Market cues : बाजार के दायरे में ट्रेड करने की उम्मीद, मुनाफे के सौदे पकड़ने के लिए इन अहम स्तरों पर रहे नजर

Trade setup for today : 19 अक्टूबर को निफ्टी में लगातार दो दिनों की तेजी का सिलसिला टूट गया और इसमें 1.1 प्रतिशत की गिरावट आई। पिछले दो सत्रों में 20-डे EMA के ऊपर बंद होने के बावजूद, इंडेक्स इस स्तर के ऊपर टिके रहने में नाकाम रहा। तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं और बड़ा टेक्निकल ढांचा भी कमजोर बना हुआ है। इंडेक्स अपने मिड और लॉन्ग टर्म के मूविंग एवरेज के नीचे कारोबार कर रहा है,जिससे बाजार पर मंदी हावी है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर निफ्टी 20-डे EMA (जो अभी 22,900 के आसपास है) के नीचे बना रहता है तो इसमें 22,800 तक की गिरावट आ सकती है, जिसके बाद 22,500 पर बड़ा सपोर्ट होगा। ऊपर की तरफ, 23,000–23,200 की रेंज रेजिस्टेंस जोन का काम कर सकती है। अगर निफ्टी इस रेंज के ऊपर मजबूती दिखाता है तो और बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं,अगर यह इसे पार नहीं कर पाता है तो बाजार कंसोलिडेशन (एक दायरे में रहने) के दौर में बना रह सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

निफ्टी 50 (22,889) के लिए महत्वपूर्ण स्तर

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 23,096, 23,174 और 23,300

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 22,844, 22,766 और 22,640

निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

निफ्टी 50 ने डेली चार्ट पर एक लंबी लाल कैंडल बनाई और 20-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) से थोड़ा नीचे बंद हुआ। ये बाजार में कमजोरी का संकेत है। निफ्टी अपने 50-दिन, 100-दिन और 200-दिन के EMA से भी नीचे रहा,जो एक कमजोर ट्रेंड का संकेत है। रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) गिरकर 47.72 पर आ गया, लेकिन यह अपनी सिग्नल लाइन से काफी ऊपर बना रहा। इस बीच,मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) सिग्नल लाइन के ऊपर बना रहा और ज़ीरो लाइन की ओर ऊपर की तरफ बढ़ता रहा। लगातार चौथे सत्र में हरे रंग का हिस्टोग्राम बार भी बड़ा हुआ। ये संकेत बताते हैं कि ब्रॉडर ट्रेंड अभी भी कमज़ोर है, हालांकि MACD मोमेंटम में सुधार निकट भविष्य में संभावित रिकवरी का संकेत देता है।

बैंक निफ्टी (55,488) के लिए महत्वपूर्ण स्तर

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 55,779, 55,909 और 56,120

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 55,357, 55,226 और 55,015

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 56,238, 56,819

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 55,049, 54,053

बैंक निफ्टी स्पेशल फॉर्मेशन

बैंक निफ्टी ने छोटी ऊपरी और निचली विक्स (wicks) वाली एक बेयरिश कैंडल बनाई है। पिछले दो सत्रों में 55,500 के स्तर के ऊपर रहने के बाद, यह 20-डे EMA के थोड़ा नीचे बंद हुआ है। यह बिकवाली के नए दबाव का संकेत है। हाल की रिकवरी के दौरान भी इंडेक्स 50-डे EMA को वापस हासिल नहीं कर पाया और अपने मिड और लॉन्ग टर्म मूविंग एवरेज के नीचे ही ट्रेड करता रहा जो बैंकिंग इंडेक्स में व्यापक कमजोरी का संकेत है।

RSI गिरकर 48.25 पर आ गया, लेकिन यह अपनी सिग्नल लाइन के ऊपर बना रहा। वहीं, MACD ऊपर की ओर बढ़ता रहा और रेफरेंस लाइन के ऊपर टिका रहा। हालांकि, लगातार पांच सेशन तक बढ़ने के बाद हिस्टोग्राम में गिरावट आई। ये इंडिकेटर बताते हैं कि MACD मोमेंटम में सुधार के बावजूद ओवरऑल ट्रेंड अभी भी कमजोर है। हिस्टोग्राम में आई हालिया गिरावट यह भी संकेत देती है कि बुलिश मोमेंटम में कुछ कमी आ सकती है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो (करोड़ रुपए में)

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इंडिया VIX

बाजार के डर का पैमाना माने जाने वाला ‘इंडिया VIX’ 5.33 प्रतिशत बढ़कर 14.77 पर पहुंच गया है। इसका ऊंचे स्तर पर बने रहना यह संकेत देता है कि तेजी की तेजड़ियों के बीच सतर्कता बढ़ गई है। अगर यह मजबूती से 15 के स्तर के ऊपर जाता है तो तेजी वाले सौदों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। वहीं,अगर इसमें गिरावट आती है और यह लगातार 13 के स्तर के नीचे बना रहता है तो इससे तेजी की उम्मीद रखने वाले निवेशकों को कुछ राहत मिल सकती है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 19 अक्टूबर को गिरकर 0.93 पर आ गया, जबकि पिछले सत्र में यह 1.21 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक: कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक: अंबुजा सीमेंट्स, केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, सेल (SAIL)

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक: कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update: मंगलवार को दशहरा की छुट्टी के बाद भारतीय शेयर बाजार में फिर से कारोबार शुरू हुआ है। पिछले हफ्ते आई तेजी के बाद, अब बाजार का रुख ‘बुल्स’ (तेजी लाने वालों) के पक्ष में जाता नहीं दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं; मंगलवार को तो ये 112 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर गई थीं।

तेल की ऊंची कीमतों के साथ-साथ, स्पेसएक्स (SpaceX) और सुपर माइक्रो (Super Micro) के नतीजों के बाद AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े शेयरों में भी वापसी देखने को मिल रही है। सोमवार रात नैस्डैक (Nasdaq) ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था, और आज फ्यूचर्स भी 200 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सोमवार को हुई ‘प्रॉफिट बुकिंग’ के बाद IT शेयरों का इस पर क्या असर होता है।

आज की सबसे बड़ी घटना जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) का IPO है। 30,213 करोड़ रुपये का यह इश्यू आज सब्सक्रिप्शन के लिए खुल रहा है और यह देश के इतिहास का सबसे बड़ा IPO है।

कंपनियों के नतीजों पर बाजार की प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। बजाज फाइनेंस, IREDA और अन्य कंपनियों के शेयरों में उनके नतीजों के आधार पर हलचल दिख रही है। आज आने वाले प्रमुख नतीजों में एटरनल (Eternal), KEI इंडस्ट्रीज और SRF शामिल हैं।

निफ्टी के लिए नीचे की तरफ 22,800 का स्तर काफी अहम है। अगर यह स्तर टूटता है, तो निफ्टी 22,550 से 22,750 के स्तर तक जा सकता है। वहीं, अगर बाजार में कोई रिकवरी आती है, तो 23,000 के स्तर पर रुकावट आ सकती है। निफ्टी बैंक के लिए, फिलहाल 55,000 से 56,000 के बीच की रेंज बनी हुई है।

गिफ्ट निफ्टी लगभग 23,031 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से करीब 96 अंक या 0.41% ऊपर है। इससे भारतीय शेयर बाजार सूचकांकों के सकारात्मक शुरुआत करने के संकेत मिलते हैं।

 

Gold Price Today: सोने का भाव और नीचे; दिल्ली, लखनऊ, जयपुर में ₹134040 पर आया 22 कैरेट

21 अक्टूबर को देश में सोने की कीमत में गिरावट है। अलग-अलग शहरों में 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव लुढ़का है। सुबह के वक्त राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 146220 रुपये प्रति 10 ग्राम है। मुंबई में भाव 146070 रुपये प्रति 10 ग्राम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,125.90 डॉलर प्रति औंस पर है। निवेशक अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग 27-28 अक्टूबर को है। सितंबर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने अपनी बेंचमार्क ओवरनाइट ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद ये 3.75%-4.00% की रेंज में आ गईं। सोने की वैश्विक कीमत इस साल जनवरी में 5,594.82 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 146220 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134040 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 133890 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 146070 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 147160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 134890 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 146070 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 133890 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली134040146220
मुंबई133890146070
अहमदाबाद133940146120
चेन्नई134890147160
कोलकाता133890146070
हैदराबाद133890146070
जयपुर134040146220
भोपाल133940146120
लखनऊ134040146220
चंडीगढ़134040146220

Silver Prices: चांदी में रिकॉर्ड हाई से 46% की गिरावट, जेपी मॉर्गन ने कीमतों के लिए अनुमान घटाया

चांदी की कीमत

दूसरी कीमती धातु चांदी में भी गिरावट है। 21 अक्टूबर की सुबह चांदी 229900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 57.86 डॉलर प्रति औंस है। इस साल जनवरी में देश के अंदर चांदी की कीमत 4 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गई थी। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Asian Market Today: अमेरिकी AI कंपनियों की शानदार कमाई से एशियाई बाजारों में तेजी,Kospi 3.6% तक उछला

Asian Market Today: एशियाई बाजारों में तेजी देखने को मिली। अमेरिकी इक्विटी-इंडेक्स फ्यूचर्स में आई बढ़त का असर एशियाई बाजारों पर दिखा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर से सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाली कुछ बड़ी कंपनियों की शानदार कमाई ने निवेशकों का टेक्नोलॉजी शेयरों के प्रति उत्साह फिर से जगा दिया है।

MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.6% ऊपर चढ़ा, जिसमें दक्षिण कोरिया और जापान सबसे आगे रहे। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स 3.62% उछल गया। इससे पहले, दक्षिण कोरिया के बाजार में हाल ही में एक IPO की शुरुआत बेहद खराब रही थी, जिससे अब बाजार ने जोरदार वापसी की है। जापान में, निक्केई 225 (Nikkei 225) में 1.76% और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 1.12% की बढ़त दर्ज की गई। हैंग सेंग फ्यूचर्स भी 0.5% ऊपर रहा।

भारत में, GIFT निफ्टी (जो यह संकेत देता है कि दिन की शुरुआत में शेयर बाजार कैसा रहेगा) ने सूचकांकों के लिए एक सकारात्मक (हरे निशान में) शुरुआत का अनुमान जताया है।

इसके अलावा, बुधवार को जियो प्लेटफॉर्म्स (Jio Platforms) के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए सब्सक्रिप्शन भी शुरू होने जा रहा है। बाजार के जानकारों ने इसे ‘सभी IPO की जननी’ (Mother of all IPOs) करार दिया है, क्योंकि उम्मीद है कि यह देश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा। करेंसी मार्केट में, जापानी येन 158.29 प्रति डॉलर के स्तर पर लगभग स्थिर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.6746 प्रति डॉलर पर बना रहा।

अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में भी तेजी दिखी। नैस्डैक 100 (Nasdaq 100) फ्यूचर्स 0.7% ऊपर चढ़े। वहीं, स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों में एक्सटेंडेड ट्रेडिंग के दौरान करीब 7% की उछाल आई, क्योंकि कंपनी ने अपने तीसरी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं।

सुपर माइक्रो कंप्यूटर (Super Micro Computer) ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और पोस्ट-मार्केट ट्रेडिंग में 15% की तेजी दर्ज की, जिससे AI-इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों को बढ़ावा मिला। दूसरी ओर, नेटफ्लिक्स (Netflix) के शेयरों में गिरावट आई, क्योंकि कंपनी ने भविष्य के लिए निराशाजनक अनुमान (forecast) जारी किया है।

स्पेसएक्स (SpaceX) की इस तेजी के पीछे एलन मस्क की सैटेलाइट, रॉकेट और AI कंपनी का शानदार प्रदर्शन रहा। सितंबर में समाप्त तिमाही के लिए कंपनी ने 4.4 अरब डॉलर की नेट इनकम दर्ज की, जबकि इसका रेवेन्यू एक साल पहले की तुलना में 161% बढ़ गया है।

इसके अलावा, मस्क ने बताया कि स्पेसएक्स और टेस्ला ने संभावित विलय (merger) की संभावना तलाशने के लिए विशेष कमेटियां बनाई हैं। यह कदम अब तक के सबसे बड़े कॉर्पोरेट गठबंधन की दिशा में एक शुरुआती पहल है।

पिछले हफ्ते AI वैल्यूएशन और फाइनेंसिंग को लेकर चिंताओं के कारण टेक्नोलॉजी शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव आया था, लेकिन हालिया नतीजों ने निवेशकों को कुछ राहत दी है। अब निवेशकों की नज़र कंपनियों के आने वाले नतीजों पर है। वे यह देखना चाहेंगे कि क्या विकास के आंकड़े AI इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाए जा रहे अरबों डॉलर के निवेश को सही ठहराते हैं।

इस बीच, मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे सत्र के बाद, एशियाई बाज़ार की शुरुआती ट्रेडिंग में तेल की कीमतों में आई तेज़ी बनी रही। मंगलवार को ट्रेडर्स अमेरिका-ईरान युद्ध को खत्म करने की कोशिशों से जुड़ी अलग-अलग खबरों का आकलन कर रहे थे। एशियाई बाज़ार की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 109.52 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.7% की बढ़त के साथ 98.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

बॉन्ड बाजार में, न्यूयॉर्क सत्र के दौरान लॉन्ग-टर्म US ट्रेज़री का प्रदर्शन बेहतर रहा, जिसका असर डॉलर पर पड़ा। इस साल अब तक US ट्रेज़री यील्ड पर तेल की कीमतों का काफी असर रहा है, लेकिन पिछले हफ्ते बॉन्ड निवेशकों ने कच्चे तेल की कीमतों पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया, क्योंकि AI निवेश से जुड़े शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

रिलायंस के पास रिफाइनिंग की असाधारण क्षमता! जामनगर दौरे से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का बड़ा बयान

Marco Rubio Jamnagar Refinery: गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के दौरे से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने कंपनी की रिफाइनिंग क्षमताओं की जमकर तारीफ की है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि रिलायंस ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में एक बेहद महत्वपूर्ण प्लेयर है और उनका दौरा वेनेजुएला तथा पश्चिमी गोलार्ध से कच्चे तेल के आयात और प्रसंस्करण को बढ़ाने पर केंद्रित होगा।

‘रिलायंस के पास रिफाइनिंग की असाधारण क्षमता’

बुधवार को जामनगर स्थित रिलायंस रिफाइनरी का दौरा करने जा रहे अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा, ‘रिलायंस एक बेहद महत्वपूर्ण कंपनी है। उसके पास कच्चे तेल को रिफाइन करने की असाधारण क्षमता है।’ रुबियो ने ये भी कहा कि रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमताएं भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने में बड़ी मदद कर सकती हैं।

वेनेजुएला के कच्चे तेल पर रिलायंस के साथ सहयोग का बड़ा प्लान

रुबियो ने कहा कि वेनेजुएला में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ रहा है और भारत का इतिहास रहा है कि वह वेनेजुएला के भारी और उच्च-सल्फर तेल को आसानी से रिफाइन कर लेता है।

उन्होंने स्पष्ट किया, ‘पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले तेल को जब भारत में रिफाइन किया जाता है, तो यह भारत के लिए भी फायदेमंद है और हमारे लिए भी।’ अमेरिकी विदेश मंत्री ने अमेरिकी ऊर्जा क्षेत्र में रिलायंस के मौजूदा निवेश और रिफाइनिंग क्षमताओं की भी सराहना की।

जामनगर में है दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स

रिलायंस इंडस्ट्रीज जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स चलाती है, जिसकी कच्चा तेल प्रसंस्करण क्षमता लगभग 14 लाख बैरल प्रति दिन है।

इस कॉम्प्लेक्स में दो बड़ी रिफाइनरी शामिल हैं, जो वेनेजुएला द्वारा उत्पादित भारी और उच्च-सल्फर ग्रेड जैसे जटिल कच्चे तेल को भी आसानी से प्रोसेस करने में सक्षम हैं।

‘बस कुछ हफ्तों की बात…’, भारत से ट्रेड डील पर US विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दे दिया बहुत बड़ा संकेत

Disclaimer: मनीकंट्रोल नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट के पास है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

Marco Rubio Interview: ‘भारत-अमेरिका ट्रेड डील जल्द’, जानिए ईरान युद्ध, आतंकवाद से लेकर रूसी तेल की खरीद पर क्या बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio Interview: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के साथ ट्रेड डील, रूस से तेल खरीदने, पाकिस्तान, ईरान और क्वाड जैसे अहम मुद्दों पर बात की। नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील लगभग तैयार है। इसे पूरा होने में महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लगने की उम्मीद है।

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के पास आपसी संबंध मजबूत करने के असाधारण अवसर हैं। रुबियो ने रूस से तेल खरीद, पाकिस्तान में आतंकवाद और ईरान युद्ध के बारे में भी बात की।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील

रुबियो ने कहा कि ट्रेड डील अब अंतिम चरण में है। कुछ तकनीकी मुद्दों को सुलझाना और समझौते की भाषा को अंतिम रूप देना बाकी है। उनके मुताबिक, घोषणा से पहले जरूरी है कि दोनों देश हर शर्त पर सहमत हों। उन्हें उम्मीद है कि डील कुछ हफ्तों में पूरी हो जाएगी।

भारत को दूसरे देशों के मुकाबले बेहतर टैरिफ मिलने के सवाल पर रुबियो ने कहा कि किसी भी ट्रेड डील का मकसद मौजूदा स्थिति से बेहतर शर्तें हासिल करना होता है। लेकिन इससे भी जरूरी है कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते लंबे समय तक टिकाऊ रहें।

उन्होंने कहा कि हर देश के अपने राष्ट्रीय हित होते हैं। भारत अपने हितों की रक्षा करेगा और अमेरिका भी ऐसा ही करेगा। लेकिन दोस्ती और सहयोग की वजह से दोनों देश मतभेदों को सुलझा सकते हैं। रुबियो के मुताबिक, समझौता ऐसा होना चाहिए, जो कुल मिलाकर दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।

रूस से तेल खरीदने पर भारत की स्थिति समझते हैं रुबियो

अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ और प्रतिबंध लगाने की बात करता है, जबकि खुद भी रूस से डीजल खरीद रहा है। इस सवाल पर रुबियो ने कहा कि यूक्रेन युद्ध पांचवें साल में पहुंच चुका है और इसे खत्म करना जरूरी है। लेकिन रूस पर प्रतिबंधों का असर सिर्फ उसी देश पर नहीं पड़ता। रूस के साथ कारोबार करने वाले दूसरे देशों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने दो चुनौतियां हैं। पहली, रूस पर दबाव बनाना, ताकि वह युद्ध खत्म करने के लिए समझौते पर आए। दूसरी, यह देखना कि इस दबाव का असर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ रहा है।

रुबियो के मुताबिक, यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका के हितों के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को भी देखना जरूरी है। उन्होंने माना कि रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत और अमेरिका के बीच तनाव है। उम्मीद जताई कि ट्रेड डील और बातचीत से मतभेद कम हो सकते हैं।

अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत

अमेरिका के इलिनॉय स्टेट में एक हिंदू मंदिर पर हमले की कथित साजिश और भारतीयों के खिलाफ नफरत के सवाल पर रुबियो ने कहा कि कोई भी देश ऐसी घटनाओं से पूरी तरह अछूता नहीं है। हर समाज में कुछ लोग अज्ञानता और नफरत के कारण गलत काम करते हैं।

हालांकि, उन्होंने इस बात से इनकार किया कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ नफरत व्यापक स्तर पर फैली हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं के बाद भारतीय-अमेरिकी समुदाय के साथ आसपास के लोग भी पीड़ितों के समर्थन में खड़े होते हैं।

रुबियो ने विस्कॉन्सिन में सिख समुदाय के साथ हुई एक भयावह घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका में यहूदी विरोधी घटनाओं में बढ़ोतरी पर चिंता जताई। उनके मुताबिक, नेताओं को ऐसी नफरत को बढ़ावा नहीं देना चाहिए, न ही उसका बचाव करना चाहिए या उसे नजरअंदाज करना चाहिए।

पाकिस्तान पर अमेरिकी नीति

पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी नीति पर रुबियो ने कहा कि अमेरिका दुनिया में कहीं भी आतंकवाद और उसे समर्थन देने वालों के खिलाफ है। हालांकि, विदेश मंत्री के तौर पर उन्हें उन देशों के साथ भी संबंध बनाए रखने पड़ते हैं, जिनसे कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।

राहुल जोशी ने उन्हें याद दिलाया कि 2025 में अमेरिकी सीनेटर रहते हुए रुबियो ने पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता रोकने से जुड़ा विधेयक लाने की बात कही थी, अगर वह भारत के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देता है। उनसे पूछा गया कि क्या अब उनकी नीति बदल गई है।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के पास परमाणु हथियार हैं और भौगोलिक स्थिति के लिहाज से भी अमेरिका के लिए उससे बातचीत करना जरूरी है। उन्होंने इसकी तुलना भारत के ईरान के साथ संबंधों से की। उनके मुताबिक, भारत को भी ईरान के नेताओं से बातचीत करनी पड़ती है, भले ही कुछ मुद्दों पर मतभेद हों।

रुबियो ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने से अमेरिका को उन मुद्दों पर बातचीत करने का मौका मिल सकता है, जिनसे भारत को चिंता है। इससे आतंकवाद को समर्थन देने वाली गतिविधियों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद भी की जा सकती है।

ईरान और होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव

ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमलों को लेकर रुबियो ने कहा कि ईरान की सरकार के साथ समझौता करना मुश्किल है। उन्होंने ईरान की तुलना नाजी जर्मनी से की और आरोप लगाया कि ईरान व्यावसायिक जहाजों को निशाना बना रहा है। और ऐसे नाविकों की जान खतरे में डाल रहा है, जिनका युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है।

रुबियो ने कहा कि अमेरिका हर रात समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। उनके मुताबिक, ईरान की ओर से दागे जाने वाले ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट कर दिया जाता है। हालांकि, कुछ हमले जहाजों तक पहुंच जाते हैं। इससे जहाजों को नुकसान होता है और लोगों की जान भी जाती है।

उन्होंने खास तौर पर भारतीय नाविकों की मौत का जिक्र किया। रुबियो ने कहा कि समुद्र में बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। इसी वजह से इन हमलों में कई भारतीयों की भी जान गई है। उन्होंने ईरान से ऐसे हमले रोकने की अपील की।

क्वाड की बैठक साल के अंत से पहले

रुबियो ने उम्मीद जताई कि क्वाड देशों के नेताओं की बैठक इस साल के अंत से पहले होगी। उन्होंने बताया कि बैठक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान सम्मेलन के दौरान आयोजित करने पर सहमति बनी है। हालांकि, तारीख अभी तय नहीं हुई है।

क्वाड में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। रुबियो ने बताया कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक क्वाड से जुड़ी थी, जिसमें जयशंकर भी शामिल थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सात या आठ बार बातचीत हो चुकी है। उन्होंने अटलांटा में G20 के दौरान एक और बैठक होने की जानकारी भी दी।

रुबियो के मुताबिक, क्वाड अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है। इसके तहत ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगली शिखर बैठक में भी ऐसे फैसलों और उनके नतीजों की घोषणा होनी चाहिए, जिनका वास्तविक असर दिखाई दे।

जयशंकर के साथ रिश्तों की तारीफ

रुबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने रिश्तों को शानदार बताया। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली बैठक में जयशंकर शामिल थे। इसके बाद दोनों कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। जयशंकर चार बार अमेरिका भी गए हैं। दोनों की मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय बैठकों और सम्मेलनों में भी हुई हैं।

रुबियो ने कहा कि जब भी दोनों किसी बैठक या कार्यक्रम के लिए एक ही शहर में होते हैं, तो मिलने का समय जरूर निकालते हैं। उनके मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में दोनों के बीच मजबूत कामकाजी रिश्ता बना है। इससे कई संवेदनशील और मुश्किल मुद्दों को संभालने में मदद मिली है।

जामनगर में रिलायंस से मुलाकात क्यों?

रुबियो ने अपनी जामनगर यात्रा को रिलायंस की रिफाइनिंग क्षमता और ऊर्जा सहयोग से जोड़ा। उन्होंने कहा कि रिलायंस के पास कच्चे तेल को उपयोगी उत्पादों में बदलने की असाधारण क्षमता है। उन्होंने इसे भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए अहम बताया।

रुबियो के मुताबिक, रिलायंस भारत को ऊर्जा आपूर्ति के अलग-अलग स्रोतों से जोड़ने में मदद कर सकती है। उन्होंने वेनेजुएला के तेल का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, वेनेजुएला अपना तेल उत्पादन बढ़ा रहा है और भारत लंबे समय से इस तरह के कच्चे तेल को रिफाइन करने में सक्षम रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि रिलायंस ने अमेरिका में रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश किया है। रुबियो ने कहा कि जामनगर में कंपनी के कामकाज को देखने और उसके अधिकारियों से बातचीत करने का मकसद ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना है।

उन्होंने कहा कि खास तौर पर पश्चिमी गोलार्ध से आने वाले कच्चे तेल को रिफाइन करने में सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है। इससे भारत को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प मिलेंगे और अमेरिका को भी लाभ होगा।

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BLS Polymers IPO: 27 अक्टूबर से खुलेगा ₹255 करोड़ का इश्यू, GMP दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत

BLS Polymers IPO: बीएलएस पॉलिमर्स का ₹255 करोड़ का IPO 27 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इसका प्राइस बैंड ₹142 से ₹150 प्रति शेयर तय किया गया है। इस हिसाब से कंपनी की वैल्यू करीब ₹930.5 करोड़ होगी। IPO में 1.7 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इश्यू 29 अक्टूबर को बंद होगा, जबकि एंकर निवेशक 26 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे।

शेयरों का अलॉटमेंट 30 अक्टूबर तक फाइनल होने की उम्मीद है। वहीं, स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्टिंग 3 नवंबर को हो सकती है। कंपनी को दिसंबर 2025 में SEBI से IPO की मंजूरी मिली थी।

BLS Polymers IPO का GMP

ग्रे मार्केट में BLS पॉलिमर्स के आईपीओ को तगड़ा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसका लेटेस्ट GMP ₹30 है। यह अपर प्राइस बैंड से 20% लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। हालांकि, GMP सिर्फ आईपीओ की डिमांड का अंदाजा भर होता है। इसे लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

IPO से जुटाए पैसे कहां खर्च होंगे?

BLS पॉलिमर्स IPO से मिलने वाली रकम में से ₹77.56 करोड़ गोवा स्थित अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के विस्तार पर खर्च करेगी। इसके अलावा, ₹89.5 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों के लिए रखे जाएंगे। बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों में होगा।

क्या करती है कंपनी?

नई दिल्ली स्थित BLS Polymers खास तरह के पॉलिमर कंपाउंड बनाती है। इनका इस्तेमाल बिजली, टेलीकॉम, रेलवे, पानी और तेल-गैस से जुड़े उद्योगों में होता है। कंपनी के प्रोडक्ट तारों, केबलों और पाइपलाइनों को सुरक्षा देने में काम आते हैं।

मुनाफा 27.8% बढ़ा

FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 27.8% बढ़कर ₹27 करोड़ हो गया, जो FY25 में ₹21.1 करोड़ था। इस दौरान रेवेन्यू भी 6.4% बढ़कर ₹349.4 करोड़ पहुंच गई। जून 2026 तिमाही में कंपनी ने ₹107.02 करोड़ की रेवेन्यू पर ₹10.2 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय!’ एस जयशंकर संग अपनी केमिस्ट्री और Quad पर बोले मार्को रुबियो

Marco Rubio S Jaishankar Relation: भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक स्पेशल इंटरव्यू में रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपने गहरे और मजबूत कामकाजी रिश्तों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि दोनों देश QUAD के जरिए अपने रणनीतिक सहयोग को एक नए मुकाम पर ले जा रहे हैं।

‘एक ही शहर में हों तो मिलना तय’: जयशंकर संग मजबूत केमिस्ट्री

मार्को रुबियो ने खुलासा किया कि पिछले डेढ़ साल के दौरान वे और विदेश मंत्री एस. जयशंकर कम से कम 12 बार मिल चुके हैं। रुबियो के अमेरिकी विदेश मंत्री बनने के बाद उनकी पहली मुलाकात भी जयशंकर के साथ ही हुई थी।

रुबियो ने कहा, ‘जब भी हम किसी वैश्विक सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय बैठक या एक ही शहर में होते हैं, तो हम एक-दूसरे से मिलना कभी नहीं भूलते। हमने एक बेहद सकारात्मक और मजबूत वर्किंग रिलेशनशिप बनाई है।’

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसी मजबूत बॉन्डिंग की बदौलत दोनों देश पिछले डेढ़ साल में कई नाजुक और संवेदनशील मुद्दों को बहुत आसानी से सुलझाने में सफल रहे हैं।

Quad सम्मेलन में होंगे ऐतिहासिक फैसले

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सदस्यता वाले ग्रुप Quad के भविष्य पर बात करते हुए रुबियो ने कहा कि यह संगठन अब सिर्फ बैठकों और समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी क्वाड लीडर्स समिट केवल एक ‘गेट-टुगेदर’ नहीं होगी। इस शिखर सम्मेलन में चारों देश ठोस और बड़े फैसलों का ऐलान करेंगे।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत-US के रिश्ते बेहद अहम

मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वैश्विक मामलों को लेकर एक जैसी सोच है। दोनों देशों के पास रक्षा, सुरक्षा, तकनीक और व्यापार के क्षेत्र में अपने संबंधों को और गहराई तक ले जाने के ‘असाधारण अवसर’ मौजूद हैं।

‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

Marco Rubio On Iran: भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान और उसकी शीर्ष नेतृत्व प्रणाली पर जमकर निशाना साधा है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर पहुंचना बेहद मुश्किल है, क्योंकि देश की कमान थियोलॉजी यानी धार्मिक नीतियों से संचालित होने वाले ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ के हाथों में है।

नाजी U-Boat रणनीति से की तुलना, भारतीय नाविकों की मौतों पर जताई चिंता

मार्को रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ईरान की इन हरकतों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी की सबमरीन रणनीतियों से की।

रुबियो ने कहा, ‘ईरान खुलेआम कह रहा है कि वे निर्दोष नाविकों को मारने और कमर्शियल जहाजों को डुबोने की कोशिश कर रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा कभी नहीं देखा गया। पूरी दुनिया को एक साथ आकर इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए।’

उन्होंने बताया कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों ने भी अपनी जान गंवाई है, क्योंकि वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या है। वैसे अमेरिकी नौसेना अधिकांश ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर रही है।

‘कट्टरपंथी मौलवियों के हाथ में कमान’, कूटनीति पर संकट

तेहरान के साथ राजनयिक समझौते और भविष्य में सैन्य तनाव की संभावना पर रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरानी नेतृत्व की कट्टरपंथी सोच के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उन्होंने कहा, ‘ईरानी शासन के साथ डील करना बहुत कठिन है। दुर्भाग्य से वे समझौता करना नहीं जानते और वे कट्टरपंथी शिया मौलवियों द्वारा नियंत्रित हैं।’ रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनका हमला सामान्य शिया समुदाय पर नहीं, बल्कि शासन चला रहे कट्टरपंथियों पर है।

अमेरिका की ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ नीति जारी रहेगी

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वाशिंगटन तेहरान पर असाधारण आर्थिक दबाव बनाना जारी रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने नागरिकों की भलाई के बजाय मिलने वाले हर डॉलर का उपयोग आतंकवाद को स्पॉन्सर करने, मिसाइलें और ड्रोन बनाने में करता है।

इससे पहले अगस्त में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ यानी आर्थिक तौर पर पंगु बनाने की रणनीति का ऐलान किया था, जिसके तहत डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, गोल्ड, एविएशन और शिपिंग सेक्टर्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

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