Stock Market Fall: 7 वजह, Sensex लाल, Nifty आया 22500 के नीचे, IT Sector की कोशिश फेल

Stock Market Fall: ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे शेयर मार्केट को रेपो रेट में बढ़ोतरी ने और झटका दिया। इसके आसार पहले से ही थे लेकिन आरबीआई ने महंगाई के अपने आउटलुक को भी बढ़ाया तो इससे मार्केट पर दबाव बढ़ाया। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 384 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का खासा दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

अभी की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 339.85 प्वाइंट्स यानी 0.47% की गिरावट के साथ 72298.85 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 113.05 प्वाइंट्स यानी 0.50% की गिरावट के साथ 22,490.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 384.47 प्वाइंट्स गिरकर 72,254.23 और निफ्टी भी 127.30 प्वाइंट्स टूटकर 22,475.75 तक आ गया था।

Stock Market Fall: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी शुरू होने से महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। इसने पूरे एशियाई मार्केट में दबाव बना दिया, जिसकी आंच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।

कच्चे तेल में उबाल

खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने पश्चिमी एशिया से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इस चिंता के बीच ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के पार पहुंचा तो इसकी आंच में मार्केट झुलस गया।

विदेशी निवेशकों की लगातार नवें दिन बिकवाली

FIIs ने लगातार नवें कारोबारी दिन बुधवार 8 अक्टूबर को ₹6,121.37 करोड़ के नेट शेयर बेचे। इससे बाजार में दबाव बना हुआ है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स यानी F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की वीकली एक्सपायरी है, जिसका असर मार्केट पर दिख रहा है।

Repo Rate में बढ़ोतरी पर मेटल-रियल्टी सेक्टर में दबाव

आरबीआई ने रेपो रेट में लंबे समय बाद फिर से बढ़ोतरी की और इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया तो लगातार दूसरे दिन इसकी आंच ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में महसूस हुई। मेटल और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स तो 1-1% से अधिक टूट गए तो निफ्टी ऑटो आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ है। बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव है। वहीं निफ्टी आईटी में 1% से अधिक बढ़त है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है तो महंगाई के भी अनुमान को बढ़ा दिया, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ा। महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने मार्केट पर दबाव बनाया है। उनका कहना है कि जब FII का निवेश स्थिर नहीं हो जाता या US ट्रेजरी यील्ड कम नहीं हो जाती,तब तक घरेलू इक्विटी में और बिकवाली का जोखिम बना रह सकता है। पोनमुडी के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो ही यह 23,000 की तरफ रिकवरी में मदद कर सकता है। नीचे की तरफ 22,500 तत्काल सपोर्ट लेवल है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 22,400-22,200 तक जा सकता है। जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक में सावधानी बरतने की जरूरत है।

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Anant Raj: हरियाणा में विदेशी कंपनियों का डेटा होस्ट करेगी कंपनी, ऑरेंज बिजनेस के साथ बड़ा समझौता

Anant Raj: अनंत राज लिमिटेड की सब्सिडियरी अनंत राज क्लाउड सिंगापुर और ऑरेंज बिजनेस सर्विसेज सिंगापुर ने हरियाणा सरकार के साथ समझौता किया है। इसका मकसद हरियाणा में विदेशी कंपनियों का डेटा होस्ट करने की संभावनाएं तलाशना है।

यह समझौता हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के जरिए हुआ है। इसके तहत हरियाणा में मौजूद क्लाउड और डेटा सेंटर सेवाओं को विदेशी ग्राहकों तक पहुंचाने पर भी काम होगा।

विदेशी ग्राहकों को जोड़ने का काम करेगी अनंत राज

अनंत राज क्लाउड सिंगापुर, कंपनी के क्लाउड प्लेटफॉर्म अशोक क्लाउड की मार्केटिंग करेगी। इसके साथ ही हरियाणा में मौजूद डेटा सेंटर सेवाओं को भी विदेशी ग्राहकों के सामने रखा जाएगा।

कंपनी ऐसे विदेशी ग्राहकों को जोड़ने में भी मदद करेगी, जो अपना डेटा हरियाणा में रखना चाहते हैं।

AI और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग पर भी फोकस

ऑरेंज बिजनेस डेटा सेंटर और क्लाउड सेवाओं में टेक्नोलॉजी पार्टनर के तौर पर काम करने की संभावनाएं तलाशेगा।

इसमें AI और हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर भी शामिल है। ऑरेंज बिजनेस टेक्नोलॉजी आर्किटेक्चर, क्लाउड और AI हार्डवेयर और तकनीकी विशेषज्ञता दे सकता है।

हरियाणा में 307 MW क्षमता बनाने की तैयारी

अनंत राज हरियाणा में डेटा सेंटर कारोबार तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के ग्रुप की कंपनियां मानेसर, पंचकूला और राय में करीब 307 MW IT लोड की क्षमता विकसित करने की योजना बना रही हैं।

यह निवेश चरणों में किया जाएगा। हालांकि, आगे का निवेश मांग और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल कंपनी मानेसर और पंचकूला में डेटा सेंटर चला रही है। इन दोनों जगहों पर क्षमता बढ़ाने का काम भी चल रहा है। कंपनी के मुताबिक, सोनीपत के राय कैंपस में करीब 200 MW IT लोड की संभावित क्षमता है।

डेटा सेंटर के लिए 25,000 करोड़ रुपये का निवेश

अनंत राज ने जून 2026 में हरियाणा सरकार के साथ एक और MoU किया था। यह समझौता ‘मेक इन हरियाणा’ कार्यक्रम के दौरान हुआ था। इसके तहत कंपनी ने राज्य में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 25,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी।

हरियाणा सरकार ने भी डेटा सेंटर कारोबार को बढ़ावा देने के लिए डेटा सेंटर पॉलिसी 2026 शुरू की है। इसमें डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।

2024 से चल रही है ऑरेंज बिजनेस के साथ साझेदारी

अनंत राज और ऑरेंज बिजनेस के बीच यह पहला समझौता नहीं है। दोनों कंपनियों की साझेदारी 2024 में शुरू हुई थी। तब दोनों ने भारत में मैनेज्ड क्लाउड सर्विसेज के लिए साझेदारी की थी। अब नया समझौता इसी साझेदारी को आगे बढ़ाता है।

7 अक्टूबर को अनंत राज लिमिटेड का शेयर 0.43% बढ़कर 611.50 रुपये पर बंद हुआ।

Stock to Buy: इस प्राइवेट बैंक के शेयर में बंपर कमाई का मौका, ब्रोकरेज फर्मों की खरीदने की सलाह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

TCS Q2 Preview: ग्रोथ, मार्जिन और AI से हायरिंग तक… तिमाही नतीजे में इन 5 सवालों के जवाब तलाशेंगे निवेशक

TCS Q2 Preview: देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्टर कंपनी TCS 8 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेगी। इसके साथ ही IT सेक्टर के Q2 रिजल्ट सीजन की शुरुआत हो जाएगी।

इस तिमाही में TCS को 1.45 अरब डॉलर की बड़ी डील मिली है। कंपनी ने पोर्शे की IT इकाई MHP को भी खरीदा है। इसके अलावा हैदराबाद में 70,000 करोड़ रुपये के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का ऐलान किया है।

दूसरी तरफ, पैरेंट कंपनी टाटा संस में नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान चल रही है। ऐसे में TCS के नतीजों के साथ मैनेजमेंट की कमेंट्री भी काफी अहम होगी।

ब्रोकरेज को इस तिमाही में TCS की ग्रोथ बहुत तेज रहने की उम्मीद नहीं है। तिमाही आम तौर पर IT कंपनियों के लिए अच्छी रहती है। लेकिन AI की वजह से कीमतों और लागत पर दबाव बढ़ रहा है। इसका असर ग्रोथ पर पड़ सकता है। नतीजों के बाद इन पांच मुद्दों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी।

1. ग्रोथ धीमी, मार्जिन में ज्यादा बदलाव नहीं

CNBC-TV18 के पोल के मुताबिक, दूसरी तिमाही में TCS का रेवेन्यू तिमाही आधार पर 1.3% बढ़कर 73,225 करोड़ रुपये हो सकता है। कंपनी का मुनाफा 2.4% बढ़कर 13,673 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।

EBIT मार्जिन करीब 20 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 24.2% रह सकता है। पिछली तिमाही में कंपनी ने सालाना वेतन बढ़ोतरी का असर झेला था। इसलिए इस बार मार्जिन को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के मुताबिक, सालाना आधार पर मार्जिन में करीब 100 बेसिस प्वाइंट की कमी आ सकती है। हालांकि, तिमाही आधार पर इसमें ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है।

वेतन बढ़ोतरी के अलावा अधिग्रहण और प्राइसिंग का दबाव मार्जिन पर असर डाल सकता है। ऐसे में मैनेजमेंट इस पर क्या कहता है, बाजार की नजर रहेगी।

2. बड़ी डील का सिलसिला जारी रहेगा?

TCS ने इस तिमाही में कई बड़ी डील हासिल की हैं। HDFC सिक्योरिटीज और कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू यानी TCV करीब 8-11 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया है।

सबसे बड़ी डील 1.45 अरब डॉलर की है। यह जर्मन लग्जरी कार कंपनी पोर्शे के साथ हुई है। इसके अलावा ABB, JFK एयरपोर्ट, JLR, Aareal Bank, Dubai Gold & Commodity Exchange और Vodafone के साथ भी TCS ने डील की है।

अब बाजार यह देखेगा कि कंपनियों का खर्च कब बढ़ना शुरू होता है। खासकर डिस्क्रिशनरी यानी कम जरूरी खर्च में रिकवरी कब आती है। फैसले लेने में हो रही देरी और दूसरी छमाही की डिमांड पर भी मैनेजमेंट का रुख अहम होगा।

3. M&A से कितनी ग्रोथ मिलेगी?

TCS लगातार दूसरी कंपनियों को खरीदकर अपना कारोबार बढ़ा रही है। इस तिमाही में भी दो बड़े अधिग्रहण हुए हैं। TCS ने पोर्शे की IT इकाई MHP को करीब 373 मिलियन डॉलर में खरीदा है। इससे कंपनी को ऑटोमोटिव कंसल्टिंग और टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग में नई क्षमताएं मिलेंगी।

कंपनी ने बेंगलुरु में Best Buy की GCC यूनिट भी खरीदी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, TCS को Best Buy से 5 साल का करीब 2,000 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है। अब निवेशक जानना चाहेंगे कि इन अधिग्रहणों से ग्रोथ कितनी बढ़ेगी। साथ ही इनका मार्जिन पर कितना असर पड़ेगा।

4. AI से कितनी कमाई बढ़ेगी?

TCS अपने कारोबार में बड़ा AI बदलाव कर रही है। कंपनी AI से जुड़ी टेक्नोलॉजी सर्विसेज पर ज्यादा जोर दे रही है। इसके लिए कारोबार की प्राथमिकताएं भी बदली जा रही हैं। इसी रणनीति के तहत TCS ने हैदराबाद में 1GW डेटा सेंटर लगाने के लिए 70,000 करोड़ रुपये के निवेश का ऐलान किया है।

जून में कंपनी ने बताया था कि उसकी सालाना AI रेवेन्यू करीब 2.6 अरब डॉलर पहुंच गई है। इसमें तिमाही आधार पर 13.6% की ग्रोथ हुई थी। अब सवाल यह है कि इतने बड़े निवेश से TCS कमाई कैसे बढ़ाएगी। AI कारोबार आगे कितनी तेजी से बढ़ेगा, इस पर मैनेजमेंट की टिप्पणी अहम होगी।

5. दूसरी छमाही में कितनी हायरिंग होगी?

पहली तिमाही तक TCS करीब 25,000 फ्रेशर्स को ऑफर दे चुकी थी। पहले कंपनी ने संकेत दिया था कि FY27 में भी FY26 की तरह 40,000 से ज्यादा फ्रेशर्स की भर्ती हो सकती है। हालांकि, बाद में कंपनी ने कहा कि FY27 की हायरिंग आने वाली तिमाहियों की डिमांड पर निर्भर करेगी।

TCS करीब 8,900 फॉरवर्ड-डिप्लॉय्ड इंजीनियर्स यानी FDEs भी जोड़ने की योजना बना रही है। इनकी मदद से AI पर फोकस करने वाली सेल्स और कंसल्टिंग को मजबूत किया जाएगा।

अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि दूसरी छमाही में कंपनी कितनी भर्ती करती है। साथ ही AI की वजह से नौकरियों और कर्मचारियों की जरूरत में क्या बदलाव आता है, यह भी अहम रहेगा।

इन 5 स्टॉक्स पर दांव लगाने से हो सकती है मोटी कमाई, एक्सपर्ट ने बताया कब करना है निवेश

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stock to Buy: इस प्राइवेट बैंक के शेयर में बंपर कमाई का मौका, ब्रोकरेज फर्मों की खरीदने की सलाह

आप किसी ऐसे शेयर की तलाश में है जो बंपर कमाई करा सकता है तो आप कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर पर दांव लगा सकते हैं। कई ब्रोकरेज फर्मों ने इस शेयर में निवेश की सलाह दी है। 7 अक्तूबर को गिरते बाजार में भी इस शेयर में तेजी देखने को मिली। यह 1.88 फीसदी चढ़कर 440 रुपये पर बंद हुआ। बीते छह महीनों में यह शेयर 21 फीसदी से ज्यादा उछला है।

सीईओ की नियुक्ति के बाद लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता खत्म

विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने Kotak Mahindra Bank के शेयर को खरीदने की सलाह दी है। उसने इस शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 520 रुपये कर दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करेंट प्राइस से करीब 20 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि सीईओ की नियुक्ति के बाद लीडरशिप को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है।

आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने का फायदा बैंक को मिलेगा

HSBC ने कोटक महिंद्रा बैंक के FY27-29 के अर्निंग्स प्रति शेयर (EPS) के अनुमान को भी बढ़ाया है। इसकी वजह बैंक की स्ट्रॉन्ग लोन ग्रोथ और स्टेबल नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) है। आरबीआई ने 7 अक्तूबर को रेपो रेट 5.25 से बढ़ाकर 5.5 फीसदी कर दिया। एचएसबीसी का मानना है कि इसका भी फायदा कोटक महिंद्रा बैंक को मिलेगा।

कई ब्रोकरेज फर्मों की शेयर को खरीदने की सलाह

कई दूसरी ब्रोकरेज फर्मों का नजरिया भी इस शेयर को लेकर पॉजिटिव है। दूसरी तिमाही में प्रदर्शन के अपडेट के बाद गोल्डमैन सैक्स ने इस शेयर को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। उसने शेयर का टारगेट प्राइस भी बढ़ाकर 540 रुपये कर दिया है। सिटी ने भी इस शेयर को खरीदने की अपनी सलाह बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 465 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करेंट लेवल से करीब 30 फीसदी चढ़ सकता है।

साल दर साल आधार पर बैंक की एडवान्सेज की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग

Citi ने कहा है कि दूसरी तिमाही में भी कोटक महिंद्रा बैंक की बैलेंसशीट में इम्प्रूवमेंट दिखा है। एफसीएनएआर(बी) डिपॉजिट आने से बैंक की मजबूती को सपोर्ट मिला है। साल दर साल आधार पर कोर एडवान्सेज ग्रोथ 21.6 फीसदी रही है, जबकि तिमाही दर तिमाही आधार पर यह 9.5 फीसदी रही है।

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ग्रोथ की अच्छी संभावना को देखते हुए शेयर की वैल्यूएशन अट्रैक्टिव

गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि आगे कोटक महिंद्रा बैंक की अर्निंग्स और मुनाफा कमाने की क्षमता बढ़ेगी। इससे अर्निंग्स ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा, जिससे शेयर की रीरेटिंग भी हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म ने अर्निंग्स के अपने अनुमान को भी बढ़ाया है। इसकी वजह उम्मीद से ज्यादा डिपॉजिट फ्लो है। इस शेयर में FY28 की अनुमानित अर्निंग्स के 15 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि यह वैल्यूएशन अट्रैक्टिव है।

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Hotel Stocks : इस बार शादियों को सीजन में खूब बजेगी शहनाई, होटल कंपनियों की खूब बढ़ेगी कमाई, इन शेयरों पर रहे नजर

Hotel Stocks : शादियों के सीजन में होटल सेक्टर की डिमांड बढ़ सकती है। जेफरीज का कहना है कि अगले साल शादियों के शुभ मुहूर्त के ज्यादा दिन होंगे। इसको ध्यान में रखते हुए जेफरीज होटल स्पेस पर बुलिश है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि वित्त वर्ष 2028 में शादी के 95 शुभ मुहूर्त हैं। सामान्य तौर पर 65-70 के मुकाबले शुभ मुहूर्त 40% ज्यादा हैं। वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही से वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक शादी के दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। शादी की ज्यादा तारीखों से होटल डिमांड और रेवेन्यू बढ़ेगा। शादियों से कमरे के किराए, बैंक्वेट और F&B कमाई बढ़ेगी। होटल की पूरी कैपेसिटी का बेहतर इस्तेमाल होने की उम्मीद है। डिमांड का बड़ा हिस्सा घरेलू डेस्टिनेशन में हो सकता है। यह होटल सेक्टर के लिए पॉजिटिव फैक्टर है।

बजेगी शहनाई, बढ़ेगी कमाई

2026 के शुभ मुहूर्त पर नजर डालें तो 21से 26 नवंबर के बीच शादी के शुभ मुहूर्त हैं। उसके बाद 1 से 13 दिसंबर के बीच शादी के शुभ मुहूर्त हैं। जेफरीज का कहना है कि इससे होटल स्टॉक्स खास कर रॉयल ऑर्किड होटल्स, लेमन ट्री होटल्स, शैले होटल्स, द लीला और कामत होटल्स को अच्छा फायदा हो सकता है। जेफरीज का कहना है कि इस बार के शादियों के सीजन में लग्जरी शादियों की बुकिंग बढ़ेगी। Q4FY27- Q3FY28 के बीच लग्जरी शादियों की बुकिंग में तेज इजाफा देखने को मिल सकता है।

होटल कपनियों की बल्ले-बल्ले

गौरतलब है कि शादियों और सर्दियों के सीजन की शुरुआत के करीब आने के साथ ही भारतीय होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में जोरदार डिमांड देखी जा रही है। कई लोकप्रिय होटलों में शादी से जुड़े कारोबार में डबल डिजिट ग्रोथ देखने को मिली है। नवंबर से फरवरी जैसे प्रमुख महीनों के लिए अधिकांश बुकिंग लगभग पूरी हो चुकी हैं। 2027 तक एडवांस बुकिंग हो चुकी लोग अब 4 से 6 महीने पहले ही बुकिंग करा रहे हैं। कई होटलों में साल 2027 के लिए भी एडवांस बुकिंग और पूछताछ आने लगी है।

विभिन्न जगहों पर मांग पर नजर डालें तो उदयपुर, जयपुर, गोवा, गुरुग्राम, करनाल और टियर-2 शहरों में डेस्टिनेशन वेडिंग के कारण कमरों, बैंक्वेट हॉल, भोजन और पेय पदार्थों की मांग काफी बढ़ गई है। इसके चलते होटल कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ में जोरदार उछाल आया है। Hilton जैसी कंपनियों का वेडिंग रेवेन्यू पिछले साल के मुकाबले 50% से ज्यादा हो गया है। वहीं, Sayaji Hotels ने उदयपुर प्रॉपर्टी में वेडिंग रेवेन्यू में 77% की सालाना ग्रोथ हासिल की की है।

Jefferies के साथ ही होटर शेयरों पर मोतीलाल ओसवाल भी बुलिश

ऐसे में Jefferies और मोतीलाल ओसवाल जैसी ब्रोकरेज फर्म्स का मानना है कि इस वेडिंग सीजन से होटल कंपनियों की ऑक्यूपेंसी, एवरेज रूम रेट्स (ARR) और कुल आय में भारी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है की वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में होटल कंपनियों की प्रति उपलब्ध कमरे से होने वाली कमाई (RevPAR) में 10 से 12% की बढ़ोतरी हो सकती है। इसकी वजह रूम बुकिंग में बढ़ोतरी और किराए की दरों में बढ़त है। इस ग्रोथ का पहला ट्रिगर बड़े इवेंट्स हैं। दूसरा ट्रिगर है शादी-ब्याह का सीज़न। वित्त वर्ष 2028 में शादियों के लिए लगभग 95 शुभ दिन होने का अनुमान है, जबकि वित्त वर्ष 2027 में यह संख्या 69 थी। इसका मतलब है कि शुभ दिनों की संख्या में लगभग 40% की बढ़ोतरी होगी। इससे होटल और रिसॉर्ट बुकिंग बढ़ सकती है, और कंपनियां सिर्फ़ कमरों के किराए के अलावा बैंक्वेट हॉल और कैटरिंग सेवाओं से भी ज़्यादा कमाई करेंगी।

मोतीलाल ओसवाल की टॉप पिक्स

स्टॉक्स की बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ने लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels) को ₹140 के टारगेट प्राइस के साथ ‘खरीदने’ (buy) की रेटिंग दी है। इसमें लगभग 34% की बढ़ोतरी का अनुमान है। वेंटिव हॉस्पिटैलिटी (Ventive Hospitality) के लिए ₹750 का टारगेट तय किया गया है,जो मौजूदा भाव से लगभग 34% की बढ़त दिखाता है। वहीं, इंडियन होटल्स के लिए ₹870 का टारगेट दिया गया है,जो मौजूदा कीमत से लगभग 22% ज़्यादा है। ब्रोकरेज का मानना ​​है कि अच्छी बुकिंग,कमरों की कम उपलब्धता,बड़े इवेंट्स और शादी का सीज़न आगे भी इस सेक्टर की ग्रोथ को सपोर्ट देते रहेंगे।

 

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इन शेयरों पर दांव लगाने से हो सकती है जोरदार कमाई, जानिए लिस्ट में कौन-कौन स्टॉक्स शामिल

शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन अच्छी तेजी दिखी। निफ्टी 0.98 फीसदी यानी 220 अंक चढ़कर 22,776 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.95 फीसदी यानी 685 अंक के उछाल के साथ 73,067 पर क्लोज हुआ। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार करेक्शन के बाद शेयरों की वैल्यूएशंस अट्रैक्टिव लेवल पर आ गई हैं। अभी निवेश करने पर अच्छी कमाई हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने ऐसे शेयरों की लिस्ट की तैयार की है।

इस कंज्यूमर ड्यूरबेल कंपनी में कमाई का मौका

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल की लिस्ट का पहला शेयर आदित्य विजन है। यह कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनी है। आदित्य विजन का शेयर 6 अक्तूबर को 0.87 फीसदी गिरकर 595.80 रुपये पर बंद हुआ। बीते 6 महीनों में यह शेयर 29 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इस शेयर का टारगेट प्राइस 720 रुपये है। इसका मतलब है कि यह शेयर 26 फीसदी चढ़ सकता है।

इस शेयर पर दांव लगाने से 26% रिटर्न मिल सकता है

इस लिस्ट की दूसरी कंपनी कैपिलरी टेक्नोलॉजीज है। यह आईटी कंपनी है। यह शेयर 6 अक्तूबर को 7.53 फीसदी चढ़कर 587.20 रुपये पर बंद हुआ। बीते छह महीनों में यह शेयर 21 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इस शेयर का टारगेट प्राइस 700 रुपये है। इसका मतलब है कि इस शेयर पर दांव लगाने से 26 फीसदी रिटर्न मिल सकता है।

बीते छह महीनों में 53 फीसदी चढ़ा है यह शेयर 

कार्बोरंडम यूनिवर्सल इस लिस्ट का तीसरा शेयर है। यह कैपिटल गुड्स कंपनी है। यह शेयर 6 अक्तूबर को 0.15 फीसदी चढ़कर 1,269.50 रुपये पर बंद हुआ। यह शेयर बीते छह महीनों में 53 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। इसका टारगेट प्राइस 1,563 रुपये है। इसका मतलब है कि इस शेयर में 26 फीसदी तेजी आ सकती है।

इस शेयर की कीमत 45 फीसदी उछल सकती है

गोदावरी पावर एंड इस्पात के शेयरों में भी कमाई का मौका दिख रहा है। यह शेयर 6 अक्तूबर को 3.4 फीसदी चढ़कर 218.50 रुपये पर बंद हुआ। बीते छह महीनों में यह शेयर 20 फीसदी गिरा है। इस शेयर का टारगेट प्राइस 314 रुपये है। इसका मतलब है कि इस शेयर में 45 फीसदी का उछाल दिख सकता है।

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इस शेयर में आ सकती है 51 फीसदी तेजी 

ताजजीवीके होटल्स के शेयर में निवेश का मौका दिख रहा है। यह होटल एंड रिजॉर्ट कंपनी है। यह शेयर 6 अक्तूबर को 1.17 फीसदी चढ़कर 319 रुपये पर बंद हुआ। इस शेयर ने बीते छह महीनों में कोई रिटर्न नहीं दिया है। इसका टारगेट प्राइस 475 रुपये है। इसका मतलब है कि यह शेयर करेंट लेवल से 51 फीसदी चढ़ सकता है।

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RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

RBI MPC Meet October 2026: देश के करोड़ों आम नागरिकों, होम लोन ग्राहकों और शेयर बाजार की नजरें कल यानी 7 अक्टूबर को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के फैसले पर टिकी होंगी। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) कल सुबह 10 बजे अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी, जिसके बाद दोपहर में गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।

पिछले 4 लगातार बैठकों से रिजर्व बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल व कमोडिटीज की कीमतों में तेजी के कारण इस बार ब्याज दरें बढ़ाए जाने की मजबूत संभावना जताई जा रही है।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) और ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स समेत अधिकांश अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बार रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% किया जा सकता है।

इस बार की पॉलिसी पर क्या है दिग्गजों की राय?

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी की अध्यक्ष सीए किंजल शाह के मुताबिक, ‘खुदरा महंगाई बढ़ने, ऊर्जा की ऊंची लागत और वैश्विक स्तर पर मौद्रिक सख्ती के बीच रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किए जाने की व्यापक उम्मीद है। हालांकि, केवल दरों का फैसला ही पर्याप्त नहीं होगा। महंगाई की उम्मीदों को नियंत्रित रखने और घरेलू आर्थिक वृद्धि को बनाए रखते हुए कर्ज की उपलब्धता जारी रखने के लिए तरलता और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा पर आरबीआई की स्पष्ट स्थिति भी बेहद महत्वपूर्ण होगी।’

बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी के उपाध्यक्ष सीए मंदार तेलंग ने कहा कि, ‘अब समय आ गया है कि सरकार केवल प्रक्रियाओं में छोटे-मोटे बदलाव करने के बजाय GST प्रशासन से जुड़े कुछ बुनियादी और संरचनात्मक मुद्दों पर भी ध्यान दे। केवल इस वजह से इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) नहीं रोका जाना चाहिए कि सप्लायर या प्राप्तकर्ता ने रिटर्न दाखिल करते समय कोई वास्तविक क्लेरिकल, गणना संबंधी या प्रक्रियात्मक गलती कर दी हो, खासकर तब जब लेन-देन वास्तविक हो। सरकार को कई राज्यों में काम करने वाली कंपनियों के लिए वास्तविक केंद्रीकृत GST पंजीकरण और अनयूज्ड ITC को आपस में ट्रांसफर करने की सुविधा देनी चाहिए। 180 दिनों में भुगतान की शर्त और MSMEs के लिए पेमेंट बेसिस टैक्स जैसे व्यावहारिक सुधारों से अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी और कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल पर दबाव घटेगा।’

कब और कहां देखें लाइव प्रसारण?

तारीख और समय: 7 अक्टूबर 2026, सुबह 10:00 बजे (पॉलिसी ऐलान) एवं दोपहर में प्रेस कॉन्फ्रेंस।

कहां देखें: आरबीआई के आधिकारिक यूट्यूब चैनल (YouTube Channel) और hindi.moneycontrol.com पर लाइव अपडेट्स।

कम होगी EMI या बढ़ेगा FDs पर ब्याज? जानिए 7 अक्टूबर को RBI के फैसले से आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा

Silver Price Outlook: रिकॉर्ड ऊंचाई से 45% फिसली चांदी, क्या अगले साल इसमें फिर आएगी तूफानी तेजी?

Silver Price Outlook: चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 45 फीसदी गिर चुकी हैं। इस साल जनवरी के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर का प्राइस 120 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया था। अब यह गिरकर 60-61 डॉलर प्रति औंस रह गया है। भारत में एमसीएक्स में सिल्वर फ्यूचर्स 4.28 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था। अब यह गिरकर 2.39-2.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है। सवाल है कि क्या चांदी की कीमतें फिर से 2027 में नई ऊंचाई पर पहुंच जाएंगी?

इस साल जनवरी में चांदी की कीमत 121 डॉलर प्रति औंस थी

अगले साल चांदी की सप्लाई डिमांड से ज्यादा रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इस वजह से रिकॉर्ड ऊंचाई पर जाने की जगह चांदी की कीमतों में कंसॉलिडेशन दिख सकता है। चांदी की कीमतों में पिछले करीब दो साल में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 1 जनवरी, 2025 को चांदी का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 डॉलर प्रति औंस था। जनवरी 2026 में भाव 121 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

इस साल जून में 57 डॉलर प्रति औंस तक आ गई थी कीमत 

इस साल जून तक कीमत करीब 65 फीसदी गिरकर 57 डॉलर प्रति औंस पर आ गई थीं। अभी यह 60-61 डॉलर प्रति औंस पर चल रही हैं। भारत में भी इस साल जनवरी में चांदी का भाव 4,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था। अभी यह गिरकर 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा है। पिछले महीने चांदी 8 फीसदी से ज्यादा गिरी। इस साल यह करीब 14 फीसदी गिरी है।

अगले साल डिमांड  से ज्यादा रह सकती है सप्लाई

पिछले कुछ सालों में चांदी की सप्लाई उसकी डिमांड से कम थी। 2021 में चांदी की सप्लाई करीब 8 से 10 करोड़ औंस कम थी। 2025 में यह 4 करोड़ औंस रही। इस साल यह 4.6 करोड़ औंस कम रह सकती है। लेकिन, अगले साल चांदी की सप्लाई डिमांड से ज्यादा रहने की उम्मीद है। इसकी वजह चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड में कमी है।

चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड घटने के संकेत

एक तरफ चांदी की डिमांड सुस्त पड़ने के संकेत हैं तो दूसरी तरफ इसकी सप्लाई बढ़ रही है। चीन में सोलर पावर सेक्टर की चांदी की डिमांड 30 फीसदी कम रह सकती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि कॉस्ट घटाने के लिए मैन्युफैक्चरर्स अब पतले इलेक्ट्रिकल कॉन्टैक्ट्स, सिल्वर पेस्ट और कॉपर पर सिल्वर प्लेटिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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ब्रोकरेज फर्मों ने दिए कीमत के अनुमान 

जेपी मॉर्गन का मानना है कि अगले साल चांदी की कीमत 63.90 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। UBS ने चांदी की कीमतें 80 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। Citi का मानना है कि अगले साल चांदी 65-75 डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकती है। HSBC ने इसकी कीमत 68 डॉलर प्रति औंस और डोएचे बैंक ने 70 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है।

Gold Price Correction: सोने की कीमत इस साल 26% गिरी, अब खरीदारी का मौका? Tata MF ने बताई पूरी रणनीति

Gold Price Correction: भारत में त्योहारी और शादी का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में सोने की कीमतों पर निवेशकों की नजर है। 2026 के शिखर से सोने के भाव में करीब 26% की गिरावट आ चुकी है। Tata Asset Management का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का बेहतर मौका दे सकती है।

हालांकि, Tata MF ने जल्दबाजी में निवेश करने से बचने को कहा है। फंड हाउस का मानना है कि सोने में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए छोटी अवधि की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेना ठीक नहीं होगा।

2026 के शिखर से करीब 26% नीचे आया सोना

Tata MF के अक्टूबर 2026 के मार्केट आउटलुक के मुताबिक, सोना जनवरी के करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस के शिखर से गिरकर लगभग 4,138 डॉलर पर आ गया है। यानी इसमें करीब 26% की गिरावट आई है।

फंड हाउस के मुताबिक, इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत अमेरिकी डॉलर है। Tata MF का कहना है कि सोने की बुनियादी कहानी में कोई बड़ी कमजोरी नहीं आई है।

सेंट्रल बैंकों की खरीद बनी बड़ी ताकत

लंबी अवधि में सोने के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर सेंट्रल बैंकों की खरीद है। Tata MF के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 289 टन सोना खरीदा।

पूरे 2026 में यह खरीद 700 से 900 टन के बीच रह सकती है। 2022 से पहले इसका सालाना औसत करीब 400-500 टन था। यानी सेंट्रल बैंकों की सोने में दिलचस्पी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है।

Tata MF के मुताबिक, खासकर उभरते बाजारों के सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व में अमेरिकी डॉलर वाली संपत्तियों की हिस्सेदारी घटा रहे हैं। इसके लिए वे सोने को एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

चीन से भी सोने को मिल रहा सहारा

चीन भी सोने की मांग का बड़ा जरिया बना हुआ है। Tata MF के मुताबिक, 2026 में चीन का गोल्ड इंपोर्ट 1,000 टन के पार पहुंच चुका है। यह 2025 में पूरे साल हुए आयात से भी ज्यादा है।

रिटेल मांग, गोल्ड ETF में निवेश और सेंट्रल बैंक की खरीद से चीन के फिजिकल गोल्ड मार्केट को सहारा मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिका-चीन की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी सोने की मांग बढ़ा सकती है।

US का बढ़ता कर्ज भी सोने के पक्ष में

Tata MF ने बढ़ते अमेरिकी कर्ज और फिस्कल डेफिसिट को भी सोने के लिए लंबी अवधि का पॉजिटिव फैक्टर बताया है। US सरकार का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है।

वहीं, फिस्कल डेफिसिट GDP के करीब 6-7% पर है। फंड हाउस के मुताबिक, कर्ज की स्थिरता और डॉलर की खरीद क्षमता को लेकर चिंता बढ़ती है तो सोना निवेशकों के लिए वैल्यू स्टोर के तौर पर और आकर्षक हो सकता है।

एक साथ पैसा लगाने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी

लंबी अवधि में सोने पर Tata MF का रुख सकारात्मक है। लेकिन हाल की तेजी और गिरावट को देखते हुए फंड हाउस ने सावधानी बरतने को कहा है। सोने में आगे भी तेज कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।

इसलिए Tata MF एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश को बेहतर मानता है। यानी बाजार का निचला स्तर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय अलग-अलग समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश किया जाए।

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