Powerica Share Price: ₹700 तक जा सकता है ₹565 का शेयर, इस कारण नुवामा हुआ बुलिश

Powerica  Share Price: नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Nuvama Institutional Equities) पावरिका लिमिटेड (Powerica Ltd) के शेयरों को लेकर बुलिश नजर आ रहा है। ब्रोकरेज फ्रर्म ने स्टॉक पर Buy रेटिंग दी है और इसके लिए 700 रुपये का टारगेट प्राइस दिया। जो मौजूदा लेवल से 20 फीसदी की तेजी दिखा रहा है । बता दें कि Powerica के शेयर अपने आईपीओ प्राइस ₹395 से लगभग 48% की तेजी आई है। सोमवार को ये 564.45 रुपये पर बंद हुआ। 2 अप्रैल 2026 को BSE और NSE पर लिस्ट होने के बाद, पिछले 6 महीनों में इस स्टॉक में 34.51% की बढ़त दर्ज की गई है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि नुवामा का यह सकारात्मक नजरिया तीन मुख्य ग्रोथ ड्राइव पर टिका है। कंपनी के डीजल जनरेटर (DG) बिजनेस में सुधार, विंड इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर (IPP) पोर्टफोलियो का विस्तार, और रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइसेस (RECDs) के क्षेत्र में लंबे समय के अवसर।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेज की राय

पावरिका का पावर-सॉल्यूशन पोर्टफोलियो काफी विविध है, जिसमें DG सेट, विंड पावर जनरेशन और RECDs शामिल हैं। नुवामा को उम्मीद है कि FY26 से FY29 के दौरान इन व्यवसायों से अच्छी कमाई होगी। इसके पीछे डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग, अधिक कुशल विंड टर्बाइन और एमिशन-कंट्रोल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाना जैसे कारण हैं।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच, DG बिजनेस के टैक्स के बाद मुनाफे (PAT) में लगभग 21% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) देखने को मिलेगी। वहीं, विंड IPP के EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमोर्टाइजेशन से पहले की कमाई) में 44% और RECD के PAT में 27% की CAGR रहने की उम्मीद है।

पावरिका का DG बिजनेस लगातार कैश जनरेट करने का एक मजबूत आधार है। भारत में कमिंस (Cummins) के लिए केवल तीन जनरेटर ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (GOEMs) में से एक होने के नाते, कंपनी को एक खास फायदा मिलता है।

भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खासकर दक्षिण और पश्चिमी भारत में, जिसका फायदा पावरिका को मिल सकता है। नुवामा ने बताया कि पावरिका के पास डेटा सेंटर से जुड़े लगभग ₹1,100 करोड़ के ऑर्डर हैं। इसकी तुलना में, FY26 में डेटा सेंटर से बिक्री लगभग ₹340 करोड़ रही थी, जो भविष्य में कंपनी की ग्रोथ की अच्छी संभावनाओं को दर्शाती है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि मार्जिन में सुधार आएगा, क्योंकि कंपनी कमिंस (Cummins) द्वारा बढ़ाई गई कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाल देगी। औद्योगिक पूंजीगत व्यय (industrial capital expenditure) में तेजी आने से इसे और बढ़ावा मिल सकता है।

हालांकि, यह सुधार इस बात पर निर्भर करता है कि पॉवरिका (Powerica) बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर कितनी अच्छी तरह डाल पाती है। नुवामा (Nuvama) ने चेतावनी दी है कि अगर कंपनी बढ़ती कमोडिटी लागत के बीच कीमतों में हुई बढ़ोतरी को खुद सहने या ग्राहकों पर डालने में विफल रहती है, तो इससे DG मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।

पॉवरिका का विंड पावर (पवन ऊर्जा) कारोबार, नुवामा की निवेश थीसिस का एक और मुख्य आधार है। कंपनी की विंड कैपेसिटी, मिले हुए ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ (LOAs) के सहारे, वित्त वर्ष 2029 तक लगभग 330 MW से बढ़कर 631 MW होने की उम्मीद है।

कंपनी का पोर्टफोलियो भी नए और अधिक कुशल टर्बाइनों की ओर बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2029 तक इनका हिस्सा 65% से बढ़कर लगभग 82% होने का अनुमान है। ये नई संपत्तियां 30% से अधिक का प्लांट लोड फैक्टर (PLF) और लगभग 80% का EBITDA मार्जिन दे सकती हैं, जिससे पूरे पोर्टफोलियो की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

नुवामा को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2029 तक ब्लेंडेड PLF लगभग 29.4% और विंड बिजनेस का EBITDA मार्जिन लगभग 77% तक पहुंच जाएगा। इसी के आधार पर, वित्त वर्ष 2026 से वित्त वर्ष 2029 के बीच विंड IPP कारोबार के लिए 44% EBITDA CAGR (चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर) का अनुमान लगाया गया है।

पॉवरिका का RECD कारोबार अभी काफी छोटा है, लेकिन जैसे-जैसे उत्सर्जन नियंत्रण (emission-control) की जरूरतें बढ़ेंगी, यह विकास का एक महत्वपूर्ण जरिया बन सकता है। नुवामा के अनुसार, इसका संभावित बाजार लगभग 60,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें केवल पांच से छह प्रमाणित प्रतिस्पर्धी ही मौजूद हैं।

ब्रोकरेज ने बताया कि इस कारोबार में इक्विटी पर लगभग 47% रिटर्न मिलने की संभावना है। साथ ही, विभिन्न राज्यों में RECD से जुड़े नियमों का लागू होना और कंपनी की नए ऑर्डर हासिल करने की क्षमता, इसके लिए महत्वपूर्ण कारक होंगे।

नुवामा का मानना ​​है कि पॉवरिका की रिपोर्ट की गई कमाई, उसकी नकदी पैदा करने की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह से नहीं दर्शाती है। FY26 में ऑपरेटिंग कैश फ्लो PAT का लगभग 170% रहा, जबकि इसके विंड एसेट्स इक्विटी पर लगभग 15–17% का कैश रिटर्न देते हैं।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंसोलिडेटेड रिटर्न ऑन इक्विटी FY27 के लगभग 12% से बढ़कर FY30 तक 14.4% हो जाएगा, क्योंकि नई विंड परियोजनाओं के लिए लगभग 70:30 के डेट-टू-इक्विटी अनुपात के साथ फंडिंग की जाएगी। नुवामा (Nuvama) के अनुसार वैल्यूएशन आकर्षक हैं। इसमें विंड बिजनेस के लिए FY29 में अनुमानित एंटरप्राइज वैल्यू-टू-EBITDA लगभग 6.8 गुना है, और DG सेट के लिए प्राइस-टू-अर्निंग मल्टीपल लगभग 21 गुना है।

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दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने एक्सप्रो इंडिया में लगभग 1% हिस्सेदारी बेची, ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिंग में बढ़ाई हिस्सेदार

जाने-माने निवेशक आशीष कचोलिया ने सोमवार को ओपन-मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए, बिड़ला समूह से जुड़ी पॉलीमर प्रोसेसिंग और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ‘एक्सप्रो इंडिया’ में अपनी लगभग 1 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच दी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा 19 अक्टूबर को जारी बल्क डील डेटा के मुताबिक आशीष कचोलिया ने 21.53 करोड़ रुपये मूल्य के 2.22 लाख इक्विटी शेयर बेचे हैं जो कंपनी की पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 0.94 प्रतिशत है। ये शेयर 970.11 रुपये प्रति शेयर के औसत भाव पर बेचे गए हैं।

सितंबर 2026 तक,एक्सप्रो इंडिया  में कचोलिया की 2.01 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जो 4.71 लाख शेयरों के बराबर है। हिस्सेदारी बेचे जाने के बावजूद, सोमवार को एक्सप्रो इंडिया के शेयरों में 1.79 प्रतिशत की तेजी आई और ये 995 रुपये पर बंद हुए। इसके साथ ही इसमें लगातार पांच दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला भी थम गया।

हालांकि,बीच-बीच में आने वाली खरीदारी के बावजूद, सितंबर के अपने स्विंग हाई पर पहुंचने के बाद से ही यह स्टॉक दबाव में बना हुआ है। यह स्टॉक सितंबर 2026 में बने 1,408.70 रुपये के हाई से लगभग 31 प्रतिशत गिर चुका है।

ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिग में खरीदी 0.73% अतिरिक्त हिस्सेदारी

इस बीच एक दूसरे दिग्गज निवेशक ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिग में 0.73% अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदी है। हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल (HNI) निवेशक ऋषि कजारिया ने स्वराज सूटिग में 1.94 लाख और इक्विटी शेयर खरीदे हैं, जो कंपनी की पेड-अप इक्विटी कैपिटल का 0.73 प्रतिशत है। ये शेयर 6.29 करोड़ रुपये में खरीदे गए हैं, जिनकी औसत कीमत 323.38 रुपये प्रति शेयर रही। सितंबर 2026 तक, स्वराज सूटिग में कजारिया की 1.24 प्रतिशत हिस्सेदारी थी,जो 3.26 लाख शेयरों के बराबर है। बता दें कि स्वराज सूटिंग सूती और सिंथेटिक कपड़े बनाती है।

FIIs ने की बिकवाली, DIIs से मिला सपोर्ट

उधर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सोमवार को भारतीय बाजारों में 1,148.64 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह इस महीने की उनकी सबसे कम नेट सेलिंग रही थी। यह 15 अक्टूबर को हुई 5,285.37 करोड़ रुपये की बिक्री से कम है। एक्सचेंज के प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 3,201.19 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

कल के सेशन में FIIs ने 11,240.64 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 12,389.28 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। DIIs ने 14,781.31 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे और 11,580.12 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, शुक्रवार, 16 अक्टूबर को FIIs नेट बॉयर रहे थे और उन्होंने 1,165.92 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी। यह इस महीने उनका एकमात्र ऐसा सत्र था जिसमें उन्होंने नेट बाइंग की। हालांकि, शुक्रवार DIIs ने 3,661.28 करोड़ रुपये की नेट सेलिंग की थी।

बाजार पर एक नजर

सोमवार को भारतीय बाजारों में गिरावट आई। निफ्टी257.20 अंक या 1.11% गिरकर 22,888.95 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 876.37 अंक या 1.17% की गिरावट के साथ 73,852.90 पर बंद हुआ। इस गिरावट में प्राइवेट बैंकों की अहम भूमिका रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.85% की गिरावट आई। FMCG में 1.44% और IT में 1.28% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में लगभग 2.4% की तेजी आई।

निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.09% और 1.01% की गिरावट आई। सोमवार को FIIs ने अपनी बिकवाली काफी कम कर दी,लेकिन फिर भी बेंचमार्क सूचकांकों में 1% से ज़्यादा की गिरावट आई।

 

 

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Kia Sorento sells 1,739 units in its first month since launch

Kia Sorento sells 1,739 units in its first month since launch
Kia Sorento

The Kia Sorento recorded 1,739 units in domestic wholesales in September 2026, its first month on sale after launching on September 4. It was Kia India’s fifth best-selling model that month. Including 365 units dispatched to dealers in August ahead of the launch, the Sorento’s total wholesales stood at 2,104 units.

Kia India recorded its highest-ever monthly wholesales of 32,017 units in September, up 41 percent year on year. This was the first time the company had crossed 30,000 units in a month, surpassing its previous record of 29,556 units in October 2025, which was the first month after the GST 2.0 rate cuts kicked in.

Kia Sorento: All you need to know

The Sorento is priced between Rs 27.99 lakh and Rs 40.39 lakh (ex-showroom). It is offered with a 1.6-litre turbo-petrol strong-hybrid powertrain or a 2.2-litre turbo-diesel engine. The hybrid setup pairs a 180hp, 265Nm petrol engine with a 65hp, 264Nm electric motor, while the diesel mill produces 193hp and 442Nm.

The SUV is available in six- and seven-seat configurations. Key features include dual 12.3-inch displays, a head-up display, ventilated front seats, a powered tailgate, a panoramic sunroof and second-row captain seats with ventilation. Safety equipment includes 10 airbags, a 360-degree camera, dual dashcams and Level 2+ ADAS.

The Kia Sorento rivals the Jeep Meridian, Skoda Kodiaq and Volkswagen Tayron. 

Kia India sales up 29 percent in H1 FY2027

Kia India recorded wholesales of 1,68,683 units between April and September 2026, a 29 percent year-on-year increase. September wholesales stood at 32,017 units, up 41 percent year on year and the company’s highest monthly total since it entered India in 2019. In Q2 FY2027 (July-September 2026), sales grew 39 percent year on year to 89,259 units and were 12 percent higher than in Q1 FY2027.

The Seltos was Kia’s best-selling model in the first half of FY2027, with 67,667 units, up 99 percent year on year. It accounted for 40 percent of the company’s total wholesales during the period. The Sonet ranked second with 56,929 units, up 21 percent, contributing 34 percent of sales. The Carens range, including the Carens, Carens Clavis and Clavis EV, recorded 34,284 units, down 18 percent year on year.

SBI की 444 दिनों की स्पेशल FD स्कीम! जानें ₹5 लाख और ₹10 लाख फिक्स कराने पर कितना मिलेगा रिटर्न

SBI Amrit Vrishti Scheme: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की स्पेशल फिक्स्ड डिपॉजिट योजना ‘अमृत वृष्टि’ निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। अगर आप सुरक्षित जगह पर निवेश करके शानदार रिटर्न पाना चाहते हैं, तो यह खास 444 दिनों की योजना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। बैंक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जानिए इस स्पेशल टेन्योर स्कीम की हर एक जरूरी बात।

ब्याज दरें: किसे कितना मिलेगा फायदा?

इस योजना के तहत अलग-अलग आयु वर्ग के निवेशकों के लिए ब्याज दरें तय की गई हैं:

  1. आम नागरिक: 6.45% सालाना
  2. वरिष्ठ नागरिक: 6.95% सालाना (सामान्य नागरिकों से 0.50% ज्यादा)
  3. सुपर सीनियर सिटीजन (80 वर्ष से अधिक): 7.05% सालाना

स्कीम की मुख्य विशेषताएं और नियम

अवधि: इस एफडी की मैच्योरिटी अवधि ठीक 444 दिन (करीब 14.5 महीने) तय की गई है।

न्यूनतम और अधिकतम राशि: इस योजना में रिटेल डिपॉजिट के तहत ₹1,000 से निवेश की शुरुआत की जा सकती है, और अधिकतम राशि ₹3 करोड़ से कम होनी चाहिए।

कौन कर सकता है निवेश: भारत के सामान्य नागरिक, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और अनिवासी भारतीय (NRIs) इसमें निवेश के पात्र हैं।

ब्याज भुगतान के विकल्प: निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार ब्याज का भुगतान मासिक, त्रैमासिक, छमाही या सीधे मैच्योरिटी के समय ले सकते हैं।

लोन सुविधा: जरूरत पड़ने पर निवेशकों को इस एफडी पर लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी मिलती है।

प्री-मैच्योर विड्रॉल यानी समय से पहले पैसे निकासी के नियम

अगर आपको मैच्योरिटी से पहले पैसों की जरूरत पड़ जाती है और आप एफडी तुड़वाते हैं, तो बैंक नियमों के तहत पेनल्टी काटता है:

₹5 लाख तक की राशि पर: 0.50% की पेनल्टी।

₹5 लाख से ₹3 करोड़ से कम राशि पर: 1.0% की पेनल्टी।

खास छूट: अगर एफडी को बुक करने के 7 दिनों के भीतर बंद किया जाता है, तो कोई ब्याज नहीं मिलता है। हालांकि, बैंक के कर्मचारियों और पेंशनर्स को इस पेनल्टी से छूट दी गई है।

कैसे कर सकते हैं आवेदन?

SBI की इस योजना का लाभ उठाने के लिए निवेशकों को बैंक जाने की भी जरूरत नहीं है, इसे घर बैठे ऑनलाइन भी शुरू किया जा सकता है:

  • SBI YONO App के जरिए।
  • एसबीआई की आधिकारिक इंटरनेट बैंकिंग पोर्टल से।
  • अपने नजदीकी एसबीआई की किसी भी शाखा में जाकर फॉर्म भरकर।

₹5 लाख और ₹10 लाख की FD पर कितना मिलेगा रिटर्न

एसबीआई की 444 दिनों वाली ‘अमृत वृष्टि’ एफडी में अगर आप 5 लाख रुपये का निवेश करते हैं, तो 6.45% सालाना ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹39,800 से ₹40,000 का ब्याज मिलेगा, जिससे कुल रकम बढ़कर करीब ₹5.40 लाख हो जाएगी; वहीं 6.95% की दर से वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹43,000 से ₹43,200 तक का रिटर्न मिलेगा, जिससे उनकी कुल रकम ₹5.43 लाख के पार पहुंच जाएगी।

इस स्कीम में ₹10 लाख की FD करने पर 6.45% सालाना चक्रवर्ती ब्याज दर के हिसाब से आम नागरिकों को मैच्योरिटी पर लगभग ₹80,000 से ₹80,500 तक का शुद्ध रिटर्न मिलेगा (कुल मैच्योरिटी रकम करीब ₹10.80 लाख हो जाएगी); वहीं 6.95% सालाना ब्याज दर के साथ वरिष्ठ नागरिकों को कुल ₹86,500 से ₹87,000 तक का ब्याज प्राप्त होगा, जिससे 444 दिनों बाद उनकी कुल जमा रकम बढ़कर लगभग ₹10.87 लाख पहुंच जाएगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Royal Enfield Guerrilla 450 vs Triumph Tracker 400 Comparison: Street Brawl

Royal Enfield Guerrilla 450 vs Triumph Tracker 400 Comparison: Street Brawl
Royal Enfield Guerrilla 450 vs Triumph Tracker 400 Comparison Lead Image

If you are considering either of these motorcycles, chances are you are also considering the other, especially since they both cost about the same. After the Triumph 400cc bikes were downsized, the Tracker 400 now uses a 349cc engine, while the Guerrilla 450 Apex is a sportier variant with more aggressive ergonomics and grippy, road-focused tyres, which I think suit the bike much better than those on the earlier variant.

On paper, the Tracker makes 40hp and 32Nm, while the Guerrilla produces 40.02hp and 40Nm. The Triumph is a lighter, more compact motorcycle, while the Royal Enfield has a larger engine with more torque and offers a stable, planted feel. So, which one makes more sense for someone looking for a sporty, entertaining roadster?

Design and Features

Both motorcycles have very different visual identities, and that is probably the first thing you’ll notice. The Tracker 400 is inspired by flat-track racers, with a flat seat, side number boards and a wide handlebar. But this isn’t really a dirt-track-focussed motorcycle underneath, as its ergonomics, chassis and suspension are properly road-oriented.

The Guerrilla 450 Apex, meanwhile, looks like a sporty and muscular roadster. Compared to the standard variant, it gets a small cowl over the headlight, a new aluminium handlebar, a removable rear-seat cowl and Vredestein Centauro ST+ tyres. The Apex also has a leaned-forward, more committed riding position compared with the standard Guerrilla.

The Tracker is a relatively compact motorcycle, while the Guerrilla’s longer 1,440mm wheelbase and broad 160-section rear tyre give it a more substantial stance. The Triumph gets a larger 13-litre fuel tank compared with the Guerrilla’s 11-litre unit, which can be tedious when long-distance touring.

Both motorcycles are equally impressive when it comes to build quality and fit and finish. The Tracker features the same digi-analogue console we have seen on all the other Triumph 400 models, while the Guerrilla features the same TFT unit from the Himalayan. The Guerrilla gets two riding modes (Sport and Street), both of which feel quite similar. On the other hand, the Tracker gets a switchable traction control system that the Guerrilla misses out on. Neither has a quickshifter. In terms of convenience, the Guerrilla has a more accessible 780mm seat height and also gets a main stand, which aids in easier chain maintenance.

There is also a difference in ergonomics. The Tracker’s seat is flat and the riding position is relatively sporty, with rear-set footpegs that suit the character of the bike. The Guerrilla Apex has a lower and more accessible 780mm seat and roadster-like, neutral-set footpegs, along with a committed upper-body position. Between the two, you sit on top of the Tracker with its flat seat, while on the Guerrilla, you sit inside the curved seat, and it is also the more comfortable of the two.

Performance and Fuel Economy

This is where things get interesting because the Tracker 400’s 349cc engine is 103cc smaller than the Guerrilla’s 452cc unit, yet peak power is almost identical. The Triumph produces 40hp at 8,750rpm and 32Nm at 7,500rpm, while the Royal Enfield makes 40.02hp at 8,000rpm. Of course, the difference comes in torque, where the RE makes a much healthier 40Nm at 5,500rpm.

The difference in torque delivery is immediately noticeable. The Tracker’s engine likes to be revved out, but you still have to work it quite a bit. The Guerrilla’s Sherpa engine has a different personality. It doesn’t need to be worked as hard, and the additional 8Nm gives it much stronger roll-on performance. It feels more raw and powerful as soon as you open the throttle, and the surge in power after 6,000rpm makes it feel really exciting. After 7,000rpm, there are some vibrations, but nothing that really ruins the riding experience.

The Tracker’s shorter-stroke engine is very refined at moderate engine speeds, but once you start revving it harder, some buzz makes its way into the tank and footpegs at the top end of the rev range. It remains an entertaining engine, but considering I have ridden the older 398cc Thruxton 400, I feel like it misses out on that initial torque kick.

In our performance tests, the Guerrilla completed the 0-100kph sprint in 6.34 seconds, while the Tracker took 7.55 seconds for the same, marking a difference of 1.21 seconds. The real difference in performance was more visible in the roll-on acceleration tests where the Guerrilla 450 Apex was notably quicker.

Fuel efficiency was almost on par in our tests, where the Tracker delivered 24.1kpl in the city and 31.71kpl on the highway, while the Guerrilla gave us 25.23kpl in the city and 32.82kpl on the highway. The Triumph’s 13-litre tank will give it a better range despite the marginally lower highway efficiency. 

Ride and Handling

The biggest difference between these two motorcycles becomes apparent once the road starts to twist. The Guerrilla feels longer and heavier and needs a bit of muscling around, but once in a corner, it is extremely stable and planted. The grip offered by the Vredestein tyres is superb and inspires a lot of confidence. The Tracker, on the other hand, feels light, nimble and very easy to flick into corners, thanks to its shorter wheelbase and the leverage offered by the wide handlebars. Its blocky MRF tyres work well, but given how it rides more like a sporty roadster rather than a tracker, stickier tyres would have been a better choice.

While many might be disappointed about the Guerrilla 450 Apex not getting a USD fork, the suspension does work much better than the Tracker’s over bad roads and undulations. The setup feels plusher than the Tracker, which has a quicker rebound that can toss you up if you hit potholes at higher speeds. 

Despite the Triumph being the more compact motorcycle, I felt like it was easier to filter through traffic on the Guerrilla, and that is because the Triumph has slightly wider handlebars and mirrors that jut out slightly more. I do remember my time spent with the Guerrilla on a go-kart track, and it was genuinely a lot of fun. The tyres kept up with the performance that the engine offers, and it was a blast to exploit the full capabilities of the bike. The only limitation was the footpegs, which kept scraping when the bike was leaned over. That said, this was never a problem out on the road.

Braking hardware is strong on both. The Tracker gets a 300mm front disc with a four-piston radial ByBre caliper, while the Guerrilla uses a 310mm front disc and 270mm rear disc. The Guerrilla stopped marginally quicker in our braking test from 60-0kph, but I did notice that the ABS intervention can be strong when emergency braking from higher speeds.

Price and Verdict

These two motorcycles are closer than their engine capacities suggest. The Tracker proves that you don’t need a large engine to make for a fun roadster. Its 349cc motor makes almost as much peak power as the Guerrilla, and its compact dimensions, wide handlebar and sporty chassis make it an engaging motorcycle on a twisty road.

The Royal Enfield Guerrilla 450 Apex, however, takes a more muscular approach. Its 452cc engine has substantially more torque, the Vredestein tyres give it a level of grip that suits its performance, and the longer wheelbase also gives it a reassuring planted character, particularly when you’re riding quickly.

They offer two distinct interpretations of the sporty modern roadster. The Tracker’s biggest strength is its agility. It feels smaller, lighter and more eager to change direction quickly. The Guerrilla’s strength is the breadth of its performance. There’s more torque, more road presence and a greater sense of stability when you’re pushing it. And that is ultimately what separates them. The Triumph is the more playful motorcycle, thanks to its nimble nature, while the Guerrilla Apex feels like a more serious attempt at turning the standard roadster into a proper performance-oriented, corner-carving machine.

While it is difficult to pick between these two motorcycles, considering that they do things in different ways, you can’t look past the value that the Guerrilla offers. Despite falling into the 40 percent GST bracket, its starting price is just Rs 10,000 more than that of the Tracker. 
To put things into perspective, the KTM 390 Duke R, which used to be the benchmark for affordable and accessible performance when its Gen 1 model was launched in India, is now priced at Rs 3.45 lakh (ex-showroom), taking its on-road price upwards of Rs 4 lakh. So the way I see it, the Guerrilla 450 Apex is now the new benchmark when it comes to affordable performance in India. Who’d have ever thought that the crown would one day be worn by a Royal Enfield.

Jio Platforms IPO: एंकर निवेशकों से जुटाए ₹8110 करोड़, 30 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन; कैपिटल ग्रुप और LIC रहे टॉप इनवेस्टर

जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का 30,213 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर को खुलने वाला है। इससे पहले एंकर बुक में कंपनी ने 212 एंकर निवेशकों से 8,109.85 करोड़ रुपये जुटाए। इस ऑफर के लिए संस्थागत निवेशकों की मांग 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही, जो एंकर बुक में उपलब्ध शेयरों की कुल कीमत से 30 गुना से भी ज्यादा है। कंपनी ने एंकर निवेशकों को प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर 7.24 करोड़ इक्विटी शेयर अलॉट किए। कैपिटल ग्रुप को 725 करोड़ रुपये के शेयर अलॉट हुए। दूसरे नंबर पर लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) रही, जिसे 499.98 करोड़ रुपये के शेयर अलॉट हुए।

एंकर बुक में ब्लैकरॉक, कैपिटल ग्रुप, फिडेलिटी इनवेस्टमेंट्स, टी. रो प्राइस, श्रोडर्स, जेपी मॉर्गन एसेट मैनेजमेंट, फ्रैंकलिन टेंपलटन, इनवेस्को और प्रूडेंशियल जैसी कई बड़ी वैश्विक कंपनियों ने भी हिस्सा लिया। दुनिया के कुछ प्रमुख सॉवरेन वेल्थ फंडों ने भी इस इश्यू में दिलचस्पी दिखाई। इनमें सिंगापुर का GIC, नॉर्वे का नॉर्जेस बैंक इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट, अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA), कतर इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (QIA), PSP इनवेस्टमेंट्स, कैलिफोर्निया स्टेट टीचर्स रिटायरमेंट और फ्लोरिडा रिटायरमेंट सिस्टम शामिल हैं। एंकर बुक में ड्रैगनियर इनवेस्टमेंट ग्रुप, जानूस हेंडरसन और नाइंटी वन जैसे ग्लोबल टेक स्पेशलिस्ट्स ने भी हिस्सा लिया।

भारत से म्यूचुअल फंड कंपनियां, जीवन बीमा कंपनियां और पेंशन फंड बने हिस्सा

भारत की टॉप 10 म्यूचुअल फंड कंपनियों ने भी इस ऑफरिंग में दिलचस्पी दिखाई है। इनमें SBI म्यूचुअल फंड, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, HDFC म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड शामिल हैं। घरेलू म्यूचुअल फंडों को 25 फंड हाउसेज की 95 स्कीमों के जरिए 2,784.96 करोड़ रुपये के 2.489 करोड़ शेयर मिले। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनियां और पेंशन फंड भी निवेशकों के इस समूह का हिस्सा हैं। इनमें LIC, HDFC लाइफ, SBI लाइफ, SBI पेंशन (NPS ट्रस्ट), HDFC पेंशन, ICICI प्रूडेंशियल और UTI पेंशन जैसी संस्थाएं शामिल हैं।

जीवन बीमा कंपनियों और पेंशन फंडों को 1,089.95 करोड़ रुपये के 97.4 लाख शेयर अलॉट हुए। इसके अलावा, भारत के प्रमुख फैमिली ऑफिसेज- जैसे कि इनाम फैमिली ऑफिस, प्रेमजी इनवेस्ट, जेरोधा फैमिली ऑफिस और HCL फैमिली ऑफिस ने भी जियो प्लेटफॉर्म्स में दिलचस्पी दिखाई है।

Jio Platforms IPO के लिए कितना है प्राइस बैंड

जियो IPO 23 अक्टूबर को बंद होगा। लगभग दो दशकों यानि कि 20 साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आ रहा है। यह साइज के मामले में देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। प्राइस बैंड ₹1065-₹1119 प्रति शेयर है। लॉट साइज 12 शेयर है। IPO में 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। अलॉटमेंट 26 अक्टूबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी की लिस्टिंग NSE और BSE पर 28 अक्टूबर को हो सकती है। एंकर निवेशक IPO में 19 अक्टूबर को बोली लगा सकते हैं।

इस पब्लिक इश्यू में Jio Platforms के कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये के शेयर और इसकी पेरेंट कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये के शेयर रिजर्व रखे गए हैं। कंपनी पात्र कर्मचारियों को फाइनल ऑफर प्राइस पर 54 रुपये प्रति शेयर की छूट (डिस्काउंट) के साथ शेयर ऑफर कर रही है। बचे हुए नेट इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा।

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IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलिकॉम, डिजिटल सर्विसेज, उद्यम समाधान और उभरते टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव शामिल हैं। इसकी टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड देश में सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।

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Commodity Cornor: क्रूड में नरमी से महंगाई की चिंता हुई कम , यील्ड में गिरावट से सोने को मिला सहारा

सोने की कीमतों में स्थिरता रही। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुई, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट ने सोने को और सहारा दिया। शाम के सत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) लगभग 4,165 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद भाव से 0.09 प्रतिशत बढ़कर 4,185 डॉलर प्रति औंस (12:40 GMT) के करीब पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप, घरेलू बाजार में MCX पर हाजिर सोना शाम के सत्र में 1,45,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था, जबकि 4 दिसंबर की डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.08 प्रतिशत गिरकर 1,47,793 रुपये प्रति 10 ग्राम (18:16 IST) पर आ गया।

LKP सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) वाइस प्रेसिडेंट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “सोने में काफी हद तक स्थिरता रही। 4,190 डॉलर के ऊपरी स्तरों से प्रॉफिट बुकिंग के बाद, यह कॉमेक्स (Comex) सोने के रुझान का अनुसरण कर रहा है। 4,200 डॉलर का स्तर एक अहम रेजिस्टेंस (बाधा) बना हुआ है, जबकि डॉलर इंडेक्स के मजबूत होने से सोने में तेजी सीमित हो रही है।”

डॉलर इंडेक्स 0.09 फीसदी बढ़कर 101.93 पर कारोबार कर रहा था, जबकि फ्यूचर्स ट्रेड में ब्रेंट क्रूड 1.17 प्रतिशत गिरकर 108.58 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

PL कैपिटल के कमोडिटी प्रमुख आशीष राजोदिया ने कहा, “अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और यील्ड कम रहती है, तो सोने और चांदी में रिकवरी जारी रह सकती है। हालांकि, अगर तेल की कीमतों में फिर से उछाल आता है या फेड (अमेरिकी केंद्रीय बैंक) की ओर से कोई सख्त रुख (hawkish signal) देखने को मिलता है, तो सोने की ये बढ़त खतरे में पड़ सकती है।”

उन्होंने आगे कहा कि बाजार अब यह मानकर चल रहा है कि 27-28 अक्टूबर की बैठक में फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। “अब सबकी नजरें फेड के बयान के लहजे और महंगाई के आंकड़ों के अगले दौर पर टिकी हैं।” ओम्निसिएंस कैपिटल के CEO विकास गुप्ता का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हैं, लेकिन साथ ही कुछ बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो सोना बेच रहे हैं, जिससे सोने की कीमतें नियंत्रित बनी हुई हैं।

गुप्ता ने कहा, “भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि, फेड (Fed) द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए, वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है, लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।”

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चीन ने टनल बोरिंग मशीनों के एक्सपोर्ट पर लगाया बैन, क्या ये भारत के मेट्रो और टनल प्रोजेक्ट्स को झटका देने की चाल?

भारत में मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और सुरंगों के निर्माण पर चीन के एक नए फैसले का असर पड़ सकता है। चीन ने टनल बोरिंग मशीन (TBM) समेत कुछ अहम मशीनों के निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। इन मशीनों का इस्तेमाल जमीन के नीचे सुरंग बनाने में होता है। ऐसे में चीन के इस कदम से भारत की कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सामने मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय (MOFCOM) ने कहा कि ये प्रतिबंध राष्ट्रीय सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए लगाए गए हैं। निर्यात पर ये पाबंदियां 18 नवंबर से लागू होंगी।

TBM के प्रतिबंध से भारत की कई परियोजनाओं पर पड़ेगा असर

टनल बोरिंग मशीनों (TBM) और उनसे जुड़ी चीजों के निर्यात पर लगी इन पाबंदियों से भारत की कई परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। इनमें अंडरग्राउंड मेट्रो सिस्टम, हाई-स्पीड रेल लाइनें और सीमावर्ती इलाकों सहित कई जगहों पर बन रही सुरंगें शामिल हैं।

गौरतलब है कि चीन पहले भी भारत को TBM के निर्यात पर पाबंदियां लगाता रहा है। साल 2024 में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जर्मनी के वाइस चांसलर रॉबर्ट हाबेक के सामने यह मुद्दा उठाया था। उन्होंने बताया था कि चीन एक जर्मन कंपनी को वहां निर्मित टनल बोरिंग मशीनें भारत निर्यात करने नहीं दे रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, चीन के नए प्रतिबंधों में ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ (चलने वाले उत्खनन यंत्र) और ‘प्लेट्यू-टाइप वेट शॉटक्रिट मशीनें’ भी शामिल हैं।

क्या है ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ मशीन?

बता दें कि ‘वॉकिंग एक्सकेवेटर’ एक ऐसी मशीन है जिसे हर तरह के भू-भाग पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है। यह अपने वर्किंग अटैचमेंट, आउट्रिगर या पहियों की मिली-जुली गतिविधियों का इस्तेमाल करके कठिन इलाकों में भी खुदाई का काम कर सकती है।

‘प्लेट्यू-टाइप वेट शॉटक्रिट मशीन’ का इस्तेमाल ऊंचे पठारी इलाकों में किया जाता है। यह सीमेंट और दूसरी निर्माण सामग्री को नोजल तक पहुंचाती है। इसके बाद हवा और एक खास केमिकल की मदद से इस मिश्रण को तेज दबाव के साथ किसी सतह पर छिड़का जाता है। इसका इस्तेमाल निर्माण कार्यों में सतह को मजबूत बनाने के लिए किया जाता है।

घोषणा के मुताबिक, इन नए उपायों के तहत ड्रेजर (तलछट हटाने वाली मशीन) से जुड़ी कुछ वस्तुओं के निर्यात नियंत्रण को भी बेहतर बनाया गया है। इनमें स्लरी पंप, ड्रैगहेड और कटरहेड जैसी चीजें शामिल हैं, जो तय तकनीकी मानकों को पूरा करती हैं।

AI से सोलर पावर तक, 14 तकनीकों पर नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी में चीन

वहीं शुक्रवार को, MOFCOM ने एक ड्राफ्ट प्लान जारी किया, जिसमें 14 तरह की तकनीकों पर नए निर्यात प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। इन तकनीकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बायोटेक्नोलॉजी से लेकर फोटोवोल्टिक सोलर पावर तक के क्षेत्र शामिल हैं।

इन प्रस्तावित प्रतिबंधों का वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा पर बड़ा असर पड़ सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो चीनी AI पर निर्भर हैं।

सोमवार को जारी घोषणा के मुताबिक, इन प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले सामान का निर्यात करने वाली कंपनियों को चीन के वाणिज्य मंत्रालय से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए उन्हें चीन के निर्यात नियंत्रण कानून और दोहरे इस्तेमाल वाली वस्तुओं से जुड़े नियमों का पालन करना होगा।

घोषणा में यह भी कहा गया है कि निर्यातकों को प्रतिबंधित सामान की सही पहचान करनी होगी और सीमा शुल्क से जुड़े दस्तावेजों में उसकी पूरी जानकारी देनी होगी। साथ ही, हर सामान के लिए तय दोहरे इस्तेमाल वाले निर्यात नियंत्रण कोड का उल्लेख करना भी जरूरी होगा।

सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, जिन वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लागू नहीं है, लेकिन जिनकी तकनीकी विशेषताएं या प्रदर्शन समान हैं, उनके मामले में निर्यातकों को अपने दावों को साबित करने के लिए विस्तृत तकनीकी पैरामीटर देने होंगे।

अगर सीमा शुल्क अधिकारियों को दी गई जानकारी की सटीकता, उसके पूरा होने या उसकी असलियत पर शक होता है, तो वे उसकी दोबारा जांच कर सकते हैं। MOFCOM की घोषणा के अनुसार, जांच पूरी होने तक संबंधित सामान की खेप को आगे भेजने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

ये निर्यात नियंत्रण उन ड्रेजर स्लरी पंपों पर लागू होंगे, जिनका इनलेट व्यास कम से कम 0.55 मीटर है और जिनकी अधिकतम रोटेशनल स्पीड 400 चक्कर प्रति मिनट (rpm) से अधिक नहीं है।

क्या होते हैं ड्रेजर स्लरी पंप?

बता दें कि ड्रेजर स्लरी पंप भारी-भरकम सेंट्रीफ्यूगल पंप होते हैं। इन्हें नदियों, झीलों, बंदरगाहों और महासागरों की तलहटी से पानी और ठोस पदार्थों (जैसे रेत, बजरी, गाद, मिट्टी और खदान के अवशेष) के सघन मिश्रण को खींचने और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

ऐसे पंपों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए मुख्य पुर्जे भी निर्यात नियंत्रण के दायरे में आएंगे। इनमें कम से कम 1.3 मीटर के आंतरिक व्यास वाले पंप केसिंग और कम से कम 1.3 मीटर व्यास वाले इम्पेलर शामिल हैं।

घोषणा के अनुसार, इन नियंत्रणों में ‘ट्रेलिंग सक्शन हॉपर ड्रेजर’ (TSHD) में इस्तेमाल होने वाले ड्रैगहेड (जिनके सक्शन पाइप का व्यास कम से कम 0.55 मीटर है) और ‘कटर सक्शन ड्रेजर’ (CSD) में इस्तेमाल होने वाले कटरहेड (जिनके बाहरी कटर रिंग का व्यास कम से कम 2.1 मीटर है) भी शामिल हैं।

TSHD और CSD पानी के नीचे जमा तलछट (sediments) को निकालने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले दो प्रमुख प्रकार के समुद्री जहाज हैं। हालांकि, ये पूरी तरह से अलग-अलग तंत्रों (mechanisms) पर काम करते हैं और अलग-अलग वातावरण के लिए उपयुक्त होते हैं।

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Silver Gold Price Today : एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में सोने-चांदी के भाव में नरमी, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Silver Gold Price Today : मंगलवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और रिटेल महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.3% गिरकर 4,126.84 डॉलर प्रति औंस पर दिख रहा है। वहीं, दिसंबर की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर 4,146.00 डॉलर पर दिख रहा है।

निवेशकों का फोकस अब यूएस फेड की 27-28 अक्टूबर की नीति बैठक और अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स’ (PCE) डेटा पर है। यूएस फेड 2% महंगाई दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए वह इस डेटा पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए है।

यूएस फेड ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में कर दिया था। CME के ​​’फेडवॉच टूल’ के मुताबिक ट्रेडर्स का मानना ​​है कि इस बात की 83% संभावना है कि केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा,जबकि दिसंबर में दरों के बढ़ने की उम्मीद 94% बनी हुई है।

इस बीच बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा है कि रिटेल महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के काफी करीब है। ग्लोबल स्तर पर AI की भारी मांग और टाइट जॉब मार्केट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिलते हैं।

आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे सोना (बुलियन) अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है, जबकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

जियोपोलिटिकल फ्रंट की बात करें तो यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रा, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं।

दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो, स्पॉट सिल्वर 0.7% गिरकर 56.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम 1,639.65 डॉलर पर सपाट दिख रहा है। जबकि, पैलेडियम 0.7% गिरकर 1,112.08 डॉलर पर आ गया है।

एक्सपर्ट्स की राय

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि अगले 2-3 के नजरिए से सोने को लेकर आम राय यही है कि इसकी कीमतें बढ़ेंगी। इस अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि,ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।

विकास गुप्ता का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हो सकते हैं,लेकिन साथ ही ऐसे बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो उसी समय सोना बेचें,जिससे सोने की कीमतें नियंत्रण में बनी रह सकती है।

भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि,फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए,ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है,लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि भारत में दशहरा मनाया जा रहा है और इस समय 24-कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले महीने यह अपने रिकॉर्ड हाई से 6% से ज्यादा नीचे आया है। इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है वह सोने के प्रति भारतीय परिवारों के लगाव में नहीं,बल्कि इसे खरीदने के तरीके में है। भारतीय अपने त्योहारी बजट को तो स्टेबल रख रहे हैं,भले ही इसके लिए उन्हें कम वजन वाले आभूषण खरीदने पड़ें।

साथ ही लोग सोने के सिक्कों,बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में अधिक निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी खरीदारी अब केवल गहने खरीदने तक सीमित न रहकर, संपत्ति को सुरक्षित रखने के एक व्यवस्थित तरीके में बदल रही है। आगे चलकर, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल नहीं आने देंगी,जिससे निकट भविष्य में सोने की कीमत में 5% तक की उतार-चढ़ाव वाली रेंज बनी रहने की संभावना है। इस दशहरे पर,खरीदार कीमतों में आई हालिया गिरावट को किसी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि खरीदारी शुरू करने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं।

 

 

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।