केन्या के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कामकाज बंद करने का दिया आदेश, 100 साल पुराने कारोबार पर लगाया ब्रेक!

Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।

इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।

क्या है पूरा विवाद?

राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।

‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’

Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।

रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”

टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।

टाटा का बयान

हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।

टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार

लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

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विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

Adani Power Share: मोतीलाल ओसवाल ने Buy रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की, बुल केस में ₹305 का टारगेट दिया

Adani Power Share: ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अदाणी ग्रुप की पावर कंपनी Adani Power पर कवरेज शुरू करते हुए इसे ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹250 का टारगेट प्राइस रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 20% ज्यादा है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, बुल केस में यह 46.8% तक भी उछल सकता है। गुरुवार को अदाणी पावर 207.50 रुपये पर तकरीबन फ्लैट बंद हुआ। 2026 में अब तक शेयर करीब 40% चढ़ चुका है।

मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी की मजबूत ग्रोथ योजनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। Adani Power FY32 तक अपनी बिजली उत्पादन क्षमता 2.3 गुना बढ़ाकर 42 GW करना चाहती है। FY27 में 1.3 GW, FY28 में 1.6 GW और FY29 में 3.2 GW नई क्षमता जोड़ने का अनुमान है।

थर्मल पावर में तगड़ी पकड़

Adani Power भारत की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी है। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी की उत्पादन क्षमता 18 GW थी। भारत की कुल कोयला और लिग्नाइट वाली बिजली क्षमता में कंपनी की हिस्सेदारी 8% है। निजी क्षेत्र में यह हिस्सेदारी करीब 24% है।

कंपनी की 95% ऑपरेशनल क्षमता लंबे और मध्यम अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट यानी PPA से जुड़ी है। कंपनी बिजली वितरण कंपनियों यानी DISCOMs को बिजली बेचती है। साथ ही वह मर्चेंट मार्केट में भी बिजली की बिक्री करती है।

मोतीलाल ओसवाल क्यों है बुलिश?

ब्रोकरेज का मानना है कि Adani Power ने संकट में फंसे कई बिजली प्लांटों का अधिग्रहण कर उन्हें सफलतापूर्वक चलाया है। कंपनी की एक और बड़ी ताकत उसकी पूंजी खर्च रणनीति है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, कंपनी ने औसतन ₹3.5 करोड़ प्रति MW की लागत पर बिजली क्षमता का अधिग्रहण किया है। वहीं नया थर्मल पावर प्लांट बनाने में करीब ₹12 करोड़ प्रति MW खर्च आता है। कंपनी के न्यूक्लियर एनर्जी में उतरने की संभावना को भी ब्रोकरेज ने भविष्य के लिए एक अतिरिक्त अवसर माना है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा कैपेक्स साइकिल पूरी होने के बाद कंपनी का EBITDA करीब ₹80,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

बुल केस में ₹305 का टारगेट

अगर बिजली की कीमतें और प्लांट लोड फैक्टर अनुमान से बेहतर रहे, तो मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ₹305 का बुल केस टारगेट रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 46.8% ज्यादा है।

इसके उलट, कमजोर स्थिति में ब्रोकरेज ने ₹140 का बेयर केस टारगेट बताया है। यह पिछले बंद भाव से करीब 32.6% नीचे है।

जोखिम भी कम नहीं

ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की आने वाली थर्मल क्षमता में करीब 44% अभी किसी पावर खरीद समझौते से जुड़ी नहीं है। इससे बिजली की मांग और कीमतों को लेकर जोखिम बना हुआ है।

इसके अलावा, बड़े कैपेक्स, प्रोजेक्ट में देरी, लागत बढ़ने और पर्यावरण नियमों का पालन भी अहम जोखिम हैं। कंपनी को बिजली सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ता है।

फिलहाल Adani Power को कवर करने वाले 10 में से 9 एनालिस्ट्स ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। एक एनालिस्ट ने ‘Hold’ रेटिंग रखी है।

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Hero Motors लाएगी ₹1000 करोड़ का ही IPO, पैसों के इस्तेमाल में भी बदलाव

Hero Motors IPO: पावरट्रेन सॉल्यूशंस प्रोवाइडर हीरो मोटर्स ने अपने आईपीओ का साइज घटा दिया है। बाजार नियामक सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने पब्लिक इश्यू का साइज घटाकर ₹1000 करोड़ कर दिया है। हालांकि इसमें जो कटौती हुई है, वह फ्रेश इश्यू में हुई है यानी कि अब आईपीओ के तहत नए शेयर कम जारी होंगे जबकि ऑफर फॉर सेल इश्यू के तहत बिकने वाले शेयरों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कंपनी की योजना आईपीओ के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी करने की है तो ऑफर फॉर सेल के जरिए प्रमोटर्स ₹400 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

नियमों के तहत IPO Size में कितना बदलाव करने की है मंजूरी?

हीरो मोटर्स ने जून 2025 में बाजार नियामक सेबी के पास अपना आईपीओ ड्राफ्ट यानी डीआरएचपी दाखिल किया था। इसके जरिए कंपनी की योजना ₹1,200 करोड़ जुटाने की थी जिसमें ₹800 करोड़ के नए शेयर जारी होते तो ₹400 करोड़ के शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल के तहत होनी थी। इस साल 13 अप्रैल से लागू हुए नए नियमों के बाद, जिसके तहत कंपनियों को सेबी के पास ड्राफ्ट दोबारा दाखिल किए बिना फ्रेश इश्यू के साइज में 50% तक बदलाव करने की अनुमति है, हीरो मोटर्स ने 30 जुलाई को सेबी के पास आवेदन किया। कंपनी ने फ्रेश इश्यू का साइज कम करने और कुल ऑफर साइज में बदलाव की मंजूरी मांगी। फिर 27 अगस्त के अप्रूवल लेटर के बाद कंपनी ने आईपीओ के तहत फ्रेश इश्यू साइज ₹600 करोड़ से घटाकर ₹400 करोड़ कर दिया।

और क्या हुआ है आईपीओ में बदलाव

कंपनी ने ऑफर फॉर सेल के ढांचे में भी बदलाव किया है। यह बदलाव इश्यू के तहत शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स भाग्योदय इंवेस्टमेंट्स और ओपी मुंजाल होल्डिंग्स की 27 अगस्त की चिट्ठियों के बाद किया गया। भाग्योदय इंवेस्टमेंट्स ने ₹5 करोड़ तक के शेयर बेचने का अपना ऑफर वापस लेने का फैसला किया। वहीं ओपी मुंजाल होल्डिंग्स ने अपने ऑफर साइज को उतना ही बढ़ाकर ₹390 करोड़ से ₹395 करोड़ कर दिया है। अब इश्यू के तहत

ओपी मुंजाल होल्डिंग्स ₹395 करोड़ के शेयर और हीरो साइकिल्स ₹5 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

हीरो मोटर्स ने नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल में भी बदलाव किया है। अब आईपीओ से मिले ₹190 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी कर्ज हल्का करने और ₹200 करोड़ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में स्थित अपने प्लांट में कैपेसिटी बढ़ाने के लिए जरूरी इक्विपमेंट्स की खरीदारी में खर्च करेगी। बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में खर्च होंगे। वहीं ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा।

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भिड़े OpenAI और SpaceX, इस कारण टूटने जा रहा एआई सर्विसेज का कॉन्ट्रैक्ट

OpanAI vs SpaceX: चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई और एलॉन मस्क (Elon Musk) के स्पेसएक्स (SpaceX) के बीच की साझेदारी खत्म हो सकती है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओपनएआई स्पेसएक्स के कोडिंग-टूल कंपनी कर्सर (Cursor) को एआई मॉडल की उपलब्धता बंद करने की योजना बना रही है। इस कदम से ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एलॉन मस्क के बीच लंबे समय से चल रही कड़वाहट भरी टक्कर और बढ़ गई है। बता दें कि जून में स्पेसएक्स ने कर्सर बनाने वाले स्टार्टअप एनीस्फीयर (Anysphere) को $6 हजार करोड़ की ऑल-स्टॉक डील में खरीदने का ऐलान किया था और इस महीने की शुरुआत में यह अधिग्रहण पूरा हो गया।

OpanAI vs SpaceX: Cusror को क्यों बंद होगी सर्विसेज?

ओपनएआई ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि कर्सर को एआई मॉडल नहीं देने का फैसला इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं है कि स्पेसएक्स उनकी तकनीक का इस्तेमाल तय शर्तों के अनुसार करेगा। ओपनएआई ने यह भरोसा नहीं होने की वजह एलॉन मस्क की कंपनियों का ओपनएआई के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट्स की शर्तों के उल्लंघन के लंबे अनुभव को बताया। वहीं इस मामले को लेकर कर्सर के को-फाउंडर माइकल ट्रुएल (Michael Truell) का कहना है कि वह ओपनएआई के शुरुआती यूजर्स में से एक है और अब इसके साथ मौजूदा मुद्दे को सुलझाने के लिए वहीं ओपनएआई की टीम से बातचीत कर रहे हैं।

ओपनएआई का कहना है कि स्पेसएक्स जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम करने के लिए खास कॉन्ट्रैक्ट्स होता है और इसमें यह तय किया जाता है कि तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सुरक्षा के साथ किया जाए। ओपनएआई के मुताबिक कर्सर को उसकी सर्विसेज 12 नवंबर 2026 तक बंद की जा सकती है। ओपनएआई का कहना है कि कर्सर के साथ कॉन्ट्रैक्ट में स्वामित्व में बदलाव के बादसीमित समय में कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का अधिकार मिल गया है।

Elon Musk vs Sam Altman: लंबा है टकराव

एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच कई वर्षों से टकराव चल रही है, और यह कोर्ट केस तक पहुंच गया। सुनवाई के दौरान मस्क के वकील ने कहा था कि मस्क और दूसरे गवाहों ने ऑल्टमैन के झूठे होने की गवाही दी है तो ओपनएआई का कहना था कि मस्क कंपनी पर कंट्रोल चाहते थे।

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क ने ओपनएआई पर $15 हजार करोड़ का मुकदमा किया था। मस्क ने कंपनी और ऑल्टमैन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने फायदे के लिए कंपनी के मूल नॉन-प्रॉफिट मिशन से धोखाधड़ी करके एक चैरिटी को हड़प लिया। इस साल की शुरुआत में एक फेडरल जूरी ने मस्क के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि उन्होंने बहुत देर से केस फाइल किया था।

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ग्रेटर नोएडा में जमीन की मिलेगी अब ज्यादा कीमत, अथॉरिटी ने 50% बढ़ाया जमीन का मुआवजा, जानिए Noida से YEIDA तक नया रेट

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों के हित को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने किसानों की जमीन के मुआवजे की दर को 4,125 रुपये बढ़ाकर 6,415 रुपये प्रति वर्ग मीटर करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। जिससे मुआवजे की दर में रिकॉर्ड 55.5 फीसदी की वृद्धि हो गई है। वहीं इस फैसले के बाद से किसानों को अब पहले के मुकाबले काफी अधिक भुगतान मिलेगा। इसके साथ ही 6% आबादी प्लॉट की योजना दुबारा शुरू की गई है। 2016 में खत्म किए गए इस प्रावधान को अब दोबारा शुरू किया गया है।

इसके तहत जो किसान 6 फीसदी आबादी प्लॉट का ऑप्शन चुनेंगे, उन्हें 5,725 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की नई दर लागू होने से ग्रेटर नोएडा के विस्तार की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दुबारा शुरू हुई आबादी प्लॉट सुविधा

TOI से बात करते हुए GNIDA के एडिशनल CEO सुनील कुमार सिंह के बताया, आबादी प्लॉट सुविधा वर्ष 2016 में बंद कर दी गई थी, लेकिन किसानों की मांग को देखते हुए इसे फिर से लागू किया गया है। सिंह ने कहा, “जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उन्हें 6,415 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, 6 फीसदी आबादी प्लॉट का विकल्प चुनने वाले किसानों को अलग से विकसित किए गए आवासीय सेक्टरों में प्लॉट आवंटित किए जाएंगे।” बता दें, मुआवजे को लेकर किसानों और अथॉरिटी के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे।

कितने जमीन की जरूरत

अधिकारी ने बताया कि, शहर के दूसरे चरण के विकास के लिए करीब 40 हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। फिलहाल पहले चरण में 31,733 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा चुका है, जिसमें 117 गांव आते हैं। दूसरे चरण में 140 और गांवों को शामिल किया जाना है। यह काम पूरा होने के बाद ग्रेटर नोएडा का नियोजित क्षेत्र करीब 71 हजार हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा।

कई बड़े प्रोजेक्ट्स है शामिल

ग्रेटर नोएडा के पहले फेज में अथॉरिटी ने रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के साथ कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। इनमें दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की औद्योगिक टाउनशिप और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। अब दूसरे फेज में दादरी और सिकंदराबाद के आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत एक्वा लाइन के डिपो-बोडाकी कॉरिडोर के विस्तार के लिए भी जमीन ली जाएगी। इसके अलावा सिरसा गांव से यमुना अथॉरिटी क्षेत्र को जोड़ने वाली 130 मीटर चौड़ी सड़क के करीब 10 किलोमीटर के अधूरे हिस्से को पूरा करने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।

किसानों के लिए आसान बनाई जाएगी प्रक्रिया

आबादी प्लॉट को भी सामान्य रिहायशी प्लॉट की तरह ही विकसित किया जाएगा, ताकि किसानों को मिलने वाली जमीन व्यवस्थित तरीके से तैयार हो सके। जमीन की रजिस्ट्री अथॉरिटी के नाम होने के साथ किसानों को प्लॉट से जुड़ा रिजर्वेशन लेटर भी दिया जाएगा। इसके अलावा, जमीन खरीदने की पूरी प्रक्रिया को किसानों के लिए आसान बनाने की तैयारी है। इसके लिए एडिशनल CEO की निगरानी में एक अलग लैंड एक्विजिशन सेल बनाया जाएगा, जहां किसानों को जरूरी जानकारी और मदद मिल सकेगी। इससे उन्हें अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुआवजे की रकम में भी पारदर्शिता बरतते हुए भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा।

आबादी प्लॉट के लिए 40 से 2,500 वर्ग मीटर तक जमीन दी जाएगी। इसके अलावा, जमीन पर बने मकान या अन्य संपत्तियों के लिए किसानों को जमीन की कीमत के अलावा अलग से मुआवजा भी दिया जाएगा।

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

farakka barrage

मनीष कुमार, पटना

नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से हुई तबाही के बाद बिहार भी सहम सा गया है। बिहार सरकार ने पश्चिम बंगाल से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में गंगा नदी में जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। 23 अगस्त को हुई इस बातचीत के 24 घंटे के अंदर बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए, जिससे बिहार में नदियों का जलस्तर तेजी से कम हुआ। अब बिहार इस समझौते के नवीकरण की जगह नया समझौता चाहता है, जिसमें बिहार के बाढ़ प्रबंधन और अन्य मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

 

फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह और भागीरथी-हुगली जलमार्ग में नौ परिवहन के लिए गहराई बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। सोच यह थी कि हुगली नदी में पर्याप्त पानी पहुंचा कर कोलकाता बंदरगाह में गाद (सिल्ट) कम किया जाए। कालांतर में यह परियोजना बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई। ALSO READ: जर्मन और विदेशी कामगारों की कमाई में इतनी बड़ी खाई क्यों?

 

बिहार में बाढ़ की वजह बना फरक्का बैराज

भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह जल संधि की गई थी, जिसे फरक्का बैराज संधि कहा जाता है। इसका उद्देश्य दोनों देश के बीच पानी का बंटवारा करना था। पानी की उपलब्धता के अनुसार दोनों के हिस्से तय होते हैं। यह बैराज बंगाल में गंगा नदी पर बनाया गया है, लेकिन इसके कारण गंगा नदी के प्रवाह की गति पीछे की तरफ धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप नदी अपने साथ जो गाद लाती है, वह बैराज के पीछे बिहार में गंगा नदी की तलहटी में जमा हो जाती है।

 

बैराज के कारण गंगा व उसकी सहायक नदियांइस सिल्ट के कारण उथली होती जा रही हैं। मानसून में जब पानी बढ़ता है तो यही उथलापन, बाढ़ का कारण बन जाता है। इससे बिहार को दो तरफा नुकसान हो रहा है। शुष्क मौसम में पानी की कमी तथा मानसून में बाढ़। बिहार का कहना है कि इस बराज को या तो पूरी तरह हटा दिया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे गाद का बहाव सुचारू रूप से हो सके। ताकि, बिहार को बाढ़ की समस्या न झेलनी पड़े।

 

गंडक का जलस्तर तीन मीटर तक हो सकता है ऊंचा

इस बीच, बिहार सरकार ने नेपाल में फ्लैश फ्लड की आपदा और गंडक नदी में अचानक जल प्रवाह तेज होने की संभावना को देखते हुए बांधों तथा तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का आदेश दिया है। सीमावर्ती छह जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल की त्रिशूली नदी का भारी सैलाब गंडक की ओर बढ़ रहा है। इससे नारायणी नदी में भी पानी बढ़ गया है। यही नारायणी नदी बिहार में गंडक नदी कहलाती है।

 

गंडक नदी के जलस्तर में एक से तीन मीटर तक की भारी वृद्धि की आशंका है। जल संसाधन विभाग के अनुसार बुधवार की रात आठ बजे के बाद फ्लैश फ्लड का पानी आना शुरू हुआ और 12 बजे तक जल प्रवाह डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। राहत की बात हालांकि यह रही कि 12.30 बजे यह घटकर 1.42 लाख और एक बजे 1.29 लाख तथा दो 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। सुरक्षा के लिहाज से पश्चिम चंपारण जिला स्थित वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। ALSO READ: असम में क्यों हो रहा है इतना निवेश?

 

बिहार के बड़े क्षेत्र में पानी के फैलाव की आशंका

नेपाल से आने वाली ज्यादातर नदियों का बहाव बिहार की ओर ही है। वहीं बिहार में नदियां पहले से ही गाद से भरी हैं, इसलिए इस बार बड़ी आबादी को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। गंगा मुक्ति आंदोलन के संस्थापक ए प्रकाश का कहना है कि हर साल मानसून में नेपाल में होने वाली बारिश का खामियाजा बिहार के 20 जिलों को भुगतना पड़ता है। लेकिन, इसे रोका नहीं जा सकता है, बल्कि इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।

 

नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र कहते हैं, ‘‘नदियों को रोकने की कवायद बेकार है। उन्हें अपनी रौ में बहने देना चाहिए। हमें बांध बनाकर या तटबंधों को ऊंचा कर उन्हें रोकना चाहते हैं। इससे बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं होगा। नदी की तलहटी में गाद जमा हो रही है। जब तक गाद प्रबंधन नहीं होगा तब तक समस्या ज्यों की त्यों ही रहेगी।''

 

फरक्का पर तेज हुई राजनीति

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे को लेकर 30 साल पुराने इस समझौते की अवधि दिसंबर, 2026 में समाप्त हो रही है। अब इसके नवीनीकरण के समय बिहार की सियासत भी गर्म हो गई है। इसे लेकर जेडीयू और आरजेडी, दोनों ने एक दूसरे पर निशाना साधा है। जेडीयू सांसद संजय झा का कहना है कि 1996 में जब केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार ने बांग्लादेश के साथ यह समझौता किया था, तब लालू प्रसाद यादव केंद्र में काफी प्रभावशाली नेता थे। अगर, उस समय बिहार सरकार ने इस जलसंधि का मजबूती से विरोध किया होता तो राज्य को बीते तीन दशकों से बाढ़ और फिर सूखे की दोहरी मार नहीं झेलनी पड़ती।

 

इस पर पलटवार करते हुए आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया में एक बयान जारी कर नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन में दूरगामी प्रभाव वाले मुद्दों पर कभी ध्यान नहीं दिया। फरक्का के मुद्दे पर उन्होंने हमेशा चुप्पी साधे रखी। लालू ने संसद में अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस संधि को देशहित के खिलाफ बताते हुए कैसे इसे रद्द करने की मांग की थी। क्योंकि इसमें बिहार के भविष्य के खतरे को अनदेखा किया गया था।

CM योगी का सख्त निर्देश- विकास परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक्सप्रेसवे से डिजिटल लाइब्रेरी तक काम समय पर पूरा करें

CM योगी का सख्त निर्देश- विकास परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक्सप्रेसवे से डिजिटल लाइब्रेरी तक काम समय पर पूरा करें

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में प्रदेश में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल परियोजनाओं की घोषणा और स्वीकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक परियोजना को तय समय में जमीन पर उतारना और उसका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचाना है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, निविदा, विभागीय समन्वय अथवा अन्य स्तर पर लंबित कार्यों का तत्काल समाधान किया जाए और जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं है, उनकी नियमित समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में बेहतर कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 6 अगस्त को निविदा प्रकाशित हो चुकी है और सितंबर में इसका चयन किया जाना है। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक 1,339.04 हेक्टेयर भूमि में 1,222.25 हेक्टेयर, यानी 91.28 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 80.43 प्रतिशत, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 84.82 प्रतिशत और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 79.27 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने और परियोजनाओं को निर्धारित समय में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। 

 

मेरठ-हरिद्वार, विंध्य और विंध्य पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे की प्लानिंग के संबंध में बैठक में बताया गया कि सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है और अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को भूमि संबंधी कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि इन महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
 

ग्रेटर नोएडा के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, जिससे उत्तर प्रदेश देश और दुनिया की सप्लाई चेन का मजबूत केंद्र बन सके। उन्नाव के एक्वा बिजनेस प्रोजेक्ट की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। कानपुर के बिनगवां में 40 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पनकी पावर प्लांट को उपचारित जल उपलब्ध कराने की परियोजना का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में संबंधित विभागों के इंजीनियरों की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और अनुरक्षण में गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। 

 

स्वास्थ्य संस्थानों, अस्पतालों और होटल-गेस्ट हाउस में अग्नि सुरक्षा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने फायर एनओसी से संबंधित प्रभावी डिजिटल डेटाबेस तैयार करने तथा एनओसी की वैधता समाप्त होने से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए। 
 

लखनऊ में सीवर लाइन और मैनहोल के भीतर से गुजर रहे विद्युत एवं ओएफसी केबलों की स्थिति की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए। जहां भी केबल सीवर लाइन अथवा मैनहोल से गुजर रहे हैं, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार शिफ्ट किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यों में स्थानीय निकाय से एनओसी जरूर प्राप्त कर लें। 

 

विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां लाइन लॉस अत्यधिक हैं, वहां वास्तविक कारणों की पहचान कर ठोस कार्रवाई की जाए। बिजली चोरी, बिलिंग और वसूली की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए तथा अत्यधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों में डिस्कॉम के जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए।
 

ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हें ग्रामीण विद्यार्थियों और युवाओं के लिए अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल लाइब्रेरियों से जुड़े सभी आवश्यक कार्य 30 सितंबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। 

 

जीरो पावर्टी अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चिन्हित सभी परिवारों को आवास की सुविधा मिलनी चाहिए। जिन पात्र परिवारों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं है, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा पात्र परिवारों को राशन, आयुष्मान कार्ड, शौचालय, आवास और अन्य संबंधित योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा परिवार के कम से कम एक सदस्य को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का प्रयास हो। बैठक में बताया गया कि 12.50 लाख चिन्हित परिवारों में नौ लाख परिवार आवास के लिए पात्र पाए गए हैं। इनमें 4.50 लाख लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची में है, जबकि करीब पांच लाख परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित किया जाना है। 6.67 लाख परिवारों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। बीओसीडब्ल्यू में पंजीकृत परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने की कार्रवाई आगे बढ़ी है। 

 

श्रमिकों के लिए संचालित लेबर अड्डों की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लेबर अड्डों का सर्वे कर वहां पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, स्नान, चिकित्सा और भोजन जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। श्रमिकों के लेबर कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में मेडिकल मोबाइल यूनिट, मोबाइल कैंटीन और आवश्यकतानुसार अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। चंदौली में निर्मित फिश मार्केट के संचालन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तैयार परिसंपत्तियों का तत्काल और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। 

 

गोरखपुर में निर्माणाधीन 30 हजार क्षमता वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि निर्माण कार्य दिसंबर 2025 में शुरू हुआ है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाना है। इसी तरह मेरठ के मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विभिन्न नीतियों के तहत देय वित्तीय प्रोत्साहनों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों को नीति के अनुरूप स्वीकृत वित्तीय प्रोत्साहन समय पर जारी किए जाएं। 

 

राजस्व विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत और पैमाइश से जुड़े मामलों का निस्तारण आम नागरिक के अधिकार और संपत्ति से सीधे जुड़ा विषय है। उन्होंने मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रयागराज में निरस्त किए गए विरासत संबंधी आवेदनों की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निरस्तीकरण की पूरी कार्रवाई मेरिट के आधार पर ही हुई हो और पात्र व्यक्ति किसी भी स्थिति में अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। बैठक में बताया गया कि निर्विवाद विरासत के मामलों में सर्वाधिक 13,386 आवेदन प्रयागराज में निरस्त किए गए हैं। पैमाइश से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने और प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व अधिकारियों की नियमित समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमि संबंधी विवाद अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

Happiest Minds के शेयर 6 फीसदी फिसले, इस खबर के बाद शेयर में बढ़ी बिकवाली

हैपिएस्ट माइंड्स के शेयरों में 27 अगस्त को बड़ी गिरावट आई। सीएनबीसी-आवाज ने खबर दी की आईटीसी इंफोटेक इसके प्रमोटर की हिस्सेदारी खरीदेगी। यह डील प्रति शेयर 390-400 की कीमत पर हो सकती है। इस खबर के बाद शेयर में गिरावट आई।

इस डील को अगले हफ्ते मिल सकती है बोर्ड की मंजूरी

सीएनबीसी-आवाज ने खबर दी कि कंपनी का बोर्ड इस डील को अगले हफ्ते मंजूरी दे सकता है। उसने यह बताया कि हैपिएस्ट माइंड्स शेयर बाजार से डीलिस्ट हो सकती है। 27 अगस्त को हैपिएस्ट माइंड्स के शेयर 6.26 फीसदी गिरकर 419.80 रुपये पर बंद हुए। बीते एक साल में यह शेयर करीब 26 फीसदी चढ़ा है।

22 फीसदी हिस्सेदारी सीधे तौर पर खरीदने का प्लान 

खबर के मुताबिक, ITC Infotech हैपिएस्ट माइंड्स में प्रमोटर की 22 फीसदी हिस्सेदारी सीधे तौर पर खरीदेगी। कंपनी में प्रमोटर की 44 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी 22 फीसदी शेयरों के लिए आईटीसी इंफोटेक अपने शेयर ऑफर कर सकती है। उसके बाद कंपनी को ओपन ऑफर लाना होगा।

आईटीसी इंफोटेक खुद को शेयर बाजार में लिस्ट करा सकती है

सीएनबीसी-आवाज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ITC Infotech अलग से शेयर बाजार में खुद को लिस्ट करा सकती है। पिछले महीने मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि आईटीसी इंफोटेक इस आईटी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में आगे है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, हैपिएस्ट माइंड्स के फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरमैन अशोक सूता की कंपनी में सीधे तौर पर 32 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। उनकी 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी दूसरे प्रमोटर होल्डिंग्स के जरिए है।

हाई ग्रोथ वाले बिजनेसेज में आईटीसी इंफोटेक की स्थिति मजबूत होगी

Ashok Soota Medical Research LLP की हैपिएस्ट माइंड्स में करीब 11.8 फीसदी हिस्सेदारी है। अगर यह डील होती है तो यह डिजिटल इंजीनियरिंग और एआई-आधारित टेक्नोलॉजी सर्विसेज बिजनेस के विस्तार पर आईटीसी इंफोटेक का सबसे बड़ा दांव होगा। हैपिएस्ट माइंड्स में हिस्सेदारी खरीदने से क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे ज्यादा ग्रोथ वाले क्षेत्रों में आईटीसी इंफोटेक की स्थिति मजबूत होगी।

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2011 में हुई थी हैपिएस्ट माइंड्स की शुरुआत

ITC Infotech ने अक्तूबर 2024 में क्लाउड सर्विसेज कंपनी Blazeclan Technologies का अधिग्रहण 485 करोड़ रुपये में किया था। जहां तक Happiest Minds की बात है तो इस डील से करीब एक दशक के बाद कंपनी के कंट्रोल में बदलाव होगा। इस कंपनी की शुरुआत में 2011 में अशोक सूता ने की थी। इस कंपनी का हेडक्वार्टर बेंगलुरु है।