Top Trading Picks : SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह से जानें, सीमेंस एनर्जी, वेल्सपन , हैवेल्स और मैनकाइंड फार्मा में क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

Top Trading Picks : गुरुवार, 1 अक्टूबर को निफ्टी 22,500 के नीचे बंद हुआ। US 10 ईयर बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण सेंटीमेंट कमजोर रहा,जिससे निफ्टी की शुरुआत निचले स्तर पर हुई। दिन के दौरान,कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती ने नेगेटिव सेंटीमेंट को और गहरा कर दिया जिससे इंडेक्स और नीचे आ गया। वीकली बेसिस पर देखें तो बीते हफ़्ते BSE सेंसेक्स 1,986.04 अंक यानी 2.68% गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी में 718.55 अंक यानी 3.10% की गिरावट आई और यह 22,421.95 पर बंद हुआ। ऐसे में यहां हम आपके लिए कुछ ट्रेडिंग आइडिया दे रहें है, जिन पर अगले हफ्ते नजर रहनी चाहिए।

सीमेंस एनर्जी (Siemens Energy) : SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के वाइस प्रेसिडेंट सुदीप शाह का कहना है कि सीमेंस एनर्जी 21 सितंबर से ₹3,158–3,358 की रेंज में कंसोलिडेट हो रहा है। ADX स्थिर बना हुआ है,जो बताता है कि इसमें किसी खास दिशा में मज़बूत मोमेंटम की कमी है। इस साइडवेज मूवमेंट के कारण मूविंग एवरेज भी सपाट हो गए हैं, जो एक रेंज-बाउंड ट्रेंड का संकेत देते हैं।

इस रेंज के किसी भी तरफ निर्णायक ब्रेकआउट से आगे की दिशा के संकेत मिलेंगे। अगर स्टॉक लगातार इस रेंज के ऊपरी स्तर के ऊपर ब्रेकआउट देता है तो इसमें नई तेजी आ सकती है।

वेल्सपन लिविंग (Welspun Living) : सुदीप शाह का कहना है कि वेल्सपन लिविंग (Welspun Living) के डेली चार्ट पर ‘हायर-हाई’ स्ट्रक्चर बन रहा है। हालांकि,स्टॉक के नया हाई बनाने के बावजूद ADX में गिरावट शुरू हो गई है,जो यह संकेत देता है कि ट्रेंड की मजबूती कम हो रही है।

साथ ही, RSI भी उसी तरह का नया हाई बनाने में नाकाम रहा है,जिससे ‘बेयरिश डाइवर्जेंस’की स्थिति बनी है। अगर स्टॉक 210–215 रुपये के 20-डे EMA जोन के नीचे टूटता है,तो यह ट्रेंड बदलने का संकेत हो सकता है। तब तक,आम तौर पर तेजी का रुख बना रहने की संभावना है।

एम्फैसिस (Mphasis) : सुदीप शाह ने कहा कि Mphasis ने अपने पिछले स्विंग-लो ज़ोन (₹2,130–2,110) से वापसी की है। हालांकि, मेन ट्रेंड में कोई खास बदलाव नहीं आया है और स्टॉक अभी भी अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है। रिकवरी को और मज़बूत बनाने के लिए, स्टॉक को ₹2,280–2,290 जोन में मौजूद अपने 20-डे EMA से ऊपर मजबूती से निकलना होगा। अभी के लिए,चार्ट्स में ऊपर की ओर बढ़ने की संभावना का कोई साफ संकेत नहीं दिख रहा है,क्योंकि बीते हफ्ते दिखी रिकवरी को अभी एक टिकाऊ ट्रेंड रिवर्सल नहीं माना जा सकता है।

हैवेल्स (Havells) : सुदीप शाह का कहना है कि हैवेल्स इंडिया ने डेली चार्ट पर ₹1,040–1,010 के अहम सपोर्ट जोन के पास ‘बुलिश हरामी’ पैटर्न बनाया है। इस स्टॉक ने मार्च 2022 और दिसंबर 2022 समेत कई बार इस जोन से वापसी की है। हालांकि, सिर्फ़ ‘बुलिश हरामी’ पैटर्न से ही ट्रेंड बदलने की पुष्टि नहीं होती। इसके लिए आने वाले सेशन में मजबूत फ़ॉलो-थ्रू की जरूरत होती है।

जब तक स्टॉक इस सपोर्ट जोन के ऊपर बना रहता है,तब तक शॉर्ट टर्म में इसमें रिकवरी (पुलबैक) जारी रह सकती है। अगर स्टॉक इस जोन के नीचे टूटता है,तो यह पैटर्न अमान्य हो जाएगा और इसमें और गिरावट आ सकती है।

मैनकाइंड फार्मा (Mankind Pharma) : मैनकाइंड फार्मा का शेयर पिछले आठ सेशन से ₹2,430–2,559 की रेंज में कंसोलिडेट हो रहा है। इस कंसोलिडेशन के बावजूद, शेयर अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है।

बढ़ता ADX बताता है कि ट्रेंड की मजबूती बुलिश रुख के पक्ष में है। अगर शेयर इस रेंज के ऊपरी स्तर से ऊपर निर्णायक रूप से ब्रेकआउट करता है तो नियर टर्म में इसमें और तेजी आ सकती है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III को मंजूरी, 1.86 लाख करोड़ की इस स्कीम से इन शेयरों को लग सकते हैं पंख

यूनियन कैबिनेट ने 30 सितंबर को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III को मंजूरी दे दी। इस स्कीम पर 1.86 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस स्कीम का मकसद देश में रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती क्षमता को देखते हुए उसके लिए पर्याप्त पावर ग्रिड सिस्टम तैयार करना है। यह स्कीम वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरी हो जाएगी। इस स्कीम से पावर सेक्टर की कंपनियों को फायदा होगा। उनके लिए कारोबारी मौके बढ़ेंगे। 1 अक्तूबर को पावर सेक्टर की कंपनियों के शेयरों पर इसका असर दिख सकता है।

1.36 लाख करोड़ इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम पर खर्च होंगे

स्कीम के तहत 1,36,378 करोड़ रुपये इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम्स को मजबूत बनाने पर खर्च होंगे। इसका सीधा फायदा ट्रांसमिशन कंपनियों को होगा। 50,000 करोड़ रुपये का निवेश 50 GWh के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स (BEES) के लिए होगा। इस स्कीम के तहत सरकार 54,082 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देगी। इस स्कीम के पूरा होने पर एनर्जी के मामले में देश की स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी।

देश में ट्रांसमिशन इंफ्रास्टक्चर स्ट्रॉन्ग होगा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में रिन्यूएबल एनर्जी की उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है। लेकिन, इस अतिरिक्त बिजली क उस जगह पहुंचाना एक बड़ा चैलेंज है, जहां उसकी जरूरत है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III इस समस्या का समाधान करेगी। इस स्कीम से देश में ट्रांसमिशन का स्ट्रॉन्ग इंफ्रास्टक्चर मौजूद होगा। इसके जरिए बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना आसान हो जाएगा।

स्कीम का फायदा इन कंपनियों को मिलेगा

इस स्कीम का फायदा पावर ग्रिड, अदाणी एनर्जी, KEC International, Kalpataru Projects, GE Vervnova T&D, Hitachi Energy India, Siemens Energy और Techno Electric जैसी कंपनियों को मिलेगा। 1 अक्तूबर को इन कंपनियों के शेयरों में तेजी दिख सकती है। ये पावर सेक्टर की दिग्गज कंपनियां हैं। इस स्कीम से इन कंपनियों के लिए कारोबारी मौके काफी बढ़ जाएंगे।

1 अक्टूबर को इन शेयरों में दिख सकता है उछाल

Power Grid का शेयर 30 सितंबर को 0.78 फीसदी गिरकर 259.45 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 7 फीसदी से ज्यादा गिरा है। Adani Energy का शेयर 30 सितंबर को 0.32 फीसदी चढ़कर 1,310 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 50 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। केईसी इंटरनेशनल का शेयर 30 सितंबर को 0.62 फीसदी गिरकर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर करीब 57 फीसदी फिसला है।

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मुनाफावसूली से अंतिम घंटों में गिरा बाजार 

30 सितंबर को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिली। कारोबार खत्म होने से कुछ घंटे पहले मुनाफा वसूली ने निफ्टी और सेंसेक्स को लाल निशान में ला दिया। निफ्टी 0.42 फीसदी गिरकर 22,620 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 0.07 फीसदी गिरकर 72,480 पर क्लोज हुआ।

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Kirloskar Pneumatic Stock Split: 2 टुकड़ों में टूटेगा शेयर, 18 अगस्त रिकॉर्ड डेट; 6 महीनों में 25% मजबूत

Kirloskar Pneumatic Company का स्टॉक, स्प्लिट होने जा रहा है। कंपनी का 2 रुपये फेस वैल्यू वाला 1 शेयर, 1 रुपये फेस वैल्यू वाले 2 शेयरों में टूट जाएगा। रिकॉर्ड डेट 18 अगस्त है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, उनके शेयर स्प्लिट हो जांएगे। शेयर की कीमत वर्तमान में बीएसई पर 1440.80 रुपये है।

इससे पहले किर्लोस्कर न्यूमैटिक कंपनी का स्टॉक साल 2018 में स्प्लिट हुआ था। उस वक्त 10 रुपये फेस वैल्यू वाला एक शेयर 2 रुपये फेस वैल्यू वाले 5 शेयरों में टूटा था। कंपनी की शुरुआत 1958 में हुई थी। यह कंपनी कई तरह के प्रोडक्ट बनाती है, जैसे कि एयर, रेफ्रिजरेशन, गैस कंप्रेसर व सिस्टम्स; वेपर एब्जॉर्प्शन चिलर और इंडस्ट्रियल गियरबॉक्स। यह स्टील, सीमेंट, कोल्ड चेन, फूड और बेवरेजेज, फार्मास्यूटिकल्स, रेलवे, डिफेंस और मरीन जैसे कई उद्योगों को अपनी सेवाएं देती है। ऑयल और गैस सेक्टर में भी इसकी अहम मौजूदगी है।

Kirloskar Pneumatic का शेयर 6 महीनों में 25 प्रतिशत चढ़ा

इसका मार्केट कैप 9300 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर BSE 1000 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर का बीएसई पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 2,197.75 रुपये और एडजस्टेड लो 955 रुपये है। शेयर 6 महीनों में 25 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 38 प्रतिशत चढ़ा है। 3 साल में कीमत 133 प्रतिशत मजबूत हुई है।

हाल ही में कंपनी ने किर्लोस्कर साउथ ईस्ट एशिया कंपनी लिमिटेड में कुल वोटिंग पावर के 99.49 प्रतिशत हिस्से की खरीद पूरी की है। अब किर्लोस्कर साउथ ईस्ट एशिया कंपनी लिमिटेड, Kirloskar Pneumatic Company Limited की सब्सिडियरी है।

Siemens Energy Stock Outlook: आगे 15% तक उछल सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने दोहराई ‘बाय’ रेटिंग

कंपनी की वित्तीय सेहत

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में किर्लोस्कर न्यूमैटिक कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 300.30 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध मुनाफा 34.10 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 1,759.20 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 258.40 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Siemens Energy Stock Outlook: आगे 15% तक उछल सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने दोहराई ‘बाय’ रेटिंग

सीमेंस एनर्जी इंडिया के शेयर में आगे 15 प्रतिशत तक की तेजी आने की गुंजाइश है। ऐसी उम्मीद मोतीलाल ओसवाल और नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के टारगेट प्राइस से मिली है। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ‘बाय’ रेटिंग दोहराई है। वहीं टारगेट प्राइस 3,950 रुपये से बढ़ाकर 4,100 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग और 4,200 रुपये प्रति शेयर का टारगेट बरकरार रखा है। यह टारगेट शेयर के BSE पर मौजूदा भाव 3648.75 रुपये से 15 प्रतिशत ज्यादा है। कंपनी के तिमाही नतीजे जारी होने के बाद ब्रोकरेज का व्यू सामने आया है।

सीमेंस एनर्जी इंडिया का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 67.8 प्रतिशत बढ़कर 440.9 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 39.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2485.6 करोड़ रुपये रहा। कुल खर्च 1949.5 करोड़ रुपये के रहे। कंपनी अक्टूबर-दिसंबर को वित्त वर्ष के तौर पर फॉलो करती है। जून 2026 तिमाही में कंपनी का EBITDA एक साल पहले से 72.1 प्रतिशत बढ़कर 585.7 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेटिंग मार्जिन बेहतर होकर 23.6 प्रतिशत हो गया।

30 जून 2026 तक सीमेंस एनर्जी इंडिया का ऑर्डर बैकलॉग 19,331 करोड़ रुपये का था। कंपनी का पावर ट्रांसमिशन बिजनेस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 41.98 प्रतिशत बढ़कर 1,386.3 करोड़ रुपये हो गया। पावर जेनरेशन सेगमेंट का रेवेन्यू सालाना आधार पर 36.02 प्रतिशत बढ़कर 1,099.3 करोड़ रुपये हो गया।

Siemens Energy पर ब्रोकरेज के तर्क

मोतीलाल ओसवाल ने अपने रिसर्च नोट में कहा कि सीमेंस एनर्जी इंडिया के जून तिमाही के नतीजे हर मामले में अनुमानों से बेहतर रहे। रेवेन्यू में बढ़ोतरी पावर ट्रांसमिशन और पावर जेनरेशन, दोनों सेगमेंट में मजबूत ग्रोथ की वजह से हुई। पावर ट्रांसमिशन सेगमेंट के लिए EBIT मार्जिन में भी सुधार हुआ और पावर जेनरेशन के लिए यह अच्छा बना रहा। कुल ऑर्डर इनफ्लो सालाना आधार पर 3 प्रतिशत बढ़कर 34 अरब रुपये हो गया, जिससे कुल ऑर्डर बुक 193 अरब रुपये पर पहुंच गई।

पावर ट्रांसमिशन के लिए इनफ्लो में सालाना आधार पर 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और आंकड़ा 24 अरब रुपये पर पहुंच गया। पावर जेनरेशन इनफ्लो सालाना आधार पर 10 प्रतिशत घटकर 10 अरब रुपये रह गया। ब्रोकरेज ने उम्मीद जताई है कि सीमेंस एनर्जी को रिन्यूएबल्स, डेटा सेंटर और स्टीम टर्बाइन जैसे क्षेत्रों में घरेलू और एक्सपोर्ट-बेस्ड मौकों से फायदा मिलता रहेगा।

नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि सीमेंस एनर्जी के मामले में अगले 12-24 महीनों में मौजूदा पुराने ऑर्डरों (बैकलॉग) को समय पर पूरा किया जाना और कलवा/ग्रीनफील्ड ट्रांसफॉर्मर व स्विचगियर क्षमता शुरू किया जाना वे महत्वपूर्ण चीजें होंगी, जिन पर नजर रखनी चाहिए। बेहतर काम-काज और मार्जिन के कारण नुवामान ने FY26E और FY27E के EPS अनुमानों को क्रमशः 12 प्रतिशत और 3 प्रतिशत बढ़ाया है।

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शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत चढ़ा

Siemens Energy का मार्केट कैप बढ़कर लगभग 1.30 लाख करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 75 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 33 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 43 प्रतिशत मजबूत हुआ है।

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महंगा वैल्यूशन, फिर भी 8 बार मिला Nifty से ज्यादा रिटर्न, अब इन स्टॉक्स पर फिदा जेफरीज

Expensive Valuations but Attractive to Invest: वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि महंगा वैल्यूएशन होने का मतलब ये नहीं कि निवेश पर अच्छा रिटर्न नहीं मिलेगा। यह बात पिछले 15 वर्षों में आठ बार सही साबित हुई है। जेफरीज ने 18 जून को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आठ बार ऐसा हुआ, जब किसी सेक्टर के शेयर महंगे यानी एक्सपेंसिव वैल्यूएशन वाले दिखने लगे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अगले दो से तीन वर्षों में शानदार रिटर्न दिए। जेफरीज का मानना है कि अब पावर सेक्टर भी ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है, खासतौर से प्राइवेट पावर कंपनियों के मामले में।

15 साल में 8 बार Expensive Valuations के बावजूद तगड़ा रिटर्न

Defence- सितंबर 2022 से जुलाई 2024

स्वदेशी मुहिम पर जोर के बाद डिफेंस स्टॉक्स की वैल्यू सितंबर 2022 तक 10 साल के औसत वैल्यूएशन से 40% अधिक हो गए थे।

इसके बावजूद जुलाई 2024 तक इस सेक्टर ने निफ्टी की तुलना में 229 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

मजबूत ऑर्डर बुक, इंपोर्ट सब्सटीट्यूशन और 33% EPS CAGR से ऊंचे वैल्यूएशन को सपोर्ट मिला।

NBFCs-अक्टूबर 2021 से फरवरी 2026

जेफरीज की रिपोर्ट्स के मुताबिक अक्टूबर 2021 तक एनबीएफसी स्टॉक्स की वैल्यू 10 साल के औसत वैल्यू से करीब 78% अधिक हो गई।

फिर भी क्रेडिट सर्किल में विस्तार, एसेट क्वालिटी में सुधार और डिजिटल मॉडल में विस्तार से 23% EPS CAGR से इसे सपोर्ट मिला और निफ्टी की तुलना में 40 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बेहतर परफॉर्म किया।

Cement-जून 2014 से मई 2017

जून 2014 तक सीमेंट स्ट़ॉक्स अपने 10 साल के औसत से 74% प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे।

इसके बावजूद मई 2017 तक इसने निफ्टी के मुकाबले 47 पर्सेंटेज प्वाइंट्स बेहतर रिटर्न दिया।

कंस्ट्रक्शन और इंफ्रा साइकिल में तेजी की उम्मीदों से इस रैली को सपोर्ट मिला।

FMCG-दिसंबर 2014 से दिसंबर 2019

दिसंबर 2024 तक एफएमसीजी कंपनियां अपने 10 साल के औसत से 44% प्रीमियम पर थे लेकिन इसके बावजूद इस सेक्टर ने दिसंबर 2019 तक 96 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इसे इकॉनमी के फॉर्मलाइजेशन यानी औपचारिकीकरण, जीएसटी और 12% EPS CAGR से सपोर्ट मिला।

Retail-दिसंबर 2014 से सितंबर 2019

दिसंबर 2014 तक रिटेल सेक्टर का वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत से 41% प्रीमियम पर पहुंच गया।

इसके बावजूद सेक्टर ने सितंबर 2019 तक निफ्टी की तुलना में 159 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इस दौरान फॉर्मलाइजेशन, प्रीमियम प्रोडक्ट्स की मजबूत मांग और उपभोक्ता खर्च में बढ़ोतरी से 20% EPS CAGR को सपोर्ट मिला।

Capital Goods- सितंबर 2022 से जून 2024

सितंबर 2022 तक 10 साल के औसत की तुलना में 28% प्रीमियम पर होने के बावजूद जून 2024 तक इसने 90 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इसे कोविड के बाद इंवेस्टमेंट साइकिल में रिकवरी से सपोर्ट मिला।

मजबूत ऑर्डर इनफ्लो और बेहतर मार्जिन पर इस दौरान EPS CAGR 26% रहा।

Hospital Stocks- दिसंबर 2021 से अक्टूबर 2025

कोविड के बाद अस्पताल दिसंबर 2021 तक हॉस्पिटल्स के वैल्यूएशन 10 साल के औसत के मुकाबले 44% प्रीमियम पर पहुंच गए थे।

इसके बावजूद हॉस्पिटल सेक्टर ने अक्टूबर 2025 तक 85 पर्सेंटेज प्वाइंट्स का आउटपरफॉरमेंस किया।

इंश्योरेंस कवरेज के विस्तार, ऑपरेटिंग लीवरेज में बढ़ोतरी और प्रति बेड आय (एवरेज रेवेन्यू पर ऑपरेटिंग बेड- ARPOB) में सुधार से EPS CAGR 23% रहा।

Hotel Stocks- दिसंबर 2021 से दिसंबर 2024

दिसंबर 2021 तक होटल स्टॉक्स अपने 10 साल के औसत से करीब 20% महंगे हो गए।

इसके बावजूद दिसंबर 2024 तक निफ्टी की तुलना में इसने करीब 290 पर्सेंटेज प्वाइंट्स अधिक रिटर्न दिया।

इसे कोविड के मांग में रिकवरी, प्रीमियमाइजेशन और विस्तार के मजबूत संभावनाओं से सपोर्ट मिला।

अब पावर स्टॉक्स पर दांव क्यों?

अब ऐसा ही रुझान ब्रोकरेज फर्म को पावर सेक्टर पर भी दिख रहा है और इस सेक्टर में जेएसडब्ल्यू एनर्जी, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, प्रीमियर एनर्जीज और सीमेंस एनर्जी को अपनी टॉप पसंद बताया है। जेफरीज के मुताबिक इसे बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की घटती लागत, स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड की बेहतर होती बैलेंस शीट, डेटा सेंटर के विस्तार, प्राइवेट सेक्टर की बढ़ती भागीदारी और ईवी के तेज विस्तार से सपोर्ट मिलेगा।

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