ग्रेटर नोएडा में जमीन की मिलेगी अब ज्यादा कीमत, अथॉरिटी ने 50% बढ़ाया जमीन का मुआवजा, जानिए Noida से YEIDA तक नया रेट

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने किसानों के हित को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने किसानों की जमीन के मुआवजे की दर को 4,125 रुपये बढ़ाकर 6,415 रुपये प्रति वर्ग मीटर करने के फैसले को मंजूरी दे दी है। जिससे मुआवजे की दर में रिकॉर्ड 55.5 फीसदी की वृद्धि हो गई है। वहीं इस फैसले के बाद से किसानों को अब पहले के मुकाबले काफी अधिक भुगतान मिलेगा। इसके साथ ही 6% आबादी प्लॉट की योजना दुबारा शुरू की गई है। 2016 में खत्म किए गए इस प्रावधान को अब दोबारा शुरू किया गया है।

इसके तहत जो किसान 6 फीसदी आबादी प्लॉट का ऑप्शन चुनेंगे, उन्हें 5,725 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। मुआवजे की नई दर लागू होने से ग्रेटर नोएडा के विस्तार की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

दुबारा शुरू हुई आबादी प्लॉट सुविधा

TOI से बात करते हुए GNIDA के एडिशनल CEO सुनील कुमार सिंह के बताया, आबादी प्लॉट सुविधा वर्ष 2016 में बंद कर दी गई थी, लेकिन किसानों की मांग को देखते हुए इसे फिर से लागू किया गया है। सिंह ने कहा, “जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जाएगी, उन्हें 6,415 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, 6 फीसदी आबादी प्लॉट का विकल्प चुनने वाले किसानों को अलग से विकसित किए गए आवासीय सेक्टरों में प्लॉट आवंटित किए जाएंगे।” बता दें, मुआवजे को लेकर किसानों और अथॉरिटी के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे।

कितने जमीन की जरूरत

अधिकारी ने बताया कि, शहर के दूसरे चरण के विकास के लिए करीब 40 हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। फिलहाल पहले चरण में 31,733 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा चुका है, जिसमें 117 गांव आते हैं। दूसरे चरण में 140 और गांवों को शामिल किया जाना है। यह काम पूरा होने के बाद ग्रेटर नोएडा का नियोजित क्षेत्र करीब 71 हजार हेक्टेयर तक पहुंच जाएगा।

कई बड़े प्रोजेक्ट्स है शामिल

ग्रेटर नोएडा के पहले फेज में अथॉरिटी ने रेजिडेंशियल, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट के साथ कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। इनमें दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की औद्योगिक टाउनशिप और मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं। अब दूसरे फेज में दादरी और सिकंदराबाद के आसपास के क्षेत्रों में विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत एक्वा लाइन के डिपो-बोडाकी कॉरिडोर के विस्तार के लिए भी जमीन ली जाएगी। इसके अलावा सिरसा गांव से यमुना अथॉरिटी क्षेत्र को जोड़ने वाली 130 मीटर चौड़ी सड़क के करीब 10 किलोमीटर के अधूरे हिस्से को पूरा करने के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज होने की उम्मीद है।

किसानों के लिए आसान बनाई जाएगी प्रक्रिया

आबादी प्लॉट को भी सामान्य रिहायशी प्लॉट की तरह ही विकसित किया जाएगा, ताकि किसानों को मिलने वाली जमीन व्यवस्थित तरीके से तैयार हो सके। जमीन की रजिस्ट्री अथॉरिटी के नाम होने के साथ किसानों को प्लॉट से जुड़ा रिजर्वेशन लेटर भी दिया जाएगा। इसके अलावा, जमीन खरीदने की पूरी प्रक्रिया को किसानों के लिए आसान बनाने की तैयारी है। इसके लिए एडिशनल CEO की निगरानी में एक अलग लैंड एक्विजिशन सेल बनाया जाएगा, जहां किसानों को जरूरी जानकारी और मदद मिल सकेगी। इससे उन्हें अलग-अलग सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। मुआवजे की रकम में भी पारदर्शिता बरतते हुए भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा।

आबादी प्लॉट के लिए 40 से 2,500 वर्ग मीटर तक जमीन दी जाएगी। इसके अलावा, जमीन पर बने मकान या अन्य संपत्तियों के लिए किसानों को जमीन की कीमत के अलावा अलग से मुआवजा भी दिया जाएगा।

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

farakka barrage

मनीष कुमार, पटना

नेपाल और तिब्बत में बाढ़ से हुई तबाही के बाद बिहार भी सहम सा गया है। बिहार सरकार ने पश्चिम बंगाल से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेपाल के जल अधिग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से कई जिलों में गंगा नदी में जलस्तर में वृद्धि को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से फरक्का बैराज के सभी गेट खोलने की मांग की है। 23 अगस्त को हुई इस बातचीत के 24 घंटे के अंदर बैराज के सभी फाटक खोल दिए गए, जिससे बिहार में नदियों का जलस्तर तेजी से कम हुआ। अब बिहार इस समझौते के नवीकरण की जगह नया समझौता चाहता है, जिसमें बिहार के बाढ़ प्रबंधन और अन्य मुद्दों को प्राथमिकता दी जाए।

 

फरक्का बैराज का निर्माण 1975 में मुख्य रूप से कोलकाता बंदरगाह और भागीरथी-हुगली जलमार्ग में नौ परिवहन के लिए गहराई बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। सोच यह थी कि हुगली नदी में पर्याप्त पानी पहुंचा कर कोलकाता बंदरगाह में गाद (सिल्ट) कम किया जाए। कालांतर में यह परियोजना बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बीच जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई। ALSO READ: जर्मन और विदेशी कामगारों की कमाई में इतनी बड़ी खाई क्यों?

 

बिहार में बाढ़ की वजह बना फरक्का बैराज

भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह जल संधि की गई थी, जिसे फरक्का बैराज संधि कहा जाता है। इसका उद्देश्य दोनों देश के बीच पानी का बंटवारा करना था। पानी की उपलब्धता के अनुसार दोनों के हिस्से तय होते हैं। यह बैराज बंगाल में गंगा नदी पर बनाया गया है, लेकिन इसके कारण गंगा नदी के प्रवाह की गति पीछे की तरफ धीमी हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप नदी अपने साथ जो गाद लाती है, वह बैराज के पीछे बिहार में गंगा नदी की तलहटी में जमा हो जाती है।

 

बैराज के कारण गंगा व उसकी सहायक नदियांइस सिल्ट के कारण उथली होती जा रही हैं। मानसून में जब पानी बढ़ता है तो यही उथलापन, बाढ़ का कारण बन जाता है। इससे बिहार को दो तरफा नुकसान हो रहा है। शुष्क मौसम में पानी की कमी तथा मानसून में बाढ़। बिहार का कहना है कि इस बराज को या तो पूरी तरह हटा दिया जाए या फिर ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे गाद का बहाव सुचारू रूप से हो सके। ताकि, बिहार को बाढ़ की समस्या न झेलनी पड़े।

 

गंडक का जलस्तर तीन मीटर तक हो सकता है ऊंचा

इस बीच, बिहार सरकार ने नेपाल में फ्लैश फ्लड की आपदा और गंडक नदी में अचानक जल प्रवाह तेज होने की संभावना को देखते हुए बांधों तथा तटबंधों की 24 घंटे निगरानी का आदेश दिया है। सीमावर्ती छह जिलों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। नेपाल की त्रिशूली नदी का भारी सैलाब गंडक की ओर बढ़ रहा है। इससे नारायणी नदी में भी पानी बढ़ गया है। यही नारायणी नदी बिहार में गंडक नदी कहलाती है।

 

गंडक नदी के जलस्तर में एक से तीन मीटर तक की भारी वृद्धि की आशंका है। जल संसाधन विभाग के अनुसार बुधवार की रात आठ बजे के बाद फ्लैश फ्लड का पानी आना शुरू हुआ और 12 बजे तक जल प्रवाह डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंच गया। राहत की बात हालांकि यह रही कि 12.30 बजे यह घटकर 1.42 लाख और एक बजे 1.29 लाख तथा दो 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। सुरक्षा के लिहाज से पश्चिम चंपारण जिला स्थित वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। ALSO READ: असम में क्यों हो रहा है इतना निवेश?

 

बिहार के बड़े क्षेत्र में पानी के फैलाव की आशंका

नेपाल से आने वाली ज्यादातर नदियों का बहाव बिहार की ओर ही है। वहीं बिहार में नदियां पहले से ही गाद से भरी हैं, इसलिए इस बार बड़ी आबादी को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ सकती है। गंगा मुक्ति आंदोलन के संस्थापक ए प्रकाश का कहना है कि हर साल मानसून में नेपाल में होने वाली बारिश का खामियाजा बिहार के 20 जिलों को भुगतना पड़ता है। लेकिन, इसे रोका नहीं जा सकता है, बल्कि इसका प्रभाव कम किया जा सकता है।

 

नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र कहते हैं, ‘‘नदियों को रोकने की कवायद बेकार है। उन्हें अपनी रौ में बहने देना चाहिए। हमें बांध बनाकर या तटबंधों को ऊंचा कर उन्हें रोकना चाहते हैं। इससे बाढ़ की समस्या का समाधान नहीं होगा। नदी की तलहटी में गाद जमा हो रही है। जब तक गाद प्रबंधन नहीं होगा तब तक समस्या ज्यों की त्यों ही रहेगी।''

 

फरक्का पर तेज हुई राजनीति

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल के बंटवारे को लेकर 30 साल पुराने इस समझौते की अवधि दिसंबर, 2026 में समाप्त हो रही है। अब इसके नवीनीकरण के समय बिहार की सियासत भी गर्म हो गई है। इसे लेकर जेडीयू और आरजेडी, दोनों ने एक दूसरे पर निशाना साधा है। जेडीयू सांसद संजय झा का कहना है कि 1996 में जब केंद्र की संयुक्त मोर्चा सरकार ने बांग्लादेश के साथ यह समझौता किया था, तब लालू प्रसाद यादव केंद्र में काफी प्रभावशाली नेता थे। अगर, उस समय बिहार सरकार ने इस जलसंधि का मजबूती से विरोध किया होता तो राज्य को बीते तीन दशकों से बाढ़ और फिर सूखे की दोहरी मार नहीं झेलनी पड़ती।

 

इस पर पलटवार करते हुए आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद ने सोशल मीडिया में एक बयान जारी कर नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि नीतीश ने अपने राजनीतिक जीवन में दूरगामी प्रभाव वाले मुद्दों पर कभी ध्यान नहीं दिया। फरक्का के मुद्दे पर उन्होंने हमेशा चुप्पी साधे रखी। लालू ने संसद में अपने एक पुराने भाषण का वीडियो साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस संधि को देशहित के खिलाफ बताते हुए कैसे इसे रद्द करने की मांग की थी। क्योंकि इसमें बिहार के भविष्य के खतरे को अनदेखा किया गया था।

CM योगी का सख्त निर्देश- विकास परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक्सप्रेसवे से डिजिटल लाइब्रेरी तक काम समय पर पूरा करें

CM योगी का सख्त निर्देश- विकास परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक्सप्रेसवे से डिजिटल लाइब्रेरी तक काम समय पर पूरा करें

Yogi adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन की बैठक में प्रदेश में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल परियोजनाओं की घोषणा और स्वीकृति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक परियोजना को तय समय में जमीन पर उतारना और उसका वास्तविक लाभ जनता तक पहुंचाना है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि अधिग्रहण, निविदा, विभागीय समन्वय अथवा अन्य स्तर पर लंबित कार्यों का तत्काल समाधान किया जाए और जिन परियोजनाओं की प्रगति अपेक्षित गति से नहीं है, उनकी नियमित समीक्षा कर जवाबदेही तय की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में बेहतर कनेक्टिविटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, निवेश, रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 6 अगस्त को निविदा प्रकाशित हो चुकी है और सितंबर में इसका चयन किया जाना है। फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे के लिए आवश्यक 1,339.04 हेक्टेयर भूमि में 1,222.25 हेक्टेयर, यानी 91.28 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। आगरा-लखनऊ-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 80.43 प्रतिशत, झांसी लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 84.82 प्रतिशत और जेवर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए 79.27 प्रतिशत भूमि प्राप्त हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने और परियोजनाओं को निर्धारित समय में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। 

 

मेरठ-हरिद्वार, विंध्य और विंध्य पूर्वांचल स्पर एक्सप्रेसवे की प्लानिंग के संबंध में बैठक में बताया गया कि सत्यापन का कार्य पूरा हो चुका है और अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी है। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को भूमि संबंधी कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि इन महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
 

ग्रेटर नोएडा के मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाए, जिससे उत्तर प्रदेश देश और दुनिया की सप्लाई चेन का मजबूत केंद्र बन सके। उन्नाव के एक्वा बिजनेस प्रोजेक्ट की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए। कानपुर के बिनगवां में 40 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से पनकी पावर प्लांट को उपचारित जल उपलब्ध कराने की परियोजना का कार्य पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में संबंधित विभागों के इंजीनियरों की क्षमता निर्माण पर भी ध्यान दिया जाए, ताकि परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और अनुरक्षण में गुणवत्ता सुनिश्चित हो सके। 

 

स्वास्थ्य संस्थानों, अस्पतालों और होटल-गेस्ट हाउस में अग्नि सुरक्षा की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने फायर एनओसी से संबंधित प्रभावी डिजिटल डेटाबेस तैयार करने तथा एनओसी की वैधता समाप्त होने से पहले नवीनीकरण की प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए। 
 

लखनऊ में सीवर लाइन और मैनहोल के भीतर से गुजर रहे विद्युत एवं ओएफसी केबलों की स्थिति की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिक सुविधाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे में सुरक्षा मानकों का पूरा ध्यान रखा जाए। जहां भी केबल सीवर लाइन अथवा मैनहोल से गुजर रहे हैं, उन्हें निर्धारित मानकों के अनुसार शिफ्ट किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कार्यों में स्थानीय निकाय से एनओसी जरूर प्राप्त कर लें। 

 

विद्युत व्यवस्था की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां लाइन लॉस अत्यधिक हैं, वहां वास्तविक कारणों की पहचान कर ठोस कार्रवाई की जाए। बिजली चोरी, बिलिंग और वसूली की व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए तथा अत्यधिक लाइन लॉस वाले क्षेत्रों में डिस्कॉम के जिम्मेदार अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जाए।
 

ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हें ग्रामीण विद्यार्थियों और युवाओं के लिए अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल ज्ञान के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डिजिटल लाइब्रेरियों से जुड़े सभी आवश्यक कार्य 30 सितंबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। 

 

जीरो पावर्टी अभियान की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चिन्हित सभी परिवारों को आवास की सुविधा मिलनी चाहिए। जिन पात्र परिवारों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में नहीं है, उन्हें मुख्यमंत्री आवास योजना से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा पात्र परिवारों को राशन, आयुष्मान कार्ड, शौचालय, आवास और अन्य संबंधित योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाए तथा परिवार के कम से कम एक सदस्य को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने का प्रयास हो। बैठक में बताया गया कि 12.50 लाख चिन्हित परिवारों में नौ लाख परिवार आवास के लिए पात्र पाए गए हैं। इनमें 4.50 लाख लोगों का नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची में है, जबकि करीब पांच लाख परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित किया जाना है। 6.67 लाख परिवारों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। बीओसीडब्ल्यू में पंजीकृत परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाने की कार्रवाई आगे बढ़ी है। 

 

श्रमिकों के लिए संचालित लेबर अड्डों की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रमिकों को सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी लेबर अड्डों का सर्वे कर वहां पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, स्नान, चिकित्सा और भोजन जैसी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। श्रमिकों के लेबर कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। प्रत्येक नगर निगम क्षेत्र में मेडिकल मोबाइल यूनिट, मोबाइल कैंटीन और आवश्यकतानुसार अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। चंदौली में निर्मित फिश मार्केट के संचालन की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तैयार परिसंपत्तियों का तत्काल और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए। 

 

गोरखपुर में निर्माणाधीन 30 हजार क्षमता वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना को निर्धारित समय में पूरा करने के साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जाए। बैठक में बताया गया कि निर्माण कार्य दिसंबर 2025 में शुरू हुआ है और इसे दिसंबर 2027 तक पूरा किया जाना है। इसी तरह मेरठ के मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। विभिन्न नीतियों के तहत देय वित्तीय प्रोत्साहनों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशकों को नीति के अनुरूप स्वीकृत वित्तीय प्रोत्साहन समय पर जारी किए जाएं। 

 

राजस्व विभाग की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत और पैमाइश से जुड़े मामलों का निस्तारण आम नागरिक के अधिकार और संपत्ति से सीधे जुड़ा विषय है। उन्होंने मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से प्रयागराज में निरस्त किए गए विरासत संबंधी आवेदनों की जांच कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निरस्तीकरण की पूरी कार्रवाई मेरिट के आधार पर ही हुई हो और पात्र व्यक्ति किसी भी स्थिति में अनावश्यक रूप से प्रभावित न हो। बैठक में बताया गया कि निर्विवाद विरासत के मामलों में सर्वाधिक 13,386 आवेदन प्रयागराज में निरस्त किए गए हैं। पैमाइश से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने और प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजस्व अधिकारियों की नियमित समीक्षा के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाए कि भूमि संबंधी विवाद अनावश्यक रूप से लंबित न रहें।

Happiest Minds के शेयर 6 फीसदी फिसले, इस खबर के बाद शेयर में बढ़ी बिकवाली

हैपिएस्ट माइंड्स के शेयरों में 27 अगस्त को बड़ी गिरावट आई। सीएनबीसी-आवाज ने खबर दी की आईटीसी इंफोटेक इसके प्रमोटर की हिस्सेदारी खरीदेगी। यह डील प्रति शेयर 390-400 की कीमत पर हो सकती है। इस खबर के बाद शेयर में गिरावट आई।

इस डील को अगले हफ्ते मिल सकती है बोर्ड की मंजूरी

सीएनबीसी-आवाज ने खबर दी कि कंपनी का बोर्ड इस डील को अगले हफ्ते मंजूरी दे सकता है। उसने यह बताया कि हैपिएस्ट माइंड्स शेयर बाजार से डीलिस्ट हो सकती है। 27 अगस्त को हैपिएस्ट माइंड्स के शेयर 6.26 फीसदी गिरकर 419.80 रुपये पर बंद हुए। बीते एक साल में यह शेयर करीब 26 फीसदी चढ़ा है।

22 फीसदी हिस्सेदारी सीधे तौर पर खरीदने का प्लान 

खबर के मुताबिक, ITC Infotech हैपिएस्ट माइंड्स में प्रमोटर की 22 फीसदी हिस्सेदारी सीधे तौर पर खरीदेगी। कंपनी में प्रमोटर की 44 फीसदी हिस्सेदारी है। बाकी 22 फीसदी शेयरों के लिए आईटीसी इंफोटेक अपने शेयर ऑफर कर सकती है। उसके बाद कंपनी को ओपन ऑफर लाना होगा।

आईटीसी इंफोटेक खुद को शेयर बाजार में लिस्ट करा सकती है

सीएनबीसी-आवाज की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ITC Infotech अलग से शेयर बाजार में खुद को लिस्ट करा सकती है। पिछले महीने मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि आईटीसी इंफोटेक इस आईटी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने की दौड़ में आगे है। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, हैपिएस्ट माइंड्स के फाउंडर और एग्जिक्यूटिव चेयरमैन अशोक सूता की कंपनी में सीधे तौर पर 32 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी है। उनकी 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी दूसरे प्रमोटर होल्डिंग्स के जरिए है।

हाई ग्रोथ वाले बिजनेसेज में आईटीसी इंफोटेक की स्थिति मजबूत होगी

Ashok Soota Medical Research LLP की हैपिएस्ट माइंड्स में करीब 11.8 फीसदी हिस्सेदारी है। अगर यह डील होती है तो यह डिजिटल इंजीनियरिंग और एआई-आधारित टेक्नोलॉजी सर्विसेज बिजनेस के विस्तार पर आईटीसी इंफोटेक का सबसे बड़ा दांव होगा। हैपिएस्ट माइंड्स में हिस्सेदारी खरीदने से क्लाउड, डेटा, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे ज्यादा ग्रोथ वाले क्षेत्रों में आईटीसी इंफोटेक की स्थिति मजबूत होगी।

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2011 में हुई थी हैपिएस्ट माइंड्स की शुरुआत

ITC Infotech ने अक्तूबर 2024 में क्लाउड सर्विसेज कंपनी Blazeclan Technologies का अधिग्रहण 485 करोड़ रुपये में किया था। जहां तक Happiest Minds की बात है तो इस डील से करीब एक दशक के बाद कंपनी के कंट्रोल में बदलाव होगा। इस कंपनी की शुरुआत में 2011 में अशोक सूता ने की थी। इस कंपनी का हेडक्वार्टर बेंगलुरु है।

ऐतिहासिक रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा DDA, जानिए कितनी है इसकी फीस और कौन-कैसे कर सकता है अप्लाई

DDA Roshanara Club Lifetime Membership: दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ऐतिहासिक डीडीए रोशनआरा क्लब की लाइफटाइम मेंबरशिप खोलने जा रहा है। कुल 750 सीटों के लिए यह मेंबरशिप स्कीम शुरू की जा रही है, जिसके जरिए दिल्लीवासियों को इस ऐतिहासिक क्लब की वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स, फिटनेस और रिक्रिएशनल सुविधाओं का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।

अगर आप भी 100 साल से ज्यादा पुराने और भारतीय क्रिकेट के इतिहास से जुड़े इस क्लब का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो जानिए फीस, योग्यता और ऑनलाइन आवेदन की पूरी प्रक्रिया।

मेंबरशिप कैटेगरी और फीस स्ट्रक्चर

डीडीए की ओर से कुल 750 लाइफटाइम मेंबरशिप दो अलग-अलग श्रेणियों में दी जा रही हैं:

नॉन-गवर्नमेंट कैटेगरी: आम नागरिकों और प्राइवेट सेक्टर के लोगों के लिए कुल 400 सीटें रखी गई हैं। इसके लिए मेंबरशिप चार्ज ₹12.50 लाख + GST तय किया गया है।

गवर्नमेंट / पीएसयू कैटेगरी: सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 350 सीटें रिजर्व हैं। इसकी फीस ₹4 लाख + GST है।

कब से शुरू होंगे आवेदन और कैसे करें अप्लाई?

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 28 अगस्त 2026 की रात 12:00 बजे से शुरू होगी।आवेदक 27 अक्टूबर 2026 (रात 11:59 बजे) तक अपना फॉर्म और फीस जमा कर सकते हैं। इच्छुक लोग केवल डीडीए के आधिकारिक पोर्टल के जरिए ही अप्लाई कर सकते हैं।

आधिकारिक लिंक: [https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx](https://online.dda.org.in/golfcourse/RoshanaraClub/RoshanaraClubHome.aspx)

क्लब में मिलेंगी कौन-कौन सी स्पोर्ट्स सुविधाएं?

22 एकड़ में फैले हरे-भरे रोशनआरा क्लब में सदस्यों को इन खेलों और फिटनेस गतिविधियों की सुविधा मिलेगी:

आउटडोर व इनडोर गेम्स: मेन क्रिकेट पिच और प्रैक्टिस पिच, टेनिस, स्क्वॉश, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, पिकलबॉल, बिलियर्ड्स और कार्ड रूम।

फिटनेस व स्विमिंग: स्विमिंग पूल, बच्चों के लिए टॉडलर पूल, मल्टी-जिम, फिटनेस सेंटर और योग क्लासेस।

कोचिंग फैसिलिटी: उभरते खिलाड़ियों के लिए योग्य कोचों द्वारा कोचिंग की सुविधा भी दी जाएगी। साथ ही क्रिकेट ग्राउंड को टूर्नामेंट्स और कॉरपोरेट इवेंट्स के लिए भी बुक किया जा सकेगा।

सोशल और क्लब हाउस सुविधाएं

स्पोर्ट्स के अलावा क्लब हाउस में सदस्यों के मनोरंजन और सोशल गैदरिंग के लिए ये सुविधाएं होंगी:

  • लाउंज, रेस्टोरेंट, कैफे और डाइनिंग एरिया
  • बार और बैंक्वेट सुविधाएं
  • किड्स जोन

क्या है रोशनआरा क्लब का इतिहास?

22 एकड़ का ऐतिहासिक परिसर और 100 साल से भी पुराना यह क्लब भारतीय क्रिकेट के शुरुआती इतिहास से जुड़ा हुआ है। इस क्लब को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के जन्मस्थान के रूप में जाना जाता है। डीडीए ने 29 सितंबर 2023 को इस ऐतिहासिक क्लब का आधिकारिक रूप से अधिग्रहण कर लिया था।

DDA रोशनआरा क्लब मेंबरशिप डिटेल्स

कुल उपलब्ध मेंबरशिप: 750

आम नागरिक फीस: ₹12.50 लाख + GST (400 सीटें)

सरकारी कर्मचारी फीस: ₹4.00 लाख + GST (350 सीटें)

रजिस्ट्रेशन शुरू होने की तिथि: 28 अगस्त 2026

रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि: 27 अक्टूबर 2026

क्लब का कुल क्षेत्रफल: 22 एकड़

दिल्ली के उपराज्यपाल के ‘ईज ऑफ लिविंग’ और एक्टिव लाइफस्टाइल को बढ़ावा देने के विजन के तहत यह कदम उठाया गया है। दिल्ली के 18 स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 3 गोल्फ कोर्स चलाने वाला DDA अब खेल प्रेमियों को देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक क्लबों में से एक का हिस्सा बनने का यह सुनहरा मौका दे रहा है।

TCS Share Price: पोर्शे के साथ बड़ी डील के बाद भी क्यों गिरा TCS का शेयर? सिटी और HSBC ने जताई ये बड़ी चिंता

TCS MHP Deal Porsche: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयर में मंगलवार सुबह शुरुआती बढ़त के बाद गिरावट देखने को मिली। पोर्शे की कंसल्टिंग सहायक कंपनी MHP के 320 मिलियन यूरो यानी करीब ₹3573 करोड़ के अधिग्रहण के बाद वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने सतर्क रुख अपनाया है।

एनालिस्ट का मानना है कि इस डील से यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में TCS की पकड़ मजबूत होगी, लेकिन MHP के घटते रेवेन्यू और इंटीग्रेशन की चुनौतियों को लेकर ब्रोकरेज हाउस काफी चिंतित हैं।

आज 25 अगस्त, मंगलवार को मार्केट खुलने के साथ ही  TCS के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। शेयर NSE पर 0.7% गिरकर ₹2,268 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। साल 2026 में अब तक TCS का शेयर करीब 29.2% टूट चुका है।

डील में क्या-क्या है शामिल?

TCS ने जर्मन लग्जरी कार निर्माता पोर्शे की कंपनी MHP Management- und IT-Beratung GmbH की 100% हिस्सेदारी करीब ₹3573 करोड़ में खरीदी है। इस अधिग्रहण के साथ ही पोर्शे ने MHP और TCS के साथ 5 साल के लिए करीब ₹14000 करोड़ का रणनीतिक समझौता भी किया है।

ब्रोकरेज हाउसेस का क्या है कहना?

अधिग्रहण की खबर के बाद प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज फर्मों ने TCS के शेयर पर अपनी रेटिंग और टारगेट प्राइस जारी किए हैं:

सिटी ने TCS के शेयरों को बेचना की सलाह बरकरार रखी है, जो इसके करेंट भाव से करीब 20% की गिरावट का संकेत देता है। ब्रोकरेज का कहना है कि MHP का रेवेन्यू साल 2024 के 830 मिलियन यूरो से घटकर 2025 में 742 मिलियन यूरो रह गया है। गिरता रेवेन्यू TCS के लिए जोखिम बन सकता है। Citi का टारगेट प्राइस ₹1825 का है।

वहीं HSBC ने निवेशकों को TCS के शेयर होल्ड करने की सलाह दी है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस डील से TCS की यूरोप के ऑटोमोटिव सेक्टर में मौजूदगी तो बढ़ेगी, लेकिन कंपनी के प्रति शेयर आय पर तुरंत कोई बड़ा असर नहीं दिखेगा। साथ ही दोनों कंपनियों का विलय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। HSBC का टारगेट प्राइस ₹2350 का है।

क्या करती है MHP कंपनी?

MHP एक ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल कंसल्टिंग कंपनी है, जिसके पास 4,500 से अधिक कर्मचारी हैं। यह कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, SAP और मैन्युफैक्चरिंग डिजिटलाइजेशन के क्षेत्र में काम करती है।

आईटी सेक्टर के लिए क्या हैं चुनौतियां?

यह डील ऐसे समय में हुई है जब पूरी भारतीय आईटी इंडस्ट्री टेक खर्च में सुस्ती और जेनेरिक एआई के कारण आ रहे बदलावों से जूझ रही है। MHP के कम वैल्युएशन पर मिलने की मुख्य वजह भी इसके घटते रेवेन्यू का रिस्क ही है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि भले ही पोर्शे के साथ लंबी अवधि के सौदे से TCS को भविष्य में रेवेन्यू का सपोर्ट मिलेगा, लेकिन MHP के गिरते बिजनेस को वापस पटरी पर लाना और इसका TCS के साथ तालमेल बिठाना कंपनी प्रबंधन के लिए एक बड़ी परीक्षा होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UP-Japan Relations: CM योगी का बड़ा प्लान, जापानी निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

UP-Japan Relations: CM योगी का बड़ा प्लान, जापानी निवेश और पर्यटन को मिलेगी नई रफ्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापानी कंपनियों के निवेश और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सोमवार को इन्वेस्ट यूपी व अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार 240 लोगों के प्रतिनिधिमंडल का प्रदेश में आगमन हुआ। इस यात्रा में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच सकारात्मक माहौल का सृजन हुआ। जापान से आए अतिथियों ने उत्तर प्रदेश में आए सकारात्मक बदलावों की सराहना की। ऐसे में जापान व उत्तर प्रदेश के बीच निरंतर संवाद कर निवेश के माध्यम से युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए। 

 

बैठक में मुख्यमंत्री जी को जापान के प्रतिनिधिमंडल की ओर से किए गए सभी एमओयू के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया गया कि इस दौरे का मुख्य फोकस निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, तकनीक, कौशल विकास, शिक्षा और पर्यटन में सहयोग बढ़ाने पर रहा।

 

मुख्यमंत्री जी ने यीडा के अंतर्गत जापानी सिटी के लिए भूमि अधिग्रहण के संबंध में जानकारी ली। अधिकारियों ने अवगत कराया कि 500 एकड़ में से 350 एकड़ से अधिक भूमि का अधिग्रहण पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री जी ने इस कार्य को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापान में सितंबर, अक्टूबर व दिसंबर में होने वाले विभिन्न वैश्विक आयोजन में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को भी भेजा जाए। इसमें मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, उद्योगपतियों के साथ ही संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापानी भाषा के प्रशिक्षण तथा स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया जाए। यामानाशी प्रांत सहित जापान के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं को सुदृढ़ किया जाए। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इन्वेस्ट यूपी में अलग से यामानाशी जापान डेस्क बनाई जाए। इसके जरिए निरंतर संवाद होता रहे। उन्होंने हर तीसरे महीने इसकी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी लेने का निर्देश दिया। 

 

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जापानी पर्यटकों को उत्तर प्रदेश के बौद्ध स्थलों पर जाने के लिए अच्छी सुविधाएं दी जाएं। एक ऐसा रूट विकसित किया जाए, जिससे वे एक साथ सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु समेत अधिक से अधिक बौद्ध स्थलों का दर्शन कर सकें। 

 

मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिया कि आगामी ट्रेड शो में जापानी विशेषज्ञों के साथ विशेष सत्र आयोजित किए जाएं, जिससे युवाओं को उनके अनुभवों का लाभ प्राप्त हो सके।  मुख्यमंत्री जी ने कहाकि यूनेस्को ने सारनाथ की भांति जापान के नारा को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। दोनों को परस्पर सांस्कृतिक रूप से जोड़ने के लिए कदम उठाए जाएं।  मुख्यमंत्री जी ने द्विपक्षीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर प्रदेश एवं यामानाशी प्रांत के टूर ऑपरेटरों के मध्य बढ़ावा देने हेतु आवश्यक कदम उठाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट में पर्यटन गतिविधियों को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाए।

टाटा की TCS ने Porsche की MHP को ₹3573 करोड़ में खरीदा, 10 महीने में तीसरी बड़ी डील

टाटा ग्रुप की Tata Consultancy Services (TCS) ने 24 अगस्त को जर्मन कार कंपनी Porsche की सब्सिडियरी MHP Management- und IT-Beratung GmbH को खरीदने का ऐलान किया। यह सौदा 320 मिलियन यूरो यानी करीब ₹3,573 करोड़ की एंटरप्राइज वैल्यू पर हुआ है। TCS MHP के 100% शेयर खरीदेगी। डील अगले 3-4 महीने में पूरी होने की उम्मीद है।

4,500 कर्मचारियों वाली कंपनी है MHP

MHP ऑटोमोटिव और इंडस्ट्रियल सेक्टर की कंसल्टिंग कंपनी है। इसका काम बिजनेस कंसल्टिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, AI, सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी, SAP और मैन्युफैक्चरिंग डिजिटाइजेशन से जुड़ा है।

CY2025 में MHP का टर्नओवर करीब €742 मिलियन रहा। कंपनी में करीब 4,500 कर्मचारी हैं। MHP की मौजूदगी जर्मनी के अलावा रोमानिया, ब्रिटेन, अमेरिका, भारत और मैक्सिको में भी है।

Porsche के साथ ₹13,959 करोड़ की पार्टनरशिप

MHP के अधिग्रहण के साथ Porsche ने TCS और MHP के साथ 5 साल की रणनीतिक पार्टनरशिप भी की है। इसकी कुल वैल्यू €1.25 अरब यानी करीब ₹13,959 करोड़ है।

इस साझेदारी का फोकस AI ट्रांसफॉर्मेशन पर रहेगा। इसमें नई पीढ़ी की मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड मोबिलिटी पर खास ध्यान दिया जाएगा।

10 महीने में TCS की तीसरी बड़ी डील

MHP TCS की पिछले 10 महीनों में तीसरी बड़ी अधिग्रहण डील है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर में Salesforce कंसल्टिंग और AI सॉल्यूशन कंपनी Coastal Cloud को $700 मिलियन में खरीदा था। इससे पहले ListEngage MidCo का करीब $72.8 मिलियन में खरीदा था।

MHP की डील के साथ TCS ने 10 महीनों में अधिग्रहण पर $1 अरब से ज्यादा खर्च कर दिया है।

TCS के शेयरों का हाल

TCS के शेयर सोमवार को 0.91% की गिरावट के साथ 2,281 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 महीने में स्टॉक 1.18% चढ़ा है। हालांकि, 1 साल में यह 27.37% टूट चुका है। कंपनी का मार्केट कैप 8.26 हजार करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NHC Foods का रेवेन्यू 73% बढ़कर ₹601 करोड़ पहुंचा, एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

एग्री कमोडिटी सेक्टर की कंपनी NHC Foods Ltd ने पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 73% बढ़कर ₹601 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹348 करोड़ था। कंपनी का बिना ऑडिट वाला कंसोलिडेटेड मुनाफा ₹12 करोड़ से ज्यादा रहा।

कंपनी का EBITDA बढ़कर ₹21.95 करोड़ हो गया। एक साल पहले यह ₹16.42 करोड़ था। यानी इसमें 34% की बढ़ोतरी हुई। बेसिक EPS ₹0.20 प्रति शेयर रहा।

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सत्यम शिरीषचंद्र जोशी ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजे कंपनी के मजबूत बिजनेस फंडामेंटल्स को दिखाते हैं। उनके मुताबिक ऑपरेशनल दक्षता और क्वालिटी पर फोकस का असर सीधे वित्तीय प्रदर्शन में दिखा है। उन्होंने कहा कि बाजार की प्रतिक्रिया निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत करती है।

FCCB कन्वर्जन से बढ़ा कैपिटल बेस

कंपनी ने Global Focus Fund को 10.41 करोड़ पूरी तरह चुकता इक्विटी शेयर आवंटित किए हैं। यह आवंटन 11 लाख डॉलर के FCCB के आंशिक कन्वर्जन के बाद हुआ। इसके बाद कंपनी की पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल बढ़कर ₹76.19 करोड़ हो गई।

एग्री कमोडिटी कारोबार में विस्तार

कंपनी के बोर्ड ने AgriConnect Solutions Pvt Ltd में प्रस्तावित निवेश और अधिग्रहण के लिए लेटर ऑफ इंटेंट को मंजूरी दी है। यह कंपनी एग्री कमोडिटीज की सप्लाई और ट्रेडिंग के कारोबार में है। कंपनी का मानना है कि इससे इस सेगमेंट में उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

कंपनी का बिजनेस क्या है

NHC Foods Ltd एग्री कमोडिटी एक्सपोर्ट और फूड ट्रेडिंग सेक्टर की कंपनी है। यह मसाले, तिलहन, अनाज, दालें, चीनी, चाय, कॉफी और दूसरी कृषि जिंसों की खरीद, प्रोसेसिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी B2B मॉडल के जरिए कुछ देशों में फूड प्रोडक्ट्स का निर्यात करती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।