Weather Update: अगले 48 घंटे भारी! यूपी, MP और झारखंड समेत इन राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट, चक्रवाती सिस्टम हुआ एक्टिव

IMD Weather Bulletin: देश के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां प्रचंड रूप पकड़ने की वजह से भारी बारिश का दौर चल रहा है। आने वाले दिनों में भी इसमें राहत की उम्मीद नहीं दिख रही क्योंकि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 18 अगस्त को जारी अपने वेदर बुलेटिन में चेतावनी दी है कि अगले 24 से 48 घंटे देश के कई राज्यों में भारी बारिश देखने को मिलेगी। झारखंड और उससे सटे गंगीय पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों पर बने डिप्रेशन (अवदाब) के असर से मौसम का मिजाज काफी आक्रामक हो गया है।

इसके चलते उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, झारखंड और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी से उठा यह डिप्रेशन पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए झारखंड और आसपास के इलाकों में केंद्रित हो गया है। अगले 24 घंटों के दौरान इसके इसी दिशा में झारखंड और बिहार से होकर गुजरने और धीरे-धीरे कमजोर होकर वेल मार्क्ड लो प्रेशर एरिया में बदलने की संभावना है। त्तर हरियाणा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पंजाब के ऊपर ऊपरी हवा का साइक्लॉनिक सर्कुलेशन बना हुआ है, जबकि मानसूनी ट्रफ भी अपने सामान्य स्थान पर सक्रिय है।

पिछले 24 घंटों में बदला मौसम का मिजाज

IMD के आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में भारी बारिश देखने को मिली है। उत्तराखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 21 सेमी से अधिक की बेहद भारी बारिश दर्ज की गई है। वहीं छत्तीसगढ़, असम व मेघालय, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में 12 से 20 सेमी की बहुत भारी बारिश हुई है। इसके अलावा कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, त्रिपुरा, पूर्वी मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश में भी 7 से 11 सेमी तक की भारी बारिश रिकॉर्ड की गई है।

दक्षिण-पूर्वी UP, MP और झारखंड में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी

मौसम प्रणालियों के प्रभाव से उत्तर भारत और मध्य भारत के मौसम में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 और 19 अगस्त को अलग-अलग जगहों पर बेहद मूसलाधार यानी अत्यंत भारी बारिश हो सकती है। इसी तरह उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और झारखंड में 18 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है।

उत्तर-पश्चिम भारत के अन्य क्षेत्रों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में 18 अगस्त को, उत्तराखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 19 अगस्त के दौरान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 और 20 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पूर्वी राजस्थान में भी अलग-अलग दिनों में तेज बौछारों के साथ भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। उत्तराखंड में 18 से 24 अगस्त तक गरज और चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका बनी रहेगी।

मध्य भारत और ओडिशा-छत्तीसगढ़ में तेज हवाओं के साथ बरसेगी आफत

मध्य भारत में पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 से 20 अगस्त तक और छत्तीसगढ़ में 18 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 18 से 22 अगस्त के दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने का अनुमान है। पूर्वी भारत में झारखंड में 18 अगस्त को 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।

इनकी स्पीड 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। ओडिशा में 18 अगस्त को भारी से बहुत भारी बारिश होगी। बिहार, गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 18 से 20 अगस्त के दौरान हल्की से मीडियम और कुछ जगहों पर भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने के आसार हैं।

पूर्वोत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के राज्यों का हाल

पूर्वोत्तर भारत में असम और मेघालय में 18 अगस्त को बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 18 से 24 अगस्त तक लगातार भारी बारिश और बिजली चमकने का दौर जारी रहेगा। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 18 से 24 अगस्त तक व्यापक बारिश होगी, जबकि मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी गरज-चमक देखने को मिलेगी।

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दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में तटीय कर्नाटक, केरल और माहे में 18 और 19 अगस्त को भारी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु और कर्नाटक के अलग अलग इलाकों में तेज सतही हवाएं और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की चेतावनी दी गई है।

Noida Airport: जेवर एयरपोर्ट के पास सेक्टर 23C में बनेगा नया इंटरस्टेट बस टर्मिनल! ताइवान सिटी, यूनिवर्सिटी और मेडिकल हब को लेकर ये है प्लान

Noida Airport News: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) तक पहुंचने और वहां से पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं आसपास के राज्यों के विभिन्न शहरों की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खबर है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने एयरपोर्ट के नजदीक एक इंटरसिटी बस टर्मिनल बनाने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही क्षेत्र में सिटी बसों की संख्या बढ़ाने समेत स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और औद्योगिक विकास से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्टों को भी हरी झंडी दी गई है।

सेक्टर-23 में बनेगा इंटरसिटी बस टर्मिनल

YEIDA के फैसले के अनुसार, यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के सेक्टर-23 में ‘इंटरसिटी बस टर्मिनल’ विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आसपास के शहरों और कस्बों से बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा के जरिए जोड़ना है।

इस टर्मिनल के बनने के बाद यात्रियों को निजी गाड़ियों या कैब पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। एयरपोर्ट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पड़ोसी क्षेत्रों के विभिन्न शहरों तक बस कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने और वहां से अपने गंतव्य तक जाने में बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

100 से बढ़ाकर 500 की जाएगी सिटी बसों की संख्या

YEIDA बोर्ड ने इस एरिया में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। आने वाले दिनों में क्षेत्र में चलने वाली सिटी बसों की संख्या 100 से बढ़ाकर 500 करने की मंजूरी दी गई है। इस कदम से एयरपोर्ट के आसपास विकसित हो रहे रिहायशी, कमर्शियल और औद्योगिक इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। जैसे-जैसे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, सार्वजनिक परिवहन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी।

एयरपोर्ट से आसपास के इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी

YEIDA के CEO आरके सिंह के अनुसार, प्रस्तावित बस टर्मिनल एयरपोर्ट को आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसका मकसद यात्रियों के लिए ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे वे एयरपोर्ट से सीधे विभिन्न शहरों और कस्बों तक आसानी से यात्रा कर सकें।

फिलहाल,नोएडा एयरपोर्ट के आसपास तेजी से विकास कार्य चल रहे हैं। भविष्य में यात्री संख्या बढ़ने के साथ परिवहन व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में इंटरसिटी बस टर्मिनल और सिटी बसों की संख्या बढ़ाने का फैसला क्षेत्र के भविष्य के यातायात ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

एयरपोर्ट के आसपास बनेगा 500 एकड़ का मेडिकल हब

YEIDA बोर्ड के फैसले सिर्फ परिवहन तक सीमित नहीं हैं। प्राधिकरण ने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे के बड़े विस्तार का भी रास्ता साफ कर दिया है।बोर्ड ने सेक्टर-13 और सेक्टर-14 में करीब 500 एकड़ क्षेत्र में मेडिकल हब बनाने को मंजूरी दी है। इस प्रोजेक्ट से आने वाले समय में बड़े अस्पतालों, मेडिकल संस्थानों और स्वास्थ्य सेवाओं के विकास को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

सेक्टर-34 में 40 एकड़ का यूनिवर्सिटी टाउनशिप

शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा प्रोजेक्ट मंजूर किया गया है। सेक्टर-34 में 40 एकड़ जमीन पर यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने की योजना को मंजूरी मिली है। इससे यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र को शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मदद मिल सकती है। एयरपोर्ट के आसपास शैक्षणिक संस्थानों और आधुनिक टाउनशिप के विकास से क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है।

50 एकड़ में बनेगा इंटरनेशनल स्टेडियम

इस एरिया में खेल ढांचे को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया गया है। YEIDA बोर्ड ने 50 एकड़ में एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के लिए जमीन मंजूर की है। इसके अलावा अन्य सार्वजनिक और व्यावसायिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भी जमीन को मंजूरी दी गई है। इससे एयरपोर्ट के आसपास का पूरा क्षेत्र केवल एक ट्रांसपोर्ट हब के बजाय स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल और कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।

सेक्टर-6 में 300 एकड़ में बनेगी ‘ताइवान सिटी’

औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए YEIDA ने सेक्टर-6 में 300 एकड़ जमीन ‘ताइवान सिटी’ के लिए आरक्षित करने का भी फैसला किया है। इसका उद्देश्य ताइवान की कंपनियों और उद्योगों को आकर्षित करना है। खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों को। यदि इस योजना को बड़े स्तर पर उद्योगों का समर्थन मिलता है तो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी विनिर्माण का एक नया औद्योगिक केंद्र विकसित हो सकता है।

तेजी से बदलने जा रहा है एयरपोर्ट के आसपास का इलाका

YEIDA के इन फैसलों से साफ है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास केवल हवाई यात्रा से जुड़ा ढांचा ही नहीं, बल्कि एक बड़े और आधुनिक शहरी क्षेत्र को विकसित करने की तैयारी की जा रही है। इंटरसिटी बस टर्मिनल, 500 सिटी बसों की योजना, 500 एकड़ का मेडिकल हब, यूनिवर्सिटी टाउनशिप, अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम और ताइवान सिटी जैसे प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकते हैं।

Tata Group News: एन चंद्रशेखरन ने आखिर टाटा संस के चेयरमैन पद से क्यों दिया इस्तीफा? जानिए टाटा समूह के अंदर की पूरी कहानी

Tata Group News: एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफे के ऐलान ने चौंका दिया था। उन्होंने 12 अगस्त को यह ऐलान किया था। तब से उनके इस्तीफे की वजहों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चा सुनने को मिली है। लेकिन, सच यह है कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई एक वजह नहीं थी। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि तीसरी बार टाटा संस के चेयरमैन पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इसका असर समूह से जुड़े ब़ड़े फैसलों पर पड़ रहा था।

गवर्नेंस और कैपिटल ऐलोकेशन को लेकर चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद था। इसके अलावा होल्डिंग कंपनी यानी टाटा संस के कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को लेकर भी बहस लगातार बढ़ रही थी। ये सभी मसले अगस्त के दूसरे हफ्ते में ऐसे लेवल पर पहुंच गए, जिसके बाद चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देने का फैसला ले लिया।

चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने बयान में कई बातें कही थीं। उन्होंने जुलाई 2025 टाटा ट्रस्ट्स के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया था, जिसमें उन्हें तीसरी बार टाटा संस का चैयरमैन पांच साल के लिए नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी। लेकिन, फरवरी 2026 में टाटा संस के बोर्ड की बैठक में एक डायरेक्टर ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। फरवरी से लेकर अब तक यह मसला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।

जुलाई 2025 के प्रस्ताव में एक दूसरी अहम बात भी शामिल थी। इसमें चंद्रशेखरन को टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने को कहा गया था। बाद में यह मसला बड़ा बन गया। स्ट्रक्चर के लिहाज से टाटा संस के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसका काफी असर चंद्रशेखरन पर पड़ा। सूत्रों ने बताया कि खासकर इस सवाल का जवाब नहीं था कि क्या आखिर में टाटा संस को खुद को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना होगा।

मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि 26 मई को बोर्ड की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन को टाटा संस की लिस्टिंग के बारे में अपनी पोजीशन बताने को कहा था। सूत्रों ने बताया कि इस बारे में चंद्रशेखरन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। टाटा संस की लिस्टिंग का मसला काफी अहम है। लिस्टिंग के बाद टाटा संस के लिए नियम और शर्तें काफी बदल जाएंगी। खासकर टाटा ट्रस्ट्स को मिले विशेष अधिकार खत्म हो जाएंगे।

टाटा ट्रस्ट्स अभी टाटा संस से जुड़े सभी बड़े फैसले लेता है। यहां तक कि टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी का एप्रूवल जरूरी है। टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होते ही टाटा ट्रस्ट्स के ये अधिकार खत्म हो जाएंगे। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

RBI ने टाटा संस को अपर लेयर वाली NBC की कैटेगरी में रखा है। इस कैटेगरी के एनबीएफसी को सख्त रेगुलेशंस का पालन करना पड़ता है। हालांकि, आरबीआई ने 6 अगस्त को कहा था कि टाटा संस का एनबीएफसी की अपर लेयर कैटेगरी में बने रहने में उसके डीरजिस्ट्रेशन के अप्लिकेशन के नतीजों का कोई हाथ नहीं है। अभी इस अप्लिकेशन पर विचार जारी है।

टाइम्स ऑफ इंडियान ने 17 अगस्त को खबर दी कि चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों ने सरकार को अलग-अलग अपनी पोजीशन के बारे में बताया। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह के भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा का अभाव था। टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बारे में फैसला होना है। बतौर चेयरमैन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है।

18 अगस्त को 2 बजे टीसीएस का शेयर 1.25 फीसदी गिरकर 2,284 रुपये पर चल रहा था। टाइटन का शेयर 0.38 फीसदी गिरकर 5049 रुपये पर चल रहा था। टाटा मोटर्स सीवी का शेयर 0.68 फीसदी गिरकर 467 रुपये पर चल रहा था।

कम होंगे बैंकर्स के लिए अदालतों के चक्कर! बदला 135 पुराना बैंकिंग कानून, ये है 5 बड़ी बातें

संसद ने इस महीने की शुरुआत में बैंकर्स बुक एविडेंस बिल 2026 (Bankers’ Books Evidence Bill 2026) पारित किया। इसका लक्ष्य बैंक रिकॉर्ड से जुड़े 135 साल पुराने कानून को बदलना और पारंपरिक बैंकिंग रिकॉर्ड को डिजिटल दौर के अनुरूप बनाना है। इससे जुड़ा कानून पहली बार वर्ष 1891 में उस समय पास किया गया था, जब बैंकिंग रिकॉर्ड्स मुख्य रूप से कागजी रूप में रखे जाते थे। अब नए कानून में बैंक के डिजिटल रूप को अधिक महत्ता दी गई है और इससे कोर्ट-कचहरी के मामले में बैंकिंग रिकॉर्ड को हासिल करने तथा इस्तेमाल करने के तरीके में बदलाव होगा। यहां इस कानून से जुड़े पांच अहम पहलू दिए गए हैं। हालांकि इससे ग्राहकों के डेटा की प्राइवेसी को लेकर चर्चा शुरू हो सकती है।

डिजिटल बैंक रिकॉर्ड्स को सबूत के तौर पर मान्यता

सबसे बड़े बदलावों में से एक इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड्स को बैंकर्स बुक्स के तौर पर मान्यता देना है। साल 1891 का कानून फिजिकल बुक्स, लेजर्स और दूसरे ट्रेडिशनल रिकॉर्ड्स को ध्यान में रखकर बनाया गया था। नए बिल के मुताबिक बैंकों को अधिकतर ट्रांजैक्शन और अकाउंट्स की जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखनी ही होगी। इसका मतलब है कि बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड किसी कानूनी मामले में साक्ष्य के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

असली रिकॉर्ड की जगह सर्टिफाइड कॉपी का इस्तेमाल

नए बैंकिंग कानून में मौजूदा नियम को बनाए रखा गया है, जिसके तहत बैंक रिकॉर्ड की सर्टिफाइड कॉपी या उनके किसी हिस्से को सबूत के तौर पर पेश किया जा सकता है। यह इसलिए अहम है क्योंकि बैंकों के पास भारी-भरकम ट्रांजैक्शन डेटा होता है। हर कानूनी मामले के लिए मूल रिकॉर्ड पेश करने बहुत समय लग सकता है। हालांकि अब नई व्यवस्था के तहत असली बैंकर बुक के बजाय सर्टिफाइड कॉपी से काम चल जाएगा, जिससे अदालतों के लिए बैंक ट्रांजैक्शन की जांच करना आसान हो जाएगा। हालांकि इसमें ऐसे प्रावधान भी किया गया है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि रिकॉर्ड भरोसेमंद हैं।

कानूनी एजेंसियों की ग्राहकों के खातों की जानकारी मांगना

इस बिल में एक प्रावधान है जिसे लेकर बहस छिड़ सकती है। इसके तहत लॉ एंफोर्समेंट एजेंसियां किसी ग्राहक के बैंक अकाउंट की जानकारी मांग सकते हैं। इस बिल में कुछ खास रैंक के पुलिस अधिकारियों को बिना किसी अदालती आदेश के सीधे बैंक से ही बैंकिंग अकाउंट की जानकारी हासिल करने का अधिकार मिला है। कुछ मामलों में बैंकों को इसके बारे में ग्राहकों को भी बताना होगा लेकिन किसी जांच, वित्तीय अपराध या नेशनल सिक्योरिटीज से जुड़े मामले में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।

बैंक अधिकारियों को बार-बार कोर्ट में पेश होने से राहत

नए बिल में बैंक अधिकारियों को ऐसी स्थितियों में राहत दी गई है, जब उनके इंस्टीट्यूशंस किसी कानूनी कार्यवाही में सीधे तौर पर शामिल न हों। किसी अधिकारी को बैंक के रिकॉर्ड पेश करने या उनमें शामिल लेन-देन को साबित करने के लिए कोर्ट में पेश होने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। हालांकि रिकॉर्ड की सत्यता पर संदेह या जांच के आदेश का पालन नही होने की स्थिति में कोर्ट रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दे सकता है। इसका लक्ष्य बैंक अधिकारियों पर रूटीन बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कोर्ट केस में बार-बार पेश होने का बोझ कम करना है।

फाइनेंस सेक्टर की दूसरी एंटिटीज तक बढ़ा दायरा

नए बिल से केंद्र सरकार को इसके प्रावधान फाइनेंशियल सेक्टर दूसरी एंटिटीज या क्लास ऑफ एंटिटीज जैसे कि NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज), पेंशन फंड्स, बीमा कंपनियां इत्यादि पर लागू करने का अधिकार मिलता है। इन एंटिटीज पर कानून लागू करते समय शर्तें, छूट या बदलाव भी तय कर सकती है।

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दिल्ली की इन 3 सरकारी कॉलोनियों में टूटेंगे पुराने फ्लैट्स, PWD बनाने जा रहा है चमचमाती बहुमंजिला इमारतें, जानिए पूरा प्लान

Plans to redevelop three colonies in Delhi: दिल्ली सरकार ने तीन प्रमुख सरकारी कॉलोनियों को फिर से रीडेवलप कर वहां अधिकारियों के लिए शानदार बहुमंजिला इमारतें (हाई-राइज टावर्स) बनाने की बड़ी योजना का ऐलान किया है। यह पुनर्विकास परियोजना गुलाबी बाग, बहापुर और कल्याणवास इलाकों में लागू की जाएगी। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार इन क्षेत्रों में मौजूद पुराने और जर्जर हो चुके फ्लैटों को ढहाकर उनकी जगह मॉर्डन बहुमंजिला फ्लैट्स बनाने जा रही है।

इसे दिल्ली सरकार की ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत बनाया जाएगा। इस नीति के तहत रेल और मेट्रो लाइनों के आसपास हाई डेंसिटी वाले कॉरिडोर डेवलप किए जाएंगे। इससे आवासीय इलाकों के ठीक पास पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी भी हासिल की जा सकेगी।

पुराने और खस्ताहाल फ्लैट्स की जगह बनेंगे हाई-राइज टावर्स

लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को नए और सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस घर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों में अभी फ्लैट्स की स्थिति बेहद खराब है। योजना के तहत इन सभी जगहों पर सिर्फ हाई-राइज टावर्स ही बनाए जाएंगे। इसके लिए बहुत जल्द टेंडर जारी किए जाएंगे। इसे सेल्फ फाइनेंस मॉडल पर तैयार किया जा रहा है। ये केंद्र सरकार की जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) योजना जैसी होगी।

कॉमर्शियल इस्तेमाल से निकलेगा खर्च, नए सचिवालय के लिए भी जुटेगा फंड

सरकार ने इस पुनर्विकास परियोजना का खर्च निकालने के लिए भी एक विशेष रणनीति बनाई है। यहां बनने वाले फ्लैट्स का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा कमर्शियल उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। इससे जो रेवेन्यू मिलेगा उससे न सिर्फ रीडेवलपमेंट का कॉस्ट निकलेगा बल्कि इस कमाई का इस्तेमाल आईटीओ पर बनने वाले दिल्ली सरकार के नए सचिवालय कॉन्प्लेक्स पर भी किया जाएगा।

गुलाबी बाग, कल्याणवास और बहापुर का ऐसा है मास्टर प्लान

सरकार ने इस परियोजना के तहत अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन का सीमांकन कर लिया है। कल्याणवास में 32 एकड़ जमीन और गुलाबी बाग में लगभग 70 एकड़ जमीन की पहचान की गई है। यहां टाइप II, टाइप III और टाइप IV कैटिगरी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे।

दक्षिण दिल्ली के बहापुर इलाके में सबसे पहले हाई राइज बनेगा। यहां नए आवासों की जरूरत तत्काल है। बहापुर आवासीय परिसर परियोजना पर लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

PSUs और केंद्र सरकार को भी दिए जा सकेंगे फ्लैट्स

बहापुर परियोजना का डिजाइन पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। यहां अधिकारियों के लिए लगभग 160 टाइप V और टाइप VI श्रेणी के फ्लैट्स बनाए जाएंगे। गुलाबी बाग और कल्याणवास के अन्य दो क्षेत्रों में बनने वाले फ्लैटों के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) की कंपनियों और केंद्र सरकार को आमंत्रित किया जाएगा ताकि जरूरत पड़ने पर वे अपने कर्मचारियों के लिए इन फ्लैटों को ले सकें।

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EMS Stocks: ECMS के पांचवें चरण को सरकार से मिली मंजूरी, सिर्मा SGS टेक्नोलॉजी और PCBL केमिकल में आई तेजी

EMS Stocks :  इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS)के 5वें चरण को सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस स्कीम के तहत 31 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इस खबर के चलते Syrma और PCBL जैसी कंपनियां फोकस में हैं। ECMS स्कीम के पांचवें चरण के तहत सरकार से 7,877 करोड़ रुपए के 31 निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। Syrma SGS और PCBL समेत 31 कंपनियों को मंजूरी मिली है। इस स्कीम के तहत 82,243 करोड़ रुपए के इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का उत्पादन होगा।

पहले 4 चरणों में अब तक 75 कंपनियों के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है। इसके तहत 23 उत्पादों के भारत में उत्पादन को मंजूरी मिली है। इसमें PCB,इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स,कैमरा मॉड्यूल और ट्रांजिस्टर शामिल हैं। इनके लिए 61,671 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी मिल चुकी है। बता दें कि ECMS इन्वेस्टमेंट और प्रोडक्शन टारगेट पहले ही पार कर चुका है। ECMS ने इन्वेस्टमेंट में 59,350 करोड़ रुपए और प्रोडक्शन में 4.56 लाख करोड़ का टारगेट रखा गया है।

विप्रो ग्लोबल इंजीनियरिंग (Wipro Global Engineering) को 1,401 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। वहीं, माइक्रोमैक्स प्रिसिजन मोल्डिंग (Micromax Precision Molding) को 565 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। पीसीबीएल केमिकल (PCBL Chemical) को 329 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। वहीं, मिंडा इंस्ट्रूमेंट (Minda Instrument) को 270 करोड़ रुपए के निवेश की मंजूरी मिली है। जबकि, सेंटम इलेक्ट्रॉनिक्स (Centum Electronics) को 106 करोड़ रुपए के 2 निवेश प्रस्तावों की मंजूरी मिली है। VVDN टेक्नोलॉजीज़ (VVDN Technologies) को 100 करोड़ रुपए के निवेश की मंज़ूरी मिली है। वहीं, मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक (Mitsubishi Electric) को 99 करोड़ रुपए के निवेश की मंज़ूरी मिली है।

कंपनियों को मंजूरी का प्रमाण पत्र देने के बाद केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस योजना ने निजी निवेश को आकर्षित किया है,जो मूल रूप से निर्धारित लक्ष्यों से अधिक हो गया है।

यह मंजूरी ऐसे समय में मिली है जब भारत घरेलू सप्लाई चेन को मजबूत करके,महत्वपूर्ण कलपुर्जों के आयात पर निर्भरता कम करने और एडवांस मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता को तैयार करके इलेक्ट्रॉनिक्स में घरेलू वैल्यूएडिशन को मजबूत करना चाहता है।

EMS शेयरों में जोश

इस खबर के चलते सिर्मा SGS टेक्नोलॉजी (Syrma SGS Technology) के शेयर में अच्छी तेजी देखने को मिली है। फिलहाल यह शेयर 30.50 रुपए यानी 2.08 फीसदी की तेजी के साथ 1498 रुपए के आसपास दिख रहा है। आज का इसका दिन का हाई 1,521 रुपए और दिन का लो 1,488.90 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 1,543 रुपए है।

पीसीबीएल केमिकल (PCBL Chemical) में भी तेजी देखने को मिल रही है। फिलहाल यह शेयर 3.25 रुपए यानी 1.03 फीसदी की बढ़त के साथ 319 रुपए पर नजर आ रहा है। आज का इसका दिन का हाई 325.85 रुपए है। स्टॉक का 52 वीक हाई 425.95 रुपए और 52 वीक लो 226.50 रुपए है।

 

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बिना फ्लाइट टिकट हवा से देखें पूरा भारत, दिल्ली में बनी यह जादुई जगह!

दिल्ली के लोगों और देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट के लिए एक नया पार्क बनाया गया है। द्वारका सेक्टर-20 में करीब 200 एकड़ में फैला यह पार्क जल्द ही प्लानिंग के साथ सभी लोगों के लिए खोला जाएगा। यहां टूरिस्ट को पर्यावरण, मनोरंजन और भारतीय संस्कृति का यूनिक एक्सपीरियंस मिल सकेगा।

भारत वंदना पार्क की सबसे बड़ा फीचर इसका 1.2 किलोमीटर लंबा स्काइब्रिज और ‘मिनी इंडिया’ जोन है। स्काइब्रिज पर घूमते हुए लोग पार्क के खूबसूरत नजारों का मजा ले सकेंगे और साथ ही मिनी इंडिया जोन में देश के अलग-अलग हिस्सों का कल्चर देखने को मिलेगा। यह पार्क के लोगों के घूमने की नई जगह तो बनेगा ही, साथ ही देश-विदेश से आने वाले टूरिस्ट को भी अट्रैक्शन पोईटन भी बनेगा।

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कॉस्ट और इनॉगरेशन

भारत वंदना पार्क को लगभग 550 करोड़ रुपये की कॉस्ट से तैयार किया जा रहा है। तकरीबन 200 एकड़ में फैले इस पार्क का बाहरी हिस्सा लगभग तैयार हो चुका है और अब इसे कुछ समय बाद ही लोगों के लिए खोला जाएगा। उम्मीद है कि अगले एक से दो महीनों में इनॉगरेशन हो सकता है। पार्क में घूमने के साथ-साथ लोगों के लिए बोटिंग, लेक-व्यू रेस्तरां और मॉडर्न टिकट काउंटर जैसी सुविधाएं भी तैयार की गई हैं।

एलिवेटेड स्काइब्रिज

पार्क का सबसे बड़ा अट्रैक्शन 1.2 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड स्काइब्रिज होगा। यह जमीन से करीब 18 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है और नौ बड़े पाइलान पर टिका होगा। यहां चलते हुए लोगों को पूरे पार्क और ‘मिनी इंडिया’ का ऊपर से 360 डिग्री नजारा देखने को मिलेगा। इसकी डिजाइन पेड़ों के तनों से इंस्पायर्ड है। नौ पाइलान को पेड़ का शेप दिया जा रहा है, जिन पर पत्तियों जैसे एल्युमिनियम पैनल लगाए जाएंगे, जिससे स्काइब्रिज का लुक एकदम यूनिक नजर आएगा।

मिनी इंडिया

भारत वंदना पार्क का ‘मिनी इंडिया’ जोन यहां आने वाले लोगों के लिए बेस्ट एक्सपीरियंस होगा। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की फेमस बिल्डिंग और सांस्कृतिक धरोहरों की कॉपी बनाई गई हैं। जिसमे जयपुर का हवा महल, कर्नाटक का हंपी रथ मंदिर, एलोरा की गुफाएं, अंडमान का सेल्यूलर जेल, पटना का गोलघर, बनारस के घाट और पुराने संसद भवन जैसी जगहों की झलक देखने को मिलेगी। गुजरात के स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की प्रतिकृति और महावीर मंदिर मेजर अट्रैक्शन रहेंगे।

कई चुनौतियों के बाद हुआ तैयार

भारत वंदना पार्क का शिलान्यास 17 दिसंबर 2019 को किया गया था और इसे मार्च 2022 तक पूरा करने की प्लानिंग थी। लेकिन कोरोना महामारी, कंस्ट्रक्शन से जुड़ी परेशानियों और पार्क के कॉम्प्लेक्स डिजाइन के कारण काम में देरी हुई। स्काइब्रिज के ऊंचे पाइलान, एयरपोर्ट के पास होने के कारण काफी दिक्कत हुयी। इसके बाद पाइलान की ऊंचाई कम करके डिजाइन चेंज करना पड़ा।

भारत वंदना पार्क के खुलने के बाद दिल्ली में घूमने के लिए एक नया और यूनिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन खुल जाएगा। यहां लोग स्काइब्रिज से खूबसूरत नजारे देखने के साथ ‘मिनी इंडिया’ में देश की संस्कृति और फेमस हेरिटेज को एक ही जगह देख सकेंगे। हरियाली, झील, बोटिंग और मनोरंजन की सुविधाओं के साथ यह पार्क फैमिली और टूरिस्ट के लिए मेजर अट्रैक्शन बन सकता है।

रेल यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, जल्द आ रही हैं 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें! अब रात का सफर होगा और आरामदायक

Vande Bharat Sleeper Train: भारतीय रेलवे और ज्यादा वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करके अपने प्रीमियम लंबी दूरी के रेल नेटवर्क को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। लॉन्च के बाद से अभी तक वंदे भारत एक्सप्रेस ज्यादातर दिन में चलने वाली चेयर कार ट्रेन के तौर पर संचालित होती रही है, लेकिन लंबे समय से यात्री रात के सफर के लिए इसके स्लीपर वर्जन की मांग कर रहे थे। वहीं, अब यात्रियों की इस मांग को पूरा करने के लिए चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी, जिनमें से हर एक में 24 कोच होंगे। उम्मीद है कि नए ट्रेनसेट से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ेगी और पूरे भारत में लंबी दूरी के और रूट पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने में मदद मिलेगी।

यह कदम भारतीय रेलवे की उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है, जिसका मकसद रात भर और इंटरसिटी यात्रा करने वाले यात्रियों को तेज, ज्यादा आरामदायक और आधुनिक यात्रा के विकल्प देना है। इस प्रस्तावित विस्तार के साथ, उम्मीद है कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें देश के प्रीमियम रेल यात्रा सेगमेंट में बड़ी भूमिका निभाएंगी।

ICF के जनरल मैनेजर मनीष अग्रवाल के अनुसार, देश में बनी 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के लिए प्रोडक्शन ड्रॉइंग पूरी हो गई हैं। इन डिजाइनों में कोच का स्ट्रक्चर, कोच को जोड़ने वाले सिस्टम और उनके नीचे लगाए जाने वाले उपकरण शामिल हैं।

नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के बारे में मुख्य बातें

  • 50 ट्रेनसेट की योजना: ICF चेन्नई 50 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट बनाएगी।
  • हर ट्रेन में 24 कोच: आने वाले ट्रेनसेट में 24 कोच होंगे, जबकि अभी चल रही स्लीपर ट्रेन में 16 कोच हैं।
  • ज्यादा यात्री क्षमता: उम्मीद है कि 24 कोच वाली ट्रेन में 16 कोच वाली ट्रेन के मुकाबले लगभग 1.5 गुना ज्यादा यात्री यात्रा कर सकेंगे।
  • प्रोडक्शन के लिए डिजाइन तैयार: कोच के स्ट्रक्चर, कोच कनेक्शन और अंडरफ्रेम इक्विपमेंट से जुड़े डिजाइन पूरे हो चुके हैं।
  • और रूटों पर चलने की उम्मीद: अतिरिक्त ट्रेनसेट से रेलवे को लंबी दूरी के और रूटों पर वंदे भारत स्लीपर सर्विस शुरू करने पर विचार करने में मदद मिलेगी।
  • लंबी यात्राओं के लिए डिजाइन: स्लीपर सुविधा का मकसद रात भर और लंबी दूरी की यात्रा के लिए तेज़ और ज्यादा आरामदायक विकल्प देना है।
  • कोच की संख्या अभी तय नहीं: भारतीय रेलवे ने अभी तक कोच की अंतिम संख्या के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है, हालांकि खबरों के मुताबिक 24-कोच वाली ट्रेनसेट में 17 AC 3-टियर कोच, पांच AC 2-टियर कोच, एक AC फर्स्ट क्लास कोच और एक पैंट्री कार हो सकती है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का नेटवर्क बढ़ाने की तैयारी

अभी देश में चलने वाली वंदे भारत स्लीपर सर्विस हावड़ा और कामाख्या के बीच चलती है। मौजूदा ट्रेन में 11 थर्ड AC कोच, चार सेकंड AC कोच और एक फर्स्ट AC कोच है।

24 कोच वाली प्रस्तावित ट्रेनों से यात्रियों की क्षमता काफी बढ़ जाएगी। हालांकि, रेलवे ने अभी तक इन नई ट्रेनों में कोच के अंतिम कॉम्बिनेशन की घोषणा नहीं की है।

बता दें कि यह कदम लंबी दूरी के यात्रियों के लिए तेज और ज्यादा आरामदायक ट्रेनें उपलब्ध कराने की रेलवे की व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

अमृत ​​भारत एक्सप्रेस 3.0 के बारे में भी अपडेट आया है

ICF ने अगली पीढ़ी की अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के बारे में भी जानकारी दी है। उम्मीद है कि अमृत भारत 3.0 में AC, जनरल और स्लीपर क्लास के कोच होंगे। इससे यात्रियों को बेहतर आराम के साथ यात्रा का एक और सस्ता विकल्प मिलेगा।

हालांकि, अभी चल रही अमृत भारत ट्रेनों में मुख्य रूप से जनरल और स्लीपर कोच हैं। अगली पीढ़ी की ट्रेनों में AC कोच जोड़ने से और भी ज्यादा यात्री इन ट्रेनों का फायदा उठा सकेंगे। ICF में हो रही ताजा गतिविधियों से पता चलता है कि वंदे भारत स्लीपर और अगली पीढ़ी की अमृत भारत ट्रेनों के प्रोडक्शन की प्लानिंग आगे बढ़ रही है।

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भारत के इन 5 राज्यों में बढ़ रहा इंसान और हाथी टकराव! WII ने मैप किए 5 राज्यों के बड़े हॉटस्पॉट्स

भारत में इंसानों और हाथियों के बीच बढ़ता टकराव एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और प्रोजेक्ट एलिफेंट डिवीजन ने देश के 5 प्रमुख राज्यों कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानव-हाथी संघर्ष के प्रमुख हॉटस्पॉट्स को मैप किया है। WII की इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य उन इलाकों की पहचान करना है जहां जोखिम सबसे अधिक है, ताकि संरक्षण और सुरक्षा प्रयासों को सही दिशा में फोकस किया जा सके।

रिसर्चर्स ने इन राज्यों के लंबे समय के डेटा की स्टडी की है। इनमें से कुछ आंकड़े साल 2000 तक पुराने हैं। इस पूरी सीरीज में ओडिशा की रिपोर्ट सबसे डिटेल है। 128 पन्नों की इस रिपोर्ट में कई सालों के डेटा का इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट का लक्ष्य उन स्थानों और दोहराए जाने वाले पैटर्न की पहचान करना है जहां हाथियों और इंसानों का आमना-सामना सबसे ज्यादा होता है।

इंसानी बस्तियों में क्यों आ रहे हैं हाथी?

रिपोर्ट के मुताबिक इंसानों और हाथियों के बीच संघर्ष की मुख्य वजह उनके प्राकृतिक आवासों (हाथी पर्यावास) और इंसानी गतिविधियों के बीच बढ़ता ओवरलैप है। जंगल लगातार छोटे-छोटे हिस्सों में बंटते जा रहे हैं। जंगलों के बीच से गुजरने वाली सड़कें और रेलवे लाइनें हाथियों के पारंपरिक रास्तों को काटती हैं। इसके अलावा बिजली की बाड़ और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर भी हाथियों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। जंगलों के करीब गांवों और इंसानी बस्तियों के विस्तार ने लोगों और हाथियों को एक-दूसरे के बेहद करीब ला दिया है।

एलिफेंट कॉरिडोर के आसपास भी मुश्किलें

हाथियों को भोजन और पानी की तलाश के साथ-साथ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित आवाजाही के लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत होती है। जब हाथियों के ये पारंपरिक कॉरिडोर या रास्ते ब्लॉक हो जाते हैं, तो वे वैकल्पिक रास्तों की तलाश करते हैं। ये वैकल्पिक रास्ते अक्सर खेतों, गांवों या बस्तियों से होकर गुजरते हैं। हाथियों के इस मूवमेंट से फसलों को भारी नुकसान पहुंचता है। इंसानों से मुठभेड़ का खतरा बढ़ जाता है और कई बार इंसानों व हाथियों दोनों को अपनी जान गंवानी पड़ती है या गंभीर चोटों का सामना करना पड़ता है।

वैज्ञानिकों ने हॉटस्पॉट आधारित समाधान की उठाई मांग

WII की यह रिपोर्ट अधिकारियों को उन संवेदनशील क्षेत्रों की तुरंत पहचान करने में मदद करेगी जहां तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि इन हॉटस्पॉट्स में बेहतर अर्ली-वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) लागू की जानी चाहिए। सुरक्षित रेलवे और सड़क योजनाएं बनाना, वन विभागों द्वारा हॉटस्पॉट क्षेत्रों में रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करना और हाथियों के गलियारों को सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

संकट से निपटने के लिए बचाव रणनीति की जरूरत

यह रिपोर्ट सिर्फ अतीत में हुए संघर्षों का रिकॉर्ड भर नहीं है बल्कि यह दिखाती है कि संघर्ष कहां, कब और किन कारणों से हो रहे हैं। यह डेटा अधिकारियों को घटनाओं के होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय, उन्हें पहले से रोकने में मदद कर सकता है। भारत के लिए यह चुनौती बिल्कुल स्पष्ट है कि हाथियों की रक्षा करने का सीधा मतलब उन प्राकृतिक भू-भागों और रास्तों की सुरक्षा करना है, जिनका उपयोग हाथी अपनी आवाजाही के लिए करते हैं।

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Oberoi Realty की Delhi NCR में एंट्री का रास्ता साफ! पहले प्रोजेक्ट पर बढ़ी बात लेकिन शेयर लाल

Oberoi Realty Shares Fall: मुंबई की रियल एस्टेट डेवलपर ओबेराय रियल्टी की दिल्ली एनसीआर में एंट्री पर लगा ग्रहण अब हट गया है। इसके बावजूद कंपनी के शेयर धड़ाम हो गए। एक्सचेंज फाइलिंग में कंपनी की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक ग्रुरुग्राम में इसके थ्री सिक्स्टी नॉर्थ प्रोजेक्ट पर पंजाब एंड हरियाण हाईकोर्ट के अस्थायी रोक को हटा दिया है। हालांकि कमजोर मार्केट सेंटिमेंट में इसका शेयरों पर पॉजिटिव असर नहीं दिखा। फिलहाल बीएसई पर यह 1.13% की गिरावट के साथ ₹1910.60 पर है। इंट्रा-डे में यह 2.82% टूटकर ₹1,878.00 तक आ गया था।

Oberoi Realty को किस मामले में मिली है राहत

ओबेराय रियल्टी ने 18 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया कि उसके गुरुग्राम के थ्री सिक्स्टी नॉर्थ प्रोजेक्ट पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की लगाई गई अस्थायी पाबंदी अब प्रभावी नहीं है। कंपनी ने सोमवार को स्टॉक एक्सचेंजों को बताया कि DTCP (हरियाणा डिपार्टमेंट ऑफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) के डायरेक्टर ने ATPL (एडवांस इंडिया प्रोजेक्ट्स लिमिटेड) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें ओबेराय रियल्टी के लाइसेंस को रद्द करने और डेवलपर बदलने की मंजूरी को रद्द करने की मांग की गई थी। DTCP का कहना है कि यह याचिका बिना किसी मेरिट के दायर की गई थी। इसका मतलब है कि Three Sixty North Project में नए अलॉटमेंट और थर्ड-पार्टी राइट्स पर पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की लगाई गई अस्थायी रोक अब लागू नहीं है।

कंपनी के लिए यह फैसला इसलिए खास है क्योंकि यह मुंबई की रियल एस्टेट डेवलपर का दिल्ली-एनसीआर में पहला प्रोजेक्ट है। पिछले महीने कंपनी ने बताया था कि इस प्रोजेक्ट के लिए उसे लगभग ₹8,109 करोड़ की ग्रॉस बुकिंग मिल चुकी है, जबकि प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित वैल्यू करीब ₹16,000 करोड़ है।

कैसी है सेहत

ओबेराय रियल्टी के लिए चालू वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी का कंसालिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 29% बढ़कर ₹544 करोड़ और ऑपरेशंस से रेवेन्यू 31.7% उछलकर ₹1,301 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर कंपनी का ईबीआईटीडीए 41.1% बढ़कर ₹734.1 करोड़ और ईबीआईटीडीए मार्जिन 52.7% से 56.4% पर पहुंच गया।

अब एक साल में इसके शेयरों की चाल की बात करें तो ओबेराय रियल्टी के शेयर 23 मार्च 2026 को ₹1,390.15 के भाव पर थे जोकि इसके लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से चार ही महीने में यह 42.79% उछलकर 6 जुलाई 2026 को ₹1,985.00 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है।

23 Hours Trading: लगातार 23 घंटे शेयरों का लेन-देन, सिर्फ 1 घंटे आराम, इस स्टॉक एक्सचेंज की जोरदार तैयारी

Milky Mist IPO Listing: मिल्की मिस्ट की क्रीम एंट्री, ₹165 पर लिस्ट ₹140 का शेयर

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।