OYO IPO: ओयो की पैरेंट कंपनी Prism नवंबर में ला सकती है IPO, ₹6650 करोड़ जुटाने की तैयारी

OYO IPO: ओयो की पैरेंट कंपनी Prism नवंबर में IPO लॉन्च कर सकती है। कंपनी फिलहाल निवेशकों से बातचीत कर रही है, ताकि शेयर बिक्री को लेकर उनकी दिलचस्पी का अंदाजा लगाया जा सके। यह जानकारी मनीकंट्रोल को सूत्रों ने दी है। सूत्रों के मुताबिक, IPO की तारीख अभी तय नहीं हुई है। यह फैसला निवेशकों की मांग, बाजार की स्थिति और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

IPO से जुटाए पैसे का क्या करेगी कंपनी?

29 जून 2026 को जारी अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, Prism फ्रेश शेयर जारी करके ₹6,650 करोड़ तक जुटाना चाहती है। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी नहीं बेचेंगे।

कंपनी ₹4,987.5 करोड़ अपनी सब्सिडियरी Oravel Stays Singapore में निवेश करेगी। इस रकम से कुछ कर्ज चुकाया जाएगा या उसका समय से पहले भुगतान किया जाएगा। बाकी पैसे का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए होगा।

दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में कंपनी का फाइनेंस कॉस्ट ₹1,089.3 करोड़ रहा। यह मार्च 2025 में समाप्त पूरे वित्त वर्ष के ₹959.2 करोड़ से ज्यादा है।

35 से ज्यादा देशों में कारोबार

2012 में शुरू हुआ OYO अब सिर्फ बजट होटल तक सीमित नहीं है। इसका कारोबार होटल, छुट्टियों में किराये पर मिलने वाले घरों और प्रॉपर्टी लिस्टिंग तक फैला है। इसके ब्रांड्स में Townhouse, Sunday, Motel 6, Studio 6 और Belvilla शामिल हैं।

31 दिसंबर 2025 तक कंपनी के प्लेटफॉर्म पर 35 से ज्यादा देशों में 2.93 लाख से अधिक लिस्टिंग थीं। इनमें होटल, होम और सब्सक्रिप्शन आधारित प्रॉपर्टी लिस्टिंग शामिल हैं। विदेशों में विस्तार के लिए कंपनी ने G6, CheckMyGuest और MadeComfy जैसी कंपनियों का अधिग्रहण भी किया है।

मुनाफा बढ़ा, लेकिन टैक्स क्रेडिट का भी असर

वित्त वर्ष 2025 में OYO का रेवेन्यू 16% बढ़कर ₹6,252.8 करोड़ हो गया। वित्त वर्ष 2024 में यह ₹5,388.8 करोड़ था। नेट प्रॉफिट भी ₹229.6 करोड़ से बढ़कर ₹244.8 करोड़ पहुंच गया।

हालांकि, इस मुनाफे में ₹767.6 करोड़ के डिफर्ड टैक्स क्रेडिट की बड़ी भूमिका थी। कंपनी को वित्त वर्ष 2025 में ₹489.3 करोड़ का प्री-टैक्स नुकसान हुआ था।

दिसंबर 2025 तक के नौ महीनों में Prism ने ₹6,941 करोड़ का रेवेन्यू और ₹748.3 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया। इस दौरान ₹559.3 करोड़ का डिफर्ड टैक्स क्रेडिट भी मिला।

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लखनऊ कैफे ऑनर मर्डर केस : पुलिस महकमे में भूचाल! DCP, ACP और SO पर गिरी गाज, फरार मॉडल श्रद्धा पर 25 हजार का इनाम

लखनऊ कैफे ऑनर मर्डर केस : पुलिस महकमे में भूचाल! DCP, ACP और SO पर गिरी गाज, फरार मॉडल श्रद्धा पर 25 हजार का इनाम

Lucknow Cafe Owner Shiva Sharma Case

Lucknow Cafe Owner Shiva Sharma Case: नवाबों के शहर लखनऊ में 28 वर्षीय कैफे मालिक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि खाकी के लिए साख का सवाल बन चुका है। घटना के 10वें दिन भी आरोपी फैशन मॉडल श्रद्धा दुबे पुलिस की पकड़ से बाहर है, वहीं दूसरी तरफ इस हाई-प्रोफाइल केस में लापरवाही और गाज गिरने का बड़ा दौर शुरू हो गया है। सोमवार को प्रशासनिक फेरबदल करते हुए लखनऊ के डीसीपी, एसीपी और हजरतगंज थाना प्रभारी को उनके पदों से हटा दिया गया है। 25 हजार की इनामी मॉडल का एक सनसनीखेज इंटरव्यू वीडियो भी सामने आया है, जिसने पूरी जांच की दिशा ही मोड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

5वीं मंजिल से रहस्यमयी मौत या हत्या? : बीती 9 अक्टूबर को हजरतगंज के बालू अड्डा इलाके के ‘अवध ग्रीन अपार्टमेंट’ से गिरकर कैफे मालिक शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। शुरुआती तौर पर इसे हादसा या खुदकुशी माना जा रहा था, लेकिन मृतक की मां रंजना शर्मा के बयानों और साक्ष्यों ने पुलिस की थ्योरी बदल दी। मां का आरोप है कि शिवा की लिव-इन पार्टनर व फैशन मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और साथियों ने शिवा को बेरहमी से पीटा, प्रताड़ित किया और बालकनी से नीचे फेंक दिया।

पुलिस अफसरों का तबादला

मामले में लापरवाही और जांच में देरी की सुगबुगाहट के बीच शासन ने सख्त कदम उठाया है। डीसीपी (मध्य) विक्रांत वीर को यूपी पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। एसीपी रजनीश वर्मा को क्राइम ब्रांच में भेज दिया गया। हजरतगंज थाना प्रभारी (SO) विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

फरार मॉडल का ‘इंटरव्यू बम’ और आत्महत्या का दावा

जब पुलिस मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और सहयोगी दानिश की तलाश में नेपाल बॉर्डर तक खाक छान रही है, तभी श्रद्धा का एक रिकॉर्डेड इंटरव्यू सामने आया। वीडियो में उसने खुद को बेकसूर बताते हुए दावा किया कि शिवा पर 15-20 लाख रुपए का कर्ज था और उसने आर्थिक तंगी में आत्महत्या की है।

 

उसने कहा- घटना वाले दिन शिवा ने खुद को बाथरूम में बंद किया और अचानक बालकनी से छलांग लगा दी। श्रद्धा ने कहा कि मैं भगोड़ी नहीं हूं, पुलिस के सामने सच रखूंगी। साथ ही सोशल मीडिया पर एक ऑडियो भी वायरल हुआ, जिसमें शिवा कथित तौर पर श्रद्धा के 6 लाख के गहने बेच देने की बात मान रहा है।

नेपाल भागने की आशंका और पुलिस का शिकंजा

श्रद्धा का महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन वाहन बहराइच के रूपईडीहा में लावारिस हालत में मिला है, जो नेपाल सीमा से महज 1 किलोमीटर दूर है। पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी नेपाल सीमा पार कर चुके हैं। तीनों मुख्य आरोपियों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया है। फिलहाल, शिवा के परिजनों की मांग है कि जब आरोपी बेकसूर है, तो वह पुलिस के सामने आने के बजाय क्यों भाग रही है?

Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV performance comparison

Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV performance comparison
Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV

The Mahindra XEV 9S Pack Three Above and MG Hector Tomahawk EV are  three-row electric SUVs that differ in their acceleration, driving range and charging capabilities. Here’s how the two compare on performance, specifications and price.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Specifications

SpecificationsMahindra XEV 9S Pack Three AboveMG Hector Tomahawk EV
Battery capacity79kWh69.2kWh
Electric motor setupSingle, rear-mountedSingle, front-mounted
Power286hp204hp
Torque380Nm310Nm
GearboxSingle-speed automaticSingle-speed automatic
Drive layoutRear-wheel driveFront-wheel drive
Claimed MIDC range679km517km
Maximum DC charging rate180kW90kW
Claimed DC charging time20min (20-80 percent)Around 35min (30-80 percent)
AC charging time

11.7 hours (7.2kW charger)

8 hours (11.2kW charger)

12.5 hours (10-100 percent)

The XEV 9S has a 82hp advantage over the Tomahawk EV and produces 70Nm more torque. The two SUVs also differ in their drive layouts. The XEV 9S sends power to the rear wheels, while the Tomahawk EV is front-wheel drive. Both use a single-speed automatic transmission.

The XEV 9S has a claimed MIDC range of 679km, which is 162km more than the Tomahawk EV’s 517km. It also supports DC fast charging at up to 180kW, compared with 90kW for the MG.

Mahindra claims the XEV 9S can charge from 20-80 percent in 20 minutes, while MG quotes around 35 minutes for a 30-80 percent charge. Since the quoted charging times cover different charging windows, they are not directly comparable. The AC charging figures also use different charging ranges. The XEV 9S supports an optional 11.2kW AC charger, in addition to the 7.2kW unit. The Tomahawk EV supports 7.4kW AC charging.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Acceleration timings 

Mahindra XEV 9S vs MG Tomahawk EV: Acceleration timings (seconds)

 

Mahindra XEV 9S

MG Tomahawk EV

0-20kph

1.39

1.47

0-40kph

2.73

2.84

0-60kph

4.17

4.25

0-80kph

5.62

5.93

0-100kph

7.54

8.23

0-120kph

9.98

11.28

The XEV 9S gets off the line slightly quicker, reaching 20kph 0.08 seconds ahead of the Tomahawk EV. The gap remains narrow at 40kph and 60kph, with the Mahindra holding leads of 0.11 seconds and 0.08 seconds, respectively. 

It begins to pull further ahead beyond 60kph, reaching 80kph 0.31 seconds sooner and 100kph 0.69 seconds sooner than the MG. By 120kph, the difference has widened to 1.30 seconds, with the XEV 9S completing the run in 9.98 seconds against the Tomahawk EV’s 11.28 seconds. The results show the Mahindra’s advantage growing at higher speeds, rather than coming solely from its initial launch.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Rolling acceleration timings 

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Rolling acceleration timings (seconds)

Rolling acceleration tests

Mahindra XEV 9S

MG Hector Tomahawk EV

20-80kph (in kickdown)

4.11

4.56

40-100kph (in kickdown)

4.74

5.45

The results show that the XEV 9S retains its lead across both rolling acceleration tests. It completes the 20-80kph run in 4.11 seconds, 0.45 seconds quicker than the Tomahawk EV’s 4.56 seconds. The gap widens in the 40-100kph test, with the Mahindra taking 4.74 seconds against the MG’s 5.45 seconds. This gives the XEV 9S a 0.71-second advantage in the higher-speed run, further underlining its stronger acceleration performance across both speed ranges.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Braking tests 

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Braking tests

 

Mahindra XEV 9S

MG Hector Tomahawk EV

80-0kph distance (m)

29.67

27.52

80-0kph time (seconds)

2.55

2.39

80-20kph L1 regen distance (m)

341.03

575.94

80-20kph L2 regen distance (m)

215.8

389.91

80-20kph L3 regen distance (m)

162.46

210.09

The Tomahawk EV has the advantage in the conventional braking test, stopping from 80kph in 27.52m and 2.39 seconds. The XEV 9S takes 29.67m and 2.55 seconds to come to a halt, requiring 2.15m more distance.

The results reverse under regenerative braking. In the 80-20kph tests, the XEV 9S covers a shorter distance at all three regeneration levels. At L1, it takes 341.03m to slow down, compared with 575.94m for the MG. At L2, the respective distances are 215.8m and 389.91m, while at L3, they are 162.46m and 210.09m. The difference is largest at L2, where the Tomahawk EV covers 174.11m more than the Mahindra before slowing from 80kph to 20kph.

Mahindra XEV 9S vs MG Hector Tomahawk EV: Prices

ModelPrice (ex-showroom)
Mahindra XEV 9S Pack Three AboveRs 29.95 lakh
MG Hector Tomahawk EVRs 19.49 lakh-23.49 lakh

The MG Hector Tomahawk EV is priced between Rs 19.49 lakh and Rs 23.49 lakh, while the Mahindra XEV 9S Pack Three Above costs Rs 29.95 lakh. The Tomahawk EV’s top variant is Rs 6.46 lakh cheaper than the XEV 9S. The Mahindra, however, gets a larger 79kWh battery and higher power and torque outputs, and was quicker in all three acceleration tests. The MG stopped in a shorter distance in our 80-0kph braking test.

Autocar India’s testing standards

Before conducting our performance tests, we check and maintain tyre pressure based on the manufacturer’s recommendation and ensure that the car is charged to 100 percent. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

All prices are ex-showroom, India.

DDA Awas Nivesh scheme: डीडीए के 2516 फ्लैटों पर 25% का बंपर डिस्काउंट, 20 अक्टूबर से बुकिंग शुरू, जानें कीमत और बाकी डिटेल्स

DDA Awas Nivesh scheme: अगर आप घर खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। दशहरे के मौके पर दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने आवास निवेश योजना 2026 की शुरुआत की है। इस योजना के तहत नरेला में लो इनकम ग्रुप (LIG) लोगों के लिए 2,516 फ्लैट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन फ्लैटों की कीमत पर 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। इन फ्लैट की शुरुआती कीमत 14.95 लाख रुपये रखी गई है। इस योजना का मकसद लोगों को कम कीमत पर दिल्ली में अपना घर खरीदने का मौका देना है। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में इस योजना को शुरू किया गया है। इस योजना का मकसद लोगों को सस्ते घर उपलब्ध कराना है। आइए जानते है इस योजना के बारे में सबकुछ

कब से शुरू होगी ऑनलाइन बुकिंग

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की आवास निवेश योजना 2026 के तहत फ्लैट खरीदने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। इस योजना की शुरुआत 8 अक्टूबर 2026 को हुई थी और इसके लिए रजिस्ट्रेशन 14 अक्टूबर से शुरू हो चुका है। फ्लैटों की बुकिंग 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे के दिन दोपहर 12 बजे से शुरू होगी। DDA की इस योजना के तहत फ्लैटों की बुकिंग ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर की जाएगी। इस योजना का लाभ लेने के इच्छुक लोग 31 जनवरी 2027 तक आवेदन और बुकिंग की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

नरेला में कहां मिलेंगे फ्लैट

DDA की इस योजना में सभी फ्लैट दिल्ली के नरेला इलाके के सेक्टर G2 से G6 के बीच पॉकेट 3 और पॉकेट 6 में स्थित हैं। कुल 2,516 फ्लैटों में से 1,020 पॉकेट 3 में और 1,496 पॉकेट 6 में उपलब्ध हैं। प्रत्येक फ्लैट का प्लिंथ एरिया करीब 49.90 वर्ग मीटर है, जिसमें साझा इस्तेमाल वाले हिस्से भी शामिल हैं। 25 फीसदी छूट के बाद पॉकेट 3 के फ्लैट की अनुमानित कीमत 15.01 लाख रुपये और पॉकेट 6 के फ्लैट की कीमत करीब 14.95 लाख रुपये रखी गई है।

कितना लगेगा रजिस्ट्रेशन फीस

DDA आवास निवेश योजना 2026 के लिए इच्छुक लोग डीडीए की आधिकारिक वेबसाइट https://eservices.dda.org.in पर जाकर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और फ्लैट बुक कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन रखा गया है, ताकि आवेदकों को आसानी हो और काम में पारदर्शिता बनी रहे। योजना के तहत एक फ्लैट बुक करने के लिए 1 लाख रुपये जमा करने होंगे। वहीं, पोर्टल पर पहली बार रजिस्ट्रेशन कराने वाले आवेदकों को 2,500 रुपये की फीस देनी होगी, जो वापस नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने पहले ही DDA के आवास पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करा लिया है, उन्हें दोबारा पंजीकरण करने की जरूरत नहीं है।

DDA आवास निवेश योजना 2026 के तहत फ्लैट बुक करने से पहले आवेदक DDA की वेबसाइट पर उपलब्ध ब्रोशर में जरूरी नियम और शर्तें पढ़ सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 1800 110 332 पर संपर्क किया जा सकता है। इस योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ते घर उपलब्ध कराना और नरेला के विकास को बढ़ावा देना है।

Bajaj Finance Q2 Results: बजाज की कंपनी को ₹6367 करोड़ का मुनाफा, NII में 23% का उछाल

Bajaj Finance Q2 Results: दिग्गज नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनी (NBFC) बजाज फाइनेंस ने 19 अक्टूबर को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 28.8% बढ़कर ₹6,367 करोड़ हो गया। ब्याज से होने वाली कमाई और लोन के कारोबार में बढ़ोतरी से नतीजों को मजबूती मिली।

ब्याज से होने वाली कमाई बढ़ी

बजाज फाइनेंस की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) दूसरी तिमाही में 23.6% बढ़कर ₹13,335 करोड़ हो गई। एक साल पहले यह ₹10,785 करोड़ थी। वहीं, कंपनी की कुल नेट इनकम भी 23% बढ़कर ₹15,974 करोड़ हो गई।

AUM बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हुआ

30 सितंबर 2026 तक कंपनी का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 26% बढ़कर ₹5.85 लाख करोड़ हो गया। AUM का मतलब है कि कंपनी ने कुल कितने पैसे का लोन दे रखा है या मैनेज कर रही है। सितंबर तिमाही में इसमें ₹37,680 करोड़ जुड़े।

इस दौरान कंपनी ने 1.345 करोड़ नए लोन बांटे। यह एक साल पहले के मुकाबले 11% ज्यादा है। तिमाही में 44.2 लाख नए ग्राहक भी जुड़े। इसके साथ ही कंपनी के कुल ग्राहकों की संख्या बढ़कर 12.885 करोड़ हो गई। इसमें सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी हुई।

लोन की वसूली कैसी रही?

सितंबर के अंत में बजाज फाइनेंस का ग्रॉस NPA 1.06% रहा। जून तिमाही में यह 0.96% था। वहीं, नेट NPA 0.39% से बढ़कर 0.42% हो गया। यानी पिछली तिमाही के मुकाबले खराब लोन का अनुपात थोड़ा बढ़ा। हालांकि, पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले स्थिति बेहतर रही। तब ग्रॉस NPA 1.24% और नेट NPA 0.60% था।

लोन के नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी ने ₹2,166 करोड़ का प्रोविजन किया। यह पिछले साल से 4% ज्यादा है। इसमें आर्थिक जोखिमों को देखते हुए ₹337 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान भी शामिल है। इसे हटा दें तो लोन लॉस और प्रोविजन 12% घटकर ₹1,829 करोड़ रह जाते हैं।

आगे कंपनी की क्या योजना है?

Bajaj Finance को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में वह 6 करोड़ से 6.2 करोड़ नए लोन बांटेगी। कंपनी 1.8 करोड़ से 2 करोड़ नए ग्राहक जोड़ने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा, वित्त वर्ष के दौरान 150 से 175 नई लोकेशन खोलने का लक्ष्य है।

दूसरी तिमाही में कंपनी के लिए फंड जुटाना भी सस्ता हुआ। फंड की लागत 9 बेसिस पॉइंट घटकर 7.31% रह गई। कंपनी को उम्मीद है कि वित्त वर्ष के दौरान कुल नेट इनकम के मुकाबले ऑपरेटिंग खर्च का अनुपात 25 से 40 बेसिस पॉइंट तक सुधर सकता है।

नतीजों से पहले शेयर गिरा

सोमवार को नतीजे आने से पहले Bajaj Finance का शेयर 2.5% गिरकर ₹957.35 पर बंद हुआ। इस साल अब तक शेयर 1.6% नीचे है। वहीं, पिछले 12 महीनों में इसमें 11% से ज्यादा की गिरावट आई है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Trusts: टाटा ट्रस्ट्स ने दरियादिली में खोला खजाना! FY26 में 70% बढ़ा चैरिटी खर्च, ₹1,556 करोड़ किए दान

Tata Trusts Charity Spending: देश के सबसे बड़े धर्मार्थ संगठनों में से एक टाटा ट्रस्ट्स ने वित्त वर्ष 2026 में अपनी चैरिटी खर्च में रिकॉर्ड बढ़ोतरी की है। नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स द्वारा दिया जाने वाला कुल दान पिछले दो वर्षों से लगातार बढ़ रहा है और FY26 में इसमें 70 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल आया है।

आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में टाटा ट्रस्ट्स ने ₹1,556 करोड़ के अनुदान वितरित किए, जबकि इससे पिछले साल (FY25) यह आंकड़ा ₹902 करोड़ था। पिछले दो सालों का कुल खर्च मिलाकर ₹2,458 करोड़ पहुंच गया है, जो कि FY21 से FY24 के चार सालों में किए गए कुल आवंटन के लगभग बराबर है।

महामारी के बाद फिर पकड़ी रफ्तार

टाटा ट्रस्ट्स ने कोविड-19 महामारी के समय अपना फंड आवंटन काफी बढ़ाया था:

  • FY21: ₹841 करोड़
  • FY22: ₹860 करोड़

महामारी के बाद इसमें थोड़ी गिरावट देखी गई थी। FY23 में ₹400 करोड़ और FY24 में ₹523 करोड़ का खर्च हुआ था। वैसे FY25 और FY26 में ट्रस्ट ने एक बार फिर सामाजिक कल्याण के लिए फंड में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की है।

कहां और कैसे खर्च हुआ ₹1,556 करोड़ का फंड?

FY26 में बांटे गए ₹1,556 करोड़ के कुल फंड को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है:

संस्थागत अनुदान और प्रत्यक्ष क्रियान्वयन खर्च: कुल फंड का 80% से अधिक हिस्सा शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों जैसी संस्थाओं को सीधे तौर पर दिया गया।

व्यक्तिगत अनुदान: शेष ₹200 करोड़ का उपयोग स्वास्थ्य, शिक्षा और गरीबी उन्मूलन जैसे व्यक्तिगत कारणों के लिए जरूरतमंदों को सहायता देने में हुआ।

सेक्टर-वाइज खर्च का ब्योरा

टाटा ट्रस्ट्स ने देश के अलग-अलग क्षेत्रों के विकास के लिए भारी फंड जारी किया है:

ग्रामीण उत्थान: सबसे बड़ा हिस्सा यानी ₹450 करोड़ ग्रामीण विकास परियोजनाओं को दिया गया। इसमें आजीविका के साधन उपलब्ध कराने और वित्तीय समावेशन के कार्यक्रम शामिल हैं।

शिक्षा क्षेत्र: शिक्षा से जुड़ी योजनाओं और पहलों पर ₹270 करोड़ खर्च किए गए।

कैंसर देखभाल: कैंसर के इलाज और सुविधाओं के लिए ₹178 करोड़ की वित्तीय सहायता दी गई। टाटा ट्रस्ट्स ‘टाटा कैंसर केयर फाउंडेशन’ (TCCF) को फंड देता है, जो कई अस्पतालों का संचालन करता है और वंचित मरीजों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

चेयरमैन नोएल टाटा का विजन: हेल्थकेयर रहेगा मुख्य फोकस

वित्त वर्ष 2026 के लिए जारी चेयरमैन लेटर में टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल टाटा ने स्पष्ट किया कि निकट भविष्य में हेल्थकेयर ट्रस्ट की सबसे बड़ी प्राथमिकता बना रहेगा।

उन्होंने कहा, ‘हम चिकित्सा संकट का सामना कर रहे परिवारों का समर्थन करना जारी रखेंगे। इसके साथ ही, कैंसर देखभाल के ऐसे मॉडल को मजबूत कर रहे हैं जिससे इलाज मरीजों के घर के करीब लाया जा सके। हम देशभर में 40 से 50 गैर-लाभकारी जनरल अस्पतालों का एक नेटवर्क तैयार करने पर काम कर रहे हैं। यह मॉडल ऐसा होगा कि जो लोग इलाज का खर्च उठा सकते हैं, वे उन लोगों की मदद करेंगे जो इसका खर्च नहीं उठा सकते।’

उन्होंने भारत में विश्वस्तरीय संस्थानों के निर्माण पर जोर देते हुए आगे कहा, ‘भारतीय मूल के विद्वान और पेशेवर दुनिया के बेहतरीन संस्थानों में अपनी छाप छोड़ रहे हैं। भारत को ऐसे और संस्थानों की जरूरत है जो इस प्रतिभा को तराश सकें, ताकि युवाओं को बाहर देखे बिना यहीं सीखने, खोजने और योगदान देने का अवसर मिले।’

BSNL यूजर्स ध्यान दें! ऐसे चेक करें रिचार्ज की वैलिडिटी और बचा हुआ डेटा, ये हैं 4 आसान तरीके

BSNL यूजर्स ध्यान दें! ऐसे चेक करें रिचार्ज की वैलिडिटी और बचा हुआ डेटा, ये हैं 4 आसान तरीके

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के प्रीपेड मोबाइल यूजर्स अपने रिचार्ज प्लान की वैलिडिटी, मेन बैलेंस और बचे हुए इंटरनेट डेटा की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए कंपनी कई विकल्प उपलब्ध कराती है। यूजर्स USSD कोड, WhatsApp, BSNL Selfcare ऐप और कस्टमर केयर की मदद ले सकते हैं।

 

अगर आप भी BSNL सिम इस्तेमाल करते हैं, तो इन तरीकों की मदद से पता लगा सकते हैं कि आपका रिचार्ज कब तक वैलिड है और कितना डेटा बचा हुआ है। इससे रिचार्ज खत्म होने से पहले नया प्लान चुनने और मोबाइल सेवाएं बिना रुकावट जारी रखने में मदद मिल सकती है।
 

1. USSD कोड से ऐसे चेक करें BSNL रिचार्ज की वैलिडिटी

अगर आपके फोन में इंटरनेट नहीं चल रहा है, तब भी आप USSD कोड के जरिए बैलेंस और प्लान की जानकारी चेक करने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए स्मार्टफोन में इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं होती।

 

इन स्टेप्स को फॉलो करें:

1. अपने मोबाइल फोन का डायलर खोलें।

2. BSNL नंबर से *123# डायल करें।

3. कॉल बटन दबाएं।

4. स्क्रीन पर मेन्यू आने का इंतजार करें।

5. उपलब्ध विकल्पों में मेन बैलेंस और प्लान वैलिडिटी से जुड़ी जानकारी देखें।

BSNL डेटा बैलेंस कैसे चेक करें?

इंटरनेट डेटा बैलेंस की जानकारी के लिए *124# डायल करके देखें। इसके बाद स्क्रीन पर आने वाले निर्देशों का पालन करें।

 

ध्यान रखें कि USSD कोड और मेन्यू की उपलब्धता सर्किल या टेलीकॉम सेवा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। यदि कोड काम नहीं करता है, तो दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करें।

2. WhatsApp से चेक करें BSNL प्लान की डिटेल्स

BSNL यूजर्स WhatsApp के जरिए भी अपने प्लान की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आधिकारिक BSNL WhatsApp सेवा का इस्तेमाल करना जरूरी है।

 

कैसे करें चेक?

1. अपने फोन में BSNL की आधिकारिक WhatsApp सेवा का नंबर सेव करें।

2. WhatsApp खोलकर उस नंबर पर मैसेज भेजें।

3. बातचीत शुरू करने के लिए ‘Hi’ लिखकर भेजें।

4. ऑटोमैटिक रिप्लाई में दिए गए विकल्पों को देखें।

5. प्लान, वैलिडिटी या बैलेंस से संबंधित विकल्प चुनें।

इससे जुड़ी जानकारी में 1800-4444 नंबर दिया गया है। हालांकि, इस्तेमाल करने से पहले BSNL की आधिकारिक वेबसाइट या आधिकारिक संचार माध्यम से इस नंबर और उपलब्ध सेवाओं की पुष्टि कर लें। किसी भी अनजान नंबर पर OTP, बैंकिंग जानकारी या अन्य निजी विवरण साझा न करें।

3. BSNL Selfcare ऐप से मिलेगी पूरी जानकारी

अगर आप मोबाइल ऐप के जरिए अपना अकाउंट मैनेज करना पसंद करते हैं, तो BSNL Selfcare ऐप उपयोगी विकल्प हो सकता है। इसमें लॉगिन करने के बाद उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार आप अपने मौजूदा प्लान और डेटा बैलेंस की जानकारी देख सकते हैं।

 

ऐप से जानकारी चेक करने का तरीका:

1. Google Play Store या Apple App Store से आधिकारिक BSNL Selfcare ऐप डाउनलोड करें।

2. ऐप खोलकर अपने BSNL मोबाइल नंबर से लॉगिन करें।

3. जरूरत पड़ने पर OTP वेरिफिकेशन पूरा करें।

4. ऐप के डैशबोर्ड पर अपने मौजूदा प्लान, वैलिडिटी और डेटा बैलेंस से संबंधित जानकारी देखें।

अगर ऐप में जानकारी अपडेट नहीं दिखाई दे रही है, तो उसे रिफ्रेश करें या दोबारा लॉगिन करके देखें। समस्या बनी रहने पर BSNL कस्टमर केयर से संपर्क किया जा सकता है।

4. कस्टमर केयर पर कॉल करके जानें रिचार्ज की वैलिडिटी

अगर USSD कोड, WhatsApp या ऐप से जानकारी नहीं मिल रही है, तो आप BSNL कस्टमर केयर की मदद ले सकते हैं।

– BSNL नंबर से: 1503 पर कॉल करें।

– दूसरे नेटवर्क से: 1800-180-1503 पर संपर्क करने की कोशिश करें।

कॉल करने के बाद वॉयस मेन्यू में बैलेंस, रिचार्ज या प्लान की जानकारी से संबंधित विकल्प चुनें। जरूरत पड़ने पर कस्टमर केयर प्रतिनिधि से बात करने का विकल्प चुन सकते हैं।

 

कॉल करने से पहले BSNL की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित हेल्पलाइन नंबर की पुष्टि कर लेना बेहतर है।

BSNL रिचार्ज की वैलिडिटी चेक करना क्यों जरूरी है?

अपने मोबाइल रिचार्ज की वैलिडिटी और डेटा बैलेंस नियमित रूप से चेक करने से कई तरह की परेशानियों से बचा जा सकता है।

– समय पर रिचार्ज: प्लान की वैलिडिटी खत्म होने से पहले नया रिचार्ज करा सकते हैं।

– डेटा की जानकारी: पता चलता है कि कितना इंटरनेट डेटा बचा है।

– कॉलिंग सेवाओं पर नजर: प्लान की शर्तों के अनुसार कॉलिंग सुविधाओं की उपलब्धता समझने में मदद मिलती है।

– सही प्लान का चुनाव: अपनी जरूरत और इस्तेमाल के हिसाब से अगला रिचार्ज चुन सकते हैं।

– सेवाओं में रुकावट से बचाव: वैलिडिटी खत्म होने से पहले रिचार्ज करके मोबाइल सेवाएं जारी रखने में मदद मिलती है।

कुल मिलाकर, BSNL यूजर्स के पास रिचार्ज की जानकारी प्राप्त करने के कई विकल्प हैं। बिना इंटरनेट के USSD कोड आजमा सकते हैं, जबकि ऐप और कस्टमर केयर के जरिए भी जानकारी ली जा सकती है। WhatsApp का इस्तेमाल करने से पहले संबंधित नंबर की आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।

Muhurat Trading: दिवाली पर मुहूर्त ट्रेडिंग की टाइमिंग का हुआ ऐलान, दोपहर 2:20 बजे से खुलेगा बाजार

Diwali Muhurat Trading 2026: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने दिवाली के दिन होने वाले विशेष ‘मुहूर्त ट्रेडिंग’ सत्र की टाइमिंग का ऐलान कर दिया है। इस साल रविवार, 8 नवंबर 2026 को विशेष लाइव ट्रेडिंग सत्र आयोजित किया जाएगा। इस दिन भारतीय शेयर बाजार नए हिंदू वर्ष विक्रम संवत 2083 का स्वागत करेगा।

भारतीय शेयर बाजार में दिवाली के दिन मुहूर्त ट्रेडिंग की परंपरा दशकों पुरानी है। मान्यता है कि इस शुभ मुहूर्त में शेयर बाजार में निवेश करने से पूरे वर्ष सुख-समृद्धि और वित्तीय उन्नति बनी रहती है। आइए जानते हैं NSE द्वारा जारी मुहूर्त ट्रेडिंग का मिनट-टू-मिनट पूरा शेड्यूल।

मेन ट्रेडिंग सेशन

मुहूर्त ट्रेडिंग के दौरान मुख्य बाजार में कारोबार की समय-सारणी इस प्रकार रहेगी:

प्री-ओपन ऑर्डर एंट्री: दोपहर 2:05 बजे से 2:15 बजे तक (इसमें ऑर्डर दर्ज, संशोधित या रद्द किए जा सकते हैं)।

ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 2:15 बजे से 2:17 बजे तक।

प्री-ओपन बफर टाइम: दोपहर 2:17 बजे से 2:20 बजे तक।

कंटीन्यूअस ट्रेडिंग: दोपहर 2:20 बजे से शुरू होगा।

मार्केट क्लोजिंग टाइम: नॉन-क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) प्रतिभूतियों के लिए बाजार दोपहर 3:30 बजे बंद होगा, जबकि CAS सिक्योरिटीज के लिए सामान्य बाजार 3:15 बजे समाप्त होगा।

CAS और पोस्ट-क्लोज सेशन का शेड्यूल

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) और उसके बाद के सत्रों की समय-सारणी इस प्रकार निर्धारित की गई है:

  • रेफरेंस प्राइस कैलकुलेशन: दोपहर 3:15 बजे से 3:20 बजे तक।
  • CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड: दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे तक।
  • ऑर्डर मैचिंग व ट्रेड कन्फर्मेशन: दोपहर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक।
  • CAS ट्रांजिशन टाइम: दोपहर 3:35 बजे से 3:50 बजे तक।
  • पोस्ट-क्लोज सेशन: दोपहर 3:50 बजे से शाम 4:00 बजे तक।
  • ट्रेड मॉडिफिकेशन कट-ऑफ टाइम: शाम 4:15 बजे तक।

नोट: प्री-ओपन और CAS ऑर्डर एंट्री पीरियड के अंतिम 2 मिनट में सिस्टम-ड्रिवन रैंडम क्लोजर लागू रहेगा।

ब्लॉक डील, IPO और अन्य विशेष सत्र

ब्लॉक डील विंडो: दोपहर 1:50 बजे से 2:05 बजे तक खुलेगी।

IPO और री-लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए स्पेशल प्री-ओपन: दोपहर 2:05 बजे से 2:50 बजे तक (अंतिम 10 मिनट में रैंडम क्लोजर)।

स्पेशल प्री-ओपन वाली कंपनियों का नॉर्मल मार्केट: दोपहर 3:05 बजे से 3:30 बजे तक चलेगा।

कॉल ऑक्शन इलिक्विड सेशन: दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे तक रहेगा।

NSE ने स्पष्ट किया है कि इस विशेष दिवाली मुहूर्त ट्रेडिंग सत्र के दौरान एग्जिक्यूटेड सभी सौदों के लिए सेटलमेंट दायित्व अनिवार्य रूप से लागू होंगे।

Electric Scooter : सस्ते स्कूटर की होने वाली है धमाकेदार इंट्री, जान लीजिए फीचर्स, और क्या हो सकती है कीमत

Electric Scooter : सस्ते स्कूटर की होने वाली है धमाकेदार इंट्री, जान लीजिए फीचर्स, और क्या हो सकती है कीमत

aprila scooter

इटली की वाहन निर्माता कंपनी पियाजियो ग्रुप (Piaggio Group) भारतीय बाजार में अपनी इलेक्ट्रिक स्कूटर रेंज का विस्तार करने की तैयारी कर रही है। कंपनी भारत के लिए एक नया स्कूटर प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है, जिस पर पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह के स्कूटर तैयार किए जाएंगे। कंपनी की योजना इस नई रेंज को 2027 में अप्रिलिया (Aprilia) ब्रांड के तहत लॉन्च करने की है। इसकी शुरुआती कीमत करीब 85,000 रुपये (एक्स-शोरूम) हो सकती है।

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पियाजियो व्हीकल्स के चेयरमैन, सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डिएगो ग्राफी ने नई स्कूटर रेंज की योजनाओं की पुष्टि की है। कंपनी के मुताबिक, इस रेंज में इलेक्ट्रिक स्कूटर के साथ 125cc पेट्रोल इंजन वाला मॉडल भी शामिल होगा। इनकी कीमत 85,000 रुपये से लेकर 1.30 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) के बीच रखी जा सकती है। इस रेंज के ऊंचे कीमत वाले मॉडल प्रीमियम इलेक्ट्रिक स्कूटर होंगे।

 

₹85,000 से ₹1.30 लाख के बीच होगी कीमत

 

कंपनी का लक्ष्य भारतीय बाजार में उन ग्राहकों को आकर्षित करना है, जो किफायती कीमत पर नया पेट्रोल या इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदना चाहते हैं। डिएगो ग्राफी के मुताबिक, कंपनी 85,000-90,000 रुपये की शुरुआती कीमत से लेकर 1.20-1.30 लाख रुपये तक के सेगमेंट को ध्यान में रखकर उत्पाद पेश करेगी। इस रेंज में अधिक कीमत वाले प्रीमियम इलेक्ट्रिक वेरिएंट भी शामिल होंगे।

 

कंपनी पिछले कुछ वर्षों से भारत के लिए इस नए प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है। यह प्लेटफॉर्म भारत में पियाजियो की विस्तार योजनाओं का अहम हिस्सा है। इसके जरिए कंपनी पेट्रोल स्कूटर के साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है।

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इलेक्ट्रिक और पेट्रोल दोनों स्कूटर के लिए बनेगा नया प्लेटफॉर्म

 

पियाजियो का नया प्लेटफॉर्म खासतौर पर भारतीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। कंपनी ने इसे शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक और पेट्रोल, दोनों तरह के स्कूटरों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है।

 

आमतौर पर कंपनियां अपने मौजूदा पेट्रोल स्कूटर प्लेटफॉर्म में बदलाव करके इलेक्ट्रिक मॉडल तैयार करती हैं। हालांकि, पियाजियो का कहना है कि उसका नया प्लेटफॉर्म शुरुआत से ही इलेक्ट्रिक पावरट्रेन को समायोजित करने के लिए तैयार किया गया है। इससे लागत, परफॉर्मेंस और ड्राइविंग रेंज के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है।

 

कंपनी भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन उद्योग से जुड़े नए घटनाक्रमों पर भी नजर रख रही है। इनमें दिल्ली की घोषित ईवी पॉलिसी 2026 भी शामिल है। हालांकि, पियाजियो की रणनीति किसी एक राज्य तक सीमित रहने के बजाय पूरे भारतीय बाजार को ध्यान में रखकर स्कूटर लॉन्च करने की है।

 

Vespa ब्रांड के तहत फिलहाल नहीं आएगा इलेक्ट्रिक स्कूटर

 

पियाजियो ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल वेस्पा (Vespa) ब्रांड के तहत इलेक्ट्रिक स्कूटर लॉन्च करने की उसकी योजना नहीं है। कंपनी के मुताबिक, मौजूदा कॉन्फिगरेशन में किफायती कीमत के साथ अपेक्षित रेंज और परफॉर्मेंस हासिल करना चुनौतीपूर्ण है।

 

इसी वजह से कंपनी नए प्लेटफॉर्म पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिसे इलेक्ट्रिक स्कूटर की जरूरतों के मुताबिक तैयार किया जा रहा है। कंपनी का उद्देश्य लागत को नियंत्रित रखते हुए बेहतर परफॉर्मेंस, पर्याप्त रेंज और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद तैयार करना है।

 

भारत से दूसरे देशों में भी निर्यात करेगी कंपनी

 

पियाजियो भारत को सिर्फ घरेलू बिक्री का बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में भी विकसित करना चाहती है। कंपनी के महाराष्ट्र स्थित बारामती प्लांट में बनने वाले कुल दोपहिया वाहनों में से फिलहाल लगभग 10-20 प्रतिशत का निर्यात विभिन्न देशों में किया जाता है।

 

कंपनी का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर कम से कम 50 प्रतिशत तक पहुंचाना है। यानी भारत में बनने वाले उसके कुल दोपहिया वाहनों का आधा हिस्सा घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात के लिए तैयार करने की योजना है।

 

भारत में निर्मित अप्रिलिया RS 457 और Tuono 457 पहले से ही कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात किए जाते हैं। कंपनी भविष्य में आने वाले मॉडलों के साथ भी इसी रणनीति को अपनाना चाहती है।

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यूरोप में भी बिकेंगे नए स्कूटर

 

डिएगो ग्राफी के मुताबिक, विकास के चरण में मौजूद नए इलेक्ट्रिक और पेट्रोल स्कूटर सिर्फ भारत के लिए नहीं होंगे। इनके समान वेरिएंट यूरोप के बाजारों में भी निर्यात किए जाएंगे।

 

इस तरह पियाजियो की आगामी स्कूटर रेंज भारतीय ग्राहकों के लिए किफायती विकल्प उपलब्ध कराने के साथ-साथ कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति का भी हिस्सा होगी। हालांकि, इन स्कूटरों के अंतिम डिजाइन, फीचर्स, बैटरी क्षमता, वास्तविक रेंज और लॉन्च की सटीक तारीख की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

 

Sugar Stocks: शुगर स्टॉक्स में भारी गिरावट, गन्ने-चीनी से एथेनॉल बनाने पर सरकारी रोक का दिखा असर

Sugar Stocks: चीनी कंपनियों के शेयरों में 19 अक्टूबर को भारी बिकवाली दिखी। कई शेयर 7% तक टूट गए। इसकी वजह एथेनॉल की खरीद से जुड़ा सरकार का फैसला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नए टेंडर से चीनी से बनने वाले एथेनॉल की खरीद को बाहर कर दिया है। इससे चीनी कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।

इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

Bajaj Hindusthan Sugar का शेयर 5.59% गिरकर ₹20.08 पर आ गया। Shree Renuka Sugars में 7% की गिरावट रही। वहीं, Balrampur Chini Mills का शेयर 3.33% और EID Parry का शेयर 3.22% टूट गया। Triveni Engineering and Industries में 1.54% की गिरावट रही। Dhampur Sugar का शेयर भी 4% से ज्यादा गिरा।

सरकार ने क्या फैसला लिया?

सरकारी तेल कंपनियों ने नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के लिए एथेनॉल खरीद का नया टेंडर जारी किया है। BPCL ने 16 अक्टूबर को यह टेंडर निकाला था। इसमें गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल की खरीद शामिल नहीं है।

इसके अलावा, मक्का से बनने वाले एथेनॉल की खरीद कीमत भी घटा दी गई है। इसे ₹71.86 से कम करके ₹68.86 प्रति लीटर कर दिया गया है। टेंडर में करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने के लिए बोलियां मांगी गई हैं।

चीनी कंपनियों को क्यों होगा नुकसान?

चीनी कंपनियां गन्ने से चीनी के साथ एथेनॉल भी बनाती हैं। इससे उन्हें कमाई का एक और रास्ता मिलता है। कई कंपनियों ने एथेनॉल बनाने की क्षमता बढ़ाने में पैसा भी लगाया है।

अब चीनी से बनने वाले एथेनॉल की सरकारी खरीद टेंडर में शामिल नहीं होने से कंपनियों की मुश्किल बढ़ सकती है। उनकी उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चुनौती बन सकता है। इससे मुनाफे पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतें काबू में रहें। त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतें 10% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। वहीं, प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कमजोर बारिश से उत्पादन घटने की आशंका है।

भारत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखता है। अब इस जरूरत को पूरा करने के लिए मक्का और दूसरे अनाज से बनने वाले एथेनॉल की भूमिका बढ़ सकती है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग पर क्या असर होगा?

ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के चेयरमैन प्रफुल्ल विठलानी का कहना है कि सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इस सीजन इसे पूरा करना मुश्किल हो सकता है। चीनी से बनने वाले एथेनॉल का उत्पादन घटने के साथ मक्के की कमी भी इसकी बड़ी वजह है।

प्रफुल्ल विठलानी के मुताबिक, पिछले सीजन में एथेनॉल सप्लाई में चीनी की हिस्सेदारी 25% थी। अब यह घटकर सिर्फ 2% के आसपास रह सकती है।

क्या चीनी की कीमतें बढ़ेंगी?

उत्पादन को लेकर चिंता के बावजूद फिलहाल चीनी की कीमतों में बड़ी हलचल की उम्मीद नहीं है। विठलानी के मुताबिक, सरकार ने कोटा जारी करके बाजार में सप्लाई को संभाला है। त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

ज्यादातर चीनी मिलों में नवंबर की शुरुआत तक पेराई शुरू होने की उम्मीद है। सरकार के सप्लाई प्रबंधन से अगले दो महीने तक कीमतें स्थिर रह सकती हैं। इसके बाद बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि चीनी का असल उत्पादन कितना रहता है और फसल की स्थिति कैसी रहती है।

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