High Return Stock: इस शेयर ने 2026 में पैसा दोगुना किया है, क्या निवेश करना चाहिए?

High Return Stock: आईनॉक्स इंडिया ने हाई वैल्यू बिजनेस पर फोकस बढ़ाया है। स्ट्रॉन्ग ऑर्डर बुक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती मौजूदगी और नए अप्लिकेशंस में एंट्री से कंपनी की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। कंपनी का शेयर 3 सितंबर को 3.84 फीसदी चढ़कर 2,180 रुपये पर बंद हुआ। इस शेयर ने 2026 में निवेशकों को मालामाल किया है। इस दौरान इसने निवेशकों का पैसा दोगुना कर दिया है।

कपैसिटी बढ़ने से ग्रोथ को मिलेगा सपोर्ट

Inox India कांडला में अपनी कपैसिटी बढ़ा रही है। इससे भी ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा। शेयरों में ज्यादा तेजी का असर वैल्यूएशन पर पड़ा है। कंपनी की वैल्यूएशन 2028 में अनुमानित अर्निंग्स का करीब 44 गुना हो गई है। हालांकि, जून तिमाही में साल दर साल आधार पर कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 8.3 फीसदी रही है। अगर लॉजिस्टिक्स से जुड़े मसले नहीं होते तो रेवेन्यू ग्रोथ ज्यादा रहती।

EBITDA मार्जिन करीब 23.5 फीसदी रहा

मुश्किल के बावजूद कंपनी का EBITDA साल दर साल आधार पर 1.4 फीसदी बढ़कर करीब 90 करोड़ रुपये रहा। EBITDA मार्जिन करीब 23.5 फीसदी रहा, जो अच्छा है। साल दर साल आधार पर टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) बगैर बदलाव के 61 करोड़ रुपये रहा। जून तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन बेहतर रहता, क्योंकि 32-35 करोड़ रुपये के इक्विपमेंट डिस्पैच के लिए तैयार हैं।

फ्रेट कॉस्ट में उछाल से इक्विपमेंट की शिपिंग में बाधा

माल ढुलाई की बढ़ती लागत और शिपिंग की सीमित उपलब्धता की वजह से इक्विपमेंट की शिपिंग नहीं हो सकी। कंपनी के मैनेजमेंट ने बताया है कि यूरोपियन कनटेनर रेट्स 3,000-4000 से बढ़कर 8,000-9,000 ड़लर तक पहुंच गए हैं। कुछ ग्राहकों ने ज्यादा फ्रेट रेट्स को देखते हुए डिलीवरी टाल दी है। मैनेजमेंट का कहना है कि यह मुश्किल थोड़े समय के लिए है।

1686 करोड़ रुयये की स्ट्रॉन्ग ऑर्डरबुक

जून तिमाही में कंपनी को 532 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले। इससे कुल ऑर्डरबुक बढ़कर जून के अंत में 1,686 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसमें एक्सपोर्ट ऑर्डर्स की 1,140 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी है। कंपनी के लिए एयरोस्पेस नए मौके के रूप में उभरा है। कंपनी को 1,500 क्यूबिक मीटर क्राइजोनिक स्टोरेज टैंक्स के 8 बड़े ऑर्डर्स मिले हैं। उसी ग्राहक से छह अतिरिक्त टैंक के भी ऑर्डर मिले हैं।

सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम में भी पैर जमाने की कोशिश

कंपनी भारत में नए उभरते सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम में भी पैर जमाने की कोशिश कर रही है। इसे धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैसिलिटी के लिए स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट के ऑर्डर मिले हैं। मैनेजमेंट ने बताया है कि ये ऑर्डर करीब 30 करोड़ रुपये के हैं। कंपनी के संभावित ग्राहकों में Micron, Foxconn और टाटा जैसी बड़ी कंपनियां शामिल है।

मैनेजमेंट ने 18-20 फीसदी का रेवेन्यू गाइडेंस बनाए रखा

मैनेजमेंट ने FY27 के रेवेन्यू ग्रोथ के 18-20 फीसदी गाइडेंस को बनाए रखा है। एबिड्टा मार्जिन के 21-24 फीसदी गाइडेंस को भी बनाए रखा है। यह इसके बावजूद है कि पहली तिमाही में कंपनी का प्रदर्शन अनुमान से थोड़ा कमजोर रहा। कंपनी की 1,686 करोड़ रुपये की ऑर्डरबुक से रेवेन्यू को लेकर अगले कई सालों की तस्वीर साफ है।

BS7 draft likely in couple of months: MoRTH

BS7 draft likely in couple of months: MoRTH
BS7 draft likely in couple of months: MoRTH

“We are ready with the next level of Bharat Stage [emission] standards and the final consultations are underway. We hopefully should be in a position to bring out the draft in a couple of months’ time for the BS 7 introduction,” Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) Secretary V Umashankar said at the 2026 SIAM Annual Convention in Delhi. 

Bharat Stage norms limit the emissions of pollutants like hydrocarbons, sulphur and oxides of nitrogen from vehicles. India currently follows BS6 Phase 2 (or BS6.2) norms, which came into effect on April 1, 2023. “I think the industry is also preparing itself for it. The key challenge there would be the timelines,” Umashankar added.

What changes with BS7?

BS7 will put a greater focus on pollution levels from vehicles in real-world driving conditions rather than laboratory testing. Unlike the dramatic transition from BS4 to BS6, the move to BS7 is a natural progression from BS6. This should put relatively less pressure on manufacturers to upgrade their vehicles. Prices may also go up slightly due to the upgrades. Some models could even be discontinued if upgrading them to meet BS7 norms is not financially viable, something that we saw during the move from BS4 to BS6 in 2020.

Bharat Stage emission norms so far

Bharat Stage emission norms were introduced in India in the year 2000 with the implementation of BS1 standards, while also rolling out BS2 across major cities in a phased manner. BS2 was based on European emission regulations, with the main difference being the test cycle’s top speed – 90kph versus 120kph in Europe.

India remained one stage behind Europe until 2010, after which the oil industry could not supply the low-sulphur fuel needed to progress to BS5 before eventually leapfrogging from BS4 to BS6 in 2020.

How are CAFE norms different from BS standards?

Corporate Average Fuel Economy (CAFE) norms deal with overall fuel consumption, specifically the quantity of fuel consumed. Imposed on a carmaker’s entire fleet, and not on an individual model, it’s a limit set on the total emission of carbon dioxide produced. These norms force manufacturers to make more fuel efficient cars, which impacts many other things. Whereas, Bharat Stage norms measure emissions at a vehicular level.

गोबर को ऊर्जा और आय में बदलेंगे 1000 विशेषज्ञ, गांवों तक तैयार होगा नेटवर्क

गोबर को ऊर्जा और आय में बदलेंगे 1000 विशेषज्ञ, गांवों तक तैयार होगा नेटवर्क

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में गो-संरक्षण को केवल गोवंश के आश्रय और देखभाल तक सीमित न रखते हुए उसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इस क्रम में गोशालाओं में उपलब्ध गोबर को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती और आय के संसाधन में बदलने के लिए उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग और ‘पार्टनर्स इन प्रॉसपेरिटी’ (पीएनपी) के बीच तकनीकी सहयोग का एमओयू हुआ है। इसके तहत प्रदेश में स्थापित दीनबंधु मॉडल बायोगैस संयंत्रों को तकनीकी सहयोग देने के साथ भविष्य में स्थापित होने वाले संयंत्रों के लिए भी मजबूत तकनीकी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत 1,000 तकनीकी विशेषज्ञ कर्मियों का नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। इसका लक्ष्य गोबर के वैज्ञानिक व आर्थिक उपयोग के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करना है।

 

समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात जमीनी स्तर पर तकनीकी तंत्र तैयार करना है। चरणबद्ध तरीके से करीब 1,000 तकनीकी कर्मियों का नेटवर्क विकसित किया जाएगा। यह नेटवर्क दीनबंधु बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के साथ उनके संचालन, रखरखाव, तकनीकी प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग में सहयोग करेगा। इससे बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के बाद उनके नियमित और प्रभावी संचालन के लिए स्थानीय स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध हो सकेगी। संस्था उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में 3,900 से अधिक दीनबंधु बायोगैस इकाइयों का निर्माण कर चुकी है। संस्था बायोगैस परियोजना विकास से लेकर तकनीकी डिजाइन, फीडस्टॉक एवं गोबर आकलन, संयंत्र निर्माण, संचालन एवं रखरखाव, लाभार्थियों के प्रशिक्षण और फील्ड मॉनिटरिंग तक पूरा तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।

गोबर के एक चक्र से ऊर्जा, खाद, खेती और कार्बन लाभ

नई पहल की अहमियत केवल गोबर से बायोगैस तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए बायोगैस, जैव-स्लरी, जैविक खाद/बायो-इनपुट, प्राकृतिक एवं पुनर्योजी कृषि, कार्बन लाभ की पूरी श्रृंखला विकसित करने की योजना है। यानी गोशाला का गोबर पहले ऊर्जा का स्रोत बनेगा और बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली जैव-स्लरी को जैविक खाद और बायो-इनपुट के रूप में खेती से जोड़ा जा सकेगा। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और प्राकृतिक व पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस मॉडल को भविष्य में पर्यावरणीय लाभ और कार्बन परियोजनाओं से जोड़ने की संभावनाओं पर भी काम होगा।

‘गोबर अपशिष्ट नहीं, ग्रामीण समृद्धि का संसाधन’

उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि गोबर को केवल अपशिष्ट मानने के बजाय ऊर्जा, जैविक कृषि और ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में देखने की आवश्यकता है। दीनबंधु बायोगैस मॉडल को तकनीकी रूप से सुदृढ़ कर बड़े स्तर पर लागू किया जाना गोशालाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए बहुआयामी लाभ का आधार बन सकता है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में उपलब्ध गोबर संसाधन को स्वच्छ ऊर्जा, जैविक उर्वरक और सतत कृषि से जोड़ते हुए ऐसी सर्कुलर इकोनॉमी विकसित करना है, जिसमें गोवंश संरक्षण के साथ रोजगार, ऊर्जा की बचत, कृषि उत्पादकता और पर्यावरणीय लाभ भी हासिल हों। प्रदेश के किसान और ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर इस कार्यक्रम का जमीनी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। तकनीकी नेटवर्क और स्थानीय अनुभव का मेल गोशालाओं में बायोगैस मॉडल को टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक अवसर

योगी सरकार के गो-संरक्षण मॉडल में यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें गोवंश संरक्षण को आर्थिक चक्र से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। गोबर यदि ऊर्जा और जैविक खाद में परिवर्तित होकर खेती में वापस पहुंचता है तो गोशालाओं के संसाधनों के उपयोग के साथ किसानों और ग्रामीण परिवारों के लिए भी आर्थिक अवसर तैयार हो सकते हैं। इस तरह प्रदेश में ‘गोबर से ऊर्जा, ऊर्जा से जैविक कृषि और जैविक कृषि से समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था’ की अवधारणा को जमीन पर उतारने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम साबित होने वाला है।

Bharat NCAP 2.0 to come into effect from October 2027: Gadkari

Bharat NCAP 2.0 to come into effect from October 2027: Gadkari
Bharat NCAP 2.0 to come into effect from October 2027: Gadkari

At the 66th SIAM Annual Convention, Union Minister of Road Transport and Highways, Nitin Gadkari, revealed that the government is preparing for the second phase of Bharat NCAP that’s set to take effect from October 2027. The new phase of the BNCAP, Gadkari said, is planned to broaden the vehicle assessment programme to areas such as crash avoidance, pedestrian safety and post-crash response.

  1. Entire crash chain will be evaluated, expanding beyond occupant protection
  2. Gadkari invited manufacturers to submit suggestions based on global safety practices

Bharat NCAP 2.0 plans: What was revealed?

“Entire crash chain” to be evaluated with the Bharat NCAP 2.0 programme 

“We are going ahead with making Bharat NCAP 2. This is a very important program [which will be] valid from October 2027,” said Gadkari while addressing the SIAM convention. The next phase is expected to assess a wider range of safety parameters. “We are going to evaluate the entire crash chain,” he added while identifying three broad areas – avoiding a crash, pedestrian protection, and post-crash evacuation and care – rather than focusing only on how vehicles protect occupants during a crash.

Image source: @siamindia on X

The ministry will also look at new safety technologies available globally as well as solutions being developed by Indian start-ups. Gadkari also invited vehicle manufacturers to submit suggestions based on their research, technical experience and safety practices followed in other markets “If you have any good suggestions, don’t hesitate, come to us”, he said.

Notified draft rules from MoRTH in November 2025 proposed 100-point evaluation criteria

In November 2025, MoRTH proposed new rules for the next phase of Bharat NCAP under AIS-197 (Revision 1), aimed at making the car safety testing programme more detailed and stricter. Under the proposed system, cars would receive a score out of 100 based on five areas: crash protection (55 points), protection for pedestrians and other vulnerable road users (20 points), safe driving features (10 points), accident avoidance technology (10 points), and post-crash safety (5 points).

The requirements for a 5-star safety rating would also become tougher. From 2027, a car would need to score at least 70 out of 100 to receive 5 stars, while from 2029, the minimum score would increase to 80 points.

The proposal also calls for more crash tests. In addition to the existing tests, cars would have to undergo a 50kph full-width frontal crash test, a 32kph oblique pole impact test and a 50kph rear-impact test. The speed of the existing side-pole test would also increase from 29kph to 32kph. Another major change is that cars would need to offer curtain airbags and electronic stability control (ESC) as standard to qualify for a star rating.

MP समेत इन राज्यों में भी बरसेंगे बादल, IMD Weather Forecast- यूपी-दिल्ली-NCR में भारी बारिश का अलर्ट

MP समेत इन राज्यों में भी बरसेंगे बादल, IMD Weather Forecast- यूपी-दिल्ली-NCR में भारी बारिश का अलर्ट

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MD Weather Forecast September 4 : देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर सक्रिय होने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 4 सितंबर को उत्तर प्रदेश, दिल्ली-NCR, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक को लेकर चेतावनी जारी की है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

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मौसम विभाग के मुताबिक सक्रिय निम्न दबाव वाले सिस्टम के प्रभाव से पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं दिल्ली-NCR, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक देखने को मिल सकती है।

 

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट

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4 सितंबर को उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में मानसून सक्रिय रहने की संभावना है। प्रदेश में कई स्थानों पर भारी बारिश के साथ गरज और बिजली चमकने की स्थिति बन सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का दौर आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है।

 

दिल्ली-NCR में फिर होगी बारिश

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दिल्ली-NCR के लोगों को 4 सितंबर को एक बार फिर बारिश का सामना करना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने राजधानी और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक का अनुमान जताया है। दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में भी बारिश होने की संभावना है। बारिश और तेज हवाओं के कारण तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है।

 

मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश

 

मध्य प्रदेश में भी मानसून की सक्रियता बनी रहने की संभावना है। IMD के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश हो सकती है।

 

पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश में 3 से 5 सितंबर के बीच गरज-चमक और बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। मध्य प्रदेश के अलावा विदर्भ और छत्तीसगढ़ में भी 9 सितंबर तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

 

उत्तराखंड और हिमाचल में भी भारी बारिश

 

उत्तराखंड में 4 सितंबर को भारी बारिश की संभावना है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के साथ अचानक तेज बारिश होने से स्थानीय स्तर पर परेशानी बढ़ सकती है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का अनुमान है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रा करने वालों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की सलाह दी जाती है।

 

बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश

 

बिहार में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की चेतावनी है। पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी बारिश होने की संभावना है।

 

राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में कैसा रहेगा मौसम?

 

राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। पंजाब और हरियाणा में भी बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में बारिश का दौर 9 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर जारी रह सकता है।

 

दक्षिण भारत में भी बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

 

दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। तटीय कर्नाटक और लक्षद्वीप में व्यापक बारिश की संभावना है आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, रायलसीमा और तेलंगाना में गरज-चमक के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

 

4 सितंबर को किन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट?

 

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार 4 सितंबर को इन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है:

 

  • पूर्वी मध्य प्रदेश: भारी से बहुत भारी और कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश: भारी से बहुत भारी बारिश
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश: भारी से बहुत भारी बारिश
  • अरुणाचल प्रदेश: भारी से बहुत भारी बारिश
  • जम्मू-कश्मीर: भारी बारिश
  • हिमाचल प्रदेश: भारी बारिश
  • उत्तराखंड: भारी बारिश
  • पंजाब: भारी बारिश
  • हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली: भारी बारिश
  • पूर्वी उत्तर प्रदेश: भारी बारिश
  • पूर्वी राजस्थान: भारी बारिश
  • छत्तीसगढ़: भारी बारिश
  • विदर्भ: भारी बारिश
  • बिहार: भारी बारिश
  • पश्चिम बंगाल और सिक्किम: भारी बारिश
  • असम और मेघालय: भारी बारिश
  • नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा: भारी बारिश

Adani Power Share: मोतीलाल ओसवाल ने Buy रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की, बुल केस में ₹305 का टारगेट दिया

Adani Power Share: ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने अदाणी ग्रुप की पावर कंपनी Adani Power पर कवरेज शुरू करते हुए इसे ‘Buy’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹250 का टारगेट प्राइस रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 20% ज्यादा है। मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, बुल केस में यह 46.8% तक भी उछल सकता है। गुरुवार को अदाणी पावर 207.50 रुपये पर तकरीबन फ्लैट बंद हुआ। 2026 में अब तक शेयर करीब 40% चढ़ चुका है।

मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी की मजबूत ग्रोथ योजनाओं को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। Adani Power FY32 तक अपनी बिजली उत्पादन क्षमता 2.3 गुना बढ़ाकर 42 GW करना चाहती है। FY27 में 1.3 GW, FY28 में 1.6 GW और FY29 में 3.2 GW नई क्षमता जोड़ने का अनुमान है।

थर्मल पावर में तगड़ी पकड़

Adani Power भारत की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी है। FY27 की पहली तिमाही में कंपनी की उत्पादन क्षमता 18 GW थी। भारत की कुल कोयला और लिग्नाइट वाली बिजली क्षमता में कंपनी की हिस्सेदारी 8% है। निजी क्षेत्र में यह हिस्सेदारी करीब 24% है।

कंपनी की 95% ऑपरेशनल क्षमता लंबे और मध्यम अवधि के पावर परचेज एग्रीमेंट यानी PPA से जुड़ी है। कंपनी बिजली वितरण कंपनियों यानी DISCOMs को बिजली बेचती है। साथ ही वह मर्चेंट मार्केट में भी बिजली की बिक्री करती है।

मोतीलाल ओसवाल क्यों है बुलिश?

ब्रोकरेज का मानना है कि Adani Power ने संकट में फंसे कई बिजली प्लांटों का अधिग्रहण कर उन्हें सफलतापूर्वक चलाया है। कंपनी की एक और बड़ी ताकत उसकी पूंजी खर्च रणनीति है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक, कंपनी ने औसतन ₹3.5 करोड़ प्रति MW की लागत पर बिजली क्षमता का अधिग्रहण किया है। वहीं नया थर्मल पावर प्लांट बनाने में करीब ₹12 करोड़ प्रति MW खर्च आता है। कंपनी के न्यूक्लियर एनर्जी में उतरने की संभावना को भी ब्रोकरेज ने भविष्य के लिए एक अतिरिक्त अवसर माना है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि मौजूदा कैपेक्स साइकिल पूरी होने के बाद कंपनी का EBITDA करीब ₹80,000 करोड़ तक पहुंच सकता है।

बुल केस में ₹305 का टारगेट

अगर बिजली की कीमतें और प्लांट लोड फैक्टर अनुमान से बेहतर रहे, तो मोतीलाल ओसवाल ने शेयर के लिए ₹305 का बुल केस टारगेट रखा है। यह पिछले बंद भाव से करीब 46.8% ज्यादा है।

इसके उलट, कमजोर स्थिति में ब्रोकरेज ने ₹140 का बेयर केस टारगेट बताया है। यह पिछले बंद भाव से करीब 32.6% नीचे है।

जोखिम भी कम नहीं

ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी की आने वाली थर्मल क्षमता में करीब 44% अभी किसी पावर खरीद समझौते से जुड़ी नहीं है। इससे बिजली की मांग और कीमतों को लेकर जोखिम बना हुआ है।

इसके अलावा, बड़े कैपेक्स, प्रोजेक्ट में देरी, लागत बढ़ने और पर्यावरण नियमों का पालन भी अहम जोखिम हैं। कंपनी को बिजली सेक्टर में प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ता है।

फिलहाल Adani Power को कवर करने वाले 10 में से 9 एनालिस्ट्स ने ‘Buy’ रेटिंग दी है। एक एनालिस्ट ने ‘Hold’ रेटिंग रखी है।

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Gold Outlook: गोल्ड ₹1.53 लाख पर, क्या यह ₹1.60 लाख का लेवल पार करेगा? जानिए आगे कैसी रह सकती है चाल

Gold Outlook: सोने में गुरुवार यानी 3 सितंबर को रिकवरी दिखी। डॉलर में कमजोरी और महंगे क्रूड की वजह से महंगाई बढ़ने की चिंता कम होने से सोने को सपोर्ट मिला। शुरुआती कारोबार में कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1.30 फीसदी चढ़कर 4,472.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इधर, भारत में भी कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी।

MCX में गोल्ड में तेजी 

MCX में गोल्ड फ्यूचर्स 1.05 फीसदी यानी 1,595 रुपये चढ़कर 1,53,997 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। एनालिस्ट्स का कहना है कि अब एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स के लिए 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लेवल महत्वपूर्ण दिख रहा है। उधर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मीटिंग करीब आ रही है। ऐसे में इनवेस्टर्स की नजरें फेड के फैसले पर टिकी हैं।

1.60 लाख का लेवल अहम 

बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव के मुताबिक, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लेवल अहम है। उन्होंने कहा कि हाल में आई तेजी और फिर करेक्शन के बाद 1.60 लाख के लेवल को ब्रेकआउट लेवल माना जा सकता है। अगर गोल्ड 1.60 लाख के लेवल को पार करने के बाद टिका रहता है तो इससे यह संकेत मिलेगा कि गोल्ड में आए करेक्शन की वजह मुख्यत: मुनाफावसूली थी।

तेजी में गोल्ड 1.65 लाख तक जा सकता है

1.60 लाख के लेवल के पार गोल्ड के टिके रहने पर इसके 1.65-1.70 लाख तक जाने का रास्ता खुल जाएगा। यादव ने कहा, “इससे पहले के टेक्निकल एसेसमेंट में भी 1.58-1.60 लाख के लेवल को ब्रेकआउट जोन बताया गया था। इसका मतलब है कि 1.65-1.70 लाख संभावित अगला टारगेट हो सकता है। गिरावट की स्थिति में 1.52-1.50 पर सोने को अहम सपोर्ट मिलेगा।”

केंद्रीय बैंकों की खरादीरी से गोल्ड को सपोर्ट

यादव ने बताया कि जब कभी गोल्ड ब्रेकआउट देता है तो इसका कनफर्मेशन जरूरी हो जाता है। मौजूदा लेवल पर ऐसा नहीं दिख रहा। हालांकि, दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं, जिससे इसे सपोर्ट मिल रहा है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक 2026 में हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद रहे हैं। उसने साल के अंत तक गोल्ड की कीमतों के लिए 4,900 डॉलर प्रति औंस का अनुमान जताया है।

जियोपॉलिटिकल टेंशन का भी गोल्ड पर असर

जियोपॉलिटिकल टेंशन बने रहने से भी गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है। गोल्ड को सुरक्षित निवेश का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। भारतीय निवेशकों के लिए रुयये का लेवल भी एक बड़ा मसला है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड कंसॉलिडेशन जारी रहता है तो भी रुपये में कमजोरी से एमसीएक्स गोल्ड को सपोर्ट मिल सकता है।

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इनवेस्टर्स की नजरें फेडरल रिजर्व के फैसले पर

यादव ने कहा कि गोल्ड के लिए शॉर्ट टर्म में सबसे बड़ा रिस्क अमेरिका में इंटरेस्ट रेट को लेकर फेड का फैसला, डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड है। फेड चेयरमैन के हालिया रुख से यह साफ हो गया है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की पॉलिसी सख्त होगी। इससे यील्ड में उछाल दिखा है और डॉलर में मजबूती आई है। इससे गोल्ड पर कुछ समय के लिए दबाव बन सकता है।

थिएटर में नंगे पैर ‘हनुमान अंश’ देखते नजर आया मुस्लिम शख्स, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह सिनेमा हॉल में ‘हनुमान अंश’ फिल्म देख रहा है। कई लोगों का ध्यान इस बात पर गया कि फिल्म देखते समय वह बिना जूते-चप्पल के बैठा है। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी खूब पसंद की जा रही है।

वीडियो में वह व्यक्ति सफेद कुर्ता-पायजामा और सफेद टोपी पहने हुए बिना जूते-चप्पल के थिएटर में बैठा दिखाई दे रहा है। वह फिल्म देखने में पूरी तरह मग्न है और उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि कोई उसका वीडियो बना रहा है।

वीडियो ऑनलाइन पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। एक यूज़र ने लिखा, “बिना राजनीति वाला भारत।” दूसरे ने लिखा, “वे दशकों से चल रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण से उसके मन को दूषित करने में नाकाम रहे।”

नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच यह वायरल क्लिप लोगों का ध्यान खींच रही है। हाल ही में मिराज सिनेमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने नीम करोली बाबा के लिए सीट नंबर 9 आरक्षित करने का फैसला किया है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि बाबा अपने भक्तों के साथ फिल्म देखेंगे।

नंगे पैर फिल्म देखने आए एक व्यक्ति का वीडियो और उस पर ऑनलाइन मिली प्रतिक्रियाओं ने ‘हनुमान अंश’ फिल्म के बारे में चर्चा को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह फिल्म सिनेमाघरों में लगातार लोगों का ध्यान खींच रही है।

नीम करौली बाबा, जिनका जन्म 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में लक्ष्मण नारायण शर्मा के रूप में हुआ था। वे हनुमान के परम भक्त थे। 1960 और 1970 के दशक में कैंची धाम और वृंदावन में अपने आश्रमों के माध्यम से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उनकी शिक्षाओं ने पश्चिमी देशों के कई साधकों को आकर्षित किया, जिनमें हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्परट (राम दास) और आध्यात्मिक साधक भगवान दास प्रमुख थे।

उनकी शिक्षाओं में निस्वार्थ सेवा और भक्ति पर जोर दिया गया था, जिसे संक्षेप में “सब से प्रेम करो, सबकी सेवा करो, सबको भोजन कराओ” कहा जाता है। हालांकि उनके अनुयायियों द्वारा बताई गई बातों में उनके जीवन से जुड़ी कई चमत्कारी घटनाओं का जिक्र मिलता है, लेकिन ये कहानियाँ उनके आध्यात्मिक जीवन-वृत्तांत का हिस्सा हैं, न कि प्रमाणित इतिहास का।

11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनके निधन के बाद, उनकी विरासत दुनिया भर में फैली और स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसी प्रमुख पश्चिमी हस्तियों को प्रभावित किया; इन सभी ने उनके कैंची धाम आश्रम का दौरा किया था।

खबरों के अनुसार, 1.8 करोड़ रुपये के कम बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने भारत में लगभग 10 लाख रुपये की शुरुआती कमाई की और 28वें दिन तक 62 करोड़ रुपये से अधिक की नेट कमाई कर ली। फिल्म निर्माताओं का मानना ​​है कि लोगों के बीच फिल्म की अच्छी चर्चा (वर्ड ऑफ माउथ) के कारण ही यह फिल्म इतने लंबे समय तक सिनेमाघरों में चल पाई।

Dividend Stocks: TCS से ONGC तक… ये 10 स्टॉक्स देते हैं तगड़ा डिविडेंड, क्या आप लगाएंगे दांव?

Dividend Stocks: अगर आप शेयर बाजार से डिविडेंड की कमाई भी चाहते हैं, तो 10 शेयरों पर नजर रख सकते हैं। Religare Broking की सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, इन शेयरों में 3.3% से लेकर 9.7% तक डिविडेंड यील्ड है। PTC India इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। वहीं Coal India, REC, ONGC, TCS और HCLTech जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं।

  1. PTC India

पावर ट्रेडिंग कंपनी PTC India इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। इसका डिविडेंड यील्ड 9.7% है। शेयर का P/E 8.7 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹14.70 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में यह ₹7.80 था।

2. Coal India

सरकारी कोयला कंपनी Coal India का डिविडेंड यील्ड 6.6% है। शेयर का P/E 7.9 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹26.40 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में यह ₹25.50 था। कंपनी ने FY26 के लिए ₹5.25 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड भी घोषित किया है।

3. REC

सरकारी पावर फाइनेंस कंपनी REC का डिविडेंड यील्ड 6.2% है। शेयर का P/E 5.3 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹19.60 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में कंपनी ने ₹20.40 प्रति शेयर डिविडेंड दिया था।

4. ONGC

सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC का डिविडेंड यील्ड 5.8% है। शेयर का P/E 6.7 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹13.50 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में यह ₹12.30 प्रति शेयर था।

5. Gujarat Pipavav Port

पोर्ट ऑपरेटर कंपनी Gujarat Pipavav Port का डिविडेंड यील्ड 5.7% है। शेयर का P/E 14.9 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹9.60 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में यह ₹7.70 प्रति शेयर था।

6. Power Finance Corporation

सरकारी पावर फाइनेंस कंपनी Power Finance Corporation का डिविडेंड यील्ड 5% है। शेयर का P/E 4.9 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹16.70 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में यह ₹13.50 प्रति शेयर था।

7. TCS

आईटी कंपनी TCS का डिविडेंड यील्ड 4.5% है। शेयर का P/E 16.2 गुना है। FY26 में कंपनी ने कुल ₹109 प्रति शेयर डिविडेंड दिया।

8. HCLTech

आईटी कंपनी HCLTech का डिविडेंड यील्ड 4.1% है। शेयर का P/E 19.6 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹54 प्रति शेयर डिविडेंड दिया।

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9. GAIL

सरकारी गैस कंपनी GAIL का डिविडेंड यील्ड 3.5% है। शेयर का P/E 11.8 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में यह ₹6.50 प्रति शेयर था।

10. Petronet LNG

गैस इंपोर्ट और री-गैसिफिकेशन कंपनी Petronet LNG का डिविडेंड यील्ड 3.3% है। शेयर का P/E 10.7 गुना है। FY26 में कंपनी ने ₹10 प्रति शेयर डिविडेंड दिया। FY25 में भी कंपनी ने इतना ही डिविडेंड दिया था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Delhi Holiday: दिल्ली में 11 सितंबर से लेकर लगातार 3 दिन छुट्टी! जानिए क्या बंद रहेगा और कौन सी सर्विस रहेंगी चालू

BRICS Summit 2026 In Delhi: राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट को देखते हुए दिल्ली में केंद्र सरकार के सभी दफ्तर 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को बंद रहेंगे। BRICS समिट 2026 के लिए बड़े पैमाने पर लॉजिस्टिकल इंतजाम करने और आम लोगों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए नई दिल्ली इलाके में सभी केंद्र सरकार के ऑफिस शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बंद रहेंगे।

सरकार ने गुरुवार (3 सितंबर) को इस बारे में एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट 11 से 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया जाएगा। इस समिट में लगभग तीस BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता, इंटरनेशनल संगठनों के प्रमुख और भारत सहित BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधि शामिल होंगे।

लगातार तीन दिन मिलेगी छुट्टी

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की तरफ से गुरुवार (3 सितंबर) को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, दिल्ली और नई दिल्ली में केंद्र सरकार के दफ्तरों को बंद करने का फैसला इस कार्यक्रम के बड़े पैमाने और इस हाई-लेवल समिट के आयोजन के लिए ज़रूरी बड़े लॉजिस्टिकल इंतज़ामों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। 11 सितंबर के अगले दिन शनिवार और रविवार है। यानी केंद्रीय कर्मचारियों को 11 सितंबर से लगातार तीन दिन छुट्टी मिलेगी।

11 से 13 सितंबर तक आयोजित होगा समिट

BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में 11 से 13 सितंबर तक आयोजित होने हैं। इस समिट में भारत समेत BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के अलावा, लगभग 30 BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता शामिल होंगे। इस कदम का मकसद समिट के दौरान आम जनता को होने वाली परेशानी को कम करना भी है। इसके लिए राजधानी में बड़े पैमाने पर सुरक्षा और ट्रैफिक इंतजाम किए जाएंगे। यह बंदी 11 सितंबर (शुक्रवार) को लागू होगी। जबकि 12 और 13 सितंबर को क्रमशः शनिवार और रविवार है।

BRICS देशों के दिग्गज होंगे शामिल

एक आदेश में कहा गया है, “मुझे यह बताने का निर्देश दिया गया है कि BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट 11-13 सितंबर, 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है। समिट में लगभग तीस BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख और भारत सहित BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के बड़े पैमाने और इसमें शामिल लॉजिस्टिकल इंतजामों को देखते हुए और आम जनता को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि दिल्ली/नई दिल्ली में स्थित केंद्र सरकार के दफ्तर शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बंद रखे जाएं (12 और 13 सितंबर 2026 को क्रमशः शनिवार और रविवार है)।”

25 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें होंगी

इस साल भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट देश भर के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों और बिजनेस-टू-बिजनेस तथा लोगों के बीच आपसी पहल के जरिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ने व्यावहारिक और विकास-उन्मुख नतीजों के माध्यम से ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।

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भारत ‘ब्रिक्स’ का एक संस्थापक सदस्य है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। साल 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के बीस साल पूरे कर रहा है।