Nestle India Share Price : Q2 नतीजों के बाद नेस्ले इंडिया में हुआ बड़ा एक्सीडेंट, कल 8% टूटने के बाद आज भी दबाव में है शेयर

Nestle India Share Price : शुक्रवार, 16 अक्टूबर को नेस्ले इंडिया के शेयरों में और गिरावट आई है। इससे पहले कंपनी के वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों के बाद कल इसके शेयरों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। ब्रोकरेज फर्म HSBC ने इस स्टॉक पर अपनी ‘होल्ड’ रेटिंग बरकरार रखी है और इसका टारगेट प्राइस 1,480 रुपये तय किया है। इसका मतलब है कि गुरुवार के क्लोजिंग प्राइस से इसमें लगभग 16 प्रतिशत की तेजी आ सकती है। साथ ही, फर्म ने यह भी चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ धीमी हो सकती है।

आज शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में नेस्ले इंडिया के शेयर 1.05 प्रतिशत गिरकर 1,262.40 रुपये पर आ गए। फिलहाल यह शेयर 11.90 रुपए यानी 0.93 फीसदी की कमजोरी के साथ 1263 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा है। कल गुरुवार को भी इसमें 7.8 प्रतिशत की गिरावट आई थी। दो दिनों की इस भारी गिरावट के बावजूद,2026 में अब तक यह शेयर केवल 1.5 प्रतिशत ही नीचे आया है। यह निफ्टी 50 के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन है,जो इसी अवधि में लगभग 12 प्रतिशत गिरा है। कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 2.46 लाख करोड़ रुपये है।

स्टॉक पर HSBC की राय

HSBC का कहना है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में नेस्ले इंडिया का रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 20 प्रतिशत बढ़ा है, जो काफी हद तक अनुमानों के अनुरूप है। वहीं, इसका दो साल का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 15 प्रतिशत रहा है। EBITDA बाजार के अनुमानों से लगभग 3 प्रतिशत अधिक रहा है।

ब्रोकरेज ने नेस्ले इंडिया के न्यूट्रिशन बिज़नेस में धीरे-धीरे हो रहे सुधार की ओर इशारा किया है। इसके चॉकलेट और कॉफी कारोबार ने भी लगातार अच्छा प्रदर्शन किया। हालांकि, HSBC ने चेतावनी दी है कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में कंपनी की ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

नेस्ले इंडिया Q2 नतीजे

सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही में नेस्ले इंडिया के कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में सालाना आधार पर 35.9 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और यह 1,009.6 करोड़ रुपये पर रहा है। वहीं,इसकी कामकाजी आय 20.3 प्रतिशत बढ़कर 6,788.3 करोड़ रुपये पर रही है। स्टैंडअलोन बेसिस पर नेट प्रॉफिट 36.2 प्रतिशत बढ़कर 1,026.8 करोड़ रुपये रहा है जो CNBC-TV18 के 1,018 करोड़ रुपये के अनुमान से ज्यादा है।

कंपनी का EBITDA मार्जिन 23.8 प्रतिशत रहा, जबकि विज्ञापन और मार्केटिंग पर होने वाला खर्च 46 प्रतिशत बढ़ है। नेस्ले ने अपने ब्रांडों में निवेश बढ़ा दिया है, जिसकी वजह से विज्ञापन और मार्केटिंग पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है।

कंपनी ने खाद्य महंगाई और कमोडिटी की लागत बढ़ने पर जताई चिंता

तिमाही के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद, गुरुवार को नेस्ले इंडिया के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के मैनेजमेंट ने बढ़ती महंगाई और कमोडिटी की लागत से जुड़ी चुनौतियों पर चिंता जताई है। जिसका असर शेयर पर देखने को मिला। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष तिवारी ने कहा कि बढ़ती महंगाई,खासकर खाने-पीने की चीजों की महंगाई,एक सच्चाई है। कंपनी कमोडिटी की लागत के दबाव को कम करने के लिए उत्पादकता बढ़ाने और परिचालन दक्षता में सुधार लाने पर फोकस करेगी।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Yes Bank Share Price: AT-1 बॉन्ड्स पर कोर्ट के फैसले पर दूसरे दिन भी शेयर धड़ाम, City ने घटाया टारगेट प्राइस

Yes Bank Share Price: दिग्गज प्राइवेट सेक्टर लेंडर येस बैंक के शेयर आज भी बिकवाली की आंधी में फंस गए। एक कारोबारी दिन तो पहले इंट्रा-डे में यह छह साल में सबसे बड़ी गिरावट के साथ टूटकर एक साल के निचले स्तर ₹16.98 पर आ गया था। इसके शेयरों को यह शॉक ₹8415 करोड़ के AT-1 (एडीशनल टियर-1) बॉन्ड्स पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते लगा है। इस झटके में शेयर एक कारोबारी दिन पहले इंट्रा-डे में 20% टूटे थे और निचले स्तर पर हल्की रिकवरी के बावजूद 14% से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए थे। अब आज की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.98% की गिरावट के साथ ₹17.79 पर है। इंट्रा-डे में आज यह 3.86% फिसलकर ₹17.45 तक आ गया था। कुछ महीने पहले 18 जून 2026 को यह एक साल के हाई ₹25.77 पर था।

क्या है Yes Bank के AT-1 बॉन्ड्स का मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में बैंक के AT-1 बॉन्ड्स को राइट ऑफ करने यानी बट्टे खाते में डालने के फैसले को गलत ठहराया है। बता दें कि बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग के दौरान ₹8400 करोड़ के इन बॉन्ड्स को राइट-ऑफ कर दिया गया था, जिसके चलते बॉन्ड होल्डर्स को अपना मूलधन भी गंवाना पड़ा था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक यस बैंक को अब इन AT-1 बॉन्ड्स पर 9.5% और 9% की तय कूपन दर के हिसाब से पेमेंट करना होगा। बैंक ने साल 2016 और साल 2017 में इन बॉन्ड्स के जरिए ₹8,415 करोड़ जुटाए थे। यह रकम कितनी है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि यह वित्त वर्ष 2026 में बैंक के ₹3476 के शुद्ध मुनाफे के दोगुने से भी अधिक है।

इस फैसले को लेकर बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि वह फिलहाल सभी कानूनी विकल्पों पर गौर कर रहा है। बैंक ने यह भी कहा कि उसके पास कैपेटिल मैनेजमेंट के बेहतर रास्ते हैं, जिससे उसे अपने ग्रोथ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अतिरिक्त पूंजी से जुड़े फैसलों को लेकर फ्लेक्सिबिलिटी बनी रहेगी। यस बैंक के मुताबिक AT-1 बॉन्ड्स से जुड़े फैसले से 30 जून 2026 तक के CET-1 रेश्यो (मुनाफा समेत) पर लगभग 250 बेसिस पॉइंट्स का असर पड़ सकता है तो प्रो-फॉर्मा आधार पर टियर-1 रेश्यो 14% पर ही बना रहेगा।

क्या है ब्रोकरेज फर्म का रुझान

वैश्विक इंवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म सिटी ने येस बैंक की सेल रेटिंग को बरकरार रखा है लेकिन टारगेट प्राइस को ₹22 से घटाकर ₹17.5 कर दिया। सिटी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का फैसला येस बैंक के लिए झटका है और इससे सीईटी-1 कम हो सकता है। सिटी का कहना है कि एटी-1 बॉन्ड्स को स्पष्ट रूप से बैंक की पूंजी बढ़ाने के लिए राइट ऑफ किया गया था। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि येस बैंक के CET-1 रेश्यो में 250 बेसिस पॉइंट की कमी आएगी और कूपन पेमेंट को स्वैच्छिक और नॉन-कम्युलेटिव मानते हुए यह गिरकर 11.5% (सिर्फ मूलधन के आधार पर) रह जाएगा। इससे बैंक की बुक वैल्यू में 13% से 14% की गिरावट आएगी, जिसके चलते बफर को फिर से बहाल करने के लिए बैंक को अतिरिक्त पूंजी जुटाने की जरूरत पड़ेगी।

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Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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Shoppers Stop Share Price: Q2 रिजल्ट से एक दिन पहले दिखी तूफानी तेजी, शेयर 15% तक भागा

फैशन और ब्यूटी ब्रांड्स की जानीमानी रिटेलर शॉपर्स स्टॉप के शेयरों में 15 अक्टूबर को बंपर खरीद हो रही है। दिन में शेयर बीएसई पर पिछले क्लोजिंग प्राइस से लगभग 15 प्रतिशत तक उछलकर 430.95 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप बढ़कर 4500 करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है। शॉपर्स स्टॉप 16 अक्टूबर को जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही और अप्रैल-सितंबर 2026 छमाही के वित्तीय नतीजे जारी करने वाली है। नतीजों से पहले जमकर शेयर खरीद हो रही है।

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड घाटा 14.25 करोड़ रुपये रहा था। एक साल पहले समान तिमाही में घाटा 15.74 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 11.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1,291.41 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था, जो जून 2025 तिमाही में 1,161.08 करोड़ रुपये था।

जून तिमाही में खोले 8 नए स्टोर

जून 2026 तिमाही में शॉपर्स स्टॉप के कुल खर्च एक साल पहले के मुकाबले 10.38 प्रतिशत बढ़कर 1,315.86 करोड़ रुपये के रहे थे। तिमाही के दौरान कंपनी ने 8 नए स्टोर खोले। इनमें से 2 डिपार्टमेंट स्टोर, 4 ब्यूटी स्टोर और बाकी 2 इसके किफायती रिटेल फॉर्मेट INTUN थे।

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Shoppers Stop का शेयर 6 महीनों में 37 प्रतिशत चढ़ा

शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। यह BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। शॉपर्स स्टॉप में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 66.06 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 37 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 541.70 रुपये और एडजस्टेड लो 267 रुपये है। अगस्त महीने में ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘होल्ड’ रेटिंग के साथ 465 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया था।

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Suzlon Energy Share: चार दिन में 12% चढ़ा सुजलॉन, अब भी तूफानी तेजी की उम्मीद; मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 का टारगेट दिया

Suzlon Energy Share: स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच Suzlon Energy के शेयरों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही। यह बीते चार सत्र में 12% चढ़ चुका है। सुजलॉन बुधवार को 1.52% की बढ़त के साथ 40.80 रुपये पर बंद हुआ।

हालांकि, इसके बावजूद शेयर का प्रदर्शन अब तक कमजोर रहा है। पिछले एक साल में इसमें 25% की गिरावट आई है। वहीं, इस साल अब तक शेयर 22% टूट चुका है। पिछले छह महीने में इसमें 17% और एक महीने में 5% की गिरावट दर्ज की गई है।

सुजलॉन पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज  का सुजलॉन पर रुख काफी बुलिश है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal ने अपनी 12 अक्टूबर को जारी रिपोर्ट में सुजलॉन पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी। साथ ही, 65 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 60% की तेजी का संकेत देता है।

सुजलॉन फिलहाल अपने 52 हफ्ते के निचले स्तर के करीब है। मोतीलाल ओसवाल ने सुजलॉन के शेयरों में संभावित तेजी की पांच बड़ी वजहें बताई हैं।

1. गिरावट के बाद शेयर का वैल्यूएशन आकर्षक

Suzlon Energy के शेयर में पिछले तीन महीनों में करीब 31% की गिरावट आई है। Motilal Oswal का मानना है कि इतनी गिरावट के बाद शेयर का वैल्यूएशन आकर्षक हो गया है। कंपनी की कमाई को लेकर भी तस्वीर पहले से बेहतर दिख रही है।

2. मजबूत ऑर्डर बुक से मिलेगा सहारा

जून तिमाही के अंत में Suzlon Energy के पास 5.9 GW के ऑर्डर थे। Motilal Oswal के मुताबिक, यह ऑर्डर बुक वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक कंपनी की डिलीवरी के अनुमान को पूरा सपोर्ट देती है।

3. देश में बढ़ रही है विंड पावर की क्षमता

भारत में चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 3 GW विंड पावर क्षमता जोड़ी गई। Motilal Oswal के मुताबिक, पिछले रुझानों को देखें तो दूसरी छमाही में इंस्टॉलेशन पहली छमाही से करीब 1.5 गुना रह सकता है। विंड पावर क्षमता बढ़ने से Suzlon जैसी कंपनियों को नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।

4. शाम को बिजली की ज्यादा मांग से फायदा

देश में बिजली की मांग बढ़ रही है। खासकर शाम के समय पीक डिमांड ज्यादा रहती है। Motilal Oswal के मुताबिक, इससे विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिल सकता है।  इसका फायदा Suzlon को भी मिलने की उम्मीद है।

5. नए कारोबार से बढ़ेगी कमाई की उम्मीद

Motilal Oswal के मुताबिक, Suzlon का DevCo मॉडल तेजी से आगे बढ़ रहा है। वित्त वर्ष की शुरुआत के चार महीनों में इस मॉडल के तहत 600 MW से ज्यादा के ऑर्डर मिले हैं। ये कंपनी के कुल ऑर्डर का करीब 60% हैं। कंपनी विदेशों में भी कारोबार बढ़ाने के मौके तलाश रही है। ब्रोकरेज के मुताबिक, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में अच्छी संभावनाएं हैं।

Suzlon Energy पर एनालिस्टों की क्या राय है?

Suzlon Energy को कवर करने वाले 12 एनालिस्ट में से 10 ने शेयर पर ‘Buy’ रेटिंग दी है। दो एनालिस्ट ने इसे ‘Hold’ रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने शेयर बेचने की सलाह नहीं दी है। सभी एनालिस्ट के टारगेट प्राइस के औसत के हिसाब से शेयर में मौजूदा स्तर से करीब 67% की तेजी की संभावना है।

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Stock to Invest: इस इंश्योरेंस कंपनी के शेयर में आ सकती है तूफानी तेजी, एनालिस्ट्स की बाय रेटिंग

Stock to Invest: आप अगर किसी ऐसे शेयर की तलाश में हैं, जिसमें दमदार रिटर्न देने की क्षमता हो तो आप आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस पर विचार कर सकते हैं। 14 अक्तूबर को यह शेयर 0.45 फीसदी गिरकर 445 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर करीब 34 फीसदी गिरा है।

सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद एनालिस्ट्स की राय पॉजिटिव

ICICI Prudential Life Insurance ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है। साल दर साल आधार पर नए बिजनेस की वैल्यू 20.7 फीसदी बढ़ी है। हालांकि, यह अनुमान से कम है। फिर भी, ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्मों का नजरिया इस शेयर को लेकर पॉजिटिव है।

ब्रोकरेज फर्मों ने बढ़ाए शेयर के टारगेट प्राइस

ग्लोबल इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्मों ने इस शेयर का टारगेट प्राइस भी बढ़ाया है। उनका मानना है कि कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स में इम्प्रूवमेंट है। हालांकि, ग्रोथ और मार्जिन को लेकर चिंता बनी हुई है। एचएसबीसी ने इस शेयर पर अपनी ‘buy’ रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 582 रुपये कर दिया है। इसका मतलब है कि मौजूदा प्राइस से यह शेयर करीब 30 फीसदी चढ़ सकता है।

एचएसबीसी की शेयर में निवेश की सलाह

एचएसबीसी का मानना है कि शेयर की वैल्यूएशन FY28 की अनुमानित एंबेडेड वैल्यू की एक गुना है, जो महंगा नहीं है। उसने कहा है कि इस वजह से इस शेयर में गिरावट की उम्मीद नहीं दिखती। उसने यह भी कहा है कि दूसरी तिमाही में कंपनी की वीएनबी अनुमान से थोड़ा ज्यादा रही। मार्जिन को फेवरेबल प्रोडक्ट मिक्स का फायदा मिला।

नोमुरा ने शेयर के लिए 710 रुपये का टारगेट दिया

विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भी इस शेयर पर ‘buy’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ाकर 710 रुपये कर दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 59 फीसदी चढ़ सकता है। हालांकि, कंपनी का वीएनबी अनुमान से कम रही। नोमुरा का मानना है कि डिस्ट्रिब्यूशन में रिफॉर्म्स का ज्यादा असर इस कंपनी पर नहीं पड़ेगा।

जेपी मॉर्गन भी इस इस शेयर को लेकर पॉजिटिव

जेपी मॉर्गन ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ के शेयर पर ‘ओवरवेट’ की रेटिंग बनाए रखी है। उसने शेयर के लिए 670 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर मौजूदा प्राइस से करीब 50 फीसदी चढ़ सकता है। हालांकि, ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कंपनी की वीएनबी ग्रोथ अनुमान से 2.7 फीसदी कम रही।

33 एनालिस्ट्स की इस शेयर पर बाय रेटिंग

ब्लूमबर्ग एनालिस्ट डेटा के मुताबिक, इस शेयर को कवर करने वाले 36 एनालिस्ट्स में से 33 ने इसे खरीदने की सलाह दी है। तीन एनालिस्ट्स की इस शेयर पर ‘होल्ड’ की रेटिंग है। किसी एनालिस्ट ने इस शेयर को बेचने की सलाह नहीं दी है। एनालिस्ट्स का 12 महीने का कन्सेन्सस टारगेट 621 रुपये है। इसका मतलब है कि यह शेयर करीब 39 फीसदी चढ़ सकता है।