8th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग जैसा फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहा, तो कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी? देखिए लेवल 1, 4, 6 और 10 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Salary Calculation: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज है। नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी में कितना उछाल आएगा, यह पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करता है।

अगर सरकार 8वें वेतन आयोग में भी 7वें वेतन आयोग की तरह 2.57 का फिटमेंट फैक्टर बरकरार रखती है, तो अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और कुल टेक-होम सैलरी में कितना अंतर आएगा, आइए समझते हैं इसका आसान गणित।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कैसे बढ़ती है बेसिक सैलरी?

फिटमेंट फैक्टर एक कॉमन मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का फॉर्मूला: 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

2.57 फिटमेंट फैक्टर का गणित: अगर 8वें वेतन आयोग में भी 2.57 का ही फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 7वें वेतन आयोग की बेसिक पे को सीधे 2.57 से मल्टीप्लाई कर नया बेसिक पे तय किया जाएगा।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

1. लेवल 1 (ग्रुप D/एमटीएस कर्मचारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹18,000 × 2.57): ₹46,260

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक पे में सीधे ₹28,260 प्रति महीने की बढ़ोतरी होगी। महंगाई भत्ता यानी DA घटने के बाद नए बेसिक पर री-कैल्कुलेट होगा।

2. लेवल 4 (लोअर डिविजन क्लर्क / LDC)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹25,500

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹25,500 × 2.57): ₹65,535

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक सैलरी में लगभग ₹40,035 प्रति महीने की सीधी वृद्धि देखने को मिलेगी।

3. लेवल 6 (असिस्टेंट / सीनियर क्लर्क / सब-इंस्पेक्टर)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹35,400

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹35,400 × 2.57): ₹90,978

सैलरी में बढ़ोतरी: इस लेवल के कर्मचारियों की बेसिक पे में ₹55,578 प्रति महीने का बड़ा उछाल आएगा।

4. लेवल 10 (ग्रुप A / क्लास 1 अधिकारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹56,100

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹56,100 × 2.57): ₹1,44,177

सैलरी में बढ़ोतरी: ग्रुप-ए अधिकारियों की बेसिक पे में सीधे ₹88,077 प्रति महीने की बंपर बढ़ोतरी होगी।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

भत्तों पर क्या पड़ेगा असर?

जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो केवल बेसिक सैलरी ही नहीं बदलती, बल्कि अन्य भत्तों का ढांचा भी पुनर्गठित होता है:

हाउस रेंट अलाउंस (HRA): नए बेसिक पे के आधार पर X, Y और Z श्रेणी के शहरों के हिसाब से HRA दोबारा तय किया जाएगा।

महंगाई भत्ता (DA): नया वेतन आयोग लागू होते ही मौजूदा DA शून्य (0%) कर दिया जाता है और नई बेसिक सैलरी पर फ्रेश तरीके से डीए की गणना शुरू होती है।

पेंशनभोगियों को फायदा: 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का सीधा लाभ 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन रिवीजन में भी मिलेगा।

कर्मचारी यूनियनें इस बार 2.86 से 3.25 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं, लेकिन अगर सरकार पिछले आयोग के 2.57 के फॉर्मूले को भी अपनाती है, तब भी कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में जबरदस्त इजाफा होगा।

Dhoot Transmission IPO: एंकर इनवेस्टर्स से मिले ₹918 करोड़, 10 अगस्त से खुलेगा इश्यू; ग्रे मार्केट में अभी से भागा शेयर

धूत ट्रांसमिशन लिमिटेड का ₹3,066.89 करोड़ का IPO 10 अगस्त को खुलने जा रहा है। इससे पहले एंकर बुक में कंपनी ने ₹918.3 करोड़ जुटाए हैं। BSE की वेबसाइट पर अपलोड किए गए एक सर्कुलर के अनुसार, कंपनी ने 72 एंकर इनवेस्टर्स को ₹871 प्रति शेयर के भाव पर 1.05 करोड़ से ज्यादा इक्विटी शेयर अलॉट किए। घरेलू म्यूचुअल फंड्स का हिस्सा सबसे बड़ा रहा। 12 फंड हाउसेज ने 46 स्कीमों के जरिए निवेश किया। उन्हें 64.59 लाख इक्विटी शेयर अलॉट किए गए।

एंकर बुक में कई घरेलू और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स ने हिस्सा लिया। इनमें SBI म्यूचुअल फंड (MF), ICICI प्रूडेंशियल MF, HDFC MF, ICICI प्रूडेंशियल AMC, निप्पॉन इंडिया MF, फ्रैंकलिन टेंप्लेटन, टाटा MF, इनवेस्को MF, HSBC MF, PGIM इंडिया MF, सुंदरम MF, व्हाइटओक, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी, ब्लैकरॉक, एक्सिस MF, मिरे एसेट, अमंडी फंड्स, आलियांज ग्लोबल इनवेस्टर्स, गवर्नमेंट पेंशन फंड, SBI लाइफ इंश्योरेंस, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, बजाज आलियांस लाइफ इंश्योरेंस, HDFC लाइफ इंश्योरेंस और एक्सिस मैक्स लाइफ इंश्योरेंस जैसे नाम शामिल हैं।

धूत ट्रांसमिशन लिमिटेड भारत की प्रमुख इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स (E&E) कंपनियों में से एक है। यह कंपनी ऑटोमोटिव और नॉन-ऑटोमोटिव इस्तेमाल के लिए वायरिंग हार्नेस और इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम की डिजाइन, इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई का काम करती है। कंपनी के पास कई तरह के प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें वायरिंग हार्नेस, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलर, ऑटोमोटिव स्विच, बैटरी पैक, टर्मिनल, कनेक्टर, केबल और पावर सप्लाई कॉर्ड शामिल हैं। ये प्रोडक्ट्स इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) दोनों तरह के प्लेटफॉर्म के लिए उपलब्ध हैं। कंपनी के प्रोडक्ट टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर, कमर्शियल व्हीकल, ऑफ-रोड व्हीकल, अर्थ मूवर, खेती के उपकरण, मेडिकल डिवाइस और घरेलू उपकरणों के लिए इस्तेमाल होते हैं।

IPO में ₹1,400 करोड़ के नए शेयर

धूत ट्रांसमिशन के IPO में ₹1,400 करोड़ के 1.61 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹1,666.89 करोड़ के 1.91 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में प्रमोटर्स- BC एशिया इनवेस्टमेंट्स XV लिमिटेड और मंगलम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड शेयरों को बिक्री के लिए रखेंगे। BC एशिया इनवेस्टमेंट्स XV लिमिटेड, प्राइवेट इक्विटी फर्म बेन कैपिटल की एक एंटिटी है। प्राइस बैंड ₹829-₹871 प्रति शेयर और लॉट साइज 17 शेयर है। IPO के 12 अगस्त को बंद होने के बाद अलॉटमेंट 13 अगस्त को फाइनल होगा। कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 17 अगस्त को लिस्ट होने की उम्मीद है।

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IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

कंपनी अपने IPO में नए शेयर जारी कर जुटाई गई राशि का इस्तेमाल अपना और अपनी सब्सिडियरी कंपनियों का कर्ज चुकाने, हरियाणा के झज्जर और तमिलनाडु के होसुर में वायरिंग हार्नेस मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने, पहले से न पता अधिग्रहणों और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च करेगी। IPO में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। ग्रे मार्केट में धूत ट्रांसमिशन का शेयर अभी से 28.36 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Dhoot Transmission की वित्तीय सेहत

धूत ट्रांसमिशन का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 31 प्रतिशत बढ़कर ₹4,563.70 करोड़ हो गया। एक साल पहले रेवेन्यू ₹3,472.24 करोड़ था। शुद्ध मुनाफा 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ ₹396.84 करोड़ रहा, जो वित्त वर्ष 2025 में ₹353.89 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर ₹841.39 करोड़ की उधारी थी। इस IPO के​ लिए एक्सिस कैपिटल, जेफरीज इंडिया, कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, नोमुरा फाइनेंशियल एडवाइजरी एंड सिक्योरिटीज (इंडिया), SBI कैपिटल मार्केट्स और 360 ONE WAM बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

क्या मौजूदा EMIs से आपको पर्सनल लोन मिलने की संभावना कम हो जाती है?

पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते समय आपकी मौजूदा EMIs काफी मायने रखती है, जो आपके फाइनैंशियल प्रोफाइल का सबसे अहम हिस्सा है। इनसे पता चलता है कि आपकी हर महीने की कमाई का कितना हिस्सा पहले से ही लोन चुकाने में जा रहा है, जिससे लोन देने वाले संस्थान यह तय करते हैं कि आप एक नई EMI आसानी से चुका पाएँगे या नहीं। पुरानी EMI का बोझ ज़्यादा होने से आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कम हो सकती है, मिलने वाले लोन की रकम घट सकती है, या लोन चुकाने की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

हालाँकि, पहले से लोन होने का मतलब यह नहीं है कि आपको लोन मिल ही नहीं सकता। लोन लेने वाले संस्थान फैसला लेने से पहले कई बातों पर गौर करते हैं, जिनमें आपकी इनकम, क्रेडिट स्कोर, नौकरी की स्थिरता, लोन चुकाने का पिछला रिकॉर्ड और आपकी बाकी की देनदारियां शामिल हैं।

अगर आप पर्सनल लोन लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि मौजूदा EMI आपकी एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं, जिससे आपको ज़िम्मेदारी से लोन लेने और आपके लिए सही लोन मिलने की संभावनाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।

मौजूदा EMI आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर कैसे असर डालती हैं?

आपकी हर महीने की EMI से आपकी मौजूदा आर्थिक देनदारियों का पता चलता है। जब आप पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो लोन देने वाले संस्थान आपकी इनकम के साथ-साथ इन देनदारियों को भी देखते हैं, उसके आधार पर तय करते हैं कि आप एक और लोन आसानी से चुका पाएंगे या नहीं।

वे आमतौर पर नीचे दी गई बातों पर गौर करते हैं:

  • महीने की इनकम
  • महीने का खर्च
  • शहर
  • जन्म तिथि

अगर आपके महीने की इनकम का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा EMI चुकाने में खर्च हो जाता है, तो इसकी वजह से लोन चुकाने की आपकी क्षमता कम हो जाती है। ऐसे में, लोन देने वाले संस्थान आपकी फाइनैंशियल प्रोफाइल के आधार पर आपको कम लोन दे सकते हैं या लोन चुकाने की समय-सीमा बदल सकते हैं।

लोन देने वाले संस्थान मौजूदा EMI पर क्यों गौर करते हैं?

लोन देने वाले संस्थान यह पक्का करना चाहते हैं कि ग्राहक किसी आर्थिक दबाव के बिना आसानी से लोन चुका सकें। मौजूदा EMI से उन्हें आपके मौजूदा लोन की जानकारी मिलती है और वे यह तय कर पाते हैं कि आपके लिए एक और लोन लेना सही रहेगा या नहीं।

लोन चुकाने से जुड़ी अपनी देनदारियों पर अच्छी तरह गौर करने से ज़िम्मेदारी से लोन लेने को बढ़ावा मिलता है और समय पर भुगतान न हो पाने का जोखिम भी कम होता है।

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर कैसे मदद कर सकता है?

पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर में दी गई आर्थिक जानकारी के आधार पर आप मिलने वाले लोन की रकम का अंदाजा लगा सकते हैं।

आमतौर पर, इसमें आपको कुछ जानकारी भरनी होती है जैसे कि:

• महीने की इनकम

• मौजूदा EMIs

• रोज़गार का प्रकार

• लोन की पसंदीदा समय-सीमा

यह कैलकुलेटर कुछ ही सेकंड में बता देता है कि आपको कितना लोन मिल सकता है। हालाँकि यह नतीजा सिर्फ़ एक अंदाज़ा होता है, लेकिन लोन के लिए आवेदन करने से पहले पैसों का हिसाब-किताब लगाने में इससे काफी मदद मिलती है।

कौन-सी बातें आपकी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी पर असर डालती हैं?

मौजूदा EMI तो बस मूल्यांकन का एक हिस्सा हैं। लोन देने वाले संस्थान पर्सनल लोन को मंजूरी देने से पहले दूसरी कई बातों पर भी गौर करते हैं।

महीने की इनकम

आम तौर पर, ज़्यादा और स्थिर इनकम से आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर होती है, जिससे आपकी एलिजिबिलिटी भी बढ़ सकती है।

क्रेडिट स्कोर

अच्छा क्रेडिट स्कोर लोन के संबंध में आपके ज़िम्मेदारी भरे रवैये को दिखाता है। अगर आप अपने EMI और बिल का समय पर भुगतान करते हैं तो आपको अपने क्रेडिट प्रोफाइल को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

नौकरी में स्थिरता

नौकरीपेशा या अपना रोजगार करने वाले जिन लोगों की इनकम में स्थिरता है और लगातार नौकरी का रिकॉर्ड भी बेहतर है तो ऐसे लोगों को लोन मिलने की संभावना थोड़ी ज्यादा होती है।

लोन की समय-सीमा

लोन चुकाने के लिए लंबी समय-सीमा चुनने से आपकी महीने की EMI कम हो सकती है, हालाँकि इससे पूरे लोन के दौरान कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज़ चुकाना पड़ सकता है।

मौजूदा आर्थिक देनदारियाँ

लोन की EMI के अलावा, लोन देने वाले संस्थान आपके लोन चुकाने की क्षमता का अंदाजा लगाते समय आपकी कुल आर्थिक देनदारियों पर भी गौर कर सकते हैं।

क्या आप अपनी पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी को बेहतर बना सकते हैं?

भले ही एलिजिबिलिटी कई बातों पर निर्भर करती है, पर लोन के लिए आवेदन करने से पहले आप अपने फाइनैंशियल प्रोफाइल को और बेहतर बना सकते हैं।

आप इन बातों को ध्यान में रख सकते हैं:

•अपने मौजूदा EMIs का समय पर भुगतान करना

• जहां तक हो सके, बकाया लोन कम करना

• थोड़े समय के भीतर बार-बार लोन के लिए आवेदन करने से बचना

• अच्छा क्रेडिट स्कोर बनाए रखना।

• लोन चुकाने के लिए सही समय-सीमा चुनना

• सिर्फ़ उतनी ही रक़म के लिए आवेदन करना जिसकी आपको असल में ज़रूरत हो

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से न सिर्फ़ आपकी एलिजिबिलिटी बेहतर होती है, बल्कि आपको लोन चुकाने में भी आसानी होती है।

पर्सनल लोन फाइनेंसिंग का सुविधाजनक विकल्प क्यों है?

पर्सनल लोन बेहद सुविधाजनक होता है, क्योंकि इसके लिए कोलेटरल की जरूरत नहीं होती और इसका उपयोग पहले से तय या अचानक सामने आने वाले कई तरह के खर्चों के लिए किया जा सकता है।

आप निम्नलिखित कामों के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं:

• मेडिकल इमरजेंसी

• आगे की पढ़ाई

• शादी का खर्च

• घर की मरम्मत

• ट्रैवल का खर्च

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन में 40,000 रुपये से लेकर 55 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, जिसे चुकाने के लिए 12 महीने से 108 महीने तक की समय-सीमा मिलती है। आपकी एलिजिबिलिटी और क्रेडिट प्रोफ़ाइल के आधार पर ब्याज़ दरें सालाना 10% से 30.5% के बीच हो सकती हैं। इस लोन के लिए किसी कोलेटरल की जरूरत नहीं पड़ती है, तुरंत मंजूरी मिल जाती है, कागजी कार्रवाई कम होती है और लोन की शर्तों को पूरा करने वाले लोगों को 24 घंटे के भीतर पैसे मिल जाते हैं।

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए कौन-कौन आवेदन कर सकते हैं?

आपकी एलिजिबिलिटी लोन देने वाले संस्थान के नियमों और आपकी आर्थिक स्थिति पर निर्भर करता है। आम तौर पर, लोगों की एलिजिबिलिटी जांचने के लिए इन बातों को देखा जाता है:

 

राष्ट्रीयताभारतीय
उम्र21 साल से 80 साल तक
नौकरीपब्लिक, प्राइवेट या MNC
CIBIL स्कोर650 या उससे ज्यादा
ग्राहक का प्रोफाइलखुद का रोजगार या नौकरीपेशा

लोन की समय-सीमा पूरी होने पर आपकी उम्र 80 साल या उससे कम होनी चाहिए

लोन पाने की शर्तें पूरी करने से लोन मंजूरी मिलने की गारंटी नहीं मिलती, क्योंकि हर आवेदन का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है।

आमतौर पर किन दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है?

बजाज फाइनैंस पर्सनल लोन के लिए बहुत कम दस्तावेज़ों की ज़रूरत होती है। यहाँ उन दस्तावेज़ों की सूची दी गई है जिनकी आवेदन के समय ज़रूरत होती है:

दस्तावेज़ों की श्रेणीमान्य विकल्प
KYC संबंधी दस्तावेज आधार/पासपोर्ट/मतदाता पहचान पत्र/ड्राइविंग लाइसेंस/ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का पत्र/ NREGA जॉब कार्ड
पहचान संबंधी दस्तावेजPAN कार्ड, वास्तविक समय की तस्वीर/फोटो
रोज़गार संबंधी दस्तावेज कर्मचारी पहचान पत्र, नौकरी देने वाली कंपनी द्वारा जारी आवास आवंटन पत्र
इनकम प्रूफ  पिछले 3 महीनों की सैलरी स्लिप, पिछले 3 महीनों का बैंक अकाउंट स्टेटमेंट
अन्य पेंशन ऑर्डर, आवश्यक सेवाओं के बिल, फ़ोन बिल, पाइप्ड गैस बिल, प्रॉपर्टी या नगरपालिका की टैक्स रसीद

लोन चुकाने के विकल्प बेहतर फाइनैंशियल प्लानिंग में कैसे मदद करते हैं?

  • लोन चुकाने की सही समय-सीमा चुनना आपके महीने के बजट को अच्छी तरह संभालने में अहम भूमिका निभाता है।
  • लोन चुकाने की समय सीमा काम हो ने से कुल ब्याज़ तो कम हो सकता है, लेकिन आपकी मासिक EMI बढ़ सकती है। वहीं, लोन चुकाने की लंबी समय-सीमा से आपके महीने की EMI कम हो सकती है, क्योंकि इसमें लोन चुकाने का समय बढ़ जाता है।
  • पर्सनल लोन के लिए आवेदन करने से पहले, अपनी महीने की इनकम, मौजूदा EMI और अपने आर्थिक लक्ष्यों पर जरूर गौर करें ताकि आप अपने बजट के हिसाब से लोन चुकाने का सही विकल्प चुन सकें।
  • ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • पर्सनल लोन लेने से आपको अपने आर्थिक लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलनी चाहिए, न कि आप पर बेवजह का आर्थिक दबाव पड़ना चाहिए।

लोन लेने से पहले:

• अपनी हर महीने की लोन चुकाने की क्षमता का सही अंदाज़ा लगाएं

• सिर्फ़ उतनी ही रकम लोन लें जितनी आपको ज़रूरत हो

• सभी EMI का भुगतान समय पर करते रहें

• अपनी लोन लेने की क्षमता का अंदाज़ा लगाने के लिए पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें

• ऑफ़र मान लेने से पहले लोन की शर्तों को ध्यान से पढ़ें

ज़िम्मेदारी से लोन लेने से आपको अपनी आर्थिक ज़िम्मेदारियों को बेहतर ढंग से पूरा करने के साथ-साथ एक अच्छा क्रेडिट प्रोफ़ाइल बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

मौजूदा EMIs आपके पर्सनल लोन की एलिजिबिलिटी तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं, क्योंकि ये आपकी हर महीने लोन चुकाने की क्षमता पर असर डालती हैं। आपकी इनकम, क्रेडिट प्रोफ़ाइल, नौकरी की स्थिरता और लोन चुकाने के पिछले रिकॉर्ड के साथ-साथ, ये लोन देने वाले संस्थानों को यह समझने में मदद करती हैं कि आप ज़िम्मेदारी से कितना लोन ले सकते हैं। आवेदन करने से पहले पर्सनल लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर का इस्तेमाल करने से आपको एक अंदाज़ा मिलता है और आप भरोसे के साथ अपने फ़ाइनेंस की योजना बना पाते हैं।

नियम व शर्तें लागू

Retirement Planning: क्या सिर्फ पोस्ट ऑफिस स्कीम के भरोसे आपका रिटायरमेंट सुरक्षित होगा? 8.2% रिटर्न देने वाली योजना की लिमिटेशन भी जानिए

Retirement Planning:  जीवन के पड़ाव में रिटायरमेंट एक ऐसा समय होता है जब पहली बार नियमित वेतन आना बंद हो जाता है। इसके बाद सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वर्षों की अपनी जमा-पूंजी और बचत को अगले 20 या 30 सालों तक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से कैसे चलाया जाए। ऐसी स्थिति में अगर पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाएं सेवानिवृत्त लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं है। पोस्ट ऑफिस की योजनाएं पूरी तरह से भारत सरकार द्वारा समर्थित हैं और इनमें निवेश करने के बाद निवेशकों को रोजाना शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की जरूरत नहीं पड़ती है।

हालांकि, रिटायरमेंट प्लानिंग का मतलब सिर्फ पैसों को सुरक्षित जगह पर रखना भर नहीं होता है। बावजूद इसके कि सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों के लिए पोस्ट ऑफिस योजनाएं एक महत्वपूर्ण विकल्प बनी हुई हैं, लेकिन वे तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब वे एक बड़ी और व्यापक फाइनेंशियल प्लानिंग की जाए। अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा वहां लगाने से पहले, यह समझना भी बेहद जरूरी है कि आप अपनी बचत का कैसा इस्तेमाल चाहते हैं।

क्या सिर्फ सुरक्षित होना काफी है?

अधिकांश सेवानिवृत्त लोग असाधारण रिटर्न पाने के पीछे नहीं भागते हैं। वे आमतौर पर यह भरोसा चाहते हैं कि जब भी उन्हें जरूरत हो उनकी बचत सुरक्षित और उपलब्ध रहे। इस मामले में पोस्ट ऑफिस की योजनाएं बेहतरीन साबित होती हैं। सरकार समर्थित होने की वजह से इनमें एक तय अवधि के लिए मिलने वाला रिटर्न पहले से पता होता है। जो लोग बाजार के जोखिमों से डरते हैं, उनके लिए यह निश्चितता काफी राहत देने वाली होती है। लेकिन रिटायरमेंट सिर्फ पैसे की रक्षा करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने के बारे में भी है कि आपका पैसा समय के साथ आपके लिए काम करता रहे।

विभिन्न जरूरतें और पोस्ट ऑफिस की प्रमुख योजनाएं

हर पोस्ट ऑफिस निवेश योजना एक ही उद्देश्य को पूरा नहीं करती है। कुछ स्कीम नियमित इनकम देने के लिए बनाई गई हैं, जबकि अन्य लंबी अवधि की बचत के लिए बेहतर हैं।

सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम: 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए यह एक सुरक्षित 5-वर्षीय सरकारी जमा योजना है। इस पर वर्तमान में 8.2 प्रतिशत प्रति वर्ष की उच्च ब्याज दर के साथ तिमाही भुगतान मिलता है। इस खाते में न्यूनतम 1000 रुपये के मल्टिपल में ही जमा किया जा सकता है और अधिकतम निवेश की सीमा 30 लाख रुपये से अधिक नहीं हो सकती।

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम (POMIS): यह भी 5 साल की एक निवेश योजना है जिसमें एकल (Single) या संयुक्त (Joint) खाता खोला जा सकता है। यह 7.4 प्रतिशत प्रति वर्ष की ब्याज दर पर गारंटीकृत मासिक आय प्रदान करती है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): इंडिया पोस्ट आम जनता के लिए कोई एक्सक्लूसिव रिटायरमेंट पेंशन तो खुद नहीं देता, लेकिन यह एनपीएस जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं के लिए ऑथराइज डिस्ट्रिब्यूटर के रूप में काम करता है। 18 से 70 वर्ष की आयु के नागरिकों के लिए यह एक स्वैच्छिक, बाजार से जुड़ी योजना है। इसमें काम करने के दौरान नियमित योगदान दिया जाता है और 60 वर्ष की आयु पर जमा राशि का एक हिस्सा कर-मुक्त निकाला जा सकता है, जबकि शेष राशि से मासिक एन्युटी (खरीदी जाती है।

अटल पेंशन योजना (APY): 18 से 40 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को टारगेटेट यह एक गारंटीकृत पेंशन योजना है। इसमें अंशदान के स्तर के आधार पर 60 वर्ष की आयु से 1000 रुपये से लेकर 5000 रुपये तक की निश्चित मासिक पेंशन मिलती है।

बेहतर विकल्प का चुनाव केवल ब्याज दर पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने मासिक खर्चों को कैसे पूरा करने की योजना बनाते हैं।

पूरा फंड एक जगह न लॉक करें: लिक्विडिटी का रखें ध्यान

सुरक्षित महसूस होने वाले प्रॉडक्ट्स में अपनी पूरी रिटायरमेंट पूंजी निवेश कर देना लुभावना लग सकता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जिंदगी में योजना के मुताबिक सब कुछ चलना मुश्किल होता है। कोई मेडिकल इमरजेंसी, घर की मरम्मत या परिवार के किसी सदस्य की अचानक आर्थिक मदद करने जैसी स्थितियों में तुरंत कैश (नकद) की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अगर आपका एक-एक रुपया तय अवधि वाले फिक्स्ड-टेन्योर निवेशों में बंधा होगा, तो कम समय में पैसे का इंतजाम करना काफी कठिन हो सकता है।

महंगाई दर पर ध्यान देना है बेहद जरूरी

सेवानिवृत्ति के बाद आपके खर्चे साल-दर-साल एक समान नहीं रहते हैं। स्वास्थ्य सेवा का खर्च, बिजली के बिल और दैनिक घरेलू सामान समय के साथ महंगे होते जाते हैं। अगर आपकी पूरी रिटायरमेंट पूंजी दशकों तक केवल फिक्स्ड रिटर्न ही कमाती है, तो समय के साथ आपकी पर्चेजिंग पावर धीरे-धीरे कमजोर हो सकती है। यही वजह है कि कई रिटायर्ड लोग अपनी बचत का कम से कम एक हिस्सा ऐसे निवेशों में रखते हैं जो जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर लंबी अवधि में महंगाई को मात देने वाला बेहतर ग्रोथ दे सकें।

आपकी रिटायरमेंट आय का स्रोत तय करेगा सही रणनीति

जिस व्यक्ति को पर्याप्त पेंशन मिल रही है, उसका निवेश का तरीका उस व्यक्ति से अलग हो सकता है जो पूरी तरह से अपनी बचत पर ही निर्भर है। अगर आपकी पेंशन, किराया या अन्य निवेश पहले से ही अधिकतर मासिक खर्चों को कवर कर रहे हैं तो पोस्ट ऑफिस की योजनाएं आपके पोर्टफोलियो का सिर्फ एक हिस्सा बन सकती हैं। लेकिन अगर आपकी जमा पूंजी ही आपकी आय का प्राथमिक जरिया है तो सही प्रॉडक्ट्स का मिश्रण चुनना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

सिर्फ ब्याज दरों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय, यह अनुमान लगाकर शुरुआत करें कि आपको वास्तव में हर महीने कितने पैसे की आवश्यकता होगी। पोस्ट ऑफिस बचत योजनाएं भारत में सबसे भरोसेमंद रिटायरमेंट निवेशों में से एक हैं और जीवन के उस मोड़ पर स्थिरता प्रदान करती हैं जब वित्तीय निश्चितता का मूल्य सबसे अधिक होता है। फिर भी उन्हें आपके पूरे रिटायरमेंट कॉर्पस का एकमात्र ठिकाना नहीं बनना चाहिए। एक अच्छी तरह से नियोजित रिटायरमेंट में आमतौर पर भरोसेमंद आय, आसानी से उपलब्ध बचत (लिक्विडिटी) और बढ़ते खर्चों के साथ तालमेल बिठाने वाले निवेश का सही संतुलन शामिल होता है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

8th Pay Commission: नया वेतन आयोग कब लागू होगा, कितना एरियर मिलेगा? समझिए पूरा हिसाब

8th Pay Commission: केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग का ऐलान कर चुकी है। आयोग का गठन भी हो चुका है। जस्टिस रंजन देसाई इसकी अध्यक्ष हैं। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स पर पड़ेगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई सैलरी कब से मिलेगी और कितनी बढ़ेगी।

फिलहाल सरकार ने लागू होने की तारीख नहीं बताई है। लेकिन कई रिपोर्ट्स का अनुमान है कि आयोग की सिफारिशें जनवरी 2026 की बजाय 2027 के आखिर या 2028 की शुरुआत में लागू हो सकती हैं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों के लिए एक अच्छी खबर भी हो सकती है।

देरी हुई, तो एरियर भी बढ़ेगा

सरकार ने आयोग को रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय दिया है। इसके बाद रिपोर्ट की समीक्षा और मंजूरी में भी कुछ महीने लग सकते हैं। अगर सरकार 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानती है, लेकिन लागू 2028 में करती है, तो कर्मचारियों को दो साल का एरियर एक साथ मिल सकता है। यानी इंतजार लंबा होगा, लेकिन रकम भी बड़ी मिल सकती है।

आयोग फिलहाल कर्मचारी संगठनों, पेंशनर्स और दूसरे हितधारकों से सुझाव ले रहा है। रिपोर्ट तैयार करने से पहले देश के अलग-अलग शहरों में बैठकें भी हो रही हैं।

सैलरी कितनी बढ़ सकती है?

Ambit Capital समेत कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में 30% से 34% तक बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल यह सिर्फ अनुमान है। अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों के बाद ही होगा।

इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा आधार फिटमेंट फैक्टर होगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। सबसे ज्यादा चर्चा 2.28 फिटमेंट फैक्टर की है। नई सैलरी तय करने से पहले मौजूदा महंगाई भत्ता (DA) बेसिक पे में मर्ज किया जाएगा। हर वेतन आयोग में यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।

एक उदाहरण से समझिए

अब मान लीजिए किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है। DA और दूसरे भत्ते जोड़ने के बाद उसकी ग्रॉस सैलरी करीब ₹35,000 बनती है।

अगर नई सैलरी में 34% की बढ़ोतरी होती है, तो उसकी ग्रॉस सैलरी करीब ₹46,900 हो सकती है। यानी हर महीने करीब ₹11,900 ज्यादा मिल सकते हैं।

अलग-अलग बेसिक पे पर संभावित बढ़ोतरी

मौजूदा बेसिक पेअनुमानित मासिक बढ़ोतरी (34%)
24 महीने का संभावित एरियर

₹18,000₹11,900₹2.85 लाख
₹25,500₹16,800₹4.03 लाख
₹35,400₹23,300₹5.59 लाख
₹44,900₹29,600₹7.10 लाख
₹56,100₹37,000₹8.88 लाख

नोट: यह सिर्फ अनुमानित कैलकुलेशन है। वास्तविक रकम फिटमेंट फैक्टर, DA मर्जर और सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

फिर एरियर कितना बनेगा?

मान लीजिए नई सैलरी जनवरी 2028 में लागू होती है, लेकिन प्रभावी तारीख 1 जनवरी 2026 रहती है। ऐसे में एरियर का हिसाब कुछ इस तरह होगा।

  • हर महीने संभावित बढ़ोतरी: ₹11,900
  • एरियर की अवधि: 24 महीने
  • कुल संभावित एरियर: करीब ₹2.85 लाख

यानी सबसे निचले पे लेवल वाले कर्मचारी को भी करीब ₹2.8 से 3 लाख तक एरियर मिल सकता है। जिनकी बेसिक सैलरी ज्यादा है, उनका एरियर इससे काफी अधिक हो सकता है। हालांकि, अगर सरकार 8वां वेतन आयोग 2026 से ही लागू कर देती है, तो एरियर इसका आधा ही मिलेगा।

अब कर्मचारी किन बातों पर नजर रखें?

सबसे पहले फिटमेंट फैक्टर पर। क्योंकि इसी से नई बेसिक सैलरी तय होगी। दूसरी सबसे अहम चीज है लागू होने की तारीख। अगर सरकार बैकडेट से लागू करती है, तो एरियर की रकम काफी बढ़ जाएगी।

इसके अलावा बजट में वेतन और एरियर के लिए कितना पैसा रखा जाता है और DA को नए वेतन ढांचे में किस तरह मर्ज किया जाता है, इस पर भी नजर रखना जरूरी होगा। तब तक कर्मचारियों को मौजूदा नियमों के मुताबिक DA और DR मिलता रहेगा। 8वें वेतन आयोग से जुड़ी अंतिम तस्वीर आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘UPI पेमेंट के लिए ग्राहकों पर कोई चार्ज नहीं लगेगा’, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त को स्पष्ट किया कि अगर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होता है, तो इसका असर सिर्फ व्यापारियों (Merchants) पर होगा। आम UPI यूजर्स से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि MDR से बैंकों और फिनटेक कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और सुरक्षा पर ज्यादा निवेश करने में मदद मिलेगी। इसका फायदा आखिरकार सभी UPI यूजर्स को मिलेगा।

अभी MDR पर अंतिम फैसला नहीं

निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI पर MDR लागू होगा या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। यह फैसला UPI और NPCI की सर्विसेज स्टीरिंग कमेटी करेगी।

उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया तभी आगे बढ़ेगी, जब संसद टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पारित करेगी। इस बिल में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है।

कांग्रेस ने क्या कहा था?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया था कि नया विधेयक UPI ट्रांजैक्शन को फीस-मुक्त रखने वाली कानूनी गारंटी को खत्म कर देगा। उनके मुताबिक, इससे भविष्य में सभी तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का रास्ता खुल सकता है और इसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा था कि आम लोगों को भविष्य में UPI इस्तेमाल करने के लिए भी शुल्क देना पड़ सकता है।

वित्त मंत्री ने दावे को बताया गलत

निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के दावों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दों पर संसद के भीतर रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए, न कि गलतफहमियां फैलानी चाहिए। उनके मुताबिक, फिलहाल ऐसा कोई फैसला नहीं हुआ है जिससे UPI यूजर्स पर कोई शुल्क लगाया जाए।

RBI गवर्नर ने क्या कहा था

UPI पर MDR को लेकर बहस RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयान के बाद तेज हुई। इसमें  उन्होंने कहा कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने की एक लागत होती है और किसी न किसी को इसका बोझ उठाना होगा। हालांकि, उन्होंने साफ संकेत नहीं दिया था कि इसका बोझ कौन उठाएगा।

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Firstsource Solutions Q1 Results: नतीजों के बाद शेयर 16% टूटा, मुनाफा 19% गिरा, रेवेन्यू और मार्जिन का अनुमान बरकरार

Firstsource Solutions Q1 Results: सॉफ्टवेयर एंड आईटी सेक्टर की कंपनी फर्स्टसोर्स सोल्युशंस (Firstsource Solutions) ने अपने तिमाही नतीजे घोषित कर दिए है। नेट प्रॉफ़िट 19% गिरकर ₹166 करोड़ हो गया, जो पहले ₹205 करोड़ था। नतीजों के ऐलान के बाद शेयर 16 फीसदी से ज्यादा टूटा।

कंपनी ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए, Firstsource ने अपने कॉन्स्टेंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ का अनुमान 10% से 13% के बीच बनाए रखा है, जबकि EBIT मार्जिन 12.25% से 12.75% के बीच रहने की उम्मीद है।

जून तिमाही के दौरान, Firstsource के रेवेन्यू में 4.5% की गिरावट आई और यह पिछली तिमाही के ₹2,853 करोड़ से घटकर ₹2,725 करोड़ हो गया।

इस तिमाही में EBIT (ब्याज और टैक्स से पहले की कमाई) ₹337 करोड़ रही, जो पिछली तिमाही के मुकाबले 7.2% ज़्यादा है, जबकि EBIT मार्जिन पिछली तिमाही के 12.2% से बढ़कर 12.3% पर स्थिर रहा। इस अवधि के लिए नेट प्रॉफ़िट 19% गिरकर ₹166 करोड़ हो गया, जो पहले ₹205 करोड़ था।

US डॉलर के हिसाब से, Firstsource ने $288 मिलियन का रेवेन्यू दर्ज किया, जिसका मतलब है कि कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ पिछली तिमाही के मुकाबले 2.2% रही।

तिमाही के दौरान, Firstsource को UK की एक प्रमुख बेनिफिट्स और पेंशन एडमिनिस्ट्रेशन प्रोवाइडर कंपनी से एंड-टू-एंड बैक-ऑफ़िस ट्रांसफॉर्मेशन और रिसोर्स ऑप्टिमाइज़ेशन के लिए एक बड़ा ट्रांसफॉर्मेटिव डील मिला।

कंपनी ने US के एक प्रमुख एकेडमिक मेडिकल सेंटर से भी इंश्योरेंस फ़ॉलो-अप, डिनायल्स मैनेजमेंट और कॉम्प्लेक्स क्लेम रिज़ॉल्यूशन के लिए एक बड़ा डील हासिल किया। कंपनी की इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन के अनुसार, यह कंपनी के लिए एक नया क्लाइंट (नया लोगो) है। कुल डील की जानकारी का खुलासा नहीं किया गया है।

जून तिमाही के अंत में, कंपनी में कर्मचारियों की कुल संख्या 36,875 थी; पिछली तिमाही के मुकाबले 670 और साल-दर-साल आधार पर 2,380 कर्मचारी बढ़े। पिछले 12 महीनों में कर्मचारियों के छोड़ने की दर (एट्रिशन रेट) 33.1% रही। यह उन कर्मचारियों के लिए है जो 180 दिनों से ज़्यादा समय से नौकरी कर रहे थे।

नतीजों की घोषणा के बाद Firstsource Solutions के शेयर 16% गिरकर ₹283.70 पर ट्रेड कर रहे हैं। पिछले एक महीने में स्टॉक 28% बढ़ा है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; दो लिस्टिंग और PB Fintech-Biocon समेत इन स्टॉक्स पर रहेगा फोकस

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 52.00 प्वाइंट्स यानी 0.21% की बढ़त के साथ 24,686.50 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 05 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 152.05 प्वाइंट्स यानी 0.19% की मजबूती के साथ 78,581.00 और निफ्टी 9.75 प्वाइंट्स यानी 0.04% की हल्की बढ़त के साथ 24,624.65 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

आज इन कंपनियों के नतीजे होंगे पेश

हीरो मोटोकॉर्प, एलआईसी, ल्यूपिन, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, अपोलो टायर्स, ब्लू स्टार, क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स, एडलवाइस फाइनेंशियल सर्विसेज, ईआईएच, एमक्योर फार्मा, फिनोलेक्स इंडस्ट्रीज, संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल, मुथूट माइक्रोफिन, एनसीसी, प्रीमियर एनर्जीज, साई लाइफ साइंसेज, ट्रेंट, विजया डायग्नोस्टिक सेंटर और विक्रम सोलर आज कारोबारी नतीजे पेश करेंगी।

इन कंपनियों के नतीजे पेश

Aurobindo Pharma Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर अरबिंदो फार्मा का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 25.2% बढ़कर ₹1,032.6 करोड़ और रेवेन्यू 16.3% उछलकर ₹9,150.4 करोड़ पर पहुंच गया।

Cummins India Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कमिंस इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 0.9% बढ़कर ₹609.3 करोड़ और रेवेन्यू 17.9% उछलकर ₹3,426 करोड़ पर पहुंच गया।

PB Fintech Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर पीबी फिनटेक का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 92.6% बढ़कर ₹162.9 करोड़ और रेवेन्यू 40.1% उछलकर ₹1,888.3 करोड़ पर पहुंच गया।

Biocon Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर बायोकॉन का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 349.4% बढ़कर ₹141.1 करोड़ और रेवेन्यू 10% उछलकर ₹4,336 करोड़ पर पहुंच गया।

Godrej Agrovet Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर गोदरेज एग्रोवेट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 13.8% गिरकर ₹128.3 करोड़ पर आ गया लेकिन इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 9.2% उछलकर ₹2,855.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Aster DM Quality Care Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एस्टर डीएम क्वालिटी केयर का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 81.2% घटकर ₹16.06 करोड़ रह गया लेकिन रेवेन्यू 21.6% उछलकर ₹1,310.7 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का एक्सपेश्नल लॉस ₹4.4 करोड़ से ₹114.4 करोड़ पर पहुंच गया।

Navin Fluorine International Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर नवीन फ्लोरीन इंटरनेशनल का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 107.7% बढ़कर ₹243.3 करोड़ और रेवेन्यू 44.1% उछलकर ₹1,045.1 करोड़ पर पहुंच गया।

Cohance Lifesciences Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कोहेंस लाइफसाइंसेज ₹48.9 करोड़ के कंसालिडेटेड प्रॉफिट से ₹24.12 करोड़ के घाटे में आ गई तो रेवेन्यू भी 23.1% घटकर ₹422.3 करोड़ रह गया।

GMM Pfaudler Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जीएमएम फॉडलर का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 114.3% बढ़कर ₹23.9 करोड़ और रेवेन्यू 16.4% उछलकर ₹924.8 करोड़ पर पहुंच गया।

JK Lakshmi Cement Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर जेके लक्ष्मी सीमेंट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 28.1% बढ़कर ₹108 करोड़ और रेवेन्यू 9.4% उछलकर ₹1,904.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Neuland Laboratories Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर नियूलैंड लैब का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 10 गुना बढ़कर ₹13.9 करोड़ से ₹147.7 करोड़ और रेवेन्यू 119.2% उछलकर ₹641.6 करोड़ पर पहुंच गया।

Meenakshi India Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर मीनाक्षी इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 15.4% बढ़कर ₹321.6 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन रेवेन्यू 4.2% फिसलकर ₹1,835 करोड़ पर आ गया।

SIS Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एसआईएस का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 9.4% बढ़कर ₹101.7 करोड़ और रेवेन्यू 29.7% उछलकर ₹4,603.6 करोड़ पर पहुंच गया।

Automotive Axles Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ऑटोमोटिव एक्सल्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 27.6% बढ़कर ₹45.6 करोड़ और रेवेन्यू 5.6% उछलकर ₹516.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Stocks to Watch: इन स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Cohance Lifesciences

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 27 जुलाई से 5 अगस्त, 2026 के बीच हैदराबाद के पशामिलाराम में कोहेंस लाइफसाइंसेज की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद कंपनी को पांच ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म 483 मिला।

RMC Switchgears

आरएमसी स्विचगियर्स को कुल ₹344.10 करोड़ के ऑर्डर मिले हैं। इनमें सबसे बड़ा ऑर्डर पश्चिम गुजरात विज कंपनी (PGVCL) से मिले 12 LoA (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) हैं, जिनकी वैल्यू ₹333.80 करोड़ है।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Meenakshi India

एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट की एल्केमी लॉन्ग टर्म वेंचर्स फंड-सीरीज 3 ने ₹4.56 करोड़ में मीनाक्षी इंडिया के 1.15 लाख शेयर (1.02% हिस्सेदारी) ₹396.65 के भाव पर खरीदे।

Sapphire Foods India

रैम्स इक्विटीज पोर्टफोलियो फंड ने हर शेयर ₹200.6 के भाव पर सफायर फूड्स के 17.7 लाख शेयर (0.55% हिस्सेदारी) ₹35.41 करोड़ में खरीदे। वहीं पीआई अपॉर्च्युनिटीज एआईएफ V एलएलपी ने ₹33.16 करोड़ के 16.57 लाख शेयर ₹200.10 के भाव पर तो पायनियर इन्वेस्टमेंट फंड स्कीम II ने ₹34 करोड़ के 17 लाख शेयर ₹200 के भाव पर बेचे। प्रेमजी इन्वेस्ट की इन दोनों एंटिटीज ने मिलकर कंपनी में 1% से अधिक हिस्सेदारी बेची।

Apollo Pipes

प्रमोटर ध्रुव गुप्ता ने हर शेयर ₹536.20 के भाव पह ₹12.6 करोड़ में अपोलो पाइप्स के 2.35 लाख अतिरिक्त शेयर (0.53% हिस्सेदारी) खरीदे।

Prataap Snacks

ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने हर शेयर ₹1,169.99 के भाव पर प्रताप स्नैक्स के 2.17 लाख शेयर (0.91% हिस्सेदारी) ₹ 25.45 करोड़ में खरीदे।

Rajgor Castor Derivatives

यूनिकॉर्न फंड ने राजगोर कैस्टर डेरिवेटिव्स में अपनी बाकी बची 2% हिस्सेदारी (4.8 लाख शेयर) ₹1.57 करोड़ में हर शेयर पर ₹32.80 के भाव पर बेच दिए। इससे पिछले सेशन में फंड ने 3.75% हिस्सेदारी बेची थी। ये शेयर रमेशचंद्र मदनलाल राठी ने खरीदे, जिन्होंने ₹1.55 करोड़ की डील में 4.74 लाख शेयर खरीदे।

Silky Overseas, Invicta Diagnostic

पाइन ओक ग्लोबल फंड ने सिल्की ओवरसीज में अपनी पूरी 2.61% हिस्सेदारी (1.66 लाख शेयर) ₹1.2 करोड़ में ₹72.26 के भाव पर बेच दिए। ये शेयर बर्चवुड मल्टी स्ट्रेटेजी फंड ओपन एंडेड पीसीसी लिमिटेड-बर्चवुड ग्लोबल अल्फा फंड ने खरीदे।

इसके अलावा बर्चवुड ग्लोबल अल्फा फंड ने पाइन ओक ग्लोबल फंड से इनविक्टा डायग्नोस्टिक में 1.54% हिस्सेदारी (1.93 लाख शेयर) ₹1.42 करोड़ में ₹73.79 के भाव पर हासिल की।

IndiGrid Infrastructure Trust

सिंगापुर सरकार ने इंडिग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट में अपनी 2.93% हिस्सेदारी ₹486.14 करोड़ में प्रति यूनिट ₹174 के भाव में बेच दी। जून 2026 तिमाही तक सिंगापुर सरकार के पास इंडिग्रिड में 7.36% हिस्सेदारी थी और वह ट्रस्ट की सबसे बड़ी यूनिट-होल्डर थी। सिंगापुर सरकार से ये यूनिट्स नियो ग्रुप, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ट्रस्ट, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, गोल्डमैन सैक्स बैंक यूरोप, अस्क्वा इनकम अपॉर्चुनिटीज AIF, IEX, अल्फा अल्टरनेटिव्स एमएसएआई, केआरबीएल, भारती एक्सा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी और सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरीशस जैसे घरेलू इंस्टीट्यूशंस और एसेट मैनेजर्स ने खरीदे।

लिस्टिंग

आज जुनिपर ग्रीन एनर्जी और एमवी इलेक्ट्रोसिस्टम्स की बीएसई और एनएसई पर एंट्री होगी तो वनइंडिग टेक और धवल पैकेजिंग के शेयर बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

एक्स-डिविडेंड

आज बेमको हाइड्रोलिक्स, भारत गियर्स, ब्लैक रोज इंडस्ट्रीज, हरक्यूलिस इन्वेस्टमेंट्स, इन्फोबीन्स टेक्नोलॉजीज, इन्वेस्टमेंट एंड प्रिसिजन कास्टिंग्स, लिंडे इंडिया, लुमैक्स इंडस्ट्रीज, लुमैक्स ऑटो टेक्नोलॉजीज, माइंडटेक (इंडिया), प्राज इंडस्ट्रीज, राणे होल्डिंग्स, और टेस्टी बाइट ईटेबल्स के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो जेनेसिस इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन के राइट्स और नेक्सस सेलेक्ट ट्रस्ट के इनकम डिस्ट्रीब्यूशन की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

एलआईसी में आज एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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