ट्रंप के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी में बगावत : उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी नाराज, रक्षामंत्री हेगसेथ पर महाभियोग का खतरा

ट्रंप के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी में बगावत : उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी नाराज, रक्षामंत्री हेगसेथ पर महाभियोग का खतरा

Pete Hegseth Impeachmen: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (US Midterm Elections 2026) में करारी हार के बाद रिपब्लिकन पार्टी और व्हाइट हाउस के भीतर अभूतपूर्व राजनीतिक भूचाल आ गया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट दोनों में बहुमत खोने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ पार्टी के अंदर ही बगावती सुर तेज हो गए हैं। हालात इतने खराब हैं कि ट्रंप की ही पार्टी के एक सांसद ने रक्षा मंत्री हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की घोषणा कर दी है। 

रिपब्लिकन पार्टी में कलह की 5 बड़ी वजहें

मध्यावधि चुनाव के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बहुमत हासिल कर ट्रंप प्रशासन पर शिकंजा कस दिया है। इस हार के बाद पार्टी नेताओं और रणनीतिकारों ने ट्रंप की घरेलू व विदेश नीतियों पर सीधा हमला बोला है। ALSO READ: ईरान युद्ध की वजह से हारे मध्यावधि चुनाव? अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा कबूलनामा

  • ईरान युद्ध (Iran War) और महंगाई : उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि 2024 में ट्रंप को वोट देने वाले कई मतदाता ईरान जंग की वजह से दूर हो गए। ईंधन की बढ़ती कीमतों और युद्ध के लंबा खिंचने से आम जनता में भारी नाराजगी दिखी। ALSO READ: क्या लेमडक बने डोनाल्ड ट्रंप? ईरान युद्ध और वैश्विक नीतियों पर पड़ेगा यह बड़ा असर, आ सकता है महाभियोग
  • रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) निशाने पर : रिपब्लिकन नेताओं ने आरोप लगाया कि रक्षा मंत्री हेगसेथ ने ट्रंप को बिना किसी ‘एग्जिट प्लान’ के ईरान युद्ध में उलझा दिया। रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने हेगसेथ के खिलाफ महाभियोग (Impeachment) प्रस्ताव लाने का ऐलान तक कर दिया है। ALSO READ: ट्रंप की हार से भारत और भारतीयों को क्या-क्या होगा फायदा?
  • विदेश नीति पर सवाल : टेक्सास रिपब्लिकन पार्टी के पूर्व कार्यकारी निदेशक चैड विलबैंक्स (Chad Wilbanks) सहित कई नेताओं ने ट्रंप की आक्रामक व्यापार नीति (Tariffs) और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के प्रति झुकाव को पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार ठहराया।
  • रणनीतिक चूक और सीमित वोटर फोकस : रणनीतिकार मैट मैकोविएक (Matt Mackowiak) और सांसद चिप रॉय ने माना कि पार्टी का पूरा ध्यान एक सीमित वोटर बेस पर रहा। विवादित उम्मीदवारों को टिकट देने और चुनावी अभियान में फंड प्रबंधन की गड़बड़ी ने नतीजों को बिगाड़ा।
  • अश्वेत और एशियाई मतदाताओं का मोहभंग : सरकार की नीतियों से नाराज होकर अश्वेत, एशियाई और युवा मतदाताओं ने बड़ी संख्या में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान किया।

Stock Market Rally: भारतीय बाजार फिर हुआ $5 ट्रिलियन का, अब इन 3 बातों पर रहेगी नजर

Stock Market Rally: घरेलू स्टॉक मार्केट में आज लगातार छठे दिन रौनक है। इन छह दिनों की तेजी के साथ भारतीय मार्केट की वैल्यू एक बार फिर $5 ट्रिलियन के पार हो गई। इन छह कारोबारी दिनों में निवेशकों की दौलत में करीब ₹30 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है। इस दौरान सेंसेक्स (Sensex) करीब 6400 प्वाइंट्स ऊपर चढ़ गया तो निफ्टी 50 (Nifty 50) 22500 के नीचे आने के बाद तेजी से रिकवर होकर आज 24400 के पार पहुंच गया। निफ्टी के सभी 50 स्टॉक्स इस दौरान मजबूत हुए हैं और निफ्टी 8% से अधिक ऊपर चढ़ा। हालांकि ब्रोडर लेवल पर स्थिति थोड़ी कमजोर रही और मिडकैप इंडेक्स में 5% तो स्मॉलकैप इंडेक्स में 3% की तेजी आई।

इन वजहों से मार्केट में छाई रौनक

28 अक्टूबर के निचले स्तर से छह कारोबारी दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी में 8-8% से अधिक की तेजी आई है। इन्हें कई बातों से सपोर्ट मिला है, जैसे कि कंपनियों के धमाकेदार कारोबार नतीजे, अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन में ट्रंप के रिपब्लिकशन पार्टी की शिकस्त और कच्चे तेल का धड़ाम होना।

विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ खरीदारी ने इस माहौल को और मजबूत किया, जिन्होंने लगातार चार कारोबारी दिनों में ₹20,834.06 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की, जिसमें से सबसे अधिक यानी ₹7,284.03 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी 4 नवंबर को की। विदेशी निवेशकों की खरीदारी को सेबी के प्रस्ताव से सपोर्ट मिला है। न्यूज एजेंसी रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी ने सरकार से FIIs को एलटीसीजी पर टैक्स से छूट का प्रस्ताव दिया है।

अब आगे क्या?

मार्केट ने $5 ट्रिलियन यानी $5 लाख करोड़ के मार्केट कैप का अहम मनोवैज्ञानिक स्तर छू लिया। अब निवेशकों को आने वाले हफ्तों में कुछ घरेलू और ग्लोबल बातों पर नजर रहेगी-

1. सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर अब अपने आखिरी चरण में है। अधिकतर कंपनियों के नतीजे अब तक तो एनालिस्ट्स की उम्मीदों के मुताबिक रहे हैं या उनसे बेहतर रहे हैं।

2. दिसंबर में आने वाली आरबीआई की पॉलिसी पर नजर रहेगा। दिग्गज बैंकर उदय कोटक को उम्मीद है कि इस वित्त वर्ष 2027 के आखिरी तक आरबीआई दरों में 75 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि दिसंबर में 25 बेसिस पॉइंट्स की और बढ़ोतरी होती है या नहीं।

3. अमेरिका में हो रहे घटनाक्रमों पर भी मार्केट की कड़ी नजर रहेगी, खासतौर से ऐसे समय में, जब डेमोक्रेट्स ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों जगह मिडटर्म चुनावों में शानदार जीत हासिल की है। मार्केट की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या सरकार पर ईरान के साथ कोई समझौता करने का दबाव होगा, और क्या AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़ा कारोबार और कम होगा।

5 वजह, Nifty लंबे इंतजार बाद 24400 के पार

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कच्चे तेल की नरमी ने दिया बूस्टर डोज, सरपट भागे JK टायर और इंडिगो के शेयर, पेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भी लगे पंख

आज गुरुवार, 5 नवंबर को JK टायर, इंडिगो, एशियन पेंट्स और कई तेल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल रही है। इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के कारण एविएशन, टायर और पेंट कंपनियों के शेयरों को फायदा मिला है। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 9 प्रतिशत गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। बाजार को उम्मीद है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के नतीजे अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे तनाव को खत्म करने का रास्ता खोल सकते हैं। इसके चलते क्रूड की कीमत में नरमी आई है।

आज शुरुआती कारोबार में JK टायर 5.6 प्रतिशत बढ़कर 351.5 रुपये पर पहुंच गया, जबकि इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन 5.04 प्रतिशत चढ़कर 5,400 रुपये पर जाता दिखा। एशियन पेंट्स 4.44 प्रतिशत बढ़कर 2,525.7 रुपये पर पहुंच गया, वहीं अपोलो टायर्स में 4.37 प्रतिशत की तेजी आई और यह 420 रुपये पर पहुंच गया।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों में भी तेजी

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) 5.17 प्रतिशत बढ़कर 385.30 रुपये पर, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) 3.63 प्रतिशत बढ़कर 315.75 रुपये पर और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) 3.10 प्रतिशत बढ़कर 146.43 रुपये पर पहुंच गया।

दूसरे बढ़त बनाने वाले शेयरों में CEAT शामिल है जो 3.25 प्रतिशत बढ़कर 3,526 रुपये पर पहुंच गया। कंसाई नेरोलैक पेंट्स 2.84 प्रतिशत बढ़कर 200.86 रुपये पर आ गया और बर्जर पेंट्स 2.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 498.45 रुपये पर पहुंच गया। स्पाइसजेट भी 1.83 प्रतिशत बढ़कर 7.78 रुपये पर आ गया।

अपस्ट्रीम तेल उत्पादक कंपनियों पर दबाव

हालांकि,अपस्ट्रीम तेल उत्पादक कंपनियां दबाव में दिख रही हैं। ऑयल इंडिया 3.07 प्रतिशत गिरकर 443.95 रुपये पर आ गया है। जबकि ONGC 1.60 प्रतिशत फिसलकर 231.24 रुपये पर आ गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट क्यों?

गुरुवार को ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार चौथे सेशन में गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी मध्यावधि कांग्रेसनल चुनावों में डेमोक्रेट्स की कई अहम जीत के बाद, मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को चुनावों में मिली हार से इस बात की उम्मीद जगी है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के संघर्ष के और अधिक बढ़ने का खतरा कम हो सकता है।

इस उम्मीद के चलते ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.03 प्रतिशत गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) फ्यूचर्स 1.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 86.98 डॉलर पर आ गया। बुधवार को दोनों बेंचमार्क में 8-9 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जिससे ये 31 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए।

इस हफ्ते ब्रेंट में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई

इस हफ्ते ब्रेंट में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है। अगर यह गिरावट शुक्रवार तक जारी रहती है तो यह अप्रैल 2020 के बाद से तेल की कीमतों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट होगी।

एविएशन, टायर और पेंट कंपनियों के शेयरों में तेजी क्यों ?

कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट से उन कंपनियों को फायदा होगा जो पेट्रोलियम से बनने वाले ईंधन और कच्चे माल पर काफी हद तक निर्भर होते हैं। इंडिगो के लिए,एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) एक बड़ा खर्च है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से कंपनी की ईंधन की लागत कम हो सकती है और एयरलाइन के मुनाफे में सुधार हो सकता है।

JK टायर, अपोलो टायर्स और CEAT जैसी टायर बनाने वाली कंपनियों को सिंथेटिक रबर, कार्बन ब्लैक और पेट्रोलियम से जुड़े दूसरे कच्चे माल की लागत कम होने से फायदा मिल सकता है। एशियन पेंट्स, बर्जर पेंट्स और कंसाई नेरोलैक जैसी पेंट बनाने वाली कंपनियों को भी कच्चे माल की लागत में राहत मिल सकती है।

इसी तरह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को बेहतर मार्केटिंग मार्जिन से फायदा हो सकता है। जबकि कच्चे तेल के सस्ते होने से ONGC और ऑयल इंडिया जैसी तेल उत्पादक कंपनियों की कमाई पर दबाव आ सकता है।

 

 

Currency Check : कच्चे तेल में नरमी से मिला सपोर्ट, रुपया 29 पैसे मजबूत होकर 94.35 रुपए प्रति डॉलर पर खुला

Currency Check : कच्चे तेल में नरमी से मिला सपोर्ट, रुपया 29 पैसे मजबूत होकर 94.35 रुपए प्रति डॉलर पर खुला

Currency Check : 5 नवंबर को लगातार पांचवें दिन भी भारतीय रुपये की बढ़त का सिलसिला जारी है। तेल की कीमतों में गिरावट आई है। इससे रुपए के सपोर्ट मिल रहा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी की हार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान युद्ध से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर सकती है। इसके चलते ही तेल की कीमतों में नरमी आई है।

बुधवार के 94.64 रुपए प्रति डॉलर के बंद भाव की तुलना में रुपया आज 29 पैसे की बढ़त के साथ 94.35 रुपए प्रति डॉलर पर खुला। आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज्यादातर एशियाई मुद्राओं में तेजी देखने को मिली है। फिलीपीन पेसो सबसे ज्यादा मजबूत हुआ है। इसमें 0.36 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। इसके बाद थाई बाहत का नंबर है जो 0.42 प्रतिशत मजबूत हुआ है। जापानी येन और मलेशियाई रिंगित में 0.29-0.29 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन और सिंगापुर डॉलर में 0.18 प्रतिशत और 0.08 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है।

दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ताइवान डॉलर में 0.21 प्रतिशत की कमजोरी आई है। जबकि चीनी रेनमिनबी और इंडोनेशियाई रुपिया में 0.07 प्रतिशत और 0.04 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

गुरुवार को डॉलर में थोड़ी गिरावट आई। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की भारी जीत ने अनिश्चितता के एक बड़े कारण को दूर कर दिया है,जिससे ग्लोबल शेयर बाजार में तेजी आई है। कई बड़ी मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स पिछले सत्र में 0.36% की गिरावट के बाद आज भी 0.06% गिरकर 101.41 पर आ गया है। यूरो 0.12% बढ़कर 1.1241 डॉलर पर पहुंच गया है।

 

 

बाजार की लगाम अब पूरी तरह से तेजड़ियों के हाथ, निफ्टी में जल्द ही 24200–24400 का लेवल मुमकिन

क्या लेमडक बने डोनाल्ड ट्रंप? ईरान युद्ध और वैश्विक नीतियों पर पड़ेगा यह बड़ा असर, आ सकता है महाभियोग

क्या लेमडक बने डोनाल्ड ट्रंप? ईरान युद्ध और वैश्विक नीतियों पर पड़ेगा यह बड़ा असर, आ सकता है महाभियोग

US Midterm Elections 2026 Results

US Midterm Elections 2026 Results: अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के परिणामों ने वॉशिंगटन की सत्ता का गणित पूरी तरह बदल दिया है। संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत घटने और डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत प्रदर्शन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन चुनावों में अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटें, उच्च सदन सीनेट की 35 सीटें, गवर्नर के 36 पद और स्थानीय निकायों के कई पद शामिल थे।

 

दरअसल, ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए देश के मतदाताओं ने बहुचर्चित मध्यावधि चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को संसद के उच्च सदन सीनेट का नियंत्रण सौंप दिया और डेमोक्रेट ने कई अहम राज्यों में गवर्नर पदों पर भी जीत दर्ज की। इन नतीजों का असर न केवल अमेरिका, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। रिपब्लिकन पार्टी को अपने मजबूत गढ़ माने जाने वाले टेक्सास, जॉर्जिया और आयोवा जैसे राज्यों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसने डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों गवर्नर के पद गंवा दिए। हालांकि अंतिम परिणाम शेष हैं, लेकिन यह भी तय है कि ट्रंप ने दोनों ही सदनों में बहुमत खो दिया है। ALSO READ: ट्रंप की हार से भारत और भारतीयों को क्या-क्या होगा फायदा?

इसके अलावा टेक्सास, मेन, साउथ कैरोलिना, नॉर्थ कैरोलिना, कंसास और आयोवा में सीनेट की सीट पर भी पार्टी को झटका लगा। माना जा रहा है कि महंगा ईंधन, घरेलू महंगाई का असर रिपब्लिकन पार्टी को ले डूबा। ईरान युद्ध को लेकर भी अमेरिकी ट्रंप के साथ नहीं आए। इतना ही नहीं ट्रंप की हार से ग्लोबल मार्केट में स्थिरता की उम्मीदें बढ़ गई हैं। 

क्या ट्रंप ‘लेमडक’ (Lame Duck) राष्ट्रपति बन गए हैं?

हालांकि अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के तहत दो बार राष्ट्रपति रह चुके ट्रंप 2028 का अगला राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकते। कार्यकाल का अंतिम दौर होने के कारण उनका राजनीतिक प्रभाव स्वाभाविक रूप से सीमित हो जाता है। कांग्रेस (संसद) पर अपनी पार्टी का पूर्ण नियंत्रण खोने के बाद अब ट्रंप अपनी इच्छानुसार कानून या बजट पारित नहीं करा पाएंगे। जब कोई राष्ट्रपति न तो अगला चुनाव लड़ सकता है और न ही संसद के जरिए मनचाही नीतियां पास करा सकता है, तो उसे राजनीतिक भाषा में ‘लेमडक’ कहा जाता है। ALSO READ: US Midterm Election: अमेरिका में ट्रंप को तगड़ा झटका, संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स भारी; जानें क्या बोले राष्ट्रपति?

ट्रंप की नीतियों पर क्या असर होगा?

डेमोक्रेटिक-नियंत्रित निचले सदन (House of Representatives) के चलते ट्रंप प्रशासन की टैक्स, आव्रजन (Immigration) और घरेलू आर्थिक नीतियों से जुड़े नए विधेयकों का पास होना बेहद कठिन हो जाएगा। बजट आवंटन को लेकर व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ सकता है, जिससे कई बार सरकारी कामकाज बंद होने की नौबत आ सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए कार्यकारी आदेशों और बजटीय वीटो पॉवर पर निर्भर रहना पड़ेगा।

क्या थम जाएगा ईरान युद्ध?

अमेरिकी संविधान के अनुसार सैन्य अभियानों के लिए फंड जारी करने का अधिकार संसद के पास है। डेमोक्रेट्स ईरान के खिलाफ किसी भी लंबे सैन्य अभियान या युद्ध के लिए फंड रोकने या सीमित करने के लिए विधायी दबाव बना सकते हैं। संसद की रक्षा और विदेश नीति समितियों द्वारा ट्रंप प्रशासन के फैसलों की कड़ी निगरानी और सुनवाई की जाएगी, जिससे आक्रामक सैन्य कदम उठाना ट्रंप के लिए कठिन होगा। ऐसी उम्मीद व्यक्त की जा रही है कि ट्रंप और नेतन्याहू की हार के बाद ईरान युद्ध थम सकता है। इससे दुनिया में होने वाली आर्थिक उथल-पुथल भी रुक सकती है। 

वैश्विक नीतियों पर हार का क्या असर पड़ेगा?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार (जैसे भारत, चीन या यूरोपीय संघ) पर एकतरफा कड़े टैरिफ लगाने के फैसलों को अमेरिकी संसद से कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों और जलवायु समझौतों पर अमेरिका के एकतरफा फैसलों पर संसद की ओर से संतुलन कायम करने का प्रयास होगा। घरेलू स्तर पर विधायी अड़चनों के कारण ट्रंप अपने कार्यकाल के बाकी समय में विदेश मामलों और कूटनीतिक वार्ताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

क्या ट्रंप के खिलाफ आ सकता है महाभियोग?

यदि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के पास बहुमत है, तो वे राष्ट्रपति पर संवैधानिक उल्लंघनों का आरोप लगाकर साधारण बहुमत से महाभियोग (Impeachment) का प्रस्ताव पास कर सकते हैं। महाभियोग पास होना एक बात है, लेकिन राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई (67 वोट) बहुमत की आवश्यकता होती है, जो कि डेमोक्रेट के पास नहीं है। सीनेट में दो-तिहाई वोट जुटाना बेहद मुश्किल होने के कारण ट्रंप को पद से हटाना कठिन होगा, भले ही महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो जाए। हालांकि ट्रंप के खिलाफ पिछले कार्यकाल में भी महाभियोग प्रस्ताव आ चुका है।

US Stock Futures: ट्रंप की हार से खुश अमेरिकी बाजार? शुरुआती गिरावट के बाद तगड़ा उछाल; GIFT Nifty भी 190 अंक चढ़ा

US Stock Futures: अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में बुधवार को जोरदार रिकवरी देखने को मिली। डेमोक्रेट्स की अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में बड़ी जीत के बाद बाजार में शुरुआत में भारी गिरावट आई थी।

हालांकि, बाद में निवेशकों का रुख बदल गया। Nasdaq 100 Futures अपने दिन के निचले स्तर से करीब 950 अंक संभले। Dow और S&P 500 Futures भी गिरावट से निकलकर तेजी में आ गए। GIFT Nifty में भी 190 अंक की बढ़त दर्ज हुई।

इस रिकवरी के पीछे अमेरिकी राजनीति को लेकर अनिश्चितता में कमी और बॉन्ड यील्ड में गिरावट अहम वजह रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव के नतीजे स्वीकार करने की बात कही। इससे बाजार को राहत मिली।

Nasdaq Futures में जोरदार रिकवरी

E-mini Nasdaq 100 Futures 28,555 पर कारोबार कर रहे थे। इसमें 250 अंक यानी 0.88% की तेजी आई। इससे पहले ये फ्यूचर्स 2.4% तक गिर गए थे।

E-mini Dow Futures 676 अंक यानी 1.3% बढ़कर 52,571 पर पहुंच गए। वहीं, E-mini S&P 500 Futures 67 अंक यानी 0.89% की बढ़त के साथ 7,664 पर कारोबार कर रहे थे। S&P 500 Futures पहले 1.4% तक गिर गए थे।

अमेरिकी चुनाव के नतीजों से क्यों घबराया बाजार?

डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इससे राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। निवेशकों को चिंता थी कि डेमोक्रेट्स के नियंत्रण में टेक कंपनियों पर सख्त नियम लागू हो सकते हैं। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश करने वाली कंपनियों पर असर पड़ने की आशंका थी।

हालांकि, बाद में निवेशकों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में गिरावट को ध्यान में रखा। इससे बाजार में रिकवरी आई।

GIFT Nifty 190 अंक उछला

अमेरिकी फ्यूचर्स में रिकवरी के साथ भारतीय बाजारों में भी तेजी जारी रही। GIFT Nifty 23,950 पर पहुंच गया। इसमें 190 अंक यानी 0.8% की बढ़त रही।

बुधवार को Sensex 383 अंक चढ़कर 77,301 पर बंद हुआ। Nifty 150 अंक बढ़कर 23,961 पर पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली। Nifty Midcap 100 में 1.55% और Nifty Smallcap 100 में 2% की तेजी आई।

US Midterm Elections : डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत, औंधे मुंह गिरे एलन मस्क के टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

US Midterm Elections : डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत, औंधे मुंह गिरे एलन मस्क के टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयर

US Midterm Elections : 2026 के अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत होने के बाद,आफ्टर-ऑवर्स ट्रेडिंग में एलन मस्क की कंपनियों टेस्ला और स्पेसएक्स के शेयरों में 1.8% की गिरावट आई है। इससे निवेशकों के बीच AI रेगुलेशन और संभावित विलय को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के शुरुआती नतीजों से डेमोक्रेट्स की निर्णायक जीत के संकेत मिलने लगे हैं। जिसके बाद रिपब्लिकन पार्टी के प्रमुख समर्थक एलन मस्क की कंपनियों टेस्ला इंक और स्पेस एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजीज कॉर्प के शेयरों में ‘आफ्टर-आवर्स’ट्रेडिंग के दौरान गिरावट आई।

मंगलवार को मतदान खत्म होने के बाद शुरुआती रुझानों में जॉर्जिया से सीनेटर जॉन ओसॉफ के फिर से जीतने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके बाद, पोस्ट-मार्केट ट्रेडिंग में दोनों कंपनियों के शेयरों में लगभग 1.8% की गिरावट आई। तब से,अलग-अलग शेयरों में ट्रेडिंग तो बंद हो गई है,लेकिन डेमोक्रेट्स की स्थिति और मजबूत हो गई है। ‘डिसीजन डेस्क एचक्यू’ (Decision Desk HQ) का अनुमान है कि डेमोक्रेटिक पार्टी अमेरिकी हाउस और सीनेट, दोनों पर अपना नियंत्रण बना सकती है।

जिन निवेशकों के पास इन दोनों में से किसी एक या दोनों कंपनियों के शेयर हैं, उनके लिए मध्यावधि चुनावों में ‘ब्लू वेव’ (डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत) एक दोहरा झटका साबित होगी। इससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कड़े नियमों को लेकर चिंताएं बढ़ेंगी और साथ ही इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी तथा रॉकेट, AI और सैटेलाइट सेक्टर की दिग्गज कंपनी के बीच संभावित विलय पर भी सवालिया निशान लग जाएगा।

फर्स्ट न्यूयॉर्क के विक्रम राय का कहना है कि भले ही कांग्रेस अकेले दम पर किसी समझौते को पूरी तरह रोक न सके, लेकिन मजबूत स्थिति वाले डेमोक्रेट्स इसे धीमा जरूर कर सकते हैं।

राय ने पिछले हफ्ते ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “अगर ‘ब्लू स्वीप’ (डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत) होती है, तो इन दोनों शेयरों पर जोखिम (हेडलाइन रिस्क) बढ़ सकता है।

जुलाई के आखिर में अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बाद से टेस्ला के शेयरों में 34% की तेजी आई है। इसके पीछे निवेशकों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोडक्ट्स को लेकर बना उत्साह और स्पेसएक्स के साथ संभावित विलय की संभावना है।

स्पेसएक्स इस साल की शुरुआत में लिस्ट होने के बाद दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो गई है। यह अमेरिकी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स के ज़रिए अरबों डॉलर कमाती है। जून में अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के बाद से कंपनी के शेयरों के भाव में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है और इसका मार्केट वैल्यूएशन 1.9 ट्रिलियन डॉलर के आसपास बना हुआ है।

अमेरिकी मिडटर्म में डेमोक्रेट्स का बड़ा उलटफेर! डॉलर-ट्रेजरी यील्ड धड़ाम, जानें भारतीय बाजार पर इसका क्या होगा असर

मिडटर्म चुनावों के करीब आते ही इन कंपनियों के कई विवादित मुद्दे सुर्खियों में आ गए। टेस्ला और स्पेसएक्स, AI की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इनके मेगा मर्जर प्लान को लेकर रेगुलेटरी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। स्टारलिंक सैटेलाइट सर्विस के मिलिट्री वर्जन तक पहुंच, अमेरिका-यूक्रेन और रूस के बीच तनाव का कारण बन गई है।

वोटिंग से पहले ही बाजार पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी थी कि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी का दबदबा मस्क के आचरण की जांच करने की उनकी क्षमता को मजबूत कर सकता है और संभावित समझौते में बाधा डाल सकता है।