Maruti Baleno Facelift: 5 सितंबर को आ रही है नई मारुति सुजुकी बलेनो फेसलिफ्ट, जानें संभावित कीमत और इसके फीचर्स

मारुति सुजुकी अपनी लोकप्रिय कार बलेनो का नया अपडेटेड मॉडल जल्द भारतीय बाजार में उतार सकती है। कंपनी इसे 5 सितंबर को लॉन्च करने की तैयारी में है। नई बलेनो में मौजूदा पेट्रोल और CNG इंजन के विकल्प जारी रहने की उम्मीद है, जबकि कार के डिजाइन और फीचर्स में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए अपडेट के साथ कंपनी ग्राहकों को पहले से बेहतर और आकर्षक अनुभव देने की कोशिश करेगी।

2026 मारुति बलेनो फेसलिफ्ट को त्योहारी सीजन में बाजार में उतारा जाएगा। इस दौरान आमतौर पर कारों की खरीदारी बढ़ जाती है, ऐसे में कंपनी को नई बलेनो से अच्छी बिक्री की उम्मीद हो सकती है। इसकी लॉन्चिंग 5 सितंबर को होने की बात कही जा रही है। हालांकि, कार की बुकिंग कब शुरू होगी, कितने वेरिएंट आएंगे और इसकी कीमत क्या होगी, इसकी जानकारी लॉन्च के नजदीक सामने आने की उम्मीद है।

नई मारुति बलेनो को सड़कों पर टेस्टिंग के दौरान देखा जा चुका है। सामने आई तस्वीरों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि कार के आगे वाले हिस्से में कुछ नए बदलाव किए जा सकते हैं। इसमें नया फ्रंट ग्रिल, बदला हुआ बंपर और नए डिजाइन के अलॉय व्हील्स मिलने की उम्मीद है। वहीं कार के पीछे बड़े बदलाव की संभावना कम है। कंपनी मौजूदा बलेनो के डिजाइन को बरकरार रखते हुए रियर बंपर और लाइट्स में हल्के बदलाव कर सकती है।

नई बलेनो फेसलिफ्ट में ग्राहकों को कुछ नए फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। इसमें नई सीट अपहोल्स्ट्री, एम्बिएंट लाइटिंग और सिंगल-पेन सनरूफ दिए जाने की उम्मीद है। हालांकि, डैशबोर्ड का डिजाइन पहले जैसा ही रह सकता है। कार में मौजूदा 9 इंच टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमैटिक क्लाइमेट कंट्रोल, हेड-अप डिस्प्ले, 360 डिग्री कैमरा और छह स्पीकर वाला ऑडियो सिस्टम भी मिल सकता है। कंपनी ने अभी तक नई बलेनो के सभी फीचर्स की आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

नई बलेनो फेसलिफ्ट में मौजूदा 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन को बरकरार रखा जा सकता है। यह इंजन करीब 89.7 PS की पावर और 113 Nm का टॉर्क दे सकता है। इसके साथ 5-स्पीड मैनुअल और 5-स्पीड ऑटोमेटेड मैनुअल गियरबॉक्स मिलने की उम्मीद है।

वहीं CNG मॉडल में 77.5 PS की पावर और 98.5 Nm का टॉर्क देने वाला इंजन जारी रह सकता है, जिसे 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ पेश किया जा सकता है। मौजूदा मारुति बलेनो की एक्स-शोरूम कीमत 5.99 लाख रुपये से 9.10 लाख रुपये के बीच है। नए फेसलिफ्ट मॉडल में अतिरिक्त फीचर्स और बदलाव किए जाने की वजह से इसकी कीमत मौजूदा मॉडल से थोड़ी ज्यादा हो सकती है। बाजार में नई बलेनो का मुकाबला टाटा अल्ट्रोज, हुंडई i20 और टोयोटा ग्लैंजा जैसी प्रीमियम हैचबैक कारों से होगा।

Gold Price Today: सोना ₹600 उछलकर ₹1.56 लाख के पार, कमजोर डॉलर से बढ़ी चमक

Gold Price Today: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट वाला सोना ₹600 चढ़कर ₹1,56,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटी) सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की उम्मीद कम हुई है। इससे डॉलर पर दबाव बढ़ा और सोने की मांग को सहारा मिला।

पिछले हफ्ते अमेरिका में महंगाई, रोजगार और रिटेल सेल्स के आंकड़े उम्मीद से नरम रहे। इससे बाजार को लगने लगा कि फेड जल्द ब्याज दरें बढ़ाने से बच सकता है।

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ग्लोबल बाजार में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत रहा। स्पॉट गोल्ड करीब 0.5% बढ़कर 4,398 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। वहीं, चांदी 1% से ज्यादा चढ़कर 65.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि कमजोर डॉलर और कच्चे तेल की सीमित कीमतें फिलहाल सोने को सहारा दे रही हैं।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

जियोपॉलिटिकल मोर्चे पर अमेरिका-ईरान तनाव अब भी बाजार की नजर में है। हालांकि, इस हफ्ते निवेशकों की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेड की FOMC बैठक के मिनट्स पर रहेगी।

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, फेड के मिनट्स से ब्याज दरों के अगले संकेत मिल सकते हैं। इससे सोने की कीमतों की अगली दिशा तय होने में मदद मिलेगी।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर,

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UP Weather Alert: यूपी के भारी होंगे अगले कुछ दिन! IMD ने कई जिलों में जारी किया भारी बारिश और आकाशीय बिजली का अलर्ट

UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में मानसून इन दिनों पूरी रह एक्टिव है। इन दिनों प्रदेश में जमकर बारिश हो रही है। वहीं लोगों को अभी बारिश से राहत नहीं मिलने वाली है। मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना जताई है। इस दौरान कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। 17 अगस्त को कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश की संभावना है। वहीं 20 और 21 अगस्त को पूर्वी उत्तर प्रदेश में कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग ने इस दौरान गरज-चमक और आकाशीय बिजली को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। वहीं लोगों को इससे सावधान रहने की सलाह दी है।

23 अगस्त तक होगी भारी बारिश

क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के मुताबिक,, प्रदेश के ऊपर बने मौसमी सिस्टम और मानसूनी द्रोणी की स्थिति में बदलाव के कारण बारिश के लिए परिस्थितियां अनुकूल हुई हैं। अगले 48 घंटों में कई जगह भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में बना मौसम सिस्टम भी आगे बढ़ रहा है, जिसका असर 19 अगस्त से उत्तर प्रदेश में दिखाई दे सकता है। इसके चलते 23 अगस्त तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान है।

यूपी के इन शहरों में होगी भारी बारिश

18 से 22 अगस्त तक यूपी के कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहेगा। 18 अगस्त को पूर्वी और मध्य यूपी के कई जिलों में भारी बारिश, 19 अगस्त को चित्रकूट, प्रयागराज, वाराणसी समेत कई इलाकों में बारिश की संभावना है। 20 और 21 अगस्त को कुछ जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। वहीं 22 अगस्त को भी बांदा, चित्रकूट, गोरखपुर, लखनऊ, रायबरेली, अयोध्या समेत कई जिलों में भारी बारिश का अनुमान है।

बारिश के साथ बिजली गिरने का भी खतरा

मौसम विभाग ने बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली को लेकर भी अलर्ट जारी किया है। लोगों को खुले में जाने और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। भारी बारिश से निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है और नदियों व जलाशयों का जलस्तर बढ़ सकता है। इससे सड़क और रेल यातायात भी प्रभावित हो सकता है।

BrahMos और Agni-V में कौन ज्यादा ताकतवर? दोनों मिसाइलों का काम बिल्कुल अलग, समझिए फर्क

भारत के पास दुनिया की सबसे ताकतवर और खतरनाक मिसाइल है। जिसकी गति और मारक क्षमता देखकर पूरी दुनिया हैरान रहती है। भारत के इन मिसाइलों का एक नजारा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में दिखा था।  पिछले 40 साल में भारत ने मिसाइल तकनीक विकसित करने की शुरुआत से लेकर आधुनिक और बेहद ताकतवर मिसाइल सिस्टम तैयार करने तक लंबा सफर तय किया है। आज देश जमीन, समुद्र और हवा से होने वाले खतरों का मुकाबला करने की अपनी क्षमता लगातार बढ़ा रहा है। इस सफर में ब्रह्मोस और अग्नि-5 भारत की मिसाइल ताकत के दो बड़े उदाहरण हैं।

हालांकि ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही भारत की ताकतवर मिसाइलों में शामिल हैं, लेकिन इन्हें एक-दूसरे से मुकाबला करने के लिए नहीं बनाया गया है। दोनों का काम और इस्तेमाल अलग है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। वहीं, अग्नि-5 भारत की रणनीतिक सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य दुश्मन को किसी बड़े हमले से रोकना और भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना उनकी ताकत के आधार पर करने के बजाय यह समझना जरूरी है कि दोनों मिसाइलें अलग-अलग भूमिकाएं निभाती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से दोनों का अपना अलग और महत्वपूर्ण स्थान है।

अलग-अलग मिशन तय करते हैं दोनों मिसाइलों की भूमिका

ब्रह्मोस और अग्नि-5 के बीच अंतर समझने का सबसे आसान तरीका यह जानना है कि दोनों को किस मकसद से बनाया गया है। दोनों आधुनिक और ताकतवर मिसाइलें हैं, लेकिन युद्ध में उनका इस्तेमाल अलग-अलग काम के लिए होता है।

ब्रह्मोस नाम ब्रह्मपुत्र और रूस की मोस्क्वा नदियों के नाम से लिया गया है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की कंपनी एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया ने मिलकर विकसित की है। यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, यानी यह आवाज की रफ्तार से भी कई गुना तेज उड़ सकती है।

ब्रह्मोस का इस्तेमाल पारंपरिक सैन्य अभियानों में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। इसमें युद्धपोत, एयरफील्ड, रडार स्टेशन और सैन्य कमांड सेंटर जैसे लक्ष्य शामिल हो सकते हैं। यह मिसाइल भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना में शामिल है और भारत की प्रमुख स्ट्राइक मिसाइलों में से एक है।

वहीं, अग्नि-5 एक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसे डीआरडीओ ने भारत की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता मजबूत करने के लिए विकसित किया है।

ब्रह्मोस के विपरीत अग्नि-5 का इस्तेमाल आम युद्ध के मैदान में किसी ठिकाने पर हमला करने के लिए नहीं किया जाता। इसका मुख्य उद्देश्य लंबी दूरी से आने वाले बड़े खतरों के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना है। यह भारत की परमाणु प्रतिरोध नीति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल अलग-अलग तरीके से काम करती हैं

ब्रह्मोस और अग्नि-5 दोनों ही मिसाइलें हैं, लेकिन इनके उड़ने और टारगेट तक पहुंचने का तरीका बिल्कुल अलग है। इसी वजह से दोनों का इस्तेमाल भी अलग-अलग काम के लिए किया जाता है।

ब्रह्मोस एक क्रूज मिसाइल है। यह वायुमंडल के अंदर एक विमान की तरह उड़ते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इसमें रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे बहुत तेज गति से उड़ने में मदद करता है। यह कम ऊंचाई पर भी उड़ सकती है, जिससे दुश्मन के लिए इसे समय रहते पहचानना और रोकना मुश्किल हो सकता है।

वहीं, अग्नि-5 एक बैलिस्टिक मिसाइल है। यह ब्रह्मोस से बिल्कुल अलग तरीके से लक्ष्य तक पहुंचती है। लॉन्च होने के बाद यह बहुत ऊंचाई तक जाती है और फिर तेज गति से नीचे आते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती है। इस तरह यह लॉन्च वाली जगह से हजारों किलोमीटर दूर तक स्थित लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम होती है।

आसान शब्दों में कहें तो ब्रह्मोस तेज गति से कम ऊंचाई पर उड़कर सटीक हमला करने वाली मिसाइल है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक मिसाइल है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत की सुरक्षा और दुश्मन को हमले से रोकने की क्षमता को मजबूत करना है।

स्पीड और रेंज

ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार के लिए जानी जाती है। यह करीब मैक 3 की गति से उड़ सकती है। इतनी तेज गति के कारण यह कुछ ही समय में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है और दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय मिलता है। कम ऊंचाई पर उड़ने और लक्ष्य के करीब पहुंचने के दौरान दिशा बदलने की क्षमता के कारण इसे रोकना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

दूसरी ओर, अग्नि-5 को लंबी दूरी के लिए बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से ज्यादा बताई जाती है। इसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में तुरंत हमला करने के बजाय भारत की लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करने के लिए किया जाता है।

आसान भाषा में समझें तो ब्रह्मोस की सबसे बड़ी ताकत उसकी रफ्तार और सटीक हमला करने की क्षमता है, जबकि अग्नि-5 की खासियत उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक भूमिका है।

कौन सी मिसाइल ज्यादा ताकतवर है?

ब्रह्मोस और अग्नि-5 की तुलना करते समय अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि दोनों में से कौन ज्यादा ताकतवर है। लेकिन इसका सीधा जवाब देना आसान नहीं है, क्योंकि दोनों मिसाइलों को अलग-अलग उद्देश्यों के लिए बनाया गया है। इसलिए इनकी ताकत का आकलन मिशन के हिसाब से करना ज्यादा सही होगा।

अगर लक्ष्य दुश्मन के युद्धपोत, एयरबेस या सैन्य कमांड सेंटर पर तेजी से हमला करना है, तो ब्रह्मोस ज्यादा उपयोगी है। इसकी तेज रफ्तार, सटीक निशाना लगाने की क्षमता और कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता इसे एक प्रभावी क्रूज मिसाइल बनाती है।

वहीं, अगर बात लंबी दूरी की रणनीतिक सुरक्षा और दुश्मन को बड़े हमले से रोकने की है, तो अग्नि-5 की भूमिका अहम हो जाती है। इसकी 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की मारक क्षमता भारत की रणनीतिक मिसाइल ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस भूमिका में मिसाइल की रफ्तार से ज्यादा उसकी लंबी दूरी और रणनीतिक क्षमता मायने रखती है।

इसलिए ब्रह्मोस और अग्नि-5 को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी कहना सही नहीं होगा। ब्रह्मोस भारत की तेज और सटीक पारंपरिक हमला करने की क्षमता को मजबूत करती है, जबकि अग्नि-5 लंबी दूरी की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को मजबूत करती है। दोनों की भूमिकाएं अलग हैं और इसी वजह से दोनों भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

Viral Video: मुरथल में इंसान नहीं रोबोट परोस रहे पराठे, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

मुरथल अपने पराठों और ढाबों के लिए जाना जाता है। वहीं हाल ही में मुरथल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। लेकिन इस बार अपने पराठों की वजह से नहीं बल्कि रोबोट वेटर की वजह से। मुरथल के रेशम ढाबा में रोबोट वेटर ग्राहकों की टेबल तक खाना पहुंचा रहा है। रोबोट को खाना सर्व करते देखकर लोग काफी एक्साईटेड हैं और उसका वीडियो भी बना रहे हैं। इस नई पहल ने पारंपरिक ढाबे के माहौल में आधुनिक तकनीक का नया रंग जोड़ दिया है।

कैसे करता है सर्व

रेस्टोरेंट में रोबोट वेटर लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जैसे ही रोबोट खाना लेकर टेबल तक पहुंचता है, कस्टमर उसका वीडियो बनाने लगते हैं और सेल्फी भी लेते हैं। बच्चों को ये रोबोट खास तौर पर पसंद आ रहा है। अब यहां लोगों को स्वादिष्ट खाना खाने के साथ रोबोट को देखना भी एक नया और मजेदार अनुभव मिल रहा है। रेस्टोरेंट में रोबोट के जरिए खाना पहुंचाने की प्रक्रिया भी काफी सरल है। ऑर्डर तैयार होने के बाद कर्मचारी खाने की ट्रे रोबोट पर रख देते हैं।

इसके बाद रोबोट अपने सिस्टम की मदद से सही रास्ते से ग्राहक की टेबल तक पहुंच जाता है। इसे सॉफ्टवेयर के साथ रिमोट से भी कन्ट्रोल किया जा सकता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर रेस्टोरेंट का स्टाफ तुरंत इसकी मदद कर सकता है।

एक बार चार्ज पर दो घंटे चलता है रोबोट

रेस्टोरेंट में इस्तेमाल हो रहा यह रोबोट देखने में काफी आधुनिक है। इसका शरीर फाइबर से तैयार किया गया है और इसमें एलईडी लाइट्स लगी हैं, जो इसे अलग लुक देती हैं। इसकी आंखों में लगी लाल रोशनी लोगों का ध्यान खास तौर पर खींचती है। रेस्टोरेंट के अनुसार, एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद रोबोट करीब दो घंटे तक काम कर सकता है। खास बात यह है कि ग्राहकों से रोबोट के जरिए खाना पहुंचाने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता।

मैनेजर ने क्या कहा

रेशम ढाबा के मैनेजर संजय के मुताबिक, रेस्टोरेंट ग्राहकों को खाने के साथ कुछ नया और मनोरंजक अनुभव देना चाहता था। उन्होंने IANS से कहा, “यह एक ऐसा कॉन्सेप्ट है, जिसमें रोबोट और ट्रेन दोनों शामिल हैं और मुरथल में यह अपने आप में नया है। यहां सभी ढाबे अच्छा खाना परोसने की कोशिश करते हैं, इसलिए हमने सोचा कि ग्राहकों के लिए कुछ अलग किया जाए। इसी सोच के साथ हमने खाने के साथ मनोरंजन जोड़ने के लिए रोबोट और ट्रेन का कॉन्सेप्ट शुरू किया।” सोशल मीडिया पर ये काफी वायरल हो रहा है।

El Nino Impact On Monsoon: अल-नीनो के साये में मानसून, समझिए कम बारिश से इकॉनमी पर पड़ सकता है कैसा असर

भारत में मानसून पर मंडराते अल-नीनो के खतरे ने आम लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने चेतावनी दी है कि अल-नीनो के मजबूत होने की वजह से मानसूनी बारिश कमजोर पड़ सकती है। इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं और हाइड्रोपावर उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। वसे एजेंसी का यह भी मानना है कि अगर मौसम का यह झटका बहुत ज्यादा गंभीर नहीं होता है तो भारत की समग्र अर्थव्यवस्था पर इसका असर सीमित रहने की उम्मीद है।

एसएंडपी के मुताबिक भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की उन इकॉनमी (जैसे वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस) में शामिल है, जहां के लोग कीमतों में होने वाले उछाल के प्रति बेहद संवेदनशील हैं। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन देशों में घरेलू बजट का एक बड़ा हिस्सा भोजन पर खर्च होता है और कृषि काफी हद तक मौसम की स्थितियों पर निर्भर करती है।

12% कम हुई बारिश, अगस्त में भी सुस्त रह सकता है मानसून

भारत के मानसूनी बारिश की स्थिति फिलहाल अच्छी नजर नहीं आ रही है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अगस्त तक 2026 के मानसून सीजन के दौरान बारिश औसत से 12 प्रतिशत कम दर्ज की गई है। इसके अलावा भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी क्षेत्रों में मानसून और कमजोर हो सकता है।

भारत में सालाना होने वाली कुल बारिश का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा मानसून से ही मिलता है। ये खेती-किसानी के लिए बेहद जरूरी है। देश की लगभग आधी कृषि भूमि में सिंचाई की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे अधिकांश फसलें नियमित बारिश पर ही निर्भर रहती हैं।

दालों, सोयाबीन और मक्के की पैदावार पर पड़ सकता है असर

अगर बारिश में कमी का यह दौर लंबा खींचता है तो इससे दालों, सोयाबीन, कपास और मक्के जैसी फसलों की पैदावार में गिरावट आ सकती है। इस सीजन में किसानों को पहले से ही असमान बारिश का सामना करना पड़ा है। हालांकि जुलाई में हुई बेहतर बारिश ने शुरुआती सुस्त मानसून से हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई की थी, लेकिन अब फिर से जोखिम बढ़ गया है।

मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमानों ने इन चिंताओं को और गहरा कर दिया है। विभाग ने अगस्त महीने में औसत से कम बारिश होने का अंदेशा जताया है जबकि इसी दौरान अल-नीनो की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो भारत में अल-नीनो का संबंध कमजोर या अनिश्चित मानसूनी बारिश से रहा है।

बिजली आपूर्ति और जलाशयों पर भी पड़ेगा प्रभाव

कम बारिश का असर सिर्फ भोजन और फसलों तक ही सीमित नहीं रहेगा। बारिश कम होने से देश के प्रमुख जलाशय खाली रह सकते हैं, जिससे हाइड्रो पावर प्रोडक्शन में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति पर पड़ेगा और ऊर्जा संकट की स्थिति खड़ी हो सकती है।

सबसे बड़ा जोखिम आम परिवारों के बजट पर है। कृषि उत्पादन में कमी आने से बाजार में खाद्य पदार्थों की आपूर्ति घट जाएगी और कीमतें ऊपर चढ़ जाएंगी। इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, खासकर तब जब रोजमर्रा की जरूरी चीजें महंगी हो जाएंगी।

भारत के पास चावल का पर्याप्त स्टॉक, लेकिन चुनौतियां बरकरार

तमाम जोखिमों के बावजूद भारत के पास खाद्य आपूर्ति के बड़े झटके से निपटने के लिए कुछ मजबूत सुरक्षा चक्र मौजूद हैं। देश के पास वर्तमान में चावल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अलावा पिछले अल-नीनो दौर की तुलना में भारत की खेती के तरीकों, सिंचाई सुविधाओं और फसल तकनीकों में काफी सुधार हुआ है। इससे भी देश की खाद्य उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है।

एसएंडपी का कहना है कि मौसम से जुड़ी अस्थायी रुकावट का मतलब यह नहीं है कि इकॉनमी को तुरंत कोई बड़ा नुकसान पहुंचेगा। नुकसान का पैमाना इस बात पर निर्भर करेगा कि मौसम कितना प्रतिकूल होता है और सरकार इससे निपटने के लिए कितनी प्रभावी कार्रवाई करती है। भारतीय उपभोक्ताओं के लिए तत्काल चिंता यही है कि अगर बारिश और कमजोर होती है तो रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। यह दबाव कितने समय तक रहेगा, यह काफी हद तक मानसून, फसल उत्पादन और आने वाले महीनों में अल-नीनो की ताकत पर निर्भर करेगा।

पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कितनी? आसिफ अली जरदारी के दावे और जनगणना के आंकड़ों में कितना फर्क, जानें कहां रहते हैं

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हाल ही में देश में धार्मिक अल्पसंख्यकों और हिंदू समुदाय की स्थिति पर बात की। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान की कुल आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 4 फीसदी बताई। हालांकि, पाकिस्तान की हालिया जनगणना के आंकड़े इस दावे से अलग तस्वीर दिखाते हैं। इससे हिंदू आबादी को लेकर दिए गए आंकड़े पर सवाल उठने लगे हैं।

पाकिस्तान में हिंदुओं की संख्या कितनी?

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार, देश में 38,67,729 लोगों ने खुद को हिंदू बताया, जो कुल आबादी का करीब 1.61 फीसदी है। वहीं, 13,49,487 लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट की श्रेणी में दर्ज किया गया, जो 0.56 फीसदी है। दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर यह संख्या 52,17,216 यानी कुल आबादी का करीब 2.17 फीसदी बैठती है। यानी पाकिस्तान के आधिकारिक जनगणना आंकड़ों में हिंदू आबादी 4 फीसदी नहीं, बल्कि अलग-अलग श्रेणियों को मिलाने पर भी करीब 2.17 फीसदी है।

आसिफ अली जरदारी के दावे और जनगणनी के आंकड़ों में कितना फर्क

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में धर्म के आधार पर आबादी के आंकड़े भी जारी किए गए हैं। इसमें कुल 24.04 करोड़ से ज्यादा लोगों को शामिल किया गया। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें करीब 23.16 करोड़ मुस्लिम, 33 लाख ईसाई और 38.67 लाख हिंदू जाति के लोग दर्ज हैं। इसके अलावा करीब 13.49 लाख लोगों को शेड्यूल्ड कास्ट की श्रेणी में रखा गया है। जनगणना के हिसाब से केवल हिंदू जाति की आबादी 1.61 फीसदी है, जबकि हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर यह आंकड़ा 2.17 फीसदी हो जाता है।

पाकिस्तान की जनगणना में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की आबादी को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज किया गया है। ऐसे में केवल हिंदू आबादी के 1.61 फीसदी आंकड़े को देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता, क्योंकि शेड्यूल्ड कास्ट में 13 लाख से ज्यादा लोग शामिल हैं। हालांकि, दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर भी कुल संख्या करीब 52.2 लाख होती है, जो पाकिस्तान की कुल आबादी का 2.17 फीसदी है, 4 फीसदी नहीं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स ने 2023 की जनगणना के विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक किए हैं, जिनमें देश, प्रांत और ग्रामीण-शहरी स्तर पर धर्म से जुड़े आंकड़े शामिल हैं।

1951 में हुई थी पहली जनगणना 

पाकिस्तान में पहली जनगणना 1951 में, देश के बंटवारे के करीब चार साल बाद हुई थी। उस समय पाकिस्तान दो हिस्सों में बंटा हुआ था, जिन्हें वेस्ट पाकिस्तान और ईस्ट पाकिस्तान कहा जाता था। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, 1951 की जनगणना में दोनों हिस्सों की आबादी को दर्ज किया गया था और अकेले वेस्ट पाकिस्तान की आबादी करीब 3.37 करोड़ थी।

पाकिस्तान की पुरानी जनगणना के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हिंदू आबादी की संख्या समय के साथ बढ़ी है। 1998 की जनगणना में पाकिस्तान में करीब 24.4 लाख हिंदू दर्ज किए गए थे। यह उस समय देश की कुल आबादी का लगभग 2.02 फीसदी था। यानी संख्या के लिहाज से हिंदू आबादी में बढ़ोतरी देखने को मिली है, हालांकि कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी अलग-अलग जनगणना में बदलती रही है।

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की कुल संख्या बढ़कर 52 लाख से ज्यादा हो गई। हालांकि, आबादी में इनकी हिस्सेदारी अब भी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के बताए 4 फीसदी से काफी कम है। 1998 की जनगणना में हिंदू आबादी 2.02 फीसदी थी, जबकि 2023 में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर भी यह आंकड़ा सिर्फ 2.17 फीसदी रहा।

पाकिस्तान की पुरानी जनगणना के आंकड़ों की आज के आंकड़ों से सीधी तुलना करना आसान नहीं है। इसकी वजह यह है कि 1951 की जनगणना में पूर्वी पाकिस्तान भी शामिल था, जो बाद में अलग होकर बांग्लादेश बन गया। इसलिए उस समय के आंकड़ों को आज के पाकिस्तान से मिलाते समय एक जैसे क्षेत्रों को आधार बनाना जरूरी है, ताकि तुलना सही तरीके से की जा सके।

सिंध में रहते हैं सबसे ज्यादा हिन्दू 

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के मुताबिक, देश की हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा सिंध प्रांत में रहता है। यहां 35,75,848 लोग हिंदू जाति और 13,25,559 लोग शेड्यूल्ड कास्ट के तौर पर दर्ज किए गए हैं। दोनों को मिलाकर यह संख्या करीब 49 लाख है, जो सिंध की कुल आबादी का 8.81 फीसदी है। देशभर में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट के रूप में दर्ज कुल आबादी में सिंध की हिस्सेदारी करीब 94 फीसदी है।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत की तुलना में दूसरे हिस्सों में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट की आबादी काफी कम दर्ज की गई है। 2023 की जनगणना के अनुसार, पंजाब में करीब 2.49 लाख लोग इन दोनों श्रेणियों में शामिल हैं, जो राज्य की आबादी का लगभग 0.20 फीसदी है। बलूचिस्तान में यह संख्या करीब 59 हजार, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में लगभग 6,100 रही। वहीं, इस्लामाबाद में हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट को मिलाकर 900 से भी कम लोग दर्ज किए गए।

सिंध प्रांत में हिंदू समुदाय की आबादी खासतौर पर दक्षिण-पूर्वी इलाकों में अधिक है। 2023 की जनगणना के मुताबिक, उमरकोट पाकिस्तान का एकमात्र जिला है, जहां हिंदू आबादी बहुमत में है। सिंध में हिंदू समुदाय से जुड़े सुरक्षा, जबरन धर्म परिवर्तन और पलायन जैसे मुद्दे भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं। जनगणना के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि पाकिस्तान की हिंदू आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है।

पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के मुताबिक, हिंदू और शेड्यूल्ड कास्ट समुदाय की आबादी शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा है। आंकड़ों के अनुसार, गांवों में करीब 27 लाख हिंदू जाति और 11.69 लाख शेड्यूल्ड कास्ट के लोग रहते हैं, जबकि शहरों में इनकी संख्या क्रमशः करीब 11.64 लाख और 1.80 लाख है। दोनों श्रेणियों को मिलाकर करीब 52.2 लाख लोगों में से लगभग 38.7 लाख ग्रामीण इलाकों में और करीब 13.5 लाख शहरी क्षेत्रों में रहते हैं।

सिंध में हिंदू समुदाय का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने आर्थिक परेशानियों के साथ-साथ सरकारी सुविधाओं और संस्थानों तक पहुंच की कमी जैसी चुनौतियां भी बताई गई हैं। अधिकार समूहों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हिंदू समुदाय की समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

Tata Group: नोएल टाटा ने PMO और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की, चेयरमैन बदलाव पर चर्चा

Tata Group: टाटा ग्रुप के नोएल टाटा ने शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। CNBC-TV18 के सूत्रों के मुताबिक, इन मीटिंग में टाटा ग्रुप की मौजूदा स्थिति और चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के फैसले पर चर्चा हुई।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही एन चंद्रशेखरन ने साफ कर दिया था कि वह 20 फरवरी 2027 के बाद टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर दूसरा कार्यकाल नहीं लेंगे।

सरकार को स्थिति की जानकारी दी गई

सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा ने सरकार को टाटा समूह में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया की जानकारी दी। यह बैठक पारसी नववर्ष के सप्ताहांत के दौरान हुई।

इससे पहले भी नोएल टाटा अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं। तब एयर इंडिया के भविष्य और ग्रुप से जुड़े दूसरे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

चेयरमैन बदलने की तैयारी

एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होगा। उन्होंने 12 अगस्त को बोर्ड को बताया था कि वह दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते और उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को कहा था।

AGM पर भी बना हुआ है पेच

18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) टल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी वजह Sir Ratan Tata Trust पर लगा नियामकीय प्रतिबंध है। इस प्रतिबंध के चलते ट्रस्ट जरूरी संयुक्त नामांकन नहीं कर पा रहा है।

टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM में कम से कम पांच सदस्यों का व्यक्तिगत रूप से मौजूद होना जरूरी है। इनमें Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust की ओर से संयुक्त रूप से नामित एक अधिकृत प्रतिनिधि भी शामिल होना चाहिए। चूंकि Sir Ratan Tata Trust फिलहाल बैठकें नहीं कर सकता और कोई फैसला नहीं ले सकता, इसलिए यह नामांकन अभी तक नहीं हो पाया है।

AGM में क्या-क्या होना है?

इस AGM में कई अहम प्रस्तावों पर फैसला होना है। FY26 के खातों को मंजूरी दी जानी है। साधारण शेयरों पर डिविडेंड पर फैसला होगा। चेयरमैन के पारिश्रमिक पर भी मुहर लगनी है। इसके अलावा रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले निदेशक के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर भी फैसला होना है।

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बिजली गई तो भी 10 घंटे तक देता रहेगा ठंडी हवा! ओरिएंट ने लॉन्च किया इन-बिल्ट बैटरी वाला BLDC पंखा, जानिए इसकी कीमत

गर्मियों के मौसम में बार-बार पावर कट यानी बिजली कटने की समस्या से परेशान रहने वाले लोगों के लिए एक राहत भरी खबर है। होम एप्लायंसेज बनाने वाली जानी-मानी कंपनी ओरिएंट इलेक्ट्रिक ने भारत में अपना नया इकोटेक वोल्ट BLDC सीलिंग फैन लॉन्च कर दिया है। इस पंखे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें इन-बिल्ट रीचार्जबल बैटरी दी गई है। इसकी मदद से ये पंखा बिजली जाने के बाद भी बिना किसी एक्सटर्नल इन्वर्टर या पावर बैकअप के कई घंटों तक लगातार ठंडी हवा देता रहता है।

कंपनी ने इस नए BLDC सीलिंग फैन को भारत में 4594 रुपये की शुरुआती कीमत पर पेश किया है। यह फैन उन घरों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आया है जहां अक्सर पावर कट होता रहता है और जो लोग अलग से महंगा इन्वर्टर या बैकअप सेटअप लगाने में पैसा खर्च नहीं करना चाहते।

पावर कट में 10 घंटे तक का बैटरी बैकअप

ओरिएंट इकोटेक वोल्ट की USP इसकी इन-बिल्ट रीचार्जबल बैटरी ही है। कंपनी का दावा है कि जब बिजली चली जाती है तो यह फैन स्पीड 1 पर चलाए जाने पर 10 घंटे तक लगातार कूलिंग दे सकता है। बैटरी की लाइफ और ड्यूरेबिलिटी को लेकर कंपनी का कहना है कि यह बैटरी 500 चार्ज साइकिल पूरा होने के बाद भी अपनी बैटरी हेल्थ क्षमता का 80 फीसदी तक हिस्सा बनाए रखती है। कंपनी पूरे पंखे पर 3 साल की वारंटी दे रही है जबकि इसमें लगी इन-बिल्ट बैटरी के लिए 1 साल की अलग से वारंटी दी जा रही है।

50% तक बिजली बचाएगी BLDC टेक्नोलॉजी

परफॉर्मेंस और एनर्जी सेविंग की बात करें तो ओरिएंट इकोटेक वोल्ट में 28W की एफिशिएंट BLDC (Brushless Direct Current) मोटर दी गई है। कंपनी के मुताबिक यह मोटर पारंपरिक इंडक्शन पंखों की तुलना में 50 प्रतिशत तक कम बिजली की खपत करती है।

इसमें डबल बॉल-बेयरिंग मैकेनिज्म का इस्तेमाल किया गया है। ये पंखे को लंबे समय तक स्मूथ और बिना किसी परेशानी के चलने में मदद करता है। यह मोटर 120V से लेकर 280V की वाइड वोल्टेज रेंज के बीच आसानी से काम कर सकती है। इससे वोल्टेज के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई खास असर नहीं पड़ता।

इन्वर्टर वाले घरों के लिए भी है काम का

यह सीलिंग फैन दो प्रीमियम कलर ऑप्शंस ग्लेशियर ग्रे और व्हाइट में पेश किया गया है। जिन घरों में पहले से इन्वर्टर लगा हुआ है, वहां भी यह बैटरी-ऑपरेटेड पंखा काफी काम साबित हो सकता है। इस फैन को अपनी इन-बिल्ट बैटरी पर चलाकर यूजर्स अपने घरेलू इन्वर्टर का लोड कम कर सकते हैं। इससे इन्वर्टर की क्षमता दूसरे जरूरी होम एप्लायंसेज को चलाने के काम आ सकती है।