गोल्ड दो हफ्ते के हाई पर, शेयर मार्केट में 4% तक बढ़ गई इन तीन शेयरों की चमक

Gold Finance Stocks: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में तेजी का असर आज 5 नवंबर को गोल्ड फाइनेंस कंपनियों के शेयरों पर भी देखने को मिला। कमजोर अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से सोने की कीमत करीब 2% बढ़कर दो हफ्ते के हाई लेवल पर पहुंच गई। इससे निवेशकों का भरोसा गोल्ड से जुड़ी कंपनियों में बढ़ा और मुथूट फाइनेंस (Muthoot Finance), मणप्पुरम फाइनेंस (Manappuram Finance) और आईआईएफएल फाइनेंस (IIFL Finance) के शेयर उछल पड़े। फिलहाल मुथूट फाइनेंस के शेयर 4% से अधिक तो मणप्पुरम फाइनेंस के शेयर 3.7% और आईआईएफएल फाइनेंस लगभग 2% चढ़ गया।

इंटरनेशनल मार्केट में सोना $4,134 पर

स्पॉट गोल्ड 1.9% उछलकर प्रति औंस $4,134.83 हो गया जोकि 22 अक्टूबर के बाद का रिकॉर्ड हाई पर लेवल है। इससे एक दिन पहले बुधवार को इसमें करीब 3.4% की तेजी आई थी, जो 19 अगस्त के बाद किसी एक दिन में सबसे बड़ी तेजी थी। दिसंबर डिलीवरी का यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 1.8% बढ़कर $4,144.20 हो गया। चांदी 1.7% बढ़कर प्रति औंस $53.12, प्लैटिनम 2.1% उछलकर $1,527.65 और पैलेडियम 2.6% मजबूत होकर $1,030.14 पर पहुंच गया।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में गिरावट से मिला सहारा

अमेरिकी डॉलर कमजोर होने से अन्य करेंसी में निवेश करने वालों के लिए सोना सस्ता हो जाता है। इसके अलावा 10 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में गिरावट से ब्याज नहीं देने वाले एसेट्स का भी क्रेज बढ़ा। XS.com की मार्केट एनालिस्ट Linh Tran का कहना है कि डॉलर की कमजोरी और डॉलर बॉन्ड की नरमी से गोल्ड $4000 के अहम लेवल के पार गया लेकिन इसके ऊपर टिकने पर ही यह $4,200 और उसके बाद $4,400 तक की रिकवरी इसमें आ सकती है।

Citi ने दिया $4,500 का लक्ष्य

मार्केट को अब शुक्रवार को आने वाली यूएस नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के रुख का बेहतर अंदाजा लगाया जा सके। सीएमई के फेडवॉच टूल के अनुसार ट्रेडर्स को फिलहाल 82% संभावना दिख रही है कि फेड दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाएगा।

ब्रोकरेज फर्म सिटी ने बुधवार को गोल्ड के लिए 0-3 महीने का टारगेट प्राइस प्रति औंस $4,500 फिक्स किया है। सिटी का मानना ​​है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल जाता है और साल के आखिरी तक पश्चिमी एशिया में चल रही लड़ाई थमती है तो सोने की कीमतों में काफी तेजी आ सकती है।

इन 5 वजहों से आज मार्केट में छाई जोरदार रौनक

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

5 सेकंड में बरसे ₹6 लाख करोड़, Trump की करारी हार पर Sensex चढ़ा 1621 प्वाइंट्स, 5 वजहों से Nifty 24400 के करीब

Share Market Rally: अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में विपक्षी पार्टी डेमोक्रेट की धमाकेदार जीत ने मार्केट में ऐसा जोश भरा कि सेंसेक्स 1621 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी 24400 के करीब पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी बहार छा गई और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1-1% से अधिक की बढ़त है। मार्केट की इस शानदार रौनक में शुरुआती कारोबार में ही बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹6 लाख करोड़ से अधिक बढ़ गया यानी निवेशकों की दौलत में ₹6 लाख करोड़ से अधिक का इजाफा हुआ है। साथ ही मार्केट में डर भी कम हुआ है और इसे मापने वाला इंडिकेटर India VIX फिलहाल 3.73% की गिरावट के साथ 14.62 पर है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 09:22 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 1415.56 प्वाइंट्स यानी 1.83% की बढ़त के साथ 78,716.96 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 392.10 प्वाइंट्स यानी 1.64% के उछाल के साथ 24,352.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 1621.04 प्वाइंट्स उछलकर 78,922.44 तो निफ्टी भी 431.35 प्वाइंट्स चढ़कर 24,391.95 तक पहुंच गया।

Share Market Rally: ये है वजह

मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप की करारी हार

अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप के रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार ने अमेरिका से लेकर भारत तक के इक्विटी मार्केट में जोश भर दिया। अमेरिकी मार्केट में एसएंडपी 500 और नास्डाक जैसे अहम इंडेक्सेज डेढ़ फीसदी के आस-पास बंद हुए। एनालिस्ट्स के मुताबिक अमेरिका में डेमोक्रेट की जीत से ट्रंप को ईरान के साथ युद्ध आगे बढ़ाने में दिक्कत हो सकती है।

कच्चे तेल की मई के बाद एक दिन में सबसे तेज फिसलन

ओवरनाइट कच्चे तेल के भाव इतने तेजी से टूटे कि यह न सिर्फ प्रति बैरल $100 के नीचे आ गया बल्कि $95 के भी नीचे आ गया। कच्चे तेल के दोनों ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और अमेरिकी वैरिएंट वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमतों में ओवरनाइट 8-8% की तेज गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड $95 के करीब बंद हुआ तो WTI भी फिसलकर प्रति बैरल $88 के पास बंद हुआ। मई के बाद से इनके भाव में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट रही।

FIIs की खरीदारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी से मार्केट को सपोर्ट मिला। विदेशी निवेशकों ने लगातार चार कारोबारी दिनों में ₹20,834.06 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की, जिसमें से सबसे अधिक यानी ₹7,284.03 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी 4 नवंबर को की। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी को सेबी के प्रस्ताव से सपोर्ट मिला है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी ने सरकार से FIIs को एलटीसीजी पर टैक्स से छूट का प्रस्ताव दिया है।

सिर्फ फार्मा सेक्टर लाल

सेक्टरलाइज सिर्फ फार्मा सेक्टर का निफ्टी इंडेक्स लाल है और बाकी सभी अहम सेक्टर्स के निफ्टी इंडेक्स ग्रीन हैं। निफ्टी ऑटो तो 2% से अधिक मजबूत हुआ है तो आईटी, पीएसयू बैंक और प्राइवेट बैंक सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक की तेजी है। साथ ही मेटल और एफएमसीजी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स में 1-1% की तेजी है। निफ्टी फार्मा में आधे फीसदी से कम की गिरावट है।

यूएस बॉन्ड यील्ड में तेज गिरावट

बुधवार को ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई। अमेरिका में डेमोक्रेट्स ने कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। बेंचमार्क US 10-ईयर ट्रेजरी यील्ड 2 बेसिस पॉइंट गिरकर 4.86% पर और 2-ईयर बॉन्ड की यील्ड लगभग 2 बेसिस पॉइंट गिरकर 4.56% पर आ गई है।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

US Midterm Results Highlights: अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की आंधी! ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन की करारी हार, भारतीय-अमेरिकियों ने जीतीं अहम सीटें

Crude Oil Crash: 8% की भारी गिरावट, मई के बाद एक दिन में सबसे बुरा हाल, आखिर क्यों टूटा कच्चा तेल?

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; BSE, Nykaa, Lenskart और Cupid समेत 16 स्टॉक्स फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में डीप ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 369.00 प्वाइंट्स यानी 1.54% की बढ़त के साथ 24,319.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 4 नवंबर को सेंसेक्स (Sensex) 383.55 प्वाइंट्स यानी 0.50% की बढ़त के साथ 77,301.40 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 149.75 प्वाइंट्स यानी 0.63% की मजबूती के साथ 23,960.60 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Aurobindo Pharma Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ऑरोबिंदो फार्मा का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 32.7% बढ़कर ₹1,126.1 करोड़ और रेवेन्यू 23.9% चढ़कर ₹10,263.3 करोड़ पर पहुंच गया।

BSE Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर बीएसई का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 44.9% बढ़कर ₹809.1 करोड़ और रेवेन्यू 34.1% चढ़कर ₹1,432.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Apollo Hospitals Enterprise Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 33.5% बढ़कर ₹659.5 करोड़ और रेवेन्यू 23% चढ़कर ₹7,614.9 करोड़ पर पहुंच गया।

Lenskart Solutions Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर लेंसकार्ट सॉल्यूशंस का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 122.1% बढ़कर ₹227.1 करोड़ और रेवेन्यू 35.7% चढ़कर ₹2,845 करोड़ पर पहुंच गया।

FSN E-Commerce Ventures (Nykaa) Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर नायका का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 206.8% बढ़कर ₹101.2 करोड़ और रेवेन्यू 28.1% चढ़कर ₹3,006 करोड़ पर पहुंच गया। बोर्ड ने सिंपली नैम (Simply Nam) में 82% हिस्सेदारी ₹33 करोड़ में खरीदने की मंजूरी दी है।

Apollo Tyres Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर अपोलो टायर्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 13.3% बढ़कर ₹292.3 करोड़ और रेवेन्यू 16.6% चढ़कर ₹7,968.2 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का एक्सपेश्नल लॉस ₹180 करोड़ से घटकर ₹26.8 करोड़ रह गया। बोर्ड ने रवि कुमार सिंगारी को सीएफओ नियुक्त किया है।

Dabur India Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर डॉबर इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 11.7% बढ़कर ₹505.5 करोड़ और रेवेन्यू 11.6% चढ़कर ₹3,563.1 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी के मुनाफे की ग्रोथ लगातार चौथी तिमाही दोहरे अंकों में रही। इस दौरान इंडिया एफएमसीजी बिजनेस 10.7% और इंटरनेशनल बिजनेस 20% की रफ्तार से बढ़ा। कंपनी का प्रीमियम ब्रांड्स आम ब्रांड्स की तुलना में 4 गुना रफ्तार से बढ़ा और घरेलू बिजनेस में 20% हिस्सेदारी है।

Entero Healthcare Solutions Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एंटेरो हेल्थकेयर सॉल्यूशंस का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 44.1% बढ़कर ₹45.5 करोड़ और रेवेन्यू 32.9% चढ़कर ₹2,087.1 करोड़ पर पहुंच गया।

Shipping Corporation of India Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 205.4% बढ़कर ₹577.8 करोड़ और रेवेन्यू 71.1% चढ़कर ₹2,290.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Ravindra Energy

रवींद्र एनर्जी की ज्वाइंटली कंट्रोल कंपनी एनर्जी इन मोशन (Energy In Motion) ने सोरिजिन ग्रीन मोबिलिटी (Sorigin Green Mobility) के साथ एक रणनीतिक एमओयू किया। इसके तहत दो साल में 500 इलेक्ट्रिक हैवी कमर्शियल वाहन (e-HCVs) तैनात किए जाएंगे।

Adani Power

अदाणी पावर ने उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) के साथ 25 साल का पावर सप्लाई एग्रीमेंट किया है। इसके तहत 1,320 MW की स्थापित क्षमता के आधार पर 1,234 MW एक्स-बस नेट थर्मल पावर की सप्लाई की जाएगी।

KSH International

केएसएच इंटरनेशनल के बोर्ड ने अपनी खास मैग्नेट वाइंडिंग वायर को बनाने की क्षमता के फेज-3 विस्तार को मंजूरी दे दी है। इससे वित्त वर्ष 2029 की पहली तिमाही (Q1 FY2029) तक कंपनी की कुल क्षमता बढ़कर लगभग 72,200 MT हो जाएगी। इसमें कंपनी की ₹185 करोड़ के निवेश की योजना है, जिसमें सुपा में 10 एकड़ अतिरिक्त जमीन की खरीदारी, साथ ही बिल्डिंग्स, प्लांट और मशीनरी में निवेश शामिल होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी अंदरूनी स्रोतों के अलावा लॉन्ग टर्म डेट के जरिए भी फंड जुटाएगी।

Cupid

क्यूपिड ने V2 रिटेल के साथ एक लॉन्ग टर्म एक्सक्लूसिव रिटेल अरेंजमेंट किया है। इसके तहत V2 रिटेल के 425 से अधिक स्टोर्स के पूरे नेटवर्क में और साथ ही देश भर में V2 रिटेल के खुलने वाले सभी नए स्टोर्स में क्यूपिड को रिटेल स्पेस मिल जाएगी। कंपनी को उम्मीद है कि V2 रिटेल के साथ इस साझेदारी से अगले 12 महीनों में उसे लगभग ₹400 करोड़ का रेवेन्यू मिलेगा।

Ajmera Realty and Infra India

ओपन मार्केट ट्रांजैक्शन के जरिए 4 नवंबर को दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल ने रियल एस्टेट डेवलपर अजमेरा रियल्टी एंड इन्फ्रा इंडिया में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच दी, जबकि एसेट मैनेजमेंट कंपनी PGIM इंडिया ने गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल ने अजमेरा रियल्टी एंड इन्फ्रा इंडिया के 37.97 लाख शेयर (1.93% हिस्सेदारी) ₹53.4 करोड़ में बेचा तो एवरेस्ट फूड प्रोडक्ट्स ने इन्हें प्रति शेयर ₹140.75 के भाव पर खरीद लिया। साथ ही सेलो पेंस एंड स्टेशनरी ने वैल्यूक्वेस्ट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स से 25 लाख शेयर (1.27% होल्डिंग) ₹35.25 करोड़ में प्रति शेयर ₹141 के भाव पर तो गोपानी जिग्नेश गुणवंत ने 14.4 लाख शेयर (0.73% होल्डिंग) ₹20.09 करोड़ में प्रति शेयर ₹139.56 के भाव पर खरीद लिए।

Ganesh Consumer Products

पीजीआईएम इंडिया इक्विटी ग्रोथ अपॉर्चुनिटीज फंड सीरीज II ने गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है और 2.5 लाख अतिरिक्त शेयर (0.6% होल्डिंग) ₹4.7 करोड़ में प्रति शेयर ₹190.38 के भाव पर खरीद लिए। कंपनी के लेटेस्ट शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में PGIM इंडिया की 1.57% हिस्सेदारी है।

Bombay Coated & Special Steels

आज बॉम्बे कोटेड एंड स्पेशल स्टील्स के शेयरों की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: ओएनजीसी, भारती एयरटेल, टाइटन कंपनी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, एलआईसी, आधार हाउसिंग फाइनेंस, एबॉट इंडिया, एस्ट्राजेनेका फार्मा इंडिया, बीईएमएल, बर्जर पेंट्स इंडिया, भारत फोर्ज, भारती हेक्साकॉम, बीकाजी फूड्स इंटरनेशनल, इमामी, फोर्टिस हेल्थकेयर, ग्लेनमार्क फार्मा, इप्का लैबोरेटरीज, आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स, कल्पतरु प्रोजेक्ट्स इंटरनेशनल, मोलबायो डायग्नोस्टिक्स, मनीव्यू, संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल, एमफैसिस, पारस हेल्थकेयर, शिप रॉकेट, ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ इंडिया, टोनबो इमेजिंग इंडिया, वीए टेक वाबाग

एक्स-डिविडेंड: इंजीनियर्स इंडिया, बिड़लासॉफ्ट, इंडियन टोनर्स एंड डेवलपर्स, नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल, सनोफी इंडिया, शेयर इंडिया सिक्योरिटीज, सन टीवी नेटवर्क, वरुण बेवरेजेज

एक्स-स्प्लिट: गुजरात नेचुरल रिसोर्सेज

एक्स-रिजॉल्यूशन प्लान सस्पेंशन: स्टारलाइट कंपोनेंट्स

एक्स-इनकम डिस्ट्रीब्यूशन: बागमने प्राइम ऑफिस रीट, ब्रुकफील्ड इंडिया रियल एस्टेट ट्रस्ट रीट, माइंटस्पेस बिजनेस पार्क रीट (REIT)

F&O बैन: कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, सेल (SAIL)

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

US Midterm Election Impact: अमेरिका में डेमोक्रेट्स की जीत से भारत को फायदा मिलेगा या बढ़ सकती हैं मुश्किलें?

अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच आए इन नतीजों से अमेरिकी राजनीति में शक्ति संतुलन बदल गया है। अब संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स की मजबूत मौजूदगी होगी जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बने रहेंगे। इस चुनावी नतीजे का असर सिर्फ अमेरिका की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा। भारत के लिए भी इसके कई मायने हैं। पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका के रिश्तों में व्यापार शुल्क, रूस से तेल खरीद, एच-1बी वीजा, पाकिस्तान के साथ अमेरिकी संबंधों और भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम को लेकर ट्रंप के बयानों के कारण तनाव देखने को मिला है।

ऐसे में सवाल है कि क्या कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स के बहुमत से भारत को ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत में कुछ राहत मिलेगी? क्या भारतीय सामान पर अमेरिकी शुल्क घट सकते हैं? क्या भारतीय आईटी पेशेवरों को एच-1बी वीजा के मामले में राहत मिल सकती है? और क्या रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिकी दबाव बढ़ेगा?

हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्टपोस्ट ने अपने एक्सप्लेनर में विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक बताया है कि डेमोक्रेट्स की जीत से भारत को बातचीत के लिए कुछ अतिरिक्त मौके मिल सकते हैं लेकिन इससे ट्रंप प्रशासन की नीतियां तुरंत बदल जाएंगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि व्यापार शुल्क और वीजा से जुड़े कई अहम फैसलों में राष्ट्रपति के पास अब भी व्यापक कार्यकारी अधिकार हैं। आपको बता दें कि नई अमेरिकी कांग्रेस जनवरी 2027 में कामकाज संभालेगी।

भारत के लिए क्यों अहम हैं अमेरिकी मध्यावधि चुनाव?

अमेरिका भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। भारतीय आईटी सेवाओं के लिए भी अमेरिकी बाजार बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और रक्षा तकनीक के मामले में दोनों देशों की साझेदारी अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदलने का असर भारत के व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, आव्रजन और रक्षा सहयोग पर पड़ सकता है। भारत-अमेरिका संबंधों में इस साल कई मुद्दों पर खींचतान रही है। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय प्रोडक्ट्स पर टैरिफ लगाए। व्यापार समझौते पर बातचीत अटकी रही। अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीद कम करने का दबाव बनाया। ट्रंप ने बार-बार दावा किया कि उन्होंने 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम कराने में मध्यस्थता की थी। इसके अलावा पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संपर्क और एच-1बी वीजा से जुड़ी नई फीस ने भी भारत की चिंताएं बढ़ाई हैं। भारत की चुनौती यह है कि वह अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत बनाए रखे लेकिन रूस जैसे देशों के साथ अपने स्वतंत्र विदेश नीति संबंधों को भी प्रभावित न होने दे।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या पड़ेगा असर?

भारत के लिए सबसे तात्कालिक चिंता व्यापार शुल्क और लंबित व्यापार समझौता है। दोनों देशों ने फरवरी 2026 में एक व्यापार समझौते की रूपरेखा का ऐलान किया था। इसके तहत भारतीय प्रोडक्ट्स पर अमेरिकी शुल्क 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किए जाने की बात थी। इसके बदले भारत को अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कुछ खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क कम करने थे। लेकिन इसके बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले ने स्थिति बदल दी। 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने व्यापक शुल्क लगाने के लिए जिस आपातकालीन शक्तियों से जुड़े कानून का इस्तेमाल किया था वह उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं देता।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 फीसदी शुल्क की दर वास्तव में लागू ही नहीं हो पाई। इसके बाद अस्थायी रूप से 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगाया गया और 24 जुलाई से ज्यादातर भारतीय उत्पादों पर सेक्शन 301 के तहत 10 फीसदी शुल्क लागू हुआ। इस बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 29 अक्टूबर को कहा था कि अंतरिम समझौता अंतिम चरण में है और इससे भारतीय किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा होगी। हालांकि समझौते पर हस्ताक्षर की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। भारत में किसान संगठनों को आशंका है कि समझौते के जरिए आनुवंशिक रूप से संशोधित यानी जीएम फसलों के लिए भारतीय बाजार का रास्ता खुल सकता है।

क्या डेमोक्रेट्स भारत के लिए कम शुल्क की राह खोलेंगे?

कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत आने से भारत को तत्काल व्यापारिक राहत मिलने की संभावना कम है। इसकी वजह यह है कि अमेरिकी डेमोक्रेटिक पार्टी भी पूरी तरह मुक्त व्यापार की समर्थक नहीं है। इसलिए उनकी जीत को भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटने का संकेत नहीं माना जा सकता। हालांकि डेमोक्रेट्स भारत को चीन के मुकाबले एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानते हैं। ऐसे में वे मौजूदा व्यापार समझौते की कुछ शर्तों में बदलाव की मांग कर सकते हैं। डेमोक्रेटिक बहुमत वाली प्रतिनिधि सभा अमेरिकी शुल्क के असर पर सुनवाई करा सकती है। खास तौर पर यह जांचने की कोशिश हो सकती है कि आयात पर लगाए गए शुल्क से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए वस्तुएं कितनी महंगी हुई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कांग्रेस में ऐसा कोई कानून पारित होने की संभावना कम है जिससे भारत पर लगने वाले शुल्क में बड़ा बदलाव हो। इसलिए भारत के लिए व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखना जरूरी होगा। डेमोक्रेट्स की जीत से बातचीत का माहौल बदल सकता है, लेकिन समझौते की शर्तें अपने आप नहीं बदलेंगी।

रूस से तेल खरीदने पर भारत की मुश्किलें बढ़ेंगी?

भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा एक और बड़ा मुद्दा है। अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर करीब आठ महीने से दबाव बना हुआ है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास पैदा हुई बाधाओं ने भी तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.8 फीसदी बढ़कर 104.42 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। बाजार की नजर इस बात पर थी कि ईरान को लेकर अमेरिकी प्रशासन अगला कदम क्या उठाता है। ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा था कि अमेरिका की ईरान पर तत्काल हमला करने की कोई योजना नहीं है। वहीं एक ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि दोनों पक्ष किसी समझौते से अभी काफी दूर हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ सकता है। भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करना पड़ता है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ सकता है और इसका असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव क्यों अहम है?

भारत के लिए रूस से कच्चा तेल खरीदना भी लगातार अमेरिकी दबाव का विषय रहा है। 18 सितंबर को हस्ताक्षरित एक अमेरिकी कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले बड़े देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने का प्रावधान है। हालांकि ट्रंप ने 16 अक्टूबर को इन शुल्कों से छूट दे दी थी। इस छूट की कोई तय समाप्ति तारीख नहीं है लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति इसे वापस ले सकते हैं। फरवरी में जारी अमेरिकी आदेश के तहत वाणिज्य विभाग को यह निगरानी करने का निर्देश दिया गया है कि भारत दोबारा रूस से तेल खरीदना शुरू करता है या नहीं। डेमोक्रेट्स के सत्ता में आने से रूस के प्रति अमेरिकी नीति में नरमी आने की संभावना नहीं दिखती। मार्च में जब अमेरिकी वित्त विभाग ने होर्मुज क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने के दौरान भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए अस्थायी छूट दी थी, तब कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सदस्यों ने इसका विरोध किया था। इसलिए भारत के लिए स्थिति आसान होने के बजाय कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण भी हो सकती है।

एच-1बी वीजा पर भारतीय आईटी पेशेवरों को मिलेगी राहत?

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव का एक बड़ा असर भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले युवाओं पर पड़ सकता है। भारतीय नागरिक एच-1बी वीजा पाने वालों में सबसे बड़ा समूह हैं। इसलिए इस वीजा से जुड़े अमेरिकी नियमों में बदलाव का असर भारतीय पेशेवरों पर सबसे ज्यादा पड़ सकता है। सितंबर 2025 में ट्रंप प्रशासन ने कुछ नए एच-1बी आवेदनों पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का एलान किया था। इससे भारतीय आईटी कंपनियों और अमेरिका में काम करने के इच्छुक भारतीय पेशेवरों की चिंता बढ़ी। हालांकि इस फीस की वसूली को लेकर कानूनी लड़ाई जारी है। फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक अदालतों ने 24 जुलाई 2026 से इस फीस की वसूली पर रोक लगा रखी है। 18 सितंबर को जारी एक राष्ट्रपति आदेश के जरिए इस व्यवस्था को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ाया गया था। मैसाचुसेट्स की एक अदालत में 20 राज्यों की ओर से दायर मामले में न्यायाधीश ने कहा कि यह फीस असल में एक तरह का कर है जिसे लगाने का अधिकार सिर्फ अमेरिकी कांग्रेस के पास है।

क्या डेमोक्रेट्स एच-1बी फीस खत्म कर सकते हैं?

कांग्रेस में डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से एच-1बी नीति की जांच-पड़ताल बढ़ सकती है। वे इस बात पर सवाल उठा सकते हैं कि नई फीस का अमेरिकी कंपनियों और विदेशी पेशेवरों पर क्या असर पड़ रहा है। लेकिन इससे यह उम्मीद करना सही नहीं होगा कि एच-1बी वीजा की फीस तुरंत खत्म हो जाएगी या वीजा नियमों में बड़ी राहत मिल जाएगी। नई कांग्रेस जनवरी 2027 में कामकाज शुरू करेगी। ट्रंप के पास राष्ट्रपति के रूप में वीटो का अधिकार बना रहेगा। अगर कांग्रेस ऐसा कोई विधेयक पारित करती है जो इस फीस को सीमित करता है या इसे कानून के रूप में बदलने की कोशिश करता है तो ट्रंप उसे वीटो कर सकते हैं।

भारतीय शेयर बाजार पर क्या होगा असर?

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बीच भारतीय शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। चुनाव परिणाम आने से पहले भारतीय बाजार मजबूत स्थिति में थे। मंगलवार तक चार कारोबारी सत्रों में निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 5 फीसदी चढ़कर दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गए थे। इसके पीछे कंपनियों के बेहतर नतीजे, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी में शुरुआती सुधार जैसे कारण थे। मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 6837 करोड़ रुपये यानी 721.66 मिलियन डॉलर की शुद्ध खरीदारी की। लेकिन बुधवार को तस्वीर कुछ बदली। निफ्टी 23946.35 के उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि सेंसेक्स ने 77396.04 का स्तर छुआ। हालांकि बाद में बाजार की बढ़त कम हो गई। इस दौरान आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। आईटी कंपनियों के शेयरों में 2.2 फीसदी की गिरावट आई। बाजार विशेषज्ञों ने इसकी वजह अमेरिकी आव्रजन नीति और आउटसोर्सिंग से जुड़ी अनिश्चितताओं को बताया। अमेरिकी बाजार में सेवाओं की मांग कमजोर रहने की आशंका भी आईटी शेयरों पर दबाव का एक कारण रही।

क्या मध्यावधि चुनाव के बाद भारतीय बाजार में तेजी आती है?

इतिहास के कुछ आंकड़े भारतीय शेयर बाजार के लिए उम्मीद की वजह हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक 1982 के बाद से अमेरिका के 11 मध्यावधि चुनावों में से छह मौकों पर उसके बाद के महीनों में भारतीय शेयर सूचकांकों ने औसतन 12 फीसदी की बढ़त दर्ज की। हालांकि इसे इस बार भी बाजार में तेजी की गारंटी नहीं माना जा सकता। कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख, कंपनियों के नतीजे और अमेरिका की आर्थिक नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ब्रोकरेज के आकलन में निफ्टी के लिए 23200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट माना गया है।

रक्षा सहयोग, क्वाड और चीन के मोर्चे पर क्या बदलेगा?

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को दोनों देशों की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों का समर्थन मिलता रहा है। दोनों देश रक्षा अभ्यास, सैन्य तकनीक, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने जैसे मुद्दों पर साथ काम करते रहे हैं। इसलिए अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स के बहुमत से भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों की दिशा में बड़े बदलाव की संभावना कम है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस की निगरानी और बजट संबंधी फैसले कुछ रक्षा परियोजनाओं की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

इसके लिए भारत-अमेरिका क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी यानी आईसीईटी ढांचे के तहत सहयोग को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके अलावा क्वाड के तहत महत्वपूर्ण खनिजों और समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली इंटरनेट केबल जैसी परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के अवसर भी हैं। डेमोक्रेट्स की मजबूत मौजूदगी अमेरिकी विदेश नीति में कुछ मामलों में संतुलनकारी भूमिका निभा सकती है। इससे भारत को रक्षा, व्यापार और कूटनीति से जुड़े अपने हितों को आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं।

भारत के लिए डेमोक्रेट्स की जीत के क्या मायने हैं?

ऐसे में देखें तो अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजे भारत के लिए न तो पूरी तरह राहत की खबर हैं और न ही किसी बड़े संकट का संकेत। इसका सबसे बड़ा असर यह होगा कि ट्रंप प्रशासन की नीतियों पर अमेरिकी कांग्रेस की निगरानी बढ़ेगी। व्यापार के मोर्चे पर भारत को तत्काल शुल्क में कमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। एच-1बी वीजा के मामले में भी डेमोक्रेट्स की जीत से तुरंत राहत मिलने की संभावना नहीं है। रूस से तेल खरीद पर अमेरिकी दबाव जारी रह सकता है और इस मुद्दे पर कांग्रेस में बहस तेज हो सकती है। भारत की चुनौती अब यह होगी कि वह ट्रंप प्रशासन के साथ अपने संबंधों को संभालते हुए अमेरिकी कांग्रेस के साथ भी संवाद मजबूत करे। आखिरकार, भारत की समस्या अमेरिका के साथ साझेदारी नहीं बल्कि ट्रंप प्रशासन के कुछ खास नीतिगत फैसले रहे हैं।

क्या लेमडक बने डोनाल्ड ट्रंप? ईरान युद्ध और वैश्विक नीतियों पर पड़ेगा यह बड़ा असर, आ सकता है महाभियोग

क्या लेमडक बने डोनाल्ड ट्रंप? ईरान युद्ध और वैश्विक नीतियों पर पड़ेगा यह बड़ा असर, आ सकता है महाभियोग

US Midterm Elections 2026 Results

US Midterm Elections 2026 Results: अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के परिणामों ने वॉशिंगटन की सत्ता का गणित पूरी तरह बदल दिया है। संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत घटने और डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत प्रदर्शन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन चुनावों में अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटें, उच्च सदन सीनेट की 35 सीटें, गवर्नर के 36 पद और स्थानीय निकायों के कई पद शामिल थे।

 

दरअसल, ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए देश के मतदाताओं ने बहुचर्चित मध्यावधि चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को संसद के उच्च सदन सीनेट का नियंत्रण सौंप दिया और डेमोक्रेट ने कई अहम राज्यों में गवर्नर पदों पर भी जीत दर्ज की। इन नतीजों का असर न केवल अमेरिका, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। रिपब्लिकन पार्टी को अपने मजबूत गढ़ माने जाने वाले टेक्सास, जॉर्जिया और आयोवा जैसे राज्यों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसने डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों गवर्नर के पद गंवा दिए। हालांकि अंतिम परिणाम शेष हैं, लेकिन यह भी तय है कि ट्रंप ने दोनों ही सदनों में बहुमत खो दिया है। ALSO READ: ट्रंप की हार से भारत और भारतीयों को क्या-क्या होगा फायदा?

इसके अलावा टेक्सास, मेन, साउथ कैरोलिना, नॉर्थ कैरोलिना, कंसास और आयोवा में सीनेट की सीट पर भी पार्टी को झटका लगा। माना जा रहा है कि महंगा ईंधन, घरेलू महंगाई का असर रिपब्लिकन पार्टी को ले डूबा। ईरान युद्ध को लेकर भी अमेरिकी ट्रंप के साथ नहीं आए। इतना ही नहीं ट्रंप की हार से ग्लोबल मार्केट में स्थिरता की उम्मीदें बढ़ गई हैं। 

क्या ट्रंप ‘लेमडक’ (Lame Duck) राष्ट्रपति बन गए हैं?

हालांकि अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के तहत दो बार राष्ट्रपति रह चुके ट्रंप 2028 का अगला राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकते। कार्यकाल का अंतिम दौर होने के कारण उनका राजनीतिक प्रभाव स्वाभाविक रूप से सीमित हो जाता है। कांग्रेस (संसद) पर अपनी पार्टी का पूर्ण नियंत्रण खोने के बाद अब ट्रंप अपनी इच्छानुसार कानून या बजट पारित नहीं करा पाएंगे। जब कोई राष्ट्रपति न तो अगला चुनाव लड़ सकता है और न ही संसद के जरिए मनचाही नीतियां पास करा सकता है, तो उसे राजनीतिक भाषा में ‘लेमडक’ कहा जाता है। ALSO READ: US Midterm Election: अमेरिका में ट्रंप को तगड़ा झटका, संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स भारी; जानें क्या बोले राष्ट्रपति?

ट्रंप की नीतियों पर क्या असर होगा?

डेमोक्रेटिक-नियंत्रित निचले सदन (House of Representatives) के चलते ट्रंप प्रशासन की टैक्स, आव्रजन (Immigration) और घरेलू आर्थिक नीतियों से जुड़े नए विधेयकों का पास होना बेहद कठिन हो जाएगा। बजट आवंटन को लेकर व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ सकता है, जिससे कई बार सरकारी कामकाज बंद होने की नौबत आ सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए कार्यकारी आदेशों और बजटीय वीटो पॉवर पर निर्भर रहना पड़ेगा।

क्या थम जाएगा ईरान युद्ध?

अमेरिकी संविधान के अनुसार सैन्य अभियानों के लिए फंड जारी करने का अधिकार संसद के पास है। डेमोक्रेट्स ईरान के खिलाफ किसी भी लंबे सैन्य अभियान या युद्ध के लिए फंड रोकने या सीमित करने के लिए विधायी दबाव बना सकते हैं। संसद की रक्षा और विदेश नीति समितियों द्वारा ट्रंप प्रशासन के फैसलों की कड़ी निगरानी और सुनवाई की जाएगी, जिससे आक्रामक सैन्य कदम उठाना ट्रंप के लिए कठिन होगा। ऐसी उम्मीद व्यक्त की जा रही है कि ट्रंप और नेतन्याहू की हार के बाद ईरान युद्ध थम सकता है। इससे दुनिया में होने वाली आर्थिक उथल-पुथल भी रुक सकती है। 

वैश्विक नीतियों पर हार का क्या असर पड़ेगा?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार (जैसे भारत, चीन या यूरोपीय संघ) पर एकतरफा कड़े टैरिफ लगाने के फैसलों को अमेरिकी संसद से कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों और जलवायु समझौतों पर अमेरिका के एकतरफा फैसलों पर संसद की ओर से संतुलन कायम करने का प्रयास होगा। घरेलू स्तर पर विधायी अड़चनों के कारण ट्रंप अपने कार्यकाल के बाकी समय में विदेश मामलों और कूटनीतिक वार्ताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

क्या ट्रंप के खिलाफ आ सकता है महाभियोग?

यदि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के पास बहुमत है, तो वे राष्ट्रपति पर संवैधानिक उल्लंघनों का आरोप लगाकर साधारण बहुमत से महाभियोग (Impeachment) का प्रस्ताव पास कर सकते हैं। महाभियोग पास होना एक बात है, लेकिन राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई (67 वोट) बहुमत की आवश्यकता होती है, जो कि डेमोक्रेट के पास नहीं है। सीनेट में दो-तिहाई वोट जुटाना बेहद मुश्किल होने के कारण ट्रंप को पद से हटाना कठिन होगा, भले ही महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो जाए। हालांकि ट्रंप के खिलाफ पिछले कार्यकाल में भी महाभियोग प्रस्ताव आ चुका है।

‘शायद मेरे स्पेस लेजर काम नहीं आए…’, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की जीत पर मस्क का तंज

US Midterm Election Results 2026: अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट पर कब्जा जमाने और रिपब्लिकन पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बीच दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क का पहला रिएक्शन आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मस्क ने चुनावी नतीजों पर अपने मजाकिया और व्यंग्यात्मक अंदाज में तंज कसा।

मस्क ने पोस्ट करते हुए लिखा, ‘Guess my election-interfering space lasers didn’t work this time’ हिन्दी में इसका मतलब ये है कि- ‘शायद चुनाव में धांधली करने वाले मेरे स्पेस लेजर इस बार काम नहीं आए’।

मस्क का यह तंज उन वामपंथी ट्रोल्स और सोशल मीडिया कॉन्सपिरेसी थ्योरी पर कड़ा प्रहार है, जिनमें दावा किया जाता रहा है कि मस्क अपनी सैटेलाइट कंपनी ‘स्टारलिंक’ या स्पेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल चुनावों को प्रभावित करने और रिपब्लिकन को जिताने के लिए करते हैं।

रिपब्लिकन को सबसे बड़े फंड देने वालों में से एक थे मस्क

यह पोस्ट इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि 2026 के इन मिडटर्म चुनावों में एलन मस्क डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के सबसे बड़े समर्थक और डोनर के रूप में सामने आए थे। मस्क ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को जिताने के लिए करीब 500 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि राजनीतिक फंड्स दी थी।

ट्रंप ने कहा था जिहादी, बताया था मुस्लिम ब्रदरहुड का मेंबर, इसके बावजूद अब्दुल अल सैयद जीत गए चुनाव, जानें कौन हैं ये

मतदान के ठीक एक दिन पहले मस्क ने X पर ‘Vote Red Today!’ लिखकर अमेरिकियों से रिपब्लिकन पार्टी को वोट देने की अपील भी की थी।

2025 में डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रपति पद पर वापसी के बाद एलन मस्क ‘डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी’ (DOGE) के प्रमुख रहे और ट्रंप के सबसे करीबी सलाहकार बने।

इसके बावजूद, सीनेट में डेमोक्रेट्स की जीत और रिपब्लिकन के घटते जनाधार ने मस्क और ट्रंप कैंपेन को भारी आर्थिक व राजनीतिक झटका दिया है।

चुनावों का मौजूदा रुख और पावर शिफ्ट

2026 के मिडटर्म चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए बहुत बड़ा गतिरोध बन गए हैं। डेमोक्रेट्स ने टेक्सास और कैरोलिना जैसे रिपब्लिकन गढ़ों को भेदते हुए बहुमत हासिल कर लिया है। सीनेट हाथ से जाने के बाद ट्रंप ने संसद के हर कानून पर ‘वीटो’ का इस्तेमाल करने और वाशिंगटन में डेमोक्रेट्स के बिल रोकने का ऐलान किया है।

Share Market Rally: 478 प्वाइंट्स चढ़ा Sensex, 5 वजहों से Nifty 23900 के पार, लेकिन बढ़ा मार्केट में डर!

Share Market Rally: अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप के पिछड़ने का असर मार्केट पर दिख रहा है और सेंसेक्स-निफ्टी उछल पड़े। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 478 प्वाइंट्स उछल पड़ा तो निफ्टी भी 23900 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में रौनक है औ निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की बढ़त है। हालांकि मार्केट में डर भी बढ़ा है और इसे मापने वाला इंडिकेटर India VIX फिलहाल 1.97% उछलकर 16.03 के पार पहुंच गया, जिसके चलते मुनाफावसूली का भी दबाव है।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:45 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 109.78 प्वाइंट्स यानी 0.14% की हल्की बढ़त के साथ 77,027.63 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 28.85 प्वाइंट्स यानी 0.12% की हल्की मजबूती के साथ 23,839.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 478.19 प्वाइंट्स उछलकर 77,396.04 तो निफ्टी भी 135.50 प्वाइंट्स चढ़कर 23,946.35 तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स टूटकर 76,604.85 और निफ्टी 77,396.04 तक आ गया था।

Share Market Rally: ये है वजह

अमेरिका का मिडटर्म इलेक्शन

मार्केट की नजर अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के नतीजे पर है। अभी तक की गणना के हिसाब से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के चहेते और रिपब्लिकन पार्टी के कैंडिडेट विवेक रामास्वामी की करारी हार हुई है। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के इस चुनाव में पिछड़ने का ईरान के साथ चल रहा तनाव हल्का पड़ सकता है। एनालिस्ट्स के मुताबिक अमेरिका में डेमोक्रेट की जीत से ट्रंप को ईरान के साथ युद्ध आगे बढ़ाने में दिक्कत हो सकती है।

कच्चे तेल की नरमी

ट्रंप का कहना है कि ईरान पर हमले की उनकी कोई योजना नहीं है और इजरायल को सालाना $400 करोड़ की दी जाने वाली सालाना मदद रोकेगा। इससे कच्चे तेल के भाव नरम पड़े और ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क प्रति बैरल टूटकर $103 के करीब आ गया।

FIIs की खरीदारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी से मार्केट को सपोर्ट मिला। विदेशी निवेशकों ने लगातार तीन कारोबारी दिनों में ₹13,550.03 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की, जिसमें से सबसे अधिक यानी ₹6,836.81 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी 3 नवंबर को की। इससे मार्केट को सपोर्ट मिला है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी को सेबी के प्रस्ताव से सपोर्ट मिला है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी ने सरकार से FIIs को एलटीसीजी पर टैक्स से छूट का प्रस्ताव दिया है।

FMCG सेक्टर से दमदार सपोर्ट

फेस्टिव सीजन से पहले एफएमसीजी सेक्टर में शानदार रौनक है और इसका निफ्टी इंडेक्स 1% से अधिक मजबूत हुआ।

तकनीकी वजह

एनालिस्ट्स के मुताबिक जब तक निफ्टी 23,700 के ऊपर है, इसमें रैली की पूरी गुंजाइश है।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि मंगलवार को अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन के चलते वोलैटिलिटी अधिक रह सकती है। निफ्टी अगर मंगलवार को गैप एरिया 23,440-23,482 के ऊपर बना रहता है तो बाजार मजबूत बना रहेगा और यह 200-दिनों के EMA और फरवरी और अगस्त 2026 के हाई लेवल को जोड़ने वाली ट्रेंडलाइन के मिलने वाले प्वाइंट 23,950-24,050 की तरफ बढ़ सकता है।

पबित्रो का कहना है कि निफ्टी के 24,050 के पार जाने पर ही इसके 24,400 की तरफ जाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि अगर यह 24,000 के ऊपर नहीं चढ़ पाता है तो पिछले 7 सेशंस में 1400 प्वाइंट्स के तेज उछाल के बाद 23,200-24,000 की रेंज में कंसालिडेशन हो सकता है। पबित्रो ने निफ्टी का शॉर्ट-टर्म सपोर्ट बढ़ाकर 23,000-23,200 कर दिया गया है और अगर निफ्टी इसके ऊपर रहता है तो इसका रुख पॉजिटिव रहेगा। पबित्रो के मुताबिक हाल ही में आई जोरदार तेजी के बाद गिरावट आने पर इसे खरीदारी के मौके के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।