Stocks to Watch: आज 14 अगस्त को Tata Motors PV, Honasa, Piramal Pharma, LG समेत इन शेयरों में दिखने वाली है बड़ी हलचल

शुक्रवार, 14 अगस्त को कई शेयरों में तेज उतारचढ़ाव देखने को मिल सकता है। इनमें टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, होनासा कंज्यूमर, पिरामल फार्मा, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, फिजिक्सवाला, अशोक लीलैंड, जैसे नाम प्रमुख हैं। इनमें से कुछ कंपनियों ने एक दिन पहले बाजार बंद होने के बाद तिमाही नतीजे जारी किए थे। लिहाजा बाजार आज, शुक्रवार को प्रतिक्रिया देगा। वहीं कुछ कंपनियों के नतीजे आज सामने आएंगे। साथ ही कुछ कंपनियां ऐसी भी हैं, जिन्होंने एक दिन पहले नई डील, कॉन्ट्रैक्ट या अन्य तरह के ​डेवलपमेंट्स की जानकारी दी थी।

इसके अलावा शुक्रवार को मेनबोर्ड सेगमेंट में 2 और SME सेगमेंट में एक कंपनी की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही करीब 40 कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के तिमाही रिजल्ट

फिजिक्सवाला, अशोक लीलैंड, अल्केम लैबोरेटरीज, भारत डायनामिक्स, 3M इंडिया, डिशमैन कार्बोजन एम्सिस, ईजी ट्रिप प्लानर्स, जिनकुशल इंडस्ट्रीज, नैटको फार्मा, GVK पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वालिटी वॉल्स (इंडिया), पुरवांकरा, NMDC, टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस, पतंजलि फूड्स, एपीजे सुरेंद्र पार्क होटल्स, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर, INDO-MIM, सूरज एस्टेट डेवलपर्स, ट्यूब इन्वेस्टमेंट्स ऑफ इंडिया, जी मीडिया कॉर्पोरेशन और स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Tata Motors Passenger Vehicles: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 80.2% घटकर ₹775 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 9.3% बढ़कर ₹95,799 करोड़ हो गया।

Honasa Consumer: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 118.4% बढ़कर ₹90.2 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹755.9 करोड़ हो गया।

KRBL: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 73.2% बढ़कर ₹260.7 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 5.6% घटकर ₹1,495.9 करोड़ रहा।

Indigo Paints: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 61% बढ़कर ₹41.7 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 19.7% की बढ़ोतरी के साथ ₹369.7 करोड़ रहा।

Welspun Living: Q1 में शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 83.6% बढ़कर ₹160.7 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 23.7% बढ़कर ₹2,795.5 करोड़ हो गया।

LG Electronics India: Q1 में मुनाफा सालाना आधार पर 27.2% बढ़कर ₹652.9 करोड़ हो गया। रेवेन्यू 15.5% बढ़कर ₹7,233.4 करोड़ रहा।

Piramal Pharma: CNBC-TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, एक मौजूदा शेयरहोल्डर ब्लॉक डील के जरिए कंपनी में 6% हिस्सेदारी बेच सकता है। इस डील का साइज लगभग ₹1,750 करोड़ होने का अनुमान है।

Aditya Birla Real Estate: कंपनी की सब्सिडियरी, बिड़ला एस्टेट्स ने नवी मुंबई मार्केट में एंट्री करने का ऐलान किया है। यह एंट्री वाशी में शिव साई को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के रीडेवलपमेंट के जरिए होगी। यह रीडेवलपमेंट प्रियंका ग्रुप की एक सहयोगी कंपनी के साथ मिलकर किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से लगभग 2,600 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

बल्क और ब्लॉक डील

UltraTech Cement: प्रमोटर कंपनी पिलानी इन्वेस्टमेंट एंड इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन ने 25 लाख शेयर बेचे हैं। यह बिक्री 2,896.25 करोड़ रुपये की रही। दूसरी ओर, कुल 17 घरेलू और ग्लोबल निवेशकों ने पिलानी इन्वेस्टमेंट द्वारा बेचे गए सभी शेयर खरीदे। इन निवेशकों में ICICI प्रूडेंशियल AMC, HDFC AMC, नेशनल पेंशन इंश्योरेंस फंड, कोटक महिंद्रा AMC, एडलवाइस MF, आदित्य बिड़ला सन लाइफ MF, एक्सिस म्यूचुअल फंड, DSP म्यूचुअल फंड, ईस्टस्प्रिंग इन्वेस्टमेंट्स, टाटा म्यूचुअल फंड, टेम्पलटन फंड्स, J.P. मॉर्गन फंड ICVC और व्हाइटओक कैपिटल MF शामिल हैं।

Urban Company: SBI म्यूचुअल फंड ने 3.15 करोड़ इक्विटी शेयर खरीदे हैं। यह सौदा 428.4 करोड़ रुपये का रहा। दूसरी ओर VYC11 ने 96.31 लाख शेयर 130.98 करोड़ रुपये में, VY ​​EM2 ने 18.68 लाख शेयर 25.41 करोड़ रुपये में और Accel India IV (मॉरीशस) ने 2 करोड़ शेयर 272 करोड़ रुपये में बेचे। इसके अलावा, बेसेमर इंडिया कैपिटल होल्डिंग्स II ने अलग से अर्बन कंपनी के 1.21 करोड़ शेयर 170.19 करोड़ रुपये में बेचे।

Renaissance Global: विजय मोहन करनानी ने 11.79 लाख शेयर 12.98 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

RPP Infra Projects: चेन्नई की कंस्ट्रक्शन कंपनी ‘दीवा प्रोजेक्ट्स’ ने प्रमोटरों से लगातार तीन सेशन में 4.99 करोड़ रुपये में 8.48 लाख अतिरिक्त शेयर खरीदे हैं। दूसरी ओर, प्रमोटर ‘यागवी एन ए’ ने 11.66 लाख शेयर 6.88 करोड़ रुपये में बेचे हैं।

Thyrocare Technologies: प्रमोटर Docon Technologies Private Limited ने 1,57,69,696 इक्विटी शेयरों की बिक्री की है। शेयरों की यह संख्या कंपनी की लगभग 9.90 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। दूसरी ओर शेयर खरीदने वालों में HSBC म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC, ICICI Prudential AMC, HBM हेल्थकेयर इन्वेस्टमेंट्स (Cayman), सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स मॉरीशस, व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड, मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर, DSP म्यूचुअल फंड, ITI म्यूचुअल फंड और कुवैत इनवेस्टमेंट अथॉरिटी शामिल हैं।

Seamec: ‘360 ONE पाइप फंड’ ने 2 लाख शेयर 30.69 करोड़ रुपये में खरीदे हैं।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

मेनबोर्ड लिस्टिंग

LEAP India

टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स

SME लिस्टिंग

Optimystix Entertainment India

ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन

गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स

गोदावरी पावर एंड इस्पात

फेडरल बैंक

क्रेस्ट वेंचर्स

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स

अनूप इंजीनियरिंग

बोंडाडा इंजीनियरिंग

अल्कली मेटल्स

एस्ट्रल

इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग्स

केनरा HSBC लाइफ इंश्योरेंस कंपनी

डायनामैटिक टेक्नोलोजिज

HB पोर्टफोलियो

कल्याणी इन्वेस्टमेंट कंपनी

कोट्यार्क इंडस्ट्रीज

रेन इंडस्ट्रीज

मंगलम सीमेंट

RBL बैंक

मिंडा कॉर्पोरेशन

क्वालिटी पावर इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट्स

लॉयड्स इंजीनियरिंग वर्क्स

ग्लोबल हेल्थ

प्रेमको ग्लोबल

NCC

REC

संघवी मूवर्स

एक्सचेंजिंग सॉल्यूशंस

रिस्पॉन्सिव इंडस्ट्रीज

राशि पेरिफेरल्स

वाइब्रेंट ग्लोबल कैपिटल

संदेश

सोनाटा सॉफ्टवेयर

टूरिज्म फाइनेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया

सारदा एनर्जी एंड मिनरल्स

सूर्यलता स्पिनिंग मिल्स

यथार्थ हॉस्पिटल एंड ट्रॉमा केयर सर्विसेज

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Calculator: SIP की एक किस्त छोड़ दी? यही गलती बाद में लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है

SIP Calculator: SIP शुरू करना आसान है। मुश्किल काम है उसे लगातार जारी रखना। कई बार महीने के आखिर में खर्च बढ़ जाते हैं। बैंक खाते में बैलेंस कम होता है। ऐसे में कई लोग सोचते हैं कि इस महीने रहने देते हैं, अगले महीने से फिर शुरू कर देंगे।

यहीं सबसे बड़ी गलती हो जाती है। SIP में सिर्फ पैसा नहीं बढ़ता, समय भी आपके लिए काम करता है। जितनी जल्दी पैसा निवेश होता है, उतने ज्यादा साल उसे बढ़ने का मौका मिलता है। इसलिए एक किस्त मिस होने का नुकसान सिर्फ उस महीने तक नहीं रहता। कई साल बाद वही रकम बड़ी बन सकती है।

पहले समझिए नुकसान क्यों होता है

SIP की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग है। इसका मतलब है कि आपका पैसा सिर्फ रिटर्न नहीं कमाता, बल्कि उस रिटर्न पर भी रिटर्न मिलता रहता है। यही वजह है कि शुरुआती सालों की हर किस्त सबसे ज्यादा अहम होती है।

अगर बीच में कोई किस्त नहीं जाती, तो उस पैसे का पूरा बढ़ने वाला सफर रुक जाता है।

₹1,000 की SIP में कितना नुकसान?

मान लीजिए आप हर महीने ₹1,000 की SIP करते हैं। निवेश की अवधि 20 साल है और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

अगर पहले साल की सिर्फ एक किस्त नहीं जाती, तो वह ₹1,000 करीब 20 साल बाद लगभग ₹9,650 बन सकती थी। यानी एक छोटी सी चूक भविष्य के करीब ₹8,650 के मौके को खत्म कर सकती है।

₹2,000 की SIP का हिसाब

यही उदाहरण ₹2,000 की SIP से समझिए। अगर पहले साल की एक किस्त छूट जाती है, तो उसकी संभावित वैल्यू करीब ₹19,300 हो सकती थी। यानी सिर्फ ₹2,000 बचाने के चक्कर में भविष्य के करीब ₹17,300 का नुकसान हो सकता है।

₹5,000 की SIP में असर और बड़ा

अब मान लीजिए आपकी SIP ₹5,000 महीने की है। अगर पहले साल की एक किस्त नहीं जाती, तो वही ₹5,000 करीब ₹48,200 तक पहुंच सकते थे। यानी भविष्य में लगभग ₹43,200 का संभावित अंतर पड़ सकता है।

तीन महीने SIP नहीं गई तो?

अब एक बड़ा उदाहरण देखते हैं। मान लीजिए आपकी SIP ₹5,000 महीने की है। पहले साल लगातार तीन महीने निवेश नहीं हुआ। यानी कुल ₹15,000 निवेश नहीं हो पाया।

अगर यही पैसा 20 साल तक 12% की दर से बढ़ता, तो उसकी संभावित वैल्यू करीब ₹1.45 लाख हो सकती थी। यानी उस वक्त ₹15,000 बचाने का फैसला आगे चलकर लाख रुपये से ज्यादा का फर्क पैदा कर सकता है। अगर शुरुआत में 6 किस्त चूक गए, तो नुकसान करीब 3 लाख तक का हो सकता है।

अलग-अलग SIP में एक किस्त छूटने का असर

मासिक SIP
20 साल बाद 1 छूटी किस्त की संभावित वैल्यू*

₹1,000₹9,650
₹2,000₹19,300
₹5,000₹48,200

*यह अनुमान 20 साल और 12% सालाना रिटर्न के आधार पर है। वास्तविक रिटर्न बाजार के हिसाब से अलग हो सकता है।

पैसे की दिक्कत हो तो क्या करें?

अगर किसी महीने आर्थिक दबाव हो, तो पूरी SIP बंद करना जरूरी नहीं है। कई म्यूचुअल फंड SIP की रकम कम करने की सुविधा देते हैं। ऑटो-डेबिट की तारीख बदलना भी एक आसान विकल्प हो सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि निवेश की आदत बनी रहे।

आखिर याद क्या रखना चाहिए?

SIP में बड़ी दौलत अक्सर बड़ी रकम से नहीं बनती। नियमित निवेश से बनती है। कई लोग ₹1,000, ₹2,000 या ₹5,000 जैसी छोटी SIP से भी अच्छा फंड बना लेते हैं, क्योंकि उन्होंने बीच में रुकना नहीं चुना।

इसलिए अगली बार अगर लगे कि “इस महीने SIP छोड़ देते हैं”, तो एक बार यह हिसाब जरूर याद कर लीजिए। हो सकता है आज की ₹5,000 की बचत भविष्य के ₹48,000 बनने वाले हों।

EPS Pension: रिटायरमेंट के बाद EPFO से कितनी पेंशन मिलेगी? पूरा हिसाब समझिए

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए क्या ₹1 करोड़ का फंड काफी है? एक्सपर्ट से समझें महंगाई और रिटर्न का पूरा गणित

Retirement Planning Calculation: भारतीय निवेशकों के बीच सालों से ₹1 करोड़ को रिटायरमेंट का एक मैजिक नंबर माना जाता रहा है। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि एक बार बैंक खाते या म्यूचुअल फंड में ₹1 करोड़ आ गए, तो उनका बुढ़ापा आराम से कट जाएगा। लेकिन वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, आज के दौर में यह सोच बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।

किसी व्यक्ति के लिए ₹1 करोड़ का कॉर्पस काफी हो सकता है, तो किसी के लिए ₹5 करोड़ भी कम पड़ सकते हैं। आपका रिटायरमेंट फंड कितना होना चाहिए, यह किसी राउंड फिगर पर नहीं बल्कि आपकी मासिक खर्चों, महंगाई दर, रिटायरमेंट की उम्र और लाइफ एक्सपेक्टेंसी पर निर्भर करता है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं रिटायरमेंट प्लानिंग का पूरा गणित।

क्यों फेल हो सकता है ₹1 करोड़ का ‘मैजिक नंबर’?

वाइज फिनसर्व के ग्रुप सीईओ और सीआईओ अजय कुमार यादव के अनुसार, ₹1 करोड़ की समस्या यह नहीं है कि यह छोटा अमाउंट है, बल्कि समस्या यह है कि यह नंबर आपके भविष्य की जीवनशैली के खर्चों को नहीं दर्शाता।

मान लीजिए कोई व्यक्ति 60 साल की उम्र में रिटायर होता है और 90 साल की उम्र (30 साल का रिटायरमेंट) तक का प्लान बनाता है। अगर ₹1 करोड़ पर 7% सालाना रिटर्न मिले, तो व्यक्ति हर महीने ₹66,500 की फिक्स्ड पेंशन ले सकता है।

अगर महंगाई दर केवल 5% सालाना भी मान ली जाए, तो आज का ₹66,500 का खर्च 10 साल बाद बढ़कर ₹1.08 लाख और 20 साल बाद ₹1.76 लाख प्रति माह हो जाएगा। यानी आपके पैसे की क्रय शक्ति तेजी से घटेगी और कुछ ही सालों में ₹1 करोड़ का फंड खत्म हो जाएगा।

इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न का असली गणित

अगर आपका पोर्टफोलियो 7% का रिटर्न देता है और महंगाई दर 5% रहती है, तो आपका वास्तविक या इन्फ्लेशन-एडजस्टेड रिटर्न केवल 2% ही रह जाता है। इस 2% वास्तविक रिटर्न के हिसाब से देखें, तो ₹1 करोड़ का फंड 30 सालों के लिए केवल ₹37,000 प्रति माह की ही परचेजिंग पावर दे पाएगा।

अगर कोई व्यक्ति हर महीने ₹1 लाख निकालना चाहता है और वह महंगाई को अनदेखा करता है, तो उसका ₹1 करोड़ का कॉर्पस 12.5 साल में खत्म होगा। लेकिन अगर महंगाई जोड़ दी जाए, तो यह फंड मात्र 9.1 साल यानी करीब 69 साल की उम्र तक में ही पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

आपको रिटायरमेंट के लिए असल में कितने पैसों की जरूरत है?

रिटायरमेंट कॉर्पस की गणना हमेशा उल्टे क्रम से करनी चाहिए। मान लीजिए एक 40 वर्षीय व्यक्ति का आज का मासिक खर्च ₹1 लाख है और वह 60 साल में रिटायर होना चाहता है। 6% महंगाई दर पर 60 साल की उम्र में वही जीवनशैली बनाए रखने के लिए उसे प्रति माह ₹3.21 लाख यानी साल के करीब ₹38.49 लाख की आवश्यकता होगी।

कितना कॉर्पस चाहिए होगा?

बिना महंगाई एडजस्टमेंट (7% रिटर्न पर) 60 साल की उम्र में कम से कम ₹4.82 करोड़ का फंड चाहिए। 5% पोस्ट-रिटायरमेंट महंगाई जोड़ने पर यही फंड बढ़कर ₹8.68 करोड़ हो जाता है।

क्या है 30X रिटायरमेंट रूल?

ट्रैक (Trackk) के सह-संस्थापक और सीईओ वेदांत गुप्ते और अजय कुमार यादव के अनुसार, 30X रूल एक अच्छा शुरुआती अनुमान हो सकता है:

नियम: अपने रिटायरमेंट के पहले साल के कुल अनुमानित खर्च को 30 से गुणा कर दें।

उदाहरण: अगर रिटायरमेंट के पहले साल का खर्च ₹38.49 लाख है, तो ₹38.49 लाख × 30 = लगभग ₹11.55 करोड़ का कॉर्पस चाहिए।

यह बड़ा फंड आपको शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, मेडिकल इमरजेंसी और लंबी उम्र जीने के जोखिम से सुरक्षा का बड़ा कवर देता है।

महंगाई के अलावा इन 3 बातों का रखें खास ध्यान

लाइफ एक्सपेक्टेंसी: अब औसतन लोग लंबा जीवन जी रहे हैं। अपनी वित्तीय योजना 75 या 80 साल के बजाय कम से कम 90 साल की उम्र मानकर बनाएं।

हेल्थकेयर कॉस्ट: इलाज का खर्च आम महंगाई की तुलना में दोगुनी तेजी से बढ़ता है। इसके लिए रिटायरमेंट फंड से अलग एक समर्पित मेडिकल एंड इमरजेंसी रिजर्व बनाएं।

कैश फ्लो पर ध्यान दें, गोल नंबर पर नहीं: ₹1 करोड़ या ₹5 करोड़ जैसे गोल नंबरों के पीछे भागने के बजाय यह तय करें कि रिटायरमेंट के बाद आपको हर महीने कितना कैश फ्लो चाहिए और आपका घर कहां मेट्रो शहर या टियर-2 शहर है।

आपके लिए क्या है सही रिटायरमेंट नंबर?

भारतीय निवेशकों के लिए कोई एक फिक्स्ड रिटायरमेंट नंबर नहीं हो सकता। ₹1 करोड़ एक शुरुआत का पड़ाव तो हो सकता है, लेकिन यह पूरा रिटायरमेंट प्लान नहीं है। आपका सही नंबर वह है जो आपकी जीवनशैली, स्वास्थ्य जरूरतों, पेंशन/रेंटल इनकम और महंगाई को जोड़कर तैयार होता है ताकि रिटायरमेंट के बाद आपके पैसे कभी खत्म न हों।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Pension Scheme: अब सिर्फ ₹99 की बचत से सिक्योर होगा फ्यूचर! गिग और डिलीवरी वर्कर्स के लिए PFRDA लाया खास NPS प्लान

NPS for Gig Workers: जोमैटो, स्वैगी, ओला, उबर, ब्लिंकिट और अर्बन कंपनी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पेंशन फंड नियामक PFRDA ने देश के लाखों डिलीवरी बॉयज, ड्राइवर्स और सर्विस पार्टनर्स को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा देने के लिए ‘NPS e-shramik Model’ को नए सिरे से हाइलाइट किया है।

इस खास स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें कोई भी वर्कर मात्र ₹99 जैसी छोटी राशि से भी अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स की शुरुआत कर सकता है। आइए जानते हैं आम लोगों और डिलीवरी पार्टनर्स के लिए यह स्कीम कितनी फायदेमंद है और इसमें कैसे जुड़ सकते हैं।

बिना किसी दबाव के बचत: अपनी मर्जी और क्षमता से जमा करें पैसा

इस योजना को गिग वर्कर्स की अस्थिर और दैनिक कमाई को ध्यान में रखकर बेहद लचीला बनाया गया है। PFRDA ने योगदान के लिए कोई निश्चित सीमा तय नहीं की है। वर्कर जब चाहें और जितना चाहें, अपनी कमाई के हिसाब से पैसा जमा कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, कोई भी वर्कर प्रतिदिन या हर हफ्ते ₹99 जैसी मामूली रकम से भी अपने एनपीएस खाते में पैसे डाल सकता है। साथ ही यह मॉडल NPS कॉर्पोरेट मॉडल पर आधारित है। इसमें पैसा केवल वर्कर, केवल एग्रीगेटर कंपनी, या फिर दोनों मिलकर जमा कर सकते हैं।

कौन-कौन से वर्कर्स उठा सकते हैं इस योजना का लाभ?

यह स्कीम उन सभी युवाओं और कर्मचारियों के लिए बेहतरीन अवसर है जो डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए काम करते हैं:

  • फूड डिलीवरी पार्टनर्स: Zomato, Swiggy आदि।
  • क्विक-कॉमर्स एंड ग्रॉसरी डिलीवरी: Blinkit, Zepto, Instamart आदि।
  • राइड-हेलिंग ड्राइवर्स: Ola, Uber, Rapido आदि।
  • होम सर्विसेज पार्टनर्स: Urban Company और अन्य सर्विस प्लेटफॉर्म्स।

खाता खोलना है बेहद आसान

इस योजना में जुड़ने की प्रक्रिया को एकदम डिजिटल और झंझट-मुक्त बनाया गया है:

आसान KYC: बेसिक केवाईसी के लिए केवल नाम, पता, पैन, मोबाइल नंबर और बैंक डिटेल्स की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया आधार आधारित ई-केवाईसी या अन्य मान्य तरीकों से मिनटों में पूरी हो जाती है।

PRAN जनरेशन: वर्कर की सहमति से तुरंत एक परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) जारी कर दिया जाता है।

नॉमिनी की सुविधा: ऑनबोर्डिंग के 60 दिनों के भीतर माता-पिता की जानकारी और नॉमिनी डिटेल्स दर्ज की जा सकती हैं।

कंपनी बदलने पर भी बंद नहीं होगा अकाउंट

अगर कोई डिलीवरी बॉय या ड्राइवर एक कंपनी जैसे- Zomato छोड़कर दूसरी कंपनी Swiggy या Uber में काम करने जाता है, तो उसका एनपीएस खाता बंद नहीं होगा। वह आसानी से अपने खाते को नए एग्रीगेटर के साथ जोड़ कर सकता है। PFRDA के तय फ्रेमवर्क के तहत ऑनबोर्डिंग के समय पॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस (PoPs) वर्कर से कोई खाता खोलने का शुल्क नहीं लेते हैं।

बुढ़ापे में मिलेगा पेंशन और एकमुश्त फंड का दोहरा फायदा

यह योजना एनपीएस के ‘ऑल सिटीजन मॉडल’ के नियमों के तहत काम करती है। इसमें जमा किया गया पैसा शेयर बाजार और सुरक्षित सरकारी सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट होता है, जिससे लंबी अवधि में एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार होता है।

60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर वर्कर्स को एकमुश्त मोटी रकम निकालने का विकल्प मिलता है और बाकी पैसे से जीवनभर हर महीने गारंटीड पेंशन मिलती है। गिग वर्कर्स के लिए बिना किसी बड़े बोझ के सुरक्षित भविष्य बनाने का यह सबसे भरोसेमंद जरिया है।

8th Pay Commission Update: क्या मई 2027 से पहले आएगी रिपोर्ट? 8वें वेतन आयोग की डेडलाइन पर सरकार ने संसद में दी सफाई

8th Pay Commission Report: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। संसद के मानसून सत्र में सरकार ने साफ किया है कि आयोग के पास अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय है। हालांकि, सरकार ने इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि आयोग अपनी रिपोर्ट तय डेडलाइन यानी मई 2027 से पहले जमा करेगा या नहीं।

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग से जुड़ी हर एक बारीकी और संसद में वित्त राज्य मंत्री द्वारा दिए गए जवाब को नीचे विस्तार से समझाया गया है।

18 महीने की डेडलाइन: संसद में सरकार ने क्या कहा?

लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की। 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को आधिकारिक संकल्प के माध्यम से किया गया था। सरकार के मुताबिक, आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। इसके हिसाब से रिपोर्ट सौंपने की अंतिम समयसीमा मई 2027 बैठती है।

जब सरकार से पूछा गया कि क्या आयोग मई 2027 से पहले रिपोर्ट सौंपेगा, तो मंत्री ने किसी भी निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं की और केवल 18 महीने के नियम को दोहराया। हालांकि, मूल प्रस्ताव के अनुसार यदि आयोग किसी विषय पर सिफारिशें पहले तय कर लेता है, तो वह सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकता है।

कितने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर?

सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस नए वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर लगभग 70 लाख लोगों पर पड़ेगा:

सिविलियन कर्मचारी: 1 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार के तहत लगभग 35.77 लाख नागरिक कर्मचारी कार्यरत थे।

पेंशनभोगी: 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 33.76 लाख पेंशनभोगी और फैमिली पेंशनर्स रजिस्टर्ड थे (इसमें रक्षा पेंशनभोगी शामिल नहीं हैं)।

आयोग के जनादेश में वेतन संशोधन, भत्ते, पेंशन, फैमिली पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े सभी अहम पहलू शामिल हैं।

वर्तमान में किस चरण में है आयोग का काम?

8वां वेतन आयोग फिलहाल हितधारकों के साथ परामर्श के चरण में है। आयोग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य हितधारकों से मुलाकात कर उनकी मांगों और सुझावों को सुन रहा है। इसके लिए जयपुर, चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसी जगहों पर बैठकें प्रस्तावित हैं।

काम को तेजी से निपटाने के लिए आयोग ने 11 अगस्त को कंसल्टेंट्स के नियमों में संशोधन किया है। अब एचआर (HR), लीगल रिसर्च, आईटी, डेटा एनालिसिस और डेटा विजुअलाइजेशन के क्षेत्र में सीनियर कंसल्टेंट्स और यंग प्रोफेशनल्स को शामिल किया जा रहा है।

लागू होने की तारीख पर स्थिति

कर्मचारी और पेंशनभोगी इस बात का भी इंतजार कर रहे हैं कि नई सिफारिशें किस तारीख से लागू मानी जाएंगी। सरकार ने साफ किया है कि जब तक आयोग अपनी अंतिम या अंतरिम रिपोर्ट नहीं सौंप देता और सरकार उस पर विचार नहीं कर लेती, तब तक नई दरों के लागू होने की तिथि पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।

कुल मिलाकर केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी नई सैलरी, एरियर और पेंशन संशोधन के लिए आयोग की बैठकों के पूरा होने और मई 2027 तक रिपोर्ट आने का इंतजार करना होगा।

8th Pay Commission पर केन्द्रीय मंत्री ने संसद में दिया बड़ा अपडेट! जानें रिपोर्ट और सैलरी हाइक को लेकर पूरी डिटेल

8th Pay Commission News: देश के करीब 70 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में 8वें वेतन आयोग के गठन, इसकी समयसीमा और मौजूदा स्थिति पर संसद में ताजा अपडेट शेयर किया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि, नई सैलरी, भत्ते और लागू होने की तारीख को लेकर सस्पेंस अभी बरकरार है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

संसद में दिए गए सरकारी बयान के मुताबिक, ‘सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक संकल्प जारी करके 8वें वेतन आयोग का आधिकारिक गठन किया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने दिए गए हैं। इसका मतलब है कि रिपोर्ट सौंपने की अंतिम समयसीमा मई 2027 है।

कब से लागू होंगी सिफारिशें?

वेतन वृद्धि और पेंशन संशोधन किस तारीख से प्रभावी होंगे, इस पर सरकार ने कहा कि जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंप देता, तब तक लागू होने की तारीख तय नहीं की जा सकती।

कौन हैं 8वें वेतन आयोग के अध्यक्ष और सदस्य?

सरकार ने इस आयोग की जिम्मेदारी अनुभवी पैनल को सौंपी है। इसकी अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई है और अन्य सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष, पंकज जैन हैं। यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों के मौजूदा वेतन ढांचे, सेवा शर्तों और भत्तों की विस्तृत समीक्षा करेगा।

किन-किन चीजों में होगा बदलाव?

3 नवंबर 2025 को अधिसूचित ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ के तहत आयोग इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देगा:

  • वेतन संशोधन: बेसिक सैलरी और पे-मैट्रिक्स का नया ढांचा।
  • महंगाई भत्ता: डीए (DA) और डीआर (DR) का विलय व कैलकुलेशन।
  • अन्य भत्ते: मकान किराया भत्ता (HRA), ट्रेवल अलाउंस (TA) और अन्य भत्तों में संशोधन।
  • पेंशन व पारिवारिक पेंशन: सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए पेंशन में बढ़ोतरी।
  • सेवा शर्तें: कार्यस्थल के माहौल और सर्विस रूल्स में सुधार।

करीब 70 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस कदम से एक बड़ी आबादी प्रभावित होगी। 1 मार्च 2026 तक देश में लगभग 35.77 लाख नागरिक केंद्रीय कर्मचारी सेवा में हैं। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 33.76 लाख पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी हैं। दोनों को मिलाकर करीब 70 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

क्या राज्यों में भी लागू होंगी ये सिफारिशें?

संसद में जब पूछा गया कि क्या केंद्र सरकार राज्यों को भी इसे अपनाने का कोई निर्देश या दिशानिर्देश जारी करेगी, तो सरकार ने साफ किया कि अभी राज्यों को ऐसा कोई परामर्श जारी नहीं किया गया है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही इस दिशा में आगे विचार किया जाएगा।

फिलहाल सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। आयोग के समीक्षा पूरी करने और रिपोर्ट सौंपने के बाद ही नई सैलरी, एरियर और पेंशन हाइक की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

रिटायरमेंट प्लानिंग होगी बेहद आसान! पेंशनबाजार ने कॉर्पोरेट NPS सर्विस की मजबूत; कर्मचारियों और कंपनियों को होगा बड़ा फायदा

PensionBazaar Corporate NPS Services: पैसाबाजार के रिटायरमेंट प्लानिंग प्लेटफॉर्म ‘पेंशनबाजार’ ने अपनी कॉर्पोरेट नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) फैसिलिटीज को और मजबूत किया है। इसका मुख्य उद्देश्य कंपनियों और संस्थानों के लिए अपने कर्मचारियों को रिटायरमेंट बेनिफिट्स देना बेहद आसान, सुचारू और डिजिटल बनाना है।

अक्सर प्रशासनिक झंझटों और कागजी कार्रवाई के कारण कंपनियां कॉर्पोरेट एनपीएस लागू करने से कतराती थीं। इस कमी को दूर करते हुए पेंशनबाजार ने एक टेक्नोलॉजी-बेस्ड सिंगल-विंडो इंटरफेस तैयार किया है, जो ऑनबोर्डिंग से लेकर सर्विसिंग तक के सभी झंझटों को खत्म करता है।

पेंशनबाजार के हेड विश्वजीत गोयल ने कहा कि, ‘लोग अक्सर अपने करियर के आखिरी दौर में रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं। हमें मिलकर कंपाउंडिंग के फायदों के बारे में जागरूकता बढ़ानी होगी, जिसका फायदा तभी मिल सकता है जब लोग जल्दी शुरुआत करें। हमारा लक्ष्य कॉर्पोरेट एनपीएस की ऑपरेशनल मुश्किलों को दूर करना और रिटायरमेंट प्लानिंग को हर कर्मचारी की वित्तीय यात्रा का एक स्वाभाविक हिस्सा बनाना है।’

एंप्लॉयर और HR टीमों का काम हुआ आसान

पेंशनबाजार का यह डिजिटल प्लेटफॉर्म कॉर्पोरेट NPS लागू करने के हर चरण को आसान बनाता है:

डिजिटल ऑनबोर्डिंग व डॉक्यूमेंटेशन: एंप्लॉय ऑनबोर्डिंग, कॉन्ट्रिब्यूशन मैनेजमेंट और रिपोर्टिंग को पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है।

ऑपरेशनल झंझट खत्म: मैन्युअल काम खत्म होने से कंपनियों की HR और फाइनेंस टीमों का समय बचता है, जिससे छोटी-बड़ी हर तरह की कंपनियां इसे आसानी से अपना सकती हैं।

कर्मचारियों के लिए एक जगह सभी सुविधाएं

कर्मचारियों के लिए भी रिटायरमेंट प्लानिंग का अनुभव अब काफी आसान हो गया है:

  • आसान डिजिटल एक्सेस: कर्मचारी घर बैठे डिजिटल रूप से अपनी ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
  • रियल-टाइम ट्रैकिंग: कर्मचारी अपने NPS अकाउंट की डिटेल्स देखने के साथ-साथ अपने रिटायरमेंट फंड की ग्रोथ पर लगातार नजर रख सकते हैं।
  • कम उम्र में प्लानिंग का मौका: वर्कप्लेस पर एनपीएस आसानी से मिलने के कारण युवा कर्मचारी करियर की शुरुआत से ही रिटायरमेंट के लिए बचत शुरू कर सकते हैं।

वर्कप्लेस पर क्यों अहम हो रही है रिटायरमेंट प्लानिंग?

आमतौर पर कर्मचारी घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई या अन्य तत्कालीन जरूरतों को प्राथमिकता देते हैं और रिटायरमेंट को करियर के आखिरी पड़ाव के लिए टाल देते हैं। लेकिन अब कंपनियां सिर्फ सैलरी देने तक सीमित न रहकर कर्मचारियों के संपूर्ण वित्तीय कल्याण पर ध्यान दे रही हैं। पेंशनबाजार आसान डिजिटल अनुभव और सही जानकारी के जरिए कर्मचारियों को कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: दिल्ली में खत्म हुईं बैठकें, कर्मचारियों की मांग कम से कम ₹52,600 हो बेसिक सैलरी! समझिए फिटमेंट फैक्टर का गणित

8th Pay Commission Latest News Today: 8वें वेतन आयोग की दिल्ली में जारी अहम परामर्श बैठकें आज यानी 10 अगस्त को समाप्त हो जाएगी। इन बैठकों में दिल्ली और आसपास के पंजीकृत केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों और एसोसिएशनों ने अपनी-अपनी मांगें आयोग के समक्ष रखने का मौका मिला।

इससे पहले नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) जैसी कई प्रमुख यूनियनें भी सैलरी, पेंशन और भत्तों में संशोधन को लेकर अपने ज्ञापन सौंप चुकी हैं। वेतन आयोग इन सभी सुझावों और मांगों का अध्ययन करने के बाद मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप सकता है।

इस बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने भी आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹52,600 प्रति माह करने और अलग-अलग पे-लेवल के हिसाब से फिटमेंट फैक्टर तय करने की जोरदार मांग की गई है।

न्यूनतम सैलरी ₹52,600 और फिटमेंट फैक्टर की मांग

IRTSA ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाली न्यूनतम सैलरी ₹18,000 को बढ़ाकर सीधा ₹52,600 किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने न्यूनतम सैलरी की गणना के लिए 2.92 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है।

IRTSA का कहना है कि आज के आधुनिक पारिवारिक खर्चों जैसे- इंटरनेट का खर्च, पैकेज्ड पीने का पानी, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल इंश्योरेंस को ध्यान में रखते हुए पुरानी गणना का तरीका बदला जाना चाहिए।

साथ ही रेलवे सुरक्षा और तकनीकी श्रेणियों में तैनात कर्मचारियों के लिए पे-लेवल 6 से आगे अधिक फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की गई है।

पे-लेवल के हिसाब से IRTSA का प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर

एसोसिएशन ने सभी पे-लेवल के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर रखने के बजाय कर्मचारियों के पद और जिम्मेदारी के हिसाब से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है:

पे-लेवल के हिसाब से IRTSA का प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर

(नोट: यह आंकड़े IRTSA द्वारा आयोग को दिए गए ज्ञापन पर आधारित हैं। अंतिम फैसला सरकार द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट के बाद ही होगा।)

5% सालाना इंक्रीमेंट और करियर ग्रोथ की मांग

IRTSA ने केवल सैलरी बढ़ाने की मांग नहीं की है, बल्कि कर्मचारियों के करियर और भत्तों में भी सुधार की सिफारिश की है:

5% एनुअल इंक्रीमेंट: वर्तमान में मिलने वाले 3% के सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 5% करने का सुझाव दिया गया है।

ग्रुप-B गजेटेड का दर्जा: जूनियर इंजीनियर्स (JE) और सीनियर सेक्शन इंजीनियर्स (SSE) के करियर में आ रहे ठहराव को दूर करने के लिए SSE को ग्रुप B गजेटेड स्टेटस देने की मांग की गई है।

MACP और भत्तों में संशोधन: मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACPS) के नियमों में ढील देने के साथ-साथ नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम, रिस्क और हार्डशिप अलाउंस को आज के महंगाई दर के हिसाब से बढ़ाने की मांग रखी गई है।

आगे क्या होगा? जानिए वेतन आयोग का अगला शेड्यूल

दिल्ली की बैठकें पूरी होने के बाद भी 8वें वेतन आयोग का कंसल्टेशन प्रोसेस जारी रहेगा। आयोग 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच जयपुर का दौरा करेगा। इसके बाद 7-8 सितंबर को चेन्नई, 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16-18 सितंबर के दौरान चंडीगढ़ में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें होंगी।

कुल मिलाकर फिलहाल न्यूनतम सैलरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर आयोग या केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। देशभर के सभी प्रमुख कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श करने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों का ड्राफ्ट तैयार करेगा।

Retirement Planning: हर महीने चाहिए ₹25,000 की पेंशन? जानें कितना बड़ा होना चाहिए रिटायरमेंट फंड

Retirement Planning Corpus Calculator: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनी रहे, यह हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। अगर आप भी अपने रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹25,000 यानी सालाना ₹3 लाख की पेंशन पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कितना बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना होगा, आइए समझते हैं इसका आसान गणित।

वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक, रिटायरमेंट फंड की गणना करते समय आपकी मौजूदा उम्र, रिटायरमेंट की उम्र, अनुमानित लाइफ एक्सपेक्टेंसी और महंगाई दर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

4% रूल (Rule of 25) से समझिए फंड का गणित

फाइनेंशियल प्लानिंग में 4% रूल का काफी इस्तेमाल किया जाता है। इस नियम के अनुसार, रिटायरमेंट के समय आपके पास जितना फंड होता है, उसका 4% आप पहले साल निकालते हैं और आगे महंगाई के हिसाब से इसे एडजस्ट करते हैं।

सालाना पेंशन की जरूरत: ₹25,000 × 12 महीने = ₹3,00,000

4% रूल के हिसाब से जरूरी कॉर्पस: ₹3,00,000 ÷ 4% (यानी सालाना पेंशन का 25 गुना) = ₹75 लाख

अगर आप आज ही रिटायर हो रहे हैं और बिना महंगाई दर के प्रभाव के सुरक्षित निवेश (जैसे- SWP, SCSS या एन्युटी) से रिटर्न चाहते हैं, तो आपको कम से कम ₹75 लाख से ₹80 लाख का रिटायरमेंट कॉर्पस चाहिए होगा।

महंगाई को जोड़ेंगे तो कितना होगा फंड?

अगर आपकी उम्र अभी 30 साल है और आप 60 साल की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं यानी रिटायरमेंट में 30 साल बाकी हैं, तो 6% की औसत महंगाई दर के हिसाब से आज के ₹25,000 की वैल्यू 30 साल बाद काफी बदल जाएगी:

30 साल बाद ₹25,000 की वैल्यू: लगभग ₹1,43,000 प्रति महीने हो जाएगी।

महंगाई एडजस्टेड रिटायरमेंट फंड: 30 साल बाद ₹1.43 लाख प्रति महीने की पेंशन पाने के लिए आपको लगभग ₹3.5 करोड़ से ₹4 करोड़ का फंड तैयार करना होगा।

₹25,000 पेंशन के लिए हर महीने कितनी SIP करनी होगी?

अगर आप 60 साल की उम्र में ₹75 लाख से ₹1 करोड़ का फंड बनाना चाहते हैं, तो आपको अपनी मौजूदा उम्र के हिसाब से म्यूचुअल फंड SIP में निवेश शुरू करना होगा (12% औसत सालाना रिटर्न के अनुमान पर):

अगर आपकी उम्र 25 साल है (35 साल बाकी): आपको हर महीने केवल ₹1,200 से ₹1,500 की SIP से शुरुआत करनी होगी।

अगर आपकी उम्र 35 साल है (25 साल बाकी): आपको हर महीने लगभग ₹4,500 से ₹5,000 की SIP करनी होगी।

अगर आपकी उम्र 45 साल है (15 साल बाकी): आपको हर महीने लगभग ₹16,000 से ₹18,000 की SIP करनी होगी।

रिटायरमेंट के बाद ₹25,000 पेंशन पाने के विकल्प

सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP): म्यूचुअल फंड के बैलेंस/हाइब्रिड फंड में अपनी एकमुश्त राशि जमा करके आप हर महीने निश्चित ₹25,000 निकाल सकते हैं, जबकि बचा हुआ पैसा फंड में ग्रो करता रहता है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): एनपीएस मैच्योरिटी पर 40% राशि से एन्युटी प्लान खरीदकर आप आजीवन हर महीने निश्चित पेंशन हासिल कर सकते हैं।

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS): 60 साल की उम्र के बाद सरकार की इस स्कीम में एकमुश्त निवेश कर सुरक्षित तिमाही ब्याज के रूप में पेंशन पा सकते हैं।

कुल मिलाकर रिटायरमेंट प्लानिंग में देरी करना सबसे महंगा पड़ता है। आप जितनी कम उम्र में निवेश शुरू करेंगे, कम्पाउंडिंग के जादू से उतना ही कम मासिक निवेश करके बड़ा रिटायरमेंट फंड आसानी से बना पाएंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।