नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

नेपाल की आपदा ने नए सिरे से बढ़ाई भारत की चिंता

threat after nepal disaster in india

प्रभाकर मणि तिवारी

भारत में खासकर पूर्वी हिमालय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बनने वाली पनबिजली परियोजनाएं, इनके तहत बनने वाले बांध और सुरंगों से पैदा होने वाले खतरे अक्सर सुर्खियां बटोरते रहे हैं। लेकिन अब नेपाल के भयावह हादसे में बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान ने विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। उनको आशंका है कि जम्मू-कश्मीर के अलावा उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में कभी भी नेपाल जैसे हादसे का खतरा मंडरा रहा है। ALSO READ: जलवायु न्याय की मांग कर रहा है आपदा प्रभावित नेपाल

 

हाल के वर्षों में इन राज्यों में भूस्खलन और सुरंग धंसने की अलग-अलग घटनाओं में कई लोग मारे जा चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद पहाड़ों की कटाई करके ऐसी परियोजनाएं बनाने का काम जारी है। इनमें खासकर सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है।

 

अरुणाचल का संकट

चीन सरकार अरुणाचल प्रदेश से सटे इलाके में एक विशालकाय बांध बना रही है। बीते साल इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ था। करीब डेढ़ सौ अरब अमेरिकी डॉलर की लागत वाली इस परियोजना के वर्ष 2033 तक पूरा होने का लक्ष्य है। विशेषज्ञ इसे वाटर बम बताते हैं। लेकिन भूवैज्ञानिकों की असली चिंता इस परियोजना का आकार नहीं बल्कि इसकी लोकेशन है। यह मेडॉग परियोजना उस फॉल्ट जोन के पास स्थित है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें मिलती हैं। इसकी वजह से यह इलाका भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील है। बीते साल भी तिब्बत के शिगात्से इलाके में रिक्टर स्केल पर 7.1 की तीव्रता वाले एक भूकंप के कारण वहां 120  से ज्यादा लोगों की मौत के अलावा कुछ बांधों को नुकसान पहुंचने की खबरें आई थी।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाले बांध को भूकंपरोधी तकनीक से बनाने के बावजूद किसी बड़े भूकंप की स्थिति में जमीन धंसने और चट्टानों के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे बांध पर तो खास असर नहीं होगा। लेकिन नदी के निचले हिस्से में स्थित भारतीय इलाकों को नेपाल जैसी आपदा झेलनी पड़ सकती है। इससे नदी का बहाव बदल सकता है। इससे पहले भी ऐसी कुछ घटनाएं हो चुकी हैं। वर्ष 2000 में तिब्बत में एक बांध टूटने से पूर्वोत्तर के कुछ हिस्सों में बाढ़ आ गई थी। इससे पहले वर्ष 2017 में अरुणाचल प्रदेश की सियांग नदी का पानी अचानक काला पड़ गया था। तब इसके लिए तिब्बत में खनन गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया गया था। यही सियांग नदी असम में प्रवेश करने के बाद ब्रह्मपुत्र कहलाती है।

 

विशेषज्ञों ने चेताया है कि चीनी परियोजना के तहत बनने वाला विशालकाय बांध पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर तबाही ला सकता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

भारत की जवाबी रणनीति

इसके असर की काट के लिए भारत सरकार ने भी राज्य के अपर सियांग में 11 हजार मेगावाट क्षमता वाली एक बहुउद्देशीय परियोजना बनाने का फैसला किया है। लेकिन स्थानीय लोग और संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के सामने विस्थापन का खतरा पैदा हो जाएगा। अरुणाचल प्रदेश में आधा दर्जन पनबिजली परियोजनाएं चल रही हैं जबकि करीब तीन दर्जन छोटी-बड़ी परियोजनाओं का काम चल रहा है। इनमें दिबांग, अपर सियांग, लोअर सुबनसिरी और इटालीन जैसी बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं। राज्य सरकार ने 2025-35 को 'पनबिजली का दशक' घोषित किया है।

 

भूवैज्ञानिकों का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में हिमालय की संरचना भी उस नेपाल-तिब्बत सीमा जैसी है जो हाल में प्राकृतिक हादसे का शिकार हुआ है। खासकर इटालीन परियोजना तो भूकंप के प्रति बेहद संवेदनशील इलाके में है। वहां ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा भी बना हुआ है।

 

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने देश भर में ऐसे 195 ग्लेशियल झीलों की पहचान की है जिनके फटने से बाढ़ आने का खतरा है। किसी ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील को रोकने वाली बर्फ, चट्टान या मलबे जैसी प्राकृतिक दीवार के अचानक टूटने के बाद आने वाली बाढ़ को 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' या 'ग्लोफ' कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इनमें से 32 झीलें अकेले अरुणाचल में ही हैं।

 

क्या है विशेषज्ञों का आकलन?

पूर्वोत्तर के मशहूर भूवैज्ञानिक डा. प्रमोद चंद्र सरमा डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हिमालय प्राकृतिक रूप से एक नाजुक पर्वतीय प्रणाली है।इसका पूर्वी क्षेत्र अभी युवा है। इस इलाके में हमेशा भूकंप, भूस्खलन, हिमस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा बना रहता है। जलवायु परिवर्तन इस खतरे को और बढ़ा रहा है। इसके साथ ही पनबिजली परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर बनने वाले बांधों ने इस जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है।”

 

पर्यावरणविद डीके अपांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “राज्य में प्रस्तावित तमाम बड़ी परियोजनाएं भूकंप के लिहाज बेहद संवेदनशील इलाकों में स्थित हैं। चीनी बांध परियोजना ने प्राकृतिक विपदा के खतरे को काफी बढ़ा दिया है।”

 

सियांग बहुउद्देशीय परियोजना का लंबे समय से विरोध कर रहे सियांग इंडीजीनस फार्म्स फोरम (एसआईएफएफ)  के प्रमुख जेजांग डीडब्ल्यू से कहते हैं, “अपर सियांग इलाका चीनी सीमा से सटा है। इसका निर्माण पूरा होने पर यहां भी नेपाल जैसा हादसा होने का खतरा बढ़ जाएगा।” ALSO READ: हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

 

क्या हैं बचाव के उपाय?

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को अर्ली-वार्निंग सिस्टम पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि ऐसे हादसे के बारे में समय रहते जानकारी मिल सके। इसके साथ ही इलाके में मौसम और हिमालय की ऊंचाई पर बने ग्लेशियरों और झीलों की स्थिति पर चौबीसों घंटे निगरानी का तंत्र विकसित करना होगा।

 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर डीडब्ल्यू को बताते हैं, “सरकार अर्ली वार्निंग सिस्टम पर काम कर रही है। पहले चरण में 46 बेहद संवेदनशील बांधों में से 40 में यह प्रणाली लागू की जा चुकी है। चरणबद्ध तरीके से दूसरी परियोजनाओं में भी इसे लागू किया जाएगा।

 

संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 में कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से बीते करीब तीन दशकों के दौरान कार्बन का सबसे ज्यादा उत्सर्जन करने वाले दो देशों, भारत और चीन के बीच स्थित नेपाल के ग्लेशियरों में जमा बर्फ की मात्रा एक-तिहाई कम हो गई है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि इसे ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है कि भौगोलिक रूप से अस्थिर हिमालयी क्षेत्र में सियांग और उसके जैसे बड़े बांधों का निर्माण उचित है या नहीं?

नेपाल बाढ़- 5300 से ज्यादा अब भी लापता:1259 की मौत, 12 हजार को बचाया; भारत ने मदद की एक और खेप भेजी

नेपाल में भोटेकोशी बाढ़ की तबाही के 10 दिन बाद भी 5,300 से ज्यादा लोग लापता हैं। अब तक 1,259 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि राहत और बचाव दलों ने 12,038 लोगों को सुरक्षित निकाला है। संकट के बीच भारत ने भी नेपाल के लिए राहत सामग्री की एक और खेप भेजी है। गुरुवार रात दो C-130J विमानों से 21.5 टन मानवीय सहायता काठमांडू पहुंची। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों में 21,402 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। ये टीमें खोज, बचाव, राहत वितरण और बरामद शवों के प्रबंधन में लगी हैं। नेपाल आपदा से जुड़ी 5 तस्वीरें… चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव बरामद, 95 की पहचान नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में शवों की बरामदगी का अभियान जारी है। चितवन जिले में सबसे ज्यादा शव मिले हैं, जबकि अब तक बरामद शवों में से 95 की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन और बचाव दल लापता लोगों की तलाश के साथ शवों की पहचान और उनके परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटे हैं। नेपाल बाढ़ से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6 performance comparison

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6 performance comparison
Toyota Ebella vs Mahindra BE 6

Earlier in 2026, Toyota launched the Urban Cruiser Ebella, its first EV for India. The Ebella competes in the popular electric midsize SUV segment that includes models such as the Mahindra BE 6. First introduced in 2024, the BE 6 was updated in 2026, with ‘Sporteq’ added to its name, along with changes to the feature list and a variant rejig. Here, we’ve tested and compared the real-world performance of the Urban Cruiser Ebella and the BE 6 to determine which one is quicker.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Specifications 

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Specifications 

Specifications

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

Battery capacity (kWh)

61

79

Electric motor setup

Single, front-mounted

Single motor, rear-mounted

Power (hp)

174

286

Torque (Nm)

193

380

Kerb weight (kg)

1,815

2,115

Power-to-weight (hp/tonne)

95.86

135.22

Torque-to-weight (Nm/tonne)

106.33

179.67

Gearbox

Single-speed automatic

Single-speed automatic

ARAI range (km)

543

708

The Urban Cruiser Ebella is powered by a 61kWh battery pack paired with a front-mounted motor. Meanwhile, the larger BE 6’s 79kWh battery pack is mated to a rear-mounted motor. The BE 6 comes across as the more powerful one on paper, with higher power-to-weight and torque-to-weight ratios, but the Ebella is 300kg lighter.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Acceleration  

More powerful BE 6 takes the lead here by a fair margin

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Acceleration (in seconds)

 

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

0-20kph

1.75

1.37

0-40kph

3.32

2.69

0-60kph

4.93

4.00

0-80kph

6.95

5.38

0-100kph

9.65

7.14

0-120kph

13.18

9.48

The BE 6’s more powerful motor helps it get off the line quickly. The Ebella trails behind and fails to catch up while the BE 6 extends its lead to 2.51 seconds at 100kph. Interestingly, the BE 6’s 0-120kph time is even quicker than that of the Ebella’s 0-100kph time. The Mahindra EV’s higher weight doesn’t stop it from outperforming the Toyota. Though both models deliver power in a progressive manner, the Ebella’s much lower torque output is a reason why it is much slower than the BE 6.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Rolling acceleration 

Ebella is not too far behind in rolling acceleration

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Rolling acceleration (in seconds)

 

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

20-80kph (in kickdown)

5.27

4.03

40-100kph (in kickdown)

6.39

4.46

The BE 6 outperforms the Ebella in rolling acceleration as well. It completed the 20-80kph and 40-100kph tests faster by 1.24 and 1.93 seconds, respectively. However, the gap between the two isn’t as much as it was in acceleration tests from a standstill.

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Prices 

Ebella more affordable by up to Rs 3.35 lakh

Toyota Ebella vs Mahindra BE 6: Prices 

 

Toyota Ebella

Mahindra BE 6

Price range (in Rs lakh)

23.60

24.45-26.95* (79kWh)

*BE 6 Sporteq price

As far as price is concerned, the Ebella is available in a single fully loaded trim for Rs 23.6 lakh. On the other hand, the BE6 offers its largest 79kWh battery pack on a few trims. Depending on the trim chosen, the BE 6 is priced up to Rs 3.35 lakh higher than the Ebella.

Autocar India’s testing standards

Before conducting our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendations and ensure that the car is charged to 100 percent. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

All prices are ex-showroom, India.

Bank of India Recruitment 2026: बैंक ऑफ इंडिया ने 205 ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए जारी किया नोटिफिकेशन, जानें कब से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया

Bank of India Recruitment 2026: सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक ने 205 ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह बैंक ऑफ इंडिया (BOI) है, जो स्केल 4 तक अलग-अलग स्ट्रीम में ऑफिसर पोस्ट के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट bankofindia.bank.in पर अपने एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं।

आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत 10 सितंबर से होगी और 25 सितंबर, 2026 को खत्म होगा। उम्र, शैक्षिक योग्यता और काम का अनुभव तय करने की कट-ऑफ डेट 1 अगस्त, 2026 है।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 चयन प्रक्रिया

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 के तहत उम्मीदवार का चयन ऑनलाइन परीक्षा और/या पर्सनल इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा, जो आवेदकों और योग्य उम्मीदवारों की संख्या पर निर्भर करेगा।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया की स्क्रूटनी

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को अपनी योग्यता का समर्थन करने वाले डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे, जिसमें संबंधित पेशेवर अनुभव का प्रमाणपत्र, जरूरी सर्टिफिकेशन और शैक्षिक योग्यता शामिल हैं। पंजीकरण के समय अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर आवेदन को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:

संबंधित पेशेवर अनुभव

जरूरी सर्टिफिकेट

शैक्षिक योग्यता

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 नोटिफिकेशन में कहा गया है कि आवेदकों को सिर्फ रजिस्ट्रेशन के समय योग्यता मानक के समर्थन में अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर शॉर्टलिस्ट या रिजेक्ट किया जाएगा। बाद में डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए कोई और पूछताछ या अपील पर विचार नहीं किया जाएगा।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 ऑनलाइन परीक्षा

ऑनलाइन परीक्षा 100 मिनट की होगी। इसमें 25 अंकों की अंग्रेजी भाषा परीक्षा और 100 अंकों की पद से संबंधित पेशवेर ज्ञान परीक्षा शामिल होगी। इंग्लिश लैंग्वेज के टेस्ट को छोड़कर, सभी टेस्ट इंग्लिश और हिंदी में बाइलिंगुअल होंगे। इंग्लिश लैंग्वेज का टेस्ट क्वालिफाइंग होगा, और मेरिट लिस्ट बनाते समय इस हिस्से में मिले अंकों पर विचार नहीं किया जाएगा।

जनरल और EWS उम्मीदवारों के लिए इंग्लिश लैंग्वेज के टेस्ट और प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में कम से कम 35% अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। SC, ST, OBC और PwBD कैटेगरी के कैंडिडेट, जो अपनी-अपनी कैटेगरी के लिए रिजर्व वैकेंसी के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उन्हें क्वालिफ़ाइंग मार्क्स में 5 परसेंट पॉइंट की छूट मिलेगी। कैंडिडेट को हर टेस्ट में न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स लाने होंगे।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: गलत जवाबों के लिए पेनल्टी

ऑब्जेक्टिव टेस्ट में हर सवाल का गलत जवाब देने पर एक-चौथाई अंक काट लिया जाएगा। बिना जवाब वाले सवालों के लिए कोई मार्क्स नहीं काटे जाएंगे।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: इंटरव्यू

ऑनलाइन परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर एक मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिर्फ प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में मिले मार्क्स ही माने जाएंगे। मेरिट लिस्ट अपनी-अपनी कैटेगरी – SC, ST, OBC, EWS, और जनरल के लिए घटते क्रम में तैयार की जाएगी। ऑनलाइन टेस्ट में मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स और मेरिट लिस्ट में अच्छी रैंक लाने वाले उम्मीदवारों को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

SBI PO 2026 Mains Admit Card: स्टेट बैंक ने जारी किया पीओ मेन्स परीक्षा का एडमिट कार्ड, 12 सितंबर को होगी परीक्षा

Market cues : बाजार में गिरावट का रुख बने रहने की संभावना, उछाल पर बिकवाली की रणनीति करेगी काम

Trade setup for today : 3 सितंबर को तेल की ऊंची कीमतों के चलते बेंचमार्क निफ्टी ने शुरुआती बढ़त गंवा दी और 0.17 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। बाजार में गिरावट का रुख बने रहने की संभावना है,क्योंकि इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज से नीचे बना हुआ है और शॉर्ट और मीडियम टर्म एवरेज नीचे की ओर रुख किए हुए हैं। मोमेंटम इंडिकेटर भी नेगेटिव क्रॉसओवर के साथ नीचे की ओर जा रहे हैं।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी अगर लगातार 24,000 के नीचे बना रहता है तो यह 23,800–23,750 के लेवल तक गिर सकता है और इसके बाद 23,600 पर अहम सपोर्ट मिल सकता है। ऊपर की तरफ, 24,000–24,200 का दायरा तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। एक्सपर्ट्स अभी भी उछाल पर बिकवाली की रणनीति अपनाने के पक्ष में नजर आ रहे हैं।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (23873) के लिए अहम लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 23,866, 23,830 और 23,772

पिवट प्वांइट पर आधारित रेजिस्टेंस : 23,982, 24,018 और 24,076

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन : निफ्टी 50 ने डेली चार्ट पर एक बेयरिश कैंडल बनाई है,जो कमजोरी का संकेत है। इंडेक्स सभी अहम मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है और शॉर्ट और मीडियम टर्म मूविंग एवरेज नीचे की ओर जा रहे हैं। इसके अलावा,यह 23,070 से 24,770 तक की रैली के 50 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल के नीचे बंद हुआ।

RSI गिरकर 37.11 पर आ गया और इसमें नेगेटिव क्रॉसओवर देखा गया,जबकि MACD बेयरिश क्रॉसओवर के साथ ज़ीरो लाइन के नीचे बना रहा। MACD हिस्टोग्राम का रेड बार भी लगातार चौथे सेशन में बढ़ा। ये सभी इंडिकेटर लगातार बनी कमजोरी की ओर इशारा करते हैं और बताते हैं कि बेयरिश ट्रेंड के बने रहने की संभावना है।

बैंक निफ्टी (57,381) के लिए अहम लेवल

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस : 57,647, 57,735 और 57,878

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट : 57,362, 57,274 और 57,132

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस : 57,684, 58,137

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट : 57,135, 56,870

स्पेशल फॉर्मेशन : गैप-अप ओपनिंग के बाद,बैंक निफ्टी ने बेंचमार्क निफ्टी से बेहतर प्रदर्शन किया और 0.36 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। हालांकि ऊंचे स्तरों से इसने अपनी कुछ बढ़त गंवा दी। इंडेक्स ने एक रेड कैंडल बनाई जिसमें ऊपर की तरफ एक स्पष्ट विक (wick) थी,जो ऊंचे स्तरों पर बिकवाली के दबाव का संकेत देती है। इसने क्लोजिंग के आधार पर 50-दिन के EMA को फिर से हासिल किया और उसे बनाए रखा,लेकिन 20-दिन के EMA से नीचे आ गया।

पिछले 21 ट्रेडिंग सेशन से बैंक निफ्टी एक सीमित दायरे में ही घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि कोई साफ दिशा वाला ट्रेंड नहीं है। मुख्य मोमेंटम इंडिकेटर और ऑसिलेटर भी साइडवेज मार्केट स्ट्रक्चर की ओर इशारा कर रहे हैं। इन सभी बातों से संकेत मिलता है कि इंडेक्स के निकट भविष्य में भी एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है और इसमें किसी साफ दिशा वाले मोमेंटम की कमी है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडेक्स,इंडिया VIX पिछले दिन की कुछ बढ़त गंवाकर 2.2 प्रतिशत गिरकर 11.34 पर बंद हुआ। यह अभी भी काफी निचले स्तर पर बना हुआ है,जो कम उतार-चढ़ाव और मार्केट के स्थिर सेंटीमेंट का संकेत है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शा ने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 3 सितंबर को गिरकर 0.8 पर आ गया, जबकि पिछले सेशन में यह 0.87 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक : इनॉक्स विंड,केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक : सेल (SAIL)

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

 

बाजार के लिए मिल रहे अच्छे संकेत, ऑटो एंसलरी सेक्टर के इन दो शेयरों में जोरदार तेजी की उम्मीद

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Ather Konarc S 125 vs TVS Orbiter V2: Price and specifications compared

Ather Konarc S 125 vs TVS Orbiter V2: Price and specifications compared
A render showing the Ather Konarc S 125 and TVS Orbiter V2

Ather has launched the Konarc with a brand-new EL platform at prices starting as low as Rs 99,999. This makes the scooter an obvious rival to the TVS Orbiter, which was revealed last year to target the urban scooter market. Since the Ather Konarc’s entry-level variant isn’t due for release until late next year, let’s see how the Konarc S 125, available later this month, compares to the TVS Orbiter V2.

Ather Konarc S 125 vs TVS Orbiter V2: Motor, battery and charging

Orbiter has more battery capacity and range

 

Ather Konarc S 125

TVS Orbiter V2

Peak motor power

4kW

2.9kW

Rated torque

16Nm

NA

Claimed top speed

70kph

69kph

Battery capacity

2.7kWh

3.1kWh

Claimed charge time (0-80 percent)

4h30m

4h10m

IDC range

125km

158km

Starting with the motor, the TVS Orbiter falls short of the Ather in terms of peak power. TVS has not mentioned a peak torque output for the Orbiter. However, the Orbiter bounces back with a higher battery capacity and range, as well as a quicker 0-80 charge time with a faster 650W bundled charger.

That said, both scooters offer optional hardware to speed up charging times. The Ather Konarc comes with a built-in 450W charger as standard, and it can be bundled with an external 450W charger for a faster 900W total charging speed, cutting the time down to 2 hours and 25 minutes. The Orbiter also offers a faster 950W charger as an add-on accessory, but it takes a longer 2 hours and 38 minutes to get to 80 percent from nil.

Ather Konarc S 125 vs TVS Orbiter V2: Dimensions and underpinnings

Orbiter is more accessible

 

Ather Konarc S 125

TVS Orbiter V2 

Wheelbase

1,352mm

NA

Seat height

770mm

760mm

Ground clearance

NA

165mm

Kerb weight

126.5kg

112kg

The Orbiter starts strong with an advantage in two important areas for a practical scooter: seat height and ground clearance. The Konarc is also the heavier scooter, with a 14.5kg higher kerb weight than the Orbiter. TVS hasn’t shared the wheelbase figure for the Orbiter.

Ather Konarc S 125 vs TVS Orbiter V2: Brakes, tyres and suspension

Konarc has the better ride package

 

Ather Konarc S 125

TVS Orbiter V2

Brakes (F, R)

220mm disc, 130mm drum

Drum, drum

Tyres (F, R)

90/90-14, 100/90-12

90/80-14, 90/90-12

Suspension (F, R)

Telescopic, monoshock

Telescopic, twin shock

The hardware package is where the Konarc gains significant ground. It gets a front disc brake compared to the Orbiter’s drum brake, along with wider front and rear tyres. Suspension setups are more evenly matched between the two, although the real-world experience could tip the scales towards one.

Ather Konarc S 125 vs TVS Orbiter V2: Features

TVS remains in (surprising) lockstep

Ather has reserved most of the headlining new features, such as the TFT instrument cluster, auto (boot) pop, smart key, and so on, for the Z line. The Konarc S gets a DeepView LCD instrument cluster and comes with AirWalk, which takes the motor’s assistance to make manually moving the scooter easier. Considering Ather’s tech-savviness, this is unsurprising. Some other tech-powered features include turn-by-turn navigation, AutoHold (hill hold), Vehicle FallSafe, TrueRange, and Find my Scooter, among others. The catch, however, is that all of them require you to pay for Ather StackPro, a one-time Rs 16,000 add-on to the Konarc S 125’s ex-showroom price.

The Orbiter, on the other hand, has a much smaller LCD cluster but matches almost all of Konarc’s features, such as turn-by-turn navigation, hill-hold, smartphone connectivity, theft and tow alerts, crash and fall alerts and motor cut-off on fall. TVS also offers cruise control, which is currently only on the Ather 450 series of scooters. Right now, you get access to all the features mentioned above at no extra cost on the Orbiter, but it remains to be seen if that will change, as the TVS iQube charges an annual subscription of Rs 999 for some advanced features.

Ather Konarc S 125 vs TVS Orbiter V2: Price

Konarc starts higher, and it only gets more expensive

 

Ather Konarc S 125

TVS Orbiter V2

Price (ex-showroom, Bengaluru)

Rs 1.23 lakh

Rs 1.15 lakh

The two variants in comparison here make the Ather about Rs 8,000 more expensive than the Orbiter. If you prefer access to all the smart features offered by Ather StackPro, that will increase the gap even further. Even though the two e-scooters are aimed at bringing in more mainstream users to the brands, both have been designed with different demographics in mind. If you happen to be in the common demographic, though, you should definitely take a test ride before picking one over the other because the on-paper specs don’t tell the whole story.

PAK ग्रूमिंग गैंग ने लंदन में सिख युवती को फंसाया:ब्रेनवॉश किया, नितनेम-गुरुद्वारा जाना छोड़ा, पुलिस को मां-बाप की शिकायत की, फिर घर छोड़ चली गई

इंग्लैंड (UK) में पंजाबी युवती पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग के चंगुल में फंस गई। युवती की मां ने एक पंजाबी चैनल से बातचीत में कहा कि उसकी 19 साल की बेटी है। वह नितनेम करती, गुरुद्वारे जाकर सेवा करती थी लेकिन गैंग ने उसे फंसा लिया। उसने सब कुछ छोड़ दिया। उसका ब्रेनवॉश कर दिया। जब हमने समझाने की कोशिश की तो हमारी शिकायत लंदन पुलिस को कर दी। इसके बाद हमें छोड़कर चली गई। मां ने कहा कि यूनिवर्सिटी में लड़कियों के एक ग्रुप से जोड़ने के बाद एक लड़का उसके टच में आया, उसके बाद ही उसका पूरा व्यवहार बदल गया। उसने इंग्लैंड में रहते सिखों से इस मामले में मदद मांगी है। लड़की को कैसे फंसाया, ग्रूमिंग गैंग का पूरा प्रोसेस क्या है, आगे क्या होता है, ये जानने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़िए… 5 पॉइंट में जानिए, युवती की मां ने ग्रूमिंग को लेकर क्या कहा.. 1. स्कूल में पढ़ी, यूनिवर्सिटी तक सब ठीक था
मां ने कहा- मेरी बेटी का नाम सिमरन है। वह 19 साल की है। बेटी यहीं (लंदन) की जन्मी है, लेकिन फिर भी वह जैसी हमारी भारतीय समुदाय की बच्चियां होती हैं, उस तरह थी। हमारे घर में एक अच्छे माहौल में पली-बढ़ी थी उसने स्कूल खत्म किया और सितंबर 2025 में यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए गई। तब तक सब कुछ ठीक था। 2. यूनिवर्सिटी में लड़कियों का ग्रुप बना, फिर एक लड़का उसके टच में आया
मां ने कहा- यूनिवर्सिटी में जाकर मुस्लिम लड़कियों का ग्रुप बना। फिर एक लड़का उनके संपर्क में आया। जिसने मेरी बेटी से संपर्क किया और फिर उसका थोड़ा-थोड़ा व्यवहार बदलने लगा। वह पहले बहुत अच्छी थी, बहुत इज्जत करती थी हमारी, कभी वह हमारे आगे बोलती नहीं थी। फिर हमें शक हुआ कि शायद कुछ गलत है। हमें जून 2026 में पता चला कि एक मुस्लिम लड़का उसके साथ जुड़ चुका है। उसके बाद उसका व्यवहार बदल गया। 3. मां-बाप को वह बातें बोलती, जिससे यकीन नहीं आता
मां ने कहा- वह काफी आक्रामक होने लगी। यहां तक कि उसको यह पता चलना बंद हो गया कि हम उसके माता-पिता हैं। वह कभी-कभी हमें इतनी गलत चीजें बोल देती थी कि हम विश्वास ही नहीं कर पाते थे कि यह सिमरन ही बोल रही है। स्कूल में हर टीचर उसकी तारीफ करता था कि यह हमारी बहुत इज्जत करती है। 4. घर पर पाठ करती, गुरुद्वारे जाती, फिर पूरी बदल गई
मां ने कहा- वह घर पर पाठ करती थी। जब भी उसको समय मिलता था, हम गुरुद्वारे जाते, सेवा करके आते थे। उसका ब्रेनवाश कर दिया गया। मतलब कि पूरी तरह से बदल दिया उसको। वह अपना किरदार ही भूल गई। मेरी फैमिली गुरसिख है। पति का परिवार अमृतधारी है। बेटी सिमरन भी सिक्खी को मानती थी लेकिन फिर वह पूरी तरह से बदल गई। 5. समझाया तो पुलिस को हमारी ही शिकायत कर दी, फिर छोड़कर चली गई
मां ने कहा- जब हमने उसे समझाने की कोशिश की तो उसने लंदन पुलिस को शिकायत कर दी। उसने झूठ कहा कि हमने उसको मारा-पीटा। जबकि हमने कभी भी उस पर हाथ नहीं उठाया। यहां तक कि हमने उससे ऊंची आवाज में बात करना भी बंद कर दिया था। हमें लगता था कि हम प्यार से उसको समझा लें, घर वापस ले आएं, हर वह चीजें करने लगे, जिससे वह खुश रहती थी। लेकिन मुझे नहीं पता कि उसका इतना माइंडवॉश कर दिया उन्होंने कि हमारी मेरी पूरी फैमिली पर आरोप लगाकर वह चली गई।
पहले भी एक युवती ने ऑनसक्रीन किए थे खुलासे बता दें, 6 महीने पहले इंग्लैंड में रहने वाले पंजाबी नवदीप सिंह ने एक युवती का वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें युवती ने ऐसे ही कुछ दावे किए थे। उसने बताया था कि ब्रिटेन में कौर-टू-खान मूवमेंट चल रहा है। सिख लड़कियों को फंसाकर उन्हें मुसलमान बनाया जा रहा है। इसके लिए यूके में पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग सक्रिय है। युवती ने वीडियो में दावा किया था कि यूके में ग्रूमिंग गैंग को कौर (सिख लड़की) से खान (मुस्लिम) बनाने पर 10 हजार पाउंड दिए जा रहे हैं। युवती का कहना था कि पाकिस्तानी मूल की ग्रूमिंग गैंग सोची-समझी साजिश के तहत गैर-मुस्लिम लड़कियों, खासकर सिख लड़कियों को निशाना बना रहे हैं। युवती ने ग्रूमिंग गैंग की स्ट्रेटजी का भी खुलासा किया था। उसका कहना था कि ग्रूमिंग गैंग पहले लड़कियों को टारगेट कर उनसे इमोशनली अटैच होते हैं, फिर उन्हें महंगी गाड़ियों व रेस्टोरेंट्स में घुमाते हैं और जब लड़की उनके जाल में फंस जाती है तो उसका धर्म परिवर्तन करा देते हैं। युवती का दावा है कि अलग-अलग धर्म की लड़कियों को फंसाने के रेट भी अलग हैं। सिख लड़की को फंसाकर मुस्लिम बनाने पर युवक को 10,000 पाउंड (करीब 11 लाख रुपये) मिलते हैं। वहीं, हिंदू या ईसाई लड़की के धर्म परिवर्तन कराने पर 5,000 पाउंड (करीब साढ़े 5 लाख रुपये) का इनाम दिया जाता है। कैसे जाल बिछाते हैं ग्रूमिंग गैंग, स्टेप-टू-स्टेप प्रोसेस जानिए…

बिहार डूबेगा या बचेगा?:नेपाल में दूसरा ग्लेशियर फटने वाला है; 8 दिनों में ऐसा क्या हुआ कि सरकार बोली- हालात गंभीर हैं

बिहार डूबेगा कि बचेगा…नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के 8 दिन बाद अब हर कोई जानना चाहता है। राज्य की 8 नदियां- गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घाघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। दूसरी तरफ नेपाल में दूसरे ग्लेशियर के फटने का अलर्ट जारी कर दिया गया है। ऐसा क्यों कहा जा रहा कि अबकी ग्लेशियर फटा तो पटना सहित 10 शहर डूब जाएंगे, हिमालय की चोटी पर क्या चल रहा है, समझेंगे; बूझे की नाही में…। बिहार की चिंता बढ़ाने वाले 3 बड़े फैक्टर 1. नेपाल में फटने वाला है दूसरा ग्लेशियर चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल में एक नया ग्लेशियल लेक फटने वाला है। कब फटेगा, इसका सटीक अंदाजा लगाना कठिन है। नया ग्लेशियल लेक लांगटांग लिरुंग हिमालय के पश्चिमी ढलान पर, रसुवा में तेनजिंग के ठीक सामने है। दरअसल… नेपाल से निकलने वाली 7 से 9 बड़ी नदियां बहकर बिहार-UP के मैदानी इलाकों में आती हैं। जब नेपाल के पहाड़ों में भारी बारिश होती है, तो इन्हीं नदियों के जरिए बिहार में बाढ़ का पानी आता है। इसे ऐसे समझिए… केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, कोसी, गंडक, बागमती और घाघरा ही वे नदियां हैं, जो बिहार में बाढ़ लाती हैं। इसलिए अगर अबकी बार ग्लेशियर फटा तो फिर भारी मात्रा में पानी बिहार पहुंचेगा। 2. 8 नदियां उफान पर, दबाव बढ़ा तो टूट जाएंगे बाढ़ ताजा हालात है कि बिहार की आठ नदियां गंगा, सोन, पुनपुन, कोसी, गंडक, बुढ़ी गंडक, बागमती और घघरा खतरे के निशान से ऊपर हैं। 3 सितंबर तक बिहार जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक… वहीं, नेपाल में आई तबाही के दिन 26 अगस्त से 3 सितंबर की सुबह 8 बजे तक बिहार में 3 बैराज से 1.98 करोड़ क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। एक क्यूसेक पानी यानी 28.3 लीटर/प्रति सेकंड। मतलब 56,119.4 करोड़ लीटर/प्रति सेकंड पानी बिहार में 9 दिन के अंदर आ चुका है। मतलब अगर नेपाल में दूसरा ग्लेशियर टूटा तो बिहार में हालात खराब हो जाएंगे। क्योंकि अभी ही नदियों में पानी काफी बढ़ गया है। आगे पानी आने पर तबाही ही मचेगी। 3. नेपाल में बारिश का अलर्ट, नदियों में बढ़ेगा पानी बिहार की सबसे बड़ी चिंता नेपाल में भारी बारिश का अलर्ट है। नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग के मुताबिक, भोटेकोशी और त्रिशूली नदी फिलहाल चेतावनी स्तर से नीचे बह रही हैं, फिर भी रसुवा और नुवाकोट में अचानक बाढ़ आने की ज्यादा संभावना है। दोनों जिलों में भोटेकोशी, त्रिशूली और छोटी नदियों का जलस्तर काफी बढ़ सकता है, जिससे अचानक बाढ़ आने का भारी खतरा है। वहीं, नेपाल के मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों यानी 6 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी है। नेपाल के जल संसाधन विभाग ने कहा कि कोशी बेसिन की सप्तकोशी, तमोर, अरुण, दूधकोशी, तामाकोशी और सुनकोशी तथा नारायणी बेसिन की नारायणी, त्रिशूली, बूढ़ी गंडकी, मर्स्यांगदी, सेती और काली गंडकी जैसी प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। विभाग ने नेपाल की छोटी नदियों में पानी बढ़ने की भी बातें कही है। इधर… पटना मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक, 5 सितंबर तक पूरे बिहार में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सीवान जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। जबकि, पटना, नालंदा, जहानाबाद, नवादा, गया, लखीसराय, शेखपुरा और बेगूसराय में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। …तो क्या बड़े शहर भी डूब सकते हैं? बिल्कुल। राज्य की नदियों में बढ़ते पानी से 13 जिले दरभंगा, मधुबनी, पश्चिम चंपारण, कटिहार, मधेपुरा, पूर्णिया, सहरसा, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय, भागलपुर, समस्तीपुर, मुंगेर प्रभावित हैं। बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग ने 3 सितंबर की शाम अलर्ट जारी करते हुए कहा कि पटना में गंगा नदी हाई फ्लड लेबल को क्रास करने वाली है। इसलिए सभी पदाधिकारी और लोग अलर्ट रहें। निचले इलाकों को बचाने के लिए तुरंत तैयारी में जुट जाएं। विभाग ने कहा है कि दक्षिण बिहार की सोन, पुनपुन, दरधा में बढ़ते पानी को देखते हुए नालंदा, भोजपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद में लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। मतलब साफ है कि अगर नेपाल से और पानी आया तो बिहार के कम से कम 10 से ज्यादा शहर डूब सकते हैं। जिसमें राजधानी पटना भी शामिल हो सकता है। ऐसा पहले भी हो चुका है…

Rashifal Today: धन के मामले में आज किसकी बदलेगी किस्मत? जानें मूलांक 1 से 9 तक का राशिफल

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार 4 सितंबर का दिन आर्थिक मामलों में योजना बनाने और पैसों को सही तरीके से संभालने का संकेत दे रहा है। आज ज्यादातर मूलांक वाले लोगों को बेवजह खर्च करने से बचने और भविष्य को ध्यान में रखकर आर्थिक फैसले लेने की सलाह दी जाती है। कुछ लोगों के लिए निवेश और बचत की नई योजना बनाने का समय अच्छा है। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण रहेगा। भविष्य को सुरक्षित करने के लिए लंबी अवधि की योजना बना सकते हैं। अपने आर्थिक लक्ष्य तय करें और बजट के अनुसार खर्च करें। अचानक या बिना सोचे खरीदारी करने से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा। कोई बड़ा फैसला लेने से पहले उसके सभी पहलुओं पर विचार करें।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में व्यावहारिक सोच रखनी होगी। गैरजरूरी चीजों पर खर्च करने से बचें और अपनी बचत को मजबूत करने पर ध्यान दें। भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के लिए लंबी अवधि की योजना बनाना फायदेमंद रहेगा। सही दिशा में उठाया गया कदम आगे चलकर आर्थिक स्थिरता देने में मदद कर सकता है।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक योजना बनाने का अच्छा समय है। अपने लक्ष्यों को स्पष्ट करें और उन्हें पूरा करने के लिए ठोस योजना तैयार करें। बाजार और निवेश से जुड़ी नई जानकारी हासिल करना फायदेमंद रहेगा। हालांकि, बजट को जरूरत के हिसाब से बदलने के लिए तैयार रहें, क्योंकि अचानक कोई खर्च सामने आ सकता है।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज घर और परिवार से जुड़े खर्चों पर विशेष ध्यान देना होगा। भावनाओं में आकर पैसा खर्च करने से बचें। अपनी आमदनी और खर्च का सही हिसाब रखें और बिना योजना वाले खर्चों पर रोक लगाएं। भविष्य में अचानक आने वाली जरूरतों के लिए कुछ रकम बचाकर रखना आपके लिए बेहतर रहेगा।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में दिन सकारात्मक रह सकता है। बजट बनाने और खर्चों को व्यवस्थित करने की आपकी क्षमता बेहतर रहेगी। गैरजरूरी खरीदारी से बचकर आप अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं। नए निवेश या कमाई के अवसरों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फैसला पूरी जानकारी लेने के बाद ही करें।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में अनुशासन जरूरी रहेगा। अपनी आमदनी और खर्च का पूरा हिसाब रखें। जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें और गैरजरूरी खर्च को टालने की कोशिश करें। हर छोटे-बड़े भुगतान पर नजर रखने से आपको अपनी आर्थिक स्थिति समझने में मदद मिलेगी। लापरवाही से बचना आपके लिए फायदेमंद होगा।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिरता और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। लग्जरी और गैरजरूरी सामान पर खर्च करने से बचें। अपनी बचत बढ़ाने के नए तरीके खोजें और मौजूदा आर्थिक योजनाओं की समीक्षा करें। आज लिए गए समझदारी भरे फैसले भविष्य में आपकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक रूप से अनुकूल रह सकता है। लंबी अवधि की योजनाओं पर काम करने का सही समय है। अपने निवेश और बजट की समीक्षा करें और देखें कि आपकी योजनाएं भविष्य के लक्ष्यों के अनुसार चल रही हैं या नहीं। बिना योजना के खर्च करने से बचें और आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है। नए अवसर सामने आ सकते हैं, लेकिन तुरंत फैसला लेने के बजाय पूरी जानकारी जुटाएं। अपने पुराने आर्थिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत पड़ने पर उनमें बदलाव करें। सोच-समझकर लिया गया फैसला आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद कर सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

नेपाल की तबाही में भारत बना सबसे बड़ा सहारा:5 खेप में 74 टन राहत भेजी; डॉक्टर, रेस्क्यू एक्सपर्ट और फोरेंसिक टीम भी पहुंचाई

नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में इस आपदा से 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। शहरों, सड़कों, पुलों और कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के कुछ घंटों के भीतर ही भारत ने राहत सामग्री भेजनी शुरू कर दी थी। 3 सितंबर तक भारत पांच खेप में कुल 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है, जिसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां शामिल हैं। भारत की मदद सिर्फ राहत सामग्री तक सीमित नहीं रही। डॉक्टर, पैरामेडिक्स, बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ, बेली ब्रिज और फोरेंसिक एक्सपर्ट भी नेपाल भेजे गए हैं। यानी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश से लेकर शवों की DNA जांच और पुनर्निर्माण तक भारत कई मोर्चों पर नेपाल की मदद कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने भी संसद में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। भारत की मदद से बना अस्पताल बाढ़ पीड़ितों के लिए बना सहारा नेपाल के नुवाकोट में नेपाल-भारत मैत्री भवन बाढ़ के बाद लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है। इस इमारत में आयुर्वेद और वैकल्पिक अस्पताल भी है। भारत सरकार ने 2015 के भूकंप के बाद इस अस्पताल का पुनर्निर्माण कराया था। ऊंचाई पर स्थित होने की वजह से भोटेकोशी बाढ़ में घर छोड़ने को मजबूर सैकड़ों लोगों ने यहां शरण ली है। अस्पताल में 11 डॉक्टर बाढ़ प्रभावित लोगों का इलाज कर रहे हैं। यहां से जिले के अलग-अलग राहत केंद्रों में पहुंचाए गए लोगों को भी मेडिकल मदद दी जा रही है। जहां पुल बह गए, वहां बेली ब्रिज से फिर जुड़ेंगे रास्ते बाढ़ में कई सड़कें और पुल बहने से दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूट गया है। इसे बहाल करने के लिए भारत नेपाल को बेली ब्रिज भेज रहा है। बेली ब्रिज लोहे के हिस्सों से तैयार होने वाला अस्थायी पुल होता है। इसके हिस्सों को प्रभावित इलाके तक ले जाकर मौके पर जोड़ा जा सकता है। इससे स्थायी पुल बनने का इंतजार किए बिना सड़क संपर्क जल्दी बहाल किया जा सकता है। भारतीय दूतावास के मुताबिक, 230 फीट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के उपकरण लेकर 16 ट्रक नेपाल पहुंच चुके हैं। सात और बेली ब्रिज लगाने के लिए उपकरण भी जल्द भेजे जाएंगे। इन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीमें भी नेपाल पहुंचेंगी। हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में भारतीय एक्सपर्ट बाढ़ के बाद नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे मजदूरों को ढूंढना है। नेपाल सरकार के मुताबिक कई सुरंगों में करीब 900 से ज्यादा कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। 30 अगस्त को भारतीय सुरंग बचाव विशेषज्ञों की टीम नेपाल पहुंची। टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर चिलिमे और लांगटांग के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हाइड्रोपावर सुरंगों में कर्मचारियों की तलाश कर रही है। दिल्ली-एनसीआर के ‘रैट माइनर्स’ की टीम ने भी नेपाल के बचाव अभियान में शामिल होने की पेशकश की है। इसी टीम ने 2023 में उत्तराखंड की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। शवों के पहचान के लिए DNA जांच में भारत की मदद बाढ़ का पानी घटने के बाद अब नेपाल के सामने एक और बड़ी चुनौती बरामद शवों और लापता लोगों की पहचान करना है। इसके लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल भेजी है। भारतीय विशेषज्ञ नेपाली टीम के साथ मिलकर DNA सैंपल की जांच कर रहे हैं। काठमांडू घाटी की दो लैब में यह काम किया जा रहा है। इनमें नेपाल पुलिस सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और खुमलटार की नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी शामिल हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए जा चुके थे। इनमें करीब 400 मामलों में सिर्फ शरीर के कुछ हिस्से मिले हैं। ऐसे मामलों में DNA जांच के जरिए मृतकों की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है। बाढ़ में तबाह स्कूल को भी दोबारा बनाएगा भारत भारत की मदद राहत और बचाव अभियान तक सीमित नहीं है। भारत ने नुवाकोट के बिदुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल को दोबारा बनाने का फैसला भी किया है। यह स्कूल भारत-नेपाल सहयोग के लिहाज से भी अहम है। इसके पुराने भवन का संबंध भारत की विकास सहायता से रहा है। अब नई इमारत भी भारत के हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत बनाई जाएगी। आपदा के समय पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहा है भारत नेपाल में मौजूदा राहत अभियान आपदा के समय दूसरे देशों की मदद करने की भारत की नीति की एक और मिसाल है। नेपाल में इस बार भी भारत की भूमिका सिर्फ शुरुआती राहत तक सीमित नहीं है। इलाज से लेकर बचाव, सुरंगों में तलाश, टूटे रास्तों को जोड़ने, शवों की पहचान और पुनर्निर्माण तक भारत नेपाल की मदद में हर स्तर पर जुटा है। —————— नेपाल बाढ़ से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… नेपाल बाढ़ में कैसे बचा 40 साल पुराना ‘हरा घर’: मालिक बोला- नींव मजबूत बनाई, नदी किनारे घर था इसलिए ज्यादा ध्यान दिया था नेपाल में 26 अगस्त को त्रिशूली नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। तेज बहाव में गाड़ियां, इमारतें और लोगों के सामान बह गए, लेकिन नुवाकोट जिले में नदी किनारे बना 40 साल पुराना हरा घर लगभग सुरक्षित बच गया। पूरी खबर पढ़ें…