Manika Plastech IPO को 29 गुना बोली, अब लिस्टिंग पर मिलेगा शॉक या होगा मुनाफा, ग्रे मार्केट से ये हैं संकेत

Manika Plastech Listing: आईपीओ को 29 गुना से अधिक रिस्पांस के बाद अब कंपनियों के लिए प्लास्टिक कवर बनाने और ऑटो पार्ट्स को पेंट करने वाली मणिका प्लास्टेक के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹2 यानी 4.65% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 4% से अधिक लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹43 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार केफिनटेक की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Manika Plastech चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट कंपनी पर क्लिक करके Manika Plastech चुनें।

पैन, एप्लीकेशन नंबर, डीपी/क्लाइंट आईडी, अकाउंट नंबर/IFSC में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

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शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Manika Plastech IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

मणिका प्लास्टेक का ₹125 करोड़ का आईपीओ 11-16 सितंबर तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 29.46 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 11.22 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 66.58 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 23.98 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹92 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले ₹33 करोड़ के 76,74,418 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹54.93 करोड़ प्लांट और मशीनरी की खरीदारी, ₹15.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹14.72 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹11.71 करोड़ अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Manika Plastech के बारे में

मणिका प्लास्टेक प्लास्टिक की ऐसी मजबूत चीजें बनाती हैं, जिसमें दूसरी कंपनियां अपने सामान पैक करती हैं या उसमें भरती हैं। इसके मुख्य प्रोडक्ट्स की बात करें तो यह इनवर्टर और ऑटोमोटिव बैट्रीज के लिए बैट्री कास्टिंग्स; पेंट, लुब्रिकेंट और केमिकल्स रखने के लिए पेल्स यानी बड़े प्लास्टिक डिब्बे; और फूड और डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए थिनवाल कंटेनर्स बनाती है। यह जापान और जर्मनी के तकनीकी मानकों को भी ध्यान में रखकर प्रोडक्ट्स तैयार करती है। इन सबके अलावा यह ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स को पेंट करने का भी काम करती है। इसके 7 ऑपरेटिंग फैसिलिटीज हैं, जिसमें से 6 मैन्युफैक्चरिंग और 1 पेंटिंग फैसिलिटी है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 39% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹22.40 करोड़ और टोटल इनकम करीब करीब 9% के सीएजीआर से ₹437.26 करोड़ पर पहुंच गया। चालू वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही अप्रैल-जून 2026 में कंपनी को ₹13.07 करोड़ का शुद्ध मुनाफा और ₹162.71 करोड़ का टोटल इनकम हासिल हुआ था। जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹92.46 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹136.97 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Elevate Campuses IPO: ₹2100 करोड़ का इश्यू 23 सितंबर से, ₹343-₹362 है प्राइस बैंड; ग्रे मार्केट में चढ़ने लगा शेयर

एलिवेट कैंपसेस का ₹2,100 करोड़ का IPO 23 सितंबर से खुलने वाला है। इसमें 5.80 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। ऑफर फॉर सेल नहीं होगा। प्राइस बैंड ₹343-₹362 प्रति शेयर है। लॉट साइज 41 शेयर है। इश्यू की क्लोजिंग 25 सितंबर को होने वाली है। इसके बाद अलॉटमेंट 28 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 30 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। एंकर निवेशक 22 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। कंपनी में हिल हाउस कैपिटल का भी पैसा लगा हुआ है।

IPO के लिए जेएम फाइनेंशियल, IIFL कैपिटल सर्विसेज और मॉर्गन स्टेनली इंडिया, बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार केफिन टेक्नोलोजीस है। पब्लिक इश्यू में 75 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

क्या करती है Elevate Campuses

एलिवेट कैंपसेस लिमिटेड एक एजुकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी है। यह हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स (HEIs) के कैंपस में छात्रों के लिए हॉस्टल और रहने की सुविधाएं उपलब्ध कराती है। कंपनी इन आवासीय सुविधाओं की मालिक होने के साथ-साथ उनका संचालन और प्रबंधन भी करती है। इसके अलावा, कंपनी K-12 स्कूलों की संपत्तियों का भी मालिकाना हक रखती है। कंपनी अपने स्टूडेंट अकोमोडेशन बिजनेस को ‘Good Host Spaces’ और ‘ScholarZ’ ब्रांड्स के तहत चलाती है।

31 मार्च, 2026 तक, कंपनी के प्री-एक्वीजीशन ग्रुप की स्टूडेंट अकोमोडेशन क्षमता भारत के 15 शहरों और यूनाइटेड अरब अमीरात के एक शहर में कुल 80,255 स्टूडेंट्स की थी। कंपनी जो ऑपरेशनल सर्विसेज देती है उनमें डील सोर्सिंग, साइट चुनना, डेवलपमेंट, एसेट खरीदना, एसेट को नए सिरे से तैयार करना (रीपोज़िशनिंग) और कम्युनिटी एंगेजमेंट शामिल हैं। यह कम्युनिटी और कैंपस टेक्नोलॉजी सर्विसेज भी देती है, जिसमें HEIs और कम्युनिटी इवेंट्स की मीडिया कवरेज शामिल है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 53 प्रतिशत बढ़कर ₹603.39 करोड़ रहा। शुद्ध मुनाफा 249 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹173.76 करोड़ दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर ₹4,120.53 करोड़ की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 में एलिवेट कैंपसेस का रेवेन्यू ₹394.13 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹49.74 करोड़ रहा।

कंपनी अपने IPO से होने वाली कमाई का इस्तेमाल K-12 एंटिटीज और कैंपसेस की खरीद के पेमेंट के लिए, अपना व सब्सिडियरीज का कर्ज और पेनल्टी चुकाने के लिए, पहले से न पता अधिग्रहणों व अन्य पहलों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ की फंडिंग के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में एलिवेट कैंपसेस का शेयर 4.14 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

टीएमसी प्रत्याशी को चुनाव से हटाया, कांग्रेस उम्मीदवार को गिरफ्तार किया

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की अपनी पारंपरिक नंदीग्राम सीट के उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी चिंता में हैं। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख बीतने के बाद शुक्रवार को शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे से मुलाकात की और उसके बाद वे चुनाव मैदान से हट गईं। इसके बाद ममता ने कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया और उसके चंद मिनटों के बाद ही मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसे लेकर प्रदेश में घमासान मचा है। कांग्रेस कह रही है कि हार के डर से सरकार ऐसा कर रही है।

गौरतलब है कि नंदीग्राम शुभेंदु अधिकारी का गढ़ है। उन्होंने 2021 के चुनाव में वहां ममता बनर्जी को हराया था और 2026 में ममता की पार्टी के पबित्र कार को हराया। इसके बावजूद 2026 का उपचुनाव बड़े संग्राम में तब्दील हो रहा है। ध्यान रहे 2021 में शुभेंदु सिर्फ 19 सौ वोट से जीते थे और 2026 में 10 हजार वोट से। चार मई को आए नतीजे में ममता की पार्टी को एक लाख 17 हजार वोट मिले थे। भाजपा और तृणमूल के वोट में चार फीसदी का अंतर था।

शुभेंदु अधिकारी के लिए नंदीग्राम सीट प्रतिष्ठा का मामला है। उनको पता है कि रेजीनगर उपचुनाव में जीतना मुश्किल है क्योंकि वहां मुस्लिम आबादी 50 फीसदी से ज्यादा है। इसलिए उनको नंदीग्राम सीट पर हाल में जीतना है। तभी नामांकन की तारीख बीतने के बाद ममता की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे से सीएम मिले और उसके बाद वे मैदान से हटीं। उसके बाद ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया तो पुलिस ने उनको हत्या के एक पुराने मामले में गिरफ्तार कर लिया।

नंदीग्राम सीट पर छह अक्टूबर को मतदान होना है। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया समाप्त हो गई है और शनिवार को नाम वापस लेने का आखिरी दिन है। उससे पहले ममता की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया है। इसके बाद ममता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे नंदीग्राम सीट से कांग्रेस कैंडिडेट को समर्थन देंगी। ममता ने रेजीनगर सीट से पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को उतारा है। वे मैदान में बने रहेंगे। ममता ने 13 सितंबर को दोनों उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी।

ध्यान रहे नंदीग्राम में 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उस समय शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में ही थे और ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी थे। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने शुभेंदु अधिकारी के पीए रहे चंद्रनाथ रथ की मां को प्रत्याशी बनाया है। गौरतलब है कि चुनाव नतीजे आने के दो दिन बाद चंद्रनाथ रथ की कोलकाता में ही गोली मार कर हत्या कर दी गई थी।

फरीदाबाद के पास नया शहर बसाने की तैयारी में HSVP, 10 लाख लोगों के रहने का तैयार हो रहा मास्टर प्लान

हरियाणा सरकार ने ‘नमो सिटी’ को विकसित करने का काम शुरू कर दिया है। यह एक ‘ग्रीनफील्ड’ शहर होगा, जिसे कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे और जल्द बनने वाले दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के आस-पास बसाने की योजना है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) ने लगभग 9000 एकड़ की इस परियोजना के लिए झज्जर, सोनीपत और रोहतक जिलों के गांवों की पहचान की है। प्राधिकरण ने वहां के किसानों से कहा है कि वे 31 अक्टूबर तक ‘ई-भूमि’ पोर्टल पर अपनी सहमति दें।

नमो सिटी क्या है?

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सबसे पहले इस साल जून के आखिर में नमो सिटी का विचार पेश किया था। तब वे दिल्ली के व्यापार प्रतिनिधियों से मिले थे और राजधानी के भीड़-भाड़ वाले बाजारों से थोक व्यापारियों को बाहर लाने के लिए 5,000 एकड़ की कमर्शियल टाउनशिप का प्रस्ताव रखा था।

सैनी का था ये प्रस्ताव

प्रस्ताव में एक ऐसा शहर जिसमें चौड़ी सड़कें, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंगल-विंडो और समय-सीमा के भीतर मंजूरी की व्यवस्था हो। निवेश व रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन भी मिलें। हरियाणा सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी की जानकारी के मुताबिक नमो सिटी का कॉन्सेप्ट KMP बेल्ट के लिए पहले से मौजूद बड़े विचार का ही एक हिस्सा है।

साल 2018 में हरियाणा कैबिनेट ने ‘पंचग्राम विकास विधेयक’ को मंजूरी दी थी। इसमें 50,000 हेक्टेयर में पांच नए शहर बसाने की योजना थी, जो आठ जिलों – सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, रेवाड़ी, मेवात (नूंह), फरीदाबाद और पलवल – में एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित होंगे।

इसके अलावा नेशनल कैपिटल रीजन प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) ने 16 जून को ‘नमो भारत रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम’ (RRTS) कॉरिडोर के किनारे आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल शहरी केंद्र के तौर पर ‘नमो सिटी’ बसाने पर चर्चा की थी। यह उसी ब्रांडिंग से जुड़ा, लेकिन एक अलग हिस्सा है।

असल में नमो सिटी ब्रांडिंग का विचार भी उसी बैठक के एक फैसले से आया है। उस बैठक में बोर्ड ने नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर के मौजूदा और आने वाले चुनिंदा स्टेशनों पर चार ‘सेमी-ग्रीनफील्ड’ शहरों को ‘मिक्स्ड-यूज’ और ‘ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट’ (यातायात-केंद्रित विकास) के तौर पर विकसित करने का प्रस्ताव दिया था। इनका नाम ‘नमो सिटी’ रखा जाएगा और इन्हें नेशनल कैपिटल रीजन में शामिल राज्यों के बीच एक कॉम्पिटिटिव प्रोसेस के जरिए चुना जाएगा।

इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए बोर्ड ने ₹5,000 करोड़ के परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव को मंज़ूरी दी। इसमें ग्रांट, लोन और गारंटी सपोर्ट का मिला-जुला रूप शामिल है, जिसमें ₹1,000 करोड़ की ग्रांट भी है। NCRPB की फंडिंग का मकसद इन नोड्स पर विकास को तेजी देना है।

अधिकारी ने बताया कि हरियाणा का KMP-लिंक्ड नमो सिटी दो चीजों से प्रेरित है

जून में व्यापारियों को दूसरी जगह बसाने की घोषणा और एक्सप्रेसवे के किनारे सुनियोजित सैटेलाइट शहर बनाने का पुराना सपना। HSVP के जमीन अधिग्रहण के विज्ञापन (जो 1 सितंबर को छपा था) में नमो सिटी को 64,000 एकड़ के बड़े प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर 9,000 एकड़ में बनाने की बात कही गई थी। इस बड़े प्रोजेक्ट में सोनीपत, रोहतक और झज्जर जैसे कई कस्बों में आम रिहायशी-कमर्शियल-संस्थागत विस्तार और ट्रांसपोर्ट नगर योजनाएं भी शामिल हैं। ये वही तीन जिले हैं, जिन्हें नमो सिटी के लिए चुना गया है।

HSVP ने नमो सिटी के लिए खास तौर पर 10 रेवेन्यू गांवों की पहचान की है

रोहतक में हसनगढ़ (1,320 एकड़), झज्जर में निलोठी, खेड़ी जसौर, जसौर खेड़ी और लोहारहेड़ी ( 1,731, 2,269, 1,315 और 1,117 एकड़) और सोनीपत में पाई, बरौना, खुरमापुर, रोहना और किढोली ( 1,040, 174, 440, 516 और 30 एकड़)। इन सबको मिलाकर कुल जमीन लगभग 10,000 एकड़ होती है।

इन गांवों के किसानों से कहा गया है कि वे 31 अक्टूबर तक e-Bhoomi पोर्टल पर अपनी सहमति दर्ज करें। इसके बाद HSVP का कहना है कि वह पॉलिसी के मुताबिक जमीन खरीदने और विकास का काम शुरू करेगा।

अब यूपी में गूंजेगा बाबा का नाम! कैंची धाम के बाद अब जन्मभूमि से समाधि तक बदलेगा पूरा नक्शा

नीम करौली बाबा को लेकर लोगों की बढ़ती दिलचस्पी भी देखने को मिल रही है और उनके जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद उनका नाम एक बार फिर चर्चा में आया है। खबरों के मुताबिक, करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने भी बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत से जुड़े विषय को लोगों के बीच पहुंचाया है।

नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में हुआ था और उन्होंने अपने जीवन का काफी समय इसी क्षेत्र में साधना और तपस्या करते हुए बिताया। बाबा की समाधि भी उत्तर प्रदेश में ही स्थित है, इसलिए उनके भक्तों के लिए राज्य में मौजूद ये जगहें खास महत्व रखती हैं। अब उत्तर प्रदेश सरकार इन स्थानों को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की योजना बना रही है। फिरोजाबाद स्थित उनकी जन्मस्थली को एक बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

जन्म स्थान पर बनेगा भव्य कॉरिडोर

फिरोजाबाद में नीम करौली बाबा की जन्मस्थली को बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। इस परियोजना के लिए करीब 87.5 बीघा जमीन तय की गई है। यहां भव्य प्रवेश द्वार, डिजिटल म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाया जाएगा, जहां लोग बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके अलावा मीटिंग हॉल, मल्टी लेवल पार्किंग, कम्युनिटी किचन, फूड कोर्ट, मेडिटेशन सेंटर और वेलनेस सेंटर जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।

जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी

इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जमीन मालिकों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा और यह राशि जमीन की मौजूदा कीमत से चार गुना होने की बात कही गई है। बाबा के परिवार के सदस्यों समेत कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर अनापत्ति प्रमाण पत्र भी दिया है, जिसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा गया है। सरकार की मंजूरी के बाद जमीन अधिग्रहण पूरा होने पर निर्माण का काम शुरू किया जा सकेगा।

तपस्या स्थल पर भी बढ़ेंगी सुविधाएं

सरकार की योजना जन्म स्थान के साथ फर्रुखाबाद के नीब करौरी गांव में भी विकास कार्य किए जाने की तैयारी है। माना जाता है कि नीम करौली बाबा ने इस इलाके में करीब 12 साल तक तपस्या की थी और इसी गांव के नाम से बाद में वे नीम करौली बाबा के नाम से प्रसिद्ध हुए। यहां करीब 5 एकड़ जमीन को विकसित करने की योजना है। प्रस्तावित कामों में पानी की टंकी, सड़कों को चौड़ा करना, अतिक्रमण हटाना और व्यवस्थित पार्किंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म ‘हनुमान अंश’ की रिलीज के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है और रोजाना करीब 60 से 70 हजार लोगों के पहुंचने की बात कही गई है।

वृंदावन के समाधि स्थल का भी होगा विकास

नीम करौली बाबा से जुड़ी धार्मिक पर्यटन योजना में वृंदावन स्थित उनके समाधि स्थल को भी शामिल किया गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ आसपास के इलाके में सड़क संपर्क और दूसरी जरूरी सुविधाओं को मजबूत करने की योजना है। इसका मकसद समाधि स्थल तक पहुंच को आसान बनाना और वहां आने वाले भक्तों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना है।

हनुमान सेतु से शुरू होगा प्रस्तावित बाबा सर्किट

लखनऊ का गोमती नदी के किनारे स्थित हनुमान सेतु मंदिर भी प्रस्तावित ‘नीम करौली बाबा सर्किट’ का अहम हिस्सा होगा। यह मंदिर बाबा की प्रेरणा से बनाया गया था और इसे सर्किट के शुरुआती केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड की ओर से यहां से गाइडेड टूर भी शुरू किए जा सकते हैं। मंदिर परिसर में फिलहाल नीम करौली बाबा की दो मूर्तियां और भगवान हनुमान की एक बड़ी मूर्ति मौजूद है।

नीम करौली बाबा से जुड़ा कैंची धाम भले ही बाबा से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध जगहों में शामिल हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में मौजूद इन स्थानों की अपनी अलग कहानी और महत्व है। प्रोजेस्ट में कैंची धाम की तरह श्रद्धालुओं के अनुभव और सुविधाओं को बेहतर बनाने की कोशिश की जाएगी, फिरोजाबाद की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखकर विकास किया जाएगा। इस विकास के बाद इन जगहों पर सुविधाएं बेहतर होने के साथ बाबा के जीवन, उनकी साधना और आध्यात्मिक विरासत को करीब से समझने का मौका भी मिल सकता है।

उड़ानों को तरसते नए हवाई अड्डे

भारत को अधिक हवाई अड्डों की नहीं, काम करने वाले हवाई अड्डों की जरूरत है। खाली रनवे पर खर्च होते रहना विकास नहीं, बर्बादी है। जब रखरखाव का बिल ही कमाई से बड़ा हो जाए, तब नीति को गर्व नहीं, सुधार चाहिए। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, यदि यही हाल रहा तो अगले दस साल में और सौ हवाई अड्डे बनेंगे और उनमें से कई फिर वीरान रहेंगे।

भारत में पिछले एक दशक में क्षेत्रीय हवाई संपर्क का नारा जितना जोर से लगाया गया, उतनी ही तेजी से छोटे शहरों में टर्मिनल बने, रिबन कटे और उद्घाटन की तस्वीरें छपी। ‘उड़े देश का आम नागरिक’ उड़ान योजना का वादा था कि टियर-2 और टियर-3 शहर भी हवाई नक्शे पर आ जाएंगे। आंकड़ों में सफलता दिखती है कि दर्जनों एयरपोर्ट चालू हुए, सैकड़ों रूट आवंटित हुए। लेकिन मैदान पर तस्वीर इससे उलट है। कई नए हवाई अड्डे और पुरानी पट्टियां आज वीरान पड़ी हैं। रनवे साफ है, सीआईएसएफ खड़ा है, बिजली जल रही है, लेकिन विमान नहीं आते। क्या यह महज ‘अस्थायी रुकावट’ है या नीतिगत असफलता का प्रमाण?

संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, उड़ान के तहत विकसित करीब पंद्रह हवाई अड्डे इस समय अनुसूचित उड़ानों से रहित हैं। इनमें पठानकोट, लुधियाना, शिमला, पाकयोंग, कुशीनगर, अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद, भावनगर, अंबिकापुर, राउरकेला, दतिया और कलबुर्गी शामिल हैं। इस सब से उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा प्रभावित है। 2021 के बाद राज्य में शुरू हुए सात नए एयरपोर्ट में से छह पर नियमित व्यावसायिक उड़ानें बंद हो चुकी हैं। केवल अयोध्या ही अपवाद है। कुशीनगर बौद्ध सर्किट के लिए खोला गया, मुरादाबाद पीतल उद्योग के लिए, आजमगढ़ और चित्रकूट पर्यटन व धार्मिक यात्रा के नाम पर। लेकिन कुछ ही महीनों में यहाँ उड़ानें थम गईं।

असफलता का सबसे ठोस सबूत खर्च बनाम कमाई है। सरकार इन पंद्रह गैर-संचालित केंद्रों के रखरखाव पर करीब 879 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है, जबकि वहां नियमित यात्री सेवा नहीं है। पाकयोंग का निर्माण ही करीब 605 करोड़ में हुआ; रखरखाव पर अब तक लगभग 179 करोड़ चुक चुके हैं। शिमला पर रखरखाव खर्च 116 करोड़ से ऊपर बताया गया। मुरादाबाद पर करीब 30 करोड़। भावनगर का हाल और स्पष्ट है, एक रिपोर्ट के अनुसार एक वर्ष में संचालन-रखरखाव पर करीब 18 करोड़ खर्च हुए, वहीं कमाई महज 4 करोड़ ही रही। यानी लागत राजस्व से कई गुना अधिक। गौरतलब है कि जब विमान नहीं उतरते, तब भी रनवे, फायर स्टेशन, सुरक्षा, एटीसी और बिजली का खर्च तो चलता ही रहता है। एयरपोर्ट अथॉरिटी के व्यापक नुकसान का एक हिस्सा इन्हीं सुनसान हवाई अड्डों से आता है।

सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ? पहला कारण मांग का गलत आकलन। हवाई अड्डा बनाने से मांग अपने आप नहीं पैदा होती। छोटे शहर में रेल और सड़क पहले से सस्ती व भरोसेमंद हैं। तीन घंटे की दूरी पर अगर ट्रेन है, तो सीमित आय वाला यात्री महंगा टिकट कभी नहीं खरीदेगा, खासकर जब सब्सिडी खत्म होने के बाद किराया दोगुना हो जाए। उड़ान में तीन साल का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (वीजीएफ) मिलता है। अवधि खत्म होते ही कई रूट ढह जाते हैं। सीएजी की पुरानी समीक्षा पहले ही कह चुकी थी कि शुरुआती चरणों के आधे से अधिक आवंटित रूट कभी शुरू ही नहीं हुए या जल्दी बंद हो गए।

दूसरा, विमान और ऑपरेटर की कमी। क्षेत्रीय उड़ानों के लिए छोटे विमान चाहिए। फ्लाईबिग जैसे ऑपरेटर बंद हुए या उनकी सेवाएं रोक दीं गईं। विमान पट्टे, रखरखाव और पायलट की कमी ने कई रूट को अधर में छोड़ दिया। तीसरा, तकनीकी सीमा। कई छोटे हवाई अड्डे केवल विजुअल फ्लाइट रूल्स पर चलते हैं। उत्तर भारत की सर्दियों में कोहरा आते ही उड़ानें रुक जाती हैं। इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम न होने से विश्वसनीयता खत्म हो जाती है। चौथा, अंतिम छोर की कनेक्टिविटी। शहर से एयरपोर्ट तक सड़क खराब हो, टैक्सी महंगी हो, तो यात्री दोबारा नहीं आता।

इसे विफलता इसलिए कहना चाहिए क्योंकि पैसा करदाता का है और वादा विकास का था। उद्घाटन राजनीतिक पूंजी बन जाता है, लेकिन तीन साल बाद भी खाली टर्मिनल जनता का नुकसान बन जाता है। भूमि अधिग्रहण के बाद गांव वाले विकास की उम्मीद लगाते हैं, लेकिन जब उड़ान नहीं आती, तो अविश्वास बढ़ता है। क्षेत्रीय विमानन तभी सार्थक है जब वह व्यापार, पर्यटन, चिकित्सा आपात और रोजगार से जुड़कर स्थायी यातायात पैदा करे। महज रनवे बिछाना बुनियादी ढांचे का भ्रम है, अर्थव्यवस्था नहीं।

ऐसे में सरकार को क्या करना चाहिए? सबसे पहले, नए हवाई अड्डे खोलने से पहले कठोर अध्ययन अनिवार्य हो। यात्री क्षमता, आसपास के उद्योग, तीर्थ-पर्यटन चक्र और वैकल्पिक परिवहन की तुलना के बिना निर्माण न हो। संशोधित उड़ान में यही सबक शामिल होना चाहिए। दूसरा, सब्सिडी की अवधि तीन से बढ़ाकर पांच-सात वर्ष की जा सकती है, लेकिन भार कारक और स्थानीय राजस्व लक्ष्य पूरे होने पर ही। तीसरा, छोटे हवाई अड्डों को केवल यात्री पर निर्भर न रखा जाए। कार्गो, पायलट प्रशिक्षण, चार्टर, मेडिकल फ्लाइट और राज्य सरकार की आधिकारिक यात्राओं से न्यूनतम उपयोग सुनिश्चित हो। चौथा, मौसम-संवेदनशील अड्डों पर आईएलएस और बेहतर नेविगेशन लगाया जाए, वरना सर्दी या ख़राब मौसम में पूरा नेटवर्क ठप रहेगा।

पांचवां, राज्य सरकारों की जिम्मेदारी बढ़ाई जाए। भूमि, सड़क, पर्यटन पैकेज और स्थानीय कर रियायत राज्य दें, केंद्र केवल विमानन ढांचा। छठा, किराया नीति लचीली हो। सब्सिडी खत्म होते ही अचानक महंगा टिकट हवाई यात्रा की मांग को मार देता है। चरणबद्ध वृद्धि और ऑफ-पीक छूट से हवाई यात्रा आदत बन सकती है। सातवां, असफल रूट को बिना शर्म के बंद करने और सफल मॉडल, जैसे बेहतर कनेक्टिविटी वाले कुछ औद्योगिक या तीर्थ केंद्र को दोहराने का साहस हो। हर जिले में एयरपोर्ट का नारा राजनीतिक रूप से आकर्षक है, परंतु आर्थिक रूप से घातक।

भारत को अधिक हवाई अड्डों की नहीं, काम करने वाले हवाई अड्डों की जरूरत है। खाली रनवे पर खर्च होते रहना विकास नहीं, बर्बादी है। उड़ान का मकसद आम नागरिक को आसमान देना था, कंक्रीट के स्मारक खड़े करना नहीं। जब रखरखाव का बिल कमाई से बड़ा हो जाए, तब नीति को गर्व नहीं, सुधार चाहिए। सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए, यदि यही हाल रहा तो अगले दस साल में और सौ हवाई अड्डे बनेंगे और उनमें से कई फिर वीरान रहेंगे।

आस्था स्पिनटेक्स का नया प्लान, फाल्कन यार्न्स यूनिट में 1.35 MW रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट

आस्था स्पिनटेक्स लिमिटेड ने फाल्कन यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में लगाए जा रहे 1.35 MW के रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ाया है। कंपनी ने बताया कि प्रोजेक्ट अब साइट पर काम शुरू होने के चरण में पहुंच गया है। आस्था स्पिनटेक्स पहले ही फाल्कन यार्न्स के अधिग्रहण की जानकारी दे चुकी है।

GEDA से मिला रजिस्ट्रेशन

फाल्कन यार्न्स की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट गुजरात के राजकोट जिले के गोंडल में भरुडी में स्थित है। यहां 1,000 kW AC और 1,350 kW DC क्षमता का रूफटॉप सोलर PV सिस्टम लगाया जाएगा।

इसके लिए कंपनी को Gujarat Energy Development Agency (GEDA) से रजिस्ट्रेशन मिल गया है। यह रजिस्ट्रेशन 16 सितंबर 2026 को जारी हुआ। प्रोजेक्ट को इंडस्ट्रियल और कमर्शियल कैटेगरी में ‘गुजरात इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2025’ के तहत रजिस्टर किया गया है।

साइट पर शुरू हुआ काम

कंपनी के मुताबिक, अब प्रोजेक्ट का काम साइट पर शुरू हो गया है। 16 सितंबर की डेली प्रोग्रेस रिपोर्ट के अनुसार, वहां 13 कर्मचारी तैनात थे।

मॉड्यूल माउंटिंग स्ट्रक्चर यानी MMS की मार्किंग का करीब 70% काम पूरा हो चुका है। वहीं, MMS लगाने का करीब 40% काम पूरा हो गया है। रेगुलेटरी रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद यह प्रोजेक्ट के अगले चरण की शुरुआत है।

अधिग्रहण के बाद ऑपरेशन पर फोकस

आस्था स्पिनटेक्स फाल्कन यार्न्स के अधिग्रहण के बाद उसके मैन्युफैक्चरिंग परिसर में कई ऑपरेशनल पहल आगे बढ़ा रही है। रूफटॉप सोलर प्रोजेक्ट भी इसी योजना का हिस्सा है।

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर दिव्यांग जसवंत पटेल ने कहा कि GEDA रजिस्ट्रेशन पूरा होना और साइट पर काम शुरू होना प्रोजेक्ट के लिए अहम पड़ाव है। उन्होंने कहा कि मॉड्यूल माउंटिंग स्ट्रक्चर का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रोजेक्ट तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है।

कंपनी की थ्री-पिलर ग्रोथ स्ट्रेटेजी

आस्था स्पिनटेक्स ने अपनी ग्रोथ के अगले चरण के लिए ‘थ्री-पिलर ग्रोथ स्ट्रेटेजी’ पेश की है। इसमें तीन चीजों पर फोकस है। पहला, फाइनेंशियल एक्सीलेंस। दूसरा, शेयरहोल्डर रिवॉर्ड्स। तीसरा, यार्न से फैब्रिक तक वर्टिकल इंटीग्रेशन।

कंपनी के मुताबिक, फाल्कन यार्न्स की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में सोलर प्रोजेक्ट भी उसके बढ़े हुए मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म के ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की पहल का हिस्सा है।

Stock to Buy: रॉकेट बन सकता है इस कंपनी का शेयर, जेफरीज ने दी खरीदने की सलाह

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 17 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 13 शेयर, टाटा ग्रुप के स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Stocks to Watch: गुरुवार 17 सितंबर को शेयर बाजार में 13 कंपनियों से जुड़े अहम अपडेट देखने को मिल सकते हैं। इनमें टाटा ग्रुप के स्टॉक्स से जुड़ी खबर भी शामिल है। वहीं, कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं। कुछ ने विस्तार और अधिग्रहण की योजनाओं का ऐलान किया है।

Tata Group Stocks

टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के बोर्ड की बैठक 17 सितंबर को मुंबई में होगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन से पद छोड़ने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा जा सकता है। उनकी मौजूदा अवधि फरवरी 2027 में पूरी हो रही है। बैठक में संभावित लिस्टिंग, अगले चेयरमैन और ग्रुप गवर्नेंस पर भी चर्चा हो सकती है।

GNFC

सरकारी फर्टिलाइजर और केमिकल कंपनी GNFC ने संजीव कुमार को नया मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। नियुक्ति 9 सितंबर 2026 से प्रभावी है। उनका कार्यकाल पांच साल का होगा। वह राजकुमार बेनीवाल की जगह लेंगे, जिन्हें गुजरात सरकार ने सूरत का म्युनिसिपल कमिश्नर बनाया है।

Susan Electronics India

इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी Susan Electronics India के बोर्ड ने बागपत में जमीन खरीदने को मंजूरी दी है। कंपनी करीब ₹22 करोड़ में यह जमीन खरीदेगी। इसका इस्तेमाल मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी बढ़ाने के लिए होगा। कंपनी ने जून 2026 में शेयर बाजार में शुरुआत की थी।

LT Foods

फूड सेक्टर की कंपनी LT Foods, Kameda LT Foods India में जापान की Kameda Seika की पूरी 49% हिस्सेदारी खरीदेगी। LT Foods के पास अभी 51% हिस्सेदारी है। डील के बाद हिस्सेदारी 100% हो जाएगी। यह जॉइंट वेंचर भारत में राइस स्नैक्स का कारोबार करता है और ‘Kari Kari’ ब्रांड से जुड़ा है।

Vodafone Idea

टेलीकॉम कंपनी Vodafone Idea पर TRAI ने ₹2 लाख की फाइनेंशियल पेनल्टी लगाई है। कंपनी ने 16 सितंबर को इसकी जानकारी शेयर बाजार को दी। कार्रवाई नवंबर 2025 में क्वालिटी ऑफ सर्विस के तय मानकों को पूरा नहीं करने से जुड़ी है। कंपनी ने कहा है कि वह TRAI के आदेश की समीक्षा कर रही है।

Krsnaa Diagnostics

डायग्नोस्टिक्स सेक्टर की कंपनी Krsnaa Diagnostics ने पंजाब हेल्थ सिस्टम्स कॉरपोरेशन के साथ 15 साल का करार किया है। इसके तहत पंजाब के चार सरकारी अस्पतालों में PET-CT डायग्नोस्टिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। कंपनी इन सुविधाओं को चलाने और मेंटेन करने का काम भी करेगी।

Mazagon Dock Shipbuilders

सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनी Mazagon Dock Shipbuilders ने NSHIPML के साथ समझौता ज्ञापन यानी MoU साइन किया है। इसके तहत कंपनी Dighi ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग क्लस्टर के लिए एंकर शिपयार्ड के तौर पर काम करेगी।

Venus Pipes & Tubes

स्टेनलेस स्टील पाइप और ट्यूब बनाने वाली कंपनी Venus Pipes & Tubes के बोर्ड ने फंड जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए 371.99 करोड़ रुपये तक जुटाएगी। इसके लिए शेयरधारकों और अन्य जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियों की जरूरत होगी।

Fortis Healthcare

हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनी Fortis Healthcare ने Seth Sunder Lal Jain Charitable Eye Hospital यानी SLJ Society के साथ अंतिम समझौते किए हैं। इसके तहत कंपनी नई दिल्ली के अशोक विहार में 400 से ज्यादा बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में हेल्थकेयर सेवाएं देगी।

Kalpataru Projects International

इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कंपनी Kalpataru Projects International ने बताया कि उसकी 96.12% फर्स्ट-लेवल स्टेप-डाउन मटेरियल सब्सिडियरी Linjemontage I Grästorp AB को स्वीडिश फाइनेंशियल सुपरवाइजरी अथॉरिटी से मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी प्रस्तावित IPO के प्रॉस्पेक्टस से जुड़ी है।

Infosys

आईटी सेक्टर की कंपनी Infosys ने इंदौर डेवलपमेंट सेंटर का विस्तार किया है। कंपनी ने सुपर कॉरिडोर स्थित अपने कैंपस में नए Software Development Block यानी SDB-2 का उद्घाटन किया है। इससे इंदौर में कंपनी के डेवलपमेंट सेंटर की क्षमता बढ़ेगी।

Highway Infrastructure

इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कंपनी Highway Infrastructure को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से 220.66 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर टोल कलेक्शन और टोल प्लाजा के संचालन से जुड़ा है।

Alembic Pharmaceuticals

फार्मा सेक्टर की कंपनी Alembic Pharmaceuticals ने बताया कि अमेरिकी दवा नियामक USFDA ने गुजरात के वडोदरा स्थित उसकी बायोइक्विवेलेंस फैसिलिटी का इंस्पेक्शन पूरा कर लिया है। कंपनी के मुताबिक, USFDA ने इस फैसिलिटी का निरीक्षण बंद कर दिया है।

Juniper Hotels

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की कंपनी Juniper Hotels ने Novotel Imagicaa होटल को खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कंपनी इस होटल को महाराष्ट्र के खोपोली में Imagicaaworld Entertainment से 248 करोड़ रुपये में खरीदेगी। Juniper Hotels भारत में Hyatt से जुड़े होटलों की सबसे बड़ी मालिक कंपनी है।

India Pesticides Share Price: UK और अर्जेंटीना से प्रोडक्ट को मिली मंजूरी, शेयर 15% उछला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर पर बिग अपडेट, मंत्रालय को सौंपा गया DPR, सारी डिटेल जानिए

Delhi-Patna Bullet Train Corridor: देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को विस्तार देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की तैयारियां तेज हो गई हैं। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रेल मंत्रालय को सौंप दी है। करीब 1,557 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर को दो चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है> जबकि दूसरे चरण में इसे वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक बढ़ाया जाएगा।

DPR के बाद ग्राउंड सर्वे की तैयारी तेज

DPR सौंपे जाने के बाद दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल लाइन के ग्राउंड सर्वे की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। NHSRCL ने 7 सितंबर को वरिष्ठ तकनीकी अधिकारियों की तैनाती को लेकर अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत तीन ऑफिसर्स ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) और तीन एडिशनल जनरल मैनेजर की नियुक्ति की जाएगी। यह प्रक्रिया अगले 30 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है। दिल्ली, नोएडा, नई दिल्ली, आगरा, लखनऊ, वाराणसी और पटना में तैनात अधिकारियों को परियोजना के जमीनी कामकाज की निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी।

पहले चरण में दिल्ली से वाराणसी तक चलेगी ट्रेन

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की लंबाई करीब 813 किलोमीटर बताई गई है। दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होने वाली यह लाइन नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी पहुंचेगी।

दूसरे चरण में वाराणसी से पटना और इसके बाद सिलीगुड़ी तक हाई-स्पीड रेल लाइन का विस्तार प्रस्तावित है। पूरे दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी कॉरिडोर की लंबाई करीब 1,557 किलोमीटर होगी।

इन शहरों से होकर गुजरेगा बुलेट ट्रेन कॉरिडोर

‘दैनिक जागरण’ के मुताबिक, प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी रूट में दिल्ली, नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या के लिए लिंक लाइन, रायबरेली, प्रयागराज, भदोही और वाराणसी को जोड़े जाने की योजना है। इसके आगे वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी सेक्शन के जरिए बिहार और पश्चिम बंगाल को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है।

सफर का समय होगा काफी कम

प्रस्तावित बुलेट ट्रेन से विभिन्न रूटों पर यात्रा का अनुमानित समय इस प्रकार बताया गया है:-

  • दिल्ली-वाराणसी का सफर 3 घंटे 50 मिनट में पूरा होगा।
  • वाराणसी-सिलीगुड़ी के बीच 2 घंटे 55 मिनट में पूरा होगा।
  • पटना-सिलीगुड़ी के बीच करीब 2 घंटे लगेंगे।
  • दिल्ली-पटना के बीच 4 घंटे 41 मिनट का समय लगेगा।
  • दिल्ली-सिलीगुड़ी के बीच 6 घंटे 45 मिनट लगेगा।

इस हिसाब से दिल्ली से पटना की यात्रा करीब 4 घंटे 41 मिनट में पूरी होने का अनुमान है। वहीं, दिल्ली से सिलीगुड़ी पहुंचने में करीब 6 घंटे 45 मिनट लग सकते हैं।

बिहार के इन शहरों को मिलेगा फायदा

  • हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में बिहार के कई शहरों को जोड़ने की योजना है। संभावित स्टेशनों में बक्सर, आरा, पटना, मोकामा, हाथीदह, बेगूसराय, महेशखूंट, कटिहार और किशनगंज शामिल हैं।
  • बिहार में इस परियोजना के लिए एलिवेटेड ट्रैक बनाए जाने की योजना है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए करीब 1,900 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव है।
  • पटना जिले में बुलेट ट्रेन स्टेशन के लिए करीब 21 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। स्टेशन के लिए शुरुआती तौर पर फुलवारी शरीफ में AIIMS पटना के पास जमीन का निरीक्षण किया गया था।
  • इसके अलावा NHSRCL की सर्वे टीम ने बिहटा के पास एक वैकल्पिक स्थान का भी सुझाव दिया है।

जमीन अधिग्रहण और सर्वे का काम जारी

उत्तर प्रदेश के आगरा, प्रयागराज और वाराणसी समेत विभिन्न जिलों में जमीन अधिग्रहण से जुड़े प्रस्तावों पर काम चल रहा है। बिहार में ग्राउंड सर्वे और मिट्टी की जांच का काम भी जारी है। फाइनल मंजूरी मिलने के बाद DPR को कैबिनेट के समक्ष पेश करने की तैयारी है। पिछले बजट में सरकार ने वाराणसी कॉरिडोर समेत सात बुलेट ट्रेन रूट को हाई-प्रायोरिटी प्रोजेक्ट के रूप में चिह्नित किया था।

280 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें

  • भारत में स्वदेशी तकनीक से बुलेट ट्रेन के कोच तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें 280 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है।
  • इसके अलावा जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन के कोच 2029-30 तक भारत में आने की बात कही गई है। इनकी अधिकतम रफ्तार 350 किलोमीटर प्रति घंटे बताई गई है।
  • जापान और चीन मैग्लेव ट्रेनों पर भी काम कर रहे हैं, जिनकी रफ्तार 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई जाती है।
  • वहीं, रूस ने भारत को ‘Ivolga’ ट्रेन की आपूर्ति की पेशकश की है, जिसकी गति 360 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है।

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UPI MDR Charge: क्या आप एमडीआर चार्ज को लेकर चिंतित हैं? 42 FAQ से समझें कि क्यों चिंता करने की जरूरत नहीं है

UPI MDR Charge: यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज के ऐलान के बाद कई लोग चिंतित हैं। उन्हें लग रहा है कि अब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें फीस चुकानी होगी। यूपीआई पर एमडीआर चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होगा। सच यह है कि इसके लागू होने के बाद भी यूजर्स को यूपीआई से पेमेंट पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी। एमडीआर चार्ज मर्चेंट यानी दुकानदार को देना होगा। इस पूरे मामले को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने 42 FAQ तैयार किए हैं। इसकी मदद से आपकी पूरी उलझन दूर हो जाएगी।

 मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अभी क्यों लागू किया जा रहा है?

यूपीआई के जरिए हर महीने अरबों रुपये के ट्रांजेक्शन होते हैं। एमडीआर चार्ज से वसूला गया पैसा सिर्फ यूपीआई इकोसिस्टम में डिस्ट्रिब्यूट होता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा (बैंकों और नॉन-बैंकों के साथ यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा) और सर्विस बेहतर बनाने में मदद मिलती है। यूपीआई का शुल्क (एमडीआर) क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, वॉलेट आदि जैसे अन्य भुगतान साधनों के मुकाबले काफी कम हैं। शुल्क बहुत ही उचित रखे गए हैं और केवल ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर ही लागू होंगे, जिससे यूपीआई भुगतान स्वीकार करने हेतु सबसे किफायती जरिया बना रहे।

क्या कम राशि वाले यूपीआई लेनदेन प्रभावित होंगे?

₹2,000 तक की राशि वाले यूपीआई लेनदेन पर MDR का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो कुल यूपीआई (पी2एम) लेनदेन के 95% से अधिक हैं। उचित एमडीआर लगाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूपीआई रोजमर्रा के लेनदेन के लिए सुलभ और सुविधाजनक बना रहे, साथ ही दीर्घकालिक इकोसिस्टम की स्थिरता को भी मजबूती मिले।

यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों के लिए कितना एमडीआर लागू किया जा रहा है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर 0.4% लागू होगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेनदेन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित होगा।

यूपीआई एमडीआर की तुलना पारंपरिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड एमडीआर से कैसे की जा सकती है?

यूपीआई एमडीआर सभी पारंपरिक कार्ड-आधारित लेनदेन शुल्कों की तुलना में काफी कम है। सामान्य क्रेडिट कार्ड एमडीआर आमतौर पर प्रति लेनदेन 1.5% से 2.5% तक होता है, जबकि डेबिट कार्ड एमडीआर 0.90% तक सीमित होता है। ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर यूपीआई एमडीआर को 0.4% और उच्च राशि की खरीदारी पर इसे ₹300 तक सीमित किया गया है।

अपडेटेड एमडीआर संबंधी प्रावधान कब से प्रभावी होंगे?

अपडेटेड एमडीआर 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यह समयसीमा अधिग्रहण करने वाले बैंकों, भुगतान एग्रीगेटरों, फिनटेक अनुप्रयोगों और कॉरपोरेट लेखा प्लेटफॉर्मों को अपने सॉफ्टवेयर इंजन और बिलिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती है।

इसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों से किस प्रकार की जा सकती है?

दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसे आर्थिक मॉडल हैं जो इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार को सहयोग करते हैं। भारत का दृष्टिकोण सुगमता, विस्तार और समावेशन को प्राथमिकता देता है।

एमडीआर की लिमिट के अंतिम कार्यान्वयन और प्रवर्तन का निर्णय कौन करता है?

परिचालन संबंधी मापदंड, शुल्क वितरण मॉडल और श्रेणी सीमाएं भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति की ओर से तय किए जाते हैं।

एमडीआर के अंतर्गत प्रस्तावित छोटे व्यापारियों के लिए समर्पित निधि क्या है?

टियर-3 में पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को मिलाकर कुल 6 केंद्रों और टियर-1 व 2 केंद्रों, जिनमें केंद्र सरकार की ओर से किसी अधिसूचित योजना (जैसे कि पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा इत्यादि) भी शामिल हैं, में डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी बनाए रखने और सब्सिडी दिए जाने हेतु एक समर्पित कोष का निर्माण किया जाएगा। इस कोष का इस्तेमाल व्यापारियों को जोड़ने के लिए इकोसिस्टम के सदस्यों को वित्तीय मदद प्रदान करने और मौजूदा छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई लेन-देन को प्रोत्साहन देने के लिए भी किया जाएगा।

प्रस्तावित समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों को किस प्रकार मदद मिलेगी?

प्रस्तावित किया गया समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके लिए अधिग्रहण बैंकों/ भुगतान एग्रीगेटरों को व्यापारी जुड़ाव पहलों के लिए वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी और छोटे व्यापारियों की ओर से, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, टियर-III केंद्रों और उससे आगे के क्षेत्रों में, किए गए यूपीआई लेन-देन हेतु प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे निरंतर इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा, डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ेगी और छोटे व्यवसायों को डिजिटल भुगतान प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। विस्तृत रूपरेखा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सलाह से अगले तीन महीनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।

यूपीआई के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना पर्याप्त क्यों नहीं है?

वार्षिक सरकारी प्रोत्साहन/ सब्सिडी, हालांकि शुरुआती समय में डिजिटल को अपनाने में तेजी लाने में मददगार है, लेकिन इसे भुगतान इंडस्ट्री की ओर से किए गए खर्चों की भरपाई के लिए स्थायी उपाय के बजाय अल्पकालिक मदद के तौर पर तैयार किया गया था। इंडस्ट्री के अनुमानों के आधार पर, यूपीआई भुगतान के संचालन, सर्वर बैंडविथ, धोखाधड़ी रोकथाम प्रणालियों और बैंक तकनीकी सहायता को बनाए रखने में सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है। केवल राजकोषीय बजट आवंटन पर निर्भर रहने से वित्तपोषण में अनिश्चितता पैदा होती है और बैंकों और फिनटेक कंपनियों की ओर से दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी निवेश सीमित हो जाते हैं। एक वाणिज्यिक, सीमा-आधारित मॉडल में बदलाव निरंतर तकनीकी नवाचार के लिए विश्वसनीय पूंजी प्रदान करता है।

यह कदम पेमेंट ऐप ऑपरेटरों के बीच बाजार प्रतिस्पर्धा को कैसे प्रोत्साहन देगा?

एक संपोषित व्यावसायिक फ्रेमवर्क स्थापित करने से नए फिनटेक स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी कंपनियों को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। जब भुगतान प्रोसेसिंग शून्य-एमडीआर (डिजिटल डिलीवरी रेट) शर्तों के अंतर्गत संचालित होती है, तो केवल उच्च पूंजी वाली तकनीकी कंपनियां ही दीर्घकालिक परिचालन घाटे को वहन कर सकती हैं। एक पूर्वानुमानित व्यावसायिक राजस्व मॉडल सभी के लिए समान अवसर प्रदान करता है, जिससे छोटे, नवोन्मेषी स्टार्टअप प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, विशेषीकृत भुगतान सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं और वित्तीय पहुंच का विस्तार कर सकते हैं। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा आखिरकार बेहतर सेवाओं, ऐप की बेहतर विश्वसनीयता और उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्पों की ओर ले जाती है।

यह नीति उभरते खतरों के खिलाफ साइबर सुरक्षा लचीलापन कैसे सुनिश्चित करती है?

एमडीआर के माध्यम से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई-आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने, एन्क्रिप्शन अपग्रेड आदि में निवेश हेतु किया जा सकता है।

2026 तक यूपीआई का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कितना विस्तार हो चुका है?

2026 तक, यूपीआई का वैश्विक विस्तार काफी बढ़ चुका है और दुनिया के 11 देशों में इसकी भुगतान सेवाएं सक्रिय हैं। एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर घरेलू आधार का निर्माण भारत को डिजिटल वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक नेतृत्व के तौर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने में मददगार होगा।

वर्तमान में यूपीआई का लेन-देन की मात्रा और मूल्य का स्तर क्या है और इसे आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता क्यों है?

अभूतपूर्व जन स्वीकृति का प्रदर्शन करते हुए, यूपीआई ने अकेले अगस्त 2026 में कुल ₹29.9 लाख करोड़ राशि के 2,451 करोड़ लेन-देन संसाधित किए। यह भारी मात्रा भारतीय अर्थव्यवस्था के प्राथमिक वित्तीय इंजन के रूप में यूपीआई की भूमिका को उजागर करती है, जो प्रतिदिन करोड़ों भुगतानों का प्रबंधन करता है। इस पैमाने को संभालने के लिए भारी संख्या में सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज गति वाली दूरसंचार लाइनें, बहुस्तरीय साइबर सुरक्षा निगरानी और विशेष बैंकिंग सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। लेन-देन के ये आंकड़े इस बात को पुष्ट करते हैं कि प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आत्मनिर्भर वित्तपोषण फ्रेमवर्क स्थापित करना क्यों जरूरी था।

क्या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने पर सामान्य उपभोक्ताओं से शुल्क लिया जाएगा?

नहीं, यूपीआई सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क जारी रहेंगी। उपभोक्ता अब तक की तरह ही यूपीआई का इस्तेमाल करके निःशुल्क लेन-देन कर सकते हैं। यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को कोई शुल्क नहीं देना होगा। व्यक्तिगत खाताधारक बिना किसी शुल्क की चिंता किए अपने सभी नियमित दैनिक खर्चों के लिए यूपीआई एप्लिकेशन का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। एमडीआर नीति यह सुनिश्चित करती है कि यूपीआई पूरे भारत में सभी नागरिकों के लिए निःशुल्क और सुलभ बनी रहे।

क्या यूपीआई के पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेन-देन जैसे दोस्तों, परिवार या व्यक्तिगत संपर्कों को पैसे भेजने पर कोई शुल्क लगता है?

नहीं, पी2पी लेन-देन भुगतानकर्ता और प्राप्तकर्ता दोनों के लिए निःशुल्क रहेंगे। यूपीआई का इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति की ओर से किसी अन्य व्यक्ति को कोई भी राशि हस्तांतरित करने या प्राप्त करने (या स्वयं को हस्तांतरित करने) पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। फिर चाहे आप परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेज रहे हों, दोस्तों के साथ बिल बांट रहे हों, या अपने लिंक किए गए बैंक खातों में स्वयं को हस्तांतरित कर रहे हों, इन पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा। नागरिक बिना किसी लेन-देन शुल्क के यूपीआई पर किसी भी स्वीकृत राशि का हस्तांतरण कर सकते हैं।

क्या यूपीआई ऐप यूपीआई भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क लेना शुरू कर देंगे?

नहीं, यूपीआई ऐप प्रदाता यूपीआई के माध्यम से किए गए किसी भी भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क या कोई अन्य शुल्क नहीं लेंगे। यूपीआई एप्लिकेशन को यूपीआई लेन-देन पर प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

क्या व्यापारियों की ओर से नाममात्र शुल्क का भुगतान शुरू करने पर दुकानों में उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी होगी?

नहीं, बाजार की गतिशीलता और ऐतिहासिक भुगतान रुझान दर्शाते हैं कि व्यापारी अधिक कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रोसेसिंग की मामूली लागत वहन करते हैं। भुगतान स्वीकार करने की लागत को मानक परिचालन खर्च माना जाता है, जिसकी भरपाई ग्राहकों की बढ़ती संख्या, उच्च औसत टिकट मूल्य और नकदी प्रबंधन के कम जोखिम से हो जाती है। चूंकि प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर क्रेडिट कार्ड शुल्क से काफी कम है और केवल विशिष्ट लेन-देन सीमा से ऊपर ही लागू होता है, इसलिए दुकानदारों के पास खुदरा कीमतों को बढ़ाने का कोई आर्थिक प्रोत्साहन नहीं है। उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के लिए निश्चित मूल्य का ही भुगतान करते रहेंगे।

क्या मुझे स्थानीय विक्रेता पर क्यूआर कोड स्कैन करते समय शुल्क देना होगा?

नहीं, स्थानीय बाजारों, स्ट्रीट वेंडरों या छोटी खुदरा दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन करना उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा। क्यूआर लेन-देन के ग्राहक के सामने वाले हिस्से में कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे खरीदारी की राशि कितनी भी हो। यह नीति चाय की दुकानों और स्थानीय परिवहन जैसी दैनिक छोटी-मोटी खरीदारी को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क से बचाने के लिए बनाई गई है। उपभोक्ता पूरी तरह से आश्वस्त होकर क्यूआर कोड स्कैन करना जारी रख सकते हैं कि उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

क्या उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन के लिए कोई मासिक सीमा है?

नहीं, व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा सीमा या स्तरित सीमा नहीं है। यूजर्स पूरे महीने में बिना किसी शुल्क सीमा तक पहुंचे, जितने चाहें उतने वैध पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) या पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन कर सकते हैं। हालांकि निजी बैंक और एनपीसीआई कुल लेन-देन राशि पर मानक दैनिक सुरक्षा सीमाएं लागू करते हैं (आमतौर पर लेनदेन श्रेणी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक), ये जोखिम प्रबंधन मापदंड हैं, न कि व्यावसायिक शुल्क स्तर पर। किसी भी स्थिति में, उपभोक्ता यूपीआई का कितनी भी बार इस्तेमाल करें, उन्हें कोई लेन-देन शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

सामान्य यूजर्स यूपीआई शुल्क के संबंध में आधिकारिक अपडेट कहां से सत्यापित कर सकते हैं?

नागरिकों को वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) या भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से सीधे प्रकाशित आधिकारिक सूचनाओं को देखने की सलाह दी जाती है। भुगतान शुल्कों के संबंध में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और भ्रामक रिपोर्टों के कारण, सरकार ने जनता से असत्यापित संदेशों को आगे न भेजने का आग्रह किया है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), आरबीआई या एनपीसीआई की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां प्रामाणिक नियामक नीति का प्राथमिक स्रोत हैं। यूजर्स अपने प्राथमिक बैंकिंग एप्लिकेशन में भी सत्यापित सूचनाओं की जांच कर सकते हैं।

क्या एमडीआर की शुरुआत से ऑटो-डेबिट रिकरिंग पेमेंट जैसे यूटिलिटी बिल या ओटीटी/ म्यूचुअल फंड सब्सक्रिप्शन पर असर पड़ता है?

नहीं, स्वचालित रिकरिंग स्थायी निर्देश, जिन्हें यूपीआई मैंडेट या ऑटोपे के नाम से जाना जाता है, पर निर्धारित एमडीआर लेन-देन शुल्क नहीं लगता है। मासिक उपयोगिता बिल, ओटीटी स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन, सभी रिकरिंग निवेश आदि के लिए स्वचालित रिकरिंग हस्तांतरण का इस्तेमाल किए गए भुगतानों पर कोई निर्धारित एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा।

क्या छोटे स्थानीय विक्रेताओं (पी2पीएम) से यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लिया जाएगा?

नहीं। पी2पीएम फ्रेमवर्क के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए शून्य एमडीआर (एमडीआर) लागू रहेगा। ये वे छोटे विक्रेता हैं जिन्हें यूपीआई क्यूआर के माध्यम से सीधे उनके खातों में प्रति माह 1 लाख रुपये तक की राशि प्राप्त होती है। पी2पीएम श्रेणी असंगठित खुदरा क्षेत्र में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता को प्रोत्साहन देती है। इसके साथ ही, छोटे विक्रेता विशेष सूक्ष्म व्यापारी खाता वर्गीकरण (पी2पीएम) के अंतर्गत काम करते हैं, जो उन्हें वाणिज्यिक शुल्कों से सुरक्षा प्रदान करता है। एमडीआर फ्रेमवर्क विशेष रूप से इस तरह से तैयार किया गया है कि असंगठित खुदरा क्षेत्र के छोटे व्यवसाय बिना किसी मार्जिन कटौती के डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकें।

पी2पीएम फ्रेमवर्क क्या है और यह छोटे व्यापारियों की सुरक्षा कैसे करता है?

पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (पी2पीएम) फ्रेमवर्क एनपीसीआई की ओर से तैयार की गई एक विशेष खाता श्रेणी है, जिसका उद्देश्य छोटे विक्रेताओं को सीधे उनके निजी बैंक खातों में भुगतान प्राप्त करने में मदद करना है। पी2पीएम दिशानिर्देशों के अंतर्गत, यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर का लाभ मिलता है। यह वर्गीकरण अनौपचारिक स्ट्रीट वेंडर सेटअप और औपचारिक वाणिज्यिक मर्चेंट एक्वायरिंग खातों के बीच एक सेतु का काम करता है, जिससे सूक्ष्म व्यवसायों के लिए कोई लागत नहीं आती है। यह असंगठित क्षेत्र में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देता है।

क्या छोटे व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर कोड को अपग्रेड करने या बदलने की जरूरत है?

नहीं। मौजूदा क्यूआर इंफ्रास्ट्रक्चर सामान्य तरीके से काम करता रहेगा। व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर स्टैंड या साउंडबॉक्स को बदलने, पुनः पंजीकृत करने या उनमें कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। दुकानों में लगे हुए सभी यूपीआई क्यूआर कोड बिना किसी रुकावट के भुगतान प्रक्रिया जारी रखेंगे। व्यापारी बैंक शाखा में जाए बिना या सॉफ्टवेयर अपडेट किए बिना अपने मौजूदा सेटअप के माध्यम से ग्राहकों से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

यदि किसी छोटे व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त होता है तो क्या होता है?

एमडीआर की प्रयोज्यता समग्र व्यापारी खाता वर्गीकरण के माध्यम से निर्धारित की जाती है। ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त करने पर पी2पीएम जैसे छूट प्राप्त श्रेणियों के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा।

समर्पित लघु व्यापारी कोष के लिए विस्तृत रूपरेखा को कब अंतिम रूप दिया जाएगा?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ सलाह मशविरा करके लघु व्यापारी निधि के लिए विस्तृत परिचालन फ्रेमवर्क को अगले तीन महीने के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा। इस सहयोगात्मक प्रक्रिया के माध्यम से पूंजी आवंटन के सटीक मानदंड, क्षेत्रीय प्राथमिकताएं और व्यापारी प्रोत्साहन संरचनाएं निर्धारित की जाएंगी। हितधारकों के साथ परामर्श से यह सुनिश्चित होगा कि योजना जमीनी स्तर पर वितरण संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करे।

क्या शून्य एमडीआर का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारी को जीएसटी के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है?

नहीं, यूपीआई लेन-देन पर शून्य एमडीआर सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत शून्य-रेटेड प्रोसेसिंग की पात्रता मासिक संग्रहण सीमा (प्रति माह ₹1 लाख तक) और बैंक खाता वर्गीकरण की ओर से निर्धारित की जाती है, चाहे कर पंजीकरण की स्थिति कुछ भी हो। अनिवार्य वैधानिक कर सीमा से नीचे काम करने वाले सूक्ष्म उद्यम जीएसटी दस्तावेज प्रदान किए बिना डिजिटल भुगतान संसाधित कर सकते हैं। इससे अनौपचारिक सूक्ष्म व्यवसायों को डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ने में आने वाली नियामक अनुपालन संबंधी बाधाओं से छूट मिलती है।

अधिग्रहण करने वाले बैंक शून्य एमडीआर के लिए पात्र छोटे व्यापारियों (पी2पीएम) की पहचान कैसे करेंगे?

अधिग्रहण करने वाले बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता, पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यापारियों के लिए प्रति माह ₹1 लाख की आने वाले लेन-देन सीमा की निगरानी के लिए लेन-देन गति जांच का इस्तेमाल करते हैं। लगातार 3 महीने तक प्रति माह ₹1 लाख से अधिक यूपीआई भुगतान का आने वाला क्रेडिट प्राप्त करने वाले व्यापारियों को औपचारिक रूप से पी2एम श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है?

हां, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पी2पीएम व्यापारियों की ओर से स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है। ग्रामीण भारत में डिजिटल तकनीक को प्रोत्साहन देना एक प्रमुख नीतिगत उद्देश्य बना हुआ है। सभी ग्रामीण दुकानदारों को सीमा छूट (₹2,000 से कम के भुगतान पर शून्य एमडीआर) का लाभ मिलेगा और प्रस्तावित समर्पित भुगतान प्रोत्साहन कोष के माध्यम से उन्हें अतिरिक्त मदद भी मिलेगी। इसके साथ ही, अधिग्रहण करने वाले बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय दुकानदारों पर लागत का बोझ काफी कम हो जाएगा।

बड़े वाणिज्यिक लेन-देन के लिए कौन सा एमडीआर लागू होता है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का मामूली एमडीआर लागू किया जाएगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा। यह 0.4% की दर क्रेडिट कार्ड या पेमेंट गेटवे जैसे वैकल्पिक भुगतान माध्यमों की तुलना में काफी कम है। इसके साथ ही, ₹2,000 की सीमा से कम के लेन-देन स्थापित व्यावसायिक संस्थाओं के लिए भी निःशुल्क रहेंगे। यह संतुलित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि उद्यम व्यापारी सिस्टम के रखरखाव में उचित योगदान दें, साथ ही दैनिक लेन-देन लागत को भी बेहद कम रखें।

क्या बहुत अधिक राशि वाले यूपीआई भुगतान पर अधिकतम शुल्क की कोई सीमा है?

हां, बड़े लेन-देन करने वाले उद्यमों की सुरक्षा के लिए, ₹75,000 और उससे अधिक के भुगतानों पर प्रति लेन-देन पर ₹300 की अधिकतम शुल्क सीमा निर्धारित की गई है। उदाहरण के लिए, ₹1,00,000 के लेन-देन पर ₹400 का प्रतिशत-आधारित शुल्क नहीं लगेगा; बल्कि, शुल्क ₹300 की निर्धारित सीमा पर ही समाप्त हो जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उच्च मूल्य के लेन-देन की लागत पूर्वानुमानित और प्रतिस्पर्धी बनी रहे।

प्रतिशत दर के बजाय निश्चित एमडीआर के लिए कौन सी विशिष्ट श्रेणियां पात्र हैं?

रेलवे, दूरसंचार सेवाएं, बीमा और ईंधन जैसी विशिष्ट व्यापारी श्रेणियों के लिए, 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेन-देन 5 रुपये का एक समान मासिक दर (एमडीआर) लागू होगा। 0.4% की परिवर्तनीय दर लागू करने के बजाय, ये विशिष्ट क्षेत्र लेन-देन राशि की परवाह किए बिना 5 रुपये का निश्चित शुल्क अदा करेंगे। यह एक समान दर मॉडल महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं, उपयोगिता बिल संग्रह और ईंधन खुदरा जैसे कम लाभ वाले क्षेत्रों में लागत बढ़ोतरी को रोकता है। यह सुनिश्चित करता है कि आवश्यक उपभोक्ता सेवाएं कम लागत वाली और डिजिटल रूप से कुशल बनी रहें।

क्या एंटरप्राइज मर्चेंट एमडीआर का बोझ खरीददार पर डाल सकते हैं?

नहीं, यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करते समय पंजीकृत व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ता केवल निर्धारित मूल्य का ही भुगतान करें।

सटीक लेन-देन (जैसे, ₹5,000 बनाम ₹1,00,000) पर एमडीआर की गणना कैसे की जाती है?

एमडीआर की गणना लेन-देन मूल्य सीमा के आधार पर एक स्पष्ट और अनुमानित सूत्र का पालन करती है। ₹3,000 की खरीदारी पर, 0.4% की दर लागू करने पर व्यापारी की ओर से अपने अधिग्रहण बैंक को ₹12 का एमडीआर शुल्क देना होता है। ₹50,000 की खरीदारी पर, 0.4% शुल्क ₹200 के बराबर होता है। हालांकि, ₹1,00,000 की उच्च-मूल्य वाली खरीदारी के लिए, 0.4% की गणना (जो ₹400 के बराबर है) ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा से अधिक हो जाती है (₹75,000 और उससे अधिक के भुगतान के लिए प्रति लेन-देन ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा है। ₹2,000 से कम के किसी भी लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं लगता है)।

मर्चेंट को भुगतान की गई राशिलागू एमडीआरमर्चेंट की ओर से भुगतान किया गया एमडीआर
₹ 2,000₹ 0
₹ 3,0000.40% ₹ 12
₹ 50,000 0.40% ₹ 200
₹ 75,000 और उससे अधिकनिश्चित ₹ 300 ₹ 300

क्या एमडीआर यूपीआई या क्रेडिट लाइन से जुड़े क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए गए लेन-देन पर लागू होता है?

क्रेडिट-लिंक्ड यूपीआई भुगतान, जैसे कि यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड या पूर्व-स्वीकृत बैंक क्रेडिट लाइनें, अलग क्रेडिट उत्पाद नियमों के अंतर्गत संचालित होते हैं। चूंकि क्रेडिट-लिंक्ड लेन-देन में जारीकर्ता बैंकों की ओर से वित्तपोषित अल्पकालिक लोन शामिल होते हैं, इसलिए वे मानक क्रेडिट कार्ड दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। इस संशोधन में चर्चा की गई एमडीआर विशेष रूप से यूजर्स खाते से व्यापारी खाते में सीधे किए जाने वाले यूपीआई लेन-देन पर लागू होती है।

यूपीआई के माध्यम से पूंजी बाजार लेन-देन पर कौन सी विशिष्ट एमडीआर दरें और सीमाएं लागू होती हैं?

म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों को किए जाने वाले भुगतानों सहित पूंजी बाजार लेन-देन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लेन-देन मूल्य का नाममात्र 0.02% निर्धारित किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है। औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए यह शुल्क मानक वाणिज्यिक लेन-देन दरों से कम है।

इस पूंजी बाजार एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत कौन सी संस्थाएं और लेन-देन के प्रकार शामिल हैं?

यह विशिष्ट एमडीआर श्रेणी पूंजी बाजारों में कार्यरत सभी विनियमित संस्थाओं को स्पष्ट रूप से कवर करती है, जिनमें एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (म्यूचुअल फंड), एसईबीआई-पंजीकृत स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज डीलर और निवेश प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह इक्विटी खरीद, डेट बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड खरीद और ब्रोकर वॉलेट टॉप-अप के लिए यूपीआई के माध्यम से किए गए फंड ट्रांसफर पर लागू होता है। इस श्रेणी को अलग से परिभाषित करके, यह सुनिश्चित किया जाता है कि पूंजी बाजार ट्रांसफर नियमित खुदरा खरीदारी या सामान्य सेवा भुगतानों से अलग हों।

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क्या बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष एमडीआर रियायतों के लिए पात्र हैं?

हां, यूपीआई के माध्यम से स्वीकार किए गए बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष निश्चित-दर की छूट के पात्र हैं। ₹2,000 से अधिक के बीमा प्रीमियम भुगतान पर, प्रतिशत-आधारित शुल्क के बजाय प्रति लेन-देन ₹5 का निश्चित एमडीआर लागू होता है। यह रियायती मॉडल सुनिश्चित करता है कि उच्च मूल्य के वार्षिक या अर्ध-वार्षिक बीमा भुगतान करने वाले पॉलिसीधारकों को भारी बैकएंड शुल्क का सामना न करना पड़े। बीमा कंपनियों को कम लागत वाले डिजिटल संग्रह से लाभ होता है, जिससे पूरे भारत में बीमा कवरेज का विस्तार करने में मदद मिलती है।

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर ईंधन की खरीद के लिए एमडीआर कैसे काम करता है?

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर की गई ईंधन खरीद पर ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 की एक समान रियायती दर लागू होती है। यह ₹5 की एक समान फीस पेट्रोल पंप संचालकों को टैंक रिफिल पर लगने वाले उच्च प्रोसेसिंग शुल्क से बचाती है। ₹2,000 से कम के सभी ईंधन भुगतानों पर एमडीआर 0% रहता है, जिससे रोजमर्रा के यात्रियों के लिए ईंधन भरना पूरी तरह से शुल्क-मुक्त हो जाता है, जबकि ईंधन स्टेशन संचालकों को ऐसे लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं देना पड़ता है।

क्या सरकारी उपयोगिता बिल संग्रह (बिजली, पानी) पर प्रतिशत एमडीआर लागू होगा?

बिजली वितरण, नगरपालिका जल शुल्क और पाइपलाइन की ओर से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस जैसे सार्वजनिक उपयोगिता भुगतान निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के उपयोगिता बिल भुगतानों पर 0.4% बदलाव दर के बजाय ₹5 का एक समान रियायती मासिक दर एमडीआर लागू होता है। ₹2,000 से कम के उपयोगिता लेन-देन पर कोई एमडीआर लागू नहीं होता है। यह फ्रेमवर्क सुनिश्चित करता है कि राज्य उपयोगिता बोर्ड और नगर निगम उच्च प्रसंस्करण शुल्क लगाए बिना बिल संग्रह को डिजिटल बना सकें, जिससे सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं सस्ती बनी रहें।

क्या शैक्षणिक संस्थान मानक एमडीआर प्रतिशत शुल्क से मुक्त हैं?

स्कूल ट्यूशन, विश्वविद्यालय सत्र शुल्क और संस्थागत प्रवेश परीक्षाओं सहित शैक्षणिक शुल्क संग्रह, निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर निश्चित-फीस संरचना या सीमित प्रोसेसिंग दरें लागू होती हैं, जिससे बड़ी राशि पर लगने वाले उच्च प्रतिशत-आधारित शुल्कों से बचा जा सकता है। ₹2,000 तक के शैक्षणिक लेन-देन पूरी तरह से एमडीआर से मुक्त हैं। यह उपाय सुनिश्चित करता है कि स्कूल, कॉलेज और छात्र भारी प्रशासनिक शुल्कों के बिना डिजिटल रूप से ट्यूशन फीस का भुगतान कर सकें।