गुजरात सरकार का बड़ा ऐलान: सेवानिवृत्ति के बाद NPS से निकासी के नियमों में बदलाव

गुजरात सरकार का बड़ा ऐलान: सेवानिवृत्ति के बाद NPS से निकासी के नियमों में बदलाव

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गुजरात सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। नए सर्कुलर के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों को पेंशन राशि की निकासी और एन्युइटी (Annuity) खरीदने के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा, सरकारी क्षेत्र के NPS सदस्यों को सेवानिवृत्ति के बाद भी 85 वर्ष की आयु तक इस योजना से जुड़े रहने की विशेष छूट दी गई है। ALSO READ: सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका: GSRTC में 2510 हेल्पर पदों पर ऑनलाइन भर्ती शुरू

 

8 लाख तक की राशि पर पूर्ण निकासी की छूट 

नए नियमों के अनुसार, सामान्य रूप से सेवानिवृत्ति के समय मिलने वाली कुल पेंशन राशि में से कम से कम 40 प्रतिशत हिस्से की एन्युइटी खरीदना अनिवार्य होता है। हालांकि, छोटे निवेशकों को राहत देते हुए यह घोषणा की गई है कि यदि कुल संचित पेंशन राशि 8 लाख रुपए तक होगी, तो कर्मचारी को पूरी राशि एकमुश्त (एक साथ) निकालने का विकल्प मिलेगा। 

 

8 से 12 लाख रुपए तक की राशि के लिए भुगतान के नए विकल्प

यदि संचित पेंशन राशि 8 लाख से 12 लाख रुपए के बीच है, तो कर्मचारी अधिकतम 6 लाख रुपए तक की राशि एकमुश्त निकाल सकेंगे। जबकि शेष राशि के लिए कम से कम छह वर्षों तक समय-समय पर (किस्तों में) भुगतान प्राप्त करने या एन्युइटी खरीदने का विकल्प दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी अपनी एन्युइटी खरीद और एकमुश्त राशि की निकासी को 85 वर्ष की आयु तक टाल (Defer) भी सकते हैं। ALSO READ: GIDC प्लॉट धारकों के लिए बड़ी राहत: राज्य सरकार ने घोषित की 'GIDC एम्नेस्टी स्कीम'
 

स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति (VRS) और अन्य विशेष प्रावधान 

स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति (VRS) या अन्य निर्धारित मामलों में, कर्मचारी को अपनी कुल संचित राशि का कम से कम 80 प्रतिशत हिस्सा एन्युइटी के लिए आवंटित करना होगा। लेकिन यदि ऐसी स्थिति में कुल संचित राशि 5 लाख या उससे कम है, तो पूरी राशि एकमुश्त निकालने की अनुमति होगी। इन नए सुधारों के माध्यम से NPS के सरकारी और गैर-सरकारी क्षेत्र के सदस्यों के लिए निकासी के अलग-अलग और स्पष्ट प्रावधान लागू किए गए हैं।

NSE IPO: SEBI से ग्रीन सिग्नल, सितंबर में ही लिस्टिंग; अब तक और क्या चला है पता

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) को अपना IPO लाने के लिए के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI की मंजूरी मिल गई है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। इसका लंबे वक्त से इंतजार किया जा रहा है। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।

NSE ने सबसे पहले दिसंबर 2016 में अपना IPO प्रॉस्पेक्टस दाखिल किया था। उस वक्त इरादा OFS के जरिए करीब 10,000 करोड़ रुपये जुटाने का था। लेकिन नियामकीय खामियों और को-लोकेशन मामले से जुड़ी चिंताओं के चलते सेबी ने मंजूरी लंबे समय तक रोक दी थी। लेकिन अब रास्ता साफ है। आइए जानते हैं NSE IPO के बारे में अब तक क्या पता चला है…

साइज और नेचर

NSE IPO करीब 30,000 करोड़ रुपये का है। यह पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। नए शेयर जारी नहीं होंगे। इसलिए शेयर बिक्री से मिला पैसा, OFS में शेयर बेचने वालों के पास जाएगा। NSE को कुछ नहीं मिलेगा।

OFS में कौन बेचेगा शेयर

एक्सचेंज के मौजूदा शेयरधारक 14.89 करोड़ शेयर यानि लगभग 6% हिस्से को बिक्री के लिए रखेंगे। OFS में टेमासेक होल्डिंग्स पीटीई., LIC, SBI और SBI कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड शेयर बेच सकते हैं। SBI अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेच सकता है। SBI कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेच सकती है। एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयरों की बिक्री कर सकती है।

शेयर बेचने वाले अन्य प्रमुख शेयरधारकों में कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इनवेस्टमेंट्स (मॉरिशस) प्राइवेट लिमिटेड, बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं।

ओपनिंग और लिस्टिंग की संभावित तारीख

इश्यू के 15 सितंबर को खुलने और 24 या 25 सितंबर को शेयर बाजार में लिस्ट होने की संभावना है। शेयर BSE पर लिस्ट होंगे।

नए सप्ताह में तय हो सकता है प्राइस बैंड

कहा जा रहा है कि NSE अगले सप्ताह IPO के लिए प्राइस बैंड, लॉट साइज और अन्य डिटेल्स की घोषणा कर सकता है।

कैसे होगा देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब NSE का 30,000 करोड़ रुपये का IPO आ रहा है। हालांकि, सबसे बड़े IPO के तमगे को लेकर इसकी टक्कर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड से है। जियो लगभग 37,700 करोड़ रुपये का IPO लाने की तैयारी में है। लेकिन इसके आने का समय अभी घोषित नहीं हुआ है।

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IPO के बाद टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में हो सकती है NSE की एंट्री

यह IPO NSE को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से भारत की टॉप 10 मोस्ट वैल्यूएबल कंपनियों में शामिल कर सकता है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि IPO से NSE का मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है।

NSE के प्रमुख शेयरहोल्डर

NSE के शेयरधारकों में घरेलू वित्तीय संस्थान, बीमा कंपनियां, विदेशी निवेशक और व्यक्तिगत निवेशक शामिल हैं। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) 10.72 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक है। जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी के पास भी हिस्सेदारी है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और उसकी सब्सिडियरी SBI कैपिटल मार्केट्स की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 7.5 प्रतिशत है। स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SHCIL) की एक्सचेंज में 4.44 प्रतिशत हिस्सेदारी है। SHCIL में 50 प्रतिशत से ज्यादा ओनरशिप IFCI के पास है। विदेशी निवेशकों में टेमासेक की सब्सिडियरी अरांदा इन्वेस्टमेंट्स और कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) की भी NSE में अच्छी खासी हिस्सेदारी है।

IPO के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंक किए गए थे शॉर्टलिस्ट

NSE ने मार्च 2026 की शुरुआत में IPO पर काम करने के लिए 20 इनवेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया था। इनमें कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी, JM फाइनेंशियल, जेपी मॉर्गन, HSBC सिक्योरिटीज, मॉर्गन स्टेनली भी शामिल हैं। इस मेगा इश्यू के लिए करीब 7 से 9 लॉ फर्म्स को भी शॉर्टलिस्ट किया गया, जिनमें सिरिल अमरचंद मंगलदास, Trilegal, और अमेरिका की Latham and Watkins भी शामिल हैं।

NSE की वित्तीय सेहत

NSE के लगभग 1.8 लाख शेयरहोल्डर हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान एक्सचेंज का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 9 प्रतिशत बढ़कर 5,252 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2025-26 में NSE का शुद्ध मुनाफा 15 प्रतिशत घटकर 10,302 करोड़ रुपये रह गया। कुल आय भी कम होकर 18,713 करोड़ रुपये पर आ गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

उत्तराखंड: सीएम धामी ने 9.91 लाख से अधिक पेंशनर्स के खातों में ट्रांसफर किए 147 करोड़, 5,605 नए लाभार्थी भी जुड़े

उत्तराखंड: सीएम धामी ने 9.91 लाख से अधिक पेंशनर्स के खातों में ट्रांसफर किए 147 करोड़, 5,605 नए लाभार्थी भी जुड़े

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कैंप कार्यालय से समाज कल्याण विभाग की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत अगस्त माह की पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई है। इस बार डीबीटी (DBT) के माध्यम से राज्य के 9,91,914 लाभार्थियों के खातों में 147.05 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भेजी गई है। इसके साथ ही, सरकार ने विभिन्न पेंशन योजनाओं के तहत 5,605 नए लाभार्थियों की पेंशन को भी स्वीकृति प्रदान की है। ALSO READ: द्वाराहाट का मां दूनागिरी मंदिर: 8,000 फीट की ऊंचाई पर विराजमान शक्तिपीठ

 

कमजोर और वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा देना संकल्प

इस अवसर पर सीएम धामी ने कहा कि समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्गों को एक सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासन का निरंतर यह प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के पारदर्शी, सरल और समयबद्ध तरीके से पहुंचे। ALSO READ: खटीमा में सीएम धामी ने उठाया चाय का लुत्फ, राहुल गांधी पर साधा निशाना

अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पेंशन योजनाओं के संचालन के दौरान यदि लाभार्थियों को किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़े, तो उसका प्राथमिकता और पूरी संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रशासनिक प्रक्रिया के चलते कोई भी पात्र व्यक्ति अपने अधिकार से वंचित न रहने पाए।

Delhi Holiday: दिल्ली में 11 सितंबर से लेकर लगातार 3 दिन छुट्टी! जानिए क्या बंद रहेगा और कौन सी सर्विस रहेंगी चालू

BRICS Summit 2026 In Delhi: राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट को देखते हुए दिल्ली में केंद्र सरकार के सभी दफ्तर 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को बंद रहेंगे। BRICS समिट 2026 के लिए बड़े पैमाने पर लॉजिस्टिकल इंतजाम करने और आम लोगों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए नई दिल्ली इलाके में सभी केंद्र सरकार के ऑफिस शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बंद रहेंगे।

सरकार ने गुरुवार (3 सितंबर) को इस बारे में एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट 11 से 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया जाएगा। इस समिट में लगभग तीस BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता, इंटरनेशनल संगठनों के प्रमुख और भारत सहित BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधि शामिल होंगे।

लगातार तीन दिन मिलेगी छुट्टी

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की तरफ से गुरुवार (3 सितंबर) को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, दिल्ली और नई दिल्ली में केंद्र सरकार के दफ्तरों को बंद करने का फैसला इस कार्यक्रम के बड़े पैमाने और इस हाई-लेवल समिट के आयोजन के लिए ज़रूरी बड़े लॉजिस्टिकल इंतज़ामों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। 11 सितंबर के अगले दिन शनिवार और रविवार है। यानी केंद्रीय कर्मचारियों को 11 सितंबर से लगातार तीन दिन छुट्टी मिलेगी।

11 से 13 सितंबर तक आयोजित होगा समिट

BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में 11 से 13 सितंबर तक आयोजित होने हैं। इस समिट में भारत समेत BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के अलावा, लगभग 30 BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता शामिल होंगे। इस कदम का मकसद समिट के दौरान आम जनता को होने वाली परेशानी को कम करना भी है। इसके लिए राजधानी में बड़े पैमाने पर सुरक्षा और ट्रैफिक इंतजाम किए जाएंगे। यह बंदी 11 सितंबर (शुक्रवार) को लागू होगी। जबकि 12 और 13 सितंबर को क्रमशः शनिवार और रविवार है।

BRICS देशों के दिग्गज होंगे शामिल

एक आदेश में कहा गया है, “मुझे यह बताने का निर्देश दिया गया है कि BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट 11-13 सितंबर, 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है। समिट में लगभग तीस BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख और भारत सहित BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के बड़े पैमाने और इसमें शामिल लॉजिस्टिकल इंतजामों को देखते हुए और आम जनता को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि दिल्ली/नई दिल्ली में स्थित केंद्र सरकार के दफ्तर शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बंद रखे जाएं (12 और 13 सितंबर 2026 को क्रमशः शनिवार और रविवार है)।”

25 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें होंगी

इस साल भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट देश भर के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों और बिजनेस-टू-बिजनेस तथा लोगों के बीच आपसी पहल के जरिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ने व्यावहारिक और विकास-उन्मुख नतीजों के माध्यम से ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।

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भारत ‘ब्रिक्स’ का एक संस्थापक सदस्य है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। साल 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के बीस साल पूरे कर रहा है।

सब्जी बेचने से लेकर भारत के लिए 4 गोल्ड मेडल जीतने तक, झारखंड के एथलीट अमरदीप कुमार की कहानी वायरल, हेमंत सोरेन ने किया रिएक्ट

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें झारखंड के रांची में अरगोरा चौक पर एक आदमी सब्ज़ियां बेचता हुआ दिख रहा है। जल्द ही लोगों को पता चला कि यह कोई और नहीं, बल्कि राज्य के थ्रोबॉल खिलाड़ी और गोल्ड मेडलिस्ट अमरदीप कुमार हैं। इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भारत के लिए चार गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, 29 साल के यह एथलीट अब गुज़ारा करने और अपने परिवार की मदद के लिए सब्ज़ियां बेच रहे हैं और कैब चला रहे हैं।

ऑनलाइन लोगों का ध्यान खींचने वाले इस वीडियो क्लिप में अमरदीप अपनी दुकान पर बैठे हुए और आस-पास कई तरह की सब्ज़ियां रखे हुए दिखाई दिए। उन्हें ग्राहक को सब्ज़ियां देने से पहले तराज़ू पर उन्हें तौलते हुए देखा गया। चर्चा की खास बात यह थी कि उन्होंने अपनी कामचलाऊ दुकान की दीवार पर अपने गोल्ड मेडल लटका रखे थे।

झारखंड के रहने वाले अमरदीप ने कई इंटरनेशनल थ्रो-बॉल इवेंट्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और चार गोल्ड मेडल जीते हैं। हालांकि, इतनी उपलब्धियों के बावजूद, उन्हें सरकारी नौकरी पाने या राज्य से कोई आर्थिक मदद मिलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

जब से सोशल मीडिया पर यह क्लिप सामने आया है, लोगों ने इस स्थिति पर निराशा जताई है। कुछ लोगों ने इसे “दिल तोड़ने वाला” बताया है, तो कुछ ने सरकार से अपील की है कि वे हर संभव तरीके से उनकी मदद करें। एक यूजर ने पूछा- “दीवार पर गोल्ड मेडल और सड़क किनारे सब्ज़ियां—यह सिर्फ़ दिल तोड़ने वाली तस्वीर नहीं है, यह सिस्टम के लिए एक असहज करने वाला सवाल है। जिस खिलाड़ी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया और गोल्ड मेडल जीता, उसे अपनी बुनियादी ज़िंदगी गुज़ारने के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए। जब ​​खिलाड़ी जीतते हैं तो हम जश्न मनाते हैं, लेकिन कैमरे हटने के बाद उनका क्या होता है?”

एक और व्यक्ति ने कहा, “इसीलिए हमें ओलंपिक में ज़्यादा मेडल नहीं मिलते। दुखद स्थिति है।” एक ने कहा कि दुख की बात यह नहीं है कि वह सब्ज़ियां बेच रहे हैं। ईमानदारी से किए गए काम में कुछ भी गलत नहीं है… चिंता की बात यह है कि उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और गोल्ड मेडल जीते, लेकिन शायद खेल में या अपनी उपलब्धियों के आधार पर करियर बनाने के लिए उनके पास कोई भविष्य का रास्ता नहीं था। समस्या संस्थागत समर्थन की कमी है, न कि नौकरी की,”।

एक अन्य ने कहा कि “सरकार को उनके जैसे लोगों को, जिन्होंने देश के लिए कुछ किया है, कम से कम मासिक सहायता राशि देनी चाहिए, न कि किसी विधायक को निजी कारणों से विधायक बनने के लिए जीवन भर पेंशन देनी चाहिए,।

कौन हैं अमरदीप कुमार?

अमरदीप ने 2015 में मलेशिया में हुई एशियन जूनियर थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद 2017 में काठमांडू में हुई इंडो-नेपाल थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में उन्होंने एक और गोल्ड मेडल जीता। 2019 में, वह उस भारतीय टीम का हिस्सा थे जिसने बेंगलुरु में साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। उनका चौथा इंटरनेशनल गोल्ड मेडल 2026 में रांची में आयोजित साउथ एशियन थ्रो-बॉल चैंपियनशिप के दूसरे एडिशन में मिला।

आज, अमरदीप गुज़ारा करने के लिए सब्ज़ियाँ बेचते हैं और कैब भी चलाते हैं, क्योंकि उनका परिवार कमाई के कई ज़रिया पर निर्भर है। मुश्किलों के बावजूद, वह थ्रो-बॉल खेलना जारी रखे हुए हैं, क्योंकि अक्टूबर 2026 के आखिर में उनके श्रीलंका का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद है।

हालांकि अमरदीप ने 2016 में किसी इनाम या प्रोत्साहन के लिए झारखंड सरकार से संपर्क किया था, लेकिन कैश इनाम और सरकारी नौकरी के लिए उनकी अर्ज़ियाँ अभी भी पेंडिंग हैं। छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों के उनके कई साथियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है।

CM हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान

अमरदीप की कहानी ऑनलाइन वायरल होने के बाद, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने X पर इस मामले के बारे में पोस्ट किया और खेल विभाग को निर्देश दिया कि वे तुरंत इस मामले का संज्ञान लें और कार्रवाई शुरू करें।

Gold Rate Today: सोने में नहीं थम रही गिरावट, लगातार हो रहा सस्ता; ये है लेटेस्ट रेट

सोने की कीमत में गिरावट थमने का नाम नहीं ले रही है। 3 सितंबर की सुबह भी ज्यादातर शहरों में 24 और 22 कैरेट का भाव गिरा है। राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत फिसलकर 152160 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में हाजिर सोना लगातार छठे कारोबारी दिन गिरा और 3 सप्ताह से ज्यादा समय के निचले स्तर पर आ गया। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंकाओं के बीच हाजिर सोने की कीमतें दबाव में हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,303.12 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 152160 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139490 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152010 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 139340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली139490152160
मुंबई139340152010
अहमदाबाद139390152060
चेन्नई139340152010
कोलकाता139340152010
हैदराबाद139340152010
जयपुर139490152160
भोपाल139390152060
लखनऊ139490152160
चंडीगढ़139490152160

Atal Pension Yojana: ₹5000 पेंशन की सरकारी गारंटी, समझिए निवेश और कमाई का पूरा हिसाब

चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमतें भी दबाव में हैं। 3 सितंबर की सुबह चांदी टूटकर 244900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 63.64 डॉलर प्रति औंस है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Atal Pension Yojana: ₹5000 पेंशन की सरकारी गारंटी, समझिए निवेश और कमाई का पूरा हिसाब

Atal Pension Yojana: हर कोई चाहता है कि बुढ़ापे में उसके पास नियमित आमदनी का कोई जरिया रहे। ताकि उसे हर छोटी-मोटी जरूरत के लिए किसी और पर निर्भर न रहना पड़े। हालांकि, कई लोगों की बचत नहीं रहती, तो उनके लिए पेंशन फंड बनाना मुश्किल होता है।

लेकिन, सरकार की अटल पेंशन योजना (APY) कम निवेश के साथ पेंशन की गारंटी देती है। इसमें 60 साल की उम्र के बाद ₹1,000 से ₹5,000 तक की न्यूनतम मासिक पेंशन की गारंटी मिलती है। इसके लिए उम्र के हिसाब से हर महीने तय योगदान करना होता है।

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम योगदान देना पड़ता है। उदाहरण के लिए, 18 साल की उम्र में ₹5,000 की पेंशन के लिए ₹210 महीने का योगदान है। 40 साल की उम्र में यही रकम ₹1,454 महीने हो जाती है।

कौन ले सकता है योजना का लाभ?

अटल पेंशन योजना में 18 से 40 साल की उम्र के भारतीय नागरिक शामिल हो सकते हैं। बैंक या पोस्ट ऑफिस में सेविंग्स अकाउंट होना जरूरी है। 1 अक्टूबर 2022 के बाद मौजूदा या पूर्व इनकम टैक्सपेयर नया APY अकाउंट नहीं खोल सकते।

स्कीम में हर व्यक्ति सिर्फ एक अकाउंट खोल सकता है। योगदान 60 साल की उम्र तक करना होता है। इसे बैंक या पोस्ट ऑफिस के जरिए शुरू किया जा सकता है।

₹5,000 पेंशन के लिए कितना निवेश?

आपकी उम्र जितनी कम होगी, मासिक योगदान उतना ही कम होगा। पेंशन 60 साल की उम्र के बाद शुरू होती है।

योजना में शामिल होने की उम्रमासिक योगदान
60 साल के बाद मासिक पेंशन

18 साल₹210₹5,000
20 साल₹248₹5,000
25 साल₹376₹5,000
30 साल₹577₹5,000
35 साल₹902₹5,000
40 साल₹1,454₹5,000

APY में ₹1,000, ₹2,000, ₹3,000, ₹4,000 और ₹5,000 की मासिक पेंशन का विकल्प मिलता है। योगदान की रकम उम्र और चुने गए पेंशन स्लैब के हिसाब से तय होती है।

निवेश और कमाई को ऐसे समझें

अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र में ₹5,000 पेंशन का विकल्प चुनता है, तो उसे 60 साल तक 42 साल योगदान करना होगा। इसके लिए उसे हर महीने ₹210 जमा करने होंगे।

60 साल के बाद उसे ₹5,000 की न्यूनतम गारंटीड मासिक पेंशन मिलेगी। यानी APY में कम उम्र में शुरुआत करने का फायदा कम मासिक योगदान के रूप में मिलता है।

पेंशनधारक की मौत के बाद क्या होगा?

60 साल की उम्र के बाद पेंशनधारक की मौत होने पर पति या पत्नी को उतनी ही मासिक पेंशन मिलती है। पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद जमा पेंशन वेल्थ नॉमिनी को दी जाती है।

अगर 60 साल से पहले सब्सक्राइबर की मौत हो जाती है, तो जीवनसाथी के पास योगदान जारी रखकर अकाउंट को 60 साल तक चलाने का विकल्प भी होता है।

इसे उदाहरण से समझिए

मान लीजिए कि पेंशनधारक ने ₹5,000 मासिक पेंशन का विकल्प चुना। 60 साल के बाद उनकी मौत हुई, तो पति या पत्नी को ₹5,000 महीने की पेंशन मिलती रहेगी। पति-पत्नी दोनों के निधन के बाद नॉमिनी को ₹8.5 लाख की तय पेंशन वेल्थ एकमुश्त मिलेगी। यह रकम पेंशनधारक के अपने योगदान की रकम भर नहीं है।

यह योजना के तहत ₹5,000 पेंशन विकल्प के लिए पहले से तय कॉर्पस है, जिसे पेंशन फंड के निवेश, सब्सक्राइबर के योगदान और जरूरत पड़ने पर सरकार की गारंटी के जरिए फंड किया जाता है। यानी ₹5,000 पेंशन के बदले 18 साल की उम्र से सिर्फ ₹1.06 लाख योगदान करने पर भी नॉमिनी को ₹8.5 लाख की तय पेंशन वेल्थ मिल सकती है। यही अटल पेंशन योजना की गारंटी का अहम हिस्सा है।

कैसे जमा होता है पैसा?

अटल पेंशन योजना में योगदान बैंक या पोस्ट ऑफिस अकाउंट से ऑटो-डेबिट के जरिए जमा होता है। सब्सक्राइबर अपनी सुविधा के हिसाब से हर महीने, तीन महीने या छह महीने में योगदान दे सकता है।

APY को रिटायरमेंट की पूरी जरूरत के बजाय एक गारंटीड बेस पेंशन के तौर पर देखना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। ₹5,000 की पेंशन भविष्य में महंगाई के हिसाब से पर्याप्त होगी या नहीं, यह अलग सवाल है। इसलिए सिर्फ इस योजना पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से दूसरी बचत और निवेश की भी जरूरत पड़ सकती है।

Retirement Planning: 20 की उम्र में सिर्फ ₹5000 की SIP से रिटायरमेंट पर ₹5 करोड़ का फंड! स्टेप-अप और एसेट एलोकेशन से समझें पूरा गणित

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Silver Rate Today 2 September: चांदी के दाम में फिर गिरावट, दिल्ली से चेन्नई तक जानें आज की कीमत

Silver Rate Today 2 September: चांदी खरीदने वालों के लिए आज बाजार से मिला-जुला संकेत सामने आया है। पिछले कुछ समय से कीमती धातु की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और इसका असर आज के रेट पर भी दिखाई दिया। दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को चांदी की कीमत ₹2,40,500 प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) दर्ज की गई, जो पिछले कारोबारी दिन के मुकाबले ₹5,000 कम है। वहीं, घरेलू वायदा बाजार में भी चांदी कमजोर नजर आई। MCX पर सुबह के कारोबार में चांदी का भाव 0.24 फीसदी गिरकर ₹2,28,993 प्रति किलो पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी हलचल का असर भी कीमती धातु पर देखने को मिल रहा है। ऐसे में अगर आप चांदी खरीदने, गहने बनवाने या निवेश के लिए भाव पर नजर रख रहे हैं, तो आज के रेट आपके लिए जानना जरूरी है। आगे जानिए देश के प्रमुख शहरों में चांदी कितने रुपये किलो बिक रही है।

MCX पर भी चांदी हुई कमजोर

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर भी चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखने को मिली। आज सुबह तक चांदी का भाव 0.24 फीसदी यानी ₹556 की गिरावट के साथ ₹2,28,993 प्रति किलो रह गया। इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में MCX पर चांदी ₹2,29,549 प्रति किलो पर बंद हुई थी।

दिल्ली समेत शहरों में चांदी कितने की मिल रही है?

अगर आप अपने शहर में चांदी खरीदने का प्लान बना रहे हैं, तो नीचे प्रमुख शहरों के ताजा भाव देख सकते हैं। ज्यादातर शहरों में चांदी की कीमत ₹2.55 लाख प्रति किलो के आसपास है।

शहर 1 किलो चांदी का भाव

दिल्ली ₹2,55,000

मुंबई  ₹2,55,000

कोलकाता     ₹2,55,000

चेन्नई ₹2,60,000

पटना  ₹2,55,000

लखनऊ      ₹2,55,000

मेरठ  ₹2,55,000

अयोध्या      ₹2,55,000

कानपुर ₹2,55,000

गाजियाबाद   ₹2,55,000

नोएडा ₹2,55,000

गुरुग्राम      ₹2,55,000

चंडीगढ़ ₹2,55,000

जयपुर ₹2,55,000

अहमदाबाद   ₹2,55,000

पुणे   ₹2,55,000

लुधियाना     ₹2,55,000

गुवाहाटी      ₹2,55,000

इंदौर  ₹2,55,000

सूरत  ₹2,55,000

नागपुर ₹2,55,000

नासिक ₹2,55,000

बैंगलोर ₹2,55,000

वडोदरा ₹2,55,000

भुवनेश्वर     ₹2,60,000

रायपुर ₹2,55,000

हैदराबाद      ₹2,60,000

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी पर दबाव

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमत कमजोर हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, चांदी करीब $64.74 प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक बाजार में बिकवाली का असर घरेलू कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है।

एक दिन पहले कितनी थी चांदी?

पिछले कारोबारी सत्र में दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी ₹2,45,500 प्रति किलो पर स्थिर थी। इसके बाद इसमें ₹5,000 की गिरावट आई और कीमत घटकर ₹2,40,500 प्रति किलो रह गई। विदेशी बाजारों में भी चांदी पर दबाव रहा। हाजिर चांदी की कीमत करीब 3 फीसदी गिरकर $64.68 प्रति औंस रह गई थी।

मंगलवार को वायदा बाजार में क्या हुआ था?

इससे ठीक एक दिन पहले घरेलू वायदा बाजार में तस्वीर थोड़ी अलग थी। मजबूत हाजिर मांग और कारोबारियों की ताजा खरीदारी के चलते चांदी वायदा 0.19 फीसदी बढ़कर ₹2,40,577 प्रति किलो पहुंच गया था। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले चांदी कॉन्ट्रैक्ट में ₹27 की तेजी दर्ज की गई थी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क में चांदी 0.17 फीसदी गिरकर $66.46 प्रति औंस पर आ गई थी।

खरीदारी करने वालों के लिए क्या समझना जरूरी है?

चांदी के भाव में इस समय तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है। घरेलू बाजार, MCX और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अलग-अलग तस्वीर दिखाई दे रही है। ऐसे में अगर आप चांदी के गहने, सिक्के या निवेश के लिए सिल्वर खरीदने जा रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने स्थानीय सर्राफा बाजार का ताजा भाव जरूर जांच लें। साथ ही, चांदी की शुद्धता, मेकिंग चार्ज और लागू टैक्स के कारण अंतिम कीमत अलग हो सकती है।

NPS Calculator: रिटायरमेंट के बाद चाहिए ₹20,000 महीना पेंशन? जानिए 60 की उम्र में कितना बड़ा होना चाहिए कॉर्पस

NPS Calculator: रिटायरमेंट के बाद चाहिए ₹20,000 महीना पेंशन? जानिए 60 की उम्र में कितना बड़ा होना चाहिए कॉर्पस

NPS Pension Calculation: रिटायरमेंट के बाद बिना किसी टेंशन के जीवन जीने के लिए एक फिक्स मंथली इनकम का होना बेहद जरूरी है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) देश में रिटायरमेंट प्लानिंग का सबसे लोकप्रिय और टैक्स-एफिशिएंट जरिया बन चुका है। लेकिन अधिकांश निवेशकों के मन में यह सवाल रहता है कि ‘अगर मुझे 60 की उम्र के बाद हर महीने ₹20,000 की पेंशन चाहिए, तो मुझे अपने एनपीएस खाते में कितना फंड जमा करना होगा?’

इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप रिटायरमेंट के समय अपने कुल फंड का कितना हिस्सा ऐन्यूटी में जमा करते हैं और कितना कैश निकालते हैं। आइए आसान भाषा में समझते हैं इसका पूरा गणित।

₹20,000 पेंशन के लिए कितना फंड जरूरी?

NPS के नियमों के मुताबिक, 60 साल की उम्र में आपको अपने कुल कॉर्पस का कम से कम 40% हिस्सा ऐन्यूटी में लगाना अनिवार्य होता है, जिससे आपको आजीवन पेंशन मिलती है। बाकी 60% हिस्सा आप एकमुश्त टैक्स-फ्री कैश निकाल सकते हैं। फिलहाल भारत में प्रमुख बीमा कंपनियों की ऐन्यूटी दर औसतन 6% प्रति वर्ष के आसपास है।

स्थिति 1: जब आप 100% पैसा ऐन्यूटी में लगाते हैं (मैक्सिमम पेंशन)

अगर आप रिटायरमेंट पर कोई एकमुश्त कैश नहीं निकालते और अपना पूरा 100% फंड पेंशन के लिए ऐन्यूटी में डाल देते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी कॉर्पस: ₹40 लाख

मासिक पेंशन (6% ऐन्यूटी दर पर): ₹20,000 / महीना

कुल रिटायरमेंट फंड: ₹40 लाख

स्थिति 2: जब आप 40% ऐन्यूटी और 60% लंपसम का विकल्प चुनते हैं

अगर आप 60% पैसा कैश निकालना चाहते हैं और केवल अनिवार्य 40% हिस्से से ही ₹20,000/माह पेंशन बनाना चाहते हैं:

जरूरी ऐन्यूटी हिस्सा (40%): ₹40 लाख

एकमुश्त कैश निकासी (60%): ₹60 लाख (पूरी तरह टैक्स-फ्री)

कुल रिटायरमेंट फंड (100%): ₹1 करोड़

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

NPS कैलकुलेटर: कॉर्पस और पेंशन का ब्रेकअप

₹20,000 पेंशन पाने के लिए हर महीने कितना SIP निवेश करना होगा?

अगर हम NPS में इक्विटी (E), कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (C) और सरकारी सिक्योरिटीज़ (G) के कॉम्बिनेशन से औसतन 10% वार्षिक रिटर्न मानकर चलें, तो आपकी उम्र के हिसाब से हर महीने की जाने वाली SIP इस प्रकार होगी:

लक्ष्य: ₹1 करोड़ का कुल फंड बनाना (₹60 लाख कैश + ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹2,630 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹4,450 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹7,750 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹13,170 / महीना

लक्ष्य: ₹40 लाख का कुल फंड बनाना (0% कैश, 100% ऐन्यूटी से ₹20k मासिक पेंशन)

  • उम्र 25 साल (35 साल का समय): केवल ₹1,050 / महीना
  • उम्र 30 साल (30 साल का समय): लगभग ₹1,780 / महीना
  • उम्र 35 साल (25 साल का समय): लगभग ₹3,100 / महीना
  • उम्र 40 साल (20 साल का समय): लगभग ₹5,270 / महीना

NPS में निवेश के 3 बड़े फायदे

एक्स्ट्रा टैक्स बचत: आयकर अधिनियम की धारा 80CCD (1B) के तहत 80C की ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है।

कम लागत वाला प्रोडक्ट: NPS दुनिया के सबसे कम फंड मैनेजमेंट फीस वाले निवेश विकल्पों में से एक है, जिससे लॉन्ग टर्म में कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा मिलता है।

कम जोखिम पर बेहतर रिटर्न: NPS का ऑटो चॉइस और एक्टिव चॉइस आपको उम्र के हिसाब से इक्विटी और डेट में एसेट एलोकेशन मैनेज करने की सुविधा देता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF vs NPS: किस स्कीम में निवेश से बड़ा रिटायरमेंट फंड बनेगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs NPS: जब रिटायरमेंट प्लानिंग की बात होती है, तो दो स्कीमों पर सबसे अधिक जोर रहता है… पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) इन दोनों को अच्छा विकल्प माना जाता हैं, लेकिन दोनों में फर्क है। PPF सुरक्षित निवेश है। इसका ब्याज सरकार तय करती है। वहीं NPS बाजार से जुड़ा है। इसमें ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना होती है, लेकिन रिटर्न तय नहीं होता।

किस स्कीम में कितना फंड बनेगा?

PPF और NPS में वक्त के साथ बड़ा रिटायरमेंट फंड सकता है। यहां ₹2,000, ₹5,000 और ₹12,500 मंथली निवेश का कैलकुलेशन है। इसमें 30 साल तक निवेश की अवधि मानी गई है। PPF पर 7.1% सालाना ब्याज और NPS में 10% सालाना औसत रिटर्न मानकर कैलकुलेशन किया गया है।

हर महीने निवेश30 साल में कुल निवेशPPF में अनुमानित फंड
NPS में अनुमानित फंड

₹2,000₹7.20 लाख₹25.03 लाख₹45.59 लाख
₹5,000₹18 लाख₹62.58 लाख₹1.14 करोड़
₹12,500₹45 लाख₹1.56 करोड़₹2.85 करोड़

दोनों स्कीम में निवेश की अवधि और रकम समान है। फर्क रिटर्न का है। इसी वजह से लंबे समय में NPS में बड़ा फंड बन सकता है।

₹2,000 की मंथली निवेश

अगर आप 30 साल तक हर महीने ₹2,000 निवेश करते हैं, तो कुल ₹7.20 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% के हिसाब से फंड करीब ₹25.03 लाख हो सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर फंड करीब ₹45.59 लाख पहुंच सकता है। यानी ₹2,000 की छोटी मंथली निवेश भी लंबे समय में अच्छा फंड बना सकती है।

₹5,000 की मंथली निवेश

हर महीने ₹5,000 निवेश करने पर 30 साल में आपकी जेब से ₹18 लाख जाएंगे। PPF में अनुमानित फंड करीब ₹62.58 लाख बन सकता है।

वहीं NPS में 10% औसत रिटर्न के हिसाब से फंड करीब ₹1.14 करोड़ हो सकता है। यानी PPF के मुकाबले करीब ₹51 लाख ज्यादा फंड बन सकता है।

Personal Loan 3 (1)

₹12,500 की मंथली निवेश

हर महीने ₹12,500 निवेश करने पर 30 साल में कुल ₹45 लाख जमा होंगे। PPF में 7.1% ब्याज के हिसाब से फंड करीब ₹1.56 करोड़ तक पहुंच सकता है।

NPS में 10% औसत रिटर्न मिलने पर यही फंड करीब ₹2.85 करोड़ हो सकता है। दोनों के बीच करीब ₹1.29 करोड़ का अंतर है। यह अंतर कंपाउंडिंग और ज्यादा रिटर्न की वजह से बनता है।

NPS में ज्यादा फंड क्यों बन सकता है?

NPS का पैसा इक्विटी, सरकारी बॉन्ड और कॉरपोरेट बॉन्ड में लगाया जाता है। इक्विटी की वजह से लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की संभावना रहती है।

लेकिन बाजार का जोखिम भी होता है। 10% रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। खराब बाजार के दौरान फंड की वैल्यू कम हो सकती है।

Retirement Planning 1

NPS का पूरा पैसा एकमुश्त नहीं मिलेगा

ऊपर टेबल में दिखाया गया NPS का फंड कुल रिटायरमेंट कॉर्पस है। मौजूदा सामान्य नियमों के तहत 60 साल की उम्र पर अधिकतम 60% रकम एकमुश्त निकाली जा सकती है। बाकी रकम से एन्युटी खरीदनी पड़ती है, जिससे नियमित पेंशन मिलती है।

उदाहरण के लिए, ₹12,500 की मंथली निवेश से ₹2.85 करोड़ का कॉर्पस बनता है। इसमें से 60% यानी करीब ₹1.71 करोड़ एकमुश्त मिल सकते हैं। बाकी करीब ₹1.14 करोड़ एन्युटी में जा सकते हैं।

PPF में मैच्योरिटी की रकम आपके हाथ में

PPF की मैच्योरिटी अवधि 15 साल है। इसे तय नियमों के तहत आगे बढ़ाया जा सकता है। PPF में बाजार का जोखिम नहीं होता।

सबसे बड़ी बात यह है कि मैच्योरिटी की पूरी रकम आपके नियंत्रण में रहती है। आपको एन्युटी खरीदना जरूरी नहीं होता। आप अपनी जरूरत के हिसाब से पैसा इस्तेमाल कर सकते हैं।

रिटायरमेंट के लिए कौन बेहतर?

अगर आपको सुरक्षित रिटर्न चाहिए, तो PPF बेहतर हो सकता है। अगर आपकी उम्र कम है और रिटायरमेंट में काफी समय बाकी है, तो NPS बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद कर सकता है।

दोनों में निवेश करना भी एक विकल्प है। इससे बाजार की ग्रोथ और सुरक्षित निवेश, दोनों का फायदा मिल सकता है।

Retirement Planning: क्या हो रिटायरमेंट की सबसे बेस्ट स्ट्रेटजी? NPS, EPF और एन्युटी पर समझिए एक्सपर्ट का ये मास्टर प्लान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।