Gold Price: 2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है सोना? Goldman Sachs ने $4900 का टारगेट दिया

Gold Price: सोने की कीमत में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में गोल्ड तीन महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली हुई। शुक्रवार को कीमत 3% से ज्यादा टूट गई।

अब सवाल है कि आगे सोना किस दिशा में जाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा करीब 4,550 डॉलर के स्तर से लगभग 8% ज्यादा है।

भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना

भारत में सोने की मौजूदा कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अंतरराष्ट्रीय कीमत में Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक करीब 8% बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घरेलू कीमत भी मोटे तौर पर ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

हालांकि, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और टैक्स भी भाव को प्रभावित करेंगे।

केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ा सपोर्ट

Goldman Sachs को सोने की कीमत में आगे भी मजबूती की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। Goldman Sachs Research के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 से पहले यह औसत सिर्फ 17 टन प्रति माह था।

जून 2026 में खरीदारी और तेज हुई। तीन महीने के सीजनली एडजस्टेड आधार पर यह आंकड़ा 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया। इससे पहले यह 66 टन था। जून में चीन का केंद्रीय बैंक सबसे बड़ा पहचाना जा सकने वाला खरीदार रहा।

2026 में काफी उतार-चढ़ाव आया

इस साल सोने की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। 29 जनवरी को गोल्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। जुलाई के मध्य में यह 4,000 डॉलर से नीचे फिसल गया।

हालांकि, जुलाई के निचले स्तर से सोना करीब 15% चढ़ चुका है। Goldman Sachs को बाकी बचे साल में भी तेजी की उम्मीद है।

ब्याज दरें तय करेंगी आगे की चाल

सोने की कीमत पर ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बनता है। यही वजह है कि अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयान के बाद गोल्ड में तेज गिरावट आई।

Goldman Sachs का मानना है कि आगे फेड से जुड़ा दबाव कम हो सकता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी आने पर फेड इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ऐसा हुआ तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

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PM मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, द्विपक्षीय बैठक में हुए कई अहम समझौते

PM मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, द्विपक्षीय बैठक में हुए कई अहम समझौते

Prime Minister Narendra Modi honored with Uzbekistan's highest honor

Prime Minister Narendra Modi in Uzbekistan : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज उज्बेकिस्तान के प्रतिष्ठित सम्मान 'ऑर्डर ऑफ ओली दराजाली दोस्तलिक' से सम्‍मानित किया गया। उन्होंने यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थाई संबंधों को समर्पित किया। प्रधानमंत्री को यह सम्मान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रदान किया। प्रधानमंत्री मोदी व्यापार, क्लीन एनर्जी और कनेक्टिविटी समेत कई क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने के लिए उज्बेकिस्तान के 2 दिवसीय दौरे पर हैं। यह यात्रा राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही है। 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आज उज्बेकिस्तान के प्रतिष्ठित सम्मान 'ऑर्डर ऑफ ओली दराजाली दोस्तलिक' से सम्‍मानित किया गया। उन्होंने यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थाई संबंधों को समर्पित किया। प्रधानमंत्री को यह सम्मान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रदान किया।

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प्रधानमंत्री मोदी व्यापार, क्लीन एनर्जी और कनेक्टिविटी समेत कई क्षेत्रों में संबंध मजबूत करने के लिए उज्बेकिस्तान के 2 दिवसीय दौरे पर हैं। यह यात्रा राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर हो रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लटेफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, 'ओली दराजाली दोस्तलिक' सम्मान प्राप्त कर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।

उन्होंने कहा, मैं यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थाई संबंधों को समर्पित करता हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि भारत के लोग इस सम्मान के नाम में प्रयुक्त शब्द 'दोस्तलिक' से भलीभांति परिचित हैं।

 

1.4 अरब भारतीयों का है सम्मान 

उन्होंने कहा, भारत में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जहां 'दोस्तलिक' शब्द दिन में 100 बार न बोला जाता हो। आज आपने वास्तव में इस शब्द के सार को सामने ला दिया है। 'दोस्तलिक' का अर्थ मित्रता है। यह शब्द अपने आप में भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के केंद्र में मौजूद भावना को खूबसूरती से व्यक्त करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान प्राप्त करना उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों का सम्मान है।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, सभी भारतीयों की ओर से मैं उज्बेकिस्तान की जनता, सरकार और अपने प्रिय मित्र राष्ट्रपति का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। मैं इस सर्वोच्च सम्मान को बहुत विनम्रता के साथ स्वीकार करता हूं। इसे हमारे दोनों देशों के सदियों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों तथा हमारी साझा विरासत को समर्पित करता हूं।

 

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने मिर्जियोयेव के साथ वार्ता की, जिसके बाद भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का फैसला किया। दोनों देशों ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति के लिए एक व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई।


वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, महत्वपूर्ण खनिजों, खनन, रक्षा और सुरक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी, UPI समेत डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और एजुकेशन के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

 

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार दोनों पक्षों ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हम आपसी सहयोग के सभी पहलुओं को दिशा देने के लिए विदेश मंत्री स्तर पर एक समन्वय परिषद (Coordination Council) का गठन करेंगे। हम अपने संयुक्त आयोग (Joint Commission) को सचिव स्तर से मंत्री स्तर तक ले जाएंगे। दोनों पक्ष मिलकर एक बिज़नेस समिट का आयोजन करेंगे जिसमें दोनों देशों के बिज़नेस लीडर्स शामिल होंगे। 

 

राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी, मेरा मानना ​​है कि आपके नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय परिणाम हासिल कर रहा है, आर्थिक विकास की उच्च दर बनाए हुए है और बड़े प्रोजेक्ट्स को लागू कर रहा है। भारत डिजिटलीकरण, सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष अन्वेषण और कई अन्य क्षेत्रों में वास्तव में असाधारण प्रगति कर रहा है।

यूपी में मरीजों से AI वॉयस बॉट पूछेगा इलाज का अनुभव, शुल्क और अस्पताल की सेवाओं पर रहेगी नजर

यूपी में मरीजों से AI वॉयस बॉट पूछेगा इलाज का अनुभव, शुल्क और अस्पताल की सेवाओं पर रहेगी नजर

– एआई से इलाज के विश्लेषण, शिकायत निवारण, अस्पतालों की निगरानी और सुविधाओं के सुधार में मिलेगी मदद

– डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक बोले, फोन पर मरीजों से ली जाएगी इलाज और अस्पताल के बारे में जानकारी

– सीएम योगी के निर्देश पर साचीज विकसित कर रहा एआई आधारित वाइस बॉट

Chief Minister Yogi Adityanath : योगी सरकार द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक और नवाचार के इस्तेमाल को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर नोडल स्टेट हेल्थ एजेंसी ‘साचीज’ द्वारा प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए मरीजों के अनुभव और उनकी राय को महत्वपूर्ण आधार बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि साचीज आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए एआई आधारित वाइस बॉट विकसित किया जा रहा है। इसके जरिए मरीजों से फोन पर सीधे उनके इलाज और अस्पताल में मिले अनुभव की जानकारी ली जाएगी।

 

मरीजों से फोन पर सीधे पूछा जाएगा अनुभव

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि सीएम योगी की मंशा के अनुरूप एआई आधारित वाइस बॉट का उद्देश्य केवल मरीजों से फीडबैक लेना नहीं है, बल्कि उनकी प्रतिक्रियाओं का तकनीक की मदद से विश्लेषण कर ऐसी जानकारी सामने लाना है, जिस पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। इससे अस्पतालों की निगरानी, शिकायतों के समाधान, ऑडिट और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।

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उन्होंने बताया कि एआई वाइस बॉट के माध्यम से इलाज करा चुके मरीजों से फोन पर बातचीत कर उनके अनुभव के बारे में जानकारी ली जाएगी। मरीज से यह पूछा जा सकेगा कि उसे अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत उपचार मिला या नहीं। इलाज के दौरान उसे किसी तरह की परेशानी हुई या नहीं, अस्पताल में उपलब्ध सेवाएं कैसी रहीं और अस्पताल के कर्मचारियों का व्यवहार कैसा रहा।

यह भी पता लगाया जा सकेगा कि योजना के तहत मिलने वाले उपचार के लिए मरीज या उसके परिवार से कोई अनधिकृत राशि तो नहीं ली गई। इलाज के बाद मरीज कितना संतुष्ट है, इसकी जानकारी भी फीडबैक के माध्यम से प्राप्त की जा सकेगी। इस तरह मरीज की आवाज सीधे स्वास्थ्य महकमे तक पहुंचेगी और उसके अनुभव के आधार पर कमियों की पहचान करना आसान होगा।

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फीडबैक से सामने आएंगे कार्रवाई योग्य मामले

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि पहल का उद्देश्य मरीजों की प्रतिक्रियाओं में से उन मामलों की पहचान करना है, जिनमें आगे कार्रवाई की जरूरत है। एआई आधारित विश्लेषण के जरिए बड़ी संख्या में प्राप्त फीडबैक को व्यवस्थित किया जा सकेगा। यदि किसी मरीज द्वारा उपचार न मिलने, अनधिकृत शुल्क लेने, खराब व्यवहार या किसी अन्य समस्या की जानकारी दी जाती है, तो ऐसे मामलों को संबंधित संचालन टीमों तक पहुंचाया जा सकेगा।

इससे शिकायतों पर कार्रवाई करने और अस्पतालों की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इस व्यवस्था से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीज के वास्तविक अनुभव को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सीमित संख्या में मरीजों से मैनुअल कॉल के माध्यम से फीडबैक लिया जाता है। इसमें समय और मानव संसाधन अधिक लगता है।

एआई वाइस बॉट के माध्यम से बड़ी संख्या में मरीजों तक पहुंचकर उनसे फीडबैक लेने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे कम समय में अधिक मरीजों से जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। बड़ी संख्या में प्राप्त प्रतिक्रियाओं के आधार पर बेहतर डेटा तैयार होगा। इस डेटा का विश्लेषण कर अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं की पहचान की जा सकेगी।

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मरीज के अनुभव को स्वास्थ्य व्यवस्था में मिलेगा अधिक महत्व

साचीज की सीईओ ने बताया कि पहल का उद्देश्य केवल लाभार्थियों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें सही, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्राप्त हो। मरीजों का प्रत्यक्ष अनुभव स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। एआई वाइस बॉट के माध्यम से प्राप्त फीडबैक का व्यवस्थित विश्लेषण कर आवश्यक कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की जयपुर में अहम बैठक! सैलरी और पेंशन पर हो सकता है ये बड़ा फैसला

8th Pay Commission Jaipur Meeting: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का काम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन में संशोधन की प्रक्रिया के तहत आयोग देश भर के विभिन्न संघों और संगठनों के साथ लगातार परामर्श कर रहा है।

इसी कड़ी में 8वां वेतन आयोग 31 अगस्त और 1 सितंबर को राजस्थान के जयपुर में हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों के साथ आधिकारिक बैठकें करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह आयोग कर्मचारियों की समस्याओं, मांगों और कामकाजी परिस्थितियों का जायजा ले रहा है।

8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने से देश के 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलेगा।

सितंबर और अक्टूबर में किन-किन शहरों का दौरा करेगा आयोग?

मार्च से ही आयोग विभिन्न राज्यों का दौरा कर आंकड़े और सुझाव जुटा रहा है। आगामी दिनों का शेड्यूल इस प्रकार है:

  • चेन्नई (तमिलनाडु): 7 से 8 सितंबर
  • पुडुचेरी: 9 सितंबर
  • चंडीगढ़: 16 से 18 सितंबर
  • बेंगलुरु (कर्नाटक): 7 से 8 अक्टूबर (अपॉइंटमेंट के लिए 18 सितंबर तक आवेदन खुला है।)
  • मुंबई (सेंट्रल रेलवे): रेलवे कर्मचारियों की कामकाजी स्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव लेने के लिए आयोग मुंबई में सेंट्रल रेलवे का दौरा भी करेगा।

जयपुर बैठक और राज्य दौरों का क्या है मुख्य एजेंडा?

हालांकि आयोग ने कोई आधिकारिक लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन कर्मचारी यूनियनों द्वारा सौंपे गए ज्ञापनों के आधार पर बैठकों में मुख्य रूप से इन मुद्दों पर चर्चा हो रही है:

फिटमेंट फैक्टर और बेसिक पे: बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी और नए फिटमेंट फैक्टर का निर्धारण।

महंगाई के हिसाब से वेतन संशोधन: महंगाई दर और जीवन यापन की लागत के अनुकूल सैलरी स्ट्रक्चर तैयार करना।

भत्तों का पुनर्गठन: हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) में सुधार।

पेंशन सुधार: सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा को बेहतर बनाना।

कर्मचारी कल्याण और कार्य परिस्थितियां: कर्मचारियों के मनोबल और कार्यस्थल की सुविधाओं में सुधार।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आयोग के गठन 3 नवंबर 2025 से 18 महीने के भीतर सिफारिशें सौंपनी हैं। इसका मतलब है कि आयोग फरवरी से मई 2027 के बीच अपनी आधिकारिक रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है।

पिछले वेतन आयोगों के रुझान को देखें तो सिफारिशें आने के बाद उनके अंतिम क्रियान्वयन में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। यानी 2027 में होने वाली घोषणाओं का पूर्ण लाभ कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिल सकता है।

नेपाल में आई बाढ़ में कानपुर के NRI दंपति समेत 3 लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे

कानपुर के श्याम नगर निवासी एनआरआई दंपति पंकज मिश्रा और रागिनी मिश्रा समेत तीन लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल में बाढ़ के बाद से लापता हैं। 25 अगस्त शाम आखिरी बार परिजनों से बात हुई थी। परिवार ने भारतीय-अमेरिकी दूतावास से मदद मांगी है। नेपाल में अब 734 मौतें और 2498 लोग लापता हैं।

VIDEO: प्रयागराज में मां गंगा ने कराया ‘लेटे हनुमान जी’ को महास्नान! गर्भगृह तक पहुंचा नदी का पानी; वीडियो वायरल

Prayagraj Floods: पड़ोसी देश नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा नदी के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। धर्मनगरी प्रयागराज में बीते कुछ दिनों से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इसके चलते उत्तर प्रदेश और बिहार के कई गंगा किनारे बसे शहरों में नदी का पानी अपने सामान्य प्रवाह क्षेत्र से बाहर फैलने लगा है। इसी बीच प्रयागराज में एक बेहद भावुक और आस्था से जुड़ा दृश्य सामने आया है, जहां मां गंगा का पानी प्रसिद्ध ‘लेटे हुए हनुमान’ यानी बड़े हनुमान जी मंदिर तक पहुंच गया।

संगम स्थित लेटे हनुमान मंदिर में मां गंगा का पानी गर्भगृह तक पहुंच गया। पानी मंदिर की सीढ़ियों से होते हुए अंदर तक पहुंचा और वहां विराजमान भगवान हनुमान की प्रतिमा को स्पर्श करने लगा। इस दौरान ऐसा दृश्य बना मानो मां गंगा स्वयं संगम तट पर विराजमान बड़े हनुमान जी का अभिषेक करने पहुंची हों। मंदिर में पानी सीढ़ियों से नीचे की ओर बहता दिखाई दिया। गर्भगृह में स्थापित लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा तक पहुंच गया, जिसे देखकर सबलोग भावुक हो गए।

पूजा-पाठ के बीच मंदिर में पहुंचा गंगा का पानी

गंगा का पानी मंदिर परिसर में एंट्री करने के बावजूद पुजारी और स्थानीय श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना जारी रखी। पुजारी ने धार्मिक अनुष्ठान और प्रार्थना की। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास ‘बड़े हनुमान जी महाराज’ और ‘मां गंगा’ के जयकारे गूंजते रहे। इसका वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंदिर के पुजारी और स्थानीय लोग श्रद्धा के साथ पूजा करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में गंगा का पानी मंदिर की सीढ़ियों से बहता हुआ दिखाई देता है। जबकि आगे बढ़कर भगवान हनुमान की प्रतिमा तक पहुंचता नजर आता है।

मंदिर के सोशल मीडिया पेज पर भी शेयर हुई तस्वीरें

इस घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो श्री बड़े हनुमान जी मंदिर (संगम प्रयाग), प्रयागराज के फेसबुक पेज पर भी शेयर किए गए हैं। पोस्ट में इस दिन को प्रयागराज और हनुमान भक्तों के लिए बेहद शुभ और सौभाग्यशाली बताया गया। पोस्ट में धार्मिक भावनाओं के अनुरूप कहा गया कि प्रयागराज के पवित्र संगम पर, जहां संगम तट पर श्री बड़े हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां ‘पतित पावनी मां गंगा’ ने स्वयं भगवान हनुमान का भव्य जलाभिषेक किया।

लगातार बढ़ रहा है गंगा का जलस्तर

दरअसल, नेपाल में बाढ़ की स्थिति और हिमालयी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण गंगा समेत कई नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश में वाराणसी और प्रयागराज सहित गंगा किनारे के इलाकों में नदी का पानी फैलने लगा है। वहीं, बिहार के बक्सर, पटना और मुंगेर जैसे जिलों में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर लोगों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम धार्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संगम क्षेत्र में स्थित बड़े हनुमान जी मंदिर की विशेष धार्मिक मान्यता है। यहां भगवान हनुमान की प्रतिमा लेटी हुई मुद्रा में है। गंगा का पानी मंदिर तक पहुंचने और प्रतिमा को स्पर्श करने के इस दृश्य को श्रद्धालु आस्था और धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष क्षण मान रहे हैं।

हर साल दिख जाता है ये मनमोहक दृश्य

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों के बाद यह दृश्य तेजी से चर्चा में है। मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने गंगा और बड़े हनुमान जी दोनों की श्रद्धा के साथ पूजा की और जयकारे लगाए। हिंदू धर्म में आस्था है कि जब हनुमान जी ने लंका दहन किया था तो उसके बाद उनका शरीर भी आग की चपेट में आकर जलनशील हो गया था। फिर बजरंगबली संगम के तट पर आकर लेट गए थे।

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बताया जाता है कि इस दौरान मां गंगा ने अपना रूप बढ़ाकर अपने जल से हनुमान जी को स्पर्श किया था। पुजारियों का कहना है कि आज भी प्रयागराज में वैसे ही मां गंगा हर साल ‘लेटे हुए हनुमान’ जी को प्रणाम करने जरूर आती है।

Women’s Champions Trophy: श्रीलंका से छिनी गई चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी, जानें ICC ने क्यों लिया ये फैसला

श्रीलंका क्रिकेट को बड़ा झटका लगा है। 2027 में पहली बार होने वाली ICC विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी अब श्रीलंका के हाथ से निकल गई है। अब 14 से 28 फरवरी के बीच होने वाला छह टीमों का यह टूर्नामेंट अब श्रीलंका में आयोजित नहीं किया जाएगा। श्रीलंका क्रिकेट में सरकारी दखल को लेकर ICC ने आपत्ति जताई है। श्रीलंका से मेजबानी छिनने के बाद अभी तक ICC ने नए मेजबान देश के नाम का ऐलान नहीं किया है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर ICC की अगली बोर्ड बैठक में चर्चा के बाद कोई फैसला लिया जा सकता है।

इससे पहले भी छिनी गई है मेजबानी

मेजबानी छिनने से श्रीलंकाई क्रिकेट के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। ये फैसला ऐसे समय में आया जब श्रीलंका क्रिकेट और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के बीच प्रशासन और कामकाज को लेकर विवाद अभी सुलझा नहीं है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को 2023-24 में कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया था। उस दौरान बोर्ड के कामकाज में राजनीतिक दखल का मुद्दा सामने आया था। बोर्ड और सरकार के बीच भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों को लेकर लंबे समय तक विवाद चलता रहा। इस विवाद का असर क्रिकेट आयोजनों पर भी पड़ा और 2024 में होने वाले पुरुष अंडर-19 वर्ल्ड कप की मेजबानी श्रीलंका से लेकर दक्षिण अफ्रीका को दे दी गई थी।

क्यों लिया फैसला

इस साल अप्रैल में श्रीलंकाई सरकार ने क्रिकेट बोर्ड के कामकाज को अस्थायी रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया था। सरकार ने क्रिकेट से जुड़े विवादों को खत्म करने और बोर्ड में जरूरी बदलाव करने के लिए एक ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी बनाने की बात कही थी। वहीं ICC का कहना है कि श्रीलंका क्रिकेट में चुनी हुई व्यवस्था वापस आनी चाहिए और बोर्ड के चुनाव कराए जाने चाहिए। इसी वजह से सरकार की बनाई कमेटी के सदस्यों को ICC की बोर्ड बैठकों में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है।

श्रीलंका नहीं करेगी मेजबानी

ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सचिव प्रकाश शैफ्टर ने ‘संडे टाइम्स’ से बातचीत में इस खबर की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट की मेजबानी अब श्रीलंका में नहीं होगी। शैफ्टर के मुताबिक, इसे किसी दूसरे देश में आयोजित किया जाएगा, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि टूर्नामेंट की मेजबानी कौन सा देश करेगा। ये फैसला उस वक्त लिया गया है, जब श्रीलंका क्रिकेट अभी भी ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी की निगरानी में चल रहा है।

क्या है आईसीसी के नियम

ICC के नियमों के मुताबिक, किसी भी सदस्य क्रिकेट बोर्ड को सरकारी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर काम करना जरूरी है। श्रीलंका क्रिकेट का मौजूदा ढांचा इसी नियम को लेकर ICC के साथ विवाद की वजह बना हुआ है। श्रीलंका से टूर्नामेंट की मेजबानी छिनने के बाद अब उसके खुद इस प्रतियोगिता में खेलने पर भी सवाल उठ सकते हैं। पहले तय नियमों के मुताबिक मेजबान देश के अलावा रैंकिंग में ऊपर रहने वाली टीमों को टूर्नामेंट में जगह मिलनी थी। मौजूदा रैंकिंग में श्रीलंका छठे नंबर पर है। हालांकि, ICC ने अभी यह नहीं बताया है कि मेजबान बदलने के बाद टीमों के चयन के नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं।

HDFC Bank के नए CEO कौन होंगे? कैजाद भरूचा का नाम सबसे आगे, बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश

HDFC Bank New CEO: प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा लेंडर HDFC Bank अक्टूबर में नए एमडी और CEO का ऐलान कर सकता है। मौजूदा एमडी और CEO शशिधर जगदीशन अक्टूबर में अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। बैंक अपने डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा का नाम आगे कर सकता है। हालांकि, अभी इस पर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

बाहरी उम्मीदवार भी तलाश रहा बैंक

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैंक एक बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश कर रहा है। RBI के नियम के तहत CEO पद के लिए एक से ज्यादा नाम भेजने होते हैं। बैंक जिन नामों का प्रस्ताव देगा, उन पर RBI फैसला करेगा। HDFC Bank और कैजाद भरूचा ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्यों अहम है कैजाद भरूचा का नाम

कैजाद भरूचा बैंक के पुराने अधिकारियों में शामिल हैं। वह रिटेल और होलसेल, दोनों बिजनेस संभाल रहे हैं। इसलिए उन्हें जगदीशन का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। वह 2029 तक रिटायर नहीं होंगे, जो उनके पक्ष में एक अहम बात है।

RBI के नियमों में कैसे फिट बैठते हैं

RBI के नियमों के तहत फुल-टाइम डायरेक्टर का अधिकतम कार्यकाल 15 साल हो सकता है। 2029 तक भरूचा के 15 साल पूरे होंगे। ऐसे में वह CEO पद के लिए पात्र हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर कार्यकाल की सीमा में छूट के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

जगदीशन ने दोबारा कार्यकाल क्यों नहीं लिया

शनिवार को HDFC Bank ने बताया कि शशिधर जगदीशन ने दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। वह अक्टूबर 2020 से बैंक के MD और CEO हैं। उनका दूसरा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। बैंक ने उनके फैसले के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई।

छह महीने से नेतृत्व को लेकर उठापटक

पिछले करीब छह महीने HDFC Bank के लिए आसान नहीं रहे हैं। मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि बैंक की कुछ प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से मेल नहीं खातीं। इसके बाद बैंक के टॉप मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठने लगे।

जांच में नहीं मिले आरोपों के सबूत

चेयरमैन के आरोपों की बाद में बाहरी कानूनी समीक्षा कराई गई। इस जांच में गवर्नेंस से जुड़े आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, पिछले महीने बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग के एक अलग मामले में जगदीशन समेत चार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। इससे बैंक के नेतृत्व पर दबाव बढ़ा।

शेयर पर भी दिखा असर

इस साल HDFC Bank के शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद गिरावट और तेज हो गई। जून के अंत तक बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 40% थी। 2023 में HDFC Ltd के साथ हुए बड़े मर्जर का फायदा भी निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखा है।

नए CEO के सामने क्या चुनौती

HDFC Bank को अब जल्द नया CEO चुनना है। बोर्ड ने भी उत्तराधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने की बात कही है। नए CEO के सामने शेयर की गिरावट रोकने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की चुनौती होगी। साथ ही HDFC Ltd के साथ मर्जर का पूरा फायदा निकालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बच्चों में कैंसर क्यों होता है? इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, डॉक्टर से जानें पूरी जानकारी

बच्चे के बार-बार बीमार पड़ने पर ज्यादातर माता-पिता इसे मौसम बदलने, संक्रमण या सामान्य कमजोरी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन अगर बुखार बार-बार लौट रहा हो, हड्डियों में लगातार दर्द हो, शरीर पर बिना चोट के नीले निशान पड़ रहे हों या कोई असामान्य गांठ दिखाई दे रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये लक्षण कई सामान्य बीमारियों में भी हो सकते हैं, लेकिन कुछ मामलों में गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।

हाल ही में द लैंसेट रीजनल हेल्थ–साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित एक अध्ययन ने दक्षिण एशिया में बच्चों में होने वाले कैंसर के बोझ पर ध्यान खींचा है। अध्ययन के मुताबिक, सार्क देशों में बच्चों के कैंसर के करीब 69 प्रतिशत मामले भारत में सामने आते हैं। भारत की बड़ी आबादी और यहां जांच व उपचार की बेहतर उपलब्धता भी इस आंकड़े की एक वजह हो सकती है। वहीं, जागरूकता और समय पर जांच की कमी के कारण कुछ मामलों की पहचान देर से होने की आशंका भी रहती है।

क्या बदलती जीवनशैली और पर्यावरण जिम्मेदार हैं?

बदलता खानपान, प्रदूषण और रसायनों का बढ़ता संपर्क आज बच्चों की सेहत को लेकर कई सवाल खड़े करता है। हालांकि, विशेषज्ञ साफ तौर पर कहते हैं कि बच्चों में होने वाले कैंसर को केवल जीवनशैली की वजह से नहीं जोड़ा जा सकता। राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के हेमेटोलॉजिस्ट और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, के अनुसार बच्चों में कैंसर के ज्यादा मामले सामने आने की एक वजह यह हो सकती है कि अब पहले के मुकाबले बीमारी की पहचान बेहतर हो रही है। ज्यादा बच्चे अस्पतालों और कैंसर उपचार केंद्रों तक पहुंच रहे हैं, इसलिए पहले से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।

दूसरी ओर, कुछ क्षेत्रों में कैंसर के वास्तविक मामलों में बढ़ोतरी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में उन इलाकों की हवा, पानी, मिट्टी और खानपान से जुड़े पर्यावरणीय कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है। लेकिन किसी एक कारण को बच्चों में कैंसर की सीधी वजह मानना सही नहीं होगा।

बच्चों में ल्यूकीमिया सबसे आम क्यों?

बच्चों में होने वाले कैंसर में ल्यूकीमिया यानी रक्त कैंसर सबसे आम है। इसकी वजह समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि बचपन में शरीर तेजी से बढ़ता है और नई कोशिकाएं तेजी से बनती हैं। खून बनाने वाली जगह यानी अस्थि मज्जा भी इस दौरान काफी सक्रिय रहती है।

नई कोशिकाएं बनते समय कभी-कभी उनके आनुवंशिक पदार्थ में बदलाव हो सकते हैं। ज्यादातर बदलाव शरीर खुद संभाल लेता है, लेकिन कुछ बदलाव कोशिकाओं की सामान्य वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं और आगे चलकर ल्यूकीमिया जैसी बीमारी का कारण बन सकते हैं।

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, ज्यादातर बच्चों में ल्यूकीमिया का कोई एक निश्चित कारण नहीं मिलता। इसलिए बच्चे को कैंसर होने पर माता-पिता को खुद को दोषी नहीं मानना चाहिए।

इन लक्षणों को सामान्य समझकर न टालें

ल्यूकीमिया के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य संक्रमण जैसे लगते हैं। लंबे समय तक या बार-बार बुखार आना, बहुत ज्यादा कमजोरी, खून की कमी, बार-बार संक्रमण होना, बिना चोट के शरीर पर नीले निशान पड़ना, नाक या मसूड़ों से खून आना और हड्डियों या जोड़ों में लगातार दर्द इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। इसके अलावा कुछ दूसरे बच्चों के कैंसर में भी विशेष संकेत दिखाई दे सकते हैं। पेट में बिना दर्द की गांठ किडनी से जुड़े कुछ कैंसर का संकेत हो सकती है। वहीं, आंख की पुतली में फोटो खींचने पर सफेद चमक दिखाई देना या अचानक भेंगापन आना आंख के कैंसर का संकेत हो सकता है।

हालांकि, इन लक्षणों का मतलब कैंसर होना नहीं है। कई सामान्य बीमारियों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। लेकिन अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, बार-बार लौटें या इलाज के बाद भी ठीक न हों, तो बाल रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

बच्चों में कैंसर को कैसे रोका जा सकता है?

बच्चों में होने वाले ज्यादातर कैंसर को आज की स्थिति में पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है, क्योंकि इनके पीछे अक्सर कोशिकाओं में होने वाले आनुवंशिक बदलाव होते हैं। इसका मतलब यह भी है कि बच्चे के कैंसर के लिए माता-पिता की सामान्य जीवनशैली या किसी एक गलती को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। फिर भी बच्चे को संतुलित आहार देना, साफ वातावरण उपलब्ध कराना, जरूरी टीके लगवाना और सामान्य स्वास्थ्य का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। इससे बच्चे का समग्र स्वास्थ्य बेहतर रहता है।

सबसे बड़ा बचाव समय पर पहचान है। अगर बच्चे में बार-बार बुखार, लगातार दर्द, असामान्य खून आना, बिना वजह नीले निशान, असामान्य गांठ या आंख में सफेद चमक जैसे संकेत दिखाई दें, तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।

डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, ल्यूकीमिया समेत बच्चों में होने वाले कई कैंसर का इलाज संभव है और कई मामलों में बच्चे पूरी तरह स्वस्थ भी हो सकते हैं। इसलिए डरने के बजाय सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरत पड़ने पर जांच करवाना सबसे जरूरी कदम है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। इसे किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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