Neha Bora: प्रोटेस्ट में पुलिस को खूब छकाने के बाद देशभर में चर्चा का केंद्र बनीं नेहा बोरा JNU से कर रही हैं कैसी पढ़ाई?

Neha Bora Qualification: राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के बीच जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की छात्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग पार करने, पुलिसकर्मियों से बचते हुए आगे बढ़ने और हिरासत में लिए जाने से जुड़ी उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इसके बाद उनकी एजुकेशन क्वालीफिकेशन, पारिवारिक बैकग्राउंड और छात्र राजनीति में उनके सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

प्रदर्शन के बाद भारत समेत दुनियाभर में नेहा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई और उत्तराखंड से छात्र राजनीति तक के सफर के बारे में भी जानना चाहते हैं। आइए जानते हैं कि नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फिलहाल क्या पढ़ाई कर रही हैं और वह राजनीति में कैसे आईं…

कहां की रहने वाली हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सेना में तैनाती के कारण परिवार को अलग-अलग शहरों और सैन्य छावनियों में रहना पड़ा। इसी वजह से नेहा का बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता।

कहां से की 10वीं और 12वीं की पढ़ाई?

हमारे सहयोगी ‘News18 हिंदी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा बोरा ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल से पूरी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के दिनों में ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक विचारों में बढ़ने लगी थी। इसी दौरान उन्होंने कम्युनिस्ट एवं क्रांतिकारी विचारक चारू मजूमदार, कवि पाब्लो नेरुदा और लेखिका अरुंधति रॉय के विचारों तथा लेखन में दिलचस्पी ली।

बताया जाता है कि उनके शुरुआती वैचारिक अनुभवों ने सामाजिक मुद्दों और राजनीति के प्रति उनकी समझ विकसित करने में भूमिका निभाई।

DU से ग्रेजुएशन, अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स

नेहा बोरा ने देश की राजधानी में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से परफॉर्मेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर, कला, अभिव्यक्ति और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का स्टडी किया जाता है। नेहा की परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर और सामाजिक विषयों की अहम भूमिका रही है।

JNU में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में कर रहीं PhD

ग्रेजुएशन और मास्टर्स के बाद नेहा बोरा ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एडमिशन लिया। वह फिलहाल JNU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज विषय में PhD कर रही हैं। वह अभी यूनिवर्सिटी में डॉक्टोरल स्कॉलर हैं। इस तरह उनकी शैक्षणिक यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय से शुरू होकर अंबेडकर यूनिवर्सिटी और फिर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी तक पहुंची। पढ़ाई के साथ-साथ वह सामाजिक गतिविधियों और छात्र राजनीति में भी लगातार एक्टिव रहीं।

थिएटर से भी जुड़ी रही हैं नेहा

नेहा बोरा की पहचान केवल एक छात्र नेता के तौर पर नहीं है। वह लंबे समय तक थिएटर से भी जुड़ी रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर समूह ‘संगवारी’ के साथ काम किया है। स्ट्रीट थिएटर के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी नेहा के लिए सामाजिक सवालों पर संवाद करने और अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम रही।

CAA विरोध-प्रदर्शन के दौरान बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

नेहा बोरा की छात्र राजनीति में सक्रियता 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान तेजी से बढ़ी। उस समय देश के कई यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। इसी दौर में नेहा की सामाजिक मुद्दों, कैंपस चर्चाओं और थिएटर से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के साथ छात्र राजनीति में सक्रियता भी बढ़ी। बाद में वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ गईं। AISA एजुकेशन, छात्र अधिकारों और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अभियान चलाने वाला छात्र संगठन है। नेहा आगे चलकर इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

प्रदर्शन के बाद फिर चर्चा में क्यों आईं?

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद नेहा बोरा एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी एजुकेशन और छात्र राजनीति में भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। नेहा की यात्रा में उच्च शिक्षा, थिएटर और छात्र आंदोलनों के तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं। उत्तराखंड से निकलकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और फिर छात्र संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने का उनका सफर अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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अमेरिकी डोनर्स दे रहे CJP को पैसा! ये दावा करने वाली अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन कौन हैं?

Mary Millben attacks CJP: अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके की कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके संगठन को अमेरिका में ऐसे डोनर से फंडिंग मिल रही है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके नेतृत्व में भारत के भविष्य के खिलाफ हैं। मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील की है कि वे कथित तौर पर देश में अशांति फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज उठाएं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं।

मिलबेन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नई दिल्ली में विपक्षी दलों और CJP के समर्थकों की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

PM मोदी के समर्थन में क्या बोलीं मैरी मिलबेन?

41 वर्षीय सिंगर मैरी मिलबेन ने सोशल मीडिया पर लिखे अपने मैसेज में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 साल तक भारत की सेवा की है, जिनमें 12 साल PM के रूप में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि PM मोदी लगातार तीन कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। उनके अनुसार, वह अमेरिका से आने वाली कथित विघटनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे। मिलबेन ने दावा किया कि कुछ अमेरिकी डोनर दुनियाभर में रूढ़िवादी विचारधारा वाले नेताओं को निशाना बनाने का एक पैटर्न अपनाते हैं।

उनके मुताबिक, पहले संबंधित देश के किसी अमेरिकी शिक्षित व्यक्ति को तलाशा जाता है। फिर उसे कट्टर विचारों की ओर प्रेरित कर वापस भेजा जाता है और उसके बाद कथित तौर पर अशांति फैलाने के लिए फंडिंग की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियों का असर संबंधित देशों के विकास और शासन व्यवस्था पर पड़ता है। हालांकि, अमेरिकी डोनर से CJP को फंडिंग मिलने के अपने दावे के समर्थन में मिलबेन ने इस बयान में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया।

युवाओं से की शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील

मैरी मिलबेन ने भारत के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोकतंत्र और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए ऐसे आंदोलनों के मुकाबले एक शांतिपूर्ण जनआंदोलन खड़ा करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में ऐसी नई आवाज उठनी चाहिए, जो देश की मिट्टी में पैदा हुई हो, यहीं पली-बढ़ी हो और यहीं शिक्षित हुई हो। उनके मुताबिक, युवाओं को संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।

भारत में क्यों लोकप्रिय हैं मैरी मिलबेन?

मैरी मिलबेन अफ्रीकी-अमेरिकी हॉलीवुड अभिनेत्री और मशहूर सिंगर हैं। भारत में वह खास तौर पर भारतीय राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और भक्ति गीत ‘ओम जय जगदीश हरे’ की अपनी प्रस्तुतियों के लिए लोकप्रिय हैं। वर्ष 2023 में अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में भी उन्होंने भारत का राष्ट्रगान गाया था। इस वजह से भारतीय दर्शकों के बीच उनकी पहचान बनी है। इस बीच, दिल्ली के जंतर-मंतर में जबरन घुसने के आरोप में CJP के दो नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री देश में अघोषित आपातकाल लागू कर रहे हैं।

दीपके ने नागपुर में पत्रकारों से कहा कि CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराकर कौन सा अपराध कर दिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शांति बनाए रखने के मुचलके के उल्लंघन और प्रदर्शन के लिए गैर-अधिसूचित क्षेत्र घोषित किए जा चुके जंतर-मंतर पर जबरन घुसने के आरोप में दास और रांका को बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

कई नेताओं के प्रयास जारी हैं

भाजपा के कई वरिष्ठ नेता संसदीय बोर्ड में शामिल होना चाहते हैं। जिनको संगठन में या सरकार में जगह मिल गई है वे भी प्रयास कर रहे हैं। कई मुख्यमंत्री इस कोशिश में लगे हैं तो कई केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री भी प्रयास कर रहे हैं। हालांकि संसदीय बोर्ड को लेकर अब पहले वाली बात नहीं है। पहले इसका सदस्य होने का मतलब था कि आप शीर्ष नेतृत्व हैं। लेकिन पिछली बार जो बदलाव हुए थे उसमें जिन नए लोगों को शामिल किया गया था उनमें एक बीएस येदियुरप्पा को छोड़ कर कोई अपने राज्य के भी शीर्ष 10 नेताओं में होने का दावा नहीं कर सकता। संसदीय बोर्ड का सदस्य बन जाने के बाद भी उनका राजनीतिक कद जस का तस रहा था। वैसे तो अब भाजपा के पदाधिकारियों या केंद्रीय मंत्रियों की भी हैसियत पहले वाली नहीं रह गई है। लेकिन भाजपा के जो नेता अपने दम पर बड़े हैं वे जरूर अपना कद बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।

तभी इस बात की बहुत चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस संसदीय बोर्ड में शामिल होना चाहते हैं। दोनों अपने अपने स्तर पर जोर लगा रहे हैं। सीएम रहते शिवराज सिंह चौहान संसदीय बोर्ड के सदस्य बने थे। लेकिन उसके बाद किसी सीएम को मौका नहीं मिला है। हालांकि जरूरी नहीं है कि दो सबसे मजबूत मुख्यमंत्रियों में से किसी को जगह मिले। हो सकता है कि रेखा गुप्ता शामिल हो जाएं, जिससे महिला औ मुख्यमंत्री दोनों कोटा पूरा हो जाए। वैसे शुभेंदु अधिकारी, हिमंत बिस्वा सरमा और नायब सिंह सैनी के नाम की भी चर्चा है। यह भी संभव है कि पर्ची के जरिए सीएम बने किसी नेता को शामिल कर लिया जाए।

बहरहाल, आदिवासी के तौर पर असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नाम की चर्चा है। संगठन महामंत्री के अलावा एक और महामंत्री इसमें शामिल हो सकता है। विनोद तावड़े सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं। दलित चेहरे के तौर पर यूपी, बिहार का कोई जाटव या रविदास समाज का नेता हो सकता है। केंद्रीय मंत्रियों में शिवराज सिंह चौहान और पीयूष गोयल की चर्चा हो रही है। अल्पसंख्यक के रूप में पंजाब से किसी सिख नेता को भी जगह मिलने की चर्चा है।

अमित शाह ने राहुल पर हमला बोला

नई दिल्ली। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों की ओर पिछले कई दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच पहली बार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इसका जवाब दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया है और उन पर हमला किया। शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एसआईआर लागू होने के पहले से हार रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों में कांग्रेस तब से हार रही है, जब बैलेट पेपर से चुनाव होते थे। उन्होंने दावा किया कि 2029 के चुनाव में भी कांग्रेस बुरी तरह से हारेगी।

अमित शाह ने मंगलवार को कहा, ‘राहुल गांधी एसआईआर की आड़ में घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इस देश की जनता उनके एजेंडे को अच्छी तरह समझती है’। उन्होंने आगे कहा, ‘मैं राहुल और उनके साथियों से कहना चाहता हूं कि 2029 में एक बार फिर करारी हार के लिए तैयार रहें। 2029 के लोकसभा चुनाव में एनडीए भारी बहुमत से जीत हासिल करेगा और कांग्रेस को लगातार चौथी हार का सामना करना पड़ेगा। इस देश की जनता पीएम मोदी, भाजपा और एनडीए के साथ खड़ी है। आप इस सच्चाई को नकार नहीं सकते’।

शाह ने कांग्रेस को आईना दिखाते हुए कहा कि त्रिपुरा में 33 साल से कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री नहीं बना है और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस 54 साल से कोई चुनाव नहीं जीती है। उन्होंने यह भी कहा कि गुजरात में 1985 के बाद यानी पिछले 41 साल से कांग्रेस नहीं जीती है। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या इन नतीजों को भी एसआईआर से जोड़ेंगे?

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि एसआईआर 2024 के बाद लागू हुआ, जबकि कांग्रेस राहुल गांधी के प्रमुख नेता, पार्टी अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद से लगातार चुनाव हार रही है। शाह ने हाल में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए उपचुनावों का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस इनमें एक भी सीट नहीं जीत सकी। उन्होंने कहा, ‘असम के नगांव में भाजपा उम्मीदवार ने 1.42 लाख वोटों के अंतर से जीत हासिल की। यह सीट पहले कांग्रेस की थी’।

Amit Shah: ‘2029 में भी हार के लिए रहें तैयार…’SIR पर राहुल गांधी को अमित शाह की दो टूक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उपचुनावों में कांग्रेस की हार को लेकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, राहुल गांधी को हार के लिए मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी पार्टी की कमियों पर ध्यान देना चाहिए। शाह ने ये भी दावा किया कि कांग्रेस पिछले 41 साल से गुजरात में कोई चुनाव नहीं जीत पाई है, जबकि वहां के मतदाता लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर भरोसा जता रहे हैं।

केंद्रीय मंत्री का ये बयान उपचुनाव और गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी के प्रदर्शन पर बात करते हुए यह बयान दिया। वहीं, राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध जारी रखे हुए हैं। राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

शाह ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि गुजरात में कांग्रेस को पिछले 41 साल से चुनावी जीत नहीं मिली है। शाह ने कहा, “मैं यह बात साफ करना चाहता हूं और खास तौर पर राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि कांग्रेस ने पिछले 41 साल में गुजरात में एक भी चुनाव नहीं जीता है। पार्टी ने आखिरी बार 1985 में जीत हासिल की थी। इसके बाद से उसे लगातार हार का सामना करना पड़ा है।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस की लगातार चुनावी हार का कारण मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) है, जबकि यह प्रक्रिया 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद शुरू हुई थी।

हार का ठीकरा SIR पर फोड़े

शाह ने कहा कि, “राहुल गांधी को ये सोचना चाहिए कि क्या गुजरात में कांग्रेस की हार के लिए SIR जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चुनाव में हार का ठीकरा SIR पर फोड़ने के बजाय अपनी कमियों पर विचार करना चाहिए।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस को 2029 के लोकसभा चुनाव में भी हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। शाह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार गलत जानकारी फैलाते हैं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का विरोध करके घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

2029 में भी मिलेगा हार

अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस के विरोध पर राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि, राहुल गांधी लगातार झूठ बोल रहे हैं। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को 2029 के लोकसभा चुनाव में चौथी बार हार का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस के चुनावी प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए।

गुजरात में बीजेपी का बेहतरीन प्रदर्शन

गुजरात में बीजेपी के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए अमित शाह ने कहा कि पार्टी ने नगर पालिकाओं और नगर निगम के चुनावों में शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने बताया कि दो नगर पालिकाओं और एक नगर निगम की कुल 104 सीटों में से बीजेपी ने 90 सीटों पर कब्जा किया। वहीं, गांधीनगर नगर निगम में पार्टी को 44 में से 38 सीटों पर जीत मिली। गांधीनगर शाह के संसदीय क्षेत्र में आता है। शाह ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी ने सभी 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर उसके उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा सके। उन्होंने कहा कि चुनाव के नतीजों से साफ पता चलता है कि गुजरात के लोगों का रुझान बीजेपी की ओर है और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन कर रहे हैं।

पीएम मोदी के साथ खड़े हैं लोग

अमित शाह ने कहा कि, गुजरात में बीजेपी की बड़ी जीत से पता चलता है कि वहां के लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चुनाव के मुकाबले गांधीनगर नगर निगम में बीजेपी का वोट शेयर 10 प्रतिशत बढ़ा है।

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केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंत्रिमंडल और राज्यसभा सदस्यता से दिया इस्तीफा, जानिए कौन हैं ये, क्यों उठाया ऐसा कदम?

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहते हैं।  वहीं ऐसी खबरें है कि, दिवाली से पहले केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कभी भी फेरबदल हो सकता है। सरकारी सूत्रों ने CNN-NEWS18 को बताया कि, इस दौरान कम से कम छह मंत्री पद खाली होने की संभावना है। वहीं मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पार्टी के ‘एक व्यक्ति, एक पद’ नियम के चलते उनके मंत्रिपद छोड़ने की संभावना जताई जा रही है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में पिछले ढाई साल से केंद्रीय मंत्रिमंडल में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। अगर ऐसा हुआ तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल के बीच में होने वाला बड़ा बदलाव होगा।

एल. मुरुगन ने दिया इस्तीफा

केंद्रीय सूचना और प्रसारण, संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल मुरुगन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि अब वह तमिलनाडु में पार्टी के काम पर ध्यान देना चाहते हैं। इससे पहले केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन भी राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद मंत्री पद छोड़ चुके हैं। इन इस्तीफों के बाद केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें और तेज हो गई हैं। हाल ही में बीजेपी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बी.एल. वर्मा को राज्यसभा के लिए दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया, क्योंकि उनका कार्यकाल पूरा हो गया था। वहीं, केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया है।

एल. मुरुगन ने किया पोस्ट 

केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने पोस्ट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और तमिलनाडु की सेवा करना मेरे लिए जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। एक दिहाड़ी मजदूर के बेटे से लेकर केंद्रीय मंत्रिपरिषद में जिम्मेदारी निभाने तक का सफर मेरे लिए बेहद गर्व की बात है। अब मैं दोबारा जमीनी स्तर पर लौटकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करना चाहता हूं। मेरा लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में बीजेपी को और मजबूत बनाना है। मेरे लिए सबसे पहले देश, फिर पार्टी और आखिर में मैं खुद हूं।” तमिलनाडु के रहने वाले मुरुगन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था।

 

केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई बैठकें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के दिनों में केंद्रीय मंत्रियों के साथ कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने और कामकाज को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। इससे पहले भी मंत्रिमंडल में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन उस समय सरकार के वरिष्ठ सूत्रों ने ऐसी किसी योजना से इनकार किया था। उन्होंने बताया था कि सरकार की प्राथमिकता संसद के बजट सत्र से जुड़े कामों पर थी।

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पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा:न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा; सरकार बोली- विरोध करने वालों पर कार्रवाई करेंगे

बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। लोगों ने उन पर बांग्लादेश में हत्याएं कराने और लोकतंत्र को बर्बाद करने के आरोप लगाए। उन्होंने यूनुस से कहा कि तुम यहां क्यों आए हो, वापस जाओ। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग यूनुस के खिलाफ नारे लगाते और उन पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। हालात को देखते हुए यूनुस और उनकी सहयोगी लामिया मोर्शेद को एयरपोर्ट के अंदर वापस ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों ने हजारों लोगों की मौत का आरोप लगाया प्रदर्शनकारियों ने यूनुस पर हजारों पुलिसकर्मियों की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह दावा भी किया कि बांग्लादेश में करीब 2 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विरोध करने वालों की पहचान नहीं हुई है। बांग्लादेश के एक मीडिया संस्थान ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक बताया है। घटना पर यूनुस या उनके प्रतिनिधियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सरकार बोली- विरोध करने वालों पर कार्रवाई करेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना एवं कम्युनिकेशन सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि यूनुस का सामना करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यूनुस के कार्यकाल में हिंसा और गिरफ्तारियों पर उठे सवाल शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 8 अगस्त 2024 को यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में बांग्लादेश में हिंसा रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सवाल उठे। इस दौरान हिंदू समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों, लोगों की गिरफ्तारी और हिरासत में मौतों की खबरें भी सामने आईं। अवामी लीग ने आरोप लगाया था कि उसके नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया गया। मानवाधिकार संगठनों ने इन मामलों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी। खसरे से 1170 बच्चों की मौतों पर भी घिरे यूनुस बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप से बच्चों की मौतों को लेकर भी यूनुस की अंतरिम सरकार की आलोचना हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीमारी से 1,170 बच्चों की मौत हुई है। यूनिसेफ ने मई 2026 में कहा था कि उसने वैक्सीन की खरीद में देरी को लेकर अंतरिम सरकार को कम से कम 10 बार चेतावनी दी थी। इसके बाद भी सरकार ने यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन खरीदने के बजाय खुली टेंडर प्रक्रिया अपनाई। इस प्रक्रिया में देरी के बीच वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया। इसके बाद बीमारी का प्रकोप बढ़ गया। हालांकि, इस मामले में सरकार की जिम्मेदारी को लेकर जांच के निष्कर्ष अलग से देखे जाने चाहिए। हसीना की सरकार गिरने के बाद डेढ़ साल सत्ता में रहे यूनुस अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व किया। उनकी सरकार करीब डेढ़ साल तक सत्ता में रही। 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना की गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। यूनुस की सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया और भारत से हसीना को बांग्लादेश भेजने की मांग की।

कोलकाता में पुलिस और केंद्रीय बलों ने ममता-टीएमसी के विरोध मार्च को रोका

कोलकाता में मंगलवार को ममता तृणमूल कांग्रेस (ममता टीएमसी) द्वारा आयोजित विरोध मार्च को अनधिकृत करार देते हुए पुलिस और केंद्रीय बलों ने रोक दिया।

प्रदर्शनकारियों ने हालांकि उसी जगह पर एक बैठक कर अपना विरोध जारी रखा। यह मार्च राजाबाजार से पार्क सर्कस तक निकाला जाना था, ताकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा सके।

प्रदर्शनकारियों ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चिंताओं के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। पुलिस की यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उस चेतावनी के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि दुर्गा पूजा के दौरान राज्य में कोई अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों को तैनात किया जा सकता है।

मंगलवार दोपहर जब मार्च शुरू हुआ, तो पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों की एक बड़ी टुकड़ी ने राजाबाजार इलाके में बैरिकेड्स लगा दिए, जिससे प्रदर्शनकारी तय रास्ते पर आगे नहीं बढ़ पाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे श्री कुणाल घोष, सुश्री डोला सेन और श्री शोवनदेव चट्टोपाध्याय ने मार्च रोके जाने के बाद समर्थकों को संबोधित किया। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रैली में शामिल नहीं हुईं।

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श्री घोष ने राज्य सरकार और केंद्र पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात करके और रैली के खिलाफ चेतावनी जारी करके डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया। श्री घोष ने कहा प्रतिबंधों से प्रदर्शनकारी उकसावे में नहीं आए। हमें एक राजनीतिक संदेश भेजना था और वह अपने लक्षित लोगों तक पहुंच गया।

उन्होंने सीईसी को निशाना बनाने वाले प्रदर्शनकारियों के नारों पर जताई गई आपत्तियों पर भी सवाल उठाए और अधिकारियों पर राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। सुश्री डोला सेन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी व्यवस्था ने पिछले पांच महीनों में उनकी पार्टी द्वारा आयोजित बैठकों और रैलियों के लिए बार-बार अनुमति देने से इनकार किया है, जिससे उन्हें अदालतों का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की आलोचना की। सुश्री सेन ने कहा राज्य सरकार की योजना प्रदर्शनकारियों को उकसाने और फिर उन्हें गिरफ्तार करने या घायल करने की थी। हम उनके जाल में नहीं फंसे।

गौरतलब है कि यह प्रदर्शन एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ जारी विरोध और श्री कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच हो रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध-प्रदर्शन में सुश्री बनर्जी के शामिल होने और पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पार्क सर्कस की ओर बढ़ने से रोके जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने राजाबाज़ार में अपना कार्यक्रम जारी रखा और रोके गए मार्च को वहीं एक सभा में बदल दिया।

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ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए आर्चर, बेथेल की इंग्लैंड वनडे टीम में वापसी

जोफ्रा आर्चर और जैकब बेथेल नवंबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए इंग्लैंड की एकदिवसीय टीम में लौट आए हैं, आर्चर को पाकिस्तान में आगामी त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए आराम दिया गया है और बाद में जुलाई में भारत के खिलाफ एकदिवसीय श्रृंखला के दौरान लगी घुटने की चोट से उबर गए हैं। हैरी ब्रुक के नेतृत्व वाली 16 सदस्यीय एकदिवसीय टीम अगले साल के विश्व कप के लिए पूरी ताकत के साथ तैयार होगी। जोस बटलर अपनी हालिया हैमस्ट्रिंग सर्जरी के बाद अनुपलब्ध हैं जबकि साकिब महमूद घुटने की चोट के कारण टीम से बाहर हैं।

हालाँकि, आर्चर, गस एटकिंसन, सन्नी बेकर और जोश टंग इसके बाद होने वाले टी20 का हिस्सा नहीं होंगे क्योंकि इंग्लैंड दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट दौरे से पहले अपने तेज गेंदबाजों का प्रबंधन कर रहा है।

इंग्लैंड के राष्ट्रीय चयनकर्ता मार्कस नॉर्थ ने कहा एकदिवसीय श्रृंखला के लिए जैकब बेथेल और जोफ्रा आर्चर की वापसी का मतलब है कि हम पूरी ताकत के करीब होंगे क्योंकि हम एक साल के समय में विश्व कप की तैयारी तेज कर देंगे। “चार तेज गेंदबाज तीन मैचों की एकदिवसीय श्रृंखला के बाद चले जाएंगे क्योंकि हम दक्षिण अफ्रीका के टेस्ट दौरे से पहले उन्हें प्रबंधित करना चाहते हैं।

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इंग्लैंड वनडे टीम: हैरी ब्रूक (कप्तान), जोफ्रा आर्चर, गस एटकिंसन, सन्नी बेकर, टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जॉर्डन कॉक्स, हेनरी क्रोकोम्बे, सैम कुरेन, लियाम डॉसन, बेन डकेट, विल जैक, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, जो रूट, जोश टंग

इसके बजाय टी20 टीम में चार अनकैप्ड खिलाड़ी शामिल होंगे, जिनमें थॉमस रीव और एडी जैक शामिल हैं, जिन्हें पहली बार इंग्लैंड कॉल-अप मिला है। 18 वर्षीय रीव टीम का सबसे युवा सदस्य है और उसे कल ही ईसीबी केंद्रीय अनुबंध मिला है। उन्होंने फरवरी में आईसीसी पुरुष अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड की कप्तानी की। वह और जैक दोनों पिछले साल ऑस्ट्रेलिया का दौरा करने वाली इंग्लैंड लायंस टीम का हिस्सा थे।

इस बीच, फिल साल्ट क्वाड चोट से उबरने के बाद लौट आए हैं, जिसके कारण वह पिछले महीने श्रीलंका के खिलाफ इंग्लैंड की 3-0 से टी20 सीरीज जीत से बाहर हो गए थे। उस श्रृंखला में पदार्पण करने के बाद एन्यूरिन डोनाल्ड ने अपना स्थान बरकरार रखा है, जबकि ल्यूक वुड को भी वापस बुला लिया गया है।

नॉर्थ ने कहा हमारी टी20 टीम कप्तान हैरी ब्रूक के नेतृत्व में शानदार फॉर्म में है और हम एक बहुत अच्छी टीम के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई परिस्थितियों में खुद को परखने के मौके का इंतजार कर रहे हैं।

इंग्लैंड टी20 टीम: हैरी ब्रुक (कप्तान), टॉम बैंटन, जैकब बेथेल, जेम्स कोल्स, जॉर्डन कॉक्स, हेनरी क्रोकोम्बे, सैम करेन, लियाम डॉसन, एन्यूरिन डोनाल्ड, एडी जैक, विल जैक, जेमी ओवरटन, आदिल राशिद, थॉमस रेव, फिल साल्ट, ल्यूक वुड

इंग्लैंड का ऑस्ट्रेलिया दौरा 7 नवंबर को पर्थ के वाका में अभ्यास मैच के साथ शुरू होगा। तीन वनडे मैच 13 नवंबर (ऑप्टस, पर्थ), 15 नवंबर (एडिलेड) और 18 नवंबर (होबार्ट) को खेले जाएंगे। पांच मैचों की टी20 सीरीज 21 नवंबर को एमसीजी में शुरू होगी और इसके बाद के मैच गोल्ड कोस्ट, ब्रिस्बेन, सिडनी और कैनबरा में होंगे।

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चुनाव हारकर भी तेलंगाना के मंत्री बने मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा (Video)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और वर्तमान में तेलंगाना राज्य में कांग्रेस के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने भी केंद्रीय पार्टी लाइन पकड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है और S.I.R (Special Intensive revision) को धोखाधड़ी बताया है।यह बातचीत उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कही जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गौरतलब है कि 3 साल पहले मोहम्मद अजहरुद्दीन तेलंगाना में घरेलू पिच पर भी नहीं जीत सके। तेलंगाना की हाई प्रोफाइल जुबली हिल्स सीट पर  उनकी स्थिती मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन वह इस सीट पर तब हार गए जब पूरे राज्य में कॉंग्रेस की आँधी चल रही थी।हार के बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने मशहूर  और मुस्लिम चेहरा होने के कारण अल्पसंख्यक मंत्रालय थमा दिया।

कांग्रेस की आंधी में भी चुनाव हारे अजहर

इस सीट पर भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को कुल 26 राउंड की वोटिंग के बाद  62,343 वोट मिले। वहीं भारत राष्ट्र समिति के प्रतिद्वंदी मगांथी गोपीनाथ को 78282 वोट मिले थे। इस कारण मोहम्मद अजहरुद्दीन 15,939 वोटों से हार गए थे। तीसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के लंकाला दीपक रेड्डी रहे थे जिन्हें कुल 25,083 वोट हासिल हुए थे। साल 2018 में भी मगांथी गोपीनाथ की इस सीट पर जीत हुई थी लेकिन मोहम्मद अजहरुद्दीन को जीत का दावेदार बताया जा रहा था।

साल 2009 में कॉंग्रेस पार्टी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस ही साल लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की मुरादाबद सीट पर जीत अर्जित की थी।इसके बाद साल 2014 में वह राजस्थान के टोंक सवाई माधोपुर से लोकसभा चुनाव में  उतरे थे लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी के  प्रत्याशी सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने उनको मात दी थी।

शानदार करियर का फिक्सिंग के आरोप ने किया अंत

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों में से एक अजहर ने भारत का 99 टेस्टों और 334 वनडे में प्रतिनिधित्व किया था। वह 1992, 1996 और 1999 के विश्व कप में भारत के कप्तान रहे थे।अजहर ने अपने करियर में 99 टेस्टों में 22 शतकों की मदद से 6215 रन और 334 वनडे में 7 शतकों की मदद से 9378 रन बनाए थे। वह भारत के सफल कप्तानों में शुमार थे। उन्होंने 47 टेस्टों में भारत का नेतृत्व किया और 14 मैच जीते जबकि वनडे में उन्होंने 174 मैचों में भारत का नेतृत्व किया और 90 मैच जीते।

अपने शानदार करियर के दौरान अजहर का नाम मैच फिक्सिंग में आया था जिसके बाद बीसीसीआई ने उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि 2012 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने उनपर लगा प्रतिबंध हटा दिया।