Lenskart Block Deal: एक झटके में बिके ₹1895 करोड़ के शेयर, कीमत 5% लुढ़की

चश्मे बनाने वाली कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस के शेयरों में 12 अक्टूबर को सुबह के कारोबार में 5 प्रतिशत तक की गिरावट दिखाई दी। BSE पर शेयर 643.80 रुपये के लो तक गया। ब्लॉक डील के जरिए कंपनी के 2.93 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई है। ये शेयर कंपनी की 1.67 प्रतिशत इक्विटी के बराबर हैं। शेयरों को 647 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बेचा गया है। इन शेयरों की कुल वैल्यू 1,895 करोड़ रुपये है। शेयरों को किसने बेचा और किसने खरीदा, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

वीकेंड पर CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि अल्फा वेव वेंचर्स LP, लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में 1,691 करोड़ रुपये की 1.6 प्रतिशत तक इक्विटी 640 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर बेच सकती है। शेयर बेचने वालों को आगे और हिस्सेदारी बेचने के लिए 30 दिन के लॉक-इन पीरियड का पालन करना होगा। स्टॉक एक्सचेंज के डेटा के अनुसार, जून 2026 तिमाही के आखिर तक लेंसकार्ट में प्रमोटर एंटिटीज की हिस्सेदारी 17.53 प्रतिशत थी।

Alpha Wave Ventures ने अगस्त में भी बेचा था हिस्सा

इससे पहले Alpha Wave Ventures LP ने अगस्त महीने में ब्लॉक डील के जरिए लेंसकार्ट के 2.95 करोड़ शेयर या 1.7 प्रतिशत इक्विटी 1,857 करोड़ रुपये में बेची थी। खरीदारों में नेशनल पेंशन सिस्टम, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड शामिल थे। 3 दिन पहले लेंसकार्ट में सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब केमैन ने BSE पर ब्लॉक डील के जरिए 641.75 रुपये प्रति शेयर की औसत कीमत पर 2,887.9 करोड़ रुपये के 4.5 करोड़ शेयर बेचे थे। सोसाइटे जेनरल ODI ने 688.92 करोड़ रुपये के 1.07 करोड़ शेयर खरीदे।

21 सितंबर 2026 को लेंसकार्ट सॉल्यूशंस में ब्लॉक डील्स के जरिए 3.6 करोड़ शेयरों की बिक्री हुई थी। ट्रांजेक्शन 688 रुपये प्रति शेयर के भाव पर हुआ और डील की कुल वैल्यू 2,468 करोड़ रुपये रही। डील से पहले CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से कहा था कि प्लेटिनम जैस्मीन ए 2018 ट्रस्ट लेंसकार्ट में हिस्सेदारी बेच सकती है। प्लेटिनम जैस्मीन, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA) का एक इनवेस्टमेंट व्हीकल है।

अगस्त और जून में भी सॉफ्टबैंक ने बेचे थे Lenskart के शेयर

इस साल अगस्त में सॉफ्टबैंक विजन फंड (SVF) II लाइटबल्ब (केमैन) लिमिटेड ने लेंसकार्ट में 2.58% हिस्सेदारी ब्लॉक डील के जरिए बेची थी। 4.5 करोड़ शेयर ₹2,887.87 करोड़ में बेचे गए थे। खरीदारों में सोसाइटे जेनरल ओडीआई, गोल्डमैन सैक्स, मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फंड, वैनगार्ड ग्रुप, मॉर्गन स्टेनली, SBI म्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया, HDFC म्यूचुअल फंड जैसे कई घरेलू और वैश्विक निवेशक शामिल थे।

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जून में भी सॉफ्टबैंक समूह ने SVF II लाइटबल्ब (केमैन) के जरिए लेंसकार्ट में 3.25% हिस्सेदारी बेची थी। उस वक्त 5,65,00,000 शेयर बेचे गए थे और ट्रांजेक्शन की वैल्यू ₹2,873.30 करोड़ रही थी। व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड (MF), मिरे एसेट MF, कोटक MF, केनरा रोबेको MF, ICICI प्रूडेंशियल MF, HDFC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस, सोसाइटी जेनरल, मेट्जलर एसेट मैनेजमेंट, गोल्डमैन सैक्स, फिडेलिटी, कॉप्थॉल मॉरीशस इनवेस्टमेंट, इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड, और डेंडाना इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस) लिमिटेड खरीदार रहे थे।

नवंबर 2025 में हुई थी लिस्ट

लेंसकार्ट ने 10 नवंबर, 2025 को शेयर बाजार में एंट्री की थी। इसका IPO 7278.02 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 1.12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर साल 2026 में अब तक लगभग 50 प्रतिशत चढ़ा है।

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Himachal Cabinet decisions: आंगनबाड़ी वर्कर्स और वन मित्रों का मानदेय बढ़ाने को मिली कैबिनेट की मंजूरी, 12,000 नई नौकरियों को भी मिली हरी झंडी

Himachal Cabinet decisions: हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज कैबिनेट बैठक आयोजित की गई, जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। प्रदेशवासियों के लिए सौगातों का पिटारा खोलते हुए सुक्खू सरकार ने राज्य सरकार के लगभग सभी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में 12,000 पद सृजित करने और उनको भरने की मंजूरी दे दी। साथ ही, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और वन मित्रों का मानदेय बढ़ाने को भी स्वीकृति प्रदान की।

मुख्यमंत्री सुक्खू की अध्यक्षता में हुई बैठक में, कैबिनेट ने जल शक्ति विभाग में पैरा पंप ऑपरेटर, पैरा फिटर और मल्टीपर्पस वर्कर समेत 4,090 पैरा-वर्कर को रखने को मंजूरी दी। कैबिनेट ने सहायक वन रक्षक नियुक्त करने की योजना को भी मंजूरी दी। इससे वन विभाग में 500 पद भरने का रास्ता साफ हो गया। हिमाचल कैबिनेट ने 100 और स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने का फैसला किया, जिसके लिए एक नई स्कीम तैयार की जाएगी। एक बयान में कहा गया कि नई योजना आधारित भर्ती के तहत इन स्कूलों में 3,900 टीचिंग और 900 नॉन-टीचिंग पोस्ट भरने को भी मंजूरी दी गई है।

कैबिनेट ने आंगनवाड़ी वर्कर्स का महीने का मानदेय 10,500 रुपये से बढ़ाकर 11,500 रुपये, आंगनवाड़ी सहायकों का 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये और वन मित्रों का 10,000 रुपये से बढ़ाकर 12,000 रुपये करने को मंजूरी दी। प्रदेश कैबिनेट ने सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात विशेष पुलिस अधिकारियों (SPOs) का मानदेय भी 500 रुपये प्रति महीना बढ़ाएने और 100% डिसेबिलिटी वाले लोगों की महीने की पेंशन 1 अप्रैल, 2026 से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने को भी स्वीकृति प्रदान की।

कैबिनेट ने 33 छोटे हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट्स, जिनमें से हर एक की इंस्टॉल्ड कैपेसिटी 5 MW से कम है, के अलॉटमेंट को कैंसिल करने को मंज़ूरी दी, क्योंकि डेवलपर्स उन्हें आगे बढ़ाने को लेकर सीरियस नहीं थे। कैबिनेट बैठक में कांगड़ा जिले की बोह वैली में आपदा प्रभावित परिवारों को एक विशेष राहत पैकेज देने का फैसला किया। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक उप समिति भी बनाई गई, जो राज्य सरकार के कर्मचारियों के उनके होम डिस्ट्रिक्ट और उसी डिस्ट्रिक्ट के अंदर ट्रांसफर को नियमित करने के लिए पूरी गाइडलाइन्स बनाएगी। कैबिनेट ने एम्बुलेंस लिंक रोड्स के डिजाइन, कंस्ट्रक्शन और सर्टिफिकेशन के लिए गाइडलाइन्स को मंजूरी दी, और उन्हें फॉर्मली एक अलग कैटेगरी के तौर पर मान्यता दी ताकि रोड कनेक्टिविटी को जितना हो सके उतना आसान बनाया जा सके।

Agniveer Retirement Benefits: अग्निवीरों का पहला बैच इस दिन होगा रिटायर, 10 लाख रुपये और सरकारी नौकरी में आरक्षण के साथ जानिए मिलेंगी क्या सुविधाएं

Agniveer Retirement Benefits: देश की तीनों सेनाओं में अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीरों की भर्ती 4 साल पहले हुई थी। इस योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों का पहला बैच भारतीय नौसेना में चार साल की सेवा पूरी करके 21 नवंबर 2026 को रिटायर होने जा रहा है। यह ऐतिहासिक पल होने के साथ ही बेहद अहम भी होगा, क्योंकि अब सभी का ध्यान सेना से सेवा निवृत्त होने वाले इन युवाओं के भविष्य पर होगा। सरकार ने इनके पुनर्वास और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या पुख्ता इंतजाम किए हैं।

अग्निपथ योजना के तहत देश की सेनाओं में 4 साल पहले अग्निवीरों की भर्ती के समय देशभर में इसको लेकर भारी चर्चा और बहस छिड़ी थी। भारतीय नौसेना से अग्निवीरों का पहला बैच 21 नवंबर 2026 को 4 साल की सेवा पूरी करके रिटायर होगा। अग्निपथ योजना के तहत लगभग 75% अग्निवीर सेवा मुक्त हो जाएंगे। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 25% युवाओं को सेना में स्थायी (Permanent) कर लिया जाएगा। खबर है कि तीनों सेनाएं रिटेंशन रेट को बढ़ाने पर विचार कर रही हैं। इस संबंध में सरकार को नया प्रस्ताव भेजने की तैयारी है।

सेवा पूरी होने पर अग्निवीरों को मिलेंगी ये सुविधाएं

सेवा निधि पैकेज : रिटायर हो रहे हर अग्निवीर को एकमुश्त लगभग 10.04 लाख रुपये का सेवा निधि पैकेज मिलेगा. यह रकम टैक्स-फ्री होगी। इसमें युवा का अपना योगदान, सरकार का बराबर का हिस्सा और उस पर मिलने वाला ब्याज शामिल होता है।

जीवन बीमा कवर : सेवा काल के दौरान अग्निवीरों को 48 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। यह उनके और उनके परिवार के लिए बड़ा सुरक्षा कवच साबित होगा।

स्किल सर्टिफिकेट : रिटायर होने वाले अग्निवीरों को स्किल सर्टिफिकेट (कौशल प्रमाण पत्र) दिया जाता है। इससे उन्हें आगे प्राइवेट या सरकारी नौकरी में इंटरव्यू के दौरान प्राथमिकता मिल सकेगी। हालांकि, इन्हें ग्रेच्युटी, पेंशन या मेडिकल और कैंटीन की आजीवन सुविधाएं नहीं मिलेंगी।

रिटायर अग्निवीरों के भविष्य के लिए सरकार का प्लान

सरकार के साथ कई मंत्रालय सेवानिवृत्त होने वाले अग्निवीरों का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए कई विकल्प तैयार किए हैं। आइए जानें :

अर्धसैनिक बलों (CAPF) में 50% आरक्षण : बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और असम राइफल्स जैसी सुरक्षा बलों में कॉन्स्टेबल (जनरल ड्यूटी) और राइफलमैन के पदों पर पूर्व अग्निवीरों के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित कर दी गई हैं। इनके लिए ‘पूर्व-अग्निवीर’ नाम से नई कैटेगरी भी बनाई गई है।

गृह मंत्रालय का नया पोर्टल : पूर्व अग्निवीरों को कॉरपोरेट और सरकारी सेक्टर में आसानी से एडजस्ट करने के लिए गृह मंत्रालय विशेष पोर्टल तैयार कर रहा है। इसके जरिए इन्हें नौकरी के ढेरों विकल्प मिलेंगे।

राज्य सरकारों का कोटा और आयु में छूट : उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की सरकारों ने पुलिस और अन्य विभागों में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 से 20 प्रतिशत तक पद रिजर्व किए हैं। साथ ही, आयु सीमा में 3 से 5 साल तक की छूट का ऐलान भी किया गया है, जिससे ये युवा आसानी से सरकारी नौकरी पा सकें।

फिजिकल और लिखित परीक्षा से छूट : इन सुरक्षा बलों में भर्ती के दौरान पूर्व अग्निवीरों को फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST), फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) और लिखित परीक्षा से छूट दी जाएगी।

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Jio Platforms IPO: ₹1065-₹1119 रह सकता है प्राइस बैंड, 21 अक्टूबर से ओपनिंग; 10 पॉइंट में जानें अहम डिटेल

रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के IPO का बेसब्री से इंतजार हो रहा है। और हो भी क्यों न, लगभग दो दशकों यानि कि 20 साल बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्रुप की किसी कंपनी का IPO आ रहा है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू साबित हो सकता है। Jio Platforms IPO पर ताजा अपडेट इसके प्राइस बैंड को लेकर है। यह कितना रहने वाला है, इस बारे में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं जियो IPO को लेकर अब तक सामने आईं खास बातें…

संभावित प्राइस बैंड और साइज

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वालों के हवाले से कहा गया है कि Jio Platforms Ltd. के प्रस्तावित IPO के लिए प्राइस बैंड 1065-1119 रुपये प्रति शेयर रहने वाला है। ब्लूमबर्ग की कैलकुलेशन के अनुसार, प्राइस बैंड के ऊपरी स्तर पर Jio के IPO से लगभग 30200 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे। इससे यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।

वैल्यूएशन

रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी 10.3 लाख करोड़ रुपये तक की मार्केट वैल्यू का लक्ष्य रख रही है। लेकिन बातचीत अभी जारी है और प्राइस बैंड, वैल्यूएशन और टाइमिंग सहित अन्य डिटेल अभी भी बदल सकती हैं। IPO का ड्राफ्ट कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास इस साल जून में जमा किया गया था। मंजूरी अगस्त में मिली।

IPO कब खुलेगा और कब लिस्ट होगा

यह पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर को खुल सकता है। एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकते हैं। 20 अक्टूबर को शेयर बाजार में दशहरा की छुट्टी है। कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजारों में लिस्ट हो सकते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबार में टेलिकॉम, डिजिटल सर्विसेज, उद्यम समाधान और उभरते टेक्नोलॉजी इनीशिएटिव शामिल हैं। इसकी टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड देश में सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।

Jio IPO में कितने नए शेयर

19 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं सालाना आम बैठक के दौरान चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि Jio Platforms को अपने प्रस्तावित IPO के लिए बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुताबिक, इश्यू में 10 रुपये फेस वैल्यू वाले 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करने की योजना है।

बुक रनिंग लीड मैनेजर

ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में Jio Platforms ने घोषणा की कि उसने IPO के लिए 19 इनवेस्टमेंट बैंकों को बुक रनिंग लीड मैनेजर (BRLM) के तौर पर नियुक्त किया है। इस ऑफर के लिए BRLM हैं- कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, CLSA इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स (इंडिया) सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज (पहले IIFL सिक्योरिटीज), जेफरीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, JM फाइनेंशियल, JP मॉर्गन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और 360 ONE WAM।

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कैसे बन सकता है देश का सबसे बड़ा IPO

भारत में अभी तक सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू Hyundai Motor India का रहा है। यह अक्टूबर 2024 में आया था और इसका साइज 27,858.75 करोड़ रुपये या 294.97 करोड़ डॉलर रहा था। अब जियो का IPO 30000 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहने वाला है।

रिजर्व हिस्से पर क्या अपडेट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पता चला है कि IPO में जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स की सब्सिडियरीज के स्थायी कर्मचारियों के लिए शेयर रिजर्व होंगे। इसके बाद नेट इश्यू का 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) के लिए, 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NIIs) के लिए और 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व रहेगा। QIB के हिस्से में से 60 प्रतिशत तक हिस्सा एंकर निवेशकों को अलॉट किया जा सकता है। इसमें से कुछ हिस्सा विशेष रूप से म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियों और पेंशन फंड्स के लिए रिजर्व होगा।

IPO के पैसे कैसे होंगे इस्तेमाल

जियो प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कंपनी की टेलिकॉम यूनिट रिलायंस जियो इंफोकॉम के कर्ज को कुछ हद तक या पूरी तरह चुकाने के लिए और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय रोड शो कंप्लीट

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि जियो प्लेटफॉर्म्स ने अमेरिका, ब्रिटेन, दुबई, हांगकांग और सिंगापुर में अपने अंतरराष्ट्रीय रोडशो पूरे कर लिए हैं। अब वह 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में सेबी के पास IPO का फाइनल ड्राफ्ट जमा कर सकती है। कंपनी भारत में भी IPO रोडशो आयोजित कर सकती है। IPO के मामले में रोड शो का मतलब है- संबंधित कंपनी के मैनेजमेंट की ओर से इनवेस्टर्स के साथ मीटिंग और रिप्रेजेंटेशंस। मीटिंग्स में IPO ला रही कंपनी के अधिकारी संभावित निवेशकों से बातचीत करते हैं और उन्हें समझाते हैं कि उनके IPO में निवेश करना क्यों उचित है।

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जियो प्लेटफॉर्म्स की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का रेवेन्यू 14.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 1.47 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 15.1 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 30,000 करोड़ रुपये रहा। EBITDA 18.8 प्रतिशत बढ़कर 76,255 करोड़ रुपये हो गया। वित्त वर्ष 2025-26 में Jio के ग्राहकों की संख्या 52.44 करोड़ रही। जियो 5G के सब्सक्राइबर्स की संख्या 26.8 करोड़ है।

Jio Platforms में किसके पास कितनी हिस्सेदारी

रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मेटा के पास 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं गूगल की 7.73 प्रतिशत, सऊदी अरेबिया वेल्थ फंड्स की 2.31 प्रतिशत, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स की 2.31 प्रतिशत, सिल्वर लेक की 1.88 प्रतिशत, मुबादला की 1.85 प्रतिशत, जीए सिंगापुर की 1.34 प्रतिशत, अबुधाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी की 1.16 प्रतिशत और टीपीजी कैपिटल की 0.93 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

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EPF vs NPS: हर महीने ₹10,000 का निवेश, 30 साल में कहां तेजी से बढ़ेगा आपका पैसा? समझिए पूरा गणित

EPF vs NPS Return Calculation: रिटायरमेंट के लिए अगले 30 सालों तक हर महीने ₹10,000 का योगदान देना एक बड़ा और सुरक्षित कॉर्पस तैयार कर सकता है। लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में से कौन सा विकल्प आपको अधिक रिटर्न देगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपका पैसा किस तरह इन्वेस्ट और ग्रो हो रहा है।

EPF जहां सरकार द्वारा हर वित्त वर्ष घोषित की जाने वाली निश्चित ब्याज दर पर काम करता है, वहीं NPS का पैसा बाजार से जुड़े एसेट्स जैसे- शेयर बाजार, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी प्रतिभूतियों में लगाया जाता है।

अगर आप बिना किसी वार्षिक बढ़ोतरी के 30 सालों तक हर महीने ₹10,000 का योगदान करते हैं, तो आपकी कुल जमा राशि ₹36 लाख होगी। आइए दोनों विकल्पों के गणित और नियमों को विस्तार से समझते हैं:

EPF का गणित: सुरक्षित और निश्चित ब्याज का विकल्प

सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए EPF पर 8.25% की ब्याज दर तय की है। अगर हम पूरे 30 सालों के लिए 8.25% की औसत वार्षिक ब्याज दर मानकर चलें, तो हर महीने ₹10,000 का निवेश बढ़कर लगभग ₹1.57 करोड़ हो जाएगा।

वैसे यह 8.25% का रिटर्न गारंटीड नहीं है, क्योंकि EPF की ब्याज दरें हर साल सरकार द्वारा संशोधित की जाती हैं। हालांकि, इसका रिटर्न दैनिक बाजार के उतार-चढ़ाव से पूरी तरह सुरक्षित रहता है।

NPS का गणित: बाजार की ताकत और कंपाउंडिंग

NPS में कोई फिक्स रिटर्न की गारंटी नहीं होती। इसमें आपका पैसा आपकी पसंद के अनुसार इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स और सरकारी सिक्योरिटीज में बांटा जाता है। ‘एक्टिव चॉइस’ के तहत आप इक्विटी में 75% तक एक्सपोजर ले सकते हैं। बाजार से जुड़े होने के कारण NPS का कॉर्पस EPF की तुलना में काफी अलग और बड़ा हो सकता है।

10% वार्षिक रिटर्न पर: अगर NPS पर औसतन 10% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो आपका ₹10,000 का मासिक निवेश 30 साल में बढ़कर लगभग ₹2.26 करोड़ हो जाएगा।

9% वार्षिक रिटर्न पर: अगर रिटर्न 9% रहता है, तो कुल कॉर्पस लगभग ₹1.83 करोड़ बनेगा।

(नोट: पेंशन फंड नियामक PFRDA के अनुसार, NPS का अंतिम फंड बाजार के प्रदर्शन, आपके द्वारा चुने गए एसेट एलोकेशन और एन्युटी खरीदारी के प्रतिशत पर निर्भर करता है।)

रिटायर्मेंट पर पैसे निकालने के नियम: EPF और NPS का अंतररिटायर्मेंट के समय

जमा राशि निकालने के मामले में EPF और NPS के नियम बिल्कुल अलग हैं। EPF मुख्य रूप से एक नियोक्ता से जुड़ा बचत ढांचा है, जिसमें 58 साल की उम्र में रिटायरमेंट पर जमा हुई पूरी 100% राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है। इसके अलावा, नौकरी के दौरान घर खरीदने, बच्चों की शिक्षा, शादी या बीमारी जैसी विशेष जरूरतों के लिए शर्तों के तहत आंशिक निकासी का विकल्प भी मिलता है।

दूसरी ओर, NPS एक स्वतंत्र और फ्लेक्सिबल पेंशन खाता है, जो रिटायरमेंट पर नियमित आय देने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। NPS के नियमों के तहत रिटायरमेंट के समय कुल कॉर्पस का अधिकतम 60% हिस्सा ही एकमुश्त निकाला जा सकता है, जबकि कम से कम 40% राशि से एन्युटी खरीदना अनिवार्य होता है ताकि जीवनभर पेंशन मिलती रहे। इसमें भी गंभीर बीमारी या बच्चों की उच्च शिक्षा/शादी जैसी विशेष परिस्थितियों में सीमित आंशिक निकासी की अनुमति दी जाती है।

टैक्स छूट और नियम

EPF पर टैक्स: EPF मुख्य रूप से EEE (Exempt-Exempt-Exempt) श्रेणी में आता है। हालांकि, अगर कर्मचारी का सालाना योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होता है, तो उस अतिरिक्त योगदान पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है।

NPS पर टैक्स: धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख की सीमा के अलावा, NPS में धारा 80CCD (1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त टैक्स छूट मिलती है। रिटायर्मेंट के समय निकाली गई 60% एकमुश्त राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है।

आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?

केवल आंकड़ों की तुलना करें, तो 10% रिटर्न के अनुमान के साथ NPS (₹2.26 करोड़) EPF (₹1.57 करोड़) से बाजी मार लेता है। लेकिन इस अतिरिक्त रिटर्न के साथ बाजार का जोखिम भी जुड़ा हुआ है।

वैसे आप बिना किसी जोखिम के सुरक्षित रिटर्न चाहते हैं, तो EPF बेहतर है। अगर आप लंबी अवधि के लिए बाजार का जोखिम उठाकर अधिक वेल्थ बनाना चाहते हैं, तो NPS सही विकल्प है।

दोनों का कॉम्बिनेशन भी बढ़िया विकल्प है। नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए यह ‘EPF या NPS’ का चुनाव नहीं है। PFRDA के नियमों के अनुसार, आप EPF के साथ-साथ अलग से NPS खाता भी चला सकते हैं।

रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय सिर्फ बड़े आंकड़े न देखें, यह भी देखें कि आप कितना मार्केट रिस्क ले सकते हैं, आपको रिटायरमेंट से पहले कितनी लिक्विडिटी चाहिए और क्या आप नियमित पेंशन चाहते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आज आपकी मंथली सैलरी 50 हजार रुपये है तो रिटायरमेंट के लिए कितना फंड पर्याप्त होगा?

कई लोग रिटायरमेंट के लिए सेविंग्स और इनवेस्टमेंट तो करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता होता कि उनका रिटायरमेंट फंड कितना बड़ा होना चाहिए। एक्सपर्ट का कहना है रिटायरमेंट फंड का साइज इस बात पर निर्भर करता है कि आज आपका हर महीने का खर्च कितना है।

रिटायरमेंट फंड के कैलकुलेशन का फॉर्मूला

डीएसपी पेंशन फंड के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर रमनीक कुंदरा के मुताबिक, रिटायरमेंट फंड आपके सालाना खर्च का करीब 25-30 गुना होना चाहिए। इसे एक उदाहरण की मदद से आसानी से समझ सकते हैं। मान लीजिए अगर किसी व्यक्ति का मंथली खर्च रिटायरमेंट से ठीक पहले 50,000 रुपये है तो इसका मतलब है कि उसका सालाना खर्च 6 लाख रुपये होगा। 6 लाख का 25 से 30 गुना 1.5 से 1.8 करोड़ होगा।

निवेश का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी में लगाना होगा

कुंदरा ने कहा कि रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए निवेश की जल्द शुरुआत करना सबसे जरूरी है। दूसरा, आपको निवेश में अनुशासन बरतना होगा। लंबी अवधि में बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करने लिए निवेश का एक बड़ा हिस्सा इक्विटी यानी शेयरों में लगाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे टारगेट तय करने से बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना आसान हो जाता है।

छोटे-छोटे टारगेट तय करने से होगी आसानी 

उन्होंने बताया कि 30 साल की उम्र में आपका रिटायरमेंट फंड आपकी एक साल की इनकम के बराबर होना चाहिए। 40 की उम्र तक यह आपकी सालाना इनकम का तीन गुना होना चाहिए। 50 की उम्र तक यह आपकी सालाना इनकम का पांच से छह गुना तक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट फंड पर मार्केट के उतार-चढ़ाव से ज्यादा निगेटिव असर इनफ्लेशन का पड़ता है।

शेयरों का सालाना रिटर्न 12-13 फीसदी के बीच 

भारत में शेयर बाजारों का लंबी अवधि का रिटर्न उतार-चढ़ाव के बावजूद सालाना 12-13 फीसदी रहा है। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) अभी सब्सक्राइबर को शेयरों में 75 फीसदी तक ऐलोकेशन की इजाजत देता है। मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क के तहत नए इनवेस्टमेंट ऑप्शंस तो इक्विटी में 100 फीसदी तक ऐलोकेशन की इजाजत देते हैं।

रिटायरमेंट करीब आने पर पैसा डेट में शिफ्ट करना जरूरी

कुंदरा ने कहा कि रिटायरमेंट जैसे-जैसे नजदीक आता है इनवेस्टर को अपनी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी में बदलाव करना जरूरी हो जाता है। रिटायरमेंट से पहले के कुछ सालों में फोकस वेल्थ बढ़ाने की जगह उसके प्रोटेक्शन पर होना चाहिए। इसकी वजह यह है कि अचानक शेयर बाजार में तेज गिरावट से आपका रिटायरमेंट फंड का एक बड़ा हिस्सा डूब सकता है।

दो-तीन साल के खर्च का पैसा लिक्विड फंड में रखने की सलाह

ऐसी स्थिति से बचने के लिए इनवेस्टर को धीरे-धीरे अपना निवेश इक्विटी की जगह डेट या लिक्विड एसेट्स में शिफ्ट करना पड़ता है। इसकी प्रक्रिया रिटायरमेंट के 5 से 10 पहले शुरू की जा सकती है। इसके अलावा दो से तीन साल की जरूरत का पैसा लिक्विड इनवेस्टमेंट में डाल देना समझदारी है। इसका फायदा यह होता है कि बाजार में गिरावट की स्थिति में इनवेस्टर को अपने जरूरी खर्च के लिए इक्विटी कम कीमत पर बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ता है।

बुजुर्ग किराएदार को घर से निकालने पर सरकार संकट में:स्पेन में महंगे किराए से जुड़ा प्रस्ताव संसद में गिरा, 8 महीने पहले चुनाव होंगे

स्पेन में 87 साल की एक महिला को घर से निकालना बहुत बड़ा मुद्दा बन गया। महंगे किराए और लोगों को घर से निकाले जाने के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। मामला इतना बढ़ा कि सरकार को किराएदारों को राहत देने के लिए संसद में इमरजेंसी बिल लाने पड़े। लेकिन सरकार इन्हें पास नहीं करा सकी। इसके बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने तय समय से करीब 8 महीने पहले आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया। स्पेन में 29 नवंबर 2026 को वोटिंग होगी। 70 साल से घर में रह रही थी बुजुर्ग मामले की शुरुआत 23 सितंबर को हुई। मैड्रिड में 87 साल की मारिया डेल कार्मेन अबास्कल को उस घर से निकाल दिया गया, जहां वह करीब 70 साल से रह रही थीं। यह घर अबास्कल परिवार के पास कई दशकों से किराए पर था। 2018 में घर के मूल मालिक ने पूरी इमारत एक रियल एस्टेट कंपनी को बेच दी। इसके बाद कंपनी और अबास्कल में किराए को लेकर विवाद शुरू हो गया। कंपनी ने किराया 500 यूरो से बढ़ाकर 2650 यूरो कर दिया। अबास्कल की मासिक पेंशन ही करीब 1,350 यूरो थी। यानी मांगा गया किराया उनकी पूरी मासिक आय से भी काफी ज्यादा था। इसी वजह से वह नया किराया देने की स्थिति में नहीं थीं। इसके बाद मामला कोर्ट में चला गया था। घटना के बाद पूरे देश में विरोध शुरू हुआ अबास्कल को घर से निकाले जाने की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से फैल गया। लोगों का कहना था कि अगर 87 साल की बुजुर्ग महिला अपनी पूरी पेंशन देने के बाद भी घर का किराया नहीं चुका सकतीं, तो यह सिर्फ एक परिवार की समस्या नहीं है। मैड्रिड समेत कई शहरों में लोगों ने महंगे किराए और बेदखली के खिलाफ प्रदर्शन किए। अबास्कल का मामला धीरे-धीरे स्पेन के बढ़ते आवास संकट का प्रतीक बन गया। सरकार पर भी दबाव बढ़ने लगा। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की सरकार ने कहा कि बुजुर्गों और दूसरे कमजोर किराएदारों को घर से निकालने से रोकने के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है। सरकार ने दो इमरजेंसी बिल पेश किए, दोनों खारिज 29 सितंबर को सरकार ने किराएदारों को राहत देने के लिए संसद में दो इमरजेंसी बिल पेश किए। पहला बिल: इसमें कमजोर किराएदारों को 2030 तक घर से निकालने से रोकने की योजना थी। साथ ही किराए बढ़ाने पर कुछ पाबंदियां लगाने और बड़े निवेशकों के घर खरीदने पर रोक लगाने की बात थी। छोटे मकान मालिकों और किराएदारों को टैक्स में राहत देने का भी प्रावधान था। दूसरा बिल: इसमें किराएदारों के मौजूदा किराए के समझौते को आगे बढ़ाने की बात थी। यानी समझौता खत्म होने के बाद उन्हें तुरंत घर खाली नहीं करना पड़ता और उन्हें कुछ और समय तक उसी घर में रहने का मौका मिलता। PM पेद्रो सांचेज की सरकार के पास संसद में बहुमत नहीं है। इसलिए उसे हर बड़े फैसले के लिए दूसरी पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ती है। सरकार को उम्मीद थी कि आवास संकट को देखते हुए दूसरी पार्टियां इन उपायों का समर्थन करेंगी। लेकिन उसे जरूरी समर्थन नहीं मिला। 2 अक्टूबर को हुए वोटिंग में दोनों प्रस्ताव पास नहीं हो सके। बिलों को समर्थन नहीं मिलने की 4 वजहें वजह 1: दूसरी पार्टियों को लगा कि इससे किराए के घर कम हो सकते हैं: विरोध करने वाली पार्टियों का कहना था कि अगर मकान मालिकों पर ज्यादा नियम लगाए गए तो वे अपने घर किराए पर देने से बच सकते हैं। इससे बाजार में किराए के लिए घर कम पड़ सकते हैं। वजह 2: किराया और बढ़ने का खतरा: जब किराए के लिए घर कम होंगे, तो बचे हुए घरों का किराया बढ़ सकता है। यानी किराएदारों को राहत देने के बजाय समस्या और बड़ी हो सकती है। वजह 3: छोटे मकान मालिकों को लेकर भी आपत्ति थी: जुंत्स का कहना था कि सरकार की योजना में छोटे मकान मालिकों के हितों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। पार्टी चाहती थी कि उनके लिए भी ज्यादा राहत और सुरक्षा हो। वजह 4: सरकार के राजनीतिक विरोधी भी साथ नहीं आए: विपक्षी पार्टियां PP और वॉक्स पहले से ही सांचेज सरकार की आवास नीति का विरोध कर रही थीं। उन्होंने दोनों बिलों का समर्थन नहीं किया। सांचेज ने समय से पहले चुनाव का फैसला क्यों लिया? स्पेन में किराए का संकट कितना बड़ा है? 1. सस्ते घरों की संख्या बेहद कम है: स्पेन में कम आय वाले लोगों के लिए सस्ते सरकारी घर बहुत कम हैं। कुल घरों में ऐसे घरों की हिस्सेदारी सिर्फ 1.5 % है। 2. महीनेभर की कमाई के करीब पहुंचा किराया: रॉयटर्स के मुताबिक कुछ मामलों में किराए की कीमत एक युवा व्यक्ति की औसत मासिक कमाई के करीब 99% तक पहुंच गई है। 3. 2028 तक 10 लाख से ज्यादा घरों की कमी का खतरा: केंद्रीय बैंक ने चेतावनी दी है कि अगर घरों की कमी दूर नहीं हुई तो 2028 तक 10 लाख से ज्यादा घरों की कमी हो सकती है।

8th Pay Commission: इस हफ्ते बेंगलुरु में बड़ी बैठक, कर्मचारियों की सैलरी व पेंशन पर होंगी ये 5 बड़ी चर्चाएं!

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की बैठकों की श्रृंखला में अगला सबसे बड़ा पड़ाव बेंगलुरु है। आयोग की टीम 7 और 8 अक्टूबर को बेंगलुरु के दो दिवसीय दौरे पर रहेगी। बैठक में भाग लेने और अपनी मांगें रखने के लिए कर्मचारी संघों, एसोसिएशनों और पेंशनभोगी संगठनों को अधिकारिक पोर्टल के माध्यम से 18 सितंबर तक आवेदन करने का समय दिया गया था। आयोग इस बैठक में प्रतिनिधिमंडलों और हितधारकों के साथ आमने-सामने की विस्तृत चर्चा करने जा रहा है।

किन-किन बड़ी बातों पर होगी चर्चा?

बेंगलुरु बैठक में केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, रेलवे, रक्षा प्रतिष्ठानों, आयकर और अन्य केंद्रीय विभागों के क्षेत्रीय प्रतिनिधि शामिल होंगे। चर्चा का मुख्य फोकस इन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा:

वेतन और फिटमेंट फैक्टर: नए वेतनमान के तहत बेसिक पे का निर्धारण करने वाले फिटमेंट फैक्टर पर अंतिम सहमति बनाना।

पेंशन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स: पेंशनभोगियों की पेंशन संशोधन, कम्यूटेशन अवधि घटाने और फैमिली पेंशन के नियमों को आसान बनाने पर मंथन।

भत्ते: बेंगलुरु जैसे तेजी से बढ़ते और महंगे शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस और मेडिकल सुविधाओं में बढ़ोतरी पर चर्चा।

वार्षिक वेतन वृद्धि: मौजूदा 3% सालाना वेतन वृद्धि दर की समीक्षा और इसे बढ़ाने की मांग।

कार्य परिस्थितियां व पदोन्नति: कैडर पुनर्गठन और समयबद्ध पदोन्नति से जुड़े स्थानीय मुद्दे।

कर्मचारी यूनियंस की मुख्य मांगें

कर्मचारी यूनियनों और नेशनल काउंसिल-जेसीएम (NC-JCM) की ओर से 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखी जा रही प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

 1. न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹69,000 करना: कर्मचारी संघों की मांग है कि न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 प्रति माह किया जाए।

2. 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग: बेसिक पे के रिवीजन के लिए 3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है।

3. 5-यूनिट फैमिली फॉर्मूला: न्यूनतम वेतन तय करने के लिए कर्मचारी और परिवार के साथ आश्रित माता-पिता को भी शामिल करते हुए ‘5-यूनिट फॉर्मूला’ लागू करने की मांग।

4. वार्षिक इंक्रीमेंट 6% हो: सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6% करने की मांग की जा रही है।

5. कम्यूटेड पेंशन रीस्टोरेशन: कम्यूटेड पेंशन की बहाली अवधि को 15 साल से घटाकर 11 साल करने का प्रस्ताव।

ये सभी आंकड़े और शर्तें फिलहाल कर्मचारी यूनियनों द्वारा रखी गई मांगें हैं। आयोग की सिफारिशों और सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही नई सैलरी और पेंशन की दरें तय होंगी।

CIBIL स्कोर 750 होने के बाद भी लोन रिजेक्ट क्यों हो जाता है? ये 5 बड़े कारण जान लीजिए

आपका CIBIL स्कोर 750 है। आपने समय पर पुराने लोन चुकाए हैं। Credit Card का बिल भी समय पर भरते हैं। फिर भी बैंक ने नया लोन देने से मना कर दिया। ऐसा होना संभव है। दरअसल, बैंक सिर्फ CIBIL स्कोर देखकर लोन नहीं देता। वह आपकी पूरी आर्थिक स्थिति देखता है।

कमाई के मुकाबले EMI ज्यादा

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी 60,000 रुपये है और पहले से 35,000 रुपये की EMI जा रही है। अब आपको किसी काम के लिए नया लोन चाहिए। CIBIL स्कोर 780 होने के बावजूद बैंक यह देखेगा कि नई EMI जुड़ने के बाद आपके पास घर का खर्च चलाने के लिए कितना पैसा बचेगा। बोझ ज्यादा लगा तो लोन रिजेक्ट हो सकता है।

ऐसे में नया लोन लेने से पहले अपनी मौजूदा EMI का बोझ कम करने की कोशिश करें। अगर कोई छोटा कर्ज बाकी है और उसे चुकाना मुमकिन है, तो पहले उसे खत्म करना बेहतर हो सकता है।

जरूरत से ज्यादा लोन मांगना

कई बार समस्या CIBIL स्कोर में नहीं, लोन की रकम में होती है। जैसे कि आपकी सैलरी 70,000 रुपये है। और आप 30 लाख रुपये का पर्सनल लोन मांग रहे हैं। बैंक को लग सकता है कि इस रकम की EMI आपकी कमाई के हिसाब से ज्यादा पड़ रही है।

इसलिए जितनी जरूरत है, उतने लोन के लिए आवेदन करें। लोन की रकम कम होने पर EMI भी कम होगी। इससे आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर दिख सकती है।

क्रेडिट कार्ड पर लगातार भारी खर्च

क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर भरने से आपका CIBIL स्कोर अच्छा रह सकता है। लेकिन बैंक यह भी देखता है कि आप कार्ड का इस्तेमाल कितना कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर कार्ड की लिमिट 2 लाख रुपये है और आप हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं, तो बैंक मान सकता है कि आप लोन पर ज्यादा निर्भर हैं।

ऐसे में क्रेडिट कार्ड की लिमिट का हमेशा 30% से कम खर्च करने की कोशिश करें। बिल समय पर भरें और कार्ड की पूरी लिमिट के आसपास लगातार खर्च करने से बचें।

कई बैंकों में एक साथ आवेदन

लोन नहीं मिला तो दूसरे बैंक में आवेदन कर दिया। वहां भी नहीं मिला तो तीसरे बैंक में कोशिश कर ली। इस तरह कम समय में कई जगह आवेदन करना ठीक नहीं माना जाता। हर बार बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट देख सकता है और इसकी इंक्वायरी रिपोर्ट में दर्ज हो सकती है।

आपको आवेदन करने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर, पात्रता और EMI देख लेनी चाहिए। फिर अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनना चाहिए। ताकि कई जगह आवेदन करने की नौबत न आए।

CIBIL रिपोर्ट में गलती

यह भी हो सकता है कि आपका CIBIL स्कोर अच्छा हो, लेकिन रिपोर्ट में कोई गलत जानकारी दर्ज हो। जैसे कोई ऐसा लोन दिख रहा हो जो आपने लिया ही नहीं। पुराने लोन का भुगतान हो चुका हो, लेकिन रिपोर्ट में बकाया दिख रहा हो।

इसलिए लोन लेने से पहले अपनी CIBIL रिपोर्ट जरूर देख लें। कोई गड़बड़ी दिखे तो उसे ठीक कराने के लिए विवाद दर्ज करें। रिपोर्ट में गलत जानकारी रहने से आगे भी परेशानी हो सकती है।

सिर्फ 750 का स्कोर काफी नहीं

CIBIL स्कोर 750 या उससे ऊपर होना अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री का संकेत हो सकता है। लेकिन बैंक के पास लोन मंजूर करने के लिए कई और पैमाने होते हैं। आपकी कमाई कितनी है, पहले से कितना कर्ज है और नई EMI आसानी से चुका पाएंगे या नहीं, ये बातें भी देखी जाती हैं।

इसलिए लोन लेने से पहले सिर्फ अपना CIBIL स्कोर मत देखिए। अपनी EMI, कुल कर्ज और Credit Card के इस्तेमाल पर भी नजर डालिए। कई बार यहीं पर वह वजह छिपी होती है, जिसकी वजह से अच्छा स्कोर होने के बावजूद लोन का आवेदन रिजेक्ट हो जाता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।