सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने और राजधानी के सभी पेइंग गेस्ट (PG) आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी।

 

CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने हादसे पर दुख जताते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को अक्सर असुरक्षित और खतरनाक आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि सरकारी बुनियादी ढांचे और राजनीतिक प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर खर्च किया जाता है। CJP ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

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सत्या निकेतन हादसे पर CJP ने क्या कहा?

 

CJP की एक टीम संगठन के सह-प्रभारी और नॉर्थ जोन प्रमुख दीपक बालियान तथा राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बालकृष्ण शुक्ला के नेतृत्व में घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हादसे वाली जगह पर स्थानीय लोगों और आपातकालीन कर्मचारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग किया।

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CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय का दौरा किया था और अपने राजनीतिक भाषण में 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, लेकिन शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की स्थिति पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। दिपके ने कहा कि साउथ कैंपस में हॉस्टल की इमारत गिर गई और छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि खराब और जर्जर बुनियादी ढांचे की कीमत छात्रों को आखिर कब तक चुकानी पड़ेगी?

 

उन्होंने छात्रों के लिए सुरक्षित क्लासरूम, हॉस्टल और बेहतर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की।

मलबे में दबे छात्रों को लेकर चिंता

 

हादसे में गिरी इमारत को उसके मालिकों द्वारा 'Hostel Daze' नाम दिया गया था। हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। CJP ने कहा कि उसके स्वयंसेवक घटनास्थल पर मौजूद रहेंगे और सभी छात्रों का पता चलने तक प्रभावित परिवारों की मदद और बचाव अभियान की निगरानी करेंगे।

 

संगठन ने दिल्ली में छात्र आवासों की निगरानी में नगर निगम की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही राजधानी के सभी PG और हॉस्टल का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की गई है।

 

स्थानीय लोगों ने खुद शुरू किया था बचाव अभियान

 

घटनास्थल पर मौजूद CJP की टीम के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। बताया गया कि बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत का काम भी चल रहा था।

 

अभिजीत दिपके ने कहा कि एक तरफ अलग-अलग राज्यों में भव्य बीजेपी भवन बनाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों को असुरक्षित और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे में पढ़ने और रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और उनकी सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

 

  • सत्या निकेतन हादसे की निष्पक्ष और तेज जांच हो।
  • हादसे के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
  • मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
  • घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिले।
  • दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
  • छात्र आवासों की निगरानी में लापरवाही की जांच हो।
  • PG और हॉस्टल में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।