अमेरिका में चुनाव के दौरान वोटरों को प्रभावित करने के लिए भारत से सोशल मीडिया पर वीडियो फैलाए गए। इन वीडियो में आम लोग सड़कों पर खड़े होकर एक उम्मीदवार की तारीफ करते और महंगाई जैसे मुद्दों पर अपनी राय देते नजर आए। वीडियो ऐसे बनाए गए थे, जैसे लोग अपनी मर्जी से उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हों। लेकिन इन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए पैसे दिए जा रहे थे। मुंबई में बैठा आयुष जैन हर पोस्ट के बदले करीब 15 डॉलर (1400 रुपए) कमा रहा था। गलत जानकारी फैलाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर रखने वाले दो रिसर्च ग्रुप्स के मुताबिक, इन वीडियो को पोस्ट करने वाले ज्यादातर अकाउंट भारत से चलाए जा रहे थे। डेमोक्रेट उम्मीदवार के समर्थन में 36 वीडियो पोस्ट किए गए यह मामला अगस्त में मिशिगन राज्य में सीनेट चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार को चुनने से पहले का है। सोशल मीडिया पर कम से कम 36 वीडियो पोस्ट किए गए जिन्हें लाखों बार देखा गया। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर डाले गए इन वीडियो में ज्यादातर सांसद हेली स्टीवंस की तारीफ की गई थी। इनमें लोग महंगाई और रोजी-रोटी जैसे मुद्दों पर बात करते हुए स्टीवंस का समर्थन करते नजर आए। हालांकि, वीडियो बनाने वालों की पहचान सामने नहीं आई है और यह भी साफ नहीं है कि इनके पीछे पैसा किसने लगाया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान स्टीवंस को उनके प्रतिद्वंद्वी डॉ. अब्दुल एल-सैयद के खिलाफ जीत दिलाने की कोशिश कर रहे किसी राजनीतिक समूह से जुड़ा हो सकता है। लेकिन इन वीडियो को फैलाने में स्टीवंस के चुनाव अभियान या उनके समर्थक समूहों का हाथ होने का कोई सबूत सामने नहीं आया है। 4 अगस्त को चुनाव में एल-सैयद ने जीत हासिल की। हर 1000 व्यू पर मिलते थे 1 से 5 डॉलर पेंसिल्वेनिया की कंपनी ने आयुष को काम पर रखा था अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य की ‘लुमिना क्लिपर्स’ नाम की एक कंपनी ने आयुष जैन को हायर किया था। यह कंपनी सोशल मीडिया पर बॉट अकाउंट के जरिए पोस्ट की पहुंच बढ़ाने का काम करती है। बॉट ऐसे अकाउंट होते हैं, जिनका इस्तेमाल बड़ी संख्या में पोस्ट और इन्फोर्मेशन फैलाने के लिए किया जा सकता है। इस कंपनी का फोन नंबर UAE का है और इसे पुर्तगाल में रहने वाले आयरलैंड के नागरिक राइस मैके चलाते हैं। मैके ने माना कि उनकी कंपनी ने मिशिगन के इन वीडियो को फैलाने में भूमिका निभाई थी। इसके लिए आयुष जैन और उनके जैसे दर्जनों अन्य लोगों को काम पर रखा गया था। हालांकि, उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि उन्हें यह काम किसने दिया था और इसके लिए कितना पैसा खर्च हुआ। 28 अकाउंट ने पैसे लेकर फैलाए वीडियो इस अभियान का सबसे पहले पता ‘एंटीबॉट4नवालनी’ नाम के समूह ने लगाया। समूह ने एक्स पर ऐसे 28 अकाउंट की पहचान की, जो पैसे लेकर वीडियो पोस्ट कर रहे थे। इन पोस्ट को 70 लाख से ज्यादा बार देखा गया। इसके बाद क्लेमसन यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स पर भी ऐसे अकाउंट खोजे। इनमें से कुछ अकाउंट पहले चीन से जुड़े बॉट नेटवर्क के जरिए चलाए गए अभियानों में भी सामने आ चुके थे। रिसर्चर्स के मुताबिक, ये अकाउंट आम तौर पर कार्टून और मनोरंजन से जुड़े वीडियो पोस्ट करते थे लेकिन चुनाव के दौरान अचानक राजनीतिक वीडियो फैलाने लगे। डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार के चुनाव के बाद भी इन अकाउंट से राजनीतिक पोस्ट जारी रहीं। इनमें कैलिफोर्निया में गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार स्टीव हिल्टन के समर्थन वाली पोस्ट भी शामिल थीं। ————————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं:10 में से 9 सर्वे में पीछे, महंगाई-ईरान जंग से लोकप्रियता घटी, अपने ही उम्मीदवार दूरी बना रहे अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
चांदनी मशीन्स लिमिटेड का स्टॉक, स्प्लिट होने वाला है। कंपनी का 10 रुपये फेस वैल्यू वाला शेयर, 1 रुपये फेस वैल्यू वाले 10 शेयरों में टूट जाएगा। रिकॉर्ड डेट 29 अक्टूबर 2026 है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, उनके शेयर स्प्लिट हो जाएंगे। कंपनी ने इस कॉरपोरेट एक्शन को सितंबर महीने में मंजूरी दी थी।
चांदनी मशीन्स में सितंबर 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 20.97 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। स्टॉक स्प्लिट में एक कंपनी अपने मौजूदा शेयरों को छोटे टुकड़ों में तोड़ देती है। इससे निवेशकों के पास शेयरों की संख्या बढ़ जाती है लेकिन उसी अनुपात में प्रति शेयर कीमत घट जाती है। निवेशकों के निवेश की कुल वैल्यू नहीं बदलती।
इस कदम का मकसद शेयरों को किफायती बनाना होता है। बहुत ज्यादा कीमत वाले शेयर छोटे निवेशकों की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। स्प्लिट के बाद शेयर सस्ते हो जाते हैं, जिससे अधिक नए निवेशक जुड़ने की संभावना रहती है।
Chandni Machines का शेयर एक साल में 190 प्रतिशत मजबूत
कंपनी के शेयर की कीमत वर्तमान में BSE पर 102.13 रुपये है। मार्केट कैप 71 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर साल 2026 में अब तक 40 प्रतिशत चढ़ा है। एक साल में कीमत लगभग 190 प्रतिशत मजबूत हुई है। 3 साल में शेयर लगभग 340 प्रतिशत और 5 साल में 1000 प्रतिशत से ज्यादा बढ़त देख चुका है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 127.74 रुपये और एडजस्टेड लो 34 रुपये है।
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कंपनी की वित्तीय सेहत
चांदनी मशीन्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग 72 प्रतिशत गिरकर 44.50 लाख रुपये रहा। एक साल पहले यह 25.89 करोड़ रुपये था। जून 2026 तिमाही में कंपनी ने 1.98 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। एक साल पहले समान तिमाही में कंपनी 74.68 लाख रुपये के मुनाफे में थी। खर्च 3.74 करोड़ रुपये के रहे, जो जून 2025 तिमाही में 26 करोड़ रुपये के थे।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में 20 अक्तूबर को जोरदार तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 1.39 फीसदी की तेजी के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.78 फीसदी चढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गया। यह क्रूड ऑयल का बीते 5 महीनों का सबसे हाई लेवल है। क्रूड की यह तेजी न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को बड़ी चोट पहुंचा सकती है।
20 मई के बाद पहली बार क्रूड 111 डॉलर पर
क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी की वजह सऊदी अरब में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती विद्रोहियों के हमले हैं। गल्फ में भी ऑयल टैंकर्स सहित जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। 20 मई के बाद पहली बार क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। हालांकि, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रही हैं।
ब्रेंट क्रूड में जल्द ज्यादा नरमी का अनुमान नहीं
ING के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में क्रूड की कीमतों के आउटलुक के बारे में बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों को मौजूदा लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है। स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा है। हालांकि, क्रूड की सप्लाई जारी है, जिससे रिस्क प्रीमियम में धीर-धीरे कमी आ सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में नरमी आने के संकेत नहीं हैं।
गल्फ में लगातार हमलों का क्रूड की सप्लाई पर असर
केपलर (kpler) ने अपनी रिपोर्ट में सोमवार को बताया था कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 18 जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बना हुआ है। इधर, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब में एनर्जी, एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अरामको की साइट को भी निशाना बनाया गया है।
हूती विद्रियों का सऊदी अरब के इंफ्रा पर हमला जारी
हूती विद्रोहियों ने सोमवार को यमन में सुरक्षा बलों के एक प्रशिक्षण शिविर को निशान बनाया, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन नए हमलों से मध्यपूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा है। साथ ही इसका असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ रहा है। इस वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।
अमेरिका डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौते को मजबूर
उधर, अमेरिका में क्रूड ऑयल का रिजर्व पिछले हफ्ते गिरने का अनुमान है। अमेरिका में पहले से ही ऑयल खासकर डीजल की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इससे अमेरिका को डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौता करना पड़ा है। लेकिन, इससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्रूड में उछाल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खराब खबर है।
भारत सहित दुनियाभर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा
महंगे क्रूड की वजह से दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों को इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि की थी। इस महीने की 28 तारीख को फेड की पॉलिसी आने वाली है। महंगाई को काबू में करने के लिए फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इधर, भारत में इस महीने की शुरुआत में RBI ने रेपो रेट रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है।
20 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट
क्रूड में उछाल का असर 20 अक्तूबर को शेयर बाजारों पर देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार दशहरा के मौके पर बंद हैं। लेकिन, दूसरे एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.63 फीसदी नीचे चल रहा था। सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स 0.25 फीसदी गिरकर चल रहा था। हैंगसेंग में 1.38 फीसदी की गिरावट दिखी। ताइवान का सूचकांक 1.14 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया के बाजार कोस्पी में 3.88 फीसदी की गिरावट दिखी।

Tesla has launched a three-row long-wheelbase variant of the Model Y electric crossover in India. Christened the Model Y L, this new variant notably offers seating for up to six occupants, captain seats in the middle row and a stronger powertrain with a higher claimed range. Below, we lay out how the new Tesla Model Y L fares against its entry-level luxury EV rivals, namely the BYD Sealion 7, Kia EV6, BMW iX1 LWB, Volvo EC40 and Mini Countryman Electric on paper.
Tesla Model Y L vs rivals: Dimensions
Larger than rivals in every sense
Tesla Model Y L vs rivals: Dimensions compared | |||||
|---|---|---|---|---|---|
| L / W / H (mm) | Wheelbase (mm) | Ground clearance (mm) | Frunk / Boot (litres) | Wheel size (inches) | |
| Model Y L | 4,976 / 1,982 / 1,668 | 3,040 | 169 | 116 / 420 (all seats up) | 19 |
| Sealion 7 | 4,830 / 1,925 / 1,620 | 2,930 | 170 | 58 / 500 | 19 / 20 |
| iX1 LWB | 4,616 / 1,845 / 1,627 | 2,800 | 190 (estimated) | – / 490 | 18 |
| Countryman Electric | 4,445 / 1,843 / 1,635 | 2,692 | 165 | – / 460 | 19 |
| EC40 | 4,440 / 1,873 / 1,591 | 2,702 | 171 | 31 / 404 | 19 |
| EV6 | 4,695 / 1,890 / 1,570 | 2,900 | – | 20 / 490 | 19 |
The Model Y L beats its rivals in every dimension, and the Sealion 7 emerges as the second-biggest EV here overall. Tesla has slightly increased the Model Y L’s ground clearance vis-a-vis the standard wheelbase (SWB) version, though the iX1 LWB still rides the highest in this company. While the alloy wheel size remains unchanged for the Model Y L, it is mostly at par with rivals on this front.
Coming to boot space, Tesla claims a cavernous 2,539-litre cargo capacity for the Model Y L with the second and third rows folded. With all three rows of seating up, the Model Y L has an estimated boot space of 420 litres, which grows to around 1,076 litres with the third row folded, and there’s a 116-litre frunk too. All told, the Model Y L offers significantly higher total cargo capacity than the 5-seater EVs it rivals.
Tesla Model Y L vs rivals: Powertrain and performance
Sealion 7 AWD is the strongest and quickest to 100kph
Tesla Model Y L vs rivals: Battery, power, performance compared | |||||
|---|---|---|---|---|---|
| Model | Battery capacity (kWh) | Motor setup | Power (hp) | Drive layout | 0-100kph (seconds) |
| Model Y L | 88.2* | Dual | 514* | AWD | 4.5 |
| Sealion 7 | 82.56 | Single / Dual | 313 / 530 | RWD / AWD | 6.7 / 4.5 |
| iX1 LWB | 66.5 | Single | 204 | FWD | 8.6 |
| Countryman Electric | 66.5 | Single | 204 | FWD | 8.6 |
| EC40 | 78 | Dual | 408 | AWD | 4.7 |
| EV6 | 84 | Dual | 325 | AWD | 5.3 |
*Estimated figures
In addition to the longer body, Tesla has fitted the Model Y L with an 88.2kWh battery pack (85kWh net), which is larger than that of the standard model. It also gets a more powerful dual-motor powertrain, making the Model Y L the first Tesla car to offer AWD in India. While the Model Y L has the biggest battery pack among its rivals, its power output falls a bit short of that of the Sealion 7 AWD.
Regardless, the Model Y L is the second-most powerful EV here by a considerable margin. As for claimed 0-100kph times, the Model Y L matches the Sealion 7 AWD, ranking above the EC40, iX1 LWB, and Countryman Electric.
Tesla Model Y L vs rivals: Range and charging speeds
Model Y L features the highest WLTP-tested range
Tesla Model Y L vs rivals: Range and charging speeds compared | |||
|---|---|---|---|
| Model | Battery capacity (kWh) | Claimed range (km) | DC fast charging time^ |
| Model Y L | 88.2* | 681 (WLTP) | 288km in 15 min |
| Sealion 7 | 82.56 | 480 / 460 (WLTP) | 45 min |
| iX1 LWB | 66.5 | 531 (MIDC) | 32 min |
| Countryman Electric | 66.5 | 462 (WLTP) | 29 min |
| EC40 | 78 | 530 (WLTP) | 27 min |
| EV6 | 84 | 581 (WLTP) | 18 min |
^10-80 percent state of charge (SOC)
*Estimated
Thanks to its larger battery pack, the Model Y L widens the WLTP range lead that the standard model already holds over its rivals. The Model Y L’s range is 100km ahead of the EV6’s, which ranks second, and a whopping 221km more than that of the Sealion 7 AWD, which has the lowest WLTP range of 460km here.
Charging speeds are difficult to compare head-to-head, as Tesla has only confirmed that the Model Y L’s battery can be charged at up to 250kW DC and that it can add 288km of range in just 15 minutes. Keeping the Model Y L aside, the EV6 has the lowest 10-80 percent DC charging time, followed by the EC40, Countryman Electric, iX1 LWB and Sealion 7.
Tesla Model Y L vs rivals: Price
Model Y L is more affordable than the top-spec SWB version
Tesla Model Y L vs rivals: Prices compared | |
|---|---|
| Price range (Rs lakh) | |
| Model Y L | 61.99 |
| Sealion 7 | 49.40-54.90 |
| iX1 LWB | 51.40 |
| Countryman Electric | 55.65-60.70 |
| EC40 | 59.00 |
| EV6 | 65.96 |
Even though the Model Y L is larger, can accommodate more occupants and offers a stronger powertrain with a higher claimed range, it’s impressively priced at around Rs 6 lakh less than the top-spec Model Y Long Range RWD. That makes the Model Y L more affordable than the EV6, the priciest EV here, but costlier than the Sealion 7, Countryman Electric, iX1 LWB and EC40.
All prices are ex-showroom, India.
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मंगलवार को कहा है कि वह दिसंबर में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा, बांग्लादेश की मौजूदा तारिक रहमान सरकार मुझे गिरफ्तार कर सकती है, मार सकती है या टॉर्चर कर सकती है, लेकिन कितना भी खतरा हो, मुझे इसकी परवाह नहीं है। मुझे अपने देश लौटना ही है। उन्होंने आगे कहा कि वह तारिक रहमान की सरकार से डरती नहीं हैं और अपने देश वापस लौटना उनकी जिम्मेदारी है। हसीना अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। तब से वह भारत में रह रही हैं। हसीना ने भारत सरकार को शुक्रिया कहा शेख हसीना ने मुश्किल समय में उन्हें शरण देने के लिए भारत सरकार और लोगों का शुक्रिया किया। उन्होंने 1975 की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी भारत ने उन्हें सहारा दिया था। हसीना ने कहा, मैं भारत सरकार, यहां के लोगों और सभी राजनीतिक दलों की शुक्रगुजार हूं। उन्होंने मुझे वैसे ही अपनाया, जैसे 1975 में अपनाया था। दरअसल, 1975 में बांग्लादेश में सैन्य तख्तापलट के दौरान हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की हत्या कर दी गई थी। वह बांग्लादेश के संस्थापक थे। इस घटना में हसीना की मां, उनके तीन भाइयों और परिवार के कई दूसरे सदस्यों की भी हत्या कर दी गई थी। उस समय हसीना और उनकी बहन अपनी जान बचाने और सुरक्षा के लिए भारत आई थीं। हसीना बोलीं- मेरे खिलाफ मामले चलाकर विपक्ष को दबाया जा रहा शेख हसीना ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया कि वह उनके और उनकी पार्टी अवामी लीग के नेताओं के खिलाफ आपराधिक मामले चलाकर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं पर लगे आरोपों का फैसला निष्पक्ष सुनवाई के जरिए होना चाहिए। उनके मुताबिक, बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और सभी को शामिल करने वाली लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए अपनी सरकार चुनने का मौका मिलना चाहिए। हसीना के भारत आने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव शेख हसीना के भारत आने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बना हुआ है। बांग्लादेश की तारिक रहमान सरकार का कहना है कि हसीना की वापसी कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी। बांग्लादेश सरकार हसीना को भगोड़ा अपराधी बताती है। उसने भारत से कहा है कि हसीना को भारतीय जमीन से राजनीतिक गतिविधियां करने या राजनीतिक बयान देने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। दूसरी ओर, बांग्लादेश में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि शेख हसीना को पनाह देना भारत की मजबूरी थी। अगर भारत उन्हें उतरने की अनुमति नहीं देता तो स्थिति खराब हो सकती थी। दूसरी ओर, भारत ने बांग्लादेश की मौजूदा सरकार के साथ रिश्ते बनाए रखने में दिलचस्पी दिखाई है। प्रधानमंत्री मोदी उन शुरुआती नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने चुनाव में जीत के बाद तारिक रहमान को बधाई दी थी। रहमान की सरकार कई बार प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी तारिक रहमान सरकार ने कई बार हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। हसीना को वापस भेजने के मुद्दे का असर तारिक रहमान के भारत दौरे पर भी पड़ा है। भारत ने पिछले महीने हुए BRICS समिट में तारिक रहमान को शामिल होने का न्योता दिया था। इसके अलावा फरवरी से ही भारत की ओर से उन्हें अलग से भारत आने का निमंत्रण दिया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने एक भी बार भारत का दौरा नहीं किया। उनकी तरफ से हर बार हसीना को वापस लौटाने की शर्त रखी गई है। भारत-बांग्लादेश के बीच प्रत्यर्पण संधि है भारत और बांग्लादेश ने 2013 में प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को दूसरे देश को सौंपने से इनकार करने के प्रावधान हैं। इनमें राजनीतिक प्रकृति के अपराध से जुड़े मामले भी शामिल हैं। हसीना पर बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और मौतों से जुड़े गंभीर आरोप हैं। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार उन्हें वापस लाकर कानूनी कार्रवाई करना चाहती है। बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने नवंबर 2025 में हसीना और उनके तत्कालीन गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को मौत की सजा सुनाई थी। 15 सितंबर 2026 को हसीना सरकार के कुछ पूर्व सहयोगियों को भी सजा सुनाई गई। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की जांच के मुताबिक, जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। ——————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला-सऊदी ने बिना बताए हमारे नागरिकों को फांसी दी:मस्जिद में अश्लील हरकत करने पर पति-पत्नी को मौत की सजा मिली थी सऊदी अरब ने मक्का में पिछले बुधवार एक बांग्लादेशी पति-पत्नी को फांसी दे दी। दोनों को एक मस्जिद के अंदर अश्लील हरकत करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। पूरी खबर पढ़ें…
Food Safety : दूध और डेयरी प्रोडक्ट में डिटर्जेंट और यूरिया, घी में जानवर की चर्बी,लाल मिर्च पाउडर में लाल मिट्टी, धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, जीरा में घास के बीज और अब बिस्किट में जानवरों की खिलाने वाला भूसा!ये सब फूड रेगुलेटर के छापों पकड़ा गया और साबित हो चुका है, फिर भी भारत में मिलावट का खेल धड़ल्ले से जारी है आखिर क्यों? कैसे रुकेगा मिलावट का काला कारोबार? आज कंज्यूमर अड्डा में इसी पर बात की गई है।
सबसे पहले समझते हैं कि फसाई (FSSAI) के छापों में ताजा खुलासा क्या हुआ है। FSSAI ने कंज्यूर्स की शिकायत पर की जांच की तो पाया कि प्रिया गोल्ड बिस्किट में ‘फाइबर’ के सोर्स के रूप में जानवरों को खिलाने वाला चोकर का इस्तेमाल किया जा रहा था । जांच में मिली चोकर की बोरियों पर साफ लिखा था कि ये केवल मवेशियों के खाने के लिए है। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग प्लांट में साफ-सफाई और वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का भारी उल्लंघन भी पाया गया। FSSAI ने कंपनी का लाइसेंस निलंबित कर दिया है।
दूसरा मामला है दूध में डिटर्जेंट और कास्टिक सोडा मिलाने का। डोडला डेयरी (Dodla Dairy) के फुल क्रीम दूध के सैंपल स्टैंडर्ड टेस्टिंग में फेल हो गए। जब रेफरल लैब से जांच कराई गई तो दूध में डिटर्जेंट की पुष्टि हुई। इस दूध में फैट भी तय मात्रा से कम था और ये मानव शरीर के लिए असुरक्षित और हानिकारक घोषित किया गया।
तीसरा मामला है पीली किशमिश में जहरीला पेस्टिसाइड का। UEIR Organic Foods की पीली किशमिश के सैंपल में तय सीमा से ज्यादा कीटनाशक पाए गए। कंज्यूमर इस प्रोडक्ट को ‘ऑर्गेनिक’ और हेल्दी मानकर खा रहे हैं। जबकि इनमें मौजूद केमिकल अवशेष उल्टा सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हां अब तक तो आप यह जान ही गए होंगे की फसाई (FSSAI) भारत का फूड रेग्यूलेटर है।
मिलावट के तरीके
दूध और डेयरी उत्पाद में डिटर्जेंट, यूरिया, स्टार्च मिलाया जाता है। वहीं, घी और मक्खन में वेजीटेबल तेल, चर्बी, स्टार्च मिलाया जाता है। हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट और मेटानिल येलो मिला जाता है। लाल मिर्च पाउडर में ईंट का चूरा और लाल मिट्टी मिलाई जाती है। धनिया पाउडर में लकड़ी का बुरादा, गोबर और भूसी मिलाई जाती है। काली मिर्च में पपीते के बीज मिला दिए जाते हैं। जीरा में घास के बीज और झाड़ू के तिनके मिला दिए जाते हैं। हींग में स्टार्च, गोंद और राल मिलाए जाते हैं। वहीं, सरसों के तेल में आर्जिमोन तेल और सस्ता पाम ऑयल मिला दिया जाता है। शहद में चीनी की चाशनी, राइस सिरप गुड़ का घोल मिलाया जाता है। वहीं, चीनी और गुड़ में चाक पाउडर और वॉशिंग सोडा मिला दिया जाता है। हरी सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन की मिलावट की जाती है। वहीं, फल पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एथिलीन गैस का इस्तेमाल होता है।
मिलावट की सजा
मानक पूरे ना करने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकता है। सब-स्टैंडर्ड खाद्य पदार्थ के लिए 5 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। गलत ब्रांडिंग/भ्रामक प्रचार के लिए 3-10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। असुरक्षित भोजन पर 6 महीने तक जेल और 1 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। भोजन से चोट या बीमारी होने पर 1 साल जेल की जेल और 3 लाख जुर्माना हो सकता है। भोजन से गंभीर बीमारी होने पर 6 साल जेल और 5 लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। भोजन से मृत्यु होने पर आजीवन कारावास और 10 लाख जुर्माना लगाया जा सकता है।
यहां दर्ज करें शिकायत
FSSAI के Food Safety Connect ऐप पर और FSSAI के टोल-फ्री नंबर पर मिलावट की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
खरीदारी के समय इन बातों पर ध्यान दें
पैकिंग पर FSSAI लाइसेंस नंबर होना चाहिए। एगमार्क (Agmark) / FSSAI लोगो होना चाहिए। अनचाही या असामान्य महक/स्वाद नहीं होना चाहिए। विश्वसनीय और सीलबंद पैकेट ही खरीदें।
जापान ने आज 20 अक्टूबर को मंगल ग्रह के सबसे बड़े चांद ‘फोबोस’ के लिए मिशन लॉन्च किया है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन के तहत तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए करीब 5 टन का स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा गया है। मिशन का मकसद फोबोस पर लैंड करना, वहां की मिट्टी-धूल के नमूने जुटाना और उन्हें साल 2031 तक धरती पर वापस लेकर आना है। जापान का पिछला मंगल मिशन नाकाम रहा था, हालांकि उसने दो बार एस्टेरॉयड से नमूने लाकर काबिलियत साबित की है। मंगल के दोनों चांद फोबोस और डीमॉस पर आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। मंगल या उसके चांद से मिट्टी का एक टुकड़ा भी अब तक धरती पर नहीं लाया जा सका है। अगर जापान यह कर लेता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा। स्पेसक्राफ्ट मंगल पर अगले साल पहुंचेगा, 2031 में वापस लौटेगा सतह पर गेंद की तरह कुछ देर उछलता रहेगा रोवर फोबोस पर उतरने वाले रोवर का नाम ‘इडेफिक्स’ है। यह एक छोटे माइक्रोवेव ओवन जितना बड़ा है और इसमें 4 पहिए लगे हैं। फोबोस पर ग्रैविटी बहुत ही कम है, इसलिए रोवर सतह पर गिरते ही गेंद की तरह कुछ मिनट तक उछलता रहेगा और फिर जाकर टिकेगा। अगर यह उल्टा गिरता है, तो खुद को सीधा कर लेगा। पर एक बार इसके सोलर पैनल खुल गए, तब यह खुद सीधा नहीं हो पाएगा। किसी गड्ढे या ढीली मिट्टी में फंसने से बचने के लिए यह बहुत संभलकर महज 1 मिलीमीटर प्रति सेकंड की धीमी चाल से चलेगा। रोवर 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा इडेफिक्स रोवर करीब 100 दिनों तक फोबोस पर घूमेगा। उसका काम मुख्य लैंडर के लिए एक सुरक्षित जगह तलाशना है, ताकि लैंडर किसी रेतीले दलदल या नुकीले पत्थरों में न फंसे। सुरक्षित जगह मिलने पर चार पैरों वाला लैंडर सतह पर उतरेगा। वह वहां सिर्फ 2 घंटे रुकेगा। ड्रिल और वैक्यूम सिस्टम से 10 ग्राम मिट्टी-पत्थर बटोरेगा और फौरन अंतरिक्ष में लौट जाएगा। दो सवालों का जवाब तलाश रहे वैज्ञानिक 1. क्या यह चांद मंगल से किसी उल्कापिंड के टकराने के बाद टूटे टुकड़ों से बना? 2. यह अंतरिक्ष में भटकता हुआ कोई एस्टेरॉयड था, जिसे मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने पकड़ लिया? इसके अलावा, फोबोस की धूल में मंगल के पुराने कण भी मिल सकते हैं। इससे एक ही बार में मंगल और उसके चांद दोनों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रह कैसे बने और क्या वहां कभी जीवन पनपने के हालात थे। चीन-अमेरिका भी मंगल से सैंपल लाने की तैयारी में इस रेस में चीन भी शामिल है। चीन 2028 में मंगल की सतह से सैंपल लाने का मिशन शुरू करेगा और वह भी 2031 तक सैंपल लाने का टारगेट बना रहा है। उधर अमेरिका का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल की सतह पर 30 से ज्यादा ट्यूब्स में मिट्टी भर चुका है, लेकिन उसे धरती पर लाया जायेगा यह तय नहीं है।
जापान ने आज 20 अक्टूबर को मंगल ग्रह के सबसे बड़े चांद ‘फोबोस’ के लिए मिशन लॉन्च किया है। मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन मिशन के तहत तानेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए करीब 5 टन का स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में भेजा गया है। मिशन का मकसद फोबोस पर लैंड करना, वहां की मिट्टी-धूल के नमूने जुटाना और उन्हें साल 2031 तक धरती पर वापस लेकर आना है। मंगल के दोनों चांद फोबोस और डीमॉस पर आज तक दुनिया का कोई भी देश नहीं पहुंच पाया है। मंगल या उसके चांद से मिट्टी का एक टुकड़ा भी अब तक धरती पर नहीं लाया जा सका है। अगर जापान यह कर लेता है, तो यह इतिहास में पहली बार होगा। स्पेसक्राफ्ट मंगल पर अगले साल पहुंचेगा, 2031 में वापस लौटेगा सतह पर गेंद की तरह कुछ देर उछलता रहेगा रोवर फोबोस पर उतरने वाले रोवर का नाम ‘इडेफिक्स’ है। यह एक छोटे माइक्रोवेव ओवन जितना बड़ा है और इसमें 4 पहिए लगे हैं। फोबोस पर ग्रैविटी बहुत ही कम है, इसलिए रोवर सतह पर गिरते ही गेंद की तरह कुछ मिनट तक उछलता रहेगा और फिर जाकर टिकेगा। अगर यह उल्टा गिरता है, तो खुद को सीधा कर लेगा। पर एक बार इसके सोलर पैनल खुल गए, तब यह खुद सीधा नहीं हो पाएगा। किसी गड्ढे या ढीली मिट्टी में फंसने से बचने के लिए यह बहुत संभलकर महज 1 मिलीमीटर प्रति सेकंड की धीमी चाल से चलेगा। रोवर 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा इडेफिक्स रोवर करीब 100 दिनों तक फोबोस की जमीन पर घूमेगा। उसका काम मुख्य लैंडर के लिए एक सुरक्षित जगह तलाशना है, ताकि लैंडर किसी रेतीले दलदल या नुकीले पत्थरों में न फंसे। सुरक्षित जगह मिलने पर चार पैरों वाला लैंडर सतह पर उतरेगा। वह वहां सिर्फ 2 घंटे रुकेगा। ड्रिल और वैक्यूम सिस्टम से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी-पत्थर बटोरेगा और फौरन अंतरिक्ष में लौट जाएगा। दो सवालों का जवाब तलाश रहे वैज्ञानिक 1. क्या यह चांद मंगल से किसी उल्कापिंड के टकराने के बाद टूटे टुकड़ों से बना? 2. यह अंतरिक्ष में भटकता हुआ कोई एस्टेरॉयड था, जिसे मंगल के गुरुत्वाकर्षण ने पकड़ लिया? इसके अलावा, फोबोस की धूल में मंगल के पुराने कण भी मिल सकते हैं। इससे एक ही बार में मंगल और उसके चांद दोनों की जानकारी मिल जाएगी, जिससे यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रह कैसे बने और क्या वहां कभी जीवन पनपने के हालात थे। रूस फोबोस पर जाने की 3 बार कोशिश कर चुका रूस ने फोबोस पर जाने के लिए 3 बार कोशिश की, लेकिन तीनों ही मिशन फेल हो गए। जापान का भी पिछला मंगल मिशन नाकाम रहा था, हालांकि उसने दो बार एस्टेरॉयड से नमूने लाकर अपनी काबिलियत साबित की है। नासा के भी मंगल से जुड़े कई मिशन पहले असफल हो चुके हैं। चीन-अमेरिका भी मंगल से सैंपल लाने की तैयारी में इस रेस में चीन भी शामिल है। चीन 2028 में मंगल की सतह से सैंपल लाने का मिशन शुरू करेगा और वह भी 2031 तक सैंपल लाने का टारगेट बना रहा है। उधर अमेरिका का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल की सतह पर 30 से ज्यादा ट्यूब्स में मिट्टी भर चुका है, लेकिन उसे धरती पर लाया जायेगा यह तय नहीं है।
Neogen Chemicals Share Price: पिछले 6 महीनों में अच्छे रिटर्न के बाद घरेलू ब्रोकरेज फर्म ‘एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग’ ने Neogen Chemicals पर कवरेज शुरू किया है। उन्होंने इसे ‘Buy’ की रेटिंग दी है और ₹3,050 का टारगेट प्राइस तय किया है। इसका मतलब है कि ₹2,482 के मौजूदा मार्केट प्राइस से इसमें लगभग 23% की तेजी आ सकती है।
ब्रोकरेज का मानना है कि स्पेशलिटी केमिकल्स बनाने वाली यह कंपनी अब कमाई में तेज बढ़ोतरी के दौर में प्रवेश करने वाली है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि कंपनी का बैटरी केमिकल्स का कारोबार बढ़ रहा है, जिसे घरेलू बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, ग्राहकों की मंजूरी और चीन के बाहर की सप्लाई चेन में मिल रहे मौकों का समर्थन मिल रहा है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने कहा Neogen Chemicals के पास एक मजबूत स्पेशलिटी केमिकल्स कारोबार है और साथ ही बैटरी के क्षेत्र में भी बड़े मौके हैं। चूंकि प्लांट काफी हद तक तैयार हो चुके हैं और ग्राहकों द्वारा मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है, इसलिए मुख्य रुकावटें अब पीछे छूट गई हैं। अब कमाई में तेजी आना बाकी है, जो विकास और री-रेटिंग का एक बेहतरीन मौका बनाता है।”
ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY26 से FY30 के बीच Neogen का रेवेन्यू, EBITDA और टैक्स के बाद का एडजस्टेड प्रॉफिट (PAT) क्रमशः 45%, 49% और 87% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा। हालांकि, इस निवेश की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि नई सुविधाएं समय पर शुरू होती हैं या नहीं, ग्राहक कितना माल खरीदते हैं, और कंपनी अपने बढ़े हुए कर्ज को कैसे संभालती है।
ब्रोकरेज स्टॉक पर बुलिश क्यों
आने वाले वर्षों में बैटरी केमिकल्स, नियोजेन के विकास का सबसे बड़ा जरिया बनने की उम्मीद है। इसकी सब्सिडियरी कंपनी, ‘नियोजेन आयोनिक्स’, बैटरी इलेक्ट्रोलाइट और लिथियम हेक्साफ्लोरोफॉस्फेट (LiPF6) बनाती है। LiPF6 एक महत्वपूर्ण सॉल्ट है जिसका इस्तेमाल लिथियम-आयन बैटरी में किया जाता है। कंपनी इसके लिए ‘MU आयोनिक सॉल्यूशंस’ की जापानी मैन्युफैक्चरिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है और जापान की ‘मोरिता’ के साथ एक जॉइंट वेंचर के जरिए अपना सॉल्ट कारोबार चलाती है।
एंटीक का अनुमान है कि नियोजेन के कुल रेवेन्यू में बैटरी केमिकल्स का हिस्सा FY26 के 4% से बढ़कर FY30 तक 62% हो जाएगा। FY26 तक यह सेगमेंट घाटे में था, क्योंकि उस दौरान इलेक्ट्रोलाइट और सॉल्ट बनाने की सुविधाएं तैयार हो रही थीं और ग्राहकों से मंजूरी लेने की प्रक्रिया चल रही थी। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि FY27 तक यह कारोबार EBITDA के स्तर पर ‘ब्रेक-ईवन’ (यानी बिना नुकसान या मुनाफे की स्थिति) तक पहुंच जाएगा। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि, “कमीशनिंग में देरी के कारण काम की गति (रैंप-अप) कुछ आगे खिसक गई है, लेकिन इससे मध्यम अवधि की कमाई के अनुमानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि FY30E (वित्त वर्ष 2030) के हमारे अनुमान जिन क्षमताओं और ग्राहकों की मंजूरी पर आधारित हैं, वे पहले से ही मौजूद हैं।”
ब्रोकरेज का मानना है कि ग्राहकों द्वारा दी जाने वाली योग्यता(क्वालिफिकेशन) कंपनी को एक प्रतिस्पर्धी बढ़त दिला सकती है। इस तरह की मंजूरी मिलने में 12-24 महीने लग सकते हैं, और एक बार किसी उत्पाद को मंजूरी मिल जाने के बाद, बैटरी निर्माता आमतौर पर अपने सप्लायर को बदलना नहीं चाहते। नियोजेन ने अमेरिका के तीन इलेक्ट्रोलाइट निर्माताओं के साथ अपने प्लांट का अंतिम ऑडिट पूरा कर लिया है। इससे कंपनी उन अमेरिकी टैक्स-क्रेडिट नियमों से जुड़ी मांग को पूरा करने की स्थिति में आ गई है, जो 2027 से कुछ चीनी सप्लायरों से सामान लेने पर रोक लगाते हैं।
भारत में बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ने के साथ, घरेलू स्तर पर भी अवसर बढ़ सकते हैं। नियोजेन की दहेज और पाखाजन इकाइयां स्थानीय सेल निर्माताओं को सेवा देने के लिए तैयार हैं, जबकि इसकी लिथियम सॉल्ट क्षमता निर्यात के अतिरिक्त अवसर प्रदान करती है। बैटरी रसायनों के अलावा, कंपनी का स्पेशलिटी केमिकल्स का स्थापित कारोबार कमाई का एक स्थिर आधार देता है। इसे कॉन्ट्रैक्ट सिंथेसिस एंड मैन्युफैक्चरिंग (CSM), एडवांस्ड इंटरमीडिएट्स और दहेज प्लांट में आग लगने की घटना के बाद उत्पादन में हुए सुधार से भी मजबूती मिलती है।
स्टॉक का परफॉर्मेंस
इस केमिकल स्टॉक में पिछले 3 महीनों में 14%, 6 महीनों में 64% और पिछले 1 साल में 70% की तेजी आई है। हालांकि, हाल के समय में इसमें 1 हफ्ते में 2% और पिछले 1 महीने में 0.3% की गिरावट देखी गई है। अक्टूबर 2026 में यह स्टॉक अपने 52-हफ्तों के उच्चतम स्तर ₹2785 पर पहुंच गया था, जबकि दिसंबर 2025 में यह अपने 52-हफ्तों के निचले स्तर ₹978 पर था।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में राज्य के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल सिंगर के प्रदर्शन पर नाराजगी जताते नजर आए। इसके बाद दलेर मेहंदी पर शराब पीकर स्टेज पर आने के आरोप लगाए गए। अब उनके भाई और सिंगर मिका सिंह ने इन आरोपों पर खुलकर अपनी बात रखी है। मिका ने यहां तक कह दिया कि अगर कोई दलेर मेहंदी को शराब पीते हुए देखने का दावा साबित कर दे, तो वह सिंगिंग छोड़ देंगे।
‘दलेर मेहंदी ने कभी शराब नहीं पी’, मिका सिंह का दावा
मिका सिंह ने अपने भाई का बचाव करते हुए शराब पीने के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि दलेर मेहंदी का नाम कभी शराब पीने से नहीं जुड़ा और उनके खिलाफ इस तरह की बातें करना ठीक नहीं है। मिका ने अपने बयान में चुनौती देते हुए कहा कि अगर किसी एक व्यक्ति के पास भी ऐसा सबूत है कि उसने दलेर मेहंदी को शराब पीते देखा है, तो वह संगीत की दुनिया छोड़ने के लिए तैयार हैं। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
तबीयत खराब होने के बावजूद स्टेज पर पहुंचे थे दलेर?
मिका सिंह ने यह भी बताया कि दलेर मेहंदी पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं और उनकी बड़ी सर्जरी भी हुई थी। मिका के मुताबिक, संभव है कि खराब तबीयत के बावजूद पहले से किया गया वादा निभाने के लिए दलेर कार्यक्रम में पहुंचे हों।
उन्होंने बताया कि कलाकार कई बार बीमारी और थकान के बावजूद अपने तय कार्यक्रम पूरे करते हैं। मिका ने कहा कि अगर किसी कलाकार ने शो के लिए हामी भर दी है, तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने की कोशिश करता है, भले ही उसकी तबीयत ठीक न हो। हालांकि, दलेर मेहंदी की तबीयत को लेकर मिका की ओर से दी गई इस सफाई के बीच शराब पीने के आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
35 लाख रुपये की फीस और लिप-सिंकिंग पर उठा सवाल
यह विवाद उत्तराखंड के टिहरी जिले में नवरात्रि के दौरान आयोजित कुंजापुरी मेले का है। 18 अक्टूबर को हुए कार्यक्रम में दलेर मेहंदी की प्रस्तुति के बीच मंत्री सुबोध उनियाल मंच पर पहुंचे और नाराजगी जताई।
मंत्री ने आरोप लगाया कि सिंगर मंच पर ठीक से गा नहीं रहे थे और गानों पर केवल लिप-सिंक कर रहे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कार्यक्रम के लिए दलेर मेहंदी को 35 लाख रुपये दिए गए थे, इसलिए उनसे बेहतर प्रस्तुति की उम्मीद थी। उनियाल ने धार्मिक आयोजन में कथित तौर पर शराब पीकर प्रस्तुति देने पर भी आपत्ति जताई। हालांकि, शराब के नशे में होने का आरोप साबित नहीं हुआ है।
#WATCH | Uttarakhand: On a viral video of him losing his cool at singer Daler Mehndi at an event, State Minister Subodh Uniyal says, “He is a big artist. If a big artist doesn’t do justice to their art…He seemed disoriented on stage and didn’t seem to be able to even keep standing. Besides this, he was only lip-syncing to his songs. I told him that he is a big artist and he should do justice to his art; he had been offered Rs 35 lakh to come and perform, but he was not even singing. So, I expressed my resentment…”
— ANI (@ANI) October 19, 2026
अब विवाद के बीच चर्चा में हैं दोनों भाई
एक तरफ मंत्री ने दलेर मेहंदी की प्रस्तुति पर सवाल उठाए हैं, तो दूसरी तरफ मिका सिंह अपने भाई के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में दोनों पक्षों के बयानों के कारण सोशल मीडिया पर बहस जारी है।
अब देखने वाली बात होगी कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और दलेर मेहंदी की ओर से इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।


