UP Home Guard vacancies: यूपी में होने वाली है नौकरियों की बारिश, योगी सरकार अगले 6 महीने में बांटेगी एक लाख नौकरियां

UP Home Guard vacancies: उत्तर प्रदेश निवासियों के लिए यह खबर खुश करने वाली है। राज्य में अगले 6 महीनों में न सिर्फ सरकारी नौकरी की बारिश होने वाली है, बल्कि सरकार राज्य में पेंशन के तहत दी जाने वाली धनराशि और लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। राज्य की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने अगले छह माह में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। इनमें 77 हजार भर्तियां सिर्फ पुलिस व होमगार्ड विभाग में होंगी। इसकी शुरुआत 19 सितंबर से होने जा रही है।

इतना ही नहीं सीएम ने वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए आर्थिक सहूलियत बढ़ाने की भी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1 करोड़ 10 लाख वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं व दिव्यांगजन को 12 हजार रुपये सालाना पेंशन दी जाती है। जल्द ही पेंशन की धनराशि और लाभार्थियों की संख्या भी बढ़ेगी। विकास व जनोपयोगी सुविधाओं के लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है।

सीएम योगी बुधवार को गोरखपुर के वार्ड नंबर-53 उर्वरक नगर के अंतर्गत जंगल नकहा नंबर-2 में नवनिर्मित कल्याण मंडपम सहित गोरखपुर विकास प्राधिकरण, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग और नगर निगम की करीब 40 करोड़ रुपये की लागत वाली 119 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी गांव या शहर में नागरिकों के जीवन स्तर का पता विकास और वहां उपलब्ध जनोपयोगी सुविधाओं से चलता है। इसके लिए कानून का राज और सुरक्षा का बेहतरीन वातावरण होना जरूरी है। 2017 के बाद गोरखपुर और उत्तर प्रदेश में कानून का राज सुनिश्चित कर विकास एवं सुविधाओं की नई श्रृंखला खड़ी की गई है।

बीमारू राज्य से देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बना यूपी

मुख्यमंत्री ने सुदृढ़ कानून व्यवस्था के चलते हुए विकास और इससे आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू राज्य नहीं है। बल्कि अब यह देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन है। उत्तर प्रदेश अब देश की सबसे तेज अर्थव्यवस्था में एक है। आज यहां आने को हर कोई लालायित है। यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, कल-कारखानों की नई श्रृंखला और सुदृढ़ कनेक्टिविटी के लिए जाना जा रहा है।

समाज की एकजुटता का परिणाम है विकास

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में विकास और जन कल्याण से सकारात्मक माहौल बना है। ऐसे में समाज को बांटने वालों से सावधान रहना होगा। विकास समाज की एकजुटता का परिणाम है। शानदार वर्तमान और बेहतरीन भविष्य के लिए डबल इंजन सरकार जरूरी है।

गोरखपुर में बदलाव ने ले ली मच्छर और माफिया की जगह

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यूपी और गोरखपुर में 2017 के बाद से दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र को इंसेफेलाइटिस, मच्छर व माफिया से निजता मिली है। इंफ्रास्ट्रक्चर ने गोरखपुर और उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाई गई है। पिछली सरकारों के निकम्मेपन से 2017 के पहले तक हर साल इंसेफेलाइटिस से सैकड़ों मौतें होती थी।

सीएम ने गोरखपुर में बंद पड़े खाद कारखाने के दोबारा चलने, फोरलेन कनेक्टिविटी, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज के निर्माण, रामगढ़ताल के पर्यटन स्थल बनने, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्थिति शानदार बनाने के साथ एम्स की सौगात मिलने का भी जिक्र किया।

अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी

सीएम योगी ने कहा कि सरकार ने अब तक साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। चुनाव की घोषणा से पहले, सरकार अगले 6 माह में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रही है। अब गोरखपुर के गीडा में 500 कारखाने लगे, जिससे अकेले गीडा में 50 हजार नौजवानों को रोजगार मिला और इस क्षेत्र को पलायन से मुक्ति मिली।

7 अक्टूबर से विशेष शिविर, मिलेगा योजनाओं का लाभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अक्टूबर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के शासन प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘सेवा संकल्प अभियान’ शिविर लगने जा रहा है। यह एक सप्ताह का विशेष शिविर होगा। इसमें सरकारी योजनाओं का लाभ पाने से वंचित नागरिकों को उनमें शामिल करने की पहल चलाई जाएगी।

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Rate Hike: त्योहारी सीजन में RBI दे सकता है झटका! बढ़ जाएगी आपकी EMI, बैंक FD पर भी पड़ेगा बड़ा असर

RBI Repo Rate Hike Expectations: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी के बाद अब सभी की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक पर टिक गई हैं। देश में बढ़ती रिटेल इंफ्लेशन और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई भी अक्टूबर 2026 की MPC समीक्षा बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

अगर दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो रेपो रेट 5.50% से बढ़कर 5.75% हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि आरबीआई यह कदम क्यों उठा सकता है और इसका आपकी होम लोन ईएमआई और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों पर क्या असर पड़ेगा।

आरबीआई क्यों बढ़ा सकता है रेपो रेट?

अमेरिकी फेड के फैसले के अलावा भारत के आंतरिक आर्थिक हालात भी आरबीआई को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई जो जुलाई में 4.45% थी। अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, खाद्य वस्तुओं के दाम और कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई 6% के ऊपरी दायरे को पार कर सकती है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होता है, तो भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट का बिल काफी बढ़ जाएगा, जिससे देश में महंगाई और बढ़ेगी।

एसबीआई, एचएसबीसी, डॉयचे बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 25-25 बीपीएस की दो किश्तों में रेपो रेट बढ़ा सकता है।

होम लोन ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आरबीआई अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करता है, तो इसका सीधा असर आपके रिटेल लोन पर पड़ेगा। ज्यादातर होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) से जुड़े होते हैं। रेपो रेट बढ़ते ही बैंक आपके लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे।इससे अगली रीसेट डेट पर या तो आपकी मासिक EMI बढ़ जाएगी या फिर आपकी लोन चुकाने की कुल अवधि लंबी हो जाएगी।

इसे उदाहरण से समझे तो अगर आपने ₹30 लाख का होम लोन 20 साल के लिए लिया है, तो 0.25% ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई में हर महीने ₹400 से ₹500 तक का एक्स्ट्रा इजाफा हो सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने पर अमूमन बैंक जमा दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं, लेकिन लोन की तरह यह तुरंत लागू नहीं होता। बैंक बाजार में लिक्विडिटी, अपने एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट (ALM) और फंड की जरूरतों के आधार पर ही एफडी दरों में रिवीजन करेंगे। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक विशेष मैच्योरिटी वाली एफडी पर ब्याज बढ़ा सकते हैं, जिससे नए एफडी निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

25 हजार रु प्रति माह वेतन तक पीएफ

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के तहत अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा के लिए वेतन सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने को मंजूरी दे दी है। सरकार के अनुसार इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के अनिवार्य दायरे में आ सकते हैं। नई सीमा 17 सितंबर, 2026 से लागू होगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य निधि कटौती के लिए अब 25,000 रुपये प्रति माह वेतन की नई सीमा होगी। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में लाया जा सकेगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार संशोधित वेतन सीमा 17 सितंबर यानी विश्वकर्मा पूजा के दिन से प्रभावी होगी।

ईपीएफओ की वेतन सीमा में 12 साल बाद बदलाव हुआ है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच यह सीमा अपरिवर्तित रही थी। सितंबर 2014 में इसे 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। उसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ।

सरकार का कहना है कि पिछले वर्षों में वेतन और आय में लगातार बढ़ोतरी हुई है। संगठित क्षेत्र में रोजगार का भी विस्तार हुआ है। कई राज्यों और क्षेत्रों में न्यूनतम वेतन मौजूदा 15,000 रुपये की सीमा के करीब या उससे ऊपर पहुंच गया है। इसे देखते हुए वेतन सीमा बढ़ाकर 25,000 रुपये करने का फैसला किया गया।

इस फैसले पर सालाना करीब 11,339 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है। मौजूदा वार्षिक बजटीय सहायता करीब 10,250 करोड़ रुपये है। पांच वर्षों में अनुमानित खर्च करीब 56,696 करोड़ रुपये होगा।

सरकार के अनुसार इससे अधिक कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ के तहत बचत, कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत पेंशन और कर्मचारी जमा संबद्ध बीमा योजना यानी ईडीएलआई के तहत बीमा सुरक्षा मिलेगी। साथ ही भविष्य निधि अंशदान और पेंशन योग्य वेतन की व्यवस्था को मौजूदा वेतन स्तर के अधिक अनुरूप बनाया जा सकेगा।

अभी 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाला नया कर्मचारी स्वतः ईपीएफ के अनिवार्य दायरे में नहीं आता। सीमा बढ़ने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों का बड़ा वर्ग अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो जाएगा।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि मंत्रिमंडल का फैसला देश के श्रमिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा देने के साथ संगठित क्षेत्र में रोजगार को भी गति देगा।

उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा और सेवा दिवस का अवसर है और यह फैसला उसी दिन से लागू होगा। ईपीएफओ दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक का संचालन करता है। इसके तहत ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई योजनाएं चलती हैं।

ईपीएफओ के ताजा आंकड़ों के अनुसार करीब 7.98 करोड़ सदस्य लगभग 7.68 लाख प्रतिष्ठानों से जुड़े हैं। ईपीएस के तहत करीब 82 लाख पेंशनधारकों को पेंशन मिलती है, जबकि ईडीएलआई ईपीएफ सदस्यों को बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराता है।

EPF Pension: ₹12500 महीना तक हो सकती है पेंशन, समझिए सरकार के नए फैसले का पूरा असर

EPF Pension: केंद्रीय कैबिनेट ने EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब यह सीमा ₹15,000 से बढ़कर ₹25,000 हो जाएगी। सरकार के मुताबिक, इस फैसले से करीब 51 लाख कर्मचारियों को फायदा होगा।

अभी तक ₹15,000 तक के वेतन पर EPF और EPS की अनिवार्य कवरेज लागू होती थी। यह सीमा 1 सितंबर 2014 से नहीं बदली थी। नई सीमा लागू होने पर ज्यादा कर्मचारी इस दायरे में आ सकते हैं।

पेंशन में 66.7% तक बढ़ोतरी

इस फैसले का सीधा असर EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना पर भी पड़ने की उम्मीद है। वजह है कि पेंशन की कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली वेतन सीमा भी ₹25,000 हो सकती है।

EPS में पेंशन का फॉर्मूला इस तरह है:

पेंशन = पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा ÷ 70

अभी अधिकतम पेंशन योग्य वेतन ₹15,000 माना जाता है। ऐसे में 35 साल की पेंशन योग्य सेवा वाले कर्मचारी की फॉर्मूला आधारित पेंशन करीब ₹7,500 बनती है।

अगर यही सीमा ₹25,000 हो जाती है, तो 35 साल की सेवा पर पेंशन ₹12,500 हो सकती है। यानी फॉर्मूला के हिसाब से पेंशन में 66.7% की बढ़ोतरी हो सकती है।

पेंशन योग्य सेवा₹15,000 वेतन सीमा पर पेंशन₹25,000 वेतन सीमा पर पेंशनसंभावित बढ़ोतरी
10 साल₹2,143₹3,57166.70%
20 साल₹4,286₹7,14366.70%
25 साल₹5,357₹8,92966.70%
30 साल₹6,429₹10,71466.70%
35 साल₹7,500₹12,50066.70%

Zaggle की CHRO लता अय्यर ने कहा, ‘अगर बढ़ी लिमिट को EPS की कैलकुलेशन में लागू किया जाता है, तो पेंशन में अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वास्तविक बढ़ोतरी पेंशन योग्य सेवा और सरकार की ओर से जारी होने वाले अंतिम नियमों पर निर्भर करेगी।’

EPF में ज्यादा पैसा कट सकता है

अब बात EPF की। यहां तस्वीर थोड़ी अलग है। वेतन सीमा बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी की सैलरी से EPF की कटौती तुरंत बढ़ जाएगी। फिलहाल कुछ कंपनियां ₹15,000 की सीमा पर EPF योगदान तय करती हैं। वहीं, कुछ कंपनियां कर्मचारी के वास्तविक बेसिक पे पर योगदान करती हैं। इसलिए नई व्यवस्था का असर कर्मचारी की मौजूदा पॉलिसी पर भी निर्भर करेगा।

मान लीजिए अभी किसी कर्मचारी का EPF योगदान ₹15,000 की सीमा पर हो रहा है। 12% के हिसाब से हर महीने कर्मचारी के हिस्से से ₹1,800 कटते हैं। अगर नई ₹25,000 की सीमा पर 12% योगदान लागू होता है, तो यह रकम बढ़कर ₹3,000 हो जाएगी। यानी हर महीने ₹1,200 ज्यादा EPF में जाएगा।

इसका सीधा असर टेक-होम सैलरी पर पड़ेगा। हाथ में आने वाली सैलरी ₹1,200 तक कम हो सकती है। हालांकि, यह पैसा कर्मचारी की रिटायरमेंट सेविंग में ही जाएगा।

हर कर्मचारी की सैलरी पर असर नहीं पड़ेगा

जिन कर्मचारियों का EPF योगदान पहले से ही उनके वास्तविक बेसिक पे पर होता है, उन पर नई सीमा का तुरंत कोई खास असर नहीं पड़ सकता।

मसलन, अगर किसी कर्मचारी की कंपनी पहले से ही ₹25,000 या उससे ज्यादा के बेसिक पे पर 12% EPF काट रही है, तो केवल वेतन सीमा बढ़ने से उसकी कटौती में जरूरी नहीं कि कोई बदलाव हो।

Choice International की CHRO नेहा जैन ने कहा, ‘अगर बढ़ी हुई सीमा पर EPF योगदान अनिवार्य होता है, तो फिलहाल ₹15,000 की सीमा पर 12% योगदान करने वाला कर्मचारी हर महीने ₹1,800 की जगह ₹3,000 योगदान करेगा। इससे टेक-होम सैलरी में हर महीने ₹1,200 तक की कमी हो सकती है।’

उन्होंने कहा, ‘अगर योगदान अभी की तरह मौजूदा सीमा पर ही कैप रहता है, तो टेक-होम सैलरी पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा। इसलिए अंतिम नोटिफिकेशन और योगदान का नया ढांचा काफी अहम होगा।’

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NPS vs EPF: हर महीने ₹10,000 निवेश करने पर किसमें बनेगा ज्यादा फंड? जानिए टैक्स नियम और मुनाफे का सटीक कैलकुलेशन

NPS vs EPF 10000 Monthly Investment: रिटायरमेंट की प्लानिंग करते समय नौकरीपेशा लोगों के सामने दो सबसे भरोसेमंद विकल्प आते हैं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)। दोनों ही योजनाएं लंबी अवधि में एक बड़ा फंड तैयार करने में मदद करती हैं, लेकिन दोनों में ब्याज या रिटर्न की दर और टैक्स छूट के नियम काफी अलग हैं।

अगर आप हर महीने ₹10,000 का निवेश करते हैं, तो 25-30 सालों में NPS और EPF में से कौन सी स्कीम आपको ज्यादा अमीर बनाएगी? आइए आधिकारिक टैक्स नियमों और संभावित रिटर्न के आधार पर इसका पूरा गणित समझते हैं।

दोनों स्कीमों का बेसिक स्ट्रक्चर और रिटर्न का तरीका

EPF (फिक्स्ड और गारंटीड रिटर्न): ईपीएफओ (EPFO) द्वारा संचालित इस सरकारी स्कीम में ब्याज दर सरकार तय करती है। फिलहाल वित्त वर्ष 2023-24 के लिए EPF पर 8.25% सालाना ब्याज तय किया गया है। इसमें आपका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और बाजार के उतार-चढ़ाव का इस पर कोई असर नहीं पड़ता।

NPS (मार्केट-लिंक्ड रिटर्न): एनपीएस एक पेंशन स्कीम है जिसमें आपका पैसा पेंशन फंड मैनेजर्स के जरिए इक्विटी (शेयर बाजार), कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज में लगाया जाता है। इसमें आपके पास 75% तक हिस्सा शेयर बाजार में लगाने का विकल्प होता है। ऐतिहासिक रूप से एनपीएस के इक्विटी-ओरिएंटेड ऑप्शन ने लंबी अवधि में औसतन 10% से 12% सालाना रिटर्न दिया है।

रिटर्न का गणित: ₹10,000 महीने के निवेश पर 25 साल बाद कितना बनेगा फंड?

अगर कोई निवेशक 30 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है और 55-60 की उम्र तक लगातार 25 सालों के लिए हर महीने ₹10,000 जमा करता है, तो दोनों में संभावित फंड इस प्रकार बनेगा:

रिटर्न का गणित: ₹10,000 महीने के निवेश पर 25 साल बाद कितना बनेगा फंड?

निकासी के नियम

EPF: रिटायरमेंट (58 साल) पर आप पूरी राशि एकमुश्त बिना किसी टैक्स के निकाल सकते हैं।

NPS: रिटायरमेंट (60 साल) पर आप कुल फंड का अधिकतम 60% हिस्सा ही एकमुश्त निकाल सकते हैं। बाकी का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी में लगाना अनिवार्य है, जिससे आपको जीवनभर मासिक पेंशन मिलती है।

किसमें मिलती है ज्यादा टैक्स छूट?

आयकर अधिनियम के आधिकारिक प्रावधानों के अनुसार दोनों स्कीमों के टैक्स फायदे इस प्रकार हैं:

EPF के टैक्स नियम:

धारा 80C: ईपीएफ में सालाना ₹1.5 लाख तक के योगदान पर Section 80C के तहत टैक्स छूट मिलती है।

टैक्स-फ्री स्टेटस: ईपीएफ को ‘EEE’ (Exempt-Exempt-Exempt) दर्जा प्राप्त है। यानी जमा, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी राशि तीनों टैक्स-फ्री होते हैं।

शर्त: अगर किसी वित्तीय वर्ष में कर्मचारी का ईपीएफ योगदान ₹2.5 लाख से अधिक होता है, तो उस अतिरिक्त योगदान पर अर्जित ब्याज टैक्सेबल हो जाता है।

NPS के टैक्स नियम:

धारा 80CCD (1) और 80C: एनपीएस में ₹1.5 लाख तक का योगदान धारा 80C की कुल सीमा में कवर होता है।

अतिरिक्त ₹50,000 का फायदा [सेक्शन 80CCD (1B)]: एनपीएस की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें आपको धारा 80C के ₹1.5 लाख के अलावा ₹50,000 का एक्स्ट्रा डिडक्शन मिलता है। यानी आप कुल ₹2 लाख तक का टैक्स क्लेम कर सकते हैं।

मैच्योरिटी पर टैक्स: 60 साल की उम्र में एनपीएस से निकाली गई 60% एकमुश्त राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है। बाकी 40% जो एन्युटी में जाता है, उससे मिलने वाली मासिक पेंशन आपकी टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होती है।

आपके लिए कौन सा विकल्प बेहतर है?

सुरक्षा और गारंटी के लिए (EPF): अगर आप बाजार का रिस्क बिल्कुल नहीं लेना चाहते और रिटायरमेंट पर एकमुश्त 100% टैक्स-फ्री पैसा चाहते हैं, तो ईपीएफ सबसे भरोसेमंद विकल्प है।

बड़ा फंड और पेंशन के लिए (NPS): अगर आप थोड़ी सी मार्केट वोलेटिलिटी झेल सकते हैं, 80C के अलावा ₹50,000 की एक्स्ट्रा टैक्स छूट चाहते हैं और रिटायरमेंट के बाद एक तय मासिक पेंशन का सुरक्षा चक्र बनाना चाहते हैं, तो एनपीएस आपके लिए ज्यादा रिटर्न जनरेट कर सकता है।

वैसे स्मार्ट निवेशक कभी भी केवल एक टोकरी में सारे अंडे नहीं रखते। अगर आप जॉब में हैं, तो आपका ईपीएफ तो कटेगा ही। इसके साथ ही, अतिरिक्त टैक्स बचाने और लंबी अवधि में ज्यादा वेल्थ बनाने के लिए एनपीएस में ₹50,000 सालाना (या ₹4,166/महीना) का अतिरिक्त निवेश करना सबसे संतुलित रणनीति मानी जाती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE IPO: ओरिएंटल इंश्योरेंस बेचेगी 49.57 लाख शेयर, हिस्सेदारी बिक्री से FY27 में मुनाफे में लौटने की उम्मीद

सार्वजनिक क्षेत्र की साधारण बीमा कंपनी ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी चालू वित्त वर्ष 2026-27 में मुनाफे में लौटने की राह पर है। कंपनी को यह बढ़त नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में अपनी हिस्सेदारी बेचने से मिलेगी। NSE का IPO 17 सितंबर को खुलने जा रहा है। इस इश्यू का लंबे वक्त से इंतजार हो रहा है। इश्यू का साइज 22,561.57 करोड़ रुपये और प्राइस बैंड 1,700-1,785 रुपये प्रति शेयर है। क्लोजिंग 21 सितंबर को होगी और शेयरों की लिस्टिंग BSE पर 24 सितंबर को होने की उम्मीद है।

NSE IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) है। नए शेयर जारी नहीं होंगे। OFS में मौजूदा शेयरहोल्डर 12.64 करोड़ इक्विटी शेयरों को बिक्री के लिए रखने वाले हैं। शेयर बिक्री करने वालों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इनवेस्टमेंट्स (मॉरीशस), न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी, SBI कैपिटल मार्केट्स, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, क्राउन कैपिटल, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी, इंडियन बैंक, ICICI लोंबार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी आदि शामिल हैं।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) संजय जोशी का कहना है, ‘‘हम इस साल कुछ मुनाफा कमाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं… NSE के IPO से मिलने वाली रकम को मुनाफे के रूप में दर्ज किया जाएगा। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार होगा। इसके अलावा, इससे कंपनी को नकदी भी मिलेगी।’’

NSE IPO में कितने शेयर बेचेगी Oriental Insurance

कंपनी NSE के IPO में अपनी हिस्सेदारी का केवल एक छोटा हिस्सा ही बेच रही है। इसके तहत करीब 49.57 लाख शेयर बिक्री के लिए रखे जाने वाले हैं। NSE में 30 जून, 2026 तक ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी के पास 3.52 करोड़ शेयर थे। शेयरों की यह संख्या NSE की 1.42 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। IPO के प्राइस बैंड के हिसाब से शेयर बिक्री के जरिए ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को लगभग 843-885 करोड़ रुपये मिलेंगे।

ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज लिमिटेड के शुरुआती निवेशकों में से एक है। जोशी का कहना है कि NSE के लिस्ट होने के बाद, उसमें बची हुई होल्डिंग वैल्यू का इस्तेमाल कंपनी की सॉल्वेंसी (देनदारी भुगतान क्षमता) को कैलकुलेट करने के लिए किया जा सकेगा। इससे कंपनी के सॉल्वेंसी रेशियो में सुधार होने की उम्मीद है।

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NSE IPO 10 सालों से पेंडिंग

NSE ने IPO में अपने कर्मचारियों के लिए 70 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व किए हैं। ये उन्हें फाइनल इश्यू प्राइस पर 170 रुपये प्रति शेयर की छूट के साथ ऑफर किए जाएंगे। NSE के बोर्ड ने इस साल फरवरी में IPO लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। पब्लिक इश्यू का ड्राफ्ट जून 2026 में SEBI के पास जमा किया था और सितंबर में SEBI की मंजूरी मिल गई। NSE, बाजार हिस्सेदारी के मामले में देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। इसका IPO लगभग 10 सालों से पेंडिंग है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission में इस नए फॉर्मूले से बदल जाएगा पूरा सैलरी स्ट्रक्चर! बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा

8th Pay Commission Minimum Pay Calculation: 8वें वेतन आयोग फिलहाल देशभर में बैठके कर के विभिन्न कर्मचारी संगठनों से उनकी मांगों का ब्योरा तैयार कर रहा है। इसी बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ा अपडेट है है। आयोग के सामने दशकों से चले आ रहे उस नियम को बदलने की जोरदार मांग उठी है, जिसके आधार पर सरकारी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय की जाती है।

अब तक वेतन आयोग न्यूनतम सैलरी का हिसाब लगाते समय एक परिवार में केवल 3 यूनिट (कर्मचारी, पति/पत्नी और 2 बच्चे) को ही जोड़ता था। लेकिन कर्मचारी यूनियनों और पेंशनभोगी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष मांग रखी है कि इस परिवार यूनिट में बुजुर्ग आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए।

अगर इस फॉर्मूले को मंजूरी मिलती है, तो कर्मचारियों की बेसिक पे और पेंशन में भारी-भरकम बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं इस नए गणित को।

3 यूनिट नहीं, अब 5.2 यूनिट पर तय हो सैलरी!

करीब 10 लाख पेंशनभोगियों का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत पेंशनर्स समाज (BPS) और कर्मचारियों की शीर्ष संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NCJCM-Staff Side) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में एक समान नया फॉर्मूला पेश किया है:

कर्मचारी (स्वयं): 1.0 यूनिट

पति या पत्नी: 1.0 यूनिट

दो बच्चे: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट

दो आश्रित माता-पिता: 0.8 + 0.8 = 1.6 यूनिट

इस हिसाब से कुल परिवार की यूनिट 5.2 (राउंड ऑफ में 5 यूनिट) बनती है। यूनियनों का तर्क है कि भारत में एक कर्मचारी न केवल अपने बच्चों का बल्कि अपने बुजुर्ग माता-पिता का भी मुख्य कमाऊ सहारा होता है। इसके अलावा ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम’ और ‘सोशल सिक्योरिटी कोड 2020’ भी कानूनी रूप से माता-पिता की जिम्मेदारी बच्चों पर डालता है।

सैलरी का नया गणित: ₹19,900 से सीधे ₹69,000 न्यूनतम बेसिक पे?

अगर 5 यूनिट के इस नए फॉर्मूले को 8वां वेतन आयोग स्वीकार कर लेता है, तो न्यूनतम सैलरी की गणना पूरी तरह बदल जाएगी।

NCJCM और BPS द्वारा दिए गए आंकड़े के अनुसार:

फूड बास्केट: 5 यूनिट के परिवार के लिए भोजन (चावल, दाल, सब्जी, दूध, अंडा, मांस आदि) का मासिक खर्च करीब ₹24,443 बैठता है।

अन्य खर्च: इसमें 10% मसाले/पेय पदार्थ, 7.5% मकान किराया, 20% ईंधन व बिजली, 25% स्किल डेवलपमेंट, 25% त्योहार व शादी-ब्याह और 5% टेक्नोलॉजी खर्च जोड़ने पर न्यूनतम सैलरी ₹68,947 (राउंड ऑफ ₹69,000) बनती है।

फिटमेंट फैक्टर: ₹69,000 की न्यूनतम बेसिक पे के आधार पर 3.833 का फिटमेंट फैक्टर निकलकर आता है, जिसे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों दोनों पर समान रूप से लागू करने की मांग की गई है।

(नोट: NCJCM के एक अन्य अनुमान के अनुसार, 2025-26 की महंगाई दरों के आधार पर 5 यूनिट का न्यूनतम वेतन ₹80,444 तक भी जा सकता है)।

पिछले वेतन आयोगों में कैसे बदली मिनिमम बेसिक सैलरी?

NCJCM द्वारा 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले आयोगों में न्यूनतम वेतन किस तरह बढ़ा:

8th Pay Commission में इस एक नए फॉर्मूले से बदल जाएगा पूरा सैलरी स्ट्रक्चर! बेसिक पे में होगा बंपर इजाफा

पेंशनभोगियों और कर्मचारियों पर क्या होगा इसका बड़ा असर?

रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने भी तर्क दिया है कि वर्तमान में भत्तों पर ज्यादा और बेसिक पे पर कम ध्यान दिया जाता है। चूंकि पेंशन और ग्रेच्युटी पूरी तरह से बेसिक पे पर निर्भर करती हैं, इसलिए बेसिक पे कम होने से रिटायर्ड कर्मचारियों को नुकसान होता है।

अगर 8वां वेतन आयोग 5 यूनिट का फॉर्मूला मान लेता है, तो बेसिक सैलरी की शुरुआती सीमा काफी ऊपर चली जाएगी। इसका सीधा फायदा यह होगा कि नए कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ पुराने पेंशनभोगियों की पेंशन में भी कई गुना का इजाफा होगा।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, परिवार की परिभाषा में माता-पिता को शामिल करने की यह मांग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से बेहद जायज लगती है। अब सबकी निगाहें 8वें वेतन आयोग के अंतिम फैसले पर टिकी हैं कि क्या वह इस 5.2 यूनिट वाले फॉर्मूले को स्वीकार करता है या पुराने 3-यूनिट ढर्रे पर ही कायम रहता है। यह फैसला आने वाले एक दशक तक देश के लाखों कर्मचारियों और पेंशनरों का भविष्य तय करेगा।

EPF Passbook: क्या आपकी कंपनी हर महीने जमा कर रही है PF? जानिए घर बैठे पासबुक चेक करने का तरीका और नियम

EPF Passbook Checking Rules: अक्सर नौकरीपेशा लोग हर महीने अपनी सैलरी स्लिप में पीएफ कटने की एंट्री देखकर निश्चिंत हो जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सैलरी स्लिप में पीएफ काटना इस बात की 100% गारंटी नहीं है कि आपकी कंपनी ने वह पैसा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में जमा भी कर दिया है?

इसीलिए हर 2-3 महीने में एक बार अपनी ई-पासबुक चेक करना बेहद जरूरी है। पासबुक से यह साफ हो जाता है कि आपके यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के तहत कर्मचारी और कंपनी दोनों का हिस्सा समय पर जमा हो रहा है या नहीं।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि पासबुक में क्या-क्या चेक करना चाहिए, पैसा जमा होने की समयसीमा क्या है और गड़बड़ी मिलने पर क्या कदम उठाना चाहिए।

अपनी पासबुक में क्या-क्या जांचना जरूरी है?

अपनी सैलरी स्लिप और ई-पासबुक को आमने-सामने रखकर इन चीजों का मिलान करें:

मंथली एंट्री: अगर आपकी अप्रैल महीने की सैलरी से पीएफ कटा है, तो पासबुक में अप्रैल का कंट्रीब्यूशन दिखना चाहिए।

तीनों हिस्से जांचें: पासबुक में केवल अपना अंशदान न देखें, बल्कि कंपनी का अंशदान और पेंशन फंड (EPS) का हिस्सा भी जरूर चेक करें।

गड़बड़ी का नुकसान: अगर अभी कोई गलती रह जाती है, तो आगे चलकर जॉब बदलते समय, पीएफ ट्रांसफर करते समय या रिटायरमेंट के वक्त पेंशन क्लेम करने में बड़ी रुकावट आ सकती है।

महीने की किस तारीख तक जमा होना चाहिए PF का पैसा?

15 तारीख का नियम: नियमानुसार, कंपनियों को कर्मचारियों की सैलरी से काटा गया पीएफ और अपना हिस्सा, महीना खत्म होने के 15 दिनों के भीतर (जैसे अप्रैल का पीएफ 15 मई तक) EPFO के पास जमा कराना अनिवार्य होता है।

तकनीकी देरी: अगर सैलरी आते ही तुरंत पासबुक में एंट्री न दिखे तो घबराएं नहीं। कई बार प्रोसेसिंग या सर्वर की वजह से एंट्री अपडेट होने में कुछ दिनों का समय लग जाता है।

अलर्ट रहें: लेकिन अगर बाद के महीनों की एंट्री दिखने लगे और किसी पुराने महीने की एंट्री गायब रहे, तो समझ जाएं कि कोई गड़बड़ी है।

ऑनलाइन EPF Passbook कैसे चेक करें? (3 आसान तरीके)

आप घर बैठे 3 तरीकों से अपना पीएफ बैलेंस और पासबुक चेक कर सकते हैं:

EPFO मेंबर पासबुक पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर UAN और पासवर्ड के जरिए लॉगिन करें और संबंधित मेंबर आईडी चुनकर पासबुक देखें।

Passbook Lite: EPFO ने सदस्यों की सुविधा के लिए ‘पासबुक लाइट’ फीचर भी दिया है, जहां जमा-निकासी और बैलेंस का एक आसान समरी व्यू मिलता है।

UMANG App: अपने स्मार्टफोन में उमंग ऐप डाउनलोड करके भी पासबुक और बैलेंस चेक किया जा सकता है।

इस बात का ध्यान दें कि अगर आपने कई नौकरियां बदली हैं, तो एक ही UAN के तहत आपकी अलग-अलग मेंबर आईडी होंगी। जिस कंपनी का रिकॉर्ड देखना हो, उसी की मेंबर आईडी सिलेक्ट करें।

जॉब बदलते समय UAN और डिटेल्स का रखें ध्यान

नई कंपनी जॉइन करते समय नया UAN बनवाने के बजाय अपना पुराना UAN ही एचआर (HR) को दें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि आपके पीएफ रिकॉर्ड में आपका नाम, जन्मतिथि और पहचान से जुड़े दस्तावेज (KYC) पूरी तरह मैच करते हों। इससे पुराना पीएफ बैलेंस नई कंपनी के खाते में आसानी से ट्रांसफर हो जाता है।

अगर पीएफ का पैसा जमा न हुआ हो तो क्या करें?

स्टेप 1: अपनी सैलरी स्लिप चेक करें और थोड़ा प्रोसेसिंग टाइम दें।

स्टेप 2: अगर फिर भी जमा राशि न दिखे, तो अपनी कंपनी के पेरोल या HR विभाग से तुरंत संपर्क करें।

स्टेप 3: अगर कंपनी आपकी सैलरी से पीएफ काट रही है लेकिन EPFO में जमा नहीं कर रही, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी की होती है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ EPFO सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ते वक्त पीएफ का पैसा रुकने से बेहतर है कि आप सतर्क रहें। हर 2-3 महीने में सिर्फ 5 मिनट निकालकर अपनी ई-पासबुक चेक करने की आदत डालें ताकि किसी भी गड़बड़ी को शुरुआती स्टेज में ही ठीक कराया जा सके।

NSE IPO का एंकरबुक, सबसे अधिक बोली लगा सकती है LIC, ये दिग्गज भी कतार में

NSE IPO: एनएसई के आईपीओ का इंतजार खत्म होने वाला है और जल्द ही यह खुलने वाला है। अब सामने आ रहा है कि इसके एंकरबुक में सबसे अधिक पैसा देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) लगा सकती है। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। हालांकि इसे लेकर अभी बातचीत चल रही है और इस पर कोई आखिरी फैसला नहीं हुआ है। एक सूत्र के मुताबिक एआईसी के बाद सबसे अधिक शेयर नॉर्वे के नॉर्गेस बैंक (Norges Bank) को मिल सकते हैं। हालांकि एंकर निवेशकों का अलॉटमेंट अभी तय नहीं हुआ है और इसमें बदलाव हो सकता है।

एक दूसरे सूत्र का कहना है कि ADAI (अबू धाबी इंवेस्टमेंट अथॉरिटी), दिग्गज यूरोपीय निवेशक कार्मिग्नैक (Carmignac), अबूधाबी की लुनाटे (Lunate), जीआईसी और फिडेलिटी भी बातचीत कर रही है और एंकरबुक के तहत बड़ी बोली लगा सकती है। एक तीसरे शख्स ने बताया कि एसबीआई पेंशन, एसबीआई लाइफ और एचडीएफसी लाइफ भी इसमें पैसे डाल सकते हैं और चूंकि यह एक बड़ा आईपीओ है तो दुनिया के प्रमुख हेज फंड्स के भी इसमें हिस्सा लेने और बड़े निवेश की उम्मीद है।

16 सितंबर को खुलेगा NSE का एंकर बुक

इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स के लिए एनएसई का एंकर बुक 16 सितंबर को खुलेगा। इसके बाद पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए यह 17 सितंबर को खुलेगा और 21 सितंबर तक खुला रहेगा। इसका ₹22,561.5 करोड़ का आईपीओ ₹1700-₹1785 के प्राइस बैंड में खुलेगा। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल का है और इसके तहत एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस), जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कनाडा पेंशन प्लान इंवेस्टमेंट बोर्ड और एरांडा इंवेस्टमेंट्स (मॉरीशस) समेत 10 मौजूदा शेयरहोल्डर्स 12.64 करोड़ शेयर बेचेंगे।

मार्केट में कैसी है स्थिति

टर्नओवर के हिसाब से एनएसई देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। Redseer Report के मुताबिक जून तिमाही के आखिरी में एनएसई की कैश मार्केट में 93.05%, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.72%, इक्विटी ऑप्शंस में 68.48%, एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स में 100% और एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी ऑप्शंस में 100% हिस्सेदारी थी। वर्ल्ड फेडेरेशन ऑफ एक्सचेंजेज के मुताबिक वित्त विर्ष 2026 में दुनिया के अहम लिस्टेड स्टॉक एक्सचेंजों की तुलना में एनएसई सबसे बड़ा मल्टी-एसेट क्लास एक्सचेंज था। कैश इक्विटीज में ट्रेड्स की संख्या के आधार पर एनएसई की वैश्विक मार्केट में 11.38% और इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडेड कॉन्ट्रैक्ट्स के आधार पर 51.18% हिस्सेदारी थी।

कैसी है सेहत

वित्तीय मोर्चे पर एनएसई की सेहत पिछले वित्त वर्ष कमजोर हुई। वित्त वर्ष 2026 में एनएसई का मुनाफा 15.5% गिरकर ₹10,302.1 करोड़ और रेवेन्यू 3.1% घटकर ₹16,601.3 करोड़ पर आ गया। इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बात करें तो जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एनएसई का मुनाफा 6.7% बढ़कर ₹3,120.1 करोड़ और रेवेन्यू 13.1% चढ़कर ₹4,560.4 करोड़ पर पहुंच गया।

NSE के शेयर लिस्ट होते ही बन सकते हैं रॉकेट, एक्सपर्ट ने बताई कहां तक जा सकती है कीमत

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

NSE के शेयर लिस्ट होते ही बन सकते हैं रॉकेट, एक्सपर्ट ने बताई कहां तक जा सकती है कीमत

एनएसई के शेयर इस महीने 24 तारीख को बीएसई पर लिस्ट हो जाएंगे। लिस्ट होते ही शेयर रॉकेट बन सकते हैं। इस शेयर में 17 सितंबर से 21 सितंबर के बीच निवेश किया जा सकता है। एक लॉट 8 शेयरों का होगा। प्रत्येक 1 रुपये फैस वैल्यू वाले शेयर का प्राइस बैंड 1,700-1,85 रुपये है।

संस्थागत निवेशकों की डिमांड से मिलेगा सपोर्ट

कनवर्जेंट फाइनेंस के मैनेजिंग पार्टनर हर्ष राघवन का कहना है कि लिस्टिंग के चार से छह हफ्तों में एनएसई का शेयर 20-25 फीसदी चढ़ सकता है। उनका कहना है कि इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की डिमांड से इस शेयर को सपोर्ट मिलेगा। एनएसई आईपीओ पर सीएनबीसी-टीवी18 के मार्केट फोरम में उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि लिस्टिंग के 4-6 हफ्ते में यह शेयर 20-25 फीसदी चढ़ जाएगा।”

म्यूचुअल फंड्स के पास एनएसई के शेयर नहींं

उन्होंने कहा कि एनएसई में पहले से कई शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी है। लेकिन, बड़े म्यूचुअल फंड्स हाउसेज और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के पास एनएसई के ज्यादा शेयर नहीं हैं। इसलिए शेयर के लिस्ट होते ही संस्थागत निवेशकों की बड़ी दिलचस्पी इस शेयर में दिखेगी। रिटेल इनवेस्टर्स को काफी समय से इस आईपीओ का इंतजार रहा है।

कम से कम 8 शेयरों के लिए करना होगा अप्लाई

इस आईपीओ में निवेश करने के लिए प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर कम से कम 14,280 रुपये की बोली लगानी होगी। प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर एक्सचेंज की वैल्यूएशन 4.41 लाख करोड़ रुपये है। यह आईपीओ पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसका मतलब है कि एनएसई आईपीओ में इनवेस्टर्स को नए शेयर इश्यू नहीं करेगा, जिससे उसके पास कोई पैसा नहीं आएगा।

ये पुराने इनवेस्टर्स बेच रहे एनएसई के शेयर

इस आईपीओ में कई पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर बेचने जा रहे हैं। इनमें एसबीआई ग्रुप, कनाडा पेंशन प्लान इनवेस्टमेंट बोर्ड, अरांडा इनवेस्टमेंट्स, एमएस स्ट्रेटेजिक, न्यू इंडिया एश्योरेंस और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं। इन इनवेस्टर्स को अपने रिटर्न पर कई गुना रिटर्न मिलने जा रहा है। एनएसई के शेयर 24 सितंबर को बीएसई में लिस्ट होंगे।

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राघवन का एनएसई में पहले से निवेश

राघवन एनएसई के पुराने निवेशकों में शामिल हैं। 2006 में उन्होंने गोल्डमैन सैक्स के जरिए एनएसई में निवेश किया था। फिर 2016 में उन्होंने फेयरफैक्स के जरिए एनएसई में निवेश किया। उन्होंने कहा कि उनके निवेश की वजह एक्सचेंज के लिए बड़ी संभावनाएं हैं। इंडियन इकोनॉमी में जैसे-जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में लोगों की दिलचस्पी बढ़ेगी, वैसे-वैसे एनएसी की स्थिति मजबूत होगी।