Compaq की धमाकेदार वापसी! लॉन्च किया 11,000mAh बैटरी वाला QTab Ultra लॉन्च, जानें कीमत

कभी PC की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाने वाला Compaq अब करीब दो दशक बाद नए अंदाज में वापसी कर रहा है। साल 2002 में HP के अधिग्रहण के बाद लगभग गायब हो चुका यह ब्रांड अब इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस मार्केट में अपनी दूसरी पारी शुरू करने की तैयारी में है। इस बार Compaq की नजर एंट्री-लेवल Android डिवाइसेस पर है और कंपनी ने इसी कड़ी में Compaq QTab Ultra 12.6 Android Tablet लॉन्च किया है।

Compaq QTab Ultra की खूबियां

लेटेस्ट Compaq QTab Ultra में 12.6 इंच की InCell AMOLED डिस्प्ले दी गई है। इसका रेजोल्यूशन 1600 x 2560 पिक्सल है। बड़ी स्क्रीन की वजह से इस टैबलेट पर वीडियो देखने और गेमिंग का मजा तो लिया ही जा सकता है, साथ ही यह पढ़ाई, ड्रॉइंग और ऑफिस के काम के लिए भी काफी उपयोगी हो सकता है।

कॉम्पैक का यह टैब Android 15 पर रन करता है, जो 5GHz Wi-Fi, Bluetooth 5.0, GPS और USB-C सपोर्ट के साथ आता है। इस टैब को कंपनी ने 11,000mAh की बैटरी के साथ लॉन्च किया है, जो 500 घंटे तक स्टेंडबाय टाइम का बैकअप ऑफर करता है। यह टैब 18W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है।

इसके अलावा, इस टैब में स्टायलस पेन और प्रोटेक्टिव केस भी मिलेगा। साथ ही इसमें एक्सटर्नल कीबोर्ड का भी सपोर्ट दिया गया है। यह टैब 12GB RAM और 512 GB की इंटरनल स्टोरेज के साथ आता है। टैब में microSD कार्ड का स्लॉट भी दिया गया है, जो 2TB तक स्टोरेज सपोर्ट करता है।

Compaq QTab Ultra की कीमत

कीमत की बात करें तो, Compaq QTab Ultra 12.6 को फिलहाल मैक्सिको में MXN 8,499 (करीब 48,000 रुपये) की कीमत पर लॉन्च किया गया है। कंपनी टैबलेट के साथ प्रोटेक्टिव केस, स्टायलस, पावर अडैप्टर और चार्जिंग केबल भी दे रही है। हालांकि, अभी Compaq ने दूसरे देशों के बाजार में इस टैबलेट की लॉन्चिंग को लेकर कोई जानकारी नहीं दी है।

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Online Instruments के आईपीओ को सेबी की मंजूरी, 750 करोड़ जुटाएगी कंपनी

ऑनलाइन इंस्ट्रूमेंट्स (इंडिया) के आईपीओ को सेबी की मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने सेबी के पास इस साल मई में ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए थे। कंपनी का आईपीओ 750 करोड़ रुपये का हो सकता है। इसमें कंपनी इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू करेगी। इसमें ऑफर फॉर सेल भी होगा।

ऑनलाइन इंस्ट्रूमेंट्स बेंगलुरु की कंपनी है, जो ऑडियो-विजुअल सिस्टम इंटिग्रेशन सॉल्यूशन ऑफर करती है। कंपनी के प्रमोटर्स अनीता महेश बेलाड और राजेश्वरी शिवानंद महेशेट ऑफर फॉर सेल (OFS) में 57.1 लाख तक शेयर बेचेंगी। कंपनी प्री-आईपीओ प्लेसमेंट से भी 150 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है।

कंपनी आईपीओ से जुटाए पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के साथ ही कुछ दूसरी जरूरतों के लिए करेगी। इसमें सामान्य कारोबारी जरूरतों के साथ ही अधिग्रहण का प्लान भी शामिल है। इक्विरस कैपिटल और मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर्स हैं। यह इश्यू ऐसे वक्त आ रहा है, जब आईपीओ बाजार में काफी हलचल है।

इस बीच, मुंबई की कंपनी सुनील गोल्ड इंडिया ने आईपीओ के पेपर्स वापस ले लिए हैं। यह कंपनी हैंड क्राफ्टेड ज्वेलरी की सप्लाई करती है। कंपनी ने 14 अगस्त को आईपीओ के लिए ड्राफ्ट पेपर्स फाइल किए थे। बाद में कंपनी ने पेपर्स वापस लेने का फैसला किया। कंपनी इनवेस्टर्स को नए 2 करोड़ शेयर्स जारी करने वाली थी। कंपनी का प्लान ऑफर फॉर सेल के जरिए भी शेयरों की बिक्री का था।

पटना से मैक्सिको तक का सफर, बिहार में जन्मे IIT ग्रेजुएट 4 बिजनेस शुरू करने के लिए छोड़ी Uber की नौकरी

बिहार में जन्मे एक एंटरप्रेन्योर की कहानी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है। उनकी कहानी उनके जीजाजी ने X (पहले ट्विटर) पर शेयर की है। इस कहानी में IIT दिल्ली से पढ़ाई और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में 10 साल के करियर के बाद मेक्सिको में चार बिजनेस चलाने तक का सफर शामिल है।

पटना के रहने वाले 33 साल के विजीत सुमन ने Uber में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़्रॉड प्रिवेंशन (धोखाधड़ी रोकने) के क्षेत्र में बिजनेस शुरू किए। हाल ही में उनके जीजाजी राहुल राज ने X पर उनकी उपलब्धियों के बारे में पोस्ट किया, जिससे उनका यह अनोखा करियर सफर वायरल हो गया और लोगों का ध्यान इस ओर गया।

IIT दिल्ली से लेकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में 10 साल का सफर

टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपना करियर शुरू करने से पहले सुमन ने IIT दिल्ली से टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की थी। उन्होंने पेमेंट और फ़्रॉड प्रिवेंशन के क्षेत्र में 10 साल से ज़्यादा समय तक काम किया और कंपनियों को अरबों डॉलर से जुड़े फाइनेंशियल क्राइम से निपटने में मदद की। उनके प्रोफेशनल सफर में ऐसी कंपनियों में काम करना भी शामिल है, जिन्हें बाद में दूसरी कंपनियों ने खरीद लिया था, जैसे Falabella द्वारा Linio और Uber द्वारा Cornershop का अधिग्रहण।

लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया में कई साल बिताने के बाद, सुमन ने एक अलग रास्ता चुनने का फ़ैसला किया। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में पहला कदम तब रखा जब वे टेक सेक्टर में काम कर रहे थे।

इसकी शुरुआत मैक्सिको में भारतीय खाने से हुई

2023 में, सुमन और उनके बिज़नेस पार्टनर अर्पित खुराना ने मैक्सिको सिटी में ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) शुरू किया। यह आइडिया विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक आम समस्या से आया: घर जैसा स्वाद वाला खाना मिलना। न तो सुमन और न ही खुराना को रेस्टोरेंट चलाने का कोई अनुभव था, लेकिन जल्द ही उनके बिज़नेस को शादियों और दूसरे इवेंट्स में कैटरिंग के लिए रिक्वेस्ट मिलने लगीं।

जो एक रेस्टोरेंट के तौर पर शुरू हुआ था, वह आगे चलकर कई बिज़नेस में से पहला बिज़नेस बन गया। 2024 तक, सुमन ने पूरी तरह से एंटरप्रेन्योरशिप पर ध्यान देने के लिए उबर (Uber) छोड़ दिया। वे एक बिज़नेस से चार बिज़नेस तक पहुंचे।

कॉर्पोरेट दुनिया छोड़ने के बाद, सुमन ने मैक्सिको सिटी में ‘संतुलन’ (Santulan) नाम का एक योग स्टूडियो शुरू किया।

शुरुआत में यह स्टूडियो एक छोटा सा वेंचर था, लेकिन जल्द ही कस्टमर्स ने पिलेट्स रिफॉर्मर क्लास की मांग की। बिज़नेस का विस्तार हुआ और सुमन के अनुसार, दो साल के भीतर यह मैक्सिको सिटी के सबसे ज़्यादा रेटिंग वाले स्टूडियो में से एक बन गया। उनकी तीसरी कंपनी एक और समस्या के समाधान के तौर पर शुरू हुई, जिसका सामना उन्हें स्टूडियो चलाते समय करना पड़ा था।

बिज़नेस को मैनेज करने के लिए सही सॉफ़्टवेयर न मिलने पर, सुमन ने अपना खुद का सॉफ़्टवेयर बनाया। बाद में दूसरे स्टूडियो मालिकों ने भी इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई, जिससे ‘क्लासियस’ (Klasius) बना – यह स्टूडियो मैनेजमेंट पर केंद्रित एक सॉफ़्टवेयर बिज़नेस है।

अपने चौथे वेंचर के साथ वे उस फील्ड में वापस लौटे जिसे वे सबसे अच्छी तरह जानते थे।

सुमन और उनके तीन दोस्तों ने ‘फोर्टिफाई’ (Fortify) नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया, जो धोखाधड़ी रोकने पर केंद्रित था। एंटरप्रेन्योर के अनुसार, कंपनी अब मेक्सिको की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक के साथ पायलट प्रोग्राम चला रही है। इस तरह सुमन अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ — इंडियन फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़ाइनेंशियल टेक्नोलॉजी — में चार बिज़नेस चला रहे थे।

300 मेहमानों वाली शादी एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई

इस सफ़र के सबसे यादगार पलों में से एक तब आया जब ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) ने 300 से ज़्यादा मेहमानों वाली एक शादी में कैटरिंग की। उस स्तर पर यह टीम का पहला बड़ा इवेंट था। कैटरिंग के इस सफल काम से बिज़नेस का कॉन्फिडेंस काफ़ी बढ़ा, खासकर तब जब मेहमानों ने टीम से कहा कि खाने ने उन्हें दिल्ली की याद दिला दी।

भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर शुरू किए गए बिज़नेस के लिए, लोगों की इस प्रतिक्रिया ने ‘अरोमा करी’ को शुरू करने के मूल मकसद को और मज़बूत किया। फिर उनके जीजाजी ने उनके बारे में पोस्ट किया। जब सुमन के जीजा राहुल राज ने X पर उनकी कहानी शेयर की, तो यह बहुत से लोगों तक पहुंची।

इस पोस्ट में बताया गया कि कैसे वे IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल से मैक्सिको में कई बिज़नेस चलाने वाले एंटरप्रेन्योर बने। सुमन के अनुसार, इस पोस्ट ने तेज़ी से लोगों का ध्यान खींचा और इसे 1,00,000 से ज़्यादा बार देखा गया। उन्होंने बताया कि इस अचानक मिली चर्चा की वजह से उन्हें ऐसे लोगों के मैसेज भी मिले जिनसे उन्होंने कॉलेज के बाद से बात नहीं की थी। इस अप्रत्याशित वायरल मोमेंट ने परिवार के एक सदस्य की पोस्ट को उनके अनोखे करियर सफ़र के बारे में एक बड़ी चर्चा में बदल दिया।

चार किरदार, एक अनोखी ‘वाइब’ और ढेर सारे सवाल, ‘वाइब’ का नया पोस्टर किया जारी, कल रिलीज होगा टीजर

अमेजन एमजीएम स्टूडियोज ने आज अपनी आने वाली थिएटर फिल्म ‘वाइब’ का टीजर पोस्टर जारी किया है। यह पोस्टर कुणाल खेमू की इस हाई-स्टेक्स एक्शन कॉमेडी की एक और झलक दिखाता है और साथ ही कई सवाल भी खड़े करता है कि आखिर इस अनोखी चौकड़ी के साथ क्या होने वाला है।

नए पोस्टर में प्रीति जिंटा एक दमदार बॉस-लेडी अवतार में नजर आ रही हैं, वहीं इसके बिल्कुल उलट कुणाल खेमू, स्पर्श श्रीवास्तव और वंशिका धीर काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं। इससे इशारा मिल रहा है कि आखिर वे जिस मुसीबत में फंसे हैं, वह पूरी तरह से उनके हाथ से निकल चुकी है।

‘वाइब’ की कहानी दो ऐसे जिगरी दोस्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी सीधी-सादी जिंदगी अचानक एक अनजान और हाई-एनर्जी एडवेंचर में बदल जाती है। यह सफर उनकी जान बचाने की काबिलियत और उनकी दोस्ती, दोनों की कड़ी परीक्षा लेता है।

कुणाल खेमू ने फिल्म को लिखा और डायरेक्ट किया है। ‘वाइब’ को कुणाल खेमू और चिराग निहलानी ने ड्रोंगो फिल्म्स के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। फिल्म में कुणाल खेमू के साथ प्रीति जी जिंटा, स्पर्श श्रीवास्तव और डेब्यू कर रहीं वंशिका धीर लीड रोल में हैं। कल टीजर रिलीज होने वाला है और इसके साथ ही फिल्म दर्शकों को एक हाई-एनर्जी एडवेंचर पर ले जाने के लिए तैयार है। अमेजन एमजीएम स्टूडियोज की फिल्म ‘वाइब’ 18 सितंबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

अमेजन एमजीएम स्टूडियोज के बारे में

अमेजन एमजीएम स्टूडियोज एक प्रमुख एंटरटेनमेंट कंपनी है, जो फिल्मों और टीवी कंटेंट के निर्माण और दुनियाभर में डिस्ट्रीब्यूशन पर फोकस करती है। इसकी ओरिजिनल सीरीज प्राइम वीडियो पर रिलीज होती हैं, जिसे दुनियाभर के 240 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में सैकड़ों तरह के कंपैटिबल डिवाइस पर देखा जा सकता है। अमेजन एमजीएम स्टूडियोज थिएटर रिलीज और खास तौर पर प्राइम वीडियो के लिए ओरिजिनल फिल्मों का निर्माण और अधिग्रहण भी करता है। इसके अलावा, अमेजन एमजीएम स्टूडियोज प्रीमियम पे टेलीविजन नेटवर्क एमजीएम+ के लिए भी कंटेंट तैयार करता है।

ड्रोंगो फिल्म्स के बारे में

ड्रोंगो फिल्म्स एक प्रोडक्शन बैनर है, जिसे एक्टर-डायरेक्टर-राइटर कुणाल खेमू और प्रोड्यूसर चिराग निहलानी ने मिलकर शुरू किया है। यह दोनों की ईमानदार और दिलचस्प कहानियां पेश करने के जुनून से बना है। क्रिएटिविटी और बिजनेस के बीच संतुलन बनाने के विजन के साथ यह कंपनी ऐसी कहानियों को सपोर्ट करने पर फोकस करती है, जो असली, दिलचस्प और सोच-समझकर तैयार की गई हों। क्रिएटिविटी के साथ-साथ मजबूत और साफ तरीके से काम करने पर फोकस करते हुए ड्रोंगो फिल्म्स ऐसी नई और दिल को छू लेने वाली कहानियों को पर्दे पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में अपनी छाप छोड़ें।

Credent IPO Listing: लिस्ट होते ही अपर सर्किट, ₹189 का शेयर डबल

Credent Connect N Care IPO Listing: हेल्थकेयर सर्विसेज और लॉजिस्टिक्स कंपनी क्रीडेंट कनेक्ट एन केयर के शेयरों की आज NSE SME प्लेटफॉर्म पर धांसू एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 153 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹189 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज NSE SME पर इसकी ₹359.10 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 90% का लिस्टिंग गेन (Credent Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर यह ₹377.05 (Credent Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 99.50% मुनाफे में हैं।

Credent IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

क्रीडेंट कनेक्ट एन केयर का ₹94 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 13-17 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 153.13 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 130.40 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 216.97 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 138.86 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 49.68 लाख नए शेयर जारी हुए हैं। इन शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹26.80 करोड़ पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी क्रीडेंट हेल्थकेयर के वर्किंग कैपिटल को लेकर निवेश, ₹3.00 करोड़ क्रीडेंट हेल्थकेयर की मशीनरी, 37.00 करोड़ अपनी वर्किंग कैपिटल की जरूरतों, ₹6.00 करोड़ कर्ज हल्का करने और बाकी पैसे आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Credent Connect N Care के बारे में

क्रीडेंट कनेक्ट एन केयर लिमिटेड एक हेल्थकेयर सर्विसेज और लॉजिस्टिक्स कंपनी है। इसकी शुरुआत जून 2015 में क्रीडेंट कोल्ड चेन लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड के रूप में हुई थी। यह मुख्य रूप से बी2बी मॉडल पर काम करती है। इसके ग्राहक डाइग्नॉस्टिक लैब, आईवीडी कंपनियां, फार्मा कंपनियां, अस्पताल, क्लीनिक और हेल्थकेयर से जुड़ी कंपनियां हैं। इसका कारोबार देश भर में फैला हुआ है। क्रीडेंट हेल्थकेयर, क्रीडेंट टीम और आलट्रैक टेक के अधिग्रहण के जरिए इसनें अपनी क्षमता भी बढ़ाई है। कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो वित्त वर्ष 2025 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 15.41% घटकर ₹2.25 करोड़ पर आ गया लेकिन टोटल इनकम 2.91% उछलकर ₹78.23 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2025 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹7.42 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹15.70 करोड़ पड़े थे।

NSE IPO: देश का 31500 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ इस तारीख को आएगा

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Solar Panel Cost: अब सोलर पैनल लगवाना महंगा होगा! ICRA ने कहा- 20% तक बढ़ सकती है लागत

Solar Panel Cost: देश में बड़े सोलर प्रोजेक्ट लगाना आने वाले महीनों में महंगा पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का कहना है कि अगले 6 से 8 महीनों में इनकी लागत करीब 20% तक बढ़ सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन की जगह घरेलू सोलर सेल का इस्तेमाल है। वहीं पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी धातुएं भी महंगी हो गई हैं।

ICRA के मुताबिक, सरकार के नए नियमों के बाद डेवलपर्स को अब घरेलू सोलर सेल खरीदने पड़ रहे हैं। ये आयातित सेल के मुकाबले काफी महंगे हैं। इसका असर सीधे मॉड्यूल और पूरे प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है।

घरेलू सोलर सेल क्यों बढ़ा रहे हैं खर्च?

ICRA का कहना है कि घरेलू सोलर सेल की कीमत आयातित सेल से 6-7 सेंट प्रति वॉट यानी करीब 5-6 रुपये प्रति वॉट ज्यादा है।

एजेंसी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गिरीशकुमार कदम के मुताबिक, घरेलू सेल से बने मॉड्यूल की लैंडेड कॉस्ट करीब 22.5 सेंट प्रति वॉट (करीब 19 रुपये) है। वहीं आयातित सेल वाले मॉड्यूल की लागत करीब 16 सेंट प्रति वॉट (करीब 13.5 रुपये) पड़ती है। उनका कहना है कि अगले कुछ महीनों में दिखने वाली लागत बढ़ोतरी का सबसे बड़ा हिस्सा इसी बदलाव से आएगा।

सरकार के नए नियम का क्या असर है?

सरकार ने 1 जून 2026 से नया नियम लागू किया है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में अब सिर्फ ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) में शामिल कंपनियों के घरेलू सोलर सेल ही इस्तेमाल किए जाएंगे।

हालांकि कुछ ओपन एक्सेस और नेट मीटरिंग प्रोजेक्ट्स को 31 दिसंबर 2026 तक की राहत दी गई है।

पश्चिम एशिया का असर भी दिख रहा

ICRA का कहना है कि सिर्फ घरेलू सेल ही वजह नहीं हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव से सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इसकी वजह से कॉपर और एल्यूमीनियम की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं। इससे प्रोजेक्ट की कुल लागत और बढ़ सकती है।

फिर भी सेक्टर पर भरोसा कायम

लागत बढ़ने के बावजूद ICRA ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर ‘Stable’ आउटलुक बरकरार रखा है।

एजेंसी का अनुमान है कि बड़े हाइड्रो समेत रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी भारत के बिजली उत्पादन में 2024-25 के 22% से बढ़कर 2029-30 तक 35% से ज्यादा हो सकती है। 30 जून 2026 तक देश में 150 गीगावॉट से ज्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन थे।

चुनौतियां अभी भी बाकी हैं

ICRA का कहना है कि जमीन अधिग्रहण, ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी, PPA और PSA साइन होने में देरी, महंगे उपकरण और सप्लाई चेन की दिक्कतें अब भी बनी हुई हैं। बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति भी सेक्टर के लिए एक बड़ी चुनौती है।

इसके बावजूद FY26 में रिन्यूएबल सेक्टर में 72 रेटिंग अपग्रेड और 21 डाउनग्रेड हुए। वहीं FY27 की पहली तिमाही में 4 अपग्रेड हुए और कोई डाउनग्रेड नहीं हुआ।

Kisan Vikas Patra: किसान विकास पत्र में पैसा डबल कितने समय में होगा?

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Pramodini IPO Listing: ₹118 के शेयर ₹120 पर लिस्ट, लगातार मजबूत हो रही प्रमोदिनी की सेहत

Pramodini IPO Listing: डाइग्नॉस्टिक सर्विसेज देने वाली प्रमोदिनी मेडिकेयर के शेयरों की आज NSE SME पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। इसके आईपीओ के तहत ₹118 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज NSE SME पर इसकी ₹120.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 1.69% का लिस्टिंग गेन (Pramodini Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹119.05 (Pramodini Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 0.89% मुनाफे में हैं।

Pramodini IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

प्रमोदिनी मेडिकेयर का ₹69 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 12-14 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.87 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.66 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 4.96 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.49 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹63 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 5,00,400 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹45.15 करोड़ मौजूदा और प्रस्तावित डाइग्नॉस्टिक सेंटर्स के लिए मेडिकल इक्विपमेंट्स की खरीदारी और बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Pramodini Medicare के बारे में

प्रमोदिनी मेडिकेयर डाइग्नॉस्टिक सर्विसेज मुहैया कराती है। यह टियर1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों, PSU, मेडिकल कॉलेजों और प्राइवेट डाइग्नॉस्टिक सेंटर्स को सर्विसेज देती है। इसके सर्विस पोर्टफोलियो में एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्सरे, कलर डॉप्लर के साथ अल्ट्रासाउंट, मैमोग्राफी, डेक्सा स्कैन और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी जैसी रेडियोलॉजी सर्विस; हेमेटोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे क्लिनिकल लेबोरेटरी सर्विस; और पीईटी-सीटी, SPECT और न्यूक्लियर थेरेपी जैसी न्यूक्लियर मेडिसिन सर्विस हैं। कंपनी विजयवाड़ा से 24×7 टेली-रेडियोलॉजी यूनिट और उसी जगह पर एक प्रोसेसिंग लेबोरेटरी भी चलाती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 56% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹17.38 करोड़ और टोटल इनकम 33% के सीएजीआर से ₹63.38 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹17.85 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹36.46 करोड़ पड़े थे।

Behari Lal IPO Listing: 118 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 63% लिस्टिंग गेन, ₹285 के शेयरों का बड़ा धमाल

Shiprocket IPO Listing: ₹97 का शेयर ₹131 पर लिस्ट, आईपीओ को मिली थी 102 गुना बोली

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Dhoot Transmission की धांसू एंट्री, IPO को 75 गुना बोली, फिर 37% प्रीमियम पर ₹871 का शेयर लिस्ट

Dhoot Transmission IPO Listing: आईपीओ को 75 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब धूत ट्रांसमिशन के शेयरों की आज घरेलू स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री हुई है। इसके आईपीओ के तहत ₹871 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹1193.80 और NSE पर ₹1,200.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 37% से अधिक लिस्टिंग गेन (Dhoot Transmission Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में हल्की फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर BSE पर यह ₹1174.50 (Dhoot Transmission Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 34.85% मुनाफे में हैं।

Dhoot Transmission IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

धूत ट्रांसमिशन का ₹3,067 करोड़ का आईपीओ 10-12 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 75.06 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 209.02 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 53.13 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 8.32 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 8.60 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹1,400 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले 1,91,37,602 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹464.80 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹301.77 करोड़ सब्सिडरीज का कर्ज हल्का करने के लिए उनमें निवेश, ₹150.00 करोड़ नई वायरिंग हार्नेस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स लगाने, ₹159.96 करोड़ आईपीओ से जुड़े खर्चों को भरने और ₹410.41 करोड़ अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Dhoot Transmission के बारे में

धूत ट्रांसमिशन देश की बड़ी E&E (इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स) कंपनियों में शुमार है। यह ऑटोमोटिव और नॉन-ऑटोमोटिव एप्लीकेशंस के लिए वायरिंग हार्नेसेज और इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम्स बनाती है। इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में वायरिंग हार्नेसेज, बैट्री पैक्स, सेंसेक्स और इलेक्ट्रिक कंट्रोलर्स, ऑटोमोटिव स्विचेज, टर्मिनल्स, कनेक्टर्स, और पावर सप्लाई कॉर्ड्स हैं। इनका इस्तेमाल तेल से चलने वाली और इलेक्ट्रिक, दोनों प्रकार की गाड़ियों में होता है।

यह दोपहिया और तिपहिया वायरिंग हार्नेस मार्केट में देश की दो सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार है जिसका 41% मार्केट पर कब्जा है तो वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक करीब 71% मार्केट शेयर के साथ दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक सेगमेंट में यह लीडर है। इसके प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कमर्शियल वेईकल्स, ऑफ-हाईवे वेईकल्स, फार्मिंग इक्विपमेंट और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशंस में भी होता है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 15% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹396.84 करोड़ और टोटल इनकम करीब 28% के सीएजीआर से ₹4,563.70 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹841.39 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,360.40 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket IPO Allotment Date: करीब 100 गुना सब्सक्राइब हुआ, जानिए लेटेस्ट GMP और अलॉटमेंट चेक करने का पूरा प्रोसेस

Shiprocket IPO: ई-कॉमर्स एनएबलमेंट प्लेटफॉर्म Shiprocket के IPO को करीब 100 गुना का जोरदार सब्सक्रिप्शन मिला। यह आईपीओ 12 से 14 अगस्त तक खुला था। शिपरॉकेट ने अपने 92-97 रुपये का प्राइस बैंड फिक्स किया था। Shiprocket IPO का अलॉटमेंट 17 अगस्त को फाइनल होने की संभावना है। इसके बाद कंपनी के शेयर 19 अगस्त को NSE और BSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

IPO का आकार कितना है?

Shiprocket का IPO ₹1,617.48 करोड़ का है। इसमें ₹885.50 करोड़ के नए शेयर जारी किए गए। वहीं ₹731.98 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे गए।

OFS में Tribe Capital, Moore Strategic Ventures, Lightrock, गौतम कपूर, साहिल गोयल, विशेष खुराना और Agility International Investment जैसे मौजूदा निवेशकों ने हिस्सेदारी बेची।

शिपरॉकेट पैसे का इस्तेमाल कहां करेगी?

कंपनी IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मार्केटिंग बढ़ाने, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, कुछ कर्ज चुकाने और संभावित अधिग्रहण जैसे कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

Temasek और Zomato के निवेश वाली Shiprocket अब सिर्फ शिपिंग कंपनी नहीं रह गई है। यह D2C ब्रांड्स और MSMEs को घरेलू शिपिंग, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग, फुलफिलमेंट, विज्ञापन, कैपिटल सॉल्यूशंस और हाइपरलोकल डिलीवरी जैसी सेवाएं देती है।

ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल?

Investorgain के मुताबिक, रविवार को Shiprocket का GMP ₹32 रहा। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 33% प्रीमियम दिखाता है। हालांकि, 13 अगस्त को यह ₹36.50 था, यानी इसमें हल्की नरमी आई है। लिस्टिंग तक GMP में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

NSE अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें?

  • NSE की IPO Bid Details वेबसाइट खोलें।
  • Equity & SME IPO बिड डिटेल्स चुनें।
  • Symbol में SHIPROCKET चुनें।
  • PAN या एप्लिकेश नंबर दर्ज करें।
  • सबमिट पर क्लिक करें।

KFin Technologies पर अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें?

  • KFin Technologies का IPO स्टेटस पोर्टल खोलें।
  • Shiprocket Ltd चुनें।
  • डीमैट नंबर, एप्लिकेशन नंबर या PAN में से कोई एक दर्ज करें।
  • सबमिट पर क्लिक करें।

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सचिन बंसल की फाइनेंशियल कंपनी नवी लाएगी आईपीओ, ₹3000 करोड़ का हो सकता है इश्यू

फिनटेक स्टार्टअप नवी ने आईपीओ लाने की तैयारी शुरू कर दी है। मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि कंपनी आईपीओ से 3000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। नवी की शुरुआत फ्लिपकार्ट के को-फाउंडर सचिन बंसल ने की थी। कंपनी ने जेएम फाइनेंशियल, कोटक महिंद्रा कैपिटल, गोल्डमैन सैक्स ग्रुप और जेपी मॉर्गन एंड चेज को एडवाइजर्स नियुक्त किया है। इस बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी।

इस इश्यू में ऑफर फॉर सेल नहीं होगा

Navi आईपीओ में निवेशकों को सिर्फ नए शेयर इश्यू करेगी। इश्यू में ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं होगा। नवी अपनी वैल्यूएशन 2 अरब डॉलर चाहती है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि कंपनी दिसंबर तक सेबी को प्रॉस्पेक्टस फाइल कर देना चाहती है।

आईपीओ का साइज और वैल्यूएशन बदल सकती है 

सूत्रों ने बताया कि अभी आईपीओ पर विचार चल रहा है। आईपीओ के साइज, कंपनी की वैल्यूएशन और इश्यू की टाइमिंग में बदलाव हो सकता है। इस बारे में प्रतिक्रिया के लिए भेजे गए सवालों के जवाब नवी और बैंकों के प्रतिनिधियों ने नहीं दिए। आने वाले महीनों में कई फाइनेंशियल कंपनियां आईपीओ पेश करने की तैयारी में हैं।

ये फाइनेंशियल कंपनियां पेश कर सकती हैें आईपीओ

Muthoot Fincorp, Truehome Finance, InCred Holdings, Moneyview और Heor FinCorp आने वाले महीनों में आईपीओ पेश कर सकती हैं। कंपनियों ने आईपीओ के जरिए इस साल अब तक करीब 7 अरब डॉलर जुटाए हैं। 2025 में कंपनियों ने आईपीओ से 22.3 अरब डॉलर जुटाए थे।

नवी ने 2022 में भी आईपीओ के लिए अप्लाई किया था

नवी ने इससे पहले मार्च 2022 में आईपीओ के लिए ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस फाइल किया था। तब कंपनी का प्लान इश्यू से 3350 करोड़ रुपये जुटाने का था। कंपनी को सेबी का एप्रूवल भी सितंबर में मिल गया था। लेकिन, इनवेस्टर्स के कमजोर सेंटिमेंट को देखते हुए कंपनी ने आईपीओ का प्लान टाल दिया था।

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नवी कई तरह की फाइनेंशियल सर्विसेज देती है

नवी एक डायवर्सिफायड फाइनेंशियल-सर्विसेज कंपनी है। यह लोन, म्यूचुअल फंड्स, हेल्थ इंश्योरेंस और यूपीआई पेमेंट जैसी सर्विसेज देती है। सचिन बंसल ने 2018 में फ्लिपकार्ट छोड़ने के बाद नवी की शुरुआत की थी। तब अमेरिकी रिटेलिंग कंपनी वॉलमार्ट ने 16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण किया था।