क्या लेमडक बने डोनाल्ड ट्रंप? ईरान युद्ध और वैश्विक नीतियों पर पड़ेगा यह बड़ा असर, आ सकता है महाभियोग

क्या लेमडक बने डोनाल्ड ट्रंप? ईरान युद्ध और वैश्विक नीतियों पर पड़ेगा यह बड़ा असर, आ सकता है महाभियोग

US Midterm Elections 2026 Results

US Midterm Elections 2026 Results: अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के परिणामों ने वॉशिंगटन की सत्ता का गणित पूरी तरह बदल दिया है। संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत घटने और डेमोक्रेटिक पार्टी के मजबूत प्रदर्शन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इन चुनावों में अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटें, उच्च सदन सीनेट की 35 सीटें, गवर्नर के 36 पद और स्थानीय निकायों के कई पद शामिल थे।

 

दरअसल, ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए देश के मतदाताओं ने बहुचर्चित मध्यावधि चुनावों में विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी को संसद के उच्च सदन सीनेट का नियंत्रण सौंप दिया और डेमोक्रेट ने कई अहम राज्यों में गवर्नर पदों पर भी जीत दर्ज की। इन नतीजों का असर न केवल अमेरिका, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी देखने को मिल सकता है। रिपब्लिकन पार्टी को अपने मजबूत गढ़ माने जाने वाले टेक्सास, जॉर्जिया और आयोवा जैसे राज्यों में करारी हार का सामना करना पड़ा, जहां उसने डेमोक्रेटिक पार्टी के हाथों गवर्नर के पद गंवा दिए। हालांकि अंतिम परिणाम शेष हैं, लेकिन यह भी तय है कि ट्रंप ने दोनों ही सदनों में बहुमत खो दिया है। ALSO READ: ट्रंप की हार से भारत और भारतीयों को क्या-क्या होगा फायदा?

इसके अलावा टेक्सास, मेन, साउथ कैरोलिना, नॉर्थ कैरोलिना, कंसास और आयोवा में सीनेट की सीट पर भी पार्टी को झटका लगा। माना जा रहा है कि महंगा ईंधन, घरेलू महंगाई का असर रिपब्लिकन पार्टी को ले डूबा। ईरान युद्ध को लेकर भी अमेरिकी ट्रंप के साथ नहीं आए। इतना ही नहीं ट्रंप की हार से ग्लोबल मार्केट में स्थिरता की उम्मीदें बढ़ गई हैं। 

क्या ट्रंप ‘लेमडक’ (Lame Duck) राष्ट्रपति बन गए हैं?

हालांकि अमेरिकी संविधान के 22वें संशोधन के तहत दो बार राष्ट्रपति रह चुके ट्रंप 2028 का अगला राष्ट्रपति चुनाव नहीं लड़ सकते। कार्यकाल का अंतिम दौर होने के कारण उनका राजनीतिक प्रभाव स्वाभाविक रूप से सीमित हो जाता है। कांग्रेस (संसद) पर अपनी पार्टी का पूर्ण नियंत्रण खोने के बाद अब ट्रंप अपनी इच्छानुसार कानून या बजट पारित नहीं करा पाएंगे। जब कोई राष्ट्रपति न तो अगला चुनाव लड़ सकता है और न ही संसद के जरिए मनचाही नीतियां पास करा सकता है, तो उसे राजनीतिक भाषा में ‘लेमडक’ कहा जाता है। ALSO READ: US Midterm Election: अमेरिका में ट्रंप को तगड़ा झटका, संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेट्स भारी; जानें क्या बोले राष्ट्रपति?

ट्रंप की नीतियों पर क्या असर होगा?

डेमोक्रेटिक-नियंत्रित निचले सदन (House of Representatives) के चलते ट्रंप प्रशासन की टैक्स, आव्रजन (Immigration) और घरेलू आर्थिक नीतियों से जुड़े नए विधेयकों का पास होना बेहद कठिन हो जाएगा। बजट आवंटन को लेकर व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच टकराव बढ़ सकता है, जिससे कई बार सरकारी कामकाज बंद होने की नौबत आ सकती है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी प्राथमिकताओं को लागू करने के लिए कार्यकारी आदेशों और बजटीय वीटो पॉवर पर निर्भर रहना पड़ेगा।

क्या थम जाएगा ईरान युद्ध?

अमेरिकी संविधान के अनुसार सैन्य अभियानों के लिए फंड जारी करने का अधिकार संसद के पास है। डेमोक्रेट्स ईरान के खिलाफ किसी भी लंबे सैन्य अभियान या युद्ध के लिए फंड रोकने या सीमित करने के लिए विधायी दबाव बना सकते हैं। संसद की रक्षा और विदेश नीति समितियों द्वारा ट्रंप प्रशासन के फैसलों की कड़ी निगरानी और सुनवाई की जाएगी, जिससे आक्रामक सैन्य कदम उठाना ट्रंप के लिए कठिन होगा। ऐसी उम्मीद व्यक्त की जा रही है कि ट्रंप और नेतन्याहू की हार के बाद ईरान युद्ध थम सकता है। इससे दुनिया में होने वाली आर्थिक उथल-पुथल भी रुक सकती है। 

वैश्विक नीतियों पर हार का क्या असर पड़ेगा?

अंतरराष्ट्रीय व्यापार (जैसे भारत, चीन या यूरोपीय संघ) पर एकतरफा कड़े टैरिफ लगाने के फैसलों को अमेरिकी संसद से कानूनी और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों और जलवायु समझौतों पर अमेरिका के एकतरफा फैसलों पर संसद की ओर से संतुलन कायम करने का प्रयास होगा। घरेलू स्तर पर विधायी अड़चनों के कारण ट्रंप अपने कार्यकाल के बाकी समय में विदेश मामलों और कूटनीतिक वार्ताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

क्या ट्रंप के खिलाफ आ सकता है महाभियोग?

यदि प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के पास बहुमत है, तो वे राष्ट्रपति पर संवैधानिक उल्लंघनों का आरोप लगाकर साधारण बहुमत से महाभियोग (Impeachment) का प्रस्ताव पास कर सकते हैं। महाभियोग पास होना एक बात है, लेकिन राष्ट्रपति को पद से हटाने के लिए सीनेट में दो-तिहाई (67 वोट) बहुमत की आवश्यकता होती है, जो कि डेमोक्रेट के पास नहीं है। सीनेट में दो-तिहाई वोट जुटाना बेहद मुश्किल होने के कारण ट्रंप को पद से हटाना कठिन होगा, भले ही महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो जाए। हालांकि ट्रंप के खिलाफ पिछले कार्यकाल में भी महाभियोग प्रस्ताव आ चुका है।