HDFC Bank News: नए MD और CEO के लिए 3 बड़ी संभावनाएं, अब RBI के फैसले पर टिकी नजर

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के HDFC Bank के नए MD और CEO को लेकर फैसला अब करीब आता दिख रहा है। बैंक के बोर्ड ने RBI को दो नाम भेजे हैं। इनमें डिप्टी MD कैजाद भरूचा और ICICI Prudential Life Insurance के MD और CEO अनूप बागची का नाम शामिल है। दोनों के नाम तीन साल के कार्यकाल के लिए भेजे गए हैं।

मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। RBI फिलहाल दोनों नामों पर विचार कर रहा है। ऐसे में नेतृत्व बदलाव को लेकर तीन संभावनाएं चर्चा में हैं।

कैजाद भरूचा बन सकते हैं नए CEO

पहली संभावना बैंक के अंदर से ही नए CEO की नियुक्ति की है। कैजाद भरूचा 1995 से HDFC Bank से जुड़े हैं। 2014 में वह बैंक के होल-टाइम डायरेक्टर बने और 2023 से डिप्टी MD हैं।

वह रिटेल एसेट्स, मॉर्गेज, कॉरपोरेट बैंकिंग, बिजनेस बैंकिंग और रूरल बैंकिंग जैसे कारोबार देखते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति से बैंक के मौजूदा सिस्टम और कारोबार की अच्छी समझ रखने वाला नेतृत्व जारी रह सकता है।

हालांकि, उनके मामले में RBI के 15 साल के एग्रीगेट टेन्योर नियम का मुद्दा है। होल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर उनका पिछला कार्यकाल भी इसमें गिना जाता है। इसलिए पूरे तीन साल के कार्यकाल के लिए नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी।

अनूप बागची की भी दावेदारी

दूसरी संभावना बाहरी उम्मीदवार की है। अनूप बागची फिलहाल ICICI Prudential Life Insurance के MD और CEO हैं। इससे पहले वह ICICI Bank में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ICICI Securities के MD और CEO रह चुके हैं।

उनके पास रिटेल, MSME, कॉरपोरेट बैंकिंग, ट्रेजरी और फाइनेंशियल सर्विसेज का लंबा अनुभव है। RBI फिलहाल उनकी उम्मीदवारी की जांच कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने उनकी उम्मीदवारी पर IRDAI और ICICI Bank से भी फीडबैक मांगा है। इसकी वजह पिछले करीब तीन साल से उनका मेनस्ट्रीम बैंकिंग से बाहर होना बताया गया है।

भरूचा CEO और बागची DMD?

तीसरी संभावना दोनों को बैंक की टॉप लीडरशिप में जगह देने की है। इस स्थिति में भरूचा CEO बन सकते हैं, जबकि बागची डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (DMD) की भूमिका में आ सकते हैं।

ऐसा होने पर भरूचा अपने मौजूदा अनुभव के साथ बैंक की कमान संभालेंगे। वहीं बागची को HDFC Bank के कारोबार और कामकाज को समझने का समय मिल सकता है। आगे चलकर वह CEO की भूमिका संभाल सकते हैं।

बैंक के लिए क्यों अहम है फैसला?

नए CEO को बड़े मर्जर के बाद तैयार हुई HDFC Bank की बैलेंस शीट के साथ काम करना होगा। डिपॉजिट ग्रोथ, फंडिंग कॉस्ट, नेट इंटरेस्ट मार्जिन, लोन ग्रोथ और रिटर्न जैसे मुद्दे बैंक के लिए अहम रहेंगे।

अभी अंतिम फैसला RBI को करना है। इसलिए फिलहाल भरूचा, बागची या दोनों की भूमिका वाली तीनों संभावनाएं खुली हैं।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tata Group: नोएल टाटा ने PMO और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की, चेयरमैन बदलाव पर चर्चा

Tata Group: टाटा ग्रुप के नोएल टाटा ने शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की। CNBC-TV18 के सूत्रों के मुताबिक, इन मीटिंग में टाटा ग्रुप की मौजूदा स्थिति और चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के फैसले पर चर्चा हुई।

यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब कुछ दिन पहले ही एन चंद्रशेखरन ने साफ कर दिया था कि वह 20 फरवरी 2027 के बाद टाटा संस के चेयरमैन के तौर पर दूसरा कार्यकाल नहीं लेंगे।

सरकार को स्थिति की जानकारी दी गई

सूत्रों के अनुसार, नोएल टाटा ने सरकार को टाटा समूह में चल रहे नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया की जानकारी दी। यह बैठक पारसी नववर्ष के सप्ताहांत के दौरान हुई।

इससे पहले भी नोएल टाटा अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर चुके हैं। तब एयर इंडिया के भविष्य और ग्रुप से जुड़े दूसरे मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

चेयरमैन बदलने की तैयारी

एन. चंद्रशेखरन का कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को खत्म होगा। उन्होंने 12 अगस्त को बोर्ड को बताया था कि वह दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते और उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करने को कहा था।

AGM पर भी बना हुआ है पेच

18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की सालाना आम बैठक (AGM) टल सकती है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी वजह Sir Ratan Tata Trust पर लगा नियामकीय प्रतिबंध है। इस प्रतिबंध के चलते ट्रस्ट जरूरी संयुक्त नामांकन नहीं कर पा रहा है।

टाटा संस के नियमों के मुताबिक AGM में कम से कम पांच सदस्यों का व्यक्तिगत रूप से मौजूद होना जरूरी है। इनमें Sir Dorabji Tata Trust और Sir Ratan Tata Trust की ओर से संयुक्त रूप से नामित एक अधिकृत प्रतिनिधि भी शामिल होना चाहिए। चूंकि Sir Ratan Tata Trust फिलहाल बैठकें नहीं कर सकता और कोई फैसला नहीं ले सकता, इसलिए यह नामांकन अभी तक नहीं हो पाया है।

AGM में क्या-क्या होना है?

इस AGM में कई अहम प्रस्तावों पर फैसला होना है। FY26 के खातों को मंजूरी दी जानी है। साधारण शेयरों पर डिविडेंड पर फैसला होगा। चेयरमैन के पारिश्रमिक पर भी मुहर लगनी है। इसके अलावा रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले निदेशक के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर भी फैसला होना है।

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