हरीश रावत से रुकवाई गई यात्रा

उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के अंदर एक बार फिर गुटबाजी तेज हो गई है। पार्टी को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी फिशिंग कर रही है तो दूसरी ओर नेता आपस में उलझे हैं। ईडी ने पिछले दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ओएसडी रहे और अभी उनके पीए के तौर पर काम कर रहे चंदन जीना के यहां छापा मारा। उनके यहां से एक करोड़ रुपए से ज्यादा की बरामदगी की भी खबर आई। उसके बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। हालांकि ऐसा करने के लिए किसी ने उनको कहा नहीं था। तब माना गया कि वे अब खुद ब खुद नेतृत्व की रेस से हट रहे हैं। लेकिन असल में ऐसा नहीं हुआ।

हरीश रावत ने मुख्यमंत्री पद की रेस से खुद को अलग करने की बजाय ज्यादा गंभीरता से अपनी तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने पूरे प्रदेश में ‘धन्यवाद एवम जनसंवाद यात्रा’ शुरू कर दी। इसके लिए भी उन्होंने किसी से बात नहीं की और न पार्टी आलाकमान की मंजूरी ली। इसके बाद उनकी शिकायत पार्टी नेतृत्व के पास पहुंची और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उनको दिल्ली तलब किया। बताया जा रहा है कि खड़गे ने उनसे कहा कि वे अपनी यात्रा स्थगित करें। उनसे कहा गया है कि पार्टी जल्दी ही सभी नेताओं के साथ बैठक कर चुनाव तैयारियों की समीक्षा करेगी। गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोंदियाल और विधायक दल के नेता यशपाल आर्य की अपनी दावेदारी है। कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि ब्राह्मण और दलित समीकरण पर जाए या ठाकुर को भी उसमें शामिल करे। भाजपा की ओर से पुष्कर सिंह धामी सीएम हैं और सीएम का चेहरा हैं इसलिए ठाकुर वोट टूटने की संभावना कम दिख रही है।

हूती मिसाइल ने रियाद एयरपोर्ट को बनाया निशाना, Air India Express और Akasa Air ने रद्द की उड़ानें

रियाद एयरपोर्ट के आसपास हुए धमाकों के बाद सऊदी अरब की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए Air India Express और Akasa Air ने गुरुवार को रियाद से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दीं। इससे यात्रियों की यात्रा पर भी असर पड़ा है।

उड़ानें रद्द किए जाने के पीछे यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों का एक दावा भी सामने आया है। हूती विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया था।

इस बीच, हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने राजधानी की ओर दागी गई दो मिसाइलों को रोक दिया है। हालांकि, हूती विद्रोहियों की ओर से किए गए इस दावे की तत्काल स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

Air India Express ने रियाद की उड़ानें रोकीं

रियाद में बिगड़ते सुरक्षा हालात के बीच Air India Express ने 10 अक्टूबर तक रियाद से आने-जाने वाली अपनी उड़ानें रद्द कर दी हैं। एयरलाइन ने इसके पीछे क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति को वजह बताया है।

एयरलाइन ने कहा कि उड़ानें रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को मुफ़्त में यात्रा की तारीख बदलने (रीशेड्यूलिंग) या बुकिंग रद्द करने पर पूरा रिफंड पाने का विकल्प दिया जाएगा।

बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब सुरक्षा से जुड़ी ताजा घटना के बाद किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान सेवाओं में फिर से रुकावट आई है।

आकासा एयर ने कोच्चि-रियाद सेवाएं रद्द कीं

आकासा एयर ने 8 अक्टूबर को होने वाली अपनी QP 523 कोच्चि-रियाद और QP 524 रियाद-कोच्चि फ्लाइट्स भी रद्द कर दीं।

एयरलाइन ने कहा कि फ्लाइट रद्द होने से प्रभावित यात्री या तो पूरा रिफंड ले सकते हैं या बिना किसी अतिरिक्त खर्च के अपनी यात्रा का समय बदल सकते हैं।

आकासा एयर ने कहा कि वह स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और आगे किसी भी बदलाव के बारे में यात्रियों को जानकारी देगी। उसने यह भी कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा और भलाई उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

रियाद एयरपोर्ट ने यात्रियों को फ्लाइट का स्टेटस चेक करने की सलाह दी

किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने यात्रियों से कहा है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर लें।

यह सलाह गुरुवार को रियाद में कई धमाकों की आवाज सुनाई देने और एयरपोर्ट के पास एक बड़े धमाके की खबर के बाद जारी की गई। एक चश्मदीद ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि फ्लाइट्स रोक दी गईं और यात्रियों से एयरपोर्ट से बाहर निकलने को कहा गया।

एयरपोर्ट ने ‘X’ पर एक बयान में कहा: “हम यात्रियों को बताना चाहते हैं कि एयरपोर्ट आने से पहले वे सीधे अपनी एयरलाइन से संपर्क करें और अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक कर लें।”

हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइल हमले का दावा किया

हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि उनके ग्रुप ने दोपहर के समय किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाया और दावा किया कि मिसाइल “अपने निशाने पर लगी”।

हालांकि, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसकी सेना ने रियाद की ओर दागी गई दो मिसाइलों को रोक दिया। वहीं, सऊदी अधिकारियों ने तुरंत इस बात की पुष्टि नहीं की कि हूती मिसाइल एयरपोर्ट से टकराई है।

यह ताजा घटना इस हफ्ते सऊदी एयरपोर्ट्स पर हुए हूती हमलों की कड़ी में एक और घटना है। सऊदी अधिकारियों ने बताया कि किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट और आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई और 36 अन्य घायल हो गए।

रियाद एयरपोर्ट पर पहले से ही उड़ानें प्रभावित

ताजा हमले ने किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर पहले से चल रही दिक्कतों को और बढ़ा दिया है। ‘द नेशनल’ के मुताबिक, गुरुवार को दर्जनों उड़ानों पर असर पड़ा। एक समय पर 58 उड़ानें देर से चलीं और 11 उड़ानें रद्द कर दी गईं।

इस स्थिति ने सऊदी एयरस्पेस से गुजरने वाली इंटरनेशनल एयरलाइंस के लिए भी बड़ी चिंताएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि हूती और सऊदी-नेतृत्व वाली सेनाओं के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है।

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सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव : धामी

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि सशक्त पंचायतें विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण से जोड़ना ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण प्रयास है।

श्री धामी कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी तथा सरकार और जनता के बीच सेतु हैं। वे स्थानीय समस्याओं को बेहतर समझते हैं और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों से ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से काम करने और प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं की जानकारी तथा लाभ पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में सशक्त किया जा रहा है। राज्य सरकार भी इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दो अक्टूबर से प्रारंभ जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। योजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं, जनसुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम निर्धारित करे, ताकि विकास कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिले।

उन्होंने कहा कि हर पंचायत की विकास योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी आवश्यकताओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। ग्राम सभाओं में लोगों के सुझाव लिए जाएं और कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा हो। पंचायत प्रतिनिधि यह भी देखें कि योजनाओं का लाभ वास्तव में किन परिवारों तक पहुंच रहा है। कमजोर और वंचित वर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जाए।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण और 584 की मरम्मत की गई है। एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी हो चुका है। उन्होंने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल पंचायत का उद्देश्य कामकाज को पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है। उन्होंने कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और इसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। विकास कार्यों की संख्या से अधिक उनका प्रभाव मायने रखता है। सड़कों की गुणवत्ता, पेयजल योजनाओं की उपयोगिता और पंचायत भवनों से मिलने वाली सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए।

श्री धामी ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों तथा स्थानीय बाजारों की सफाई को कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। विकासखंड स्तर पर भी इस कार्य के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। उन्होंने स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ने और गांवों में नियमित सफाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि वे प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित करें। प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का उपयोग कर पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और विकसित उत्तराखण्ड का संकल्प साकार होगा। पंचायतराज मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय सहित विकास की तमाम योजनाएं पंचायतों के माध्यम से लोगों तक पहुंचती हैं। पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से गांवों में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, विधायक रानीपुर आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, आदेश सैनी, बहादराबाद ब्लॉक प्रमुख आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, विभिन्न ग्राम पंचायत से आये हुए ग्राम प्रधान एवं जनप्रतिनिधि सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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रूस के भीषण मिसाइल हमलों से यूक्रेन में तबाही

यूक्रेन पर हुए ताजा रूसी हमलों में पांच बच्चों सहित 36 लोगों की मौत हो गयी और कई लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। गुरुवार सुबह क्रामाटोर्स्क शहर में एक सामान्य सार्वजनिक बस स्टॉप को निशाना बनाया गया, जिसमें 12 लोगों की जान चली गयी।

इसके अलावा राजधानी कीव में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में दो नागरिकों की मौत हो गयी और दो बच्चों सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। ओडेसा क्षेत्र में ड्रोन हमले से एक पशु आश्रय स्थल क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि ऊर्जा बुनियादी ढांचा एक बार फिर हमलों की ज़द में आया है।

इस हमले से पहले प्रिलुकी शहर में एक पांच मंजिला आवासीय इमारत पर रूस के एक घातक मिसाइल हमले के बाद चलाये जा रहे खोज एवं बचाव अभियान को पूरा कर लिया गया है। इस दर्दनाक हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गयी है, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं। 

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राहत और बचाव कार्य के दौरान 54 लोग घायल हुए हैं, जिनमें सात बच्चे शामिल हैं। आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों ने मुस्तैदी से काम करते हुए मलबे से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिनमें एक पांच साल का बच्चा भी शामिल है।

यूक्रेनी नेतृत्व ने रूसी अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने वाले अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है। यह भी कहा गया कि केवल शाब्दिक समर्थन काफी नहीं है और इसे तत्काल नये सैन्य रक्षा पैकेजों के रूप में जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। एंटी-बैलिस्टिक क्षमताओं की आपूर्ति, लड़ाकू विमानों के लिए गोला-बारूद और इंटरसेप्टर तकनीक में निवेश प्रतिदिन निर्दोष नागरिकों की जान बचाने में सीधे तौर पर मददगार साबित हो रहा है।

अपनी रक्षा प्रणालियों को और अधिक मजबूत करने तथा ठोस परिणाम हासिल करने के उद्देश्य से यूक्रेन अपने वैश्विक साझेदारों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेगा।

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सऊदी एयरपोर्ट पर हूतियों का हमला, 3 की मौत:ड्रोन-मिसाइल हमले में 36 घायल; जवाब में यमन के 80 ठिकानों पर सऊदी की एयरस्ट्राइक

सऊदी अरब के दो एयरपोर्ट्स पर हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। इसमें 3 लोगों की मौत हो गई है। साथ ही 36 लोग घायल हुए हैं। सऊदी अरब की जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) ने बुधवार को यह जानकारी दी। अबहा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को 6 और 7 अक्टूबर को निशाना बनाया गया। हूती विद्रोहियों ने दोनों हमलों की जिम्मेदारी ली है। वहीं, सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यमन में हूतियों के 80 से ज्यादा सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। विदेशी नागरिकों ने हमले में जान गवाईं अबहा एयरपोर्ट पर हमले में मोरक्को और अल्जीरिया की दो महिला नागरिकों की मौत हुई। साथ ही यहां 28 लोग घायल हुए, जिनमें सऊदी, बांग्लादेशी और फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं। वहीं, किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक सूडानी नागरिक की मौत हुई। यहां 8 लोग घायल हुए, जिनमें 5 सऊदी नागरिक, 2 मिस्र के निवासी और एक पाकिस्तानी निवासी शामिल हैं। GACA ने बताया कि सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। साथ ही अधिकारी सुविधाओं की सुरक्षा की जांच कर रहे हैं और यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। हूतियों ने अरामको रिफाइनरी पर हमले का भी दावा किया इससे पहले हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने सऊदी अरब में कई जगहों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने की जिम्मेदारी ली थी। इसमें रबीघ में स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अरामको पर हमला भी शामिल है। सरी ने टेलीग्राम पर जारी बयान में कहा कि संगठन ने बड़ी संख्या में बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ ड्रोन का इस्तेमाल करते हुए तीन बड़े सैन्य अभियान चलाए। सरी ने दावा किया कि ये हमले यमन पर सऊदी अरब के हमलों के जवाब में किए गए। उनके मुताबिक, इससे पहले के 24 घंटों में सऊदी अरब ने यमन पर 60 हवाई और मिसाइल हमले किए थे। सऊदी ने यमन में मिसाइल लॉन्च करने वाला ठिकाना नष्ट किया इस बीच, यमन में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने दावा किया कि उसने रियाद पर हमले के लिए इस्तेमाल किए गए एक बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च प्लेटफॉर्म को नष्ट कर दिया है। गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मालिकी ने कहा कि यह कार्रवाई यमन की राजधानी सना में की गई। उनके मुताबिक, वहां सऊदी अरब पर एक और हमले की तैयारी चल रही थी और हमला जल्द किया जा सकता था।

प्राथमिकता का प्रश्न है

हालिया अनुभवों है कि ओलिंपिक आयोजन मेजबान देश में जितना उल्लास एवं गर्व का भाव भरते हैं, उससे कहीं अधिक ये विवादों से घिरते रहे हैं। ओलिंपिक्स अपने पीछे अक्सर कई गंभीर समस्याएं छोड़ जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (आईओसी) ने पुष्टि कर दी है कि भारत 2036 के ओलिंपिक खेलों की मेजबानी के लिए दावा पेश करने वाले देशों में शामिल है। इसके अलावा कतर, दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी, हंगरी, तुर्किये और दक्षिण कोरिया ने भी अपना दावा रखा है। इनमें आईओसी किन्हें सक्षम दावेदार मानती है, उसकी सूची वह मार्च 2027 में जारी करेगी। फिर उस सूची में शामिल देशों के साथ उसकी वार्ता होगी। आईओसी के मुताबिक फैसला धन जुटाने की क्षमता और खेल के लिए मौजूद राजनीतिक एवं जन समर्थन की कसौटी पर होगा। 2028 के मध्य में आईओसी 2036 के मेजबान की अपनी प्राथमिकता सूची जारी करेगी। 2029 के मध्य तक अंतिम निर्णय का एलान किया जाएगा।

भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य के प्रमुख शहर अहमदाबाद में ओलिंपिक्स आयोजन का इरादा जताया है। नीता अंबानी भारत के दावेदारी अभियान का नेतृत्व कर रही हैं। इसलिए राजनीतिक समर्थन और फंडिंग क्षमता को लेकर शायद ही कोई संदेह उठे। जन समर्थन का मुद्दा पेचीदा है, जिस पर अभी कुछ कहना ठीक नहीं होगा। हालिया अनुभवों पर गौर करें, तो ओलिंपिक आयोजन अब मेजबान देश में जितना उत्सव एवं गर्व का भाव भरते हैं, उससे कहीं अधिक ये विवादों से घिरते रहे हैं। इसकी बड़ी वजह है कि मेजबानी अपने पीछे अक्सर शहर और देश पर भारी आर्थिक बोझ, कर्ज संकट, और रखरखाव के लिए बेकार पड़े महंगे स्टेडियम (सफेद हाथी) जैसी गंभीर समस्याएं छोड़ जाती है।

2004 में ग्रीस और 2026 में ब्राजील में इस आयोजन के कारण नागरिक सेवाओं के बजट में कटौती करनी पड़ी थी। 2020 में टोक्यो ओलिंपिक के आयोजन का कुल खर्च शुरुआती बजट से दोगुने से भी ज्यादा हो गया। उससे सबक लेकर 2024 में पेरिस में मौजूदा और अस्थायी इन्फ्रास्ट्रक्चर के उपयोग की रणनीति अपनाई गई। फिर भी खर्च अनुमानित बजट से कई अरब यूरो ऊपर चला गया। निर्माण कार्यों के लिए गरीबों का होने वाला विस्थापन हर जगह एक अलग समस्या रही है। जब धनी देशों की भी यही कहानी है, तो सवाल है कि क्या भारत जैसे विकासशील देश को ऐसे आयोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए?

‘जनसेवा से राष्ट्रसेवा’ तक PM मोदी के 25 साल, वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा का भव्य समापन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा और समर्पण के 25 साल पूरे होने के मौके पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत निकाली गई ‘वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा’ का बुधवार को वडनगर में समापन हुआ। इस अवसर पर वडनगर में गौरवपूर्ण समापन समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी मौजूद रहे। इस दौरान अलग-अलग राज्यों से पहुंचे बाइकर्स और सेवा यात्रियों का स्वागत किया गया और उन्हें सम्मानित भी किया गया।

सीएम ने क्या कहा

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने ‘वाराणसी से वडनगर सेवा यात्रा’ के समापन अवसर पर कहा कि, “7 अक्टूबर, 2001 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सेवा दायित्व संभाला था। आज प्रधानमंत्री ने लगातार 25 वर्षों तक जनसेवा और सुशासन का दायित्व निभाकर देश में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले जननायक बनने का गौरव हासिल किया है। ” सीएम ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री ने सत्ता को पद के बजाय सेवा का माध्यम माना और गरीबों, मध्यम वर्ग, किसानों, महिलाओं और युवाओं के विकास पर जोर दिया।”

भारत की ताकत दुनिया के सामने मजबूत

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आगे कहा कि, “गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात समिट, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, बुलेट ट्रेन, GIFT City और सेमीकंडक्टर हब जैसे बड़े प्रोजेक्ट मोदी के विकास के विजन को दिखाते हैं। पीएम मोदी के नागरिक-केंद्रित शासन के चलते देश में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं और भारत दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है।” उन्होंने कहा कि, “कोरोना के दौरान वैक्सीन की मदद, ग्रीन एनर्जी के लक्ष्यों, अनुच्छेद 370 हटाने, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और अंतरिक्ष व रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जैसे कदमों से भारत की ताकत दुनिया के सामने मजबूत हुई है। पटेल ने प्रधानमंत्री को जनसेवा के 25 साल पूरे होने पर बधाई दी और कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को पूरा करने में गुजरात की युवा शक्ति अहम भूमिका निभाएगी।”

देश की सेवा में एक भी दिन नहीं किया आराम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 अक्टूबर को ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इसी दिन 2001 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जनसेवा की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि, “पीएम मोदी ने पिछले 25 वर्षों में बिना एक भी दिन आराम किए देश के विकास और गरीबों के कल्याण के लिए काम किया।” चौहान ने कोरोना संकट और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व की भी सराहना की।” उन्होंने कहा कि, “नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है और विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वाराणसी से वडनगर तक बाइक रैली के जरिए पहुंचे युवाओं की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि देश के युवाओं में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना होनी चाहिए और उन्हें विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए।”

मद् भगवद् गीता के श्लोकों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि गीता में बताए गए ‘सात्विक कर्ता’ के सभी गुण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में दिखाई देते हैं। वे राग-द्वेष और अहंकार से परे रहकर धैर्य के प्रतीक बन गए हैं।

पश्चिम बंगाल के सीएम ने क्या कहा

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने वडनगर पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि को नमन करते हुए कहा कि, इस धरती ने देश को एक दूरदर्शी नेता दिया है। उन्होंने कहा कि, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘राष्ट्र प्रथम’ और गरीब कल्याण को ध्यान में रखते हुए देश में विकास और सुशासन को बढ़ावा मिला। अधिकारी के मुताबिक, किसान कल्याण, ग्रामीण विकास, सड़क और रेलवे के विस्तार, पीएम आवास योजना, पीएम किसान सम्मान निधि और उड़ान योजना जैसी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए देशभर के लोग एकजुट होकर आगे बढ़ रहे हैं। अधिकारी ने वाराणसी से वडनगर तक निकाली गई सेवा यात्रा को देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने वाला प्रयास बताया।

सेवा यात्रा के समापन कार्यक्रम में गुजरात बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और निकोल विधायक जगदीश विश्वकर्मा ने देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे बाइकर्स और युवाओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि, “7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी और अब उनकी जनसेवा के 25 साल पूरे हो गए हैं। इस यात्रा के दौरान युवाओं को सरकार की अलग-अलग योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे बातचीत करने का मौका मिला।” विश्वकर्मा ने कहा कि, “मोदी का 25 साल का सार्वजनिक जीवन ‘जनसेवा और राष्ट्रसेवा’ के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उनके नेतृत्व में देश के विकास, सुशासन और आर्थिक मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण काम हुए हैं, जिससे भारत की वैश्विक पहचान भी मजबूत हुई है।

पीएम मोदी के 25 साल के जनसेवा का सफर

‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 साल के जनसेवा के सफर को लोगों तक पहुंचाने के लिए वाराणसी से वडनगर तक सेवा यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में 500 बाइकर्स और कई युवा शामिल हुए, जिन्होंने 10 राज्यों के गांवों और शहरों में पहुंचकर सफाई अभियान, पौधारोपण, नशामुक्ति और लोगों से संवाद जैसे सामाजिक काम किए। अभियान से बड़ी संख्या में लोग जुड़े और पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ऑनलाइन युवाओं का उत्साह बढ़ाया। यात्रा के दौरान वडनगर के शर्मिष्ठा तालाब का जल काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचाया गया, जबकि वाराणसी से लाए गए पवित्र जल से वडनगर के हाटकेश्वर महादेव मंदिर में अभिषेक किया गया। इस पहल के जरिए वाराणसी और वडनगर के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी दर्शाया गया।

कौन-कौन था मौजूद

सेवा यात्रा के समापन समारोह में राज्य सरकार के मंत्री सर्व ऋषिकेशभाई पटेल, कौशिकभाई वेकरिया, प्रवीणभाई माली, कमलेशभाई पटेल, गुजरात प्रदेश प्रभारी तरुण चुग, सांसद सर्व हरिभाई पटेल, मयंक नायक, राजेंद्रभाई शुक्ल, मध्य प्रदेश के सांसद वी.डी. शर्मा, मेहसाणा जिला पंचायत अध्यक्ष नितिनभाई पटेल, विधायक सर्व किरीटभाई पटेल, मुकेशभाई पटेल, सरदारभाई चौधरी, सुखाजी ठाकोर, राजेश चावड़ा, पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिनभाई पटेल, मेहसाणा दूध सागर डेयरी के चेयरमैन अशोकभाई चौधरी, मेहसाणा डिस्ट्रिक्ट बैंक के चेयरमैन विनोदभाई पटेल, वडनगर नगर पालिका अध्यक्ष, सेवा संकल्प अभियान गुजरात प्रदेश प्रभारी और पूर्व मंत्री ब्रिजेश मेरजा, भाजपा प्रदेश महामंत्री प्रशांतभाई कोराट, उपाध्यक्ष नटुजी ठाकोर, अग्रणी भरतभाई पंड्या, सीताबेन पटेल, गिरीशभाई राजगोर, मेहसाणा जिला प्रभारी भरतभाई डांगर सहित बाइकर्स, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

Mithun Chakraborty अब पश्चिम बंगाल की शुभेंदू सरकार में सलाहकार का रोल निभाएंगे, मिलेगा कैबिनेट मंत्री का दर्जा

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कई बड़े फैसले लिए हैं। ऐसे ही एक अहम फैसले के बारे में उन्होंने उत्तम कुमार शताब्दि समारोह में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जाने-माने फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को राज्य सरकार का सलाहकार नियुक्त किया गया है। वह पश्चिम बंगाल के सांस्कृतिक मामलों के मंत्रालय में अपनी सेवाएं देंगे। इस पद के तहत उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त होगा। बता दें, सांस्कृतिक मंत्रालय सुवेंदु अधिकारी के पास है।

यह कार्यकारी आदेश तुरंत लागू होगा और अगली सूचना तक वैध रहेगा। पश्चिम बंगाल में इस साल हुए विधान सभा चुनाव के बाद सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार ने सत्ता संभाली है। अब राज्य में सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और फिल्म इंडस्ट्री को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। सरकार का मकसद बंगाल की समृद्ध फिल्म विरासत को बढ़ावा देना और राज्य को एक बड़े सांस्कृतिक व सिनेमाई केंद्र के तौर पर स्थापित करना है। इसी कड़ी में अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को सरकार में एक अहम जिम्मेदारी दी गई है।

चक्रवर्ती की नियुक्ति का आदेश हो चुका है जारी

इस रणनीतिक नियुक्ति को कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग ने (IAS सेल) ने 6 अक्टूबर, 2026 को औपचारिक तौर पर नोटिफाई किया था। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, यह नोटिफिकेशन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के आदेश से, काबिल अथॉरिटी से साफ अप्रूवल के बाद जारी किया गया था। प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया कि यह रणनीतिक फैसला पूरी तरह से “आम जनता के हित में” लागू किया गया था, जो सांस्कृति नीति और क्षेत्रीय मनोरंजन पहल को स्ट्रीमलाइन करने के लिए राज्य की बढ़ी हुई कोशिश को दिखाता है।

फिल्म इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में कोलकाता के न्यू टाउन में उत्तम कुमार फिल्म सेंटर की आधारशिला रखी। इसका उद्देश्य फिल्म निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। सरकार ने अत्याधुनिक थिएटर कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना भी सामने रखी है। मुख्यमंत्री ने बंगाल के सांस्कृतिक माहौल को मजबूत करने और फिल्म उद्योग को ज्यादा सहयोग देने की जरूरत पर जोर दिया है। ऐसे में मिथुन चक्रवर्ती की नियुक्ति को सरकार की व्यापक सांस्कृतिक योजना से जोड़कर देखा जा रहा है।

मृणाल सेन की फिल्म से 1976 में किया था डेब्यू

बड़े पैमाने पर ‘बंगाल के गौरव’ के तौर पर मशहूर, मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के एक ऐसे दिग्गज हैं जिन्होंने दशकों तक राष्ट्रीय मंच पर पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक बिरादरी को दिखाया है। उन्होंने मृणाल सेन की मशहूर 1976 की आर्ट-हाउस ड्रामा ‘मृगया’ से एक्टिंग में डेब्यू किया, और अपनी पहली ही सिनेमाई परफॉर्मेंस के लिए बेस्ट एक्टर का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। इस सफलता के बाद, चक्रवर्ती हिंदी और बंगाली दोनों सिनेमा में स्टार बन गए, और खुद को देश के सबसे मशहूर जन-आंदोलनों में से एक और हमेशा रहने वाले सांस्कृतिक राजदूत के रूप में स्थापित किया।

कब मनाया जाएगा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें कब हुई इसकी शुरुआत और क्‍या है उद्देश्‍य?

कब मनाया जाएगा विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस? जानें कब हुई इसकी शुरुआत और क्‍या है उद्देश्‍य?

Why is World Mental Health Day observed, When did it begin and what is its objective

World Mental Health Day 2026: मनुष्य की शारीरिक सेहत की भांति ही उसका मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) भी संपूर्ण जीवन का एक महत्वपूर्ण आधार है। इसी विचार को ध्येय बनाकर प्रति वर्ष 10 अक्टूबर को अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नेतृत्व में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाने और मानसिक देखभाल को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाता है। कब हुई विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत और क्‍या है इस दिवस को मनाने का उद्देश्‍य? आइए जानते हैं विस्‍तार से…

 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का इतिहास

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने की शुरुआत वर्ष 1992 में हुई थी। दरअसल उस समय के संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव यूजीन ब्रॉडी ने दुनियाभर में इस दिवस को मनाए जाने की सलाह दी थी और स्वास्थ्य संघ की पहल पर ही पहली बार इस दिवस को मनाया गया था। तब से ही यह दिवस अब दुनियाभर में मनाया जाने लगा। 

 

इस अंतरराष्‍ट्रीय अभियान का नेतृत्व विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ‘वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ’ (WFMH) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है। यह केवल एक औपचारिक दिन नहीं, बल्कि 100 से अधिक देशों में चलाया जाने वाला एक व्यापक जनजागरूकता अभियान है।

 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्‍य

वर्तमान समय में भागदौड़ वाली जिंदगी में तनावरहित जीना बहुत ही मुश्किल हो गया है। हर साल विश्वभर में 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस या मानसिक दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य मेंटल हेल्थ या मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। 

 

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाने का उद्देश्‍य जनसामान्य को यह समझाना कि मन की बीमारियां और तनाव भी शरीर की अन्य बीमारियों की तरह स्वाभाविक हैं। साथ ही इस दिवस के जरिए समाज के हर वर्ग तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और परामर्श की पहुंच सुनिश्चित करना है।

 

पीड़ित व्यक्तियों को सही समय पर अपनों का संबल और चिकित्सीय सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करना। मानसिक रोग से पीड़ित लोगों को प्रायः समाज की उपेक्षा या पूर्वाग्रहों का सामना करना पड़ता है। यह दिवस इस झिझक और रुढ़िवादिता को तोड़कर खुलकर बात करने का मंच प्रदान करता है।

 

समय पर लक्षणों की पहचान कर डिप्रेशन, एंग्जायटी (चिंता) और अत्यधिक तनाव जैसी समस्याओं को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि यदि हम स्वयं या हमारे आसपास कोई व्यक्ति मानसिक दबाव से गुजर रहा है, तो सहायता मांगना कमजोरी नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता और साहस का लक्षण है।

 

मानसिक बीमारियों से बचाव के लिए क्या करें?

व्यस्तता भरे दिनचर्या से खुद के लिए समय निकालें।

पोषक तत्व वाले भोजन को जीवन का हिस्सा बनाएं।

प्रोफेशनल डॉक्टर का सहारा लें।

नकारात्मक लोगों से दूरी रखें।

तनाव को नियंत्रित करें।

मेडिटेशन को अपनाएं।

योग का सहारा लें।

हमेशा खुश रहें।

अकेले न रहें।

इजराइल में 20 दिन बाद वोटिंग, नेतन्याहू हार सकते हैं:हमास हमले ने बदली देश की राजनीति; वामपंथ कमजोर, अरब पार्टियां अछूत बनीं

7 अक्टूबर 2023 को हमास के करीब 6 हजार लड़ाकों ने इजराइल पर हमला किया। लोगों को घरों और बंकरों में मारा गया, कई लोगों को जिंदा जला दिया गया और 250 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले जाया गया। करीब 1,200 लोग मारे गए। इसके जवाब में इजराइल ने गाजा पर हमला शुरू कर दिया। तीन साल बाद भी 7 अक्टूबर का असर सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं है। इस हमले ने इजराइल की राजनीति का एजेंडा भी बदल दिया। इजराइल में 27 अक्टूबर को आम चुनाव होने हैं। पहले महंगाई, घरों की कीमत और नेतन्याहू के खिलाफ मुकदमे जैसे मुद्दे चुनावी बहस में प्रमुख थे। अब सुरक्षा, हमास, सेना और फिलिस्तीन का सवाल सबसे ऊपर है। इसका फायदा पहले से मजबूत दक्षिणपंथी राजनीति को मिला है। हालांकि पीएम नेतन्याहू के हारनेका खतरा मंडरा रहा है। वहीं लेफ्ट कमजोर हुआ है और अरब पार्टियों के लिए सरकार बनाने में पहले जैसी किंगमेकर भूमिका निभाना मुश्किल हो गया है। गाजा जंग के बाद देश में पहला चुनाव, हमास हमले के बाद यह देश का पहला राष्ट्रीय चुनाव है। इस चुनाव में सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नेतन्याहू फिर प्रधानमंत्री बनेंगे या नहीं। तीन साल पहले जिस हमले ने इजराइल की राजनीति बदल दी थी, अब उसी हमले के लिए नेतन्याहू की सरकार से जवाब भी मांगा जा रहा है। हमले के समय नेतन्याहू ही प्रधानमंत्री थे और उन पर सुरक्षा चूक की जिम्मेदारी लेने का दबाव है। उनकी मुश्किल यह है कि इस बार उन्हें पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजेनकोट से सीधी चुनौती मिल रही है। आइजेनकोट की पार्टी कई हालिया सर्वे में नेतन्याहू की लिकुड के बराबर या उससे आगे दिखाई दे रही है। एक ताजा सर्वे में लिकुड को करीब 22-23 और आइजेनकोट की पार्टी को करीब 22 सीटें मिल रही हैं। दूसरी तरफ नेतन्याहू के साथ मौजूद दक्षिणपंथी दलों का पूरा गठबंधन भी बहुमत से पीछे है। हालिया सर्वे के औसत में उनके गठबंधन को करीब 52-55 सीटें मिल रही हैं, जबकि सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। दक्षिणपंथ पहले से मजबूत था, 7 अक्टूबर के बाद और मजबूत हुआ इजराइल में दक्षिणपंथ 7 अक्टूबर से पहले ही मजबूत था। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और धार्मिक-राष्ट्रवादी दल पहले से सरकार में थे। लेकिन हमास के हमले के बाद सुरक्षा का मुद्दा सबसे बड़ा हो गया। दक्षिणपंथी नेता लगातार कहने लगे कि इजराइल को हमास और फिलिस्तीनियों के खिलाफ सख्त रुख रखना चाहिए। इतमार बेन-ग्विर और बेजेलेल स्मोट्रिच जैसे नेताओं को इसी मुद्दे पर अपनी बात रखने की ज्यादा जगह मिली। फिलिस्तीनी राज्य का विरोध, वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों का समर्थन और फिलिस्तीनियों के खिलाफ सख्त नीति जैसे मुद्दे अब इजराइली राजनीति में ज्यादा खुलकर उठाए जाने लगे। लेफ्ट पहले शांति की बात करता था, अब सुरक्षा-आतंकवाद की 3 साल पहले इजराइल की लेफ्ट राजनीति में लेबर पार्टी और मेरेत्ज सबसे प्रमुख नाम थे। दोनों पार्टियां फिलिस्तीन को मान्यता देने और शांति की बात करती थीं। मेरेत्ज तो वेस्ट बैंक के कब्जे वाले इलाकों से इजराइल की वापसी की भी वकालत करती थी। लेकिन 7 अक्टूबर के हमले के बाद यह राजनीति मुश्किल में आ गई। हमास के हमले ने इजराइली समाज में सुरक्षा और आतंकवाद का मुद्दा सबसे ऊपर ला दिया। इसी बदलाव के बीच लेबर और मेरेत्ज ने 2024 में मिलकर ‘द डेमोक्रेट्स’ पार्टी बनाई। इसका नेतृत्व पूर्व सैन्य अधिकारी याइर गोलान कर रहे हैं। वामपंथी पार्टी अब भी फिलिस्तीनियों के साथ राजनीतिक समाधान और वेस्ट बैंक के विलय को रोकने की बात करती है, लेकिन साथ ही हमास के शासन को खत्म करने और इजराइल की सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर देती है। यही इजराइली राजनीति में आया सबसे बड़ा बदलाव है। सुरक्षा का मुद्दा सिर्फ दक्षिणपंथ की पहचान नहीं रहा; नेतन्याहू का विरोध करने वाली पार्टियां भी अब इसी सवाल का जवाब दिए बिना चुनाव नहीं लड़ सकतीं। अरब पार्टी पहले किंगमेकर हुआ करती थीं, अब अछूत बनीं इजराइल की राजनीति में अरब पार्टियों की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण 2021 में देखने को मिला। उस चुनाव में किसी भी खेमे को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें नहीं मिलीं। नेतन्याहू सबसे बड़े नेता जरूर रहे, लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाए। इसके बाद उनके विरोध में खड़े अलग-अलग दलों ने हाथ मिला लिया। दक्षिणपंथी नेता नफ्ताली बेनेट और सेंटर के नेता याइर लैपिड ने गठबंधन बनाया। इसमें वामपंथी और दक्षिणपंथी दलों के साथ मंसूर अब्बास की अरब पार्टी राअम भी शामिल हुई। राअम की 4 सीटों के समर्थन से सरकार बनी। इस तरह करीब 12 साल से प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू सत्ता से बाहर हो गए। इजराइल में पहली बार कोई अरब पार्टी सरकार बनाने वाले गठबंधन का हिस्सा बनी। 2026 में तस्वीर अलग है। मौजूदा सर्वेक्षणों में अरब पार्टियों को करीब 13 सीटें मिलती दिख रही हैं। अरब पार्टी को सरकार में शामिल करना राजनीतिक रूप से कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। ऐसा करने पर पार्टी को यहूदी वोटर्स के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। यानी 2021 में अरब पार्टियां नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने की ‘किंगमेकर’ बनी थीं। 2026 में उनके पास फिर सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें हो सकती हैं, लेकिन 7 अक्टूबर के बाद बदले राजनीतिक माहौल में उन्हें साथ लेना कहीं ज्यादा मुश्किल हो गया है। —————————– यह खबर भी पढ़ें… ममदानी की जीत से बदली यूरोप की राजनीति:वामपंथी पार्टियों ने सस्ते घर और कम किराए को मुद्दा बनाया; जर्मनी में जीत मिली जोहरान ममदानी ने पिछले साल नवंबर में न्यूयॉर्क मेयर का चुनाव जीता था। उनका मैसेज था कि न्यूयॉर्क को आम लोगों के लिए सस्ता बनाया जाए। पूरी खबर यहां पढ़ें…