Zydus Wellness में 9% का उछाल, दो अधिग्रहण पर ब्रोकरेज ने लगाया दांव तो चमके शेयर

Zydus Wellness Share Price: ब्रोकरेज फर्म आईआईएफएल ने जाइडस वेलनेस की खरीदारी की रेटिंग और ₹650 के टारगेट प्राइस के साथ कवरेज शुरू की तो इसके शेयर रॉकेट बन गए। एक तरफ शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) धड़ाम हो गए तो दूसरी तरफ जाइडस वेलनेस के शेयर 9% से अधिक उछल पड़े और यह निफ्टी 500 का टॉप गेनर बन गया। फिलहाल बीएसई पर यह 3.67% की बढ़त के साथ ₹549.30 पर है। इंट्रा-डे में यह 9.56% उछलकर ₹580.50 तक पहुंच गया था। इससे पहले 2 मार्च 2026 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹357.55 पर था जिससे चार ही महीने में यह 70.871% उछलकर 20 जुलाई 2026 को एक साल के हाई ₹610.95 पर पहुंच गया था।

Zydus Wellness पर क्यों फिदा IIFL Capital?

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि जाइडस वेलनेस का बिजनेस अब तक शुगर-फ्री, ग्लूकॉन-डी, नाइसिल, इवरयूथ और न्यूट्रालाइट जैसे चुनिंदा ब्रांड्स पर निर्भर रहा है। इनकी अपने-अपने सेगमेंट में मजबूत मार्केट हिस्सेदारी रही है लेकिन सीजनल डिमांड और कैटेगरी की सुस्त ग्रुथ के चलते कंपनी की ग्रोथ सीमित रही है।

हालांकि अब ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि राइटबाइक मैक्स प्रोटीन (RiteBike Max Protein) और कंफर्ट क्लिक (Comfort Click-CC) के अधिग्रहण से कंपनी के बिजनेस में बड़ा बदलाव आया है। FY27 तक इन दोनों नए ग्रोथ प्लेटफॉर्म्स की कंपनी के बिजनेस में कुल मिलाकर करीब 50% हिस्सेदारी हो सकती है। इसके दम पर वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच इसकी सेल्स सालाना 13.7% की रफ्तार से बढ़ सकती है जबकि वित्त वर्ष 2021-26 के बीच इसकी रफ्तार करीब 6.4% CAGR रही थी। ब्रोकरेज के अनुसार कंपनी का कंसालिडेटेड EBITDA मार्जिन भी FY26 के 12.9% से बढ़कर FY29 तक 16% हो सकता है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इससे पहले कंपनी ने Heinz का जो अधिग्रहण किय़ा था, वहां मुख्य दांव पुराने और मेच्योर ब्रांड्स को दोबारा तेजी से बढ़ाने पर था, लेकिन अब राइटबाइक मैक्स प्रोटीन और कंफर्ट क्लिक के अधिग्रहण में ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर दांव लगाया गया है जो पहले से तेज गति से बढ़ रहे हैं और आगे भी उसी तरह बढ़ सकते हैं।

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कंपनी अपने जनरल ट्रेड (GT) डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का फायदा राइटबाइट को दे सकती है तो कंफर्ट क्लिक को जाइडस वेलनेस की मजबूत बैलेंस शीट का फायदा मिलेगा। कंफर्ट क्लिक अपने कारोबार को बड़े पैमाने पर करने और यूके/यूरोप से बाहर ले जाने के लिए जरूरी पूंजी मिल जाएगी। आईआईएफएल कैपिटल का कहना है कि जाइडस वेलनेस अब एक अलग तरह की कंपनी है, क्योंकि दो नए ग्रोथ इंजन जुड़ने से मौसमी और मैच्योर कैटेगरी पर इसकी निर्भरता कम हो गई है।

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Sensex लगातार दूसरे दिन लाल, एक्सपायरी को Nifty 24056 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

Sensex-Nifty closes red: उम्मीद से बेहतर जीडीपी ग्रोथ और निचले स्तर पर वैल्यू बाइंग से मार्केट में तेज रिकवरी आई लेकिन फिर कच्चे तेल के उबाल और बैंकिंग शेयरों की बिकवाली का दबाव अधिक भारी पड़ गया। इस दबाव में डे-हाई से सेंसेक्स 576 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 24000 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर मिडकैप स्पेस में अधिक दबाव दिखा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 आज 0.25% कमजोर हुआ तो निफ्टी मिडकैप 100 भी 1.39% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज एफएमसीजी और आईटी सेक्टर ने मार्केट को संभालने की काफी कोशिश की जिनके निफ्टी इंडेक्स करीब 1% मजबूत हुए। हालांकि ऑटो, बैंकिंग और फार्मा स्टॉक्स का दबाव अधिक भारी पड़ गया। निफ्टी फार्मा आज करीब डेढ़ फीसदी तो निफ्टी ऑटो और निफ्टी पीएसयू बैंक 1% से अधिक और निफ्टी प्राइवेट बैंक करीब 1% कमजोर हुआ। बिकवाली की इस आंधी में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो महीने के पहले कारोबारी दिन आज 1 सितंबर निफ्टी की वीकली एक्सपायरी को सेंसेक्स (Sensex) 12.99 प्वाइंट्स यानी 0.02% की मामूली फिसलन के साथ 76,944.28 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 24.60 प्वाइंट्स यानी 0.10% की कमजोरी के साथ 24,055.80 पर बंद हुआ है।

इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स और निफ्टी में काफी उठा-पटक दिखी। पहले तो सेंसेक्स 193.01 प्वाइंट्स गिरकर 76,764.26 तक आया था, जिससे फिर यह 467.61 प्वाइंट्स रिकवर होकर 77,231.87 के हाई तक पहुंचा लेकिन फिर इस हाई से यह 575.75 प्वाइंट्स टूटकर 76,656.12 तक आ गया। वहीं निफ्टी भी 70.90 प्वाइंट्स टूटकर 24,009.50 तक आया था, जिससे यह फिर 133.65 प्वाइंट्स ऊपर चढ़कर 24,143.15 तक पहुंचा था लेकिन फिर इस हाई लेवल से यह 190.60 प्वाइंट्स टूटकर 23,952.55 तक आ गया।

डूबे निवेशकों के ₹3.46 लाख करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 31 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,91,58,204.57 करोड़ था। आज यानी 1 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,88,11,607.93 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹3,46,596.64 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 13 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 13 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज आईटीसी, एचसीएलटेक और इंफोसिस सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ मारुति, एसबीआई और इंडिगो में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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Pharma Stocks: बारिश-बाढ़ के चलते कुछ यूनिट्स में काम बंद, अब 27 जुलाई को इस फार्मा शेयर पर रहेगी नजर

Piramal Pharma Stocks: फार्मा सेक्टर की दिग्गज कंपनी पिरामल फार्मा के शेयरों में 27 जुलाई को स्टॉक मार्केट खुलने पर तेज हलचल दिख सकती है। इसकी वजह ये है कि कंपनी ने एक दिन पहले 24 जुलाई की रात एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि भारी बारिश और जलभराव के चलते गुजरात में इसकी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज में काम अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। ऐसे में शेयरों पर भी इसका असर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 24 जुलाई को बीएसई पर यह 0.17% की बढ़त के साथ ₹181.15 पर बंद हुआ था जबकि निफ्टी 0.43% की कमजोरी के साथ 23,767.45 पर बंद हुआ था।

इन फैसिलिटीज की Piramal Pharma के रेवेन्यू में कितनी हिस्सेदारी?

भारी बारिश और बाढ़ के चलते पिरामल फार्मा ने शुक्रवार 24 जुलाई को बताया कि उसने गुजरात के अहमदाबाद में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में कुछ समय के लिए काम रोक दिया है। कंपनी ने बताया कि इनके सभी एंप्लॉयीज और कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे स्टॉफ सुरक्षित हैं। अब कंपनी मौजूदा स्थिति का आकलन कर रही है और कामकाज बंद होने के असर का कैलकुलेशन कर रही है। कंपनी का कहना है कि मौसम की स्थिति में सुधार होने पर अगले कुछ दिनों में कामकाज धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है। पिरामल फार्मा का कहना है कि जिन यूनिट्स को बंद किया गया है, उनके एसेट्स इंश्योरेंस कवरेज के तहत हैं। कंपनी के मुताबिक इन यूनिट्स की कुल मिलाकर इसके कंसालिडेटेड रेवेन्यू में 3% से कम हिस्सा है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

पिरामल फार्मा के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल बीएसई पर 29 जुलाई 2025 को यह ₹210.35 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 8 ही महीने में यह 37% टूटकर 23 मार्च 2026 को ₹132.50 के भाव पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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18% टूटे Medplus Health के शेयर, निवेश के दो तगड़े ऐलान के बावजूद कमजोर रिजल्ट पड़ा भारी

Medplus Health Share Price: देश की सबसे बड़ी रिटेल फार्मेसी ओमनी चैनल मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों को जून तिमाही के रिजल्ट से तगड़ा शॉक लगा है। इसके झटके से मेडप्लस के शेयर करीब 18% टूट गए और फिसलकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गए। शेयरों को निवेश के दो बड़े ऐलान से भी सपोर्ट नहीं मिल पाया। अभी की बात करें तो फिलहाल 14.95% की गिरावट के साथ मेडप्लस का शेयर ₹676.45 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 17.80% टूटकर ₹653.80 तक आ गया था।

Medplus Health Services Q1 Results: खास बातें

चालू वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही मेडप्लस हेल्थ सर्विसेज के लिए किसी झटके से कम नहीं रही। जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 21.7% गिरकर ₹33.17 करोड़ पर आ गया। मुनाफे में यह गिरावट ऐसे समय में आई, जब कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू इस दौरान 21.84% बढ़कर ₹1879.60 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए इस दौरान 1.9% बढ़कर ₹130.7 करोड़ पर पहुंचा लेकिन ईबीआईटीडीए मार्जिन 8.5% से फिसलकर 7.1% पर आ गया। जून तिमाही में कंपनी ने 146 नए स्टोर खोले जिसमें 131 फ्रेंचाइजी स्टोर्स थीं।

कहां निवेश कर रही मेडप्लस?

एक्सचेंज फाइलिंनग में नतीजे के साथ-साथ कंपनी ने बताया कि इसकी मुख्य सब्सिडियरी ऑप्टिवल हेल्थ सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड तेलंगाना के हैदराबाद में एक फूड पार्क बनाने की योजना बना रही है। इसमें कोल्ड प्रेस ऑयल निकालने वाली यूनिट भी शामिल होगी। इसमें करीब ₹40 करोड़ की पूंजी लगेगी। इसके अलावा कंपनी की योजना हैदराबाद में एक कॉन्सिअर्ज हेल्थ एंड वेलनेस सर्विसेज फैसिलिटी शुरू करने की भी है। इसमें करीब ₹115 करोड़ का निवेश होगा जिसमें ₹90 करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल?

मे़डप्लस हेल्थ सर्विसेज के शेयरों ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को कुछ ही महीने में बीमार कर दिया। 21 मई 2026 को बीएसई पर यह ₹1,020.35 के भाव पर था जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से दो ही महीने में यह 35.92% फिसलकर आज 22 जुलाई 2026 को ₹653.80 पर आ गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

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Trump Tariffs: जेनेरिक्स पर ट्रंप का एक ऐलान, फार्मा सेक्टर में कोहराम, भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा इतना गहरा असर

Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार 22 जुलाई को 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने की नई टाइमलाइन का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद अब सन फार्मा (Sun Pharma), ल्यूपिन (Lupin), सिप्ला (Cipla) समेत देश की कई दवा कंपनियां निवेशकों के रडार पर आ गई हैं। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका में आयात होने वाली दवाईयों पर सभी जेनेरेकि दवाओं पर अब दो साल तक कोई टैरिफ नहीं लगाया जाएगा। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक इसके बाद 1 अगस्त 2028 से इन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा और 1 अगस्त 2029 से इसे बढ़ाकर 200% कर दिया जाएगा।

Trump Tariffs: अमेरिका के लिए कितना अहम है जेनेरिक्स?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुकाबिक जेनेरिक दवाओं का उत्पादन अमेरिका में करने के लिए टैरिफ पॉलिसी बनाई गई है। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां तय समय के भीतर अमेरिका में अपने प्लांट और इक्विपमेंट नहीं लगाएंगी, उन्हें टैरिफ झेलना पड़ेगा। इससे पहले ट्रंप ने जो टैरिफ लगाए थे, उसके दायरे में ब्रांडेड और पेटेंट वाली दवाईयां थीं, जिसमें अभी भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। पहले वाली पॉलिसी में जेनेरिक्स दवाईयां शामिल नहीं थीं क्योंकि अमेरिका में डॉक्टर्स करीब 90% जेनेरिक्स दवाईयां ही लिखते हैं। ट्रंप सरकार ने ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट के सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर फार्मा इंडस्ट्री की जांच भी शुरू की थी। इसके अलावा आम लोगों सीधे सस्ती दवाओं की बिक्री के लिए Trump RX नाम से एक प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया।

भारतीय फार्मा कंपनियों पर क्या असर?

जेनेरिक्स पर अमेरिकी टैरिफ का भारतीय कंपनियों पर बहुत असर पड़ सकता है। इसकी वजह ये है कि भारतीय दवा कंपनियों का अमेरिका में जितना सेल्स वॉल्यूम है, उसका करीब 90% तो जेनेरिक्स दवाईयों का है तो अमेरिका जितना जेनेरिक्स आयात करता है, उसमें 40% भारत से है। भारत से अमेरिका को करीब $1 हजार करोड़ का फार्मा एक्सपोर्ट है। इसके अलावा भारत के बाहर अमेरिकी दवा नियामक एफडीए से मंजूरी मिली हुई मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में सबसे अधिक भारतीय कंपनियों की ही हैं, जिनकी संख्या लगभग 670 है।

अमेरिका की तुलना में भारत में क्यों बनती हैं अधिक दवाईयां

भारत में दवा बनाने की लागत अमेरिका की तुलना में 30-50% तक सस्ती पड़ती है। सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री के कई जानकारों का मानना है कि अभी यह देखना बाकी है कि इस नीति को वास्तव में कैसे लागू किया जाएगा और ट्रंप के कार्यकाल के बाद इस पर क्या होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक लगातार कीमतों में गिरावट, तगड़े कॉम्पटीशन , अलग-अलग प्रकार की डोजेज और सख्त मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी के चलते अमेरिका में बड़े पैमाने पर जेनेरिक दवाओं का उत्पादन आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अमेरिका में बड़े वॉल्यूम में प्रोडक्शन कैपेसिटी डेवलप करने में कई दशक लग सकते हैं, क्योंकि कम लागत वाली जेनेरिक दवाइयां बनाने को लेकर अमेरिका की क्षमता काफी हद तक कम हो चुकी है।

अमेरिका में किन भारतीय कंपनियों की है मौजूदगी

कई भारतीय कंपनियों की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। अरबिंदो फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग में अच्छी मौजूदगी है तो डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, ल्यूपिन, सिप्ला और जाइडस लाइफ जैसी कंपनियों का भी अमेरिका में कारोबार फैला हुआ है। वहीं एल्केम लैब्स और टोरेंट फार्मा जैसी कंपनियां पूरी तरह से भारत में मौजूद मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर निर्भर हैं और अमेरिका से उनकी कमाई बहुत अधिक नहीं होती है। बायोकॉन जैसी कंपनियां बायोसिमिलर और जेनेरिक दवाओं के प्रोडक्शन के लिए भारत और मलेशिया की यूनिट्स पर निर्भर हैं, जबकि सेनोरेस फार्मा की अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग मौजूदगी है।

Market Insight : IT की रैली पर फिर मंडरा रहा खतरा, ट्रंप ने फार्मा सेक्टर को  दिया झटका, जानिए इनमें अब क्या हो रणनीति

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Market Insight : बाजार में ऊपरी स्तरों पर बना रहेगा दबाव, फार्मा और डिफेंस के इन शेयरों में हो सकती है अच्छी कमाई

Market Insight : आज गुरुवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिल रही है। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद, आज आई चौतरफा खरीदारी ने बेंचमार्क इंडेक्स में जोश भर दिया है। 11.30 बजे के आसपास सेंसेक्स 514.41 अंक या 0.67 प्रतिशत बढ़कर 77,018.01 पर और निफ्टी 148.15 अंक या 0.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,030.20 पर दिख रहा था। मार्केट ब्रेथ में भी मजबूती देखने को मिल रही है। 2,633 शेयरों में तेजी आई है। जबकि 940 शेयरों में गिरावट देखने को मिली है। रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल और मीडिया शेयरों में सबसे ज्यादा बढ़त हुई है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर आज बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह बाजार में उतार-चढ़ाव कम होने का संकेत है।

ऐसे में मार्केट टेक्निकल पर चर्चा करते हुए कोटक सिक्योरिटीज ( Kotak Securities) के श्रीकांत चौहान ने कहा कि उन्हें लगता है कि कल की भारी गिरावट के बाद मार्केट के लिए ऊपरी स्तरों पर टिकना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। निफ्टी में कल 500 अंकों की गिरावट आई थी। अगर हम इसका रिट्रेसमेंट तो यह लगभग 2410 के करीब आता है। यह लेवल मार्केट में एक रेजिस्टेंस का काम करेगा। मार्केट शायद थोड़ा कंसोलिडेट करते हुए नजर आएगा। हायर लेवल पर प्रेशर रहेगा। लेकिन बाजार में वापस स्टॉक स्पेसिफिक एक्शन सक्रिय हो सकते हैं। आज हमें फार्मा जैसे डिफेंसिव शेयरों में काफी अच्छी खरीदारी देखने को मिल रही है। सभी फार्मा स्टॉक्स में अच्छा टेक्निकल ब्रेकआउट जैसा फॉर्मेशन बना है।

उन्होंने आगे कहा कि डिवीज लैब्स जैसे भारी वोलेटाइल स्टॉक में भी एक अच्छा टेक्निकल ब्रेकआउट है। फार्मा में आज अच्छा रिवर्सल बना हुआ है। इसके अलावा ईएमएस सेक्टर में भी एक अच्छा रिवर्सल पैटर्न हमें देखने मिल रहा है। कुछ एक डिफेंस स्टॉक्स में भी बाइंग इंटरेस्ट लौट रहा है। इस कॉन्टेक्स्ट के साथ अगर हम देखें तो इस समय सन फार्मा काफी चल चुकने के बाद अभी भी काफी अच्छा लग रहा है। इस स्टॉक में खरीदारी की जा सकती है। इस स्टॉक में 2200 रुपए का टारगेट हासिल हो सकता है।

वर्तमान स्तरों पर अरबिंदो फॉर्मा के शेयर काफी अच्छा दिख रहा है। यह शेयर 1590-1600 रुपए के रेंज में ट्रेड कर रहा है। इसमें काफी बड़े कंसोलिडेशन के बाद ब्रेकआउट देखने को मिल रहा है। इस स्टॉक में 1570 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 1650-1660 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की जा सकती है।

इसके हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स का शेयर भी अच्छा लग रहा है। यह शेयर 4350 रुपए के करीब ट्रेड कर रहा है। एक रैली के बाद इसमें एक छोटा सा ट्रायंगल फॉर्मेशन बन रहा है जो तेजी के जारी रहने के संकेत दे रहा है। इस स्टॉक में हमें 4350-4360 रुपए के आसपास खरीदारी करनी चाहिए। स्टॉपलॉस 4270 रुपए के आसपास रखें। इसमें हमें 4450-4500 के टारगेट मिल सकते हैं।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।