रिपोर्ट- चीन की मदद से मिसाइल बना रहे हूती विद्रोही:डिजाइन ईरान में तैयार हुआ; सऊदी के अलावा इजराइल को भी निशाना बना सकते हैं

यमन के हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से नई बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही ईरान में डिजाइन हुई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं, जिसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर है। अगर हूती ऐसा हथियार बनाने में सफल होते हैं, तो वे सऊदी अरब के अलावा इजराइल को भी ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बना सकते हैं। हथियार बनाने के लिए जरूरी सामान जुटा रहे हूती रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अधिकारियों ने जुलाई में चीन से भेजे गए दो संदिग्ध सामानों की खेप पकड़ी थी। इनमें मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे मिले। पकड़ी गई खेप चीन से भेजी गई थी। इसे यमन के होदेइदा बंदरगाह पहुंचाया जाना था। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईरान हथियारों की सप्लाई के लिए करता रहा है। पकड़ी गई खेप में क्या-क्या मिला? रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्था के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, हूती ईरान में डिजाइन की गई खास तरह की मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन पुर्जों का इस्तेमाल आम नागरिक कामों में करना मुश्किल है। हूतियों की हथियार बनाने की क्षमता पहले से ज्यादा हूती करीब दो दशक पहले यमन में एक विद्रोही संगठन के तौर पर उभरे थे। शुरुआत में उनके पास यमन की सेना से हासिल सोवियत दौर के और उत्तर कोरिया में बने हथियार थे। समय के साथ उन्हें ज्यादा आधुनिक हथियार और तकनीक मिलने लगी। ईरान पर निर्भरता घटाने की कोशिश क्यों? ईरान लंबे समय से हूतियों को हथियार बनाने की तकनीक, डिजाइन और जरूरी पुर्जे देता रहा है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, अब हूती चीन समेत दूसरे देशों से भी हथियार बनाने का सामान जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू ने कहा कि हथियार बनाने के लिए कई जगहों से सामान मिलना किसी संगठन के लिए फायदेमंद होता है। उनके मुताबिक, ईरान पर रोक के बीच हूती सामान जुटाने के दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हूती अभी मिसाइल के लिए जरूरी जटिल सिस्टम के लिए ईरान पर निर्भर हैं। वे दूसरे देशों से मिले पुर्जों को जोड़कर कुछ हथियार बना सकते हैं, लेकिन आधुनिक हथियारों की पूरी तकनीक खुद विकसित नहीं कर सकते। चीन के लिए कूटनीतिक चुनौती बढ़ सकती है चीन ईरान और सऊदी अरब, दोनों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। 2023 में चीन ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में भी भूमिका निभाई थी। चीन ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हूतियों के हमलों की निंदा की है और संघर्ष कम करने की अपील की है। अब अगर चीन से आए पुर्जों का इस्तेमाल हूती मिसाइल बनाने में होने के दावे की पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब और चीन के रिश्तों पर दबाव बढ़ सकता है। चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है। मध्य पूर्व के विशेषज्ञ क्रिस्टियन उलरिचसन के मुताबिक, सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और एयरपोर्ट पर हमलों के बाद चीन पर इस मुद्दे को लेकर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं होता कि चीन की सरकार ने जानबूझकर हूतियों को मिसाइल बनाने के लिए सामान भेजा था। ————————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज में बारूदी सुरंग से टकराकर जहाज डूबा: जंग शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराकर बुधवार सुबह एक मालवाहक जहाज डूब गया। जहाज में 2500 कंटेनर थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने यह जानकारी दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते नेतन्याहू:बोले- तेहरान ने हमला किया तब भी विरोधी मुझे जिम्मेदार ठहराएंगे; 27 अक्टूबर को वोटिंग

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते। बुधवार को इजराइली आर्मी रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना ठीक नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने इजराइल पर हमला किया, तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा। नेतन्याहू ने कहा कि अगर ईरान इजराइल पर मिसाइलें दागता है, तो उनके विरोधी इसके लिए भी उन्हें ही जिम्मेदार ठहराएंगे। विपक्ष का आरोप है कि नेतन्याहू चुनाव से पहले ईरान के साथ लड़ाई शुरू कर सकते हैं। जून के बाद से ईरान और इजराइल के बीच सीधा हमला नहीं अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों पर हमले किए। जून के बाद से दोनों देशों के बीच सीधे हमले नहीं हुए हैं। नेतन्याहू ने कहा कि मिडिल-ईस्ट के कई देश इजराइल की सैन्य कामयाबी के बाद उससे संपर्क कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि क्या इजराइल सऊदी अरब को हूती विद्रोहियों के हमलों से बचाने में मदद कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते में सऊदी अरब पर हूतियों के हमले बढ़े हैं। शनिवार, 10 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर हुए हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी। 7 अक्टूबर के हमले के बाद भी सत्ता में लौट सकते हैं नेतन्याहू टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक चुनाव से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में वापसी की संभावना बनी हुई है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गए थे। इसे इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी नाकामी माना गया था। विपक्ष का आरोप है कि नेतन्याहू ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली और सुरक्षा में चूक के लिए सेना व अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। हमले की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग बनाने की मांग भी उठी, लेकिन इस पर विवाद बना रहा। इसके बावजूद विपक्ष नेतन्याहू को कड़ी चुनौती नहीं दे पा रहा है। कुछ सर्वे में विपक्ष आगे है, तो कुछ में नेतन्याहू का गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। विपक्ष में एकजुटता की कमी का फायदा मिल सकता है टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, विपक्षी नेताओं के बीच मतभेद नेतन्याहू के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। गादी आइजेनकोट, नफ्ताली बेनेट और एविगडोर लिबरमैन जैसे नेता उन्हें चुनौती दे रहे हैं, लेकिन विपक्ष अब तक एकजुट होकर चुनाव प्रचार नहीं कर पाया है। दूसरी ओर, नेतन्याहू टीवी कार्यक्रमों, सोशल मीडिया और जनसभाओं के जरिए अपने समर्थकों को जोड़ने में जुटे हैं। वह यह भी कोशिश कर रहे हैं कि दक्षिणपंथी पार्टियों के वोट आपस में न बंटें। छोटी पार्टियों के वोट तय करेंगे चुनाव का नतीजा इजराइल की संसद में 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। किसी पार्टी को संसद में सीटें पाने के लिए कम से कम 3.25% वोट हासिल करना जरूरी है। ऐसे में छोटी पार्टियों का प्रदर्शन भी अहम होगा। अगर कोई पार्टी जरूरी वोट नहीं जुटा पाती, तो उसे संसद में एक भी सीट नहीं मिलेगी। इससे दूसरी पार्टियों के लिए सरकार बनाने का रास्ता आसान हो सकता है। ———————- ये खबर भी पढ़ें…. इजराइल हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों लड़ना चाहता है:अमेरिका के जरिए नेतन्याहू ने मदद का मैसेज भेजा, सऊदी ने इनकार किया इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ लड़ाई में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह प्रस्ताव अमेरिका के जरिए सऊदी अरब को भेजा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

CJP फंडिंग पर मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके आमने-सामने:मिलबेन बोलीं- फेल हुए तो अमेरिकी डोनर्स छोड़ देंगे, बेहतर है पीएम के साथ बैठो, भारत को आगे बढ़ाओ

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।

CJP फंडिंग पर मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके आमने-सामने:मिलबेन बोलीं- फेल हुए तो अमेरिकी डोनर्स छोड़ देंगे, बेहतर है पीएम के साथ बैठो, भारत को आगे बढ़ाओ

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।

हॉलीवुड सिंगर बोलीं- CJP को अमेरिका से फंडिंग मिल रही:भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे; मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील

हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी को अमेरिका से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने कहा कि PM नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के काम में रुकावट डालने के लिए किया जा रहा है। मिलबेन ने X पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, “यह चुप रहने का समय नहीं है।” मिलबेन बोलीं- PM मोदी बाहरी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे मिलबेन ने दावा किया कि कुछ US डोनर्स दुनियाभर के रूढ़िवादी नेताओं को निशाना बनाने का एक तय तरीका अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘वे उस देश से अमेरिका में पढ़े किसी व्यक्ति को ढूंढते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं, वापस देश भेजते हैं और अराजकता व तबाही फैलाने के लिए फंड करते हैं।’ मिलबेन ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। वह अमेरिका से आने वाली उन ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे। मिलबेन ने 2023 में मोदी के दौरे पर राष्ट्रगान गाया था मैरी मिलबेन अमेरिकी सिंगर और एक्ट्रेस हैं। भारत में उन्हें 2022 में देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर पहचान मिली थी। जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया था। इस दौरान उन्होंने मोदी के पैर भी छुए थे, जिसके बाद भारत में उनकी काफी चर्चा हुई। अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने दिसंबर 2023 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की जीत को मोदी की लोकप्रियता से जोड़ा। मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी।

हॉलीवुड सिंगर बोलीं- CJP को अमेरिका से फंडिंग मिल रही:भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे; मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील

हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी पर अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि PM नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के काम में रुकावट डालने के लिए किया जा रहा है। मिलबेन ने X पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, ‘यह चुप रहने का समय नहीं है।’ मिलबेन बोलीं- PM मोदी बाहरी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे मिलबेन ने दावा किया कि फंडिंग करने वाले कुछ अमेरिकी दुनियाभर के दक्षिणपंथी नेताओं को निशाना बनाने का एक तय तरीका अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘ऐसे लोग किसी देश में अमेरिका से पढ़े व्यक्ति को ढूंढते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं, वापस उसके देश भेजते हैं और अराजकता व तबाही फैलाने के लिए फंड करते हैं।’ मिलबेन ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। वह अमेरिका से आने वाली ऐसी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है। 10 अक्टूबर को हुए दिल्ली प्रदर्शन पर हार्वर्ड के दो बयान दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के दो समूहों ने अलग-अलग बयान जारी किए। पहले समूह ने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता, गैरकानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया। 12 अक्टूबर को जारी इस बयान पर 100 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए थे। वहीं, बुधवार को जारी दूसरे बयान पर 44 लोगों के हस्ताक्षर हैं। खुद को ‘हार्वर्ड कम्युनिटी’ बताने वाले इस समूह ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित अभियान पर चिंता जताई। इसमें चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय और संसद के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशों का जिक्र किया गया। ———————— यह खबर भी पढ़ें… दिल्ली में प्रदर्शन पर वर्ल्ड मीडिया: अल-जजीरा ने लिखा- सरकार के लिए सबसे गंभीर चुनौती, NYT बोला- विरोध को दबाना मुश्किल भारत में SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिकी डोनर्स दे रहे CJP को पैसा! ये दावा करने वाली अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन कौन हैं?

Mary Millben attacks CJP: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके संगठन को अमेरिका में ऐसे डोनर से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व में भारत के भविष्य के खिलाफ हैं। मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील की है कि वे कथित तौर पर देश में अशांति फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठाएं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं।

मिलबेन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नई दिल्ली में विपक्षी दलों और CJP के समर्थकों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

PM मोदी के समर्थन में क्या बोलीं मैरी मिलबेन?

41 वर्षीय सिंगर मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने मैसेज में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 साल तक भारत की सेवा की है, जिनमें 12 साल PM के रूप में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि PM मोदी लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। उनके अनुसार, वह अमेरिका से आने वाली कथित विघटनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे। मिलबेन ने दावा किया कि कुछ अमेरिकी डोनर दुनियाभर में रूढ़िवादी विचारधारा वाले नेताओं को निशाना बनाने का एक पैटर्न अपनाते हैं।

उनके मुताबिक, पहले संबंधित देश के किसी अमेरिकी शिक्षित व्यक्ति को तलाशा जाता है। फिर उसे कट्टर विचारों की ओर प्रेरित कर वापस भेजा जाता है और उसके बाद कथित तौर पर अशांति फैलाने के लिए फंडिंग की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों का असर संबंधित देशों के विकास और शासन व्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, अमेरिकी डोनर से CJP को फंडिंग मिलने के अपने दावे के समर्थन में मिलबेन ने इस बयान में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया।

युवाओं से की शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील

मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए ऐसे आंदोलनों के मुकाबले एक शांतिपूर्ण जनआंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी नई आवाज उठनी चाहिए, जो देश की मिट्टी में पैदा हुई हो, यहीं पली-बढ़ी हो और यहीं शिक्षित हुई हो। उनके मुताबिक, युवाओं को संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।

भारत में क्यों लोकप्रिय हैं मैरी मिलबेन?

मैरी मिलबेन अफ्रीकी-अमेरिकी हॉलीवुड अभिनेत्री और मशहूर सिंगर हैं। भारत में वह खास तौर पर भारतीय राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और भक्ति गीत ‘ओम जय जगदीश हरे’ की अपनी प्रस्तुतियों के लिए लोकप्रिय हैं। वर्ष 2023 में अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में भी उन्होंने भारत का राष्ट्रगान गाया था। इस वजह से भारतीय दर्शकों के बीच उनकी पहचान बनी है। इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर में जबरन घुसने के आरोप में CJP के दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश में अघोषित आपातकाल लागू कर रहे हैं।

दीपके ने नागपुर में पत्रकारों से कहा कि CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर कौन सा अपराध कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शांति बनाए रखने के मुचलके के उल्लंघन और प्रदर्शन के लिए गैर-अधिसूचित क्षेत्र घोषित किए जा चुके जंतर-मंतर पर जबरन घुसने के आरोप में दास और रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

पोप लियो को लंग कैंसर, सर्जरी के बाद पता चला:दाएं फेफड़े का निचला हिस्सा निकाला गया; गांठ के लिए हुई थी सर्जरी

पोप लियो XIV को लंग कैंसर होने की पुष्टि हुई है। वेटिकन ने मंगलवार को मेडिकल बुलेटिन जारी कर इसकी जानकारी दी। 71 साल के पोप के फेफड़े में गांठ मिली थी, जिसे निकालने के लिए रोम के एक अस्पताल में उनकी 90 मिनट तक सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान उनके दाएं फेफड़े का निचला हिस्सा निकाला गया। जांच में इसमें कैंसर होने की पुष्टि हुई। वेटिकन के मुताबिक, सर्जरी सफल रही और इस दौरान कोई परेशानी नहीं आई। सर्जरी के बाद पोप को होश भी आ गया था। ऑपरेशन से पहले भी कैंसर का शक था पोप लियो XIV ने रविवार को अपनी सर्जरी की जानकारी दी थी। उन्होंने रोम में सेंट पीटर्स स्क्वायर के सामने बालकनी से लोगों को संबोधित किया था। पोप ने बताया था कि उनके फेफड़े की गांठ सीमित है और शुरुआती चरण में ही इसका पता चल गया। डॉक्टरों ने उन्हें गांठ हटाने के लिए सर्जरी कराने की सलाह दी थी। फेफड़ों में बनने वाली छोटी गांठों को पल्मोनरी नोड्यूल कहा जाता है। ये गांठें आम होती हैं और जरूरी नहीं कि कैंसर वाली हों। वेटिकन ने बताया कि पोप के फेफड़े में गांठ मिलने के बाद हुई जांच में पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा यानी कैंसर की पुष्टि हुई। ऑपरेशन से पहले की जांच में भी इसी तरह के कैंसर का शक था। कैंसर फैलने की जांच कर रहे डॉक्टर पोप के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सुनकर बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे। लोगों ने घंटों इंतजार किया। पोप की कार पहुंचने पर उन्होंने उनका स्वागत किया। पोप ने भी कार की खिड़की से हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।ट AFP के मुताबिक, उनकी सफल सर्जरी के बाद डॉक्टर अब जांच कर रहे हैं कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में तो नहीं फैला है। पोप को उनके स्वास्थ के चलते आराम करने की सलाह दी गई है। उनके सार्वजनिक कार्यक्रम भी 20 अक्टूबर तक रद्द कर दिया गया है। जानिए पोप कौन होते हैं और कैसे चुने जाते हैं… पोप कौन होते हैं? पोप कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु होते हैं। उन्हें दुनिया भर के कैथोलिक ईसाइयों का आध्यात्मिक नेता माना जाता है। जिस तरह हिंदू धर्म में शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक गुरु होते हैं, उसी तरह कैथोलिक ईसाई धर्म में पोप का बहुत अहम स्थान है। हालांकि, दोनों की भूमिका और अधिकार अलग-अलग हैं। पोप वेटिकन सिटी में रहते हैं। यह इटली की राजधानी रोम के अंदर बसा दुनिया का सबसे छोटा देश है। पोप कैथोलिक चर्च के प्रमुख होते हैं और दुनिया भर के चर्चों, पादरियों और बिशपों का मार्गदर्शन करते हैं। वे धार्मिक नियमों, ईसाई शिक्षाओं और नैतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। वे युद्ध, गरीबी और शांति जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी लोगों से अपील करते हैं। पोप कैसे चुने जाते हैं? जब किसी पोप की मृत्यु हो जाती है या वे अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, तब नए पोप को चुनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके लिए 80 साल से कम उम्र के कार्डिनल वेटिकन में इकट्ठा होते हैं और गुप्त मतदान करते हैं। इस प्रक्रिया को कॉन्क्लेव कहते हैं। दो-तिहाई वोट मिलने पर नए पोप का चुनाव होता है। चुनाव की खबर वेटिकन की सिस्टीन चैपल की चिमनी से निकलने वाले सफेद धुएं के जरिए दुनिया को दी जाती है। काला धुआं निकलने का मतलब है कि अभी नया पोप नहीं चुना गया है। पोप लियो को मई 2025 में चुना गया था पोप लियो XIV का असली नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट है। उनका जन्म 14 सितंबर 1955 को अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था। वे कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धार्मिक पद पर हैं। 8 मई 2025 को उन्हें कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। वे अमेरिका से आने वाले पहले पोप हैं। उनसे पहले पोप फ्रांसिस इस पद पर थे। पोप बनने से पहले लियो XIV ने कई साल तक पादरी, मिशनरी और बिशप के रूप में काम किया। उन्होंने अपनी जिंदगी का लंबा समय दक्षिण अमेरिका के पेरू में बिताया। वहां उन्होंने लोगों के बीच रहकर धार्मिक और सामाजिक काम किए। उन्होंने पेरू के चिक्लायो इलाके में बिशप के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। 2023 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें वेटिकन में बिशप चुनने से जुड़े अहम विभाग का प्रमुख बनाया था। बाद में उन्हें कार्डिनल भी बनाया गया। कार्डिनल कैथोलिक चर्च के वरिष्ठ धर्मगुरु होते हैं, जो नए पोप को चुनने में हिस्सा लेते हैं। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अजरबैजान में 96% मुस्लिम, फिर भी हिजाब बैन हुआ मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सरकार ने स्कूलों के ड्रेस कोड में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगाई गई है, जिन्हें सरकार धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ मानती है। पूरी खबर पढ़ें…

Eastern-Western Freight Corridor: 6 साल में 20 गुना बढ़ी माल ढुलाई,रोजाना दौड़ रहीं 440 मालगाड़ियां! जानिए कैसे लॉजिस्टिक्स का सुपरहब बना न्यू दादरी

ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बीच स्थित न्यू दादरी स्टेशन देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (डीएफसीसी) का यह इंटरचेंज स्टेशन अब केवल भारी उद्योगों के माल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि ई-कॉमर्स और आम उपभोक्ताओं से जुड़े पार्सल कारोबार में भी अपनी भूमिका निभा रहा है। पिछले छह वर्षों में यहां से मालगाड़ियों के परिचालन में करीब 20 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। इससे देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और वितरण केंद्रों के बीच माल की आवाजाही को नई गति मिली है।

22 से बढ़कर 440 ट्रेनें प्रतिदिन

न्यू दादरी स्टेशन पर मालगाड़ियों के परिचालन में आई वृद्धि इसकी बढ़ती उपयोगिता को दर्शाती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020-21 में यहां औसतन 22 ट्रेनें प्रतिदिन संचालित होती थीं। वर्ष 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 64 तक पहुंच गई। वर्ष 2022-23 में 170 ट्रेनें प्रतिदिन दर्ज की गईं, जबकि 2023-24 में परिचालन में 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष 2024-25 में 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ यह संख्या 358 ट्रेनें प्रतिदिन हो गईं। वर्ष 2025-26 में आंकड़ा 406 ट्रेनों तक पहुंचा, जबकि 2026-27 में अब तक औसतन 440 ट्रेनों के प्रतिदिन परिचालन का उल्लेख किया गया है। इस तरह छह वर्षों में स्टेशन की परिचालन क्षमता और माल ढुलाई गतिविधियों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।

ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर का अहम जोड़

न्यू दादरी की भौगोलिक स्थिति इसे विशेष महत्व देती है। यह स्टेशन ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो लुधियाना से दानकुनी तक माल परिवहन को जोड़ता है, और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के बीच महत्वपूर्ण इंटरचेंज का काम करता है। इसके माध्यम से उत्तर भारत के औद्योगिक क्षेत्रों से आने वाला माल पश्चिमी बंदरगाहों और देश के अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्रों तक पहुंचाने में मदद मिलती है।

जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (जेएनपीटी) और गुजरात के मुंद्रा व पीपावाव बंदरगाहों से आने-जाने वाले आयात-निर्यात कंटेनर, औद्योगिक सामान और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी खेप इस नेटवर्क का हिस्सा हैं। इससे उद्योगों को माल की आवाजाही के लिए एक वैकल्पिक और अधिक व्यवस्थित रेल नेटवर्क मिलता है।

भारी उद्योगों के साथ ई-कॉमर्स को भी सहारा

न्यू दादरी स्टेशन की भूमिका अब पारंपरिक औद्योगिक माल ढुलाई से आगे बढ़ रही है। यहां रोजाना करीब 350 से 400 टन पार्सल का ट्रांजिट होता है। इसमें ई-कॉमर्स कंपनियों से जुड़ा माल भी शामिल है। स्टेशन पर ज्वाइंट पार्सल प्रोडक्ट-रैपिड कार्गो सर्विस (जेपीआरएस) जैसी सुविधाओं के संचालन से पार्सल परिवहन को बढ़ावा मिला है।

लुधियाना-दानकुनी मार्ग से आने वाला कोयला, स्टील, सीमेंट और कृषि उत्पाद भी इस नेटवर्क के जरिए आगे भेजे जाते हैं। वहीं, एनटीपीसी दादरी पावर प्लांट के लिए समर्पित रेल लाइन से कोयले की आपूर्ति होती है। इसके अलावा एनसीआर के उद्योगों के लिए कच्चे माल, कोल्ड स्टोरेज से जुड़े उत्पादों और तापमान-संवेदनशील वस्तुओं की आवाजाही में भी यह नेटवर्क उपयोगी साबित हो रहा है।

72 घंटे से घटकर 24 घंटे में सफर

माल ढुलाई के समय में कमी इस बदलाव का एक प्रमुख पहलू है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले कुछ मार्गों पर माल पहुंचाने में करीब 72 घंटे लगते थे, जबकि अब यह समय घटकर लगभग 24 घंटे रह गया है। कुछ परिस्थितियों में समय 10 से 12 घंटे तक भी बताया गया है। इससे कारोबारियों को माल की समय पर आपूर्ति, भंडारण और वितरण की योजना बनाने में सहूलियत मिलती है। समय की बचत के साथ माल ढुलाई की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है।

न्यू दादरी में बढ़ता परिचालन देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में फ्रेट कॉरिडोर की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर के बीच यह स्टेशन उद्योग, बंदरगाह, ई-कॉमर्स और उपभोक्ता बाजारों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन रहा है। आने वाले समय में माल परिवहन की बढ़ती मांग के बीच इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।

ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट