अदाणी पावर की GVK Energy को खरीदने की तैयारी, 330 MW हाइड्रो प्रोजेक्ट मिलेगा

Adani Power: अदाणी ग्रुप की दिग्गज बिजली कंपनी Adani Power ने GVK Energy को खरीदने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। GVK Energy के लेनदारों की समिति यानी CoC ने Adani Power के रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दे दी है। इसके बाद कंपनी को लेटर ऑफ इंटेंट यानी LOI भी मिल गया है।

Adani Power ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि GVK Energy के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने 7 सितंबर को LOI जारी किया।

330 MW का हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट

GVK Energy के पास उत्तराखंड में 330 MW का हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट है। यह प्रोजेक्ट उसकी सब्सिडियरी Alaknanda Hydro Power Company के जरिए चलता है।

Adani Power यह अधिग्रहण कॉरपोरेट इनसॉल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रोसेस यानी CIRP के तहत कर रही है। यह प्रक्रिया इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के तहत चल रही है।

100% हिस्सेदारी खरीदेगी Adani Power

Adani Power ने GVK Energy की 100% शेयर कैपिटल और कंट्रोल खरीदने का प्लान दिया है। कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया यानी CCI ने मई में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।

डील अभी पूरी नहीं हुई है

LOI मिलने का मतलब यह नहीं है कि अधिग्रहण पूरा हो गया है। रिजॉल्यूशन प्लान लागू करने के लिए अभी कुछ और मंजूरियां जरूरी हैं।

Adani Power ने कहा है कि यह प्रक्रिया LOI की शर्तों के अधीन होगी। इसके अलावा हैदराबाद स्थित नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी NCLT से भी मंजूरी लेनी होगी। जरूरत पड़ने पर दूसरे रेगुलेटरी अथॉरिटीज, कोर्ट या ट्रिब्यूनल से भी मंजूरी लेनी पड़ सकती है।

Adani Power के शेयर का हाल

Adani Power का शेयर 7 सितंबर को NSE पर 1.31% गिरकर ₹204.49 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 46.93% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 61.24% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 78.97 हजार करोड़ रुपये है।

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Zydus Wellness में 9% का उछाल, दो अधिग्रहण पर ब्रोकरेज ने लगाया दांव तो चमके शेयर

Zydus Wellness Share Price: ब्रोकरेज फर्म आईआईएफएल ने जाइडस वेलनेस की खरीदारी की रेटिंग और ₹650 के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की तो इसके शेयर रॉकेट बन गए। एक तरफ शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) धड़ाम हो गए तो दूसरी तरफ जाइडस वेलनेस के शेयर 9% से अधिक उछल पड़े और यह निफ्टी 500 का टॉप गेनर बन गया। फिलहाल बीएसई पर यह 3.67% की बढ़त के साथ ₹549.30 पर है। इंट्रा-डे में यह 9.56% उछलकर ₹580.50 तक पहुंच गया था। इससे पहले 2 मार्च 2026 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹357.55 पर था जिससे चार ही महीने में यह 70.871% उछलकर 20 जुलाई 2026 को एक साल के हाई ₹610.95 पर पहुंच गया था।

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ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि जाइडस वेलनेस का बिजनेस अब तक शुगर-फ्री, ग्लूकॉन-डी, नाइसिल, इवरयूथ और न्यूट्रालाइट जैसे चुनिंदा ब्रांड्स पर निर्भर रहा है। इनकी अपने-अपने सेगमेंट में मजबूत मार्केट हिस्सेदारी रही है लेकिन सीजनल डिमांड और कैटेगरी की सुस्त ग्रुथ के चलते कंपनी की ग्रोथ सीमित रही है।

हालांकि अब ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि राइटबाइक मैक्स प्रोटीन (RiteBike Max Protein) और कंफर्ट क्लिक (Comfort Click-CC) के अधिग्रहण से कंपनी के बिजनेस में बड़ा बदलाव आया है। FY27 तक इन दोनों नए ग्रोथ प्लेटफॉर्म्स की कंपनी के बिजनेस में कुल मिलाकर करीब 50% हिस्सेदारी हो सकती है। इसके दम पर वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच इसकी सेल्स सालाना 13.7% की रफ्तार से बढ़ सकती है जबकि वित्त वर्ष 2021-26 के बीच इसकी रफ्तार करीब 6.4% CAGR रही थी। ब्रोकरेज के अनुसार कंपनी का कंसालिडेटेड EBITDA मार्जिन भी FY26 के 12.9% से बढ़कर FY29 तक 16% हो सकता है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इससे पहले कंपनी ने Heinz का जो अधिग्रहण किय़ा था, वहां मुख्य दांव पुराने और मेच्योर ब्रांड्स को दोबारा तेजी से बढ़ाने पर था, लेकिन अब राइटबाइक मैक्स प्रोटीन और कंफर्ट क्लिक के अधिग्रहण में ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर दांव लगाया गया है जो पहले से तेज गति से बढ़ रहे हैं और आगे भी उसी तरह बढ़ सकते हैं।

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कंपनी अपने जनरल ट्रेड (GT) डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का फायदा राइटबाइट को दे सकती है तो कंफर्ट क्लिक को जाइडस वेलनेस की मजबूत बैलेंस शीट का फायदा मिलेगा। कंफर्ट क्लिक अपने कारोबार को बड़े पैमाने पर करने और यूके/यूरोप से बाहर ले जाने के लिए जरूरी पूंजी मिल जाएगी। आईआईएफएल कैपिटल का कहना है कि जाइडस वेलनेस अब एक अलग तरह की कंपनी है, क्योंकि दो नए ग्रोथ इंजन जुड़ने से मौसमी और मैच्योर कैटेगरी पर इसकी निर्भरता कम हो गई है।

Inox Clean Energy बनेगी ₹100000 करोड़ की कंपनी!  ₹10000 करोड़ के आईपीओ का ड्राफ्ट एक महीने में होगा जमा

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Inox Clean Energy बनेगी ₹100000 करोड़ की कंपनी! ₹10000 करोड़ के आईपीओ का ड्राफ्ट एक महीने में होगा जमा

Inox Clean Energy IPO: आईनॉक्स क्लीन एनर्जी इस महीने के आखिरी या अक्टूबर की शुरुआत तक करीब ₹10,000 करोड़ के आईपीओ का ड्राफ्ट सेबी के पास दाखिल कर सकती है। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। सूत्रों के मुताबिक आईनॉक्सजीएफएल ग्रुप (InoxGFL Group) की ग्रीन एनर्जी इकाई आईनॉक्स क्लीन एनर्जी के आईपीओ के लिए इंवेस्टमेंट बैंक- नुवामा, जेएमफाइनेंशियल और एमिरेट्स एनबीडी सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं। कंपनी की कोशिश प्रमोटर्स की करीब 10% हिस्सेदारी बेचकर करीब ₹1 लाख करोड़ का वैल्यूएशन हासिल करने की है। पिछले एक साल में इसने कई बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी और सोलर कंपनियों का अधिग्रहण किया है, जिससे कारोबार तेजी से बड़ा हुआ है।

बता दें कि आईनॉक्सजीएफएल आईनॉक्स ग्रुप से अलग है। आईनॉक्स ग्रुप के पास आईनॉर्स एयर प्रोडक्ट्स और लिस्टेड क्रायोजेनिक इक्विपमेंट कंपनी आईनॉक्स इंडिया जैसी कंपनियां हैं। साल 2021 में हुए एक पारिवारिक समझौते के बाद दोनों कारोबारी ग्रुप अलग हुए थे। विवेक जैन के पास स्पेशलिटी केमिकल्स और रिन्यूएबल एनर्जी बिजनेस आया, जबकि उनके भाई पवन जैन और भतीजे सिद्धार्थ जैन के पास इंडस्ट्रियल गैस, क्रायोजेनिक इक्विपमेंट और मल्टीप्लेक्स कारोबार रहा।

क्या है Inox Clean Energy की योजना

आईनॉक्स क्लीन एनर्जी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 95% है और वे आईपीओ के जरिए 10% हिस्सेदारी हल्की करने वाले हैं। सूत्रों के मुताबिक कंपनी की योजना ₹1 लाख करोड़ का वैल्यूएशन हासिल करने की है। सूत्रों के मुताबिक आईपीओ के जरिए कंपनी को जो पैसा मिलेगा, उसे अधिग्रहण और कर्ज हल्का करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। आईनॉक्स क्लीन एनर्जी को विवेक जैन की आईनॉक्सजीएफएल ग्रुप प्रमोट करती है और विवेक के बेटे देवांश जेन इसके एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं।

कंपनी के बारे में

आईनॉक्स क्लीन एनर्जी एक इंटीग्रेटेड रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म है जो पावर जेनेरेशन औ सोलर मैन्युफैक्चरिंग पर काम करता है। अपनी एक सब्सिडरी आईनॉक्स नियो एनर्जीज के जरिए यह विंड, सोलर और हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट्स को डेवलप, एक्विजिशन और ऑपरेट करने का काम करती है तो आईनॉक्स सोलर के जरिए यह भारत और अमेरिका में सोलर मॉड्यूल और सोलर सेल बनाती है।

कंपनी के विस्तार की बात करें तो ताबड़तोड़ अधिग्रहण के बाद यह काफी बड़ी हो चुकी है। एक साल में देश-विदेश में इसने 10 रणनीतिक अधिग्रहणों को या तो ऐलान किया, या उन्हें पूरा किया। हाल ही में इसका सबसे बड़ा अधिग्रहण ₹6000 करोड़ का था जिसमें इसने ब्लैकरॉक की ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर पार्टनर्स से वेना एनर्जी इंडिया को हासिल किया। इस सौदे के बाद आईनॉक्स क्लीन एनर्जी का चालू और चालू होने के करीब वाला पोर्टफोलियो लगभग 4 GW हो गया, जबकि डेवलपमेंट पाइपलाइन में 12 GW से ज्यादा सोलर और विंड कैपेसिटी और 2.5 GWh की BESS कैपेसिटी शामिल है।

Gold-Silver ETF में लगाते हैं पैसे? बदल गई निवेशकों के लिए ये तीन चीजें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

LIC के लिए ICICI Bank में हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ, RBI से मिली हरी झंडी

एलआईसी के लिए आईसीआईसीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। आरबीआई ने देश की सबसे बड़ी इंश्योरेंस कंपनी को आईसीआईसीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.99 फीसदी तक करने की इजाजत दे दी है। यह अप्रूवल आरबीआई के लेटर इश्यू होने के बाद के एक साल तक वैलिड होगा।

एक साल के लिए यह एप्रूवल वैलिड होगा

LIC अगर एक साल तक ICICI Bank में अपनी हिस्सेदारी इस लिमिट तक नहीं बढाती है तो यह एप्रूवल लैप्स कर जाएगा। इस बारे में आरबीआई का लेटर 4 सितंबर को आईसीआईसीआई बैंक को मिल गया। एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ने यह जानकारी दी है। हालांकि, शेयरों के प्रस्तावित अधिग्रहण के लिए एलआईसी को रेगुलेटर से जुड़े दूसरे नियमों का भी पालन करना होगा।

LIC को एचडीएफसी बैंक में भी हिस्सा बढ़ाने की मंजूरी मिली थी

इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में कहा गया है, “इस एप्रूवल पर कुछ खास शर्तें लागू होंगी।” इससे पहले LIC को HDFC Bank में अपनी हिस्सेदारी 9.99 फीसदी तक बढ़ाने के लिए आरबीआई से ऐसा ही एक लेटर मिला था। एचडीएफसी बैंक की 19 अगस्त की रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, आरबीआई ने बैंक में 9.99 फीसदी तक हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एप्रूवल दे दिया है।

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ICICI Bank के शेयर में 4 सितंबर को गिरावट 

HDFC Bank की फाइलिंग के मुताबिक, एलआईसी की बैंक में 4.11 फीसदी हिस्सेदारी है। एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा बैंक है। HDFC Bank का शेयर 4 सितंबर को 1.16 फीसदी चढ़कर 714.85 रुपये पर बंद हुआ। LIC का शेयर 0.096 फीसदी गिरकर 416.50 रुपये पर बंद हुआ था। ICICI Bank का शेयर 0.44 फीसदी गिरकर 1,423.70 रुपये पर बंद हुआ था।

केन्या के राष्ट्रपति ने टाटा केमिकल्स को कामकाज बंद करने का दिया आदेश, 100 साल पुराने कारोबार पर लगाया ब्रेक!

Tata company out in Kenyan: केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने कहा है कि ‘टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals)’ को काजियाडो काउंटी के लेक मगाडी में अपने खनन कामकाज तत्काल बंद करने का आदेश दिया है। Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूटो ने गुरुवार (3 सितंबर) को कहा, “उन्होंने भारत की टाटा केमिकल्स (TTCH.NS) को केन्या में अपना कामकाज रोकने का आदेश दिया है, क्योंकि कंपनी की मौजूदगी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ।” रूटो ने कहा कि सरकार टाटा केमिकल्स का कामकाज संभालने के लिए दो नई कंपनियां लाएगी।

इस फैसले के साथ इलाके में टाटा केमिकल्स और उससे पहले की कंपनियों की करीब 100 साल से चली आ रही खनिज गतिविधियों (मिनरल निकालने के काम) पर विराम लग गया है। दक्षिणी केन्या में विकास कार्यों के दौरे के दौरान रुटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि कंपनी ने दशकों तक इलाके में मौजूद सोडा ऐश के विशाल प्राकृतिक भंडार का इस्तेमाल करने के बावजूद कोई ठोस आर्थिक विकास, रोजगार या स्थानीय औद्योगिक ढांचा नहीं बनाया।

क्या है पूरा विवाद?

राष्ट्रपति रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि इतने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के बावजूद काजियाडो एरिया में स्थानीय लोगों के लिए पर्याप्त रोजगार, उद्योग और आर्थिक विकास का आधार तैयार नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कच्चा माल विदेश क्यों भेजा जाता रहे और स्थानीय समुदाय को उसका पर्याप्त लाभ क्यों न मिले।

‘उन्होंने यहां कुछ नहीं बनाया’

Reuters के मुताबिक, दक्षिणी केन्या के विकास दौरे के दौरान काजियाडो में लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रूटो ने टाटा के पुराने कारोबार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कंपनी को करीब 100 साल तक कॉन्ट्रेक्ट मिला। लेकिन उसने काजियाडो में कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं लगाई। रुटो ने जोर देकर कहा कि भविष्य में माइनिंग लाइसेंस के लिए निवेशकों को कच्चे सोडा ऐश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के बजाय स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट बनाने की शर्त माननी होगी।

रूटो ने कथित तौर पर कहा, “उस टाटा कंपनी के पास 100 साल का कॉन्ट्रैक्ट था। उन्होंने काजियाडो में कुछ नहीं बनाया। उन्होंने काजियाडो में कोई फैक्ट्री नहीं बनाई। हमने कहा है कि हम एक नई कंपनी लाएंगे और उन्हें यहां काजियाडो में कांच की एक बड़ी कंपनी और केमिकल बनाने वाली एक और कंपनी लगानी चाहिए। क्या हम दूसरे लोगों के गुलाम हैं?”

टाटा के खिलाफ कार्रवाई की वजह क्या बताई गई?

राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब केन्या के खनन मंत्रालय ने पहले ही टाटा के खनन संचालन पर रोक लगा दी थी। 28 जुलाई को खनन मामलों के कैबिनेट सचिव हसन जोहो ने कंपनी के संचालन को निलंबित किया था। अधिकारियों की ओर से इसके पीछे कई कथित नियामकीय उल्लंघनों का हवाला दिया गया, जिनमें स्थानीय खरीद संबंधी कानूनों का पालन न करना, निर्यात से जुड़े रिकॉर्ड में कथित गड़बड़िया और काउंटी के भूमि करों का कथित रूप से भुगतान न करना शामिल हैं।

टाटा का बयान

हालांकि, टाटा केमिकल्स का कहना है कि उसने केन्या के नियमों का पालन किया है। कंपनी का यह भी दावा है कि वह लेक मगाडी के आसपास रहने वाली करीब 30,000 स्थानीय आबादी को स्वास्थ्य और पानी जैसी आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है। जुलाई के आखिर में टाटा ने कहा था कि केन्या सरकार ने उसकी यूनिट टाटा केमिकल लिमिटेड को मगाडी सोडा फैक्ट्री में कामकाज रोकने और सोडा ऐश का एक्सपोर्ट बंद करने का आदेश दिया है।

टाटा ने 2005 में संभाला था कारोबार

लेक मगाडी में सोडा ऐश का खनन कोई नया कारोबार नहीं है। टाटा केमिकल्स ने 2005 में ऐतिहासिक Magadi Soda Company का अधिग्रहण किया था। इसके बाद से टाटा ग्रुप इस क्षेत्र में सोडा ऐश और उससे जुड़े खनिज कारोबार से जुड़ा रहा है। सोडा ऐश का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांच, रसायन और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। अब रूटो सरकार चाहती है कि केन्या अपने प्राकृतिक संसाधनों का सिर्फ निर्यात न करे। बल्कि केन्या के भीतर ही उनका वैल्यू एडिशन और औद्योगिक उत्पादन हो।

विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

राष्ट्रपति रूटो के इस फैसले के बाद केन्या में राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है। विपक्षी डेमोक्रेसी फॉर सिटिजन्स पार्टी (DCP) के नेताओं ने सरकार पर राज्य प्रायोजित आर्थिक तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। विपक्ष का दावा है कि टाटा के संचालन पर रोक लगाने से 1 लाख से ज्यादा लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इससे सैकड़ों प्रत्यक्ष नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।

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विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि इस कार्रवाई के पीछे कोई दूसरा राजनीतिक मकसद हो सकता है। उनका दावा है कि लेक मगाडी एरिया में मौजूद संभावित लिथियम भंडार और तेल संसाधनों पर नए कारोबारी और राजनीतिक सहयोगियों को मौका देने के लिए मौजूदा कंपनी पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि केन्याई सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है।

Adani Power Share: मोतीलाल ओसवाल ने Buy रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की, बुल केस में ₹305 का टारगेट दिया

Adani Power Share: ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अदाणी ग्रुप की पावर कंपनी Adani Power पर कवरेज शुरू करते हुए इसे ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹250 का टारगेट प्राइस रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 20% ज्यादा है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, बुल केस में यह 46.8% तक भी उछल सकता है। गुरुवार को अदाणी पावर 207.50 रुपये पर तकरीबन फ्लैट बंद हुआ। 2026 में अब तक शेयर करीब 40% चढ़ चुका है।

मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी की मजबूत ग्रोथ योजनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। Adani Power FY32 तक अपनी बिजली उत्पादन क्षमता 2.3 गुना बढ़ाकर 42 GW करना चाहती है। FY27 में 1.3 GW, FY28 में 1.6 GW और FY29 में 3.2 GW नई क्षमता जोड़ने का अनुमान है।

थर्मल पावर में तगड़ी पकड़

Adani Power भारत की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी है। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी की उत्पादन क्षमता 18 GW थी। भारत की कुल कोयला और लिग्नाइट वाली बिजली क्षमता में कंपनी की हिस्सेदारी 8% है। निजी क्षेत्र में यह हिस्सेदारी करीब 24% है।

कंपनी की 95% ऑपरेशनल क्षमता लंबे और मध्यम अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट यानी PPA से जुड़ी है। कंपनी बिजली वितरण कंपनियों यानी DISCOMs को बिजली बेचती है। साथ ही वह मर्चेंट मार्केट में भी बिजली की बिक्री करती है।

मोतीलाल ओसवाल क्यों है बुलिश?

ब्रोकरेज का मानना है कि Adani Power ने संकट में फंसे कई बिजली प्लांटों का अधिग्रहण कर उन्हें सफलतापूर्वक चलाया है। कंपनी की एक और बड़ी ताकत उसकी पूंजी खर्च रणनीति है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, कंपनी ने औसतन ₹3.5 करोड़ प्रति MW की लागत पर बिजली क्षमता का अधिग्रहण किया है। वहीं नया थर्मल पावर प्लांट बनाने में करीब ₹12 करोड़ प्रति MW खर्च आता है। कंपनी के न्यूक्लियर एनर्जी में उतरने की संभावना को भी ब्रोकरेज ने भविष्य के लिए एक अतिरिक्त अवसर माना है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा कैपेक्स साइकिल पूरी होने के बाद कंपनी का EBITDA करीब ₹80,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

बुल केस में ₹305 का टारगेट

अगर बिजली की कीमतें और प्लांट लोड फैक्टर अनुमान से बेहतर रहे, तो मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ₹305 का बुल केस टारगेट रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 46.8% ज्यादा है।

इसके उलट, कमजोर स्थिति में ब्रोकरेज ने ₹140 का बेयर केस टारगेट बताया है। यह पिछले बंद भाव से करीब 32.6% नीचे है।

जोखिम भी कम नहीं

ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की आने वाली थर्मल क्षमता में करीब 44% अभी किसी पावर खरीद समझौते से जुड़ी नहीं है। इससे बिजली की मांग और कीमतों को लेकर जोखिम बना हुआ है।

इसके अलावा, बड़े कैपेक्स, प्रोजेक्ट में देरी, लागत बढ़ने और पर्यावरण नियमों का पालन भी अहम जोखिम हैं। कंपनी को बिजली सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ता है।

फिलहाल Adani Power को कवर करने वाले 10 में से 9 एनालिस्ट्स ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। एक एनालिस्ट ने ‘Hold’ रेटिंग रखी है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Hero Motors लाएगी ₹1000 करोड़ का ही IPO, पैसों के इस्तेमाल में भी बदलाव

Hero Motors IPO: पावरट्रेन सॉल्यूशंस प्रोवाइडर हीरो मोटर्स ने अपने आईपीओ का साइज घटा दिया है। बाजार नियामक सेबी से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी ने पब्लिक इश्यू का साइज घटाकर ₹1000 करोड़ कर दिया है। हालांकि इसमें जो कटौती हुई है, वह फ्रेश इश्यू में हुई है यानी कि अब आईपीओ के तहत नए शेयर कम जारी होंगे जबकि ऑफर फॉर सेल इश्यू के तहत बिकने वाले शेयरों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब कंपनी की योजना आईपीओ के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी करने की है तो ऑफर फॉर सेल के जरिए प्रमोटर्स ₹400 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

नियमों के तहत IPO Size में कितना बदलाव करने की है मंजूरी?

हीरो मोटर्स ने जून 2025 में बाजार नियामक सेबी के पास अपना आईपीओ ड्राफ्ट यानी डीआरएचपी दाखिल किया था। इसके जरिए कंपनी की योजना ₹1,200 करोड़ जुटाने की थी जिसमें ₹800 करोड़ के नए शेयर जारी होते तो ₹400 करोड़ के शेयरों की बिक्री ऑफर फॉर सेल के तहत होनी थी। इस साल 13 अप्रैल से लागू हुए नए नियमों के बाद, जिसके तहत कंपनियों को सेबी के पास ड्राफ्ट दोबारा दाखिल किए बिना फ्रेश इश्यू के साइज में 50% तक बदलाव करने की अनुमति है, हीरो मोटर्स ने 30 जुलाई को सेबी के पास आवेदन किया। कंपनी ने फ्रेश इश्यू का साइज कम करने और कुल ऑफर साइज में बदलाव की मंजूरी मांगी। फिर 27 अगस्त के अप्रूवल लेटर के बाद कंपनी ने आईपीओ के तहत फ्रेश इश्यू साइज ₹600 करोड़ से घटाकर ₹400 करोड़ कर दिया।

और क्या हुआ है आईपीओ में बदलाव

कंपनी ने ऑफर फॉर सेल के ढांचे में भी बदलाव किया है। यह बदलाव इश्यू के तहत शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स भाग्योदय इंवेस्टमेंट्स और ओपी मुंजाल होल्डिंग्स की 27 अगस्त की चिट्ठियों के बाद किया गया। भाग्योदय इंवेस्टमेंट्स ने ₹5 करोड़ तक के शेयर बेचने का अपना ऑफर वापस लेने का फैसला किया। वहीं ओपी मुंजाल होल्डिंग्स ने अपने ऑफर साइज को उतना ही बढ़ाकर ₹390 करोड़ से ₹395 करोड़ कर दिया है। अब इश्यू के तहत

ओपी मुंजाल होल्डिंग्स ₹395 करोड़ के शेयर और हीरो साइकिल्स ₹5 करोड़ के शेयर बेचेंगे।

हीरो मोटर्स ने नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों के इस्तेमाल में भी बदलाव किया है। अब आईपीओ से मिले ₹190 करोड़ का इस्तेमाल कंपनी कर्ज हल्का करने और ₹200 करोड़ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में स्थित अपने प्लांट में कैपेसिटी बढ़ाने के लिए जरूरी इक्विपमेंट्स की खरीदारी में खर्च करेगी। बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में खर्च होंगे। वहीं ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिलेगा।

IPO News: SEBI की हरी झंडी, दो कंपनियों के आईपीओ के रास्ते का एक बड़ा पड़ाव पार

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भिड़े OpenAI और SpaceX, इस कारण टूटने जा रहा एआई सर्विसेज का कॉन्ट्रैक्ट

OpanAI vs SpaceX: चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई और एलॉन मस्क (Elon Musk) के स्पेसएक्स (SpaceX) के बीच की साझेदारी खत्म हो सकती है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओपनएआई स्पेसएक्स के कोडिंग-टूल कंपनी कर्सर (Cursor) को एआई मॉडल की उपलब्धता बंद करने की योजना बना रही है। इस कदम से ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और एलॉन मस्क के बीच लंबे समय से चल रही कड़वाहट भरी टक्कर और बढ़ गई है। बता दें कि जून में स्पेसएक्स ने कर्सर बनाने वाले स्टार्टअप एनीस्फीयर (Anysphere) को $6 हजार करोड़ की ऑल-स्टॉक डील में खरीदने का ऐलान किया था और इस महीने की शुरुआत में यह अधिग्रहण पूरा हो गया।

OpanAI vs SpaceX: Cusror को क्यों बंद होगी सर्विसेज?

ओपनएआई ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि कर्सर को एआई मॉडल नहीं देने का फैसला इसलिए लिया जा रहा है क्योंकि उन्हें भरोसा नहीं है कि स्पेसएक्स उनकी तकनीक का इस्तेमाल तय शर्तों के अनुसार करेगा। ओपनएआई ने यह भरोसा नहीं होने की वजह एलॉन मस्क की कंपनियों का ओपनएआई के साथ हुए कॉन्ट्रैक्ट्स की शर्तों के उल्लंघन के लंबे अनुभव को बताया। वहीं इस मामले को लेकर कर्सर के को-फाउंडर माइकल ट्रुएल (Michael Truell) का कहना है कि वह ओपनएआई के शुरुआती यूजर्स में से एक है और अब इसके साथ मौजूदा मुद्दे को सुलझाने के लिए वहीं ओपनएआई की टीम से बातचीत कर रहे हैं।

ओपनएआई का कहना है कि स्पेसएक्स जैसी बड़ी कंपनियों के साथ काम करने के लिए खास कॉन्ट्रैक्ट्स होता है और इसमें यह तय किया जाता है कि तकनीक का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर सुरक्षा के साथ किया जाए। ओपनएआई के मुताबिक कर्सर को उसकी सर्विसेज 12 नवंबर 2026 तक बंद की जा सकती है। ओपनएआई का कहना है कि कर्सर के साथ कॉन्ट्रैक्ट में स्वामित्व में बदलाव के बादसीमित समय में कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने का अधिकार मिल गया है।

Elon Musk vs Sam Altman: लंबा है टकराव

एलॉन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच कई वर्षों से टकराव चल रही है, और यह कोर्ट केस तक पहुंच गया। सुनवाई के दौरान मस्क के वकील ने कहा था कि मस्क और दूसरे गवाहों ने ऑल्टमैन के झूठे होने की गवाही दी है तो ओपनएआई का कहना था कि मस्क कंपनी पर कंट्रोल चाहते थे।

दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क ने ओपनएआई पर $15 हजार करोड़ का मुकदमा किया था। मस्क ने कंपनी और ऑल्टमैन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने फायदे के लिए कंपनी के मूल नॉन-प्रॉफिट मिशन से धोखाधड़ी करके एक चैरिटी को हड़प लिया। इस साल की शुरुआत में एक फेडरल जूरी ने मस्क के खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि उन्होंने बहुत देर से केस फाइल किया था।

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