सऊदी अरब में तैनात होंगी पाकिस्तान-तुर्किये की फौज:हूती विद्रोहियों के खिलाफ साथ आए तीनों देश; पिछले महीने पाकिस्तान ने मदद से इनकार किया था

पाकिस्तान और तुर्किये अपनी सेना जल्द सऊदी अरब में तैनात करेगी। यह फैसला सोमवार को रियाद में मक्का गठबंधन की आपात बैठक में हुआ। हूती विद्रोहियों से जुड़े हमलों के बाद सुरक्षा खतरों को देखते हुए तीनों देश साथ आ गए हैं। हूतियों ने यमन के लाल सागर तट और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। यह इलाका सऊदी अरब के बेहद करीब है। इससे सऊदी की सुरक्षा और व्यापार पर संकट बढ़ गया है। हालांकि, इससे पहले पाकिस्तान ने सितंबर में सऊदी को सैन्य मदद देने से इनकार कर दिया था। यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी ने हूती हमले के बाद सबसे पहले पाकिस्तान से मदद मांगी थी। लेकिन पाकिस्तान ने कहा कि उसकी सेना किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में शामिल नहीं होगी। हूती विद्रोहियों ने लाल-सागर में दो और द्वीपों पर कब्जा किया यमन के हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में दो और अहम द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। यमन सरकार के मुताबिक हूतियों ने ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश द्वीपों पर अपने लड़ाके तैनात किए हैं। ये द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में हैं। इससे पहले पिछले हफ्ते हूतियों ने लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोखा और बाब अल-मंदेब में मौजूद मायून द्वीप पर भी कब्जा किया था। इन दोनों जगहों पर सऊदी अरब के समर्थन वाली यमनी सरकारी सेना का नियंत्रण था। हूतियों के इन द्वीपों पर कब्जे से लाल सागर के समुद्री रास्ते पर उनका दबदबा और मजबूत हो गया है। बाब अल-मंदेब एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के लिए शॉर्टकट रास्ता है। यहां से गुजरने के बाद जहाज स्वेज नहर के रास्ते भूमध्य सागर तक पहुंचते हैं। सऊदी अरब जल्द हूतियों पर हमला कर सकता है सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को यमन में उतार सकता है। इसका मकसद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं – इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है। मक्का पैक्ट लागू- एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा रियाद में सोमवार को हुई बैठक में मक्का रक्षा समझौता औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस समझौते के तहत एक देश पर हमला तीनों पर माना जाएगा। इस बैठक में तीनों देशों के वरिष्ठ रक्षा और सैन्य अधिकारी शामिल हुए। तुर्किये की ओर से विदेश मंत्री हाकान फिदान, रक्षा मंत्री याशार ग्यूलर शामिल हुए। सऊदी अरब की ओर से विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान शामिल हुए। पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद इशाक डार ने किया। उनके साथ चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मौजूद रहे। पाकिस्तान के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल नौमान महमूद भी बैठक में शामिल हुए। उन्हें मक्का रक्षा पैक्ट का महासचिव नियुक्त किया गया है।

Rejinagar Bypolls election voting: रेजीनगर उपचुनाव में वोटिंग के दौरान भारी हंगामा, पश्चिम बंगाल पुलिस ने हुमायूं कबीर को किया गिरफ्तार

Rejinagar Bypolls election voting: आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को मंगलवार (6 अक्टूबर) को पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव में वोट डालने के बाद हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने कई बूथों पर वोटिंग प्रक्रिया में पुलिस के दखल का आरोप लगाया था। वोटिंग के बाद कबीर ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी मतदान प्रक्रिया में बाधा डाल रहे थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार पहले से ही सत्ता में है, तो ऐसी दखलअंदाजी की क्या जरूरत है।

इस दौरान उन्होंने काफी हंगामा किया। फिर कुछ देर बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हुमायूं कबीर को पुलिस ने उनके रेजीनगर पार्टी ऑफिस से हिरासत में लिया और फिर रेजीनगर पुलिस स्टेशन ले गई। आम जनता उन्नयन पार्टी ने रेजीनगर उपचुनाव में कबीर के बेटे गुलाम नबी आजाद को चुनावी मैदान में उतारा है।

उपचुनाव के लिए मतदान जारी

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मंगलवार सुबह सात बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान शुरू हुआ। मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट उस समय खाली हुई जब 2026 के विधानसभा चुनाव में रेजीनगर और नवादा दोनों सीटों से जीतने वाले हुमायूं कबीर ने नवादा सीट बरकरार रखी।

कबीर ने अपने बेटे को बनाया उम्मीदवार

हुमायूं कबीर की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) ने उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को उम्मीदवार बनाया है। चुनाव मैदान में BJP के उम्मीदवार और मुर्शिदाबाद जिले के पूर्व अध्यक्ष सखराव सरकार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी, तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े के उम्मीदवार सफीउज्जमान शेख, कांग्रेस उम्मीदवार मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी और माकपा के सैयद असद अली शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था की है।

नंदीग्राम में भी वोटिंग जारी, 71 कंपनियां तैनात

अधिकारियों ने बताया कि उपचुनाव के लिए केंद्रीय बलों की कुल 71 कंपनियां तैनात की गई हैं। मतदान शाम छह बजे तक चलेगा। शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीट से जीत हासिल की थी। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद भवानीपुर सीट बरकरार रखी, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव की जरूरत पड़ी।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने चंद्रनाथ रथ की मां हासिरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। चंद्रनाथ, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे। विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के दो दिन बाद छह मई को चंद्रनाथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल धड़े की उम्मीदवार संचित प्रधानी डे ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद अपना नाम वापस ले लिया। इसके बाद बनर्जी के पास अपना कोई उम्मीदवार नहीं बचा और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन किया। उन्होंने इसे इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) को मजबूत करने की कोशिश बताया।

ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल के प्रतिद्वंद्वी धड़े ने मोहम्मद एतेशामुल हक को लिफाफा चुनाव चिह्न और एक अलग अस्थायी पार्टी पहचान के साथ मैदान में उतारा है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने शांतिगोपाल गिरि को उम्मीदवार बनाया है। वहीं,

मतगणना नौ अक्टूबर को होगी।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता की पार्टी की तुरंत धन जारी करने की अर्जी ठुकरायी

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की ओर से पार्टी धन के इस्तेमाल के लिए दायर की गयी तत्काल सुनवाई की अर्ज़ी को ठुकरा दिया है।

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने तुरंत सुनवाई की पार्टी की अर्ज़ी को ठुकराते हुए कहा कि पूजा की छुट्टियों के बाद सामान्य प्रक्रिया के तहत इस मामले पर सुनवाई होगी।

तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक अवकाशप्राप्त न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार की अध्यक्षता वाली एक समिति ने त्योहार से पहले ज़रूरी खर्चों के लिए धन जारी करने से मना कर दिया है। विशेष अधिकारी ने इस बारे में लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा है कि क्या चुनाव आयोग का वह आदेश, जिसमें पार्टी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगायी गयी थी, सिर्फ़ उपचुनावों के लिए है या अनिश्चितकाल तक लागू रहेगा।

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गौरतलब है कि यह विवाद एक निजी बैंक में टीएमसी के तीन खातों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं पर पुलिस की कार्रवाई के बाद शुरू हुआ। खातों के बंद होने के बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। अदालत ने हालांकि गत नौ जुलाई को निर्देश दिया था कि सुश्री ममता बनर्जी का तृणमूल कांग्रेस का अगले साल 29 जनवरी तक खातों पर पूरा नियंत्रण नहीं होगा लेकिन रोज़मर्रा की संगठनात्मक गतिविधियों और कर्मचारियों के वेतन के लिए ज़रूरी धन विशेष अधिकारी के ज़रिए जारी किए जाने चाहिए।

एक नयी कानूनी मुश्किल तब खड़ी हुई जब चुनाव आयोग ने सुश्री ममता बनर्जी और श्री रिताब्रत बनर्जी गुटों को ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से अस्थायी रूप से रोक दिया। राज्य की ओर से पेश हुए अतिरिक्त अधिवक्ता जनरल राजदीप मजूमदार ने तर्क दिया कि चूंकि चुनाव आयोग ने उस नाम से पार्टी के कानूनी अस्तित्व को निलंबित कर दिया था, इसलिए उस नाम से दायर याचिका सुनवाई योग्य नहीं थी।

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HDFC Bank में आ सकती है जोरदार तेजी! Emkay ने 74% तक उछाल का अनुमान दिया

HDFC Bank Share Price: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank के शेयर में सोमवार को दबाव रहा। शुरुआती तेजी के बावजूद शेयर 2% से ज्यादा गिरकर ₹704.55 पर बंद हुआ। इस बीच Emkay Research ने बैंक के शेयर पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने ₹1,225 का टारगेट दिया है। यानी मौजूदा भाव से करीब 74% की तेजी की गुंजाइश है।

ब्रोकरेज का कहना है कि लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन के बाद HDFC Bank का वैल्यूएशन अब आकर्षक दिख रहा है। अगर नए नेतृत्व में कारोबार सुधरता है और FPI आउटफ्लो कम होता है, तो शेयर में री-रेटिंग हो सकती है।

नेतृत्व का संकट अब पीछे

HDFC Bank में नेतृत्व को लेकर बना लंबा असमंजस अब खत्म हो गया है। RBI ने 1 अक्टूबर को अनूप बागची को बैंक का नया MD और CEO बनाने की मंजूरी दी थी। उनका तीन साल का कार्यकाल 27 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा।

Emkay का मानना है कि बागची की नियुक्ति से बैंक के निवेशकों और ग्राहकों का भरोसा लौट सकता है। बागची का ICICI Bank Group में लंबा अनुभव रहा है। उनका नेतृत्व का तरीका ज्यादा दखल देने वाला नहीं है। वह बड़े रणनीतिक मुद्दों पर फोकस करते हैं और टीम को काम करने की आजादी देने में भरोसा रखते हैं।

HDFC Bank के लिए टारगेट

ब्रोकरेजरेटिंगटारगेट प्राइस
संभावित तेजी

Emkay ResearchBuy₹1,22574%
Motilal OswalBuy₹92531%
PL CapitalBuy₹95035%
ICICI SecuritiesBuy₹92030.60%

अब बैंक के सामने क्या चुनौती है?

नए MD के सामने कई अहम काम होंगे। सबसे पहले वरिष्ठ प्रबंधन में स्थिरता लानी होगी। इसके साथ ही डिपॉजिट ग्रोथ को फिर रफ्तार देनी होगी।

नई ब्रांचों की प्रोडक्टविटी सुधारना भी जरूरी होगा। बैंक को टेक्नोलॉजी और डिजिटल क्षमता मजबूत करनी होगी। इसके अलावा मिस-सेलिंग जैसे पुराने मामलों से जुड़े प्रोसेस में भी सुधार करना होगा।

लोन और डिपॉजिट ग्रोथ पर नजर

Emkay को HDFC Bank के कारोबार में आगे सुधार की उम्मीद है। ब्रोकरेज ने FY27 में लोन ग्रोथ 16% और डिपॉजिट ग्रोथ 17.1% रहने का अनुमान लगाया है। FY28 और FY29 में लोन ग्रोथ 18% रहने का अनुमान है।

FY27 में बैंक का नेट प्रॉफिट करीब ₹86,189 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके बाद FY28 में यह करीब ₹99,738 करोड़ और FY29 में करीब ₹1.22 लाख करोड़ पहुंच सकता है।

HDFC बैंक पर बाकी ब्रोकरेज की राय

मोतीलाल ओसवाल ने भी HDFC Bank पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इसके साथ ही ₹925 का टारगेट प्राइस दिया है। यह 31.3% की तेजी की संभावना दिखाता है।

HDFC Bank के लिए PL Capital ने टारगेट प्राइस ₹950 रखा है, जो करीब 34.9% की तेजी दिखाता है। ब्रोकरेज के मुताबिक, अब बैंक के सामने बैलेंस शीट ग्रोथ, डिपॉजिट, NIM और क्रेडिट कॉस्ट से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर करने की जिम्मेदारी होगी।

ICICI Securities ने ₹920 का टारगेट दिया है। यह टारगेट करीब 30.6% की तेजी दिखाता है। रिपोर्ट में बागची की नियुक्ति को बैंक के लिए नया दौर शुरू होने वाला कदम बताया गया है।

HDFC Bank के शेयरों का हाल

HDFC बैंक का शेयर सोमवार को 2.31% की गिरावट के साथ 704.55 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, शुरुआत हरे निशान में हुई और स्टॉक पिछले बंद स्तर से करीब 2% उछल गया। लेकिन फिर मुनाफावसूली हावी हो गई।

पिछले 6 महीने में स्टॉक 8.62% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने करीब 27% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। बैंक का मार्केट कैप 5.40 लाख करोड़ रुपये है।

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एनएसयूआई का ‘जीवित लाश’ प्रदर्शन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

‘वोट चोरी’ के आरोपों और चुनाव आयोग की जवाबदेही की मांग को लेकर नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) ने सोमवार को जंतर-मंतर पर अनोखा प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया।

एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने ‘जीवित लाश’ बनकर प्रदर्शन करते हुए कहा कि यदि नागरिकों के वोट और लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित नहीं हैं तो लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं रह जाता। प्रदर्शन का नेतृत्व एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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एनएसयूआई के अनुसार, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने जाखड़ समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। श्री जाखड़ ने कहा कि वोट चोरी और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों का जवाब देने के बजाय छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई न डरेगी और न झुकेगी तथा हर मतदाता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

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GIFT Nifty दे रहा गैप-अप ओपनिंग के संकेत, क्या HDFC बैंक और IT आज संभालेंगे बाजार की कमान

Gift Nifty Indicator: 5 अक्टूबर को भारतीय बाजार में गैप-अप ओपनिंग की संभावना है, क्योंकि GIFT Nifty 140 अंक ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसे US में सख्त मॉनेटरी पॉलिसी (monetary tightening) को लेकर कम होती चिंताओं और तेल की कीमतों में गिरावट से सहारा मिल रहा है।

5 अक्टूबर को सुबह 7:47 बजे, GIFT Nifty 143 अंक ऊपर 22,633.5 पर ट्रेड कर रहा था। पिछले हफ्ते Nifty 50 और Sensex दोनों में लगातार आठवीं बार साप्ताहिक गिरावट देखी गई। इस गिरावट के पीछे विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में तेज़ बढ़ोतरी जैसे कारण थे, जिन्होंने रिस्क लेने की क्षमता को कम कर दिया।

संभावित गैप-अप ओपनिंग के पीछे ये चार मुख्य कारण हैं

1) कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई। मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल के बढ़ते एक्सपोर्ट और G7 देशों द्वारा तेल स्टॉक जारी करने से सप्लाई बढ़ रही है, जबकि ईरान युद्ध के बीच खाड़ी क्षेत्र में तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को और नुकसान की चिंताएं बनी हुई हैं।

0115 GMT तक ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 35 सेंट या 0.34% गिरकर $101.90 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $90.49 प्रति बैरल पर था, जिसमें 62 सेंट या 0.68% की गिरावट आई।

पिछले हफ्ते ब्रेंट ने अपनी ज़्यादातर बढ़त गंवा दी थी, जबकि WTI 1.6% नीचे था। यह गिरावट तब आई जब शुक्रवार को G7 देशों ने इमरजेंसी रिज़र्व से 100 मिलियन बैरल डीज़ल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई और US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बाद एनर्जी एक्सपोर्ट पर पाबंदियां न लगाने का वादा किया।

2) Accenture के Q4 नतीजे

1 अक्टूबर को Accenture के शेयरों में 22% की ज़बरदस्त उछाल आई, जो उनके लिए अब तक का सबसे अच्छा दिन साबित हुआ। कंपनी ने उम्मीद से बेहतर सालाना रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान जताया, जिससे IT कंसल्टिंग बिज़नेस की मज़बूती का पता चला। इस बिज़नेस पर AI-आधारित बदलावों (disruption) की चिंताओं का असर पड़ा था।

इस आउटलुक से पता चला कि ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनियाँ उन कंपनियों की मज़बूत मांग का फायदा उठा रही हैं जो जटिल कामों को ऑटोमेट करने और AI को अपनाने में मदद के लिए बाहरी टेक्नोलॉजी पार्टनर की तलाश कर रही हैं। इससे इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों के शेयरों में भी तेज़ी आई। कॉग्निजेंट के शेयरों में लगभग 8% और IBM में लगभग 3% की बढ़त हुई। भारतीय प्रतिद्वंद्वियों विप्रो और इंफोसिस के ADRs में भी 6% से 7% के बीच बढ़त देखी गई।

3) ग्लोबल स्तर पर सकारात्मक संकेत

सोमवार को एशिया में शेयरों की शुरुआत मजबूत रही, जबकि डॉलर में थोड़ी गिरावट आई और बॉन्ड की कीमतें स्थिर रहीं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उम्मीद से कमजोर अमेरिकी जॉब्स डेटा के बाद निवेशकों ने फेडरल रिजर्व द्वारा आक्रामक पॉलिसी टाइटनिंग साइकिल (ब्याज दरें बढ़ाने की प्रक्रिया) पर अपनी उम्मीदें कम कर दीं।

चीन, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में छुट्टियों के कारण एशिया में ट्रेडिंग कम रही, जिससे बाजारों को शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट की चालों से संकेत लेने पड़े।

पिछले हफ्ते के डेटा से पता चला कि सितंबर में अमेरिका में जॉब ग्रोथ उम्मीद से ज्यादा धीमी रही और पिछले दो महीनों के नॉन-फार्म पेरोल आंकड़ों में भारी कटौती की गई, जिससे इस महीने फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना लगभग खत्म हो गई।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, निवेशक अब इस महीने फेड द्वारा दरें बढ़ाने की संभावना केवल 22% मान रहे हैं, जबकि एक हफ्ते पहले यह संभावना 64% थी।

इस महीने फेड द्वारा दरें न बढ़ाने (पॉज़) की बढ़ती संभावना से जापान के निक्केई में सत्र की शुरुआत में 2% की बढ़त हुई, जबकि ऑस्ट्रेलियाई शेयरों में 0.5% की बढ़ोतरी हुई और जापान के बाहर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे बड़े इंडेक्स में 0.15% की बढ़त दर्ज की गई।

4) HDFC बैंक को नया CEO मिला

देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक ने गुरुवार को घोषणा की कि उसने अनूप बागची को तीन साल के लिए अपना अगला चीफ एग्जीक्यूटिव (CEO) नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब कोई बाहरी व्यक्ति इस संस्थान का नेतृत्व करेगा।

55 वर्षीय बागची, शशिधर जगदीशन की जगह लेंगे। जगदीशन ने अगस्त में फैसला किया था कि 26 अक्टूबर को उनका दूसरा तीन साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद वे दोबारा नियुक्ति नहीं चाहेंगे, जिससे उत्तराधिकार की एक अनियोजित और तेज प्रक्रिया शुरू हो गई।

वे ऐसे समय में कार्यभार संभाल रहे हैं जब मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं और धीमी परफॉर्मेंस से जूझ रहा है।

नए CEO की घोषणा के बाद HDFC बैंक के ADR शेयरों में लगभग 5% की बढ़त हुई।

टेक्निकल आउटलुक

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज के फाउंडर गौरव उदाणी ने कहा “निफ्टी के लगभग 115 अंक ऊपर, यानी 22,535 के आसपास खुलने की उम्मीद है, जो एक मजबूत गैप-अप शुरुआत का संकेत है। हाल की कमजोरी और इंडेक्स के अहम 22,500 ज़ोन के आसपास बंद होने के बाद, यह रिकवरी उत्साहजनक है, लेकिन बढ़त को बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।

“तत्काल सपोर्ट 22,450–22,500 के आसपास है, जबकि 22,750–22,850 पहला रेजिस्टेंस ज़ोन होगा। अगर निफ्टी 22,850 के ऊपर बना रहता है, तो रिकवरी 23,000 की ओर बढ़ सकती है। हालांकि, मैं शुरुआती चाल के पीछे भागने से बचूंगा और इसके बजाय गिरावट पर खरीदारी के मौके तलाशूंगा, बशर्ते इंडेक्स अहम सपोर्ट ज़ोन को बनाए रखे। व्यापक ट्रेंड सतर्कता वाला बना हुआ है, और निकट अवधि के सेटअप में सार्थक सुधार के लिए 23,050 के ऊपर लगातार बने रहना जरूरी होगा। तब तक, उतार-चढ़ाव और इंट्राडे में अचानक बड़े बदलावों से इनकार नहीं किया जा सकता है।”

 

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प्रधानमंत्री जीत तय मानता है, जनता धोखा देती है!

यह दिल्ली की सत्ता की पुरानी बीमारी है। सत्ता में बैठ कर प्रधानमंत्री को धीरे-धीरे विश्वास होने लगता है कि उसने भारत को समझ लिया है। जनता को पढ़ लिया है। किसे राशन चाहिए, किसे आरक्षण, किस जाति को क्या चाहिए, किस धर्म को किससे डराना है, किस लाभार्थी को कितने रुपये देने हैं और किस नारे से चुनाव जीतना है, इसका हिंसाब लगातार पकाया जाता है। नरेंद्र मोदी-अमित शाह तो यों भी चौबीसों घंटे हिसाब बनाते है। इनकी सर्वे टीम, लगातार काम करती है। पार्टी, संघ संगठन अलग से सर्वे, फीडबैक देते है। दरबारी पूजा करते ही है तो प्रचारतंत्र से पूरे देश को मीडिया, सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम चौबीसों घंटे, सातों दिन खुद मोदी बताते है कि वे लोगों की भलाई के लिए कैसे दीन-रात अपना खून सूखा रहे है!

जवाहरलाल नेहरू को छोडकर हर प्रधानमंत्री भारत के मतदाताओं के साथ इसी विश्वास में जीया है कि जब इतना कर रहे है तो लोग उन्हे बदले में उन्हे ही वोट देंगे। न कि लोहिया की भीड, जनसंघ के नारों और समाजवाद को कोसने वाले स्वतंत्र पार्टी के उधमियों को। बावजूद इसके नेहरू के बाद हर प्रधानमंत्री को जनता ने तब भी सत्ता से बेदखल किया जब वे शाईनिंग इंडिया जैसी बातों में झूमते-झूमाते हुए थे।

ऐसा इंदिरा गांधी के साथ हुआ। राजीव गांधी, नरसिंह राव के साथ हुआ तो अटलबिहारी वाजपेयी के साथ भी हुआ। फिर दस वर्ष की मनमोहन सिंह सरकार के साथ हुआ। वजह हर बार एक नहीं थी। कहीं आंदोलन था, कहीं भ्रष्टाचार मुद्दा था, कहीं विपक्ष एक हुआ, कहीं महंगाई और स्थानीय असंतोष था। लेकिन हर बड़ी चुनावी हार में एक समानता जरूर थी। सत्ता को अपने बनाए गणित पर चुनावी मतगणना तक भरोसा था कि वे जीत रहे है। और मुझे पता है सरकारी खुफिया एजेंसियां भी ऐसे ही हिसाब, ऐसे मुगालतों में रही है।

सोचें, इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में क्या बाकी छोड़ा था? विपक्ष जेल में, प्रेस पर सेंसरशिप, प्रशासन सरकार के हाथ और प्रधानमंत्री की सत्ता अपने चरम पर। मगर 1977 में जब चुनाव हुआ तो कांग्रेस 154 सीटों पर रह गई। वही लावारिस जनता पार्टी ने 295 सीटें जीती। स्वयं इंदिरा गांधी रायबरेली, संजय गांधी अमेठी हार गए। जिस सत्ता के सामने देश खामोश दिखाई देता था, उसी खामोशी ने मतपेटी में उसका फैसला किया।

और राजीव गांधी! दिसंबर 1984 में किसे कल्पना थी कि नौजवान प्रधानमंत्री का चक्रवर्ती जनादेश पांच वर्ष भी नहीं टिकेगा? उन्होने 1984-85 में 414 सीटें जीती थीं। 1989 में उनकी कांग्रेस 197 सीटों पर रह गई।

भारत में हर बडी चुनावी हार सरकार, सत्ता के हर तरह के दुरूपयोग, आंतक, चुनावी धांधलियों, शाईनिंग इंडिया जैसे ढिढोरों के बावजूद हुई है। सोचे, किसने सोचा शाईनिंग नेतृत्व, शाईनिंग इंडिया के बावजूद प्रधानमंत्री वाजपेयी 2004 में सोनिया गांधी के आगे हारेंगे? कोई माने या न माने अन्ना, केजरीवाल के आंदोलनों, अपनी भारी-भरकम वर्चुअल कैंपेनिंग के बावजूद नरेंद्र मोदी को भी भरोसा नहीं था कि हिंदीभाषी इलाके में उनकी आंधी जैसे चुनाव परिणाम होंगे!

आगे 2024 के चुनाव में जो हुआ वह सामान्य नहीं था। ध्यान रहे ये चुनाव अयोध्या में राममंदिर की प्राणप्रतिष्ठा के बाद हुए थे। बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उस उत्तरप्रदेश में भी कम सीटे मिली जहां रामजी का नगाड़ा घर-घर गूंजा था। भाजपा 303 से घटकर 240 सीटों पर सिमटी। गठबंधन से जरूर बहुमत बचा, लेकिन भाजपा अपना अकेला बहुमत तो खो बैठी थी।

तभी से नरेंद्र मोदी- अमित शाह मतदाताओं की सूचियों को सुधारने के नाम पर उन्हे कैसे मनमाफिक बनवाने के अभियान में जुटे है, इसके ढेरों किस्से, साक्ष्य अब जगजाहिर है। जीतने की ऐसी हठ से स्वभाविक सवाल है कि मोदी के रहते कुल मतदाताओं की संख्या में क्या संघ परिवार-भाजपा पचास प्रतिशत से ऊपर की संख्या वफादार वोटों, भक्तों की बनवा लेगै? आखिर इसके बिना तो लगातार चुनाव को गारंटीनुमा जीतना संभव नहीं है? क्या लोग ऐसा होने देंगे? गली-गली, घऱ-घर में किसी के नाम होने, किसी के कटे होने की वासत्विकताओं में क्या लोगों को जाहिर नहीं होगा कि वोटर लिस्ट की ऐसी गडबडी किसलिए? नतीजतन वही वही मौन सत्ता पलट क्रांति होगी जैसे इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ हुई थी।

मगर प्रधानमंत्री ऐसे नहीं सोचता। वह सत्ता है तो मुमकिन के विश्वास में जीता होता है।

ऐसा आत्मविश्वास मैंने लालू यादव के समय के बिहार में देखा था तो एनटी रामराव, वीपीसिंह (राजा ने बांधी गांठ, पिछड़ा पावे सौ में साठ)। या कांसीराम-मायावती का हुंकारा-जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी। सोचे वीपीसिंह, मायवती, लालू-राबडी यादव का गणित आधारित चक्रवर्तीय शासन कितनी पीड़ी फला-फूंला?

पुराने नेताओं और नरेंद्र मोदी की गणित में एक बुनियादी फर्क है। नरेंद्र मोदी ने अजैविक, दैवीय जन्म के विश्वास में हिंदुओं में अपना भक्ति आंदोलन बनाया है। बावजूद इसके जरा गौर करे कि इन कथित भगवानजी को भी चुनाव आयोग के जरिए वोटरलिस्ट का पुर्नलेखन करवाना पड रहा है। उसी बूते तो भगवानजी को विश्वास है, संघ-भाजपा के सत्ताभोगियों की तैयारियां है कि 2047 तक तो उनका राज पक्का है। 2034 तक मोदी, 2034 से 2043 तक अमित शाह और 2043 -2047 के सौ वर्षीय भारत के युगप्रवर्तक प्रधानमंत्री होंगे योगी आदित्यनाथ! कल्पना करें तब तक एक नंबर बन चुके चीन के आगे भारत के नेतृत्वकर्ता के चेहरे पर।

हां, गांठ बांधे रखे मोदी है तो सब संभव है। दरअसल हजार साला गुलामी में जीया हुआ, धड़कता हुआ भक्त हिंदू ऐसे ही सोचा करता है। यही हिंदू राष्ट्र का सत्य है और भविष्य की खामोख्याली है।

इसलिए उन बातों, उन वीडियों को नहीं देखे जो दो अक्टूबर को मुंबई में नौजवानों के विशाल हूजुम में मौजूद है या दिल्ली में मौजूद था। नौजवान जंतर-मंतर पर बैठ कर भले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले या ज्ञानेश कुमार का। प्रदर्शन कॉकरोचों का हो, आम आदमी-वामपंथियों का हो या कांग्रेस-ममता बनर्जी और विपक्षी गठजोड़ का, इन सबका नमोदी- शाह पर रत्ती भर असर नहीं होना है!

नोट रखे भारत में सत्ता प्रदर्शन नहीं देखती। स़डक का गुस्सा नहीं समझती। सत्ता हमेशा अपने आंकड़े देखती होती है। दिल्ली की सत्ता की खूबी है जो प्रधानमंत्री और उसके अनुचरों को सौ टका विश्वास दिलाए रहती है कि आप प्रधानमंत्री नहीं, भारत भाग्य विधाता हैं। हम जनता के लिए इतना कुछ तो कर रहे हैं। भारत अब शाइनिंग इंडिया है। आप माईबाप, हुजूर सभी को रोटी खिला रहे हैं। राशन दे रहे है। घर दिया। शौचालय दिया। गैस दी। राशन दिया। खाते में पैसा दिया। रामजी की ऊंगली पकड़ उन्हे राममंदिर में प्रतिष्ठित किया। भारत का दुनिया में डंका बजा हुआ है। औरतें भी कह रही हैं, हमने नमक खाया है तो मोदीजी को ही वोट देंगे। इं

दिरा गांधी ने भी सब किया था। वाजपेयी, उनके साथी धुरंधरों, प्रमोद महाजन, वेंकेया, जेतली, सुषमा जैसे ढेरों नाम शाईनिंग इंडिया से देश गुंजाते हुए थे। ध्यान रहे दंगों के बाद की हिंदू राजनीति के पीक के बावजूद मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने प्रदेश गुजरात में 26 सीटों में से 14 सीटे ही भाजपा को जीता पाए थे।

और हर बार वही कहानी। चुनावी मतगणना के दिन ही सत्ता को मालूम होता है अरे यह क्या! सो नोट रखे भारत का मतदाता भी कभी किसी प्रधानमंत्री की स्थायी संपत्ति नहीं हुआ। भक्तों की भी आस्था के भगवान समय अनुसार चुपचाप बदलते रहते है!

ज्ञानेश है भाजपा का हथियारः उद्धव

मुंबई। शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ‘हथियार’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को रद्द करने और भविष्य के चुनाव मतपत्र से कराने की मांग की।

सीईसी और एसआईआर के खिलाफ ठाकरे बंधुओं के नेतृत्व में मुंबई में निकाले गए ‘विराट गर्जना मोर्चा’ में हजारों लोग शामिल हुए। मार्च के बाद हुई रैली में कांग्रेस नेता बालासाहेब थोराट और विजय वडेट्टीवार तथा शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख भी शामिल हुए।

उद्धव ठाकरे ने सवाल किया कि अगर एसआईआर मतदाता सूची से बांग्लादेशियों को बाहर करने के लिए कराया गया था तो सरकार बताए कि देश में अवैध रूप से रह रहे कितने बांग्लादेशियों का पता लगाया गया है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘ज्ञानेश कुमार भाजपा का हथियार हैं।’

निर्वाचन आयोग को निशाना बनाते हुए उद्धव ने दावा किया कि महाराष्ट्र में एसआईआर के दौरान दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह की कवायद में पश्चिम बंगाल में 30 लाख और तमिलनाडु में 70 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

उद्धव ठाकरे ने नूर्नबर्ग मुकदमों की तर्ज पर भाजपा नेताओं के खिलाफ अभियोजन की चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, ‘भाजपा और इन अधिकारियों को समझ लेना चाहिए कि देश में भी ऐसा ही होगा।’

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों की लड़ाई किसी एक पार्टी या नेता, धर्म या जाति के लिए नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता के लिए है। उद्धव ने दावा किया, ‘भाजपा को समझ लेना चाहिए कि लोग आज शांत हैं। अगर वे आक्रोशित हो गए तो वे उसका सिंहासन जला देंगे।’

उद्धव ने भाजपा पर न केवल वोट और विधायकों को ‘चुराने’ का आरोप लगाया, बल्कि अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे को भी ‘चुराने’ का आरोप लगाया।

शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़े मामले की तत्काल सुनवाई नहीं करने को लेकर उच्चतम न्यायालय की भी आलोचना की। यह मामला राज्य में उपचुनाव से एक दिन पहले तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया था। अदालत इस मामले पर पांच अक्टूबर को सुनवाई करेगी, जबकि राज्य की दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव छह अक्टूबर को होने हैं।

उद्धव ने दावा किया, ‘यह दिखाता है कि वे सभी संस्थानों को किस तरह नियंत्रित कर रहे हैं।’ राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में एसआईआर की प्रक्रिया रद्द करने की मांग करते हुए कहा कि देश में भविष्य के चुनाव मतपत्र के जरिए कराए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि वे 2017-18 से ही राजनीतिक नेताओं को निर्वाचन निकाय में कथित ‘अनियमितताओं’ के बारे में बताते रहे हैं।

मनसे प्रमुख ने कहा कि उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची के मुद्दे पर तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। उन्होंने दोनों नेताओं से इन मुद्दों के स्पष्ट होने तक चुनाव का बहिष्कार करने का आग्रह भी किया था।

दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू हुआ विरोध मार्च कुछ ही दूरी तय कर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) मुख्यालय पहुंचा। एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में आयोजित इस मार्च में सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने या उनके इस्तीफे की मांग की गई।

मार्च में राजनीतिक दलों के झंडे ले जाने की अनुमति नहीं थी। प्रतिभागियों से केवल राष्ट्रीय तिरंगा साथ रखने को कहा गया था। प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि शहर एक बार फिर स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आया है। सभी भारतीयों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए दीपके ने कहा, ‘अब या कभी नहीं।’

85 पदकों के साथ भारत चौथे स्थान पर

नागोया। जापान की संस्कृति और मेहमाननवाजी की शानदार झलक के साथ संगीत और रोशनी से सजे भव्य समारोह में रविवार को आइची-नागोया एशियाई खेलों का समापन हो गया। भारत 21 स्वर्ण सहित 85 पदकों के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। भारत ने 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते। कुल 85 पदकों का प्रदर्शन चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले एशियाई खेलों के मुकाबले 21 पदक कम रहा।

चीन लगातार 12वें एशियाई खेलों में पदक तालिका में शीर्ष पर रहा। उसने 169 स्वर्ण, 89 रजत और 83 कांस्य सहित कुल 341 पदक जीते। विदेश में आयोजित एशियाई खेलों में यह चीन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।मेजबान जापान 83 स्वर्ण, 95 रजत और 91 कांस्य सहित 269 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। दक्षिण कोरिया ने 39 स्वर्ण, 43 रजत और 68 कांस्य पदक जीते।

दो सप्ताह से अधिक समय तक चली कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद एशिया के 45 देशों के खिलाड़ी मिजुहो पार्क एथलेटिक स्टेडियम में समापन समारोह में शामिल हुए। खेलों के दौरान 350 से अधिक रिकॉर्ड बने, जिनमें कम से कम 50 विश्व रिकॉर्ड शामिल हैं। हालांकि आयोजन से पहले खेल लॉजिस्टिक समस्याओं और कुप्रबंधन से प्रभावित रहे थे।

करीब 90 मिनट तक चले समापन समारोह में एशिया ओलंपिक परिषद (ओसीए) के अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने खेलों के समापन की घोषणा की। इसके बाद ओसीए का ध्वज 2030 एशियाई खेलों की आयोजन समिति के प्रतिनिधि को सौंपा गया। अगले एशियाई खेल दोहा में होंगे। ओसीए ध्वज दोहा को सौंपने से संबंधित कार्यक्रम में कतर के ओलंपिक और विश्व चैंपियन मुताज बाशिम भी शामिल हुए।

ट्रैप निशानेबाज नीरू ढांडा के नेतृत्व में भारतीय दल ने भी उत्सवी माहौल में हिस्सा लिया। दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतने वाली नीरू के साथ सफेद और नीले रंग की पोशाक पहने लगभग 30 भारतीय खिलाड़ियों और अधिकारियों ने एथलीट परेड में हिस्सा लिया और तिरंगा लहराया।समापन समारोह की ‘वन एशिया’ अवधारणा को अभिव्यक्त करने के लिए स्टेडियम के बीचोंबीच षट्भुजाकार मंच बनाया गया था। यह समारोह का मुख्य आकर्षण रहा। भव्य समापन के दौरान इसे लालटेन से सजाया गया, जो जापानी गर्मियों का विशिष्ट प्रतीक है।

ओसीए अध्यक्ष शेख जुआन बिन हमद अल थानी ने कहा कि आइची-नागोया एशियाई खेलों ने एशियाड के लिए मानक ऊंचा किया है। उन्होंने कहा, ‘मैं आइची-नागोया एशियाई खेलों को आधिकारिक रूप से समाप्त घोषित करता हूं।’

अल थानी ने कहा, ‘आज रात आइची-नागोया 2026 का ध्वज उतारते हुए हम इन खेलों का समापन करते हैं। लेकिन हम एशियाई खेलों के लिए मानक ऊंचा करते हैं। लौ बुझ सकती है, लेकिन इसने जिन उम्मीदों को प्रज्वलित किया है, वे हमारे महाद्वीप में उज्ज्वल रूप से जलती रहेंगी।’ उन्होंने कहा, ‘हमने शानदार वापसी, अंतिम सेकेंड में मिली जीत और नाटकीय रूप से मामूली अंतर से मिली हार देखी है। हमने नए किशोर सुपरस्टारों और अनुभवी चैंपियनों के उभरने का जश्न मनाया है, जिन्होंने अपनी प्रभावशाली विरासत में और उपलब्धियां जोड़ी हैं।’

ओसीए अध्यक्ष ने कहा, ‘हमने खिलाड़ियों को विपरीत परिस्थितियों और चोटों से जूझते हुए जीत हासिल करते देखा है और प्रतिद्वंद्वियों को अविश्वसनीय खेल भावना और सम्मान का प्रदर्शन करते देखा है।’