Vodafone Idea Share Price: SBI के नेतृत्व में बैंकों का ग्रुप $3.5 अरब देने पर हुआ राजी, शेयर 1% तक उछला

वोडाफोन आइडिया लिमिटेड की मुश्किलें लग रहा है कि थोड़ी कम होने वाली हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की अगुवाई में कर्ज देने वालों का एक ग्रुप वोडाफोन आइडिया को लगभग 3.5 अरब डॉलर का कर्ज देने पर सहमत हो गया है। यह बात ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से कही गई है। उनका कहना है कि इस ग्रुप में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया लिमिटेड और नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट भी शामिल हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वोडाफोन आइडिया इस फंड का कुछ हिस्सा अपने नेटवर्क को बेहतर बनाने और भारती एयरटेल लिमिटेड और रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के साथ बेहतर मुकाबला करने के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रही है।

कंपनी को दिए जाने वाले लोन की अवधि 10 साल है। फंडिंग की शर्तों में यह शामिल है कि अरबपति कुमार मंगलम बिड़ला लोन की अवधि के दौरान चेयरमैन बने रहेंगे। डिफॉल्ट होने की स्थिति में उन्हें पेमेंट की गारंटी भी देनी होगी।

Vodafone Idea का शेयर 6 महीनों में 55 प्रतिशत मजबूत

कंपनी के शेयरों में 11 सितंबर को तेजी है। BSE पर शेयर पिछले ​बंद भाव से 1.6 प्रतिशत तक चढ़कर 15.20 रुपये के हाई तक गया। कंपनी का मार्केट कैप 1.63 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर एक महीने में 16 प्रतिशत और 6 महीनों में 55 प्रतिशत बढ़ा है। एक साल में यह निवेशकों का पैसा डबल कर चुका है। वोडाफोन आइडिया में सरकार के पास लगभग 49 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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जून तिमाही में घाटे में गिरावट

कर्ज में फंसी टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया का घाटा अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कम होकर 3,754 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले कंपनी को 6,611 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। ऑपरेशंस से रेवेन्यू 6 प्रतिशत बढ़कर 11,689 करोड़ रुपये हो गया, जबकि जून 2025 तिमाही में यह 11,023 करोड़ रुपये था। जून 2026 तिमाही में कंपनी के ग्राहकों की संख्या करीब 2 प्रतिशत घटकर 19.31 करोड़ रह गई। प्रति ग्राहक औसत रेवेन्यू (एआरपीयू) 10.2 प्रतिशत बढ़कर 195 रुपये हो गया।

वोडाफोन आइडिया मजबूत स्थिति में आने के लिए कर्ज जुटाने पर काम कर रही है। CNBC-TV18 ने मई में रिपोर्ट दी थी कि कंपनी कर्ज देने वालों के साथ बातचीत कर रही है। SBI के इस ग्रुप की अगुवाई करने की संभावना जताई गई थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

Bank Strike Today: लगातार 4 दिन ठप रहेगा बैंकों का कामकाज! जानिए सोमवार को भी RBI ने क्यों दी है छुट्टी, ग्राहकों के लिए ये हैं ऑप्शन

Bank strike news: देश भर के बैंकों में आज से अगले चार दिनों तक सामान्य कामकाज प्रभावित रहने वाला है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर 11 सितंबर को बुलाई गई देशव्यापी बैंक हड़ताल के साथ ही बैंकों की लंबी बंदी का दौर शुरू हो गया है। 11 सितंबर की हड़ताल के बाद दूसरा शनिवार, रविवार और फिर गणेश चतुर्थी के अवसर पर कई राज्यों के बैंकों में काम ठप रहेगा। इसके चलते बैंक शाखाओं के जरिए होने वाले कामकाज पर भी सीधा असर पड़ेगा।

लगातार 4 दिन क्यों ठप रहेंगे बैंक? जानिए पूरा कैलेंडर

11 सितंबर (शुक्रवार): यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के नेतृत्व में देशव्यापी बैंक हड़ताल।

12 सितंबर (शनिवार): महीने का दूसरा शनिवार होने की वजह से देश भर में नियमित बैंक अवकाश।

13 सितंबर (रविवार): साप्ताहिक बंदी।

14 सितंबर (सोमवार): गणेश चतुर्थी त्योहार को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हॉलिडे कैलेंडर के तहत संबंधित राज्यों में बैंकों में छुट्टियां दी गई हैं।

यहां ये जानना जरूरी है कि अलग-अलग राज्यों में त्योहारों के आधार पर बैंक छुट्टियों की लिस्ट अलग होती है, इसलिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने क्षेत्र के बैंक हॉलिडे कैलेंडर की पुष्टि जरूर कर लें। अगर आपको RBI ऑफिशियल हॉलिडे कैलेंडर देखना है तो इसे यहां क्लिक कर देखा जा सकता है।

11 सितंबर को क्यों बुलाई गई हड़ताल? ये हैं प्रमुख मांगें

यूनियनों ने अपनी कई लंबे समय से पेंडिंग डिमांड मांगों को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ यह हड़ताल आयोजित की है। हड़ताल का मुख्य मुद्दा हफ्ते में 5 दिन काम की व्यवस्था लागू करना है। यह मांग 8 मार्च 2024 को भारतीय बैंक संघ (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच साइन किए गए समझौते और संयुक्त नोट पर आधारित है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत महीने के दूसरे और चौथे शनिवार के अलावा बाकी सभी शनिवारों को बैंकों में छुट्टी घोषित किया जाना है जबकि इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक कर्मचारियों के डेली वर्किंग टाइम में कुछ समय बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा बैंक संगठन वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के लिए लागू परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) संरचना का भी विरोध कर रहे हैं और इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं।

क्या बंद रहेंगी सभी सेवाएं? जानें ऑनलाइन और UPI का क्या होगा

बैंक शाखाओं के दरवाजे बंद रहने के बावजूद डिजिटल माध्यमों से बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी। आम ग्राहक UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए नियमित फंड ट्रांसफर, बिलों का भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के इस्तेमाल कर सकते हैं। कैश निकालने के लिए एटीएम और दूसरी सेल्फ-सर्विस बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध रहने की उम्मीद है। फिजिकल डॉक्यूमेंट जमा करना, चेक क्लियरेंस और नो योर कस्टमर से जुड़ी प्रक्रियाएं यानी ऐसे काम जिनके लिए बैंक ब्रांच जाना अनिवार्य है उनमें इन चार दिनों के दौरान रुकावट या देरी आ सकती है।

ग्राहकों के लिए क्या हैं विकल्प और आगे की सलाह?

शाखाओं से जुड़े किसी भी काम के लिए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे बैंक जाने से पहले अपनी संबंधित ब्रांच से संपर्क करें या डिजिटल विकल्पों का रुख करें। साधारण लेनदेन, पैसे भेजने और बिल भरने के लिए मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल करना सबसे आसान विकल्प रहेगा। जिन लोगों के चेक प्रोसेसिंग में लगे हैं, वे चार दिनों की छुट्टियों को ध्यान में रखते हुए अपने वित्तीय फैसलों की योजना बनाएं।

आने वाले दिनों में भी हड़ताल की चेतावनी

अगर बैंक कर्मचारियों की मांगों पर सहमति नहीं बनती है, तो आने वाले समय में भी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। बैंक यूनियनों ने 28, 29 और 30 सितंबर को भी आगे की हड़ताल का ऐलान किया है। इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की योजना बनाई गई है। हालांकि बैंकों का कहना है कि वे आम जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए व्यवस्था करेंगे, फिर भी शाखा स्तर पर सेवाओं में देरी से इंकार नहीं किया जा सकता।

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हिमाचल प्रदेश को बड़ी सौगात! 11 सितंबर को खुल रही हैं 2 नई सुरंगें, 2 घंटे का सफर अब सिर्फ 60 मिनट में कराने की तैयारी

Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पंडोह-तकोली सेक्शन के NH-03 पर देवड़ और हनोगी की दो प्रमुख सुरंगों को 11 सितंबर 2026 से ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। इससे कुल्लू-मनाली और आगे लेह-लद्दाख की ओर जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस प्रोजेक्ट के तहत 2.8 किलोमीटर लंबी देवड़ टनल (T4-01) और 650 मीटर लंबी हनोगी टनल (T4-02) तैयार की गई हैं। ये दोनों सुरंगें इस मार्ग के दो बेहद महत्वपूर्ण जाम वाले हिस्सों को खत्म करने में मदद करेंगी।

जाम से मिलेगी राहत

इन दोनों टनल के शुरू होने के बाद प्रभावित सड़क का हिस्सा 6 किलोमीटर से घटकर करीब 3.5 किलोमीटर रह जाएगा। इससे जोगनी माता मंदिर, देवड़ और हनोगी के पास लगने वाले लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी। खासकर टूरिस्ट सीजन में इन जगहों पर लोगों को 1 से 2 घंटे या उससे भी ज्यादा समय तक जाम में फंसे रहना पड़ता है।

समय की बचत

ये टनल NH-21 के एंड ऑफ पंडोह बाईपास-टकोली सेक्शन के ₹4,465.94 करोड़ के 4-लेन प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। 18.908 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर का निर्माण हाइब्रिड एन्युटी मोड (HAM) के तहत किया जा रहा है। सड़क पर ट्रैफिक बेहतर होने के बाद सामान्य परिस्थितियों में मंडी से कुल्लू का सफर करीब 2 घंटे से घटकर लगभग 60 मिनट रह जाएगा।

नितिन गडकरी ने X पर पोस्ट कर दी जानकारी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, ” माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, हम हिमाचल प्रदेश के लोगों के लिए सुरक्षित, तेज और ज्या भरोसेमंद कनेक्टिविटी बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

बता दें कि केंद्र सरकार के इस प्रोजेक्ट से हिमाचल प्रदेश में ट्रैफिक व्यवस्था अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम होने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय लोगों की आवाजाही को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।

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Apple Event 2026 Live Updates: iPhone 18 Pro, Foldable iPhone, Apple Watch और AirPods पर बड़े ऐलान

Apple Event 2026 Live Updates: iPhone 18 Pro, Foldable iPhone, Apple Watch और AirPods पर बड़े ऐलान

Apple Event 2026

Apple Event 2026

Apple Event 2026 Live Updates : Apple  अपने सबसे बड़े लॉन्च इवेंट में नए iPhone और अन्य प्रोडक्ट्स से पर्दा उठाने जा रहा है। ‘Surprise and shine’ नाम से होने वाला यह इवेंट भारतीय समय के अनुसार रात 10:30 बजे शुरू होगा। इस बार सभी की नजरें iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ Apple के पहले फोल्डेबल iPhone पर टिकी हैं।

इसके अलावा Apple Watch और AirPods को लेकर भी बड़े ऐलान की उम्मीद है। नए CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में होने वाले इस खास इवेंट से जुड़ी हर बड़ी घोषणा, लॉन्च, कीमत, फीचर्स और उपलब्धता की जानकारी आपको यहां Apple Event 2026 Live Updates में सबसे पहले मिलेगी।

बेटियों की सुरक्षा और आत्मसम्मान के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, स्कूलों में शिक्षकों को मिलेगी खास ट्रेनिंग

बेटियों की सुरक्षा और आत्मसम्मान के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम, स्कूलों में शिक्षकों को मिलेगी खास ट्रेनिंग

योगी सरकार बालिकाओं की शिक्षा को उनके आत्मसम्मान, सुरक्षा, गरिमा और नेतृत्व क्षमता से जोड़ते हुए विद्यालयी वातावरण को अधिक संवेदनशील बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में बच्चों के आत्मसम्मान को प्रभावित करने वाले संवेदनशील मुद्दों पर शिक्षकों की समझ विकसित की जा रही है। रूप-रंग अथवा शारीरिक बनावट को लेकर चिढ़ाना, स्वयं और दूसरों को केवल शरीर या रूप-रंग के आधार पर देखना, अपने शरीर और उसकी क्षमताओं को पहचानना, सोशल मीडिया का प्रभाव तथा लैंगिक रूढ़ियां प्रशिक्षण के प्रमुख विषय हैं। 

 

विशेष परियोजना फॉर इक्विटी के अंतर्गत मीना मंच कार्यक्रम एवं सेल्फ-एस्टीम परियोजना के लिए आज से दो बैच में 100 प्रतिभागियों का दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण शुरू हो गया है। व्यापक प्रशिक्षण रूपरेखा में कुल 450 मास्टर ट्रेनर्स को तैयार करने का लक्ष्य है। 

 

इस पहल का उद्देश्य शिक्षकों को बच्चों के संवेदनशील अनुभवों को समझने और उनके साथ प्रभावी संवाद के लिए तैयार करना है, ताकि विद्यालयों में सुरक्षित, सहभागी और सम्मानजनक वातावरण मजबूत हो तथा हर बालिका आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा और भविष्य की ओर आगे बढ़ सके।

 

आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दों पर समझ

प्रशिक्षण में नव-विकसित चार कॉमिक पुस्तकों को शिक्षण संसाधन के रूप में शामिल किया गया है। इनके माध्यम से रूप-रंग और शारीरिक बनावट के आधार पर चिढ़ाने एवं परेशान करने, शरीर को लेकर बच्चों की धारणाओं, अपने शरीर से जुड़ाव एवं उसकी क्षमताओं तथा सोशल मीडिया के प्रभाव जैसे विषयों को समझाया जा रहा है। इन संसाधनों के उपयोग से बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और विद्यालयी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के तरीकों का भी प्रदर्शन होगा। 

 

लैंगिक रूढ़ियों पर संवेदनशील संवाद

प्रशिक्षण में मीना मंच के गठन, ‘पॉवर एंजिल’ की भूमिका और सहभागितापूर्ण सहजीकरण की प्रक्रिया पर काम हो रहा है। एसटीएआरएस सिद्धांत के माध्यम से सुरक्षित वातावरण में बच्चों की बात सुनने, बिना पूर्वधारणा के संवाद करने, सभी आवाजों को महत्व देने और अनुभवों से सीखने की प्रक्रिया समझाई जा रही है। लैंगिक रूढ़ियों की पहचान तथा कॉमिक्स और कक्षा गतिविधियों के माध्यम से इन विषयों पर संवाद का भी अभ्यास हो रहा है। 

 

पॉक्सो अधिनियम से बाल सुरक्षा पर जोर

प्रशिक्षण के पहले दिन लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) पर चर्चा के माध्यम से बाल सुरक्षा के प्रमुख संदेशों को स्पष्ट किया गया। मॉक प्रदर्शन और रचनात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से प्रतिभागियों के सहजीकरण कौशल को मजबूत करने का प्रयास हुआ। बच्चों और शिक्षकों की कहानियों को एकत्रित, दस्तावेजीकृत और प्रस्तुत करने की प्रक्रिया पर भी काम होगा। 

 

किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा

दूसरे दिन संशोधित ‘प्रगति के पंख’ मॉड्यूल के चार नए अध्यायों, 13 सत्रों और शिक्षक मार्गदर्शिका की समझ विकसित की जाएगी। समूह अभ्यास और मॉक सत्रों के माध्यम से इसके सत्रों को पाठ्यक्रम तथा किशोर-किशोरियों के जीवन से जोड़ने का अभ्यास होगा। ‘अरमान’ मॉड्यूल और अभिभावक सत्रों की जानकारी भी दी जाएगी। 

 

मासिक धर्म स्वास्थ्य और गरिमा पर चर्चा

उच्चतम न्यायालय के डॉ. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार एवं अन्य (2026) निर्णय के प्रमुख निहितार्थों पर भी चर्चा होगी। मासिक धर्म स्वास्थ्य, गरिमा और विद्यालय की जिम्मेदारियों के अंतर्गत सुरक्षित शौचालय, पानी, आवश्यक उत्पाद, निस्तारण, गोपनीयता और जागरूकता जैसे विषयों पर विद्यालयी स्तर पर व्यावहारिक कदम तय करने का अभ्यास कराया जाएगा। 

 

 

संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने कहा कि योगी सरकार बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मसम्मान, सुरक्षा और नेतृत्व का वातावरण देने के लिए प्रतिबद्ध है। रूप-रंग, शारीरिक बनावट, सोशल मीडिया और लैंगिक रूढ़ियों जैसे संवेदनशील विषयों को समझना शिक्षकों के लिए बेहद आवश्यक है। मीना मंच के माध्यम से शिक्षकों को तैयार करने से विद्यालयों में बच्चों के साथ अधिक संवेदनशील और प्रभावी संवाद को मजबूती मिलेगी।

 

स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने कहा कि बच्चों के आत्मसम्मान और सुरक्षित वातावरण के लिए शिक्षकों का संवेदनशील होना महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षण में बॉडी इमेज, सोशल मीडिया के प्रभाव, लैंगिक रूढ़ियों, बाल सुरक्षा और मासिक धर्म स्वास्थ्य जैसे विषयों को व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़कर समझाया जा रहा है। प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर्स के माध्यम से यह समझ विद्यालय स्तर तक प्रभावी रूप से पहुंचाई जाएगी।

मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत..? छात्र को नोटिस भेजने पर भड़के CJI, ग्रेटर नोएडा प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

मजिस्ट्रेट की इतनी हिम्मत..? छात्र को नोटिस भेजने पर भड़के CJI, ग्रेटर नोएडा प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार

CJI Suryakant news

CJI Suryakant: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के मामले में सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशों के बावजूद छात्रों पर कार्रवाई करने को लेकर शीर्ष अदालत बेहद सख्त नजर आ रही है। ग्रेटर नोएडा के एक एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट द्वारा यूनिवर्सिटी के छात्र को 'शांति बंधपत्र' का नोटिस भेजने पर चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने साफ लहजे में पूछा कि जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा चुका है, तो मजिस्ट्रेट की ऐसी हिम्मत कैसे हुई? 

 

अदालत के स्पष्ट रुख के बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आदेशों की अनदेखी का एक बड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां CJI सूर्यकांत ग्रेटर नोएडा प्रशासन की कार्यशैली पर बुरी तरह भड़क गए। मामला गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी (GBU) के छात्र अक्षत त्रिपाठी को जारी किए गए एक प्रशासनिक नोटिस से जुड़ा है। ALSO READ: CJP प्रोस्टेट पर बोले CJI- युवाओं की बात सुननी चाहिए, हिंसा का जवाब हिंसा नहीं हो सकता

 

जब यह मामला चीफ जस्टिस की पीठ के समक्ष लाया गया, तो उन्होंने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकता है? हमने पहले ही साफ कर दिया था कि छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में किसी भी छात्र के खिलाफ कोई जबरन या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। देश का कोई भी मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।

क्या है पूरा विवाद और क्यों भेजा गया नोटिस?

यह पूरा मामला दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। ग्रेटर नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत छात्र अक्षत त्रिपाठी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में छात्र से 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। ALSO READ: NEET प्रदर्शन विवाद : पुलिस लाठीचार्ज वाली याचिका मामले में क्यों भड़के CJI सूर्यकांत?

 

पुलिस का दावा था कि प्रयागराज निवासी और GBU का छात्र अक्षत छात्रों को उकसाने, सरकार विरोधी और भ्रामक प्रचार फैलाने का काम कर रहा था, जिससे परिसर में तनाव फैल सकता था। छात्र अक्षत त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन में भाग लिया था और वह किसी तरह का भ्रामक प्रचार नहीं कर रहा था।

स्थानीय प्रशासन बैकफुट पर

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पूर्व में ही छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी एफआईआर रद्द कर चुका है और सीजेपी प्रदर्शनों से जुड़े किसी भी छात्र पर दंडात्मक कार्रवाई न करने का अंतरिम आदेश दे चुका है। अदालत का कड़ा रुख देखने और मामला तूल पकड़ने के बाद ग्रेटर नोएडा पुलिस और स्थानीय प्रशासन बैकफुट पर आ गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला संज्ञान में आते ही इस नोटिस को निरस्त कर दिया गया है।

Mangal Neech Bhang Rajyog: कर्क राशी में गोचर करेंगे मंगल और गुरु के साथ बनाएंगे नीचभंग राजयोग, 4 राशियों की जागेगी किस्मत

Mangal Neech Bhang Rajyog: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। यह ग्रह 18 सितंबर को शाम 4.44 बजे कर्क राशि में प्रवेश करने वाला है। कर्क राशि में मंगल नीच के होते हैं, यानी कम प्रभावशाली होते हैं। लेकिन इस राशि में गुरु पहले से विराजमान हैं और यह उनकी स्वराशि है और इसमें वह उच्च के होते हैं। इस राशि में 18 सितंबर को मंगल और गुरु की युति बनेगी। साथ ही, अपनी नीच राशि में पहुंचते ही मंगल नीचभंग राजयोग का निर्माण करेंगे। ज्योतिषशास्त्र में यह एक अत्यंत शुभ और शक्तिशाली स्थिति मानी जाती है। जब कुंडली में मंगल अपनी नीच राशि (कर्क राशि) में स्थित हो, लेकिन कुछ विशेष नियमों के कारण उसका नीचत्व (कमजोरी) समाप्त होकर वह राजयोग में परिवर्तित हो जाता है, तो इसे नीचभंग राजयोग कहते हैं।

मंगल के कर्क राशि में होने पर नीचभंग की स्थिति मुख्य रूप से कई परिस्थितियों में बनती है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा यदि मंगल के साथ बैठा हो या मंगल पर दृष्टि डाल रहा हो। इसके अलावा, यदि बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में मंगल के साथ हो या उस पर अपनी शुभ दृष्टि डाल रहा हो। जैसा कि 18 सितंबर को हो रहा है। मंगल का नीचत्व भंग होने से जातक में अद्भुत इच्छाशक्ति, निडरता और प्रशासनिक या नेतृत्व क्षमता आ जाती है। मंगल भूमि और अचल संपत्ति का कारक है, इसलिए इस योग के प्रभाव से व्यक्ति बड़ी मात्रा में संपत्ति, मकान या रियल एस्टेट में सफलता प्राप्त करता है।

इन राशियों को मिलेगा शुभ फल

मेष राशि : मेष राशि के स्वामी मंगल हैं, इसलिए मंगल का यह गोचर आपके लिए विशेष महत्व रखता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने या कार्यक्षेत्र में प्रभाव बढ़ने के योग बन सकते हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को किसी पुराने प्रोजेक्ट से लाभ मिल सकता है। आर्थिक दृष्टि से भी समय सकारात्मक रह सकता है।

वृषभ राशि : वृषभ राशि के जातकों के लिए मंगल का गोचर आर्थिक मामलों में सक्रियता बढ़ा सकता है। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना बन सकती है। नौकरी में आय बढ़ाने या अतिरिक्त कमाई का कोई रास्ता सामने आ सकता है। कारोबारी जातकों को नई डील से फायदा मिल सकता है।

तुला राशि : तुला राशि वालों के लिए मंगल का यह गोचर करियर और कारोबार के लिहा ज से महत्वपूर्ण हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी का अवसर मिल सकता है। कारोबारियों के लिए नई डील, साझेदा री या विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है। आर्थिक मामलों में अचानक लाभ के अवसर भी बन सकते हैं।

वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि के स्वामी भी मंगल हैं। इसलिए कर्क राशि में मंगल का नीचभंग होना आपके लिए खास माना जा रहा है। नौकरी में पदोन्नति या बेहतर अवसर मिल सकता है। कारोबारियों को विदेश से जुड़े किसी काम से लाभ मिलने के योग बन सकते हैं। लंबे समय से रुका कोई काम गति पकड़ सकता है।

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जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी का चेहरा एलिस वीडल कैसे बनीं:लेस्बियन होकर भी समलैंगिक शादी के खिलाफ, श्रीलंका में जन्मी प्रवासी विरोधी नेता की पार्टनर

जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन AfD की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD पार्टी की चीफ एलिस वीडेल खुद लेस्बियन हैं। उनकी शादी श्रीलंका में जन्मी एक महिला से हुई है। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडेल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडेल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? बचपन: नाजी अतीत वाले फैमिली में जन्म जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई और उन्हें जज बना दिया गया। उनका परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो उनका परिवार सिलेसिया से भागकर पश्चिमी जर्मनी आ गया। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। 1985 में जब वीडल के दादा की मौत हुई, तब वह सिर्फ छह साल की थीं। वीडल के मुताबिक, उनके दादा ने नाजी शासन के दौरान जो काम किए थे, उस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, “वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए वह कभी-कभी अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं।” स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनकी सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और इसके बाद जर्मनी लौट आईं। राजनीति में आने से पहले वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और अर्थव्यवस्था की अच्छी समझ थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। उनका जन्म श्रीलंका में हुआ था और बचपन में एक स्विस परिवार ने उन्हें गोद ले लिया था। दोनों की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई और 2009 से वे साथ रहने लगीं। आज वीडल और सारा स्विट्जरलैंड में अपने दो गोद लिए हुए बेटों के साथ रहती हैं। दोनों बच्चों की परवरिश साथ मिलकर करती हैं। सारा के मुताबिक वह खुद घर में पत्नी की जिम्मेदारियां निभाती हैं। दोनों ने अपने रिश्ते को काफी निजी रखा है और उनकी पहली मुलाकात कब और कहां हुई, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई। राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गई थीं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की राजनीति, शरणार्थी बने बड़ा मुद्दा फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की राजनीति की दिशा बदल दी। सीरिया में 2011 से चल रहा गृहयुद्ध तब तक और ज्यादा हिंसक हो चुका था। अपनी जान बचाने के लिए सीरिया के लाखों लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। सिर्फ सीरिया ही नहीं, अफगानिस्तान, इराक और कुछ दूसरे देशों में युद्ध और हिंसा से परेशान लोग भी यूरोप की ओर बढ़ने लगे। कुछ ही महीनों में यूरोप पहुंचने वाले शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ गई और बड़ी संख्या में लोग जर्मनी पहुंचने लगे। शरणार्थी संकट AfD के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। यानी जो पार्टी शुरुआत में यूरो और आर्थिक मुद्दों को लेकर बनी थी, वह धीरे-धीरे प्रवासियों और शरणार्थियों के विरोध के लिए पहचानी जाने लगी। एक साल बाद 2016 में AfD ने अपना पहला घोषणापत्र जारी किया। इसमें समलैंगिता का विरोध भी जुड़ गया। पार्टी ने स्कूलों में सेक्स और यौन विविधता से जुड़ी शिक्षा का विरोध किया। विरोधाभास: लेस्बियन होकर भी समलैंगिक शादी के खिलाफ यहीं एलिस वीडेल और AfD को लेकर विरोधाभाष दिखता है। जो पार्टी प्रवासियों और समलैंगिक विवाह के खिलाफ है, उसी पार्टी की सबसे बड़ी नेता खुद एक समलैंगिक महिला हैं और एक अप्रवासी महिला के साथ परिवार चला रही हैं। जब वीडल से पूछा गया कि वह खुद लेस्बियन होने के बावजूद ऐसी पार्टी की नेता क्यों हैं, जो समलैंगिक अधिकारों का विरोध करती है, तो उनका जवाब था कि उनका लेस्बियन होना और AfD की नेता होना ही एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। वीडल का कहना है कि समलैंगिक लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा कुछ मुस्लिम गिरोहों से है। उनका तर्क है कि अगर जर्मनी दूसरे देशों से आने वाले लोगों की संख्या पर रोक लगाए और आव्रजन को सख्त करे, तो समलैंगिक लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी। यानी वीडल अपनी लेस्बियन पहचान को AfD से अलग नहीं देखतीं। वह इसी पहचान का हवाला देकर पार्टी की प्रवासियों को लेकर सख्त नीति का बचाव करती हैं। यही विरोधाभास उन्हें AfD का एक अलग तरह का चेहरा बनाता है। वीडल समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता देने के खिलाफ रही हैं। हालांकि, वह समलैंगिक जोड़ों को कानूनी पार्टनरशिप देने के पक्ष में हैं। इसका मतलब है कि शादी किए बिना भी दो लोगों के रिश्ते को कानून की मान्यता मिल जाए और उन्हें संपत्ति, मेडिकल फैसलों और कुछ आर्थिक या पारिवारिक मामलों में कानूनी अधिकार मिल सकें। जर्मनी की अगली चांसलर की रेस में 2013 में बनी AfD को उसी साल के चुनाव में 4.7% वोट मिले थे। अब हाल के सर्वे में पार्टी को करीब 27-28% वोट मिल रहे हैं। यानी करीब एक दशक में AfD का समर्थन कई गुना बढ़ गया है। पूर्वी जर्मनी में मजबूत पकड़: सैक्सोनी और थुरिंगिया जैसे राज्यों में AfD का मजबूत आधार है। हाल ही में सैक्सोनी-अनहाल्ट में पार्टी को करीब 44% वोट मिले, जो उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सरकार बनाने की होगी। जर्मनी की दूसरी बड़ी पार्टियां अब तक AfD के साथ गठबंधन करने से इनकार करती रही हैं। इसलिए सिर्फ सबसे ज्यादा वोट मिल जाना वीडल के चांसलर बनने के लिए काफी नहीं होगा। उन्हें सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन भी हासिल करना होगा। यही तय करेगा कि AfD की बढ़ती ताकत 2029 में एलिस वीडल को जर्मनी की चांसलर की कुर्सी तक पहुंचा पाती है या नहीं। ————————– यह खबर भी पढ़ें… जर्मनी में पहली बार कट्टरपंथी AfD पार्टी ने चुनाव जीता:यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों का दबदबा बढ़ा, फ्रांस में ले-पेन, ब्रिटेन में नाइजल फराज मजबूत

पूर्वी जर्मनी के छोटे से राज्य सैक्सोनी-अनहाल्ट में रविवार को दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की। यूरोप में शायद पहली बार हुआ है जब किसी राज्य चुनाव के नतीजे को लोकतंत्र के भविष्य से इतना जोड़कर देखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी का चेहरा एलिस वीडल कैसे बनीं:खुद लेस्बियन, पार्टनर श्रीलंका में जन्मी; फिर भी समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ

जर्मनी के सैक्सोनी-आनहाल्ट में सितंबर 2026 के चुनाव में अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहली बार है, जब जर्मनी में कोई दक्षिणपंथी पार्टी किसी राज्य में इतनी बड़ी जीत के साथ सत्ता के करीब पहुंची है। AfD दूसरे देशों से आकर जर्मनी में बसे लोगों और समलैंगिक शादी के खिलाफ अपने सख्त रुख के लिए जानी जाती है। लेकिन इस पार्टी की कहानी में एक बात सबसे ज्यादा चौंकाती है। AfD की चीफ एलिस वीडल खुद लेस्बियन हैं। उनकी पार्टनर श्रीलंका में जन्मी हैं। यानी जिस पार्टी की नीतियां समलैंगिक शादी और प्रवासियों के खिलाफ हैं, उसी पार्टी की सबसे ताकतवर नेता की अपनी निजी जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। जर्मनी में AfD के बढ़ते प्रभाव के पीछे वीडल का बड़ा हाथ माना जाता है। लेकिन उनकी राजनीति को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर एलिस वीडल कौन हैं और वह ऐसी पार्टी का चेहरा कैसे बनीं, जिसकी सोच उनकी अपनी जिंदगी से बिल्कुल अलग है? बचपन: दादा हिटलर समर्थक थे, घर छोड़कर भागना पड़ा जर्मन अखबार डाय वेल्ट के मुताबिक वीडल का बचपन ऐसे माहौल में बीता, जहां राजनीति को लेकर काफी चर्चा होती थी। हालांकि, उनके माता-पिता किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े नहीं थे। वीडल के दादा हंस वीडल हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े हुए थे। इस दौरान उनकी काफी तरक्की हुई। हिटलर ने उन्हें 1941 में नाजी कब्जे वाले वारसॉ में सैन्य न्यायधीश बनाया था। वीडल परिवार तब सिलेसिया में रहता था। यह अब पोलैंड का इलाका है। द्वितीय विश्व युद्ध में जब हिटलर की हार हुई तो वे भागकर पश्चिमी जर्मनी पहुंचे। यहां वीडल परिवार ने फर्नीचर का काम शुरू किया। 1979 में एलिस वीडल का जन्म हुआ। वह सिर्फ 6 साल की थीं, जब उनके दादा की मौत हो गई। एलिस के मुताबिक, नाजी शासन के दौरान उनके दादा ने क्या काम किए थे, इस बारे में परिवार में कभी बातचीत नहीं हुई। टीचर को चिढ़ाने के लिए मर्सिडीज से स्कूल जाती थीं अपने स्कूली दिनों को लेकर वीडल ने बताया कि उनके स्कूल के ज्यादातर शिक्षक वामपंथी विचारधारा से प्रभावित थे। वह कहती हैं, वे मुझे पसंद नहीं करते थे और मैं भी उन्हें पसंद नहीं करती थी। उनको चिढ़ाने के लिए मैं अपने पिता की मर्सिडीज से स्कूल जाती थी स्कूली दिनों में वीडल डॉक्टर बनना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता इसके खिलाफ थे। उनका कहना था कि डॉक्टर की पूरी जिंदगी बीमार लोगों के बीच गुजरती है। ऐसे पेशे में जाने का कोई मतलब नहीं है। पिता की सलाह पर वीडल ने इकोनॉमिक्स और बिजनेस की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग और बिजनेस में करियर शुरू किया। कुछ समय उन्होंने अमेरिकी इनवेस्टमेंट कंपनी गोल्डमैन सैक्स में काम किया। इसके बाद वह चीन चली गईं। मंदारिन सीखी, चीन की अर्थव्यवस्था समझी चीन में वीडल ने बैंक ऑफ चाइना में काम किया और 5 साल तक वहां रहीं। इसी दौरान उन्होंने मंदारिन यानी चीनी भाषा सीखी और बिजनेस कंसल्टेंट के तौर पर भी काम किया। चीन में रहते हुए उनकी दिलचस्पी वहां की अर्थव्यवस्था में बढ़ी और उन्होंने चीन की पेंशन व्यवस्था के भविष्य पर रिसर्च शुरू की। 2011 में उन्होंने इसी विषय पर डॉक्टरेट पूरी की और फिर जर्मनी लौट आईं। वीडल अर्थशास्त्र पढ़ चुकी थीं, बैंक में काम कर चुकी थीं और चीन में कई साल बिता चुकी थीं। यानी राजनीति में आने से पहले ही उन्हें पैसे, कारोबार और दुनियादारी की अच्छी समझ हो गई थी। प्यार-परिवार: पार्टनर के ताना मारने पर राजनीति में एंट्री साल 2007 में वीडल की मुलाकात सारा बॉसार्ड से हुई। सारा स्विट्जरलैंड की फिल्म निर्माता हैं। सारा का जन्म श्रीलंका में हुआ था। जब वह सिर्फ तीन महीने की थीं, तब स्विट्जरलैंड के एक पादरी दंपती ने उन्हें गोद ले लिया था। वीडल और सारा की दोस्ती धीरे-धीरे रिश्ते में बदल गई। दोनों 2009 से साथ हैं। वे स्विट्जरलैंड में अपने दो बेटों के साथ रहती हैं और मिलकर उनकी परवरिश करती हैं। सारा बोसार्ड ने दोनों बच्चों को स्पर्म डोनेशन की मदद से जन्म दिया। दोनों बच्चों के जैविक पिता अलग-अलग पुरुष हैं। यह कोई गुमनाम स्पर्म बैंक का मामला नहीं था। वीडल और सारा दोनों बच्चों के जैविक पिताओं को जानती हैं और बच्चों को भी अपने जैविक पिता की पहचान पता है। हालांकि, इन दोनों पुरुषों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। वीडल के मुताबिक, AfD में शामिल होने का आइडिया उन्हें उनकी पार्टनर सारा से ही मिला था। एक पार्टी में वीडल लगातार यूरोपीय संघ की राजनीति पर बातें किए जा रही थीं। उनकी लंबी-लंबी बातें सुनकर सारा परेशान हो गईं। उन्होंने वीडल से कहा, अगर राजनीति पर इतनी ही बातें करनी हैं तो खुद राजनीति में क्यों नहीं चली जातीं? सारा की यह बात वीडल के मन में बैठ गई… राजनीति: देखते ही देखते AfD का सबसे बड़ा चेहरा बन गईं 2013 में वीडल नई-नई बनी AfD पार्टी से जुड़ गईं। उस समय पार्टी का मुख्य मुद्दा प्रवासी या समलैंगिक विवाह नहीं, बल्कि यूरो और यूरोजोन संकट था। AfD इस बात के खिलाफ थी कि जर्मनी आर्थिक संकट से जूझ रहे दूसरे यूरोपीय देशों को लगातार पैसे दे। वीडल भी यूरो को लेकर जर्मनी की नीतियों की आलोचना करती थीं। यही वजह थी कि वह इस नई पार्टी के साथ जुड़ीं। AfD में शामिल होने के बाद वीडल का कद तेजी से बढ़ने लगा। कुछ ही समय में वह पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व में पहुंच गईं। उनकी पहचान ऐसी नेता के तौर पर बनने लगी, जो आर्थिक मामलों को अच्छी तरह समझती थीं और पार्टी की बात को मीडिया के सामने मजबूती से रख सकती थीं। 2015 में बदली AfD की सियासत, शरणार्थी को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया फिर आया 2015, वह साल जिसने जर्मनी की राजनीति की दिशा बदल दी। सीरिया में 2011 से चल रहा गृहयुद्ध और ज्यादा हिंसक हो चुका था। अपनी जान बचाने के लिए लाखों लोग घर छोड़कर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में निकल पड़े। सिर्फ सीरिया ही नहीं, अफगानिस्तान, इराक और कुछ दूसरे देशों में युद्ध और हिंसा से परेशान लोग भी यूरोप की ओर बढ़ने लगे। कुछ ही महीनों में यूरोप पहुंचने वाले शरणार्थियों की संख्या तेजी से बढ़ गई और बड़ी संख्या में लोग जर्मनी पहुंचने लगे। शरणार्थी संकट AfD के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। यानी जो पार्टी शुरुआत में यूरो और आर्थिक मुद्दों को लेकर बनी थी, वह धीरे-धीरे प्रवासियों और शरणार्थियों के विरोध के लिए पहचानी जाने लगी। एक साल बाद 2016 में AfD ने अपना पहला घोषणापत्र जारी किया। इसमें समलैंगिता का विरोध भी जुड़ गया। पार्टी ने स्कूलों में सेक्स और यौन विविधता से जुड़ी शिक्षा का विरोध किया। विरोधाभास: लेस्बियन होकर भी समलैंगिक शादी के खिलाफ यहीं एलिस वीडल और AfD को लेकर विरोधाभाष दिखता है। जो पार्टी प्रवासियों और समलैंगिक विवाह के खिलाफ है, उसी पार्टी की सबसे बड़ी नेता खुद एक समलैंगिक महिला हैं और एक अप्रवासी महिला के साथ परिवार चला रही हैं। जब वीडल से पूछा गया कि वह खुद लेस्बियन होने के बावजूद ऐसी पार्टी की नेता क्यों हैं, जो समलैंगिक अधिकारों का विरोध करती है, तो उनका जवाब था कि उनका लेस्बियन होना और AfD की नेता होना ही एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। वीडल का कहना है कि समलैंगिक लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा कुछ मुस्लिम गिरोहों से है। उनका तर्क है कि अगर जर्मनी दूसरे देशों से आने वाले लोगों की संख्या पर रोक लगाए और आव्रजन को सख्त करे, तो समलैंगिक लोगों की सुरक्षा बढ़ेगी। यानी वीडल अपनी लेस्बियन पहचान को AfD से अलग नहीं देखतीं। वह इसी पहचान का हवाला देकर पार्टी की प्रवासियों को लेकर सख्त नीति का बचाव करती हैं। यही विरोधाभास उन्हें AfD का एक अलग तरह का चेहरा बनाता है। 2017 में वीडल ने खुद कहा था कि उनकी निजी जिंदगी और पार्टी की पारिवारिक नीति में पूरी तरह समानता नहीं है। उन्होंने यह भी माना था कि वह परिवार नीति के मामले में पार्टी लाइन से ज्यादा उदार हैं। वीडल समलैंगिक शादी को कानूनी मान्यता देने के खिलाफ रही हैं। हालांकि, वह समलैंगिक जोड़ों को कानूनी पार्टनरशिप देने के पक्ष में हैं। कानूनी पार्टनरशिप का मतलब है शादी किए बिना भी दो लोगों के रिश्ते को कानून की मान्यता मिल जाए और उन्हें संपत्ति, मेडिकल फैसलों और कुछ आर्थिक या पारिवारिक मामलों में कानूनी अधिकार मिल सकें। जर्मनी की अगली चांसलर की रेस में 2013 में बनी AfD को उसी साल के चुनाव में 4.7% वोट मिले थे। अब हाल के सर्वे में पार्टी को करीब 27-28% वोट मिल रहे हैं। यानी करीब एक दशक में AfD का समर्थन कई गुना बढ़ गया है। पूर्वी जर्मनी में मजबूत पकड़: सैक्सोनी और थुरिंगिया जैसे राज्यों में AfD का मजबूत आधार है। हाल ही में सैक्सोनी-अनहाल्ट में पार्टी को करीब 44% वोट मिले, जो उसका अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। अब AfD सबसे बड़ी चुनौती सरकार बनाने की होगी। जर्मनी की दूसरी बड़ी पार्टियां अब तक AfD के साथ गठबंधन करने से इनकार करती रही हैं। इसलिए सिर्फ सबसे ज्यादा वोट मिल जाना वीडल के चांसलर बनने के लिए काफी नहीं होगा। उन्हें सरकार बनाने के लिए दूसरी पार्टियों का समर्थन भी हासिल करना होगा। यही तय करेगा कि AfD की बढ़ती ताकत 2029 में एलिस वीडल को जर्मनी की चांसलर की कुर्सी तक पहुंचा पाती है या नहीं। ————————– यह खबर भी पढ़ें… जर्मनी में पहली बार कट्टरपंथी AfD पार्टी ने चुनाव जीता:यूरोप में दक्षिणपंथी पार्टियों का दबदबा बढ़ा, फ्रांस में ले-पेन, ब्रिटेन में नाइजल फराज मजबूत

पूर्वी जर्मनी के छोटे से राज्य सैक्सोनी-अनहाल्ट में रविवार को दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने बड़ी जीत हासिल की। यूरोप में शायद पहली बार हुआ है जब किसी राज्य चुनाव के नतीजे को लोकतंत्र के भविष्य से इतना जोड़कर देखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

World’s 10 Richest Person: एलन मस्क से लेकर मार्क जुकरबर्ग तक…ये हैं दुनिया के 10 सबसे अमीर लोग, जानें किसके पास है कितनी संपत्ति

World’s 10 Richest Person: दुनिया के सबसे अमीर लोगों में कौन-कौन शामिल है इसकी लिस्ट आ गई है। इस महीने अरबपतियों की लिस्ट में बड़ा बदलाव हुआ है। अगस्त 2026 के दौरान दुनिया के सबसे अमीर लोगों की संपत्ति में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली। फोर्ब्स की 1 सितंबर 2026 तक की सूची के मुताबिक दुनिया के टॉप 10 अरबपतियों की कुल संपत्ति करीब 2.8 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई। वहीं दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में एलन मस्क टॉप पर है। वहीं जेफ बेजोस, अमानसियो ऑर्टेगा ने टॉप-10 में जगह बना ली है। इस लिस्ट में टेक और बिजनेस की दुनिया के कई बड़े नाम शामिल हैं। आइए जानते हैं सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में मार्क जुकरबर्ग, जेफ बेजोस, स्टीव बाल्मर और अमानसियो ऑर्टेगा किस स्थान पर है।

1- एलन मस्क

फोर्ब्स की 1 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति बने हुए हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 892 अरब डॉलर आंकी गई है। अगस्त के दौरान स्पेसएक्स और टेस्ला के शेयरों में तेजी का सीधा फायदा उनकी संपत्ति पर पड़ा। इस दौरान उनकी नेट वर्थ में करीब 202 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इससे पहले जून में मस्क कुछ समय के लिए दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर भी बने थे।

2- लैरी पेज

फोर्ब्स की सूची में गूगल के सह-संस्थापक लैरी पेज 277 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। वहीं अगस्त के दौरान उनकी संपत्ति में करीब 15 अरब डॉलर की कमी आई। इस वजह से वह उस महीने टॉप-10 अरबपतियों में सबसे ज्यादा संपत्ति गंवाने वाले व्यक्ति रहे। लैरी पेज ने 1998 में सर्गेई ब्रिन के साथ मिलकर गूगल की शुरुआत की थी।

3- जेफ बेजोस

अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस फोर्ब्स की सूची में 268 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति हैं। अगस्त के महीने में उनकी कुल संपत्ति में करीब 10 अरब डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले जुलाई में बेजोस ने सर्गेई ब्रिन को पीछे छोड़ते हुए अमीरों की सूची में तीसरा स्थान हासिल किया था।

4- सर्गेई ब्रिन

गूगल के सह-संस्थापक सर्गेई ब्रिन दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में चौथे स्थान पर हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 256 अरब डॉलर है, जो पिछले महीने की तुलना में 13 अरब डॉलर कम हुई है। ब्रिन ने 1998 में लैरी पेज के साथ मिलकर गूगल की शुरुआत की थी। वह अभी भी अल्फाबेट के बोर्ड में शामिल हैं और कंपनी के प्रमुख शेयरहोल्डर में से एक हैं।

5- माइकल डेल

फोर्ब्स की अमीरों की सूची में डेल टेक्नोलॉजीज के प्रमुख माइकल डेल पांचवें स्थान पर हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 241 अरब डॉलर है और अगस्त के दौरान इसमें लगभग 12 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। कॉलेज के दिनों में ही कारोबार शुरू करने के बाद माइकल डेल ने अपने आज डेल टेक्नोलॉजीज के चेयरमैन और सीईओ के तौर पर कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं।

6- मार्क जुकरबर्ग

मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में छठे स्थान पर हैं। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति करीब 197 अरब डॉलर है, जो पिछले महीने के मुकाबले 6 अरब डॉलर अधिक है। जुकरबर्ग ने 2004 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान फेसबुक की शुरुआत की थी। समय के साथ कंपनी ने अपना नाम बदलकर मेटा कर लिया और इंस्टाग्राम व व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म भी इसके कारोबार का हिस्सा बने।

7- लैरी एलिसन

ओरेकल के सह-संस्थापक लैरी एलिसन फोर्ब्स की अमीरों की सूची में सातवें स्थान पर पहुंच गए हैं। उनकी कुल संपत्ति करीब 193 अरब डॉलर है। अगस्त के दौरान उनकी संपत्ति में लगभग 25 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई, जो टॉप-10 अरबपतियों में दूसरी सबसे बड़ी बढ़त रही। एलिसन ने 1977 में ओरेकल की शुरुआत में अहम भूमिका निभाई थी।

8- जेन्सेन हुआंग

एनवीडिया के सीईओ जेन्सेन हुआंग दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में आठवें पायदान पर हैं। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 191 अरब डॉलर है, जिसमें अगस्त के दौरान 17 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। हुआंग ने 1993 में एनवीडिया की स्थापना की थी और लंबे समय से कंपनी के सीईओ और प्रेसिडेंट के रूप में इसकी कमान संभाल रहे हैं।

9-स्टीव बाल्मर

माइक्रोसॉफ्ट के पूर्व सीईओ स्टीव बाल्मर दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में नौवें स्थान पर पहुंच गए हैं। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति करीब 155 अरब डॉलर है और अगस्त में इसमें 10 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इस बढ़त के साथ बाल्मर 11वें स्थान से ऊपर उठकर टॉप-10 में शामिल हो गए। कारोबार के अलावा वह NBA टीम लॉस एंजिल्स क्लिपर्स के मालिक भी हैं।

10-अमानसियो ओर्टेगा

स्पेन के कारोबारी अमानसियो ओर्टेगा ने दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूची में टॉप-10 में जगह बना ली है। फोर्ब्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति करीब 148 अरब डॉलर है, जिसमें अगस्त के दौरान 5 अरब डॉलर का इजाफा हुआ। संपत्ति बढ़ने के साथ ऑर्टेगा 12वें पायदान से सीधे 10वें स्थान पर पहुंच गए और उन्होंने बर्नार्ड अर्नाल्ट को पीछे छोड़ दिया। ऑर्टेगा फैशन ब्रांड जारा की पैरेंट कंपनी इंडिटेक्स के सह-संस्थापक हैं।