Asian Champions Trophy के लिए भारतीय हॉकी टीम का ऐलान, इस गोलकीपर की हुई वापसी

पंजाब में 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक होने वाली एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी के लिये हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई में भारतीय पुरूष टीम में एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले अधिकांश खिलाड़ियों को बरकरार रखा गया है लेकिन गोलकीपर कृशन बहादुर पाठक की वापसी हुई है।

हरमनप्रीत की कप्तानी में भारत ने लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिये क्वालीफाई किया।

एशियाई खेलों और विश्व कप से बाहर रहे पाठक ने वापसी की है जबकि युवा डिफेंडर अमनदीप लाकड़ा और मिडफील्डर आदित्य अर्जुन लालागे भी टीम में हैं। मिडफील्डर विष्णु कांत सिंह और फॉरवर्ड अंगद बीर सिंह 18 सदस्यीय टीम में दो रिजर्व खिलाड़ी हैं।

एशियाई चैम्पियंस ट्रॉफी के जरिये पंजाब में दो दशक बाद अंतरराष्ट्रीय हॉकी की वापसी हो रही है । इसके मुकाबले जालंधर और मोहाली में खेले जायेंगे।

भारतीय टीम :

गोलकीपर : सूरज करकेरा, कृशन बहादुर पाठक

डिफेंडर : संजय, हरमनप्रीत सिंह (कप्तान), अमित रोहदास, जुगराज सिंह, जरमनप्रीत सिंह, अमनदीप लाकड़ा

मिडफील्डर : राजिंदर सिंह, आदित्य अर्जुन लालागे, नीलाकांता शर्मा, हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह

फॉरवर्ड : शिलानंद लाकड़ा, अभिषेक, सुखजीत सिंह, दिलप्रीत सिंह, मनदीप सिंह

रिजर्व : विष्णु कांत सिंह, अंगद बीर सिंह

Champions Trophy के लिए भारत नहीं आना चाहता पाकिस्तान, मांग अलग वेन्यू की

पाकिस्तान ने बुधवार को एशियाई हॉकी महासंघ (AHF) से अपने एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी (एसीटी) के मुकाबलों को मेजबान भारत से किसी तटस्थ स्थल पर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। पाकिस्तान ने इसके लिए दोनों देशों के बीच ‘संवेदनशील द्विपक्षीय स्थिति’ का हवाला दिया है। पाकिस्तान हॉकी महासंघ (पीएचएफ) ने कहा कि वह पुरुष एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में देश की निर्बाध और पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तटस्थ स्थल चाहता है।

पीएचएफ के अध्यक्ष मोहिउद्दीन अहमद वानी ने एक बयान में कहा कि उन्होंने पूरे टूर्नामेंट या पाकिस्तान के सभी मुकाबलों को तटस्थ स्थल पर स्थानांतरित करने का अनुरोध किया है।वानी ने बयान में कहा, ‘‘यह फैसला पाकिस्तान और भारत के बीच मौजूदा संवेदनशील द्विपक्षीय स्थिति और मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए लिया गया है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए सुरक्षित, गरिमापूर्ण और अनुकूल माहौल सुनिश्चित करना है।’’

गौरतलब है कि अगले महीने हॉकी की एशियाई चैंपियन्स ट्रॉफी खेली जाने वाली है जिसमें पाकिस्तान समेत आधा दर्जन टीमें  शामिल है। भारत और पाकिस्तान का मुक़ाबला 1 नवंबर को जालंधर में होना है, और यह मैच पंजाब दिवस के दिन ही होगा।

केंद्र सरकार की  खेल नीति के अनुसार भारत पाकिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं खेलेगा। भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ संक्षिप्त सैन्य अभियान चलाया था।खेल मंत्रालय ने हालांकि ओलंपिक चार्टर का पालन करते हुए कहा है कि दोनों देश बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में एक दूसरे का सामना कर सकते हैं और भारत इस तरह की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पाकिस्तान के खिलाड़ियों को अपने देश में खेलने से नहीं रोकेगा।

इस टूर्नामेंट में भारत, पाकिस्तान, चीन, जापान, मलेशिया और कोरिया हिस्सा लेंगे, जबकि ओमान और बांग्लादेश को रिज़र्व टीमों के तौर पर रखा गया है।लीग चरण जालंधर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक खेला जाएगा, इसके बाद 4 नवंबर को सेमीफ़ाइनल और 5 नवंबर को फ़ाइनल होगा।://x.com/yourhardik/status/2100242808624054613?s=20

पंजाब दिवस के दिन जालंधर में भिडेंगी भारत-पाकिस्तान की हॉकी टीमें

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पाकिस्तानी हॉकी टीम की मेजबानी की तैयारी पर बयान देकर एक नया भूराजनैतिक विवाद खड़ा कर दिया है। गौरतलब है कि अगले महीने हॉकी की एशियाई चैंपियन्स ट्रॉफी खेली जाने वाली है जिसमें पाकिस्तान समेत आधा दर्जन टीमें  शामिल है। भारत और पाकिस्तान का मुक़ाबला 1 नवंबर को जालंधर में होना है, और यह मैच पंजाब दिवस के दिन ही होगा।

पाकिस्तान की भागीदारी और इसके लिए आवश्यक मंजूरी मिल जाने के बारे में पूछे जाने पर मान ने कहा, ‘‘बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में कोई समस्या नहीं है। हो सकता है कि द्विपक्षीय श्रृंखलाएं (भारत और पाकिस्तान के बीच) न हो सकें।’मान ने कहा कि एसीटी के लीग चरण के मैच जालंधर में, जबकि सेमीफाइनल और फाइनल मोहाली स्टेडियम में खेले जाएंगे।

केंद्र सरकार की  खेल नीति के अनुसार भारत पाकिस्तान के खिलाफ द्विपक्षीय श्रृंखला नहीं खेलेगा। भारत ने पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ संक्षिप्त सैन्य अभियान चलाया था।खेल मंत्रालय ने हालांकि ओलंपिक चार्टर का पालन करते हुए कहा है कि दोनों देश बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में एक दूसरे का सामना कर सकते हैं और भारत इस तरह की प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए पाकिस्तान के खिलाड़ियों को अपने देश में खेलने से नहीं रोकेगा।

हालांकि भारत में अगले महीने होने वाली हॉकी एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान की भागीदारी अभी पक्की नहीं हुई है; नेशनल फ़ेडरेशन टीम की यात्रा के लिए सरकार की मंज़ूरी का इंतज़ार कर रहा है।पाकिस्तान हॉकी फ़ेडरेशन के प्रमुख मोहियुद्दीन अहमद वानी ने कहा कि फ़ेडरेशन टूर्नामेंट में टीम की भागीदारी पर सरकार के फ़ैसले का पालन करेगा। यह टूर्नामेंट 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक पंजाब में आयोजित होगा।

पाकिस्तान के अख़बार ‘डॉन’ के अनुसार, वानी ने कहा, “पाकिस्तान टीम का दौरा सरकार की मंज़ूरी पर निर्भर करेगा। सरकार जो भी करने को कहेगी, हम वही करेंगे।”

वानी, जो इंटर-प्रोविंशियल कोऑर्डिनेशन मिनिस्ट्री के फ़ेडरल सेक्रेटरी भी हैं, ने छह देशों के इस टूर्नामेंट में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच ये बातें कहीं। इस इवेंट में भारत, पाकिस्तान, चीन, जापान, मलेशिया और कोरिया हिस्सा लेंगे, जबकि ओमान और बांग्लादेश को रिज़र्व टीमों के तौर पर रखा गया है।लीग चरण जालंधर में 27 अक्टूबर से 2 नवंबर तक खेला जाएगा, इसके बाद 4 नवंबर को सेमीफ़ाइनल और 5 नवंबर को फ़ाइनल होगा।

Women’s Champions Trophy: श्रीलंका से छिनी गई चैंपियंस ट्रॉफी 2027 की मेजबानी, जानें ICC ने क्यों लिया ये फैसला

श्रीलंका क्रिकेट को बड़ा झटका लगा है। 2027 में पहली बार होने वाली ICC विमेंस चैंपियंस ट्रॉफी की मेजबानी अब श्रीलंका के हाथ से निकल गई है। अब 14 से 28 फरवरी के बीच होने वाला छह टीमों का यह टूर्नामेंट अब श्रीलंका में आयोजित नहीं किया जाएगा। श्रीलंका क्रिकेट में सरकारी दखल को लेकर ICC ने आपत्ति जताई है। श्रीलंका से मेजबानी छिनने के बाद अभी तक ICC ने नए मेजबान देश के नाम का ऐलान नहीं किया है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर ICC की अगली बोर्ड बैठक में चर्चा के बाद कोई फैसला लिया जा सकता है।

इससे पहले भी छिनी गई है मेजबानी

मेजबानी छिनने से श्रीलंकाई क्रिकेट के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है। ये फैसला ऐसे समय में आया जब श्रीलंका क्रिकेट और इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के बीच प्रशासन और कामकाज को लेकर विवाद अभी सुलझा नहीं है। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड को 2023-24 में कुछ समय के लिए निलंबित भी किया गया था। उस दौरान बोर्ड के कामकाज में राजनीतिक दखल का मुद्दा सामने आया था। बोर्ड और सरकार के बीच भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों को लेकर लंबे समय तक विवाद चलता रहा। इस विवाद का असर क्रिकेट आयोजनों पर भी पड़ा और 2024 में होने वाले पुरुष अंडर-19 वर्ल्ड कप की मेजबानी श्रीलंका से लेकर दक्षिण अफ्रीका को दे दी गई थी।

क्यों लिया फैसला

इस साल अप्रैल में श्रीलंकाई सरकार ने क्रिकेट बोर्ड के कामकाज को अस्थायी रूप से अपने नियंत्रण में ले लिया था। सरकार ने क्रिकेट से जुड़े विवादों को खत्म करने और बोर्ड में जरूरी बदलाव करने के लिए एक ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी बनाने की बात कही थी। वहीं ICC का कहना है कि श्रीलंका क्रिकेट में चुनी हुई व्यवस्था वापस आनी चाहिए और बोर्ड के चुनाव कराए जाने चाहिए। इसी वजह से सरकार की बनाई कमेटी के सदस्यों को ICC की बोर्ड बैठकों में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई है।

श्रीलंका नहीं करेगी मेजबानी

ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सचिव प्रकाश शैफ्टर ने ‘संडे टाइम्स’ से बातचीत में इस खबर की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि टूर्नामेंट की मेजबानी अब श्रीलंका में नहीं होगी। शैफ्टर के मुताबिक, इसे किसी दूसरे देश में आयोजित किया जाएगा, लेकिन अभी यह तय नहीं हुआ है कि टूर्नामेंट की मेजबानी कौन सा देश करेगा। ये फैसला उस वक्त लिया गया है, जब श्रीलंका क्रिकेट अभी भी ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी की निगरानी में चल रहा है।

क्या है आईसीसी के नियम

ICC के नियमों के मुताबिक, किसी भी सदस्य क्रिकेट बोर्ड को सरकारी हस्तक्षेप से स्वतंत्र होकर काम करना जरूरी है। श्रीलंका क्रिकेट का मौजूदा ढांचा इसी नियम को लेकर ICC के साथ विवाद की वजह बना हुआ है। श्रीलंका से टूर्नामेंट की मेजबानी छिनने के बाद अब उसके खुद इस प्रतियोगिता में खेलने पर भी सवाल उठ सकते हैं। पहले तय नियमों के मुताबिक मेजबान देश के अलावा रैंकिंग में ऊपर रहने वाली टीमों को टूर्नामेंट में जगह मिलनी थी। मौजूदा रैंकिंग में श्रीलंका छठे नंबर पर है। हालांकि, ICC ने अभी यह नहीं बताया है कि मेजबान बदलने के बाद टीमों के चयन के नियमों में कोई बदलाव किया जाएगा या नहीं।