सऊदी अरब के एयर डिफेंस सिस्टम ने मंगलवार को मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बुधवार को बताया कि ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल होने से पहले ही मार गिराया गया। सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि इस्लाम के पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सऊदी अरब के लिए रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि गठबंधन हूतियों के खिलाफ जरूरी कदम उठाएगा। वहीं हूति विद्रोहियों ने मक्का या दूसरे पवित्र स्थलों को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है। हूतियों की समाचार एजेंसी SABA के मुताबिक, संगठन से मक्का या अन्य पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं है। मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र शहर है। यहां मुस्लिमों के प्रमुख पवित्र स्थल हैं और हर साल दुनिया भर से लाखों लोग हज के लिए पहुंचते हैं। अल-मलिकी ने इस घटना को मक्का को निशाना बनाने की हूतियों की दूसरी कोशिश बताया। इससे पहले जुलाई 2017 में गठबंधन ने हूतियों पर मक्का की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाया था। इस्लामिक देशों के संगठन ने हूती हमलों को आतंकवाद बताया इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने मक्का और मदीना क्षेत्र में हूती हमलों की निंदा की है। संगठन ने कहा कि पवित्र जगहों, मस्जिदों और आम लोगों के ठिकानों पर हमला करना आतंकवाद है। ऐसी कार्रवाई इस्लाम की सीख और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। यमन में तनाव के बाद सऊदी में हमले ईरान से जुड़े हूतियों का आरोप है कि सऊदी अरब यमन में हवाई हमले कर रहा है और क्रूज मिसाइलें दाग रहा है। यमन के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में हूती लड़ाकों और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच भारी लड़ाई चल रही है। इसी बीच हूतियों ने यमन के पश्चिमी लाल सागर तट पर तेजी से अपना कब्जा बढ़ाया है। उन्होंने सोमवार को इस इलाके में दो और द्वीप ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश पर भी कब्जा कर लिया। ये दोनों द्वीप बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में स्थित हैं। हूतियों ने पिछले हफ्ते सऊदी एयरबेस पर हमले का दावा किया हूतियों ने पिछले एक हफ्ते सऊदी अरब के खिलाफ कई हमलों का दावा किया है। सोमवार को संगठन ने एक एयरबेस को निशाना बनाने की बात कही थी। हूतियों के मुताबिक, यह कार्रवाई यमन पर हुए हवाई हमलों के जवाब में की गई। ————— ये खबर भी पढ़ें… मक्का में पहली बार मिसाइल अटैक का इमरजेंसी अलर्ट:हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर हमला किया; 2017 में भी मक्का की ओर आई थी मिसाइल यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

यह बात राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ यानी आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने कही है। वे एक जैन धर्मगुरू से मिलने गए थे, जहां उनसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी के समानता वाले दिशानिर्देशों के बारे में पूछा गया था। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता बनाने का जो दिशानिर्देश जारी किया है वह अभी कानून नहीं बना है और कभी भी कानून नहीं बनेगा। उनका यह बयान बहुत बड़ा है और इससे दो सवाल उठते हैं। पहला सवाल तो यह है कि क्या मोहन भागवत की सरकार में कोई ऑथोरिटी है, जो वे कह रहे हैं कि यह कभी कानून नहीं बनेगा या सरकार के किसी व्यक्ति ने उनसे ऐसी बात कही है? अनौपचारिक रूप से सब जानते हैं कि भाजपा के ऊपर संघ का क्या असर है। लेकिन क्या औपचारिक रूप से संघ प्रमुख इस तरह की घोषणा कर सकते हैं? दूसरा सवाल यह है कि अभी यह ऐलान करने की जरुरत क्यों पड़ी है?
गौरतलब है कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों के कैम्पस में कथित तौर पर समानता बहाल करने के लिए इस साल फरवरी में एक नया दिशानिर्देश जारी किया था। उसे लेकर बहुत तीव्र विरोध हुआ क्योंकि उससे ज्यादा असमानता बनाने वाला और भेदभाव को बढ़ाने वाला सरकारी निर्देश आज तक आजाद भारत में नहीं जारी हुआ था। वह दिशानिर्देश कैम्पस में प्रवेश से पहले ही सामान्य वर्ग के छात्र को अपराधी बना देने वाला है। अगर ये निर्देश लागू हो जाते तो किसी भी सामान्य वर्ग के छात्र को, जिसकी दाखिले के समय 18 साल के आसपास उम्र होगी उसे उत्पीड़न के आरोप में फंसाया जा सकता था। फंसाने वाले के आरोप अगर गलत निकलते तब भी उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होती। सो, जैसे ही ये निर्देश जारी हुए वैसे ही इसका विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने इस पर रोक लगा दी। पिछले सात महीने से यथास्थिति बनी हुई है और भेदभाव रोकने का 2012 का पुराना दिशानिर्देश लागू है।
इसलिए सात महीने बाद मोहन भागवत ने ऐलान किया है कि यह कभी कानून नहीं बनेगा इसका अर्थ है कि अब सामान्य वर्ग के लोगों की नाराजगी की आंच संघ और भाजपा दोनों को महसूस होने लगी है। उनको लगने लगा है कि वे सामान्य वर्ग को नाराज कर अपनी ताकत गंवा रहे हैं। धारणा के स्तर पर, मीडिया और सोशल मीडिया में समर्थन के स्तर पर और राजनीतिक व चुनावी स्तर पर भी यह दबाव महसूस हो रहा है। तभी भागवत ने यह बात कही है। और तभी ऐसा लग रहा है कि सरकार इसे नहीं लागू करने जा रही है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई हुई तो केंद्र सरकार ने कहा कि वह इन दिशानिर्देशों पर पुनर्विचार कर रही है। इसके बाद मामला टल गया।
इस बीच सरकार के सूचना सलाहकारों में से एक दिलीप मंडल ने इसे लेकर एक लंबी पोस्ट लिखी। वे दलित, आदिवासी और पिछड़ा उत्पीड़न के लिए सामान्य वर्ग को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं। लेकिन उनका सुर बदला हुआ था। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि रोहित वेमुला मामले के बाद कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए थे और कोर्ट ने नए दिशानिर्देश बनाने को कहा था, जिसके बाद यूजीसी के कुछ अधिकारियों ने दिशानिर्देश बना दिए। इसके आगे उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें लागू नहीं किया है। उन्होंने अपनी तरफ से अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ कर राजनीतिक नेतृत्व को बचाने का प्रयास किया। इससे भी लग रहा है कि सरकार इस मसले पर पीछे हट गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इजराइल को 2.8 अरब डॉलर यानी करीब ₹26 हजार करोड़ के हथियार देने की तैयारी कर रहा है। इस पैकेज में करीब 40 हजार भारी बम शामिल हैं। हर बम का वजन 2000 पाउंड यानी करीब 900 किलो है। इन बमों की सप्लाई पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2024 में रोक लगाई थी। प्रस्तावित हथियार पैकेज में 20 हजार Mk84 और 20 हजार BLU-117 बम शामिल हैं। डील अभी फाइनल नहीं हुई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कांग्रेस को इसकी अनौपचारिक जानकारी दे दी गई है। गाजा में बड़ी संख्या में मौतों के डर से रोक लगी थी 2024 में बाइडेन प्रशासन ने 2,000 पाउंड के इन बमों की एक खेप इजराइल भेजने पर रोक लगा दी थी। उस समय चिंता थी कि गाजा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में इनका इस्तेमाल होने पर बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो सकती है। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यह रोक हटा दी गई। अब उनका प्रशासन इन्हीं बमों की बड़ी संख्या वाली नई डील की तैयारी कर रहा है। कुछ बम जमीन के अंदर ठिकानों को भेदने के लिए इन 900 किलो के बमों के अलग-अलग मॉडल हैं। कुछ को जमीन के अंदर मौजूद ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि कुछ जमीन के ऊपर फटकर बड़े इलाके में भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक्सपर्ट्स ने गाजा में हुए हमलों के वीडियो और घटनास्थलों से मिले बमों के टुकड़ों का विश्लेषण किया है। उनके मुताबिक, वहां अमेरिकी निर्मित बमों का इस्तेमाल हुआ है। इनमें कुछ हमास के सुरंग नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में भी लोगों की मौत हुई। ट्रम्प पहले भी दे चुके हैं अरबों डॉलर के हथियार ट्रम्प प्रशासन पिछले साल इजराइल के लिए करीब 3 अरब डॉलर की हथियार बिक्री मंजूर कर चुका है। इसमें 35,500 से ज्यादा भारी बम शामिल थे। इसके बाद जनवरी में इजराइल के लिए 6.67 अरब डॉलर की एक और हथियार बिक्री को मंजूरी दी गई। 7 अक्टूबर के हमले के बाद शुरू हुआ था गाजा युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में दक्षिणी इजराइल पर हमला किया गया था। इसमें करीब 1,200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बनाया गया। इसके बाद इजराइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इजराइली अभियान में अब तक 73,264 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इनमें संघर्षविराम के बाद मारे गए लोग भी शामिल हैं। अमेरिका की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ है, लेकिन गाजा में हिंसा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। इजराइल की ओर से हमले जारी रहने के साथ ही हमास से जुड़े लड़ाकों और इजराइली सैनिकों के बीच भी हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं —————————- ये खबर भी पढ़ें…. मक्का में पहली बार मिसाइल अटैक का इमरजेंसी अलर्ट:हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर हमला किया; 2017 में भी मक्का की ओर आई थी मिसाइल यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दो विधानसभा सीटों का उपचुनाव बहुत दिलचस्प होता जा रहा है। ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के दोनों खेमे चुनाव लड़ेंगे। दोनों ने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने तृणमूल कांग्रेसे से तालमेल नहीं किया है और अपना उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। लेफ्ट का उम्मीदवार भी होगा। इस तरह भाजपा को मिला कर रेजीनगर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर कम से कम पांच बड़े उम्मीदवार होंगे।
इस बीच भाजपा ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीट से उम्मीदवार का ऐलान किया है। भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी की पारंपरिक नंदीग्राम सीट से उनके पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां को टिकट दिया है। गौरतलब है कि चंद्रनाथ रथ को छह मई की रात को गोली मारी गई थी। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी मौत हो गई थी।
बहरहाल, भाजपा ने नंदीग्राम से चंद्रनाथ रथ की मां हसीरानी रथ और रेजीनगर से शाश्वर सरकार को टिकट दिया है। यह सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे से खाली हुई है। वे नंदीग्राम के अलावा भबानीपुर सीट से भी चुनाव जीते थे। वहां उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था। चार मई को आए चुनाव नतीजों में भाजपा ने 207 सीटें जीत कर सरकार बनाई।
दोनों सीटों के उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट भी आमने सामने हैं। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउज्जमान शेख को मैदान में उतारा है। वहीं ममता गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। दोनों गुट खुद को असली तृणमूल बता कर दो फूल चुनाव चिन्ह पर दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने दोनों की बात सुनी है। आयोग के गुरुवार तक इस पर फैसला करने की संभावना है।
यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक, नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म ने यह अलर्ट जारी किया था। लोगों से ऊंची इमारतों से दूर रहने की अपील की गई। लोगों से कहा गया कि वे भीड़ और खुले इलाकों में जाने से बचें और तुरंत किसी सुरक्षित जगह चले जाएं। कुछ देर बाद सिविल डिफेंस ने बताया कि खतरा टल गया है। हालांकि, लोगों से भीड़ से दूर रहने और किसी घटना की वीडियो या फोटो नहीं बनाने की अपील की गई। मंगलवार सुबह जेद्दा और ताइफ में भी ऐसे ही इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए थे। इन्हें भी कुछ देर बाद हटा लिया गया। हूती हमलों में 13 लोग घायल हुए थे ये इमरजेंसी अलर्ट सऊदी अरब पर हूतियों के लगातार हमलों के बीच जारी किए गए हैं। सोमवार को हूतियों ने सऊदी शहरों खमिस मुशैत, अबहा और ताइफ की ओर कई मिसाइल और ड्रोन दागे थे। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 13 नागरिक घायल हुए थे। मंगलवार को जारी बयान में अल-मलिकी ने सऊदी नागरिकों को निशाना बनाने वाले हूतियों के हमलों को जानबूझकर किया गया हमला बताया। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की संप्रभुता की रक्षा के लिए सेना इन हमलों का मजबूती से जवाब देगा। हूतियों की बढ़ती गतिविधियों को रोकने के लिए सभी जरूरी सैन्य कदम उठाए जाएंगे। पिछले हफ्ते 73 लोग घायल हुए थे पिछले हफ्ते भी हूतियों ने सऊदी अरब पर मिसाइलों और ड्रोन की बड़ी संख्या में हमले किए थे। इनमें अबहा, खमिस मुशैत, जाजान और नजरान शहरों को निशाना बनाया गया था। इन हमलों में कम से कम 73 लोग घायल हुए थे। हमलों के बाद सऊदी अरब की कुछ ऊर्जा सुविधाओं का काम भी कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। खबर लगातार अपडेट हो रही है…
Ashneer Grover On UPI MDR Charge: भारतपे के सह-संस्थापक और अपनी किताब ‘दोगलापन’ के लिए मशहूर अश्नीर ग्रोवर ने UPI के नए नियमों पर एक गजब का फार्मूला बताया है। सरकार के ₹2,000 से ऊपर के UPI पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाने की अटकलों के बीच उन्होंने सरकार और बैंकिंग सिस्टम को आड़े हाथों लिया है।
हाल ही में सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर साफ किया है कि ₹2,000 तक के UPI ट्रांसजेक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से भुगतान पर बैंक या पेमेंट सिस्टम कोई चार्ज नहीं वसूल सकते। हालांकि, इस नोटिफिकेशन में ₹2,000 से ऊपर के UPI भुगतानों पर चार्ज लगाने या न लगाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। इसी को लेकर अश्नीर ग्रोवर ने सोशल मीडिया (X) पर आंकड़ों के साथ पूरा गणित समझाते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।
आइए आपको बताते हैं कि अश्नीर ग्रोवर ने क्या गणित बिठाया है और सरकार आखिर UPI पर चार्ज का फ्रेमवर्क क्यों ला रही है।
बंद करो ATM, UPI पर टैक्स की बलि क्यों?
अश्नीर ग्रोवर ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि UPI पर किसी भी तरह का चार्ज लगाना सिर्फ टैक्स वसूली जैसा है। उन्होंने कहा, ‘UPI भारत की एक ऐसी वैज्ञानिक उपलब्धि है जिसे पूरी दुनिया मानती है, पर अब यह टैक्स की बलि चढ़ेगी।’
इसके जवाब में उन्होंने कहा कि, देश में कैश और ATM इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने का सालाना खर्च करीब ₹30,500 करोड़ आता है। ग्रोवर की सलाह है कि अगर सरकार को खर्च कम ही करना है, तो एटीएम बंद कर दे और यूपीआई को बढ़ावा दे। ग्रोवर ने याद दिलाया कि RBI ने सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का सरप्लस ट्रांसफर किया है, सभी लिस्टेड बैंकों का मुनाफा ₹4.11 लाख करोड़ है और NPCI के पास टैक्स से पहले ₹1,888 करोड़ का सरप्लस है।
‘जब बैंक और आरबीआई इतना भारी मुनाफा कमा रहे हैं, तो फिर यूपीआई की वजह से किसका नुकसान हो रहा है? सरकार ऐसी कौन सी सब्सिडी दे रही है जिससे नुकसान हो रहा है?’
India mein koi 5 minutes number Google kar le to doodh ka doodh paani ka paani ho jaye.
RBI surplus to Govt : ₹2.87 Lakh Crores (US$30 Bn)
Total listed bank profits : ₹4.11 Lakh Crores (US$42 Bn)
NPCI – which runs UPI pre tax ‘surplus’ : ₹ 1,888 crores (US$200 Mn)
— Ashneer Grover (@Ashneer_Grover) September 15, 2026
सरकार का नया नियम: ₹2,000 की लिमिट और MDR
14 सितंबर को जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, ₹2,000 तक के UPI या RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट ऐप कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष चार्ज नहीं वसूल सकते।
संसद के मानसून सत्र (जो 13 अगस्त 2026 को समाप्त हुआ) में पेमेंट एक्ट की धारा 10A में संशोधन किया गया। इसके तहत इलेक्ट्रॉनिक भुगतान पर MDR लगाने का एक रास्ता तैयार हो गया है।
NPCI के नेतृत्व वाली ‘यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ अब यह तय करेगी कि ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट भुगतानों पर कितना MDR चार्ज लगाया जाएगा।
सरकार क्यों लाना चाहती है MDR फ्रेमवर्क?
सरकार का तर्क है कि UPI अब काफी बड़ा हो चुका है और इसके सुरक्षित संचालन के लिए पैसों की जरूरत है। लेनदेन की भारी मात्रा को संभालने के लिए साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए लगातार बड़े निवेश की जरूरत है। सरकार का मानना है कि UPI के अगले चरण के विस्तार के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना मुमकिन नहीं है।
जब डिजिटल पेमेंट कंपनियों को कमाई (MDR) का जरिया मिलेगा, तो इस सेक्टर में नई कंपनियां आएंगी, जिससे कॉम्पिटिशन और इनोवेशन बढ़ेगा।
कितना बड़ा हो चुका है देश का UPI का नेटवर्क?
NPCI द्वारा संचालित UPI ने पिछले एक दशक में डिजिटल पेमेंट की दुनिया बदल दी है। वित्त वर्ष 2017 में जहां UPI के जरिए ₹0.07 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ था, वहीं वित्त वर्ष 2026 (FY26) में यह बढ़कर ₹314 लाख करोड़ हो गया। यानी 10 सालों में 4,000 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी।
UPI अब भारत के अलावा दुनिया के 11 देशों में इस्तेमाल हो रहा है। उज्बेकिस्तान इस लिस्ट में शामिल होने वाला नया देश बना है। इसके अलावा सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में भी यूपीआई स्वीकार किया जाता है।
UCC Row In NDA: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा कि 21 राज्यों की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकारें 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेंगी। शाह ने कहा, “तीन तलाक को समाप्त करके मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू की है। मुझे विश्वास है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले यूसीसी लागू कर दिया जाएगा।”
शाह ने कहा कि सरकार ने भारतीय न्याय संहिता के माध्यम से देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया है। साथ ही दावा किया कि कई राज्यों में एक साल में दोषसिद्धि दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि तीन साल के भीतर न्याय दिलाने के लिए एक व्यवस्था स्थापित की जा रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर शाह ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35ए को बिना एक बूंद खून बहाए या एक गोली चलाए समाप्त किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार ने पांच दशक से जारी नक्सलवाद को समाप्त किया है। देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 14 से अधिक शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
UCC पर NDA में हलचल, JDU ने किया विरोध
अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू किए जाने के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह इस मुद्दे पर जल्द ही गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे। फिर उनकी पार्टी अपना रुख तय करेगी। झा ने इस विषय पर पीटीआई से कहा कि वह जल्द ही केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात करेंगे और उसके बाद पार्टी यूसीसी के मुद्दे पर अपना रुख तय करेगी।
बिहार में लागू नहीं होने देंगे: श्याम रजक
इस बीच, बिहार में सत्तारूढ़ राजग के प्रमुख घटक JDU के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने कहा कि पार्टी ने संसद में यूसीसी से जुड़े विधेयक का समर्थन किया था। लेकिन बिहार में इसे लागू करने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।
बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और विधायक श्याम रजक ने सोमवार को कहा कि उनकी पार्टी ने भले ही नागरिक संहिता से जुड़े विधेयक का संसद में समर्थन किया था। लेकिन वह इसे राज्य में लागू करने के पक्ष में नहीं है। JDU के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रजक ने दावा किया कि इस मुद्दे पर पार्टी का रुख सर्वोच्च नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।
JDU विधायक दल के नेता एवं बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने भी यूसीसी पर सीधे टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के प्रवक्ता बोलेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष सुनने के बाद वह कुछ कहेंगे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूसीसी के मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत करेंगे। बिहार में भारतीय जनता पार्टी नीत राजग सरकार में JDU दूसरा सबसे बड़ा घटक है। अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है।
चिराग ने भी जताया विरोध
बिहार में बीजेपी की प्रमुख सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि पहले ड्राफ्ट आए। इसमें सभी पक्षों के हित शामिल रहें। पासवान ने एक पोस्ट में लिखा, “भारत का सामाजिक ताना-बाना विविधतापूर्ण है। हर वर्ग की अपनी नागरिक परंपराएँ और रीति-रिवाज हैं। संविधान ने स्वयं इसे स्वीकार किया है। पांचवीं-छठी अनुसूची, आर्टिकल 371A व 371G, और अब तक की हर संहिता में अनुसूचित जनजातियों को दी गई छूट इसका प्रमाण है। मेरी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता- दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रारूप सार्वजनिक हो, सभी हितधारकों के हितों का अवलोकन हो, व्यापक विचार-विमर्श हो> तत्पश्चात अवलोकन उपरांत पार्टी अपना मत रखेगी।”
TDP का मिला समर्थन
लोकसभा में TDP के नेता लावू कृष्ण देवरायालु ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “हम इसका समर्थन करेंगे।” कृष्ण ने कहा, “अभी तो कोई चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन जब भी हमें इसकी जरूरत महसूस होगी, हम इस पर विचार करेंगे। इसे अपनाने से पहले हम निश्चित रूप से अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को इसमें शामिल करेंगे।”
ओवैसी ने यूसीसी को लेकर शाह पर साधा निशाना
देश के 21 राज्यों में भाजपा के नेतृत्व वाली NDA सरकारों के 2029 से पहले यूसीसी लागू करने के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल मुसलमानों को निशाना बनाना चाहता है।नउन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और शाह संविधान के आर्टिकल 25 (जो धर्म की आजादी की गारंटी देता है) और आर्टिकल 14 (जो समानता के अधिकार की गारंटी देता है) का उल्लंघन करते हुए समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
ओवैसी ने कहा कि देश की आत्मा उसकी विविधता है। यूसीसी लागू करने का मतलब गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार द्वारा नियुक्त विधि आयोग ने यह निष्कर्ष निकाला था कि यूसीसी न तो जरूरी है और न ही वांछनीय। गोवा में यूसीसी के अलग-अलग प्रावधानों का जिक्र करते हुए, उन्होंने पूछा कि क्या शाह और भाजपा पश्चिमी राज्य में भी उसी यूसीसी को लागू करेंगे, जैसा उत्तराखंड जैसे भाजपा-शासित राज्यों में लागू है।
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या एन. चंद्रबाबू नायडू, नीतीश कुमार और चिराग पासवान जैसे NDA नेता यूसीसी के प्रावधानों का समर्थन करेंगे। दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत-चीन संबंधों में आए सुधार पर ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या बेहतर द्विपक्षीय संबंधों का मतलब यह है कि भारत ने भारत-चीन सीमा पर अपने गश्त करने के अधिकार खो दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने पाकिस्तान को हथियार दिए थे।
‘सांप्रदायिक राजनीतिक के लिए कर रही यूसीसी का इस्तेमाल’
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) शासित 21 राज्यों में 2029 से पहले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की घोषणा को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मुद्दे का इस्तेमाल सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के लिए कर रही है। माकपा ने कहा कि एकरूपता का मतलब हमेशा समानता नहीं होता और यूसीसी लागू करने की घोषणा से भाजपा का राजनीतिक इरादा स्पष्ट हो गया है।
माकपा ने आरोप लगाया कि BJP समान अधिकारों से जुड़े जटिल सवाल को सांप्रदायिक और बहुसंख्यकवादी राजनीति के हथियार में बदल रही है। अगले लोकसभा चुनाव से पहले अपने हिंदुत्व वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वाम दल ने कहा कि बेरोजगारी, महंगाई, कृषि संकट और छात्रों की समस्याओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से निपटने के बजाय भाजपा एक और विभाजनकारी अभियान चलाने को प्राथमिकता दे रही है।
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बांग्लादेश की ढाका यूनिवर्सिटी में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीरें लगाने को लेकर विवाद हो गया है। यूनिवर्सिटी के सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन (DUCSU) के नए आर्काइव में जिन्ना की तीन तस्वीरें लगाई गई थीं। छात्रों ने इसका विरोध किया और एक तस्वीर फाड़ दी। इसके जवाब में छात्र फेडरेशन के एक नेता ने उसी जगह जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम की तस्वीर लगा दी। इसके बाद मामला और बढ़ गया। छात्र संघ बोला- इतिहास दिखाना मकसद DUCSU के नए सिरे से तैयार किए गए आर्काइव का उद्घाटन रविवार को हुआ था। यहां 1905 से 1971 तक ढाका यूनिवर्सिटी के इतिहास से जुड़ी सामग्री रखी गई है। आर्काइव में जिन्ना से जुड़ी तीन तस्वीरें थीं। इनमें 1948 की एक तस्वीर भी शामिल थी। इसमें जिन्ना ढाका के तत्कालीन रेसकोर्स ग्राउंड में उर्दू को पाकिस्तान की एकमात्र राज्य भाषा बनाने की बात कह रहे थे। दूसरी तस्वीर 1940 में ऑल इंडिया मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन की थी। तीसरी 1970 के चुनाव से जुड़ी ‘डॉन’ अखबार की कटिंग थी। DUCSU सचिव फातिमा तसनीम जुमा ने कहा कि तस्वीरें जिन्ना के सम्मान में नहीं लगाई गई थीं। उनका कहना था कि आर्काइव में उस दौर की प्रमुख घटनाओं और उनसे जुड़े लोगों को दिखाया गया है। DUCSU के जीएस एसएम फरहाद ने कहा कि जिन्ना की उर्दू वाली तस्वीर भी उनके समर्थन में नहीं थी। इसे इसलिए रखा गया था ताकि लोगों को उनके भाषा संबंधी रुख और उसके विरोध के बारे में पता चले। छात्रों ने पूछा- मुजीबुर रहमान की तस्वीर क्यों नहीं? तस्वीरें सामने आने के बाद कुछ छात्र संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि ढाका यूनिवर्सिटी का इतिहास भाषा आंदोलन और 1971 की आजादी की लड़ाई से जुड़ा है। ऐसे में जिन्ना की तस्वीरों को आर्काइव में जगह देना सही नहीं है। छात्रों ने यह भी सवाल उठाया कि आर्काइव में जिन्ना की तीन तस्वीरें हैं, लेकिन बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की कोई अकेली और प्रमुख तस्वीर नहीं है। सोमवार को यह विरोध और बढ़ गया। छात्र ने जिन्ना की फोटो फाड़ी सोमवार दोपहर करीब 2 बजे ढाका यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग के छात्र मोहम्मद अबू तैयब आर्काइव पहुंचे। वह पिछले DUCSU चुनाव में उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार भी थे। तैयब ने वहां लगी जिन्ना की एक तस्वीर फ्रेम से निकालकर फाड़ दी। उन्होंने सवाल उठाया कि भाषा आंदोलन और 1971 की आजादी की लड़ाई से जुड़े विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर क्यों लगाई गई है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या DUCSU के घोषणापत्र में जिन्ना को हीरो बनाने की बात कही गई थी। इसके बाद छात्र फेडरेशन की DU इकाई ने जिन्ना से जुड़ी ‘डॉन’ अखबार की एक कटिंग भी तैयब को दी। तैयब ने उस कटिंग को भी फाड़ दिया। छात्र फेडरेशन के नेता अरको बरुआ ने तैयब की कार्रवाई का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अगर DUCSU सचिव अपनी मर्जी से जिन्ना की तस्वीर लगा सकती हैं, तो छात्र भी उसका विरोध कर सकते हैं। जवाब में गुलाम आजम की तस्वीर लगाई इसके कुछ देर बाद बरुआ ने विरोध के तौर पर उसी आर्काइव में गुलाम आजम की तस्वीर लगा दी। गुलाम आजम जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख थे। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान समर्थक लड़ाकों का नेतृत्व करने का उन पर आरोप था। 2013 में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में दोषी ठहराया गया और 90 साल की सजा सुनाई गई। 23 अक्टूबर 2014 को जेल में उनकी मौत हो गई। बरुआ ने गुलाम आजम की तस्वीर के साथ 1 जनवरी 1981 की एक घटना का कैप्शन भी लगाया। इसमें बताया गया था कि बैतुल मुकर्रम के बाहर एक भीड़ ने गुलाम आजम की पिटाई की थी। बरुआ ने कहा कि उन्होंने यह तस्वीर जानबूझकर लगाई है। उनका तर्क था कि अगर DUCSU सचिव अपनी पसंद से जिन्ना की तस्वीर लगा सकती हैं, तो विरोध में वे भी अपनी पसंद की तस्वीर लगा सकते हैं।
विवाद के पीछे बदली छात्र राजनीति इस विवाद को समझने के लिए ढाका यूनिवर्सिटी की हाल की छात्र राजनीति भी अहम है। सितंबर 2025 में हुए DUCSU चुनाव में जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई इस्लामी छात्र शिबिर ने बड़ी जीत दर्ज की थी। शिबिर समर्थित उम्मीदवार VP, GS और AGS जैसे प्रमुख पदों पर जीते थे। यह अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद DUCSU का पहला चुनाव था। हसीना की अवामी लीग की छात्र इकाई छात्र लीग ने इस चुनाव में हिस्सा नहीं लिया था। इसके बाद DUCSU में शिबिर समर्थित नेताओं के आने से यूनिवर्सिटी के इतिहास और कैंपस की राजनीतिक पहचान को लेकर बहस तेज हुई। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक, मौजूदा DUCSU कमेटी में ज्यादातर सदस्य शिबिर से जुड़े हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने DUCSU को चेताया जिन्ना की तस्वीरों के विवाद के बीच ढाका यूनिवर्सिटी प्रशासन ने DUCSU के कुछ हालिया फैसलों पर भी आपत्ति जताई। यूनिवर्सिटी के पब्लिक रिलेशंस ऑफिस ने कहा कि DUCSU ने कुछ मामलों में यूनिवर्सिटी के कानून और नियमों का पालन नहीं किया है। वाइस चांसलर डॉ. एबीएम ओबैदुल इस्लाम ने कहा, “DUCSU ने यूनिवर्सिटी के कानून के खिलाफ काम किया।” यूनिवर्सिटी ने चेतावनी दी कि DUCSU प्रशासन को दरकिनार कर कोई समानांतर व्यवस्था बनाने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Budh Uday 2026: ग्रहों के राजकुमार बुध का ज्योतिष शास्त्र में अहम स्थान है। यह ग्रह जातक के जीवन में बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है। कन्या बुध ग्रह की उच्च राशि मानी जाती है। यह ग्रह जब अपनी उच्च राशि में विराजमान होता है, इसका असर बहुत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। पंचांग एवं ज्योतिषीय गणना के अनुसार, बुद्धि, तर्क, वाणी और व्यापार के कारक बुध देव का अपनी उच्च राशि कन्या में उदय हो चुका है। ऐसे में कन्या राशि में बुध का उदय ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। बुध की मजबूत स्थिति का संबंध बुद्धि, विश्लेषण क्षमता, व्यापारिक समझ, वाणी और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि किसी पर इसका वास्तविक प्रभाव उसकी जन्मकुंडली में बुध की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करता है। बुध के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए भगवान गणेश की पूजा करें, उन्हें दूर्वा अर्पित करें और “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें।
बुध उदय की तारीख और समय
पंचांग के अनुसार 14 सितंबर 2026 को बुध ग्रह रात 2 बजकर 52 मिनट पर कन्या राशि में उदय हुए हैं। कन्या राशि बुध की स्वराशि होने के साथ-साथ उनकी उच्च राशि भी मानी जाती है। ऐसे में कन्या राशि में बुध का उदय ज्योतिष की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।
कन्या राशि : इस राशि के जातकों के लिए बुध का उदय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में आपकी समझदारी के साथ निर्णय लेने की क्षमता की सराहना हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की या बेहतर अवसर मिलने के योग बन सकते हैं।
मकर राशि : मकर राशि वालों के लिए बुध उदय आर्थिक और पेशेवर मोर्चे पर सकारात्मक बदलाव ला सकता है। लंबे समय से अटके काम गति पकड़ सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना बन सकती है। कारोबारियों को नए संपर्कों का लाभ मिल सकता है और व्यापार विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है।
सिंह राशि : बुध का उदय सिंह राशि के जातकों के लिए करियर में प्रगति के नए रास्ते खोल सकता है। आपकी बातचीत और नेतृत्व क्षमता का फायदा कार्यक्षेत्र में मिल सकता है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापार करने वालों को नए क्लाइंट या लाभदायक डील मिल सकती है।
वृश्चिक राशि : बुध का उदय इनके लिए भी शुभ परिणाम देने वाला रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग ला सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। कारोबार में नई रणनीति बनाने और उसे लागू करने का अच्छा समय मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत बन सकते हैं।
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HDFC Bank CEO Race: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank के अगले MD और CEO की तलाश अब आखिरी दौर में पहुंच गई है। रेस में सिर्फ दो नाम बचे हैं। इनमें पहले डिप्टी MD कैजाद एम. भरूचा हैं। और दूसरे ICICI Prudential Life के MD और CEO अनूप बागची।
CNBCTV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भरूचा इंटरनल कैंडिडेट हैं। यानी वह पहले से HDFC Bank में हैं। वहीं बागची एक्सटर्नल कैंडिडेट हैं। उन्हें बैंक के बोर्ड ने शॉर्टलिस्ट किया है। इस बारे में अनूप बागची और HDFC Bank को भेजे गए सवालों का खबर छपने तक जवाब नहीं मिला था।
HDFC Bank में CEO की तलाश क्यों?
बैंक के मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का दूसरा कार्यकाल अक्टूबर 2026 में खत्म हो रहा है। उन्होंने दोबारा इस पद पर आने की इच्छा नहीं जताई है।
बोर्ड ने उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश भी की थी। लेकिन अब बैंक नए CEO की तलाश में आगे बढ़ चुका है।
कैजाद भरूचा कौन हैं
कैजाद भरूचा 1995 से HDFC Bank के साथ हैं। उन्हें बैंकिंग का 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह 2014 से बैंक के बोर्ड में होल-टाइम डायरेक्टर हैं। अप्रैल 2023 में उन्हें डिप्टी MD बनाया गया था।
भरूचा ने बैंक में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने कॉरपोरेट बैंकिंग, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल एसेट्स जैसे कारोबार देखे हैं। यानी बैंक के कामकाज को वह अंदर से जानते हैं। अगर उन्हें CEO बनाया जाता है, तो बैंक को अंदर से ही नया नेतृत्व मिल जाएगा। इससे कामकाज में निरंतरता बनी रह सकती है।
लेकिन उनके सामने एक दिक्कत भी है। भरूचा 2014 से बैंक के बोर्ड में होल-टाइम डायरेक्टर हैं। उनके 13 साल से ज्यादा पूरे हो चुके हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, होल-टाइम डायरेक्टर का कुल कार्यकाल 15 साल तक हो सकता है। इसमें MD और CEO भी शामिल हैं।
ऐसे में भरूचा की मौजूदा पात्रता 2029 तक ही रह सकती है। अगर वह CEO बनते हैं, तो करीब तीन साल ही इस पद पर रह पाएंगे। अगर बैंक उन्हें इसके बाद भी पूरा कार्यकाल देना चाहता है, तो RBI से छूट लेनी पड़ सकती है।
अनूप बागची की दावेदारी
दूसरे दावेदार अनूप बागची हैं। वह अभी ICICI Prudential Life के MD और CEO हैं। बागची को बैंकिंग, कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने रिटेल, MSME और कॉरपोरेट बैंकिंग में काम किया है। इसके अलावा ट्रेजरी और क्रेडिट पॉलिसी का भी अनुभव है।
बागची ICICI Group के पुराने अधिकारियों में शामिल हैं। वह इससे पहले ICICI Securities के MD और CEO रह चुके हैं। वह ICICI Bank के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी रहे हैं।
उनका अनुभव सिर्फ बैंकिंग तक सीमित नहीं है। कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस की भी उन्हें अच्छी समझ है। यही वजह है कि वह HDFC Bank के लिए मजबूत बाहरी उम्मीदवार माने जा रहे हैं।
अब RBI की मंजूरी का इंतजार
नए MD और CEO का फैसला सिर्फ HDFC Bank का बोर्ड नहीं करेगा। इसके लिए रेगुलेटरी मंजूरी भी जरूरी है। इसमें RBI की मंजूरी सबसे अहम होगी। अब असली सवाल यह है कि बैंक किसे चुनता है।
एक तरफ कैजाद भरूचा हैं। उन्हें HDFC Bank के कामकाज की अंदर से अच्छी समझ है। दूसरी तरफ अनुप बागची हैं। उनके पास बैंकिंग के साथ कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस का भी अनुभव है।
निवेशकों की नजर अब बोर्ड के अंतिम फैसले और RBI की मंजूरी पर रहेगी। यही दोनों चीजें HDFC Bank के शेयर के लिए आगे बड़ा ट्रिगर बन सकती हैं।
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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

