थिएटर में नंगे पैर ‘हनुमान अंश’ देखते नजर आया मुस्लिम शख्स, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

सोशल मीडिया पर एक मुस्लिम व्यक्ति का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वह सिनेमा हॉल में ‘हनुमान अंश’ फिल्म देख रहा है। कई लोगों का ध्यान इस बात पर गया कि फिल्म देखते समय वह बिना जूते-चप्पल के बैठा है। नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी खूब पसंद की जा रही है।

वीडियो में वह व्यक्ति सफेद कुर्ता-पायजामा और सफेद टोपी पहने हुए बिना जूते-चप्पल के थिएटर में बैठा दिखाई दे रहा है। वह फिल्म देखने में पूरी तरह मग्न है और उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा कि कोई उसका वीडियो बना रहा है।

वीडियो ऑनलाइन पोस्ट होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी। एक यूज़र ने लिखा, “बिना राजनीति वाला भारत।” दूसरे ने लिखा, “वे दशकों से चल रहे राजनीतिक ध्रुवीकरण से उसके मन को दूषित करने में नाकाम रहे।”

नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच यह वायरल क्लिप लोगों का ध्यान खींच रही है। हाल ही में मिराज सिनेमा ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि उन्होंने नीम करोली बाबा के लिए सीट नंबर 9 आरक्षित करने का फैसला किया है, क्योंकि उनका मानना ​​है कि बाबा अपने भक्तों के साथ फिल्म देखेंगे।

नंगे पैर फिल्म देखने आए एक व्यक्ति का वीडियो और उस पर ऑनलाइन मिली प्रतिक्रियाओं ने ‘हनुमान अंश’ फिल्म के बारे में चर्चा को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह फिल्म सिनेमाघरों में लगातार लोगों का ध्यान खींच रही है।

नीम करौली बाबा, जिनका जन्म 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में लक्ष्मण नारायण शर्मा के रूप में हुआ था। वे हनुमान के परम भक्त थे। 1960 और 1970 के दशक में कैंची धाम और वृंदावन में अपने आश्रमों के माध्यम से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। उनकी शिक्षाओं ने पश्चिमी देशों के कई साधकों को आकर्षित किया, जिनमें हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिक रिचर्ड अल्परट (राम दास) और आध्यात्मिक साधक भगवान दास प्रमुख थे।

उनकी शिक्षाओं में निस्वार्थ सेवा और भक्ति पर जोर दिया गया था, जिसे संक्षेप में “सब से प्रेम करो, सबकी सेवा करो, सबको भोजन कराओ” कहा जाता है। हालांकि उनके अनुयायियों द्वारा बताई गई बातों में उनके जीवन से जुड़ी कई चमत्कारी घटनाओं का जिक्र मिलता है, लेकिन ये कहानियाँ उनके आध्यात्मिक जीवन-वृत्तांत का हिस्सा हैं, न कि प्रमाणित इतिहास का।

11 सितंबर 1973 को वृंदावन में उनके निधन के बाद, उनकी विरासत दुनिया भर में फैली और स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग और जूलिया रॉबर्ट्स जैसी प्रमुख पश्चिमी हस्तियों को प्रभावित किया; इन सभी ने उनके कैंची धाम आश्रम का दौरा किया था।

खबरों के अनुसार, 1.8 करोड़ रुपये के कम बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ ने भारत में लगभग 10 लाख रुपये की शुरुआती कमाई की और 28वें दिन तक 62 करोड़ रुपये से अधिक की नेट कमाई कर ली। फिल्म निर्माताओं का मानना ​​है कि लोगों के बीच फिल्म की अच्छी चर्चा (वर्ड ऑफ माउथ) के कारण ही यह फिल्म इतने लंबे समय तक सिनेमाघरों में चल पाई।

बारिश से मुंबई का बुरा हाल! सड़क पर नाव लेकर निकला एक्टर, वीडियो हुआ वायरल

मुंबई में हर साल मॉनसून आते ही भारी बारिश, जलभराव और घंटों तक चलने वाला ट्रैफिक लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन जाता है। आमतौर पर यह मौसम लोगों के लिए परेशानी और संघर्ष लेकर आता है, लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है जिसने लोगों को परेशान करने के बजाय हंसने पर मजबूर कर दिया। वीडियो में दिखाया गया है कि जब शहर की सड़कें नदी जैसी बन जाएं, तो वहां का सफर भी किसी रोमांचक अनुभव से कम नहीं लगता।

यह क्लिप मुंबई की मॉनसून हकीकत को एक मजेदार अंदाज में दिखाती है, जहां लोग रोजमर्रा की मुश्किलों को भी हल्के-फुल्के तरीके से जीते नजर आते हैं। यही वजह है कि यह वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

अभिनेता अय्याज अहमद की ‘नाव वाली एंट्री’

अभिनेता अय्याज अहमद का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें वह मुंबई के अंधेरी वेस्ट स्थित वीर देसाई रोड पर भरे हुए पानी के बीच एक ऑरेंज inflatable नाव चलाते नजर आते हैं। यह दृश्य लोगों को जितना चौंकाने वाला लगा, उतना ही मजेदार भी।

‘Mumbaikar in Every Monsoon’ लोगों की मिली पहचान

वीडियो में लिखा टेक्स्ट “Mumbaikar in Every Monsoon” लोगों को खूब पसंद आया। कई यूजर्स ने कहा कि यह लाइन मुंबई की बारिश के हालात को बिल्कुल सही तरीके से दिखाती है। भारी जलभराव के बीच भी अय्याज़ शांत होकर नाव चलाते और छाता पकड़े नजर आए।

इंस्टाग्राम पर बढ़ी हंसी की लहर

अभिनेता की रिलैक्स्ड एक्सप्रेशन और मजेदार अंदाज ने वीडियो को और वायरल बना दिया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में भी लिखा कि वह खुश हैं कि उन्होंने छाता साथ रखा। साथ ही वीडियो में “Water too much” ऑडियो ने इसे और भी एंटरटेनिंग बना दिया।

सोशल मीडिया पर मजेदार रिएक्शन

वीडियो वायरल होते ही लोगों ने मजेदार कमेंट्स की बौछार कर दी। किसी ने इसे “नई मुंबई रिक्षा” बताया तो किसी ने कहा कि “ऑफिस जाने के लिए यही सही तरीका है।” कई यूजर्स ने तो कहा कि उन्हें भी ऐसी नाव चाहिए।

हर साल की वही समस्या पर सवाल

जहां एक तरफ लोग वीडियो पर हंस रहे थे, वहीं कुछ यूजर्स ने मुंबई की पुरानी समस्या पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर साल बारिश में यही हाल होता है और कई इलाके जैसे अंधेरी सबवे, मारोल और मालाड SV रोड सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

बारिश ने तोड़ा रिकॉर्ड, शहर बना पानी-पानी

रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई में इस साल मॉनसून की शुरुआत धीमी रही, लेकिन जुलाई की शुरुआत में मौसम अचानक बदल गया। सिर्फ तीन दिनों में ही शहर ने जुलाई की आधी से ज्यादा बारिश झेल ली। कई इलाकों में एक दिन में 200 mm से ज्यादा बारिश दर्ज की गई, जिससे शहर की रफ्तार पूरी तरह थम गई।

Viral Post: ‘मेरी नौकरी जाने वाली है’, लेऑफ की चर्चा के बीच माइक्रोसॉफ्ट कर्मचारी का इमोशनल पोस्ट हुआ वायरल

माइक्रोसॉफ्ट के एक कर्मचारी की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों चर्चा में है। उन्होंने लिखा कि उन्हें लगता है कि आने वाली लेऑफ में उनका नाम भी शामिल हो सकता है। वहीं कंपनी ने अभी तक आधिकारिक सूची जारी नहीं की है। कर्मचारी ने अपनी पोस्ट में बताया कि दफ्तर में पिछले कुछ समय से ऐसे कई संकेत मिल रहे थे, जिनसे उन्हें अंदाजा हो गया था कि उनकी नौकरी खतरे में है। इस पोस्ट पर लोगों ने कई तरह के रिएक्शन दिए है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

पोस्ट के मुताबिक काम करने के तरीके में बदलाव, प्रोजेक्ट्स का दूसरी टीमों को सौंपा जाना और मैनेजर की ओर से पहले जैसी बातचीत या प्रतिक्रिया न मिलना इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि उनकी भूमिका खत्म की जा सकती है।

कर्मचारी ने किया पोस्ट

कर्मचारी ने बताया कि, उन्हें पहले ही उनके नियमित प्रोजेक्ट से अलग कर दिया गया था और अब उनके मैनेजर की ओर से भी पहले जैसी बातचीत या मार्गदर्शन नहीं मिल रहा था। उन्होंने कहा कि दफ्तर में हो रहे इन बदलावों को लेकर उनके सहकर्मी भी असमंजस में थे और किसी को स्पष्ट रूप से यह नहीं पता था कि आखिर इन फैसलों के पीछे क्या वजह है। कर्मचारी ने लिखा, “मेरे मैनेजर को 30 तारीख को लेऑफ लिस्ट मिल रही है। लेकिन मुझे पता है कि मुझे नौकरी से निकाल दिया जाएगा।” उन्होंने बताया कि काम पर अनिश्चितता महीनों से चल रही थी और मानसिक रूप से थका देने वाली हो गई थी।

अफवाहें मेंटली थका देती है

उनके मुताबिक लगातार रीस्ट्रक्चरिंग और छंटनी की चर्चाओं के कारण काम पर ध्यान लगाना और खुद को सुरक्षित महसूस करना मुश्किल हो गया था। उन्होंने लिखा, “और सच कहूं तो? मुझे राहत महसूस हो रही है। इसलिए नहीं कि नौकरी छूटना मजेदार है। इसलिए नहीं कि मार्केट बहुत अच्छा है। इसलिए नहीं कि मैंने सब कुछ समझ लिया है। मुझे राहत इसलिए मिल रही है क्योंकि अनिश्चितता आखिरकार खत्म हो रही है।” उनके मुताबिक कंपनी में छंटनी की अफवाहें, बार-बार होने वाले बदलाव, कामकाज में सुधार की चर्चाएं और अच्छे कर्मचारियों को जाते देखना मानसिक रूप से काफी थका देने वाला रहा। उन्होंने कहा कि हर कुछ महीनों में यह डर बना रहता था कि अगली बारी कहीं उनकी तो नहीं होगी।

लेऑफ होने पर कैसा होगा इमोशन

उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे माहौल में रहना इसे छोड़ने से भी ज्यादा बुरा लगने लगा था। “किसी समय आप लेऑफ होने की चिंता करना बंद कर देते हैं और इस बात की चिंता करने लगते हैं कि यहं रहने से आपका क्या होगा।” कर्मचारी ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि लेऑफ ऑफिशियली होने के बाद उनकी भावनाएं कैसी होंगी। उन्होंने लिखा, “हो सकता है कि जब यह असल में होगा, तब भी मुझे अलग तरह से महसूस हो। लेकिन अभी, एक नई शुरुआत की संभावना एक और साल की अनिश्चितता से बेहतर लग रही है। क्या कोई और उस पॉइंट तक पहुंचा है?”

सोशल मीडिया पर लोगों ने किया कमेंट

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर लोगों ने कई तरह के रिएक्शन दिए। एक यूजर ने लिखा, “मेरे साथ ऐसा तब हुआ जब मैं कोविड से प्रभावित इंडस्ट्री में था। अपने रोल की वजह से मुझे ऐसी जानकारी थी जो दूसरों को नहीं थी (इसलिए मुझे फाइनेंशियल बातें पता थीं और यह भी कि कंपनी शायद टिक न पाए) और फिर मैंने अपने मैनेजर को एक माइक्रोमैनेजर के हाथों खो दिया। मुझे जाने में राहत मिली।” दूसरे व्यक्ति ने कमेंट लिखा, “जब आप नर्ड्स को मैनेज करने के लिए साइकोपैथ्स का एक झुंड लाते हैं तो यही होता है।”

एक व्यक्ति ने आगे कहा, “अभी अमेरिका में हर कॉर्पोरेशन में यही हो रहा है। और वे “प्रोफिशिएंसी को ऑप्टिमाइज करने” जैसी बकवास करते हैं। असल में यह अपने शेयरहोल्डर्स को खुश करने के लिए कॉस्ट कटिंग है।”

Viral Post: 27 करोड़ से सीधा 15 करोड़! IPL ट्रेड के बाद हर्ष गोयनका ने ऋषभ पंत को लेकर कही ये बात

सोशल मीडिया पर इस समय आईपीएल में दो टीमों के बीच हुए ट्रेड डील की काफी चर्चा है। आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच सबसे बड़ा ट्रेड हुआ। इस डील के बाद ऋषभ पंत अपनी पुरानी टीम दिल्ली कैपिटल्स में लौट गए हैं, वहीं स्पिन गेंदबाज कुलदीप यादव को लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ जुड़ गए है। इससे पहले लखनऊ सुपर जायंट्स ने उन्हें 27 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड राशि में अपनी टीम में शामिल किया था, जिसके बाद वह आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ियों बन गए। हाल ही में पंत एक बार फिर दिल्ली कैपिटल्स के साथ जुड़ गए हैं, जहां उनकी नई फीस 15 करोड़ रुपये तय की गई है। ये रकम उनके पिछले अनुबंध की तुलना में काफी कम है। वहीं सोशल मीडिया पर लोग इस पर कई तरह से रिएक्शन दे रहे है।

इसी बीच आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका का एक सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों काफी चर्चा में है। उन्होंने भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत का उदाहरण देते हुए कॉर्पोरेट जगत में मिलने वाले वेतन और आईपीएल खिलाड़ियों की कीमत में होने वाले बदलाव की तुलना की। हर्ष का ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

हर्ष गोयनका ने किया पोस्ट

इस पूरे घटनाक्रम पर रिएक्शन देते हुए हर्ष गोयनका ने पेशेवर खेल और कॉर्पोरेट दुनिया के बीच के अंतर को उजागर किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा, “ऋषभ पंत: 27 करोड़ रुपये ➝ 15 करोड़ रुपये। जरा सोचिए, अगर किसी सीईओ से कहा जाए कि पिछले साल आपको 27 करोड़ रुपये दिए गए थे, लेकिन इस साल प्रदर्शन और बाजार की मांग को देखते हुए आपका वेतन घटाकर 15 करोड़ रुपये किया जा रहा है।”

उन्होंने आगे लिखा, “कॉर्पोरेट दुनिया में ऐसी बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन आईपीएल में खिलाड़ियों की कीमत नीलामी और बाजार की मांग तय करती है। शुक्र है कि हममें से ज्यादातर लोग कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम करते हैं।”

लोगों ने किया कमेंट

हर्ष गोयनका की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। कई यूजर्स ने इस बात पर अपनी राय रखी कि क्या खिलाड़ियों की कमाई और उनकी कीमत की तुलना कॉर्पोरेट कर्मचारियों की सैलरी से की जा सकती है। इस पोस्ट पर लोगों ने अलग-अलग तरह के रिएक्शन दिए हैं। एक यूजर ने खिलाड़ियों की कीमत तय करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए लिखा, “परफॉर्मेंस क्या है? 15 करोड़ रुपये भी बहुत ज्यादा लगते हैं। इसकी शुरुआत 2 करोड़ रुपये से होनी चाहिए और फिर खिलाड़ी के प्रदर्शन के आधार पर रकम बढ़नी चाहिए।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने आईपीएल और कॉर्पोरेट नौकरी की तुलना को गलत बताते हुए कहा, “ये दोनों पूरी तरह अलग चीजें हैं सर। कॉर्पोरेट नौकरी 12 महीने की होती है, जबकि आईपीएल सिर्फ 2 महीने का टूर्नामेंट है। कॉर्पोरेट में अगर आपका प्रदर्शन अच्छा नहीं है तो कंपनी आपको बाहर कर सकती है और फिर आपको कुछ नहीं मिलेगा।”

चर्चा में ऋषभ पंत

ऋषभ पंत की कीमत और आईपीएल में उनकी वैल्यू को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा हो रही है। ऋषभ पंत लंबे समय से दिल्ली कैपिटल्स के अहम खिलाड़ी रहे हैं। उन्होंने टीम के लिए शानदार प्रदर्शन किया और कप्तानी भी संभाली। अब वह फिर से दिल्ली कैपिटल्स में लौट आए हैं। वहीं इस बार उनकी कीमत पहले के मुकाबले कम रही, जिसके बाद आईपीएल में खिलाड़ियों की कीमत और ट्रेड को लेकर काफी चर्चा शुरू हो गई है।

रात के बचे चावल से बनाएं ऐसे मजेदार और हेल्दी नाश्ते के आइडियाज, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आएंगे

बचे हुए चावल अक्सर घरों में बच तो जाते हैं, लेकिन सही इस्तेमाल न होने पर फेंक भी दिए जाते हैं। जबकि इन्हीं चावलों को थोड़ी सी समझदारी से एक स्वादिष्ट और झटपट बनने वाले व्यंजन में बदला जा सकता है। वेज फ्राइड राइस इसी का सबसे आसान और लोकप्रिय तरीका है, जिसे कम समय में तैयार किया जा सकता है। इसमें अलग-अलग सब्जियों और हल्के मसालों का इस्तेमाल करके स्वाद को और भी बेहतर बनाया जाता है।

यह न सिर्फ बची हुई चीजों का सही उपयोग करता है, बल्कि बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आने वाला एक टेस्टी ब्रेकफास्ट या स्नैक बन जाता है। घर में मौजूद साधारण सामग्री से बनने वाली यह डिश रोजमर्रा की कुकिंग को भी आसान और मजेदार बना देती है।

चावल का चीला

बेसन या सूजी के चीले तो आपने खाए होंगे, लेकिन राइस चीला भी उतना ही स्वादिष्ट होता है। चावल को पीसकर उसमें हरी मिर्च, प्याज, धनिया और मसाले मिलाएं और तवे पर कुरकुरा सेंक लें। इसे टोमैटो सॉस या किसी चटनी के साथ परोसा जा सकता है।

चावल के पॉप्स

चावल में उबली सब्जियां, मसाले और थोड़ा चीज मिलाकर छोटे-छोटे बॉल्स बनाएं। इन्हें ब्रेड क्रंब्स में लपेटकर सुनहरा होने तक फ्राई करें। बाहर से क्रिस्पी और अंदर से सॉफ्ट ये स्नैक बच्चों को खूब पसंद आता है।

चावल के पकौड़े

बचे हुए चावल से बनने वाले पकौड़े शाम के स्नैक के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। इसमें उबले आलू, प्याज, हरी मिर्च और मसाले मिलाकर पकौड़े तैयार करें और गरमा-गरम चाय के साथ सर्व करें।

लेमन राइस

अगर आपको हल्का और चटपटा स्वाद पसंद है तो लेमन राइस एक शानदार विकल्प है। सरसों के दाने, करी पत्ते, मूंगफली और नींबू के रस के साथ बना यह डिश खुशबू और स्वाद दोनों में बेहतरीन होता है।

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Viral Video: ब्रश से रंगे जा रहे समोसे? वायरल क्लिप ने लोगों को कर दिया हैरान

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों के बीच काफी हैरानी और चर्चा पैदा कर दी है। वीडियो में पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे कोई व्यक्ति समोसों जैसे दिखने वाले खाद्य पदार्थों को ब्रश की मदद से रंग रहा है। यह अनोखा दृश्य देखने के बाद यूजर्स के बीच तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे खाने की चीजों में मिलावट से जोड़कर चिंता जताई, जबकि कुछ ने इसे पूरी तरह गलत समझ बताया। वहीं कई यूजर्स का कहना है कि ये समोसे असली खाने के लिए नहीं बल्कि किसी तरह की सजावटी या आर्टवर्क से जुड़ी चीजें हो सकती हैं।

इस पूरे मामले ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जहां लोग वीडियो की सच्चाई को लेकर अलग-अलग दावे कर रहे हैं और असल सच अब भी रहस्य बना हुआ है।

 “क्या समोसे में भी मिलावट?”

यह वीडियो X (ट्विटर) पर शेयर किया गया, जिसके साथ दावा किया गया कि समोसों पर रंग लगाया जा रहा है। यूजर ने लिखा कि समोसे तो शुद्ध होने चाहिए, लेकिन यहां भी मिलावट दिखाई दे रही है। यह बात फैलते ही लोगों में नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ने लगे।

वीडियो में आखिर दिख क्या रहा है?

क्लिप में एक व्यक्ति जमीन पर बैठा दिखता है, जिसके चारों ओर समोसे जैसे त्रिकोण आकार के टुकड़े रखे हैं। कुछ हल्के रंग के हैं तो कुछ सुनहरे तले हुए जैसे लगते हैं। वह ब्रश की मदद से उन पर रंग लगाता नजर आता है। पास में छोटे-छोटे कंटेनर और कई और टुकड़े भी रखे हुए हैं, जिससे पूरा दृश्य और भी रहस्यमय लगने लगता है।

शुरू हुई अटकलों की बौछार

जैसे-जैसे वीडियो वायरल हुआ, वैसे-वैसे प्रतिक्रियाएं भी दो हिस्सों में बंट गईं। कुछ लोगों ने इसे लेकर सवाल उठाए और इसे गलत बताया, जबकि कुछ ने कहा कि यह खाने वाली चीज नहीं बल्कि सजावट का सामान है।

कुछ यूजर्स ने इसे कला का नमूना बताया, तो कुछ ने दावा किया कि ये नकली समोसे हैं जो सिर्फ शो के लिए बनाए गए हैं। एक यूज़र ने तो यहां तक लिख दिया कि यह मिट्टी से बनी डेकोरेशन हो सकती है।

असली सच्चाई अब भी रहस्य

अब तक इस वीडियो की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि यह समोसे असली खाने के हैं या सिर्फ सजावटी आइटम। अलग-अलग दावों के बीच सच्चाई अभी भी साफ नहीं है।

फिलहाल यह क्लिप इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है और एक बार फिर साबित कर रही है कि सोशल मीडिया पर कोई भी साधारण सी चीज भी बड़ी बहस में बदल सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया पर साझा किए गए कंटेंट पर आधारित है। वीडियो और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।