होर्मुज में तेल टैंकर समुद्री माइन से टकराया:जहाज में ब्लास्ट के बाद लगी आग, 10 दिन में 13 घटनाएं

होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर समुद्री माइन से टकरा गया। इसके बाद जहाज में ब्लास्ट हुआ और आग लग गई। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने यह जानकारी दी। हालांकि, उन्होंने जहाज की पहचान और उसके झंडे वाले देश का नाम नहीं बताया। रॉयटर्स के मुताबिक, 28 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच होर्मुज स्ट्रेट के आसपास तेल, लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) ले जाने वाले टैंकरों से जुड़ी 13 घटनाएं हुईं। JMIC बोला- ईरान समुद्री रास्तों पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहता है अमेरिकी नौसेना के नेतृत्व वाले जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने रविवार को कहा कि होर्मुज में ऐसी गतिविधियां जारी हैं। उन्होंने आगे कहा, “इन गतिविधियों से पता चलता है कि ईरान समुद्री रास्तों पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना चाहता है और वहां से गुजरने वाले जहाजों पर दबाव बनाए रखना चाहता है।

भारत अघोषित आपातकाल की स्थिति में : वांगचुंक

भारत के जानेमाने शिक्षा सुधारक, पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुंक ने शनिवार को कहा कि भारत अघोषित आपातकाल की स्थिति है।

उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, “शुक्रवार को जब मैंने आज के विरोध-प्रदर्शन के लिए एकता एवं शांति की अपील करते हुए एक मैसेज पोस्ट किया था, तब मैंने कभी नहीं सोचा था कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र अघोषित आपातकाल की स्थिति में होगा।

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उन्होंने लिखा मुझे खुशी थी कि आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए बहुत सारे नेता थे लेकिन अब मुझे पता चला है कि उन सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुझे उम्मीद है कि गिरफ्तार किए गए लोगों को जल्द ही रिहा किया जाएगा। अगर उन्हें रविवार तक रिहा नहीं किया गया, तो मुझे अनशन या पदयात्रा करने पर विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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जंतर-मंतर विरोध-प्रदर्शन के बीच अभिजीत दीपके की दादी का निधन, अभी हिरासत में हैं CJP फाउंडर

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार, 10 अक्टूबर को राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस बीच खबर है कि CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके की दादी का उनके पैतृक गांव में निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं। दीपके इस विरोध-प्रदर्शन के लिए मुंबह से दिल्ली आए हैं।

दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को राष्ट्रीय राजधानी में उनका प्लेन उतरते ही हिरासत में ले लिया। दीपके का पैतृक गांव महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में संतुक पिंपरी है। दीपके का परिवार छत्रपति संभाजीनगर में रहता है। लेकिन दादी पैतृक गांव में ही रह रही थीं और शनिवार सुबह वहीं उनका निधन हो गया। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थीं।

दीपके के माता-पिता हिंगोली जाने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन यह अभी साफ नहीं है कि दादी के निधन के बाद दिल्ली पुलिस दीपके को उनके पैतृक गांव जाने की इजाजत कब देगी। CJP ने एक बयान जारी कर अभिजीत दीपके को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। दावा किया कि है यह उसके नेताओं को प्रस्तावित प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा है।

CJP ने कहा है कि जब तक दीपके, दास और रांका हिरासत में रहेंगे, तब तक पार्टी के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे। CEC ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की आड़ में मतदाता सूचियों में गड़बड़ी करने का आरोप लगा है। साथ ही वोटर रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज ‘फॉर्म 6’ में बदलाव के लिए दो सहयोगी निर्वाचन आयुक्तों की आपत्ति को दरकिनार करने के आरोप भी हैं।

आकाशवाणी भवन के निकट पुलिस पर पथराव, दो पुलिसकर्मी घायल

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, CJP के प्रदर्शन के दौरान शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने अवरोधकों को लांघने के बाद आकाशवाणी भवन के निकट इम्तियाज अली मार्ग पर सुरक्षाकर्मियों पर कथित तौर पर पथराव किया। इसमें दो पुलिसकर्मी घायल हो गए। दोपहर में 25 से 30 प्रदर्शनकारियों ने इम्तियाज अली मार्ग पर लगे अवरोधकों को पार कर सुरक्षाकर्मियों पर पथराव किया। इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और कार्रवाई के दौरान दो पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शनिवार सुबह साढ़े 10 बजे शुरू होना था, लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को तय स्थल तक पहुंचने से रोक दिया। नई दिल्ली जिले में निषेधाज्ञा लागू है। कनॉट प्लेस सहित कई स्थानों से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है, जबकि कई अन्य को लौटा दिया गया। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और जंतर-मंतर के पास किसी भी जमावड़े को रोकने के लिए प्रमुख चौराहों व संपर्क मार्गों पर पुलिसबल तैनात कर दिया।

सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, कई नेता हिरासत में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित अन्य मांगों में शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं माकपा के एमए बेबी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बार्डर सहित कई इलाकों में पहरा सख्त करते हुए कई जगह पर बैरिकेडिंग लगा दी और सुबह से ही यातायात पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गईं।

वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रमुख चौराहों पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में यातायात जाम और रूट डायवर्जन की चेतावनी देते हुए एडवाइजरी जारी की। पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जगह जगह पहुंचे। इनमें मिंटो ब्रिज, दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रभावित चौराहों और मार्गों में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोल चक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोल चक्कर, गोल डाकखाना और विंडसर प्लेस शामिल हैं।

पुलिस ने सीजेपी संस्थापक सर्वश्री दीपके, दास और रांका को राष्ट्रीय राजधानी में तब हिरासत में ले लिया जब वे मुंबई से यहां आए हवाई जहाज से उतरने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उनको विमान के भीतर से अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पार्टी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

श्री दीपके ने एक पूर्व रिकार्डेड मैसेज से यह जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व की हिरासत के बावजूद यह प्रदर्शन जारी रहेगा तथा श्री कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग पर आंदोलन पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि श्री दीपके की दादी का निधन हो गया। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं की इस तरह की गई हिरासत कार्यकर्ताओं के हौसलों को नहीं डिगा सकती और यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक संघर्ष है।

बयान में कहा गया जब राज्य सत्ता लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का सहारा लेती है, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को स्वयं कमान संभालनी होगी । इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एक संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के एक आवासीय फ्लैट से चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। श्री राठी ऐसे वीडियोज के लिए जाने जाते हैं जिनमें केंद्र सरकार की कठोर आलोचना की जाती है।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्य दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। निर्धारित प्रदर्शन स्थल के पास एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बसों में भरकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया। सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए अब तक हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस प्रदर्शन की अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पार्टी द्वारा प्रस्तुत सूचना कोई औपचारिक आवेदन नहीं थी, क्योंकि नियमों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने और राजधानी की ओर प्रदर्शनकारियों के आने को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, बाजारों और मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के आदेश दिए हैं तथा शहर में आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। दिल्ली के लोकप्रिय दिल्ली हाट से छात्रों की भीड़ का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को भी “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता गाते हुए देर दोपहर हिरासत में ले लिया गया।

ममता बनर्जी और उनके सांसदों और समर्थकों का एक समूह प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिए जाने से पहले अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर तख्तियां लेकर धरने पर बैठा था। ममता बनर्जी ने एक पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय संवाददाताओं से कहा देश में क्या चल रहा है, सबको पता है । दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर देश में तनाव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सरकार उनके द्वारा अशांति भड़काने के प्रयासों से सख्ती से निपटेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बार-बार की चुनावी हार के बाद हताश होकर काम कर रहे हैं और चेतावनी दी कि पार्टी तथा उसके समर्थक उनके इन प्रयासों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा भारत सरकार आपके द्वारा तनाव पैदा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सख्ती से निपटेगी । कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को “किले” में तब्दील करने का आरोप लगाया, जिसके तहत पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा राष्ट्रीय राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है, जहाँ हर तरफ सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ।कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार से सवाल करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबायी जा रही है और देश को ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदला जा रहा है।

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श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबरों और कंटेंट क्रिएटरों सहित सरकार से सवाल करने वाले सभी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कायरता आज पूरी तरह सामने आ गयी है। हिरासत, गिरफ्तारियां, जेल, लाठियां और पैलेट भी भारत के लोगों को रोक नहीं सकते। स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवा देश की नियति तय करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं । कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर इस तानाशाही शासन के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ती रहेगी। भारत की आजादी के लिए खून बहाने वाली कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश सरकार की बड़ी भूल साबित होगी।

श्री यादव ने ‘एक्स’ पर कहा किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा । उन्होंने कहा कि देश की युवा ऊर्जा उनके साथ है। भाजपा सरकार अगर यह समझ रही है कि वह ताकत के बल पर जनता को रोक लेगी, तो यह उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। श्री यादव ने कहा कि ‘जंतर-मंतर’ अब केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। पुलिस ने सुबह ही जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में माकपा महासचिव एमए बेबी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, केरलम के पूर्व वित्त मंत्री केएन. बालगोपाल, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, मणिकंतन वी. गोविंदान, श्रीमती, वृंदा करात, के के शैलजा और पी राजीव शामिल हैं।

श्रीमती करात ने फेसबुक पेज पर लिखा मोदी और उनकी सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के लोग उठ खड़े हुए हैं और वे उन्हें रोक नहीं सकते। दिल्ली का दिल उसके सभी लोगों का है। ये दबाने वाले तरीके हमें नहीं रोक पाएंगे! चलो जंतर-मंतर की ओर!”

केरलम भवन से बाहर निकलते ही पुलिस ने वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने श्री विजयन, श्री ब्रिटास और श्री केएन बालगोपाल को छोड़कर अन्य नेताओं को हिरासत में लिया था लेकिन जब ये तीनों नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई और पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री विजयन ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों से उनकी सरकार चुनने का अधिकार छीना जा रहा है और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के इशारे पर किया है और सरकार अब उन्हें बचाने के लिए गैर-कानूनी तरीके अपना रही है लेकिन यह विरोध आज खत्म नहीं होगा। श्री विजयन ने कहा कि भारत देश कोई पुलिस राज्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश है और सत्ताधारी दल के मन में लोकतंत्र के प्रति कोई सम्मान न होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सांसद जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने और उनकी हिरासत की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं सहित वरिष्ठ और युवा वकीलों की कथित हिरासत का मुद्दा उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दिए गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बिना किसी कानूनी आधार के रोके गए वकीलों को तत्काल कानूनी सहायता प्रदान करने, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

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व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया:ट्रम्प बोले- वे मेरी वफादर समर्थक; 7 बार से इस पद पर महिला चुनी गईं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को केटी जकारिया को व्हाइट हाउस की नई प्रेस सेक्रेटरी बनाने का ऐलान किया। कैरोलिना लेविट के पद छोड़ने के बाद करीब दो महीने से यह पद खाली था। जकारिया कैलिफोर्निया की वकील और कंजर्वेटिव विचारों वाली कमेंटेटर हैं। वह ट्रम्प की बड़ी समर्थक हैं और कई बार उनकी जमकर तारीफ कर चुकी हैं। ट्रम्प ने नियुक्ति का ऐलान करते हुए कहा कि जकारिया का उनके समर्थन का रिकॉर्ड बेदाग है। ट्रम्प ने उन्हें वफादार और प्रतिभाशाली समर्थक बताया। केटी जकारिया से पहले लगातार 6 महिलाएं इस पद की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। आखिरी पुरुष प्रेस सेक्रेटरी शॉन स्पाइसर थे, जिन्होंने 2017 में ट्रम्प के पहले कार्यकाल की शुरुआत में यह पद संभाला था। ट्रम्प ने फैसला लेने से पहले लेविट से भी सलाह ली ट्रम्प ने यह फैसला लेने से पहले अपने कई करीबी सलाहकारों से बात की थी। इनमें पूर्व प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट भी शामिल थीं। लेविट ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के बाद अगस्त के आखिर में प्रशासन छोड़ दिया था। उनकी जगह लेने के लिए CNN के कंजर्वेटिव कमेंटेटर स्कॉट जेनिंग्स, ट्रम्प की पूर्व वकील अलीना हब्बा और डिप्टी प्रेस सेक्रेटरी एना केली के नाम भी चर्चा में थे। करीब दो महीने तक प्रेस सेक्रेटरी का पद खाली रहने के कारण व्हाइट हाउस के प्रेस ब्रीफिंग रूम में आखिरी औपचारिक ब्रीफिंग 3 सितंबर को हुई थी। जकारिया ट्रम्प की कंपनी में भी काम कर चुकी हैं 42 साल की केटी जकारिया के चार बच्चें हैं। वे कैलिफोर्निया के वेस्टलेक विलेज में रहती हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन और कानून की पढ़ाई पेपरडाइन यूनिवर्सिटी से की है। जून से वह ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में सीनियर कम्युनिकेशन एडवाइजर के तौर पर काम कर रही थीं। यह वही कंपनी है जो ट्रम्प के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ को चलाती है। इसके अलावा पिछले एक साल में फॉक्स न्यूज और न्यूजमैक्स पर वह कई बार नजर आई हैं। जकारिया खुद को फॉक्स न्यूज की कमेंटेटर बता चुकी हैं। हालांकि, चैनल ने साफ किया है कि वह वहां कभी कर्मचारी नहीं रहीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रम्प ने जकारिया को टीवी पर देखने के बाद पसंद किया। जकारिया ने टीवी कार्यक्रमों में ही नहीं, बल्कि लंबे लेख लिखकर भी ट्रम्प के नेतृत्व और उनकी राजनीतिक उपलब्धियों की तारीफ की है। जकारिया ने नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट का विरोध किया था जकारिया फॉक्स न्यूज जैसे बड़े अमेरिकी न्यूज चैनलों पर ट्रम्प की नीतियों का बचाव करती रही हैं। उन्होंने ट्रम्प को अमेरिकी राजनीति का अब तक का सबसे बड़ा खिलाड़ी बताया था और उनकी तुलना खेल जगत के दिग्गजों से की थी। जकारिया के विचार ट्रम्प से काफी मिलते हैं। उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के गिरफ्तारी वारंट का भी विरोध किया था। वह ईरान के खिलाफ भी सख्त रुख रखती हैं। जुलाई में जकारिया ने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की आलोचना की थी। ममदानी ने कहा था कि नेतन्याहू के न्यूयॉर्क आने पर उन्हें गिरफ्तार कराने के कदम उठाए जा सकते हैं। इस पर जकारिया ने कहा था कि ममदानी ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे वह किसी स्वतंत्र देश के शासक हों।

राष्ट्रपति से मिले विपक्षी नेता

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों के 10 सांसदों का एक दल शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला। विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी के आरोप लगा रहा है। राष्ट्रपति से विपक्षी पार्टियों के नेताओं की मुलाकात रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। विपक्षी नेताओं ने पहले कहा था कि सांसदों और अन्य लोगों का करीब तीन सौ लोगों का एक समूह राष्ट्रपति से मिलना चाहता है। लेकिन बाद में चुनिंदा नेता राष्ट्रपति से मिले।

इससे पहले विपक्षी सांसद और अन्य नेता संसद भवन से मार्च करते हुए रायसीना हिल्स पर स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। इस बीच प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षाकर्मियोंसे बहस हो गई, जिसके बाद वे सांसदों के साथ विजय चौक पर ही धरने पर बैठ गईं। बहरहाल, राहुल गांधी के साथ विपक्ष के कई नेता मार्च में शामिल हुए। ममता बनर्जी भी मार्च में शामिल थीं और राष्ट्रपति से मिलीं। ‘सेव डेमोक्रेसी’ का बैनर लेकर विपक्षी सांसदों ने मार्च किया।

राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने से पहले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इस बैठक में राहुल ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 14 अगस्त 1947 को दिया भाषण पढ़ा। उन्होंने कहा, ‘एक नई उम्मीद जन्म ले रही है और लंबे समय से संजोया गया सपना साकार हो रहा है। उम्मीद है कि यह सितारा कभी अस्त न हो और यह उम्मीद कभी निराश न हो’।

इससे पहले कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘हम आगे क्या कदम उठाएंगे, इसकी जानकारी आपको देंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। परसों तक हम अपने फैसले के मुताबिक आगे बढ़ते रहेंगे’। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन रोक दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है। लोकतांत्रिक देश में आंदोलन और जुलूस होते रहेंगे। सरकार को इन्हें उसी तरह संभालना चाहिए। लेकिन यह सरकार पूरी तरह तानाशाही तरीके से काम कर रही है’।

नंदीग्राम में BJP का रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन, हासी रानी रथ ने 1,22,800 वोटों से मारी बाजी

Nandigram Bypoll Results: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर बीजेपी ने ऐसी बाजी मारी, जिसने पुराने चुनावी रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। दरअसल, पार्टी की उम्मीदवार हासी रानी रथ ने उपचुनाव में 1,22,800 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की हैं। ​​उनकी इस जीत से मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की नंदीग्राम में राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो गई है।

हासी रानी रथ ने जीत के अंतर के मामले में सुवेंदु अधिकारी का पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। अधिकारी ने 2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम सीट से 82,000 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। जबकि इस बार बीजेपी उम्मीदवार ने उससे कहीं ज्यादा अंतर से जीत हासिल की।

जीत के बाद शुक्रवार को राज्य सचिवालय नबन्ना में सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि उन्हें पहले से ही हासी रानी रथ की बड़ी जीत का भरोसा था। उन्होंने बताया, “जब मैं नंदीग्राम में चुनाव प्रचार कर रहा था, तब मैंने सभी से कहा था कि हासी रानी रथ यहां 82,000 वोटों के मेरे जीत के अंतर को भी पार कर जाएंगी।”

रथ की जीत को अधिकारी ने बताया ऐतिहासिक

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में, अधिकारी ने रथ को ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ने वाली जीत के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह नतीजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास के एजेंडे और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व में वोटरों के भरोसे को दिखाता है।

उन्होंने इस नतीजे को पश्चिम बंगाल में बीजेपी के कामकाज पर मुहर बताया और पार्टी के विकास के एजेंडे की तुलना अपने विरोधियों के कुशासन और अव्यवस्था से की। उन्होंने इस जीत का श्रेय पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक नेतृत्व को भी दिया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं ने लगातार प्रचार किया और जमीनी स्तर पर मेहनत की, जिसका फायदा पार्टी को मिला।

बता दें कि यह उपचुनाव इसलिए कराना पड़ा क्योंकि सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा सीट अपने पास रखने के लिए नंदीग्राम सीट छोड़ दी थी। हासी रानी रथ के बेटे चंद्रनाथ रथ मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी थे।

फिलहाल, इस नतीजे से नंदीग्राम में बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है। यह सीट 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी अहम रही है। उस चुनाव में सुवेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट पर हराया था।

रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी बीजेपी ने दर्ज की जीत

इसके अलावा, रेजीनगर विधानसभा सीट पर भी बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की। पार्टी के उम्मीदवार शंखराव सरकार को 1,29,914 वोट मिले, उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी AJUP के गुलाम नबी आजाद उर्फ रॉबिन को 75,816 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रच दिया। गुलाम नबी आजाद को 54,098 वोट मिले।

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पाकिस्तान का नक्शा बदल अपनी ताकत बढ़ाना चाहते हैं मुनीर:4 प्रांतों को 15 हिस्सों में बांटने की तैयारी; पंजाब-सिंध की सियासी ताकत कमजोर होगी

पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर देश के 4 प्रांतों को 12 से 15 हिस्सों में बांटकर सियासत का पूरा गणित बदलना चाहते हैं। ब्रिटिश मैगजीन ‘द इकोनॉमिस्ट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम से पंजाब और सिंध में मजबूत राजनीतिक पार्टियों का दबदबा टूट सकता है। अभी इन प्रांतों की सरकारें केंद्र को चुनौती देने की ताकत रखती हैं। छोटे प्रांत बनने पर यह ताकत बंट जाएगी और इस्लामाबाद का दखल बढ़ेगा। इससे पहले से मजबूत सेना को देश की राजनीति और सरकार पर अपनी पकड़ बढ़ाने का मौका मिल सकता है। पंजाब और सिंध की सियासी ताकत कम होगी पाकिस्तान का पंजाब प्रांत पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) का गढ़ है, जबकि सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) का दबदबा है। दोनों पार्टियों की ताकत बड़े प्रांतों में उनकी मजबूत पकड़ से आती है। अगर इन प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटा जाता है, तो मौजूदा राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। पार्टियों को अलग-अलग छोटे प्रांतों में अपनी ताकत साबित करनी होगी। इससे बड़े नेताओं का प्रभाव घट सकता है और केंद्र सरकार को प्रांतीय राजनीति में दखल देने का ज्यादा मौका मिल सकता है। प्रांत को छोटे करने के पीछे दलील क्या है ‘द इकोनॉमिस्ट’ के मुताबिक, मुनीर का मानना है कि पाकिस्तान के प्रांत इतने बड़े हैं कि वहां प्रशासन ठीक से नहीं चल पा रहा। पंजाब में करीब 12.8 करोड़ लोग रहते हैं, जबकि क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा बलूचिस्तान है, जहां करीब डेढ़ करोड़ की आबादी है। बड़े इलाकों में लोगों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना मुश्किल होता है। ग्रामीण पंजाब में लोगों को बुनियादी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बलूचिस्तान में भी दूर-दराज के इलाकों तक सुविधाएं पहुंचाना चुनौती है। लेकिन पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था, महंगाई और कर्ज की समस्या सिर्फ प्रांतों के बड़े आकार से पैदा नहीं हुई। ऐसे में सवाल है कि प्रांतों को बांटने से आम लोगों की जिंदगी कितनी बदलेगी और सत्ता का फायदा किसे मिलेगा। पाकिस्तान में सेना पहले से ताकतवर पाकिस्तान में सेना कई बार सीधे सत्ता संभाल चुकी है। आज भी राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े मामलों में उसका खासा प्रभाव है। सेना के पास जमीन, कारोबार और बड़े संसाधन भी हैं। ऐसे में प्रांतों को बांटने से अगर मौजूदा राजनीतिक ताकत कमजोर होती है, तो सेना और केंद्र सरकार का दबदबा बढ़ सकता है। बड़े प्रांतों के मजबूत नेताओं के बजाय केंद्र को कई छोटी सरकारों से निपटना होगा। इससे प्रांतीय नेतृत्व की सामूहिक ताकत कम हो सकती है। 15 छोटे प्रांत बनाने या जिलों को ज्यादा ताकत देने पर विचार पाकिस्तान में दो रास्तों पर चर्चा है। पहला, 4 प्रांतों को बांटकर 12 से 15 नए प्रांत बनाना। दूसरा, करीब 160 जिलों को ज्यादा अधिकार देना, ताकि लोगों के काम के लिए उन्हें दूर न जाना पड़े। योजना मंत्री अहसान इकबाल इन दोनों विकल्पों का जिक्र कर चुके हैं।
नए प्रांत बनाने के लिए संविधान बदलना होगा। वहीं, जिलों को ज्यादा अधिकार देने से मौजूदा प्रांतों को बांटे बिना लोगों को सरकारी सुविधाएं आसानी से मिल सकती हैं। कौन-कौन से नए प्रांत बन सकते हैं? पाकिस्तान सरकार की तरफ से अभी आधिकारिक नक्शा जारी नहीं किया गया है, लेकिन जिन इलाकों की चर्चा है, वे कुछ इस तरह हैं- पंजाब: उत्तर पंजाब, मध्य पंजाब, दक्षिण पंजाब सिंध: कराची सिंध, मध्य सिंध, ऊपरला सिंध KP: उत्तरी KP, दक्षिणी KP, आदिवासी KP/फाटा रीजन बलूचिस्तान: पूर्व बलूचिस्तान, पश्चिम बलूचिस्तान, दक्षिणी बलूचिस्तान सिंध में पहले से प्रस्ताव का विरोध हो रहा सिंध विधानसभा ने 3 सितंबर को प्रस्ताव पास कर प्रांत को बांटने और उसके किसी हिस्से को केंद्र के अधीन करने का विरोध किया था। पाकिस्तान के संविधान के मुताबिक, किसी प्रांत की सीमा बदलने के लिए उसकी विधानसभा के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी जरूरी है। संसद की मंजूरी भी लेनी होगी। सिंध में कराची है, जो पाकिस्तान का प्रमुख कारोबारी केंद्र है। यहां सीमा बदलने से राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के बंटवारे को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। नक्शा बदलेगा तो सत्ता का गणित भी बदलेगा प्रांत छोटे होने से प्रशासन लोगों के करीब पहुंच सकता है, लेकिन असली सवाल यह है कि नई इकाइयों को कितने अधिकार मिलेंगे। अगर पैसा और फैसले लेने की ताकत केंद्र के पास ही रही, तो छोटे प्रांत सिर्फ नाम के लिए अलग होंगे। इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर पंजाब और सिंध की मौजूदा ताकत पर पड़ सकता है। बड़े प्रांतों की सियासी पकड़ कमजोर होने से केंद्र और सेना को फायदा मिल सकता है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में आटे के संकट से जूझ रहे लोग:20 किलो आटे का बैग 3300 रुपए पहुंचा, रोटी 20 से बढ़कर 30 रुपए हुई पाकिस्तान के पेशावर में आटे की कीमत तेजी से बढ़ने से लोग परेशान हैं। 20 किलो मोटे आटे का बैग 3,300 पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच गया है। आटे की कीमत बढ़ने का असर तंदूरों पर भी पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

हर राज्य में भाजपा नेताओं की एक ही शिकायत

भारतीय जनता पार्टी की करीब 20 राज्यों में सरकार चल रही है। लगभग सभी राज्यों में भाजपा के नेताओं की एक ही शिकायत है। वह शिकायत है कि अधिकारी बात नहीं सुनते। मजेदार बात यह है कि भाजपा के बहुत बड़े नेता भी यह शिकायत कर रहे हैं। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मंत्रियों की भी शिकायत है। दूसरी शिकायत यह है कि मुख्यमंत्री मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं और किसी को भरोसे में नहीं ले रहे हैं। पहली शिकायत का ही यह विस्तार है, जिसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री की शह पर अधिकारी दूसरे नेताओं को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। सोचें, भाजपा को सबसे ज्यादा अनुशासन वाली पार्टी माना जाता है। ऊपर से नरेंद्र मोदी और अमित शाह का नेतृत्व है, फिर भी पार्टी के नेता खुलेआम एक दूसरे की आलोचना कर रहे हैं और कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री बेलगाम हो गए हैं।

यह शिकायत लगभग सभी राज्यों की है लेकिन मध्य प्रदेश का घटनाक्रम सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। पिछले दिनों चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश का संगठन महामंत्री बनाया गया। उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मुख्यमंत्री की जम कर शिकायत की। जानकार सूत्रों का कहना है कि एक समय तो मंत्री के साथ मुख्यमंत्री की नोकझोंक भी हो गई। सीएम और डिप्टी सीएम के इस विवाद को संगठन महामंत्री ने संभाला।

बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर ने पार्टी के सभी नेताओं को तीन महीने के अंदर आपसी विवाद के मुद्दे सुलझाने और आंतरिक कलह समाप्त करने को कहा है। सूत्रों का कहना है कि उनकी मौजूदगी में हुई बैठक में प्रदेश के दो सबसे बड़े नेताओं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी शिकायत की। शिवराज सिंह चौहान 15 साल राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं और अभी केंद्र में मंत्री है, उन्होंने कहा कि जिले के कलेक्टर उनकी बात नहीं सुनते हैं। अमित शाह की टीम में राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया जा रहा है कि संगठन महामंत्री के साथ बैठक में कहा कि 15 दिन तक प्रयास करने के बावजूद मुख्यमंत्री से बात नहीं हो पाती है।

सोचें, पार्टी के साधारण नेताओं की क्या स्थिति होगी, जब इतने बड़े नेताओं की बात सीएम से नहीं हो पाती है और इतने बड़े नेताओं की बात कलेक्टर नहीं सुनते हैं! इस तरह की शिकायत राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार से लेकर ओडिशा तक की भाजपा सरकारों के मंत्री और वरिष्ठ नेता कर रहे हैं। हर जगह गुटबाजी की खबरें आ रही हैं। कई लोग कह रहे हैं कि सचमुच में भाजपा का कांग्रेसीकरण हुआ है।

नितिन नबीन सबसे युवा मार्गदर्शक!

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन अभी भाजपा के मार्गदर्शक मंडल में नहीं गए हैं। वहां लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, नरेंद्र मोदी और राजनाथ सिंह ही हैं। लेकिन प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपना मार्गदर्शक बताया है। यह कमाल की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को नितिन नबीन का नेतृत्व स्थापित करने के लिए इतनी मेहनत करनी पड़ रही है। वे जब राष्ट्रीय अध्यक्ष बने तब प्रधानमंत्री मोदी ने उनको कुर्सी पर बैठाने के बाद अपने भाषण में कहा कि नितिन नबीन उनके भी बॉस हैं। बुधवार, सात अक्टूबर को जब प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे हुए तो इस अवसर पर इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में मोदी ने अपने संबोधन में नितन नबीन को अपनी और पार्टी का मार्गदर्शक बताया।

याद करें क्या कभी नरेंद्र मोदी ने इस तरह की बात अपने प्रधानमंत्री काल में बने तीन भाजपा अध्यक्षों के बारे में कही है? जब वे प्रधानमंत्री बने उस समय राजनाथ सिंह अध्यक्ष थे। उसके बाद अमित शाह अध्यक्ष बने और फिर छह साल तक जेपी नड्डा पार्टी के अध्यक्ष रहे। याद नहीं आ रहा है कि इन तीनों में से किसी को नरेंद्र मोदी ने अपना बॉस या मार्गदर्शक कहा हो! सबको पता है कि वे पार्टी के सर्वोच्च नेता हैं और जो भी अध्यक्ष हुआ वह उनके आगे हाथ जोड़ कर खड़ा रहा और फूल देकर स्वागत करता रहा। फिर भी वे नितिन नबीन को बॉस और मार्गदर्शक बता रहे हैं तो उसका कारण यह है कि उनको पता है कि पार्टी के अनेक बड़े नेता अब भी नितिन नबीन का नेतृत्व स्वीकार करने में हिचक रहे हैं या अब भी वे इस बात को हजम नहीं कर पा रहे हैं कि नितिन नबीन राष्ट्रीय अध्यक्ष हो गए। इसलिए प्रधानमंत्री उनका नेतृत्व स्थापित कराने के लिए अपने संबोधन के जरिए मैसेज कर रहे हैं।