Manish Brahmbhatt: कॉकरोच जनता पार्टी में बगावत! जानिए कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट, अभिजीत दिपके से अलग होकर बनाई CJP-लोकतांत्रिक

Who is Manish Brahmbhatt: सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को नई राजनीतिक पार्टी ‘कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक (CJP-D)’ के गठन की घोषणा की। उन्होंने इसे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विकल्प के रूप में पेश किया। ब्रह्मभट्ट ने CJP के मुखिया अभिजीत दीपके के नेतृत्व वाले पार्टी पर उस छात्र आंदोलन से दूर जाने का आरोप लगाया, जिससे यह संगठन उभरा था। ब्रह्मभट्ट ने पहले CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन अब आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी लोगों की मनमाने ढंग से चुनी गई टीम बन गया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन में शामिल रहे स्वयंसेवकों तथा प्रदर्शनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं कर रहा है।

पीटीआई के मुताबिक ब्रह्मभट्ट ने कहा, “आज हम कॉकरोच जनता पार्टी-लोकतांत्रिक की शुरुआत कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि नया मंच आंदोलन में शामिल रहे लोगों की सामूहिक ताकत को एकजुट करने का प्रयास करेगा। CJP की शुरुआत पहले एक ऑनलाइन व्यंग्य मंच के रूप में हुई थी। बाद में इसने पेपर लीक और एजुकेशन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर दिल्ली में छात्रों के नेतृत्व में आंदोलन किया। इसके बाद संगठन ने देशभर में अपनी गतिविधियों का विस्तार करने की योजना की घोषणा की।

दीपके पर AAP से जुड़े होने का आरोप!

ब्रह्मभट्ट ने आरोप लगाया कि CJP के नए नेतृत्व में आंदोलनकारियों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी से जुड़े कई लोगों को इसमें शामिल किया गया। जबकि अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े स्वयंसेवकों और प्रदर्शनों में हिस्सा लेने वाले लोगों को बाहर रखा गया। ब्रह्मभट्ट ने सवाल किया, “आम आदमी पार्टी से जुड़े आठ लोगों को ही क्यों शामिल किया गया है?”

उन्होंने कहा कि शिवसेना, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों से जुड़े लोगों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। लेकिन नए संगठनात्मक ढांचे में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनके नेतृत्व वाला संगठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए एक राष्ट्रीय टीम बनाने और फैसले लेने की प्रक्रिया में स्वयंसेवकों और प्रदर्शनकारियों को शामिल करने की कोशिश करेगा।

कौन हैं मनीष ब्रह्मभट्ट?

सामाजिक कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट CJP आंदोलन से जुड़े प्रमुख वालंटियर और कोऑर्डिनेटर रहे हैं। चुनावी राजनीति में भी वे कोई नया चेहरा नहीं हैं। ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत’ करने वाले नेता के तौर पर उभरने से पहले ब्रह्मभट्ट ने 2022 का गुजरात विधानसभा चुनाव पालनपुर से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें 964 वोट (0.53%) मिले थे। वे पांचवें स्थान पर रहे थे। इस सीट से राज्य में सत्ताधारी BJP के अनिकेत गिरीशभाई ठाकर ने 95,588 वोट पाकर जीत दर्ज की थी।

पेशेवर और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ के ‘MyNeta’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद ब्रह्मभट्ट के चुनावी हलफनामे के अनुसार, चुनाव के समय वे 37 साल के मैनेजमेंट कंसल्टेंट थे। उन्होंने हेमचंद्राचार्य नॉर्थ गुजरात यूनिवर्सिटी से B.Com और F.Y. LLB की पढ़ाई की है।

संपत्ति और विवाद से जुड़े मामले

चुनावी हलफनामे में उनकी घोषित संपत्ति लगभग 44.42 लाख रुपये थी। उन्होंने कोई देनदारी (कर्ज) नहीं बताई थी। उनके चुनावी हलफनामे में चार लंबित आपराधिक मामलों का भी जिक्र है। इनमें IPC की धारा 325 (जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाना), 505(2) (समूहों के बीच दुश्मनी या नफरत फैलाने वाले बयान), 114 (अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाना), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 153 (दंगा भड़काने के इरादे से उकसाना), 501 (मानहानि करने वाली सामग्री छापना) और 502 के तहत आरोप शामिल हैं। हालांकि, ये मामले लंबित हैं। इनमें उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है।

CJP में विवाद और भूख हड़ताल की वजह!

बताया जा रहा है कि ब्रह्मभट्ट का हालिया राजनीतिक उभार जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में हुए छात्र-युवा आंदोलन से हुआ। विवाद तब शुरू हुआ जब अगस्त में CJP ने अपनी राष्ट्रीय कार्यकारिणी और शीर्ष नेतृत्व का ऐलान किया। इसमें अभिजीत दीपके को राष्ट्रीय संयोजक, जबकि सौरव दास और आशुतोष रांका को सह-संयोजक बनाया गया। ब्रह्मभट्ट का दावा है कि इस आंदोलन से करीब 450 कोऑर्डिनेटर जुड़े थे। लेकिन 12 सदस्यीय कोर टीम बनाते समय जमीनी कार्यकर्ताओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

अगस्त में जब दीपके ने अपने आवास पर कोर टीम की बैठक बुलाई, तो ब्रह्मभट्ट अपने साथी राहुल पांड्या के साथ विरोध दर्ज कराने पहुंचे थे। इस फैसले में प्रतिनिधित्व न मिलने पर कार्यकर्ताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। हेल्थ बिगड़ने पर ब्रह्मभट्ट और पांड्या को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। उन्होंने कहा कि मूल आंदोलन देश का था। यह इसलिए सफल हुआ क्योंकि लोगों ने इसमें अपना खून-पसीना लगाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन की सफलता के बाद इसे बेच दिया गया।

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Yasin Malik wife Mushaal Mullick: राजधानी दिल्ली के तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कश्मीरी अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के चेयरमैन यासीन मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल मलिक से शादी खत्म करने की इच्छा जाहिर की है। यासीन मलिक ने जम्मू की टाडा (TADA) कोर्ट में एक 25 पन्नों का हलफनामा दायर किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें उसने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक को तलाक देने और सरला भट्ट हत्याकांड में केस लड़े बिना खुद के लिए फांसी की मांग की है।

पत्नी-बेटी का किया जिक्र

मलिक ने इस मर्डर केस की सुनवाई के दौरान जम्मू की स्पेशल TADA/POTA कोर्ट में 25 पेज का पर्सनल हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने का अनुरोध किया है। हमारे सहयोगी News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, हलफनामे में उसने अपनी मां, पत्नी और 13 साल की बेटी रजिया सुल्ताना का जिक्र किया है। इसमें उसने परिवार से लंबे समय तक अलग रहने के बारे में लिखा।

‘8 साल से आवाज नहीं सुनी…’

रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक ने हलफनामे में यह भी कहा कि उसने पिछले आठ वर्षों से अपनी पत्नी की आवाज तक नहीं सुनी है। उसका दावा है कि जेल में रहने के दौरान उसे पत्नी और बेटी से नियमित फोन पर बातचीत या सामान्य वीडियो कॉल की सुविधा नहीं मिल सकी। मलिक के मुताबिक, जेल में रहने के दौरान उनके परिवार से बातचीत सीमित और अनिश्चित रही है। उसने इस लंबे अलगाव की वजह अपनी जेल की सज़ा और बातचीत पर लगी पाबंदियों को बताया।

पत्नी से कहा- अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो

यासीन मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल से कहा कि वह अपनी बाकी जिंदगी उसका इंतजार करते हुए या उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता में न बिताएं। उसने उन्हें जिंदगी में नया अध्याय शुरू करने की बात कही है। मलिक ने लिखा कि उसका फैसला किसी नाराजगी या दुश्मनी की वजह से नहीं है। वह अब भी अपनी पत्नी का सम्मान करता है। मलिक ने यह भी कहा कि उसने मुशाल के साथ बिताए वैवाहिक वर्षों का अफसोस नहीं है। दोनों के बीच दूरी के लिए उसने उन परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया, जो उसके कंट्रोल से बाहर थीं।

बेटी का बचपन मिस करने का भी जिक्र

हलफनामे में मलिक ने अपनी बेटी के बचपन से दूर रहने का भी जिक्र किया है। उसने कहा कि लंबे समय तक जेल में रहने और परिवार से अलगाव के कारण वह अपने बच्चों के बचपन में उनके साथ नहीं रह सका। उसने लिखा कि उसके बच्चे माता-पिता की सामान्य मौजूदगी और मार्गदर्शन के बिना बड़े हुए। परिवार को उम्मीद थी कि वह किसी दिन वापस घर लौटेंगे। लेकिन बाद में उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। मलिक ने यह भी माना कि उनकी गिरफ्तारी और लंबे कारावास का उनकी पत्नी और पूरे परिवार की निजी जिंदगी पर गहरा असर पड़ा है।

बेटी से दादी के साथ रहने की अपील

अपनी बेटी रजिया सुल्ताना को संबोधित करते हुए मलिक ने उससे अपनी दादी के करीब रहने की अपील की है। उसने बेटी से कहा कि वह अपनी दादी से हर दिन कम से कम पांच मिनट फोन पर बात करे, ताकि परिवार से दूर रहने के बावजूद उनकी मां को अपनी पोती का स्नेह और साथ मिलता रहे। मलिक ने कहा कि उसका हलफनामा किसी से सहानुभूति या दया हासिल करने के लिए नहीं है, बल्कि यह उनकी अंतरात्मा की आवाज और परिवार के लिए एक संदेश है।

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आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की काट रहा सजा

यासीन मलिक को साल 2022 में दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। मलिक और उसके नेतृत्व वाले JKLF पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। कश्मीर में उग्रवाद के दौर में हिंदूओं के खिलाफ टारगेटेड हिंसा और हत्याओं की घटनाएं भी हुई थीं। इनमें कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन से जुड़ी घटनाएं भी शामिल थीं। इन सभी मामलों में मलिक मुख्य रूप से शामिल था।

गोबर को ऊर्जा और आय में बदलेंगे 1000 विशेषज्ञ, गांवों तक तैयार होगा नेटवर्क

गोबर को ऊर्जा और आय में बदलेंगे 1000 विशेषज्ञ, गांवों तक तैयार होगा नेटवर्क

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गो-संरक्षण को केवल गोवंश के आश्रय और देखभाल तक सीमित न रखते हुए उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इस क्रम में गोशालाओं में उपलब्ध गोबर को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती और आय के संसाधन में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग और ‘पार्टनर्स इन प्रॉसपेरिटी’ (पीएनपी) के बीच तकनीकी सहयोग का एमओयू हुआ है। इसके तहत प्रदेश में स्थापित दीनबंधु मॉडल बायोगैस संयंत्रों को तकनीकी सहयोग देने के साथ भविष्य में स्थापित होने वाले संयंत्रों के लिए भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत 1,000 तकनीकी विशेषज्ञ कर्मियों का नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। इसका लक्ष्य गोबर के वैज्ञानिक व आर्थिक उपयोग के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना है।

 

समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात जमीनी स्तर पर तकनीकी तंत्र तैयार करना है। चरणबद्ध तरीके से करीब 1,000 तकनीकी कर्मियों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह नेटवर्क दीनबंधु बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के साथ उनके संचालन, रखरखाव, तकनीकी प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग में सहयोग करेगा। इससे बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के बाद उनके नियमित और प्रभावी संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध हो सकेगी। संस्था उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 3,900 से अधिक दीनबंधु बायोगैस इकाइयों का निर्माण कर चुकी है। संस्था बायोगैस परियोजना विकास से लेकर तकनीकी डिजाइन, फीडस्टॉक एवं गोबर आकलन, संयंत्र निर्माण, संचालन एवं रखरखाव, लाभार्थियों के प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग तक पूरा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।

गोबर के एक चक्र से ऊर्जा, खाद, खेती और कार्बन लाभ

नई पहल की अहमियत केवल गोबर से बायोगैस तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए बायोगैस, जैव-स्लरी, जैविक खाद/बायो-इनपुट, प्राकृतिक एवं पुनर्योजी कृषि, कार्बन लाभ की पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना है। यानी गोशाला का गोबर पहले ऊर्जा का स्रोत बनेगा और बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली जैव-स्लरी को जैविक खाद और बायो-इनपुट के रूप में खेती से जोड़ा जा सकेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक व पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस मॉडल को भविष्य में पर्यावरणीय लाभ और कार्बन परियोजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम होगा।

‘गोबर अपशिष्ट नहीं, ग्रामीण समृद्धि का संसाधन’

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोबर को केवल अपशिष्ट मानने के बजाय ऊर्जा, जैविक कृषि और ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखने की आवश्यकता है। दीनबंधु बायोगैस मॉडल को तकनीकी रूप से सुदृढ़ कर बड़े स्तर पर लागू किया जाना गोशालाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बहुआयामी लाभ का आधार बन सकता है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध गोबर संसाधन को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक उर्वरक और सतत कृषि से जोड़ते हुए ऐसी सर्कुलर इकोनॉमी विकसित करना है, जिसमें गोवंश संरक्षण के साथ रोजगार, ऊर्जा की बचत, कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय लाभ भी हासिल हों। प्रदेश के किसान और ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का जमीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। तकनीकी नेटवर्क और स्थानीय अनुभव का मेल गोशालाओं में बायोगैस मॉडल को टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक अवसर

योगी सरकार के गो-संरक्षण मॉडल में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें गोवंश संरक्षण को आर्थिक चक्र से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गोबर यदि ऊर्जा और जैविक खाद में परिवर्तित होकर खेती में वापस पहुंचता है तो गोशालाओं के संसाधनों के उपयोग के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए भी आर्थिक अवसर तैयार हो सकते हैं। इस तरह प्रदेश में ‘गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैविक कृषि और जैविक कृषि से समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाला है।

Raghav Chadha SIR Row: ‘दिल्ली वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने की कोशिश’; राघव चड्ढा के पंजाब ड्राफ्ट लिस्ट विवाद में नया मोड़, AAP का बड़ा आरोप

Raghav Chadha SIR Row: पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम ‘शिफ्टेड’ (दूसरी जगह चले गए) बताए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी (AAP) के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया है कि पंजाब की AAP सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया है। वहीं, AAP ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया है कि राघव चड्ढा दिल्ली में अपना नाम वोटर लिस्ट में रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश कर रहे थे।

आम आदमी पार्टी ने अपने पूर्व सहयोगी पर आरोप लगाया कि इसके लिए चड्ढा ने कथित तौर पर बैकडेटेड प्रोसेस” (पुरानी तारीख वाली प्रक्रिया) का सहारा लिया गया। पार्टी का कहना है कि अब चड्ढा अपनी ही स्थिति का ठीकरा AAP और पंजाब सरकार पर फोड़ रहे हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग के एक सीनियर अधिकारी ने दिल्ली की वोटर लिस्ट में चड्ढा का नाम शामिल करने के लिए पर्दे के पीछे की किसी भी कोशिश के दावों को खारिज करते हुए पीटीआई से कहा, “ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया और न ही उठाया जा रहा है।” आपको बता दें कि चड्ढा ने अप्रैल में AAP छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जॉइन की थी।

क्या है पूरा विवाद?

पंजाब में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रोसेस के बाद तैयार की गई वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में राघव चड्ढा के नाम के आगे “शिफ्टेड” स्टेटस दर्ज किया गया है। पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गुरुवार को कहा कि वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में उनके नाम के आगे शिफ्टेड (यानी कहीं और चले गए) लिखा गया है। जबकि उनका वोटर ID मोहाली में रजिस्टर्ड है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार राजनीतिक बदले की भावना से चुनावी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है।

X पर एक पोस्ट में चड्ढा ने कहा, “पंजाब में AAP सरकार अब बदले की राजनीति को वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट तक ले आई है। मैं पंजाब से राज्यसभा सांसद हूं और मेरा वोटर ID पंजाब के मोहाली में रजिस्टर्ड है। इसके बावजूद वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट में मेरे नाम के आगे ‘शिफ्टेड’ लिखा गया है।” उन्होंने आरोप लगाया, “यह सिर्फ क्लर्क की गलती नहीं लगती। यह साफ तौर पर राजनीतिक बदले की भावना का मामला है।” चड्ढा ने कहा कि वह SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

‘शिफ्टेड किसने मार्क किया’?

चड्ढा ने आगे कहा, “अच्छी बात यह है कि यह सिर्फ एक ड्राफ्ट लिस्ट है, फाइनल वोटर लिस्ट नहीं। ‘दावे और आपत्तियों’ (claims and objections) की प्रक्रिया के दौरान सुधार किए जा सकते हैं, जो अभी चल रही है। फाइनल वोटर लिस्ट अक्टूबर में जारी की जाएगी। मैं पहले से ही SIR गाइडलाइंस के तहत उपलब्ध उपायों का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हूं।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उन्हें “शिफ्टेड” किसने मार्क किया? इस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया और ऊंचे लेवल पर इसे किसने मंजूरी दी?

पंजाब अधिकारियों पर लगाया आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार के अधिकारी शामिल थे। चड्ढा ने आरोप लगाया, “मुझे ‘शिफ्टेड’ के तौर पर किसने मार्क किया? AAP सरकार के एक अधिकारी ने? उस क्लासिफिकेशन को किसने वेरिफाई किया? फिर से AAP सरकार के ही एक अधिकारी ने…। ऊंचे स्तर पर यह प्रक्रिया किसने पूरी की? एक बार फिर उसी AAP सरकार के एक अधिकारी ने।” उन्होंने दावा किया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी तक, पंजाब सरकार के अधिकारी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) प्रक्रिया के हर चरण में तैनात होते हैं।

उन्होंने कहा, “BLO आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के अधिकारी असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (AERO), इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEO भी पंजाब सरकार के अधिकारी होते हैं। सबसे ऊपर पंजाब कैडर का IAS अधिकारी होता है जो मुख्य चुनाव अधिकारी के तौर पर काम करता है।” उन्होंने दावा किया कि ऐसे अधिकारी राजनीतिक दबाव में आ सकते हैं क्योंकि उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर राज्य सरकार के कंट्रोल में होते हैं।

राज्यसभा सांसद ने आरोप लगाया, “इन अधिकारियों को पता है कि चुनाव ड्यूटी खत्म होने के बाद AAP सरकार ही उनके ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका ट्रांसफर कर सकता है और कौन उनकी जिंदगी मुश्किल बना सकता है। इस तरह, AAP सरकार राजनीतिक बदला लेने के लिए राज्य के अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव डालती है।” उन्होंने यह भी कहा कि जब से उन्होंने “भ्रष्ट” पार्टी छोड़ी है, तब से आम आदमी पार्टी का नेतृत्व उनसे नाराज है।

चुनाव आयोग की नियमों का किया जिक्र

उन्होंने कहा, “AAP ने उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी का इस्तेमाल किया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया। पंजाब सरकार ने उन अन्य सांसदों को भी निशाना बनाया है जिन्होंने AAP छोड़कर BJP का दामन थामा। यह गलत क्लासिफिकेशन उसी राजनीतिक बदले की भावना का ताजा उदाहरण है।” चड्ढा ने चुनाव आयोग की विस्तृत SIR गाइडलाइंस के पैरा 4(d) का भी जिक्र किया, जिसमें जन-प्रतिनिधियों की एक “प्रोटेक्टेड लिस्ट” (सुरक्षित सूची) का प्रावधान है।

AAP का पलटवार

चड्ढा की बातों पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP की पंजाब यूनिट के प्रवक्ता ने कहा कि स्पेशल समरी रिविजन (SSR) चुनाव आयोग करता है, न कि राज्य सरकार। उन्होंने कहा, “वोटर लिस्ट में किसका नाम शामिल करना है या किसका नाम हटाना है, इसमें पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं होती।” प्रवक्ता ने आगे कहा, “यह बात सभी जानते हैं कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते हैं, पंजाब में नहीं। अगर वह अब पंजाब में नहीं रहते हैं, तो यह उनकी अपनी जिम्मेदारी थी कि वह या तो वहां अपना वोटर रजिस्ट्रेशन बनाए रखते या उसे कहीं और ट्रांसफर करवाते। वोटर लिस्ट से अपना नाम हटने के लिए वह अब AAP या पंजाब सरकार को दोष नहीं दे सकते।”

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उन्होंने यह भी दावा किया कि AAP को चुनाव आयोग के सूत्रों से जानकारी मिली है कि चड्ढा “बैक-डेटेड प्रोसेस” का इस्तेमाल करके दिल्ली के राजिंदर नगर में वोटर के तौर पर रजिस्टर होने की कोशिश कर रहे थे। AAP प्रवक्ता ने कहा, “अगर बैक डेटेड प्रोसेस या ऐसी कोई गैर-कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई थी, तो इसकी जांच होनी चाहिए और पूरी सच्चाई जनता के सामने आनी चाहिए। अगर BJP या किसी और ने बैक-डेटेड प्रोसेस के जरिए नाम दर्ज कराने में मदद की है, तो हम इस मामले को तार्किक अंजाम तक पहुंचाएंगे और सच्चाई सामने लाएंगे।”

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

पंजाब SIR में राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से कटा! AAP सरकार पर भड़के BJP सांसद

Raghav Chadha name removed from voter list in SIR

पंजाब में SIR में भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चढ्‍डा का नाम कटने से हड़कंप मच गया। उन्होंने राज्य की भगवंत मान सरकार पर बदले की राजनीति के ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स तक लाने का आरोप लगाया। ALSO READ: क्या राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का बदलेगा विभाग? मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों के बीच उठे बड़े सवाल

 

राघव चढ्‍डा ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि आप सरकार अब बदले की राजनीति को प्रारूप मतदाता सूची (ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल्स) तक ले आई है।

 

उन्होंने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हूँ और मेरा वोटर आईडी पंजाब के मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद, प्रारूप मतदाता सूची में मेरे नाम को स्थानांतरित के रूप में वर्गीकृत किया गया है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। 'दावे और आपत्ति' (क्लेम्स एंड ऑब्जेक्शन) प्रक्रिया के दौरान नामों को सुधारा जाता है, जो फिलहाल जारी है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित की जाएगी। मैं एसआईआर (SIR) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठाने की प्रक्रिया में हूं।

 

भाजपा सांसद के अनुसार, यह केवल एक लिपिकीय गलती नहीं लगती। यह राजनीतिक प्रतिशोध का एक स्पष्ट मामला है। मुझे ‘स्थानांतरित’ के रूप में किसने चिह्नित किया? आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उस वर्गीकरण का सत्यापन किसने किया? फिर से, आप की पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने आगे बढ़ाया? एक बार फिर, वही आप की पंजाब सरकार के अधिकारी ने।

 

उन्होंने कहा कि जमीन पर तैनात बीएलओ (BLO) से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस पूरी प्रक्रिया का हर प्रशासनिक स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों से भरा पड़ा है। बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार का एक जूनियर कर्मचारी होता है। बीच के एईआरओ, ईआरओ और डीईओ पंजाब सरकार के अधिकारी हैं। सबसे शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी हैं जो पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि ये अधिकारी जानते हैं कि चुनावी ड्यूटी समाप्त होते ही आप सरकार उनके तबादले, तैनाती और करियर को नियंत्रित करती है। वे जानते हैं कि कौन उनका तबादला कर सकता है और कौन उनका जीवन कठिन बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक बदले को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव बनाती है।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका नेतृत्व गुस्से में जल रहा है। इसने हममें से उन लोगों के खिलाफ पंजाब पुलिस और पंजाब सरकार की प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया है जिन्होंने चुप रहने से इनकार कर दिया था। आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए अन्य सांसदों को भी पंजाब सरकार द्वारा निशाना बनाया गया है। यह गलत वर्गीकरण उस राजनीतिक प्रतिशोध का एक नया अध्याय है।

 

उन्होंने कहा कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि चुनाव आयोग के एसआईआर (SIR) के विस्तृत दिशानिर्देशों का पैराग्राफ 4(d) उन जनप्रतिनिधियों के लिए एक 'सुरक्षित सूची' (प्रोटेक्टेड लिस्ट) बनाता है जिनके नाम चिह्नित किए गए हैं। इसमें न्यायाधीश, सांसद और विधायक शामिल हैं। यह कहता है: न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों के धारकों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल व लोक सेवा आदि क्षेत्रों की हस्तियों के वे सभी नाम जो पहले चुनावी डेटाबेस में चिह्नित किए गए हैं, उन्हें प्रारूप मतदाता सूची में शामिल किया जाना है, ताकि दावों और आत्तियों की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज भी एकत्र किए जा सकें।

 

राघव चढ्‍डा ने कहा कि मैं पंजाब से मौजूदा संसद सदस्य हूं। यदि मेरे नाम को चिह्नित भी किया गया था, तो पैराग्राफ 4(d) के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची में मेरा नाम शामिल करना अनिवार्य था। इस निर्देश की केवल अनदेखी नहीं की गई, बल्कि मेरे मामले में जानबूझकर इसका उल्लंघन किया गया। आप भले ही पंजाब सरकार चला सकती है, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची उसकी निजी संपत्ति नहीं है।

देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर के समय की इनकी कहानी जानिए

Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।

इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।

भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।

यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।

जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।

उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।

उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।

जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन

मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?

CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।

उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।

रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।

मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।

जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर

मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।

उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।

स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।

कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।

ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।

जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग

एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।

बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।

एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।

‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।

जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?

मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।

इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।

1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।

बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।

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सुंदर पिचाई का फ्यूचर मंत्र! तकनीक बदलेगी, लेकिन इंसान पर भरोसा करना न छोड़े

टेक्नोलॉजी की दुनिया में हर दिन कुछ नया आता रहता है। कभी नया फोन लॉन्च होता है, तो कभी किसी ऐप या सॉफ्टवेयर में नया फीचर जुड़ जाता है। ऐसे बदलाव हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाते हैं। लेकिन इनके पीछे सिर्फ मशीनों का कमाल नहीं होता, बल्कि इन्हें बनाने और इस्तेमाल करने वाले लोगों की सोच भी बहुत मायने रखती है। सुंदर पिचाई टेक्नोलॉजी के फ्यूचर को लेकर काफी पॉजिटिव सोच रखते हैं। उनका मानना है कि टेक्निक हमारी जिंदगी को बेहतर बना सकती है, लेकिन इसके लिए लोगों की सोच और सही फैसले भी जरूरी हैं। यानी उनका भरोसा सिर्फ टेक्नोलॉजी पर नहीं, बल्कि उन लोगों पर भी है जो इसे बनाते हैं और सही तरीके से इस्तेमाल करते हैं।

 

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सुंदर पिचाई का आज का विचार-

मैं आशावादी हूं, इसलिए नहीं कि मुझे टेक्नोलॉजी पर भरोसा है, बल्कि इसलिए कि मुझे लोगों पर भरोसा है।

 

लोगों पर भरोसा करें

सुंदर पिचाई के इस विचार का मतलब है कि फ्यूचर को लेकर उनका भरोसा सिर्फ टेक्नोलॉजी पर नहीं है। मशीनें काम को तेज कर सकती हैं, सॉफ्टवेयर कई चीजों को अपने आप कर सकता है और AI कुछ ही सेकंड में जवाब दे सकता है। लेकिन सही फैसला लेना अभी भी इंसान के हाथ में है। कौन-सी परेशानी हल करनी है, किसी जवाब पर भरोसा करना है या नहीं और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किस तरह करना है, यह इंसान ही तय करता है।

 

अपने फैसले खुद लें

नई टेक्नोलॉजी आने के बाद हर कोई उसे एक ही तरीके से इस्तेमाल नहीं करता। कंपनियां तय करती हैं कि उन्हें कौन-सा सिस्टम अपनाना है, एम्पलॉई देखते हैं कि वह उनके काम को कैसे आसान बना सकता है और कस्टमर तय करते हैं कि कौन-सा प्रोडक्ट लंबे समय तक चलेगा। वहीं गवर्नमेंट और दूसरी ऑर्गेनाइजेशन यह तय करती हैं कि किसी टेक्निक के इस्तेमाल के लिए कौन से नियम होने चाहिए।

टेक्नोलॉजी कई ऐसे काम कर सकती है, जिनमें पहले काफी समय और मेहनत लगती थी। इससे काम करने का तरीका जरूर बदल रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इंसानों की जरूरत खत्म हो जाएगी। किसी को यह तय करना होगा कि काम कैसे किया जाए, नतीजा सही है या नहीं और गलती होने पर क्या कदम उठाना है। बातचीत करना, परेशानी को समझना, सही फैसला लेना और दूसरों के साथ मिलकर काम करना जैसी खूबियां आज भी जरूरी हैं।

 

 

 

नई चीजें सीखते रहे

टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है, इसलिए एक ही सिस्टम या टूल को हमेशा के लिए सीख लेना काफी नहीं है। आज जो सॉफ्टवेयर काम का है, हो सकता है कुछ समय बाद उसकी जगह कोई नया टूल ले ले। ऐसे में नई चीजों को सीखने और जरूरत के हिसाब से खुद को बदलने की आदत काफी काम आती है। शुरुआत में किसी नई टेक्नोलॉजी को समझने में परेशानी हो सकती है, लेकिन गलतियों से सीखकर धीरे-धीरे बेहतर हुआ जा सकता है।

 

 

 

AI इनफार्मेशन सोच-समझकर अपनाएं

पिचाई की बात का मतलब यह नहीं है कि टेक्नोलॉजी से जुड़ी हर चीज अच्छी ही होगी। AI गलत जानकारी दे सकता है, ऑटोमेशन से कुछ नौकरियों पर असर पड़ सकता है और डिजिटल टेक्नोलॉजी से प्राइवेसी जैसे सवाल भी खड़े हो सकते हैं। इसलिए नई टेक्निक को अपनाते समय सिर्फ उसके फायदे देखना सही नहीं है। यह भी समझना जरूरी है कि इसे किसने बनाया, इसका इस्तेमाल कौन कर रहा है, इससे किसे फायदा हो रहा है और इसकी वजह से किन लोगों को परेशानी हो सकती है।

 

 

टेक्नोलॉजी लगातार बदल रही है, इसलिए जरूरी है कि हम भी नई चीजों के साथ खुद को बदलते रहें। हर नई टेक्निक को बिना सोचे अपनाने के बजाय यह समझना बेहतर है कि वह हमारे लिए कितनी काम की है। खुली सोच और सीखने की आदत के साथ हम आने वाले बदलावों को आसानी से अपना सकते हैं।

बेटियों की प्रतिभा को मंच, सपनों को पंख दे रही योगी सरकार

बेटियों की प्रतिभा को मंच, सपनों को पंख दे रही योगी सरकार

प्रदेश की बेटियों को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार लगातार नई पहल कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार को लखनऊ के खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में राज्य स्तरीय युवा महोत्सव हौसलों की उड़ान-2026 का आयोजन किया गया। 

 

बेटियों के आत्मविश्वास को मिल रहा सरकार का संबल

 

इस दौरान समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने छात्राओं से संवाद कर उनकी प्रतिभा एवं उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की बेटियों में प्रतिभा के साथ आत्मविश्वास भी भरपूर है। शिक्षा के साथ खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों में उनकी बढ़ती भागीदारी इसका प्रमाण है। बेटियां हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए तैयार हैं। 

 

अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की राह हुई आसान

 

योगी सरकार की मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मजबूत माध्यम बन रही है। खुन खुन जी गर्ल्स पीजी कॉलेज में संचालित अभ्युदय योजना के तहत अब तक 80 विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन हो चुका है। यह उपलब्धि योजना के प्रभाव और छात्राओं की मेहनत दोनों को दर्शाती है।

 

अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब से मिलेगा डिजिटल संसाधनों का लाभ

 

मंत्री असीम अरुण ने घोषणा की कि अभ्युदय कोचिंग को और प्रभावी बनाने के लिए कॉलेज में जल्द ही अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की जाएगी। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहीं छात्राओं को ऑनलाइन अध्ययन सामग्री, मॉक टेस्ट और डिजिटल रिसर्च जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी। योगी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ आधुनिक तकनीकी संसाधन भी उपलब्ध हों, ताकि वे अपने सपनों को साकार कर आत्मनिर्भर बन सकें।