Redmi 17 5G की भारत में एंट्री, Snapdragon 4 Gen 5 प्रोसेसर और 7,900mAh बैटरी के साथ

Redmi ने गुरुवार को भारत में अपना नया Redmi 17 5G स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। इस फोन को Amazon और कंपनी के अधिकृत आउटलेट्स से खरीदा जा सकेगा। ग्लोबल वेरिएंट की तरह भारत में भी यह स्मार्टफोन तीन अलग-अलग कलर ऑप्शन में उपलब्ध होगा। आइए जानते हैं Redmi 17 5G की कीमत और इसके स्पेसिफिकेशंस के बारे में।

भारत में Redmi 17 5G की कीमत

Redmi 17 5G के 6GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की शुरुआती कीमत ₹39,999 है। वहीं, 8GB RAM + 128GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत ₹41,999 है। खास बात यह है कि कंपनी ने दोनों मॉडल्स की नेट इफेक्टिव कीमत क्रमशः ₹23,999 और ₹26,999 तय की है।

यह फोन भारत में 10 सितंबर 2026 से Amazon और Xiaomi के अधिकृत आउटलेट्स के जरिए खरीदा जा सकेगा। Redmi 17 5G को Absolute Black, Endless Blue और Eternal Orange जैसे तीन कलर ऑप्शन में पेश किया गया है।

Redmi 17 5G के स्पेसिफिकेशन्स

Redmi 17 5G में डुअल-सिम स्लॉट है और यह Android 16 पर आधारित HyperOS3 पर चलता है। इस हैंडसेट में 6.9-इंच का HD+ डिस्प्ले होगा, जिसका रिफ्रेश रेट 120Hz तक और पीक ब्राइटनेस 825 निट्स होगी।

पावर की बात करें तो, इस स्मार्टफोन में Qualcomm का ऑक्टा-कोर Snapdragon 4 Gen 5 चिप है, जो 4nm प्रोसेस पर बना है। इसमें Adreno GPU के साथ 8GB तक LPDDR4x RAM और 256GB तक UFS 2.2 ऑनबोर्ड स्टोरेज भी मिलता है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड से 2TB तक बढ़ाया जा सकता है।

फोटोग्राफी के लिए, इस हैंडसेट में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें f/1.8 अपर्चर वाला 50MP का मेन सेंसर और एक सेकेंडरी कैमरा शामिल है। सेल्फी के लिए, स्मार्टफोन में f/2.05 अपर्चर वाला 8MP का कैमरा दिया गया है।

Redmi 17 5G में 7,900mAh की बैटरी है और यह 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 22.5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करता है। इस डिवाइस का साइज 170.12×78.42×8.8mm है। कनेक्टिविटी के लिए, Redmi 17 5G में 5G और 4G LTE नेटवर्क के साथ डुअल-बैंड Wi-Fi, Bluetooth, NFC, GPS और USB Type-C पोर्ट की सुविधा है। इसमें 3.5mm हेडफोन जैक भी दिया गया है।

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Hyundai compact EV to debut by end of 2026

Hyundai compact EV to debut by end of 2026
Hyundai compact EV to debut by end of 2026

At its 2026 CEO Investor Day, Hyundai revealed plans to debut its made-in-India compact electric SUV by March 2027. However, Tarun Garg, Managing Director and CEO of Hyundai Motor India, in an interaction with our sister publication Autocar Professional, confirmed the EV will debut earlier than that, by the end of 2026. Garg also said that the EV will initially use battery cells from Svolt, before moving to its original plan to source them from Exide. 

  1. To be built on the E-GMP (K) platform that underpins the Inster EV
  2. Will rival the Tata Nexon EV, Mahindra XUV 3XO EV and Kia Syros EV

Hyundai has also revealed it expects EVs to account for more than 7 percent of its domestic sales within the next year. In FY26 (April 2025 to March 2026), EVs accounted for a 1 percent share of total Hyundai sales in the country, a figure similar to FY25 (April 2024 to March 2025).

Upcoming Hyundai compact EV: More details

Svolt to supply battery cells initially, after Exide flagged production delays earlier

Image source: @joonsun_erin on Instagram

The upcoming compact EV will initially use Svolt battery cells. “We are already ready with the new EV using Svolt cells. Otherwise, the programme could have been delayed, and we did not want to delay the vehicle,” Garg said to Autocar Professional. However, Hyundai subsequently plans to source locally produced cells through its association with Exide, as was originally planned. Notably, Exide revealed in August 2026 that battery production is delayed and that they would not be able to supply components by FY27 (by March 2027). 

Will be underpinned by the Inster’s E-GMP (K) platform

The upcoming compact EV, codenamed HE1i, will be underpinned by the E-GMP (K) platform, also used by the internationally available Inster EV. It will be offered in two versions: standard range and long range, but exact specifications are under wraps. For context, the Inster EV is also available in standard and long-range versions, with 42kWh and 45kWh batteries, respectively, offering a WLTP-claimed range of up to 355km.

Hyundai has also confirmed that the new compact EV will get a ‘next-generation infotainment system’, which could be the Pleos Connect infotainment system seen on several new-age Hyundai models now, and a ‘Level 2 assisted driving technology’. It will be manufactured at Hyundai’s Sriperumbudur facility in Tamil Nadu. Upon launch, it will lock horns with the Tata Nexon EV, Mahindra XUV 3XO EV and Kia Syros EV. 

With inputs from Ketan Thakkar and Hormazd Sorabjee

Market Outlook : लगातार चौथे सेशन में गिरावट के साथ बंद हुआ बाजार, जानिए 4 सितंबर को कैसी रह सकती है इसकी चाल

Market Outlook : गुरुवार, 3 सितंबर के ट्रेडिंग सेशन में बाजार की क्लोजिंग गिरावट के साथ हुई। US फ़ेडरल रिज़र्व के साथ ही दुनिया भर के केंद्रीय बैंक बढ़ती कीमतों के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इस आशंका के चलते बाजार दबाव में आ गया। कारोबार के अंत में निफ्टी 0.17% की गिरावट के साथ 23,873 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 0.55% गिरकर 76,152 पर बंद हुआ। ये दोनों इंडेक्स लगातार चौथे सेशन में गिरावट लेकर बंद हुए। हालांकि, हालांकि, ब्रॉडर मार्केट ने अपनी शुरुआती गिरावट से उबरते हुए अच्छी वापसी की। इसके चलते निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.40% की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.27% की बढ़ोतरी देखने को मिली।

सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी, मीडिया, केमिकल और प्राइवेट बैंक के शेयरों में खरीदारी आई। वहीं, IT, FMCG, ऑटो और फार्मा शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च, विनोद नायर का कहना है कि बाजार की रिकवरी की कोशिशें असफल हो गईं। ग्लोबल स्तर पर मिले अच्छे संकेतों और FII के नए निवेश के बावजूद, लंबे समय से चले आ रहे जियोपॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल यील्ड में बढ़ोतरी का असर भी देखने को मिल रहा है। बैंकिंग और रियल्टी शेयरों ने बाजारर को सपोर्ट दिया। स्मॉल-कैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखी। यह घरेलू विकास की संभावनाओं में भरोसे को दिखाता है। कच्चे तेल की लगातार बनी ऊंची कीमतें घरेलू बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। हालांकि भारत की मज़बूत ग्रोथ स्टोरी और हाल ही में सॉवरेन रेटिंग में सुधार जैसे पॉजिटिव फैक्टर बने हुए हैं। लेकिन बाजार की निकट भविष्य की दिशा मुख्य रूप से ग्लोबल मैक्रो और जियोपॉलिटिकल जोखिमों में होने वाली घट-बढ़ पर निर्भर करेगी।

रेलिगेयर ब्रोकिंग के SVP रिसर्च, अजीत मिश्रा का कहना है कि बाजार शुरुआती बढ़त को बनाए रखने में नाकाम रहा और वीकली एक्सपायरी के दिन गिरावट के साथ बंद हुआ। ग्लोबल मार्केट से मिले अच्छे संकेतों के कारण निफ्टी गैप-अप के साथ खुला। हालांकि, जैसे-जैसे कारोबारी सेशन आगे बढ़ा बिकवाली के दबाव के कारण इंडेक्स नीचे आ गया। नतीजतन अंत में निफ्टी 0.17% गिरकर दिन के निचले स्तर के पास 24,873.45 पर बंद हुआ। सेंसेक्स लगभग 0.55% गिरकर 76,152.86 पर बंद हुआ।

अलग-अलग सेक्टर का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। रियल्टी, बैंकिंग और एनर्जी शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि IT और FMCG शेयरों पर दबाव रहा। ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा। इससे मिडकैप इंडेक्स में लगभग 0.37% की बढ़त हुई, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 1.20% ऊपर बंद हुआ।

शुरुआत में मार्केट को ग्लोबल मार्केट में रिकवरी, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में कमी, FII की खरीदारी और RBI के उम्मीद से ज़्यादा FCNR डिपॉजिट रोलओवर से सपोर्ट मिला, जिससे मार्केट का सेंटीमेंट बेहतर हुआ। हालांकि, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच निवेशक सतर्क रहे, क्योंकि ये फैक्टर ग्लोबल रिस्क लेने की क्षमता को प्रभावित करते रहते हैं।

टेक्निकल तौर पर निफ़्टी को रिकवरी के दौरान रुकावट का सामना करना पड़ रहा है, जो शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर के कमजोर होने का संकेत है। इसके लिए 23,800 का जोन शॉर्ट-टर्म के लिए एक अहम सपोर्ट बना हुआ है और अगर यह लेवल टूटता है, तो 23,700–23,600 के जोन की ओर गिरावट आ सकती है। ऊपर की ओर, 24,000–24,150 का जोन रेजिस्टेंस के तौर पर काम कर सकता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और कमजोर मार्केट मोमेंटम को देखते हुए रिस्क मैनेजमेंट पर खास फोकस रखते हुए सतर्क और स्टॉक-स्पेसिफिक अप्रोच अपनाने की सलाह होगी।

बोनान्ज़ा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आने वाले समय में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों और मैक्रो-इकोनॉमिक हालात पर निर्भर करेगी। अगर हालात और बिगड़े तो बाजार में सावधानी बरती जा सकती है और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि इंस्टीट्यूशनल निवेश में स्थिरता और भारत की मज़बूत ग्रोथ की उम्मीद बाजार को सहारा दे सकती है। खास तौर पर ब्याज दरों से प्रभावित होने वाले सेक्टर में सोच-समझकर निवेश करने की रणनीति अपनाने की जरूरत है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि निफ्टी की शुरुआत गैप-अप के साथ हुई, लेकिन राइजिंग चैनल के निचले बैंड के पास उसे रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा, जिससे पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। डेली टाइमफ्रेम पर ‘डार्क क्लाउड कवर’ कैंडलस्टिक पैटर्न बना है जो निकट भविष्य में कमजोरी बने रहने का संकेत देता है। निफ्टी के लिए निचले स्तर पर 23,850 पर सपोर्ट है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स 23,700–23,730 के स्तर तक गिर सकता है। ऊपरी स्तर पर, 24,000 पर रेजिस्टेंस है। मंदी के रुझान को खत्म करने के लिए निफ्टी के लिए 24,000 के स्तर के ऊपर टिके रहना जरूरी होगा।

 

बाजार में इस समय निफ्टी का टेक्सचर काफी खराब, अभी इंडेक्स में कोई पोजिशन कैरी नहीं करें

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

किचन का वो ‘कचरा’ जो आपकी त्वचा और पौधों के लिए है असली सोना!

आलू की सब्जी या कोई दूसरी डिश बनाने के बाद हम उसके छिलके निकालकर सीधे डस्टबिन में डाल देते हैं। लेकिन जिन्हें हम बेकार समझते हैं, वे घर के कई छोटे-बड़े कामों में इस्तेमाल हो सकते हैं, इन छिलकों को सही तरीके से इस्तेमाल करके बर्तन साफ करने, पौधों की देखभाल करने और यहां तक कि खाने के लिए कुछ नया बनाने में भी काम लिया जा सकता है।

यदि आप भी घर में चीजों को दोबारा इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, तो आलू के छिलकों को फेंकने से पहले एक बार जरूर सोचें। इन्हें थोड़ी मेहनत के साथ उपयोगी चीज में बदला जा सकता है और इससे किचन का कचरा भी कम होगा। आलू के छिलकों के कुछ आसान और काम के इस्तेमाल करके आप घर पर आसानी से आजमा सकते हैं।

potato pos

1. चेहरे की सफाई और निखार में मदद

आलू के छिलकों में कुछ एंटीऑक्सिडेंट और पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए कई लोग इन्हें स्किन की देखभाल के लिए इस्तेमाल करते हैं। छिलकों को गुलाब जल से हल्का गीला करके चेहरे पर बहुत हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। आप चाहें तो छिलकों को पीसकर उसमें थोड़ा दूध मिलाकर पेस्ट भी बना सकते हैं। इसे करीब 10 मिनट चेहरे पर लगाकर साफ पानी से धो लें। इससे स्किन साफ और मुलायम महसूस हो सकती है।

2. बालों के लिए इस्तेमाल

आलू के छिलकों से तैयार पानी को बालों की देखभाल के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए छिलकों को करीब 1 लीटर पानी में 10-15 मिनट तक उबालें। पानी आधा रह जाए तो इसे छानकर ठंडा कर लें। शैम्पू करने के बाद इस पानी को बालों और स्कैल्प पर लगाएं और कुछ देर बाद नॉर्मल पानी से धो लें।

3. डार्क सर्कल और टैनिंग के लिए

आलू के छिलकों को डार्क सर्कल, झाइयों और टैनिंग के लिए घरेलू उपाय के समान इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए छिलके के अंदर वाले हिस्से को एफेक्टेड जगह पर करीब 5 मिनट तक बहुत हल्के हाथों से लगाएं। आंखों के आसपास इस्तेमाल करते समय सावधानी रखें और आंखों में जाने से बचाएं। आपकी स्किन सेंसेटिव है, तो पहले पैच टेस्ट जरूर कर लें।

4. वेट लॉस में फायदेमंद

आलू के छिलकों में डाइटरी फाइबर पाया जाता है, जो पेट को कुछ समय तक भरा रखने में मदद कर सकता है। इसी कारण छिलके सहित आलू को डाइट में शामिल किया जा सकता है। यदि आपको कुरकुरा खाना पसंद है, तो साफ किए हुए आलू के छिलकों को हल्के मसालों के साथ बेक या रोस्ट करके स्नैक की तरह भी खा सकते हैं।

5. पौधों के लिए न्यूट्रिशन

आलू के छिलकों को कूड़े में फेंकने के बजाय पौधों की देखभाल में इस्तेमाल किया जा सकता है। इन्हें अच्छी तरह साफ करके कुछ दिनों तक सुखाएं या पानी में भिगोकर इसका पानी तैयार करें। छाने हुए पानी को पौधों की मिट्टी में सीमित मात्रा में डाला जा सकता है। छिलकों को सीधे बहुत ज्यादा मात्रा में मिट्टी में डालने से बचें, ताकि कीड़े न लगे।

6. होम क्लीनिंग में मददगार

आलू के छिलकों से तैयार पानी का इस्तेमाल कुछ घरेलू सफाई के कामों में किया जा सकता है। छिलकों को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा कर लें और फिर इसे सफाई के लिए इस्तेमाल करें। छोटे-मोटे दाग या गंदगी साफ करने में इसे आजमाया जा सकता है।

आलू के छिलके सिर्फ किचन वेस्ट नहीं हैं, बल्कि इन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करके स्किन, बालों, पौधों और घर की सफाई जैसे कई कामों में मदद ली जा सकती है। इसलिए अगली बार इन्हें फेंकने से पहले इनके इन आसान इस्तेमालों को जरूर आजमाएं।

3 reasons to buy the Maruti Celerio and 3 reasons to avoid it

3 reasons to buy the Maruti Celerio and 3 reasons to avoid it
Maruti Celerio side static

The Celerio is positioned between the cheaper Alto K10 and the even more popular Wagon R in Maruti Suzuki’s line-up. Priced between Rs 4.70 lakh and Rs 6.75 lakh (ex-showroom), the Celerio is available in petrol and CNG versions with manual and AMT gearbox options, just like its rivals. While the second-gen model arrived on the entry-level hatchback scene in 2021, it hasn’t received a single facelift in the following five years, placing it at a disadvantage over some of its competitors. This Heartect platform-based hatchback goes up against the likes of the new-gen Tata Tiago and its own stablemate, the Wagon R.

Reasons to buy the Maruti Celerio

City slicker

The Celerio’s urban-friendly demeanour is great for regular commutes

Maruti Celerio engine

One of the factors making the Maruti Celerio a great urban runabout is its 1.0-litre three-cylinder engine. It builds power smoothly right from lower RPMs which, along with a slick 5-speed manual gearbox and a light clutch, make pottering around town an easy affair. Those seeking an even easier time commuting can pick the AMT (automated manual transmission), whose shifts are relatively smooth as far as AMTs go.

Maruti Celerio front tracking

Helping matters further in the city is the plaint suspension, which soaks up bumps at lower speeds without much fuss. The light steering, tight turning radius and good front visibility also go a long way in helping you navigate compact parking spots and bustling city traffic. And despite its cost-friendly design, the height-adjustment feature for the driver’s seat means finding a suitable position isn’t too much of an issue.

Efficiency champ

This is Maruti Suzuki’s most frugal offering in the country

Maruti Celerio AMT gearbox

Not only is it easy to drive, but the Maruti Celerio will not have you complaining about fuel economy either. The petrol version with the 5-speed manual transmission has a claimed mileage of up to 25.24kpl, while the AMT option is rated at 26kpl – making the Celerio AMT the most fuel-efficient petrol car in the market. All variants of the Celerio come with an automatic engine stop-start function, further reducing fuel consumption. While this feature isn’t enabled when running on CNG (in VXi MT only), the claimed mileage of 34.43km/kg is better than that of the Maruti Wagon R CNG and the Renault Kwid CNG.

Roomy boot

The Celerio’s boot affords more space than some rivals

Maruti Celerio boot space

At 292 litres, the boot of the Maruti Celerio is bigger than those rivals such as the Tata Tiago and Renault Kwid. This is enough to accommodate two large suitcases and a couple of carry-on-sized bags, with still some room to spare. If you need even more space, the 60:40 split-folding rear seats will come in handy. On the other hand, the loading lip is high and relatively narrow, making loading or unloading heavier items cumbersome.

Reasons to avoid the Maruti Celerio

Ergonomic niggles

This interior has a few sore points that’ll take getting used to

Maruti Celerio infotainment

Compared to most of its adversaries, the power window switches of the Maruti Celerio aren’t placed on the doors. The front ones are positioned on the dashboard, whilst the rear switches are found on the rear centre pedestal between the front seats. Buttons to operate the door and power-window locks are also on the dashboard. Then there are the thick A-pillars, which can obstruct your view at junctions and roundabouts.

Maruti Celerio rear seats

The well-cushioned rear seats of the Celerio offer plenty of kneeroom for even taller occupants. However, headroom isn’t all that good, and the fixed headrests are positioned way too low to be effective. The angled design of these headrests also means that they poke into your back, which can be uncomfortable.

Unimpressive material quality and feature set

The Celerio’s cabin isn’t the most up-to-date in this segment

When compared to the new-gen Tata Tiago, the interior of the Maruti Celerio looks and feels a touch dated. There’s plenty of hard plastics which, even though are accompanied by shiny trim and a sculpted dashboard, feel pretty basic. The relatively simple design is backed by an equipment list that isn’t particularly competitive either.

Maruti Celerio interior

For instance, even the top trim level of the Celerio doesn’t come with a rearview camera. There’s also no automatic climate control system, while Apple CarPlay and Android Auto both require a wired connection. The touch-infotainment screen is a 7-inch unit, whereas a similarly priced Tata Tiago offers an 8-inch setup. On the outside, the Maruti Celerio gets the old-school ‘flip-up’ door handles.

Imperfect on a highway

This hatchback isn’t particularly meant to be driven hard or fast

Maruti Celerio side tracking

While it’s perfectly at home in the city, the Maruti Suzuki Celerio isn’t as good out on the open road. The lifeless steering aside, the body moves around enough – both of which robs you of confidence required to push the car any harder.

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चीन- PhD छोड़, रिसर्च पेपर की गड़बड़ियां खोजने लगा शख्स:40 वैज्ञानिकों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया, जिनपिंग सरकार ने फंडिंग-पुरस्कार छीने

चीन में एक पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई के रिसर्च पेपर में गड़बड़ियां पकड़ने के बाद 40 से ज्यादा रिसर्चर्स पर कार्रवाई हुई है। चीन की प्रमुख रिसर्च फंडिंग संस्था नेशनल नेचुरल साइंस फाउंडेशन ऑफ चाइना (NSFC) ने 31 मामलों में कार्रवाई की है। इसे संस्था की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। कार्रवाई की जद में कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ प्रोफेसर भी हैं। इनमें 4 ऐसे वैज्ञानिक हैं, जिनके पेपर पर पूर्व PhD छात्र गेंग होंगवेई ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए थे। गेंग को ‘स्टूडेंट गेंग’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2025 में बायोसाइंस की PhD छोड़ दी थी। इसके बाद वह रिसर्च पेपर में डेटा, तस्वीरों और ग्राफ की गड़बड़ियां खोजकर सोशल मीडिया पर सामने लाने लगे। उनके सवालों के बाद संबंधित संस्थानों ने जांच शुरू की और अब मामला NSFC की कार्रवाई तक पहुंच गया है। PhD ड्रॉपआउट ने क्या पकड़ा? 1. आंकड़ों में अजीब पैटर्न
एक पेपर में एक कॉलम के लगभग सभी आंकड़ों का आखिरी अंक 5 था। दूसरे कॉलम में भी आंकड़े एक तय पैटर्न में थे। एक कॉलम के आंकड़े दूसरे से लगभग हर जगह 0.3 के अंतर पर थे। गेंग ने इसे डेटा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली बात बताया। 2. 196 चूहों के वजन में सटीकता
एक रिसर्च में 196 लैब चूहों का वजन दो दशमलव तक दर्ज किया गया था। गेंग ने सवाल उठाया कि चलते-फिरते चूहों का वजन इतनी सटीकता से कैसे दर्ज किया गया। इससे डेटा के साथ छेड़छाड़ की आशंका पैदा हुई। 3. एक ही तस्वीर, अलग-अलग प्रयोग
कुछ पेपर में एक जैसी तस्वीरों को अलग-अलग प्रयोगों के नतीजे के तौर पर इस्तेमाल किए जाने पर सवाल उठे। कुछ डेटा सेट भी असामान्य रूप से एक-दूसरे से मिलते थे। नेचर ने भी बताया था कि गेंग ने कई पेपर के आंकड़ों में असामान्यताएं पकड़ी थीं। चार बड़े वैज्ञानिक भी कार्रवाई की जद में गेंग ने अप्रैल में चीन के चार प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से जुड़े वैज्ञानिकों के रिसर्च पर सवाल उठाए थे। इनमें टोंगजी यूनिवर्सिटी के वांग पिंग, नानकाई यूनिवर्सिटी के चेन चुआन, शंघाई यूनिवर्सिटी के सु जियाचन और सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के कुआंग डोंगमिंग शामिल हैं। इन चारों को चीन का प्रतिष्ठित नेशनल साइंस फंड फॉर डिस्टिंग्विश्ड यंग स्कॉलर्स मिल चुका था। यह चीन में युवा वैज्ञानिकों को दिया जाने वाला प्रमुख सम्मान है। इनमें से तीन अपने संस्थानों में डीन या एसोसिएट डीन जैसे प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं। इन वैज्ञानिकों के खिलाफ उनके विश्वविद्यालयों ने भी कार्रवाई की। कुछ को प्रशासनिक पदों से हटाया गया। इसके बाद NSFC ने भी इन मामलों में कार्रवाई की। संस्था ने संबंधित रिसर्च फंडिंग और सम्मान वापस ले लिए। उन्हें पहले मिली 1 करोड़ युआन से ज्यादा यानी करीब 15 लाख डॉलर की रिसर्च ग्रांट लौटाने का आदेश दिया गया। साथ ही तीन से सात साल तक NSFC की फंडिंग के लिए दोबारा आवेदन करने पर रोक लगा दी गई। अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स के पेपर भी जांच के घेरे में गेंग के सवालों में नेचर, नेचर कैंसर और सेल बायोलॉजी जैसे प्रतिष्ठित जर्नल्स में प्रकाशित रिसर्च पेपर भी शामिल थे। मई में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने रिपोर्ट किया था कि चीनी सोशल मीडिया पर इन जर्नल्स में प्रकाशित कुछ रिसर्च पेपर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके बाद स्प्रिंगर नेचर ने कहा था कि उसे पांच पेपर को लेकर चिंताएं मिली हैं और उनकी जांच की जा रही है। जुलाई में नेचर और नेचर कैंसर ने चीन के वैज्ञानिकों के दो रिसर्च पेपर वापस ले लिए।

Tamil Nadu CM Vijay announces plans for new Motor Sports City

Tamil Nadu CM Vijay announces plans for new Motor Sports City
Tamil Nadu CM Vijay Motor Sports City

Tamil Nadu Chief Minister C. Joseph Vijay has revealed plans to develop a dedicated motorsport city in Chennai. This will include a new race track, capable of hosting F1, F2, F3, F4 and other international races.

“An Olympic city will be set up in Chennai. A Motor Sports city will also be set up in Chennai to host Formula 1 races. The talents of youth in motor sports will be identified, and training and racing opportunities will be provided to create national and international level champions,” Vijay said during the state Assembly.

He added, “Establishing world-class motor vehicle car racing arenas will provide opportunities for tourism, special vehicle manufacturing industries, employment, and economic development.”

  1. New Chennai race track aims to host F1, F2 and more
  2. Venue will also include training facilities

Chennai Motor Sports City plans revealed

F4 India

Tamil Nadu is at the very heart of the motorsport scene in India, with tracks like the Madras International Circuit and Kari Motor Speedway hosting majority of our national championship races. There’s also the Madras International Karting arena, which is the first karting track in the country to meet global CIK (Commission Internationale de Karting) standards. 

Vijay highlighted the business case behind setting up the new motorsport city in the state. Tamil Nadu is currently a leading state for the production of various two-wheelers and four-wheelers, as well as racing vehicles. He added that setting up “world class” racing venues will provide opportunities to boost tourism, specialised vehicle manufacturing industries and well as employment and the local economy in general.

While the precise location of this new motorsport city hasn’t been revealed, Vijay did share that the goal is for the venue to be capable of hosting international-level racing like F4, F3, F2 and even F1. 

Driver development will be another key focus area. Vijay stated that the venue will also include training facilities to identify and nurture local racing talent in a bid to give them opportunities on the national and international stage. 

India eyes F1 return

F1 Indian GP

This announcement follows renewed interest from the Indian government to bring F1 back to India.

The Buddh International Circuit last hosted The F1 Indian GP from 2011 to 2013. But the race was then dropped, mainly due to the Uttar Pradesh government’s taxation policy at the time, which classified F1 as entertainment rather than sport. 

However, speaking to media earlier this year, sports minister Mansukh Mandaviya shared that the government is working to make India a viable host country for international racing. “For instance, if the entertainment tax cannot be altogether repealed, we will try to ensure that reimbursements are provided to incentivise the project for the organisers. Discussions are ongoing on this issue. It is an interministerial matter, and we are trying our best to make it attractive for Formula 1,” he said at the time.

F1 CEO Stefano Domenicali has stated that there is “big interest” for the championship to return to India, but also stressed that this won’t happen any time soon and will require several conditions to be met. “There are the right things that we need to do – to again find back the right promoters, the right collaboration and the right timing, which will not be in the very short term. But when we talk about five years in Formula 1, it seems to be very far away, but it’s not,” he told F1 India broadcaster FanCode.

Abhinandan Varthaman: पाकिस्तानी फाइटर जेट गिराने वाले एयरफोर्स के पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने IAF छोड़ी, अब गोवा के इस एयरलाइन से जुड़े

Abhinandan Varthaman: पाकिस्तानी जेट गिराने वाले इंडियन एयर फोर्स (IAF) के फाइटर पायलट और पूर्व ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने भारतीय वायुसेना से समय से पहले ही रिटायरमेंट ले लिया है। अब वह गोवा के एक प्राइवेट एयरलाइन में कमर्शियल पायलट के तौर पर अपना नया एविएशन करियर शुरू कर रहे हैं। वर्धमान को फरवरी 2019 में पाकिस्तान एयरफोर्स के फाइटर जेट के साथ हवाई लड़ाई में अपना विमान गिराए जाने के बाद पाकिस्तान में तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था।

करीब दो दशक इंडियन एयरफोर्स में सेवा देने के बाद यह अभिनंदन के करियर की नई पारी है। अभिनंदन 27 फरवरी 2019 को पाकिस्तानी फाइटर जेट F-16 गिराने के बाद भारत समेत दुनियाभर में सुर्खियों में आए थे। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अभिनंदन अब पायलट के तौर पर रीजनल एयरलाइन FLY91 से जुड़ गए हैं।

कॉमर्शियल यात्री विमान के पायलट होंगे

सूत्रों ने बताया कि यहां वे कॉमर्शियल यात्री विमान के पायलट होंगे। सूत्रों ने बताया कि ‘वीर चक्र’ से सम्मानित वर्तमान अगस्त में गोवा की एयरलाइन FLY91 में पायलट के तौर पर शामिल हुए। 2019 में पाकिस्तान के साथ हवाई संघर्ष के बाद वर्धमान चर्चा में आए थे। उस हवाई लड़ाई के दौरान उन्होंने पाकिस्तान के एक फाइटर जेट को मार गिराया था। इसके बाद उन्हें तीन दिनों तक पाकिस्तान में हिरासत में रखा गया था।

‘वीर चक्र’ से सम्मानित

उन्हें 2021 में ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था, जो युद्ध के समय वीरता के लिए भारत का तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है। इस सम्मान के लिए जारी प्रशस्ति पत्र में हवाई संघर्ष के दौरान उनके “कर्तव्य के प्रति असाधारण समर्पण” को सराहा गया था। FLY91 के प्रवक्ता ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

उन्होंने पीटीआई से कहा कि किसी कर्मचारी की निजी जानकारी एक निजी मामला है। एयरलाइन में वर्तमान की भूमिका के बारे में और जानकारी तुरंत उपलब्ध नहीं हो सकी। गोवा स्थित FLY91 ने मार्च 2024 में अपना कामकाज शुरू किया था। इसके बेड़े में अभी छह ATR 72-600 विमान हैं। यह दो बेस गोवा और हैदराबाद से अपनी सेवाएं देती है।

अभिनंदन वर्धमान के बारे में बड़ी बातें

  • फरवरी 2019 में पुलवामा में आत्मघाती बम धमाके में सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के 40 जवानों की मौत के बाद भारतीय सेना ने पाकिस्तानी इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ एयर स्ट्राइक की थी। नई दिल्ली ने कहा कि स्ट्राइक में बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) ग्रुप के ट्रेनिंग कैंप को निशाना बनाया गया था।
  • अगले दिन पाकिस्तान एयरफोर्स की जवाबी कार्रवाई से दोनों परमाणु बम से लैस दो पड़ोसियों के बीच युद्ध का डर पैदा हो गया था। इस टकराव का सबसे चर्चित चेहरा विंग कमांडर वर्धमान थे। उनके MiG-21 फाइटर जेट को गिराए जाने के बाद पाकिस्तान द्वारा उन्हें पकड़ लिए जाने से दशकों में दोनों पड़ोसियों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संकट पैदा हो गया था।
  • 27 फरवरी 2019 को अपना जेट हिट होने से पहले वर्धमान  ने पाकिस्तान के F-16 फ़ाइटर जेट को मार गिराया था। उस समय विंग कमांडर रहे वर्धमान को तीन दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। 1 मार्च की रात को पाकिस्तान ने उन्हें रिहा कर दिया था।
  • हवाई लड़ाई के दौरान अपने मिग-21 बाइसन से बाहर निकलते समय वर्धमान को चोटें आई थीं। बाद में उसी साल डॉगफाइट के दौरान “असाधारण कर्तव्य-निष्ठा” दिखाने के लिए उन्हें भारत के युद्ध-समय के तीसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि वर्धमान ने समय से पहले रिटायरमेंट क्यों लिया।

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Lumino Industries Share Price: 34% के दमदार प्रीमियम पर लिस्टिंग; अब क्या करें- बाय, सेल या होल्ड?

ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के IPO निवेशकों को लिस्टिंग डे पर जबरदस्त गेन हुआ है। 3 सितंबर को शेयर BSE पर शेयर करीब 33 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 109 रुपये और NSE पर 34 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 110 रुपये पर लिस्ट हुआ। IPO के लिए फाइनल इश्यू प्राइस 82 रुपये था। ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज लिमिटेड एक इंटीग्रेटेड इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी है। यह अपने प्रोडक्ट भारत की बड़ी EPC कंपनियों को सप्लाई करती है और इंटरनेशनल ग्राहकों को भी सेवाएं देती है।

इसका फोकस पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंडस्ट्री के लिए कंडक्टर, पावर केबल, इलेक्ट्रिकल वायर और खास तरह के प्रोडक्ट बनाने और उनकी सप्लाई करने पर है। कंपनी ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों में इस्तेमाल होने वाले हाई-टेंपरेचर लो-सैग (HTLS) कंडक्टर भी बनाती है।इसके मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस में एल्युमीनियम कंडक्टर, पावर केबल और इलेक्ट्रिकल वायर शामिल हैं। वहीं EPC बिजनेस में पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन, रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन, HTLS री-कंडक्टरिंग, EHV सबस्टेशन, सोलर पावर प्रोजेक्ट और वॉटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट शामिल हैं।

कंपनी का ₹700 करोड़ का IPO 124.02 गुना सब्सक्रिप्शन के साथ बंद हुआ था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 232.79 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 185.21 गुना, रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 40.27 गुना और एंप्लॉयीज के लिए रिजर्व हिस्सा 12.37 गुना भरा था।

ब्रोकरेज की राय

स्वास्तिका इन्वेस्टस्मार्ट में वेल्थ हेड, शिवानी न्याति का कहना है, “हमारा नजरिया पॉजिटिव है। इसकी वजह हैं- EPC और केबल सेक्टर की दूसरी कंपनियों के मुकाबले आकर्षक वैल्यूएशन, 11.71% EBITDA मार्जिन के साथ अच्छा मुनाफा, और मुख्य प्रतिस्पर्धियों में सबसे ज्यादा RoNW। IPO से मिले पैसे से कर्ज कम करने की योजना से भविष्य में फाइनेंस कॉस्ट भी कम हो सकती है। कंपनी की सरकारी और PSU क्लाइंट्स पर निर्भरता बेहद ज्यादा है। रेवेन्यू का 53%–86% हिस्सा इसी से आता है। यह एक बड़ा रिस्क है, क्योंकि टेंडर बेस्ड कैश फ्लो में उतार-चढ़ाव हो सकता है।”

आगे कहा कि IPO में शेयर पाने वाले निवेशक थोड़ा मुनाफा वसूल सकते हैं और बाकी शेयर ₹98–100 के ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस के साथ होल्ड कर सकते हैं। नए निवेशकों को लिस्टिंग के बाद हुई जबरदस्त बढ़त के बाद स्टॉक के पीछे नहीं भागना चाहिए और थोड़े कंसोलिडेशन का इंतजार करना चाहिए। अगर स्टॉक मजबूत वॉल्यूम के साथ ₹110–112 के ऊपर बना रहता है, तो यह ₹120–125 की ओर बढ़ सकता है। मीडियम-टर्म निवेशक समझदारी से पोजीशन साइजिंग करते हुए इसे होल्ड कर सकते हैं।

Kwick Forensic Solutions IPO Listing: निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा, शेयर 66% के बंपर प्रीमियम पर लिस्ट

कंपनी की वित्तीय सेहत

ल्यूमिनो इंडस्ट्रीज का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 7 प्रतिशत बढ़कर ₹2,089.31 करोड़ हो गया। शुद्ध मुनाफा 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹160 करोड़ रहा। एक साल पहले रेवेन्यू ₹1,946.68 करोड़ और शुद्ध मुनाफा ₹124.59 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹384.16 करोड़ की उधारी थी।कंपनी का मार्केट कैप 3400 करोड़ रुपये के करीब है। शेयर की फेस वैल्यू 5 रुपये है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 71.97 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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सब्जी बेचने से लेकर भारत के लिए 4 गोल्ड मेडल जीतने तक, झारखंड के एथलीट अमरदीप कुमार की कहानी वायरल, हेमंत सोरेन ने किया रिएक्ट

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें झारखंड के रांची में अरगोरा चौक पर एक आदमी सब्ज़ियां बेचता हुआ दिख रहा है। जल्द ही लोगों को पता चला कि यह कोई और नहीं, बल्कि राज्य के थ्रोबॉल खिलाड़ी और गोल्ड मेडलिस्ट अमरदीप कुमार हैं। इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत के लिए चार गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, 29 साल के यह एथलीट अब गुज़ारा करने और अपने परिवार की मदद के लिए सब्ज़ियां बेच रहे हैं और कैब चला रहे हैं।

ऑनलाइन लोगों का ध्यान खींचने वाले इस वीडियो क्लिप में अमरदीप अपनी दुकान पर बैठे हुए और आस-पास कई तरह की सब्ज़ियां रखे हुए दिखाई दिए। उन्हें ग्राहक को सब्ज़ियां देने से पहले तराज़ू पर उन्हें तौलते हुए देखा गया। चर्चा की खास बात यह थी कि उन्होंने अपनी कामचलाऊ दुकान की दीवार पर अपने गोल्ड मेडल लटका रखे थे।

झारखंड के रहने वाले अमरदीप ने कई इंटरनेशनल थ्रो-बॉल इवेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और चार गोल्ड मेडल जीते हैं। हालांकि, इतनी उपलब्धियों के बावजूद, उन्हें सरकारी नौकरी पाने या राज्य से कोई आर्थिक मदद मिलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

जब से सोशल मीडिया पर यह क्लिप सामने आया है, लोगों ने इस स्थिति पर निराशा जताई है। कुछ लोगों ने इसे “दिल तोड़ने वाला” बताया है, तो कुछ ने सरकार से अपील की है कि वे हर संभव तरीके से उनकी मदद करें। एक यूजर ने पूछा- “दीवार पर गोल्ड मेडल और सड़क किनारे सब्ज़ियां—यह सिर्फ़ दिल तोड़ने वाली तस्वीर नहीं है, यह सिस्टम के लिए एक असहज करने वाला सवाल है। जिस खिलाड़ी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया और गोल्ड मेडल जीता, उसे अपनी बुनियादी ज़िंदगी गुज़ारने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए। जब ​​खिलाड़ी जीतते हैं तो हम जश्न मनाते हैं, लेकिन कैमरे हटने के बाद उनका क्या होता है?”

एक और व्यक्ति ने कहा, “इसीलिए हमें ओलंपिक में ज़्यादा मेडल नहीं मिलते। दुखद स्थिति है।” एक ने कहा कि दुख की बात यह नहीं है कि वह सब्ज़ियां बेच रहे हैं। ईमानदारी से किए गए काम में कुछ भी गलत नहीं है… चिंता की बात यह है कि उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और गोल्ड मेडल जीते, लेकिन शायद खेल में या अपनी उपलब्धियों के आधार पर करियर बनाने के लिए उनके पास कोई भविष्य का रास्ता नहीं था। समस्या संस्थागत समर्थन की कमी है, न कि नौकरी की,”।

एक अन्य ने कहा कि “सरकार को उनके जैसे लोगों को, जिन्होंने देश के लिए कुछ किया है, कम से कम मासिक सहायता राशि देनी चाहिए, न कि किसी विधायक को निजी कारणों से विधायक बनने के लिए जीवन भर पेंशन देनी चाहिए,।

कौन हैं अमरदीप कुमार?

अमरदीप ने 2015 में मलेशिया में हुई एशियन जूनियर थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2017 में काठमांडू में हुई इंडो-नेपाल थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में उन्होंने एक और गोल्ड मेडल जीता। 2019 में, वह उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने बेंगलुरु में साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। उनका चौथा इंटरनेशनल गोल्ड मेडल 2026 में रांची में आयोजित साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप के दूसरे एडिशन में मिला।

आज, अमरदीप गुज़ारा करने के लिए सब्ज़ियाँ बेचते हैं और कैब भी चलाते हैं, क्योंकि उनका परिवार कमाई के कई ज़रिया पर निर्भर है। मुश्किलों के बावजूद, वह थ्रो-बॉल खेलना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि अक्टूबर 2026 के आखिर में उनके श्रीलंका का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद है।

हालांकि अमरदीप ने 2016 में किसी इनाम या प्रोत्साहन के लिए झारखंड सरकार से संपर्क किया था, लेकिन कैश इनाम और सरकारी नौकरी के लिए उनकी अर्ज़ियाँ अभी भी पेंडिंग हैं। छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों के उनके कई साथियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है।

CM हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान

अमरदीप की कहानी ऑनलाइन वायरल होने के बाद, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने X पर इस मामले के बारे में पोस्ट किया और खेल विभाग को निर्देश दिया कि वे तुरंत इस मामले का संज्ञान लें और कार्रवाई शुरू करें।