Viral Post: ₹1.84 लाख से ₹75 लाख की सैलरी तक कैसे पहुंचा युवक? सोशल मीडिया पर शेयर किया अपना सीक्रेट

इंजीनियरिंग की डिग्री या बड़े कॉलेज से पढ़ाई किए बिना भी अच्छी नौकरी और सैलरी हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में यूजर ने अपनी नौकरी और कमाई से जुड़ी कहानी शेयर की है। यूजर ने बताया कि उसने करीब नौ साल के करियर में अपनी सालाना कमाई ₹1.84 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख कर ली। अपनी कहानी से यूजर ने बताया कि सही स्किल और लगातार मेहनत के दम पर बिना बड़े कॉलेज बैकग्राउंड के भी करियर में अच्छी ग्रोथ हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

Reddit के r/IndianWorkplace सबरेडिट पर इस प्रोफेशनल ने अपनी करियर जर्नी शेयर किया है। रेडिट पर शेयर किए गए इस पोस्ट को X पर एक यूजर ने शेयर किया है। यूजर ने कहा कि, उसने यह कहानी उन लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए शेयर की है, जो नौकरी जाने या B.Tech डिग्री न होने से परेशान हैं। उसके मुताबिक, मेहनत और बेहतर स्किल्स से करियर में सफलता हासिल की जा सकती है।

₹1.84 लाख सालाना से शुरू किया करियर

पोस्ट के अनुसार, इस प्रोफेशनल ने एक Tier-3 कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन के साथ मैथ में B.Sc. की पढ़ाई की। इसके बाद उसे WITCH कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए पहली नौकरी मिली। उसने अपने करियर की शुरुआत महज ₹1.84 लाख सालाना सैलरी से की थी, जो टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले कई लोगों को काफी कम लग सकती है। करियर के शुरुआती चार सालों में उसकी सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई।

 

कोविड के बाद बढ़ी सैलरी

कोविड-19 के दौर तक उसकी सालाना कमाई करीब ₹4.5 लाख पहुंची थी। इसके बाद नौकरी के बाजार में आए बदलाव के बीच उसे एक बड़ी कंपनी में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज ₹8 लाख हो गया। इस तरह उसकी सैलरी में एक साथ करीब 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसके करियर को आगे बढ़ने का नया रास्ता मिला। इसके करीब एक साल बाद उसकी कमाई में एक और बड़ा बदलाव आया। मौजूदा नौकरी से संतुष्ट न होने के कारण उसने दूसरी कंपनियों में अवसर तलाशने शुरू किए।

कुछ ही सालों में सालाना सैलरी ₹42.2 लाख हो गई

इस दौरान उसे कई नौकरी के ऑफर मिले और बेहतर विकल्प मिलने के बाद उसने ₹17.4 लाख सालाना पैकेज पर नई नौकरी तय की। यह उसकी पिछली ₹8 लाख सालाना सैलरी से दोगुने से भी ज्यादा थी। अगले तीन सालों में उसने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम जारी रखा और कई चुनौतियों के बावजूद अपनी कमाई बढ़ाता रहा। समय-समय पर मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी के चलते उसका सालाना पैकेज करीब ₹30 लाख तक पहुंच गया। इसके बाद उसने बेहतर कमाई और काम का अच्छा माहौल पाने के लिए एक स्टार्टअप का रुख किया। यह फैसला उसके लिए फायदेमंद रहा और उसकी सालाना सैलरी बढ़कर ₹42.2 लाख हो गई।

नौकरी से निकाला भी गया

करियर में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया, जब स्टार्टअप में काम करने के करीब एक साल बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, उसने इसे अपने करियर का अंत मानने के बजाय इस समय का इस्तेमाल आगे की नौकरी की तैयारी में किया। इसके बाद उसे एक दूसरे स्टार्टअप में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज बढ़कर ₹75 लाख हो गया। यह उसकी पिछली ₹42.2 लाख की सैलरी से करीब 77 फीसदी ज्यादा थी। यूजर के मुताबिक, करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स, लगातार सीखना और सही फैसले ज्यादा जरूरी हैं। समस्या हल करने की क्षमता भी सफलता में अहम भूमिका निभाती है।

सैलरी को लेकर करे नेगोशिएशन

Reddit यूजर ने अपनी कहानी में बताया कि नौकरी बदलते समय सैलरी पर बातचीत करना कितना जरूरी है। उन्होंने पहला ऑफर तुरंत स्वीकार करने के बजाय बेहतर पैकेज के लिए बातचीत की, जिससे उनकी सालाना सैलरी ₹8 लाख से बढ़कर ₹17.4 लाख हो गई। उन्होंने ये भी बताया कि नौकरी जाना हमेशा करियर के लिए नुकसान नहीं होता। उनके मामले में ₹42 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छूटने के बाद उन्हें ऐसा मौका मिला, जहां उनकी कमाई बढ़कर ₹75 लाख सालाना हो गई।

महंगे हो गए 5G स्मार्टफोन्स, 10 हजार से कम में खरीदें ये 10 दमदार 4G फोन्स जो दे रहे हैं बंपर फीचर्स, देखें लिस्ट

मेमोरी की कीमत बढ़ने और दूसरे पार्ट्स महंगे होने के कारण 5G स्मार्टफोन की कीमत लगातार बढ़ रही है। IDC के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में 5G स्मार्टफोन की औसत कीमत 341 डॉलर पहुंच गई, जबकि 4G स्मार्टफोन की औसत कीमत 109 डॉलर रही। इस तरह 5G और 4G फोन की कीमत में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। इसका असर बजट में फोन खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ रहा है। खासकर छोटे शहरों और कस्बों के ग्राहक महंगे 5G फोन के बजाय कम कीमत वाले 4G स्मार्टफोन खरीदना पसंद कर रहे हैं।

यह बदलाव स्मार्टफोन की बिक्री के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में 4G स्मार्टफोन की बिक्री में 40% की बढ़ोतरी हुई। इस दौरान कुल बिके स्मार्टफोन में 4G फोन की हिस्सेदारी बढ़कर 12% हो गई। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि लोग 5G फोन खरीदना बंद कर रहे हैं। असल में, बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर कम बजट वाले ग्राहकों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि ये ग्राहक महंगे 5G फोन की जगह सस्ते 4G स्मार्टफोन को चुन रहे हैं।

जिन लोगों को फोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉलिंग, WhatsApp, सोशल मीडिया, वीडियो देखने, रास्ता खोजने और रोजमर्रा के ऐप्स चलाने के लिए करना है, उनके लिए 4G स्मार्टफोन अभी भी एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं। अगर आप 5G फोन पर ज्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहते हैं, तो बजट में मिलने वाले 4G फोन पर विचार किया जा सकता है। इनमें से एक है Lava Bold N2 Lite। Flipkart पर इसकी कीमत 9,399 रुपये बताई गई है। फोन में 3GB रैम और 64GB स्टोरेज मिलती है। इसमें 6.75 इंच का डिस्प्ले, 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5,000mAh की बैटरी दी गई है।

  • POCO C61

POCO C61 की कीमत 7,499 रुपये है। इसमें 4GB रैम और 64GB स्टोरेज दी गई है। फोन में 6.71 इंच का HD+ डिस्प्ले, 8 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5,000mAh की बैटरी मिलती है।

  • Redmi 12C

Redmi 12C भी 7,499 रुपये की कीमत में आता है। इसमें 4GB रैम और 64GB स्टोरेज दी गई है। फोन में 6.71 इंच का HD+ डिस्प्ले, 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5,000mAh की बैटरी मिलती है।

  • Lava Blaze

Lava Blaze भी बजट सेगमेंट में एक विकल्प है। यह उन यूजर्स के लिए उपयोगी हो सकता है जो कम कीमत में रोजमर्रा के काम के लिए 4G स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं।

Ai+ Pulse 2

Ai+ Pulse 2 की कीमत 9,987 रुपये है। इसमें 6.745 इंच का HD+ डिस्प्ले दिया गया है। फोन में 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 6,000mAh की बैटरी मिलती है। इसमें 4GB रैम, 64GB स्टोरेज और Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम दिया गया है।

Moto G05

Motorola G05 की कीमत 7,299 रुपये है। इसमें 4GB रैम और 64GB स्टोरेज दी गई है। फोन में 6.67 इंच का HD+ डिस्प्ले, 50 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5,200mAh की बैटरी मिलती है।

POCO C71

POCO C71 की कीमत 8,999 रुपये है। इसमें 6GB रैम और 128GB स्टोरेज दी गई है। फोन में 6.88 इंच का डिस्प्ले, 32 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5,200mAh की बैटरी मिलती है। इसमें स्टोरेज को मेमोरी कार्ड के जरिए बढ़ाने का विकल्प भी दिया गया है।

Rhea Chakraborty: रिया चक्रवर्ती ने अपने बुरे दिनों को किया याद, बोलीं- मेरी कॉन्ट्रोवर्सी की वजह पिता की गई नौकरी

Rhea Chakraborty: एक्टर रिया चक्रवर्ती की जिंदगी 2020 में उनके एक्स-बॉयफ्रेंड सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पूरी तरह बदल गई थी। कुछ महीने पहले, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने सुशांत की मौत के मामले में क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की और रिया को सभी आरोपों से बरी कर दिया। सुशांत से जुड़े ड्रग्स मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया और उनके भाई शोविक चक्रवर्ती, दोनों को गिरफ्तार किया था।

रिया ने क्या कहा?

रिया अभी ‘द ट्रेटर्स’ के सीज़न 2 में नजर आ रही हैं। वह फराह खान के यूट्यूब व्लॉग में शामिल होने वाली लेटेस्ट सेलिब्रिटी थीं, जहां दोनों ने एक्टर के ‘चैप्टर 2’ के बारे में बात की। रिया ने बताया कि सुशांत की मौत और उसके बाद अपनी गिरफ्तारी के दौरान जब उन पर बहुत ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा था, तो उनके परिवार को कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उनके पिता इंद्रजीत चक्रवर्ती, जो एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर और पूर्व मेडिकल कॉर्प्स एडमिनिस्ट्रेटर/डॉक्टर हैं, उन्हें भी एक झटका लगा क्योंकि उन्हें नौकरी से हटा दिया गया था।

उन्होंने बताया, “पापा को शहर के एक बहुत बड़े अस्पताल में मेडिकल सुपरिटेंडेंट की बहुत अच्छी नौकरी मिली थी… और फिर उन्हें उनका सरनेम पता चला और उन्होंने कहा, ‘सॉरी, आप रिया चक्रवर्ती के पिता हैं, इसलिए आप यहां काम नहीं कर सकते’।” व्लॉग में रिया के पिता फराह से भी मिले और कहा कि वह उस अच्छे खाने का इंतजार कर रहे हैं, जो वे अपनी नई किचन में बनाएंगी। फराह ने जवाब दिया कि वह उनके लिए रोस्ट चिकन लाई हैं।

2020 में अपने एक्स-बॉयफ्रेंड, एक्टर सुशांत की मौत के बाद रिया को जेल की सजा और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ा था। पिछले साल, इस मामले में CBI की क्लोज़र रिपोर्ट से उन्हें राहत मिली, क्योंकि उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। अपने पिछले इंटरव्यू में उन्होंने माना था कि इस पूरे घटनाक्रम का उनकी मानसिक सेहत पर बुरा असर पड़ा और उन्हें PTSD (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) का सामना करना पड़ा।

‘द ट्रेटर्स 2’ में रिया के बारे में और जानकारी

शो में, कंटेस्टेंट मल्लिका शेरावत की एक तंज भरी टिप्पणी के बाद रिया को जेल में बिताए अपने समय की याद आ गई। यह तब शुरू हुआ जब मुनव्वर फारुकी ने मल्लिका की “वापसी” (कमबैक) के बारे में कुछ कहा और रिया ने उनका बचाव किया। रिया कहती हैं, “मुझे नहीं लगता कि वह कोई बहुत बुरी बात थी।” मल्लिका जवाब देती हैं, “ओह, तो यह तुम्हारा कमबैक है? रिया, वह इस पर कमेंट करने वाले कौन होते हैं? क्या यह गेम कमबैक के बारे में है? मैं भी कह सकती हूं, ‘ओह रिया, तुम जेल में थीं। क्या यह तुम्हारे लिए बड़ा कमबैक है?'” रिया ने कहा कि मल्लिका का कमेंट, मुनव्वर की गई टिप्पणी की तुलना में कहीं ज़्यादा निजी थी।

इस सीज़न की सेलिब्रिटी लाइन-अप में आदित्य कुलश्रेष्ठ (कुल्लू), अभिषेक मल्हान (फुकरा इंसान), अंश चोपड़ा, दलीप ताहिल, हरमन सिंघा, इक्का सिंह, करण सिंह मैजिक, क्रिस्टल डिसूज़ा, मल्लिका शेरावत, मुनव्वर फारुकी, पारुल गुलाटी, प्रिश और रणवीर बराड़ शामिल हैं। रिया चक्रवर्ती, रिदा थराना, साहिल सलाथिया, शाहनील गिल, शालिनी पासी, श्वेता तिवारी, सौंदस मौफकिर और तान्या पुरी भी नए सीज़न का हिस्सा हैं।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

Gold Silver price: भारत में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। इसकी वजह ग्लोबल मार्केट में मजबूती का ट्रेंड था, जिसमें कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने कीमती धातुओं की मांग को सहारा दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के वायदा भाव ₹676 या 0.44% बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव ₹2,270 या 0.96% बढ़कर ₹2.38 लाख प्रति किलोग्राम हो गए।

ग्लोबल स्तर पर, सोने के वायदा भाव लगभग 0.40% बढ़कर $4,394.01 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 1.64% बढ़कर $65.74 प्रति औंस हो गए।

क्यों बढ़ रही कीमतें हैं?

इसका एक मुख्य कारण अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर बदलता नज़रिया है। हाल ही में अमेरिका में महंगाई, रोजगार और कंज्यूमर एक्टिविटी के आंकड़े कमज़ोर रहे हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व द्वारा और सख्ती बरतने की उम्मीदें कम हो गई हैं। इसका असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा है और सोने को इससे सहारा मिला है।

आमतौर पर डॉलर के कमज़ोर होने से सोने को फायदा होता है क्योंकि दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए यह धातु सस्ती हो जाती है। कम ब्याज दरों की उम्मीदें भी सोने को सहारा दे सकती हैं, क्योंकि सोने जैसी ऐसी एसेट (संपत्ति) को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है जिससे कोई रेगुलर इनकम नहीं होती।

भारत के लिए खास वजह क्या है?

घरेलू कीमतें करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी दिखाती हैं। सोमवार (17 अगस्त) को शुरुआती कारोबार में रुपया कमज़ोर होकर लगभग ₹95.59 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपया कमज़ोर होने से सोने और चांदी जैसी इंटरनेशनल कीमत वाली कमोडिटीज़ की ‘लैंडेड कॉस्ट’ (आयात लागत) बढ़ सकती है, जिससे घरेलू कीमतों को और सहारा मिलता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भी रुपये पर दबाव रहा है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, WTI क्रूड लगभग $82.83 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि ब्रेंट $89 के आसपास बना हुआ था। गर्ग ने कहा कि डॉलर के कमज़ोर होने और आर्थिक आंकड़े कमज़ोर रहने से फेड द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गईं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने US-ईरान शांति वार्ता के रुकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही कम होने के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताओं की ओर भी इशारा किया।

बता दें कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता एक और वजह है जो बुलियन (सोना-चांदी) को सहारा दे रही है। US-ईरान शांति वार्ता में कोई प्रगति न होने और तेल की सप्लाई को लेकर चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क रखा है। ऐसी अनिश्चितता सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की मांग बढ़ा सकती है।

अब आगे क्या करें निवेशक

सोने के लिए, फेडरल रिजर्व का रेट आउटलुक, US डॉलर, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम मुख्य कारक बने रहेंगे। अगर फेड का रुख नरम (dovish) होता है तो कीमतों को सहारा मिल सकता है, जबकि महंगाई का नया झटका या सख्त (hawkish) पॉलिसी रुख बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

VT मार्केट्स में ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड, रॉस मैक्सवेल ने कहा कि $4,400-$4,450 प्रति औंस सोने के लिए तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है। अगर कीमत $4,500 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है तो तेजी का रुझान (bullish trend) मजबूत हो सकता है, जबकि उन्होंने $4,150-$4,200 प्रति औंस को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट एरिया बताया।

हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल सोना और चांदी की कीमतें समीकरण का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंटरनेशनल कीमतें और घरेलू बाजार की स्थितियां मिलकर MCX कीमतों की दिशा तय करती हैं।

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर लगातार बनी मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतें नए हफ़्ते में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही हैं।”

देसाई ने कहा, “भू-राजनीतिक जोखिम और ग्लोबल ग्रोथ को लेकर चिंताएं बुलियन को और सहारा दे रही हैं।” हालांकि, एनालिस्ट कीमतों में सीधी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। हालिया बढ़त के बाद, सोने और चांदी की कीमतों में कुछ ठहराव (कंसोलिडेशन) या मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखी जा सकती है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Samsung Galaxy S24 Ultra की कीमत हुई कम! Exchange और Cashback से ₹25,849 की बचत

Samsung Galaxy S24 Ultra को खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो Amazon पर इस फोन पर फिलहाल अच्छी डील मिल रही है। फोन की कीमत अभी ₹99,999 है, जबकि इसकी लिस्टेड MRP ₹1,34,999 है। खास बात यह है कि एक्सचेंज ऑफर और कैशबैक का फायदा उठाकर इसकी प्रभावी कीमत ₹74,150 तक आ सकती है।

Amazon की लिस्टिंग में एक एलिजिबल पुराने स्मार्टफोन के लिए ₹20,850 तक की एक्सचेंज वैल्यू दिखाई गई है। एक्सचेंज स्क्रीन पर अभी 128GB स्टोरेज और बिना किसी डैमेज वाले Apple iPhone 13 को चुनने पर ₹20,850 तक की एक्सचेंज वैल्यू दिख रही है। हालांकि, असल वैल्यू फोन के मॉडल, स्टोरेज क्षमता और कंडीशन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

डील का हिसाब देखें तो ₹99,999 की कीमत में से अधिकतम ₹20,850 का एक्सचेंज बेनिफिट घटाने पर फोन की प्रभावी कीमत ₹79,149 रह जाती है। इसके बाद अगर आपको उपलब्ध ऑफर के तहत ₹4,999 तक का कैशबैक मिलता है, तो इसकी प्रभावी कीमत घटकर ₹74,150 हो सकती है।

एक्सचेंज ऑफर का इस्तेमाल कैसे करें

Amazon के एक्सचेंज प्रोसेस में खरीदार को अपने पुराने फोन का ब्रांड, मॉडल, स्टोरेज क्षमता और उसकी हालत बतानी होती है। दिखाए गए उदाहरण में, चुना गया डिवाइस Apple iPhone 13 है जिसमें 128GB स्टोरेज है और यह “बिना किसी डैमेज” वाली कैटेगरी में है।

Amazon का कहना है कि अगर पुराना फोन चालू हालत में नहीं है, उसकी RAM, स्टोरेज या IMEI की जानकारी मेल नहीं खाती है, एक्सचेंज ऐप से वेरिफिकेशन फेल हो जाता है, या स्क्रीन लॉक या iCloud लॉक नहीं हटाया गया है, तो पिकअप के समय फोन को रिजेक्ट किया जा सकता है।

अगर फोन की हालत बताई गई जानकारी से मेल नहीं खाती है, तो भी Amazon के अनुसार खरीदार डिलीवरी एजेंट को अंतर की रकम देकर कुछ डिस्काउंट पा सकता है। वहीं, अगर पिकअप के समय पुराना फोन वेरिफिकेशन में फोल हो जाता है, तो भी एक्सचेंज की रकम चुकाकर एक्सचेंज डिस्काउंट का फायदा उठाया जा सकता है।

Galaxy S24 Ultra के स्पेसिफिकेशन्स

Amazon पर लिस्टेड Samsung Galaxy S24 Ultra में 6.8 इंच का डिस्प्ले दिया गया और यह Snapdragon 8 Gen 3 प्रोसेसर पर चलता है। इस मॉडल में 12GB RAM और 256GB स्टोरेज दी गई है।

कैमरे की बात करें तो Galaxy S24 Ultra में 200MP का मेन कैमरा मिलता है। फोन में 5,000mAh की बैटरी दी गई है। इसके अलावा, यह स्मार्टफोन Galaxy AI फीचर्स को भी सपोर्ट करता है और इसके साथ 1 साल की वारंटी मिलती है।

Amazon पर फोन के साथ 10 दिन की सर्विस सेंटर रिप्लेसमेंट, फ्री डिलीवरी और पे-ऑन-डिलीवरी जैसे फायदे भी दिए गए हैं।

बता दें कि ₹99,999 की कीमत वाले Galaxy S24 Ultra पर पहले से ही डिस्काउंट मिल रहा है, और एक्सचेंज व कैशबैक ऑफर के साथ इसकी असल कीमत ₹74,150 तक कम हो सकती है। हालांकि, ₹74,150 की कीमत पूरी ₹20,850 की एक्सचेंज वैल्यू और ज्यादा से ज्यादा ₹4,999 का कैशबैक मिलने पर ही लागू होगी, इसलिए खरीदारों को चेकआउट के समय फाइनल ऑफर जरूर देख लेना चाहिए।

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₹87 हजार करोड़ घटी निवेशकों की दौलत, लगातार पांचवे दिन Sensex लाल, 24288 पर बंद Nifty

Sensex-Nifty closes red: जियो-पॉलिटिकल टेंशन बने रहने और रुपये की कमजोरी ने आज मार्केट पर ऐसा दबाव बनाया कि निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद यह संभल नहीं पाया। हालांकि ब्रोडर लेवल पर रिकवरी दिखी और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 रेड से ग्रीन जोन में लौटे और बढ़त के साथ बंद हुए। इसमें निफ्टी मिडकैप 100 लगभग फ्लैट रहा तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.36% की मजबूती आई।

सेक्टरवाइज आईटी और एफएमसीजी सेक्टर ने आज मार्केट पर काफी दबाव बनाया और इन्होंने मेटल स्टॉक्स की कोशिश को फेल कर दिया। निफ्टी मेटल में आज 1% से अधिक की बढ़त आई तो निफ्टी आईटी में डेढ़ फीसदी से अधिक गिरावट और निफ्टी एफएमसीजी में 1% से अधिक कमजोर हुआ। ओवरऑल इस माहौल में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹86 लाख करोड़ से अधिक घट गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज सेंसेक्स (Sensex) 281.09 प्वाइंट्स यानी 0.36% की गिरावट के साथ 77,728.16 और निफ्टी 78.35 प्वाइंट्स यानी 0.32% की फिसलन के साथ 24,287.65 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 555.50 प्वाइंट्स टूटकर 77,453.75 तक आया था जिससे 474.93 प्वाइंट्स रिकवर होकर यह 77,928.68 पहुंचा तो निफ्टी भी 139.05 प्वाइंट्स टूटकर 24,226.95 तक आया था जिससे 133.15 प्वाइंट्स रिकवर होकर यह 24,360.10 तक पहुंच गया।

डूबे निवेशकों के ₹86 हजार करोड़

एक कारोबारी दिन पहले यानी 14 अगस्त 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,93,37,892.96 करोड़ था। आज यानी 17 अगस्त 2026 को यह घटकर ₹4,92,51,039.39 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹86,853.57 करोड़ की गिरावट आई

Sensex के सिर्फ 7 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें आज सिर्फ 7 ही ग्रीन जोन में बंद हुए हैं। दिन के आखिरी में आज टाटा स्टील और एक्सिस बैंक में सबसे अधिक बढ़त रही तो दूसरी तरफ सबसे अधिक गिरावट इंफोसिस, एचसीएलटेक और सन फार्मा में रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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175 शेयर एक साल के हाई पर

बीएसई पर आज 4674 शेयरों की ट्रेडिंग हुई। इसमें 2087 शेयर आज मजबूत हुए तो 2353 में गिरावट रही जबकि 234 में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके अलावा 175 शेयर एक साल के हाई और 120 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 10 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 42 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

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स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचलें यहां पढ़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

भारत के बैंकिंग सेक्टर में होगा बड़ा बदलाव! वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिए हाई-पावर्ड कमेटी के संकेत, जानिए क्या है पूरा प्लान

High-Powered Committee on Banking: भारतीय बैंकिंग क्षेत्र आने वाले समय में एक बड़े ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बनने जा रहा है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार, 17 अगस्त को घोषणा की कि केंद्र सरकार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंकिंग सेक्टर पर एक ‘हाई-पावर्ड कमेटी’ गठित करने की तैयारी में है।

दो दिवसीय ‘पीएसबी मंथन/संगम’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस सम्मेलन से निकलने वाले सुझाव और विचार इस उच्च स्तरीय समिति के लिए मुख्य आधार तैयार करेंगे। आइए जानते हैं कि भारतीय बैंकों के लिए क्या है सरकार का नया रोडमैप और बीते 10 सालों में बैंकिंग क्षेत्र की कितनी तस्वीर बदली है।

विकसित भारत का विजन: क्या करेगी यह हाई-पावर्ड कमेटी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह कमेटी इस बात का गहन अध्ययन और आकलन करेगी कि ‘विकसित भारत’ के सफर में देश को किस दिशा में आगे बढ़ना है और इसमें बैंकिंग सेक्टर की क्या भूमिका होगी।

सम्मेलन में हो रही चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक, स्पष्ट और अमल में लाने योग्य विचार तैयार करना है, जिन्हें बैंकिंग क्षेत्र लागू कर सके। वित्त मंत्री के अनुसार, यह सुधार सही समय पर हो रहे हैं क्योंकि भारतीय बैंक आज अब तक की सबसे मजबूत वित्तीय स्थिति में खड़े हैं। दो दिवसीय सम्मेलन में बैंकिंग जगत के दिग्गज 7 प्रमुख विषयों पर चर्चा कर रहे हैं, जो भविष्य के रोडमैप का आधार बनेंगे।

रिकॉर्ड निचले स्तर पर NPA: ऐतिहासिक मजबूती में भारतीय बैंक

बैंकिंग क्षेत्र में इस नए सुधार पैकेज का सबसे मजबूत पहलू यह है कि बैंक अब अपने सबसे कम एनपीए (NPA) के स्तर पर हैं, जिससे उनकी कर्ज देने की क्षमता काफी बढ़ गई है। वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के सचिव संजय लोहिया ने बताया कि पिछले एक दशक में भारतीय बैंकों के पैमाने, स्थिरता और पहुंच में क्रांतिकारी बदलाव आया है।

मजबूत बैलेंस शीट के दम पर अब सरकारी बैंक (PSBs) देश की आर्थिक वृद्धि, कृषि सेक्टर, MSMEs और समाज के वंचित वर्गों को वित्तीय सहायता देने में कहीं ज्यादा सक्षम हैं।

10 साल में कितना बदला बैंकिंग सेक्टर? आंकड़े दे रहे गवाही

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2015 से मार्च 2026 के बीच भारतीय बैंकों के प्रदर्शन में जबरदस्त उछाल देखा गया है:

कुल कारोबार: मार्च 2015 के ₹128 लाख करोड़ से दोगुना से भी अधिक बढ़कर मार्च 2026 में करीब ₹283 लाख करोड़ तक पहुंच गया।

जमा राशि: बैंकों में जमा राशि ₹72 लाख करोड़ से बढ़कर ₹156 लाख करोड़ हो गई।

कुल लोन: बैंकों द्वारा दिया गया कर्ज ₹36 लाख करोड़ से बढ़कर ₹127 लाख करोड़ हो गया।

नेट प्रॉफिट: बैंकों का शुद्ध मुनाफा 4 गुना से अधिक बढ़ा है। FY15 के ₹45,000 करोड़ के मुकाबले FY26 में बैंकों ने ₹1.9 लाख करोड़ का रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया।

ग्रॉस एनपीए में भारी गिरावट: मार्च 2018 में ग्रॉस NPA 14.6% के शिखर पर था, जो मार्च 2026 में घटकर महज 1.93% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। वहीं नेट NPA भी 8% से घटकर 2.39% रह गया है।

आगे का लक्ष्य: गुणवत्तापूर्ण ग्रोथ और ग्राहकों की नई जरूरतें

वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव संजय लोहिया के अनुसार, पब्लिक सेक्टर बैंकों (PSBs) की अगली प्राथमिकता इस तेजी को बनाए रखना है। बैंक अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति का उपयोग करके क्वालिटी बिजनेस ग्रोथ पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसके अलावा, उभरती हुई नई वित्तीय जरूरतों और बदलते दौर में ग्राहकों की अपेक्षाओं के अनुसार बैंक अपनी सेवाओं में बदलाव करेंगे।

वित्तीय सेक्टर में पिछले एक दशक के ठोस सुधारों के बाद अब सरकार का पूरा ध्यान बैंकों को 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के मुख्य इंजन के रूप में ढालने पर है। जल्द ही गठित होने वाली हाई-पावर्ड कमेटी का रोडमैप आने वाले सालों में भारतीय बैंकिंग प्रणाली की नई दिशा तय करेगा।

Sunny Deol: हम कलीग हैं दोस्त नहीं…, ‘डर’ के दौरान हुई लड़ाई के बाद शाहरुख खान संग अपने बॉन्ड पर बोले सनी देओल

Sunny Deol: ‘डर’ फिल्म की शूटिंग के दौरान सनी देओल और शाहरुख खान के बीच हुई अनबन किसी से छिपी नहीं है। दोनों एक्टर्स 1993 की इस फिल्म के क्लाइमेक्स को लेकर सहमत नहीं थे और सनी इतने गुस्से में थे कि उन्होंने अपनी जीन्स को अपने हाथों से ही फाड़ दिया था। उनकी लड़ाई इतनी जबरदस्त थी कि उन्होंने एक-दूसरे से बात करना बंद कर दिया था। 2023 में ‘गदर 2’ की सफलता के बाद ही वे फिर से दोस्त बने। सनी ने हाल ही में इस झगड़े के बारे में बात की और बताया कि क्या अब वे शाहरुख के दोस्त हैं।

सनी और शाहरुख की लड़ाई इनसिक्योरिटी की वजह से हुई…

शुभंकर मिश्रा के साथ बातचीत में सनी ने गुस्से में अपनी जींस फाड़ने की बात याद की। उन्होंने कहा कि वह खुद से नाराज हैं और उन्होंने कहा, “छोटी उम्र में मैं ये तो नहीं कहूंगा कि एक दूसरे से वो चीज नहीं होती है। वो होती है। मैं असुरक्षित व्यक्ति नहीं हूं, लेकिन असुरक्षा के कारण, कितने अभिनेता बहुत कुछ ऐसी चीजें कर जाते हैं जो उन्हें करने की कोई जरूरी नहीं है।”

सनी ने समझाया, “हम वही किरदार निभा सकते हैं जो हम हैं। उससे अलग कुछ नहीं बन सकते। लेकिन कई बार एक्टर्स असुरक्षित महसूस करते हैं और इस वजह से माहौल खराब हो जाता है। ऐसी चीजें हो जाती हैं, जिनकी कोई जरूरत नहीं थी। लेकिन यही तो फिल्म बनाने की सच्चाई है।”

शाहरुख खान साथी हैं, दोस्त नहीं- सनी देओल

जब उनसे पूछा गया कि क्या आज शाहरुख खान उनके दोस्त हैं, तो ‘बंटवारा 1947’ के एक्टर ने कहा, “उस समय भी हम दुश्मन तो नहीं थे। हां, दोस्त का मतलब है कि हम सब साथी (colleagues) हैं। फ़िल्म इंडस्ट्री में मैं कहूंगा कि हम सब साथी ज़्यादा हैं, बजाय इसके कि…” एक्टर ने कहा कि उनके असली दोस्त वे हैं, जो स्कूल के समय बने थे, न कि बॉलीवुड वाले, क्योंकि “दोस्ती वो होती है जहां आप पूरी तरह खुले और बेझिझक हों और ऐसी दोस्ती बचपन में ही होती है।”

सनी देओल और शाहरुख खान के बीच झगड़ा किस बात पर हुआ था?

सनी देओल और शाहरुख खान के बीच अनबन 1993 में शुरू हुई थी, जब वे अपनी फ़िल्म ‘डर’ की शूटिंग कर रहे थे। खबरों के मुताबिक भले ही सनी फिल्म के हीरो थे, लेकिन वे इस बात से खुश नहीं थे कि शाहरुख खान के विलेन वाले किरदार के मुकाबले उनके किरदार को कैसे दिखाया गया था। ‘डर’ के रिलीज होने के बाद, दोनों एक्टर्स ने 16 साल तक एक-दूसरे से बात नहीं की।

Business idea: 1 करोड़ की नौकरी छोड़ भारत लौटा इंजीनियर! सिर्फ ₹90,000 से शुरू किया बिजनेस, 6 साल में हासिल किया बड़ा मुकाम

Business idea: अमेरिका में करोड़ों की सैलरी वाली नौकरी छोड़कर भारत लौटने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर पारिवारिक जीवन, भारत में बढ़ते स्टार्टअप अवसर और कुछ नया करने की चाह लोगों को वापस देश आने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी कड़ी में चेन्नई के युवा उद्यमी विवेक तिरुवेंगडम (Vivek Thiruvengadam) की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।

Qubit Fitness के संस्थापक और CEO विवेक तिरुवेंगदम ने बताया कि उन्होंने अमेरिका में करीब 1 करोड़ रुपये सालाना की नौकरी छोड़ दी और परिवार के साथ चेन्नई लौट आए। उस समय उनके पास सिर्फ 90 हजार रुपये की बचत थी। लेकिन उन्होंने इसी रकम से अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया।

विवेक ने इंस्टाग्राम पर अपनी छह साल की यात्रा साझा करते हुए लिखा कि यह फैसला अचानक नहीं था। उनका मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं। बल्कि परिवार के करीब रहना और ऐसा काम करना था, जिसका समाज पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।

उन्होंने बताया कि अमेरिका में 14 साल बिताने के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपनी 11 महीने की बेटी के साथ भारत लौटने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि परिवार के साथ रहकर कुछ नया और सार्थक बनाना किसी बड़ी नौकरी से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

Qubit Fitness की कैसे हुई शुरुआत?

जनवरी 2021 में विवेक ने बिना किसी ऑफिस, निवेशक या टीम के Qubit Fitness की शुरुआत की। उनके पास सिर्फ एक लैपटॉप, अपना समय और 90 हजार रुपये की बचत थी। शुरुआती दौर आसान नहीं था। पहले साल कंपनी का कारोबार करीब 20 लाख रुपये तक ही पहुंच पाया, जो अमेरिका में उनकी सालाना आय की तुलना में काफी कम था।

हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। समय के साथ कंपनी का विस्तार हुआ। नए ग्राहक जुड़े, कामकाज बेहतर हुआ और कारोबार बढ़ता गया। भारत लौटने के छह साल बाद विवेक ने वह वित्तीय लक्ष्य हासिल कर लिया, जिसके लिए उन्होंने यह बड़ा फैसला लिया था।

अपने अनुभव शेयर करते हुए विवेक ने कहा कि उद्यमिता ने उन्हें सिखाया कि लगातार मेहनत, प्रतिभा से भी ज्यादा महत्वपूर्ण होती है। धैर्य का फल देर से मिलता है। लेकिन मिलता जरूर है। उन्होंने यह भी कहा कि उद्देश्य के साथ काम करके कमाया गया पैसा अलग तरह की संतुष्टि देता है।

सफलता का श्रेय परिवार को दिया

विवेक ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, ग्राहकों और शुरुआती दिनों में उनका साथ देने वाले लोगों को दिया। उन्होंने कहा कि इन्हीं लोगों के भरोसे और सहयोग की वजह से वह अपने सपने को हकीकत में बदल पाए। सोशल मीडिया पर उनकी कहानी को लोगों ने खूब सराहा। एक यूजर ने लिखा कि आपकी सफलता के पीछे आपकी अच्छाई और सोच सबसे बड़ी ताकत है।

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वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि आपका ब्रांड और सोच लोगों के लिए प्रेरणा है। परिवार के साथ रहकर आगे बढ़ने का आपका फैसला शानदार है। कई अन्य लोगों ने भी विवेक की यात्रा को प्रेरणादायक बताते हुए उन्हें बधाई दी। विवेक का कहना है कि कभी-कभी विश्वास ही आपका इकलौता बिजनेस प्लान होता है। इस यात्रा ने उन्हें सिखाया कि प्रतिभा से ज्यादा निरंतरता मायने रखती है। उद्देश्यपूर्ण काम से मिलने वाली संतुष्टि अलग ही होती है।

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तमिलनाडु में किसानों का 75000 रुपये तक का कर्ज माफ, CM विजय ने किया बड़ा एलान…जानें किन्हें मिलेगा लाभ

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोमवार को किसानों के लिए बड़ी घोषणा की। उन्होंने 75,000 रुपये तक के सहकारी कृषि ऋण को पूरी तरह माफ करने का ऐलान किया। वहीं, 75,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के ऋण पर भी 75,000 रुपये तक की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और देश की तरक्की किसानों के समर्थन पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि राज्य इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, इसके बावजूद सरकार ने किसानों को अतिरिक्त मदद देने का फैसला किया है। इसके तहत किसानों को कुल 953.06 करोड़ रुपये की सहायता दी जाएगी।

किसानों के लिए बड़ा ऐलान

विधानसभा में नियम 110 के तहत घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि सरकार ने मई में सत्ता संभालने के 15 दिनों के अंदर 50,000 रुपये तक के कृषि ऋण माफ कर दिए थे। इसके बाद सरकार ने राहत बढ़ाते हुए 75,000 रुपये तक के कृषि ऋण पूरी तरह माफ करने का फैसला किया। वहीं, 75,000 रुपये से ज्यादा के ऋण पर 35,000 रुपये तक की छूट दी गई। इस फैसले से 14.44 लाख से ज्यादा किसानों को फायदा हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अगस्त 2026 को कृषि संगठनों के साथ हुई बातचीत के बाद सरकार ने किसानों को और राहत देने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि यह फैसला राज्य की मौजूदा आर्थिक मुश्किलों और भारतीय रिजर्व बैंक के उन दिशा-निर्देशों के बावजूद लिया गया है, जिनमें सहकारी बैंकों के ऋण का जल्द निपटारा करने की जरूरत बताई गई है।

माफ किया जाएगा कर्ज

मुख्यमंत्री की घोषणा के मुताबिक, 75,000 रुपये तक के सहकारी कृषि ऋण को अब पूरी तरह माफ किया जाएगा। वहीं, 75,000 रुपये से 1 लाख रुपये तक के ऋण पर 75,000 रुपये तक की छूट मिलेगी। 1 लाख रुपये से ज्यादा के ऋण पर अधिकतम 35,000 रुपये की राहत दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस फैसले से 1.38 लाख से ज्यादा किसानों को अतिरिक्त मदद मिलेगी। इससे सरकार पर करीब 953.06 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसके बाद 13.34 लाख किसानों को मिलने वाली कुल ऋण राहत की राशि बढ़कर 6,220 करोड़ रुपये हो जाएगी।