SBI Scholarship 2026: स्टूडेंट्स को SBI दे रहा ₹15 लाख तक की स्कॉलरशिप! 19 सितंबर तक है मौका, जानें पूरी डिटेल्स

SBI Asha Scholarship 2026-27: अगर आप या आपके घर में कोई स्टूडेंट स्कूल, कॉलेज, IIT, IIM, मेडिकल या विदेश में पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई का खर्च आड़े आ रहा है, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक की यह स्कीम आपके बड़े काम आ सकती है। एसबीआई फाउंडेशन ने ‘एसबीआई प्लेटिनम जुबली आशा स्कॉलरशिप 2026-27’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्या है इस स्कीम में?

एसबीआई की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को ₹15,000 से लेकर ₹15 लाख सालाना तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क और ऑनलाइन है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, 2026-27 सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 19 सितंबर 2026 कर दी गई है।

किस कैटेगरी में मिलेगी कितनी स्कॉलरशिप?

एसबीआई आशा स्कॉलरशिप अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से दी जा रही है:

  • कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र: ₹15,000 सालाना।
  • अंडरग्रेजुएट (UG) छात्र: ₹75,000 तक।
  • पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्र: ₹1.5 लाख तक।
  • MBBS (मेडिकल) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IITs (इंजीनियरिंग) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IIMs (MBA/PGDM) छात्र: ₹5 लाख तक।
  • विदेश में पढ़ाई करने वाले : ₹15 लाख तक।

कौन कर सकता है अप्लाई?

स्कॉलरशिप पाने के लिए एसबीआई फाउंडेशन ने कुछ शैक्षणिक और फैमिली इनकम की शर्तें तय की हैं:

कक्षा 9 से 12वीं के लिए: पिछली कक्षा में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA होना अनिवार्य है। SC/ST छात्रों के लिए न्यूनतम अंक 65% और दिव्यांग छात्रों (PwBD) के लिए 60% तय किए गए हैं। पारिवारिक आय सीमा ₹3 लाख सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन (UG/PG): UG छात्रों के लिए पारिवारिक आय सीमा ₹6 लाख सालाना है। कॉलेज/संस्थान NIRF ओवरऑल रैंकिंग की टॉप 300 सूची में या NAAC ‘A’ ग्रेड प्राप्त होना चाहिए।

MBBS: AIIMS या NIRF टॉप 50 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए। साथ ही NEET स्कोरकार्ड अनिवार्य है।

IIT: देश के 23 IITs में से किसी एक में पढ़ाई और वैध JEE Advanced स्कोरकार्ड।

IIM: देश के 22 IIMs में अध्ययनरत छात्र और वैध CAT स्कोरकार्ड (आय सीमा व शैक्षणिक नियम लागू)।

विदेश में उच्च शिक्षा: QS टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रहे या एडमिशन ऑफर लेटर पाने वाले भारतीय छात्र पात्र हैं। पारिवारिक आय ₹6 लाख सालाना से कम होनी चाहिए। वैध GRE, GMAT, MCAT, LNAT या LSAT स्कोरकार्ड होना अनिवार्य है।

आवेदन कैसे करें और क्या-क्या डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

पोर्टल पर जाएं: आधिकारिक SBI Asha Scholarship पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट बनाएं।

कैटेगरी चुनें: अपनी योग्यता के अनुसार सही स्कॉलरशिप कैटेगरी का चयन करें और फॉर्म भरें।

डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: पिछली शैक्षणिक मार्कशीट, पहचान पत्र (Aadhaar/Govt ID), आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक डिटेल्स, एडमिशन/बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद, प्रवेश परीक्षा स्कोरकार्ड (JEE/NEET/CAT/GRE/GMAT आदि), कास्ट सर्टिफिकेट या दिव्यांग प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)।

ध्यान दें: एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया जा सकेगा। शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों का टेलीफोनिक इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद फाइनल सिलेक्शन होगा।

Rentomojo IPO 9 सितंबर से, ₹384-₹404 रहेगा प्राइस बैंड; ग्रे मार्केट में अभी से चढ़ा शेयर

फर्नीचर, अप्लायंसेज किराए पर देने वाली कंपनी रेंटोमोजो का ₹1,255.57 करोड़ का IPO 9 सितंबर को खुलने वाला है। इसके लिए प्राइस बैंड ₹384-₹404 प्रति शेयर तय किया गया है। लॉट साइज 37 शेयर है। इस इश्यू में ₹150 करोड़ के 37.15 लाख नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹1,105.57 करोड़ के 2.74 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में कंपनी के प्रमोटर गीतांश बामनिया के साथ-साथ एक्सेल इंडिया IV (मॉरीशस), एडलवाइस डिस्कवरी फंड-सीरीज I, IDG वेंचर्स इंडिया फंड III LLC, वैल्यू क्वेस्ट S.C.A.L.E. फंड, मैडिसन इंडिया, चिराटे वेंचर्स, GMO पेमेंट गेटवे समेत कई निवेशक शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे।

IPO में एंकर निवेशक 8 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। इश्यू की क्लोजिंग 11 सितंबर को होगी, जिसके बाद अलॉटमेंट 15 सितंबर को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 सितंबर को लिस्ट हो सकते हैं। इश्यू के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, एक्सिस कैपिटल और IIFL कैपिटल सर्विसेज बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं। रजिस्ट्रार Kfin Technologies Ltd. है।

रेंटोमोजो ग्राहकों को घर के फर्नीचर और अप्लायंसेज के लिए किफायती, फ्लेक्सिबल और लॉन्ग टर्म सब्सक्रिप्शन प्लान उपलब्ध कराती है। इसके प्रोडक्ट्स में घर की जरूरी चीजें जैसे बेड, गद्दे, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, अलमारी, सोफा, टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, वॉटर प्योरिफायर आदि शामिल हैं। IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

रेंटोमोजो अपने पब्लिक इश्यू में नए शेयर जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए, वेयरहाउस और एक्सपीरियंस स्टोर्स के लिए लीज रेंटल/लाइसेंस फीस का पेमेंट करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 8.17 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है।

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Rentomojo की वित्तीय सेहत

कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 45 प्रतिशत बढ़कर 394 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 142 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 104.30 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 187.59 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 271.96 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 43.11 करोड़ रुपये रहा था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mirzapur Viral Dialogues: ‘मिर्जापुर द मूवी’ हुई रिलीज, सोशल मीडिया पर वायरल हुए डायलॉग

Mirzapur Viral Dialogues: अमेजन प्राइम वीडियो की सबसे पॉपुलर सीरीज ‘मिर्जापुर’ का प्रीक्वल आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गया है। अली फजल, पंकज त्रिपाठी, श्वेता त्रिपाठी, दिव्येंदु, अभिषेक बनर्जी, रवि किशन और श्रिया पिलगांवकर जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म ने फैंस के बीच खूब एक्साइटमेंट बनाकर रखा हुआ है। रिलीज के बीच सोशल मीडिया पर इस सीरीज के फेमस डायलॉग तेजी से वायरल हो रहे हैं।

1-बंदूकों की मदद से डर नहीं बढ़ाना है, डर की मदद से बंदूकें बढ़ाना है….

2-अटैक में भी गन, डिफेंस में भी गन, हम बनाएंगे मिर्जापुर को अमेरिका…..

3-माता जी यहां है, बहन यहां है, मां बहन करने में आसानी होगी…

4-डर की यही दिक्कत है कि कभी भी खतम हो सकता है….

5-सुरू मजबूरी में किये थे, अब मजा आ रहा है….

6-इज्जत नहीं करते हैं, डरते हैं सब….

7-अब चाहे सांप आके घर में दोस्ती करले..रहता तो जहरीला ही है ना….

8-कुछ लोग बाहुबली पैदा होते हैं, और कुछ बनाना पढ़ते हैं…इनको बनाएंगे…..

9-अगर नेता बनना है तो गुंडे पालो, गुंडे बनो मत…..

10-जो आया है, वो जाएगा भी बस मर्जी हमारी होगी….

बंगाल में खुलेंगे RSS के 1000 नए स्कूल, शिक्षा विभागों का होगा विलय; जानें बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक योजना के बारे में जानकारी दी है। इसके तहत अगले एक साल में हर जिले, नगर पालिका और पंचायत में RSS से जुड़ी संस्था विद्या भारती के कम से कम 1,000 स्कूल खोलने का लक्ष्य है। इसके अलावा राज्य के चार शिक्षा विभागों को मिलाकर एक विभाग बनाने की भी बात कही गई है। इस योजना के तहत मदरसा शिक्षा के लिए अलग विभाग नहीं होगा। सीएम ने विद्या भारती की 74वीं वर्षगांठ के मौके पर रामकृष्ण मिशन इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर में आयोजित कार्यक्रम में इसकी जानकारी दी है। वहीं इस कार्यक्रम में सुवेंदु अधिकारी ने संस्था की भूमिका को लेकर अपनी बात रखी।

सीएम ने इन जगहों पर स्कूलों खोलने की कही बात

उन्होंने विद्या भारती से बच्चों को देश और समाज से जुड़ी शिक्षा देने की दिशा में काम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियों को सचिवालय बुलाकर सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक करने और इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए कहा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने संस्था से मुर्शिदाबाद और दक्षिण 24 परगना में स्कूलों की संख्या बढ़ाने पर खास ध्यान देने को कहा। उन्होंने इन इलाकों में ज़्यादा एंटी-नेशनल एक्टिविटीज होने का दावा भी किया। अधिकारी ने पिछली टीएमसी सरकार पर शिक्षा का माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विद्या भारती जैसी संस्थाओं को राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करनी चाहिए।

टीएमसी पर लगाए ये आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली टीएमसी सरकार के दौरान शिक्षा का माहौल खराब हो गया था। उन्होंने टीएमसी पर लोगों को बांटने के लिए बंगाली पाठ्यक्रम में बदलाव करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम में ‘मां’ की जगह ‘अम्मा’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। साथ ही, उन्होंने दावा किया कि पाठ्यक्रम में ईश्वर चंद्र विद्यासागर और स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं को भी नजरअंदाज किया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी के “एक देश, एक विधान, एक निशान, एक प्रधान” के नारे का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही सोच शिक्षा के क्षेत्र में भी लागू होनी चाहिए।

सीएम ने क्या कहा

सीएम ने कहा कि, “हम ऐसा कोई इंतजाम नहीं होने देंगे जहां हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट सभी यूनिवर्सिटीज को देखेगा, वहीं दूसरा डिपार्टमेंट आलिया यूनिवर्सिटी को देखेगा।” आलिया यूनिवर्सिटी को अभी राज्य का माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट मैनेज करता है। सीएम ने आगे कहा,” मैंने बोर्ड टॉपर्स को सम्मानित किया। बाद में, माइनॉरिटी अफेयर्स डिपार्टमेंट ने 27 मुस्लिम स्टूडेंट्स के नामों वाली एक अलग फाइल भेजी। मैंने पूछा क्यों? मैं पहले ही 20 स्टूडेंट्स को सम्मानित कर चुका हूँ, और उनमें मुस्लिम, जैन और बौद्ध शामिल हैं।” पश्चिम बंगाल में फिलहाल विद्या भारती के 313 स्कूल चल रहे हैं, जबकि पूरे देश में यह संस्था 12,000 से ज्यादा स्कूल और 10,000 बाल संस्कार केंद्र संचालित करती है।

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जानिए न्यू-एज पैरेंटिंग के 5 जरूरी नियम, जहां बच्चों का बचपन मार्क्स और रैंक की रेस में नहीं निकलता!

आजकल बच्चों पर पढ़ाई को लेकर काफी दबाव रहता है। अच्छे नंबर लाना, क्लास में फर्स्ट आना और बाकी बच्चों से आगे निकलना, ये सब बातें छोटी उम्र से ही उनके दिमाग में आने लगती हैं। कई बार माता-पिता की ज्यादा उम्मीदों की वजह से भी बच्चों पर दबाव बढ़ जाता है। जब बच्चे को बार-बार उसके मार्क्स या रैंक से जज किया जाता है, तो उसे लगने लगता है कि अच्छे नंबर लाना ही सबसे जरूरी है।

लेकिन हर बच्चा अपने तरीके से सीखता है और हर बच्चे की अपनी खासियत होती है। इसलिए बच्चों की दूसरे बच्चों से तुलना करने या हर बार टॉप करने की उम्मीद रखने के बजाय उनकी मेहनत और पसंद को समझना जरूरी है। माता-पिता को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि उनकी बातें बच्चों के मन पर असर डालती हैं। बच्चों को सिर्फ अच्छे नंबर लाने के लिए नहीं, बल्कि खुश रहने, खुद पर भरोसा रखने और अपनी पसंद के काम करने के लिए भी आगे बढ़ाना चाहिए।

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1. सेल्फ-कॉन्फिडेंस बढ़ाएं

कई बार माता-पिता बच्चे के अच्छे नंबर आने के बाद भी इस बात पर ध्यान देते हैं कि वह फर्स्ट क्यों नहीं आया। जैसे, यदि बच्चे को 18 नंबर मिले हैं, तो उसकी तारीफ करने के बजाय उससे कहा जाता है कि तुम फर्स्ट नहीं आए। ऐसी बातें बार-बार सुनने से बच्चे को लग सकता है कि उसकी मेहनत की कोई कीमत नहीं है। धीरे-धीरे उसका सेल्फ-कॉन्फिडेंस कम हो सकता है और उसे हर हाल में दूसरों से आगे निकलने का प्रेशर फील होने लगता है।

2. कॉम्पिटिशन के लिए मोटिवेट करें

बच्चों के बीच थोड़ा कॉम्पिटिशन उन्हें मेहनत करने और बेहतर करने के लिए मोटिवेट कर सकता है। परेशानी तब शुरू होती है, जब बच्चा हर समय दूसरे बच्चों को हराने के बारे में सोचने लगे। माता-पिता को बच्चों को यह समझाना चाहिए कि मुकाबला किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने के लिए होना चाहिए।

3. अपना काम खुद करना सिखाएं

एक स्कूल स्पोर्ट्स डे की रेस ने इस बात को समझने का एक अच्छा उदाहरण दिया। रेस में बच्चे को दौड़कर एक पानी की बोतल उठानी थी और वापस आना था। उसने अपनी पसंद की नीली बोतल उठाई, लेकिन बाद में अपनी बहन के पसंदीदा रंग की गुलाबी बोतल लेने के लिए भी रुक गया। इस वजह से वह रेस नहीं जीत पाया, लेकिन उसने अपनी बहन के बारे में सोचकर जो किया, वह जीत से कहीं ज्यादा खास था।

4. मार्क्सशीट नहीं, बच्चे की काबिलियत पहचानें

यदि कोई बच्चा दौड़ने में तेज है, तो जरूरी नहीं कि वह ड्राइंग में भी अच्छा हो। इसी तरह कोई बच्चा पढ़ाई में औसत हो सकता है, लेकिन खेल, कला या किसी दूसरी चीज में बहुत अच्छा कर सकता है। इसलिए बच्चों को सिर्फ रैंक या मार्क्स के बेस पर जज नहीं करना चाहिए। उन्हें यह समझाना जरूरी है कि किसी और का किसी चीज में बेहतर होना उनकी काबिलियत को कम नहीं करता। हर बच्चे का फर्स्ट आना जरूरी नहीं है, जरूरी है कि वह अपनी खूबियों को पहचाने और खुद पर भरोसा करना सीखे।

5. बच्चों की बात ध्यान से सुनकर दें सही सॉल्यूशन

हर बच्चे की अपनी पसंद, सोच और सीखने का तरीका अलग होता है। इसलिए सिर्फ यह पूछने के बजाय कि कितने नंबर आए या कौन-सी रैंक मिली, माता-पिता को यह भी पूछना चाहिए कि बच्चे को पढ़ाई में क्या अच्छा लगा, कहां परेशानी हुई और वह किस चीज में दिलचस्पी रखता है। जब बच्चों को अपनी बात खुलकर कहने का मौका मिलता है, तो वे ज्यादा सहज महसूस करते हैं और माता-पिता के साथ अपनी परेशानियां भी आसानी से शेयर कर पाते हैं।

बच्चों का बचपन मार्क्स और रैंक की रेस नहीं होना चाहिए। हर बच्चे की अपनी अलग खूबी होती है और जरूरी नहीं कि हर कोई पढ़ाई में ही सबसे आगे हो। माता-पिता बच्चों को मेहनत के लिए जरूर एप्रिशिएट करें, लेकिन उनकी तुलना दूसरों से न करें। उनकी मेहनत, रुचि और खूबियों की तारीफ करने से उनका सेल्फ-कॉफिडेंस बढ़ेगा। क्योंकि फर्स्ट आने से ज्यादा जरूरी है कि बच्चा खुश रहे और अच्छा इंसान बने।

एस्टोनिया के रक्षामंत्री ने इस्तीफा दिया:यूक्रेन को समय पर तोप के गोले नहीं दे पाए; कॉन्ट्रैक्ट में भारतीय कंपनी शामिल, अनुभव नहीं होने का आरोप

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह यूक्रेन के लिए की गई करीब 768 करोड़ रुपए की एक डील है। सौदे के तहत भारतीय कंपनी से जुड़ी इटली की एक फर्म को गोला-बारूद सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। आरोप है कि कंपनी के पास तोप के गोले बनाने या बेचने का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और भारी रकम एडवांस में दी गई। कंपनी के साथ किए गए थे 4 समझौते 2024 में एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट ने तोप के गोलों की खरीद के लिए डेटासेल एसआरएल के साथ चार समझौते किए। यह कंपनी इटली में रजिस्टर्ड है। मार्च 2024 में इसे भारतीय कंपनी नेको डिफेंस म्यूनिशंस ने खरीदा था। पहला कॉन्ट्रैक्ट अगस्त 2024 में हुआ था। इसके तहत करीब 1.5 करोड़ यूरो एडवांस दिए गए। इसके बाद दूसरे और फिर दो अन्य कॉन्ट्रैक्ट किए गए। चारों सौदों में एडवांस भुगतान करीब 7 करोड़ यूरो तक पहुंच गया। नवंबर 2024 तक यूक्रेन पहुंचने थे गोले गोला-बारूद का पहला बैच नवंबर 2024 में यूक्रेन पहुंचना था, लेकिन डेटासेल ने देरी की। बाद में जो सामान पहुंचा, उसे लेकर भी सवाल उठाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ खेप अधूरी थी और उसमें गोले चलाने के लिए जरूरी हिस्से मौजूद नहीं थे। इनमें फ्यूज, प्रोपेलेंट चार्ज और प्राइमर जैसे हिस्से शामिल बताए गए हैं। इसलिए एस्टोनिया ने कुछ सामान को स्वीकार नहीं किया। कंपनी ने आरोपों को खारिज किया डेटासेल ने एस्टोनिया के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। कंपनी का कहना है कि उसने बड़ी मात्रा में सामान तैयार किया और उसकी सप्लाई के लिए बिल भी दिए। कंपनी ने यह भी कहा कि डिलीवरी में देरी के पीछे अलग-अलग देशों से मंजूरी और जरूरी दस्तावेज मिलने में हुई देरी जैसी वजहें थीं। एस्टोनिया के 768 करोड़ रुपए अटके एस्टोनिया ने इस सौदे में करीब 768 करोड़ रुपए दिए थे। अब वह इस रकम को वापस पाने की कोशिश कर रहा है। अनुबंध को लेकर मामला मध्यस्थता तक पहुंच गया है। अगर पैसा वापस नहीं मिला तो एस्टोनिया पर इस रकम का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यूरोपीय आयोग भी एस्टोनिया के साथ इस मामले पर बातचीत कर रहा है। EU के फंड से आया था पैसा इस सौदे में इस्तेमाल हुआ पैसा यूरोपीय संघ की यूरोपियन पीस फैसिलिटी (EPF) से आया था। यह फंड यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि अगर एस्टोनिया कंपनी से पैसा वापस नहीं ले पाया तो इस फंड का क्या होगा। यूरोपीय आयोग इस मामले में एस्टोनियाई अधिकारियों के संपर्क में है। मंत्री बोले- हर सौदे की जिम्मेदारी मेरी रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने कहा कि मंत्री खुद हर हथियार खरीद के कॉन्ट्रैक्ट पर बातचीत नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने संबंधित कॉन्ट्रैक्ट व्यक्तिगत रूप से नहीं पढ़े थे। लेकिन उनके मुताबिक, मंत्रालय के काम की राजनीतिक जिम्मेदारी रक्षा मंत्री की होती है। इसी वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। जांच में खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखा कार्यालय ने इस सौदे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच का एक बड़ा मुद्दा यह है कि इतने बड़े रक्षा सौदे में ऐसी कंपनी को कैसे चुना गया, जिसके पास तोप के गोले की सप्लाई का पहले का अनुभव नहीं था। यानी विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि गोले समय पर पहुंचे या नहीं। सवाल यह भी है कि कंपनी का चयन कैसे हुआ और इतनी बड़ी रकम एडवांस में क्यों दी गई। ————————- यह खबर भी पढ़ें… जयशंकर बोले- तेल खरीद पर रोक से जंग नहीं थमेगी: बातचीत से ही खत्म होगी, भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता को तैयार केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश रूसी तेल खरीदता है या नहीं। पूरी खबर पढ़ें…

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! 20 महीने के एरियर से खाते में आएंगे एकमुश्त ₹14 लाख? जानिए पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Arrears Update: 8वें वेतन आयोग को लेकर देश के 1 करोड़ से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। हालांकि, इस इंतजार के पीछे एक राहत भरी खबर भी छिपी है। अगर आयोग की सिफारिशें लागू होने में देरी होती है, तो कर्मचारियों को एकमुश्त मिलने वाला एरियर काफी बड़ा हो सकता है।

कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर 8वां वेतन आयोग लागू होने में 20 महीने की देरी होती है, तो लेवल 7 के कर्मचारियों को 20 महीने के एरियर के रूप में ₹14 लाख से अधिक की भारी-भरकम एकमुश्त राशि मिल सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अलग-अलग पे-लेवल (Level 4 से Level 7) के कर्मचारियों को एरियर के रूप में कितना पैसा मिल सकता है और इसका पूरा गणित क्या है।

क्यों बढ़ रहा है एरियर का आंकड़ा?

वेतन आयोग के कार्यान्वयन में जितनी देरी होगी, बकाया यानी एरियर की रकम उतनी ही बड़ी होती जाएगी। सूत्रों और विशेषज्ञों का अनुमान है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों को पूरी तरह लागू होने में करीब 20 महीने या उससे अधिक का समय लग सकता है। अगर सरकार 2.57 के फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक सैलरी का पुनरीक्षण करती है, तो कर्मचारियों की मासिक बेसिक पे में भारी उछाल आएगा, जिसका सीधा फायदा बकाया एरियर के रूप में मिलेगा।

लेवल के हिसाब से समझिए संभावित एरियर का गणित

अगर 20 महीने के बकाया का हिसाब लगाया जाए, तो बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी के आधार पर विभिन्न लेवल के कर्मचारियों को अनुमानित इतना एरियर मिल सकता है:

1. लेवल 7 (Level 7) – ₹14.09 लाख तक का एरियर

मौजूदा बेसिक पे (7th CPC): ₹44,900

अनुमानित नई बेसिक पे (8th CPC): ₹1,15,393

मासिक अंतर: ₹70,493

20 महीने का कुल एरियर: ₹70,493 ✕ 20 = ₹14,09,860 (लगभग ₹14.10 लाख)

2. लेवल 6 (Level 6) – ₹11.11 लाख तक का एरियर

लेवल 6 के अधिकारियों की बेसिक सैलरी में बढ़ोतरी के हिसाब से 20 महीने का संभावित एरियर लगभग ₹11.11 लाख तक बैठ सकता है।

3. लेवल 5 (Level 5) – ₹9.13 लाख तक का एरियर

मौजूदा बेसिक पे: ₹29,200

20 महीने के अंतर के आधार पर लेवल 5 के कर्मचारियों का संभावित एरियर लगभग ₹9.13 लाख बनता है।

4. लेवल 4 (Level 4) – ₹8 लाख तक का एरियर

मौजूदा बेसिक पे: ₹25,000

शुरुआती बेसिक सैलरी ₹25,000 के आधार पर 20 महीने का एरियर लगभग ₹8 लाख तक हो सकता है।

क्या ₹14 लाख की यह रकम फाइनल है?

इस एरियर कैलकुलेशन को लेकर कर्मचारियों को कुछ मुख्य बातें ध्यान में रखनी चाहिए। ऊपर बताया गया ₹14.09 लाख का आंकड़ा केवल बेसिक सैलरी में आने वाले अंतर पर आधारित है। इसमें हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) या डियरनेस अलाउंस (DA) के एरियर को शामिल नहीं किया गया है।

यह एक अनुमानित कैलकुलेशन है। अंतिम एरियर की रकम सरकार द्वारा तय किए जाने वाले फिटमेंट फैक्टर, कार्यान्वयन की आधिकारिक तारीख और बकाया की वास्तविक अवधि पर निर्भर करेगी।

रोहित शर्मा को शामिल करने पर अड़ी BCCI इसलिए आगरकर ने चिढकर ज्वाइन नहीं की मीटिंग

बुधवार को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की रिव्यू मीटिंग में पूर्व कप्तान रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर बीसीसीआई और मुख्य चयनकर्ता एक राय पर नहीं दिखे। जब यह खबर आई कि चयनकर्ता 2027 वर्ल्ड कप के लिए रोहित को नहीं चाहते और लॉर्ड्स वनडे उनका आखिरी मैच होगा, तो बीसीसीआई ने तुरंत इसका खंडन किया। लगभग ऐसा ही जवाब बीसीसीआई सेक्रेटरी देवजीत सैकिया ने इस बार दिया है।

उन्होंने यह कहा कि रोहित शर्मा अभी औसत से बेहतर खेल रहे हैं और टीम की योजना को लेकर उनकी भूमिका पर कोई संशय नहीं है। मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर इस मीटिंग में हीं थे। शायद उनको पहले ही बोर्ड का विचार पता लग गया होगा। यह अफवाह है कि रोहित की पैरवी के कारण ही वह इस मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे। 

माना जा रहा था रोहित शर्मा ने अपने PR यानि कि जनसंपर्क के कारण अफगानिस्तान सीरीज में अपनी जगह बचा ली थी लेकिन इंग्लैंड उनकी अंतिम सीरीज मानी जा रही थी।रोहित शर्मा ने फिर जबरदस्त जनसंपर्क की बिसात बिछाकर अपनी जगह एक बार फिर बचा ली और आलोचकों के मुंह शतक लगाकर बंद कर दिए।

आगरकर से जुड़ी खबर में इस बात का भी जिक्र है कि कई चयनकर्ताओं को लगता है कि उनके साथ धोखा हुआ है क्योंकि उनको लगता है कि रोहित के रहते भारतीय टीम 2027 वनडे विश्व कप नहीं जीत सकती जबकि बीसीसीआइ के कुछ बड़े लोग सोशल मीडिया को देखकर अपनी रणनीति बदल रहे हैं।

मुख्य चयनकर्ता और चयनसमिती की पसंद यशस्वी जायसवाल 

एकदिवसीय विश्वकप 2027 के लिए मुख्य चयनकर्ता और चयन समिती की पहली पसंद यशस्वी जासवाल है जो 3 पारियो में दो एकदिवसीय शतक लगा चुके हैं। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका और अफगानिस्तान के खिलाफ शतक जमाया था। लेकिन बोर्ड संभवत प्रसारणकर्ता के दबाव के कारण बुरे फॉर्स से गुजर रहे रोहित शर्मा को बरकरार रखना चाहती है।

रोहित शर्मा का साल भर रहा बुरा फॉर्म, लॉर्ड्स पर मिली संजीवनी

गौरतलब है कि रोहित शर्मा खराब फॉर्म से जूझ रहे थे और इंग्लैंड के पहले दो एकदिवसीय मैच में फ्लॉप रहे थे। जिसके बाद उनकी संन्यास की अटकलें लगनी शुरु हो गई थी। हालांकि आज उन्होंने बेहतरीन पारी खेली। रोहित शर्मा ने 110 गेंदो में 138 रन बनाए। उन्हें जैकब बैथल ने बोल्ड किया।

रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे।  दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था।

अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।

Commodity Market: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल! ब्रेंट $95 के पार, जानिए सोने-चांदी का हाल

Commodity Market Updates: आज शुक्रवार, 4 सितंबर को वैश्विक कमोडिटी बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से भड़की तबाही की चिंगारी के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। दूसरी ओर, अमेरिकी एंप्लॉयमेंट डेटा से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती व स्थिरता बनी हुई है।

कच्चे तेल में आई यह तेजी मध्य जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर इशारा कर रही है। आइए आपको बताते हैं कमोडिटी बाजार का पूरा अपडेट।

कच्चे तेल की कीमतों में उबाल: ब्रेंट $95 और WTI $91 के पार

मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में शुक्रवार को बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 15 सेंट (0.2%) चढ़कर $95.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वीकली आधार पर इसमें 7.1% की भारी बढ़त देखी जा रही है। वही अमेरिकी WTI क्रूड 26 सेंट (0.3%) की बढ़त के साथ $91.56 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। हफ्ते भर में WTI में 9.8% का उछाल दर्ज किया गया है। यह 20 जुलाई के बाद कच्चे तेल में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।

सोने-चांदी का हाल: US Fed के नरम रुख से मिला सहारा

कच्चे तेल की आग के बीच सोने की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है और यह भी मामूली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $4,477.10 प्रति औंस के मजबूत स्तर पर टिका हुआ है। दिसंबर का अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,522.60 प्रति औंस पर रहा। सिल्वर (चांदी) 0.1% बढ़कर $66.90 प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में मामूली सुस्ती रही।

निवेशक अब आज शाम जारी होने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर अगला कदम उठाने का संकेत मिलेगा।

गुरुवार को गोल्ड में क्यों आई थी 2% की तेजी?

अमेरिकी फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने कहा था कि अगर महंगाई दर स्थिर रहती है तो वे ब्याज दरें न बढ़ाने का समर्थन करेंगे। उनके इस बयान के बाद ट्रेडर्स ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदें कम कर दीं, जिससे गुरुवार को सोने में 2% का बड़ा उछाल आया था।

डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी

दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05% घटकर 99.54 पर आ गया। डॉलर कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कोटेड कमोडिटी (सोना-तेल) खरीदना तुलनात्मक रूप से सस्ता हो जाता है, जिससे कीमतों को सहारा मिलता है।

यूरो (Euro): $1.1589 पर स्थिर।

जापानी येन (Yen): डॉलर के मुकाबले 0.07% मजबूत होकर 158.59 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।