Apple Event 2026 : iPhone 18 से Foldable iPhone Ultra तक, जानिए ‘Surprise and Shine’ इवेंट में क्या-क्या होगा

Apple Event 2026 : iPhone 18 से Foldable iPhone Ultra तक, जानिए 'Surprise and Shine' इवेंट में क्या-क्या होगा

Apple Event 2026

Apple Event 2026

Apple का साल का सबसे बड़ा लॉन्च इवेंट 9 सितंबर 2026 को होने जा रहा है। 'Surprise and shine' नाम से होने वाले इस इवेंट में कंपनी नई iPhone 18 Pro सीरीज के साथ अपने इतिहास का पहला फोल्डेबल iPhone पेश कर सकती है। यह इवेंट Apple के नए CEO John Ternus के कार्यकाल का पहला बड़ा प्रोडक्ट लॉन्च भी होगा। Ternus ने 1 सितंबर को Tim Cook की जगह Apple CEO का पद संभाला है।

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Apple Event 2026 कब और कितने बजे होगा?

 

Apple का Surprise and shine Event बुधवार, 9 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा।

 

तारीख : 9 सितंबर 2026

समय : रात 10:30 बजे IST

अमेरिका में समय: सुबह 10:00 बजे PT

स्थान : Apple Park, Cupertino, California

इवेंट : Surprise and shine

 

Apple ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी 9 सितंबर को रात 10:30 बजे IST से इवेंट शुरू होने की पुष्टि की है।

 

Apple Event 2026 लाइव कैसे देखें?

 

भारतीय यूजर्स Apple का यह इवेंट ऑनलाइन लाइव देख सकते हैं। इसके लिए प्रमुख विकल्प हैं:

 

  • Apple की आधिकारिक वेबसाइट
  • Apple TV App
  • Apple का आधिकारिक YouTube चैनल
  •  
  • Apple ने खुद Apple.com, Apple TV और YouTube Live पर इवेंट देखने की जानकारी दी है।

 

iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max में क्या मिलेगा?

इस बार Apple का मुख्य फोकस iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max पर रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों मॉडल में नया 2nm A20 Pro चिप, बेहतर बैटरी और कैमरा सिस्टम में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

 

iPhone 18 Pro सीरीज में संभावित फीचर्स:

 

  • नया A20 Pro 2nm चिप
  • बेहतर बैटरी लाइफ
  • नया कैमरा सिस्टम
  • Pro Max में Variable Aperture Camera मिलने की संभावना
  • छोटा Dynamic Island होने की संभावना
  • नए कलर ऑप्शन
  • Apple का नया C2 मॉडेम होने की चर्चा
  • प्रीमियम मॉडल की कीमत बढ़ने की संभावना

 

हालांकि इनमें से कई जानकारियां अभी लीक्स और रिपोर्ट्स पर आधारित हैं, इसलिए आधिकारिक स्पेसिफिकेशन लॉन्च के समय ही स्पष्ट होंगे।

 

पहली बार आ सकता है Foldable iPhone Ultra

 

इस इवेंट का सबसे बड़ा आकर्षण Apple का पहला फोल्डेबल iPhone हो सकता है। रिपोर्ट्स में इसे फिलहाल iPhone Ultra नाम से संदर्भित किया जा रहा है। लीक्स के मुताबिक यह फोन किताब की तरह खुलने वाले फोल्डेबल डिजाइन के साथ आ सकता है। इसमें लगभग 7.8-इंच की अंदरूनी स्क्रीन और करीब 5.3-इंच की कवर स्क्रीन होने की चर्चा है। इसमें A20 Pro चिप और 12GB RAM मिलने की भी रिपोर्ट है। फोल्डेबल iPhone की कीमत भी काफी प्रीमियम हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में इसकी शुरुआती कीमत 2,000-2,500 डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान लगाया गया है।

Foldable iPhone में क्या खास होगा?

  • Book-style foldable design
  • लगभग 7.8-inch अंदर की स्क्रीन
  • करीब 5.3-inch कवर डिस्प्ले
  • A20 Pro चिप
  • 12GB RAM की संभावना
  • दो 48MP रियर कैमरे की चर्चा
  • Touch ID की वापसी की संभावना
  • MagSafe सपोर्ट मिलने की संभावना

 

इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि Apple के इवेंट में ही होगी।

 

Apple Watch Series 12 और Ultra 4 भी हो सकती है लॉन्च

 

iPhone के साथ Apple नई Apple Watch Series 12 और Apple Watch Ultra 4 भी पेश कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार Apple Watch में हेल्थ और फिटनेस फीचर्स पर ज्यादा जोर रह सकता है। नई Watch में नया चिप, बेहतर बैटरी और नए हेल्थ फीचर्स मिलने की उम्मीद है। Ceramic case option की वापसी की भी चर्चा है।

 

AirPods 5 में मिल सकता है Health Tracking फीचर

 

Apple इवेंट में AirPods 5 भी पेश कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए ईयरबड्स में बेहतर चिप के साथ Heart-rate tracking/health sensor जैसी सुविधाएं मिल सकती हैं। हालांकि कैमरा वाले AirPods को लेकर सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक ऐसा मॉडल 2027 तक नहीं आ सकता।

 

Apple Home Hub और Smart Home पर भी नजर

 

इस बार Apple के Smart Home प्लान पर भी नजर रहेगी। कंपनी नए Home Hub के साथ स्मार्ट होम इकोसिस्टम को विस्तार दे सकती है। रिपोर्ट्स में लगभग 7-इंच स्क्रीन वाले Home Hub, नए HomePod mini और अपडेटेड Apple TV 4K की भी चर्चा है।

 

Apple की AI और नई Siri भी रहेगी चर्चा में

 

John Ternus के लिए यह लॉन्च सिर्फ नए हार्डवेयर का इवेंट नहीं होगा। Apple की AI Strategy और नई Siri भी महत्वपूर्ण विषय रहने वाली है। Reuters के मुताबिक Apple अपनी नई Siri और AI क्षमताओं को भी इस नए नेतृत्व के तहत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

इस बार Apple का सबसे बड़ा सरप्राइज क्या होगा?

अगर मौजूदा रिपोर्ट्स सही साबित होती हैं, तो पहला Foldable iPhone Ultra इस साल के Apple Event का सबसे बड़ा आकर्षण हो सकता है। इसके साथ iPhone 18 Pro और Pro Max, Apple Watch Series 12, Watch Ultra 4 और AirPods 5 भी लॉन्च किए जा सकते हैं।

पाकिस्तान का नया AI ‘वॉर वीडियो’ वायरल, 32 एयरबेस और 8 विमान तबाह करने का दावा, सबूत नदारद

India-Pakistan Conflict: एयर फोर्स डे के मौके पर, पाकिस्तान एयर फोर्स के डायरेक्टरेट जनरल पब्लिक रिलेशंस ने एक शानदार और ग्राफिक्स से भरपूर वीडियो जारी किया, जिसमें मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का एक असाधारण रूप दिखाया गया है।

“फिजाओं के पासबान” नाम के इस वीडियो में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट किए, भारत के आठ विमान गिराए और भारत के नेशनल पावर ग्रिड और फ्यूल सप्लाई चेन को बाधित किया। एनिमेशन में भारतीय संसद और INS विक्रांत समेत भारत के प्रमुख ठिकानों पर हमले भी दिखाए गए हैं।

वीडियो के ग्राफिक्स से इस फैंटेसी (काल्पनिक कहानी) का दायरा काफी साफ हो जाता है। एक ग्राफिक में दावा किया गया है कि “IAF के 32 बेस पर हमला हुआ”, जबकि दूसरे में दावा है कि चार राफेल, एक Su-30MKI, एक MiG-29, एक मिराज-2000 और एक हेरॉन UAV नष्ट कर दिए गए। अन्य विजुअल में S-400 सिस्टम पर हमले, भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर के बर्बाद होने और भारतीय शहरों की ओर मिसाइलें जाते हुए दिखाई गई हैं।

पाकिस्तान के लिए समस्या काफी सीधी-सी है: वीडियो में बहुत सारे धमाके, मैप और कंप्यूटर से बनाई गई तबाही तो है, लेकिन असल तबाही का बहुत कम सबूत है।

भारत के 32 एयरबेस पर हमला? आखिर इसका सबूत कहां है?

सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना के 32 बेस पर हमला किया। अगर यह सच होता, तो यह एक बहुत बड़ी सैन्य उपलब्धि होती। इसे छिपाना भी बहुत मुश्किल होता।

फिर भी, PAF के वीडियो में इस दावे को साबित करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरें, हमले से पहले और बाद की तस्वीरें, रनवे को हुए पहचाने जा सकने वाले नुकसान या नष्ट हुए हैंगर की ऐसी तस्वीरें नहीं दिखतीं जिनकी पुष्टि की जा सके। सीमा के दूसरी तरफ से मिले सबूतों के साथ इसका अंतर साफ दिखता है।

जब मई 2025 की लड़ाई के आखिरी दौर में भारत ने पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर हमला किया, तो सैटेलाइट तस्वीरों से बिल्कुल अलग तरह की जानकारी मिली। ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने दो दर्जन से ज्यादा सैटेलाइट तस्वीरों और हमले के बाद के वीडियो का विश्लेषण किया। इसमें पाकिस्तान के कम से कम छह एयरफील्ड पर नुकसान का पता चला, जिनमें तीन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हैंगर, दो रनवे और पाकिस्तान वायु सेना द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली दो मोबाइल इमारतें शामिल थीं।

तस्वीरों में नूर खान, भोलारी, शाहबाज, सुक्कुर और मुशफ जैसी जगहों पर नुकसान दिखाई दिया। भोलारी में, एनालिस्ट्स ने एयरक्राफ्ट हैंगर में एक बड़ा छेद देखा। शाहबाज में एक और बड़े हैंगर और कंट्रोल टावर को नुकसान पहुंचा था, जबकि मुशफ और शेख जायद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रनवे पर गड्ढे दिखाई दिए।

बता दें कि जब मिलिट्री को होने वाला नुकसान सिर्फ पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तक सीमित न रहकर असलियत में सामने आता है, तो वह कुछ ऐसा ही दिखता है।

S-400 वाला दावा पहले ही खारिज किया जा चुका है

PAF के वीडियो में फिर से वही पुराना दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने भारत के दो S-400 एयर डिफेंस सिस्टम नष्ट कर दिए थे। यह दावा नया नहीं है।

मई 2025 के टकराव के दौरान, पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने भारत का एक S-400 सिस्टम नष्ट कर दिया है। भारत ने उस समय इस आरोप को खारिज कर दिया था। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने S-400 के नष्ट होने या उसे नुकसान पहुंचाने की खबरों को बेबुनियाद बताया था, जबकि रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान S-400 सिस्टम और भारतीय एयरफील्ड से जुड़े दावों को लेकर गलत जानकारी फैलाने का अभियान चला रहा है।

असल में, कुछ ही दिनों बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के आदमपुर एयर फोर्स स्टेशन के अचानक दौरे के दौरान अपनी तस्वीरें जारी कीं, जिनमें वे पूरी तरह सुरक्षित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के सामने खड़े थे। मई 2025 में जारी इन तस्वीरों को पाकिस्तान की सेना के उन दावों का जवाब माना गया था, जिनमें कहा गया था कि उसने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बेस और रूस से मिले S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया था।

इसके बाद के भारतीय सैन्य रिकॉर्ड भी पाकिस्तान के दावे से मेल नहीं खाते। मार्च 2026 में, भारत ने पांच और S-400 सिस्टम खरीदने का रास्ता साफ कर दिया था। जबकि जून तक चौथी स्क्वाड्रन भारत पहुंच चुकी थी।

यानी पाकिस्तान के नए एनिमेशन ने असल में उस दावे को ही लिया है जिस पर 2025 में ही विवाद था, और बस इस बार उसे कंप्यूटर से नया रूप दिया है।

8 विमानों के दावे की सच्चाई की जांच होनी चाहिए

वीडियो में दावा किया गया है कि भारत के 8 विमान नष्ट हो गए थे। ग्राफिक में खास तौर पर चार राफेल, एक Su-30MKI, MiG-29, Mirage-2000 और Heron UAV का जिक्र किया गया है।

हालांकि, भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने माना कि शुरुआत में भारत को हवाई हमले में नुकसान हुआ था, लेकिन उन्होंने पाकिस्तान के बहुत बड़े दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने पाकिस्तानी आंकड़ों को “पूरी तरह गलत” बताया और कहा कि शुरुआती नुकसान के बाद भारत ने आगे हमले करने से पहले अपनी रणनीति बदल ली थी।

आखिरकार, इस पूरे मामले में चल रही प्रचार की जंग ने एक दिलचस्प मोड़ ले लिया।

अगस्त 2025 में, भारतीय एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने कहा कि संघर्ष के दौरान भारत ने पाकिस्तान के पांच फाइटर जेट और एक अन्य मिलिट्री एयरक्राफ्ट को मार गिराया था। उनके अनुसार, पाकिस्तान के ज्यादातर एयरक्राफ्ट भारत के S-400 सिस्टम से गिराए गए थे। उन्होंने इसकी पुष्टि के लिए इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डेटा का हवाला दिया।

हालांकि, दोनों पक्षों ने युद्ध के मैदान को लेकर दावे किए हैं, लेकिन कुछ वास्तविक नुकसान को स्वीकार करने और एक एनिमेटेड स्कोरबोर्ड दिखाने में बहुत बड़ा अंतर है—जैसे कि नक्शे पर दिखाए गए हर धमाके की स्वतंत्र रूप से पुष्टि की गई हो।

पाकिस्तान के अपने एयर बेस एक अजीब तुलना पेश करते हैं

शायद PAF के हालिया वीडियो के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि मई 2025 की असली सैटेलाइट तस्वीरें एक ऐसी कहानी बताती हैं जिसे पाकिस्तान सिर्फ एनिमेशन से नहीं बदल सकता।

पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर हमले किए। भारत के रक्षा मंत्रालय ने 10 मई को कहा कि उसकी सेनाओं ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों, जिनमें एयर डिफेंस सिस्टम भी शामिल थे, पर हमले किए। स्टिमसन सेंटर के हमले के बाद के आकलन में पाया गया कि भारतीय हमलों ने कम से कम 11 जगहों को निशाना बनाया, जिनमें नूर खान, रफीकी, रहीम यार खान, सुक्कुर, सरगोधा, भोलाड़ी और जैकोबाबाद शामिल हैं। कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों से इन एयर बेस में से ज्यादातर पर हमलों की पुष्टि हुई।

वाशिंगटन पोस्ट ने इन हमलों को 1971 की लड़ाई के बाद पाकिस्तान के सैन्य बुनियादी ढांचे पर भारत का सबसे बड़े हवाई हमला बताया। पाकिस्तान ने खुद माना कि सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा और हमले के बाद वायु सेना के 6 जवान मारे गए।

तस्वीरों से यह भी पता चला कि जमीन पर हुए नुकसान का मतलब सिर्फ कुछ मामूली निशान नहीं थे। हैंगर टूट गए थे, रनवे पर बड़े गड्ढे हो गए थे और मिलिट्री की इमारतों पर हमले हुए थे।

यह फर्क इसलिए जरूरी है क्योंकि इससे पता चलता है कि मिलिट्री का गंभीर आकलन कैसा होता है। इसके लिए यह दावा करने की जरूरत नहीं है कि पूरी एयर फोर्स ही गायब हो गई। इसके लिए यह दिखाना जरूरी है कि असल में किन चीजों पर हमला हुआ।

एयर बेस से लेकर नेशनल ग्रिड तक

PAF का वीडियो सिर्फ एयरक्राफ्ट और एयर बेस तक ही सीमित नहीं है। इसके ग्राफिक्स में भारत के नेशनल ग्रिड, फ्यूल सप्लाई चेन और मिलिट्री सैटेलाइट क्षमताओं को बाधित करने का भी दावा किया गया है। एक हिस्से में भारत का नक्शा दिखाया गया है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद होते हुए दिखाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में बड़े पैमाने पर साइबर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर कैंपेन को दिखाया गया है।

यहां भी, ज्यादातर काम एनिमेशन के जरिए ही दिखाया गया है।

इन बड़े दावों के साथ कोई ऐसी सैटेलाइट इमेज या स्वतंत्र रूप से वेरिफाई किया जा सकने वाला ठोस सबूत नहीं है जिसकी तुलना की जा सके। समस्या तब और साफ हो जाती है जब वीडियो किसी खास जगह पर हुए खास नुकसान के बजाय, पूरे देश में चलाए गए कथित कैंपेन को कंप्यूटर से बनाए गए धमाकों की एक सीरीज के तौर पर दिखाता है।

जाहिर है, युद्ध में साइबर ऑपरेशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ऐसी रुकावटें शामिल हो सकती हैं जिनकी तस्वीरें अंतरिक्ष से नहीं ली जा सकतीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एनिमेशन इस बात का सबूत बन जाता है कि वे ऑपरेशन असल में हुए थे।

और फिर बारी आती है संसद की

वीडियो में संसद परिसर समेत भारत के अहम राष्ट्रीय ठिकानों पर हमले दिखाए गए हैं। यह टीवी पर तो रोमांचक लग सकता है, लेकिन सबूत के तौर पर इसकी अहमियत बहुत कम है।

कंप्यूटर से बनाए गए एक सीन में मिसाइलों को एक जानी-पहचानी जगह की ओर बढ़ते हुए दिखाया गया है, जिससे पता चलता है कि इसे बनाने वाले दर्शकों को क्या दिखाना चाहते थे। इससे यह साबित नहीं होता कि असल में उस जगह पर हमला हुआ था।

यही बात उन दृश्यों पर भी लागू होती है जिनमें भारत में धमाके, आसमान से गिरते विमान और सेना के ढांचे को ढहते हुए दिखाया गया है। ये दृश्य भले ही प्रभावशाली हों, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि के बिना सबूत के तौर पर इनकी कोई खास अहमियत नहीं है।

आसिम मुनीर की जीत की कहानी को एक और ग्राफिक्स पैकेज मिला

PAF की इस प्रस्तुति का एक व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी है। मई 2025 के संघर्ष के कुछ ही समय बाद, पाकिस्तान ने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को फील्ड मार्शल का दर्जा दिया। सरकार ने उनकी “रणनीतिक सूझबूझ और साहसी नेतृत्व” का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की और दुश्मन को हराया।

तब से, इस संघर्ष के बारे में सेना का नजरिया पाकिस्तान के आधिकारिक संदेश का मुख्य हिस्सा बन गया है।

PAF का ताजा वीडियो इसी नजरिए के साथ पूरी तरह मेल खाता है। भले ही युद्ध के मैदान का घटनाक्रम जटिल रहा हो, लेकिन एनिमेशन बिल्कुल सरल है। यह एक साफ-सुथरा स्कोरबोर्ड दिखाता है: भारतीय विमान नष्ट, भारतीय बेस पर हमले, S-400 सिस्टम खत्म, बुनियादी ढांचा बर्बाद और पाकिस्तान की जीत।

हकीकत इससे काफी अलग और जटिल है।

उपलब्ध सबूतों से पता चलता है कि भारत को कुछ विमानों का नुकसान हुआ था, खासकर संघर्ष के शुरुआती दौर में। लेकिन यह भी सामने आया है कि इसके बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर सटीक और दूर तक पहुंचने वाले हमले किए। सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हुए नुकसान को साफ देखा गया।

और यही वजह है कि PAF का यह नया वीडियो काफी कुछ बताता है।

दावा जितना बड़ा और शानदार होता जाता है, सबूतों की कमी उतनी ही ज्यादा साफ दिखाई देती है।

जब युद्ध का मैदान वीडियो-एडिटिंग का मुकाबला बन जाए

मई 2025 के टकराव में दोनों पक्षों को असल सैन्य सफलताएं और नाकामियां मिलीं। साथ ही, अलग-अलग दावे, बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बातें और गलत सूचनाओं की बाढ़ भी देखने को मिली।

लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद, ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की वायु सेना एनिमेशन के जरिए इस बहस को खत्म करने की कोशिश कर रही है।

यहां एक साफ विरोधाभास है।

PAF के वीडियो में दावा किया गया है कि उसने भारत के 32 ठिकानों पर हमला किया, दो S-400 सिस्टम नष्ट किए, 8 विमान तबाह किए, भारत के ग्रिड को बेकार कर दिया और देश के अहम ठिकानों पर हमले किए। फिर भी, जब सवाल यह उठता है कि “सबूत कहां है?”, तो उसका जवाब ज्यादातर उस वीडियो के अंदर ही मिलता है।

भारत को हुए सैन्य नुकसान की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है। इसके लिए दुर्घटनास्थल की तस्वीरें और दूसरे उपलब्ध सबूत देखे जा सकते हैं। वहीं, पाकिस्तान के एयरबेस को हुए नुकसान की जांच कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की जा सकती है। भारत के हमलों के बाद पाकिस्तान की सेना ने भी अपने सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की बात स्वीकार की थी।

ऐसे में PAF के सामने एक मुश्किल स्थिति है। या तो वह अपने एनीमेशन में और धमाके जोड़ता रहे, या फिर उन दावों के समर्थन में सैटेलाइट तस्वीरें पेश करे।

नेपाल-आंदोलन के एक साल बाद भी मुकदमे झेल रहे Gen-Z:पुरानी और मौजूदा सरकार में खास अंतर नहीं; संविधान-संशोधन जैसे मुद्दे अब भी अधूरे

नेपाल में भ्रष्टाचार खत्म करने और सुशासन की मांग को लेकर 8-9 सितंबर 2025 को हुए Gen-Z आंदोलन को एक साल पूरा हो गया है। आंदोलन के बाद सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी थी। इसके बाद बालेन के नेतृत्व वाली सरकार को भी 6 महीने हो चुके हैं। इसके बावजूद आंदोलन के दौरान उठाए गए कई मुद्दे अब तक अधूरे हैं। Gen-Z युवाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे भी वापस नहीं लिए गए हैं। संविधान और शासन व्यवस्था में बदलाव, निर्वाचन प्रणाली में सुधार, Gen-Z युवा परिषद का गठन, आंदोलन के दौरान दमन करने वालों पर कार्रवाई, शहीद परिवारों को राहत, रोजगार और भ्रष्टाचार खत्म करने जैसे मुद्दों पर सरकार की गंभीरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शरीर में अब भी छर्रे, इलाज का खर्च खुद उठा रहे आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों को अब तक पर्याप्त इलाज नहीं मिल सका है। Gen-Z आंदोलन में सक्रिय अर्जुन चुंदाली के मुताबिक, कुछ घायल अपने खर्च पर भारत जाकर इलाज करा रहे हैं। कई लोगों के शरीर में अब भी गोलियों के छर्रे हैं। Gen-Z आंदोलन में दो दिनों के दौरान 77 लोगों की मौत हुई थी और 2,429 लोग घायल हुए थे। आंदोलन से करीब 84 अरब 45 करोड़ रुपए के बराबर आर्थिक नुकसान का अनुमान है। पहले दिन संसद भवन के सामने 20 से ज्यादा छात्रों की मौत हुई थी। गृहमंत्री बोले- मांगें पूरी करने में जुटे हैं आंदोलन के अगुआ रहे सुदन गुरुंग अब नेपाल के गृहमंत्री हैं। उन्होंने कहा, “हमने जो कसम खाई है, उसे पूरा करना है। कई काम बाकी हैं, लेकिन हम जुटे हुए हैं।” Gen-Z आंदोलन शहीद परिवार के अध्यक्ष नारायण श्रेष्ठ ने कहा कि आंदोलन के दौरान युवाओं पर अत्याचार करने वाले दोषियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शहीद और घायल परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की पूरी जिम्मेदारी राज्य को लेनी चाहिए। भास्कर एक्सपर्ट: नए लोगों को जनमत दिलाने तक सीमित रहा आंदोलन राजनीतिक विश्लेषक प्रो. डॉ. बासुदेव खनाल के मुताबिक, Gen-Z आंदोलन पुराने राजनीतिक दलों के प्रति आक्रोश पैदा करने और नए लोगों के पक्ष में जनमत बनाने तक सीमित रह गया। उनका कहना है कि Gen-Z युवा कानून के शासन के लिए लड़े थे, लेकिन आज भी देश कानून और नीति के बजाय आदेश और अध्यादेश से चलाया जा रहा है। इससे यह संदेश मिलता है कि असंगठित आंदोलन से नुकसान तो ज्यादा हो सकता है, लेकिन ठोस परिणाम हासिल करना मुश्किल है। कई मोर्चों पर सरकार की रफ्तार धीमी बहुदलीय शासन व्यवस्था की वापसी के बाद पदाधिकारियों की संपत्ति जांच के लिए बना आयोग भी अब तक काम शुरू नहीं कर सका है। सरकारी नियुक्तियों में नेताओं के करीबियों को तरजीह देने के आरोप भी लग रहे हैं। सरकारी तंत्र में डर का माहौल है। बड़े पदों से लगातार इस्तीफे हो रहे हैं, जिसे लेकर भी चिंता बढ़ रही है। आर्थिक मोर्चे पर भी हालात बेहतर नहीं हैं। बैंकों में निवेश के लिए पैसा मौजूद है, लेकिन निवेशक पैसा लगाने को तैयार नहीं हैं। विदेशी निवेश भी घटा है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़- 7 सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश जारी:अब तक 13 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू, 5 हजार अब भी लापता नेपाल में आई बाढ़ के 13 दिन बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। रेस्क्यू टीम अलग-अलग 7 हाईड्रोपॉवर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों की तलाश कर रही हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने और राजधानी के सभी पेइंग गेस्ट (PG) आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी।

 

CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने हादसे पर दुख जताते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को अक्सर असुरक्षित और खतरनाक आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि सरकारी बुनियादी ढांचे और राजनीतिक प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर खर्च किया जाता है। CJP ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

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सत्या निकेतन हादसे पर CJP ने क्या कहा?

 

CJP की एक टीम संगठन के सह-प्रभारी और नॉर्थ जोन प्रमुख दीपक बालियान तथा राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बालकृष्ण शुक्ला के नेतृत्व में घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हादसे वाली जगह पर स्थानीय लोगों और आपातकालीन कर्मचारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग किया।

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CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय का दौरा किया था और अपने राजनीतिक भाषण में 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, लेकिन शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की स्थिति पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। दिपके ने कहा कि साउथ कैंपस में हॉस्टल की इमारत गिर गई और छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि खराब और जर्जर बुनियादी ढांचे की कीमत छात्रों को आखिर कब तक चुकानी पड़ेगी?

 

उन्होंने छात्रों के लिए सुरक्षित क्लासरूम, हॉस्टल और बेहतर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की।

मलबे में दबे छात्रों को लेकर चिंता

 

हादसे में गिरी इमारत को उसके मालिकों द्वारा 'Hostel Daze' नाम दिया गया था। हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। CJP ने कहा कि उसके स्वयंसेवक घटनास्थल पर मौजूद रहेंगे और सभी छात्रों का पता चलने तक प्रभावित परिवारों की मदद और बचाव अभियान की निगरानी करेंगे।

 

संगठन ने दिल्ली में छात्र आवासों की निगरानी में नगर निगम की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही राजधानी के सभी PG और हॉस्टल का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की गई है।

 

स्थानीय लोगों ने खुद शुरू किया था बचाव अभियान

 

घटनास्थल पर मौजूद CJP की टीम के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। बताया गया कि बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत का काम भी चल रहा था।

 

अभिजीत दिपके ने कहा कि एक तरफ अलग-अलग राज्यों में भव्य बीजेपी भवन बनाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों को असुरक्षित और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे में पढ़ने और रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और उनकी सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

 

  • सत्या निकेतन हादसे की निष्पक्ष और तेज जांच हो।
  • हादसे के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
  • मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
  • घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिले।
  • दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
  • छात्र आवासों की निगरानी में लापरवाही की जांच हो।
  • PG और हॉस्टल में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

‘नई पीढ़ी ग्लोबल हो, लेकिन हृदय में भारत हो’, नेल्लोर में CM योगी ने बताई विकसित भारत की दिशा

'नई पीढ़ी ग्लोबल हो, लेकिन हृदय में भारत हो', नेल्लोर में CM योगी ने बताई विकसित भारत की दिशा

स्वर्ण भारत ट्रस्ट के 25वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पहुंचते ही ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा। बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ उनका स्वागत किया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। इस दौरान अपने संबोधन में सीएम योगी ने कहा कि विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक दौर ने भारत की स्वावलंबी ग्रामीण व्यवस्था को कमजोर किया। गांवों की आत्मनिर्भरता और स्थानीय संस्थाओं पर इसका असर पड़ा, लेकिन गांवों की आत्मा कभी समाप्त नहीं हुई।

स्वर्ण भारत ट्रस्ट का ब्रिज स्कूल और उत्तर प्रदेश के अटल आवासीय विद्यालय अलग राज्यों में होने के बावजूद समान सोच के साथ वंचित बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य ऐसी नई पीढ़ी तैयार करना है, जो ग्लोबल भी हो और रूटेड भी, आधुनिक तकनीक से लैस हो, लेकिन हृदय में भारत, संस्कृति पर गर्व, अपनी जड़ों का बोध, समाज के प्रति संवेदनशीलता और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना रखती हो। तकनीक भेदभाव नहीं करती और नए भारत ने गांव की ताकत को नई तकनीक से जोड़ दिया है। सीएम ने वेंकैया नायडू को उत्तर व दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक व आध्यात्मिक सेतु बताया।

 

मुख्यमंत्री ने स्वर्ण भारत ट्रस्ट के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सभी पदाधिकारियों, सदस्यों और शुभचिंतकों को बधाई दी। साथ ही ट्रस्ट के संस्थापक एवं पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू का हृदय से अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि वेंकैया नायडू जी बहुआयामी व अत्यंत संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी हैं। सार्वजनिक जीवन में उन्होंने अपनी सरलता, सहजता और सभी को साथ लेकर चलने की क्षमता के बल पर पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई। सार्वजनिक जीवन में ऐसा विराट व्यक्तित्व मिलना दुर्लभ है, जो दल और विचारधारा की सीमाओं से ऊपर उठकर सभी को समान रूप से साथ लेकर चले और जिसकी सर्वत्र स्वीकार्यता हो। राज्यसभा सभापति के रूप में दायित्वों के निर्वहन में यही व्यापक स्वीकार्यता दिखाई देती थी। उनका योगदान राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने तेलुगु संस्कृति, खान-पान और वेश-भूषा को देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 2001 में एक व्यक्ति ने शासन में रहकर समाज सेवा की यात्रा प्रारंभ की थी, आज वह भारत के प्रधानमंत्री हैं। उसी वर्ष समाज सेवा की एक और यात्रा शुरू हुई, जो स्वर्ण भारत ट्रस्ट के रूप में हम सबके सामने है। 25 वर्ष बाद दोनों यात्राओं का लक्ष्य एक ही है- विकसित भारत। जब सरकार और समाज दोनों की दिशा एक हो, दोनों का संकल्प एक हो और दोनों लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयास करते हैं, तो अवश्य परिणाम आते हैं।

 

भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति हमारे गांव

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी शक्ति हमारे गांव रहे हैं। सदियों तक गांव अर्थव्यवस्था, सामाजिक जीवन और संस्कृति के केंद्र रहे। वे उत्पादन, ज्ञान और जल संरक्षण के साथ ही कला-शिल्प के केंद्र रहे हैं तथा सामाजिक मूल्यों की मूल इकाई भी रहे हैं। कृषि, पशुपालन, शिल्प, व्यापार, स्थानीय संस्थाएं, सभी एक दूसरे से जुड़ी थीं। गांव की अर्थव्यवस्था एक सर्कुलर इकॉनमी थी। एक का उत्पादन दूसरे की आजीविका बनता था। विदेशी आक्रमणों और औपनिवेशिक दौर का असर केवल अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ा। गांव की आत्मनिर्भरता कम हुई। स्थानीय संस्थाएं कमजोर हुईं और ग्रामीण भारत की विकास यात्रा पर आघात हुआ।

 

सीएम ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान चेतना की एक नई दिशा दी थी। उनका आह्वान था- 'बैक टू विलेज'। वे 'ग्राम स्वराज' के माध्यम से ऐसा गांव चाहते थे जो आत्मनिर्भर हो, स्वावलंबी हो, अपनी आवश्यकताओं के लिए सक्षम हो और अपने निर्णय स्वयं लेने में समर्थ हो। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वेंकैया नायडू जी ने 2001 में अपने आठ साथियों के साथ स्वर्ण भारत ट्रस्ट की शुरुआत की थी। ट्रस्ट ने स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर दंत एवं नेत्र चिकित्सा, पशु चिकित्सा से लेकर किसान प्रशिक्षण, महिला प्रशिक्षण से लेकर व्यावसायिक शिक्षा और कंप्यूटर प्रशिक्षण से लेकर विद्यालयों एवं ब्रिज स्कूलों तक विभिन्न क्षेत्रों में अत्यंत सराहनीय कार्य किया है।

 

इकोसिस्टम से बाहर बच्चों को वापस शिक्षा में लाना महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि रेजिडेंशियल ब्रिज स्कूल के माध्यम से स्वर्ण भारत ट्रस्ट वंचित तबके के बच्चों को शिक्षा, भोजन, पुस्तकें, ड्रेस और आवास की सुविधा उपलब्ध कराकर उन्हें फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का सराहनीय कार्य कर रहा है। अक्षरा विद्यालय और स्वर्ण भारती विद्या मंदिर जैसे संस्थानों के माध्यम से ग्रामीण व बीपीएल परिवार के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का भी अभिनव कार्य हो रहा है। पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में भी श्रमिकों के बच्चों के लिए 18 मंडल मुख्यालयों पर अटल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं। कोरोना महामारी के दौरान माता-पिता को खोने वाले बच्चों को भी इन विद्यालयों में शिक्षा व आवास सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। ये निःशुल्क आवासीय विद्यालय हैं, जहां आधी सीटें बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं।

 

पुराने हुनर को दिया नया बाजार

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कोई न कोई पारंपरिक हुनर मौजूद है। वाराणसी की साड़ी, भदोही का कालीन, मुरादाबाद का पीतल, फिरोजाबाद का कांच, कन्नौज का इत्र और लखनऊ की चिकनकारी इसकी मिसाल हैं। पीढ़ियों से इस हुनर को आगे बढ़ाने वाले कारीगरों के पास आधुनिक डिजाइन, पूंजी और बाजार की कमी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए हमने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ योजना शुरू की। हर जिले के एक प्रमुख उत्पाद को चिन्हित कर उसके कारीगरों को डिजाइन प्रशिक्षण, आधुनिक टूल किट, आसान बैंक ऋण तथा मार्केटिंग और एक्सपोर्ट का मंच उपलब्ध कराया गया। ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ के तहत पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण और टूल किट दिए गए। इसका परिणाम है कि इनका हुनर निर्यात तक पहुंच रहा है और उत्तर प्रदेश देश के प्रमुख निर्यातक राज्यों में शामिल हो गया है। हमने कारीगर को नया हुनर नहीं सिखाया, बल्कि उसके पुराने हुनर को नया बाजार उपलब्ध कराया है।

 

गांव की बेटियों को मिला गांव में रोजगार

मुख्यमंत्री ने स्वर्ण भारत ट्रस्ट की ग्रामीण महिलाओं के लिए संचालित प्रशिक्षण व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि इसमें महिलाओं के लिए अलग आवास की व्यवस्था भी है। जब तक व्यवस्था सुरक्षित नहीं होती, तब तक परिवार अपनी बेटी को बाहर नहीं भेजता। उत्तर प्रदेश में ‘मिशन शक्ति’ के माध्यम से महिलाओं को ‘बीसी सखी’ के रूप में तैयार किया गया। उन्हें प्रशिक्षण और डिजिटल डिवाइस देकर बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा गया। अब गांव के बुजुर्गों व अन्य लोगों को बैंकिंग सेवाएं घर पर मिल रही हैं और ये काम उसी गांव की बेटियां कर रही हैं। उन्हें अच्छी आय भी हो रही है। गोवंश संरक्षण के लिए उत्तर प्रदेश में 7,700 से अधिक गो-आश्रय स्थल बनाए गए हैं। निराश्रित गोवंश को पालने वाले किसानों को राज्य सरकार की ओर से प्रति गोवंश 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जा रहे हैं।

 

इंसेफेलाइटिस उन्मूलन में मिली सफलता

सीएम योगी ने कहा कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाला उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी इंसेफेलाइटिस यानी दिमागी बुखार के कारण हर वर्ष मध्य जुलाई से मध्य नवंबर तक हजारों मौतें होती थीं। गोरखपुर से सांसद रहते हुए उन्होंने इस समस्या के खिलाफ लगातार आवाज उठाई और आंदोलन किया, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा था। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र में सरकार बनने के बाद स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत हुई। वेंकैया नायडू जी उस कैबिनेट के महत्वपूर्ण सदस्य थे। ‘हर घर शौचालय’ के लक्ष्य के साथ उत्तर प्रदेश में ‘दस्तक अभियान’ चलाकर घर-घर जागरूकता पहुंचाई गई। इसके परिणामस्वरूप दशकों से हजारों लोगों की जान लेने वाली इंसेफेलाइटिस को पूरी तरह नियंत्रित करने और उसके उन्मूलन में सफलता मिली।

 

तकनीक नहीं करती भेदभाव

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तकनीक का युग है और तकनीक का सबसे बड़ा गुण यह है कि वह भेदभाव नहीं करती। प्रधानमंत्री जी ने तकनीक का प्रभावी उपयोग कर महिला और ग्रामीण सशक्तीकरण को नई गति दी है। जनधन खातों और डीबीटी के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है और यह सुनिश्चित हुआ है कि योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। आज लगभग 60 करोड़ भारतवासी जनधन खातों का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और करोड़ों परिवारों को वित्तीय समावेशन का लाभ मिल रहा है। डिजिटल लेन-देन के मामले में भारत पूरी दुनिया को राह दिखा रहा है। इसका लाभ दुकानदार, महिला, अन्नदाता किसान सभी को मिल रहा है। योजनाओं का लाभ उस गरीब परिवार को मिल रहा है, जिसे बिना बिचौलियों के पक्के मकान के लिए सरकारी सहायता मिल रही है।

 

समारोह में ट्रस्ट के संस्थापक एवं पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, आंध्र प्रदेश सरकार के नगर प्रशासन एवं शहरी विकास मंत्री पी. नारायणा, आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री वाई. सत्य कुमार यादव, बीजेपी आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष पी.बी.एन. माधव, राज्यसभा सांसद बीडा मस्तान राव, स्वर्ण भारत ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. कामिनेनी श्रीनिवास, आंध्र प्रदेश विधानसभा के विधायक सोमीरेड्डी चंद्रमोहन रेड्डी, स्वर्ण भारत ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी दीपा वेंकट, पुष्पा बरपु फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी एम. हर्षवर्धन आदि उपस्थित थे।

भारत-बांग्लादेश के बीच फिर दौड़ेंगी यात्री ट्रेनें! ढाका रख सकता है नए राजशाही-कोलकाता रूट का प्रस्ताव

भारत और बांग्लादेश के बीच बंद पड़ी यात्री ट्रेन सेवाओं को दोबारा शुरू करने की दिशा में बातचीत हो सकती है। ढाका के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच सीमा पार चलने वाली ट्रेनों को फिर से शुरू करने को लेकर चर्चा की जाएगी। ये ट्रेन सेवाएं 2024 में बांग्लादेश में हुए राजनीतिक बदलावों और अस्थिरता के बाद से बंद हैं। बांग्लादेश और भारत के रेलवे अधिकारी मंगलवार से ढाका में होने वाली दो दिन की बैठक में आमने-सामने बातचीत करेंगे। इस बैठक में मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेनों को फिर से शुरू करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा, बांग्लादेश राजशाही और कोलकाता के बीच नई ट्रेन सेवा शुरू करने का प्रस्ताव भी रख सकता है। अगर दोनों देशों के बीच सहमति बनती है, तो यात्रियों को एक बार फिर रेल के जरिए भारत-बांग्लादेश यात्रा करने की सुविधा मिल सकती है।

इस मामले की जानकारी रखने वाले बांग्लादेश रेलवे के एक अधिकारी ने कहा, “कल से शुरू होने वाली IGRM (इंटर-गवर्नमेंटल रेलवे मीटिंग) में हम मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस ट्रेन सेवाओं को दोबारा शुरू करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।”

नई ट्रेन शुरू करने पर भी विचार

भारत और बांग्लादेश के बीच रेल संपर्क को बढ़ाने के लिए नई ट्रेन सेवा शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। बांग्लादेश, राजशाही से कोलकाता के बीच सीधी यात्री ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रख सकता है। फिलहाल मैत्री एक्सप्रेस ढाका-कोलकाता और बंधन एक्सप्रेस खुलना-कोलकाता के बीच चलती है। वहीं मिताली एक्सप्रेस ढाका को न्यू जलपाईगुड़ी से जोड़ती थी। नई ट्रेन सेवा शुरू होने से दोनों देशों के यात्रियों को सफर का एक और विकल्प मिल सकता है। बांग्लादेश, ढाका और कोलकाता के बीच चलने वाली मैत्री एक्सप्रेस के रूट में बदलाव का सुझाव भी दे सकता है। इसके तहत ट्रेन को पुराने जमुना ब्रिज की जगह नए पद्मा ब्रिज से चलाने का प्रस्ताव है।

बैठक में होगा फैसला

बांग्लादेश रेलवे के अधिकारी के मुताबिक, अगर दोनों देशों के बीच इस प्रस्ताव और ट्रेन सेवाओं को लेकर सहमति बन जाती है, तो मैत्री, बंधन और मिताली एक्सप्रेस को अगले महीने से दोबारा शुरू किया जा सकता है। अधिकारी के अनुसार, भारतीय रेलवे भी दोनों देशों के बीच यात्री ट्रेन सेवाएं दोबारा शुरू करने को लेकर पॉजिटिव है। लेकिन, ट्रेनों को फिर से चलाने या कोई नया रेल रूट शुरू करने से पहले भारत और बांग्लादेश के कई संबंधित मंत्रालयों से मंजूरी लेनी होगी। इस मुद्दे पर होने वाली दो दिवसीय बैठक में अलग-अलग मंत्रालयों के अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। इसके बाद ट्रेन सेवाओं को बहाल करने का अंतिम फैसला दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की सहमति से लिया जाएगा।

दोनों देशों के बीच नहीं चल रही यात्री ट्रेनें

बांग्लादेश में जुलाई 2024 के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच चलने वाली तीन यात्री ट्रेन सेवाएं बंद कर दी गई थीं। शुरुआत में मैत्री और बंधन एक्सप्रेस को 19 जुलाई से 6 अगस्त 2024 तक रोकने का फैसला किया गया था। लेकिन हालात नॉर्मल नहीं होने के कारण बाद में इन दोनों ट्रेनों का संचालन अनिश्चित समय के लिए बंद कर दिया गया। भारत और बांग्लादेश के बीच मालगाड़ी सेवा पिछले साल फरवरी में दोबारा शुरू कर दी गई थी। ये सेवा करीब नौ महीने तक बंद रही थी, लेकिन दोनों देशों के बीच यात्री ट्रेनें अब भी नहीं चल रही हैं। ऐसे में होने वाली रेलवे बैठक को काफी अहम माना जा रहा है।

कब चली थी आखिरी ट्रेन

भारतीय रेलवे के मुताबिक, मिताली एक्सप्रेस ने 17 जुलाई 2024 को ढाका के लिए आखिरी सफर किया था, लेकिन इसके बाद यह ट्रेन भारत वापस नहीं आई। बांग्लादेश में राजनीतिक हालात बिगड़ने के बाद ट्रेन सेवा बंद हो गई। 5 अगस्त 2024 को लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया और भारत आ गईं। इसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनी।

इस दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बढ़ा और शेख हसीना की भारत में मौजूदगी दोनों देशों के बीच बड़ा मुद्दा बनी रही। बांग्लादेश ने उन्हें वापस भेजने की मांग भी की। बाद में बांग्लादेश में चुनाव हुए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में आई। लेकिन भारत और बांग्लादेश के बीच कई मुद्दों को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में UP के 16 शहर, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में UP के 16 शहर, लखनऊ देश में पहले स्थान पर

Yogi adityanath

Swachh Vayu Sarvekshan 2026 Lucknow First: उत्तर प्रदेश में स्वच्छ हवा को लेकर किए जा रहे लगातार प्रयासों ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देश में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वेक्षण में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में लखनऊ ने पहली बार इंदौर को पीछे छोड़ते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। 

 

लखनऊ ने 198 अंक के साथ प्रथम स्थान जबकि इंदौर 197 और जबलपुर 195 अंकों के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे हैं। यह उपलब्धि केवल राजधानी लखनऊ तक सीमित नहीं है। प्रदेश के 16 शहरों ने अलग-अलग आबादी वर्गों में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश में स्वच्छ वायु को लेकर शहर स्तर से लेकर वार्ड स्तर तक योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।

यूपी के दूसरे शहरों ने भी दिखाया दम

10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। आगरा 192 अंकों के साथ चौथे, गाजियाबाद 184 अंकों के साथ नौवें, कानपुर 183.2 अंकों के साथ 11वें और प्रयागराज 180 अंकों के साथ 13वें स्थान पर रहा। मेरठ 22वें और वाराणसी 34वें स्थान पर रहे। इस रैंकिंग से यह संकेत मिलता है कि स्वच्छ हवा को लेकर प्रदेश के बड़े शहरों में किए जा रहे प्रयासों का असर व्यापक स्तर पर दिखाई दे रहा है।

3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में भी यूपी का दबदबा

मध्यम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। फिरोजाबाद ने 195 अंक हासिल कर देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। शहर में कांच उद्योगों को स्वच्छ प्राकृतिक गैस ईंधन की ओर तेजी से स्थानांतरित करने को अहम उपलब्धि माना गया। झांसी 192.5 अंकों के साथ पांचवें, जबकि मुरादाबाद और नोएडा 187.5-187.5 अंकों के साथ संयुक्त रूप से आठवें स्थान पर रहे। गोरखपुर 22वें और बरेली 26वें स्थान पर रहा।

छोटे शहरों में भी बेहतर प्रदर्शन

तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में भी यूपी के शहरों ने प्रभावी प्रदर्शन किया। रायबरेली 180.5 अंकों के साथ 17वें स्थान पर रहा। अनपरा 29वें, खुर्जा 30वें और गजरौला 31वें स्थान पर रहे। इन शहरों में धूल नियंत्रण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए किए गए प्रयासों को प्रमुखता मिली।

वार्ड स्तर पर भी यूपी की बड़ी उपलब्धि

स्वच्छ वायु प्रबंधन को शहरों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय स्तर पर भी प्रभावी कदम उठाए गए। 30 हजार से अधिक आबादी वाले शहरी वार्डों की राष्ट्रीय श्रेणी में लखनऊ के जोन-4 स्थित वार्ड-70 ने पहला स्थान हासिल किया। वहीं 10 हजार से 30 हजार आबादी वाले वार्डों की श्रेणी में प्रयागराज के वार्ड-31 ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। राज्य स्तरीय वार्ड पुरस्कारों में कानपुर के वार्ड केएनपी078, प्रयागराज के वार्ड-33 और बरेली के गांधी उद्यान वार्ड-32 को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। खुले में कूड़ा जलाने पर प्रभावी रोक और स्थानीय स्तर पर धूल नियंत्रण जैसे उपायों को इसमें महत्वपूर्ण माना गया।

समन्वित रणनीति का परिणाम

प्रदेश में स्वच्छ हवा के लिए नगर विकास विभाग, स्थानीय नगरीय निकायों और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के समन्वय से विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की गई। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत तैयार और लागू की गई समन्वित रणनीति का असर लखनऊ के देश में पहले स्थान समेत यूपी के कई शहरों और वार्डों की राष्ट्रीय रैंकिंग में दिखाई दिया है। 

पुरस्कार के साथ बढ़ा स्थानीय निकायों का उत्साह

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में उत्तर प्रदेश ने शानदार प्रदर्शन किया है। श्रेणी-1 में लखनऊ नगर निगम को प्रथम पुरस्कार हासिल करने के साथ ही 1.5 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिली है। वहीं श्रेणी-2 में फिरोजाबाद नगर निगम को प्रथम पुरस्कार के साथ 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई है। वार्ड स्तर पर भी प्रदेश को महत्वपूर्ण सफलता मिली। लखनऊ नगर निगम के वार्ड-70 को प्रथम पुरस्कार के साथ 50 लाख रुपये, प्रयागराज नगर निगम के वार्ड-31 ने तृतीय पुरस्कार के साथ 20 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गई है।

स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ की उपलब्धि प्रदेश के लिए नई प्रेरणा- नगर विकास मंत्री

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में उत्तर प्रदेश के शहरों की तस्वीर तेजी से बदल रही है। लखनऊ ने स्वच्छ वायु संरक्षण के क्षेत्र में पहली बार इंदौर को पीछे छोड़कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के लिए एक नई प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार स्वच्छ वायु के क्षेत्र में लखनऊ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है, उसी प्रकार स्वच्छता सर्वेक्षण में भी लखनऊ को देश का नंबर-वन शहर बनाने के लिए सरकार, नगर निगम और नागरिक मिलकर पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे।

लखनऊ की नंबर-1 उपलब्धि ने बढ़ाया यूपी का गौरव

लखनऊ को 198 अंकों के साथ देश में पहला स्थान मिलना प्रदेश के लिए विशेष उपलब्धि है। राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए इलेक्ट्रिक परिवहन, सड़क की धूल नियंत्रण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाने और यातायात व्यवस्था को बेहतर करने जैसे क्षेत्रों में लगातार काम किया गया। नगर निगम की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण के लिए करीब 1,100 इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए शहर में 12 चार्जिंग स्टेशन और 916 चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं। स्वच्छ परिवहन की दिशा में 140 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन भी किया जा रहा है। सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए 97 इलेक्ट्रिक मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनें संचालित हैं। इसके साथ ही 559.85 किलोमीटर सड़कों को एंड-टू-एंड पक्का किया गया है, जिससे धूल के कारण होने वाले प्रदूषण को कम करने में मदद मिली है।

कचरा प्रबंधन और हरियाली पर भी विशेष जोर

स्वच्छ वायु की रणनीति में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। लखनऊ में 2,550 टीपीडी क्षमता से 100 प्रतिशत वैज्ञानिक कचरा प्रसंस्करण की व्यवस्था की गई है। खुले में कूड़ा जलाने की समस्या को नियंत्रित करने के साथ ही शहर में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण पर जोर दिया गया। शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए वर्टिकल गार्डन और मियावाकी पौधरोपण जैसे प्रयास किए गए।

इस तरह स्वच्छ वायु के लिए परिवहन, सड़क, कचरा प्रबंधन और हरित क्षेत्र सभी प्रमुख क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर काम किया गया। लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल ने इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व, जनता, पार्षदों और नगर निगम कर्मियों के सामूहिक प्रयासों को दिया है। राजधानी की यह सफलता अब प्रदेश के दूसरे शहरों के लिए भी स्वच्छ वायु प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रभावी मॉडल के रूप में सामने आई है।

LAC पर भारत-चीन की सेनाओं की बड़ी बैठक, अरुणाचल सेक्टर को लेकर हुई बड़ी चर्चा

LAC पर भारत-चीन की सेनाओं की बड़ी बैठक, अरुणाचल सेक्टर को लेकर हुई बड़ी चर्चा

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भारत और चीन की सेनाओं ने अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की। दोनों देशों के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही सीमा विवाद को लेकर बीजिंग में भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों (Special Representatives) के बीच वार्ता हुई थी। रविवार को अरुणाचल प्रदेश के किबिथू क्षेत्र में स्थित वाचा-दमाई बॉर्डर मीटिंग पॉइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई। 

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मामले से परिचित लोगों के अनुसार, बैठक का मुख्य उद्देश्य सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना तथा किसी भी तरह के तनाव को रोकना था।  भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया ने किया। वह दीमापुर स्थित भारतीय सेना की 3 कोर के कमांडर हैं।

 

बैठक में LAC से जुड़े मौजूदा हालात और सीमा पर शांति बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की गई। यह वार्ता दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर जारी सैन्य और कूटनीतिक संवाद का हिस्सा है।

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गलवान झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच बढ़ा था तनाव

भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की सैन्य वार्ताएं मुख्य रूप से लद्दाख सेक्टर के चुशुल-मोल्डो सीमा बैठक स्थल पर होती रही हैं। यहां वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों सेनाओं के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। इस झड़प में दोनों पक्षों के सैनिक हताहत हुए थे। गलवान घटना के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की।

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साथ ही पर्वतीय युद्ध के लिए अपनी सैन्य तैयारियों को व्यापक रूप से मजबूत किया। भारत ने चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा की स्थिति को एकतरफा तरीके से बदलने के किसी भी प्रयास का कड़ा जवाब दिया था। वहीं अब भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने और शांति बनाए रखने के लिए सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है।

Apple Event 2026: iPhone 18 Pro से फोल्डेबल iPhone तक होंगे बड़े ऐलान, जानें और क्या होगा खास

Apple September Event 2026: Apple अपना बड़ा सितंबर इवेंट 9 सितंबर को रात 10:30 बजे (IST) आयोजित करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उम्मीद है कि क्यूपर्टिनो की यह टेक कंपनी इस इवेंट में अपनी नई iPhone 18 Pro सीरीज, अपना पहला फोल्डेबल iPhone और नए Apple Watch मॉडल पेश करेगी। बता दें कि टिम कुक के टॉप पद से हटने के बाद, नए Apple CEO जॉन टर्नस के नेतृत्व में यह iPhone का पहला बड़ा लॉन्च होगा।

Apple के इस सितंबर इवेंट में ग्राहकों iPhone 18 Pro और Apple के पहले फोल्डेबल iPhone से लेकर नए Apple Watch और दूसरे प्रोडक्ट्स तक देखने को मिल सकते हैं।

iPhone 18 Pro और Pro Max पर रहेंगी नजरें

इस इवेंट में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max मुख्य आकर्षण हो सकते हैं।

उम्मीद है कि क्यूपर्टिनो की यह टेक कंपनी नए Pro मॉडल के साथ नई पीढ़ी की A20 Pro चिप, बेहतर कैमरा और बेहतर बैटरी लाइफ लाएगी। ऐसी खबरें भी हैं कि iPhone बनाने वाली कंपनी Dynamic Island में बदलाव कर सकती है और iPhone 18 Pro Max में वेरिएबल-अपर्चर वाला मेन कैमरा ला सकती है।

हालांकि, भारतीय खरीदारों के लिए सबसे बड़ा सवाल कीमत का होगा।

लीक के अनुसार, iPhone 18 Pro की शुरुआती कीमत लगभग 1.5 लाख रुपये हो सकती है, जबकि Pro Max की कीमत लगभग 1.7 लाख रुपये हो सकती है। ये अनुमानित कीमतें हैं और Apple ने अभी तक इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

सबसे बड़ा सरप्राइज Samsung और Google को टक्कर देने के लिए Apple का फोल्डेबल स्मार्टफोन मार्केट में उतरना हो सकता है। उम्मीद है कि US की यह टेक कंपनी अपना पहला फोल्डेबल iPhone लॉन्च करेगी, जो किताब की तरह खुल सकता है और एक बहुत बड़ी डिस्प्ले दिखा सकता है।

उम्मीद यह भी है कि iPhone Ultra प्रीमियम सेगमेंट को टारगेट करेगा और यह Apple का अब तक का सबसे महंगा iPhone बन सकता है। खबरों के अनुसार, फोल्डेबल iPhone की कीमत $2,000 से ज्यादा हो सकती है। वहीं, भारत में इसकी कीमत 2 लाख रुपये से अधिक पहुंचने की संभावना है।

रेगुलर iPhone 18 के बारे में क्या?

इस साल Apple की iPhone लॉन्च करने की रणनीति में बड़ा बदलाव हो सकता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple पहले iPhone 18 Pro मॉडल और फोल्डेबल iPhone लॉन्च कर सकता है, जबकि रेगुलर iPhone 18 और iPhone 18e बाद में, शायद 2027 में आ सकते हैं। इसका मतलब है कि जो भारतीय खरीदार सस्ता नया iPhone चाहते हैं, उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है।

Apple Watch के नए मॉडल

उम्मीद है कि कंपनी इस इवेंट में Apple Watch के नए मॉडल भी पेश करेगा। चर्चा है कि कंपनी Apple Watch Series 12 और Apple Watch Ultra 4 लॉन्च करेगी, जिनमें हेल्थ, फिटनेस और परफॉर्मेंस पर खास ध्यान दिया जाएगा।

इसके अलावा, iPhone बनाने वाली कंपनी नए AirPods की भी घोषणा कर सकती है, हालांकि जरूरी नहीं कि चर्चा में रहे सभी प्रोडक्ट्स सितंबर वाले इवेंट में पेश किए जाएं।

Apple के दूसरे प्रोडक्ट्स

खबरों के मुताबिक, क्यूपर्टिनो की टेक कंपनी कई और प्रोडक्ट्स पर काम कर रही है, जिनमें नया Apple TV, HomePod mini और OLED iPad mini शामिल हैं। इनमें से कुछ प्रोडक्ट्स की घोषणा सितंबर के इवेंट में हो सकती है, जबकि बाकी प्रोडक्ट्स अक्टूबर या उसके बाद आ सकते हैं।

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क्या बदल जाएगा दुनिया का नक्शा? UN में पास हुआ ‘Correct the Map’ प्रस्ताव, भारत ने समर्थन के साथ रखी अपनी शर्त

क्या बदल जाएगा दुनिया का नक्शा? UN में पास हुआ 'Correct the Map' प्रस्ताव, भारत ने समर्थन के साथ रखी अपनी शर्त

UN World Map Resolution

UN Correct Map resolution: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में दुनिया के पारंपरिक नक्शे को बदलने और उसमें सुधार करने से जुड़ा एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित हो गया है। इस मुहिम का नेतृत्व अफ्रीकी देश टोगो ने अफ्रीकन यूनियन (AU) के 54 सदस्य देशों के समर्थन से किया था।

 

इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों —विशेषकर अफ्रीका— के वास्तविक आकार और क्षेत्रफल को सही अनुपात में दर्शाना है। 

क्या है पूरा मामला?

यूएन में मतदान और देशों का रुख : संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया।

  • समर्थन करने वाले प्रमुख देश : भारत, फ्रांस, ब्रिटेन (इंग्लैंड) समेत 164 राष्ट्र।
  • विरोध करने वाला देश : एकमात्र अमेरिका (USA) ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया। अमेरिका की प्रतिनिधि एरियाना फेरिनसेविच ने इसे UNGA के समय और उद्देश्य का मजाक बताया।
  • वोटिंग से दूरी बनाने वाले देश : एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन (कुल 6 देश)।

 

UN World Map Resolution

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UN World Map Resolution

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अफ्रीकी देशों ने क्यों चलाई 'Correct the Map' मुहिम?

टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डसी के अनुसार, “एक निष्पक्ष दुनिया की शुरुआत एक निष्पक्ष नक्शे से होती है। नक्शा सोच को आकार देता है।”

 

अफ्रीकी देशों का मानना है कि गलत नक्शे के कारण विकासशील देशों की जरूरतों और क्षमताओं को कम करके आंका जाता है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि उनका देश अब सरकारी कामकाज और शिक्षा में मरकेटर मैप का इस्तेमाल बंद करेगा।

क्या अब कानूनी रूप से दुनिया का नक्शा बदल जाएगा?

नहीं। यूएन का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Non-Binding) नहीं है।

 

संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि मरकेटर मैप पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है और न ही किसी नए नक्शे को अनिवार्य किया गया है। यूएन केवल शैक्षणिक और संस्थागत उपयोग में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन जैसे सटीक नक्शों के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है।

भारत की प्रतिक्रिया और आधिकारिक रुख

भारत ने यूएन में इस प्रस्ताव का समर्थन किया है, लेकिन विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है:

  • सीमाओं से कोई लेना-देना नहीं : यह प्रस्ताव केवल महाद्वीपों के क्षेत्रफल के सही अनुपात को दिखाने के लिए है। इसका देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या जगहों के नाम से कोई संबंध नहीं है।
  • संप्रभुता पर स्पष्ट रुख : भारत का क्षेत्र— जिसमें केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं— उसे केवल भारत के आधिकारिक नक्शे के अनुसार ही दिखाया जाना चाहिए।
  • कोई समझौता नहीं : भारतीय सीमाओं को गलत या भ्रामक तरीके से दिखाना भारत को कतई मंजूर नहीं होगा। भारत अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं करेगा।