Sunshine Pictures IPO: खुलने के 90 मिनट में ही 100% फुल! विपुल शाह के आईपीओ पर टूटे निवेशक, GMP में बंपर उछाल

Sunshine Pictures IPO Day 1: फिल्म और टेलीविजन निर्माता-निर्देशक विपुल अमृतलाल शाह की कंपनी सनशाइन पिक्चर्स के आईपीओ को प्राइमरी मार्केट में निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला है। आज, 18 अगस्त को खुलते ही इस आईपीओ पर निवेशक टूट पड़े और महज 90 मिनट के भीतर यह पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया।

फिल्म और वेब सीरीज क्रिएशन व डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी इस कंपनी के पब्लिक इश्यू में रिटेल और गैर-संस्थागत निवेशकों (NII) ने जोरदार दिलचस्पी दिखाई है।

खुलते ही 90 मिनट में फुल सब्सक्राइब

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को सुबह 11:30 बजे तक ही आईपीओ को 54.86 लाख शेयरों के ऑफर के मुकाबले 54.59 लाख शेयरों के लिए बोलियां मिल चुकी थीं:

रिटेल निवेशक: रिटेल कैटेगरी में आईपीओ 1.49 गुना सब्सक्राइब हुआ।

गैर-संस्थागत निवेशक (NII): एनआईआई का हिस्सा 1.16 गुना भरा।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹84.64 करोड़

पब्लिक इश्यू खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से ₹84.64 करोड़ का फंड जुटाया है। कंपनी ने 9 प्रमुख एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित किए हैं:

  • इनोवेटिव विजन फंड (Innovative Vision Fund)
  • खंडेलवाल फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड (Khandelwal Finance Pvt Ltd)
  • अर्नेस्टा ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड (Arnesta Global Opportunities Fund)
  • यूनी ग्रोथ फंड (Uni Growth Fund)
  • जील ग्लोबल अपॉर्चुनिटीज फंड (Zeal Global Opportunities Fund)
  • विजनरी वैल्यू फंड (Visionary Value Fund)
  • द एसियो फंड वीसीसी (The Asio Fund VCC)
  • शाइन स्टार बिल्ड कैप (Shine Star Build Cap Pvt Ltd)
  • एलआरएसडी सिक्योरिटीज (LRSD Securities Pvt Ltd)

सनशाइन पिक्चर्स आईपीओ की पूरी डिटेल्स

इश्यू साइज: कुल ₹282 करोड़ का यह आईपीओ 18 अगस्त को खुला है और 20 अगस्त 2026 तक सब्सक्रिप्शन के लिए खुला रहेगा।

प्राइस बैंड: कंपनी ने ₹342 से ₹360 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है।

ओएफएस (OFS): प्रमोटर विपुल अमृतलाल शाह ओएफएस के जरिए 20.31 लाख शेयर और शेफाली विपुल शाह 10.06 लाख शेयर बेच रहे हैं।

अलॉटमेंट और लिस्टिंग डेट: 21 अगस्त को अलॉटमेंट, बीएसई और एनएसई पर कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग 25 अगस्त 2026 को होगी।

जुटाए गए पैसों का कहां होगा इस्तेमाल?

सनशाइन पिक्चर्स की योजना फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि में से ₹112.50 करोड़ तक का उपयोग अपनी दीर्घकालिक कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए करने की है। शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इस लिस्टिंग से भारतीय बाजार में कंपनी की ब्रांड वैल्यू और विजिबिलिटी में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।

जीएमपी उछलकर ₹75 पहुंचा

प्राइमरी मार्केट में सनशाइन पिक्चर्स के आईपीओ को लेकर निवेशकों का उत्साह सातवें आसमान पर है और इसका असर ग्रे मार्केट में भी साफ दिख रहा है। 18 अगस्त को सनशाइन पिक्चर्स का जीएमपी बढ़कर +₹75 पर पहुंच गया है, जो इसके पिछले आठ सेशन का उच्चतम स्तर है।

₹360 के अपर प्राइस बैंड के हिसाब से शेयर की संभावित लिस्टिंग ₹435 प्रति शेयर (20.83% प्रीमियम) पर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। ग्रे मार्केट में लगातार जारी तेजी और 90 मिनट में मिले 100% से ज्यादा सब्सक्रिप्शन से संकेत मिल रहे हैं कि 25 अगस्त को दलाल स्ट्रीट पर यह एंटरटेनमेंट स्टॉक धमाकेदार एंट्री कर सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Blue Star Share Price: ब्रोकरेज फर्म ने रेटिंग की अपग्रेड, 18% ऊपर का दिया टारगेट, क्या आप करेंगे निवेश

Blue Star Share Price: ब्रोकरेज फर्म HSBC से AC बनाने वाली कंपनी ब्लू स्टार (Blue Star) के शेयर की रेटिंग अपग्रेड कर दी। HSBC ने अब ब्लू स्टार के लिए अपनी पिछली “hold” रेटिंग को बदलकर “buy” (खरीदने) की सलाह दी है और प्रति शेयर ₹1,780 का प्राइस टारगेट तय किया है। इसका मतलब है कि पिछले क्लोजिंग प्राइस से इसमें 18% की बढ़ोतरी हो सकती है।

ब्रोकरेज ने कहा कि जून तिमाही में रूम एयर कंडीशनर (RAC) इंडस्ट्री में 25% की बढ़ोतरी हुई, जिसमें वॉल्यूम में अनुमानित बढ़ोतरी 20% – 22% रही। उसने यह भी कहा कि पहली तिमाही में ब्लू स्टार के मुकाबले वोल्टास का प्रदर्शन बेहतर रहा।

HSBC ने कहा कि गर्मियों की बिक्री (जनवरी से जून) को देखें तो, ऊंचे बेस (high base) के बावजूद धीमी ग्रोथ के बावजूद ब्लू स्टार के मार्जिन स्थिर रहेकम मार्जिन गाइडेंस के कारण ब्रोकरेज ने अपने अनुमानों में कटौती की है।

उसने कहा कि मजबूत ऑर्डर बुक, डेटा सेंटर बिजनेस में मौजूदगी, मार्जिन बढ़ने की गुंजाइश और अपने मुख्य बिजनेस पर फोकस को देखते हुए उसने ब्लू स्टार की रेटिंग बढ़ाई है।

इस साल अब तक ब्लू स्टार के शेयर की कीमत में 23% की गिरावट आई है, जबकि वोल्टास के शेयरों में 8% की गिरावट देखी गई है। HSBC का कहना है कि इससे कंपनी का वैल्यूएशन अधिक आकर्षक हो गया है।

इस महीने की शुरुआत में, कंपनी ने अपनी पहली तिमाही की कमाई की रिपोर्ट दी थी, जिसमें उसका रेवेन्यू 13.3% बढ़कर ₹3,378 करोड़ हो गया, लेकिन यह CNBC-TV18 के ₹3,547 करोड़ के अनुमान से कम था। इसका EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) पिछले साल के मुकाबले 12% घटकर ₹175 करोड़ रह गया और यह बाजार के ₹247 करोड़ के अनुमान से भी काफी कम था।

कंपनी का EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान अवधि के 6.7% से घटकर 5.2% हो गया और यह बाजार के 7% के अनुमान से भी कम था।

हालांकि, कंपनी ने कहा कि डेटा सेंटर MEP प्रोजेक्ट ऑर्डर का आना इस हाई-ग्रोथ सेगमेंट में लगातार बनी हुई तेजी को दिखाता है।

ब्लू स्टार पर नज़र रखने वाले 27 एनालिस्ट में से 13 ने “buy” रेटिंग, 9 ने “hold” रेटिंग और 5 ने “Sell” रेटिंग दी है। ब्लू स्टार के शेयर बढ़त के साथ खुले, लेकिन बाद में वह बढ़त खत्म हो गई और मंगलवार को शेयर 0.3% गिरकर ₹1,503.2 पर ट्रेड कर रहे थे। इस साल अब तक शेयर में 15% की गिरावट आई है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Tata Sons: नोएल टाटा जल्द कर सकते हैं RBI अधिकारियों से मुलाकात, टाटा संस की लिस्टिंग पर हो सकता है अंतिम फैसला

Noel Tata RBI Meeting: टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इस महीने के अंत से पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा टाटा संस को अनलिस्टेड कंपनी के रूप में बनाए रखने और लिस्टिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं को खत्म करना है।

एन चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में चेयरमैन पद छोड़ने के ऐलान के बाद, अब नोएल टाटा खुद रेगुलेटरी के साथ बातचीत की कमान संभालने जा रहे हैं।

वार्ता की कमान अब नोएल टाटा के हाथों में

अब तक टाटा संस के अधिकारी और कुछ बोर्ड मेंबर्स आरबीआई के साथ लिस्टिंग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत कर रहे थे। लेकिन अब नोएल टाटा बोर्ड मेंबर और बहुसंख्यक शेयरधारक के प्रतिनिधि के रूप में सीधे आरबीआई से बात करेंगे। नोएल टाटा मई 2025 में ही आरबीआई को पत्र लिखकर टाटा संस को अनलिस्टेड रखने की अपनी इच्छा जाहिर कर चुके हैं। अब वे पिछले तीन साल से चले आ रहे इस मुद्दे का स्थाई समाधान चाहते हैं।

NBFC-CIC डी-रजिस्ट्रेशन और लिस्टिंग का पूरा गणित

साल 2022 में रिजर्व बैंक ने टाटा संस को ‘Upper Layer NBFC’ के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी के लिए 3 साल के भीतर (सितंबर 2025 तक) शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य था। हालांकि, टाटा संस ने लिस्टिंग से बचने के लिए कई कदम उठाए हैं:

कर्ज मुक्त हुई कंपनी: टाटा संस ने बैंकिंग सेक्टर से लिया गया अपना पूरा बाहरी कर्ज चुका दिया है।

आरबीआई को आश्वासन: कंपनी ने गारंटी दी है कि वह समूह की अन्य कंपनियों को लोन देने के लिए कोई नया कर्ज नहीं लेगी और न ही फीस लेकर कोई कॉर्पोरेट गारंटी देगी।

NBFC दर्जा रद्द करने की अर्जी: टाटा संस ने दिसंबर 2024 में आरबीआई को आवेदन सौंपकर कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (NBFC-CIC) का दर्जा रद्द करने की मांग की थी। यदि आरबीआई इस अर्जी को स्वीकार कर लेता है, तो टाटा संस पर अनिवार्य IPO/लिस्टिंग की शर्त अपने आप खत्म हो जाएगी।

SP ग्रुप की हिस्सेदारी का मुद्दा भी आ सकता है सामने

शापूरजी पालोनजी (SP Group) की टाटा संस में लगभग 18% हिस्सेदारी है। 31 मार्च 2026 तक एसपी ग्रुप पर करीब 60,000 करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज था। अपने कर्ज से राहत पाने के लिए एसपी ग्रुप टाटा संस के आईपीओ या शेयर बाय-बैक के जरिए लिक्विडिटी हासिल करने की कोशिश में है। अगर बैठक के दौरान आरबीआई इस विषय को उठाता है, तो एसपी ग्रुप की हिस्सेदारी से बाहर निकलने की योजना पर भी चर्चा की जा सकती है।

आरबीआई की यह शर्त रही है कि टाटा संस को अनलिस्टेड रखने के लिए टाटा ग्रुप के भीतर पूर्ण सहमति होनी चाहिए। नए नेतृत्व के गठन और एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के बीच नोएल टाटा की यह बैठक टाटा संस के भविष्य के कॉर्पोरेट ढांचे के लिहाज से सबसे निर्णायक मानी जा रही है।

करियर में आगे बढ़ने के लिए बदली नौकरी, लेकिन 30 दिन बाद ही बेरोजगार हुआ टेक प्रोफेशनल

नौकरी बदलने का फैसला अक्सर बेहतर सैलरी, करियर ग्रोथ और नई संभावनाओं की उम्मीद में लिया जाता है। लेकिन एक डेटा इंजीनियर के लिए यही फैसला कुछ ही हफ्तों में परेशानी का कारण बन गया। करीब पांच साल तक एक कंपनी में काम करने के बाद उसने नई कंपनी का रुख किया था। उसे उम्मीद थी कि नया अवसर उसके करियर को आगे बढ़ाएगा, लेकिन नई नौकरी शुरू करने के महज एक महीने बाद ही हालात बदल गए। कंपनी में प्रोजेक्ट और क्लाइंट से जुड़ी स्थिति बदलने के साथ बजट की समस्या सामने आ गई। इसके चलते उसके पास काम करने के लिए कोई प्रोजेक्ट नहीं बचा और उसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया।

खास बात यह है कि उसने पुरानी नौकरी किसी खराब प्रदर्शन या विवाद की वजह से नहीं छोड़ी थी। अब अचानक दोबारा नौकरी तलाशने की स्थिति में पहुंचा यह प्रोफेशनल सोच रहा है कि क्या उसे अपनी पुरानी कंपनी से वापस संपर्क करना चाहिए या फिर नए अवसरों की तलाश जारी रखनी चाहिए।

5 साल बाद लिया था नौकरी बदलने का फैसला

डेटा इंजीनियर ने Reddit पर अपनी कहानी शेयर की। उसने बताया कि वह करीब पांच साल से एक कंपनी में डेटा इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रहा था। नौकरी स्थिर थी और उसका प्रदर्शन भी किसी समस्या की वजह नहीं बना था। बेहतर मौके की उम्मीद में उसने कंपनी बदलने का फैसला किया और नई कंपनी जॉइन कर ली। नई कंपनी में सिर्फ एक महीना हुआ था नई नौकरी शुरू किए अभी एक महीना ही हुआ था कि हालात अचानक बदल गए। उसके मुताबिक, प्रोजेक्ट और क्लाइंट से जुड़ी स्थिति बदल गई और कंपनी को बजट की परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके चलते उसके पास कोई प्रोजेक्ट नहीं बचा। बाद में उसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया। इतनी जल्दी नौकरी खत्म होने से वह खुद भी हैरान रह गया।

पुरानी नौकरी छोड़ने का अब हो रहा अफसोस?

सबसे मुश्किल बात यह थी कि उसने अपनी पुरानी नौकरी खुद छोड़ी थी। वह कंपनी में करीब पांच साल से था और वहां उसकी नौकरी स्थिर थी। उसका कहना है कि नई कंपनी में जाने का फैसला किसी खराब प्रदर्शन या विवाद की वजह से नहीं था। अब अचानक फिर से नौकरी तलाशने की स्थिति आने के बाद उसके सामने बड़ा सवाल है क्या उसे अपनी पुरानी कंपनी से दोबारा संपर्क करना चाहिए?

‘क्या पुरानी कंपनी में लौटना करियर के लिए खराब होगा?’

टेक प्रोफेशनल ने Reddit पर लोगों से सलाह मांगी कि क्या उसे अपने पुराने नियोक्ता से वापस नौकरी देने की बात करनी चाहिए या पूरी तरह नई कंपनी तलाशनी चाहिए। उसकी चिंता यह भी है कि इंटरव्यू में सिर्फ एक महीने की नई नौकरी को कैसे समझाएगा। साथ ही, उसे डर है कि पुरानी कंपनी में वापस जाने से उसके करियर पर कोई गलत असर तो नहीं पड़ेगा।

लोगों ने कहा- दोनों रास्ते खुले रखो

Reddit पर कई लोगों ने उसे सलाह दी कि सिर्फ एक विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय दोनों रास्ते खुले रखे जाएं। कुछ यूजर्स ने कहा कि उसे नई नौकरियों के लिए आवेदन करते रहना चाहिए और साथ ही पुराने सहकर्मियों से संपर्क करने में भी कोई नुकसान नहीं है। एक यूजर ने अपनी कहानी भी शेयर की। उसने बताया कि कोविड के दौरान नई कंपनी में छह महीने काम करने के बाद उसका प्रोजेक्ट बंद हो गया था और छंटनी हो गई थी। इसके बाद वह अपनी पुरानी कंपनी में वापस चला गया।

उसके मुताबिक, पुरानी कंपनी ने उसके पिछले छह महीनों को स्किलिंग के लिए ‘सैबेटिकल’ की तरह दिखाने में भी मदद की। यानी सही रिश्ते और पुराने काम की अच्छी छवि होने पर पुरानी कंपनी में वापसी संभव हो सकती है।

पुरानी कंपनी में वापसी हमेशा गलत फैसला नहीं

इस कहानी से एक बात साफ है कि नौकरी बदलने के बाद आने वाली हर परेशानी कर्मचारी की गलती नहीं होती। कई बार प्रोजेक्ट, क्लाइंट या बजट में अचानक बदलाव का असर सीधे कर्मचारियों पर पड़ता है। ऐसे में पुरानी कंपनी में वापसी मांगना शर्म की बात नहीं है। अगर वहां अच्छे संबंध और मजबूत प्रदर्शन का रिकॉर्ड रहा हो, तो ‘boomerang employee’ के तौर पर लौटना भी एक व्यावहारिक करियर विकल्प हो सकता है।

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NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी में चॉइस फिलिंग की आखिरी तारीख बढ़ी, अब आज रात 11.59 बजे तक बता सकते हैं अपनी पसंद

NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी 2026 में सफल छात्र अब मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की ओर से आयोजित की जा रही काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। इसके तहत पहले राउंड में अपनी पसंद की मेडिकल सीट भरने और लॉक करने की सुविधा छात्रों को दी जाती है। एमसीसी ने काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे छात्रों को सहूलियत देते हुए नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1 चॉइस भरने और लॉक करने की डेडलाइन बढ़ाने का फैसला किया है। इसके तहत चॉइस लॉक करने की सुविधा भी बढ़ा दी गई है। कैंडिडेट 18 अगस्त, 2026 को रात 11:59 बजे तक यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

काउंसलिंग प्रक्रिया 15% ऑल इंडिया कोटा (AQI) के तहत अंडरग्रेजुएट मेडिकल और डेंटल कोर्स के लिए तय है। बदले हुए शेड्यूल के मुताबिक, नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1 चॉइस फिलिंग विंडो, जो 7 अगस्त को खुली थी, 18 अगस्त रात 11:59 बजे तक उपलब्ध रहेगी।

नीट यूजी काउंसलिंग 2026 राउंड 1 चॉइस फिलिंग : बदली हुई तारीखें

कैंडिडेट 17 अगस्त शाम 5:30 बजे से 18 अगस्त, 2026 रात 11:59 बजे तक अपनी पसंद अंतिम रूप से लॉक कर सकते हैं। नीचे दी गई जरूरी डिटेल्स देखें :

राउंड 1 चॉइस फिलिंग : 7 अगस्त से 18 अगस्त, 2026

राउंड 1 चॉइस लॉकिंग : 17 अगस्त, शाम 5:30 बजे से 18 अगस्त, रात 11:59 बजे तक

नीट यूजी काउंसलिंग 2026 के लिए चॉइस कैसे भरें?

प्रेफरेंस पूरी करने के लिए ये स्टेप्स हैं:

  • ऑफिशियल वेबसाइट mcc.nic.in पर जाएं।
  • नीट यूजी काउंसलिंग पंजीकरण या कैंडिडेट लॉगिन लिंक पर क्लिक करें। जरूरी क्रेडेंशियल्स के साथ साइन इन करें।
  • चॉइस फिलिंग सेक्शन खोलें।
  • अपनी पसंद के क्रम में कॉलेज और कोर्स चुनें।
  • पूरी प्रेफरेंस लिस्ट देखें।
  • अगर जरूरत हो, तो बदलाव करें या चॉइस बदलें।
  • चॉइस लॉक करें और फाइनल लिस्ट सबमिट करें।

कैंडिडेट्स को याद रखना चाहिए कि सिर्फ पंजीकृत छात्र ही चॉइस फिलिंग की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। लॉक करने से पहले प्रेफरेंस ऑर्डर को ध्यान से देखना जरूरी है, क्योंकि सबमिट की गई चॉइस राउंड 1 सीट अलॉटमेंट में अहम भूमिका निभाएंगी।

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Redmi Note 17 सीरीज की ग्लोबल लॉन्च डेट कन्फर्म, 10,000mAh बैटरी समेत इन फीचर्स का हुआ खुलासा

Xiaomi के सब-ब्रांड Redmi ने ऐलान किया है कि Redmi Note 17 सीरीज जल्द ही ग्लोबल मार्केट में दस्तक देने वाली है। कंपनी ने सोमवार को इसकी लॉन्च डेट की जानकारी दी। बता दें कि इस सीरीज के फोन जुलाई में चीन में लॉन्च किए गए थे, और ब्रांड ने Redmi Note 17 के 5G और 4G वेरिएंट भी ग्लोबल लेवल पर पेश किए थे। उम्मीद है कि ग्लोबल लाइनअप में तीन मॉडल होंगे — Redmi Note 17, Note 17 Pro और एक नया Note 17 Pro Max। इनमें से आखिरी वाले (Pro Max) के कई स्पेसिफिकेशन भी अब सामने आ गए हैं।

Redmi Note 17 सीरीज की लॉन्च डेट

Xiaomi ने X पर एक पोस्ट में घोषणा की कि Redmi Note 17 सीरीज को 27 अगस्त को ग्लोबल लेवल पर लॉन्च किया जाएगा। Xiaomi की ग्लोबल वेबसाइट पर एक नई माइक्रोसाइट से Redmi Note 17 Pro Max नाम के एक नए मॉडल के जल्द लॉन्च होने की पुष्टि होती है। डिजाइन की बात करें तो, इस लाइनअप में फोटोक्रोमिक टेक्नोलॉजी होगी। Redmi का कहना है कि इसमें एक नया ‘क्लाउड ब्लश’ एलिमेंट है जो सूरज की रोशनी के साथ रिएक्ट कर सकता है।

आने वाली Redmi Note 17 सीरीज में 6.83 इंच का CrystalRes AMOLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 1.5K रेजोल्यूशन के साथ आएगा। फोन में Snapdragon 6 Gen 5 चिपसेट दिया जाएगा। इसके साथ 24GB तक रैम मिलेगी, जिसमें वर्चुअल रैम का सपोर्ट भी शामिल होगा। Redmi का दावा है कि फोन 72 महीने तक स्मूद परफॉर्मेंस बनाए रखेगा।

माइक्रोसाइट से धूल और पानी से बचाव के लिए IP66 + IP68 + IP69 + IP69K रेटिंग्स का भी पता चलता है। Xiaomi के सब-ब्रांड का कहना है कि उनके फोन SGS और TÜV SÜD दोनों से सर्टिफाइड हैं।

कैमरे की बात करें तो अभी इसके बारे में पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी ने कन्फर्म किया है कि Note 17 सीरीज में AI-पावर्ड पोर्ट्रेट एन्हांसमेंट फीचर होगा। ब्रांड द्वारा शेयर किए गए कैमरा सैंपल में f/1.5 अपर्चर, 26mm फोकल लेंथ, 1/60-सेकंड शटर स्पीड और ISO 125 की जानकारी मिलती है।

हालांकि, सबसे खास बात इसकी बैटरी क्षमता है, जो 10,000mAh की है। जानकारी से पता चलता है कि यह Redmi 17 Pro Max के लिए है, जो 100W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करेगा, हालांकि Xiaomi ने कन्फर्म किया है कि वे बॉक्स में पावर एडॉप्टर नहीं देंगे। Redmi Note 17 सीरीज खरीदने पर ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त खर्च के 2 महीने का YouTube Premium, तीन महीने का Spotify Premium, छह महीने का Google One प्लान, 24 महीने के अंदर एक बार फ्री स्क्रीन रिप्लेसमेंट और 36 महीने के अंदर एक बार फ्री बैटरी सर्विस मिलेगी।

पिछली रिपोर्ट्स के अनुसार, Redmi Note 17 सीरीज भारत में 18 या 20 सितंबर को लॉन्च हो सकती है। लीक से यह भी पता चलता है कि Redmi Note 17 Pro Max में 50MP (f/1.8) का प्राइमरी रियर कैमरा हो सकता है, साथ ही 8MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल लेंस और सेल्फी व वीडियो कॉल के लिए 32MP का फ्रंट कैमरा भी हो सकता है। हालांकि, पहले सामने आई जानकारी में फोन में 9,210mAh बैटरी होने की बात कही गई थी।

लेकिन अब ग्लोबल लॉन्च डेट कन्फर्म होने के बाद, हम उम्मीद कर सकते हैं कि Redmi Note 17 सीरीज के लॉन्च से पहले के दिनों में और भी जानकारी सामने आएगी।

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MBBS Seats: दिल्ली के मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी 408 नई मेडिकल सीटें, जानें किस कोर्स में बढ़ने जा रही हैं कितनी सीटें

MBBS Seats: दिल्ली सरकार राज्य की चिकित्सा व्यवस्था को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए रोडमैप तैयार कर रही है। इसके तहत सरकार ने मेडिकल शिक्षा क्षमता विस्तार के लिए रोडमैप तैयार किया है। साथ ही सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस, पीजी और डीएनबी सीटों की संख्या बढ़ाने का भी फैसला किया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ पंकज कुमार सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करना है। साथ ही राजधानी की स्वास्थ्य सेवा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक मजबूत चिकित्सा कार्यबल का निर्माण करना है। दिल्ली सरकार की योजना के तहत, नए और मौजूदा मेडिकल संस्थानों में 300 एमबीबीएस सीटें और 103 पीजी/डीएनबी सीटें जोड़ी जाएंगी। पांच फेलोशिप सीटों का भी प्रस्ताव है, जिससे नई मेडिकल सीटों की कुल संख्या 408 हो जाएगी।

अस्पताल-वार सीट विस्तार का प्रस्ताव

ग्रीनफील्ड मॉडल के तहत, इंदिरा गांधी अस्पताल (IGH) और द्वारका के गुरु गोबिंद सिंह अस्पताल में विकसित किए जा रहे मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक में 150 एमबीबीएस सीटों का प्रस्ताव है मेडिकल कॉलेज में PG सीटों की संख्या 125 से बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव है। मौलाना आजाद इंस्टिट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (MAIDS) में बीडीएस सीटों की संख्या भी 50 से बढ़ाकर 70 करने का प्रस्ताव है।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (MAMC) में पीजी सीटों को 260 से बढ़ाकर 295 करने का प्रस्ताव है, जबकि एमएआईडीएस में पीजी सीटें 22 से बढ़कर 42 हो जाएंगी। बीएसए मेडिकल कॉलेज में भी 24 सीटों के साथ नए पीजी कोर्स शुरू होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर, सरकार के रोडमैप में अलग-अलग सरकारी मेडिकल संस्थानों में 103 नई पीजी/डीएनबी सीटों का प्रावधान है, जिसमें 67 एमडी/एमएस और 36 डीएनबी सीटें शामिल हैं। इसके अलावा, पांच फेलोशिप सीटों का प्रस्ताव है—तीन जीटीबी हॉस्पिटल में और दो दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टिट्यूट में। इससे पीजी, डीएनबी और फेलोशिप लेवल पर नई सीटों की कुल संख्या 108 हो जाएगी।

डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि यह बढ़ोतरी सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका मकसद ज्यादा ट्रेंड डॉक्टर, स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट तैयार करना है जो दिल्ली के लोगों को बेहतर हेल्थकेयर दे सकें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की लीडरशिप में, सरकार लगातार चिकित्सा शिक्षा क्षमता बढ़ा रही है, साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी और पेशेंट-केयर सुविधाओं को भी मजबूत कर रही है।

सरकार डीएम/एमसीएच और स्ट्रक्चर्ड पोस्ट-डॉक्टरल फेलोशिप जैसे सुपर-स्पेशियलिटी प्रोग्राम को बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है। प्रस्तावित रोडमैप को लागू करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) समेत सक्षम अथॉरिटी से जरूरी मंजूरी लेने का प्रोसेस अभी चल रहा है।

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दुनिया का सबसे ‘बदसूरत’ कुत्ता कौन? लटकी जीभ बनी खासियत, मालिक को मिले 5 लाख रुपये

दुनिया में खूबसूरती के मुकाबले तो आपने कई देखे होंगे, लेकिन अमेरिका में होने वाली एक अनोखी प्रतियोगिता का मकसद बिल्कुल अलग है। यहां खूबसूरत नहीं, बल्कि सबसे अलग और ‘बदसूरत’ दिखने वाले कुत्ते को विजेता चुना जाता है। हालांकि, इसके पीछे किसी जानवर का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि रेस्क्यू डॉग्स की ओर लोगों का ध्यान खींचना है। साल 2026 में इस अनोखे मुकाबले का खिताब 6 साल की पग कुतिया जिन्नी लू ने जीता है। उसकी उभरी हुई आंखें और बाहर निकली बड़ी जीभ उसकी पहचान बन गई हैं। खास बात यह है कि जिन्नी लू की कहानी सिर्फ उसके अजीबोगरीब लुक तक सीमित नहीं है।

कभी दक्षिण कोरिया में मुश्किल हालात में मिली यह कुतिया आज अमेरिका में सुरक्षित और खुशहाल जिंदगी जी रही है। उसकी जीत यह संदेश भी देती है कि किसी जानवर की खूबसूरती उसके चेहरे से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और जज्बे से देखी जानी चाहिए।

6 साल की जिन्नी लू बनी विजेता

2026 के World’s Ugliest Dog Contest का खिताब 6 साल की पग कुतिया जिन्नी लू ने अपने नाम किया। उसकी बड़ी-बड़ी उभरी आंखें और मुंह से बाहर निकली लंबी जीभ उसके लुक को बेहद अनोखा बनाती हैं। यही ‘परफेक्टली इंपर्फेक्ट’ अंदाज जजों को पसंद आया। जिन्नी लू को जीत के लिए 5,000 डॉलर की इनामी राशि मिली। इसके साथ उसे टीवी शो में नजर आने और एक स्पेशल एडिशन प्रोडक्ट पर अपनी तस्वीर छपने का मौका भी मिला।

कभी ठंड में लकड़ी के बक्से में मिली थी

जिन्नी लू की कहानी उसके लुक से कहीं ज्यादा भावुक है। वह दक्षिण कोरिया के एक पहाड़ी इलाके में बेहद खराब हालत में मिली थी। उसे ठंड में एक लकड़ी के बक्से में छोड़ दिया गया था। बाद में उसे रेस्क्यू किया गया और अमेरिका में एक नया परिवार मिला। आज वही कुतिया न सिर्फ सुरक्षित और खुशहाल जिंदगी जी रही है, बल्कि दुनिया का ध्यान भी अपनी ओर खींच रही है।

प्रतियोगिता का मकसद सुनकर बदल जाएगा नजरिया

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य किसी कुत्ते का मजाक बनाना नहीं है। आयोजक ऐसे रेस्क्यू डॉग्स को पहचान दिलाना चाहते हैं, जिन्होंने बीमारी, चोट, उपेक्षा या मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया है।जिन्नी लू की जीत भी इसी संदेश को मजबूत करती है कि किसी जानवर की कीमत उसके चेहरे से नहीं, बल्कि उसकी जिंदगी और संघर्ष से तय होनी चाहिए।

पग की शक्ल के पीछे छिपी है स्वास्थ्य की कहानी

पग कुत्तों की चपटी नाक, बड़ी आंखें और छोटी कद-काठी उन्हें अलग पहचान देती है। हालांकि, उनकी शारीरिक बनावट के कारण कुछ पग्स को सांस लेने जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जिन्नी लू की उभरी आंखें और बाहर निकली जीभ भी उसकी अनोखी शारीरिक बनावट का हिस्सा हैं। इसके बावजूद वह एक सक्रिय और खुश कुतिया है। शायद यही वजह है कि इस बार जजों को उसमें ‘बदसूरती’ से ज्यादा संघर्ष के बाद मिली जिंदगी की खूबसूरती नजर आई।

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