Electronics Manufacturing: सरकार ने ₹7877 करोड़ के 31 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, Wipro समेत कई कंपनियों के शेयर फोकस में

Electronics Manufacturing: केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹7,877 करोड़ के 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स से ₹82,243 करोड़ का प्रोडक्शन होने की उम्मीद है। इस मंजूरी के बाद Wipro, PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं।

निवेश लक्ष्य से आगे निकली योजना

नए प्रोजेक्ट्स के बाद ECMS के तहत मंजूर कुल निवेश ₹69,548 करोड़ पहुंच गया है। यह स्कीम के शुरुआती ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से ज्यादा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक 106 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 38 प्रोजेक्ट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं, 16 प्रोजेक्ट्स पर निर्माण का काम चल रहा है।

इन कंपनियों को मिली मंजूरी

कंपनीमंजूर निवेश
Wipro Global Engineering₹1,401 करोड़
Micromax Precision Moulding₹565 करोड़
PCBL Chemical₹329 करोड़
Minda Instrument₹270 करोड़
Centum Electronics (दो प्रोजेक्ट)₹106 करोड़
VVDN Technologies₹100 करोड़
Mitsubishi Electric₹99 करोड़
Syrma SGS₹60 करोड़

10 राज्यों में लगेंगे नए प्रोजेक्ट

MeitY सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि ये प्रोजेक्ट 10 राज्यों में लगाए जाएंगे। इनमें कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट शामिल हैं।

कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल को भी मंजूरी मिली है। कैपिटल गुड्स और एनोड मटेरियल भी इसमें शामिल हैं। कनेक्टर्स, स्पीकर्स और माइक्रोफोन को भी मंजूरी दी गई है। एंटेना, कैपेसिटर, फिल्टर और रेयर अर्थ मैग्नेट भी इस सूची का हिस्सा हैं। कॉपर-क्लैड लैमिनेट जैसे प्रोडक्ट्स को भी मंजूरी मिली है।

हर हफ्ते हो रही हैं मंजूरियां

एस. कृष्णन ने कहा कि उद्योग से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी वजह से सरकार अब लगभग हर हफ्ते या 10 दिन में मंजूरी बैठकें कर रही है। जिन कैटेगरी में आवेदन खुले हैं, उनमें जुलाई 2027 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

कई प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू

कई मंजूर प्रोजेक्ट्स में काम शुरू हो चुका है। कुछ जल्द कमर्शियल प्रोडक्शन तक पहुंच सकते हैं।

इनमें Tata Electronics का होसुर प्लांट शामिल है। Dixon Technologies का नोएडा प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है। Kaynes का चेन्नई के पास PCB प्लांट तैयार हो रहा है। Motherson का कांचीपुरम प्लांट और Wipro का लैमिनेट प्लांट भी प्रगति पर हैं।

सरकार ने क्या कहा?

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि निवेश का लक्ष्य पार हो गया है। लेकिन घरेलू डिजाइन क्षमता और स्वदेशी सप्लाई चेन पर अभी और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में Six Sigma जैसे उच्च गुणवत्ता मानक अपनाना भी जरूरी है। Six Sigma एक मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल का तरीका है। इसका मकसद प्रोडक्शन में गलती को लगभग शून्य तक लाना होता है।

केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में ECMS का आवंटन ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया था। इस स्कीम को मार्च 2025 में मंजूरी मिली थी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत में 500 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन हासिल करना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आधी वजनी लेकिन दोगुनी घातक! भारत की BrahMos-NG के सामने दुश्मन के एयर डिफेंस फेल, जानिए ब्रह्मोस और NG में क्या है फर्क

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक के रूप में अपनी खास पहचान बनाई है। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल होने के बाद से इसने देश की हमलावर क्षमता को काफी मजबूत किया है। अब इसी कड़ी में एक नया नाम चर्चा का विषय बना है और वो है ‘ब्रह्मोस एनजी’ (BrahMos Next Generation)। आइए समझते हैं भारत के इस नए विनाशक हथियार की जर्नी और ये भी जानते हैं कि ये मूल ब्रह्मोस से कितनी अलग है, क्या-क्या खास है इसमें?

क्यों पड़ी ब्रह्मोस NG को विकसित करने की जरूरत?

आपतो बता दें कि ब्रह्मोस मिसाइल जमीन पर हमला करने और समुद्री जहाजों को निशाना बनाने वाले ऑपरेशन में काफी सफल रही। इसके बावजूद अपने भारी-भरकम आकार और वजन की वजह से इसे ले जाने सकने वाले विमान कम थे। काफी वजन होने की वजह से भारतीय वायु सेना के मौजूदा विमानों में मूल ब्रह्मोस मिसाइल को सिर्फ सुखोई सु-30एमकेआई (Su-30MKI) फाइटर जेट पर ही तैनात किया जा सकता है। ब्रह्मोस एनजी का डेवलपमेंट इसी चुनौती से पार पाने के लिए किया गया है। सुपरसोनिक रफ्तार को बरकरार रखते हुए इसके छोटे आकार और कम वजन की वजह से भारत इसे कई तरह के लड़ाकू और नौसैनिक विमानों पर तैनात करने की योजना बना रहा है। इससे सशस्त्र बलों को अपने अभियानों में अधिक संख्या में मिसाइलों का इस्तेमाल करने की सुविधा मिलेगी।

आकार और वजन में बड़ा बदलाव

दोनों मिसाइलों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके आकार और वजन का है। मूल ब्रह्मोस मिसाइल लगभग 8.4 मीटर लंबी है और इसके हवा से दागे जाने वाले वर्जन का वजन करीब 3 टन है। इसके उलट ब्रह्मोस एनजी करीब 6 मीटर लंबी होगी और इसका वजन करीब 1.3 से 1.6 टन के बीच होगा। अपने छोटे और कॉम्पैक्ट डिजाइन की वजह से इसे कई अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर ले जाना और तैनात करना बहुत आसान हो जाएगा। जो विमान अभी मूल ब्रह्मोस को ले जाने में सक्षम नहीं हैं, वे भी इस नई मिसाइल को ले जा सकेंगे। इसके अलावा आकार छोटा होने से एक ही फाइटर जेट एक भारी मिसाइल के बजाय कई ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकता है जिससे लड़ाकू विमान की हमलावर क्षमता काफी बढ़ जाती है।

रफ्तार और रेंज में नहीं होगी कोई कमी

मिसाइल का आकार छोटा करने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि इसकी रफ्तार से कोई समझौता किया गया है। ब्रह्मोस एनजी से उसी सुपरसोनिक क्षमता को बनाए रखने की उम्मीद है जिसने पुरानी ब्रह्मोस को दुनिया भर में फेसम बनाया है। मौजूदा ब्रह्मोस करीब 3 मैक की रफ्तार से उड़ान भरती है, जिससे यह सबसोनिक क्रूज मिसाइलों की तुलना में अपने टारगेट तक बहुत तेजी से पहुंचती है। इसकी तेज स्पीड दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को रिएक्शन देने का बेहद कम वक्त देती है और इसीलिए इसे हवा में रोकना बेहद कठिन हो जाता है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मुताबिक ब्रह्मोस एनजी भी करीब 3 मैक की गति से उड़ान भरेगी।

रेंज के मामले में भी मूल ब्रह्मोस मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में भारत के शामिल होने के बाद अपनी शुरुआती 290 किमी की सीमा से काफी आगे बढ़ चुकी है। ब्रह्मोस एनजी भी उसी के समकक्ष ऑपरेटिंग रेंज देगी, जबकि इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, गाइडेंस सिस्टम और टोटोल एफिशियंसी में सुधार देखने को मिलेगा।

कई फाइटर जेट्स से दागी जा सकेगी मिसाइल

मूल ब्रह्मोस मोबाइल लैंड लॉन्चर्स, भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और विशेष रूप से संशोधित सु-30एमकेआई लड़ाकू विमानों से फायर होती है। हल्की ब्रह्मोस एनजी सु-30एमकेआई के अलावा तेजस एमके1ए (Tejas Mk1A), एचएएल तेजस एमके2 (HAL Tejas Mk2), टीइडीबीएफ (TEDBF) और भविष्य में एएमसीए (AMCA) जैसे उन्नत लड़ाकू विमानों के साथ इंटिग्रेट हो सकती है। इससे भारतीय वायु सेना अपनी पूरी फ्लीट के माध्यम से इन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को तैनात कर सकेगी।

गाइडेंस, सटीकता और पेलोड क्षमता

ब्रह्मोस ने न सिर्फ अपनी रफ्तार बल्कि अपनी अचूक क्षमता की वजह से भी फेमस है। यह चलते हुए जहाजों और जमीन पर बने दुश्मन के ठिकानों को सटीक निशाना बनाने के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम, सैटेलाइट नेविगेशन और टर्मिनल फेज़ में एक्टिव रडार सीकर का इस्तेमाल करती है। ब्रह्मोस एनजी इन्हीं सिद्धांतों पर काम करेगी, लेकिन नए इलेक्ट्रॉनिक्स और छोटे आकार की वजह से इसके ऑनबोर्ड सिस्टम टारगेट को खोजने और नेविगेशन में ज्यादा बेहतर होंगे।

आकार छोटा होने की वजह से ब्रह्मोस एनजी का पेलोड वजन थोड़ा कम होगा। मूल ब्रह्मोस करीब 200 से 300 किग्रा का पारंपरिक वॉरहेड ले जाती है, जो भारी सुरक्षा वाले सैन्य ठिकानों को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है। ब्रह्मोस एनजी लगभग 200 किग्रा का थोड़ा हल्का वॉरहेड ले जाएगी। पेलोड हल्का होने के बावजूद यह युद्धपोतों, कमांड सेंटरों, रडार प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हाई वैल्यू टारगेट्स का काम तमाम कर पाएगी।

एक ही विमान से दागी जा सकेंगी कई मिसाइलें

ब्रह्मोस एनजी का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा यह है कि एक विमान अब ज्यादा मिसाइलें ले जा सकेगा। पहले वाली ब्रह्मोस भारी होने की वजह से एक सु-30एमकेआई विमान आमतौर पर एक मिशन के दौरान सिर्फ एक ही मिसाइल ले जा पाता है। हल्की ब्रह्मोस एनजी इस समीकरण को बदल देगी। वही विमान अब तीन ब्रह्मोस एनजी मिसाइलें ले जा सकेगा।

कौन सी मिसाइल है ज्यादा बेहतर?

ये बात मिसाइल के स्पेसिफिकेशन के बजाय मिशन की जरूरत पर डिपेंड करती है। मूल ब्रह्मोस एक बेहद प्रभावी मिसाइल है जो पहले से ही तीनों सेनाओं में सेवा दे रही है। यह अधिकतम मारक क्षमता वाले अभियानों के लिए इस्तेमाल होती रहेगी। ब्रह्मोस एनजी, मूल मिसाइल की जगह लेने के लिए नहीं बल्कि उसके सप्लिमेंट के रूप में काम करेगी। जहां अधिकतम विनाशात्मक क्षमता की जरूरत होगी वहां मूल ब्रह्मोस का इस्तेमाल किया जाएगा और जहां लड़ाकू विमानों की क्षमता बढ़ाने और एक साथ कई मिसाइलें दागने की जरूरत होगी वहां ब्रह्मोस एनजी काम आएगी। भारतीय सशस्त्र बल इन दोनों मिसाइलों का एक साथ इस्तेमाल करेंगे।

McDonald’s ने लॉन्च किया सावन स्पेशल मेन्यू, बिना प्याज-लहसुन के मिलेगा बर्गर, पोस्ट पर भड़के लोग

मैकडॉनल्ड्स का नया मेन्यू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मैकडॉनल्ड्स ने भारतीय ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए सावन महीने के लिए एक खास मेन्यू पेश किया है। सावन के महीने में कई लोग नॉनवेज नहीं खाते हैं। वहीं कुछ लोग सावन के महीने में लहसुन और प्याज भी नहीं खाते हैं। इसी को देखते हुए कंपनी ने अपने सावन स्पेशल मेन्यू में सिर्फ वेजिटेरियन आइटम शामिल किए हैं। इस नए मेन्यू की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई है। लोग इसे लेकर अलग-अलग रिएक्शन दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

X पर एक यूजर ने McDonald’s के एक आउटलेट पर लगे सावन स्पेशल मेन्यू की तस्वीर शेयर की। पोस्ट में उसने मजाकिया अंदाज में लिखा कि, उन्होंने पहली बार McDonald’s को उपवास के लिए खाना बेचते हुए देखा है। तस्वीर में दो सावन कॉम्बो नजर आ रहे हैं, जिनमें अनसाल्टेड फ्राइज और शेक शामिल हैं। इसके अलावा मेन्यू में सिग्नेचर 7 वेजीज बर्गर, मैकआलू टिक्की नॉन-बर्गर और मैक्सिकन मैकआलू टिक्की नॉन-बर्गर जैसे ऑप्शन भी दिए गए हैं।

McDonald’s का ये खास मेन्यू उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो सावन के दौरान नॉन-वेज के साथ प्याज और लहसुन से भी परहेज करते हैं। इसी को देखते हुए कंपनी ने ग्राहकों के लिए अलग तरह के खाने के विकल्प पेश किए हैं।

लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन

McDonald’s के सावन स्पेशल मेन्यू की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग रिएक्शन दे रहे हैं। कुछ लोगों ने इस पहल को पसंद किया और मेन्यू को लेकर उत्साह दिखाया, जबकि कुछ यूजर्स ने सवाल उठाए। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “मेरे खानदान में पहली बार किसी को ‘उपवास’ में दावत करते देखा है।” एक और यूजर ने लिखा, “जब हमें मैकसाबूदाना टिक्की बर्गर मिले तो मुझे जगा देना।”

कुछ लोगों ने उठाए सवाल

एक और यूजर ने मेन्यू पर नाराजगी जताते हुए लिखा, “यह बकवास है। नॉन-वेज किचन में तैयार किया गया खाना इस ऑफर के मकसद को ही खत्म कर देता है। दुख की बात है कि लोग इसके सात्विक महत्व को समझने के बजाय सिर्फ कूल दिखने या किसी और वजह से ऐसी जगहों पर खाना पसंद करते हैं।” एक अन्य यूजर ने कहा, “पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे उपवास का खाना नहीं माना जा सकता। व्रत के खाने में साबूदाना और फल जैसी चीजें होनी चाहिए। ग्लूटेन होने की वजह से यह उपवास के लिए सही नहीं है। इस तरह के खाने में धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

नेपाल ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को दिया बड़ा सम्मान, नेपाली आर्मी, भारत संग रिश्ते को नई ताकत देने की कवायद

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने नेपाली सेना के जनरल का मानद पद दिया। यह सम्मान काठमांडू के राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में दिया गया। यह सम्मान भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच लंबे समय से चली आ रही खास परंपरा का हिस्सा है। दोनों देशों की सेनाओं के प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद पद देने की परंपरा रही है।

नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने  मानद पद दिया

जनरल धीरज सेठ सोमवार को तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर नेपाल पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा 17 से 19 अगस्त तक है। इसका मकसद भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों को और मजबूत करना है। यात्रा के दौरान उन्होंने काठमांडू स्थित नेपाली सेना के मुख्यालय में औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने टुंडिखेल के आर्मी पैवेलियन में जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि भी दी।

रक्षा मंत्रालय ने जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह अपने नेपाली समकक्ष के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे। इसके अलावा, वह नेपाली सेना के सैन्य संचालन महानिदेशक से दोनों देशों के रणनीतिक हित से जुड़े मामलों पर जानकारी लेंगे।

जनरल धीरज सेठ की कहानी

18 अगस्त को जनरल धीरज सेठ शिवपुरी स्थित आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के अधिकारियों को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह कॉलेज के प्रशिक्षकों और विदेशी अधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। इसके अलावा, नेपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ भारत-नेपाल के द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे। 19 अगस्त को अपनी यात्रा के आखिरी दिन सेना प्रमुख पोखरा जाएंगे। यहां वह पूर्व सैनिकों के एक कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस दौरान वह वीर नारियों और वीरता पुरस्कार पाने वाले लोगों को सम्मानित करेंगे। भारत लौटने से पहले वह नेपाल में रहने वाले भारतीय सेना के पूर्व सैनिकों से भी मुलाकात करेंगे।

भारत-नेपाल के बीच रिश्ते मजबूत

रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच लंबे समय से मजबूत ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। दोनों देशों के इस रिश्ते को अक्सर ‘रोटी-बेटी का रिश्ता’ कहा जाता है। जनकपुर-अयोध्या और लुंबिनी-बोधगया जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध दोनों देशों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं। भारत और नेपाल लोकतांत्रिक मूल्यों, क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को लेकर भी एक जैसी सोच रखते हैं। मंत्रालय के मुताबिक, जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा दोनों देशों की सेनाओं और जनता के बीच पुराने संबंधों को और मजबूत करने का मौका है। इससे भारत और नेपाल की सेनाओं के बीच सहयोग के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

जनरल धीरज सेठ को परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल और अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने अपने सैन्य करियर की शुरुआत नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला से की थी। दिसंबर 1986 में उन्हें आर्म्ड कॉर्प्स में कमीशन मिला था। ईमानदारी, कड़ी मेहनत, निस्वार्थ सेवा और सेना के प्रति समर्पण ने जनरल धीरज सेठ को एक कुशल और अनुभवी सैन्य अधिकारी बनाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने लंबे सैन्य करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

बीजेपी की नई टीम का ऐलान, युवा और अनुभवी नेतृत्व का उचित संतुलन

अटकलों का दौर खत्म हुआ। लंबे इंतजार के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन की टीम का ऐलान आखिरकार हो ही गया। बीजेपी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की लिस्ट से साफ है कि नीतिन नबीन की इस नयी टीम में निरंतरता के साथ साथ परिवर्तन का भी एक बड़ा संतुलन बना कर रखा गया है। इसमें 40 वर्ष से कम उम्र के 6 सदस्य, 40-49 की आयु के 15 और 50-59 साल के 21 सदस्यों को स्थान मिला है। सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष को अपनी टीम के गठन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का सहयोग मिला।

संदेश साफ है कि 2029 को ध्यान में रख कर ये टीम बनायी गयी है। इसमें 13 उपाध्यक्ष, 8 महासचिव, एक संगठन महासचिव, दो सह संगठन महासचिव, 16 सचिव, और केन्द्रीय मंत्री पियुष गोयल को एक बार फिर राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। बीएल संतोष बतौर समगठन महामंत्री और साथ ही सौदान सिंह और शिव प्रकाश बतौर सह संगठन महामंत्री अपना काम करते रहेंगे। पूर्व महासचिव महासचिव तरुण चुघ को केन्द्रीय कार्यालय का प्रभारी बनाया गया है। विष्णु दत्त शर्मा को सभी सेलों और प्रकोष्ठों का प्रभारी बनाया गया है जबकि संबित पात्रा को पूर्वोत्तर का प्रभारी बनाया गया है। जानते हैं कि क्या है इस नयी टीम का क्या है संदेश–

अनुभवी औऱ युवा नेतृत्व का संतुलन

नयी टीम की सबसे महत्वपूर्ण बात है पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं प्रखर वक्ता स्मृति ईरानी की महामंत्री के रूप में वापसी। 2024 के लोकसभा चुनावो की हार के बाद स्मृति ईरानी थोड़ी हाशिए पर थीं। लेकिन बतौर स्टार प्रचारक पार्टी उनको कभी नहीं भूली थी। जेपी नड्डा के अध्यक्ष काल में संगठन से बाहर हुए संघ के प्रचारक रहे लेखक-चिंतक राम माधव की उपाध्यक्ष के रूप में वापसी हुई है। जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर के राज्यों में भगवा लहराने वाले राम माधव की संगठनात्मक कुशलता का लाभ भी पार्टी को मिलने वाला है। एबीवीपी कार्यकर्ता रहे विनोद तावड़े को उनके कुशल सांगठनिक क्षमता के लिए फिर से महामंत्री बनाया गया हो तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में भारी विजय दिलाने वाले सुनील बंसल को दुबारा महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

आदिवासी समाज के गजेंद्र पटेल को मिली महामंत्री की जिम्मेदारी दी गयी है तो उत्तर पूर्व से युवा नेता मृगांक बर्मन बने राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद और युवा नेता संगीता यादव बनी राष्ट्रीय सचिव बनायी गयीं हैं। अनुभव की बात करें तो 3 पूर्व मुख्यमंत्रियों को भाजपा की राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता वसुंधरा राजे सिंधिया, उत्तराखंड के पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लव देब का अनुभव संगठन में खासा काम आने वाला है।

समाज के सभी वर्गों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व

नितिन नबीन ने आला नेताओं से चर्चा के बाद तमाम क्षेत्रों और समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए ये कोशिश की कि टीम में एक सामंजस्य़ बना रहे और देश भर में सही संदेश जाए। अरसे से बात चल रही थई कि उत्तर प्रदेश में अग़डे नाराज है या फिर ब्राह्मण नाराज हैं। लेकिन नयी टीम मे उत्तर प्रदेश से आने वाले हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय महासचिव बना कर चुनावों से पहले अगड़ों को भी एक संदेश दे दिया है। दूसरी तरफ लिस्ट के मुताबिक लगभग 40 फीसदी से ज्यादा नयी टीम के सदस्य वंचित समाज से है। नागालैंड से राज्यसभा सांसद फांगनोन कोन्याक को राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। आंध्र प्रदेश से डी पुरंदेश्वरी बनी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और तमिलनाडु के मा व्यंकटेशन बने राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है।

अल्पसंख्यक समाज से आने वाले उत्तर प्रदेश के प्रोफेसर तारीक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। उत्तर प्रदेश के कूुंवर बसित अली तो अल्पसंख्यक मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। सरदार मनप्रीत सिंह बादल को उपाध्यक्ष बनाया गया है। गुजरात के डाक्टर हेमांग जोशी को युवा मोर्चा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। हेमांग जोशी अब कर्नाटक के तेजस्वी सूर्या की जगह लेंगे।

संगठन और प्रोफेशनल विशेषज्ञों का उचित समन्वय

संघ के प्रचारक और प्रवक्ता रहे राम माधव की टीम में वापसी संघ और संगठन के बीच सामंजस्य तो जोड़ती ही रहेगी और साथ ही उनकी संगठनात्मक क्षमता का उपयोग उन इलाकों में काम आएगा जहां पार्टी कमजोर है। बंगाल चुनावों में संगठन को मजबूत करने वाले नेता सुनील बंसल पुनः महासचिव बने हैं। जेएनयू में एबीवीपी कार्यकर्ता रहे और वर्तमान में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ स्वदेश सिंह भाजपा की नई टीम में राष्ट्रीय सचिव, कैंसर स्पेशलिस्ट डॉ मधुचंद्रा कर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, कर्नाटक के प्रोफेसर M नागराज, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए गए हैं।

मीडिया और सोशल मीडिया संभालने के लिए भी नयी टीम लेकिन नेतृत्व अनुभवी हाथों में

अब तक मीडिया प्रमुख का पद संभाल रहे पौड़ी से सांसद अनिल बलूनी को एक बार फिर मीडिया का राष्ट्रीय सयोजन बनाया गया है। उनके साथ हरियाणा के सिद्धार्थ यादव, दिल्ली के प्रदीप भंडारी और मध्य प्रदेश के आशीष उषा अग्रवाल को सह संयोजक बनाया गया है। इसमे पहले के उप मीडिया प्रमुख संजय मयूख को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। अब वे बिहार में विधायक के तौर पर अपनी राजनीति करेंगेे। सोशल नीडिया की टीम के प्रमुख के पद से अमित मालविय को मुक्त किया गया है औऱ उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को संयोजक बनाया गया है।

नजर 2029 पर है और जिम्मेदारी इस युवा टीम पर। नीतीन नबीन को इस युवा और अनुभवी टीम को फ्रंट से लीड करना होगा ताकि पहली चुनौती जो अगले साळ कई यूपी, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में होने वालों चुनावों में बीजेपी का भगवा फिर से लहराने लगे।

मुसीबत में कौन सा फंड देगा आपका साथ? जानिए EPF, NPS, PPF और म्यूचुअल फंड्स से निकासी की पूरी टाइमलाइन

Retirement Options Withdrawal Timelines: रिटायरमेंट फंड या लंबी अवधि का पोर्टफोलियो बनाते समय हम अक्सर सिर्फ ब्याज दर या मिलने वाले रिटर्न पर ध्यान देते हैं। लेकिन इमरजेंसी के समय सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होता है कि रिडेम्पशन या विदड्रॉल रिक्वेस्ट डालने के बाद पैसा आपके बैंक खाते में कितनी जल्दी आता है?

कुछ ऑप्शन जहां 24 से 48 घंटे में पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, वहीं कुछ में हफ्तों का समय लग जाता है। आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर जसमीत सिंह के मुताबिक, ‘लिक्विड और इलिक्विड इंस्ट्रूमेंट्स के अंतर को समझना जरूरी है। क्योंकि हर निवेश तुरंत पैसे देने के लिए नहीं बना होता।’

आइए जानते हैं भारत के 4 सबसे लोकप्रिय निवेश विकल्पों EPF, NPS, PPF और Mutual Funds की निकासी टाइमलाइन और उनके नियमों का पूरा गणित।

1. Mutual Funds: सबसे तेज और आसान निकासी (1 से 3 दिन)

अगर आपको तुरंत और बिना किसी शर्त के पैसे की जरूरत है, तो ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड सबसे बेहतर विकल्प साबित होते हैं। लिक्विड और ओवरनाइट फंड्स का पैसा कट-ऑफ टाइम के आधार पर T+1 (अगले वर्किंग डे) या उसी दिन क्रेडिट हो जाता है। इक्विटी और अन्य डेट फंड्स का पैसा 1 से 3 कार्य दिवसों (T+1 to T+3) में बैंक अकाउंट में आ जाता है।

इसमें पैसा निकालने के लिए किसी विशेष कारण (जैसे- बीमारी, शादी या पढ़ाई) की आवश्यकता नहीं होती। वैसे ये मार्केट-लिंक्ड होते हैं, इसलिए NAV में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है।

2. NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम): T+2 सेटलमेंट टाइमलाइन

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में क्लेम प्रोसेसिंग की समयसीमा को काफी सुधारा गया है। सितंबर 2022 से PFRDA ने NPS एग्जिट विदड्रॉल की समयसीमा T+4 से घटाकर T+2 (2 सेटलमेंट डेज) कर दी है। हालांकि, पूरा फंड ट्रांसफर होने की प्रक्रिया में एन्युटी खरीदने के नियम भी लागू होते हैं।

एनपीएस टियर-1 खाते से आप केवल अपने योगदान का अधिकतम 25% ही निकाल सकते हैं। इसके लिए विशिष्ट कारणों (जैसे- बीमारी, घर, बच्चों की पढ़ाई) का होना अनिवार्य है।

3. कर्मचारी भविष्य निधि(EPF): 3 दिन से 20 दिन की समयसीमा

जून 2026 में लागू नए कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026 के तहत ईपीएफओ ने क्लेम सेटलमेंट के नियमों को सख्त और तेज किया है। पूरी तरह से सही पाए गए क्लेम को निपटाने के लिए 20 दिनों की वैधानिक समयसीमा तय की गई है। अगर बिना किसी कारण 20 दिनों से अधिक देरी होती है, तो कमिश्नर के वेतन से 12% वार्षिक ब्याज की दर से हर्जाना वसूला जा सकता है। ऑनलाइन और ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए योग्य क्लेम 3 से 5 दिनों में सेटल हो जाते हैं।

ईपीएफ से केवल तय कारणों जैसे- मेडिकल, शादी, घर आदि के लिए ही आंशिक निकासी संभव है। अगर आधार-UAN लिंकिंग या एंप्लॉयर वेरिफिकेशन में कोई गड़बड़ी हो, तो पैसे आने में 2 से 3 हफ्ते का समय लग सकता है।

4. पब्लिक प्रॉविडेंट फंड(PPF): कोई निश्चित T+2 वादा नहीं

पब्लिक प्रॉविडेंट फंड में पैसा निकालने की कोई केंद्रीय ऑनलाइन T+1 या T+2 व्यवस्था नहीं है। आवेदन करने के बाद बैंक या पोस्ट ऑफिस की आंतरिक प्रक्रिया के आधार पर 2 से 5 कार्य दिवसों में पैसा अकाउंट में आता है। पीपीएफ में 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही साल में केवल एक बार आंशिक निकासी की अनुमति होती है, जो कि पात्र बैलेंस के एक तय हिस्से तक ही सीमित रहती है।

EPF vs NPS vs PPF vs Mutual Funds किसमें कितना समय और कितनी छूट?

EPF vs NPS vs PPF vs Mutual Funds किसमें कितना समय और कितनी छूट?

एक्सपर्ट्स की ये है सबसे जरूरी सलाह

रिटायरमेंट पोर्टफोलियो बनाते समय केवल एक ही इंस्ट्रूमेंट पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। आनंद राठी वेल्थ के जसमीत सिंह सलाह देते हैं कि, ‘निवेशकों को अपने कम से कम 6 महीने के खर्च का इमरजेंसी फंड आसानी से सुलभ विकल्पों जैसे लिक्विड म्यूचुअल फंड या बैंक एफडी में रखना चाहिए, ताकि अनिश्चितता के समय लंबे समय के लिए किए गए EPF, PPF या NPS निवेश को समय से पहले न तोड़ना पड़े।’

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Ram Gopal Varma: ‘मैं मरे हुए लोगों के बारे में नहीं सोचता’, जानें श्रीदेवी की बर्थ एनिवर्सरी पर ऐसा क्यों बोले राम गोपाल वर्मा

राम गोपाल वर्मा ने धीरज यू. कुमार की लिखी श्रीदेवी की बायोग्राफी ‘द एम्प्रेस’ (The Empress) के बारे में अपनी राय दी है। इस किताब की घोषणा प्रियंका चोपड़ा ने श्रीदेवी के जन्मदिन पर की थी। ‘वैरायटी इंडिया’ से बात करते हुए वर्मा ने बताया कि उन्होंने इस किताब के लिए एक चैप्टर लिखा है। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि उनका चैप्टर ‘सबसे अच्छा’ है, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा, “हो सकता है कि वे हर उस व्यक्ति से यही कहते हों जिसने इसमें योगदान दिया है।”

श्रीदेवी की बायोग्राफी और उसके नाम के बारे में बात करते हुए फिल्ममेकर ने कहा, “मुझे नहीं पता था कि इसका नाम ‘एम्प्रेस’ है। क्या इसका नाम ‘एम्प्रेस’ है? ठीक है, शायद वह वैसी ही थीं। हालांकि, मैं ‘स्क्रीन क्वीन’ नाम को ज़्यादा पसंद करता, क्योंकि वह वैसी ही थीं। बाकी सभी तो उनके बाद आए।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर कुछ खास किया या उनकी फिल्में देखीं, तो वर्मा ने कहा, “नहीं! मैं मरे हुए लोगों के बारे में बिल्कुल नहीं सोचता। एक बार जब वे चले जाते हैं, तो वे मेरी ज़िंदगी से बाहर हो जाते हैं। मरे हुए लोगों के बारे में सोचने के बजाय मैं अपनी ज़िंदगी पर ध्यान देना पसंद करता हूं। मैं हर्षवर्धन राणे के साथ अपनी फिल्म ‘पुलिस कंपनी’ की शूटिंग में पूरी तरह बिज़ी हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने उनकी फिल्में देखी हैं और बताया, “उनके गुज़रे हुए कई साल हो गए हैं। आज भी, मैं यह समझ नहीं पाता कि उन्होंने स्क्रीन पर क्या किया था। जैसे, ‘मिस्टर इंडिया’ में चार्ली चैपलिन वाला सीन… ऐसी चीज़ के पीछे की कला को समझना नामुमकिन है। मैंने जितने भी एक्टर्स को डायरेक्ट किया है, उनमें वह सबसे जबरदस्त थीं।”

श्रीदेवी के बारे में बात करते हुए, उन्होंने एक्ट्रेस के साथ अपनी पहली मुलाकात को याद किया और कहा, “मैं उन्हें साइन करने के लिए चेन्नई में उनके घर गया था। मैं उनकी मां के साथ लिविंग रूम में बैठा था, जबकि श्रीदेवी फ़्लाइट पकड़ने के लिए पैकिंग कर रही थीं और बीच-बीच में कमरे में आ-जा रही थीं। जब भी वह कमरे में आती थीं, तो ऐसा लगता था जैसे ताज़ी, स्फूर्तिदायक हवा का झोंका आ गया हो। मैं चाहता हूँ कि वह फिर से धरती पर आएं। बस एक बार। ताकि दुनिया को पता चल सके कि वह सच में थीं।”

श्रीदेवी के बारे में

जानकारी के लिए बता दें कि श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी 2018 को दुबई, संयुक्त अरब अमीरात में 54 साल की उम्र में हुआ था। ‘मिस्टर इंडिया’, ‘चांदनी’ और ‘हिम्मतवाला’ जैसी फिल्मों में अपने किरदारों के लिए मशहूर इस एक्ट्रेस की मौत कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) की वजह से हुई थी।

वह दुबई में अपने रिश्तेदार और एक्टर मोहित मारवाह की शादी में शामिल होने गई थीं, तभी यह दुखद घटना हुई। उस समय की खबरों के मुताबिक, श्रीदेवी अपने होटल के कमरे में गिर पड़ी थीं। मेडिकल टीम ने उन्हें होश में लाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। बाद में अस्पताल ले जाने पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

FCNR (B) Deposit Scheme : समय से पहले ही बंद हो जाएगी FCNR(B) विंडो, स्कीम को मिला शानदार रिस्पॉन्स, जानिए रुपए के लिए क्या हैं मायने?

FCNR(B)Deposit Scheme : RBI ने समय से एक महीने पहले यानी 31 अगस्त से ही NRIs के लिए FCNR डिपॉजिट विंडो बंद करने का एलान किया है। स्कीम को शानदार रिस्पॉन्स के चलते 13 अगस्त तक बैंकों को अब तक 52 बिलियन डॉलर से ज्यादा के डिपॉडिट मिल चुके हैं। FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम की डेडलाइन 30 सितंबर की जगह अब 31 अगस्त कर दी गई है। इस स्कीम को शानदार रिस्पॉन्स के चलते समय से पहले बंद किया गया है।

इस स्कीम पर नजर डालें तो स्वैप फैसिलिटी के जरिए 13 अगस्त तक 57 अरब डॉलर आए हैं। FCNR डिपॉजिट स्कीम से ही 52 अरब डॉलर से ज्यादा के डिपॉजिट आए हैं। FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम में तेज रफ्तार इनफ्लो देखने को मिला है। पहले 20 अरब डॉलर आने में 38 दिन लगे। वहीं, दूसरे 20 अरब डॉलर आने में सिर्फ 14 दिन लगे। पिछले 13 दिनों में 16 अरब डॉलर का इनफ्लो देखने को मिला। ऐसा मानना है कि इस महीने के अंत तक इनफ्लो की रफ्तार और बढ़ेगी।

और कितना इनफ्लो संभव?

एक्सपर्ट्स और इकोनॉमिस्ट की राय है कि अगस्त अंत तक FCNR (B) डिपॉजिट से 65-75 अरब डॉलर का इनफ्लो संभव है। कुल मिलाकर 80-100 अरब डॉलर का इनफ्लो संभव है। SBI रिसर्च ने पहले अनुमान लगाया था कि अगर FCNR-B रूट के ज़रिए निवेश की सुविधा सितंबर तक खुली रहती है, तो 70 अरब डॉलर तक का निवेश आ सकता है, जो 2013 में आए निवेश के स्तर से कहीं ज्यादा होगा।

FCNR (B) डिपॉजिट स्कीम और रुपया

बड़े डॉलर इनफ्लो के बाद भी रुपए में ज्यादा मजबूती नहीं आई है। RBI ने इनफ्लो का बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट बनाने में लगाया गया। एक पूर्व सेंट्रल बैंकर ने इस अचानक होने वाले क्लोजर होने की वजह रुपये पर पड़ रहे दबाव को बताया है। उनका कहना है पहले के विपरीत, इस बार USD/INR करेंसी पेयर स्थिर रहा है, लेकिन इसमें लगातार गिरावट का रुझान बना हुआ है। खबर है कि RBI रुपये की गिरावट को रोकने के लिए पिछले कुछ दिनों से डॉलर बेच रहा है।

उन्होंने कहा 5 जून और 14 अगस्त के बीच रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिला। 5 जून को डॉलर के मुकाबले रुपया 95.39 पर बंद हुआ था और 14 अगस्त तक यह लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 95.45 पर आ गया। इनफ्लो शुरू होने के बाद, जुलाई के मध्य में रुपये में थोड़ी रिकवरी हुई और यह 94.30 पर पहुंच गया, लेकिन उसके बाद इसकी रफ़्तार धीमी पड़ गई। हाल के हफ्तो में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगातार बढ़त और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता की वजह से रुपया कमजोरर हुआ है। साथ ही, फ़ॉरवर्ड्स मार्केट में ऐसी हलचल नहीं दिख रही है जिससे RBI के लिए इकोनॉमिक हेजिंग आसान हो सके। इसलिए, शायद RBI ने गोल्ड बॉन्ड की तरह ही इसे अभी बंद कर देना ही बेहतर समझा होगा।

FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से बैंक डिपॉजिट पर पड़ा बड़ा असर

FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से बैंक डिपॉजिट पर बड़ा असर पड़ा है। 15 जून से 31 जुलाई के बीच टाइम डिपॉजिट में 8.5 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसमें FCNR डिपॉजिट का करीब 3-3.5 लाख करोड़ रुपए का योगदान रहा है। SBI रिसर्च के मुताबिक अगस्त में टाइम डिपॉजिट 5 लाख करोड़ रुपए और बढ़ सकता है। इससे बैंकों को स्टेबल और सस्ते फंडिंग का फायदा मिलेगा। अतिरिक्त लिक्विडिटी से सरकारी बॉन्ड यील्ड में कमी आ सकती है।

FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम से किन बैंकों ज्यादा फायदा?

इससे प्राइवेट और सरकारी बैंकों के हिस्से में 42%-42% डिपॉजिट आया है। वहीं, विदेशी बैंकों के हिस्से में 15% डिपॉजिट आया है। इस स्कीम के जरिए HSBC ने 6.1 अरब डॉलर जुटाए हैं। HSBC के बाद SBI और ICICI बैंक ने काफी डिपॉजिट जुटाए है। HDFC बैंक इस रेस में पीछे रहा है।

एक्सपर्ट्स की राय

एक प्राइवेट बैंक के ट्रेज़री हेड ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि FCNR-B डिपॉज़िट स्कीम को मिले अच्छे रिस्पॉन्स की वजह से शायद सेंट्रल बैंक को अपना फैसला बदलना पड़ा।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस स्कीम में जरूरत से ज्यादा पैसा आ गया है और ऐसे में अब सेंट्रल बैंक की तरफ इसको समय से पहले बंद करने का फैसला लिया गया है।

करूर वैश्य बैंक के ट्रेज़री हेड रामचंद्र रेड्डी ने कहा “स्कीम को समय से पहले बंद करना नीति में बदलाव के बजाय एक तरह का तालमेल बिठाने जैसा लग रहा है। FCNR-B फेसिलिटी को मिली जबरदस्त रिस्पॉन्स से पता चलता है कि इसके जरिए फंड जुटाने का मकसद काफी हद तक पूरा हो गया है और RBI अब इससे मिली लिक्विडिटी और फॉरेन एक्सचेंज पर पड़ने वाले इसके असर को मैनेज करने पर फोकस कर सकता है। मैं इसे नीति में किसी बदलाव के बजाय इस स्कीम में सोच-समझकर किए गए मामूली सुधार के तौर पर देखता हूं।”

 

 

Market Outlook : बाजार में गिरावट का सिलसिला रहा जारी, जानिए 18 अगस्त को कैसी रह सकती है इसकी चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आया बड़ा उछाल! कमजोर डॉलर और US Fed के फैसले से रॉकेट बने दाम, देखें नया भाव!

Gold Price Today: कमजोर डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद घटने से सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी आई। स्पॉट गोल्ड 0.5% चढ़कर 4,398.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% बढ़कर 4,455.50 डॉलर प्रति औंस हो गया।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.2% गिरावट आई। इससे दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया। Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटेजी हेड ओले हैनसेन का कहना है कि अमेरिका में महंगाई, रोजगार और उपभोक्ता खर्च के नरम आंकड़ों से फेड की अगली बड़ी चाल अब ब्याज दर बढ़ाने की बजाय कटौती की तरफ झुकती दिख रही है।

सितंबर में रेट बढ़ने की उम्मीद घटी

हाल में आए कमजोर पेरोल डेटा और नियंत्रित महंगाई के बाद बाजार की धारणा बदली है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, सितंबर में फेड के ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अब 31% रह गई है। एक महीने पहले यह 51% थी।

UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अब भी 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर हैं। इससे अगले महंगाई आंकड़ों पर कुछ दबाव बना रह सकता है।

इस हफ्ते किन स्तरों पर रहेगी नजर?

LKP Securities में VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, COMEX पर सोना 4,395 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके लिए 4,410-4,415 डॉलर का दायरा नजदीकी रेजिस्टेंस है। 4,375 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। वहीं MCX Gold में ₹1,54,750 का स्तर अहम सपोर्ट और ₹1,55,500 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

दूसरे कीमती धातुओं का हाल

दूसरी कीमती धातुओं में भी तेजी दिखी। चांदी 1.5% बढ़कर 65.61 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। प्लैटिनम 0.7% चढ़कर 1,759.72 डॉलर और पैलेडियम 1.6% बढ़कर 1,333.25 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

निवेशक अब बुधवार को आने वाली फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

कल का मौसम: IMD की बड़ी चेतावनी! 18 अगस्त को 6 राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, दिल्ली से यूपी-बिहार तक ऐसा रहेगा वेदर

18 अगस्त को मौसम विभाग ने बड़े पैमाने पर बारिश का अलर्ट जारी किया है। झारखंड में सबसे ज्यादा खतरा है। यहां बहुत ज्यादा भारी बारिश की पूरी संभावना बन रही है। इसी तरह बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश, तेज आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का गंभीर खतरा बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और चक्रवाती हवाओं के क्षेत्र के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दायरा काफी व्यापक रहने वाला है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए प्रशासन और नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।

झारखंड में आफत की बारिश, बिहार समेत 6 राज्यों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी

18 अगस्त को मौसम का सबसे भयानक रूप झारखंड में देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के अनुसार झारखंड में अलग-अलग स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। राज्य में मूसलाधार बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने और नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है। इसके अलावा देश के 6 राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक 18 अगस्त को बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर अति भारी बारिश होने की पूरी संभावना बनी हुई है। इन राज्यों में बारिश की तीव्रता काफी अधिक रहेगी।

दिल्ली-एनसीआर, पूर्वी UP और उत्तराखंड समेत इन राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भी 18 अगस्त को हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख और पश्चिम बंगाल व सिक्किम में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम व मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों केरल व माहे और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में भी अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

50 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, बिजली कड़कने की आशंका

बारिश के साथ-साथ 18 अगस्त को देश के अलग अलग हिस्सों में तेज हवाओं और बिजली गिरने का भी असर देखने को मिलेगा। आंध्र प्रदेश, गुजरात क्षेत्र, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराइकल में अलग-अलग जगहों पर 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने और बिजली गिरने की संभावना है।

इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल व सिक्किम, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और आंतरिक कर्नाटक में तेज सतही हवाएं भी चलेंगी।

गुजरात, सोमालिया और ओमान तटों पर 65 किमी/घंटे की गति से चलेंगी हवाएं

समुद्री इलाकों में 18 अगस्त को स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण रहेगी। अरब सागर में गुजरात, सोमालिया और ओमान के तटीय इलाकों के पास, तथा मध्य-पश्चिम अरब सागर के अधिकांश भागों और दक्षिण-पश्चिम, उत्तर व मध्य-पूर्व अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने के आसार हैं। इनकी गति बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। मौसम विभाग ने समुद्र में तेज हवाओं को देखते हुए मछुआरों को तटीय और गहरे समुद्री क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी है।