घर, गाड़ी की ईएमआई महंगी हुई

मुंबई। लंबे अरसे के बाद भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने नीतिगत ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति यानी एमपीसी की दोमासिक बैठक के बाद बुधवार को गवर्नर संजय मल्होत्रा ने रेपो रेट में बढ़ोतरी का ऐलान किया। आरबीआई ने करीब साढ़े तीन साल के बाद रेपो रेट में बढ़ोतरी की है। इसे 5.25 से बढ़ा कर 5.50 फीसदी कर दिया गया है। बढ़ती हुई महंगाई के कारण आरबीआई को यह फैसला करना पड़ा है।

आरबीआई के इस फैसले के बाद बैंकों से कर्ज लेना महंगा होगा और पहले से लिए गए कर्ज की ईएमआई भी महंगी हो जाएगी। देश में महंगाई दर बढ़ने की वजह से आरबीआई को फरवरी 2023 के बाद यानी करीब साढ़े तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाना पड़ा है। रेपो रेट वो ब्याज दर है जिस पर कॉमर्शियल बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेता है। अगर आरबीआई ज्यादा ब्याज दर पर कर्ज देगा तो बैंक भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेंगे।

ब्याज दर में बढ़ोतरी का असर विकास दर पड़ेगा क्योंकि इससे बाजार में मांग घटती है। मांग कम होने से आपूर्ति स्थिर होगा यानी बाजार में वस्तुओं की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे महंगाई दर कम होगी। रिजर्व बैंक ने दोमासिक बैठक के बाद महंगाई दर का अनुमान भी बढ़ाया है। अब 2026-27 में महंगाई दर 5.2 फीसदी रहने का अनुमान है, जो पहले पांच फीसदी था। ध्यान रहे रिजर्व बैंक ने महंगाई की औसत दर चार फीसदी तय की है। इसे दो से छह फीसदी के बीच रखने का लक्ष्य तय किया गया है।

बहरहाल, रेपो रेट बढ़ने के बाद भी अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अच्छी खबर है। रिजर्व बैंक ने 2026-27 के लिए जीडीपी की विकास दर का अनुमान 6.7 से बढ़ा कर 7.1 फीसदी कर दिया है। इसमें दूसरी तिमाही की विकास दर 7.2 और तीसरी तिमाही की विकास दर 6.9 फीसदी रहने की उम्मीद है। चौथी तिमाही का अनुमान 6.8 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मामले में नई याचिकाएं

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमों में नया पेंच आ गया है। इस मामले में दो नई याचिकाएं दायर की गई हैं। असल में 2023 में बने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस मामले पर 23 सितंबर को दो जजों जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने विचार किया था। दोनों जजों ने अलग अलग फैसला सुनाया। जस्टिस दत्ता ने कहा कि इस मामले को बड़ी बेंच को भेजने की जरुरत नहीं है, जबकि जस्टिस शर्मा ने कहा कि इसे पांच जजों की संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए।

हालांकि दोनों इस बात पर सहमत हुए कि मामले को चीफ जस्टिस के पास भेज देना चाहिए। बुधवार, सात अक्टूबर को वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने बताया कि इस मामले में एक याचिका दायर की गई, जिसमें जस्टिस दत्ता और जस्टिस शर्मा के फैसले को वापस लेने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि इस याचिका की जांच की जाएगी। वकील ने यह भी बताया कि एक अन्य सुधारात्मक याचिका भी दायर की गई है। चीफ जस्टिस ने कहा कि उनको उस याचिका की भी जानकारी है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक पैनल का गठन किया था, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस को रखा गया था। हालांकि अदालत ने कहा था कि यह अस्थायी व्यवस्था है। इसके बाद सरकार ने संसद में एक कानून बनाया, जिसमें नियुक्ति समिति से चीफ जस्टिस को हटा कर वहां एक केंद्रीय मंत्री को रख दिया गया। इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। उसे बड़ी बेंच के सामने भेजने का मामला उलझा हुआ है।

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने इसे संविधान पीठ को भेजने की बात रही है। लेकिन जस्टिस शर्मा को लेकर पक्षपात की आशंका जताई गई है। उनके बेटे मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुना आयोग के स्टैंडिंग काउंसिल हैं। बहरहाल, अगर सुप्रीम कोर्ट नई याचिकाओं की जांच करता है और उसे सुनवाई के लिए स्वीकार करता है तो इस कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली अन्य याचिकाओं की सुनवाई प्रभावित होगी और इसे बड़े बेंच को भेजने का मामला भी अटकेगा।

Asian Market : क्रूड में उछाल, टेक शेयरों में बिकवाली से गिरे एशियाई बाजार, निक्केई 700 अंक टूटा

Asian Market :  अमेरिकी बाजारों में गिरावट के बाद 8 अक्तूबर को एशियन शेयर मार्केट में भी बिकवाली देखने को मिल रही है। क्रूड की ऊंची कीमतों ने महंगाई की आशंकाओं को हवा दी और निवेशकों ने एक बार फिर टेक्नोलॉजी शेयरों की बिकवाली की। MSCI के एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 0.3% की गिरावट आई, जिसमें जापान और दक्षिण कोरिया सबसे आगे रहे। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 1.12% गिरा, जबकि व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 1.42% की गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया के कोस्पी (Kospi) में 0.56% की गिरावट आई और हैंग सेंग फ्यूचर्स ने हांगकांग में 0.6% की गिरावट के साथ खुलने का संकेत दिया। चीन के मुख्य बाजार छुट्टी के बाद फिर से खुले।

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया। चिप बनाने वाली इस प्रमुख कंपनी ने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया, लेकिन ब्लूमबर्ग के अनुसार, नतीजे विश्लेषकों के अनुमान से कम रहे।

वॉल स्ट्रीट ने बाजार का रुख तय किया। महंगाई की चिंताएं फिर से उभरने के कारण S&P 500 और नैस्डैक 100 दोनों में 0.2% की गिरावट आई, और फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 1.2% नीचे आ गया।

भारत में, GIFT निफ्टी (जो यह बताता है कि देश का शेयर बाजार दिन के कारोबार के लिए कैसे खुलेगा ) ने गिरावट के साथ शुरुआत का संकेत दिया, जिससे 50-स्टॉक वाला इंडेक्स पूरे सप्ताह के लिए नुकसान में जा सकता है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें निवेशकों के लिए स्थिति को मुश्किल बना रही हैं क्योंकि वे महंगाई का दबाव बढ़ाती हैं, ठीक उसी समय जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व अपनी नीति को सख्त कर रहा है। पिछले महीने, केंद्रीय बैंक ने 2023 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की थी।

फेड की सितंबर की बैठक के मिनट्स (कार्यवृत्त) से पता चला कि सभी 19 अधिकारियों ने बेंचमार्क दर की टारगेट रेंज को 3.75%-4% तक बढ़ाने का समर्थन किया, जो जुलाई 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी थी। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने अर्थव्यवस्था के मजबूत होने के संकेत मिलने के बाद यह कदम उठाया। अधिकारियों ने वित्तीय स्थितियों की भी समीक्षा की। कई लोगों ने कहा कि लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) बढ़ने के बावजूद, स्थितियां अभी भी विकास के अनुकूल थीं क्योंकि शेयरों में तेजी आई थी और कॉर्पोरेट बॉन्ड स्प्रेड कम बने हुए थे। जापानी येन 158 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहा और 0.1% बढ़कर 157.92 पर पहुंच गया। मीटिंग के मिनट्स से यह भी पता चला कि जुलाई के आखिर में येन को सपोर्ट करने के लिए किए गए इंटरवेंशन में अमेरिका की भूमिका फेड ने अपने फंड का इस्तेमाल करके नहीं, बल्कि US ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने निभाई थी।

ऑफशोर युआन 6.7020 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।

इस बीच, जियोपॉलिटिकल रिस्क और सप्लाई में रुकावट की वजह से तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। ब्रेंट क्रूड 1% बढ़कर लगभग $101.20 प्रति बैरल हो गया। यह बढ़ोतरी एक रिपोर्ट के बाद हुई जिसमें कहा गया था कि व्हाइट हाउस ने पेंटागन से ईरान के खिलाफ स्ट्राइक के ऑप्शन तैयार करने को कहा है, जिन्हें मिडटर्म इलेक्शन से पहले अंजाम दिया जा सकता है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 0.9% बढ़कर $89.09 प्रति बैरल हो गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पाकिस्तान में आटे के संकट से जूझ रहे लोग:20 किलो आटे का बैग 3300 रुपए पहुंचा, रोटी 20 से बढ़कर 30 रुपए हुई

पाकिस्तान के पेशावर में आटे की कीमत तेजी से बढ़ने से लोग परेशान हैं। 20 किलो मोटे आटे का बैग 3,300 पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच गया है। आटे की कीमत बढ़ने का असर तंदूरों पर भी पड़ा है। ANI के मुताबिक, 20 रुपए में मिलने वाली 50 ग्राम की रोटी अब 30 रुपए में बिक रही है। कई इलाकों में एक रोटी की बिक्री भी बंद कर दी गई है और 40 रुपए में दो रोटियां दी जा रही हैं। सरकारी सब्सिडी वाला आटा बाजार से लगभग गायब हो गया है। इसके चलते दुकानों पर व्यावसायिक आटे की कीमत बढ़ गई है। 20 किलो महीन आटे का बैग 3,120 रुपए में बिक रहा है, जबकि 80 किलो मोटे आटे की कीमत 13,200 रुपए पहुंच गई है। 20 किलो चोकर का बैग भी 1,480 रुपए में मिल रहा है। कारोबारियों पर आटे की जमाखोरी का आरोप आटे की कीमत बढ़ने के पीछे कुछ कारोबारियों पर जमाखोरी करने के आरोप लग रहे हैं। आरोप है कि कारोबारियों ने आटे का स्टॉक गोदामों में रोक लिया, जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता कम हो गई और कीमतें तेजी से बढ़ीं। आटे की अचानक बढ़ी कीमतों के बाद कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियां बड़े कारोबारियों और आटा गोदामों पर नजर रख रही हैं। इस संकट के बीच आटा कारोबारियों के कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपए का मुनाफा कमाने की बात भी सामने आई है। कई इलाकों में दुकानदारों ने एक अकेली रोटी देना बंद किया पेशावर के खैबर बाजार, अशरफ रोड, कराची मार्केट, नमक मंडी और गवर्नमेंट कॉलेज चौक जैसे इलाकों में कई दुकानदार अब एक अकेली रोटी नहीं दे रहे हैं। ग्राहकों को 40 रुपए में दो रोटियां खरीदनी पड़ रही हैं। लोगों का कहना है कि आटे की कीमत बढ़ने के साथ रोटी का वजन भी कम किया जा रहा है। आटे और रोटी की बढ़ती कीमतों से लोगों में नाराजगी है। उन्होंने प्रशासन से तय कीमत पर आटा और रोटी उपलब्ध कराने के साथ रोटी का वजन भी तय मानक के मुताबिक रखने की मांग की है। सरकार का दावा- सब्सिडी वाला आटा अब भी बांटा जा रहा खाद्य विभाग का कहना है कि सब्सिडी वाला आटा अब भी पूरे प्रांत में बांटा जा रहा है। विभाग के मुताबिक, पिछले हफ्ते 1,611 सक्रिय डीलरों के जरिए सरकारी दरों पर 4,17,168 बैग आटा सप्लाई किया गया। पेशावर डिवीजन को 1,01,955, मलाकंड को 1,20,737 और मरदान को 59,389 बैग मिले। हजारा को 38,129, बन्नू को 12,588, डेरा इस्माइल खान को 41,688 और कोहाट को 42,682 बैग की सप्लाई की गई। पाकिस्तान में पहले भी कई बार आटे का संकट आया पाकिस्तान में आटे की कमी कोई नई समस्या नहीं है। देश में पिछले कुछ वर्षों में कई बार गेहूं और आटे की सप्लाई प्रभावित हुई है। 2019-20 में आटे की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के साथ आटे की कमी का संकट सामने आया था। इसके बाद 2023 में भी गेहूं और आटे की भारी किल्लत हुई, जब सब्सिडी वाले आटे के लिए लोगों की लंबी कतारें लग गई थीं। 2023 के संकट में सरकार की ओर से कम कीमत पर दिए जाने वाले आटे की मांग तेजी से बढ़ गई थी। कई जगह लोग घंटों कतार में खड़े रहे। कुछ स्थानों पर आटा लेने के दौरान भगदड़ जैसी स्थिति भी बनी थी। इससे साफ हुआ कि आटे की सप्लाई में रुकावट का सबसे ज्यादा असर सीधे आम लोगों पर पड़ता है। ————————————— ये खबर भी पढ़ें…. पाकिस्तान में 60 लड़कियों के फोन लेकर फरार हुए ठग:नौकरी का झांसा देकर बुलाया, सभी के मोबाइल जमा कराए, फिर बाइक से भाग निकले पाकिस्तान के कराची में ठग नौकरी का झांसा देकर कम से कम 60 लड़कियों के मोबाइल फोन लेकर फरार हो गए। ठगों ने सोशल मीडिया और वॉट्सऐप ग्रुप के जरिए उन्हें एक कार्यक्रम में स्टॉल संभालने का काम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Bank of India ने लोन महंगा किया, दूसरे बैंक भी जल्द बढ़ा सकते हैं इंटरेस्ट रेट

बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो आधारित लेंडिंग रेट (आरबीएलआर) बढ़ा दिया है। उसने आरबीएलआर में 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी एक-चौथाई फीसदी वृद्धि की है। अब यह 8.35 फीसदी हो गया है। नया रेट 7 अक्तूबर से प्रभावी हो गया है। इसका मतलब है कि आरबीएलआर से जुड़े बैंक को होम लोन, कार लोन और दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे।

RBI के रेपो रेट बढ़ाने के दिन ही बैंक ने बढ़ाया इंटरेस्ट रेट

Bank of India ने आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के दिन ही अपने लोन को महंगा करने का ऐलान कर दिया। केंद्रीय बैंक ने 7 अक्तूबर को अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा दिया। उसने इसे 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.5 फीसदी कर दिया। आरबीआई ने 2023 के बाद पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है।

दूसरे बैंक भी जल्द कर सकते हैं इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के ऐलान 

आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के बाद यह माना जा रहा था कि सरकारी बैंक, प्राइवेट बैंक सहित दूसरे बैंक अपने लोन का इंटरेस्ट बढ़ाएंगे। बैंक ऑफ इंडिया ने सबसे पहले अपना रेपो आधारित लेंडिंग रेट बढ़ाने का ऐलान किया। यह 7 अक्तूबर से ही लागू हो गया। बैंक ऑफ इंडिया के रेपो से जुड़े सभी लोन अब महंगे हो जाएंगे। बैंकों को अपने लोन के इंटरेस्ट रेट के लिए किसी बाहरी बेंचमार्क से लिंक्ड करना पड़ता है। अब ज्यादातर बैंकों के लोन रेपो से लिंक्ड हैं।

होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन हो जाएंगे महंगे

बैंक ऑफ इंडिया सरकारी बैंक है। माना जा रहा है कि जल्द दूसरे बैंक भी अपने लोन के इंटरेस्ट रेट में इजाफा कर सकते हैं। इससे होम लोन, कार लोन सहित दूसरे लोन महंगे हो जाएंगे। त्योहारों के पहले इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने का असर लोन के नए और पुराने दोनों ग्राहकों पर पड़ेगा। जो लोन पहले होम लोन ले चुके हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। कोई ग्राहक नया लोन लेने जा रहा है तो उसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट पर लोन मिलेगा।

आरबीआई ने इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए बढ़ाया रेपो

आरबीआई ने 7 अक्तूबर को रेपो रेट बढ़ाने का फैसला महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए किया। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी के सभी 6 सदस्यों ने रेपो रेट बढ़ाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। अगस्त में रिटेल इनफ्लेशन 4.82 फीसदी पर पहुंच गया।

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क्रूड में उछाल से दुनियाभर में बढ़ रहा इनफ्लेशन 

पिछले कई महीनों से इनफ्लेशन लगातार बढ़ रहा है। इसकी वजह क्रूड की ऊंची कीमतें हैं। अमेरिका सहित दुनियाभर में इनफ्लेशन बढ़ रहा है। सितंबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने इनफ्लेशन को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाया था।

इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं:हमास हमले ने बदली देश की राजनीति; वामपंथ कमजोर, अरब पार्टियां अछूत बनीं

7 अक्टूबर 2023 को हमास के करीब 6 हजार लड़ाकों ने इजराइल पर हमला किया। लोगों को घरों और बंकरों में मारा गया, कई लोगों को जिंदा जला दिया गया और 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया। करीब 1,200 लोग मारे गए। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा पर हमला शुरू कर दिया। तीन साल बाद भी 7 अक्टूबर का असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है। इस हमले ने इजराइल की राजनीति का एजेंडा भी बदल दिया। इजराइल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने हैं। पहले महंगाई, घरों की कीमत और नेतन्याहू के खिलाफ मुकदमे जैसे मुद्दे चुनावी बहस में प्रमुख थे। अब सुरक्षा, हमास, सेना और फिलिस्तीन का सवाल सबसे ऊपर है। इसका फायदा पहले से मजबूत दक्षिणपंथी राजनीति को मिला है। हालांकि पीएम नेतन्याहू के हारनेका खतरा मंडरा रहा है। वहीं लेफ्ट कमजोर हुआ है और अरब पार्टियों के लिए सरकार बनाने में पहले जैसी किंगमेकर भूमिका निभाना मुश्किल हो गया है। गाजा जंग के बाद देश में पहला चुनाव, हमास हमले के बाद यह देश का पहला राष्ट्रीय चुनाव है। इस चुनाव में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नेतन्याहू फिर प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं। तीन साल पहले जिस हमले ने इजराइल की राजनीति बदल दी थी, अब उसी हमले के लिए नेतन्याहू की सरकार से जवाब भी मांगा जा रहा है। हमले के समय नेतन्याहू ही प्रधानमंत्री थे और उन पर सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी लेने का दबाव है। उनकी मुश्किल यह है कि इस बार उन्हें पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट से सीधी चुनौती मिल रही है। आइजेनकोट की पार्टी कई हालिया सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड के बराबर या उससे आगे दिखाई दे रही है। एक ताजा सर्वे में लिकुड को करीब 22-23 और आइजेनकोट की पार्टी को करीब 22 सीटें मिल रही हैं। दूसरी तरफ नेतन्याहू के साथ मौजूद दक्षिणपंथी दलों का पूरा गठबंधन भी बहुमत से पीछे है। हालिया सर्वे के औसत में उनके गठबंधन को करीब 52-55 सीटें मिल रही हैं, जबकि सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। दक्षिणपंथ पहले से मजबूत था, 7 अक्टूबर के बाद और मजबूत हुआ इजराइल में दक्षिणपंथ 7 अक्टूबर से पहले ही मजबूत था। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और धार्मिक-राष्ट्रवादी दल पहले से सरकार में थे। लेकिन हमास के हमले के बाद सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा हो गया। दक्षिणपंथी नेता लगातार कहने लगे कि इजराइल को हमास और फिलिस्तीनियों के खिलाफ सख्त रुख रखना चाहिए। इतमार बेन-ग्विर और बेजेलेल स्मोट्रिच जैसे नेताओं को इसी मुद्दे पर अपनी बात रखने की ज्यादा जगह मिली। फिलिस्तीनी राज्य का विरोध, वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों का समर्थन और फिलिस्तीनियों के खिलाफ सख्त नीति जैसे मुद्दे अब इजराइली राजनीति में ज्यादा खुलकर उठाए जाने लगे। लेफ्ट पहले शांति की बात करता था, अब सुरक्षा-आतंकवाद की 3 साल पहले इजराइल की लेफ्ट राजनीति में लेबर पार्टी और मेरेत्ज सबसे प्रमुख नाम थे। दोनों पार्टियां फिलिस्तीन को मान्यता देने और शांति की बात करती थीं। मेरेत्ज तो वेस्ट बैंक के कब्जे वाले इलाकों से इजराइल की वापसी की भी वकालत करती थी। लेकिन 7 अक्टूबर के हमले के बाद यह राजनीति मुश्किल में आ गई। हमास के हमले ने इजराइली समाज में सुरक्षा और आतंकवाद का मुद्दा सबसे ऊपर ला दिया। इसी बदलाव के बीच लेबर और मेरेत्ज ने 2024 में मिलकर ‘द डेमोक्रेट्स’ पार्टी बनाई। इसका नेतृत्व पूर्व सैन्य अधिकारी याइर गोलान कर रहे हैं। वामपंथी पार्टी अब भी फिलिस्तीनियों के साथ राजनीतिक समाधान और वेस्ट बैंक के विलय को रोकने की बात करती है, लेकिन साथ ही हमास के शासन को खत्म करने और इजराइल की सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर देती है। यही इजराइली राजनीति में आया सबसे बड़ा बदलाव है। सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ दक्षिणपंथ की पहचान नहीं रहा; नेतन्याहू का विरोध करने वाली पार्टियां भी अब इसी सवाल का जवाब दिए बिना चुनाव नहीं लड़ सकतीं। अरब पार्टी पहले किंगमेकर हुआ करती थीं, अब अछूत बनीं इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियों की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण 2021 में देखने को मिला। उस चुनाव में किसी भी खेमे को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें नहीं मिलीं। नेतन्याहू सबसे बड़े नेता जरूर रहे, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाए। इसके बाद उनके विरोध में खड़े अलग-अलग दलों ने हाथ मिला लिया। दक्षिणपंथी नेता नफ्ताली बेनेट और सेंटर के नेता याइर लैपिड ने गठबंधन बनाया। इसमें वामपंथी और दक्षिणपंथी दलों के साथ मंसूर अब्बास की अरब पार्टी राअम भी शामिल हुई। राअम की 4 सीटों के समर्थन से सरकार बनी। इस तरह करीब 12 साल से प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू सत्ता से बाहर हो गए। इजराइल में पहली बार कोई अरब पार्टी सरकार बनाने वाले गठबंधन का हिस्सा बनी। 2026 में तस्वीर अलग है। मौजूदा सर्वेक्षणों में अरब पार्टियों को करीब 13 सीटें मिलती दिख रही हैं। अरब पार्टी को सरकार में शामिल करना राजनीतिक रूप से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। ऐसा करने पर पार्टी को यहूदी वोटर्स के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। यानी 2021 में अरब पार्टियां नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने की ‘किंगमेकर’ बनी थीं। 2026 में उनके पास फिर सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें हो सकती हैं, लेकिन 7 अक्टूबर के बाद बदले राजनीतिक माहौल में उन्हें साथ लेना कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… ममदानी की जीत से बदली यूरोप की राजनीति:वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को मुद्दा बनाया; जर्मनी में जीत मिली जोहरान ममदानी ने पिछले साल नवंबर में न्यूयॉर्क मेयर का चुनाव जीता था। उनका मैसेज था कि न्यूयॉर्क को आम लोगों के लिए सस्ता बनाया जाए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

‘अगर दोबारा ड्रॉप भी हुआ तो…’, टीम इंडिया में वापसी के बाद ईशान किशन ने बताया अपना फोकस

भारतीय क्रिकेटर ईशान किशन के लिए साल 2026 काफी खास रहा है। भारतीय टीम में वापसी के बाद से ही ईशान किशन बेहरतीन फॉर्म में नजर आ रहे हैं। ईशान किशन को इस साल जनवरी में भारतीय टीम में वापसी की थी। साल 2023 के अंत में इंटरनेशनल क्रिकेट से ब्रेक लेने के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था। उस समय ईशान साउथ अफ्रीका से लौटने के बाद अपनी घरेलू टीम झारखंड के लिए रणजी ट्रॉफी मैच खेलने नहीं उतरे थे। इसके बाद ईशान को बीसीसीआई के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट में भी जगह नहीं मिली।

इसके बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी की और लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर टीम में फिर अपनी जगह बनाई। लगातार मेहनत के बाद ईशान ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज से टीम में वापसी की और लगातार अच्छे प्रदर्शन से अपनी जगह मजबूत की।

‘मैंने धैर्य बनाए रखा’

ईशान किशन ने JioHotstar पर कहा, “जब मुझे इंटरनेशनल टीम से बाहर किया गया, तो मुझे अपनी कुछ गलतियों के नतीजों का एहसास हुआ। इसलिए, मैंने अपनी फिटनेस और बल्लेबाजी पर काम किया। मैंने धैर्य रखा और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करके अपनी गलतियों को सुधारने पर ध्यान दिया।” उन्होंने कहा, “मुझे पता था कि अगर मैं घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करता रहा, तो मुझे मौका जरूर मिलेगा और अपनी मेहनत के दम पर मुझे नेशनल टीम में वापस बुलाया गया। एक बार टीम में वापसी करने के बाद आप यह नहीं सोचते कि अगर दोबारा बाहर कर दिया गया तो क्या होगा।”

लगातार रन बनाना मेरा काम

उन्होंने आगे कहा, “सबसे जरूरी है कि क्रिकेट का आनंद लिया जाए और टीम की सफलता में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने पर ध्यान दिया जाए। मेरा काम लगातार रन बनाना है और अगर मैं ऐसा करता रहा, तो बाकी चीजें अपने आप सही हो जाएंगी।” उन्होंने कहा, “एक बल्लेबाज के तौर पर, जब मैं अच्छी फॉर्म में नहीं होता और दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में बल्लेबाजी कर रहा होता है और गेंद को अच्छे से हिट कर रहा होता है, जैसा कि इस मामले में श्रेयस अय्यर कर रहे थे, तो मुझे दूसरे बल्लेबाज को सपोर्ट करने में कोई दिक्कत नहीं होती।”

ईशान ने खेली शानदार पारी

मंगलवार को लखनऊ में वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 मुकाबले में ईशान किशन ने शानदार पारी खेली। भारत को 172 रन का लक्ष्य मिला था, जिसे टीम ने 14.4 ओवर में हासिल कर लिया। इशान ने कप्तान श्रेयस अय्यर के साथ मिलकर 137 रन की नाबाद साझेदारी की। इशान के मुताबिक, जब किसी बल्लेबाज का बल्ला अच्छी तरह चल रहा हो, तो दूसरे बल्लेबाज को उसके लिए अपनी भूमिका बदलने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

अय्यर ने ठोका शतक

ईशान ने कहा, “वह (अय्यर) हमारी साझेदारी में ज्यादातर रन बना रहे थे और जब वह शानदार बल्लेबाजी कर रहे हों, तो मेरा काम होता है कि उन्हें विरोधी गेंदबाजों पर दबाव बनाने का मौका दूं। उन्होंने यह काम बहुत अच्छी तरह किया और आखिर में हमने लक्ष्य का सफलतापूर्वक पीछा कर लिया।” श्रेयस अय्यर ने नाबाद शतक लगाकर टी20 इंटरनेशनल में अपनी पहली सेंचुरी पूरी की। इसके साथ ही वह उन चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों की सूची में शामिल हो गए, जिन्होंने क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने का कारनामा किया है।

आरबीआई ने रेपो दर 0.25 प्रतिशत बढ़ाया, महंगा हो सकता है कर्ज

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बढ़ती मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के मद्देनजर बुधवार को अल्पावधि कर्ज की अपनी नीतिगत दर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर दी।

इससे होम लोन, व्यक्तिगत ऋण और उद्योगों के लिए पूंजी की लागत बढ़ने की आशंका है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की आज समाप्त तीन दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि समिति ने सर्वसम्मति से रेपो दर 5.25 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत करने का निर्णय किया है। रेपो दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक पूंजी उपलब्ध कराता है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना रुख भी बदल दिया है और अब वह भविष्य में रेपो दर में और बढ़ोतरी के लिए तैयार है।

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श्री मल्होत्रा ने कहा कि निकट भविष्य में रेपो दर में कटौती की उम्मीद नहीं है। इसमें या तो वृद्धि होगी या इसे स्थिर रखा जाएगा। चालू वित्त वर्ष में एमपीसी की यह चौथी और कैलेंडर वर्ष में पांचवीं द्विमासिक बैठक थी जिसमें नीतिगत दरों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस साल नीतिगत दरों में पहली बार बदलाव किया गया है।

पिछले साल एमपीसी ने चार बार में रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी जिससे आम लोगों को अपना घर और वाहन खरीदने में काफी राहत मिली थी। आखिरी कटौती दिसंबर में (0.25 प्रतिशत) की गई थी। फरवरी 2023 के बाद पहली बार रेपो दर बढ़ाई गई है। कोविड काल में मई 2022 से फरवरी 2023 के बीच छह बार में इसमें कुल 2.5 प्रतिशत (250 आधार अंकों) की वृद्धि की गई थी।

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ममदानी की जीत ने बदली यूरोप की राजनीति:वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को मुद्दा बनाया; बर्लिन में जीत मिली

न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी की जीत का असर अब यूरोप की राजनीति में दिखने लगा है। यूरोपीय नेता ममदानी की तरह महंगे किराए, बढ़ती महंगाई और आम लोगों के खर्च पर फोकस कर रहे हैं। सबसे दिलचस्प मामला जर्मनी के बर्लिन का है। वहां महंगे घरों को मुद्दा बनाकर एलिफ एराल्प ने चुनाव जीत लिया। जर्मन मीडिया ने अब एराल्प को ‘बर्लिन की ममदानी’ कह रहे हैं। वहीं, फ्रांस, स्पेन और नीदरलैंड के वामपंथी नेता भी ममदानी की राजनीति पर नजर रख रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि ममदानी ने यूरोप के वामपंथ को चुनाव लड़ने का नया तरीका दे दिया है। 1. जर्मनी: सस्ते घरों का वादा किया, सबसे ज्यादा सीटें मिलीं अगर यूरोप में किसी एक नेता को ममदानी से सबसे सीधे तौर पर जोड़ा जा सकता है, तो वह एलिफ एराल्प हैं। 45 साल की एराल्प वकील हैं और तुर्की मूल के परिवार से आती हैं। उनके माता-पिता 1980 के तुर्की सैन्य तख्तापलट के बाद जर्मनी आए थे। एराल्प 2017 में द लिंक से जुड़ी थीं। पिछले महीने हुए चुनाव में उनकी पार्टी का सबसे बड़ा मुद्दा रहा- महंगा शहर और महंगा किराया। एराल्प ने बर्लिन में निजी कंपनियों के पास मौजूद करीब 2.2 लाख मकानों को सार्वजनिक नियंत्रण में लाने की मांग की। इसका फायदा द लिंक को मिला। वह चुनाव में करीब 25.7% वोट मिले और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। अब सरकार बनाने के लिए उसे दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करना होगा। 2. ब्रिटेन: पर्यावरण के मुद्दे को महंगे घर से जोड़ा ब्रिटेन में ममदानी से सबसे ज्यादा तुलना जैक पोलांस्की की होती है। वे ग्रीन पार्टी के नेता हैं। यह पार्टी मुख्य रूप से पर्यावरण और जलवायु के मुद्दों पर राजनीति करती रही है। लेकिन पोलांस्की ने इनका दायरा बढ़ाया है। पोलांस्की महंगाई, महंगे घर, बढ़ते किराए, रोजमर्रा के खर्च और अमीरों पर ज्यादा टैक्स जैसे मुद्दों को पर्यावरण की राजनीति से जोड़ते हैं। पोलांस्की इसे ‘इको-पॉपुलिज्म’ कहते हैं। ममदानी की तरह पोलांस्की भी सोशल मीडिया को राजनीति का अहम माध्यम बना रहे हैं। पोलांस्की ने बताया कि उनकी वीडियो टीम ममदानी के वीडियो बनाने वाली टीम से टिप्स ले रही है। दिलचस्प बात यह है कि पोलांस्की इस समय लंदन की होलबॉर्न सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के सांसद पद से हटने के बाद 8 अक्टूबर को यहां उपचुनाव हो रहा है। दो साल पहले हुए चुनाव में ग्रीन पार्टी को यहां सिर्फ 10 फीसदी वोट मिले थे। कुछ सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि इस बार ग्रीन को 40 फीसदी वोट मिल सकता है। 3. स्पेन: 87 साल की महिला को घर से निकाला, सरकार गिरी स्पेन में महंगा घर और बढ़ता किराया इस समय बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पिछले महीने मैड्रिड में 87 साल की मारिकर्मेन अबास्कल को 70 साल से रह रहे घर से निकाल दिया गया। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। यह मामला स्पेन के आवास संकट का प्रतीक बन गया। मामला इतना बढ़ा कि सरकार पर आवास संकट से निपटने का दबाव बढ़ गया। संसद में सरकार के आवास संबंधी प्रस्ताव खारिज होने के बाद प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने 29 नवंबर को समय से पहले आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। यानी स्पेन में भी घर और किराया अब सिर्फ सामाजिक समस्या नहीं रहे। वे सीधे चुनावी राजनीति का मुद्दा बन चुके हैं। 4. फ्रांस: पेरिस में 60 हजार सस्ते घर बनाने का वादा फ्रांस की राजधानी पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर समाजवादी पार्टी से जुड़े हैं। वे इसी साल मेयर चुने गए हैं। उनकी राजनीति में महंगा घर और बढ़ता किराया बड़ा मुद्दा है। ग्रेगोयर पेरिस में ज्यादा सस्ते घर बनाने, खाली पड़े मकानों को लोगों के लिए इस्तेमाल करने और किराए पर नियंत्रण बढ़ाने की बात करते हैं। उनकी सरकार का मकसद 60 हजार नए सस्ते घर बनाना है। ममदानी की जीत से पहले भी फ्रांस के कुछ वामपंथी नेता उनके अभियान से सीखने की बात कर चुके थे। ब्रिटेन की तरह यहां भी ममदानी की चुनावी शैली और सीधे मैसेज देने के तरीके पर नजर रखी गई। 5. नीदरलैंड: घर की कमी को मुद्दा बनाया, सबसे बड़ी पार्टी बनी नीदरलैंड में ममदानी की जीत से पहले ही घर और किराए का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ चुका था। 2025 के राष्ट्रीय चुनाव में D66 के नेता रॉब येटन ने आवास संकट को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया। उस समय देश में करीब 4 लाख घरों की कमी थी। घर खरीदना महंगा हो चुका था और किराए लगातार बढ़ रहे थे। यानी लाखों लोगों के सामने सवाल था। सरकार महंगाई कब कम करेगी से पहले घर मिलेगा कब? येटन की पार्टी D66 ने हर साल 1 लाख नए घर बनाने और 10 नई टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव रखा। चुनाव में इसका फायदा भी मिला। पार्टी 2023 की 9 सीटों से बढ़कर 2025 में 26 सीटों पर पहुंच गई और सबसे बड़ी पार्टियों में शामिल हुई। यानी नीदरलैंड में सस्ता घर और कम किराया यूरोप में ममदानी की जीत से पहले ही बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका था। ममदानी की जीत ने इस बहस को और चर्चा में ला दिया। ——————————

कियारा-सिद्धार्थ के घर फिर गूंजेगी किलकारी! नन्ही सारायाह ने दिया खास हिंट

बॉलीवुड की चर्चित जोड़ी Kiara Advani और Sidharth Malhotra ने फैंस के साथ एक बड़ी खुशखबरी शेयर की है। दोनों एक बार फिर माता-पिता बनने की तैयारी में हैं। जुलाई 2025 में बेटी के जन्म के बाद अब कपल ने अपने दूसरे बच्चे के आने की जानकारी दी है। सोशल मीडिया पर सामने आई इस खबर के बाद फैंस से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया है। कपल की इस अनाउंसमेंट ने देखते ही देखते लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

नन्ही बेटी की तस्वीर ने जीता दिल

कियारा ने सोशल मीडिया पर एक बेहद प्यारी तस्वीर साझा की। फोटो में उनकी बेटी सारायाह के नन्हे हाथ में सफेद रंग का एक छोटा सा मोजा दिखाई दे रहा है। बच्ची का हाथ कियारा और सिद्धार्थ ने थाम रखा है। इस तस्वीर के साथ कियारा ने लिखा कि वे एक बार फिर जिंदगी के सबसे बड़े तोहफे से धन्य महसूस कर रहे हैं और उनके दिल प्यार व आभार से भरे हुए हैं। तस्वीर सामने आते ही फैंस ने कमेंट्स में कपल को शुभकामनाएं देनी शुरू कर दीं।

मां बनने के बाद खुद को बदला हुआ महसूस करती हैं कियारा

कियारा इससे पहले कई मौकों पर मां बनने के अनुभव को लेकर खुलकर बात कर चुकी हैं। राज शमानी के पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि मातृत्व ने उनके व्यक्तित्व को काफी बदल दिया है और अब वह खुद को पहले से बिल्कुल अलग इंसान मानती हैं।

काम पर वापसी को लेकर बातचीत में अभिनेत्री ने यह भी कहा था कि मां बनने के बाद उनके अंदर एक अलग तरह की मजबूती आई है। उन्होंने खुद को पहले से ज्यादा मजबूत और आत्मविश्वासी महसूस करने की बात कही थी।

‘शेरशाह’ के सेट से शुरू हुई थी प्रेम कहानी

कियारा और सिद्धार्थ की प्रेम कहानी की शुरुआत फिल्म ‘शेरशाह’ के दौरान हुई बताई जाती है। दोनों ने अपने रिश्ते को लंबे समय तक निजी रखा, लेकिन समय के साथ उनकी नजदीकियों की चर्चा तेज होती गई।

7 फरवरी 2023 को दोनों ने राजस्थान के जैसलमेर स्थित सूर्यगढ़ पैलेस में करीबी लोगों की मौजूदगी में शादी की। इसके बाद जुलाई 2025 में उनके घर बेटी ने जन्म लिया।

‘शेरशाह’ में सिद्धार्थ ने कैप्टन विक्रम बत्रा का किरदार निभाया था, जबकि कियारा डिंपल चीमा के रोल में नजर आई थीं। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली थी और इसी फिल्म के दौरान दोनों के रिश्ते ने एक नया मोड़ लिया।

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