Market Outlook: 5 दिनों में 20% तक चढ़े ये स्मॉलकैप स्टॉक्स, Nifty के लिए ये है सपोर्ट-रेजिस्टेंस

Market Outlook: 7 अगस्त को समाप्त हुए पिछले कारोबारी हफ्ते निफ्टी 50 की तुलना में ब्रोडर मार्केट यानी मिडकैप और स्मॉलकैप के इंडेक्सेज में अधिक तेजी आई। निफ्टी 50 पिछले कारोबारी हफ्ते 0.8% मजबूत हुआ तो निफ्टी मिडकैप में 0.9% और निफ्टी स्मॉलकैप में 2.7% की बढ़त आई। हालांकि उतार-चढ़ाव के बावजूद अर्निंग्स सेशन के दौरान इंडिविजुअल स्टॉक्स में तेजी से निफ्टी को सपोर्ट मिला। पिछले कारोबारी हफ्ते सेंसेक्स (Sensex) 404.53 प्वाइंट्स यानी 0.51% की बढ़त के साथ 78,499.17 तो निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 187.05 प्वाइंट्स यानी 0.76% के उछाल के साथ 24,570.65 पर बंद हुआ था।

बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों के कुल मार्केट कैप में ₹7 लाख करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी हुई। विदेशी निवेशकों का रुझान पॉजिटिव बना रहा और लगातार दूसरे हफ्ते नेट खरीदारी की। पिछले कारोबारी हफ्ते उन्होंने ₹2,887.69 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की तो डीआईआई ने ₹7,767.37 करोड़ की नेट खरीदारी की।

सेक्टरवाइज पिछले कारोबारी हफ्ते सेक्टरवाइज मिला-जुला माहौल रहा। निफ्टी पीएसयू बैंक में सबसे अधिक 5% की तेजी आईतो जुलाई में अच्छी बिक्री के चलते निफ्टी ऑटो 3% मजबूत हुआ। अच्छे नतीजों पर निफ्टी आईटी में 2.7% की तेजी आई तो निफ्टी एफएमसीजी 0.6% और निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.5% मजबूत हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी मीडिया में सबसे अधिक 4% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी कैपिटल मार्केट्स में 2% और निफ्टी रियल्टी में 1.7% की गिरावट आई।

Nifty के Midcap और Smallcap इंडेक्सेज को किन स्टॉक्स से सपोर्ट

केईआई इंडस्ट्रीज, जुबिलेंट फूडवर्क्स, एक्साइड इंडस्ट्रीज, नेशनल एल्युमीनियम कंपनी, एपीएल अपोलो ट्यूब्स, पेटीएम और गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया के सपोर्ट से निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में लगभग 1% की बढ़त हुई। हालांकि ब्लू स्टार, बीएसई, यूपीएल, कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, ऑयल इंडिया और वोल्टास में गिरावट से इसे झटका लगा। वहीं दूसरी तरफ न्यूलैंड लेबोरेटरीज, देवयानी इंटरनेशनल, एथर एनर्जी, टाटा टेक्नोलॉजीज, वेल्सपन कॉर्प, पाइन लैब्स, अर्बन कंपनी और रेडिंगटन के शेयरों में 10-20% की बढ़ोतरी हुई और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इनके दम पर ढाई फीसदी से अधिक मजबूत हुआ। हालांकि इसे नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, फर्स्टसोर्स सॉल्यूशंस, नारायण हृदयालय, इन्वेंटुरस नॉलेज सॉल्यूशंस, स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण में गिरावट से झटका भी लगा।

किस तरफ बढ़ रहा मार्केट?

एंजेल वन के इक्विटी एंड डेरिवेटिव्स टेक्निकल एनालिस्ट हितेश राठी का कहना है कि निफ्टी के लिए अभी 24450–24350 सपोर्ट लेवल की तरह काम कर रहा है। इसके बाद 24 हजार का लेवल मनोवैज्ञानिक तौर पर सपोर्ट है। वहीं ऊपर की तरफ निफ्टी को 24650-24750 के लेवल पर रेजिस्टेंस झेलना पड़ सकता है, जिसके बाद 24800-24850 पर रेजिस्टेंस है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज का डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह का कहना है कि तीन कारोबारी दिनों से निफ्टी 24400 और 24700 के बीच कंसालिडेट हो रहा है और डेली बेसिस पर यह लोअर हाई और हायर लो बना रहा है। नंदीश के मुताबिक मुख्य रुझान अभी भी बुलिश है क्योंकि यह सभी अहम मूविंग एवरेजेज के ऊपर बना हुआ है। नंदीश के मुताबिक ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए 24,770 और 25,000 अहम रेजिस्टेंस लेवल्स हैं तो नीचे की तरफ 24,430–23,380 सपोर्ट जोन है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

FPI की खरीद जारी, अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयरों में लगाए ₹12921 करोड़

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की खरीदारी का सिलसिला अगस्त में भी जारी है। विदेशी निवेशकों ने अगस्त के पहले सप्ताह में भारतीय शेयरों में ₹12,921 करोड़ का निवेश किया। बेहतर होती मैक्रो इकोनॉमिक स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और रुपये की स्थिरता की वजह से FPI के लिए भारतीय बाजार आकर्षक बना हुआ है।

इससे पहले जुलाई में FPI ने भारतीय शेयरों में ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था। इसके पहले लगातार 4 महीने सेलिंग की थी। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के मुताबिक, FPI ने जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में रिकॉर्ड ₹1.17 लाख करोड़ की बिकवाली की थी।

इससे पहले फरवरी में उन्होंने भारतीय शेयरों में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। हालांकि, हालिया खरीदारी के बावजूद साल 2026 में विदेशी निवेशक अब तक भारतीय शेयर बाजार में ₹2.41 लाख करोड़ की बिक्री कर चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने ₹1.66 लाख करोड़ की सेलिंग की थी।

एक्सपर्ट्स का क्या है कहना

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में FPI का रुख बदलने के पीछे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की बढ़ती उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी और रुपये की स्थिरता जैसे कारक प्रमुख हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के बेहतर ग्रोथ और महंगाई संबंधी अनुमान से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इनवेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते का कहना है कि भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण आगे विदेशी निवेश के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है। हाल की खरीदारी का एक बड़ा हिस्सा सेकेंडरी मार्केट के जरिए आया है। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी केवल IPO तक सीमित नहीं है, बल्कि लिस्टेड भारतीय कंपनियों में भी बढ़ रही है।

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जियोजीत इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार का मानना है कि FPI की खरीदारी में एक महत्वपूर्ण रुझान यह है कि वे ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भारतीय डेट या बॉन्ड बाजार में भी बनी हुई है। अगस्त में अब तक उन्होंने बॉन्ड बाजार में जनरल रूट के तहत ₹622 करोड़ का निवेश किया है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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Deepak Nitrite Share Price: दिग्गज केमिकल कंपनी दीपक नाइट्राइट के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में में कंपनी ने ऑपरेटिंग लेवल पर धमाकेदार परफॉरमेंस दिखाया और इसका ईबीआईटीडीए ढाई गुना से अधिक बढ़ गया। शेयरों की बात करें तो अपनी 6 अगस्त की रिपोर्ट में घरेलू ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने इसकी सेल रेटिंग को बरकरार रखा है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 7 अगस्त को बीएसई पर यह 2.62% की बढ़त के साथ ₹1,795.50 पर बंद हुआ है।

किस भाव तक टूट सकता है Deepak Nitrite का शेयर

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज का कहना है कि दीपक नाइट्राइट का ऑपरेटिंग परफॉरमेंस कम बेस के चलते जून तिमाही में सालाना आधार पर उम्मीद से बेहतर रहा। जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कंपनी का ईबीआईटीडीए कंसालिडेटेड लेवल पर 2.8 गुना बढ़कर ₹189.6 करोड़ से ₹540.2 करोड़ और मार्जिन 10.0% से 21.0% पर पहुंच गया। इसके ईबीआईटीडीए को फोनॉलिक सेगमेंट में सालाना आधार पर 3.5 गुना और एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स सेगमेंट में 89% की ईबीआईटी ग्रोथ से सपोर्ट मिला। इसे बेहतर प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज के साथ-साथ बेहतर फिनॉल और बेंजीन स्प्रेड्स से सपोर्ट मिला।

आगे को लेकर ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इंडस्ट्री के सामने आने वाली शॉर्ट-टर्म चुनौतियों और बदलते जियोपॉलिटिकल हालात कंपनी की परफॉर्मेंस पर असर डाल सकते हैं, लेकिन इसका कुल असर सीमित रहेगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक लगातार प्रोसेस में सुधार, बैकवर्ड इंटीग्रेशन से मिलने वाले फायदे, मैन्युफैक्चरिंग की बेहतर क्षमता, लागत को सही ढंग से कंट्रोल करना, घरेलू और एक्सपोर्ट मार्केट में ग्राहकों की बढ़ती इंक्वायरी और नए प्रोडक्ट्स का कमर्शियलाइजेशन से इसे सपोर्ट मिलेगा।

जून तिमाही के बेहतर मार्जिन को ध्यान में रखते हुए ब्रोकरेज फर्म ने वित्त वर्ष 2026-28 में इसके रेवेन्यू के 13%, शुद्ध मुनाफे के 24% और ईबीआईटीडीए के 22% के सीएजीआर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। हालांकि वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई के मुकाबले कंपनी ने इसका भाव 24 गुना पर फिक्स किया है, जिससे इसका टारगेट प्राइस ₹1500 बन रहा है। ब्रोकरेज फर्म ने इसे फिर से सेल रेटिंग दी है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

दीपक नाइट्राइट के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 24 सितंबर 2025 को बीएसई पर यह ₹1,904.50 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 6 महीने में यह 32.77% टूटकर 30 मार्च 2026 को ₹1,280.40 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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Kospi Outlook: हाहाकार के बाद अब क्या है दक्षिण कोरियाई बाजार का हाल, कब तक बनेगा विदेशी निवेशकों की पसंद

Kospi Outlook: दक्षिण कोरिया के शेयर मार्केट की भारी उथल-पुथल खत्म होने की संभावना जताई जाने लगी है। रिकॉर्ड बिकवाली के बाद लेवरेज्ड पोजीशन खत्म हो गईं और नियामकीय प्रतिबंधों के चलते तगड़े रिस्क वाले कुछ प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग में भारी गिरावट आई है। बता दें कि पिछले कारोबारी हफ्ते कोस्पी में ऐसी गिरावट आई कि यह टूटकर जून के रिकॉर्ड हाई से गिरकर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। यह जून के हाई से करीब 40% नीचे आ चुका है।

कोस्पी की यह स्थिरता मार्केट में हाहाकार के चलते कुछ पोजिशन को जबरन बंद करने के चलते आई, जिसके बंद होने से बकाया मार्जिन डेट को कम करने में मदद मिली। इसके अलावा कोस्पी को लेवरेज्ड ईटीएफ पर सख्त नियमों के चलते दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी और एसके हाइनिक्स से जुड़े प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग और एसेट्स में गिरावट से भी सपोर्ट मिला। इससे संकेत मिल रहा है कि कोरियाई स्टॉक मार्केट में उठा-पटक का दौर अब काफी हद तक गुजर चुका है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टैनले का अनुमान है कि डीलेवरेजिंग प्रोसेस अब आधे से अधिक पूरा हो चुका है।

लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी नहीं कर रहे ताबड़तोड़ निवेश

कोस्पी में भारी उठा-पटक के चलते इसे मापने वाला इंडेक्स जून में 96.9 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था जबकि साल 2025 के आखिरी में यह सिर्फ 28.9 पर था। मार्केट में ऐसी हाहाकार मची थी कि मार्केट के 8% गिरने पर एक्सचेंज का 20 मिनट तक ट्रेडिंग रोकने वाला फीचर पिछले महीने रिकॉर्ड चार बार एक्टिव हुआ था। इसके अलावा लगभग आधे ट्रेडिंग दिनों में कोस्पी में कम से कम 5% की तेजी या गिरावट आई। 31 जुलाई को तो कोस्पी में एक ही दिन में रिकॉर्ड 18% की तेजी आई।

अब कोस्पी में स्थिरता आती दिख रही है लेकिन विदेशी निवेशक अभी भी ताबड़तोड़ निवेश नहीं कर रहे हैं। सिंगापुर में एबेरडीन एशियन इनकम फंड के सीनियर इंवेस्टमेंट डायरेक्टर Isaac Thong का कहना कि विदेशी निवेशकों का रुझान अब पॉजिटिव तो हो रहा है, लेकिन वे अभी पूरी तरह सहज नहीं हैं क्योंकि वोलैटिलिटी अभी भी काफी अधिक है। उनका कहना है अगर रिटर्न की गुंजाइश इतनी अधिक हो जाए कि रिस्क लेने को वाजिब बना लसके तो मार्केट को लेकर नजरिया और पॉजिटिव हो सकता है।

शेयर मार्केट की हाहाकार और सख्त नियमों के चलते कई रिटेल इंवेस्टर्स को अपनी पोजिशंस बंद करनी पड़ी। कोरिया फाइनेंशियल इंवेस्टमेंट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार खुदरा निवेशकों के खातों से जून में करीब 1 लाख करोड़ वान (करीब ₹6760 करोड़) और जुलाई में 99.3 हजार करोड़ वान (करीब $6710 करोड़) की पोजिशन जबरन बंद कर दी हई। ये इस साल के दो सबसे बड़े मंथली आंकड़े थे। अब स्थिति में थोड़ा सुधार है और शेयरों की खरीदारी के लिए इस्तेमाल होने वाले मार्जिन लोन का आउटस्टैंडिंग बैलेंस भी 4 अगस्त तक घटकर इस साल के रिकॉर्ड निचले स्तर 27.4 लाख करोड़ वान (करीब ₹1.85 लाख करोड़) रह गया।

अब सवाल उठता है कि क्या खुदरा निवेशकों की जगह विदेशी निवेशक लेंगे। इसे लेकर दुबई की अर्केवियम कैपिटल (Arkevium Capital) के सीआईओ Maxence Visseau का मानना है कि ऐसा हो सकता है लेकिन इसके लिए उन्हें भरोसा होना चाहिए मार्केट में प्राइस डिस्कवरी मैकेनिज्म यानी सही कीमत तय होने की प्रक्रिया फिर से सामान्य तरीके से काम कर रही है।

किस लेवल तक चढ़ सकता है Kospi?

ताबड़तोड़ बिकवाली के बाद अब कोरियाई मार्केट कुछ मायने में सस्ता दिख रहा है। कोस्पी फिलहाल अपने 12 महीने के फारवर्ड अर्निंग्स के मुकाबले 5.1 गुना के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है लेकिन विदेशी निवेशकों को यह आकर्षित नहीं कर पा रहा है।

सिंगापुर में टेम्पलटन ग्लोबल इन्वेस्टमेंट्स की फंड मैनेजर यिपिंग लियाओ का कहना है कि गिरावट के बाद सैमसंग और हाइनिक्स काफी सस्ते हो चुके हैं और इनके मुनाफे का आउटलुक भी मजबूत है लेकिन भारी उतार-चढ़ाव के बाद निवेशक काफी सतर्क हो चुके हैं। उनका कहना है कि भारी उठा-पटक की वजह से मार्केट में दोबारा ताबड़तोड़ खरीदारी का माहौल नहीं बन रहा है बल्कि धीरे-धीरे खरीदारी हो रही है।

ग्लोबल फंड्स ने कोरियाई शेयरों से अपनी निकासी धीमी कर दी है, लेकिन वे अभी भी बेच रहे हैं। स्टॉक एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार जून में रिकॉर्ड $30 अरब निकालने के बाद विदेशी निवेशकों ने जुलाई में $6.2 अरब और अगस्त में अब तक $4.3 अरब के शेयर बेचे हैं।

हालांकि कुछ एनालिस्ट्स बुलिश हैं। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप ने इस हफ्ते कोस्पी के लिए फिर से 12 महीने का टारगेट 12,000 फिक्स किया है, जो शुक्रवार की क्लोजिंग से लगभग 90% अधिक है। पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग टेलीविजन पर एक इंटरव्यू में इन्वेस्टमेंट बैंक के चीफ एशिया पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने कहा था कि अगर उतार-चढ़ाव कम हो जाता है, तो फंडामेंटल्स फिर से असरदार हो जाएंगी।

मैथ्यूज इंटरनेशनल कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर और पोर्टफोलियो मैनेजर शॉन टेलर का कहना है कि फंडामेंटल्स बहुत मजबूत हैं और हाल के नतीजे से ये साबित भी होता है। हालांकि शॉन का कहना है कि उनका मार्केट में लेवरेज और पोजिशनिंग बहुत अधिक बढ़ गई थी, तो अभी एक और महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Siemens Energy Stock Outlook: आगे 15% तक उछल सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने दोहराई ‘बाय’ रेटिंग

सीमेंस एनर्जी इंडिया के शेयर में आगे 15 प्रतिशत तक की तेजी आने की गुंजाइश है। ऐसी उम्मीद मोतीलाल ओसवाल और नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के टारगेट प्राइस से मिली है। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। वहीं टारगेट प्राइस 3,950 रुपये से बढ़ाकर 4,100 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग और 4,200 रुपये प्रति शेयर का टारगेट बरकरार रखा है। यह टारगेट शेयर के BSE पर मौजूदा भाव 3648.75 रुपये से 15 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी के तिमाही नतीजे जारी होने के बाद ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है।

सीमेंस एनर्जी इंडिया का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 67.8 प्रतिशत बढ़कर 440.9 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 39.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2485.6 करोड़ रुपये रहा। कुल खर्च 1949.5 करोड़ रुपये के रहे। कंपनी अक्टूबर-दिसंबर को वित्त वर्ष के तौर पर फॉलो करती है। जून 2026 तिमाही में कंपनी का EBITDA एक साल पहले से 72.1 प्रतिशत बढ़कर 585.7 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन बेहतर होकर 23.6 प्रतिशत हो गया।

30 जून 2026 तक सीमेंस एनर्जी इंडिया का ऑर्डर बैकलॉग 19,331 करोड़ रुपये का था। कंपनी का पावर ट्रांसमिशन बिजनेस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 41.98 प्रतिशत बढ़कर 1,386.3 करोड़ रुपये हो गया। पावर जेनरेशन सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 36.02 प्रतिशत बढ़कर 1,099.3 करोड़ रुपये हो गया।

Siemens Energy पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा कि सीमेंस एनर्जी इंडिया के जून तिमाही के नतीजे हर मामले में अनुमानों से बेहतर रहे। रेवेन्यू में बढ़ोतरी पावर ट्रांसमिशन और पावर जेनरेशन, दोनों सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ की वजह से हुई। पावर ट्रांसमिशन सेगमेंट के लिए EBIT मार्जिन में भी सुधार हुआ और पावर जेनरेशन के लिए यह अच्छा बना रहा। कुल ऑर्डर इनफ्लो सालाना आधार पर 3 प्रतिशत बढ़कर 34 अरब रुपये हो गया, जिससे कुल ऑर्डर बुक 193 अरब रुपये पर पहुंच गई।

पावर ट्रांसमिशन के लिए इनफ्लो में सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 24 अरब रुपये पर पहुंच गया। पावर जेनरेशन इनफ्लो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत घटकर 10 अरब रुपये रह गया। ब्रोकरेज ने उम्मीद जताई है कि सीमेंस एनर्जी को रिन्यूएबल्स, डेटा सेंटर और स्टीम टर्बाइन जैसे क्षेत्रों में घरेलू और एक्सपोर्ट-बेस्ड मौकों से फायदा मिलता रहेगा।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि सीमेंस एनर्जी के मामले में अगले 12-24 महीनों में मौजूदा पुराने ऑर्डरों (बैकलॉग) को समय पर पूरा किया जाना और कलवा/ग्रीनफील्ड ट्रांसफॉर्मर व स्विचगियर क्षमता शुरू किया जाना वे महत्वपूर्ण चीजें होंगी, जिन पर नजर रखनी चाहिए। बेहतर काम-काज और मार्जिन के कारण नुवामान ने FY26E और FY27E के EPS अनुमानों को क्रमशः 12 प्रतिशत और 3 प्रतिशत बढ़ाया है।

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शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत चढ़ा

Siemens Energy का मार्केट कैप बढ़कर लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 75 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 43 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

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Technocraft Ventures IPO: टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स का आईपीओ खुला, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?

Technocraft Ventures IPO: टेक्नोक्रॉफ्ट वेंचर्स का आईपीओ 7 अगस्त को खुल गया। कंपनी ने प्रति शेयर 200-212 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। यह इश्यू 252 करोड़ रुपये का है। इस इश्यू में ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) शामिल है। इसका मतलब है कि कंपनी के पुराने इनवेस्टर्स यह प्रमोटर्स अपने शेयर बचेंगे। इस इश्यू में 11 अगस्त तक निवेश किया जा सकता है।

क्या कंपनी सिर्फ नए शेयर इश्यू करेंगी?

Technocraft Ventures आईपीओ में निवेशकों को 202 करोड़ रुपये के नए शेयर इश्यू करेगी। बाकी 50 करोड़ रुपये के शेयर ओएफएस के जरिए बेचे जाएंगे। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगे। क्वालिफायड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए 50 फीसदी शेयर रिजर्व हैं। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के लिए 15 फीसदी और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 35 फीसदी शेयर रिजर्व हैं।

कंपनी का बिजनेस क्या है?

कंपनी की शुरुआत 1998 में हुई थी। इसका हेडक्वार्टर दिल्ली-एनसीआर में है। यह पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ईपीसी कंपनी है। इसके प्रोजेक्ट्स राजस्थान, उत्तर प्रदेशन, दिल्ली, उत्तराखंड, बिहार और मध्यप्रदेश में हैं। ये प्रोजेक्ट्स वाटर सप्लाई स्कीम, सिवरेज नेटवर्क्स, सिवेज ट्रीटमेंट प्लांटंस (STPs), पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रिब्यूशन और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े हैं। कंपनी की ऑर्डरबुक में सिवरेज और वेस्टवाटर प्रोजेक्ट्स की करीब 91 फीसदी हिस्सेदारी है।

क्या कंपनी मुनाफा कमा रही है?

कंपनी को करीब पूरा बिजनेस सरकार के डिपार्टमेंट्स और म्युनिसिपल बॉडीज से मिलता है। इनमें केंद्र और राज्य सरकार की स्पॉन्सर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होती हैं। बीते तीन सालों में कंपनी की ग्रोथ अच्छी रही है। FY26 में कंपनी का टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) 43.31 करोड़ रुपये रहा। पीएटी मार्जिन 12.56 फीसदी रहा। ऑपरेशन से रेवेन्यू 345 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू ग्रोथ 23.40 फीसदी रही। कंपनी की ऑर्डरबुक 1,236 करोड़ रुपये की थी।

शेयर की वैल्यूएशन ज्यादा या कम?

इश्यू से आए पैसे का इस्तेमाल कंपनी वर्किंग कैपिटल के लिए इस्तेमाल करेगी। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर इश्यू बाद कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 840 करोड़ रुपये का होगा। शेयर की कीमत FY26 की अर्निंग्स का 19.4 गुना है। प्राइस-टू-बुक रेशिया 2.3 गुना है। प्रतिद्वद्वी कंपनियों के मुकाबले वैल्यूएशन ठीक लगती है। प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के शेयरों का औसत पी/ई करीब 23 गुना है।

ग्रे मार्केट में कितना चल रहा प्रीमियम?

इनवेस्टर को कम से कम एक लॉट शेयरों के लिए बोली लगानी होगी। एक लॉट 70 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर अप्लाई करने के लिए कम से कम 14,840 रुपये की जरूरत पड़ेगी। शेयरों का एलॉटमेंट 12 अगस्त को होने की संभावना है। बीएसई और एनएसई में कंपनी के शेयर 14 अगस्त को लिस्ट होंगे। इनवेस्टरगेन के मुताबिक, ग्रे मार्केट में कंपनी के शेयर पर प्रीमियम 13 रुपये चल रहा है। 6 अगस्त को ग्रे मार्केट प्रीमियम 10 रुपये था। यह ज्यादा नहीं है। हालांकि, अभी यह इश्यू का पहला दिन है।

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क्या आपको आईपीओ में पैसे लगाने चाहिए?

ब्रोकरेज फर्म आनंदराठी ने इस आईपीओ में पैसे लगाने की सलाह दी है। उसने कहा है कि कंपनी की ऑर्डरबुक डायवर्सिफायड है। कंपनी नए इलाकों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। कंपनी को इंटिग्रेटेड ईपीसी कपैबिलिटी का फायदा होगा। शेयर की वैल्यूएशन प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के मुकाबले कम है। सुशील फाइनेंशियल सर्विसेज ने भी इस आईपीओ में पैसे लगाने की सलाह दी है। हालांकि, इनवेस्टर्स को अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह के बाद इस आईपीओ में निवेश के बारे में फैसला लेना चाहिए।

Hindustan Aeronautics Share Price: गोल्डमैन सैक्स ने अपग्रेड की रेटिंग, शेयर 5% चढ़ा

Hindustan Aeronautics Share Price: डिफेंस इक्विपमेंट बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के शेयरों में 6 अगस्त को तेजी देखने को मिली। शेयर 5 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। शेयर में आज यह तेजी ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स के इस स्टॉक को अपग्रेड करने के बाद आई है। बता दें कि अक्टूबर 2025 में ब्रोकरेज द्वारा कवरेज शुरू करने के बाद से HAL को गोल्डमैन सैक्स से मिला यह पहला अपग्रेड है।

गोल्डमैन सैक्स ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स (HAL) पर अपनी रेटिंग को ‘Neutral’ से बदलकर ‘Buy’ (खरीदने की सलाह) कर दिया है और इसका प्राइस टारगेट भी ₹5,545 से बढ़ाकर ₹5,870 कर दिया है। नया प्राइस टारगेट गुरुवार के क्लोजिंग लेवल से 26% की बढ़त की संभावना दिखाता है।

गोल्डमैन सैक्स ने क्या दिया तर्क

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि तेजस Mk1A फाइटर जेट की डिलीवरी में लगभग दो साल की देरी के बाद, इस फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही से HAL के काम में तेजी आएगी। उनके चैनल चेक से पता चलता है कि GE एयरोस्पेस के मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की दूसरी छमाही से F-404 इंजन की डिलीवरी को सुव्यवस्थित करने की संभावना है।

HAL की कमाई पर मार्केट की आम राय LCA तेजस Mk1A प्लेटफॉर्म की संभावनाओं पर बहुत ज़्यादा केंद्रित लगती है और इसमें आने वाले दूसरे प्लेटफॉर्म की डिलीवरी पर ध्यान नहीं दिया गया है।

पिछली तिमाही की अर्निंग्स कॉल के दौरान, HAL के मैनेजमेंट ने बताया था कि उन्हें GE से छह इंजन मिले हैं और एयरक्राफ्ट का टेस्ट चल रहा है। मैनेजमेंट को उम्मीद थी कि अगस्त और सितंबर तक सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा और स्थिति स्थिर हो जाएगी।

HAL की योजना FY27 में 20 एयरक्राफ्ट डिलीवर करने की है, जबकि FY26 में शुरुआती टारगेट 12 था, जिसे बाद में घटाकर 5 से 6 कर दिया गया था।

LCA Mk1A ऑर्डर का साइज़ ₹48,000 करोड़ है, जो FY26 के अंत में कंपनी के कुल ₹2.5 लाख करोड़ के ऑर्डर बुक का एक अहम हिस्सा है।

28 एनालिस्ट हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स को कवर करते हैं, जिनमें से 23 की रेटिंग ‘buy’ है, 1 की ‘hold’ है और 4 की रेटिंग ‘Sell’ है। प्राइस टारगेट के आम अनुमानों के अनुसार, मौजूदा स्तरों से इसमें 10.1% की बढ़त की संभावना है।

गुरुवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के शेयर 5.36% बढ़कर ₹4,895.80 पर ट्रेड कर रहे हैं। पिछले एक महीने में इस स्टॉक में 10% की बढ़त हुई है, जिससे साल की शुरुआत से अब तक इसमें कुल 11.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

PM Surya Ghar Yojana: रूफटॉप सोलर योजना 50 लाख घरों तक पहुंची, टाटा पावर समेत इन 3 शेयरों पर रखें नजर

PM Surya Ghar Yojana: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत देश में अब तक 50.06 लाख घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। इससे रूफटॉप सोलर लगाने, फाइनेंसिंग करने और सोलर मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों के लिए बड़ा बाजार तैयार हो रहा है। इस वजह से Tata Power, Waaree Energies और Premier Energies जैसे शेयर निवेशकों के रडार पर हैं।

Tata Power

टाटा ग्रुप की Tata Power सोलर वैल्यू चेन के लगभग हर हिस्से में मौजूद है। कंपनी सोलर सेल और मॉड्यूल बनाती है, रूफटॉप सोलर इंस्टॉल करती है और फाइनेंसिंग की सुविधा भी देती है। टाटा पावर को लेकर अधिकांश ब्रोकरेज हाउस भी बुलिश हैं। मोतीलाल ओसवाल, इलारा कैपिटल और एम्बिट ने टाटा पावर को खरीदने की सलाह दी है।

वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 1.7 गीगावॉट पीक (GWp) रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की। 2.2 लाख से ज्यादा घरों तक पहुंच बनाई और कुल रेजिडेंशियल ग्राहकों की संख्या 3 लाख के पार पहुंच गई। हालांकि, रूफटॉप सोलर कंपनी के कुल कारोबार का सिर्फ एक हिस्सा है। इसलिए इसका असर पूरे बिजनेस में बंट जाता है।

Waaree Energies

सोलर मॉड्यूल निर्माता Waaree Energies सोलर सेक्टर की सबसे बड़ी खिलाड़ी है। इसने जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी की रेवेन्यू 79.2% बढ़कर 7,932 करोड़ रुपये रही। EBITDA 44.4% बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 15.4% बढ़कर 892 करोड़ रुपये हो गया। 28 जुलाई 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 61,500 करोड़ रुपये पर पहुंच गई थी।

Premier Energies

प्रीमियर एनर्जीज ने भी PM Surya Ghar Yojana को अपने लिए बड़ा ग्रोथ ड्राइवर बताया है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 14,010 करोड़ रुपये थी। पहली तिमाही में उसे 3,011 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। कंपनी 6 अगस्त को जून तिमाही के नतीजे जारी करेगी।

निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?

Tata Power के लिए रिन्यूएबल क्षमता में बढ़ोतरी, रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन, बैटरी स्टोरेज और मुंद्रा प्रोजेक्ट से जुड़े घटनाक्रम अहम रहेंगे। वहीं, Waaree Energies और Premier Energies जैसी कंपनियों के लिए ऑर्डर बुक, मांग, क्षमता उपयोग और प्राइसिंग आने वाले समय में सबसे बड़े ट्रिगर होंगे।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Investment: क्या अभी सोना खरीदना चाहिए? मोतीलाल ओसवाल ने निवेशकों को दी खास सलाह

Gold Investment: हाल के वर्षों में सोने ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन अब निवेश की रणनीति बदलने की जरूरत हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म Motilal Oswal Financial Services (MOFSL) का कहना है कि तेजी के दौरान एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रहेगा।

ब्रोकरेज के मुताबिक, अब सोने की कीमतों पर सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव का असर नहीं पड़ता। अमेरिकी महंगाई, ब्याज दरें और रियल यील्ड जैसे फैक्टर्स भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

क्या अभी सोना खरीदना चाहिए?

MOFSL का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को एक बार में बड़ी रकम लगाने से बचना चाहिए। इसके बजाय अलग-अलग स्तर पर धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा स्तर से सोने में 6% से 8% तक की गिरावट आ सकती है। इसके बाद अगले 12 से 15 महीनों में कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है।

भारतीय निवेशकों के लिए ब्रोकरेज ने ₹1.30 लाख से ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को खरीदारी के लिए वाजिब माना है। वहीं, मीडियम टर्म में ₹1.68 लाख और उसके बाद ₹1.93 लाख प्रति 10 ग्राम का लक्ष्य दिया है।

ब्याज दरों पर क्यों रखें नजर?

सोना नियमित आय नहीं देता, जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट या बॉन्ड देते हैं। इसलिए ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ता है।

जब रियल यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इससे सोने पर दबाव आ सकता है। वहीं, ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद सोने की मांग बढ़ा सकती है।

ब्रोकरेज का कहना है कि आने वाले महीनों में अमेरिकी महंगाई, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर फैसले, ग्लोबल लिक्विडिटी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और ETF निवेश पर नजर रखनी चाहिए।

चांदी को लेकर क्या राय है?

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि चांदी की चाल सोने से अलग होती है। इसकी वजह यह है कि चांदी का इस्तेमाल निवेश के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक सेक्टर में भी होता है।

इसी कारण चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज्यादा हो सकता है। इस पर औद्योगिक मांग, वैश्विक आर्थिक स्थिति, निवेशकों की खरीदारी और ब्याज दरों का असर पड़ता है।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

ब्रोकरेज का मानना है कि सोना और चांदी लंबी अवधि में पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अच्छा विकल्प बने रहेंगे। हालांकि, निवेशकों को छोटी अवधि की तेजी या गिरावट के पीछे भागने के बजाय अनुशासित तरीके से निवेश करना चाहिए। महंगाई, ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखना ज्यादा अहम होगा।

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