Acevector IPO: स्नैपडील की पेरेंट का इश्यू 5 गुना भरकर बंद, 5 अक्टूबर को लिस्टिंग; क्या कह रहा है ग्रे मार्केट

ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस स्नैपडील की पेरेंट कंपनी ऐसवेक्टर का ₹420 करोड़ का IPO 29 सितंबर को बंद हो चुका है। यह 5.07 गुना भरा। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 3.42 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 8.53 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 4.83 गुना सब्सक्राइब हुआ। अब कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 5 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर महज 2.19 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ऐसे में लिस्टिंग बहुत अच्छी रहने की उम्मीद नहीं है। हालांकि ग्रे मार्केट के संकेत लिस्टिंग के दिन सच ही हो जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है।

Acevector IPO के लिए प्राइस बैंड ₹30-₹32 प्रति शेयर था। IPO में ₹287 करोड़ के 8.97 करोड़ नए शेयर जारी हुए। साथ ही ₹133 करोड़ के 4.16 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। IPO के लिए रजिस्ट्रार MUFG Intime India थी। IPO से पहले ऐसवेक्टर ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹189 करोड़ जुटाए। IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मार्केटप्लेस बिजनेस की मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन के लिए, मार्केटप्लेस बिजनेस के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

ऐसवेक्टर को कुणाल बहल और रोहित बंसल ने शुरू किया था। ऐसवेक्टर, स्नैपडील के साथ-साथ सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) प्लेटफॉर्म ‘यूनिकॉमर्स’ और कंज्यूमर ब्रांड बिल्डिंग फर्म Stellaro Brands को भी ऑपरेट करती है। यूनिकॉमर्स अगस्त 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हो चुकी है। इसका IPO ₹276.57 करोड़ का था।

Acevector IPO का अलॉटमेंट कैसे करें चेक

BSE पर

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Acevector IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में Acevector सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • Submit पर क्लिक करें।

अप्रैल-सितंबर में मेनबोर्ड सेगमेंट में आए 78 IPO, जुटाए गए रिकॉर्ड ₹94205 करोड़

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Copper News: कमोडिटी ट्रेडर्स के लिए बिग अलर्ट, कॉपर में मई के बाद की सबसे बड़ी वीकली गिरावट

Copper News: शेयर मार्केट में हाहाकार मचा हुआ ही है, कमोडिटी मार्केट में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। निफ्टी (Nifty) वीकली लेवल पर लगातार आठ हफ्ते कमजोर हुआ है और इतनी लंबी गिरावट 25 साल बाद दिखी है। अब कमोडिटी मार्केट में बात करें तो कॉपर जो धड़ाधड़ ऊपर भाग रहा था, अब मई के बाद से सबसे बड़ी वीकली गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। शुक्रवार को डॉलर में गिरावट के साथ लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसके फ्यूचर्स प्रति टन $14,300 प्रति टन से ऊपर चले गए, लेकिन फिर भी वीकली लेवल पर हफ्ते की समाप्ति पर इसमें लगभग 2% की गिरावट रहने के आसार हैं।

क्यों फीका पड़ा Copper?

एनर्जी की लागत में बढ़ोतरी और चीन के लड़खड़ाते इंडस्ट्रियल सेक्टर की वजह से मांग कम होने के डर से कॉपर को झटका लगा। एनर्जी की लागत इसलिए बढ़ रही है क्योंकि पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने तेल की सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ है, जिससे यह उबल पड़ा और कॉपर को भी इसकी आंच महसूस हुई। इसके अलावा चीन में इंडस्ट्रियल कमजोरी के आंकड़ो ने भी कॉपर पर दबाव बनाया।

अभी कितना टूटेगा भाव?

चीन में इंडस्ट्रियल एक्टिविटीज की कमजोर और कच्चे तेल में उबाल ने कॉपर को नरम किया है लेकिन सप्लाई की कमी के कारण कीमतें ऊपरी लेवल पर बनी हुई है यानी कि इसमें अधिक गिरावट की गुंजाइश नहीं दिख रही है। रिफाइंड मेटल पर अमेरिकी टैरिफ के डर से ट्रेडर्स ने लाखों टन मेटल अमेरिका भेजा है, जिससे दूसरी जगहों पर कमी का खतरा पैदा हो गया है। चिली की एक बड़ी खदान में भी हड़ताल चल रही है।

बैंक ऑफ अमेरिका कॉरपोरेशन के एनालिस्ट्स ने अपने नोट में जिक्र किया है कि जब तक पश्चिमी एशिया में युद्ध जारी रहेगा, बेस मेटल्स में बढ़ोतरी सीमित हो सकती है लेकिन एल्युमीनियम, कॉपर और निकेल की सप्लाई में कमी से कीमतों को सपोर्ट मिलना चाहिए।

अभी अमेरिका में सितंबर महीने का रोजगार डेटा आना है, जिसमें मार्केट का अनुमान है कि हायरिंग में बड़ी सुस्ती देखने को मिल सकती है। यह आंकड़ा आज शुक्रवार को आना है। इसमें सुस्ती का असर ये होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अपनी मौद्रिक नीतियों को और सख्त करने की संभावना फीकी होगी, जो कॉपर के लिए पॉजिटिव हो सकता है।

Orient Cables IPO: ग्रे मार्केट में तूफानी चाल, आईपीओ को 97 गुना बोली के बाद अब धांसू लिस्टिंग की तैयारी

Bajaj Finance Shares: ₹17500 करोड़ जुटाने का प्लान, दो रास्ते से आएगा बजाज फाइनेंस में झमाझम पैसा, लेकिन एक में है पेच

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock Market Crash: शेयर बाजार में लगातार 8 हफ्ते की गिरावट, एक्सपर्ट्स ने बताया अब क्या करें निवेशक

Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट रही। 25 साल में पहली बार बाजार इतनी लंबी गिरावट की लकीर में है। इस हफ्ते चारों कारोबारी सत्रों में बाजार गिरा और Nifty के 50 में से 45 शेयर नुकसान में रहे। BSE में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब ₹20 लाख करोड़ घट गया।

ऐसे माहौल में बाजार एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को अलग-अलग रणनीति बताई है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी पूरे बाजार में निवेश करने के बजाय चुनिंदा शेयरों और सेक्टर पर फोकस करना बेहतर हो सकता है।

बॉटम-अप स्ट्रैटेजी पर फोकस

Marcellus Investment Managers के को-फाउंडर प्रमोद गुब्बी का कहना है कि मौजूदा बाजार बॉटम-अप स्टॉक पिकिंग के लिए ज्यादा बेहतर है। यानी पूरे बाजार की चाल का अनुमान लगाने के बजाय मजबूत कंपनियों और बेहतर संभावनाओं वाले शेयरों को चुनने पर फोकस करना चाहिए।

उन्होंने निवेशकों को एसेट एलोकेशन पर भी ध्यान देने की सलाह दी। गुब्बी के मुताबिक इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और कमोडिटी में पैसा बांटना पोर्टफोलियो का जोखिम कम कर सकता है। हालांकि, इसका अनुपात निवेशक के लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता के हिसाब से तय होना चाहिए।

बाजार में राहत की उम्मीद

JM Financial Services के डायरेक्टर और हेड ऑफ टेक्निकल, डेरिवेटिव्स राहुल शर्मा के मुताबिक बाजार कई संकेतकों पर ओवरसोल्ड जोन में पहुंच चुका है। RSI, India VIX और FII के लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो जैसे संकेतक दबाव दिखा रहे हैं।

शर्मा ने Nifty में 22,000-22,182 के स्तर को अहम बताया है। उनके मुताबिक यहां से राहत की तेजी आ सकती है। ऐसी स्थिति में Nifty में 500-800 अंकों की उछाल भी देखने को मिल सकती है।

घबराहट में बन सकता है बॉटम

DRChoksey Finserv के देवेन चोकसी कहना है कि बाजार में इस समय कैपिटुलेशन जैसी स्थिति है। मतलब कि बहुत से निवेशक घबराकर बिकवाली कर रहे हैं। इसी के चलते कुछ मजबूत शेयर भी दबाव में आ गए हैं।

उनका मानना है कि इससे बाजार में पैनिक बॉटम बन सकता है। ऐसे में उन कंपनियों में मौके बन सकते हैं, जिनके कारोबार और फंडामेंटल पर बिकवाली का असर नहीं पड़ा है। चोकसी की नजर Nifty में 21,800 के नीचे और 22,800-23,200 के ऊपर के स्तर पर है।

कंज्यूमर और फाइनेंशियल सेक्टर पर नजर

IKIGAI Asset Manager के फाउंडर और CIO पंकज तिबरेवाल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, होम इम्प्रूवमेंट और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी कंपनियों पर नजर रख रहे हैं। उनके मुताबिक लंबे समय बाद B2C कंपनियां आकर्षक दिख रही हैं।

तिबरेवाल के मुताबिक फाइनेंशियल सेक्टर भी अब बेहतर दिख रहा है। खासकर प्राइवेट सेक्टर बैंकों में अर्निंग्स ग्रोथ शुरू होने के संकेत हैं। इसके अलावा मेटल, माइनिंग और एग्रो कमोडिटीज में भी उन्हें मजबूत साइकिल की उम्मीद है।

क्या धीरे-धीरे निवेश बढ़ाना चाहिए?

Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक बाजार में हालिया बिकवाली की बड़ी वजह ग्लोबल फैक्टर हैं। बॉन्ड यील्ड कई साल के ऊंचे स्तर पर है। कच्चा तेल भी महंगा बना हुआ है। इससे वित्त वर्ष 2026-27 की आर्थिक ग्रोथ को लेकर चिंता बढ़ी है।

नायर का कहना है कि अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और इन चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबी अवधि के निवेशक बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ा सकते हैं। वहीं, छोटी अवधि के निवेशक फिलहाल इंतजार कर सकते हैं।

Stock Market Crash: निफ्टी में 25 साल की सबसे लंबी गिरावट, ये 7 बड़े कारण क्रैश के जिम्मेदार

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

खत्म हुआ मार्केट में गिरावट का दौर! इस कारण मैक्वेरी को है भरोसा, लगाया इन सेक्टर पर दांव

Market Outlook: मैक्वेरी कैपिटल के एमडी और भारत में इक्विटी हेड संदीप भाटिया का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल अपनी रेंज के निचले स्तर पर हैं। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि मार्केट को झटका देने वाली जितनी भी खबरें हैं, और जो भी दबाव है, उसका खराब दौर अब निश्चित रूप से पीछे छूट चुका है। संदीप के मुताबिक कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी टैरिफ का रिस्क बना हुआ है तो भारत और अमेरिका में ब्याज दरें अभी भी मार्केट के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। इसके अलावा भारत को अभी तक हार्डवेयर और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े थीम में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी का पूरा फायदा नहीं मिला है। इन चिंताओं के बावजूद उनका मानना है कि भारतीय कंपनियों के सितंबर 2026 तिमाही के रिजल्ट उम्मीद से बेहतर रह सकते हैं।

बैंकिंग सेक्टर

किस सेक्टर के कंपनियों के कारोबारी नतीजे धमाकेदार रह सकते हैं, इसे लेकर संदीप ने कोई अनुमान तो नहीं बताया लेकिन यह जरूर कहा कि बैंकिंग सेक्टर में आउटलुक सुधर रहा है। बैंकिंग सेक्टर उन सेक्टर्स में शुमार है, जिनमें सबसे अधिक दबाव दिखा है लेकिन अब संदीप को उम्मीद है कि अगले दो साल में बैंकों के मार्जिन में सुधार होगा और उनके शेयरों की वैल्यूएशन फिर से बढ़ सकती है, हालांकि नियर टर्म में कमाई पर कुछ दबाव रह सकता है। उनका कहना है कि साल 2027 और साल 2028 में यानी अगले दो वर्षों में बैंकों की कमाई अच्छी रहेगी।

फाइनेंशियल सेक्टर

संदीप भाटिया को फाइनेंशियल सेविंग्स में बड़ा मौका दिख रहा है। उनका अनुमान है कि देश की वित्तीय बचत $50 हजार करोड़ से अधिक है, जोकि और बढ़ सकता है। संदीप का मानना है कि एमसीएक्स, बीएसई और एनएसई को इस रुझान से फायदा हो सकता है।

कंज्यूमर और ऑटो सेक्टर

संदीप भाटिया को उम्मीद है कि कंज्यूमर-ड्यूरेबल कंजम्प्शन से अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने हुंडई इंडिया, मारुति सुजुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी ऑटो कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि फेस्टिवल सीजन के दौरान गाड़ियों की बिक्री जबरदस्त रही है।

पावर और एनर्जी सेक्टर

संदीप भाटिया की पावर और एनर्जी स्पेस में दिलचस्पी बनी हुई है। रिन्यूएबल एनर्जी स्पेस में उन्हें क्लीन मैक्स एंवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस तो पावर इक्विपमेंट और ट्रांसमिशन कंपनियों में हिताची एनर्जी इंडिया पसंद है। उनका कहना है कि यह मौका सिर्फ एआई से जुड़ी बिजली की मांग की वजह से नहीं बन रहा है, बल्कि देश में मजबूत इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ से भी इसे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आईटी सेक्टर

वैल्यूएशन आकर्षक होने के बावजूद संदीप आईटी सेक्टर को लेकर सतर्क हैं और अभी इस सेक्टर में निवेश करने से बच रहे हैं। संदीप का मानना है कि जब तक एआई के असर को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं आती, तब तक दबाव बना रहेगा।

इंश्योरेंस सेक्टर

संदीप भाटिया का कहना है कि इंश्योरेंस सेक्टर के लिए नियमों में बदलाव बड़ी चिंता बनी हुई है। फिलहाल वह पॉलिसीबाजार की पीबी फिनटेक को लेकर सतर्क हैं और इस सेक्टर पर कोई फैसला लेने से पहले बीमा नियामक IRDA की ड्राफ्ट सिफारिशों के फाइनल होने का इंतजार करना चाहते हैं।

GST Collection लगातार तीसरे महीने ₹2 लाख करोड़ के पार, रिफंड में आई गिरावट

MTNL Share Price: 17% चढ़ा शेयर, ₹891 करोड़ में बेची मुंबई की प्रॉपर्टी तो मना जश्न

Darjeeling में पहले होटल का जश्न, 7% उछल पड़ा इस होटल कंपनी का शेयर

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

इस प्राइवेट बैंक के शेयर में आ सकती है तूफानी तेजी, एनालिस्ट ने बताया टॉप पिक

एलारा सिक्योरिटीज ने आईसीआआईसीआई बैंक को अपनी टॉप पिक बताया है। यह देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक है। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 1 अक्तूबर को 2 बजे 0.64 फीसदी गिरकर 1,313.30 रुपये पर चल रहा था। बैंक निफ्टी पर भी दबाव दिखा। यह 0.64 फीसदी नीचे था।

करेक्शन के बाद वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर

Elara Securities का मानना है कि हालिया गिरावट के बाद ICICI Bank की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई है। ब्रोकरेज फर्म के हेड ऑफ रिसर्च बिनो पतिपरामपिल ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में अभी कम रिस्क के साथ स्ट्रॉन्ग ग्रोथ की संभावना दिख रही है। उन्होंने कहा कि अगर अभी निवेश के लिए किसी सेक्टर का चुनाव करना हो तो बैंक सेक्टर को चुना जा सकता है।

प्राइवेट बैंकों के शेयरों में आ सकती है बड़ी तेजी

उन्होंने कहा, “आईसीआईसीआई बैंक टॉप चॉइस बना हुआ है।” अच्छी क्रेडिट ग्रोथ, क्रेडिट की स्ट्रॉन्ग डिमांड और बेहतर एसेट क्वालिटी के बावजूद बीते एक साल में प्राइवेट बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन सरकारी बैंकों के मुकाबले कमजोर रहा है। बीते एक साल में निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 4.72 फीसदी चढ़ा है, जबकि निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.98 फीसदी चढ़ा है।

पीएसयू बैंकों के मुकाबले प्राइवेट बैंक शेयरों का प्रदर्शन कमजोर

मार्केट में रिकवरी शुरू होने पर प्राइवेट बैंकों के शेयरों में अच्छी तेजी दिख सकती है। आईसीआईसीआई बैंक सहित कई बड़े प्राइवेट बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन बीते एक साल में कमजोर रहा है। इस दौरान आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 4.34 फीसदी गिरा है। एचडीएफसी बैंक का शेयर बीते एक साल में करीब 26 फीसदी टूटा है।

जून तिमाही में ICICI Bank का अच्छा प्रदर्शन 

जून तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक का प्रदर्शन अच्छा रहा। इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट 14800 करोड़ रुपये रहा। यह एनालिस्ट्स की उम्मीद से ज्यादा था। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 12.7 फीसदी गिरकर 24300 करोड़ रुपये रही। घरेलू लोन की ग्रोथ 19 फीसदी से ज्यादा रही। नेट इंटरेस्ट मार्जिन भी बढ़कर 4.36 फीसदी रहा। बैड लोन के लिए बैंक की प्रोविजनिंग में काफी कमी देखने को मिली।

बाजार में 1 अक्टूबर को भी बड़ी गिरावट 

1 अक्तूबर को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखा। निफ्टी 1.71 फीसदी यानी 385 अंक गिरकर 22,232 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.58 फीसदी यानी 1137 अंक गिरकर 71,334 पर चल रहा था। बैंक शेयरों पर भी दबाव दिखा। भारतीय शेयर बाजार का सेंटिमेंट काफी कमजोर है। बाजार के प्रमुख सूचकांक अहम सपोर्ट लेवल को तोड़ चुके हैं।

PB Fintech Share Price: पॉलिसीबाजार की पेरेंट का शेयर लगातार 6ठे दिन गिरा, ​​7% तक टूटकर 52 वीक के नए लो पर

Policybazaar प्लेटफॉर्म की पेरेंट कंपनी PB Fintech के शेयरों में गुरुवार को लगातार छठे दिन गिरावट है। बीएसई पर शेयर पिछले बंद भाव से 7 प्रतिशत तक टूटकर 988.30 रुपये के लो तक गया। यह शेयर का 52 सप्ताह का नया निचला स्तर है। कंपनी का मार्केट कैप घटकर 46200 करोड़ रुपये पर आ गया है। पीबी फिनटेक के शेयर में 24 सितंबर से लगातार गिरावट आ रही है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर नया ड्राफ्ट आने के बाद शेयर में जबरदस्त बिकवाली का सिलसिला शुरू हुआ और अभी तक जारी है। माना जा रहा है कि कमीशन को लेकर ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित कटौती से PB Fintech को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन टेक-रेट पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकल पाएगी।

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने कुछ स्ट्रक्चरल सुधारों का प्रस्ताव दिया है। इनका मकसद इंश्योरेंस की लागत कम करना, उन लोगों तक कवरेज पहुंचाना जिन्हें अभी तक यह सुविधा नहीं मिली है, और इस सेक्टर को टिकाऊ विकास की राह पर वापस लाना है। एक दिन पहले सामने आया था कि ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पीबी फिनटेक के शेयर के लिए टारगेट प्राइस 2310 रुपये से घटाकर 1085 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। लेकिन आउटपरफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है।

IRDAI का ड्राफ्ट आने के बाद बर्नस्टीन ने अपने नोट में लिखा कि कमीशन में प्रस्तावित कटौती बहुत बुरी है और ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित ‘टेक रेट’ से PB Fintech का यूनिट-इकोनॉमिक्स बिगड़ जाएगा। कम जनरल इंश्योरेंस टेक रेट पीबी फिनटेक की मौजूदा लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। IRDAI के ड्राफ्ट पेपर में कोटेशन (Rates) बनाने के लिए कॉन्टैक्ट डिटेल्स इकट्ठा करने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई है। बर्नस्टीन के अनुसार, PB Fintech के लिए यह कस्टमर बनाने का एक अहम जरिया है।

PB Fintech के लिए दूसरे ब्रोकरेज की रेटिंग

पीबी फिनटेक के शेयर के लिए HSBC ने रेटिंग घटाकर होल्ड कर दी है। टारगेट प्राइस 2,100 रुपये से घटाकर 1,150 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल ने 1,150 रुपये के टारगेट के साथ न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी है। मैक्वेरी ने शेयर की रेटिंग आउटपरफॉर्म से घटाकर न्यूट्रल कर दी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर दिया है।

Tech Mahindra 11 साल बाद बांट सकती है बोनस शेयर, अंतरिम डिविडेंड का भी हो सकता है ऐलान; 15 अक्टूबर को फैसला

PB Fintech के शेयर में पिछले 5 दिनों में 43 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। शेयर अकेले 24 सितंबर को 36 प्रतिशत नीचे आया था। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 99.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

GEC-III स्कीम को मंजूरी से पावर इंफ्रा स्पेस के शेयरों पर बाजार का फोकस, जानिए इन पर क्या है ब्रोकरेज की राय

पावर इंफ्रा स्पेस में आज काफी एक्शन देखने को मिला है। कल कैबिनेट ने PM-DHARA स्कीम को मंजूरी दी है, जिसके तहत ₹1.86 लाख करोड़ का बड़ा आवंटन किया गया है। वहीं, JM FINANCIAL की रिपोर्ट से भी इंडस्ट्रियल शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। आज के सत्र में पावर ग्रिड और केबल शेयर फोकस में हैं। PM-DHARA स्कीम के तहत राज्यों में इंटर ट्रांसमिशन सिस्टम मजबूत करने पर जोर होगा। इसके तहत 135 GW रिन्यूएबल ट्रांसमिशन और 50 GWh BESS क्षमता जोड़ने का लक्ष्य है। FY33 तक PM-DHARA स्कीम लागू करने का लक्ष्य है। इंटर ट्रांसमिशन सिस्टम के लिए 1.36 करोड़ रुपए खर्च होंगे। 50 GWh BESS के लिए `50,000 करोड़ खर्च होंगे।

इंडस्ट्रियल शेयरों पर JM की रिपोर्ट

इंडस्ट्रियल शेयरों पर JM की रिपोर्ट में कहा गया है कि CG पावर ने सितंबर में मोटर्स की कीमतें 5% बढ़ाईं हैं। अगस्त 2025 से CG पावर में कुल प्राइस हाइक 18–30% रहा है। ABB इंडिया ने मोटर्स की कीमतें 20% तक बढ़ाईं हैं। अल्टरनेटर में इससे ज्यादा प्राइस हाइक हुआ है। कमिंस ने जुलाई में डीजल जेनसेट की कीमतें बढ़ाईं हैं। वेस्ट एशिया संकट के बाद कमिंस में कुल 10–12% प्राइस हाइक देखने को मिला है। FY27 से ग्रॉस मार्जिन सामान्य होने की उम्मीद है।

इंडस्ट्रियल शेयरों पर नोमुरा की राय

जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का मानना ​​है कि सरकार के ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (GEC-III) से GE वर्नोवा T&D इंडिया, हिताची एनर्जी इंडिया और CG पावर को सबसे ज्यादा फायदा होगा। ब्रोकरेज का कहना है कि इसमें काफी ज्यादा खर्च और क्षमता बढ़ाने के लक्ष्यों से ट्रांसमिशन कैपेक्स साइकल को बढ़ावा मिल सकता है। ब्रोकरेज ने इन तीनों स्टॉक्स पर ‘बाय’ रेटिंग दी है।

नोमुरा ने 30 सितंबर की एक रिपोर्ट में कहा है कि GEC-III के तहत बहुत ज्यादा खर्च,क्षमता बढ़ाने के लक्ष्य,CFA और BESS कंपोनेंट को शामिल करने से ट्रांसमिशन इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनियों और BESS सॉल्यूशन देने वाली कंपनियों के लिए डिमांड बढ़ने की संभावना बढ़ गई है।

बताते चलें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 30 सितंबर को कुल 1.9 लाख करोड़ रुपये के खर्च वाली GEC-III योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का मकसद 135 GW रिन्यूएबल एनर्जी को ट्रांसमिट करना और 50 GWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाना है।

इस पर होने वाले कुल खर्च में से 1.4 लाख करोड़ रुपये राज्य के भीतर ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) के लिए दिए जाएंगे,जबकि 0.5 लाख करोड़ रुपये BESS के लिए इस्तेमाल होंगे। इस स्कीम को 541 अरब रुपये की केंद्रीय आर्थिक मदद मिलेगी, जो कुल खर्च का 29% है। इसे FY33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

नोमुरा का कहना है कि GEC-III, खर्च के मामले में पिछले चरणों की तुलना में एक बड़ी बढ़ोतरी है और उम्मीद है कि ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों को जोड़ने का काम काफी ज्यादा होगा।

एलारा सिक्योरिटीज की राय

एलारा सिक्योरिटीज के रेलवे एनालिस्ट हर्षित कपाड़िया का कहना है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹1.86 लाख करोड़ की ‘पीएम डेवलपिंग हार्मनी एंड एक्सेलेरेटिंग रिन्यूएबल एनर्जी एक्सेस’ (DHARA) योजना को मंज़ूरी मिलने से ट्रांसमिशन उपकरण बनाने वाली कंपनियों, केबल बनाने वाली कंपनियों और इससे जुड़ी अन्य कंपनियों के लिए कई वर्षों तक विकास के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

उन्होंने आगे कहा कि इस स्कीम से ट्रांसमिशन सेक्टर की उन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को ज्यादा फायदा होगा जो बड़े सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स के लिए हाई-वोल्टेज प्रोडक्ट्स सप्लाई करते हैं। इसमें हिताची एनर्जी, सीमेंस एनर्जी, सीजी पावर, पॉलीकैब, केईआई इंडस्ट्रीज और अपार इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां शामिल हैं।

 

 

Kotak Mahindra Bank share price : नए MD और CEO की नियुक्ति ने भरा जोश, 4% से ज्यादा भागा शेयर

RBI Policy Big Update: जल्द महंगी होगी आपकी EMI? ब्रोकरेज फर्म्स का दावा- अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ा सकता है रिजर्व बैंक

RBI Policy Repo Rate Hike: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, जिद्दी खुदरा महंगाई और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के सामने एक जटिल आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है। वित्तीय बाजारों में अगले एक साल के भीतर ब्याज दरों में 125 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.25% तक की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज फर्मों और ग्लोबल इकोनॉमिक डेस्क के बीच इस बात को लेकर तीखे मतभेद हैं कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें कितनी तेजी से और किस हद तक बढ़ाएगा।

आक्रामक रुख: बैंक ऑफ अमेरिका, एचएसबीसी और मॉर्गन स्टेनली

दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स BofA, HSBC और Morgan Stanley का मानना है कि आरबीआई को महंगाई और लिक्विडिटी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए जल्द से जल्द ब्याज दरें बढ़ानी होंगी।

बैंक ऑफ अमेरिका (BofA): BofA ने अपनी पिछली समयसीमा को पहले खिसकाते हुए अनुमान जताया है कि आरबीआई अक्टूबर में ही रेपो रेट बढ़ाना शुरू कर सकता है। BofA का मानना है कि इस पूरे चक्र में कुल 100 bps (1%) की बढ़ोतरी होगी और टर्मिनल रेपो रेट बढ़कर 6.25% तक पहुंच जाएगा।

मॉर्गन स्टेनली: मॉर्गन स्टेनली को भी अक्टूबर में 25 bps की बढ़ोतरी की उम्मीद है। उसका अनुमान है कि अप्रैल 2027 तक रेपो रेट बढ़कर 6.25% के स्तर पर आ जाएगा ताकि बाहरी आर्थिक स्थिरता बनी रहे।

एचएसबीसी का लिक्विडिटी पर जोर: एचएसबीसी ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी पर गंभीर चिंता जताई है। FCNR(B) डिपॉजिट जैसे स्पेशल विंडोज के जरिए भारी विदेशी मुद्रा प्रवाह से बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹15 लाख करोड़ का लिक्विडिटी सरप्लस जमा हो गया है। एचएसबीसी का कहना है कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई को रेपो रेट बढ़ाने के साथ-साथ इस बहु-ट्रिलियन रुपये के सरप्लस को सिस्टम से बाहर निकालना होगा।

एक्सिस बैंक और एचएसबीसी का विश्लेषण: आरबीआई पहले से ही वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR), ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) सेल्स और फॉरेक्स इंटरवेंशन का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इतनी बड़ी नकदी को बिना संभाले छोड़ने से महंगाई भड़कने का खतरा बना रहेगा।

नोमुरा का सीमित बढ़ोतरी का अनुमान

दूसरी ओर, जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा बाजार में चल रही इतनी आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को खारिज करती है। नोमुरा का तर्क है कि भारत की कोर महंगाई दर ऐतिहासिक ऊंचाइयों से घटकर अब लगभग 3% के आसपास आ गई है और मजदूरी-कीमतों का कोई व्यापक दबाव नहीं दिख रहा है।

घरेलू वृद्धि की गति धीमी होने के संकेत को देखते हुए, नोमुरा का मानना है कि आरबीआई बहुत आक्रामक कदम नहीं उठाएगा। नोमुरा के अनुसार, आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 bps की दो छोटी बढ़ोतरी करके रेपो रेट को 5.75% तक ले जाएगा, जिसके बाद 2027 की शुरुआत से ही मौद्रिक सख्ती का दबाव कम होने लगेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।