10.22 करोड़ घरों तक पहुंचे RSS स्वयंसेवक, देश में 1.03 लाख स्थानों पर संघ का विस्तार

10.22 करोड़ घरों तक पहुंचे RSS स्वयंसेवक, देश में 1.03 लाख स्थानों पर संघ का विस्तार

dattatreya hosabale

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वार्षिक अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक 4 नवंबर को इंदौर में संपन्न हुई। बैठक के अंतिम दिन संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने पत्रकार वार्ता में शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों, संगठन के विस्तार, सेवा कार्यों और सामाजिक जागरण से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान संघ के कार्यकर्ता देशभर में 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचे। वहीं, देश में अब 1,03,397 स्थानों पर प्रत्यक्ष संघ कार्य हो रहा है।

 

सरकार्यवाह ने बताया कि बैठक में देशभर से आमंत्रित 406 कार्यकर्ताओं में से 398 उपस्थित रहे। प्रतिवर्ष दशहरा और दीपावली के बीच होने वाली इस बैठक में विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026 तक आयोजित शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा की गई। बैठक में पंच परिवर्तन को समाज के व्यवहार में प्रभावी रूप से लागू करने, शाखाओं के विस्तार और संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करने की आगामी योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
 

10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुंचा गृह संपर्क अभियान

संघ के शताब्दी वर्ष के तहत चलाए गए गृह संपर्क अभियान में स्वयंसेवकों ने देशभर के 4,63,340 गांवों और 41,825 नगरीय बस्तियों में संपर्क किया। इस अभियान के तहत कुल 10,22,05,665 घरों तक कार्यकर्ताओं की टोलियां पहुंचीं। सरकार्यवाह के अनुसार, कार्यकर्ताओं ने प्रत्येक घर में 15 से 20 मिनट बैठकर संघ की विचारधारा और उसकी 100 वर्षों की यात्रा के बारे में चर्चा की।

देशभर में 65,664 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन

शताब्दी वर्ष के दौरान सामाजिक समरसता, आपसी सहयोग और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से देशभर में 65,664 हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इनमें कुल 4,93,76,694 लोगों ने भाग लिया। इन कार्यक्रमों में सवा दो करोड़ से अधिक महिलाओं की सहभागिता रही। ये सम्मेलन 3,08,449 गांवों सहित 37,080 ग्रामीण मंडलों और 28,584 नगरीय बस्तियों में आयोजित किए गए। अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख और अंडमान जैसे क्षेत्रों में भी सम्मेलन हुए।

एक लाख से अधिक स्थानों पर संघ की गतिविधियां

सरकार्यवाह ने बताया कि देश में संघ की दैनिक शाखाओं की संख्या बढ़कर 99,423 हो गई है, जो 63,208 स्थानों पर संचालित हो रही हैं। पिछले वर्ष की तुलना में दैनिक शाखाओं में 12,025 की वृद्धि हुई है, जबकि शाखाओं के स्थानों की संख्या 8,156 बढ़ी है। इसके अलावा, 26,826 स्थानों पर 34,982 साप्ताहिक मिलन और 13,363 स्थानों पर 14,096 मासिक मंडलियां संचालित हो रही हैं। साप्ताहिक मिलन में 2,712 और मासिक मंडलियों में 463 की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

पिछले वर्ष देश में 93,156 स्थानों पर प्रत्यक्ष संघ कार्य हो रहा था, जो अब बढ़कर 1,03,397 स्थानों तक पहुंच गया है। संघ की भौगोलिक संगठनात्मक संरचना में भी बदलाव किया जाएगा। इसके तहत 46 प्रांतों के स्थान पर अब 88 संभाग बनाए जाएंगे।

38 लाख से अधिक युवाओं की कार्यक्रमों में सहभागिता

शताब्दी वर्ष में युवाओं को संगठन और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए 21,237 स्थानों पर 57,243 कार्यक्रम हुए, जिनमें 31,26,404 विद्यार्थियों ने भाग लिया। वहीं, युवा व्यवसायियों के लिए आयोजित 14,285 कार्यक्रमों में 6,90,835 युवाओं की सहभागिता रही। इस तरह दोनों श्रेणियों में कुल 38,17,239 युवाओं ने प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया। इसके अलावा, जिला केंद्रों और अन्य प्रमुख स्थानों पर 3,207 प्रमुख जन गोष्ठियां आयोजित की गईं, जिनमें 4,29,262 प्रमुख समाजजन शामिल हुए।

8,346 सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन

समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सहयोग, सद्भाव और भेदभाव रहित समाज निर्माण के उद्देश्य से देशभर में सामाजिक सद्भाव बैठकें आयोजित की गईं। कुल 5,028 ग्रामीण खंडों और 3,318 नगरों में 8,346 बैठकें हुईं। इनमें 36,916 महिलाओं सहित 3,79,581 समाज प्रमुखों ने भाग लिया।

प्राकृतिक आपदाओं में स्वयंसेवकों ने चलाए राहत अभियान

सरकार्यवाह ने विभिन्न राज्यों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्वयंसेवकों की ओर से किए गए सेवा कार्यों की भी जानकारी दी। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी में बाढ़ के बाद 350 स्वयंसेवकों ने प्रभावित शहरी और ग्रामीण परिवारों तक राहत किट पहुंचाई। इसके साथ ही 6,000 से अधिक लोगों के भोजन की स्थायी व्यवस्था की गई और 5,600 लोगों को चिकित्सा सहायता दी गई। पशुओं के टीकाकरण का भी प्रयास किया गया। लखनऊ क्षेत्र में अत्यधिक बारिश के कारण आई बाढ़ के दौरान 300 से अधिक स्वयंसेवकों ने प्रभावित परिवारों को भोजन, पानी, दवाइयां और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया।

 

असम के शिवसागर और जोरहाट जिलों में 1,600 से अधिक स्वयंसेवकों ने बाढ़ प्रभावित 42,200 परिवारों तक भोजन, पानी और दवाइयां पहुंचाईं। इस सेवा कार्य के लिए पांच करोड़ रुपये से अधिक की राशि एकत्र की गई। वहीं, चक्रवात के प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में कंधमाल, गंजाम, श्रीकाकुलम और विजयवाड़ा सहित प्रभावित इलाकों में स्वयंसेवक स्थानीय समाज के साथ मिलकर सहायता कार्य कर रहे हैं।

युवाओं को नशे से बचाने के लिए सामाजिक जागरूकता पर जोर

बैठक में युवाओं में बढ़ते नशे के प्रचलन पर भी चिंता जताई गई। सरकार्यवाह ने कहा कि नशीले पदार्थों से युवाओं को बचाने के लिए संघ सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से जागरूकता बढ़ाने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि नशे के अंतरराष्ट्रीय व्यापार और षड्यंत्र से युवाओं को बचाने के लिए प्रशासन और सरकार भी काम कर रही है। बैठक में नशे के विरुद्ध सामाजिक चेतना विकसित करने और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर काम करने की योजना पर विचार किया गया।

तीन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को किया याद

बैठक में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की ओर से तीन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान को लेकर वक्तव्य जारी किए गए।

राजनारायण बसु: उनकी 200वीं जयंती पर उनके सामाजिक और राष्ट्रीय योगदान को याद किया गया। उन्होंने निर्धनों के उत्थान, नशामुक्ति, महिला शिक्षा, विधवा पुनर्विवाह और स्वदेशी, स्वभाषा व स्वधर्म के संरक्षण के लिए प्रयास किए थे।

स्वामी श्रद्धानंद: उनके बलिदान के 100वें वर्ष पर उनके जीवन और शुद्धिकरण आंदोलन में योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी गई।

स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती : उनके जन्म के 100वें वर्ष के अवसर पर उनके जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वावलंबन, गोपालन, कृषि और जल संरक्षण के कार्यों का स्मरण किया गया।

तीन देशों के दौरे पर गए सरसंघचालक

सरकार्यवाह ने बताया कि अगस्त-सितंबर में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने तीन देशों का प्रवास किया। इस दौरान उन्होंने विश्व एकता और मानव एकता के लिए भारत का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख लोगों, विश्वविद्यालयों के विद्वानों और सामाजिक प्रतिनिधियों से संवाद किया। इस दौरान स्वामीनारायण मंदिर, खालसा गुरुद्वारा और जैन मंदिर में भी उनका जाना हुआ।

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सोशल मीडिया और मोबाइल के इस्तेमाल पर कही यह बात

पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने सोशल मीडिया पर अनावश्यक सामग्री के प्रसार को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि तकनीक को रोकना संभव नहीं है। यदि सोशल मीडिया पर अनावश्यक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए सरकार को सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व को साथ लेकर कानून बनाने की जरूरत हो तो आवश्यक निर्णय करना चाहिए।

 

उन्होंने परिवार में संस्कार और अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि मोबाइल छोड़कर परिवार के सदस्यों को एक साथ बैठकर सकारात्मक विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। परिवार में जीवन मूल्यों और सामाजिक संस्कारों को विकसित करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

जेन जी की आकांक्षाओं को समझने की जरूरत

लोकतंत्र और जेन जी से जुड़े सवाल पर सरकार्यवाह ने कहा कि देश में सत्ता परिवर्तन के लिए चुनाव की व्यवस्था है। अराजकता और अशांति के माध्यम से सत्ता परिवर्तन करना देश के हित में नहीं है।

उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के साथ सकारात्मक संवाद होना चाहिए। युवाओं की आकांक्षाओं को समझना और उनके भीतर आने वाले आक्रोश को सही दिशा देना जरूरी है। युवा ऊर्जा, सामाजिक संवेदना और सेवा भाव से युक्त होते हैं। उन्हें सकारात्मक कार्यों से जोड़ने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि अराजक शक्तियां देश में हावी न हों, इसके लिए समाज के अच्छे सोचने वाले लोगों को सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

महिलाओं की भागीदारी बढ़ने पर दिया जोर

संघ के पंजीयन से जुड़े सवाल पर होसबाले ने कहा कि संघ और समाज अलग-अलग नहीं हैं। पूरे समाज को संगठित करना ही संघ का कार्य है और संगठन संवैधानिक व्यवस्थाओं के अंतर्गत काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन और सामाजिक बदलाव से जुड़े कार्यों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ रही है। महिलाओं को छोड़कर समाज की कल्पना भी संभव नहीं है। संघ का कार्य अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, त्रिपुरा जैसे दुर्गम क्षेत्रों के साथ केरल और पश्चिम बंगाल जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी बढ़ रहा है।