आशीषकुमार चौहान टाटा संस का चेयरमैन बनने की रेस में नहीं, NSE ने रिपोर्ट्स को खारिज किया

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 6 सितंबर को उन खबरों का खंडन किया, जिनमें कहा गया था कि NSE के MD और CEO आशीषकुमार चौहान Tata Sons के चेयरमैन बन सकते हैं।

NSE ने साफ कहा कि ये खबरें एक्सचेंज के पास मौजूद किसी जानकारी पर आधारित नहीं हैं। चौहान ने भी इन खबरों को गलत बताया है। ये सारी बातें ऐसे समय में हो रही हैं, जब NSE आईपीओ लाकर शेयर मार्केट में लिस्ट होने की तैयारी कर रहा हैष

PTI की रिपोर्ट के बाद सफाई

यह सफाई 5 सितंबर की PTI रिपोर्ट के बाद आई। रिपोर्ट में Tata Sons के अगले चेयरमैन की दौड़ में Tata Steel के CEO टीवी नरेंद्रन और Tata Sons के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सौरभ अग्रवाल नरेंद्रन और अग्रवाल के साथ चौहान का नाम भी शामिल किया गया था।

NSE के मुताबिक, चौहान ने ऐसी खबरों रो साफ तौर पर खारिज किया है। उन्होंने इन्हें अटकलों पर आधारित और तथ्यात्मक रूप से गलत बताया।

चौहान ने भी किया इनकार

चौहान ने NSE को भेजे ईमेल में कहा कि Tata Sons के चेयरमैन पद से उनका नाम जोड़ने वाली खबरें पूरी तरह निराधार और तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।

उन्होंने कहा कि उनका पूरा ध्यान अभी NSE की जिम्मेदारियों पर है। खासतौर पर एक्सचेंज के प्रस्तावित IPO पर उनका फोकस है।

NSE IPO पर ध्यान

चौहान ने कहा कि वह बोर्ड और शेयरधारकों के साथ मिलकर NSE की सफल लिस्टिंग के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह लगे हुए हैं।

NSE लंबे समय से अपने IPO की तैयारी कर रहा है। ऐसे में कंपनी के नेतृत्व की भूमिका अहम है। चौहान ने साफ किया है कि फिलहाल उनका ध्यान NSE की लिस्टिंग और उससे जुड़े काम पर है।

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MP Jahrili Sharab: मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब का कहर! 9 लोगों की दर्दनाक मौत, जिले में मचा हड़कंप

MP Jahrili Sharab: एक अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश के सागर जिले की बंडा तहसील के चार गांवों में कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से शनिवार (5 सितंबर) रात नौ लोगों की मौत हो गई। सागर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) देवेश पटेरिया ने बंडा में पत्रकारों से कहा कि कथित तौर पर जहरीली शराब पीने से नौ से 10 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि पांच लोगों की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें सागर जिला अस्पताल भेजा गया है।

हालांकि, ‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जहरीली और अवैध शराब पीने से कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई है। जबकि लगभग 35 लोगों को अस्पताल लाया गया है, जिनमें से 24 का अभी भी इलाज चल रहा है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हालांकि, प्रशासन की तरफ से 11 मौतों की पुष्टि नहीं की गई है।

दूसरी तरफ सागर की जिलाधिकारी प्रतिभा पाल ने पत्रकारों से कहा कि यह जरूरी नहीं है कि मौतें जहरीली शराब के सेवन के कारण ही हुई हों। उन्होंने कहा, “कुछ लोग बीमार पड़े हैं और कुछ मौतें भी हुई हैं। सिविल अस्पताल में उनकी जांच की जा रही है। नौराज और घूघर समेत आसपास के चिह्नित इलाकों में चिकित्सकों और अधिकारियों की जांच दल तैनात किए गए हैं।”

जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से अपील की है कि पिछले 24 से 48 घंटे के दौरान किसी भी प्रकार की शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति को यदि किसी तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो वह तुरंत डॉक्टर से जांच कराए।

किस इलाके में हुई है मौत?

DM ने पत्रकारों से कहा, “प्रशासन ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रहा है। जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।” बंडा के पूर्व विधायक तरवर लोधी ने दावा किया कि नौ लोगों की मौत जहरीली शराब पीने के कारण हुई है।

उन्होंने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा कि बंडा विकासखंड के बराज, घूघर, नौराज और आसपास के गांवों में रहने वाले कई लोगों ने शनिवार रात शराब का सेवन किया था, जिसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्होंने बताया कि परिजन उन्हें इलाज के लिए बंडा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने कई लोगों को मृत घोषित कर दिया।

सीएम ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एमपी के सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों पर न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि ऐसी घटनाओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने रविवार को कहा, “मैंने प्रभारी मंत्री को निर्देश दिए हैं और अधिकारियों से कहा है कि वे तुरंत कार्रवाई करें, सबसे सख़्त कदम उठाएं और मामले की पूरी जांच करें। हमारी सरकार ऐसी घटनाओं को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी।”

पूर्व विधायक ने बताया कि चार-पांच लोग बंडा सिविल अस्पताल में भर्ती हैं। जबकि चार-पांच लोगों को सागर भेजा गया है। लोधी ने लोगों से अपील की है कि जिन लोगों ने पिछले दो-तीन दिनों में बंडा क्षेत्र की किसी दुकान या अवैध रूप से शराब बेचने वालों से शराब खरीदकर पी है। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी थोड़ी भी परेशानी महसूस हो रही है। वे तुरंत अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरों से जांच कराएं।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए सागर जिले की जिलाधिकारी (DM) प्रतिभा पाल और पुलिस अधीक्षक (SP) अनुराग सुजानिया के नेतृत्व में जिला प्रशासन और मध्य प्रदेश पुलिस की टीम मौके पर मौजूद है। अधिकारी फिलहाल, मामले की जांच कर रहे हैं।

SRCC में PM मोदी का Gen Z कनेक्ट, ‘OG’ और ‘धुरंधर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर युवाओं को दिया संदेश

PM Modi SRCC Speech: शनिवार को श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के छात्रों को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘Gen Z’ (आज की युवा पीढ़ी) की भाषा में ‘OG’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही, 2013 में दिए गए अपने भाषण के 13 साल बाद कॉलेज लौटने पर उन्होंने हाल ही में लोकप्रिय हुई फिल्म ‘धुरंधर’ का भी जिक्र किया।

पीएम मोदी ने अपनी बात की शुरुआत अपने पुराने भाषण का जिक्र करते हुए किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में उनके 2013 के भाषण की काफी चर्चा हुई और लोगों ने उसे दोबारा देखा। उन्होंने छात्रों से कहा, “2013 में मैंने जो कहा था, वह मेरा पक्का विश्वास था।”

‘धुरंधर’ से ‘रीविजिट’ तक

हल्के-फुल्के अंदाज में बात करते हुए पीएम मोदी ने छात्रों से कहा, “हो सकता है कि आप ‘धुरंधर’ न हों, लेकिन अपनी मौजूदगी का एहसास जरूर कराएं।” अपनी छाप जरूर छोड़ें। उन्होंने ‘रीविजिट’ (फिर से देखना/याद करना) शब्द का इस्तेमाल करते हुए युवा पीढ़ी से कहा कि वे उस समय की स्थिति पर नजर डालें जब उन्होंने 2013 में आखिरी बार SRCC को संबोधित किया था।

पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि वे ऑनलाइन जाकर देखें कि उस समय अखबारों में क्या खबरें छप रही थीं, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार सत्ता में थी और वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

SRCC के जाने-माने पूर्व छात्रों (एलुमनाई) को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “SRCC के पूर्व छात्र भी बहुत खास रहे हैं। अगर मैं आपकी भाषा में कहूं, तो यहां के पूर्व छात्र ‘OGs’ (असली दिग्गज) हैं।”

दोनों दौर की तुलना करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि 2013 में भारत कई चुनौतियों का सामना कर रहा था, जिनमें आतंकी हमले, महंगाई और भ्रष्टाचार शामिल थे।

उन्होंने कहा, “विकास दर बहुत नीचे थी और महंगाई चरम पर थी,” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि घोटाले और भ्रष्टाचार भी अपने चरम पर थे।

उस समय के माहौल को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “हर तरफ निराशा और मायूसी ही थी।”

इस दौरान पीएम मोदी ने सुरक्षा चुनौतियों और ‘लाइन ऑफ कंट्रोल’ (LoC) पर हालात का भी जिक्र किया और 2014 से पहले की स्थिति की तुलना अपनी सरकार के जवाब से की।

पीएम मोदी ने पाकिस्तान पर साधा निशाना

पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए, पीएम मोदी ने सीमा पार से होने वाले हमलों पर उस समय और अब के रवैये की तुलना की।

उन्होंने कहा, “आज जब पाकिस्तान कोई हरकत करता है, तो हम उनके घर में घुसकर हमला करते हैं।” उन्होंने अपनी सरकार के दौरान पाकिस्तान के प्रति भारत के रुख का जिक्र करते हुए यह बात कही।

उन्होंने उस समय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि का भी जिक्र किया और बताया कि 2013 में देश को “फ्रैजाइल फाइव” (कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक) कहा जाता था। उन्होंने 2013 में भारत की स्थिति और आज की स्थिति की तुलना करते हुए इस शब्द का इस्तेमाल किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अब भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर पहचाना जा रहा है। उन्होंने हाल के GDP आंकड़ों का भी जिक्र किया, जिनके मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है।

क्या Gen Z तक पहुंचने की नई कोशिश है?

हाल ही में जंतर-मंतर पर Gen Z के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद, BJP और उसके नेता युवा दर्शकों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में PM मोदी ने SRCC में खास तरह की भाषा का इस्तेमाल किया। हाल ही में BJP सांसदों ने संसद में “MIA”, “FOMO” और “Delulu” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया है, जबकि खुद प्रधानमंत्री भी इंस्टाग्राम-स्टाइल वीडियो और युवाओं को ध्यान में रखकर संदेश देने का तरीका अपना रहे हैं।

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से मीम्स, रील्स और इंटरनेट कल्चर से प्रेरित थे। इनसे पता चला कि Gen Z किस तरह सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके लोगों को एकजुट कर सकता है और राजनीतिक चर्चा को दिशा दे सकता है। बता दें कि इस आंदोलन के कारण तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था।

इसलिए, PM मोदी का SRCC का दौरा सिर्फ 2013 में दिए गए भाषण को दोहराना नहीं था। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब राजनीतिक पार्टियां उस पीढ़ी की भाषा को समझने और बोलने की कोशिश कर रही हैं जो रील्स, मीम्स और इंटरनेट स्लैंग के जरिए बातचीत करती है।

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50 अमेरिकी फौजी अफसरों का पॉलीग्राफ टेस्ट:ईरान जंग की सीक्रेट जानकारी लीक करने का शक, हथियारों की कमी दुनिया के सामने आई

अमेरिका में ईरान युद्ध से जुड़ी सीक्रेट जानकारी लीक होने की जांच तेज हो गई है। यह पता लगाने के लिए कि जानकारी किसने मीडिया तक पहुंचाई, पेंटागन ने करीब 50 सैन्य अधिकारियों और कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया है। टेस्ट के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने ईरान युद्ध से जुड़ी सीक्रेट जानकारी मीडिया से जुड़े लोगों को दी थी। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या उन्होंने अमेरिका के हथियारों और गोला-बारूद के घटते भंडार से जुड़ी कोई जानकारी बाहर साझा की थी। पॉलीग्राफ को आम भाषा में झूठ पकड़ने वाला टेस्ट कहा जाता है। इसमें धड़कन, सांस और पसीने जैसे बदलावों को रिकॉर्ड कर सच-झूठ का पता लगाया जाता है। अगस्त में हथियार लीक होने की खबर मीडिया में लीक हुई थी यह कार्रवाई अगस्त में आई उन मीडिया रिपोर्ट्स के बाद हुई, जिनमें बताया गया था कि ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के कुछ जरूरी हथियारों का भंडार कम हुआ है। इनमें लंबी दूरी की मिसाइलें और पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर भी शामिल थे। जॉइंट स्टाफ में करीब 1,500 से 2,000 अधिकारी और कर्मचारी काम करते हैं। यह अमेरिकी सैन्य नेतृत्व के लिए दुनियाभर में चल रहे सैन्य अभियानों, नीतियों और युद्ध की योजनाओं के बीच तालमेल बनाने वाली प्रमुख संस्था है। 50 सैन्य अधिकारियों का टेस्ट कराया जाना असामान्य माना जा रहा है। जांच से जुड़े जानकारों के मुताबिक पॉलीग्राफ टेस्ट का मकसद सिर्फ यह पता लगाना नहीं था कि सीक्रेट जानकारी किसने लीक की। इससे दूसरे अधिकारियों और कर्मचारियों को भी भविष्य में ऐसी जानकारी मीडिया तक पहुंचाने से रोकने का मैसेज दिया गया। ट्रम्प ने लीक करने वालों पर सख्ती के संकेत दिए ईरान युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिकी हथियारों के भंडार पर दबाव बढ़ने की खबरें लगातार सामने आने लगीं। कई अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने बताया कि युद्ध में लंबी दूरी की मिसाइलों और पैट्रियट इंटरसेप्टर जैसे हथियारों का भंडार कम हो रहा है। कुछ खबरों में यह भी सामने आया कि ईरान के खिलाफ युद्ध की रणनीति को लेकर अमेरिकी प्रशासन के अंदर ही चिंता और मतभेद हैं। इन खबरों के सामने आने के बाद ट्रम्प प्रशासन ने यह पता लगाने की कोशिश तेज कर दी कि सीक्रेट जानकारी मीडिया तक कौन पहुंचा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अधिकारियों पर लीक करने वालों को खोजने के लिए सख्त कार्रवाई का दबाव बनाया। ट्रम्प ने युद्ध की रणनीति और हथियारों की कमी को लेकर सरकार की आलोचना करने वाली मीडिया रिपोर्ट्स पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने ऐसी रिपोर्टिंग को देशद्रोही तक बता दिया। हेगसेथ के कार्यकाल में पेंटागन में बढ़ा लीक का विवाद जॉइंट स्टाफ की जांच ऐसे समय में हो रही है, जब रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कार्यकाल में पेंटागन के अंदर गोपनीय जानकारी लीक होने के मामले लगातार सामने आए हैं। इन मामलों की जांच भी चल रही है। मौजूदा और पूर्व अधिकारियों के मुताबिक, लगातार हो रही इन जांचों का असर पेंटागन के माहौल पर भी पड़ा है। वहां अब एक-दूसरे पर शक और भरोसे की कमी बढ़ गई है। हेगसेथ के कार्यकाल में कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को पद से हटाने या उनकी पदोन्नति रोकने के फैसलों को लेकर भी विवाद हुआ है। पिछले साल की शुरुआत से मीडिया में किसी लीक की खबर सामने आने के बाद पेंटागन ने कई बार जांच शुरू की है। इनमें ऐसी खबरें भी शामिल हैं, जिनमें हेगसेथ के नेतृत्व और उनके फैसलों पर सवाल उठाए गए थे। खास बात यह है कि हेगसेथ खुद भी गोपनीय जानकारी लीक होने के विवाद में घिर चुके हैं। पिछले साल यमन में अमेरिकी हमलों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी एक सिग्नल ग्रुप में साझा किए जाने के मामले में उनकी काफी आलोचना हुई थी। हेगसेथ पर खुद सीक्रेट जानकारी शेयर करने का आरोप मार्च 2025 में अमेरिका यमन में हूती विद्रोहियों पर हमला करने वाला था। इस ऑपरेशन की जानकारी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सिग्नल के एक निजी ग्रुप में शेयर की। ग्रुप में उनकी पत्नी, भाई, निजी वकील और कुछ करीबी लोग भी थे। इससे पहले एक दूसरे सिग्नल ग्रुप में गलती से द अटलांटिक के एडिटर भी जुड़ गए थे, जहां यमन हमले की जानकारी शेयर हुई थी और बाद में यह मामला सार्वजनिक हो गया। विवाद इसलिए हुआ क्योंकि सैन्य हमले की टाइमिंग और लड़ाकू विमानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी निजी मैसेजिंग ऐप पर शेयर की गई थी। सवाल उठा कि ऐसी जानकारी उन लोगों के साथ क्यों साझा की गई, जो रक्षा विभाग के कर्मचारी भी नहीं थे। हेगसेथ ने कहा कि उन्होंने कोई क्लासिफाइड यानी बेहद गोपनीय जानकारी शेयर नहीं की थी। बाद की जांच में हालांकि सिग्नल पर संवेदनशील सैन्य जानकारी भेजने को लेकर उनकी आलोचना हुई। यही वजह है कि अब जब हेगसेथ खुद सैन्य जानकारी लीक होने के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, तो उनका पुराना सिग्नल विवाद भी चर्चा में आ रहा है। 5 मई के बाद ईरान युद्ध पर प्रेस ब्रीफिंग नहीं हुई हेगसेथ ने 5 मई के बाद से ईरान युद्ध को लेकर पेंटागन के पत्रकारों के सामने कोई प्रेस ब्रीफिंग नहीं की है। उनके कार्यकाल में पत्रकारों की पेंटागन तक पहुंच को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ है। पेंटागन ने पत्रकारों की वहां पहुंच और रिपोर्टिंग को लेकर नियम कड़े किए हैं। इससे पत्रकारों के लिए पेंटागन के अंदर जाकर अधिकारियों से बात करना और वहां से खबरें जुटाना मुश्किल हुआ है। इसी नीति को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स अदालत गया है। पिछले महीने रक्षा विभाग ने स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के प्रकाशक और एडिटर-इन-चीफ को भी उनके पद से हटा दिया। यह अमेरिकी सेना से जुड़ा और सरकार द्वारा वित्त पोषित समाचार संस्थान है। दोनों पत्रकारों का आरोप था कि उन्हें हटाने का फैसला USS अब्राहम लिंकन पर बिगड़ती परिस्थितियों को लेकर उनकी रिपोर्टिंग के बाद लिया गया। यानी पेंटागन में मीडिया की पहुंच और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरानी टैंकर पर मिसाइल दागी:खार्ग आइलैंड के पास धमाका अमेरिका ने ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया। मीडिया के मुताबिक, खार्ग आइलैंड के पास ईरान का तेल ले जा रहे टैंकर पर अमेरिका ने 4 मिसाइलें दागीं। पूरी खबर पढ़ें…

Teacher’s Day 2026: ‘आदर्श बाल विद्यालय’ से ‘एस्पिरेंट्स’ तक, ओटीटी की 10 ऐसी सीरीज जो बताती हैं बेहतरीन शिक्षक सिर्फ क्लासरूम में नहीं होते

Teacher’s Day 2026: टीचर्स डे अब सिर्फ ब्लैकबोर्ड और रिपोर्ट कार्ड तक सीमित नहीं रह गया है। हमें कई यादगार शिक्षक और मार्गदर्शक म्यूजिक स्कूल, कोचिंग सेंटर, कोर्टरूम, गांवों और जिंदगी के मुश्किल दौर में भी मिले हैं। ये किरदार सिर्फ हमें कोई विषय नहीं सिखाते, बल्कि हमारी जिंदगी को आकार देते हैं, हमारी सोच को चुनौती देते हैं और ऐसी सीख देते हैं जो फिल्म या सीरीज खत्म होने के बाद भी हमारे साथ रहती है।

इस टीचर्स डे पर नजर डालते हैं ओटीटी के उन टाइटल्स पर, जिनमें मेंटर्स, गाइड्स और ऐसे किरदार नजर आते हैं जो अनोखे अंदाज में शिक्षक की भूमिका निभाते हैं।

1. जगमे संगीतथम् (प्राइम वीडियो)

‘जगमे संगीत’ संगीत के जरिए गुरु और शिष्य के बीच के हमेशा बने रहने वाले रिश्ते को दिखाता है। वैकुंठपुरम की पृष्ठभूमि में बनी यह सीरीज शास्त्रीय परंपराओं को दिखाती है। इसमें शास्त्री (प्रकाश राज) अपने पोते का मार्गदर्शन करते हैं, जिसका किरदार अक्षय लगुसानी ने निभाया है। यह कहानी बताती है कि एक गुरु और शिष्य का रिश्ता सिर्फ प्रतिभा तक सीमित नहीं होता, बल्कि अनुशासन, विरासत और भरोसे पर भी टिका होता है।

2. बंदिश बैंडिट्स (प्राइम वीडियो)

‘बंदिश बैंडिट्स’ की कहानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक कला को पहुंचाने के बारे में है। पंडित राधेमोहन राठौड़ (नसीरुद्दीन शाह) की कड़ी ट्रेनिंग से लेकर राधे (ऋत्विक भौमिक) के अपनी खुद की पहचान और आवाज तलाशने तक, यह सीरीज खूबसूरती से दिखाती है कि अच्छे शिक्षक हमें हमारी क्षमता पहचानने के लिए प्रेरित करते हैं।

3. कोटा फैक्ट्री (नेटफ्लिक्स)

बहुत कम शोज ने शिक्षक की भूमिका को ‘कोटा फैक्ट्री’ जितने अलग अंदाज में दिखाया है। जीतू भैया सिर्फ फिजिक्स के शिक्षक नहीं हैं, बल्कि छात्रों के मेंटर, काउंसलर और भावनात्मक सहारे भी हैं। वह छात्रों को उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में आगे बढ़ने में मदद करते हैं।

4. एस्पिरेंट्स (प्राइम वीडियो)

यूपीएससी की तैयारी सिर्फ परीक्षा देने तक सीमित नहीं है और ‘एस्पिरेंट्स’ हमें यही याद दिलाता है। संदीप भैया, अभिलाष के ऐसे मेंटर बन जाते हैं, जिसकी उन्होंने खुद भी उम्मीद नहीं की थी। इस पूरी कहानी में मेंटर और एक परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र का रिश्ता दिखाता है कि मुश्किल रास्ते पर साथ चलने वाले लोगों से हमें मार्गदर्शन के साथ-साथ कई बार मतभेद और टकराव भी मिलते हैं।

5. रॉकेट बॉयज (सोनीलिव)

कुछ शिक्षक सिर्फ एक क्लासरूम को प्रभावित करते हैं, जबकि कुछ पूरे देश को आकार देते हैं। ‘रॉकेट बॉयज़’ होमी भाभा और विक्रम साराभाई के जरिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन की कहानी दिखाता है। यह बताता है कि कैसे सोच, जिज्ञासा और नेतृत्व की भावना आने वाली पीढ़ियों के इनोवेटर्स को प्रेरित कर सकती है।

6. क्रिमिनल जस्टिस: अ फैमिली मैटर (जियोहॉटस्टार)

माधव मिश्रा भले ही एक वकील हैं, लेकिन हर केस उनके लिए सहानुभूति, न्याय और इंसानियत की एक नई सीख लेकर आता है। शो में शिवानी को मेंटर करने के दौरान माधव का किरदार साबित करता है कि जिंदगी की सबसे मुश्किल परिस्थितियां ही कई बार हमारी सबसे बड़ी शिक्षक बन जाती हैं।

7. मिथ्या (ज़ी5)

‘मिथ्या’ में हुमा कुरैशी और अवंतिका दसानी के किरदारों के बीच एक प्रोफेसर और छात्रा का रिश्ता दिखाया गया है, जो आगे चलकर एक अप्रत्याशित मोड़ लेता है। यह साइकोलॉजिकल थ्रिलर दिखाती है कि ताकत, प्रभाव और मार्गदर्शन का रिश्ता किस तरह खतरनाक स्थिति में बदल सकता है। यही वजह है कि यह ओटीटी पर शिक्षक और छात्र के रिश्ते की सबसे अलग कहानियों में से एक है।

8. आदर्श बाल विद्यालय (प्राइम वीडियो)

हाल के समय में बहुत कम शोज ने स्कूल की जिंदगी को ‘आदर्श बाल विद्यालय’ जितनी गर्मजोशी और सच्चाई से दिखाया है। इसके शिक्षक और छात्र हमें याद दिलाते हैं कि शिक्षा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि दयालुता, आत्मविश्वास और एक-दूसरे का साथ देना भी उतना ही जरूरी है। इस कहानी में प्रधानाचार्य ज्ञानेश्वर त्रिपाठी और छात्रों का रिश्ता खास तौर पर देखने लायक है।

9. हाफ सीए (प्राइम वीडियो)

बड़े होने के दौरान हमें ऐसे मेंटर्स की जरूरत होती है जो किताबों से आगे जाकर हमारी परेशानियों को समझ सकें। ‘हाफ सीए’ उन युवाओं की कहानी है जो चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने की तैयारी कर रहे हैं और पढ़ाई, उम्मीदों और खुद पर होने वाले संदेह के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। यह उन शिक्षकों और मार्गदर्शकों की अहमियत को दिखाता है जो इस सफर को थोड़ा आसान बना देते हैं।

10. 13th: सम लेसन्स आरंट टॉट इन क्लासरूम्स (सोनीलिव)

यह प्रभावशाली डॉक्यूमेंट्री साबित करती है कि शिक्षा सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं है। ‘13th सम लेसन्स आरंट टॉट इन क्लासरूम्स’ दर्शकों को इतिहास, व्यवस्था और समाज पर सवाल उठाने के लिए प्रेरित करती है। यही वजह है कि टीचर्स डे पर देखने के लिए यह एक सोचने पर मजबूर करने वाली डॉक्यूमेंट्री है।

इस टीचर्स डे पर ये कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि सबसे प्रभावशाली शिक्षक हमेशा ब्लैकबोर्ड के सामने खड़े नहीं होते। कई बार वे मेंटर, माता-पिता, दोस्त, प्रोफेशनल्स या खुद जिंदगी होती है, जो हमें ऐसी सीख देकर जाती है जो हमेशा हमारे साथ रहती है।

गोरक्षपीठ में सीएम योगी ने मनाया गोपाल का प्राकट्योत्सव

गोरक्षपीठ में सीएम योगी ने मनाया गोपाल का प्राकट्योत्सव

CM Yogi, Gorakhnath Temple Krishna Janmashtami: भक्ति, प्रेम व धर्म के शाश्वत आलोक, गोपाल, जगतपाल, पूर्ण परब्रह्म, भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव का पवित्र पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की साधनास्थली गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक श्रद्धा, भव्यता एवं हर्षोल्लास से मनाया गया। गोरक्षपीठ के इस पारंपरिक कार्यक्रम का नेतृत्व करने के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार रात लखनऊ से गोरखपुर पहुंचे।

 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह से मध्य रात्रि तक, मथुरा से लेकर लखनऊ और गोरखपुर तक, समस्त योगियों के परमेश्वर माने जाने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण की साधना में रमे रहे। सुबह उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा स्थित जन्मभूमि मंदिर में कान्हा की विधि विधान से आराधना कर प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। शाम को वह लखनऊ पुलिस लाइन में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह में सम्मिलित हुए और फिर रात में गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर उन्होंने पारंपरिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में प्रभु के प्राकट्य अनुष्ठान को पूर्ण कराया। 

 

गोरखनाथ मंदिर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने सबसे पहले शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन किया। इसके बाद उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर मत्था टेक पुष्पार्चन किया, उनका आशीर्वाद लिया। गोरखनाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन उपलक्ष्य में महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में भजन संध्या का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री यहां पहुंचे और सुमधुर भजनों का आनंद उठाते हुए राधा-कृष्ण बने बच्चों को दुलारकर उन्हें उपहार देते रहे। 

 

गोरक्षपीठाधीश्वर ने मध्य रात्रि गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर विधि विधान से विशिष्ट पूजा अर्चना की। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की' और ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव’ की मंगल धुन, सोहर गीत और घंटों-घड़ियाल की ध्वनि के बीच गोरक्षपीठाधीश्वर उन्हें गोद में लेकर गर्भगृह से बाहर आए। सीएम योगी ने, प्रभु श्रीहरि के बाल स्वरूप ‘लड्डू गोपाल’ को फूलों से सजे पालने में बैठाकर श्रद्धाभाव से उन्हें झुलाया और आरती उतारी। प्रभु श्रीकृष्ण का प्राकट्य अनुष्ठान पूर्ण होने के उपरांत मंदिर की तरफ से श्रद्धालुओं को फलाहार और प्रसाद वितरित किया गया। 

 

गोरखनाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव परंपरागत रूप से धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में भजन संध्या कार्यक्रम सुपरिचित लोक गायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव के संयोजन में शाम से ही जारी था। दूसरी तरफ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान मंदिर के गर्भगृह में रात करीब साढ़े ग्यारह बजे से प्रारंभ हुआ और ठीक मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोपरांत मंगल गीत व प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, कई साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मध्य रात्रि तक मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा। 

राधा-कृष्ण बने बच्चों को मिला सीएम योगी का स्नेह व उपहार

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में भजन कीर्तन के मध्य श्रीकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में राधा व कृष्ण बने बच्चों को खूब स्नेह दिया। उनसे खूब हंसी ठिठोली भी की। उन्हें खिलौने व चॉकलेट उपहार में दिए। इस दौरान कई मासूमों को अपनी गोद में लेकर वह काफी देर तक खिलाते रहे, प्यार-दुलार करते रहे। कुछ बच्चों ने सीएम योगी को दोहे और श्लोक सुनाए तो कुछ ने उनके साथ सेल्फी ली। मुख्यमंत्री सभी बच्चों का अनुरोध पूरा करते रहे।

बालरूप सज्जा नयनाभिराम

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर गोरखनाथ मंदिर के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता में सजधज कर आए बच्चों ने लोगों का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में कोई श्रीकृष्ण के रूप में था तो कोई राधा। इन बच्चों के वेश और रूप से सभागार एकबारगी गोकुल का भान करा रहा था। दो वर्गों में हुई इस प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चे कार्यक्रम का आकर्षण बढ़ा रहे थे। बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता के कान्हा वर्ग में प्रथम पुरस्कार शर्विल पांडेय को, द्वितीय पुरस्कार सौम्या प्रजापति और तृतीय पुरस्कार हिमांशी श्रीवास्तव को दिया गया। गोपाल वर्ग में प्रथम पुरस्कार सार्थक, द्वितीय राजवीर और तृतीय पुरस्कार रूद्र को मिला। श्रीकृष्ण रूप सज्जा में विजेताओं को मुख्यमंत्री ने प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर पुरस्कृत किया। निर्णायक की भूमिका सारिका राय, मनीषा सिंह और हृदया त्रिपाठी ने निभाई जबकि संचालन शिवेंद्र पांडेय ने किया।

भजनों में गूंजा जय कान्हा-श्याम

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में, डॉ. राकेश श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित भजन संध्या में कान्हा-श्याम की आराधना की गूंज रही। शुभारंभ पुनीत श्रीवास्तव ने एक सुमधुर भक्ति गीत से किया। इसके पश्चात हृदया त्रिपाठी व अनीता सिंह ने सोहर और लक्ष्मी गुप्ता ने बधाई गीत की कर्णप्रिय प्रस्तुति दी। गायक उमेश मिश्रा और एकता शुक्ला ने कृष्ण भजन सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया। डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने पारंपरिक बधाई गीत एवं सोहर के गायन से वातावरण को उल्लासमय बना दिया। वाद्य यंत्रों पर श्यामसुंदर लाल श्रीवास्तव हंसलोना, दीपक, आभास पाठक एवं सुधाकर सिन्हा ने संगत की।

गर्भगृह में हनुमत संगीत आश्रम ने सजाई भजन संध्या

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में हनुमत संगीत आश्रम एवं सेवा संस्थान की तरफ से रात आठ बजे से बारह बजे तक भजनों की प्रस्तुति की गई। जन्मोत्सव से पूर्व, गर्भगृह में भजनों का श्रवण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत गायक और संगीतकार अभिषेक पांडेय बिट्टू के भजनों से हुई। तत्पश्चात सिद्धि सिंह, निशांत शुक्ला, श्रेयांश तेजस्वी, ओम सिंह, हृदयांश श्रीवास्तव, अपूर्व नमन, आकांक्षा त्रिपाठी, प्रीति अग्रहरि और अलका जायसवाल ने अपने भजनों की प्रस्तुति से लोगों को खूब झुमाया। कार्यक्रम का संयोजन धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं संगीत निर्देशन अभिषेक पांडेय बिट्टू का था। वाद्य यंत्र पर अजीत राज, शैलेश दुबे व रुद्राक्ष शुक्ला ने संगत की।

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी – शताब्दी पर जयजगत!

जन नेता कामरेड होमी एफ दाजी - शताब्दी पर जयजगत!

होमी एफ. दाजी, साम्यवादी विचारधारा के साथ ज़ीने वाले साम्यवादी राजनेता होने के साथ ही वंचित तबके से लेकर पढ़े-लिखे बुद्धिजीवियों के मन मस्तिष्क को गहराई से प्रभावित करने वाले राजनेता थे। होमी दाजी का जन्म 5 सितम्बर 1926 को बम्बई में एक पारसी परिवार में हुआ था। 14 मई 2009 को कामरेड होमी दाजी ने अपनी जीवन यात्रा इन्दौर में 82 वर्ष की आयु में पूरी की। जीवन संघर्ष क्या होता है यह होमी दाजी ने अपने जीवन के प्रारंभ में ही अच्छे से समझ लिया था।

 

बम्बई से अपने पिताजी के साथ होमी दाजी इन्दौर आए और इन्दौर में आपने अपना और अपने परिवार के निजी जीवन को गढ़ने की खुद शुरुआत की और जीवन संघर्ष में सतत आगे बढ़ते रहने का अनथक सिलसिला प्रारंभ किया। होमी दाजी के समूचे जीवन की कहानी वंचित समूह के लोगों में ज़ीने के साथ हक एवं गरिमापूर्वक जीते रहने की आशा और विश्वास पैदा करने की अनोखी कहानी है। आजादी आने के शुरुआती काल में सभी लोगों के मन में बहुत बढ़िया उत्साह का वातावरण बना हुआ था। आजादी की खुशी और आगे बढ़कर देश समाज के कार्य में सहजता से भागीदारी की प्रवृत्ति भी बहुतायत से मौजूद थी।

 

आजादी आंदोलन के कारण जनचेतना समाज के सभी तबकों और हिस्सों में मौजूद थीं। गुलामी के कालखंड की उदासीनता छट चुकी थी। इस कालखंड में नौजवान होमी दाजी जो खुद घनघोर आर्थिक संकटों से घिरे हुए थे, ने अपनी परवाह किए बगैर लोगों के अरमानों को जगाने और उनके सपनों में रंग भरने के लिए संघर्ष की राजनीति की राह चुनी। छात्र जीवन में अपने अध्ययन हेतु स्कूल की फीस भरने लायक आर्थिक स्थिति नहीं होने पर भी होमी दाजी ने बिना घबराए और बिना पीछे हटे, छात्र जीवन संघर्ष की वैचारिक प्रतिबद्धता एवं तेजस्विता के साथ इतिहास विषय में आगरा यूनिवर्सिटी से एमए करने के साथ साथ ही एलएलबी की डिग्री मेरिट लिस्ट में स्थान पाकर हासिल की थी। यह युवा होमी दाजी के व्यक्तित्व का उजला पृष्ठ है कि परिस्थितियां कैसी भी हो हिम्मत कभी न हारो।

 

कामरेड होमी दाजी जैसा शब्दों और आवाज का जादूगर किसी भी कालखंड में यदा-कदा ही संघर्षमयी सार्वजनिक, राजनीतिक जीवन के सतत, सक्रिय, संघर्ष में से उभरकर आता हैं। कामरेड होमी दाजी को सुनने के लिए लोग लालायित बने रहते थे। दाजी का कालखंड एक तरह से लगातार आमसभाओं की वैचारिक सक्रियता का कालखंड था। होमी दाजी को अपने श्रोताओं के मानस की गहरी समझ थी। यदि गरीब वंचित और निरक्षर लोगों के बीच होमी दाजी बोलते थे तो इस तरह बोलते थे कि उनके द्वारा बोली हुई बातें श्रोताओं के दिल दिमाग में उतर जाएं। इसी तरह दिग्गज पढ़े-लिखे विद्वानों की सभा में भी शामिल श्रोता समूह, मंत्रमुग्ध हो दाजी को सुनता रहता था।

 

आम सभा हो या कपड़ा मिलों में मजदूरों की छुट्टी होने पर होने वाली गेट मीटिंग, होमी दाजी के भाषण न केवल मजदूरों को राजनीतिक चिंतन का विषय देते थे वरन गेट मीटिंग सुनने वाले मजदूर, अपनी-अपनी बस्तियों में जाकर लोगों को बताते थे कि आज होमी दाजी ने अपने भाषण में यह बात कही और इस तरह मज़दूरों को गेट मीटिंग के माध्यम से अपनी बस्तियों में जाकर राजनीतिक चेतना को फ़ैलाने की लोक कोचिंग वे आम सभाओं के माध्यम से करते रहते थे।

 

होमी दाजी की वकालत का कार्यालय एक तरह से वकालत के साथ ही राजनीतिक सामाजिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण संचालन केन्द्र की तरह जाना जाता था। होमी दाजी की वकालत केवल कोर्ट परिसर तक ही सीमित नहीं थी, जनता के बीच भी दाजी की वकालत सार्वजनिक मुद्दों पर चलती रहती थी। पर होमी दाजी की वकालत का लोहा विधि जगत मानने लगा था।

 

कामरेड होमी दाजी ने सन 1962 में चीन के भारत पर हमले की पृष्ठभूमि में इन्दौर से लोकसभा का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा और वे तीसरी लोकसभा के सदस्य बने, 1962 के इस लोकसभा निर्वाचन की एक और उल्लेखनीय बात यह थी कि समाजवादी पार्टी ने सुप्रसिद्ध मामा बालेश्वर दयाल को इन्दौर लोकसभा से प्रत्याशी बनाया था। इस आम चुनाव में जीत होमी दाजी को मिली। इन्दौर लोकसभा क्षेत्र से मामा बालेश्वर दयाल के समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ने से जो राजनीतिक चेतना निकली उसकी परिणति यह हुई कि 1967 के विधानसभा चुनाव में इन्दौर से साथी कल्याण जैन और साथी आरिफ बेग दोनों समाजवादी विधायक निर्वाचित हुए। इस तरह कामरेड होमी दाजी और मामा बालेश्वर दयाल के निर्वाचन लड़ने से इन्दौर की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण मोड़ आया और समाजवादी और साम्यवादी विचारधारा की इन्दौर की राजनीति और समाजिक जीवन में पकड़ मजबूत हुई।

 

लोकसभा में कामरेड होमी दाजी ने अपनी भाषण कला के साथ संसदीय प्रक्रिया की गहरी संवैधानिक समझ होने की छाप संसदीय प्रक्रिया में निरंतर सक्रिय भागीदारी कर लोकमानस पर छोड़ने के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका की शुरुआत की। इस कालखंड में पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री थे। समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया सहित देश के दिग्गज राजनेता लोकसभा में मौजूद थे। लोकसभा में सक्रिय भूमिका से कामरेड होमी दाजी ने देश के दिग्गज राजनेताओं सहित जनमानस का ध्यान आकर्षित किया और देश की संसदीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

कामरेड होमी दाजी दो बार मध्य प्रदेश की विधानसभा के सदस्य के रूप में इन्दौर के श्रमिक क्षेत्र से निर्वाचित हुए। कामरेड होमी दाजी बाद में 1967 के लोकसभा चुनाव में प्रकाशचन्द्र सेठी से चुनाव हार गए। 1971 में पुनः इन्दौर के श्रमिक क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। इन्दौर, मध्यप्रदेश और भारत के श्रमिक आंदोलन में कामरेड होमी दाजी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एटक में राष्ट्रीय स्तर पर भी कामरेड होमी दाजी की महत्वपूर्ण भूमिका इतिहास में दर्ज है।

 

कामरेड होमी दाजी की जीवनसाथी कामरेड पैरिन दाजी ने घर, परिवार से लेकर कम्युनिस्ट पार्टी, श्रम आन्दोलन और सार्वजनिक एवं निजी जीवन में बराबरी से सहभागिता कर एक आदर्श प्रस्तुत किया जो सार्वजनिक जीवन में मिलने वाला बिरला उदाहरण है। कामरेड होमी दाजी एवं पैरिन दाजी का एक बेटा रूसी दाजी जो एक अभिभाषक होने के साथ-साथ आजीवन सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहा। इसी तरह एक बेटी कामरेड डाक्टर रोशनी दाजी जो रूस से डाक्टर बनकर आई और इन्दौर की वंचित बस्तियों में वंचित वर्ग के लोगों के लिए चिकित्सकीय परामर्श और इलाज एक डिस्पेंसरी के माध्यम से करते हुए राजनीतिक सामाजिक गतिविधियों में आजीवन शामिल रही।

 

कामरेड दाजी के दोनों बच्चों का युवा अवस्था में ही देहावसान हो जाना दाजी दम्पति के जीवन काल की गहरी दुखदाई घटना होने पर भी दाजी दम्पति ने निराशा को अपने निजी जिंदगी में फटकने नहीं दिया और आशा, विश्वास और संघर्ष को अपने जीवन क्रम का एक हिस्सा माना। अपनी लंबी निजी जिंदगी और संघर्षपूर्ण सार्वजनिक जीवन को जिस हिम्मत से शांतिपूर्वक तरीके से स्वीकार कर जीवन में निराशा को न तो दोनों ने आने दिया और न ही संघर्ष से पलायन कर अपने जीवन संघर्ष में आईं चुनौतियों से धबराए। यही दाजी दम्पति का निजी और सार्वजनिक जीवन जीने वाले सभी सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए खुला और सीधा संदेश है कि “हिम्मत कभी न हारो”।

 

होमी दाजी ने 50-55 साल से भी ज्यादा का समय सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका के साथ बिताया। इस कालखंड में हजारों नौजवानों, मजदूरों, किसानों और राजनीतिक सामाजिक कार्यकर्ताओं को जनता के लिए और जनता की तरह जीते हुए निर्भय राजनीति करते रहने का रास्ता दिखाया। मैं सन 1960 से इन्दौर के सार्वजनिक राजनीतिक सामाजिक जीवन में सतत सक्रिय हूं और 1960 में 9 वर्ष की आयु में पहली बार कामरेड होमी दाजी से एक आम सभा में मिला था। तब से लेकर कामरेड होमी दाजी के अंतिम संस्कार तक की घटनाएं मेरी स्मृति में आज भी जीवन्त रूप में दर्ज हैं। मुझे कामरेड होमी दाजी को देखने, सुनने, समझने और साथ काम करने का लंबा अवसर मिला।

 

कामरेड होमी दाजी से जीवन के कई नए आयाम सीखने का अद्भुत अवसर भी मिला। इन्दौर के साम्यवादी विचारधारा के कई कार्यकर्ताओं और राजनीतिक सामाजिक नेतृत्व से भी सम्पर्क का अवसर कामरेड होमी दाजी के साथ कई आन्दोलनों एवं मुद्दों पर साथ काम करने से मिला। इन्दौर में साम्यवादी आन्दोलन के काफी नेताओं को देखने-सुनने और मिलने का अवसर भी मिला। दत्तात्रय सरमंडल, कामरेड अनंत लागू से लेकर इन्दौर के साम्यवादी आन्दोलन की आज की पीढ़ी एवं पुरानी पीढ़ी के लगभग सभी साथियों एवं लोगों से पिछले 60-65 सालों से मिलने और जानने का एक लंबा सिलसिला जारी है, जो मेरे सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का अनमोल खजाना है। इन्दौर में नगर निगम की चुनावी राजनीति में नागरिक समिति के रूप में विपक्षी राजनैतिक दलों का मोर्चा बनाने में भी कामरेड होमी दाजी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

 

यह वर्ष कामरेड होमी दाजी का शताब्दी वर्ष है। 100 वर्ष में सारी दुनिया में जमीन आसमान का अंतर आता गया है। पर सारी दुनिया में मनुष्यता के बुनियादी सवाल और अधिक गहराई से वैसे ही उठ रहे हैं जैसे 100 साल पहले या उससे पहले भी उठ रहे थे। 100 साल यानी पांच पीढ़ियों का कालखंड। आज का कालखंड एक दम भिन्न हो गया है पर भारत ही नहीं सारी दुनिया की समस्याएं और उन्हें समझने और धीरज के साथ बेहतर रास्ता निकालने की समझ जरूरी है। वैसे ही आज के कालखंड के नौजवान, मजदूर, किसान और जीवन संघर्ष में रास्ता खोज रहे राजनैतिक, सामाजिक गतिविधियों में लगे हुए आन्दोलनकारी लोगों को नया बेहतर रास्ता निकालने का आमंत्रण दे रहे हैं जैसा कि कामरेड होमी दाजी की युवावस्था में आजाद भारत के शुरुआती दिनों में युवा होमी दाजी की पीढ़ी को मिला था। 

 

किसी भी व्यक्ति की शताब्दी के वर्ष में बहुत सारे लोग, संदर्भ और पूरा जनजीवन बदल जाता है, पर फिर भी जीवन का बुनियादी संघर्ष नहीं बदलता, बुनियादी सवाल नई चुनौतियों के साथ आ जाते हैं। कामरेड होमी दाजी की जन्म शताब्दी पर कामरेड पैरिन दाजी, कामरेड रूसी दाजी, कामरेड डाक्टर रोशनी दाजी सहित जीवन संघर्ष के सभी साथियों सहित सभी दिवंगत साथियों का भी सादर स्मरण। सबको जयजगत।

मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में पीएम सूर्य घर योजना में यूपी ने और तेज की रफ्तार


PM Surya Ghar Yojana: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना के तहत घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश तेजी से देश में प्रथम स्थान की ओर बढ़ रहा है। अगस्त 2026 के प्रदर्शन ने प्रदेश की इस बढ़त को और मजबूत किया है।

वर्तमान गति बनी रही तो शीघ्र ही उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में भारत में प्रथम स्थान हासिल कर सकता है। अगस्त 2026 तक उत्तर प्रदेश में 7,92,959 संचयी सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके हैं। अगस्त माह में ही प्रदेश में 73,716 इंस्टॉलेशन किए गए। इस दौरान उत्तर प्रदेश की औसत दैनिक इंस्टॉलेशन गति 2,378 प्रतिदिन रही, जो देश के प्रमुख राज्यों में सबसे तेज गति में शामिल है।

नंबर वन की रेस में यूपी

संचयी इंस्टॉलेशन में उत्तर प्रदेश 7,92,959 इंस्टॉलेशन में दूसरे स्थान पर है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अगस्त में उत्तर प्रदेश की औसत दैनिक गति 2,378 इंस्टॉलेशन रही। यानी उत्तर प्रदेश प्रतिदिन औसतन 780 इंस्टॉलेशन अधिक कर रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रहती है, तो अक्टूबर 2026 के दूसरे सप्ताह के आसपास उत्तर प्रदेश घरेलू रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन में देश का नंबर-1 राज्य बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।

आंकड़े भी बता रहे उत्तर प्रदेश की रफ्तार

  • संचयी इंस्टॉलेशन : 7,92,959
  • अगस्त 2026 इंस्टॉलेशन : 73,716
  • अगस्त औसत दैनिक गति : 2,378/दिन
  • अनुमानित ओवरटेक समय : लगभग 41 दिन

विजय के ‘पीएम दांव’ पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

विजय के 'पीएम दांव' पर सियासत गर्माई : DMK और कांग्रेस का तंज, क्या 2029 में विजय बनेंगे प्रधानमंत्री?

CM Vijay Thalapathy

TVK Vijay Prime Minister Demand: तमिलनाडु की राजनीति में हाल में हुए बड़े बदलाव के बाद अब एक नया सियासी भूचाल खड़ा हो गया है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने राज्य विधानसभा चुनाव में इतिहास रचते हुए 108 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की और अकेले दम पर 35% वोट शेयर हासिल किया। लगभग 60 सालों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बारी-बारी के शासन को खत्म कर विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं।

 

35% वोट शेयर का यह आंकड़ा तमिलनाडु के पूर्व लोकप्रिय मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन (MGR) को मिले वोट शेयर से भी 2 प्रतिशत अधिक है। बिना किसी गठबंधन के अकेले चुनाव लड़कर इतना बड़ा जनादेश हासिल करने का दावा करते हुए टीवीके समर्थक अब एक कदम आगे बढ़ गए हैं और विजय को 'भारत का अगला प्रधानमंत्री' प्रोजेक्ट करने लगे हैं। ALSO READ: परिसीमन पर तमिलनाडु CM विजय ने PM मोदी को लिखा पत्र, लोकसभा सीटों की संख्या 543 पर स्थायी रूप से तय करने की मांग

विधानसभा में उठा 'दक्षिण का पीएम' का मुद्दा

हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान टीवीके के वरिष्ठ नेता और मंत्री आधव अर्जुन (Aadhav Arjuna) ने यह कहकर नया विवाद छेड़ दिया कि 'दक्षिण भारत के किसी तमिल नेता को देश का अगला प्रधानमंत्री बनना चाहिए'।

 

इसके बाद से पूरे तमिलनाडु में टीवीके कार्यकर्ताओं और विजय के प्रशंसकों ने जगह-जगह पोस्टर्स और होर्डिंग्स लगा दिए हैं, जिनमें विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस बहस से जुड़े रील्स और वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहे हैं।

कांग्रेस भड़की : 'दिल्ली में राहुल गांधी ही पीएम चेहरा'

टीवीके के इस नए दांव ने उनकी सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को असहज और नाराज कर दिया है।

 

कांग्रेस नेताओं का रुख : तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि भले ही विजय तमिलनाडु में एक बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर और दिल्ली की राजनीति में राहुल गांधी ही विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के एकमात्र उम्मीदवार हैं।

 

कांग्रेस का कहना है कि 2029 के आम चुनाव में राहुल गांधी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, इसलिए टीवीके कार्यकर्ताओं का विजय को पीएम पद का दावेदार बताना जल्दबाजी और अनुचित है। विजय के मंत्रिमंडल में शामिल 2 विधायकों ने भी इसका खुला विरोध किया है और मंत्री पद से इस्तीफे की धमकी भी दी है। 

 

दूसरी ओर, राज्य के अन्य विपक्षी दलों ने विजय को प्रधानमंत्री बनाने की बात को 'एक बड़ा मज़ाक' करार देते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि ऐसा होने की कोई व्यावहारिक संभावना नहीं है। ALSO READ: तमिलनाडु CM विजय के यू-टर्न पर भड़के CJP नेता अभिजीत दीपके, कहा डर लग रहा है तो सुधारो व्यवस्था

DMK प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन का तीखा तंज

इस पूरे राजनीतिक घमासान के बीच डीएमके के मुख्य प्रवक्ता और कम्यूनिकेशन टीम के अध्यक्ष टीकेएस एलंगोवन (TKS Elangovan) ने टीवीके और विजय पर जोरदार कटाक्ष किया है।

 

“टीवीके को तमिलनाडु में स्पष्ट बहुमत (118 सीटें) खुद नहीं मिला था। विजय केवल कांग्रेस और वीसीके (VCK) जैसी पार्टियों के समर्थन के बल पर सरकार चला रहे हैं। जब राज्य में ही उनकी सरकार दूसरों के बैसाखियों पर टिकी है, तो वे पूरे देश के प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं?”

 

उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा- “एक दौर था जब हमने मांग की थी कि तमिलनाडु को एक अलग देश बनाया जाए। अगर तमिलनाडु कभी एक अलग देश बनता है, तो शायद विजय वहां के प्रधानमंत्री जरूर बन सकते हैं!”

2029 के लिए क्या हैं सियासी मायने?

तमिलनाडु में सत्ता में आते ही टीवीके द्वारा राष्ट्रीय राजनीति में अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर करना इस बात का संकेत है कि पार्टी खुद को सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रखना चाहती। हालांकि, कांग्रेस के साथ उभरते मतभेद और डीएमके का हमला यह दर्शाता है कि विजय के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाना और क्षेत्रीय सहयोगियों को साधे रखना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।

पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी:सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड, लगातार 1413 दिन से सत्ता में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में मेलोनी को अपनी मित्र बताते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि इटली के लोगों के उनके नेतृत्व पर भरोसे और विश्वास को दिखाती है। उन्होंने कहा कि मेलोनी की दोस्ती भारत और इटली के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में भी अहम रही है। मोदी ने दोनों देशों के लोगों के बेहतर भविष्य के लिए आगे भी मिलकर काम करने की उम्मीद जताई। प्रधानमंत्री ने मेलोनी को आने वाले वर्षों में सफलता के लिए शुभकामनाएं भी दीं। मेलोनी के लगातार सत्ता में 1,413 दिन पूरे जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने शुक्रवार को लगातार 1,413 दिन सत्ता में रहकर इटली में नया रिकॉर्ड बनाया। 1946 में इटली गणराज्य बनने के बाद यह किसी एक कैबिनेट का सबसे लंबा लगातार कार्यकाल है। मेलोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार का रिकॉर्ड तोड़ा है। बर्लुस्कोनी की दूसरी कैबिनेट 2001 से 2005 तक 1,412 दिन सत्ता में रही थी। मेलोनी 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। वे दक्षिणपंथी पार्टी ‘ब्रदर्स ऑफ इटली’ की प्रमुख भी हैं। इटली में सरकारें औसतन 13 महीने ही चलती हैं इटली में पिछले कई दशकों से सरकारों के बार-बार बदलने और राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है। 80 साल पहले गणराज्य बनने के बाद से देश में 68 सरकारें बन चुकी हैं। इन सरकारों का औसत कार्यकाल करीब 13 महीने रहा है। ऐसे में मेलोनी की तीन दक्षिणपंथी और कंजरवेटिव पार्टियों वाली गठबंधन सरकार का करीब 4 साल तक टिकना बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मेलोनी की पार्टी जश्न मनाएगी मेलोनी ने अपनी सरकार के लंबे कार्यकाल को बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश किया है। उनकी पार्टी शुक्रवार शाम दक्षिणी शहर बारी में रैली करने वाली है। मेलोनी भी इस रैली में भाषण देंगी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि मेलोनी सरकार ने लंबे समय तक सत्ता में रहने को ही अपनी उपलब्धि बना लिया है। मोदी ने मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी दी थी मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली के दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी का पैकेट गिफ्ट किया था। मेलोनी ने बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया और मोदी को गिफ्ट के लिए धन्यवाद दिया था। मोदी और मेलोनी की साथ की तस्वीरों के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi काफी लोकप्रिय हुई थी। खबर अपडेट हो रही है…