चुनाव जीतकर भी क्या PM नहीं बन पाएंगे नेतन्याहू:दक्षिणपंथी वोटों के बंटने का डर; हाथ से निकल सकती है सत्ता

इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने चुनाव के बाद सत्ता गंवाने का खतरा है। उनके अपने दक्षिणपंथी खेमे की छोटी पार्टियां उनके लिए मुश्किल खड़ी कर रही हैं। इनके कारण वोट बंट सकते हैं। वहीं, चुनाव के बाद ये पार्टियां नेतन्याहू की सरकार में शामिल होने से भी इनकार कर सकती हैं। चुनाव से 11 दिन पहले नेतन्याहू इन पार्टियों के वोट अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ, विपक्षी नेता गादी आइजनकोट अपनी पार्टी को विपक्ष का सबसे बड़ा दल बनाने में जुटे हैं, ताकि प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा मजबूत हो सके। 1. नेतन्याहू के लिए छोटी पार्टियां क्यों बनीं चुनौती? इजराइल में दक्षिणपंथी वोटों के लिए बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को ओफर विंटर और योआज हेंडेल की पार्टियों से चुनौती मिल रही है। नेतन्याहू चाहते हैं कि दक्षिणपंथी मतदाता उनकी पार्टी को वोट दें, ताकि चुनाव के बाद उनकी सरकार बनाने की संभावना मजबूत रहे। नेतन्याहू ने विंटर की पार्टी को वोट न देने की अपील की है। उन्हें डर है कि विंटर दक्षिणपंथी वोट लेकर चुनाव के बाद एविगडोर लिबरमैन के साथ जा सकते हैं। यानी वोट मिलने के बावजूद नेतन्याहू को इन पार्टियों का समर्थन मिले, यह जरूरी नहीं है। 2. वोट बंटने से नेतन्याहू को कैसे नुकसान हो सकता है? 3. विंटर ने नेतन्याहू को समर्थन देने पर शर्त रखी 4. विपक्ष में भी PM पद के लिए एक नाम पर सहमति नहीं नेतन्याहू को हराने की कोशिश कर रहे विपक्षी दलों में भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर सहमति नहीं है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट चाहते हैं कि उनकी पार्टी याशर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बने। इसके लिए वे दूसरी विपक्षी पार्टियों के समर्थकों को अपनी ओर लाने की कोशिश कर रहे हैं। आइजनकोट का मानना है कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनने से प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा मजबूत होगा। लेकिन इससे दूसरी विपक्षी पार्टियों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में चुनाव के बाद नेतन्याहू के खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हो पाएंगे या नहीं, यह भी अहम होगा। नेतन्याहू को देश के लिए खतरा मानते हैं आइजनकोट आइजनकोट का आरोप है कि नेतन्याहू 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहे। उनका कहना है कि किसी नेता की पहचान उसके भाषणों से नहीं, बल्कि उसके नतीजों से होती है। उन्होंने नेतन्याहू को एंटी-लीडर बताते हुए कहा कि किसी भी नाकामी की जिम्मेदारी नेता को खुद लेनी चाहिए, लेकिन नेतन्याहू ऐसा नहीं करते। आइजनकोट का मानना है कि देश को ऐसी सरकार चाहिए, जो गलतियों की जिम्मेदारी ले और इजराइल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के करीब लाए। आइजनकोट की पार्टी याशर विपक्षी खेमे का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही है। लेख में दिए गए सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त नेता के सवाल पर आइजनकोट नेतन्याहू से आगे चल रहे थे। एक सर्वे में उन्हें 41% और नेतन्याहू को 38% लोगों ने पसंद किया। दूसरे सर्वे में आइजनकोट को 44% और नेतन्याहू को 38% समर्थन मिला। 5. बहुमत के बिना भी सरकार बनाने की कोशिश करेंगे आइजनकोट इजराइल की संसद में 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए आमतौर पर 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इससे कम समर्थन के साथ भी सरकार बन सकती है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट इसी संभावना पर विचार कर रहे हैं। वे ऐसी सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, जिसे अरब पार्टियों के मतदान से दूर रहने पर संसद में मंजूरी मिल जाए। हालांकि, यह अभी सिर्फ एक संभावना है। आइजनकोट के लिए सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाना आसान नहीं होगा। 6. सरकार नहीं बनी तो कार्यवाहक PM बने रह सकते हैं नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट चाहते हैं कि चुनाव के बाद जल्द नई सरकार बने, ताकि बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री न बने रहें। इजराइल में अप्रैल 2019 से नवंबर 2022 के बीच पांच बार चुनाव हुए थे। इस दौरान नेतन्याहू कुल 19 महीने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे। आइजनकोट इसी स्थिति से बचने के लिए अल्पमत सरकार बनाने का विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि, इसके लिए भी उन्हें संसद में जरूरी समर्थन जुटाना होगा। ——————- ये खबर भी पढ़ें… चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते नेतन्याहू:बोले- तेहरान ने हमला किया तब भी विरोधी मुझे जिम्मेदार ठहराएंगे; 27 अक्टूबर को वोटिंग इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते। बुधवार को इजराइली आर्मी रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना ठीक नहीं होगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

चुनाव जीतकर भी क्या PM नहीं बन पाएंगे नेतन्याहू:दक्षिणपंथी वोटों के बंटने का डर; हाथ से निकल सकती है सत्ता

इजराइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने चुनाव के बाद सत्ता गंवाने का खतरा है। उनके अपने दक्षिणपंथी खेमे की छोटी पार्टियां उनके लिए मुश्किल खड़ी कर रही हैं। इनके कारण वोट बंट सकते हैं। वहीं, चुनाव के बाद ये पार्टियां नेतन्याहू की सरकार में शामिल होने से भी इनकार कर सकती हैं। चुनाव से 11 दिन पहले नेतन्याहू इन पार्टियों के वोट अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ, विपक्षी नेता गादी आइजनकोट अपनी पार्टी को विपक्ष का सबसे बड़ा दल बनाने में जुटे हैं, ताकि प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा मजबूत हो सके। 1. नेतन्याहू के लिए छोटी पार्टियां क्यों बनीं चुनौती? इजराइल में दक्षिणपंथी वोटों के लिए बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को ओफर विंटर और योआज हेंडेल की पार्टियों से चुनौती मिल रही है। नेतन्याहू चाहते हैं कि दक्षिणपंथी मतदाता उनकी पार्टी को वोट दें, ताकि चुनाव के बाद उनकी सरकार बनाने की संभावना मजबूत रहे। नेतन्याहू ने विंटर की पार्टी को वोट न देने की अपील की है। उन्हें डर है कि विंटर दक्षिणपंथी वोट लेकर चुनाव के बाद एविगडोर लिबरमैन के साथ जा सकते हैं। यानी वोट मिलने के बावजूद नेतन्याहू को इन पार्टियों का समर्थन मिले, यह जरूरी नहीं है। 2. वोट बंटने से नेतन्याहू को कैसे नुकसान हो सकता है? 3. विंटर ने नेतन्याहू को समर्थन देने पर शर्त रखी 4. विपक्ष में भी PM पद के लिए एक नाम पर सहमति नहीं नेतन्याहू को हराने की कोशिश कर रहे विपक्षी दलों में भी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर सहमति नहीं है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट चाहते हैं कि उनकी पार्टी याशर विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बने। इसके लिए वे दूसरी विपक्षी पार्टियों के समर्थकों को अपनी ओर लाने की कोशिश कर रहे हैं। आइजनकोट का मानना है कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनने से प्रधानमंत्री पद के लिए उनका दावा मजबूत होगा। लेकिन इससे दूसरी विपक्षी पार्टियों को नुकसान हो सकता है। ऐसे में चुनाव के बाद नेतन्याहू के खिलाफ सभी विपक्षी दल एकजुट हो पाएंगे या नहीं, यह भी अहम होगा। नेतन्याहू को देश के लिए खतरा मानते हैं आइजनकोट आइजनकोट का आरोप है कि नेतन्याहू 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहे। उनका कहना है कि किसी नेता की पहचान उसके भाषणों से नहीं, बल्कि उसके नतीजों से होती है। उन्होंने नेतन्याहू को एंटी-लीडर बताते हुए कहा कि किसी भी नाकामी की जिम्मेदारी नेता को खुद लेनी चाहिए, लेकिन नेतन्याहू ऐसा नहीं करते। आइजनकोट का मानना है कि देश को ऐसी सरकार चाहिए, जो गलतियों की जिम्मेदारी ले और इजराइल को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के करीब लाए। आइजनकोट की पार्टी याशर विपक्षी खेमे का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही है। लेख में दिए गए सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त नेता के सवाल पर आइजनकोट नेतन्याहू से आगे चल रहे थे। एक सर्वे में उन्हें 41% और नेतन्याहू को 38% लोगों ने पसंद किया। दूसरे सर्वे में आइजनकोट को 44% और नेतन्याहू को 38% समर्थन मिला। 5. बहुमत के बिना भी सरकार बनाने की कोशिश करेंगे आइजनकोट इजराइल की संसद में 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए आमतौर पर 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इससे कम समर्थन के साथ भी सरकार बन सकती है। विपक्षी नेता गादी आइजनकोट इसी संभावना पर विचार कर रहे हैं। वे ऐसी सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं, जिसे अरब पार्टियों के मतदान से दूर रहने पर संसद में मंजूरी मिल जाए। हालांकि, यह अभी सिर्फ एक संभावना है। आइजनकोट के लिए सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाना आसान नहीं होगा। 6. सरकार नहीं बनी तो कार्यवाहक PM बने रह सकते हैं नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट चाहते हैं कि चुनाव के बाद जल्द नई सरकार बने, ताकि बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री न बने रहें। इजराइल में अप्रैल 2019 से नवंबर 2022 के बीच पांच बार चुनाव हुए थे। इस दौरान नेतन्याहू कुल 19 महीने तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहे। आइजनकोट इसी स्थिति से बचने के लिए अल्पमत सरकार बनाने का विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि, इसके लिए भी उन्हें संसद में जरूरी समर्थन जुटाना होगा। ——————- ये खबर भी पढ़ें… चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते नेतन्याहू:बोले- तेहरान ने हमला किया तब भी विरोधी मुझे जिम्मेदार ठहराएंगे; 27 अक्टूबर को वोटिंग इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह 27 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करना चाहते। बुधवार को इजराइली आर्मी रेडियो से बातचीत में उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना ठीक नहीं होगा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Updated Hero Xtreme 160R 4V launched from Rs 1.27 lakh

Updated Hero Xtreme 160R 4V launched from Rs 1.27 lakh
Hero Xtreme 160R 4V Carbon front right quarter.

The Xtreme 160R 4V has been Hero’s answer since 2023 to the Bajaj Pulsar NS160 and the TVS Apache RTR 160, although it hasn’t been as popular. Late last year, the brand launched a higher variant of it called the Combat Edition with cruise control, ride-by-wire and an updated negative LCD screen from the GlamourX 125 and now it’s taking that further with a refined design and TFT display. The bigger Xtreme 250R also sees some big improvements alongside its younger brother.

  1. Retains the 164.32cc, oil-cooled engine; peak power has increased to 17.1hp
  2. Top Carbon variant gets a TFT display
  3. Standard costs Rs 1.27 lakh, Pro costs Rs 1.37 lakh and Carbon costs Rs 1.41 lakh

Hero Xtreme 160R 4V: What’s new?

Sharper design and a stronger feature set

Hero has started the updates with the design of the Xtreme 160R 4V. Compared to the previous Combat Edition, the entire silhouette has been sharpened and it’s most obvious in the fuel tank and the rear seat cowl. There are also new colours and variants on offer. The current base variant has been rechristened to Standard variant, the Combat Edition has become Pro, and a new top-variant called Carbon. Standard gets Firestorm Red and Pearl Black and Pro gets Pro Red and Pro Black. Carbon gets Carbon Red, Carbon Black, Carbon Grey and Abrax Orange.

Moving onto mechanical changes, all variants of the Xtreme 160R retain the 164.32cc, oil-cooled engine but peak power has marginally increased to 17.1hp (versus 16.9hp earlier) delivered 250rpm later in the rev range at 8,750rpm. Torque figures remain unchanged, 14.6Nm at 6,500rpm. However, Hero has separated the Standard variant from the other two quite significantly by way of features. It gets a telescopic front suspension and retains a mechanical throttle. While dual discs are also retained, it only has single-channel ABS and gets the LCD console from the Combat Edition, one of two things it shares with the Pro; the other being the design.

The Pro variant, except for the changes mentioned above, remains identical to the Combat Edition. Which means, ride-by-wire is standard with three ride modes (Rain, Road and Sports), as is cruise control. The front suspension on this one is a 37mm KYB USD fork and the rear is a monoshock that has adjustable preload. Dual-channel ABS is standard and the brake specifications remain the same too, 276mm front and 220mm rear. On the dimensions-front, seat height has gone up by a negligible 2mm to 805mm and the kerb weight by 1.5kg to 149kg.

The top Carbon variant is identical to Pro, except for its new TFT display. While the TFT display itself is shared with the Xpulse 210, Hero has changed the layout and design of it to better suit the Xtreme 160R’s sporty characteristics. There’s no difference in weight between the three variants.

With the updated design and additional features, the Hero Xtreme 160R 4V Standard comes in at Rs 1.27 lakh, Pro sits at Rs 1.37 lakh, a significant Rs 10,000 increase. Top Carbon costs Rs 1.41 lakh. Hero specifies all three variants’ prices as introductory. The current base variant costs Rs 1.35 lakh and the Combat Edition Rs 1.38 lakh; though we can’t compare the two base variants directly, the Combat edition has effectively become cheaper by Rs 1,000, with an updated design. The Haryana-based manufacturer says bookings are open today across all its showrooms in India and deliveries will begin from November, in time for the festive season.

All prices mentioned are ex-showroom.

शेयर बाजार में हेरफेर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, 6 शहरों में 29 ठिकानों पर की छापेमारी

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय (ED) के मुंबई जोनल ऑफिस-I ने शेयर बाजार में कथित हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED ने 16 अक्टूबर 2026 को महाराष्ट्र, गुजरात समेत 6 शहरों में 29 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई मुंबई, नासिक, अहमदाबाद, गांधीनगर, सूरत और भावनगर में की गई।

ED के इस जांच का संबंध लिस्टेड कंपनियों M/s R M Drip and Sprinklers Systems Ltd और M/s R&B Denims Ltd के शेयरों में कथित हेरफेर से है। ED ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की है।

शेयरों के आवंटन से लेकर कीमत बढ़ाने तक की जांच

प्रवर्तन निदेशालय की जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच दोनों कंपनियों ने चुनिंदा व्यक्तियों और संस्थाओं को 3.5 करोड़ से अधिक शेयर और कन्वर्टिबल वारंट जारी किए। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन शेयरों के भुगतान में बड़ी रकम कुछ सीमित और आपस में जुड़े लोगों, कंपनियों और कर्जदाताओं के समूह से आई थी। इसके साथ ही आरोप है कि इसके बाद आने वाले महीनों में दोनों कंपनियों के शेयरों की कीमत लगातार बढ़ाई गई, जबकि अधिकांश शेयर उन्हीं लोगों के पास बने रहे।

‘Multibagger Stocks’ जैसे व्हाट्सऐप ग्रुप से निवेशकों को लुभाया

ED की जांच में यह भी सामने आया कि दिसंबर 2025 के अंत से फरवरी 2026 के बीच ‘Multibagger Stocks’ जैसे नामों वाले व्हाट्सऐप कम्युनिटी ग्रुप के जरिए इन दोनों शेयरों को खरीदने के लिए रोजाना टिप्स भेजे जा रहे थे। जांच एजेंसी के अनुसार, इन ग्रुपों के जरिए छोटे और खुदरा निवेशकों को शेयर खरीदने के लिए आकर्षित किया गया। इन ग्रुपों को चलाने के लिए हरियाणा और मुंबई में दूसरे लोगों के नाम पर लिए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल किया गया, जबकि इनका संचालन गुजरात के भावनगर से किया जा रहा था।

ED के मुताबिक, इन संदेशों के बाद दोनों शेयरों में खरीदारों की संख्या करीब 3,400 से बढ़कर एक लाख से अधिक हो गई।

व्हाट्सऐप ग्रुप डिलीट होते ही शेयरों में भारी गिरावट

जांच के अनुसार, 25 फरवरी 2026 को इन व्हाट्सऐप ग्रुपों को अचानक डिलीट कर दिया गया। इसके बाद दोनों कंपनियों के शेयर लोअर सर्किट पर आ गए और कुछ ही दिनों में उनकी कीमत करीब 70 प्रतिशत तक गिर गई। इस घटनाक्रम के कारण एक लाख से अधिक छोटे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ। कई निवेशक ऐसे शेयरों के साथ फंस गए, जिन्हें वे गिरती कीमतों के बीच बेच नहीं पा रहे थे।

कंपनियों के दफ्तर, प्रमोटरों के घर और ब्रोकिंग फर्मों पर छापे

ED ने जिन ठिकानों की तलाशी ली, उनमें दोनों कंपनियों के कार्यालय, उनके प्रमोटरों के आवास, कम कीमत पर शेयर पाने वाले लोगों के ठिकाने, स्टॉक-ब्रोकिंग और फाइनेंस कंपनियों के कार्यालय तथा कथित तौर पर प्रचार के लिए इस्तेमाल किए गए व्हाट्सऐप ग्रुपों के संचालन से जुड़े लोगों के परिसर शामिल हैं। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस, शेयर लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और संपत्तियों के दस्तावेज बरामद कर जब्त किए हैं।

ED मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और शेयर बाजार में कथित हेरफेर से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। मामले में आगे की जांच जारी है।

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PM मोदी 11 दिसंबर को कनाडा जाएंगे:ट्रेड डील पर बातचीत होगी; ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11-12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर जाएंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। भारत-कनाडा व्यापार समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी है। भारत और कनाडा 2030 तक आपसी कारोबार को बढ़ाकर सालाना 7 लाख करोड़ रुपए करना चाहते हैं। अभी दोनों देशों के बीच करीब 3 लाख करोड़ रूपए का व्यापार होता है। पीएम मोदी का दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिती है। ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा है। PM मोदी ने पीएम कार्नी से फोन पर बात की प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई। मोदी ने इसे अच्छी बातचीत बताया। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेता चाहते हैं कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द पूरी हो। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर भी चर्चा हुई। कार्नी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिशों के लिए मोदी की तारीफ भी की। 2023 में निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते बिगड़े थे भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए। लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं। पिछले साल नवंबर में भारत दौरे के दौरान कार्नी ने भारत को भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बताया था। दिसंबर में पीएम का 3 देशों के दौरे का कार्यक्रम रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी दिसंबर में कनाडा के अलावा अमेरिका और बेल्जियम भी जा सकते हैं। इन दौरों में व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। 11-12 दिसंबर: कनाडा – मोदी टोरंटो और ओटावा जाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत होगी। 13-15 दिसंबर: अमेरिका – फ्लोरिडा में G20 समिट में शामिल होने का कार्यक्रम है। 16-17 दिसंबर: बेल्जियम – ब्रसेल्स में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा हो सकती है। कनाडा दौरे की तारीख की पुष्टि हो चुकी है। अमेरिका और बेल्जियम के कार्यक्रमों की तारीखों की आधिकारिक घोषणा होना बाकि है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं,10 दिन में फैसला: ट्रम्प तय करेंगे रूसी तेल खरीदने वाले किन देशों पर प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे।

PM मोदी 11 दिसंबर को कनाडा जाएंगे:ट्रेड डील पर बातचीत होगी; ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 से 12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर रहेंगें। इस दौरान दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर बातचीत होगी। भारत-कनाडा व्यापार समझौते (CEPA) पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी है। इसके तहत दो देश व्यापार, निवेश और कारोबार बढ़ाने के लिए नियम तय करते हैं। भारत और कनाडा 2030 तक आपसी कारोबार को बढ़ाकर सालाना 7 लाख करोड़ रुपए करना चाहते हैं। अभी दोनों देशों के बीच करीब 3 लाख करोड़ रूपए का व्यापार होता है। PM मोदी का दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब कनाडा और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर की स्थिती है। ट्रम्प के टैरिफ दबाव के बीच कनाडा नए बाजार तलाश रहा है। PM मोदी ने मार्क कार्नी से फोन पर बात की थी प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच 13 अक्टूबर को फोन पर बातचीत हुई। मोदी ने इसे अच्छी बातचीत बताया। दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर सहमति जताई। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, दोनों नेता चाहते हैं कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जल्द पूरी हो। बातचीत में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के हालात पर भी चर्चा हुई। कार्नी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिशों के लिए मोदी की तारीफ भी की। 2023 में निज्जर की हत्या के बाद रिश्ते बिगड़े थे भारत और कनाडा के रिश्तों में 2023 में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए। लेकिन मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हुई हैं। पिछले साल नवंबर में भारत दौरे के दौरान कार्नी ने भारत को भरोसेमंद व्यापारिक साझेदार बताया था। PM मोदी का 11 साल बाद द्विपक्षीय दौरा जून 2025 – PM मोदी का यह द्विपक्षीय दौरा नहीं था। वे G7 समिट में शामिल होने गए थे। हालांकि बैठक के इतर उन्होंने PM कार्नी से मुलाकात की थी। अप्रैल 2015 – PM मोदी कनाडा के द्विपक्षीय दौरे पर गए थे। उस समय कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर थे। इस दौरे के बाद भारत ने कनाडा से यूरेनियम खरीदने का समझौता भी किया था। दिसंबर में PM का 3 देशों के दौरे का कार्यक्रम रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी दिसंबर में कनाडा के अलावा अमेरिका और बेल्जियम भी जा सकते हैं। इन दौरों में व्यापार और दूसरे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। 11-12 दिसंबर: कनाडा – मोदी टोरंटो और ओटावा जाएंगे। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत होगी। 13-15 दिसंबर: अमेरिका – फ्लोरिडा में G20 समिट में शामिल होने का कार्यक्रम है। 16-17 दिसंबर: बेल्जियम – ब्रसेल्स में भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर चर्चा हो सकती है। अमेरिका और बेल्जियम के कार्यक्रमों की तारीखों की आधिकारिक घोषणा होना बाकि है। ——————– ये खबर भी पढ़ें…. भारत पर 100% टैरिफ लगेगा या नहीं,10 दिन में फैसला: ट्रम्प तय करेंगे रूसी तेल खरीदने वाले किन देशों पर प्रतिबंध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे।

Yes Bank News: यस बैंक ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तोड़ी चुप्पी, शेयर 14% क्रैश होने के बाद कही ये बात

Yes Bank News: प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक के शेयरों में गुरुवार, 15 अक्टूबर को भारी गिरावट आई। कारोबार के दौरान स्टॉक करीब 14% तक टूट गया। मामला 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का फैसला रद्द कर दिया है। इसके बाद बैंक ने कहा कि वह कोर्ट के फैसले और उसके असर की जांच कर रहा है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने भी शेयर में गिरावट को लेकर बैंक से जवाब मांगा था। इसके बाद यस बैंक ने कहा कि वह फैसले की पूरी कॉपी हासिल कर रहा है। उसे पढ़ने और उसके असर को समझने के बाद बैंक जरूरत के मुताबिक आगे जानकारी देगा।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को खारिज कर दिया। कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के 2023 के फैसले को बरकरार रखा। यस बैंक और दूसरे पक्षों की अपील भी खारिज कर दी गई।

कोर्ट के मुताबिक, बैंक के पुनर्गठन की अंतिम योजना में इन बॉन्ड को राइट ऑफ करने का साफ प्रावधान नहीं था। इसलिए बैंक के एडमिनिस्ट्रेशन को ऐसा करने का अधिकार नहीं था।

AT-1 बॉन्ड क्या होते हैं?

AT-1 बॉन्ड बैंकों के लिए पूंजी जुटाने का एक तरीका हैं। बैंक इनसे निवेशकों से पैसा जुटाते हैं और बदले में ब्याज देते हैं। लेकिन इनमें जोखिम भी ज्यादा होता है। बैंक की वित्तीय हालत बहुत खराब होने पर नियमों और शर्तों के तहत इन बॉन्ड की रकम घटाई या पूरी तरह खत्म की जा सकती है।

यस बैंक ने दिसंबर 2016 में 3,000 करोड़ रुपये के AT-1 बॉन्ड जारी किए थे। इसके बाद अक्टूबर 2017 में 5,415 करोड़ रुपये के और बॉन्ड जारी किए गए। इस तरह कुल रकम 8,415 करोड़ रुपये थी।

2020 में क्या हुआ था?

मार्च 2020 में यस बैंक गंभीर वित्तीय संकट में फंस गया था। उस समय केंद्र सरकार ने बैंक पर करीब एक महीने के लिए मोरेटोरियम लगाया था। यानी बैंक से पैसे निकालने पर कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाई गई थीं। इसके बाद बैंक के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई।

इसी दौरान नियुक्त एडमिनिस्ट्रेशन ने AT-1 बॉन्ड को राइट ऑफ कर दिया। इसका मतलब था कि बॉन्डधारकों की निवेश रकम खत्म कर दी गई। बॉन्डधारकों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी।

बॉन्डधारक कोर्ट क्यों पहुंचे?

मई 2020 में Axis Trustee Services ने बॉन्डधारकों की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। इसमें बॉन्ड राइट ऑफ करने के फैसले को चुनौती दी गई। वहां बॉन्डधारकों के पक्ष में फैसला आया। मार्च 2023 में यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यस बैंक इसके कानूनी और वित्तीय असर की समीक्षा कर रहा है। बैंक ने कहा है कि फैसले के अलावा उसके पास ऐसी कोई दूसरी जानकारी नहीं है, जिसका खुलासा करना जरूरी हो।

यस बैंक का स्टॉक 14% क्रैश

यस बैंक का शेयर 14.53% गिरकर 18.12 रुपये पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 20% के लोअर सर्किट के साथ 16.96 रुपये तक फिसला था। हालांकि, बाद में थोड़ी रिकवरी हुई।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Video: तीन साल तक ₹10 के सिक्के बचाए, फिर उन्हीं से खरीद ली 1.23 लाख की Honda Activa, 2 घंटे तक गिनते रहे शोरूम वाले!

Honda Activa News: कहते हैं कि बूंद-बूंद से घड़ा भरता है और छोटी-छोटी बचत से बड़े से बड़े सपने पूरे हो जाते हैं। तेलंगाना के मंचेरियल जिले के एक शख्स ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। उन्होंने तीन साल तक ₹10 के सिक्के जमा किए और जब पर्याप्त रकम इकट्ठा हो गई, तो उन्हीं सिक्कों से 1 लाख 23 हजार रुपये की होंडा एक्टिवा (Honda Activa) स्कूटर खरीद ली। उनकी इस अनोखी कहानी ने शोरूम के कर्मचारियों से लेकर स्थानीय लोगों तक का ध्यान खींचा है। लक्षेट्टीपेट निवासी बी. रवि जोसेफ ने बताया कि उन्होंने परिवार के लिए कोई उपयोगी चीज खरीदने के उद्देश्य से रोजमर्रा के लेनदेन, जैसे किराने का सामान खरीदने के दौरान मिले 10 रुपये के सिक्कों को सावधानीपूर्वक बचाकर रखा।

परिवार को पहले था शक, लेकिन बाद में किया सपोर्ट

पीटीआई के मुताबिक, जोसेफ ने कहा कि शुरुआत में परिवार के सदस्यों को उनके इस विचार पर शक हुआ था। लेकिन बाद में उन्होंने उनका साथ दिया। रवि ने बताया कि उनकी पुरानी बाइक खराब होने लगा था, जिसके बाद उन्होंने नया स्कूटर खरीदने का फैसला किया। शोरूम के मैनेजर ने बताया कि रवि जोसेफ करीब 15 दिन पहले यह पता करने आए थे कि क्या शोरूम स्कूटर के पेमेंट के लिए सिक्के स्वीकार करेगा। मैनेजर के अनुसार, शोरूम ने सिक्के स्वीकार करने पर सहमति जताई। मैनेजर ने बताया कि इसके बाद रवि जोसेफ एक लाख 23 हजार रुपये के 10 रुपये के सिक्के लेकर शोरूम पहुंचे और स्कूटर खरीदा।

रोजमर्रा के खर्च से बचाए पैसे

रवि जोसेफ पेशे से चर्च के पादरी हैं। रवि ने रोजमर्रा के खर्चों में से थोड़े-थोड़े पैसे बचाकर यह रकम जुटाई। पोर्ट के मुताबिक, उन्होंने 10 अक्टूबर 2023 से ₹10 के सिक्के जमा करना शुरू किया था। किराने का सामान खरीदने और रोजमर्रा के लेन-देन के दौरान मिलने वाले सिक्कों को वह अलग रख देते थे। इस तरह तीन साल तक लगातार बचत करते हुए उन्होंने करीब ₹1.23 लाख जमा कर लिए।

पुराना वाहन खराब हुआ तो लिया नया स्कूटर खरीदने का फैसला

रवि जोसेफ का पुराना वाहन बार-बार खराब होने लगा था। ऐसे में उन्होंने नया दोपहिया वाहन खरीदने का फैसला किया। उनका सपना पहले रॉयल एनफील्ड बुलेट खरीदने का था। लेकिन आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें अपना यह इरादा छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपनी जमा की गई रकम से परिवार के लिए एक नया स्कूटर खरीदने का फैसला किया। जिस पैसे को उन्होंने लंबे समय तक धीरे-धीरे जमा किया था, वही आखिरकार उनके काम आया।

परिवार ने भी जताई थी चिंता

रवि जोसेफ के लिए तीन साल तक सिक्के जमा करना आसान नहीं था। इस दौरान उनके परिवार के लोगों ने भी चिंता जताई। ₹10 के सिक्कों को लेकर बाजार में इनके बंद होने या कानूनी मान्यता खत्म होने जैसी अफवाहों की चर्चा से परिवार को लगा कि कहीं उनकी मेहनत बेकार न चली जाए। परिवार ने उन्हें सिक्के जमा करना बंद करने की सलाह भी दी। लेकिन रवि जोसेफ ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा और लगातार बचत करते रहे।

दो घंटे तक सिक्के गिनते रहे शोरूम के कर्मचारी

शख्स ने होंडा मोटर्स शोरूम में अपनी जमा रकम से स्कूटर खरीदने का फैसला किया। इसके बाद जब रवि जोसेफ अपने परिवार के साथ सिक्के लेकर शोरूम पहुंचे, तो कर्मचारियों के सामने उन्हें गिनने और रकम का मिलान करने की चुनौती थी। रिपोर्ट के अनुसार, सिक्कों को गिनने और कुल राशि की पुष्टि करने में कर्मचारियों को करीब दो घंटे लग गए। आखिरकार, सिक्कों की कुल कीमत ₹1.23 लाख निकली और रवि जोसेफ ने इन्हीं पैसों से अपनी सपनों की Honda Activa खरीद ली।

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छोटी बचत, बड़ी सीख

रवि जोसेफ की यह कहानी केवल एक स्कूटर खरीदने तक सीमित नहीं है। यह बताती है कि नियमित रूप से थोड़ी-थोड़ी रकम बचाकर भी किसी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। जहां कई लोग छोटी रकम को नजरअंदाज कर देते हैं। वहीं, रवि ने रोजमर्रा के लेन-देन से मिलने वाले ₹10 के सिक्कों को अपनी ताकत बना लिया। तीन साल की मेहनत के बाद जब वह अपने परिवार के साथ नया स्कूटर लेकर निकले, तो उनकी बचत की कहानी दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गई। रवि सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

एसआईआर के खिलाफ विपक्षी दलों की याचिका पर चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

उच्चतम न्यायालय ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरुद्ध लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के अन्य घटक दलों के नेताओं की ओर से दायर याचिका पर गुरुवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी किये।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के साथ-साथ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को नोटिस जारी किये । मुख्य न्यायाधीश ने याचिका पर सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से टिप्पणी की, ” हम याचिकाकर्ताओं में से एक से उनके आचरण के बारे में भी पूछेंगे।” गौरतलब है कि 12 अक्टूबर को श्री गांधी, कांग्रेस और विपक्षी दलों के कुछ अन्य विपक्षी नेताओं ने उच्चतम न्यायालय तक एक मार्च निकाला था और उसके वे उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करने गये थे। इससे न्यायालय परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई और हंगामा के स्थिति बन गयी थी।

याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, ममता तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के एम ए बेबी, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी. मुहम्मद बशीर शामिल हैं। विदुथलाई चिरुथाइगल काची के अध्यक्ष थोल. थिरुमावलवन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सज्जाद अहमद किचलू भी याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।

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कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया का शुरू से ही विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग ने भारतीय जनता पार्टी के दबाव में मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम काट दिये हैं। वे इसको लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे है। न्यायालय ने अल हिंद मुस्लिम इत्तेहाहुल मुसलमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने भी एसआईआर के विरुद्ध न्यायालय में अलग अलग याचिकाएं दायर की हैं।

याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर कराने के संबंध में चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 के फैसले के रिकॉर्ड को तलब किये जाने और यह तय करने का अनुरोध किया है कि इस प्रक्रिया में नियम कायदे का पालन हुआ है या नहीं । याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि इस मामले में यह न्यायिक समीक्षा भी की जाए कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के तहत आयोग की निर्णय प्रक्रिया में सामूहिक दायित्व और दस्तावेजी निर्णय लेने की व्यवस्था का अनुपालन हुआ या नहीं।

याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से नाम हटाने तथा मतदाता सूची डेटाबेस का ऑडिट करने के लिए उच्चतम न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की भी मांग की है। याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से हटाए गए नामों और उन्हें हटाने के कारणों की बूथ-वार जानकारी दिये जाने, नाम हटाने से पहले नोटिस और सुनवाई , नाम वापस जोड़ने की व्यवस्था किये जाने, चुनाव वाले राज्यों में पंजीकरण की समय-सीमा बढ़ाये जाने और जब तक यह मामला चल रहा है, तब तक पूरे देश में एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की भी मांग की है।

Pic Credit : UNI